मेनका की नींद खुली तो देखा कि उसके ससुर उसकी छाती दबाते हुए उसके निपल्स को मसल रहे थे और उन्हे अपनी जीभ से छेड़ रहे थे। उसने अंगड़ाई लेते हुए उन्हे लिटा दिया और उठ कर उनके लंड को अपने मुँह मे ले चूसने लगी। काफ़ी देर तक वो उनके लंड और अंडो को चूमती,चुस्ती रही और फिर उनके उपर चढ़ कर उनका लंड अपनी चूत मे ले लिया और उछल-उछल कर अपने ससुर को चोदने लगी।
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दुष्यंत वेर्मा का जासूस मनीष वो फोटो ले कर हर जगह छान-बीन कर रहा था।"अरे साहब,ये आदमी तो कुछ दिन पहले तक मेरे से माल ले जाता था,पर इधर अचानक गायब हो गया है। मेरे को भी इसकी तलाश है।"
"तुझे क्यू? तेरे ग्राहक कम हो गये हैं क्या?" मनीष शहर के एक पहुँचे हुए ड्रग डीलर से बात कर रहा था।
"नही सर,उपरवाले के करम से धंधा मस्त चल रहा है। पर बात क्या है ना कि ये साला नशेड़ी लगता नही था। मुझे शुरू मे शक़ था,फिर लगा कि नया-नया शौक चढ़ा होगा पट्ठे को। पर जब ये गायब हो गया तो मुझे पूरा यकीन हो गया कि ये साला मुझसे माल खरीद कर आगे ज़्यादा दाम मे बेचता होगा। मा कसम! बहनचोद,मिल जाए तो साले की ऐसी-तैसी कर दूँगा।"
"ठीक है,कर देना ऐसी-तैसी। पर उस वक़्त ज़रा मेरा भी ख़याल रखना,मैं भी इस से मिलना चाहता हू।" उसने उसे 1000 का नोट पकड़ाया।
"ओके,सर।" सलाम ठोंक कर वो डीलर चलता बना।
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जुएदे रहिये