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Erotica साइको कविता (psycho Kavita)

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Shetan

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A. Hoga ghama saan.par kya rupa ko bhi waha hona chahiye?kya kavita bhi sath degi?kya viru jaan paiga ki ye RJ kavita hi hai?

Intejaar rahega 🙏🙏🙏🙏
लगातार बने रहने और शरुआत से साथ देने के लिए बहोत बहोत शुक्रिया. कुछ ही दिनों मे एक थ्रिलर रोमांटिक स्टोरी परिंदा भी स्टार्ट करने वाली हु.
 

Chalakmanus

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लगातार बने रहने और शरुआत से साथ देने के लिए बहोत बहोत शुक्रिया. कुछ ही दिनों मे एक थ्रिलर रोमांटिक स्टोरी परिंदा भी स्टार्ट करने वाली हु.
Saitan g aisha keh kar sarminda na kare.
Hum log iss forum pe kahaniya padhne hi to aaye hai.haan jis main update time to time aate rehti hai us main reader aa hi jaate hai.or aap sayad Saturday ko update deti hai.

Aapki do kahaniya padhi hai.
1.chudeal ki prem kahani. Bohot achhi thi.
2.ek koi horror hai.
Haan chudail wala ka part 2 bhi silently read Kiya tha par aadha.

Or ye kahani to apne aap main khas hai.
Aap aaram se likhiye.time lijiye.
Or ek baat kehna chahunga har update pehle se behtar ja raha hai.

Aapka niyamit pathak 🙏🙏🙏
 
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Chalakmanus

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लगातार बने रहने और शरुआत से साथ देने के लिए बहोत बहोत शुक्रिया. कुछ ही दिनों मे एक थ्रिलर रोमांटिक स्टोरी परिंदा भी स्टार्ट करने वाली हु.
Or agli story ke liye agrim badhai.💐
 
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Shetan

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Saitan g aisha keh kar sarminda na kare.
Hum log iss forum pe kahaniya padhne hi to aaye hai.haan jis main update time to time aate rehti hai us main reader aa hi jaate hai.or aap sayad Saturday ko update deti hai.

Aapki do kahaniya padhi hai.
1.chudeal ki prem kahani. Bohot achhi thi.
2.ek koi horror hai.
Haan chudail wala ka part 2 bhi silently read Kiya tha par aadha.

Or ye kahani to apne aap main khas hai.
Aap aaram se likhiye.time lijiye.
Or ek baat kehna chahunga har update pehle se behtar ja raha hai.

Aapka niyamit pathak 🙏🙏🙏
तक़रीबन कई बड़े राइटर ऐसे है. जो नॉन इरोटिक या कोई अमेज़िंग टॉपिक पर कुछ नया लिखते है तो उनका फ्रेंडस ग्रुप ही इतना बडा होता है की हार किसी की एक एक कमेंट से ही स्टोरी हिट हो जाती है. भले स्टोरी ख़राब हो या अच्छी. मेरे पास दोस्तों की कमी है. और जो है. वो भी कम ही आते है.
ऐसे मे मेरी स्टोरी को रियल रीडर्स ने ही बचाकर रखा है. जैसे की आप हो गए. और भी दो तीन दोस्त है. और एक टाइम मुझे भी अपनी स्टोरी हिट जानेपर घमंड महसूस हुआ था कभी.
तभी से सिख ले ली की रीडर्स बिना राइटर कुछ नहीं होता. और मै अपने हार रीडर्स की फुल रिस्पेक्ट करती हु.
Or agli story ke liye agrim badhai.💐
बहोत जल्द स्टार्ट करुँगी. छुट्टी वाला दिन देख रही हु.
 
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RAAZ

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तक़रीबन कई बड़े राइटर ऐसे है. जो नॉन इरोटिक या कोई अमेज़िंग टॉपिक पर कुछ नया लिखते है तो उनका फ्रेंडस ग्रुप ही इतना बडा होता है की हार किसी की एक एक कमेंट से ही स्टोरी हिट हो जाती है. भले स्टोरी ख़राब हो या अच्छी. मेरे पास दोस्तों की कमी है. और जो है. वो भी कम ही आते है.
ऐसे मे मेरी स्टोरी को रियल रीडर्स ने ही बचाकर रखा है. जैसे की आप हो गए. और भी दो तीन दोस्त है. और एक टाइम मुझे भी अपनी स्टोरी हिट जानेपर घमंड महसूस हुआ था कभी.
तभी से सिख ले ली की रीडर्स बिना राइटर कुछ नहीं होता. और मै अपने हार रीडर्स की फुल रिस्पेक्ट करती हु.

बहोत जल्द स्टार्ट करुँगी. छुट्टी वाला दिन देख रही हु.
Bohat sahi kaha hai aapne. Readers n writers ka ek rishta set ho jata hai aur is me dono ek doosre ke poorak hotey hai. Warna bohat se writers ko kuch kaho to palat kar jawab aata hai ki ek story likh ke dikhao to jano.
Arey bhai nahi likh saktey tabhi to forum per aatey hai aur jab kisi story ke sath jud jaye to writer beech me chod ker bhaag khada ho to bura lagega na. App story ke sath jud jao aur khatam se pehlay writer bhaag khada ho to log to ghalat bolenge hi na. Isi liye sab writers ko salah deta hoon ki aap story thoda chota likhi taki jaldi hi khatam ho jaye. Agar uske baad time ho to uska sequel de do.
Lekin yah aapki saralta hai ki aap ne apne readers ka bhi samman kia hai. Anyhow aisay hi aapke sath hai is safar me aapke hum safar ban kar. Jaldi milege next update per.
 

Shetan

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Bohat sahi kaha hai aapne. Readers n writers ka ek rishta set ho jata hai aur is me dono ek doosre ke poorak hotey hai. Warna bohat se writers ko kuch kaho to palat kar jawab aata hai ki ek story likh ke dikhao to jano.
Arey bhai nahi likh saktey tabhi to forum per aatey hai aur jab kisi story ke sath jud jaye to writer beech me chod ker bhaag khada ho to bura lagega na. App story ke sath jud jao aur khatam se pehlay writer bhaag khada ho to log to ghalat bolenge hi na. Isi liye sab writers ko salah deta hoon ki aap story thoda chota likhi taki jaldi hi khatam ho jaye. Agar uske baad time ho to uska sequel de do.
Lekin yah aapki saralta hai ki aap ne apne readers ka bhi samman kia hai. Anyhow aisay hi aapke sath hai is safar me aapke hum safar ban kar. Jaldi milege next update per.
बिलकुल... हमे खुद ही पहले मेच्योरिटीअपना ने की जरुरत है. आशा है की आगे और मंचों पर भी हम दोस्त साथ आगे बढ़ेंगे.
 

Shetan

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Coming Soon

बीवी ने पी शराब. माहौल हुआ ख़राब ( Biwi ne pi Sharab. Mahaul hua kharab)

हिंदी & Roman दोनों भाषाओ मे.

रोमांटिक और कॉमेडी स्टोरी.
 
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komaalrani

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एकदम अलग ढंग की कहानी और अलग ढंग के देह संबंध

बहुत ही अलग सोच से यह कहानी लिखी गयी है, अद्भुत और अलग

A

Episode 10


रात के 1 बज रहे थे. और बुधवार का दिन शुरू हो चूका था. वीरू के सीने पर सर रखे कविता तो चैन की नींद सो रखी थी. पर नींद तो हराम वीरू की हो चुकी थी. कैसे वो कविता के बाहेकावे मे आ गया. वीरू अपना गुस्सा कविता पर उतरना चाहता था.

कुछ पल पहले वो इंतजार कर रहा था की कब कविता उसकी बाहो मे आए. पर सेक्स के बाद वही कविता बोझ लगने लगी थी. वीरू का लिंग अब भी कविता के ही योनि मे था. भले ही वो तनाव महसूस ना कर रहा हो. पर लिंग योनि मे होने के कारण तना हुआ था.

वीरू को कविता पर ज्यादा गुस्सा तो इसी लिए भी आ रहा था क्यों की वो बहोत चैन से सो रही थी. और उसके ऊपर होने के कारण उसे नींद नही आ रही थी. वो सोच ने लगा की इस साली को तो प्यार से नही कस के चोदना चाहिये. वो थोड़ा हिला भी.

ताकि कविता को अपने ऊपर से हटा सके. पर कविता हिलने के बाद भी गिरी नही. वो वीरू को जकड़े हुए थी. उसे कोई फरक नही पड़ा. वीरू के हाथ बंधे हुए थे. वो उसे पकड़ नही सकता था. तभि उसने कमर हिलाई. और दोबारा लिंग योनि के अंदर आगे पीछे होने लगा. वीरू पर हवस हावी होने लगी.

कुछ घंटे पहले जिसे वीरू प्यार कर रहा था. उसे अब वो रगड़ कर बेराहेमी से भोगना चाह रहा था. वीरू अपनी कमर ऊपर उठाने लगा. वीरू के अंदर बदले जैसी भावना थी. वो कविता से उस वक्त नफरत कर रहा था. इसी लिए उसने तुरंत ही जोर के झटके मरना शुरू कर दिया. तभि हिलने के कारण कविता की नींद खुली.

वो अपना सर ऊपर उठकार वीर की तरफ देखती है. उसकी आंखे नींद मे होने के कारण आधी ही खुली. पर हैरानी की बात यह की वो गुस्से की बजाय स्माइल करती है. वो तो बेचारी इस लिए खुश हुई की वीर ने शारुआत की. पर उसका स्माइल करना वीरू को बुरा लगा.

उसे खुद पर और ज्यादा गुस्सा आने लगा. वो कविता को जैसे सबख सीखना चाहता हो. वो और जोर से झटका मरता है. लिंग कविता की योनि मे अंदर तक ठोंकर मरता है. कविता जैसे सॉक हो गई हो. वो वीरू को हैरानी से देखती है. उसका मुँह ओ टाइप मे खुल गया.

लेकिन वो फिर भी खुश थी. वो अपनी प्यारी आवाज मे जरासा हसीं. और दोबारा वीरू के सीने पर अपना सर रखती है. और वीरू को जोरो से जकड़ लेती है. वीरू के लिए उसने अपनी हिप्स खुद ही ऊपर कर दी. यह देख कर वीरू को गुस्सा आने लगा.

वीरू को यह चैलेंज जैसा लगने लगा. वो निचे से ही अपनी कमर उठाकर जोरो से झटके मारने लगा. रूम मे फट फट की आवाज गूंजने लगी. पर कविता जैसे किसी तूफान मे किसी पेड़ को जकड़ी हुई हो. ऐसे वीरू को जकडी हुई रही. वो तूफान भी ख़तम हुआ.

और वीरू ने चरम सुख पा लिया. वो एक बार फिर कविता के अंदर झड गया. वो कुछ पल ऐसे ही आंखे बंद करके पड़ा रहा. और कविता भी उसके सीने पर सर टिकाए लेटी रही. उसका लिंग अब भी कविता की योनि मे था. और हाथ वैसे ही पीछे की तरफ बंधे हुए.

पर तभि एकदम से कविता उठने लगी. उठते वक्त कविता के घने बाल लटक कर वीरू के सीने और गले को गुद गुदते है. वीरू ने तुरंत कविता को देखा. उसका ध्यान कविता के गोरे सोडोल पर लटकते बूब्स पर गया. कविता सीधी खड़ी हुई और उसने खड़े होते निचे अपनी योनि की तरफ देखा. देखते वक्त अपनी दोनों टांगे भी खोल दी.

कविता थोड़ी सॉक और स्माइल करती हुई वीरू को देखती है. उसकी योनि से वीरू का वीर्य एकदम से बहार आने लगा था. योनि और दोनों झागें भीग कर चमक रही थी. कविता वीरू की तरफ देख कर स्माइल ही इसी लिए कर रही थी की उसे बता सके. की देखो क्या हुआ.

इन सब मे वो बहोत खुश भी थी. पर वीरू को कविता की मसूनियत देख कर थोड़ा गिल्ट भी फील हो रहा था. कविता रूम से चली गई. वो बाथरूम गई थी. वही वीरू खुद सोच मे डूबा हुआ था की वो कविता से नफरत क्यों नही कर पा रहा है. तभि कविता फिर अंदर आई.

कविता के हाथ मे गिला कपड़ा था. यह वही नाईटी थी. जो उसने पहनी हुई थी. मतलब कविता जब अंदर आई तब वो पूरी तरह से नंगी थी. उसने अपना दिमाग़ की कोई कपड़ा ढूढ़ने मे नही लगाया. दए बाए देखा. कुछ नही मिला तो अपनी ही नाईटी उतार कर भिगो दी.

कविता ने गीले कपडे से वीरू का लिंग और झागें पोछी. उसके बाद कपडे को फर्श पर फेक कर वैसे ही वीरू के ऊपर लाद गई. वीरू अपने सीने से थोड़ा निचे कविता के बूब्स महसूस कर रहा था. कविता तो फिर चैन की नींद सो गई. पर वीरू को नींद नही आ रही थी. पर नींद ना आने की भावना जरूर बदल गई.

कुछ देर पहले वो कविता को बेरहमी से रगड़ कर तड़पना चाह रहा था. पर अब उसे उसपर प्यार आने लगा था. वो चाहता था की वो भी कविता को बाहो मे कसे. उसकी पिठ पर हाथ घुमाए. उसे सहेलाए. पर वीरू के हाथ बंधे हुए थे. धीरे धीरे रात गहेरी हो गई.

वीरू को भी नींद आ गई. दोनों ही पुरे नंगे सो रहे थे. और ac ऑन था. वीरू को तो ठंड नही लगी. क्यों की उसके ऊपर कविता थी. लेकिन पिठ की तरफ से कविता को ठंड लगने लगी. कविता फिर भी उठ नही रही थी. वो गहेरी नींद मे जा चुकी थी. वो नींद मे ही वीरू को ठंड की वजह से और ज्यादा जकड़ रही थी.

तभि रात उसके रूम का डोर खुला. और रूपा अंदर आई. उसके हाथ मे एक ब्लेंकेट था. वो बेड के आगे खड़ी हो गई. उसने वीरू और कविता दोनों को नंगे एक दूसरे से चिपके हुए देखा.

उसके फेस पर स्माइल छा गई. उसे भी दोनों को एक साथ देख कर बहोत ख़ुशी हुई. इतनी ज्यादा ख़ुशी तो खुद वीरू या कविता को भोग कर भी नही हुई. सायद उसका दिल चाहने लगा था की दोनों एक हो जाए. वो बेड पर बैठ गई. और अपना हाथ आगे बढ़ती है.


उसने कविता की पिठ और फिर हिप्स तक हाथ घुमाया. कविता इतनी गहेरी नींद मे थी. की उसे पता ही नही चला की रूपा भी वही है. वो उन दोनों पर ब्लेंकेट डाल कर दोनों को ढक देती है. और चुप चाप रूम से बहार आकर अपने रूम मे चली गई.
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komaalrani

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Episode 10.1


वीरू को बहोत देर से नींद आई. जब सुबह कविता उठी तो 9 बज रहे थे. कविता उठी उस वक्त वीरू की नींद नही खुली. क्यों की वीरू को नींद आई. तब तक सुबह के 4 बज चुके थे. वो सोता ही रहा. उसे यह पता ही नही चला कब कविता उसके ऊपर से उठी.

कविता जब नींद से उठी तब वो वीरू के सोते हुए चहेरे को देखती है. गहेरी नींद मे सोए वीरू पर अब उसे ज्यादा ही प्यार आने लगा. कविता ने सोए वीरू के सर और फिर होठो पर और आखरी मे वीरू की थोड़ी पर किश किया. कविता बाथरूम मे जाकर फ्रेश होना नहाना सब कर लेती है. पर वीरू की नींद खुली 11बजे.

कविता बहोत खुश थी. वो वीरू को वैसे ही दो दिनों के जैसे ही बन्दुख के दम पर खोलती है. वीरू का नहाना धोना सब कुछ हुआ. कविता उसके साथ साथ चलती. उसे नाहेलाती, पोछती सब कुछ करती.

पर वो कुछ बोल नही रही थी. बस मंद मंद मुस्कुरा रही थी. कविता शर्मा भी रही थी. पर फिर भी खामोश थी. वीरू का मन गिल्टी था. वो चाह कर भी कविता से नफरत नही कर पा रहा था. उसकी कोसिस नाकाम हो रही थी. जब कविता उसे बेड पर लेकर आई.

और उसे दोबारा बांध दिया. कविता वीरू की कमर के पास बैठ गई. वो वीरू के लिंग को देखने लगी. जो मूरझाया हुआ था. क्यों की वीरू बिलकुल भी अच्छा फील नही कर रहा था. अब तक कविता चुप थी. पर वीरू के लिंग को देख कर उसे रात वाला किस्सा याद आया. और वो लिंग से वैसे ही रात के जैसे बाते करने की कोसिस करने लगी.


कविता : (स्माइल) हेई दोस्त. तुम्हे क्या हुआ. तुम क्यों ऐसे मुँह लटकाए हुए हो.


कविता के ऐसा बोलने पर वीरू को गुस्सा आने लगा. वीरू के हाथ बंधे हुए थे. पर फिर भी वो मूड सकता था. वो कमर पर जोर लगाकर पलट गया. कविता को थोड़ा अजीब लगा. वो वीरू की कमर पकड़ कर वीरू को वापिस पलट कर सीधा करती है.


कविता : अरे तुम क्या कर रहे हो. मुझे बात करने दो अपने दोस्त से.


वीरु पलट गया. पर उसने गुस्से मे बस अपनी आंखे बंद कर ली. जैसे वो अपने आप को रोक रहा हो.


कविता : (स्माइल) ओह्ह्ह अच्छा. तो तुम्हे किश चाहिये.


इस बार वीरू अपने आप को रोक नही पाया. और वो भड़क गया.


वीरू : (गुस्सा) उसे कुछ नही चाहिये. बस तुमसे छुटकारा चाहिये. क्या कुछ पल के लिए अकेला छोड़ सकती हो.


वीरू ने यह बात गुस्से मे दाँत पीसते हुए कही. कविता वीरू के रवइये पर सॉक हो गई. क्यों की रात वीरू ने बड़े रोमांटिक तरीके से उसके साथ सेक्स किया था.


कविता : (प्यार से, बच्चों जैसे) क्या हुआ तुम्हे. क्यों ऐसे बात कर रहे हो. वो मेरा दोस्त हेना.... मुझे उस से बात करने दो ना.


वीरू फिर भड़क गया. जैसे उसने सोच रखा हो. वो कविता से नफरत ही करेगा. चाहे उसका मन ना करें.


वीरू : वो तुमसे बात नही करेगा. क्यों की वो बात नही करता. क्यों की मै बात करता हु. समझी.


कविता जैसे बच्चों से कोई चीज छीन ने की धमकी देते बच्चा रोने लगता है. वैसे रोने लगी.


कविता : (बच्चों जैसे रोना) नही....


वीरू : और वो तुम्हारा दोस्त है. ना मै. क्या तुम्हे समझ आ रहा है.


कविता : (बच्चों जैसे रोना) नही.... वो मेरा दोस्त है. बोलो ना. दोस्त हेना मेरा.


वीरू कविता के बच्चों जैसे रवैये पर और ज्यादा भड़क गया. अपनी दोनों टांगे खोल कर कमर ऊपर उठा देता है.


वीरू : लो लो. लेलो अपने दोस्त को.


कविता बच्चों के जैसे अपना निचला होंठ लम्बा किए हुए थी. वो बच्चों के जैसे गुस्से वाला मुँह बनती है. और गुस्से मे उस रूम से नीकल गई. कविता बहोत स्पीड से गई. वीरू ने अपने बंद की जैसे चैन की सांसे ले रहा हो. वो मन मे सोचने लगा की अच्छा हुआ साली गई. पर तभि उसे रूपा की आवाज आने लगी.


रूपा : बीबीजी नही..... क्या कर रही हो... बीबीजी...


वीरू को डर लगने लगा. वो समझ गया की कविता कुछ गड़बड़ करेंगी. तभि कविता रूम मे आई. उसके हाथ मे बडासा चाकू था. चाकू को देख कर वीरू की गांड फट गई.


वीरू : ककक क्या कर रही हो.


कविता वीरू के पास आ गई. और जैसे चाकू से लिंग काटने वाली हो.


कविता : (गुस्से मे) मेने बोला ना. वो मेरा दोस्त है. अब मै उसे अपने साथ ले जा रही हु.


तभि वीरू ने तुरंत सारेनडर कर दिया.


वीरू : (सॉक, हड बडाट) अरे वो तुम्हारा दोस्त है. और मै भी. प्लीज.


कविता रुक गई. और वीरू की तरफ देखने लगी.


वीरू : प्लीज वो मर जाएगा. वो तुम्हारा दोस्त हेना. (कुछ सेकंड बाद.) और मै भी तुम्हारा दोस्त हु. हा दोस्त.


लिंग काटने के डर से वीरू भी बोखला कर पागलो जैसे करने लगा. कविता दोस्त सुनकर बच्चों जैसे स्माइल करने लगी. वीरू को तो हसीं भी नही आ रही थी. वो फिर भी स्माइल करता है. और कविता बच्चों जैसे सवाल करती है.


कविता : फिर तुम गुस्सा क्यों कर रहे थे........????


वीरू : (स्माइल, पागलो जैसे) मज़ाक कर रहा था..... हे हे हे मज़ाक.....


कविता एकदम बच्चों जैसे खुश खिल खिलाकर हसने लगी. रूपा डोर से यह सब देख रही थी. पर ना वो हसीं ना कुछ बोली. वो गुस्से मे बस देख रही थी. और फिर वो पीछे मूड गई.


वीरू : जाओ जाओ जाओ. यह चाकू को रख कर आओ. जाओ.


कविता वीरू के नाटक और झूठ से ही खुश हो गई. जैसे बच्चे खुश होते हर बात मान जाते है. वैसे कविता भी मान गई. और चाकू रखने चली गई. तब जाकर वीरू को चैन आया. जब कविता चाकू रखने जाने लगी. तब डोर पर ही उसे रूपा मिली. वो कविता को देख कर स्माइल करती है. कविता भी उसे देख कर स्माइल करती है.

लेकिन रूपा को महसूस हुआ की कविता बस दिखावे वाली स्माइल कर रही है. जैसे वो अपने अंदर का दर्द छुपा रही हो. दोनों एक दूसरे को कुछ नही बोला. और कविता चली गई. रूपा वीरू के पास आई. उसने जब वीरू का चहेरा देखा तो रूपा जोरो से हस पड़ी.


वीरू : (सॉक) तुम हस रही हो. वो साली पागल है. साली इसे काट रही थी.


वीरू ने अपने लिंग की तरफ हिसारा किया.


रूपा : (स्माइल) अब मिली है तुम्हे टक्कर की.


रूपा बोलते हुए वीरू के कमर के पास बैठ गई. और अपना हाथ बढाकर वीरू के लिंग पर रख दिया. वो लिंग को आहिस्ता आहिस्ता सहलाने लगी.


रूपा : मै जानती हु. तुम्हारा धंधा इसी से ही तो चलता है. लेकिन बीबीजी भी तुमसे कम नही. नसीब वाले हो तुम.


वीरू कुछ नही बोला. बस लम्बी सांस लेता है. पर सेक्सुअल नही. रिलेक्स होने वाली.


रूपा : बीबीजी ने तुम्हारे आलावा कभी किसी मर्द को अपने करीब भी नही आने दिया. नसीब वाले हो तुम.


वीरू ने झटके से अपनी आंखे खोली.


वीरू : घंटा... साली बांध कर रखा है. साली जो मर्जी आए वो कर रही है.


रूपा : (स्माइल, शारारत) अच्छा... तो देखते है. वो पीछे से भी कोरी है. मै उसे तैयार करती हु. देखते है. तुम अपने आप को रोक पाते हो या नही.


रूपा ने बोलते हुए वीरू के लिंग को अपनी मुट्ठी मे जोरो से कसा. वीरू के मुँह से आह निकल गई.


वीरू : अह्ह्ह....


रूपा खड़ी हुई. और जाने लगी.


वीरू : अब साली को मै हाथ भी नही लगाने वाला. तुम देख लेना.


वीरू ने भी डिंगे मार दिया. रूपा वहां से चली गई. वो पहले किचन मे घुसी. उसे चाकू बहार ही पड़ा मिला. वो चाकू स्टैंड मे रखती है. और कविता के पास जाने लगी. कविता दूसरे रूम मे थी. पर डोर उसने अंदर से लॉक किया हुआ था. रूपा डोर नॉक करती है.


रूपा : बीबीजी..... बीबीजी...


कविता : (अंदर से) क्या है. मै थोड़ी देर अकेले रहना चाहती हु.


रूपा : बीबीजी नास्ता निकलू???


कविता : नही मुझे भूख नही है. तुम उसे(वीरू) खिला दो.


रूपा : ठीक है.


रूपा वहां से चली गई. वो वीरू को वैसे ही नास्ता खिला देती है. और दोनों मे कुछ बाते भी होती है. फिर वो बाकि काम करते लंच भी बनती है. दोपहर के दो बजे रूपा ने फिर डोर नॉक किया.


रूपा : बीबीजी..


कविता : क्या है???


रूपा : बीबीजी खाना खा लो.


कविता : मुझे भूख नही है. तुम उसे खिला दो. मुझे भूख लगेगी तब मै तुम्हे बुला लुंगी.


रूपा वहां से चली गई. वो वीरू को खिला देती है. और भी काम. जैसे वीरू को उसके बेड पर ही टोईलेट करवाना वगेरा. सब करते टाइम 03:20 हो गए. और रूपा खाने की थाली लेकर फिर कविता के रूम तक पहोच गई. रूपा ने फिर डोर नॉक किया.


रूपा : बीबीजी.... बीबीजी....


कविता : क्या है रूपा???


रूपा : दरवाजा खोलो बीबीजी.


कविता : पर मुझे अकेला रहने दो ना. मत तंग करो.


रूपा : अरे खोलो ना. बीबीजी.


कविता ने डोर खोला. और रूपा थाली लेकर सीधा अंदर चली आई. कविता की एक ना चली. रूपा सीधा बेड पर ही थाली लेकर बैठ गई.


कविता : अरे बाबा मेने कहा ना. मुझे नही खाना.


इस बार कुछ नया हुआ. रूपा एक माँ की तरह कविता को डांट देती है.


रूपा : मेने कहा ना. चलो यहाँ बैठो.


कविता को यह जबरदस्ती बहोत अच्छी लगी. वो थोड़ासा मुस्कुराई. और उसके सामने बेड पर बैठ गई. उसे रूपा खुद निवाला बनाकर खिलाने लगी. और कविता चुप चाप खा रही थी. खाते हुए दोनों मे बाते होती है.


रूपा : (स्माइल) वैसे अच्छा डराया उसे. मुझे तो लगाथा की तुम सच मे काटने वाली हो.


कविता : (खाते हुए) हा तो सच मे ही काट रही थी.


यह सुनकर रूपा की आंखे ही बड़ी हो गई. वो यह सुनकर सॉक हुई. और समझ गई की वीरू का डर जायझ था. कविता बहोत धीरे धीरे खाना चबा रही थी. जैसे कही खोई हुई हो.


रूपा : क्या सोच रही हो. वो मान जाएगा.


कविता : पता है तुम्हे (सोच कर) मुझे वो प्यार नही करता उसका अफ़सोस नही है.


रूपा : तो फिर???


कविता : वो मुझसे नफरत करता है. उस से फरक पड़ता है.


रूपा : वो प्यार नही करता तो नफरत भी नही करता. मै उसे जानती हु. वो बस कोसिस कर रहा है की तुम उस से नफरत करने लगो.


तब कविता को यह खयाल आया की रूपा तो उसे पहले से ही जानती है. कविता के फेस पर शरारत भरी स्माइल आ गई.


कविता : (शारारत, शर्म, स्माइल) अच्छा... तो तुम उसे पहले से जानती हो. तुम भी उसके साथ...


कविता बोलते हुए रुक गई. पर रूपा कविता क्या पूछना चाह रही है. वो समझ गई.


रूपा : (स्माइल) हा हा. ना उस से कोई औरत या लड़की नफरत करती है. और ना ही वो किसी से. वो तो सब मे प्यार बाटता है. और उसके वो पैसे भी लेता है.


कविता : (सॉक) वाओ... प्यार करने के वो पैसे लेता है. वो क्या प्रोस्टीट्यूट है क्या???


रूपा प्रोस्टीट्यूट का मतलब समझती थी.


रूपा : हा. और मै यह भी जानती हु की उसे क्या पसंद है.


यह सुकर कविता एक्साइटेड हो गई.


कविता : (स्माइल, एक्साइटेड) तो बताओ ना. मै भी वही चाहती हु. जो उसे पसंद आए.


रूपा : (शारारत, स्माइल) लेकिन पहेली बार दर्द होगा.


कविता : ससससस अरे.... तुम बस बताओ. मै सब कर लुंगी.


रूपा हसने लगी. और तुरंत खड़ी हो गई.


रूपा : (शारारत, स्माइल) फिर तुम तैयार हो जाओ. और बेड पर उलटी लेट जाओ. मै अभी तेल लेकर आती हु.


रूपा तुरंत चली गई. कविता बहोत खुश हो गई. वो ऐसा कुछ करना चाहती थी. जिस से वीरू खुश हो जाए. वो पहले से नंगी थी. ऐसा कुछ कविता सोच ही रही थी की तभि डोर खुला. और रूपा अंदर आई.

कविता और रूपा दोनों की नजरें मिली तो दोनों के फेस पर स्माइल आ गई. रूपा के फेस पर शारारत थी तो कविता के फेस पर शर्म. कविता तुरंत ही उठ कर बैठ गई. और रूपा उसके पास आ गई.


रूपा : अरे उठो मत. लेटी रहो.


रूपा ने कविता को पुश किया. और वापस उल्टा लेटा दिया. कविता बहोत एक्सीडेंट थी. वो पेट के बल लेटी हुई थी. और रूपा उसके पीछे थी. इसी लिए कविता रूपा को देख नही सकती थी. कविता को ज्यादा बेचैनी इसी लिए हो रही थी. क्यों की रूपा तेल की कटोरी से क्या करेंगी. यह कविता को नही मालूम थी.

तभि कविता को अपनी नंगी पिठ पर रूपा का हाथ महसूस हुआ. साथ थोड़ा ठंडा और गिला भी लगा. कविता समझ गई की वो तेल है. साथ दोनों बाते भी करते है.


रूपा : पीछे कभी शेक्स किया है??


कविता हस पड़ी. पर कविता समझ गई थी की रूपा अनाल सेक्स की बात कर रही है. क्यों की यूरोप मे यह बहोत बड़ी भी बात नही थी.


कविता : शेक्स नही सेक्स होता है. रूपा.... वैसे मेने पहले कभी नही किया. क्या उसे यह सब पसंद है??


कविता ने महसूस किया की रूपा का हाथ सरकतें हुए निचे की तरफ जा रहा है. और कमर से होते कविता की हिप्स तक भी पहोच गया. कविता को गुद गुदी भी हुई. और आंखे भी बंद हो गई. उसे नशा सा चढने लगा.


कविता : अह्ह्ह्ह......


रूपा : हा... उसे यह सब बहोत पसंद है.


रूपा कविता की हिप्स पर अपना हाथ घूमने लगी. और कविता मदहोश हुए जा रही थी. दोनों को ही मझा आ रहा था. रूपा तो कविता को छूना बहोत पसंद करती थी. उसे कविता की गोरी मखमली त्वचा छूने से ही उत्तेजना पैदा हो रही थी. उसकी हथेली का पंजा कविता की पूरी हिप्स पर घूम रहा था. और कविता सिसक रही थी.

नरम नरम गोल पर स्थिर हिप्स को छूते वो जेली की तरह हिलती. उसे करीब से देख कर रूपा भी मचल रही थी. रूपा के हाथ तेल वाले थे. जब हिप्स पर तेल लगता तो वो और ज्यादा चैनकने लगी. तभि रूपा ने अपनी उगोयों को कविता की दोनों हिप्स के बिच से निकला. जैसे दो तरबूच को अलग कर रही हो.


कविता : बोलो ना. ससससस अह्ह्ह्हह...


रूपा : (शारारत, मदहोशी) हा........ और मुझे भी मझा आता. पहेली बार तो बहोत दर्द हुआ था.


रूपा ने इसी बिच कविता के हिप्स के बिच उसके पिछवाडे के छेद को भी छुआ. कविता एकदम मचल गई. वो गुद गुदी बरदास नही कर पाई. और अपनी कमर हिलाने लगी. जैसे बचना चाहती हो.


कविता : (मदहोश) ससस क्या ससस क्या अब भी दर्द होता है???


तभि रूपा ने अपनी तेल वाली एक ऊँगली बड़े आहिस्ता से पच देकर थोड़ी सी घुसा दी. कविता की तो मानो दर्द से जान ही निकल गई. और तभि रूपा रुक गई.


कविता : (आंखे बंद, दर्द) ससस अह्ह्ह्ह...


रूपा : नही...... अब दर्द नही होता. दर्द तो पहेली बार हुआ था.... तुम्हारी तरह ही. पर अब तो बहोत मझा आता है.


बोलते हुए रूपा ने अपनी ऊँगली आहिस्ता आहिस्ता प्रेस करना शुरू की. चिकनी ऊँगली टाइट पिछवाड़े मे मुश्किल से घुस रही थी. कविता की तो जान ही निकल गई. वो चीख पड़ी. सर धड ऊपर की तरफ उठ गया.


रूपा : तुम्हे भी मझा आएगा.


कविता : (दर्द) आआआहहहहहहह..........


पर रूपा ने कविता की दर्द की परवाह किए बगैर ऊँगली को आगे पीछे करना आहिस्ता आहिस्ता शुरू किया. और कविता छट पटाने लगी. पर रूपा नही रुकी. आखिर उसे कविता को वीरू के लिए तैयार जो करना था. ताकि वीरू कविता का दीवाना हो जाए.


कविता : अह्ह्ह्ह ससस प्लीजज्ज्ज्ज्बज.. निकालोलोलोलो............


रूपा को कविता का छटपटाना मझा भी दे रहा था. वो जानती थी की पहेली बार तो प्राण निकल जाता है. उसे तो ऐसे किसी ने ऊँगली डाल कर तैयार भी नही किया था. किसी शराबी ने उसे उसकी जवानी मे जबरदस्ती पकड़ कर रगड़ दिया. और वो बहोत ज्यादा छट पटाई थी. पर कोई उसे बचाने वाला नही था.

रूपा बिलकुल नही रुकी. और धीरे धीरे ऊँगली आगे पीछे करते रही. कविता थोड़ी नार्मल होते ऐसे ही किसी छिपकली की तरह पड़ी रही. बस अपना सर धड ऊपर किए सिसक रही थी.


कविता : (आंखे बंद, मदहोश) अह्ह्ह्ह ससससस अह्ह्ह्ह...


रूपा ने देखा की जब कविता अब आराम से एक ऊँगली झेल रही है तो रूपा ने ऊँगली बहार निकल के फिर तेल वाली की. कविता थोड़ी सॉक हुई. और सर घुमाकर रूपा को देखती है.


कविता ::(सॉक) क्या हुआ??? करो ना...


कविता के पिछवाड़े मे ऊँगली का जादू चलने लगा था. उसे मझा आने लगा था. ऊँगली पीछे हो रही थी. पर असर तो आगे भी हो रहा था. रूपा कविता की बेचैनी पर मुस्कुराई.


रूपा : (स्माइल) करती हु. रुको तो.


कविता भी रूपा को मुस्कुराते देख कर शर्माने लगी. और तुरंत नजरें घुमाकर सर निचे कर लेती है. तभि रूपा ने इस बार आहिस्ता से दो ऊँगली कविता के पूछवाड़े मे घुसाई. कविता की फिर जान निकल गई.


कविता : (आंखे बंद, दर्द) आआआहहहहहहह........


कविता को दर्द तो हुआ. पर अब वो दर्द बरदास कर पा रही थी. रूपा को भी उन दोनों मखमली गोलो के बिच उंगलियां अंदर बहार करने मे मझा आ रहा था. साथ ही अफ़सोस भी हो रहा था की वो मर्द नही औरत है. वरना वो कविता को भोग पाती. यही सोच रूपा को भी ज्यादा रोमांचित कर रही थी. वो जोस मे अपनी उंगलियों की स्पीड बढाती है. वही कविता छटपटा तो रही थी.

मगर उसे उतना माझा भी आ रहा था. वो और ज्यादा सिसकने लगी. अपना हाथ निचे योनि तक लेजाकर अपनी योनि माशलने लगी. और बहोत जोरो से सिसकने लगी.


कविता : (मदहोश ) अह्ह्ह ससससस अह्ह्ह्ह ससससस अह्ह्ह...


तभि मानो कविता के अंदर तूफान आया हो. चरमसुख के करीब पहोचकर वो बहोत जोरो से झड़ने लगी. रूपा पुरानी खिलाडी थी. कविता की हालत देख कर वो समझ गई. कविता जोरो से चीखते हुए बड़ी जोरो से झडी.


कविता : (बेकाबू ) आआआआआ हहहहहहह.........



कविता के झडते रूपा रुक गई. अपनी उंगलियां उसके पिछवाड़े से निकली. कटोरी उठाकर रूम से बहार निकल गई. उसने कविता को ऐसे ही छोड़ दिया. कविता बहोत थक गई थी. उसे होश नही था. यह उसका पहला अनुभव था. वो ऐसे ही बेड पर उलटी लेटी ही रही. और उसके दिमाग़ मे कई सवाल पैदा होते रहे.
कन्या रस का अद्भुत वर्णन
 
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komaalrani

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Episode 10.2


शाम हो चुकी थी. और रूपा वीरू का खास ध्यान रख रही थी. वैसे तो उसे टोईलेट तक तो बेड पर कराया जा रहा था. पर रूपा उस से बाते मज़ाक वगेरा ज्यादा कर रही थी. वीरू के बगल मे बैठी रूपा के हाथ मे एक प्लास्टिक का जार जैसा कुछ था.

जैसे पेड़ो मे पानी डालने के लिए होता है. एक नोज़ल वाला. पर उसकी नोज़ल लम्बी और मोटी थी. और उस नोज़ल मे वीरू का लिंग था. वीरू ताकत लगाकर उसमे मूत रहा था. वही रूपा खड़ी उस जार को पकडे हुए थी. वीरू का मूत्र उस जार मे ही जा रहा था. साथ रूपा उस से बाते भी कर रही थी.


रूपा : (स्माइल, शारारत) जानते हो. आज मेने उसके पिछवाड़े की अच्छी मसाज की.


वीरू : (मूत ते हुए) अह्ह्ह ससस तो यह सब तुम मुझे क्यों बता रही हो.


रूपा : (स्माइल, शारारत) तेल लगाकर एकदम अच्छे से. वो भी अंदर तक. पता है. उसकी एकदम कस्सी हुई भी है. और मुलायम भी.


वीरू : ससस बस करो. मुझे नही सुन ना.


रूपा तो कविता के पिछवाड़े के बखान करने से बिलकुल पीछे नही हटी. वीरू का मूतना हो गया था. रूपा वीरू के लिंग को उस जार की नोज़ल से निकल कर कपडे से साफ करते हुए बोली.


रूपा : (स्माइल, शारारत) दिखती भी तो सुंदर है. गोरी.... गोरी. गोल गोल. मै तो खुद ही देख कर मचल जाती हु.


वीरू : (गुस्सा) फिर तू ही ले लेना उसकी. मुझे क्यों परेशान कर रही है.


वीरू कविता से नफरत करने की कोसिस कर रहा था. वो इतना समझ चूका था की रूपा अब उसकी तरफ नही है. रूपा भी जैसे वीरू के विरोध की कोई परवाह ना कर रही हो. बोलती ही चली गई.


रूपा : जानते हो. उसमे एक खास बात है. दर्द अच्छा बरदास कर लेती है. बिलकुल मना नही करती. और ना हिलती डुलती है.


वीरू ने कोई जवाब नही दिया. रूपा जाते जाते अपना असली मकशद बता गई.


रूपा : उसे तैयार कर दिया है मेने. रात को आती हु लेकर. तू उसे संभाल लेना. तेरा एक हाथ खोल दूंगी. पर प्यार से करना. उसने कभी पीछे से किया नही है.


रूपा बोल कर चली गई. वीरू सोचने लगा. वो चाह कर भी कविता से नफरत नही कर पा रहा था. वो सोचने लगा की ऐसा क्या करें जो वो पागल लड़की उसका पीछा छोड़ दे. वीरू सोचने लगा की अगर वो उस लड़की की लाइफ मे विलन बन जाए तो सायद वो लड़की उसे छोड़ देगी. पर डर यह भी था की कही उसे गोली ना मार दे.

रूपा वीरू के रूम से निकालने के बाद रूपा किचन मे जा रही थी. जाते हुए वो कविता जिस रूम मे थी. वहां रुक गई. डोर अब भी खुला हुआ था. रूपा ने अंदर झांका कविता अब भी बेड पर उलटी लेटी हुई थी. बस हिस्प के थोड़े ऊपर तक बेडशीट ओढ़े हुए थी.

कविता की नंगी पीठ चमकते हुए बहोत खूबसूरत और कामुख लग रही थी. कविता की आंखे खुली हुई. जैसे कही खोई हुई हो. जब रूपा डोर पर रुकी तो कविता की नजर भी डोर पर गई. दोनों की नजरें मिली. और दोनों ही मुस्कुरा दिए. रूपा की आँखों मे शारारत थी तो कविता की आँखों मे शर्म. रूपा ने अपनी आँखों के हिसारे से वीरू के रूम की तरफ वाला हिसारा दिआ.

जैसे कोमल रानी की किसी कहानी मे भाभी अपनी ननंद को उसके पहले सम्भोग से पहले हिसारा देती है. की अब तेरी बारी आ गई है. कविता भी रूपा के उस शारारत भरे हिसारे को देख कर शर्मा गई. और तुरंत अपने एक हाथ से अपना चहेरा ढक लिया. जितनी बेचैनी कविता को हो रही थी. उतना ही रोमांचित रूपा हो रही थी.


रूपा : (स्माइल, शारारत) उसे खाना खिला दू. फिर तुम्हे लेने आती हु. तैयार हो जाओ मेरी रानी. आज तुम्हारे पिछवाड़े का फूल भी खिलने वाला है.


रूपा की बात पर कविता और ज्यादा शर्मा गई तो रूपा खिल खिलाकर हस पड़ी. रूपा वहां से किचन मे चली गई. और कविता और ज्यादा बेचैन हो गई. जैसे कोई दुल्हन अपनी सुहागरात से पहले बेचैन होती है.
बहुत आभार अपने मेरी कहानी का भी जिक्र किया लगता है कुछ टर्न आने वाला है , नागर का टारगेट और कविता भी काफ़ी दिन से स्टूडियों और आफिस से बाहर है
 
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