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Erotica साइको कविता (psycho Kavita)

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Shetan

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बहुत आभार अपने मेरी कहानी का भी जिक्र किया लगता है कुछ टर्न आने वाला है , नागर का टारगेट और कविता भी काफ़ी दिन से स्टूडियों और आफिस से बाहर है
आप का सपोर्ट मेरे लिए बहोत अनमोल है कोमलजी. आप की स्टोरी का जिक्र करना सिर्फ मेरी मर्जी और चाह ही नहीं वक्त की जरुरत और हालत भी है. वाह सारे किस्से जिसे पढ़कर मेरे अंदर अलग अलग फैंटासी की रचना हुई. इसका श्रेय सिर्फ आप को ही जाता है. और सायद मेरी कहानियो मे आगे भी होता रहेगा. थैंक्यू सो मच कोमलजी. ऐसे ही सपोर्ट करते रहिएगा.
 
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Shetan

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Episode 10.3


रूपा के जाने के बाद कविता फिर सोच मे डूब गई. वो यह सोचने लगी की जब रूपा की ऊँगली घुसने से उसे इतना दर्द हुआ. वीरू का तो बहोत मोटा और लम्बा है. वो घुसेगा तो मै जिन्दा ही नही बचूंगी. वो यह सोच ही रही थी की तभि उसने डोर की तरफ देखा.

उसने देखा की रूपा डिनर की ट्रे लेकर वहां से गुजरी है. वो समझ गई की वीरू को खाना पहोंचाया जा रहा है. उसके बाद वही सब होगा. कविता के बदन मे डर से खुजली सी होने लगी. बदन मे जैसे चीटिया काट रही हो. कविता ज्यादा ही घबराने लगी.

उसे समझ नही आ रहा था की वो क्या करें. उसने बेड पर तेज़ी से दए बाए देखा. उसे अपना मोबइल दिखाई दिया. कविता अपने मोबाइल पर झपट कर अपने हाथो मे लेती है. और गूगल पर सर्च करना शुरू किया. अनाल सेक्स. बहोत सारी साइट खुल गई.

कविता ने एक साइट ओपन की तो कई सारी वीडियो उसकी स्क्रीन पर आ गई. वीडियो के पोस्टर से ही कविता को ज्यादा डर लगने लगा. लोगो जितने ही सीन बहोत सेक्सुअल थे. कविता जैसे डरी हुई हो. एक वीडियो ओपन करती है. जो शार्ट थी.

और सीधा सेक्स ही चालू था. लड़की बड़ी थी. और कुतिया जैसे नंगी झूकी हुई थी. वही लड़का उस लड़की से छोटा और वो भी नंगा था. पर इसका लिंग बहोत बडा था. वीरू की तरह. लड़का उस लड़की के पीछे दोनों हिप्स के बिच बार बार अंदर डालता और पूरा निकलता. लड़की आंखे बंद किए सिसकती. करहती.

बहोत कामुख आवाज निकलती. कविता को यह समझ नही आया की लड़की को तकलीफ हो रही है. या मझा आ रहा है. कविता ने घबराकर फोन दूर फेक दिया. जैसे कोई होरोर सीन देख लिया हो. कविता का डर के मारे मुँह सुख गया. क्यों की उसे अपने कोमर्य ( virginity) भंग होने का पहला दर्द याद आ गया.

जिसमे वो बेहोश हो गई थी. वो वीरू के साइज को जानती थी. तभि उसे फिर एक बार डोर पर रूपा आती हुई दिखाई दी. उसके हाथ मे वीरू को खिलाए डिनर की झूठी प्लेटस दिखाई दी. कविता समझ गई की वीरू ने डिनर खा लिया. अब वही प्रोग्राम शुरू होगा. जिसके लिए कविता डर रही थी.


रूपा : (स्माइल ) तैयार हो जा मेरी रानी. मै अभी प्लेटस रख कर आती हु. फिर तुम्हे ले चलती हु.


रूपा को क्या पता था की कविता का डर से बुरा हाल हो रहा है. वो तो वहां से किचन मे चली गई. पर कविता को इतना ज्यादा डर लगने लगा की उसे टोईलेट आने लगी. वो नंगी ही तुरंत खड़ी हुई. और बाथरूम मे घुस गई.
 

Shetan

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Episode 10.4


जब कविता से मिलने के बाद रूपा वीरू के लिए डिनर लेकर गई. तब कविता की तो हालत बुरी हो गई. पर रूपा बहोत रोमांचित थी. वो भरी पूरी और ऐसा कहो की youngest MLF थी. रूपा को xforum पर कोमलरानी की कहानियाँ पढ़ने का सोख था. और वही से उसके दिल मे एक फैंटासी ने जन्म लिया हुआ था.

जिसमे स्टोरी की लीड हीरोइन अपने पाती हीरो से अपनी छोटी बहन का सेक्स करवाती है. अपनी मासूम बहन का सर अपनी गोद मे रख कर. प्यार दुलार करते हुए उसका बेराहेमी से अपने पति द्वारा सम्भोग होता है. रूपा ने कोमल रानी की कहानी मे ऐसे कई किस्से पढ़े. कही जवान नांदिया को भाभी देवरो से टांका भीड़वाती है. तो कही ननंद नन्दोई सहलज का कामुख सीन.

यह एक लेडी कक्स(lady cucks) फीकिंग्स थी. जो रूपा के जहन मे भी फेल चुकी थी. और कविता और वीरू के सम्भोग से वही फैंटासी पूरी हो रही थी. रूपा खाने की थाली लेकर वीरू के सामने खड़ी हो गई. पूरी तरह से नंगा और दोनों बंधे हुए हाथ. वो रूपा को थोड़ा नाराजगी वाले लहजे से बोला.


वीरू : इतना हस क्यों रही हो???


रूपा वीरू के कमर के पास बैठ गई. वीरू भी थोड़ाऊपर की ओर खिसक कर बैठ गया. रूपा ने बैठते ही उसे खिलाना शुरू किया.


रूपा : (स्माइल, शारारत ) तुम तैयार हो ना??


वीरू : (सॉक ) किस लिए.


रूपा : (सॉक, स्माइल ) अरे...... कमाल है. रूपा एक बार तेरा पिछवाडा. मुझे तो तुम छोड़ते नही थे. कितना रगड़ा तुमने मेरा पिछवाडा. अब लड़की तैयार हुई है तो तुम भाव खा रहे हो.


वीरू समझ गया की रूपा कविता के साथ अनाल सेक्स करने के लिए कहे रही है. भले ही वीरू कविता से दूर भाग रहा था. पर वो भी कविता की खूबसूरती से मुँह मोड़ नही पा रहा था. वीरू को गुस्सा भी आया. और उत्तेजना भी महसूस हुई. वो कविता के पूछवाड़े की कल्पना करने लगा. और उसका लिंग अपने आप तन गया.

साथ ही वो अपने मन मे बोलने लगा. ऐसा पेलुँगा की साली जिंदगी भर नही भूलेगी. वीरू कविता से कुछ हद तक बदला लेने वाले फील मे था.


रूपा : अममम खाओ ना. कहा खो गए. (स्माइल ) कही उसके बारे मे तो नही सोचने लगे. देखो कैसे तन गया.


रूपा ने बोलते हुए वीरू के लिंग को ही हाथो मे पकड़ लिया.


वीरू : ( सॉक ) ससस तू भी पागल हो गई है. उसके साथ रहकर.


रूपा वीरू को खाना खिला चुकी थी. वो ट्रे लेकर खड़ी हो गई.


रूपा : (शारारत, स्माइल) फिर तू भी पागल हो जा. मै आती हु उसे लेकर. और हा. आराम से धीरे से. तेरा झटका झेल नही पाएगी. आराम से करना. समझा.


बोल कर रूपा चली गई. वीरू चाहता था की कविता उस से नफरत करने लग जाए. और उसे वहां से जाने दे. इसी लिए वो कोसिस कर रहा था की खुद भी कविता से नफरत करें. रूपा वहां से जा चुकी थी. पर वीरू कविता के पिछवाड़े के बारे मे सोच सोच कर ज्यादा ही उत्तेजित हो रहा था.
 

Shetan

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Episode 10.5


वीरू को डिनर करवाने के बाद रूपा ने कविता को कहे दिया की तैयार हो जाए. और वो खाली प्लेटस और बाकि कामों के लिए किचन चली गई. वही कविता तो पहले से डरी हुई थी. जब रूपा ने उसे तैयार होने को कहा तो कविता के मुँह का पानी तक डर से सुख गया.

कविता अपने डर का सामना ही कर रही थी की रूपा एक बार फिर डोर पर आकर खड़ी हो गई. इस बार उसके हाथ मे तेल की कटोरी थी. पर मज़े की बात यह की वो साड़ी मे नही थी. सिर्फ अपने ब्लाउज और घाघरे मे. चहेरे पर शारारत भरी मुस्कान. और एक नशीलापन.


रूपा : (स्माइल, शारारत, नशीलापन) चले मेरी रानी.


कद कठि से रूपा की बॉडी कविता से काफ़ी बड़ी थी. बूब्स 38 तो वही कविता परफेक्ट 34 और दोनों की हाईट भी थी. पर कविता ज्यादा ही लम्बी थी. बस रूपा के पेट पर थोड़ी चर्बी थी. सेक्स की चाह मे लीन रूपा कविता को बीबीजी के बजाए रानी बोलने लगी. जैसे वो उसकी बड़ी बहन या भाभी हो.


रूपा : क्या हुआ डर लग रहा है???


कविता ने डरे सहमे चहेरे से हा मे सर हिलाती है. रूपा कविता के करीब आई. और उसके पास बैठ गई. उसके चहेरे को अपनी तरफ किया.


रूपा : (स्माइल) देख मेरी रानी. कुछ पाना है. तो थोड़ा दर्द तो साहना पड़ेगा. और तू बता की तुझे दर्द के बाद मझा आया या नही.


कविता ने बस थोड़ी सी स्माइल की और हा मे सर हिलाया. लेकिन वो अभी भी डर रही थी.


रूपा : अगर उसे तेरी आदत लग गई. तो तुजसे चाह कर भी अलग नही हो पाएगा. बस उसे तेरी आदत लग जाए.


कविता ने हा मे सर हिलाया. कविता के मन मे भी सवाल थे. जो वो पूछे बिना नही रहे पाई.


कविता : (घबराहट) क्या फिर वो मुझसे प्यार करेगा.


रूपा बहोत इरोटिक फील कर रही थी. पर कविता की इस बचकानी बात से रूपा की स्माइल भी फीकी पड़ गई. वो समझ गई की कविता डर भी रही है. और सिर्फ वीरू को उस से प्यार हो जाए. इसी लिए वो दर्द झेलने को तैयार है. पर रूपा के पास कोई जवाब नही था.


रूपा : पता नही.....


रूपा कुछ पल के लिए रुक गई. वो बोले भी तो क्या. उसे समझ ही नही आ रहा था.


रूपा : बस उसे तुम्हारी आदत लग जाए. तुम कोसिस तो करो. पहेली बार थोड़ा दर्द होगा. फिर तुम्हे भी मझा आएगा.


कविता ने बस स्माइल की. रूपा उसका जवाब समझ गई. कविता तैयार है. पर अपने मज़े के लिए नही. सिर्फ वीरू को रिझाने के लिए. रूपा भी सब भूल कर आगे बढ़ी.


रूपा : अरे अरे... रुको मेरी रानी. ऐसे नंगीही जाओगी क्या??


कविता : (सॉक) पर क्या???


रूपा : (स्माइल शारारत) अरे तुम तो खजाना हो. उसे देखने के लिए थोड़ा तरसने तो दो.



रूपा दए बाए देखने लगी. उसने बेड की बदशीट ही खींच ली. और कविता को पूरी तरह से ढक दिया. अब कविता सिरद गर्दन के ऊपर तक ही दिखाई दे रही थी. रूपा कविता को लेकर वीरू जिस रूम मे था. उस रूम की तरफ चल दी.
 
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komaalrani

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रूपा के जाने के बाद कविता फिर सोच मे डूब गई. वो यह सोचने लगी की जब रूपा की ऊँगली घुसने से उसे इतना दर्द हुआ. वीरू का तो बहोत मोटा और लम्बा है. वो घुसेगा तो मै जिन्दा ही नही बचूंगी. वो यह सोच ही रही थी की तभि उसने डोर की तरफ देखा.

उसने देखा की रूपा डिनर की ट्रे लेकर वहां से गुजरी है. वो समझ गई की वीरू को खाना पहोंचाया जा रहा है. उसके बाद वही सब होगा. कविता के बदन मे डर से खुजली सी होने लगी. बदन मे जैसे चीटिया काट रही हो. कविता ज्यादा ही घबराने लगी.

उसे समझ नही आ रहा था की वो क्या करें. उसने बेड पर तेज़ी से दए बाए देखा. उसे अपना मोबइल दिखाई दिया. कविता अपने मोबाइल पर झपट कर अपने हाथो मे लेती है. और गूगल पर सर्च करना शुरू किया. अनाल सेक्स. बहोत सारी साइट खुल गई.

कविता ने एक साइट ओपन की तो कई सारी वीडियो उसकी स्क्रीन पर आ गई. वीडियो के पोस्टर से ही कविता को ज्यादा डर लगने लगा. लोगो जितने ही सीन बहोत सेक्सुअल थे. कविता जैसे डरी हुई हो. एक वीडियो ओपन करती है. जो शार्ट थी.

और सीधा सेक्स ही चालू था. लड़की बड़ी थी. और कुतिया जैसे नंगी झूकी हुई थी. वही लड़का उस लड़की से छोटा और वो भी नंगा था. पर इसका लिंग बहोत बडा था. वीरू की तरह. लड़का उस लड़की के पीछे दोनों हिप्स के बिच बार बार अंदर डालता और पूरा निकलता. लड़की आंखे बंद किए सिसकती. करहती.

बहोत कामुख आवाज निकलती. कविता को यह समझ नही आया की लड़की को तकलीफ हो रही है. या मझा आ रहा है. कविता ने घबराकर फोन दूर फेक दिया. जैसे कोई होरोर सीन देख लिया हो. कविता का डर के मारे मुँह सुख गया. क्यों की उसे अपने कोमर्य ( virginity) भंग होने का पहला दर्द याद आ गया.

जिसमे वो बेहोश हो गई थी. वो वीरू के साइज को जानती थी. तभि उसे फिर एक बार डोर पर रूपा आती हुई दिखाई दी. उसके हाथ मे वीरू को खिलाए डिनर की झूठी प्लेटस दिखाई दी. कविता समझ गई की वीरू ने डिनर खा लिया. अब वही प्रोग्राम शुरू होगा. जिसके लिए कविता डर रही थी.


रूपा : (स्माइल ) तैयार हो जा मेरी रानी. मै अभी प्लेटस रख कर आती हु. फिर तुम्हे ले चलती हु.


रूपा को क्या पता था की कविता का डर से बुरा हाल हो रहा है. वो तो वहां से किचन मे चली गई. पर कविता को इतना ज्यादा डर लगने लगा की उसे टोईलेट आने लगी. वो नंगी ही तुरंत खड़ी हुई. और बाथरूम मे घुस गई.
जबरदस्त तो बात गुदा मैथुन तक पहुँच गई।

यही तो अल्टीमेट है और जिस तरह से आपने मन में भय दिखाया और मन में डर और वासना का द्वन्द, फिर रूपा ने जिस तरह से कविता के मन में आग लगायी, तन को उसका स्वाद चखाया,

यह सब आप और सिर्फ आप ही कर सकती थी और लगता है अब कविता और वीरू के देह संबंध एक नई ऊंचाई पर पहुंचेंगे।


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Episode 10.5


वीरू को डिनर करवाने के बाद रूपा ने कविता को कहे दिया की तैयार हो जाए. और वो खाली प्लेटस और बाकि कामों के लिए किचन चली गई. वही कविता तो पहले से डरी हुई थी. जब रूपा ने उसे तैयार होने को कहा तो कविता के मुँह का पानी तक डर से सुख गया.

कविता अपने डर का सामना ही कर रही थी की रूपा एक बार फिर डोर पर आकर खड़ी हो गई. इस बार उसके हाथ मे तेल की कटोरी थी. पर मज़े की बात यह की वो साड़ी मे नही थी. सिर्फ अपने ब्लाउज और घाघरे मे. चहेरे पर शारारत भरी मुस्कान. और एक नशीलापन.


रूपा : (स्माइल, शारारत, नशीलापन) चले मेरी रानी.


कद कठि से रूपा की बॉडी कविता से काफ़ी बड़ी थी. बूब्स 38 तो वही कविता परफेक्ट 34 और दोनों की हाईट भी थी. पर कविता ज्यादा ही लम्बी थी. बस रूपा के पेट पर थोड़ी चर्बी थी. सेक्स की चाह मे लीन रूपा कविता को बीबीजी के बजाए रानी बोलने लगी. जैसे वो उसकी बड़ी बहन या भाभी हो.


रूपा : क्या हुआ डर लग रहा है???


कविता ने डरे सहमे चहेरे से हा मे सर हिलाती है. रूपा कविता के करीब आई. और उसके पास बैठ गई. उसके चहेरे को अपनी तरफ किया.


रूपा : (स्माइल) देख मेरी रानी. कुछ पाना है. तो थोड़ा दर्द तो साहना पड़ेगा. और तू बता की तुझे दर्द के बाद मझा आया या नही.


कविता ने बस थोड़ी सी स्माइल की और हा मे सर हिलाया. लेकिन वो अभी भी डर रही थी.


रूपा : अगर उसे तेरी आदत लग गई. तो तुजसे चाह कर भी अलग नही हो पाएगा. बस उसे तेरी आदत लग जाए.


कविता ने हा मे सर हिलाया. कविता के मन मे भी सवाल थे. जो वो पूछे बिना नही रहे पाई.


कविता : (घबराहट) क्या फिर वो मुझसे प्यार करेगा.


रूपा बहोत इरोटिक फील कर रही थी. पर कविता की इस बचकानी बात से रूपा की स्माइल भी फीकी पड़ गई. वो समझ गई की कविता डर भी रही है. और सिर्फ वीरू को उस से प्यार हो जाए. इसी लिए वो दर्द झेलने को तैयार है. पर रूपा के पास कोई जवाब नही था.


रूपा : पता नही.....


रूपा कुछ पल के लिए रुक गई. वो बोले भी तो क्या. उसे समझ ही नही आ रहा था.


रूपा : बस उसे तुम्हारी आदत लग जाए. तुम कोसिस तो करो. पहेली बार थोड़ा दर्द होगा. फिर तुम्हे भी मझा आएगा.


कविता ने बस स्माइल की. रूपा उसका जवाब समझ गई. कविता तैयार है. पर अपने मज़े के लिए नही. सिर्फ वीरू को रिझाने के लिए. रूपा भी सब भूल कर आगे बढ़ी.


रूपा : अरे अरे... रुको मेरी रानी. ऐसे नंगीही जाओगी क्या??


कविता : (सॉक) पर क्या???


रूपा : (स्माइल शारारत) अरे तुम तो खजाना हो. उसे देखने के लिए थोड़ा तरसने तो दो.



रूपा दए बाए देखने लगी. उसने बेड की बदशीट ही खींच ली. और कविता को पूरी तरह से ढक दिया. अब कविता सिरद गर्दन के ऊपर तक ही दिखाई दे रही थी. रूपा कविता को लेकर वीरू जिस रूम मे था. उस रूम की तरफ चल दी.
एक एक लाइने कमाल की हैं

"अरे, तुम तो खजाना हो। उसे देखने के लिए थोड़ा तरसने तो दो।"

और फिर कविता के प्यार और वीरू की नफरत के झूले के बीच, पेंग लगाती रूपा

और वीरू जो हमेशा औरतों को अपने मजे और पैसे के लिए इस्तेमाल करता था, उसे कोई औरत खुद खिलौना बना ले, उसकी जगह उसके लिंग को ही उसका पूरा अस्तित्व मान ले, जो काम वह औरतों के साथ करता था

गजब की कहानी और गजब के सीन
 
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komaalrani

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वीरू को डिनर करवाने के बाद रूपा ने कविता को कहे दिया की तैयार हो जाए. और वो खाली प्लेटस और बाकि कामों के लिए किचन चली गई. वही कविता तो पहले से डरी हुई थी. जब रूपा ने उसे तैयार होने को कहा तो कविता के मुँह का पानी तक डर से सुख गया.

कविता अपने डर का सामना ही कर रही थी की रूपा एक बार फिर डोर पर आकर खड़ी हो गई. इस बार उसके हाथ मे तेल की कटोरी थी. पर मज़े की बात यह की वो साड़ी मे नही थी. सिर्फ अपने ब्लाउज और घाघरे मे. चहेरे पर शारारत भरी मुस्कान. और एक नशीलापन.


रूपा : (स्माइल, शारारत, नशीलापन) चले मेरी रानी.


कद कठि से रूपा की बॉडी कविता से काफ़ी बड़ी थी. बूब्स 38 तो वही कविता परफेक्ट 34 और दोनों की हाईट भी थी. पर कविता ज्यादा ही लम्बी थी. बस रूपा के पेट पर थोड़ी चर्बी थी. सेक्स की चाह मे लीन रूपा कविता को बीबीजी के बजाए रानी बोलने लगी. जैसे वो उसकी बड़ी बहन या भाभी हो.


रूपा : क्या हुआ डर लग रहा है???


कविता ने डरे सहमे चहेरे से हा मे सर हिलाती है. रूपा कविता के करीब आई. और उसके पास बैठ गई. उसके चहेरे को अपनी तरफ किया.


रूपा : (स्माइल) देख मेरी रानी. कुछ पाना है. तो थोड़ा दर्द तो साहना पड़ेगा. और तू बता की तुझे दर्द के बाद मझा आया या नही.


कविता ने बस थोड़ी सी स्माइल की और हा मे सर हिलाया. लेकिन वो अभी भी डर रही थी.


रूपा : अगर उसे तेरी आदत लग गई. तो तुजसे चाह कर भी अलग नही हो पाएगा. बस उसे तेरी आदत लग जाए.


कविता ने हा मे सर हिलाया. कविता के मन मे भी सवाल थे. जो वो पूछे बिना नही रहे पाई.


कविता : (घबराहट) क्या फिर वो मुझसे प्यार करेगा.


रूपा बहोत इरोटिक फील कर रही थी. पर कविता की इस बचकानी बात से रूपा की स्माइल भी फीकी पड़ गई. वो समझ गई की कविता डर भी रही है. और सिर्फ वीरू को उस से प्यार हो जाए. इसी लिए वो दर्द झेलने को तैयार है. पर रूपा के पास कोई जवाब नही था.


रूपा : पता नही.....


रूपा कुछ पल के लिए रुक गई. वो बोले भी तो क्या. उसे समझ ही नही आ रहा था.


रूपा : बस उसे तुम्हारी आदत लग जाए. तुम कोसिस तो करो. पहेली बार थोड़ा दर्द होगा. फिर तुम्हे भी मझा आएगा.


कविता ने बस स्माइल की. रूपा उसका जवाब समझ गई. कविता तैयार है. पर अपने मज़े के लिए नही. सिर्फ वीरू को रिझाने के लिए. रूपा भी सब भूल कर आगे बढ़ी.


रूपा : अरे अरे... रुको मेरी रानी. ऐसे नंगीही जाओगी क्या??


कविता : (सॉक) पर क्या???


रूपा : (स्माइल शारारत) अरे तुम तो खजाना हो. उसे देखने के लिए थोड़ा तरसने तो दो.



रूपा दए बाए देखने लगी. उसने बेड की बदशीट ही खींच ली. और कविता को पूरी तरह से ढक दिया. अब कविता सिरद गर्दन के ऊपर तक ही दिखाई दे रही थी. रूपा कविता को लेकर वीरू जिस रूम मे था. उस रूम की तरफ चल दी.
आप का सपोर्ट मेरे लिए बहोत अनमोल है कोमलजी. आप की स्टोरी का जिक्र करना सिर्फ मेरी मर्जी और चाह ही नहीं वक्त की जरुरत और हालत भी है. वाह सारे किस्से जिसे पढ़कर मेरे अंदर अलग अलग फैंटासी की रचना हुई. इसका श्रेय सिर्फ आप को ही जाता है. और सायद मेरी कहानियो मे आगे भी होता रहेगा. थैंक्यू सो मच कोमलजी. ऐसे ही सपोर्ट करते रहिएगा.
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बीवी ने पी शराब. माहौल हुआ ख़राब ( Biwi ne pi Sharab. Mahaul hua kharab)

हिंदी & Roman दोनों भाषाओ मे.

रोमांटिक और कॉमेडी स्टोरी.
Incest or erotica?
 
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Chalakmanus

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रूपा के जाने के बाद कविता फिर सोच मे डूब गई. वो यह सोचने लगी की जब रूपा की ऊँगली घुसने से उसे इतना दर्द हुआ. वीरू का तो बहोत मोटा और लम्बा है. वो घुसेगा तो मै जिन्दा ही नही बचूंगी. वो यह सोच ही रही थी की तभि उसने डोर की तरफ देखा.

उसने देखा की रूपा डिनर की ट्रे लेकर वहां से गुजरी है. वो समझ गई की वीरू को खाना पहोंचाया जा रहा है. उसके बाद वही सब होगा. कविता के बदन मे डर से खुजली सी होने लगी. बदन मे जैसे चीटिया काट रही हो. कविता ज्यादा ही घबराने लगी.

उसे समझ नही आ रहा था की वो क्या करें. उसने बेड पर तेज़ी से दए बाए देखा. उसे अपना मोबइल दिखाई दिया. कविता अपने मोबाइल पर झपट कर अपने हाथो मे लेती है. और गूगल पर सर्च करना शुरू किया. अनाल सेक्स. बहोत सारी साइट खुल गई.

कविता ने एक साइट ओपन की तो कई सारी वीडियो उसकी स्क्रीन पर आ गई. वीडियो के पोस्टर से ही कविता को ज्यादा डर लगने लगा. लोगो जितने ही सीन बहोत सेक्सुअल थे. कविता जैसे डरी हुई हो. एक वीडियो ओपन करती है. जो शार्ट थी.

और सीधा सेक्स ही चालू था. लड़की बड़ी थी. और कुतिया जैसे नंगी झूकी हुई थी. वही लड़का उस लड़की से छोटा और वो भी नंगा था. पर इसका लिंग बहोत बडा था. वीरू की तरह. लड़का उस लड़की के पीछे दोनों हिप्स के बिच बार बार अंदर डालता और पूरा निकलता. लड़की आंखे बंद किए सिसकती. करहती.

बहोत कामुख आवाज निकलती. कविता को यह समझ नही आया की लड़की को तकलीफ हो रही है. या मझा आ रहा है. कविता ने घबराकर फोन दूर फेक दिया. जैसे कोई होरोर सीन देख लिया हो. कविता का डर के मारे मुँह सुख गया. क्यों की उसे अपने कोमर्य ( virginity) भंग होने का पहला दर्द याद आ गया.

जिसमे वो बेहोश हो गई थी. वो वीरू के साइज को जानती थी. तभि उसे फिर एक बार डोर पर रूपा आती हुई दिखाई दी. उसके हाथ मे वीरू को खिलाए डिनर की झूठी प्लेटस दिखाई दी. कविता समझ गई की वीरू ने डिनर खा लिया. अब वही प्रोग्राम शुरू होगा. जिसके लिए कविता डर रही थी.


रूपा : (स्माइल ) तैयार हो जा मेरी रानी. मै अभी प्लेटस रख कर आती हु. फिर तुम्हे ले चलती हु.


रूपा को क्या पता था की कविता का डर से बुरा हाल हो रहा है. वो तो वहां से किचन मे चली गई. पर कविता को इतना ज्यादा डर लगने लगा की उसे टोईलेट आने लगी. वो नंगी ही तुरंत खड़ी हुई. और बाथरूम मे घुस गई.
Dar to lazmi hai.har wo kaam jo pehli baar ho raha ho tab bhi.
 
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एक एक लाइने कमाल की हैं

"अरे, तुम तो खजाना हो। उसे देखने के लिए थोड़ा तरसने तो दो।"

और फिर कविता के प्यार और वीरू की नफरत के झूले के बीच, पेंग लगाती रूपा

और वीरू जो हमेशा औरतों को अपने मजे और पैसे के लिए इस्तेमाल करता था, उसे कोई औरत खुद खिलौना बना ले, उसकी जगह उसके लिंग को ही उसका पूरा अस्तित्व मान ले, जो काम वह औरतों के साथ करता था

गजब की कहानी और गजब के सीन
Thankyou so much komalji. Aap story ki barik si chijo ko bhi bahot khubshurati se nikhar kar jatati ho. Bahot bahot dhanyvad Komalji. Lot of thanks.
 
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