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Incest खेल ससुर बहु का

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चलिए आगे बढ़ते है
 

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पार्ट--9

गतान्क से आगे........

उस रात राजासाहब ने अपनी बहू को दोबारा नही चोदा। वो जानते थे कि अभी उसकी गांड को और चूत को थोड़ा आराम चाहिए था। वो मेनका को बाहों मे भर कर वैसे ही सो गये।

सवेरे मेनका की नींद खुली तो वो अपने ससुर के बिस्तर मे,उनकी बाहों मे नंगी पड़ी थी। वो हौले से उनके आगोश से निकली,उनके होठों को बहुत धीरे से चूमा और क्लॉज़ेट के रास्ते अपने कमरे मे चली गयी।

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कल्लन बॅंगलुर पहुँच गया था और जब्बार और मेनका के साथ जब्बार के रूम मे बैठा था।

"भाई,मुझे ये समझ नही आ रहा कि रिहेब सेंटर के अंदर कैसे घुसा जाए और राजा के पिल्ले को कैसे बाहर निकाला जाए?

तुम्हे जगह दिखा दी है और इसने तुम्हे अंदर के सारे डीटेल्स भी दे दिए हैं।",जब्बार ने मलिका की ओर इशारा किया,"अब तुम्ही कोई रास्ता सुझाओ।"

"एक रास्ता है पर उसके लिए कुछ चीज़ों की ज़रूरत पड़ेगी।"

"कौन सी चीज़ें?"

"एक बेस्कॉम(बॅंगलुर पॉवेर को।) की वन और उसके साथ एक लंबी सीधी, अगर आज इनका इंतेज़ाम हो जाता है तो आज रात को मैं एक बार सेंटर के अंदर जाकर वहा का जायज़ा लूँगा और कल रात विश्वजीत को बाहर निकल लाऊंगा।"

"ओके,मैं कोशिश करता हू। तब तक तुम दोनो यही रहना।",जब्बार रूम से बाहर चला गया।

उसके निकलते ही मलिका दौड़ते हुए कल्लन की बाहों मे समा गयी और दोनो एक दूसरे को पागलों की तरह चूमने लगे। मलिका उसे चूमते हुए उसकी शर्ट के बटन खोलने लगी तो कल्लन उसकी टाइट जीन्स मे कसी गांड को दबाने लगा। मलिका ने उसकी शर्ट उतार कर उसे बिस्तर पर धकेल दिया और उस पर चढ़ कर बैठ गयी। वो भूखी शेरनी की तरह उस पर टूट पड़ी और उसकी छाती चूमने लगी।

उसने खुद ही अपनी शर्ट उतार दी,ब्रा उसने पहनी नही थी तो शर्ट खुलते ही उसकी छातिया कल्लन के सामने छलक गयी। उसने हाथ बढ़ा कर उन्हे दबोच लिया। मलिका अपनी गांड उसके लंड पे रगड़ रही थी। थोड़ी देर तक इसी तरह एक दूसरे के जिस्मो को मसल ने के बाद दोनो बेताबी से उठ बैठे और एक दूसरे की पॅंट उतार दी। मलिका अब पूरी नंगी थी,वही कल्लन अब केवल एक अंडरवेर मे था।

दोनो फिर एक दूसरे से चिपक कर चूमने लगे। मलिका ने अपना हाथ कल्लन के अंडरवेर मे डाल दिया और उसके लॅंड को मसलने लगी। कल्लन भी उसकी गांड को बेतहाशा रगड़ रहा था। मलिका झुकी और उसका अंडरवेर उतार कर फेंक दिया और उसके लंड को अपने मुँह मे भर लिया।

अब कल्लन बेड पे घुटनो के बल खड़ा था और मलिका उसके लंड को चूस रही थी। कल्लन ने मलिका के बालों को पकड़ा हुआ था और कमर हिला-हिला कर उसके मुँह को चोद रहा था। मलिका ने एक हाथ से उसके लंड को पकड़ा हुआ था और दूसरे से अपनी चूत के दाने को रगड़ रही थी। और अपनी चूत को एक अच्छे हमले के लिए तैयार कर रही थी।

अब कल्लन के लिए अपने पे काबू रखना नामुमकिन हो गया था। उसने मलिका को अपने लंड से अलग किया और उसे बेड पर पटक कर उसकी टांगे फैला दी। फिर अपने लंड को पकड़ कर एक ही झटके मे उसकी चूत मे उतार दिया।

"एयेए...आअहह।।!",मलिका कराही और उस से चिपक गयी। कल्लन का लंड उसकी चूत की गहराइयाँ नापने लगा और वो हवा मे उड़ने लगी। उसने अपने नाख़ून उसकी पीठ मे गढ़ा दिए और अपनी टांगे लपेट उसे अपने बदन से चिप्टा लिया। कल्लन ने अपने धक्के और तेज़ कर दिए और उसकी तेज़ चुदाई से मलिका तुरंत झड़ गयी। थोड़ी ही देर मे कल्लन ने भी उसके चूत के अंदर अपना वीर्यदान कर दिया। वो उसके सीने पे सर रख हाँफने लगा।

थोड़ी देर तक वैसे ही पड़े रहने के बाद मलिका ने फिर से अपनी चूत सिकोड कर उसके लंड को छेड़ना शुरू कर दिया। अपनी एक उंगली उसने उसके गांड के छेद मे डाल दी तो कल्लन भी फिर से गरम होने लगा। उसने फिर से अपनी कमर हिलाना शुरू कर दिया,लंड फिर से सख़्त हुआ तो उसके धक्कों मे और जोश आ गया और मलिका एक बार फिर चुदने लगी।

-------------------------------------------------------------------------------

दोपहर का वक़्त था और मेनका राजासाहब के ऑफीस चेम्बर मे उनकी चेर के बगल मे खड़ी उन्हे कोई फाइल दिखा रही थी। फाइल देखते-देखते राजासाहब ने अपना बाया हाथ उसकी कमर पे लगा दिया और उसकी गांड सहलाने लगे।

"क्या कर रहे हो? कोई देख लेगा।",वो अलग होने के लिए छटपटाने लगी तो राजासाहब ने अपनी पकड़ और मज़बूत कर दी," प्लीज़! छोडो ना।",मेनका को बहुत डर लग रहा था,कही कोई आ गया तो ग़ज़ब हो जाएगा, लेने के देने पद सकते है और बेकार में इस मजे के माहोल की गांड लग जायेगी, और उसके ससुर तो बिल्कुल पागल हो गये थे।

"यश,प्लीज़! अभी नही! ऊऊओ...ऊऊहह..!",राजासाहब ने उसे वैसे ही चेर पे बैठ हुए पकड़ कर अपनी तरफ घुमा कर उसके पेट मे अपना मुँह घुसा दिया था।

"आ....आआहह...! प्लीज़....छ्च..हहोड़ो नाअ....कोई आ...ना... जा...आए..."।राजासाहब उसकी नाभि मे अपनी जीभ फिरा रहे थे और उसके चिकने पेट को भी चूम रहे थे।उन्होने अपने हाथ उसकी पीठ से सरका कर नीचे उसकी गांड को सहलाना शुरू कर दिया तो मेनका उनके बाल पकड़ उन्हे अपने से अलग करने लगी। उसकी चूत गीली हो रही थी पर उसे बहुत डर भी लग रहा था।

तभी दरवाज़े पे दस्तक हुई तो वो छितक कर उनसे अलग हो अपनी साडी ठीक कर फाइल पढ़ने लगी। राजासाहब ने भी अपने बाल ठीक किए,"कम इन।"

"अरे आप हैं सेशाद्री साहब! आपको नॉक करने की क्या ज़रूरत है।",उन्होने एक बहुत हल्की सी शरारती मुस्कान अपनी बहू की तरफ फेंकी जिसे सेशाद्री नही देख पाए। मेनका ने गुस्से से उन्हे देखा और फिर से फाइल पढ़ने लगी।

"क्या हुआ कुँवारानी? आप परेशान लग रही हैं। तबीयत तो ठीक है ना?",सेशाद्री मेनका से मुखातिब हुए।

"नही अंकल, तबीयत थोड़ी गड़बड़ लग रही है"

"अरे,तब आप यहा क्या कर रही हैं? आपको तो घर जाकर आराम करना चाहिए। सर,मैं ग़लत तो नही कह रहा।"

"नही,सेशाद्री साहब।"

"तो मैं घर जाऊं?",मेनका ने बड़ी मासूमियत से अपने ससुर से पूचछा।

"हा,हा! बिल्कुल।"

"ओके",मेनका ऑफीस के दरवाज़े की ओर बढ़ गयी औरदरवाज़े पे पहुँच कर सेशाद्री की पीठ के उपर से अपने ससुर को मुँह चिढ़ा दिया। राजासाहब को मन ही मन सेशाद्री पे बहुत गुस्सा आ रहा था। अगर वो अभी नही आता तो वो मेनका को अभी चोद रहे होते। पर अब क्या किया जा सकता था। वो मन मार कर सेशाद्री के लाए पेपर्स पढ़ने लगे।

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बने रहिये मेरे साथ इस कहानी में


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चलिए कहानी में आगे बढ़ते है ................
 

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अब आगे............


रात को महल से सारे नौकर बाहर चले गये तो राजासाहब ने दरवाज़ा बंद किया और केवल एक पायजामा पहने क्लॉज़ेट के रास्ते अपनी बहू के क्लॉज़ेट मे पहुँच गये। मेनका वहा अपनी साडी उतारना शुरू ही कर रही थी कि उन्हे देख चिहुन्क पड़ी।

"अरे ये शुभ काम हमे करने दो, मेमसाब।",राजासाहब ने उसका आँचल पकड़ कर खींच दिया।

"अभी जाओ। हमे कपड़े बदलने दो ना।",मेनका उनके हाथ से अपनी साडी खींचने लगी।

"फिर ये दरवाज़ा क्यू खुला छोडा?",राजासाहब ने क्लॉज़ेट के सीक्रेट दरवाज़े की ओर इशारा किया।

"ये तो कपड़े चेंज करने के बाद के लिए।",मेनका शर्मा गयी तो उसके ससुर ने उसे खींच अपने सीने से लगा लिया और उसके चेहरे को हाथों मे ले निहारने लगे। उसका आँचल नीचे गिर गया था और उसकी ब्लाउस मे भारी बोबले उनके बालों भरे सीने से दबी हुई थी।

"तुम कितनी खूबसूरत हो,मेनका। हमे तो यकीन ही नही होता कि तुम सिर्फ़ हमारी हो।।",मेनका के गाल शर्म से लाल हो गये थे और आँखें बंद। राजासाहब ने उसकी बंद पलकों को और फिर गालों को चूम लिया। फिर हाथ उसकी कमर मे डाल उसके होठ चूमने लगे। मेनका भी उनसे लिपट गयी और अपनी जीभ उनके मुँह मे डाल उनकी जीभ से खेलने लगी।राजासाहब एक हाथ आगे लाए और उसकी कमर पे अटकी साडी को खींच दिया और फिर उसे उसके बदन से अलग कर दिया।

मेनका के हाथ उनकी पीठ पर घूम रहे थे और वो अपनी चूचियो को उनके सीने पे हल्के-हलके रगड़ रही थी। बीच-बिच मे हाथ नीचे ले जाकर उनके पायजामा मे घुसा वो उनकी गांड पे भी अपने नाख़ून गढ़ा रही थी। राजासाहब ने उसके पेटिकोट को भी नीचे सरका दिया। आज मेनका ने पेंटी नही पहनी थी तो राजासाहब अब उसकी नंगी गांड को जम के दबा रहे थे। उसकी चूत उसके ससुर की हरकतों से गीली होने लगी थी। इस बार जब उसके हाथ नीचे गये तो उन्होने उनके पायजामा को उनकी गांड से नीचे उतार दिया। पायजामा घुटनो तक आया तो उसने अपनी एक टाँग उठाई और पैर से उसे नीचे उनकी टांगो से उतार कर अलग कर दिया।
फनलव की पेशकश।

अब राजासाहब पूरे नंगे थे और मेनका केवल ब्लाउस मे थी,दोनो एक दूसरे से चिपके एक दूसरे की पीठ और गांड सहलाते,अपनी छातिया रगड़ते चूम रहे थे। राजासाहब का तना हुआ लंड उनकी बहू की गीली चूत से सटा था और दोनो अपनी-अपनी कमर हिला कर लंड और चूत को एक साथ रगड़ रहे थे।

राजासाहब ने अपने हाथ पीछे ले जाकर मेनका के ब्लाउस के हुक खोल दिए और उसे नीचे उतार दिया। मेनका अब बिल्कुल गरम हो गयी थी,जब राजासाहब उसके ब्रा को उतारने लगे तो उसने हाथ नीचे कर अपनी चूचियाँ नंगी करने मे उनकी पूरी मदद की। अब दोनो पूरे नगे एक दूसरे के जिस्मो से खेल रहे थे।

चूमते हुए राजासाहब की नज़र बगल मे पड़ी तो उन्होने देखा की ड्रेसिंग टेबल के शीशे मे दोनो की परछाई नज़र आ रही थी। उन्होने चूमते हुए मेनका को इशारे से ये दिखाया तो वो शर्मा कर क्लॉज़ेट से बाहर जाने लगी। पर राजासाहब ने हाथ पकड़ कर उसे शीशे के सामने खड़ा कर दिया और पीछे से उसकी कमर मे हाथ डाल कर खड़े हो गये।


बाकी है...................बने रहिये


।।जय भारत।।
 
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"क्या कर रहे हो? कमरे मे चलो ना।" मेनका का शर्म से बुरा हाल था। शीशे मे उसका पूरा हुस्न नज़र आ रहा था और पीछे से चिपके उसके ससुर भी। उसे लग रहा था जैसे कोई और उन दोनो को देख रहा हो।

"प्लीज़,यश चलो ना।!"

"क्यू मेरी जान?",राजासाहब उसकी चूचियाँ दबाते हुए उसके निपल्स मसल रहे थे और उनका मुँह उसकी गर्दन मे था।

"हमे शरम आती है।"उसने एक हाथ अपने ससुर के बालों मे फिराते हुए कहा।

"अरे अब हमसे कैसी शर्म?",राजासाहब ने उसे थोडा सा अपनी तरफ घूमाते हुए अपने होठ उसकी एक चूची से लगा दिए।

"ऊओ..ऊवन्न....हह...!",मेनका की आँखे बंद हो गयी और वो अपनी गांड से अपने ससुर के लंड पर रगड़ने लगी। राजासाहब का मुँह उसकी एक चूची पे,उनका एक हाथ उसकी दूसरी चूची पे और उनका दूसरा हाथ उसकी चूत पे लग गये थे। मेनका तो जन्नत मे पहुँच गयी थी। उसके ससुर उसके नाज़ुक अंगो को छेड़ रहे थे और खास कर उनकी उंगली तो उसकी चूत को रगड़-रगड़ कर उसे गीली पर गीली किए जा रही थी।

ये सारा नज़ारा दोनो शीशे मे देख और मस्त हो रहे थे। तभी राजासाहब ने उसे आगे झुकाया तो वो ड्रेसिंग टेबल का सहारा ले झुक गयी। उन्होने उसकी कमर पकड़ी और पीछे से अपना लंड उसकी चूत मे पेल दिया और उसे चोदने लगे। मेनका आँहे भरने लगी। चोद्ते हुए उन्होने ड्रेसिंग टेबल से क्रीम उठाई और उसकी गांड मे लगाने लगे। मेनका समझ गयी कि आज फिर उसकी गांड मारी जाएगी और ये ख़याल आते ही उसकी चूत ने पानी छोड़ दिया।

राजासाहब वैसे ही चोद्ते रहे और थोड़ी देर बाद लंड उसकी चूत से निकाल उसकी गांड मे उतार दिया। उसे हल्का सा दर्द हुआ पर जैसे ही लंड गांड मे उतरा,उसके ससुर ने उसकी चूचिया और चूत को फिर से रगड़ना शुरू कर दिया और उसे दर्द से ज़्यादा मज़ा आने लगा। राजासाहब थोड़ी देर तक उसकी गांड मारते रहे और फिर लंड निकाल कर फिर से चूत मे डाल दिया। काफ़ी देर तक वो ऐसे ही शीशे मे अपनी बहू से नज़रे मिलाते हुए, बारी-बारी से उसकी चूत और गांड मारते रहे और इस दौरान मेनका 3 बार और झड़ गयी। अब उसकी टांगे जवाब दे रही थी। राजासाहब भी ये भाँप गये थे। उन्होने अपना लंड निकाला और उसे गोद मे उठा कमरे मे बिस्तर पे ले गये।

अब मेनका लेटी हुई थी और उसके ससुर उसके उपर चढ़ कर लंड उसकी चूत मे घुसा रहे थे। मेनका ने अपनी टांगो और बाहों मे अपने ससुर के बदन को कस लिया। अब राजासाहब अपनी बहू को उसी के बिस्तर मे चोद रहे थे। उनका बड़ा लंड उसकी चूत को तेज़ी से चोद्ते हुए उसकी कोख पे चोट कर रहा था। हर चोट पे मेनका के जिस्म मे मज़े की लहर दौड़ जाती और उसकी आह निकल जाती। उसकी कसी चूत की दीवारें भी उसके ससुर के लंड को अपनी पकड़ मे कसे हुए थी।

राजासाहब काफ़ी देर से अपने आंडो मे उमड़ रहे सैलाब को रोके हुए थे और अब उनके धक्कों मे तेज़ी आ रही थी,मेनका भी नीचे से ज़ोर-जोर से अपनी कमर हिला रही थी। उसने अपने ससुर के बदन को कस के जाकड़ लिया और बिस्तर से उठती हुई उचक कर उन्हे चूमने लगी,उसकी चूत ने राजासाहब के लंड को बिल्कुल जाकड़ लिया और पानी छोड़ दिया। जैसे ही वो झड़ी की राजासाहब की कमर भी झटके खाने लगी और उनके लंड ने उसकी चूत को अपने पानी से लबालब भर दिया। मेनका के चेहरे पे खुशी और संतोष का भाव आया और वैसे ही अपने ससुर से लिपटी हुई थकान के मारे नींद की गोद मे चली गयी।

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आज के लिए बस यही तक फिर मिलेंगे अगले अपडेट के साथ ।
तब तक के लिए फनलव की ओर से।



।। जय भारत।।

16

 

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आप सब की प्रतिक्रया की अपेस्क्षा सह.........................
 
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