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Shukriya dost.आपकी स्टोरी पढकर बहुत अच्छी लगी। अगले एपिसोड का इन्तजार रहेगा। धन्यवाद।
Bane rahiye.....
Shukriya dost.आपकी स्टोरी पढकर बहुत अच्छी लगी। अगले एपिसोड का इन्तजार रहेगा। धन्यवाद।
उधर ससुर बहु chudayi me lage huye hai aur yaha viswa ko Maar द्वय bahnchod jabbar ne.....जैसे ही वान सेंटर के पास पहुँची वो गार्ड हाथ हिलाता नज़र आया।
"क्या हुआ?"
"अरे भाई,हमारा जनरेटर नही चल रहा?"
"अरे,अभी लाइट आ जाएगी,जेनरेटर का क्या करना है।"
"देख लो भाई,मरीज़ो को तकलीफ़ हो जाएगी।" गार्ड ने बोला। मैत्री की लिखावट
"अच्छा भाई,पहले तुम्हारा ही काम करते हैं। गेट खोलो।"
वॅन अंदर लगा कर जब्बार उतरा,"कहा है जेनरेटर?"
"वहा नीचे।",गार्ड नीचे जाने लगा।
"तुम रहने दो,मैं देखता हू।",जब्बार बेसमेंट मे चला गया।
"वॅन खुली है, इसे चुपके से उसमे पहुँचाओ और तुम भी उसमे छिप जाओ।"
"ओके!" कल्लन धीरे-धीरे बाहर पहुँचा,गार्ड गेट के पास घूम रहा था। उस से छिपते हुए कल्लन ने विश्वा को अंदर डाला और खुद भी लेट गया। थोड़ी देर बाद जब्बार जनरेटर स्टार्ट कर बाहर निकला और वेन स्टार्ट कर दी,"हो गया भाई तेरा काम।"
"शुक्रिया भाई।" गार्ड ने गेट खोला। इस पूरे दौरान जब्बार ने टोपी पहने हुई थी और अंधेरे की वजह से गार्ड ठीक से उसका चेहरा नही देख पाया। जब्बार ने वॅन कॉलेज की तरफ घुमाई और फिर पीछे आके दीवार के पास गिरी सीढ़ी उठाई और फिर घुमा कर जंक्शन बॉक्स के पास गया और सेंटर की बिजली कनेक्ट कर दी।
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मेनका अभी भी अपने ससुर की गोद मे उनका लंड अपनी चूत मे लिए बैठी उन्हे चूम रही थी। राजासाहब थोड़ी ही देर पहले झडे थे पर दोनो का दिल अभी भी नही भरा था। राजासाहब झुक कर उसकी चूचियाँ चूसने लगे तो मेनका मस्त हो कर नीचे से कमर हिलाने लगी। राजासाहब ने उसकी गांड मसलते हुए एक उंगली उसकी गांड के छेद मे डाल दी। मेनका चिहुनक के और ज़ोर से उनके लंड पे उछलने लगी। राजासाहब का सोया लंड एक बार फिर से उनकी बहू की चूत के अंदर फिर से अपनी जगह बना रहा था। वो भी नीचे से अपनी कमर हिलाने लगे। उन्होने अपने हाथों मे उसकी गांड की फांके भर एक उंगली उसमे घुसाए हुए उठ कर अपने घुटनो पे बैठ गये और लगे उसे चोदने। मेनका मस्त हो गयी और उनसे लिपट कर चुदाई का मज़ा लेने लगी। राजासाहब झुक कर बारी-बारी से उसकी चूचिया और कड़े निपल्स को निचोड़ रहे थे। कमरे मे गीली चूत मे अंदर-बाहर होते लंड की फॅक-फॅक,राजासाहब की भारी साँसे और मेनका की आँहे गूँज रही थी।
मेनका के बदन मे बिजली दौड़ गयी और उसकी चूत ने चुतरस छोड़ दिया। राजासाहब की बहू उनसे कस के लिपट गयी,वो समझ गयी को वो झड़ रही है,उन्होने ने भी 2-3 ज़ोरदार धक्के लगाए और उसकी चूत मे पानी छोड़ दिया।
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उधर....
विश्वा होश मे आया तो उसने अपने को एक बंध गंदे कमरे मे कुर्सी पे बँधा पाया। सामने जब्बार,कल्लन और मलिका खड़े थे।
"तू!!?" वो अपने बंधन खोलने की कोशिश करने लगा। फनलव की पेशकश
"आराम से कुंवर", जब्बार ने अपने दोनो साथियो को इशारा किया,"कुंवर साहब की खातिर शुरू करो।“
कल्लन और मलिका ने उसके बँधे हाथो की नसो मे इंजेक्षन्स लगाने शुरू कर दिए।
"नही..नही...मुझे छोड़ दे बहनचोद,कमीने!",विश्वा चिल्लाने लगा तो जब्बार ने उसके मुँह मे कपड़ा ठूंस दिया।" लगाते रहो इम्जेक्षन यह भोसड़ीके को, तब तक जब तक कुंवर साहब भगवान के पास ना पहुँच जाए।।"
विश्वा की आँखे ख़ौफ्फ से फैल गयी और कल्लन और मलिका उसे इंजेक्षन लगाते रहे।
थोड़ी ही देर बाद विश्वा बेसूध हो गया। तीनो ने दस्ताने पहने हुए थे और मलिका यूज़ की हुई सरिंजस उठा कर एक पॅकेट मे रख रही थी। कल्लन विश्वा की नब्ज़ देख रहा था, "काम हो गया।"
"यस!",जब्बार खुशी से चिल्लाया। खोलो इस बहनचोदकी रस्सियाँ और चलो बाहर।"
उन्होने विश्वा की लाश गली के एक नाले के पास गिरा दी और उस कमरे को वैसे ही खुला छोड़ कर अलग-अलग रस्तो से बॅंगलुर छोड़ने की तैयारी करने लगे।
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आज के लिए बस यही तक.
दुबारा मिलेंगे एक नए एपिसोड के साथ
तब तक के लिए जय भारत
उधर ससुर बहु chudayi me lage huye hai aur yaha viswa ko Maar द्वय bahnchod jabbar ne.....जैसे ही वान सेंटर के पास पहुँची वो गार्ड हाथ हिलाता नज़र आया।
"क्या हुआ?"
"अरे भाई,हमारा जनरेटर नही चल रहा?"
"अरे,अभी लाइट आ जाएगी,जेनरेटर का क्या करना है।"
"देख लो भाई,मरीज़ो को तकलीफ़ हो जाएगी।" गार्ड ने बोला। मैत्री की लिखावट
"अच्छा भाई,पहले तुम्हारा ही काम करते हैं। गेट खोलो।"
वॅन अंदर लगा कर जब्बार उतरा,"कहा है जेनरेटर?"
"वहा नीचे।",गार्ड नीचे जाने लगा।
"तुम रहने दो,मैं देखता हू।",जब्बार बेसमेंट मे चला गया।
"वॅन खुली है, इसे चुपके से उसमे पहुँचाओ और तुम भी उसमे छिप जाओ।"
"ओके!" कल्लन धीरे-धीरे बाहर पहुँचा,गार्ड गेट के पास घूम रहा था। उस से छिपते हुए कल्लन ने विश्वा को अंदर डाला और खुद भी लेट गया। थोड़ी देर बाद जब्बार जनरेटर स्टार्ट कर बाहर निकला और वेन स्टार्ट कर दी,"हो गया भाई तेरा काम।"
"शुक्रिया भाई।" गार्ड ने गेट खोला। इस पूरे दौरान जब्बार ने टोपी पहने हुई थी और अंधेरे की वजह से गार्ड ठीक से उसका चेहरा नही देख पाया। जब्बार ने वॅन कॉलेज की तरफ घुमाई और फिर पीछे आके दीवार के पास गिरी सीढ़ी उठाई और फिर घुमा कर जंक्शन बॉक्स के पास गया और सेंटर की बिजली कनेक्ट कर दी।
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मेनका अभी भी अपने ससुर की गोद मे उनका लंड अपनी चूत मे लिए बैठी उन्हे चूम रही थी। राजासाहब थोड़ी ही देर पहले झडे थे पर दोनो का दिल अभी भी नही भरा था। राजासाहब झुक कर उसकी चूचियाँ चूसने लगे तो मेनका मस्त हो कर नीचे से कमर हिलाने लगी। राजासाहब ने उसकी गांड मसलते हुए एक उंगली उसकी गांड के छेद मे डाल दी। मेनका चिहुनक के और ज़ोर से उनके लंड पे उछलने लगी। राजासाहब का सोया लंड एक बार फिर से उनकी बहू की चूत के अंदर फिर से अपनी जगह बना रहा था। वो भी नीचे से अपनी कमर हिलाने लगे। उन्होने अपने हाथों मे उसकी गांड की फांके भर एक उंगली उसमे घुसाए हुए उठ कर अपने घुटनो पे बैठ गये और लगे उसे चोदने। मेनका मस्त हो गयी और उनसे लिपट कर चुदाई का मज़ा लेने लगी। राजासाहब झुक कर बारी-बारी से उसकी चूचिया और कड़े निपल्स को निचोड़ रहे थे। कमरे मे गीली चूत मे अंदर-बाहर होते लंड की फॅक-फॅक,राजासाहब की भारी साँसे और मेनका की आँहे गूँज रही थी।
मेनका के बदन मे बिजली दौड़ गयी और उसकी चूत ने चुतरस छोड़ दिया। राजासाहब की बहू उनसे कस के लिपट गयी,वो समझ गयी को वो झड़ रही है,उन्होने ने भी 2-3 ज़ोरदार धक्के लगाए और उसकी चूत मे पानी छोड़ दिया।
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उधर....
विश्वा होश मे आया तो उसने अपने को एक बंध गंदे कमरे मे कुर्सी पे बँधा पाया। सामने जब्बार,कल्लन और मलिका खड़े थे।
"तू!!?" वो अपने बंधन खोलने की कोशिश करने लगा। फनलव की पेशकश
"आराम से कुंवर", जब्बार ने अपने दोनो साथियो को इशारा किया,"कुंवर साहब की खातिर शुरू करो।“
कल्लन और मलिका ने उसके बँधे हाथो की नसो मे इंजेक्षन्स लगाने शुरू कर दिए।
"नही..नही...मुझे छोड़ दे बहनचोद,कमीने!",विश्वा चिल्लाने लगा तो जब्बार ने उसके मुँह मे कपड़ा ठूंस दिया।" लगाते रहो इम्जेक्षन यह भोसड़ीके को, तब तक जब तक कुंवर साहब भगवान के पास ना पहुँच जाए।।"
विश्वा की आँखे ख़ौफ्फ से फैल गयी और कल्लन और मलिका उसे इंजेक्षन लगाते रहे।
थोड़ी ही देर बाद विश्वा बेसूध हो गया। तीनो ने दस्ताने पहने हुए थे और मलिका यूज़ की हुई सरिंजस उठा कर एक पॅकेट मे रख रही थी। कल्लन विश्वा की नब्ज़ देख रहा था, "काम हो गया।"
"यस!",जब्बार खुशी से चिल्लाया। खोलो इस बहनचोदकी रस्सियाँ और चलो बाहर।"
उन्होने विश्वा की लाश गली के एक नाले के पास गिरा दी और उस कमरे को वैसे ही खुला छोड़ कर अलग-अलग रस्तो से बॅंगलुर छोड़ने की तैयारी करने लगे।
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आज के लिए बस यही तक.
दुबारा मिलेंगे एक नए एपिसोड के साथ
तब तक के लिए जय भारत
जी दोस्त आपकी बात सही हैउधर ससुर बहु chudayi me lage huye hai aur yaha viswa ko Maar द्वय bahnchod jabbar ne.....