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Rudransh ek aadmi ka naam hai mitraKahani to alag mod le rhi h isme ab mahadev aur rudraksh bhi shamil ho gye h


Rudransh ek aadmi ka naam hai mitraKahani to alag mod le rhi h isme ab mahadev aur rudraksh bhi shamil ho gye h
Thank you so muchNice update![]()
Double HappyKaise ho bhidu logbatao baato hi baato me 95 updates ho gaye, ab main soch raha hu ki after 100 updates thoda update ki size badha deta hu aur speed bhi, kya bolte ho? Aage waise bhi kahani aur bhi havey honi hai
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अभी दिमाग काम नहीं कर रहा, सिर्फ एक ही सवाल है-
इस टापू पर सब कुछ और हर कोई देवी शलाका के लिए समर्पित है फिर भी कोई सुयश मतलब आर्यन को ना जानता है ना पहचानता है, उल्टा सुयश और उसके साथियों की जान लेने पर उतारू हैं।
क्यों?
मेरे विचार से एक ही वजह है, देवी शलाका के प्रति समर्पण दिखाकर एक दूसरे को भ्रमित करते हुए यहां मौजूद अलग-अलग गुट, उस शैतान जैगोन या जो भी नाम है, उसके साथ सौदेबाज़ी करके अपना-अपना उल्लू सीधा करने में लगे हैं
मैंने हमेशा से कहा है कहानिया हमारे आसपास हमारे गली मोहल्ले मे ही घटित होती रहती है बस नजर चाहिए देखने की. शहर मे लोग जी ले उतना ही काफी है, शहरो मे हादसे होते है कहानिया आज भी गाँव की गलियों मे लिखी जा सकती है.
Nice update....
Nice! Nice! Nice!!! Well-done brother.
Jab lagta hai ye update sabse better hai usse aur better ek episode aa jata hai.
Supreme ka destroy hona aur logo ka marna aapne bahut achhe se likha hai.
Par ye toh pata hai ki ab jo bhi ho Lufasha ko uske kiye ki saja milni chahiye usne itne logo ki jaan le liya hai ki usko maaf nahi kiya ja sakta hai kabhi wo shaitani takat Jegan ka sath de raha hai apni powers ko badhane ke liye.![]()
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I don't know ,aap padhakar batana kaisi lagi ,
कहते हैं इतिहास से जिस ने सबक नही लिया वह अपने बुरे अंजाम के लिए तैयार रहें । वह चाहे कोई व्यक्ति हो या समाज या फिर कोई देश ।
सोलह साल पूर्व ' सम्राट शिप ' की जैसी ही एक दुर्घटना हुई थी और उस समय का शिप ' ब्लैक थंडर ' था । एक इंसान को छोड़कर सभी यात्री मारे गए थे । ठीक उसी तरह सोलह साल बाद इसी घटना की पुनरावृत्ति हुई । सब कुछ ऐन वही हुआ जो ब्लैक थंडर शिप के साथ और उस शिप के पैसेंजर के साथ हुआ था ।
सोलह साल पहले उस्मान खान की एक भूल ने लगभग चार सौ लोगों को परलोक पहुंचा दिया और सोलह साल बाद हुबहु उसी तरह उस्मान खान के पुत्र मोइन खान की गलती ने लगभग तीन सौ लोगों को मृत्यु के द्वार तक पहुंचा दिया ।
कहते हैं कि एक कील की वजह से राजा अपना राज्य खो बैठता है । जब कि यहां तो बहुत बड़ी भूल हुई ।
वैसे ब्लैक थंडर शिप की घटना से एक उम्मीद तो अवश्य बंधी है कि सम्राट के बचे पैसेंजर जीवित बच सकते हैं । जब उस्मान खान इस तिलिस्म द्वीप से सकुशल अपने देश पहुंच सकता है तो यह लोग क्यों नही !
शायद तकदीर ने इन यात्रीगण के साथ बहुत ही क्रूर मजाक किया । क्लिटो की मुक्ति और शलाका के उद्धार के लिए जब चंद लोग की ही आवश्यकता थी तो फिर सैंकड़ो निर्दोष लोगों की मौत आखिर क्यों !
होना तो यह चाहिए था कि सुयश साहब , शैफाली और वह लोग जिन की इस द्वीप पर मौजदूगी अवश्यंभावी थी , ही इस द्वीप पर पहुंचे होते ।
इन अपडेट से यह भी क्लियर हुआ कि अराका द्वीप पर भी वर्चस्व की लड़ाई चल रही है । एक पक्ष अच्छाई के साथ खड़ा है और एक पक्ष बुराई के साथ । अच्छाई का प्रतिनिधित्व युगाका और उनके भाई - बहन कर रहे है तो बुराई के साथ मकोटा खड़ा है ।
आप बहुत खुबसूरत कहानी लिख रहे है । जिस तरह से आपने इस कहानी के लिए रिसर्च किया है वह वास्तव मे अद्भुत है ।
सभी अपडेट बेहद ही शानदार थे ।
आउटस्टैंडिंग एंड अमेजिंग अपडेट शर्मा जी ।
अपडेट्स 92 और 93 पर मेरे विचार --
सुयश की बातें सुन कर लगता है कि वो एक आशावादी व्यक्ति है। लेकिन उसके इस अति-आशावाद ने कई लोगों की जान ले ली। अगर वो समय रहते सही निर्णय लेता, तो शायद अभी सुप्रीम के हज़ारों यात्री जीवित रहते। लेकिन अपने राज भाई को वो पसंद है, इसलिए उसकी ऐसी-तैसी हम नहीं करेंगे। वैसे, सोलह साल का समय किसी जाति के सभ्य होने के लिए बहुत कम हैं। हाँ, असभ्य होने के लिए पर्याप्त हैं।
अराका पर सीनोर बनाम सामरा के बीच वर्चस्व का खेल चल रहा है। जहाँ सीनोर जाति के लोग तमराज जैगन के पक्ष में लग रहे हैं (मजबूरी में ही सही), वहीं सामरा जाति के लोग क्लिटो को मुक्त कराना चाहते हैं। (एक बात है भाई, जो मैं पहले भी कहना चाहता था - लेकिन क्लिटो से क्लाइटोरिस शब्द याद आने लगता है और उसका मतलब तो आप जानते ही हैं... हा हा हा हा! क्या करूँ - दिमाग में न चाहते हुए भी ऐसी खुरपेंची बातें आ ही जाती हैं)!
एक बात अपडेट 93 के बाद भी समझ नहीं आई - अगर युगाका अधिक से अधिक मानवों को तिलिस्मा तोड़ने के लिए भेजना चाहता था, तो मानवों की संख्या कम होने से वो इतना खुश क्यों लगा? मतलब वो युगाका नहीं है। इस ‘युगाका’ ने अलेक्स का रूप धर तो लिया, लेकिन शेफाली की दिव्य-दृष्टि से बच न सका। अब ये युगाका ही है, या कोई बहुरूपिया (लुफ़ासा तो नहीं)? अगले कुछ अपडेट्स बेहद रोमाँचक होने वाले हैं।
बहुत ही बढ़िया कहानी चल रही है राज भाई!
आपकी USC की दूसरी कहानी पढ़ी। पहली भी पढता हूँ और दोनों के बारे में अपने विचार अलग अलग लिखता हूँ, जल्दी ही। कुछ कहानियाँ बहुत अच्छी आई हैं इस बार!
Bhavisya ke patthar..![]()
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pahli baar aisa concept padhne ko mila hai, lagta hai aage or bhi dhaasu update hone waale hai
Awesome update and mind blowing story bhai ji![]()
Awesome update
nice update
Bahut adhbhud aur lajawab update he Raj_sharma Bhai,
Rahasay he ki khatam hone ka naam hi nahi le rahe he..........
Keep rocking Bro
Badhiya update ha bhai
Yugaka khud ko tus markhan samajh raha tha idhar Shefali ne okat dukha di lekin fir wahi sawal ha ki akhir kyon shefali hi kyon akhir kya ha shefali ke ander aisa to konsi importnat chij ha uske ander ki khud island hi bachane aa jata ha use ka hi kis roop me to kabhi kis roop me baharhal dekhte han ki Yugaka sach me i he chakma dekar bhag gaya ya wo wapas ayega
romanchak update..yugaka ne Alex ko behosh karke uski jagah le ki ,par emu ne usko dushman bataya jisse shefali ne usko behosh karke bandi bana liya ,pedo ki shakti se sabko pakad liya par shefali ke power ke aage bebas ho gaya .aur respect bhi dene laga.
ab ye Alex kaha gum ho gaya ,bechari jenith ki love story adhuri hi reh jayegi kya .
yugaka ne rasta to bata diya sabko bahar nikalne ka par aur kitne khatro ka saamna karna padega sabko dekhte hai .
aur ye yugaka ko kya kaam aa gaya jo jaldbaji me usko jana pada .
romanchak update..
Bahut hi badhiya update diya hai Raj_sharma bhai....
Nice and beautiful update....
Bhut hi badhiya update
To lagta hai james us darwaje se kailash parvat par pahuch gaya hai
Dekhte hai ab james ke sath aage kya hota hai
बहुत ही सुंदर लाजवाब और अद्भुत रमणिय रोमांचकारी अपडेट है भाई मजा आ गया
अगले रोमांचकारी धमाकेदार अपडेट की प्रतिक्षा रहेगी जल्दी से दिजिएगा
Kahani to alag mod le rhi h isme ab mahadev aur rudraksh bhi shamil ho gye h
Double Happy![]()
Bahut hi shaandar update diya hai Raj_sharma bhai....#96.
चैपटर-12 : अटलांटिस वृक्ष
(9 जनवरी 2002, बुधवार, 15:45, सामरा राज्य, अराका द्वीप)
व्योम लगातार किसी अंधे कुंए में गिरता हुआ सा प्रतीत हो रहा था।
कुछ देर तक ऐसे गिरते रहने के बाद व्योम को अपना शरीर किसी धरातल से छूता हुआ प्रतीत हुआ।
व्योम ने अपनी आँखो को खोला। वह इस समय एक घने जंगल में घास पर पड़ा हुआ था।
“ये मैं कहां आ गया?"
व्योम याद करते हुए बड़बड़ाया- “मैं तो द्वीप के नीचे के स्थान पर किसी विज्ञान की दुनियां में था। वहां पर मैने एक मशीन का बटन दबाया था, तभी मुझे अपना शरीर खंडों मे विभक्त होता हुआ महसूस हुआ। जिसके फल स्वरूप मैं यहां पहुंच गया। क्या....क्या वो मशीन ट्रांसमिट मशीन थी? पर उस मशीन ने मुझे कहां भेज दिया?"
व्योम ने एक नजर अपने आसपास के स्थान पर मारी। वह एक बहुत ही खूबसूरत परंतु छोटी सी घाटी में था।
चारो ओर हरियाली थी। खूबसूरत पहाड़ो के बीच सुंदर फल और फूलों वाली घाटी रंग- बिरंगे फूलों से बिलकुल स्वर्ग के समान महसूस हो रही थी।
वहां लगे सभी पेड़-पौधे व्योम के लिये नये थे। इससे पहले उसने ऐसे फल और फूलों के पौधे अपनी जिंदगी में कभी नहीं देखे थे।
व्योम अभी जंगल की खूबसूरती का नजारा ले ही रहा था कि तभी उसे कुछ ‘धम-धम’ की आवाज सुनाई दी।
आवाज सुनते ही व्योम समझ गया कि कोई विशालकाय जीव उधर आ रहा है।
वह तुरंत एक पास के पेड़ पर चढ़ कर बैठ गया।
व्योम की नजर अब आवाज की दिशा की ओर थी, जो कि अब पास आती जा रही थी।
कुछ ही देर में व्योम को एक तरफ से एक मदममस्त हाथी आता हुआ दिखाई दिया।
उस हाथी की चाल से पता चल रहा था कि वह कुछ दिन पहले ही व्यस्क हुआ है। क्यों कि वह पूरी मस्ती में उछलता-कूदता दिखाई दे रहा था।
हाथी के दाँत लंबे और चमकीले थे। हाथी अपनी मस्तानी चाल से कुछ छोटे-छोटे पेडों को उखाड़ता चल रहा था।
हाथी को देख व्योम ने अपने आप को एक मोटी टहनी के पीछे छिपा लिया, जिससे हाथी की नजर उस पर ना पड़े।
झूमता हुआ हाथी अचानक एक पेड़ को उखाड़ते-उखाड़ते रुक गया। अब हाथी ध्यान से उस पेड़ पर लगे फलों को देखने लगा।
हाथी को ऐसा करते देख व्योम को थोड़ा आश्चर्य हुआ। वह भी ध्यान से उस पेड़ के फलों को देखने लगा।
उस पेड़ पर छोटे-छोटे आँवले के जैसे लाल और हरे फल लगे थे। कुछ देर तक देखते रहने के बाद हाथी ने एक लाल फल को खा लिया।
फल को खाते ही हाथी का आकार आश्चर्यजनक तरीके से एक चूहे के बराबर हो गया।
व्योम आँखे फाड़े उस दृश्य को देख रहा था।
चूहे के आकार में आकर हाथी काफ़ी खुश हो गया। अब वह चिंघाड़ते हुए वहां से चला गया।
“अरे बाप रे....यह तो बहुत ही विचित्र जगह है।" व्योम ने अपने मन मे सोचा- “ऐसे फलों के बारे में तो मैने कभी सुना भी नहीं....यह फल तो किसी भी जीव के जीनोम को बदलने की क्षमता रखता है।"
यह सोच व्योम अब पेड़ से उतरकर उस विचित्र वृक्ष के पास आ गया और उसके फलों को ध्यान से देखने लगा। व्योम को देखने में वो फल बिल्कुल साधारण से ही लगे।
“इन लाल फलों को खाकर वह हाथी छोटा हुआ था। पर यह हरे फलों से क्या होता है? कहीं ये हरे फल वापस जीव को सामान्य आकार में तो नहीं लाते। जरूर ऐसा ही होगा। पर इस हरे फल को चेक कैसे करू? मैं स्वयं पर तो इसका प्रयोग कर नहीं सकता। चलो कुछ फल जेब में रख लेता हूं, बाद में इसका प्रयोग करके देखूंगा कहीं पर?"
यह सोचकर व्योम ने कुछ लाल और कुछ हरे फल, पेड़ से तोड़कर अपनी जेब में डाल लिये।
“अब मुझे सबसे पहले पता करना चाहिए कि मैं हूं कहां पर?"
यह सोचकर व्योम ने अपने बैग से दूरबीन को निकाल कर अपनी आँखों पर चढ़ा लिया और घाटी पर एक नजर डाली, पर उसे दूर-दूर तक कुछ नजर नहीं आया।
“यहां से तो मनुष्य के जीवन के कोई अवशेष नजर नहीं आ रहे, फ़िर मुझे बतायेगा कौन? कि मैं इस समय कहां पर हूं? मुझे पहाड़ पर चढ़कर देखना चाहिए। शायद वहां से कुछ नजर आ जाये।"
यह सोचकर व्योम एक पास वाले पहाड़ पर चढ़ना शुरू हो गया। 1 घंटे के अथक परिश्रम के बाद व्योम उस पहाड़ की चोटी पर पाहुंच गया।
पहाड़ पर उसे एक विशालकाय वृक्ष दिखाई दिया। उस वृक्ष की ऊंचाई कम से कम 100 फिट से कम नहीं थी।
उस वृक्ष पर हजारो शाखाएं थी और हर शाखा पर बहुत ज़्यादा पत्तियाँ लगी थी। वह पेड़ इतना घना था कि पेड़ के नीचे सूर्य की रोशनी भी नहीं आ रही थी।
उस पेड़ का तना 12 फिट चौड़ा था। दूर से देखने पर वह पेड़ किसी विशालकाय दैत्य की भाँति प्रतीत हो रहा था।
उस पेड़ पर एक भी फल और फूल नहीं लगे थे।
व्योम ने उस पेड़ को हाथ लगाकर देखा। पेड़ को छूते ही अचानक उसे अपने मस्तिष्क में बहुत शांति महसूस हुई।
व्योम को एक अतिन्द्रिय शक्ति का अहसास हुआ, इसिलसे जाने क्यों श्रद्धावश व्योम ने पेड़ को हाथ जोड़कर प्रणाम कर लिया।
धीरे-धीरे शाम होने वाली थी और व्योम को भूख और प्यास भी लग रही थी, इसिलये व्योम ने एक बार फिर दूरबीन को आँखों से लगाकर घाटी की दूसरी ओर देखना शुरू कर दिया।
घाटी के दूसरी ओर बहुत दूरी पर उसे कोई चमकती हुई चीज दिखाई दी। व्योम ने दूरबीन को समायोजित करके देखा।
“अरे यह तो कोई धातु की विशाल मूर्ति लग रही है। मुझे उस दिशा में ही चलना चाहिए। शायद वहां पर कोई इंसान मिल जाये।"
यह सोच व्योम धीरे-धीरे पहाड़ से उतरने लगा। व्योम के पलटते ही उस वृक्ष से रोशनी की एक किरण निकली और व्योम के शरीर में समा गयी, पर व्योम इस दृश्य को देख नहीं पाया।
सागरिका
(9 जनवरी 2002, बुधवार, 16:20, कलाट महल, अराका द्वीप)
इस समय युगाका कलाट महल में कलाट के सामने बैठा था।
“क्या हुआ बाबा? आपने आपातकाल बटन क्यों दबाया? ऐसी क्या तत्काल जरूरत पड़ गयी? सब ठीक तो है ना?" युगाका ने एक नजर कलाट पर डालते हुए पूछा।
“मुझे भी कुछ ज्यादा पता नहीं है बेटा। पर मुझे लग रहा है कि कोई बाहरी इंसान सामरा राज्य के अंदर दाख़िल हुआ है क्यों कि कुछ देर पहले अटलांटिस वृक्ष को, किसी के छूने के संकेत मुझे प्राप्त हुए हैं।" कलाट ने गंभीर होकर कहा।
“ऐसा कैसे हो सकता है? हमारी अदृश्य दीवार को कोई बाहरी शक्ति भेद नहीं सकती। फ़िर भला कोई अंदर कैसे आ सकता है? और बाहरी किसी इंसान को अटलांटिस वृक्ष के बारे में कैसे पता चलेगा?" युगाका के शब्दों में आश्चर्य के भाव नजर आने लगे।
“युगाका तुम तो जानते हो कि तुम्हारी वृक्ष शक्ति का आधार वही अटलांटिस वृक्ष है। हम गिने-चुने सामरा वासियो के अलावा उस वृक्ष की जानकारी तो सीनोर वासियो को भी नहीं है। फ़िर कोई भला उसके बारे में कैसे जान सकता है। बस यही तो मेरी चिंता का कारण है। लगता है हमें अटलांटिस वृक्ष तक चलना पड़ेगा।" कलाट ये कहकर खड़ा होने लगा।
“बाबा, मुझे भी आपसे कुछ बातें बतानी है?" युगाका ने कलाट को खड़ा होते देख कहा।
युगाका की बात सुन कलाट वापस अपनी कुर्सी पर बैठ गया और युगाका की ओर देखने लगा।
“बाबा कुछ दिन पहले एक पानी का जहाज कुछ इंसानों को लेकर इस क्षेत्र में आया था, जिसे लुफासा ने अपनी शक्तियों से तोड़कर अधिकतर इंसानों को मार डाला, परंतु 12 इंसान किसी प्रकार बचकर मायावन में प्रविष्ट हो गये हैं। वह एक के बाद एक बाधाओं को पार करते जा रहे हैं। उनमें से कुछ मानव के पास तो असीमित शक्तियां भी हैं।" युगाका ने अपने भावनाओं को प्रदर्शित करते हुए कहा।
“इंसानों के पास शक्तियां? कैसी शक्तियां हैं उनके पास?" कलाट ने आश्चर्य से भरते हुए युगाका से पूछा।
“एक इंसान की पीठ पर ‘पंचशूल’ पर छपी सूर्य की आकृति बनी है। उसने देवी शलाका की मूर्ति को भी छुआ, फिर भी वो जिंदा बच गया।" युगाका ने कहा।
“पंचशूल वाली सूर्य की आकृति? और....और....उसे देवी शलाका की मूर्ति को छूकर भी कुछ नहीं हुआ? ..... असंभव!....ये नहीं हो सकता।" कलाट भी यह बात सुनकर घबरा गया।
“ऐसा मेरी आँखों के सामने ही हुआ है बाबा। मैं आपसे झूठ नहीं बोल रहा।" युगाका ने कलाट को यकीन दिलाते हुए कहा- “और दूसरी लड़की तो अभी मात्र xx-xx वर्ष की ही लग रही है, पर वह मायावन के बारे में सबकुछ जानती है, उसने....उसने तो आज मेरी वृक्ष शक्ति भी मुझसे छीन ली थी।"
“क्याऽऽऽऽऽऽ?" युगाका के शब्द सुन कलाट के आश्चर्य का ठिकाना ना रहा ।
“तुमने मुझे इस बारे में पहले क्यों नहीं बताया? मुझे लगता है वह घड़ी आने वाली है जिसका अराका वासियों को हज़ारों सालो से इंतजार है। महाशक्ति ने अराका पर अपने कदम को रख दिया है। अब ‘सागरिका’ को फ़िर से खोलना पड़ेगा।"
“कौन महाशक्ति बाबा? और...और ये सागरिका क्या है?" युगाका के लिये कलाट का हर शब्द एक रहस्य के समान था।
“बताता हूं, सब बताता हूं...पर पहले सूर्य के अस्त होने के पहले हमें अटलांटिस वृक्ष तक पहुंचना होगा।" कलाट ने कहा।
“ठीक है बाबा तो पहले अटलांटिस वृक्ष तक पहुंचने की ही व्यवस्था करते हैं। आप मेरे साथ महल की छत पर चिलये।" इतना कहकर युगाका कलाट महल के छत की ओर भागा।
कलाट युगाका के पीछे था।
युगाका ने महल की छत पर पहुंचकर एक अजीब सी सीटी बजाई, कुछ देर बाद उसे हवा में उड़कर वही लकड़ी का ड्रोन आता दिखाई दिया।
ड्रोन महल की छत पर उतर गया। कलाट और युगाका दोनों ही ड्रोन में बैठ गये।
युगाका के इशारे पर अब वह ड्रोन अटलांटिस वृक्ष की ओर उड़ चला।
“क्या अब आप बतायेंगे बाबा कि महाशक्ति कौन है?" युगाका ने कलाट से पूछा।
जारी रहेगा_______![]()
Thank you so much parkas bhai for your valuable reviewBahut hi shaandar update diya hai Raj_sharma bhai....
Nice and lovely update....