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बिल्कुल ठीक कह रहें है आप। मनुष्य ना प।ले कम थे, ना अब कम है। मनुष्य का सबसे बड़ा हथियार उसकी बुद्धी है। शैफाली ने भी बार-बार यह सिद्ध किया है। और रामायण काल मे भी ये बात साबित हो चुकी है।अपडेट 94 :
इतना तो समझ में आया कि युगाका चाहता है कि केवल समर्थ मानव ही तिलिस्मा में जा सके। सभी भी है - यह कोई कंपनी बाग़ तो है नहीं, कि कोई भी ऐरा गैरा चला आए। लेकिन शेफ़ाली ने उसके ‘श्रेष्ठ’ होने के गुब्बारे की हवा निकाल दी। क्लिटो को छुड़ाने के लिए उसको मानवों की आवश्यकता है। इस बात से इंकार नहीं कर सकता वो। हो सकता है कि अटलांटियन लोग मानवों को अपने से निम्न मानते हैं, फिर भी इस बात से मानवों की महत्ता कम नहीं हो जाती। हमारे यहाँ तो “आयुद्ध पूजा” करी जाती है : अस्त्र-शस्त्र-यंत्र इत्यादि को निम्न नहीं, बल्कि अपने काम और सुविधा का साधन मान कर उनका आदर किया जाता है।
अंत में शेफ़ाली ने यह दर्शा दिया कि पेड़ों को नियंत्रित करने की शक्ति उसके अंदर युगाका से अधिक है। इसलिए वो अधिक न उड़े! लेकिन अलेक्स का यूँ अचानक गायब होना एक और खतरे का संकेत लग रहा है।
100% नीमा उसि गुरुकुल से संबंध रखता है।अपडेट 95 :
जेम्स और विल्मर एक अलग ही तरह के तिलिस्म में फँसे हुए से लगते हैं। जेम्स को एक हिमालयन ‘यति’ ने पकड़ लिया और एक अन्य नए पात्र, नीमा के पास ले आया। नीमा कहीं उस शिक्षण संस्थान से तो सम्बंधित नहीं जहाँ सुयश का ‘भूत रूप’ और यह नकली ‘शलाका’ पढ़ते थे? कुछ अन्य नए पात्र रूद्राक्ष और शिवन्या भी दिखाई देंगे!
यार - बहुत सारे पात्र हैं अब तो! दिमाग चकराने लगा है। वैसे ही बुढ़ापे के कारण कम याद रहता है, लेकिन अब तो बहुत मुश्किल हो रहा है।

महाशक्ति तो मैग्रा ही है, जिसका विवरण दे चुका हूं। वैसे आप सही कह रहें हैं, व्योम बेचारा अकेला ही सब खतरों से दो-चार हो रहा है। अब उस वृक्ष से व्योम को क्या मिला? ये तो समय आने पर ही बता पाउंगाअपडेट 96 :
जेम्स और विल्मर के बारे में जल्दी ही कह दिया।
व्योम एक बड़े तिलिस्म में है और अकेले ही उससे दो-चार हो रहा है। लाल - हरे फलों का पूरा राज़ शायद आगे पता चले। लाल आकार को छोटा करता है; लेकिन हरा? देखते हैं।
व्योम जिस वृक्ष से मिला, वो “अवतार” फिल्म के पैंडोरा ग्रह के होमट्री जैसा प्रतीत होता है - ज्ञान का भण्डार! स्पष्ट है कि अब वो वृक्ष (अटलांटिस वृक्ष) और व्योम आपस में कनेक्ट हो गए हैं।
महाशक्ति कौन है?

ये सारी किताबें हर एक तत्व से संबंध रखती है।, सायद या तो मै इनकी डिटेल्स अपडेट मे बता चुका हूं, अगर नहीं बताया तो आगे, बता दूंगा।अपडेट 97 :
कैस्पर और मैग्रा - अपने नल और नील जैसे लग रहे हैं... या फिर माया असुर (जिसने इंद्रप्रस्थ में माया सभा का निर्माण किया था)!
कलाट के हिसाब से महाशक्ति मैग्रा अपनी शेफ़ाली हो सकती है। सही है - उसके जैसी रचनात्मक क्षमता के लिए आँखों का होना कोई आवश्यक नहीं। बढ़िया भाई! बहुत बढ़िया!!
महावृक्ष की बात से लगता है कि व्योम के अंदर भी परा-शक्तियाँ हैं। लेकिन अभी उसको स्वयं पता नहीं।
भाई, सागरिका किताब की प्रोफेसी तो हमको भी समझ में नहीं आई। शायद आगे के अपडेट्स में बताया गया हो?!
व्योम विलक्षण प्रतिभा का धनी है भाई

जानी, और जैक दोनो ही अती लालची है, और दोनों ही क्रिमिनल है, सायद इसी लिए सुयश को छोड़कर किसी को उसके जाने का अफसोस तक ना हुआ।अपडेट 98 :
जॉनी गोरिल्ला बन गया - यह शायद उसको उसके लालच का दण्ड मिला है। लेकिन उसके जाने का दुःख किसी को नहीं हुआ - यह जान कर मुझे थोड़ा दुःख ज़रूर हुआ। कोई व्यक्ति इतना vestigial नहीं होना चाहिए कि उसके जाने का कोई ग़म ही न करे! ख़ैर...!

अपडेट 99 :
अब्बे यार! और भी अधिक पात्र!
दिमाग में पात्रों की खिचड़ी बन चुकी है अब।
ख़ैर, मेडूसा ने शेफाली को मैग्रा की मेमोरी दिखा दी।



नक्षत्रा का होना इन सब के लिए, हर हाल में मददगार साबित होगा भाई, जिस हिसाब से पात्र बढें है, कुछ कम भी तो हुए है।अपडेट 100 :
समय-चक्र किसी ब्रेन-कंप्यूटर इंटरफ़ेस जैसा लगता है, जिससे किसी आर्टिफीसियल इंटेलिजेंस को मानव मस्तिष्क से वार्तालाप करने में आसानी हो सकती है। ये दोनों एक ही वस्तु हो सकती हैं।
ई ल्यौ! और भी अधिक पात्र! अबकी बार गिरोट (डेल्फानो)! यार, सच में - इतने अधिक किरदारों को प्रॉसेस करना कम से कम मेरे लिए असंभव है। पहले ही लोगों के नाम याद नहीं होते थे, लेकिन ये तो अनगिनत पात्र हो गए हैं! पूरी महाभारत ही लिख दी है भाई आपने -- सच में, बेहद कठिन काम कर डाला है आपने। काश, यह कहानी किसी नॉवेल के रूप में प्रकाशित हो सकती!!
हम्म्म... कम से कम ये समयचक्र कहीं और से आया है और एक परा-शक्ति है। इसका इस्तेमाल कर के मानवों को अटलांटिस / तिलिस्मा के ऊपर एक एडवांटेज ज़रूर मिलेगी।
अंत में लगता है नक्षत्रा / समय-चक्र ने जेनिथ को तौफ़ीक़ की सच्चाई दिखा दी।
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आपको कोई हक नही है की आप अपने आपको मामूली कहैं।आप जो लिख लेते है, हम वो नहीं लिख पाते।सौ तिलिस्म रुपी अपडेट्स लिखने की बहुत बहुत बधाइयाँ मेरे भाई! बेहद कठिन काम है ऐसा कुछ सोच पाना, और फिर उस सोच को शब्दों का जामा पहना पाना। मैं मामूली कहानी लिखने में संघर्ष करने लगता हूँ - ये तो गज़ब की कथा है मित्र! वाह... वाह!!




सबसे पहले तो आपके प्रयत्न पूर्वक दिए गये रिव्यू और आपके प्रशंनीय शब्दों के लिए आपका बोहोत बोहोत आभार भाई साहबबीवी बच्चों के संग लम्बी छुट्टियों पर गया हुआ था। वापसी की यात्रा के दौरान मैंने आपके अपडेट्स पर अपनी प्रतिक्रियाएँ लिखीं। शायद इसीलिए ठीक से टीका टिप्पणी नहीं कर सका। लेकिन यह बात तो मैं बार बार कहूँगा कि आपकी जैसी सोच, समझ, और जानने / पढ़ने की ललक इस फ़ोरम पर शायद ही किसी अन्य में हो! शब्द-रुपी तिलिस्म जो आपने यहाँ रचा है, वो अद्भुत है। आप किसी के रिएक्शन की बाट न जोहें। यह अद्भुत और कालजयी रचना है। फिर से कहूँगा - इसको उपन्यास का रूप देने का प्रयास करें! लोगों को बहुत पसंद आएगी!

परिवार के साथ समय बिताना भी बोहोत जरूरी है मित्रवर, आपके सुझाव पर गौर अवश्य किया जाएगा।

मै केवल यही कोशिश कर रहा हूं कि एक ऐसी कहानी आप सबको दे पाऊ की जो लम्बे समय तक उन पाठकों का मनोरंजन करे जो केवल सेक्स पढने नहीं आते है। इरोटिका, आपको केवल कुछ साल तक ही अच्छी लगती है, उसके बाद आदमी को कुछ हटके ही पढ़ना होता है, ऐसा मेरा अनुभव रहा है। ओर जब मुझे कुछ ज्यादा ना मिल पाया स्पेशली देवनागरी मे इस फोरम पर, तो मुझे महसूस हुआ कि काश कम से कम एक ऐसी कहानी तो यहां सबको देकर जाऊं।
