KEKIUS MAXIMUS
Supreme
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- 259
Bahut hi badhiya update diya hai Raj_sharma bhai....#95.
हिमालयन यति :
(9 जनवरी 2002, बुधवार, 15:30, ट्रांस अंटार्कटिक-पर्वत-अंटार्कटिका)
जेम्स और विल्मर को शलाका के दिये कमरे में रहते हुए आज एक दिन बीत गया था, पर ना तो शलाका उनसे मिलने आयी थी और ना ही उन दोनों को अपने पास बुलाया था।
जेम्स और विल्मर एक कमरे में बंद ऊब रहे थे। पर उन्हें यह भी समझ में नहीं आ रहा था कि आख़िर देवी शलाका से संपर्क कैसे करे?
उस कमरे में ना तो कोई दरवाजा था और ना ही कोई खिड़की? आख़िर वह बाहर जायें तो जायें कैसे?
“यार जेम्स!" हम लोग यहां क्या सोच कर आये थे कि खजाना मिलेगा? पर यहां कुछ मिलना तो छोड़ो, हम यहां खुद ही कैद हो गये।" विल्मर ने निराश होते हुए कहा।
“नकारात्मक मत सोचो दोस्त।" जेम्स ने विल्मर का हौसला बढ़ाते हुए कहा- “वह तो देवी हैं और पता नहीं कितने समय से यहां सो रही थी। अब इतने बाद अगर वो उठी हैं तो बहुत से काम बाकी होंगे। देवी पहले उसको पूरा करेंगी, फ़िर समय निकालकर हम लोगो से मिलेंगी। वैसे वह हमसे काफ़ी खुश हैं। हम तो जो मांगेंगे, उसे वह पूरा करेंगी । तू चिंता मत कर, हमारा खजाना मिलना तो पक्का है।"
“पता नहीं क्यों? पर मुझे तो थोड़ी टेंशन हो रही है।" विल्मर ने कहा- “अगर वह सच में हमसे इतना खुश थी, तो उसी समय क्यों नहीं खजाना देकर हमें वापस भेज दिया? और मान लिया कि उनके पास बहुत काम होंगे जिसकी वजह से वह हमसे नहीं मिल पा रही हैं, तो कम से कम ऐसे कमरे में रखती, जहां कुछ खिड़की व दरवाजे तो होते। उन्होने तो हमें ऐसे कमरे में बंद कर दिया है, जैसे हम उनके मेहमान ना होकर कोई कैदी हैं?"
विल्मर की बात में दम था, इसिलये जेम्स ने इस बार कोई विरोध नहीं किया।
जेम्स भी अब बैठे-बैठे थक गया था। इसिलये वह उठकर कमरे में ही टहलने लगा।
टहलते-टहलते जेम्स की निगाह एक दीवार पर चिपके दरवाजे के स्टीकर पर गयी।
स्टीकर देखकर उसे थोड़ा सा अजीब लगा। इसिलये वह दीवार के पास जाकर स्टीकर को देखने लगा।
वह एक साधारण स्टीकर ही था। ध्यान से देखने पर जेम्स को उस स्टीकर के दरवाजे पर एक उभरा हुआ लाल रंग का बटन दिखाई दिया।
जेम्स ने धीरे से उस बटन को दबा दिया।
बटन दबाने पर उसका रंग बदल कर लाल से हरा हो गया, पर कहीं से कोई आवाज नहीं आयी।
तभी जेम्स को स्टीकर देखते हुए एक अजीब सा अहसास हुआ।
एक बार फ़िर जेम्स ने स्टीकर को छूना चाहा, पर स्टीकर पर हाथ लगाते ही जेम्स को अपना हाथ दरवाजे के पार होता दिखाई दिया।
जेम्स ने एक बार विल्मर की ओर देखा। विल्मर कुर्सी पर आँख बंद किये हुए बैठा था।
जेम्स ने वापस स्टीकर की ओर देखा और धीरे से अपना एक हाथ स्टीकर के अंदर कर दिया।
दूसरी ओर खाली स्थान देख जेम्स पूरा का पूरा उस स्टीकर में घुस गया।
जेम्स के सामने एक गैलरी सी दिखाई दी। जिसमें हल्का उजाला था। जेम्स उस गैलरी में आगे बढ़ गया।
थोड़ा चलने के बाद जेम्स को हर तरफ दरवाजे ही दरवाजे दिखने लगे।
जेम्स ने घूमकर चारो ओर के दरवाजो को देखा, पर पलटने पर वह खुद भूल गया कि वह किस दरवाजे से यहां आया था।
अब जेम्स घबरा गया। काफ़ी देर तक उसने अंदाजा लगाने की सोची, पर उसे कुछ समझ नहीं आया।
अंततः वह एक दरवाजे से बाहर निकल गया। वह रास्ता एक बर्फ़ की गुफा में निकला था।
एक बार तो जेम्स खुश हो गया कि उसने बाहर निकलने का रास्ता खोज लिया, पर सामने का नजारा देख वह चकरा गया क्यों कि उसे अपने अगल-बगल चारो तरफ बर्फ़ के पहाड़ दिखाई दे रहे थे।
“यह मैं कहां आ पहुंचा? यह अंटार्कटिका नहीं है। अंटार्कटिका का एक-एक चप्पा मैं पहचानता हूं, वहां इतने पहाड़ नहीं है और...और वहां की बर्फ़ का रंग भी इतना सफेद नहीं है।....पर मैं 10 कदम के अंदर अंटार्कटिका से इतना दूर कैसे आ सकता हूं?” जेम्स मन ही मन बुदबुदाया।
जेम्स गुफा से निकल कर बाहर आ गया। तभी उसे अपने सामने एक 30 इंच लंबा पैर का निशान बर्फ़ पर बना दिखाई दिया।
“हे भगवान ... ये किस दैत्य के पैरों के निशान हैं बर्फ़ पर?" जेम्स के चेहरे पर आश्चर्य ही आश्चर्य दिख रहा था-“ये मैं कहां आ गया? मुझे तुरंत वापस जाना होगा।"
इतना सोचकर जेम्स जैसे ही वापस जाने के लिये घूमा, उसे अपने पीछे की गुफा गायब दिखाई दी।
“अब ये गुफा कहां गायब हो गयी?" गुफा को गायब देख जेम्स डर गया- “अब मैं वापस कैसे जाऊंगा?"
जेम्स ने अपने आप को एक मैदान में खड़े पाया। उसे समझ में नहीं आया कि अब वो कहां जाये? तभी आसमान से बर्फ़ गिरना शुरू हो गयी।
पहले ही जेम्स को ठंड लगने लगी थी और अब उस अनचाही बर्फ़ ने जेम्स का शरीर गलाना भी शुरू कर दिया।
अब जेम्स के पास और कोई चारा नहीं था, उन विशालकाय कदमों का पीछा करने के अलावा। कुछ सोच जेम्स उन कदमों के निशान के पीछे चल पड़ा।
थोड़ा आगे जाने पर उसे वो कदमों के निशान एक गुफा की ओर जाते हुए दिखाई दिये।
आसपास कुछ और ना होने की वजह से जेम्स भी उस गुफा की ओर चल दिया।
जेम्स ने बाहर से ही धीरे से झांक कर गुफा में देखा।
जेम्स को गुफा में कोई दिखाई नहीं दिया। गुफा के छत की ओर एक गोल सा सुराख था, जिसमें से होकर बर्फ़ ने गुफा में एक छोटा सा पहाड़ बना दिया था।
वह गुफा आगे जाकर सुरंग में बदलती दिख रही थी। आसमान से गिरती बर्फ़ से बचने के लिये जेम्स उस गुफा के एक किनारे खड़ा हो गया।
जेम्स को वहां खड़े हुए अभी ज़्यादा देर नहीं हुआ था कि अचानक जेम्स को गुफा के अंदर का बर्फ़ का टीला हिलता हुआ सा दिखाई दिया।
यह देख जेम्स डरकर वहीं दीवार से चिपक गया।
अब वह बर्फ़ तेजी से हिली और उसमें से एक 12 फुट का विशाल यति निकल आया।
यति को देख जेम्स बहुत डर गया और वह गुफा से चीखकर बाहर की ओर भागा।
यति की नजर भी जेम्स की ओर गयी। वह भी जेम्स के पीछे भागा।
मुस्किल से 5 सेकंड में ही यति ने जेम्स को अपने हाथों में पकड़ लिया।
यति ने एक बार ध्यान से जेम्स की ओर देखा। जेम्स ने डर के मारे अपनी आँखे बंद कर ली।
उसे लगा कि यति अब उसे खाने जा रहा है। जेम्स के मुंह से एक तेज चीख भी निकल गयी।
तभी जेम्स को अपना शरीर हवा में झूलता हुआ महसूस हुआ। जेम्स ने एक झटके से अपने आँखे खोली। उसने देखा कि यति हवा में ऊंचे-ऊंचे कूदता हुआ किसी दिशा में जा रहा है और वह यति के हाथों में है।
बस इससे ज़्यादा जेम्स कुछ नहीं देख पाया क्यों की अब वह बेहोश हो चुका था।
ऊंची छलांग लगाता हुआ वह यति एक विशालकाय पर्वत के पास पहुंच गया।
पर्वत पर एक बर्फ़ से लदा हुआ घर बना था।
घर बर्फ़ से इतना ज़्यादा ढका था कि यही नहीं पता चल रहा था कि वह घर किस चीज से बना है।
उस घर का दरवाजा छोटा था।
यह देख यति का आकार अपने आप छोटा होने लगा।
अब यति का आकार इंसान के बराबर हो गया और वह जेम्स को लेकर उस घर में दाख़िल हो गया।
पता नहीं यति किस प्रकार चल रहा था कि उसके पैरों से रत्ती भर भी आवाज नहीं हो रही थी।
2 कमरे पारकर यति एक बड़े से हॉल में पहुंचा।
उस हॉल के बीचोबीच एक काले रंग के पत्थर से निर्मित शिवाला बना था। जिसके पास एक सफेद दाढ़ी वाला बूढ़ा बैठा भगवान की पूजा कर रहा था।
यह तिब्बत का एक भिक्षुक नीमा था।
यति ने धीरे से शिवाला को सिर झुकाया और सामने की ओर चुपचाप बैठकर नीमा की पूजा ख़तम होने का इंतजार करने लगा।
लगभग 10 मिनट के बाद नीमा ने अपनी पूजा ख़तम करके अपनी आँखे खोली।
आँख खोलते ही नीमा की नजर यति और उसके पास बेहोश पड़े जेम्स की ओर गयी।
“यह कौन है हनुका?" नीमा ने यति की ओर देखते हुए पूछा।
“मुझे भी नहीं पता। मुझे ये म.. हा….देव की ‘योग-गुफा’ में मिला था।"
हनुका ने कहा- “मुझे शकल से ये विदेशी दिखाई दिया, इसिलये इसे मैं आपके पास ले आया।"
“गुरुत्व शक्ति के प्रकट होने का समय आ रहा है। हो सकता है ये वही चुराने के लिये यहां आया हो।"
नीमा ने कहा- “आप इसे रूद्राक्ष और शिवन्या को सौंप दो। वही देखेंगे कि इसका आगे क्या करना है?"
“जी धर्मगुरु!" इतना कहकर हनुका जेम्स को ले वहां से बाहर निकल गया।
जारी रहेगा_________![]()
Bhut hi badhiya update#95.
हिमालयन यति :
(9 जनवरी 2002, बुधवार, 15:30, ट्रांस अंटार्कटिक-पर्वत-अंटार्कटिका)
जेम्स और विल्मर को शलाका के दिये कमरे में रहते हुए आज एक दिन बीत गया था, पर ना तो शलाका उनसे मिलने आयी थी और ना ही उन दोनों को अपने पास बुलाया था।
जेम्स और विल्मर एक कमरे में बंद ऊब रहे थे। पर उन्हें यह भी समझ में नहीं आ रहा था कि आख़िर देवी शलाका से संपर्क कैसे करे?
उस कमरे में ना तो कोई दरवाजा था और ना ही कोई खिड़की? आख़िर वह बाहर जायें तो जायें कैसे?
“यार जेम्स!" हम लोग यहां क्या सोच कर आये थे कि खजाना मिलेगा? पर यहां कुछ मिलना तो छोड़ो, हम यहां खुद ही कैद हो गये।" विल्मर ने निराश होते हुए कहा।
“नकारात्मक मत सोचो दोस्त।" जेम्स ने विल्मर का हौसला बढ़ाते हुए कहा- “वह तो देवी हैं और पता नहीं कितने समय से यहां सो रही थी। अब इतने बाद अगर वो उठी हैं तो बहुत से काम बाकी होंगे। देवी पहले उसको पूरा करेंगी, फ़िर समय निकालकर हम लोगो से मिलेंगी। वैसे वह हमसे काफ़ी खुश हैं। हम तो जो मांगेंगे, उसे वह पूरा करेंगी । तू चिंता मत कर, हमारा खजाना मिलना तो पक्का है।"
“पता नहीं क्यों? पर मुझे तो थोड़ी टेंशन हो रही है।" विल्मर ने कहा- “अगर वह सच में हमसे इतना खुश थी, तो उसी समय क्यों नहीं खजाना देकर हमें वापस भेज दिया? और मान लिया कि उनके पास बहुत काम होंगे जिसकी वजह से वह हमसे नहीं मिल पा रही हैं, तो कम से कम ऐसे कमरे में रखती, जहां कुछ खिड़की व दरवाजे तो होते। उन्होने तो हमें ऐसे कमरे में बंद कर दिया है, जैसे हम उनके मेहमान ना होकर कोई कैदी हैं?"
विल्मर की बात में दम था, इसिलये जेम्स ने इस बार कोई विरोध नहीं किया।
जेम्स भी अब बैठे-बैठे थक गया था। इसिलये वह उठकर कमरे में ही टहलने लगा।
टहलते-टहलते जेम्स की निगाह एक दीवार पर चिपके दरवाजे के स्टीकर पर गयी।
स्टीकर देखकर उसे थोड़ा सा अजीब लगा। इसिलये वह दीवार के पास जाकर स्टीकर को देखने लगा।
वह एक साधारण स्टीकर ही था। ध्यान से देखने पर जेम्स को उस स्टीकर के दरवाजे पर एक उभरा हुआ लाल रंग का बटन दिखाई दिया।
जेम्स ने धीरे से उस बटन को दबा दिया।
बटन दबाने पर उसका रंग बदल कर लाल से हरा हो गया, पर कहीं से कोई आवाज नहीं आयी।
तभी जेम्स को स्टीकर देखते हुए एक अजीब सा अहसास हुआ।
एक बार फ़िर जेम्स ने स्टीकर को छूना चाहा, पर स्टीकर पर हाथ लगाते ही जेम्स को अपना हाथ दरवाजे के पार होता दिखाई दिया।
जेम्स ने एक बार विल्मर की ओर देखा। विल्मर कुर्सी पर आँख बंद किये हुए बैठा था।
जेम्स ने वापस स्टीकर की ओर देखा और धीरे से अपना एक हाथ स्टीकर के अंदर कर दिया।
दूसरी ओर खाली स्थान देख जेम्स पूरा का पूरा उस स्टीकर में घुस गया।
जेम्स के सामने एक गैलरी सी दिखाई दी। जिसमें हल्का उजाला था। जेम्स उस गैलरी में आगे बढ़ गया।
थोड़ा चलने के बाद जेम्स को हर तरफ दरवाजे ही दरवाजे दिखने लगे।
जेम्स ने घूमकर चारो ओर के दरवाजो को देखा, पर पलटने पर वह खुद भूल गया कि वह किस दरवाजे से यहां आया था।
अब जेम्स घबरा गया। काफ़ी देर तक उसने अंदाजा लगाने की सोची, पर उसे कुछ समझ नहीं आया।
अंततः वह एक दरवाजे से बाहर निकल गया। वह रास्ता एक बर्फ़ की गुफा में निकला था।
एक बार तो जेम्स खुश हो गया कि उसने बाहर निकलने का रास्ता खोज लिया, पर सामने का नजारा देख वह चकरा गया क्यों कि उसे अपने अगल-बगल चारो तरफ बर्फ़ के पहाड़ दिखाई दे रहे थे।
“यह मैं कहां आ पहुंचा? यह अंटार्कटिका नहीं है। अंटार्कटिका का एक-एक चप्पा मैं पहचानता हूं, वहां इतने पहाड़ नहीं है और...और वहां की बर्फ़ का रंग भी इतना सफेद नहीं है।....पर मैं 10 कदम के अंदर अंटार्कटिका से इतना दूर कैसे आ सकता हूं?” जेम्स मन ही मन बुदबुदाया।
जेम्स गुफा से निकल कर बाहर आ गया। तभी उसे अपने सामने एक 30 इंच लंबा पैर का निशान बर्फ़ पर बना दिखाई दिया।
“हे भगवान ... ये किस दैत्य के पैरों के निशान हैं बर्फ़ पर?" जेम्स के चेहरे पर आश्चर्य ही आश्चर्य दिख रहा था-“ये मैं कहां आ गया? मुझे तुरंत वापस जाना होगा।"
इतना सोचकर जेम्स जैसे ही वापस जाने के लिये घूमा, उसे अपने पीछे की गुफा गायब दिखाई दी।
“अब ये गुफा कहां गायब हो गयी?" गुफा को गायब देख जेम्स डर गया- “अब मैं वापस कैसे जाऊंगा?"
जेम्स ने अपने आप को एक मैदान में खड़े पाया। उसे समझ में नहीं आया कि अब वो कहां जाये? तभी आसमान से बर्फ़ गिरना शुरू हो गयी।
पहले ही जेम्स को ठंड लगने लगी थी और अब उस अनचाही बर्फ़ ने जेम्स का शरीर गलाना भी शुरू कर दिया।
अब जेम्स के पास और कोई चारा नहीं था, उन विशालकाय कदमों का पीछा करने के अलावा। कुछ सोच जेम्स उन कदमों के निशान के पीछे चल पड़ा।
थोड़ा आगे जाने पर उसे वो कदमों के निशान एक गुफा की ओर जाते हुए दिखाई दिये।
आसपास कुछ और ना होने की वजह से जेम्स भी उस गुफा की ओर चल दिया।
जेम्स ने बाहर से ही धीरे से झांक कर गुफा में देखा।
जेम्स को गुफा में कोई दिखाई नहीं दिया। गुफा के छत की ओर एक गोल सा सुराख था, जिसमें से होकर बर्फ़ ने गुफा में एक छोटा सा पहाड़ बना दिया था।
वह गुफा आगे जाकर सुरंग में बदलती दिख रही थी। आसमान से गिरती बर्फ़ से बचने के लिये जेम्स उस गुफा के एक किनारे खड़ा हो गया।
जेम्स को वहां खड़े हुए अभी ज़्यादा देर नहीं हुआ था कि अचानक जेम्स को गुफा के अंदर का बर्फ़ का टीला हिलता हुआ सा दिखाई दिया।
यह देख जेम्स डरकर वहीं दीवार से चिपक गया।
अब वह बर्फ़ तेजी से हिली और उसमें से एक 12 फुट का विशाल यति निकल आया।
यति को देख जेम्स बहुत डर गया और वह गुफा से चीखकर बाहर की ओर भागा।
यति की नजर भी जेम्स की ओर गयी। वह भी जेम्स के पीछे भागा।
मुस्किल से 5 सेकंड में ही यति ने जेम्स को अपने हाथों में पकड़ लिया।
यति ने एक बार ध्यान से जेम्स की ओर देखा। जेम्स ने डर के मारे अपनी आँखे बंद कर ली।
उसे लगा कि यति अब उसे खाने जा रहा है। जेम्स के मुंह से एक तेज चीख भी निकल गयी।
तभी जेम्स को अपना शरीर हवा में झूलता हुआ महसूस हुआ। जेम्स ने एक झटके से अपने आँखे खोली। उसने देखा कि यति हवा में ऊंचे-ऊंचे कूदता हुआ किसी दिशा में जा रहा है और वह यति के हाथों में है।
बस इससे ज़्यादा जेम्स कुछ नहीं देख पाया क्यों की अब वह बेहोश हो चुका था।
ऊंची छलांग लगाता हुआ वह यति एक विशालकाय पर्वत के पास पहुंच गया।
पर्वत पर एक बर्फ़ से लदा हुआ घर बना था।
घर बर्फ़ से इतना ज़्यादा ढका था कि यही नहीं पता चल रहा था कि वह घर किस चीज से बना है।
उस घर का दरवाजा छोटा था।
यह देख यति का आकार अपने आप छोटा होने लगा।
अब यति का आकार इंसान के बराबर हो गया और वह जेम्स को लेकर उस घर में दाख़िल हो गया।
पता नहीं यति किस प्रकार चल रहा था कि उसके पैरों से रत्ती भर भी आवाज नहीं हो रही थी।
2 कमरे पारकर यति एक बड़े से हॉल में पहुंचा।
उस हॉल के बीचोबीच एक काले रंग के पत्थर से निर्मित शिवाला बना था। जिसके पास एक सफेद दाढ़ी वाला बूढ़ा बैठा भगवान की पूजा कर रहा था।
यह तिब्बत का एक भिक्षुक नीमा था।
यति ने धीरे से शिवाला को सिर झुकाया और सामने की ओर चुपचाप बैठकर नीमा की पूजा ख़तम होने का इंतजार करने लगा।
लगभग 10 मिनट के बाद नीमा ने अपनी पूजा ख़तम करके अपनी आँखे खोली।
आँख खोलते ही नीमा की नजर यति और उसके पास बेहोश पड़े जेम्स की ओर गयी।
“यह कौन है हनुका?" नीमा ने यति की ओर देखते हुए पूछा।
“मुझे भी नहीं पता। मुझे ये म.. हा….देव की ‘योग-गुफा’ में मिला था।"
हनुका ने कहा- “मुझे शकल से ये विदेशी दिखाई दिया, इसिलये इसे मैं आपके पास ले आया।"
“गुरुत्व शक्ति के प्रकट होने का समय आ रहा है। हो सकता है ये वही चुराने के लिये यहां आया हो।"
नीमा ने कहा- “आप इसे रूद्राक्ष और शिवन्या को सौंप दो। वही देखेंगे कि इसका आगे क्या करना है?"
“जी धर्मगुरु!" इतना कहकर हनुका जेम्स को ले वहां से बाहर निकल गया।
जारी रहेगा_________![]()
बहुत ही सुंदर लाजवाब और अद्भुत रमणिय रोमांचकारी अपडेट है भाई मजा आ गया#95.
हिमालयन यति :
(9 जनवरी 2002, बुधवार, 15:30, ट्रांस अंटार्कटिक-पर्वत-अंटार्कटिका)
जेम्स और विल्मर को शलाका के दिये कमरे में रहते हुए आज एक दिन बीत गया था, पर ना तो शलाका उनसे मिलने आयी थी और ना ही उन दोनों को अपने पास बुलाया था।
जेम्स और विल्मर एक कमरे में बंद ऊब रहे थे। पर उन्हें यह भी समझ में नहीं आ रहा था कि आख़िर देवी शलाका से संपर्क कैसे करे?
उस कमरे में ना तो कोई दरवाजा था और ना ही कोई खिड़की? आख़िर वह बाहर जायें तो जायें कैसे?
“यार जेम्स!" हम लोग यहां क्या सोच कर आये थे कि खजाना मिलेगा? पर यहां कुछ मिलना तो छोड़ो, हम यहां खुद ही कैद हो गये।" विल्मर ने निराश होते हुए कहा।
“नकारात्मक मत सोचो दोस्त।" जेम्स ने विल्मर का हौसला बढ़ाते हुए कहा- “वह तो देवी हैं और पता नहीं कितने समय से यहां सो रही थी। अब इतने बाद अगर वो उठी हैं तो बहुत से काम बाकी होंगे। देवी पहले उसको पूरा करेंगी, फ़िर समय निकालकर हम लोगो से मिलेंगी। वैसे वह हमसे काफ़ी खुश हैं। हम तो जो मांगेंगे, उसे वह पूरा करेंगी । तू चिंता मत कर, हमारा खजाना मिलना तो पक्का है।"
“पता नहीं क्यों? पर मुझे तो थोड़ी टेंशन हो रही है।" विल्मर ने कहा- “अगर वह सच में हमसे इतना खुश थी, तो उसी समय क्यों नहीं खजाना देकर हमें वापस भेज दिया? और मान लिया कि उनके पास बहुत काम होंगे जिसकी वजह से वह हमसे नहीं मिल पा रही हैं, तो कम से कम ऐसे कमरे में रखती, जहां कुछ खिड़की व दरवाजे तो होते। उन्होने तो हमें ऐसे कमरे में बंद कर दिया है, जैसे हम उनके मेहमान ना होकर कोई कैदी हैं?"
विल्मर की बात में दम था, इसिलये जेम्स ने इस बार कोई विरोध नहीं किया।
जेम्स भी अब बैठे-बैठे थक गया था। इसिलये वह उठकर कमरे में ही टहलने लगा।
टहलते-टहलते जेम्स की निगाह एक दीवार पर चिपके दरवाजे के स्टीकर पर गयी।
स्टीकर देखकर उसे थोड़ा सा अजीब लगा। इसिलये वह दीवार के पास जाकर स्टीकर को देखने लगा।
वह एक साधारण स्टीकर ही था। ध्यान से देखने पर जेम्स को उस स्टीकर के दरवाजे पर एक उभरा हुआ लाल रंग का बटन दिखाई दिया।
जेम्स ने धीरे से उस बटन को दबा दिया।
बटन दबाने पर उसका रंग बदल कर लाल से हरा हो गया, पर कहीं से कोई आवाज नहीं आयी।
तभी जेम्स को स्टीकर देखते हुए एक अजीब सा अहसास हुआ।
एक बार फ़िर जेम्स ने स्टीकर को छूना चाहा, पर स्टीकर पर हाथ लगाते ही जेम्स को अपना हाथ दरवाजे के पार होता दिखाई दिया।
जेम्स ने एक बार विल्मर की ओर देखा। विल्मर कुर्सी पर आँख बंद किये हुए बैठा था।
जेम्स ने वापस स्टीकर की ओर देखा और धीरे से अपना एक हाथ स्टीकर के अंदर कर दिया।
दूसरी ओर खाली स्थान देख जेम्स पूरा का पूरा उस स्टीकर में घुस गया।
जेम्स के सामने एक गैलरी सी दिखाई दी। जिसमें हल्का उजाला था। जेम्स उस गैलरी में आगे बढ़ गया।
थोड़ा चलने के बाद जेम्स को हर तरफ दरवाजे ही दरवाजे दिखने लगे।
जेम्स ने घूमकर चारो ओर के दरवाजो को देखा, पर पलटने पर वह खुद भूल गया कि वह किस दरवाजे से यहां आया था।
अब जेम्स घबरा गया। काफ़ी देर तक उसने अंदाजा लगाने की सोची, पर उसे कुछ समझ नहीं आया।
अंततः वह एक दरवाजे से बाहर निकल गया। वह रास्ता एक बर्फ़ की गुफा में निकला था।
एक बार तो जेम्स खुश हो गया कि उसने बाहर निकलने का रास्ता खोज लिया, पर सामने का नजारा देख वह चकरा गया क्यों कि उसे अपने अगल-बगल चारो तरफ बर्फ़ के पहाड़ दिखाई दे रहे थे।
“यह मैं कहां आ पहुंचा? यह अंटार्कटिका नहीं है। अंटार्कटिका का एक-एक चप्पा मैं पहचानता हूं, वहां इतने पहाड़ नहीं है और...और वहां की बर्फ़ का रंग भी इतना सफेद नहीं है।....पर मैं 10 कदम के अंदर अंटार्कटिका से इतना दूर कैसे आ सकता हूं?” जेम्स मन ही मन बुदबुदाया।
जेम्स गुफा से निकल कर बाहर आ गया। तभी उसे अपने सामने एक 30 इंच लंबा पैर का निशान बर्फ़ पर बना दिखाई दिया।
“हे भगवान ... ये किस दैत्य के पैरों के निशान हैं बर्फ़ पर?" जेम्स के चेहरे पर आश्चर्य ही आश्चर्य दिख रहा था-“ये मैं कहां आ गया? मुझे तुरंत वापस जाना होगा।"
इतना सोचकर जेम्स जैसे ही वापस जाने के लिये घूमा, उसे अपने पीछे की गुफा गायब दिखाई दी।
“अब ये गुफा कहां गायब हो गयी?" गुफा को गायब देख जेम्स डर गया- “अब मैं वापस कैसे जाऊंगा?"
जेम्स ने अपने आप को एक मैदान में खड़े पाया। उसे समझ में नहीं आया कि अब वो कहां जाये? तभी आसमान से बर्फ़ गिरना शुरू हो गयी।
पहले ही जेम्स को ठंड लगने लगी थी और अब उस अनचाही बर्फ़ ने जेम्स का शरीर गलाना भी शुरू कर दिया।
अब जेम्स के पास और कोई चारा नहीं था, उन विशालकाय कदमों का पीछा करने के अलावा। कुछ सोच जेम्स उन कदमों के निशान के पीछे चल पड़ा।
थोड़ा आगे जाने पर उसे वो कदमों के निशान एक गुफा की ओर जाते हुए दिखाई दिये।
आसपास कुछ और ना होने की वजह से जेम्स भी उस गुफा की ओर चल दिया।
जेम्स ने बाहर से ही धीरे से झांक कर गुफा में देखा।
जेम्स को गुफा में कोई दिखाई नहीं दिया। गुफा के छत की ओर एक गोल सा सुराख था, जिसमें से होकर बर्फ़ ने गुफा में एक छोटा सा पहाड़ बना दिया था।
वह गुफा आगे जाकर सुरंग में बदलती दिख रही थी। आसमान से गिरती बर्फ़ से बचने के लिये जेम्स उस गुफा के एक किनारे खड़ा हो गया।
जेम्स को वहां खड़े हुए अभी ज़्यादा देर नहीं हुआ था कि अचानक जेम्स को गुफा के अंदर का बर्फ़ का टीला हिलता हुआ सा दिखाई दिया।
यह देख जेम्स डरकर वहीं दीवार से चिपक गया।
अब वह बर्फ़ तेजी से हिली और उसमें से एक 12 फुट का विशाल यति निकल आया।
यति को देख जेम्स बहुत डर गया और वह गुफा से चीखकर बाहर की ओर भागा।
यति की नजर भी जेम्स की ओर गयी। वह भी जेम्स के पीछे भागा।
मुस्किल से 5 सेकंड में ही यति ने जेम्स को अपने हाथों में पकड़ लिया।
यति ने एक बार ध्यान से जेम्स की ओर देखा। जेम्स ने डर के मारे अपनी आँखे बंद कर ली।
उसे लगा कि यति अब उसे खाने जा रहा है। जेम्स के मुंह से एक तेज चीख भी निकल गयी।
तभी जेम्स को अपना शरीर हवा में झूलता हुआ महसूस हुआ। जेम्स ने एक झटके से अपने आँखे खोली। उसने देखा कि यति हवा में ऊंचे-ऊंचे कूदता हुआ किसी दिशा में जा रहा है और वह यति के हाथों में है।
बस इससे ज़्यादा जेम्स कुछ नहीं देख पाया क्यों की अब वह बेहोश हो चुका था।
ऊंची छलांग लगाता हुआ वह यति एक विशालकाय पर्वत के पास पहुंच गया।
पर्वत पर एक बर्फ़ से लदा हुआ घर बना था।
घर बर्फ़ से इतना ज़्यादा ढका था कि यही नहीं पता चल रहा था कि वह घर किस चीज से बना है।
उस घर का दरवाजा छोटा था।
यह देख यति का आकार अपने आप छोटा होने लगा।
अब यति का आकार इंसान के बराबर हो गया और वह जेम्स को लेकर उस घर में दाख़िल हो गया।
पता नहीं यति किस प्रकार चल रहा था कि उसके पैरों से रत्ती भर भी आवाज नहीं हो रही थी।
2 कमरे पारकर यति एक बड़े से हॉल में पहुंचा।
उस हॉल के बीचोबीच एक काले रंग के पत्थर से निर्मित शिवाला बना था। जिसके पास एक सफेद दाढ़ी वाला बूढ़ा बैठा भगवान की पूजा कर रहा था।
यह तिब्बत का एक भिक्षुक नीमा था।
यति ने धीरे से शिवाला को सिर झुकाया और सामने की ओर चुपचाप बैठकर नीमा की पूजा ख़तम होने का इंतजार करने लगा।
लगभग 10 मिनट के बाद नीमा ने अपनी पूजा ख़तम करके अपनी आँखे खोली।
आँख खोलते ही नीमा की नजर यति और उसके पास बेहोश पड़े जेम्स की ओर गयी।
“यह कौन है हनुका?" नीमा ने यति की ओर देखते हुए पूछा।
“मुझे भी नहीं पता। मुझे ये म.. हा….देव की ‘योग-गुफा’ में मिला था।"
हनुका ने कहा- “मुझे शकल से ये विदेशी दिखाई दिया, इसिलये इसे मैं आपके पास ले आया।"
“गुरुत्व शक्ति के प्रकट होने का समय आ रहा है। हो सकता है ये वही चुराने के लिये यहां आया हो।"
नीमा ने कहा- “आप इसे रूद्राक्ष और शिवन्या को सौंप दो। वही देखेंगे कि इसका आगे क्या करना है?"
“जी धर्मगुरु!" इतना कहकर हनुका जेम्स को ले वहां से बाहर निकल गया।
जारी रहेगा_________![]()
Thanksromanchak update..
Thank you very much parkas bhaiBahut hi badhiya update diya hai Raj_sharma bhai....
Nice and beautiful update....
Ye ek rahasyamayi jagah hai mitra, dekhte jao, kya se kya hota haiBhut hi badhiya update
To lagta hai james us darwaje se kailash parvat par pahuch gaya hai
Dekhte hai ab james ke sath aage kya hota hai
Thank you very much for your valuable review and support bhaiबहुत ही सुंदर लाजवाब और अद्भुत रमणिय रोमांचकारी अपडेट है भाई मजा आ गया
अगले रोमांचकारी धमाकेदार अपडेट की प्रतिक्षा रहेगी जल्दी से दिजिएगा
Nice update#95.
हिमालयन यति :
(9 जनवरी 2002, बुधवार, 15:30, ट्रांस अंटार्कटिक-पर्वत-अंटार्कटिका)
जेम्स और विल्मर को शलाका के दिये कमरे में रहते हुए आज एक दिन बीत गया था, पर ना तो शलाका उनसे मिलने आयी थी और ना ही उन दोनों को अपने पास बुलाया था।
जेम्स और विल्मर एक कमरे में बंद ऊब रहे थे। पर उन्हें यह भी समझ में नहीं आ रहा था कि आख़िर देवी शलाका से संपर्क कैसे करे?
उस कमरे में ना तो कोई दरवाजा था और ना ही कोई खिड़की? आख़िर वह बाहर जायें तो जायें कैसे?
“यार जेम्स!" हम लोग यहां क्या सोच कर आये थे कि खजाना मिलेगा? पर यहां कुछ मिलना तो छोड़ो, हम यहां खुद ही कैद हो गये।" विल्मर ने निराश होते हुए कहा।
“नकारात्मक मत सोचो दोस्त।" जेम्स ने विल्मर का हौसला बढ़ाते हुए कहा- “वह तो देवी हैं और पता नहीं कितने समय से यहां सो रही थी। अब इतने बाद अगर वो उठी हैं तो बहुत से काम बाकी होंगे। देवी पहले उसको पूरा करेंगी, फ़िर समय निकालकर हम लोगो से मिलेंगी। वैसे वह हमसे काफ़ी खुश हैं। हम तो जो मांगेंगे, उसे वह पूरा करेंगी । तू चिंता मत कर, हमारा खजाना मिलना तो पक्का है।"
“पता नहीं क्यों? पर मुझे तो थोड़ी टेंशन हो रही है।" विल्मर ने कहा- “अगर वह सच में हमसे इतना खुश थी, तो उसी समय क्यों नहीं खजाना देकर हमें वापस भेज दिया? और मान लिया कि उनके पास बहुत काम होंगे जिसकी वजह से वह हमसे नहीं मिल पा रही हैं, तो कम से कम ऐसे कमरे में रखती, जहां कुछ खिड़की व दरवाजे तो होते। उन्होने तो हमें ऐसे कमरे में बंद कर दिया है, जैसे हम उनके मेहमान ना होकर कोई कैदी हैं?"
विल्मर की बात में दम था, इसिलये जेम्स ने इस बार कोई विरोध नहीं किया।
जेम्स भी अब बैठे-बैठे थक गया था। इसिलये वह उठकर कमरे में ही टहलने लगा।
टहलते-टहलते जेम्स की निगाह एक दीवार पर चिपके दरवाजे के स्टीकर पर गयी।
स्टीकर देखकर उसे थोड़ा सा अजीब लगा। इसिलये वह दीवार के पास जाकर स्टीकर को देखने लगा।
वह एक साधारण स्टीकर ही था। ध्यान से देखने पर जेम्स को उस स्टीकर के दरवाजे पर एक उभरा हुआ लाल रंग का बटन दिखाई दिया।
जेम्स ने धीरे से उस बटन को दबा दिया।
बटन दबाने पर उसका रंग बदल कर लाल से हरा हो गया, पर कहीं से कोई आवाज नहीं आयी।
तभी जेम्स को स्टीकर देखते हुए एक अजीब सा अहसास हुआ।
एक बार फ़िर जेम्स ने स्टीकर को छूना चाहा, पर स्टीकर पर हाथ लगाते ही जेम्स को अपना हाथ दरवाजे के पार होता दिखाई दिया।
जेम्स ने एक बार विल्मर की ओर देखा। विल्मर कुर्सी पर आँख बंद किये हुए बैठा था।
जेम्स ने वापस स्टीकर की ओर देखा और धीरे से अपना एक हाथ स्टीकर के अंदर कर दिया।
दूसरी ओर खाली स्थान देख जेम्स पूरा का पूरा उस स्टीकर में घुस गया।
जेम्स के सामने एक गैलरी सी दिखाई दी। जिसमें हल्का उजाला था। जेम्स उस गैलरी में आगे बढ़ गया।
थोड़ा चलने के बाद जेम्स को हर तरफ दरवाजे ही दरवाजे दिखने लगे।
जेम्स ने घूमकर चारो ओर के दरवाजो को देखा, पर पलटने पर वह खुद भूल गया कि वह किस दरवाजे से यहां आया था।
अब जेम्स घबरा गया। काफ़ी देर तक उसने अंदाजा लगाने की सोची, पर उसे कुछ समझ नहीं आया।
अंततः वह एक दरवाजे से बाहर निकल गया। वह रास्ता एक बर्फ़ की गुफा में निकला था।
एक बार तो जेम्स खुश हो गया कि उसने बाहर निकलने का रास्ता खोज लिया, पर सामने का नजारा देख वह चकरा गया क्यों कि उसे अपने अगल-बगल चारो तरफ बर्फ़ के पहाड़ दिखाई दे रहे थे।
“यह मैं कहां आ पहुंचा? यह अंटार्कटिका नहीं है। अंटार्कटिका का एक-एक चप्पा मैं पहचानता हूं, वहां इतने पहाड़ नहीं है और...और वहां की बर्फ़ का रंग भी इतना सफेद नहीं है।....पर मैं 10 कदम के अंदर अंटार्कटिका से इतना दूर कैसे आ सकता हूं?” जेम्स मन ही मन बुदबुदाया।
जेम्स गुफा से निकल कर बाहर आ गया। तभी उसे अपने सामने एक 30 इंच लंबा पैर का निशान बर्फ़ पर बना दिखाई दिया।
“हे भगवान ... ये किस दैत्य के पैरों के निशान हैं बर्फ़ पर?" जेम्स के चेहरे पर आश्चर्य ही आश्चर्य दिख रहा था-“ये मैं कहां आ गया? मुझे तुरंत वापस जाना होगा।"
इतना सोचकर जेम्स जैसे ही वापस जाने के लिये घूमा, उसे अपने पीछे की गुफा गायब दिखाई दी।
“अब ये गुफा कहां गायब हो गयी?" गुफा को गायब देख जेम्स डर गया- “अब मैं वापस कैसे जाऊंगा?"
जेम्स ने अपने आप को एक मैदान में खड़े पाया। उसे समझ में नहीं आया कि अब वो कहां जाये? तभी आसमान से बर्फ़ गिरना शुरू हो गयी।
पहले ही जेम्स को ठंड लगने लगी थी और अब उस अनचाही बर्फ़ ने जेम्स का शरीर गलाना भी शुरू कर दिया।
अब जेम्स के पास और कोई चारा नहीं था, उन विशालकाय कदमों का पीछा करने के अलावा। कुछ सोच जेम्स उन कदमों के निशान के पीछे चल पड़ा।
थोड़ा आगे जाने पर उसे वो कदमों के निशान एक गुफा की ओर जाते हुए दिखाई दिये।
आसपास कुछ और ना होने की वजह से जेम्स भी उस गुफा की ओर चल दिया।
जेम्स ने बाहर से ही धीरे से झांक कर गुफा में देखा।
जेम्स को गुफा में कोई दिखाई नहीं दिया। गुफा के छत की ओर एक गोल सा सुराख था, जिसमें से होकर बर्फ़ ने गुफा में एक छोटा सा पहाड़ बना दिया था।
वह गुफा आगे जाकर सुरंग में बदलती दिख रही थी। आसमान से गिरती बर्फ़ से बचने के लिये जेम्स उस गुफा के एक किनारे खड़ा हो गया।
जेम्स को वहां खड़े हुए अभी ज़्यादा देर नहीं हुआ था कि अचानक जेम्स को गुफा के अंदर का बर्फ़ का टीला हिलता हुआ सा दिखाई दिया।
यह देख जेम्स डरकर वहीं दीवार से चिपक गया।
अब वह बर्फ़ तेजी से हिली और उसमें से एक 12 फुट का विशाल यति निकल आया।
यति को देख जेम्स बहुत डर गया और वह गुफा से चीखकर बाहर की ओर भागा।
यति की नजर भी जेम्स की ओर गयी। वह भी जेम्स के पीछे भागा।
मुस्किल से 5 सेकंड में ही यति ने जेम्स को अपने हाथों में पकड़ लिया।
यति ने एक बार ध्यान से जेम्स की ओर देखा। जेम्स ने डर के मारे अपनी आँखे बंद कर ली।
उसे लगा कि यति अब उसे खाने जा रहा है। जेम्स के मुंह से एक तेज चीख भी निकल गयी।
तभी जेम्स को अपना शरीर हवा में झूलता हुआ महसूस हुआ। जेम्स ने एक झटके से अपने आँखे खोली। उसने देखा कि यति हवा में ऊंचे-ऊंचे कूदता हुआ किसी दिशा में जा रहा है और वह यति के हाथों में है।
बस इससे ज़्यादा जेम्स कुछ नहीं देख पाया क्यों की अब वह बेहोश हो चुका था।
ऊंची छलांग लगाता हुआ वह यति एक विशालकाय पर्वत के पास पहुंच गया।
पर्वत पर एक बर्फ़ से लदा हुआ घर बना था।
घर बर्फ़ से इतना ज़्यादा ढका था कि यही नहीं पता चल रहा था कि वह घर किस चीज से बना है।
उस घर का दरवाजा छोटा था।
यह देख यति का आकार अपने आप छोटा होने लगा।
अब यति का आकार इंसान के बराबर हो गया और वह जेम्स को लेकर उस घर में दाख़िल हो गया।
पता नहीं यति किस प्रकार चल रहा था कि उसके पैरों से रत्ती भर भी आवाज नहीं हो रही थी।
2 कमरे पारकर यति एक बड़े से हॉल में पहुंचा।
उस हॉल के बीचोबीच एक काले रंग के पत्थर से निर्मित शिवाला बना था। जिसके पास एक सफेद दाढ़ी वाला बूढ़ा बैठा भगवान की पूजा कर रहा था।
यह तिब्बत का एक भिक्षुक नीमा था।
यति ने धीरे से शिवाला को सिर झुकाया और सामने की ओर चुपचाप बैठकर नीमा की पूजा ख़तम होने का इंतजार करने लगा।
लगभग 10 मिनट के बाद नीमा ने अपनी पूजा ख़तम करके अपनी आँखे खोली।
आँख खोलते ही नीमा की नजर यति और उसके पास बेहोश पड़े जेम्स की ओर गयी।
“यह कौन है हनुका?" नीमा ने यति की ओर देखते हुए पूछा।
“मुझे भी नहीं पता। मुझे ये म.. हा….देव की ‘योग-गुफा’ में मिला था।"
हनुका ने कहा- “मुझे शकल से ये विदेशी दिखाई दिया, इसिलये इसे मैं आपके पास ले आया।"
“गुरुत्व शक्ति के प्रकट होने का समय आ रहा है। हो सकता है ये वही चुराने के लिये यहां आया हो।"
नीमा ने कहा- “आप इसे रूद्राक्ष और शिवन्या को सौंप दो। वही देखेंगे कि इसका आगे क्या करना है?"
“जी धर्मगुरु!" इतना कहकर हनुका जेम्स को ले वहां से बाहर निकल गया।
जारी रहेगा_________![]()