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Incest खेल ससुर बहु का

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Funlover

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Menka ki family ko bhi shamil karo....story is running good...wow..👏👏
शुक्रिया दोस्त कहानी आपको पसंद आ रही है जानकार बहोत ख़ुशी हो रही है

अब आपकी ख्वाहिश पर आते है तो यह कहानी सिर्फ सेक्स या चुदाई पर निर्भर नहीं है दोस्त. यह कहानी में ससुर बहु मिलकर कैसे परिस्थिति का सामना करते है और कैसे उस असमंजस से बाहर आते है उस पर आधारित कहानी है. और कहानी के प्रवाह में मेनका की फेमिली का कोई रोल नहीं है.

क्षमा चाहती हूँ
 

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Aap pahle writer h jo mujhse bat ki aapki ye story bahut achhi lagi kaise ek pariwar se dusre pariwar Wale jalte h uski tarakki aur uske mehnat par mai esi tarah ki story dhundti rahti hu aisi story mujhe sirf 4 se 5 story mili h jo pasand aai jisme do story adhuri likhi gai

शुक्रिया दोस्त

मुझे तो नहीं लागता की आपसे बात ना करने का कोई कारण भी होगा.

फिर भी मैं सब पाठको से बात करती हूँ खासकर उन लोगो से जो लोग कहानी के बारे में बात करते है

मेरे पास ऐसी कोई कहानी फिलहाल उपलब्ध नहीं है पर प्लोट अच्छा है आगे कोई कहानी लिखूंगी तो आपके इस सुझाव पर जुरूर गार करुँगी.. लेकिन मुझे यकीं है की आपकी मनपसंद सब्जेक्ट इस कहानी में कुछ कुछ मिला है


शुक्रिया दोस्त आपने एक नया प्लाट दिया और बताया की इस सब्जेक्ट पर काफी कम कहानिया बनी हुई है......आगे कोशिश करेंगे


अभी फिलहाल काफी कहानी मेरी चल रही है और मेरे पास समय का अभाव है की मैं कोई नया शुरू करू......



आपका बहोत बहोत धन्यवाद दोस्त मुझे आप से बात कर के ख़ुशी हुई......

बने रहिये
 
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शुक्रिया दोस्त

मुझे तो नहीं लागता की आपसे बात ना करने का कोई कारण भी होगा.

फिर भी मैं सब पाठको से बात करती हूँ खासकर उन लोगो से जो लोग कहानी के बारे में बात करते है

मेरे पास ऐसी कोई कहानी फिलहाल उपलब्ध नहीं है पर प्लोट अच्छा है आगे कोई कहानी लिखूंगी तो आपके इस सुझाव पर जुरूर गार करुँगी.. लेकिन मुझे यकीं है की आपकी मनपसंद सब्जेक्ट इस कहानी में कुछ कुछ मिला है


शुक्रिया दोस्त आपने एक नया प्लाट दिया और बताया की इस सब्जेक्ट पर काफी कम कहानिया बनी हुई है......आगे कोशिश करेंगे


अभी फिलहाल काफी कहानी मेरी चल रही है और मेरे पास समय का अभाव है की मैं कोई नया शुरू करू......



आपका बहोत बहोत धन्यवाद दोस्त मुझे आप से बात कर के ख़ुशी हुई......

बने रहिये
Thank you
 
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Aap pahle writer h jo mujhse bat ki aapki ye story bahut achhi lagi kaise ek pariwar se dusre pariwar Wale jalte h uski tarakki aur uske mehnat par mai esi tarah ki story dhundti rahti hu aisi story mujhe sirf 4 se 5 story mili h jo pasand aai jisme do story adhuri likhi gai
Aapka bahot bahot dhanyawad mi aap mere sabhi post padh rahe hai.

Shukriya dost.
 

Funlover

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Chaliye dosto ab ham kahani ke Ant ki taraf kuch karte hai....
 
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Chaliye dosto aage badhte hai.
 

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गतान्क से आगे.............................



मेनका ने राजासाहब को लिटा दिया और उनके सीने पे अपनी बड़ी-बड़ी चूचिया रख के लेट गयी," बॅंगलुर कब जाओगे?"

"सोचते हैं कल ही निकल जाएँ।",राजासाहब उसकी चिकनी कमर सहला रहे थे।
फनलवकी प्रस्तुति.

"हमे भी ले जाओगे ना?"

"नही,मेनका,तुम्हे तुम्हारे मायके छोड़ देंगे।"

"क्यू?",मेनका अपनी कोहनी पे अपना भार रख थोड़ा उठ गयी। राजासाहब को अपने सीने पे उसकी चूचियो का दबाव बड़ा भला लग रहा था,उसके उठते ही छातिया हटी तो उन्होने हाथ कमर से उपर सरका उसकी पीठ दबा के उसके उरोजो को वापस अपने सीने पे दबा दिया।

"अभी तुम्हारा बॅंगलुर जाना ठीक नही होगा। ये कोई बिज़नेस डील नही है। तुम अपने माता-पिता के पास रहोगी तो हम निश्चिंत रहेंगे कि तुम सही-सलामत हो।"

"और हम कैसे निश्चिंत रहेंगे तुम्हारे बारे मे?",मेनका ने अपनी एक जाँघ उनके उपर चढ़ा दी।

"हमारी फ़िक्र मत करो। हम काम ख़त्म कर जल्दी वापस लौट आएँगे।",उन्होने उसकी जाँघ को खींच अब उसे अपने उपर पूरी तरह से ले लिया। अब मेनका की चूत उनके लंड पे लगी हुई थी।

"तो ठीक है,कल हमे हमारे मायके छोड़ तुम बॅंगलुर चले जाना पर वादा करो कि जैसे ही वहा से वापस आओगे सीधा हमे लेने आओगे।"

"वादा तो कर दे पर तुम्हारे माता-पिता को अजीब नही लगेगा! और फिर वो ये भी तो चाहेंगे कि तुम उनके साथ कुछ और दिन रह लो।",राजासाहब ने उसकी गांड की फांको को फैलाते हुए नीचे से एक धक्का मारा तो लंड 3 इंच तक उसकी चूत मे घुस गया।

"...एयेए..यईईए....!...तुम उस...की चिंता मत क...रो...ऊऊ...ऊओह....मैं वो संभाल लूँगी। तुम एयेए...आहह..बस वा...अदा करो।",मेनका ने उठ कर अपनी कमर हिलाई और पूरा लंड अपने अंदर ले लिया।

"वादा करते हैं,मेरी रानी!",राजासाहब उठ बैठे और उसे अपनी बाहों मे कस उसकी चुचियाँ अपने मुँह मे भर ली। मेनका भी मस्त हो उनसे लिपट कर कमर हिला-हिला कर उन्हे चोदने लगी।

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अगली सुबह दोनो मेनका के मायके के लिए रवाना हो गये। राजासाहब ने उसे वहा छोडा और वहा से कार से शहर आकर बॅंगलुर की फ्लाइट पकड़ ली। शाम 7 बजे वो बॅंगलुर मे थे। पहुँचते ही उन्होने डॉक्टर पुरन्दारे से अगले दिन का अपायंटमेंट ले लिया।

अगले दिन सुबह दस बजे राजासाहब डॉक्टर पुरन्दारे के कॅबिन मे उनके सामने बैठे थे।

"राजासाहब,जो भी हुआ उसके लिए मैं आपसे माफी चाहता हू।"

"डॉक्टर साहब आप हमे शर्मिंदा कर रहे हैं। जो भी हुआ उसमे आपकी कोई ग़लती नही थी। प्लीज़ अब आप खुद को दोष देना छोड़ दीजिए।"

"पर राजासाहब विश्वजीत मेरा पेशेंट था। मेरी ज़िम्मेदारी था। मुझे तो समझ नही आता ये सब आख़िर हुआ कैसे!"

"डॉक्टर साहब आपका मानना है कि विश्वा काफ़ी हद तक ठीक हो गया था, इसीलिए वो यहा से ड्रग्स लेने के लिए भागने जैसी हरकत नही कर सकता। राइट?"

"राइट, मैने अपनी पूरी ज़िंदगी लोगो को ये लत छुडवाते बिता दी और मैं दावे के साथ कह सकता हू कि विश्वा ऐसा काम नही कर सकता था।"

"तो फिर वो किसी और कारण से यहा से निकला होगा....ऐसा कौन सा कारण हो सकता है..?"

"यकीन मानिए,राजासाहब यही सवाल मुझे भी परेशान कर रहा है और एक दिन भी ऐसा नही गुज़रा होगा जब मैने इसका जवाब तलाशने की कोशिश ना की हो।"

"डॉक्टर साहब, मुझे भी इस सवाल का जवाब मिलता नज़र नही आता। अच्छा उस रात यहा कौन-कौन था?"

"जी,मरीज़ो के अलावा नाइट ड्यूटी के 2 डॉक्टर्स और गेट पे गार्ड।"

"आपकी इजाज़त हो तो मैं उनसे बात कर सकता हू?"

"ज़रूर राजासाहब। आप इस सेंटर मे जिस से चाहे, जो चाहे पूछ सकते हैं और जब जी चाहे आ-जा सकते हैं।"

"थॅंक यु वेरी मच,डॉक्टर। तो प्लीज़ मुझे उन डॉक्टर्स और गार्ड से मिलवा दीजिए।" फनलव रचित.

"अभी लीजिए।",कह के डॉक्टर पुरन्दारे ने इंटरकोम का रिसीवर अपने कान से लगा लिया।


***************************

बने रहिये दोस्तों........................


Funlover.
 

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डॉक्टर्स से राजासाहब को कुछ खास बात नही पता चली। इस वक़्त वो सेंटर के लॉन मे एक चेर पे बैठे थे और उनके सामने उस रात की ड्यूटी वाला गार्ड खड़ा था,"हुज़ूर, हमने सचमुच विश्वजीत साहब को बाहर जाते हुए नही देखा था और ना ही हम गेट से हीले थे या सोए थे।"

"देखो,हम तुम पे कोई इल्ज़ाम लगाने नही आए हैं,हम तो बस ये जानना चाहते हैं कि उस रात क्या हुआ था।"

गार्ड ने उन्हे वही सब बातें बताई जो डॉक्टर पुरन्दारे,उनका स्टाफ और पोलिसेवाले कह रहे थे।

"...तो उस रात कुछ भी ऐसा नही घटा था जिस से की किसी अनहोनी की आशंका होती।"

"जी नही,साहब। बस थोड़ी देर के लिए बिजली गयी थी जिसे बेस्कॉम वाले ठीक कर गये थे।"

"क्या? बिजली गयी थी! पूरी बात बताओ।"

गार्ड ने उन्हे पूरा किस्सा सुना दिया।

"तुमने ये बात पोलीस को बताई थी।?"
फनलव द्वारा निर्मित.

"जी,साहब।"

"ह्म्म। अच्छा,जेनरेटर ठीक करने जो आदमी बेसमेंट मे गया था,क्या तुम भी उस के साथ गये थे?"

"नही,साहब। उसने हमे माना कर दिया। कहने लगा कि हम परेशान ना हो,वो काम कर देगा बस छोटी सी गड़बड़ है। साहब, हमने उस वक़्त भी गेट नही छोडा था,और बिजली ठीक करने भी वॅन के साथ बस एक आदमी आया था और दस मिनिट मे चला भी गया था..और जाते वक़्त वो अकेला ही था।"

"तुमने उसकी शक्ल देखी थी?"

"कुछ ठीक से याद नही साहब।बहुत अंधेरा था...नाटा,काला सा आदमी था।"

राजासाहब पूरी तैयारी के साथ आए थे,"क्या ये था?",अपना ब्रीफकेस खोल जब्बार की तस्वीर निकाल गार्ड के सामने कर उन्होने पूचछा।

"पक्का नही कह सकते,साहब...पर हां इसी तरह का था।"

राजासाहब के लिए इतना काफ़ी था। थोड़ी देर बाद वो पोलीस स्टेशन मे विश्वा के केस के इन्वेस्टिगेशन ऑफीसर के सामने बैठे थे,"।।। उस रात शायद बिजली भी गयी थी उस इलाक़े की?"

"जी,ऐसा बहुत कामन है उस एरिया मे। नया बसा है ना! होते रहते हैं पावरकट्स और वैसे भी उस रात बिजली ठीक करने वाला आदमी बेस्कॉम की यूनिफॉर्म और वन के साथ था। मैने सारे रेकॉर्ड्स चेक किए थे बेस्कॉम की कोई भी वॅन गायब या चोरी की रिपोर्ट नही थी। सो,मुझे लगता है कि वो आंगल नही है। मुझे पक्का यकीन है गार्ड सो रहा था और आपका बेटा निकल गया और उसकी बदक़िस्मती की ग़लत लोगो के हथ्थे चढ़ गया।"

"ह्म्म,एनीवे,थॅंक यू ऑफीसर। आपने जो भी किया है उसके लिए मैं ज़िंदगी भर आपका आभारी रहूँगा।",राजासाहब ने अपना हाथ ऑफीसर की ओर बढ़ाया।

"जस्ट डूयिंग माइ जॉब,राजासाहब। मेरा भरोसा करिए,मुजरिम को तो मैं पकड़ कर रहूँगा।",उसने राजासाहब से हाथ मिलाया।

राजासाहब उस से विदा ले एरपोर्ट चल पड़े, उनका काम हो गया था। गार्ड से बात करके उन्हे यकीन हो गया था कि जब्बार ही उनके बेटे का कातिल है। उन्होने जानबूझ कर ऑफीसर को जब्बार का फोटो या उस पे शक़ होने की बात नही बताई थी। अब वो जब्बार को अपने हाथो से सज़ा देने की ठान चुके थे। एरपोर्ट पहुँच कर उन्होने मेनका को फोन मिलाया,"हमारा काम हो गया है।हम अगली फ्लाइट से आ रहे हैं।"

"सीधा हमे लेने आना।"
फनलव की प्रस्तुति.

"ठीक है,मेरी जान।"

मेनका के माता-पिता चाहते तो नही थे कि उनकी बेटी इतनी जल्दी वापस जाए पर मेनका ने ऑफीस मे ज़रूरी काम का बहाना बना दिया था। उसके माता-पिता को भी लगा कि उनकी विधवा बेटी का मन काम के बहाने ही सही बहल तो रहा है,सो उन्होने ने भी उसे रोकने के लिए ज़्यादा ज़िद नही की। अब मेनका अपने मायके मे बेसब्री से राजासाहब का इंतेज़ार कर रही थी।

क्रमशः।।।।।।।।।।।।।।।।।।।।।।।।।।।।।।।


बने रहिये................

आज के लिए बस यही तक। फिर मिलेंगे एक नए अध्याय के साथ।
तब तक के लिए
फनलव की तरफ से जय भारत।।
 

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Dosto

Aapke week end manoranjan ke liye 2 updates diye hai.

Aapke comments ki pratiksha......

Dhanyawaad.
 
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