Gorgeous Ridhimaa
रिद्धिमा ✨
- 83
- 212
- 34
Update 06
कमरे में हल्की-हल्की रोशनी थी और चारों तरफ एकदम सन्नाटा था। गोलू बिस्तर पर अपने घुटनों के बल बैठा हुआ था। उसने अपने दोनों हाथ पीछे बांध रखे थे, बिल्कुल वैसे ही जैसे बचपन में कोई गलती करने पर खड़ा रहता था। उसकी आँखों में कोई चालाकी नहीं थी, बस एक अजीब सी मासूमियत और उत्सुकता थी कि माँ अब क्या करने वाली है।
मेरे कांपते हुए हाथों ने जैसे ही गाउन का पहला बटन खोला, मेरी गर्दन और छाती का ऊपरी हिस्सा दिखने लगा। गोलू की सांसें एकदम थमी हुई थीं, वह बिना पलक झपके मेरी उंगलियों को देख रहा था।
मुझे इतनी ज्यादा शर्म और घबराहट हो रही थी कि मेरा पूरा बदन ठंडा पड़ रहा था। मेरे अंदर की ममता और मर्यादा के बीच एक जंग चल रही थी। एक माँ होने के नाते मुझे यह सब करते हुए बहुत झिझक हो रही थी, लेकिन सामने बैठे अपने ही बच्चे की वह रोती हुई सूरत और नादान जिद देखकर मैं खुद को रोक नहीं पाई। मैंने मन ही मन खुद को समझाया कि यह सिर्फ एक बार की बात है, बस उसकी शंका दूर करने के लिए, ताकि वह बाहर किसी से गलत बातें न सीखे।
मैंने एक लंबी सांस ली और कांपते हाथों से गाउन का दूसरा और तीसरा बटन भी खोल दिया। जैसा कि मैंने बताया था, रात को सोते समय मैंने अंदर ब्रा नहीं पहनी थी, इसलिए बटन खुलते ही गाउन आगे से थोड़ा ढीला होकर खुल गया। लेकिन मेरे स्तन अभी भी गाउन के कपड़े के पीछे आधे छुपे हुए थे, पूरी तरह सामने नहीं आए थे।
यह आधा-अधूरा नजारा देखकर गोलू और भी बेचैन हो गया। वह किसी छोटे बच्चे की तरह अपनी गर्दन को झुकाकर गाउन के अंदर झांकने की कोशिश करने लगा। उसकी यह नादान और बेताब हालत देखकर इस नाजुक मोड़ पर भी मेरे होठों पर एक हल्की सी हंसी आ गई। मैं अपनी मुस्कान रोक नहीं पाई और दबी आवाज में बोली, "क्या हुआ? इतना परेशान क्यों हो रहे हो? ऐसे छुपकर झांकने से कुछ नहीं दिखेगा।"
मेरी बात सुनकर उसका चेहरा शर्म से बिल्कुल लाल हो गया और उसने झेंपकर अपनी नजरें नीचे कर लीं। उसकी इस मासूमियत को देखकर मेरी रही-सही झिझक भी जैसे गायब हो गई। मैंने सीधे उसकी आँखों में देखा और बिना कुछ सोचे, खुद अपने दोनों हाथों से गाउन के किनारों को पकड़ा और उसे पीछे की तरफ हटाते हुए अपने दोनों गोरे और भारी स्तनों को पूरी तरह गाउन से बाहर निकाल दिया।
जैसे ही वे बाहर आए, कमरे की ठंडी हवा के छूते ही मेरे स्तनों के निप्पल्स एकदम सख्ंत होकर सीधे खड़े हो गए। मेरा पूरा वक्षस्थल अब गोलू के ठीक सामने बिल्कुल साफ था।
अपने सामने इस रूप को देखकर गोलू मानो सुन्न हो गया। वह एकटक कभी मेरे स्तनों को देखता तो कभी सीधे मेरी आँखों में झांकता। उसकी सांसें इतनी तेज चल रही थीं कि उसकी छाती ऊपर-नीचे हो रही थी।
"मम्मी... ये... ये तो बहुत सुंदर हैं," गोलू ने हकलाते हुए बेहद मासूमियत से कहा। उसने धीरे से अपना हाथ आगे बढ़ाया, लेकिन डर के मारे उसकी कांपती हुई उंगलियाँ हवा में ही रुक गईं। उसने मेरी तरफ देखा, "मम्मी, क्या मैं... क्या मैं इन्हें बस एक बार छू सकता हूँ? प्लीज, सिर्फ एक बार उंगली लगाकर देखूं?"
मैंने उसका हाथ धीरे से पीछे कर दिया और प्यार से डांटते हुए कहा, "बिल्कुल नहीं! हमारी शर्त क्या थी? सिर्फ देखने की ना? अब देख लिया ना, अब चुपचाप सो जाओ।"
"अरे मम्मी, प्लीज ना! सिर्फ देखने से क्या पता चलेगा? जब तक छूकर महसूस नहीं करूँगा, तब तक मुझे कैसे समझ आएगा कि असली क्या होता है? दोस्तों की बातें सच हैं या झूठ, ये कैसे पता चलेगा? मैं तो बस यह देखना चाहता हूँ कि ये कितने सॉफ्ट होते हैं," उसने किसी अबोध बच्चे की तरह मुंह फुलाते हुए अपनी जिद जारी रखी।
उसकी इस नादानी पर मुझे फिर से हंसी आ गई। मैंने उसे दुलारते हुए समझाया, "अच्छा जी! तो तुम्हें पूरी जांच-पड़ताल करनी है? देखो गोलू, यह कोई खिलौना नहीं है। एक औरत के शरीर का यह हिस्सा बहुत नाजुक होता है, और इस पर सिर्फ उसके पति का या फिर उसके होने वाले छोटे बच्चे का हक होता है। जब तुम बड़े हो जाओगे, तुम्हारी शादी होगी, तब तुम्हें अपनी पत्नी के साथ यह सब करने का पूरा हक होगा। लेकिन अभी तुम बहुत छोटे हो।"
"मैं छोटा नहीं हूँ मम्मी! देखो, मैं लंबाई में आपसे भी बड़ा हो गया हूँ," उसने थोड़ा हंसते हुए अपनी मर्दानगी दिखाने की कोशिश की, लेकिन उसकी नजरें अभी भी मेरे स्तनों के उन तने हुए निप्पल्स पर ही टिकी हुई थीं। वह फिर से बच्चों की तरह गिड़गिड़ाया, "प्लीज मम्मी... बस एक बार छूने दो ना। अपनी बीवी को तो मैं बाद में छूऊंगा, पहले अपनी प्यारी मम्मी से सीख तो लूं कि प्यार से कैसे छूते हैं? प्रॉमिस, इसके बाद कभी नहीं बोलूंगा।"
उसकी इस मासूम दलील और प्यार भरी जिद ने मुझे पूरी तरह बेबस कर दिया था। मेरे स्तनों पर टिकी उसकी वह निष्पाप निगाहें मेरे पूरे बदन में एक अनजानी, मीठी और बहुत तीखी सिहरन पैदा कर रही थीं, जिसे मैं चाहकर भी अब रोक नहीं पा रही थी।
कमरे के उस मद्धम उजाले में गोलू बस एकटक मेरे खुले हुए स्तनों को निहारे जा रहा था। इस उम्र में उसने पहली बार किसी औरत के स्तनों को इतने करीब से और वो भी पूरी तरह नग्न देखा था, इसलिए उसके चेहरे पर अजीब सी दीवानगी और हैरानी साफ दिख रही थी। मेरी गोरी त्वचा पर वे दोनों उभरे हुए सुडौल स्तन बहुत भारी और भरे-भरे लग रहे थे। ठंड की वजह से उनके निप्पल्स एकदम कड़े होकर उभरे हुए थे, जो गोलू को अपनी तरफ जैसे खींच रहे थे।
वह अपनी नजरें वहां से हटा ही नहीं पा रहा था और बच्चों की तरह अजीब-अजीब बातें करके उनकी तारीफ करने लगा।
"मम्मी... ये कितने बड़े और गोल हैं," गोलू ने अपनी आँखें फाड़कर देखते हुए कहा, उसकी आवाज में एक अजीब सी खामोशी और दीवानगी थी। "ये तो बिल्कुल वैसे दिख रहे हैं जैसे बर्फ के पहाड़ होते हैं, एकदम सफेद और साफ। और इनके ऊपर ये जो छोटे-छोटे काले दाने जैसे निप्पल्स खड़े हैं, ये तो कमाल लग रहे हैं मम्मी। मैंने कभी सोचा भी नहीं था कि ये इतने सुंदर और भारी दिखते हैं।"
उसकी ये बातें सुनकर लाज के मारे मेरी आँखें अपने आप झुक गईं। मेरे पूरे बदन में एक अजीब सी सिहरन दौड़ गई। अपनी ही कोख से जन्मे जवान बेटे के मुंह से अपने स्तनों की ऐसी तारीफ सुनकर मुझे जितनी झिझक हो रही थी, उतनी ही उसके भोलेपन पर प्यार भी आ रहा था। मैंने शर्माते हुए अपने गाउन के कपड़े को थोड़ा सा समेटने की कोशिश की, लेकिन वह तुरंत मचल उठा।
"अरे मम्मी, प्लीज छुपाओ मत ना!" वह थोड़ा और करीब खिसक आया, लेकिन वादे के मुताबिक उसने अपने हाथ अभी भी पीछे ही बांध रखे थे। "मम्मी, मुझे बस एक बार इन्हें हाथ लगाने दो ना। ये दिखने में इतने मुलायम और गद्देदार लग रहे हैं कि मेरा दिल कर रहा है बस एक बार अपनी उंगली से इन्हें दबाकर देखूं। मुझे सच में यह समझना है कि इन्हें छूने पर कैसा फील होता है? क्या ये सचमुच उतने ही सॉफ्ट हैं जितने दिख रहे हैं, या फिर ये अंदर से थोड़े सख्त होते हैं?"
उसका यह नादान और उत्सुकता से भरा सवाल सुनकर मेरी धड़कनें और तेज हो गईं। मैंने उसे और भी ज्यादा लाड और प्यार से समझाते हुए कहा, "गोलू, तू सच में बहुत जिद्दी होता जा रहा है। मैंने कहा ना कि इन्हें सिर्फ देखना था। ये कोई खिलौना नहीं हैं कि तू जब चाहे इनसे खेले। एक माँ का शरीर बहुत पवित्र होता है, बेटा। ये स्तन सिर्फ सुंदरता के लिए नहीं हैं, जब तू छोटा सा बच्चा था, तब तू इन्हीं से अपना पेट भरता था। यह एक माँ की ममता का रूप हैं।"
"वही तो मम्मी!" गोलू ने बिल्कुल मासूमियत से अपना तर्क दिया। "अगर मैं बचपन में इनसे दूध पीता था, तो ये तो मेरे अपने ही हुए ना? फिर आप मुझे बस एक बार छूने से क्यों मना कर रही हो? पापा भी तो इन्हें ऐसे ही छूते होंगे ना? प्लीज मम्मी, मैं कोई गंदी बात नहीं कर रहा, प्रॉमिस। मैं बस यह देखना चाहता हूं कि जब मैं अपनी उंगली इस पर रखूंगा, तो यह कितना अंदर तक धंसेगा। क्या ये रुई जैसे हल्के होते हैं?"
उसकी इस नादानी और जिद के आगे मैं बिल्कुल निहत्थी होती जा रही थी। कमरे की हवा में एक अजीब सी मादकता और गर्माहट घुल चुकी थी। मेरे स्तनों के वे कड़े निप्पल्स गोलू की सांसों की गर्मी से और भी ज्यादा संवेदनशील हो रहे थे। मैं एक माँ होने के नाते उसे डांटकर दूर भी नहीं करना चाहती थी क्योंकि मैं जानती थी कि यह उसकी उम्र का दोष है, कोई पाप नहीं।
"अच्छा, तू तो बिल्कुल रिसर्चर बन गया है," मैंने मुस्कुराते हुए बेहद धीमे और दुलार भरे लहजे में कहा, हालांकि मेरी आवाज में घबराहट साफ महसूस हो रही थी। "पर बेटा, बात को समझ। इंसान के बड़े होने पर कुछ पाबंदियां आ जाती हैं। तू अब बच्चा नहीं रहा। अगर तू इन्हें छुएगा, तो यह सही नहीं होगा। अपनी इस जिज्ञासा को थोड़ा काबू में रखना सीख, यही एक अच्छे लड़के की पहचान है।"
लेकिन गोलू का चेहरा अब उदास होने लगा था। उसने अपनी बड़ी-बड़ी आँखें मेरी आँखों में डालीं, जिनमें एक अजीब सी बेबसी थी। "प्लीज मम्मी... बस एक बार, सिर्फ अपनी इस छोटी उंगली से इसके निप्पल को छूकर देखूंगा कि यह कितना हार्ड है। इसके बाद मैं कभी जिद नहीं करूंगा, पक्का प्रॉमिस!"
उसकी आँखों में उदासी और वह भोलापन देखकर मेरा ममता भरा दिल आखिर पिघल ही गया। मैंने मन ही मन सोचा कि आखिर है तो यह मेरा ही अंश, मेरा अपना खून। बचपन में कितनी ही बार इसने इन्हीं स्तनों से दूध पीकर अपनी भूख मिटाई है, इसी छाती से लिपटकर यह चैन की नींद सोया है। एक तरह से देखा जाए तो उसका हक तो बनता ही था। लेकिन एक माँ होने के नाते मैं उसे किसी गलत आदत में नहीं डालना चाहती थी, न ही इस बात को बहुत ज्यादा बढ़ावा देना चाहती थी।
इसलिए मैंने खुद को संभालते हुए एक गहरी सांस ली। मैं बिस्तर पर सीधी खड़ी हुई और धीरे-धीरे अपने गाउन के खुले हुए बटन वापस लगा लिए। फिर मैंने कमरे की लाइट बंद कर दी और आकर बिस्तर पर लेट गई। गोलू का चेहरा बहुत उतर गया था, वह काफी दुखी लग रहा था। मैंने उससे कहा, "चलो गोलू, अब बहुत रात हो गई है, चुपचाप सो जाओ।"
वह कुछ नहीं बोला और मायूस होकर दूसरी तरफ मुंह करके लेट गया। उसकी वह नाराजगी मुझसे देखी नहीं गई। मैंने धीरे से सरककर उसे पीछे से कसकर अपनी गोद में भींच लिया। जब मेरा बदन उसके शरीर से सटा, तब मुझे अहसास हुआ कि मेरा बच्चा सच में अब काफी बड़ा हो गया था। लंबाई में तो वह मुझसे आगे निकल ही चुका था, पर इस वक्त पीछे से छूने पर उसका बदन एक गठीले मर्द की तरह सख्त महसूस हो रहा था। उसके चौड़े कंधे और मजबूत पीठ देखकर मुझे अपनी ममता पर गर्व भी हो रहा था और एक अजीब सी घबराहट भी।
मैंने उसे मनाने के लिए उसके कान के पास बेहद लाड और प्यार भरी आवाज में कहा, "मेरा बच्चा... मेरा प्यारा बेटा, ऐसे नाराज नहीं होते। तू तो जानता है ना कि मैं दुनिया में सबसे ज्यादा प्यार तुझसे ही करती हूँ। तेरे लिए तो मैं कुछ भी कर सकती हूँ।"
गोलू ने थोड़ा सा सुसकते हुए और अपनी नाराजगी दिखाते हुए धीमी आवाज में जवाब दिया, "कहाँ करती हो मम्मी... बस कहने की बातें हैं। मैं तो बस थोड़ा सा छूना चाहता था, पर आपको लगता है कि मैं कोई गंदा काम कर रहा हूँ।"
उसकी इस मासूम नाराजगी को दूर करने के लिए मैंने उसका कंधा पकड़कर उसे अपनी तरफ घुमा लिया। अब हम दोनों आमने-सामने थे। कमरे के घने अंधेरे में हमारी आँखें एक-दूसरे को तलाश रही थीं और हल्की सी चमक रही थीं। हमारी सांसों की गरमाहट एक-दूसरे के चेहरों पर महसूस हो रही थी। मैंने खुद को हल्का सा पीछे किया और उसका हाथ अपने हाथ में ले लिया। फिर मैंने बिना कुछ सोचे, उसके कांपते हुए हाथ को उठाया और सीधे नाइट गाउन के ऊपर से ही अपने भरे हुए सीने पर रख दिया।
मेरा सीना छूते ही जैसे गोलू के होश उड़ गए। वह एकदम से कांप उठा, मानो उसके बदन में बिजली दौड़ गई हो। गाउन के पतले कपड़े के पार से भी उसे मेरे स्तनों की वह लाजवाब नरमी और भारीपन साफ महसूस हो रहा था।
उसने डरते और थरथराते हुए बेहद धीमी, मदहोश आवाज में कहा, "मम्मी... ये... ये सच में बहुत नरम हैं। इतने सॉफ्ट तो मैंने कभी किसी चीज को महसूस नहीं किया।"
मैंने मुस्कुराते हुए अपना हाथ उसके हाथ से हटा लिया, लेकिन उसके हाथ को वहीं मेरे सीने पर टिका रहने दिया। मैंने प्यार से अपना दूसरा हाथ उसके गालों पर फेरा, उसकी त्वचा को सहलाते हुए धीरे से कहा, "अब खुश हो ना मेरे राजा बाबू?"
गोलू ने बेहद प्यार और दुलार से अपने हाथ को मेरे स्तन पर थोड़ा सा घुमाया और उन्हें सहलाने लगा। उसके छूने के इस सलीके को देखकर मुझे अंदर ही अंदर एक बात का अहसास हुआ। शायद पिछले कुछ दिनों से जब मैं गहरी नींद में होती थी, तब उसने चुपके से मेरी नींद का फायदा उठाकर इन्हें छुआ था। इसी वजह से वह आज उनकी संवेदनशीलता को इतने अच्छे से समझ रहा था। मुझे अच्छे से याद था कि जब रात में उसके कांपते हाथ मुझे इस जगह छूते थे, तो मेरी नींद अचानक खुल जाती थी, पर मैं अनजान बनी रहती थी। आज वही छुअन जागते हुए महसूस हो रही थी।
धीरे-धीरे, जैसे-जैसे गोलू का डर कम हुआ, मेरे स्तनों पर उसकी उंगलियों की पकड़ थोड़ी मजबूत होने लगी। वह उन्हें थोड़ा सा दबाने लगा। जैसे ही उसने हल्का सा दबाव बनाया, मेरे भीतर एक बहुत तेज, मीठी और तीखी कामुक सिहरन दौड़ गई, जिसने मेरे पूरे बदन को बेबस कर दिया।
इससे पहले कि पानी सिर से ऊपर गुजर जाता, मैंने तुरंत आगे बढ़कर उसका हाथ वहां से हटाया और उसे कसकर अपनी छाती से चिपका लिया। मैंने उसे बहुत प्यार से गले लगाते हुए अपने दिल का हाल बयां किया, "गोलू... मेरी बात सुन बेटा। जब तू इस तरह से अपनी पकड़ मजबूत करता है ना, तो तेरी इस छुअन से मेरा हाल बहुत अजीब होने लगता है। मैं एक माँ हूँ, और मुझे अंदर से बहुत घबराहट और बेचैनी होने लगती है। इसलिए तू ऐसा मत किया कर। आज के बाद कभी ऐसी जिद मत करना, समझ गए ना?"
मेरी आवाज में छिपी वह बेबसी और ममता भरी सीख सुनकर गोलू ने धीमे से हामी भरी। उसने अपना सिर मेरी छाती पर रख दिया। फिर हम दोनों एक-दूसरे से पूरी तरह लिपट गए और उस शांत, अंधेरी रात में चैन की सांस लेते हुए सो गए।
कमरे में हल्की-हल्की रोशनी थी और चारों तरफ एकदम सन्नाटा था। गोलू बिस्तर पर अपने घुटनों के बल बैठा हुआ था। उसने अपने दोनों हाथ पीछे बांध रखे थे, बिल्कुल वैसे ही जैसे बचपन में कोई गलती करने पर खड़ा रहता था। उसकी आँखों में कोई चालाकी नहीं थी, बस एक अजीब सी मासूमियत और उत्सुकता थी कि माँ अब क्या करने वाली है।
मेरे कांपते हुए हाथों ने जैसे ही गाउन का पहला बटन खोला, मेरी गर्दन और छाती का ऊपरी हिस्सा दिखने लगा। गोलू की सांसें एकदम थमी हुई थीं, वह बिना पलक झपके मेरी उंगलियों को देख रहा था।
मुझे इतनी ज्यादा शर्म और घबराहट हो रही थी कि मेरा पूरा बदन ठंडा पड़ रहा था। मेरे अंदर की ममता और मर्यादा के बीच एक जंग चल रही थी। एक माँ होने के नाते मुझे यह सब करते हुए बहुत झिझक हो रही थी, लेकिन सामने बैठे अपने ही बच्चे की वह रोती हुई सूरत और नादान जिद देखकर मैं खुद को रोक नहीं पाई। मैंने मन ही मन खुद को समझाया कि यह सिर्फ एक बार की बात है, बस उसकी शंका दूर करने के लिए, ताकि वह बाहर किसी से गलत बातें न सीखे।
मैंने एक लंबी सांस ली और कांपते हाथों से गाउन का दूसरा और तीसरा बटन भी खोल दिया। जैसा कि मैंने बताया था, रात को सोते समय मैंने अंदर ब्रा नहीं पहनी थी, इसलिए बटन खुलते ही गाउन आगे से थोड़ा ढीला होकर खुल गया। लेकिन मेरे स्तन अभी भी गाउन के कपड़े के पीछे आधे छुपे हुए थे, पूरी तरह सामने नहीं आए थे।
यह आधा-अधूरा नजारा देखकर गोलू और भी बेचैन हो गया। वह किसी छोटे बच्चे की तरह अपनी गर्दन को झुकाकर गाउन के अंदर झांकने की कोशिश करने लगा। उसकी यह नादान और बेताब हालत देखकर इस नाजुक मोड़ पर भी मेरे होठों पर एक हल्की सी हंसी आ गई। मैं अपनी मुस्कान रोक नहीं पाई और दबी आवाज में बोली, "क्या हुआ? इतना परेशान क्यों हो रहे हो? ऐसे छुपकर झांकने से कुछ नहीं दिखेगा।"
मेरी बात सुनकर उसका चेहरा शर्म से बिल्कुल लाल हो गया और उसने झेंपकर अपनी नजरें नीचे कर लीं। उसकी इस मासूमियत को देखकर मेरी रही-सही झिझक भी जैसे गायब हो गई। मैंने सीधे उसकी आँखों में देखा और बिना कुछ सोचे, खुद अपने दोनों हाथों से गाउन के किनारों को पकड़ा और उसे पीछे की तरफ हटाते हुए अपने दोनों गोरे और भारी स्तनों को पूरी तरह गाउन से बाहर निकाल दिया।
जैसे ही वे बाहर आए, कमरे की ठंडी हवा के छूते ही मेरे स्तनों के निप्पल्स एकदम सख्ंत होकर सीधे खड़े हो गए। मेरा पूरा वक्षस्थल अब गोलू के ठीक सामने बिल्कुल साफ था।
अपने सामने इस रूप को देखकर गोलू मानो सुन्न हो गया। वह एकटक कभी मेरे स्तनों को देखता तो कभी सीधे मेरी आँखों में झांकता। उसकी सांसें इतनी तेज चल रही थीं कि उसकी छाती ऊपर-नीचे हो रही थी।
"मम्मी... ये... ये तो बहुत सुंदर हैं," गोलू ने हकलाते हुए बेहद मासूमियत से कहा। उसने धीरे से अपना हाथ आगे बढ़ाया, लेकिन डर के मारे उसकी कांपती हुई उंगलियाँ हवा में ही रुक गईं। उसने मेरी तरफ देखा, "मम्मी, क्या मैं... क्या मैं इन्हें बस एक बार छू सकता हूँ? प्लीज, सिर्फ एक बार उंगली लगाकर देखूं?"
मैंने उसका हाथ धीरे से पीछे कर दिया और प्यार से डांटते हुए कहा, "बिल्कुल नहीं! हमारी शर्त क्या थी? सिर्फ देखने की ना? अब देख लिया ना, अब चुपचाप सो जाओ।"
"अरे मम्मी, प्लीज ना! सिर्फ देखने से क्या पता चलेगा? जब तक छूकर महसूस नहीं करूँगा, तब तक मुझे कैसे समझ आएगा कि असली क्या होता है? दोस्तों की बातें सच हैं या झूठ, ये कैसे पता चलेगा? मैं तो बस यह देखना चाहता हूँ कि ये कितने सॉफ्ट होते हैं," उसने किसी अबोध बच्चे की तरह मुंह फुलाते हुए अपनी जिद जारी रखी।
उसकी इस नादानी पर मुझे फिर से हंसी आ गई। मैंने उसे दुलारते हुए समझाया, "अच्छा जी! तो तुम्हें पूरी जांच-पड़ताल करनी है? देखो गोलू, यह कोई खिलौना नहीं है। एक औरत के शरीर का यह हिस्सा बहुत नाजुक होता है, और इस पर सिर्फ उसके पति का या फिर उसके होने वाले छोटे बच्चे का हक होता है। जब तुम बड़े हो जाओगे, तुम्हारी शादी होगी, तब तुम्हें अपनी पत्नी के साथ यह सब करने का पूरा हक होगा। लेकिन अभी तुम बहुत छोटे हो।"
"मैं छोटा नहीं हूँ मम्मी! देखो, मैं लंबाई में आपसे भी बड़ा हो गया हूँ," उसने थोड़ा हंसते हुए अपनी मर्दानगी दिखाने की कोशिश की, लेकिन उसकी नजरें अभी भी मेरे स्तनों के उन तने हुए निप्पल्स पर ही टिकी हुई थीं। वह फिर से बच्चों की तरह गिड़गिड़ाया, "प्लीज मम्मी... बस एक बार छूने दो ना। अपनी बीवी को तो मैं बाद में छूऊंगा, पहले अपनी प्यारी मम्मी से सीख तो लूं कि प्यार से कैसे छूते हैं? प्रॉमिस, इसके बाद कभी नहीं बोलूंगा।"
उसकी इस मासूम दलील और प्यार भरी जिद ने मुझे पूरी तरह बेबस कर दिया था। मेरे स्तनों पर टिकी उसकी वह निष्पाप निगाहें मेरे पूरे बदन में एक अनजानी, मीठी और बहुत तीखी सिहरन पैदा कर रही थीं, जिसे मैं चाहकर भी अब रोक नहीं पा रही थी।
कमरे के उस मद्धम उजाले में गोलू बस एकटक मेरे खुले हुए स्तनों को निहारे जा रहा था। इस उम्र में उसने पहली बार किसी औरत के स्तनों को इतने करीब से और वो भी पूरी तरह नग्न देखा था, इसलिए उसके चेहरे पर अजीब सी दीवानगी और हैरानी साफ दिख रही थी। मेरी गोरी त्वचा पर वे दोनों उभरे हुए सुडौल स्तन बहुत भारी और भरे-भरे लग रहे थे। ठंड की वजह से उनके निप्पल्स एकदम कड़े होकर उभरे हुए थे, जो गोलू को अपनी तरफ जैसे खींच रहे थे।
वह अपनी नजरें वहां से हटा ही नहीं पा रहा था और बच्चों की तरह अजीब-अजीब बातें करके उनकी तारीफ करने लगा।
"मम्मी... ये कितने बड़े और गोल हैं," गोलू ने अपनी आँखें फाड़कर देखते हुए कहा, उसकी आवाज में एक अजीब सी खामोशी और दीवानगी थी। "ये तो बिल्कुल वैसे दिख रहे हैं जैसे बर्फ के पहाड़ होते हैं, एकदम सफेद और साफ। और इनके ऊपर ये जो छोटे-छोटे काले दाने जैसे निप्पल्स खड़े हैं, ये तो कमाल लग रहे हैं मम्मी। मैंने कभी सोचा भी नहीं था कि ये इतने सुंदर और भारी दिखते हैं।"
उसकी ये बातें सुनकर लाज के मारे मेरी आँखें अपने आप झुक गईं। मेरे पूरे बदन में एक अजीब सी सिहरन दौड़ गई। अपनी ही कोख से जन्मे जवान बेटे के मुंह से अपने स्तनों की ऐसी तारीफ सुनकर मुझे जितनी झिझक हो रही थी, उतनी ही उसके भोलेपन पर प्यार भी आ रहा था। मैंने शर्माते हुए अपने गाउन के कपड़े को थोड़ा सा समेटने की कोशिश की, लेकिन वह तुरंत मचल उठा।
"अरे मम्मी, प्लीज छुपाओ मत ना!" वह थोड़ा और करीब खिसक आया, लेकिन वादे के मुताबिक उसने अपने हाथ अभी भी पीछे ही बांध रखे थे। "मम्मी, मुझे बस एक बार इन्हें हाथ लगाने दो ना। ये दिखने में इतने मुलायम और गद्देदार लग रहे हैं कि मेरा दिल कर रहा है बस एक बार अपनी उंगली से इन्हें दबाकर देखूं। मुझे सच में यह समझना है कि इन्हें छूने पर कैसा फील होता है? क्या ये सचमुच उतने ही सॉफ्ट हैं जितने दिख रहे हैं, या फिर ये अंदर से थोड़े सख्त होते हैं?"
उसका यह नादान और उत्सुकता से भरा सवाल सुनकर मेरी धड़कनें और तेज हो गईं। मैंने उसे और भी ज्यादा लाड और प्यार से समझाते हुए कहा, "गोलू, तू सच में बहुत जिद्दी होता जा रहा है। मैंने कहा ना कि इन्हें सिर्फ देखना था। ये कोई खिलौना नहीं हैं कि तू जब चाहे इनसे खेले। एक माँ का शरीर बहुत पवित्र होता है, बेटा। ये स्तन सिर्फ सुंदरता के लिए नहीं हैं, जब तू छोटा सा बच्चा था, तब तू इन्हीं से अपना पेट भरता था। यह एक माँ की ममता का रूप हैं।"
"वही तो मम्मी!" गोलू ने बिल्कुल मासूमियत से अपना तर्क दिया। "अगर मैं बचपन में इनसे दूध पीता था, तो ये तो मेरे अपने ही हुए ना? फिर आप मुझे बस एक बार छूने से क्यों मना कर रही हो? पापा भी तो इन्हें ऐसे ही छूते होंगे ना? प्लीज मम्मी, मैं कोई गंदी बात नहीं कर रहा, प्रॉमिस। मैं बस यह देखना चाहता हूं कि जब मैं अपनी उंगली इस पर रखूंगा, तो यह कितना अंदर तक धंसेगा। क्या ये रुई जैसे हल्के होते हैं?"
उसकी इस नादानी और जिद के आगे मैं बिल्कुल निहत्थी होती जा रही थी। कमरे की हवा में एक अजीब सी मादकता और गर्माहट घुल चुकी थी। मेरे स्तनों के वे कड़े निप्पल्स गोलू की सांसों की गर्मी से और भी ज्यादा संवेदनशील हो रहे थे। मैं एक माँ होने के नाते उसे डांटकर दूर भी नहीं करना चाहती थी क्योंकि मैं जानती थी कि यह उसकी उम्र का दोष है, कोई पाप नहीं।
"अच्छा, तू तो बिल्कुल रिसर्चर बन गया है," मैंने मुस्कुराते हुए बेहद धीमे और दुलार भरे लहजे में कहा, हालांकि मेरी आवाज में घबराहट साफ महसूस हो रही थी। "पर बेटा, बात को समझ। इंसान के बड़े होने पर कुछ पाबंदियां आ जाती हैं। तू अब बच्चा नहीं रहा। अगर तू इन्हें छुएगा, तो यह सही नहीं होगा। अपनी इस जिज्ञासा को थोड़ा काबू में रखना सीख, यही एक अच्छे लड़के की पहचान है।"
लेकिन गोलू का चेहरा अब उदास होने लगा था। उसने अपनी बड़ी-बड़ी आँखें मेरी आँखों में डालीं, जिनमें एक अजीब सी बेबसी थी। "प्लीज मम्मी... बस एक बार, सिर्फ अपनी इस छोटी उंगली से इसके निप्पल को छूकर देखूंगा कि यह कितना हार्ड है। इसके बाद मैं कभी जिद नहीं करूंगा, पक्का प्रॉमिस!"
उसकी आँखों में उदासी और वह भोलापन देखकर मेरा ममता भरा दिल आखिर पिघल ही गया। मैंने मन ही मन सोचा कि आखिर है तो यह मेरा ही अंश, मेरा अपना खून। बचपन में कितनी ही बार इसने इन्हीं स्तनों से दूध पीकर अपनी भूख मिटाई है, इसी छाती से लिपटकर यह चैन की नींद सोया है। एक तरह से देखा जाए तो उसका हक तो बनता ही था। लेकिन एक माँ होने के नाते मैं उसे किसी गलत आदत में नहीं डालना चाहती थी, न ही इस बात को बहुत ज्यादा बढ़ावा देना चाहती थी।
इसलिए मैंने खुद को संभालते हुए एक गहरी सांस ली। मैं बिस्तर पर सीधी खड़ी हुई और धीरे-धीरे अपने गाउन के खुले हुए बटन वापस लगा लिए। फिर मैंने कमरे की लाइट बंद कर दी और आकर बिस्तर पर लेट गई। गोलू का चेहरा बहुत उतर गया था, वह काफी दुखी लग रहा था। मैंने उससे कहा, "चलो गोलू, अब बहुत रात हो गई है, चुपचाप सो जाओ।"
वह कुछ नहीं बोला और मायूस होकर दूसरी तरफ मुंह करके लेट गया। उसकी वह नाराजगी मुझसे देखी नहीं गई। मैंने धीरे से सरककर उसे पीछे से कसकर अपनी गोद में भींच लिया। जब मेरा बदन उसके शरीर से सटा, तब मुझे अहसास हुआ कि मेरा बच्चा सच में अब काफी बड़ा हो गया था। लंबाई में तो वह मुझसे आगे निकल ही चुका था, पर इस वक्त पीछे से छूने पर उसका बदन एक गठीले मर्द की तरह सख्त महसूस हो रहा था। उसके चौड़े कंधे और मजबूत पीठ देखकर मुझे अपनी ममता पर गर्व भी हो रहा था और एक अजीब सी घबराहट भी।
मैंने उसे मनाने के लिए उसके कान के पास बेहद लाड और प्यार भरी आवाज में कहा, "मेरा बच्चा... मेरा प्यारा बेटा, ऐसे नाराज नहीं होते। तू तो जानता है ना कि मैं दुनिया में सबसे ज्यादा प्यार तुझसे ही करती हूँ। तेरे लिए तो मैं कुछ भी कर सकती हूँ।"
गोलू ने थोड़ा सा सुसकते हुए और अपनी नाराजगी दिखाते हुए धीमी आवाज में जवाब दिया, "कहाँ करती हो मम्मी... बस कहने की बातें हैं। मैं तो बस थोड़ा सा छूना चाहता था, पर आपको लगता है कि मैं कोई गंदा काम कर रहा हूँ।"
उसकी इस मासूम नाराजगी को दूर करने के लिए मैंने उसका कंधा पकड़कर उसे अपनी तरफ घुमा लिया। अब हम दोनों आमने-सामने थे। कमरे के घने अंधेरे में हमारी आँखें एक-दूसरे को तलाश रही थीं और हल्की सी चमक रही थीं। हमारी सांसों की गरमाहट एक-दूसरे के चेहरों पर महसूस हो रही थी। मैंने खुद को हल्का सा पीछे किया और उसका हाथ अपने हाथ में ले लिया। फिर मैंने बिना कुछ सोचे, उसके कांपते हुए हाथ को उठाया और सीधे नाइट गाउन के ऊपर से ही अपने भरे हुए सीने पर रख दिया।
मेरा सीना छूते ही जैसे गोलू के होश उड़ गए। वह एकदम से कांप उठा, मानो उसके बदन में बिजली दौड़ गई हो। गाउन के पतले कपड़े के पार से भी उसे मेरे स्तनों की वह लाजवाब नरमी और भारीपन साफ महसूस हो रहा था।
उसने डरते और थरथराते हुए बेहद धीमी, मदहोश आवाज में कहा, "मम्मी... ये... ये सच में बहुत नरम हैं। इतने सॉफ्ट तो मैंने कभी किसी चीज को महसूस नहीं किया।"
मैंने मुस्कुराते हुए अपना हाथ उसके हाथ से हटा लिया, लेकिन उसके हाथ को वहीं मेरे सीने पर टिका रहने दिया। मैंने प्यार से अपना दूसरा हाथ उसके गालों पर फेरा, उसकी त्वचा को सहलाते हुए धीरे से कहा, "अब खुश हो ना मेरे राजा बाबू?"
गोलू ने बेहद प्यार और दुलार से अपने हाथ को मेरे स्तन पर थोड़ा सा घुमाया और उन्हें सहलाने लगा। उसके छूने के इस सलीके को देखकर मुझे अंदर ही अंदर एक बात का अहसास हुआ। शायद पिछले कुछ दिनों से जब मैं गहरी नींद में होती थी, तब उसने चुपके से मेरी नींद का फायदा उठाकर इन्हें छुआ था। इसी वजह से वह आज उनकी संवेदनशीलता को इतने अच्छे से समझ रहा था। मुझे अच्छे से याद था कि जब रात में उसके कांपते हाथ मुझे इस जगह छूते थे, तो मेरी नींद अचानक खुल जाती थी, पर मैं अनजान बनी रहती थी। आज वही छुअन जागते हुए महसूस हो रही थी।
धीरे-धीरे, जैसे-जैसे गोलू का डर कम हुआ, मेरे स्तनों पर उसकी उंगलियों की पकड़ थोड़ी मजबूत होने लगी। वह उन्हें थोड़ा सा दबाने लगा। जैसे ही उसने हल्का सा दबाव बनाया, मेरे भीतर एक बहुत तेज, मीठी और तीखी कामुक सिहरन दौड़ गई, जिसने मेरे पूरे बदन को बेबस कर दिया।
इससे पहले कि पानी सिर से ऊपर गुजर जाता, मैंने तुरंत आगे बढ़कर उसका हाथ वहां से हटाया और उसे कसकर अपनी छाती से चिपका लिया। मैंने उसे बहुत प्यार से गले लगाते हुए अपने दिल का हाल बयां किया, "गोलू... मेरी बात सुन बेटा। जब तू इस तरह से अपनी पकड़ मजबूत करता है ना, तो तेरी इस छुअन से मेरा हाल बहुत अजीब होने लगता है। मैं एक माँ हूँ, और मुझे अंदर से बहुत घबराहट और बेचैनी होने लगती है। इसलिए तू ऐसा मत किया कर। आज के बाद कभी ऐसी जिद मत करना, समझ गए ना?"
मेरी आवाज में छिपी वह बेबसी और ममता भरी सीख सुनकर गोलू ने धीमे से हामी भरी। उसने अपना सिर मेरी छाती पर रख दिया। फिर हम दोनों एक-दूसरे से पूरी तरह लिपट गए और उस शांत, अंधेरी रात में चैन की सांस लेते हुए सो गए।