Update 04
इस घटना के बाद कुछ दिन बहुत ही शांति और सामान्य तरीके से बीत गए। गोलू घर में बिल्कुल पहले की तरह रहने लगा था, लेकिन हम दोनों के बीच एक गुप्त प्रॉमिस का धागा बंध चुका था। कुछ दिनों बाद, अचानक एक बार फिर गोलू के पापा को दफ़्तर के किसी ज़रूरी काम से कुछ दिनों के लिए शहर से बाहर जाना पड़ा। वह अपना बैग लेकर जैसे ही घर से निकले, मेरे दिल की धड़कनें थोड़ी तेज़ हो गईं। मुझे पता था कि रात को क्या होने वाला है।
हमेशा की तरह, जैसे ही रात के ग्यारह बजे और घर में सन्नाटा पसरा, कमरे का दरवाज़ा धीरे से खुला। गोलू अपने शॉर्ट्स और टी-शर्ट में बेहद मासूमियत से अंदर आया और चुपचाप बिस्तर पर मेरे पास आकर लेट गया। रात के अंधेरे में उसने पीछे से आगे बढ़कर मेरी कमर में अपनी बाहें डाल दीं और मुझे कसकर हग कर लिया। उसका जवां बदन मेरे गाउन से सटा हुआ था। वह धीरे से फुसफुसाते हुए बोला, "मम्मी, अब बताओ ना... पापा भी घर पर नहीं हैं। आप उस दिन रो क्यों रही थीं? मुझे जानना है।"
मैंने एक गहरी साँस ली और बहुत ही शांति से अपनी करवट उसकी तरफ़ बदल ली। करवट बदलते ही उसका चेहरा मेरे सीने के बिल्कुल करीब आ गया। मैंने उसे दोनों बाहों में कसकर पकड़ लिया और अपने सीने से लगा लिया। उसका सिर मेरे नाइट गाउन के ऊपर, मेरे भारी स्तनों के उभार पर टिक गया, जहाँ से मेरे बदन की खुशबू और गर्मी उसे महसूस हो रही थी। मैंने उसके बालों को सहलाते हुए बड़े ही लाड और धीमे लहजे में कहा, "तब मैं रो नहीं रही थी मेरे बच्चे... वो तो तुम्हारे पापा का प्यार था, जिसकी वजह से मेरे मुँह से वैसी आवाज़ें निकल रही थीं। तुमने फिल्मों में देखा है ना, जैसे हीरो-हीरोइन एक-दूसरे को किस करते हैं, फिर बेड पर वो सब हग और कडलिंग करते हैं... बिल्कुल वैसे ही हम भी कर रहे थे, समझे?"
लेकिन गोलू इतनी आसानी से मानने वाला नहीं था। उसकी आँखों में अभी भी वही पुरानी शंका थी। वह मेरे सीने से थोड़ा सिर उठाकर मेरी आँखों में देखते हुए बोला, "लेक़िन मम्मी, आपकी आवाज़ में दर्द था। आप रो ही रही थीं, मुझे पक्का पता है।"
स्थिति बेहद नाज़ुक हो चुकी थी। एक माँ के रूप में मुझे उसे अब सही और वैज्ञानिक बात समझानी ही थी, ताकि उसका भ्रम दूर हो सके। मैंने मुस्कुराते हुए उससे पूछा, "अच्छा ये बताओ, बेटा तुम्हें पता है कि बच्चे कैसे होते हैं?"
गोलू थोड़ा शर्माया, उसका चेहरा अंधेरे में भी लाल हो गया। वह हिचकिचाते हुए बोला, "मुझे ज़्यादा तो नहीं पता मम्मा... वो शायद नुन्नू को डालना पड़ता है अंदर।"
उसकी इस बात पर मैंने उसकी पीठ को सहलाया और बड़ी ही सहजता और कामुक गहराई के साथ उसे समझाना शुरू किया, "हाँ, तो मेरे बच्चे... जैसे बच्चे के लिए एक मर्द औरत की सुसु वाली जगह पे अपना लिंग डालता है, जिसे तुम नुन्नू बोल रहे हो वो... वैसे ही जब पापा को मम्मी पर बहुत ज़्यादा प्यार आता है, तब वो अपना लिंग मेरे वहां डाल कर प्यार करते हैं। उससे थोड़ा दर्द भी होता है, लेकिन वो दर्द वैसा दर्द नहीं होता जैसा चोट लगने पर होता है। यह दर्द काफी मीठा-मीठा दर्द होता है, जिसके लिए हर औरत और मर्द तड़पते हैं और यह वाला प्यार सिर्फ और सिर्फ पति-पत्नी के बीच ही होता है।"
गोलू बिना पलक झपकाए मेरी बातें सुन रहा था। उसकी सांसें मेरे गले पर गर्म हवा की तरह लग रही थीं। मैंने बात को आगे बढ़ाते हुए कहा, "और वो जो सफेद पानी आखिर में निकलता है ना... अगर वो औरत के अंदर निकल जाएगा, तो औरत प्रेग्नेंट हो जाएगी, बशर्ते उसके फर्टाइल दिन चल रहे हों। इसी वजह से बड़े लोग कंडोम पहनते हैं, तुमने टीवी पर इसकी ऐड तो देखी ही होगी ना?"
मैंने उसके गाल को छुआ और दूध वाली शंका को दूर करते हुए कहा, "और वो दूध नहीं पीते बेटा। तुम्हारे पापा सिर्फ मेरे स्तनों को सहलाते हैं और उनसे प्यार करते हुए उन्हें चूसते हैं । ऐसा करने से हम दोनों को बहुत अच्छा और सुकून महसूस होता है। सेक्स के दौरान हम एक-दूसरे को ऐसे किस करते हैं, सिर्फ अपना प्यार देने के लिए दुध पीने के लिए नहीं, समझे मेरे लाल?"
मेरी बातें सुनकर गोलू के भीतर जैसे एक नया तूफ़ान उठ खड़ा हुआ। उसकी आँखें पूरी तरह से बदल चुकी थीं, और उसमें अब एक नई जवां दीवानगी और उत्सुकता साफ़ झलक रही थी। उसका अंग उसके शॉर्ट्स के भीतर पूरी तरह सख्त होकर खड़ा हो चुका था, जो मेरे पेट और जांघों पर महसूस हो रहा था।
वह मेरे और करीब सरका, उसके हाथ मेरी पीठ पर और मज़बूत हो गए। वह बेहद बेताबी और गहरी कामुक आवाज़ में बोला, "मम्मी... मुझे भी आपको ऐसे ही प्यार करना है... मम्मी, क्या मैं आपके दूध को देख सकता हूँ?"
गोलू की इस सीधी और कामुक मांग को सुनकर मेरे बदन में बिजली सी दौड़ गई। मेरे नाइट गाउन के भीतर छुपे निप्पल्स एकदम सख्त हो गए और मेरी सांसें तेज़ चलने लगीं। एक माँ के सामने उसका जवां बेटा अब अपने पूरे पुरुषत्व के साथ खड़ा था और मर्यादा की आखिरी दीवार पूरी तरह पिघलने की कगार पर आ चुकी थी।
गोलू की उस सीधी और कामुक मांग को सुनकर पल भर के लिए मेरा दिमाग पूरी तरह सुन्न हो गया। कमरे के सन्नाटे में हमारी तेज़ होती सांसें साफ़ सुनाई दे रही थीं। मैंने खुद को थोड़ा पीछे खींचते हुए उसे समझाने वाले लहजे में कहा, "बेटा, माँ और बेटे के बीच यह सब नहीं हो सकता। यह सब चीजें शादी के बाद अपनी पत्नी के साथ करते हैं। अभी तुम बहुत छोटे हो और यह सब बातें हमारे रिश्ते की मर्यादा के खिलाफ हैं।"
लेकिन गोलू के सिर पर इस वक्त अपनी माँ के शरीर को देखने और समझने का एक अलग ही भूत सवार था। उसकी आँखों में एक अजीब सी बेताबी और जिद थी। उसने मेरे दोनों हाथों को अपने हाथों में थाम लिया और गिड़गिड़ाते हुए बोला, "मम्मी प्लीज... मुझे सिर्फ एक बार देखने तो दो। मैं कुछ नहीं करूँगा, सिर्फ देखना है मम्मा... प्लीज मान जाओ ना।"
मैंने अपनी साड़ी और गाउन के पल्लू को थोड़ा और समेटते हुए सख्ती दिखाने की कोशिश की, "नहीं बेटा, तुम जिद मत करो। मैं तुम्हारी माँ हूँ, बीवी नहीं। तुम्हें अपनी माँ से ऐसी जिद शोभा नहीं देती।"
मेरी इस दो टूक बात को सुनकर गोलू का चेहरा एकदम से उतर गया। उसकी आँखों की वो चमक गायब हो गई और उसकी जगह एक गहरा खालीपन आ गया। वह बेहद मायूस और आहत होकर बिस्तर से उठने लगा और रुआंसे लहजे में बोला, "मम्मी, ठीक है मत दिखाओ... मैं अपने कमरे में जा रहा हूँ।"
गोलू को इस तरह बेहद उदास, मायूस और अपनी ही माँ से आहत होकर जाते देख, मेरे भीतर का वो सख्त माँ वाला दिल एकदम से पिघल उठा। मैं एक पल के लिए भूल गई कि क्या सही है और क्या गलत। मुझे बस अपने बेटे की वो मासूम उदासी बर्दाश्त नहीं हुई। मैंने तुरंत पीछे से उसे आवाज़ देकर कहा, "अच्छा रुक जा... लेकिन मेरी एक शर्त है। सिर्फ एक ही बार देखोगे, और इसके बाद कभी ऐसी जिद नहीं करोगे। और हाँ, इस बात का पता दुनिया में किसी को भी नहीं चलना चाहिए, ठीक है?"
जैसे ही मेरे मुँह से ये शब्द निकले, गोलू के चेहरे पर एक गजब की खुशी दौड़ गई। वह खुशी से झूम उठा और लगभग कूदते हुए वापस बेड पर आया। उसने बिना एक पल गंवाए मुझे बेहद कसकर गले से लगा लिया। वह अपनी इस जीत से इतना दीवाना हो चुका था कि उसने मेरे गालों को चूमना शुरू कर दिया। उसे इतनी शिद्दत और दीवानगी से खुश होते हुए शायद मैंने अपनी पूरी जिंदगी में कभी नहीं देखा था। उसकी इस बेपनाह खुशी को देखकर मेरा दिल भी भर आया और मैंने भी उसे अपनी बाहों में कसकर भींच लिया, जिससे उसका सिर एक बार फिर मेरे सीने की गहराई में दब गया।
कुछ पलों के बाद, मैं बिस्तर पर थोड़ी पीछे की तरफ़ खिसकी। कमरे की मद्धम रोशनी में अब हम दोनों एक-दूसरे के बिल्कुल आमने-सामने बैठे थे। मेरे कांपते हुए हाथ अब धीरे-धीरे मेरे नाइट गाउन के ऊपरी बटन पर जाकर टिक गए थे। इस वक्त मेरे दिमाग में कोई पाप या गलत भावना नहीं थी, मुझे तो बस गोलू की आँखों में एक नई चीज़ को देखने की, एक औरत के बदन के रहस्यों को समझने की वो मासूम और कामुक जिज्ञासा साफ़ दिखाई दे रही थी। वह अपनी माँ के रूप में पूरी प्रकृति के उस आदिम सत्य को निहारने के लिए अपनी आँखें फाड़े इंतज़ार कर रहा था। उसकी आँखों में छिपी इस अनजानी और तीखी उत्सुकता को देखकर, मैं भी चाहकर खुद को नहीं रोक पाई और उसे देखते हुए धीरे से मुस्कुरा दी। मेरे हाथों ने गाउन के पहले बटन को खोलने के लिए हरकत शुरू कर दी थी।