Update 04
मुझे डर सता रहा था की वो कोई नादानी भरा सवाल न कर दे या कोई नई हरकत लेकिन उसने ऐसा कुच नहि किया, गोलू दिन के वक्त बिल्कुल सामान्य व्यवहार कर रहा था, जैसे सुबह कुछ हुआ ही न हो। दिनभर उसने घर के कामों में हाथ बंटाया, मुझसे बेहद तमीज से बात की और सामान्य तरीके से पढ़ाई की, जिससे मुझे लगा कि शायद वह अपनी उत्सुकता को भूल चुका है और सब कुछ पहले जैसा ही है। लेकिन जैसे ही रात हुई और बिस्तर पर अंधेरा छाया, उसके भीतर की कामुक जिज्ञासा फिर से जाग उठी। रात के अंधेरे में मेरी नींद अचानक एक हल्की सी 'आह' के साथ खुल गई। मैंने महसूस किया कि उसका हाथ मेरे स्तन को बेहद कामुकता से सहला रहा था। उसने अपनी उंगलियों की गिरफ्त को कड़ा करते हुए उन्हें हल्के से दबा भी दिया था। उस अनजाने और गरम स्पर्श की वजह से मेरी सांसें तेज़ होने लगी थीं। घबराहट और बढ़ती उत्तेजना के बीच, मैंने फौरन आगे बढ़कर उसका हाथ थाम लिया। मैंने उसे डांटा नहीं, बल्कि बिना कुछ कहे उसकी तरफ़ करवट बदली और उसे दोबारा अपने सीने से लगा लिया ताकि वह शांत हो जाए।
अगली सुबह मैंने अपनी भूल को सुधारा और पूरी सावधानी बरती। मैं बाथरूम के भीतर ही पेटीकोट, ब्लाउज़ और अपने ब्रा पेंटी पहनकर पूरी तरह तैयार होकर कमरे में बाहर आई। जैसे ही मैं बाहर निकली, मैंने देखा कि गोलू जाग रहा था, लेकिन मुझे देखते ही उसने फटाक से अपनी आँखें बंद कर लीं और सोने का नाटक करने लगा।
तीसरे दिन की रात को भी उसने वही हरकत दोहराई। जब मेरी नींद खुली, तो उसका हाथ मेरे नाइट गाउन के ऊपर से ही मेरे स्तनों की गोलाई को सहला रहा था। उसकी थरथराती उंगलियां कपड़े के ऊपर से ही मेरे निप्पल्स को खोज रही थीं। उसके हाथों के इस लगातार और गहरे अहसास की वजह से, मेरे शरीर में एक अनचाही कामुक उत्तेजना दौड़ने लगी। ठंडी हवा और कपड़े के ऊपर से होते हुए उसके गरम स्पर्श के घालमेल से मेरे निप्पल्स एकदम सख्त और तने हुए खड़े हो गए। जैसे ही उसकी उंगलियों ने उन तने हुए निप्पल्स को छुआ, मेरे बदन में एक सिहरन दौड़ गई। आज अजीब बात यह थी कि मैंने उसे तुरंत नहीं हटाया। पता नहीं क्यों, मैं उसे वहां छूने दे रही थी। शायद यही माँ की वो अनजानी ममता भी है, जो बेटे की इस बढ़ती उम्र की उत्सुकता और गलत काम में भी उसके प्रति प्यार खोज लेती है। उसकी इस बेताब जिज्ञासा को देखकर मेरे होठों पर अंधेरे में एक हल्की सी मुस्कान आ गई। वह उन्हें हल्के-हल्के हाथों से पकड़कर उनके उभार को महसूस कर रहा था। उसकी तेज़ और गरम सांसों की हवा मेरी गर्दन और गले की त्वचा पर लग रही थी, जिससे माहौल और भी मादक हो गया था।
तभी गोलू ने खुद को थोड़ा और करीब लाने के लिए बिस्तर पर जैसे ही अपनी पोजीशन को एडजस्ट किया, मेरे होश उड़ गए। मैं शर्म और उत्तेजना से पानी-पानी हो गई। उसका लोहे जैसा सख्त और गर्म लंड मेरी पीठ के नीचे, मेरी जांघों के ऊपरी हिस्से और नितम्बों के बीच के उभार पर साफ़ महसूस हो रहा था। यह अहसास इतना तीखा था कि मैं और ज़्यादा कशमकश बर्दाश्त नहीं कर सकी। मैंने तुरंत अपनी करवट बदली, उसका रुख अपनी तरफ़ किया और उसे कसकर अपने सीने से लगा लिया। जब वह पूरी तरह मेरी बाहों में जकड़ गया, तब जाकर मैंने राहत की सांस ली।
सुबह जब मेरी आँख खुली, तो धूप कमरे में फैल चुकी थी। मैंने देखा कि आज गोलू पूरी रात मेरे सीने से बिल्कुल लिपटकर ही सोया रहा था। मेरे नाइट गाउन का सीने वाला हिस्सा उसके मुँह से निकली लार की वजह से गीला हो चुका था। उसे इस तरह मासूमियत से सोता हुआ देख मेरे भीतर ममता का एक गजब का सैलाब उमड़ आया। मुझे उस पर बहुत प्यार आया, और मैंने झुककर उसके बिखरे बालों को बेहद लाड से चूम लिया। पता नहीं क्यों, मेरा दिल नहीं भरा और मैंने दो-तीन बार और उसके माथे और गालों को चूमा। मेरे चूमते ही अचानक उसकी आँखें खुल गईं। उसके चेहरे पर एक शरारती मुस्कान थी। उसे देखकर मुझे अहसास हुआ कि वह सो नहीं रहा था, बल्कि पहले से ही जाग रहा था।
वह बेहद प्यार और थोड़े नटखट लहजे में बोला, "क्या हुआ मम्मी? आज सुबह-सुबह अपने बेटे पर कुछ ज़्यादा ही प्यार आ रहा है!"
इससे पहले कि मैं कुछ समझ पाती या जवाब देती, वह एकदम से मेरे ऊपर आ गया। उसने अपने शरीर का पूरा वजन मेरे ऊपर डाल दिया और अपना मुँह मेरे भारी स्तनों के बीच रखकर लेट गया। मेरे भरे हुए स्तन उसके सिर के इस अचानक आए वजन और दबाव की वजह से नीचे पिघलने लगे। इस शारीरिक स्पर्श और दबाव ने मेरे भीतर ममता के साथ-साथ एक अजीब सा, अलौकिक अहसास उजागर कर दिया। लेकिन उस वक्त मेरा ध्यान उस शारीरिक उत्तेजना पर नहीं था; मुझ पर माँ की ममता पूरी तरह हावी थी। मैंने अपने हाथ उसकी पीठ और कमर पर लपेटे और उसे कसकर अपनी बाहों में भींच लिया।
मैंने उसके बालों को सहलाते हुए कहा, "हाँ, बहुत प्यार आ रहा है... ऐसा लगता है जैसे कल ही की तो बात है जब तू मेरे दूध पीने के लिए रोते हुए उठता था। पता ही नहीं चला कि तू कब इतना बड़ा और जवान हो गया।" मैंने फिर से अपना सिर थोड़ा उठाया और उसके माथे को चूम लिया।
मेरी बात सुनते ही गोलू ने मेरे सीने पर से अपना सिर उठाया, मेरी आँखों में देखा और बेहद दीवानगी और मासूमियत के मिले-जुले लहजे में बोला, "मम्मी, मुझे भी आपका दूध पीना है..."
ऐसा कहते ही उसने बिना एक पल गंवाए, मेरे नाइट गाउन के ऊपर से ही मेरे पूरे स्तन पर अपना मुँह खोलकर रख दिया। उसके गीले मुँह और होठों के स्पर्श से मेरा गाउन तुरंत वहां से भीग गया। हालांकि उसने सिर्फ हल्के से वहां छुआ था और कपड़े के ऊपर से ही अपना मुँह टिकाया था, लेकिन उस स्पर्श की गहराई देखकर मानो मेरी जान ही निकल गई। मेरा पूरा बदन कांप उठा और धड़कनें आसमान छूने लगीं। एक माँ होने के नाते इस अजीब मोड़ पर मैं उसे क्या कहती और कैसे रोकती, यह सोचकर मेरा दिमाग पूरी तरह सुन्न हो गया था।
मैंने अपनी भारी और तेज़ चलती सांसों को काबू में करने की कोशिश की। गोलू का गीला मुँह अभी भी मेरे गाउन के ऊपर, मेरे स्तनों के कड़े उभार पर टिका हुआ था, जिससे वहां का कपड़ा पूरी तरह भीग चुका था। मैंने उसकी आँखों में सीधे झांकते हुए, अपने चेहरे पर एक हल्की और लाड़ भरी मुस्कान लाने की कोशिश की और बड़े प्यार से कहा, "बेटा, मेरा दूध नहीं आता अब।"
मेरी बात सुनते ही गोलू का चेहरा उतर गया। उसके चेहरे पर एक अजीब सी बेबसी, नाराज़गी और जिद्द के भाव आ गए। वह मुझसे अपनी आँखें चुराते हुए, काफी उदास और नाराज़ होकर बोला, "क्यों नहीं आता? आप झूठ बोल रही हो। आपको मुझे दूध नहीं पिलाना है, मुझे अच्छी तरह पता है। आप सिर्फ पापा को दूध पीने देती हो!" इतना कहकर वह झटके से मेरे ऊपर से हटा और बिस्तर से उठकर कमरे से बाहर जाने लगा।
उसकी यह आखिरी बात मेरे कानों में किसी बम की तरह फटी। मेरे होश उड़ गए, और मेरे मुँह से बस इतना ही निकल पाया, "बेटा, ऐसा नहीं है..."
मैं बिस्तर पर अकेली बैठी रह गई। मेरे भरे हुए स्तनों और दूध के लिए उसका यह नया आकर्षण तो मैं समझ सकती थी; उसकी उम्र ही ऐसी थी कि लड़के अक्सर इस तरह की चीज़ों की ओर आकर्षित हो जाते हैं। शारीरिक बदलावों और कामुक उत्सुकता की वजह से वह मेरे बदन को छूना चाहता था, यह बात अलग थी। लेकिन उसने ऐसा क्यों कहा कि मैं सिर्फ पापा को पिलाती हूँ? क्या उसने सच में कुछ ऐसा-वैसा तो नहीं देख लिया? कहीं उसने... नहीं, नहीं! यह सोचकर ही मेरा बदन कांप उठा कि अगर उसने कभी मुझे और मेरे पति को करीब आते देख लिया होगा, तो मैं उससे कभी आँखें नहीं मिला पाऊँगी। आखिरकार मैं उसकी माँ थी, और मेरी इतनी हिम्मत नहीं हो रही थी कि मैं उससे आगे बढ़कर कुछ भी पूछूँ।
सुबह की इस घबराहट और उलझन के बाद, मैं नहा-धोकर अपनी साड़ी पहनकर पूरी तरह तैयार हो चुकी थी। जब हम दोनों रसोई में नाश्ते के समय मेज़ पर साथ बैठे, तो माहौल में एक भारी सन्नाटा था। मेरी साड़ी के सूती कपड़े के नीचे बदन की बनावट साफ़ झलक रही थी। गोलू अभी भी अंदर ही अंदर नाराज़ दिख रहा था, और चुपचाप अपनी प्लेट में देख रहा था। उसका यह उतरा हुआ चेहरा देखकर मुझसे रहा नहीं गया। मैंने अपनी सारी हिम्मत बटोरी और अपनी साड़ी के पल्लू को ठीक करते हुए पूछा, "बेटा, मम्मी का दूध सच में नहीं आता है। पर आपको ऐसा क्यों लगता है कि पापा को मैं दूध पीने देती हूँ?"
गोलू ने अपनी चम्मच प्लेट पर रखी, उसकी आँखें लाल थीं। वह अपनी उम्र के हिसाब से बड़ी ही हठ और कामुक उत्सुकता के मिले-जुले लहजे में बोला, "मम्मी, बस मुझे पता है। मैं बड़ा हो गया हूँ, आप मुझे बेवकूफ मत बनाओ। सभी वाइफ पिलाती हैं अपने हसबैंड को, मुझे सब पता है।"
उसकी बात सुनकर मेरे बदन में एक सिहरन दौड़ गई। मैंने अपनी आवाज़ को थोड़ा गंभीर किया और कहा, "बेटा, आपको ये सब किसने कहा? दूध सिर्फ कुछ साल ही आता है, जब कोई माँ बच्चे को जन्म देती है, यानी प्रेगनेंसी के बाद।"
गोलू फिर भी चुप रहा। मैंने अपने लहजे में थोड़ा गुस्सा और सख्ती दिखाते हुए पूछा, "बताओ, ये सब गलत बातें कौन बोल रहा है तुमसे, गोलू...?"
वह मेरी सख्ती देखकर थोड़ा हकबकाया, और अपनी उंगलियों को चटकाते हुए धीमे से बोला, "वो... वो मेरे दोस्त ने कहा।"
मैंने अपनी साड़ी के ब्लाउज के बंद हिस्सों को टटोला, जहाँ सुबह गोलू की भूखी नज़रें टिकी थीं, और थोड़ी सख्ती से कहा, "तुम्हें कितनी बार कहा है कि ऐसे गंदे लड़कों से दोस्ती मत करो और उनसे ऐसी बातें मत किया करो।"
गोलू की आँखों में अब आंसू तैरने लगे थे। वह डरते और hiचकिचाते हुए बोला, "वो... वो आप उस दिन रो रही थीं, तो मैंने बस उससे ऐसे ही कह दिया था... तो उसने कहा कि तेरे पापा तेरी मम्मी का पी रहे होंगे और..."
उसकी अधूरी बात ने मेरे दिल की धड़कन को आसमान पर पहुँचा दिया। मैंने मेज़ पर थोड़ा आगे झुकते हुए, अपने भारी सीने के उभार को छिपाने की कोशिश की और ज़ोर से पूछा, "और क्या? बोल!"
गोलू ने अपना सिर पूरी तरह नीचे झुका लिया, उसका चेहरा शर्म और डर से लाल हो चुका था। वह सुबकते हुए बोला, "और... वो पापा आपको चोद रहे थे, इसलिए आप रो रही थीं।"
यह शब्द सुनते ही मानो मेरे पैरों तले जमीन खिसक गई। मेरे कानों में सन्नाटा छा गया और मुझे कुछ समझ नहीं आया कि मैं क्या करूँ, कहाँ जाऊँ। एक माँ के रूप में मेरे सामने मर्यादा का सबसे बड़ा संकट खड़ा था। लेकिन जब मैंने देखा कि गोलू का सिर नीचे झुका है और उसकी आँखों से लगातार आंसू निकल रहे हैं, तो मेरी सारी घबराहट पर माँ की ममता और उसका डर हावी हो गया। वह इस अधूरी और गलत जानकारी की वजह से अंदर ही अंदर घुट रहा था।
मैंने बिना एक पल गंवाए अपनी कुर्सी से उठी, उसके पास गई और उसे खींचकर कसकर अपने सीने से लगा लिया। उसका सिर सीधे मेरी साड़ी और ब्लाउज के नीचे दबे मेरे भरे हुए स्तनों के बीच जाकर टिक गया। मैंने उसे अपने आलिंगन में भींचते हुए बेहद प्यार और तसल्ली भरे लहजे में कहा, "मेरा बच्चा... ऐसा कुछ नहीं होता। मम्मी आपको सब समझा देगी, ठीक से। अब उससे ऐसी बातें कभी मत करना और उसकी कही बातें भूल जाओ।"
अंधेरे और कामुक कशमकश से भरी रातों के बाद, अब मेरे सामने अपनी ही साड़ी के आंचल में अपने जवान होते बेटे को जीवन और कामुकता का सही पाठ पढ़ाने की एक बड़ी ज़िम्मेदारी खड़ी थी।
गोलू अभी भी रो रहा था और उसका सिर मेरी साड़ी के नीचे, मेरे सीने से पूरी तरह सटा हुआ था। उसकी गरम और तेज़ चलती हुई सांसें मेरे ब्लाउज़ के कपड़े के ऊपर से मेरी त्वचा को साफ़ महसूस हो रही थीं, जिससे मेरे बदन में एक अजीब सी सिहरन दौड़ रही थी। घबराहट और ममता के इस मिले-जुले माहौल में, मैंने महसूस किया कि उसके दोनों हाथ धीरे-धीरे मेरी कमर पर आकर टिक गए थे।
उसने मुझे कसकर पकड़ रखा था, जैसे उसे अपनी माँ की बाहों में दुनिया भर का सुकून मिल रहा हो। मैंने उसके डर और भ्रम को दूर करने के लिए उसके सिर के बालों को बेहद प्यार से सहलाया और झुकर उसके कान के पास बहुत ही धीमी और गंभीर आवाज़ में कहा,
"देखो बेटा, अब से कोई भी बात हो, तुम्हारे दिमाग में कैसा भी सवाल आए, तो सबसे पहले मुझसे पूछना, ठीक है मेरे बच्चे? और... मम्मी उस दिन क्यों रो रही थी... मेरा दूध अब क्यों नहीं आता, इन सब बातों का जवाब तुम्हें पता चल जाएगा। लेकिन अभी नहीं। तुम्हारे पापा कभी भी आते ही होंगे, उन्हें इस बारे में कुछ भी पता नहीं चलना चाहिए। यह बात सिर्फ हम दोनों के बीच ही रहनी चाहिए मेरे लाल।"
मेरी बात सुनकर गोलू ने अपने आंसू पोंछे और मेरी आँखों में देखते हुए बेहद मासूमियत से कहा, "ठीक है मम्मी, प्रॉमिस! मैं यह बात किसी को भी नहीं कहूँगा, अपने बेस्ट फ्रेंड को भी नहीं।"
उसका यह जवाब सुनकर मेरे दिल को बड़ी तसल्ली मिली। मैंने राहत की एक गहरी साँस ली और झुककर गोलू के गाल पर अपने होठ टिका दिए। उसे प्यार से चूमते हुए मैंने कहा, "मेरा प्यारा बच्चा।"
हम दोनों अभी इस भावुक पल में बंधे ही हुए थे कि तभी अचानक घर के मुख्य दरवाज़े पर भारी ट्रैवल बैग रखने की आवाज़ आई। आवाज़ सुनते ही हम दोनों चौंककर अलग हुए। सामने मेरे पति खड़े थे, जो मुस्कुराती हुई नज़रों से हम दोनों को ही देख रहे थे। माँ और बेटे को इस तरह एक-दूसरे पर प्यार लुटाते देख शायद वह अंदर से काफी खुश थे। उन्हें देखकर मेरी धड़कनें पल भर के लिए रुक गईं, लेकिन उनके चेहरे के हाव-भाव देखकर मैं तुरंत समझ गई कि उन्होंने हमारी बातें ज़्यादा कुछ सुनी नहीं थीं। उन्होंने सिर्फ हमारा यह आलिंगन देखा था। यह भांपते ही मैंने चैन की एक लंबी साँस ली।
मेरे पति ने अपनी जैकेट उतारते हुए हल्के मज़ाकिया लहजे में पूछा, "क्या नहीं बताओगे बेटा? क्या खिचड़ी पक रही है माँ-बेटे में आज सुबह-सुबह?"
इससे पहले कि कोई और बात आगे बढ़ती, मैं गोलू से पूरी तरह अलग हो गई। गोलू थोड़ा शर्माते और झेंपते हुए मेज़ से उठा और चुपचाप बिना कुछ बोले ऊपर अपने कमरे की तरफ़ चला गया। मैंने अपने पति की तरफ़ देखा, अपनी साड़ी के पल्लू को थोड़ा ठीक किया और थोड़ा सा मुँह चिढ़ाते हुए नखरे से कहा, "वो हम माँ-बेटे के बीच की बात है, आपको उससे क्या करना है?" इतना कहकर मैं हल्के से मुस्कुरा दी।
फिर मैंने बात को बदलते हुए उनके पास जाकर कहा, "चलिए, आप सफर से आए हैं, जल्दी से फ्रेश हो जाइए। काफी थक गए होंगे ना?" वह अपना सामान लेकर कमरे की तरफ़ बढ़ गए और मैं रसोई में बर्तनों को समेटने लगी, लेकिन मेरा दिमाग अभी भी इस बात पर अटका था कि मुझे सही समय आने पर गोलू को जीवन का यह पाठ कैसे पढ़ाना है।