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Thriller कातिल रात

Raj_sharma

यतो धर्मस्ततो जयः ||❣️
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रिव्यू की शुरुआत की जाए

पिछले तीनों अपडेट के रिव्यू एक साथ ही,
अच्छा गहराई वाला रिव्यू आएगा, कुर्सी की पेटी बाँध लीजिए क्योंकि जब हम रिव्यू लिखते हैं तो लोग बोलते हैं लिखो तो ऐसा रिव्यू लिखो, वरना न लिखो।
:reading:
बहुत कुछ घटित हो गया है, कहानी के रहस्य कुछ उजागर हुए, तो कुछ अभी भी बचे हुए हैं। हमें इसका मुख्य प्लॉट स्पष्ट हो चुका है, कहानी के खलनायक भी कुछ हद तक सामने आ गए हैं। कौन सच्चा, कौन झूठा ये भी सामने आ गया है, पर मुख्य सवाल यही है कि क्या ये सब ही खलनायक हैं, या अभी मुख्य खलनायक का आना बाकी है?
Mujhe lagta hai ki abhi kuch bacha hona :writing:
जिसका अंदेशा कम था, वो भी हुआ। एक तरह से आश्चर्य हुआ मुझे।

अब सोचा जा रहा होगा कि किस तरह की घुमा-फिरा कर बातें कर रहा हूँ मैं, तो चीज़ें स्पष्ट करता हूँ।
Karne ka man, apun wait kar hi raha tha :reading:
देवप्रिया कमीना था, वो हमें पता था, पर ये नहीं पता था कि इतना इस तरह दुश्मन खेमे से मिलीभगत कर बैठेगा। इसकी क्या रोमेश से रंजिश थी पहले या जलनखोर है ये कि रोमेश को पुलिस में इतनी पहचान है, इसलिए ये उसकी ऊँचाई से जलन रखता है। ज़्यादा कुछ नहीं, पैसे ही वजह होंगे इसके पीछे। मेरा एक ही अनुमान है कि देवप्रिया के पीछे इन सभी सम्मिलित चीज़ों का योगदान है।
Devpriya humko bhi Apriya hai bhai, sala jaha dekhi tava paraat, vahi bitaai saari raat type ka hi laga apun ko, londiya dekhte hi fisal gaya :sigh:
मेघना–अनामिका… मेरा अनुमान वैसे तो कम ही ज़्यादा गलत जाता है, लेकिन यहाँ मैं ज़्यादा गलत था कि मेघना और अनामिका को कुछ ज़्यादा ही सज्जन समझ बैठा। ये दोनों बालिकाएँ कात्ये महा चालाक और धूर्त हैं, जो लोगों को धोखा देना जानती हैं। ऐसे लोगों को गरम तेल में फ्राई किया जाना चाहिए।
Fry karne se kuch nahi hoga dost, wo garam tel laga kar.... :sex: Karna chahiye.
मेरा सवाल अब यही है कि पहले चलो मान कर चलते हैं कि मेघना अनामिका इन लोगों को फँसाने आई हैं, तो क्या रोमेश निठल्ला, नकारा, बद्दिमाग है जो इनके जाल-साज़ी में फँस गया?
Rajasthani me ek kahawat hai, bharose ki bhains paado lave.
Matlab over confidence aadmi ko le doobta hai :dazed:
सच बोलूँ, रोमेश की डिटेक्टिव स्किल्स से मैं तो प्रभावित नहीं हुआ। ये कैसा डिटेक्टिव आया है जो अपने घर से पिस्टल लेकर जाने वाले के बारे में जान नहीं पाया, उल्टा दूसरों के इशारों पर इधर से उधर घूम रहा है।
Abhi wo khula hi kaha hai mitra 😎
मेरे सवाल अब सामने आते हैं कि पिस्टल घर में वापस आई कैसे। चलो मान लिया जाए कि वो पिस्टल अनामिका या चुराने वाले ने वापस किचन में रख दी।

तो वो आया तो दरवाज़े से नहीं होगा, क्योंकि उधर से आता तो सामने ढाबे के CCTV से मालूम चल जाता। इतना स्मार्ट है रोमेश कि ये चेक करे कि मेन गेट से आया या कहीं और से।
Kaisi baate kar rahe ho?? Meghna sabse pahle kichan me gayi thi, wo bhi to rakh sakti hai waha?:D
वो जो भी आया होगा, बैक गेट या खिड़की के रास्ते। तो रोमेश ने खिड़की और दूसरी जगहों की तलाशी क्यों नहीं ली कि आने वाला आया कैसे? कुछ तो सुराग होना चाहिए था। फिंगरप्रिंट के भरोसे नहीं रहना चाहिए रोमेश को, क्योंकि ये संभव है कि जिसने भी उस पिस्टल से कांड किया, उसने ऐसे ही नहीं उठाया होगा पिस्टल को। ग्लव्स का इस्तेमाल ज़रूर किया होगा पिस्टल में।
Koi aaya hi na ho to kidhar dhoondhna hai wo bhi bata do:D
अब आते हैं कुमार गौरव के ऊपर—ये भैंसाहब ग़ज़ब टोपीबाज़ हैं। कभी लगता है इसके साथ गलत हुआ, तो कभी लगता है सारे फ़साद की जड़ ही यही है।

अब देखो क्या हुआ होगा कुमार के साथ। जहाँ तक सब सोच रहे हैं कि कुमार गौरव मारा गया, तो मेरा सोचना डिफरेंट है, क्योंकि राइटर चाहता है कि सबको लगे कुमार मर गया। जबकि मैं ठहरा अलग इंसान जो दिखाया जा रहा है, मैं वो नहीं देखता, अपनी अलग ही सोच है।
Great 👌🏻 sochna bhi aise hi chahiye man, 80% case me yahi hota hai ki jo dikhta hai wo hota nahi, baaki 20% me ho bhi jaata hai :D
कुमार मेरे अनुसार मारा नहीं गया है, उसे किडनैप किया गया है। क्योंकि इतने जल्दी विलेन थोड़े हमारे नायक को फँसाएगा। वो तो अभी रोमेश के मज़े ले रहा है। रोमेश को एक प्यादा बनाया है विलेन ने। डिटेक्टिव लोग हमेशा क्लू से विलेन का पता लगाते हैं और इस बात को विलेन जानता है। इसलिए वो फेक क्लू प्लांट कर रहा है ताकि रोमेश उसके अनुसार चले। यही रोमेश की सबसे बड़ी गलती है वो क्लू के हिसाब से नहीं चले, बल्कि खुद कुछ अलग तरह से सोचे, तभी वो सफल जाएगा।
:claps::claps: Bhai bohot badhiya ja rahe ho.
अब आते हैं रागिनी और रोमेश के प्रेम प्रसंग के बारे में क्या हुआ इनके प्रेम प्रसंग का? लग तो रहा है रोमेश भैया के अरमानों पर पानी फिर गया है। मैडम मानने वाली नहीं हैं इतनी जल्दी, बहुत पापड़ बेलने पड़ जाएँगे। एक बार को मुझे लगा मैडम का चक्कर कहीं और चल रहा है।
Uska baad me pata chalega, per haan itni aasaani se hath aane wali item nahi wo 😜
सौम्या - कहा था मैंने, ये मैडम का रोल इस कहानी में ज़्यादा महत्वपूर्ण है, जिसकी वजह भी बताई थी। अब देखो, यहाँ लोगों को सिंपल लग रहा है कि सौम्या की दुश्मनी की वजह से रोमेश भी फँस रहा है।
Romesh jana maana detective hai, and uske case handle karni ki vajah se bohot se log, jinme udhyogpati bhi samil hain, wo jail me hain, to koi bhi game khel sakta hai uske khilaaf :dazed:
लेकिन मैं ठहरा महापुरुष जहाँ सबका सोचना खत्म, वहाँ से हम सोचना चालू करते हैं। सिंपल बात नहीं होगी कि सौम्या के मैटर के अलावा भी कुछ न कुछ इसके पीछे ज़रूर होगा, कि मेघना और अनामिका वापस आईं।
:approve:
सौम्या को सबसे ज़्यादा सेफ्टी चाहिए, तो रोमेश बाबू उनके घर ही क्यों न रुक जाएँ। इस बहाने कुछ अलग, अनोखा देखने को मिलेगा हमें। वैसे भी सौम्या मैडम का मिज़ाज कुछ अलग सा है।
Tapatap manta ju :sex: But apun karega nahi :D
कुल मिलाकर शानदार अपडेट।
अगले की प्रतीक्षा।


@Raj_sharma आ गया रिव्यू
vihan27 मानते हो ना, जू का ब्रो लेजेंड है
Thank you very much for your amazing review and superb support bhai , sath bane rahiye :hug:
Maan na to padega hi, ju smart londa hai, :claps:
 

Raj_sharma

यतो धर्मस्ततो जयः ||❣️
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Haan! Pahle ye chhichhori harkate kar lo kyoki ye zyada zaruri hai, hat lauda :buttkick:
:D
Dear detective zara explain karoge ki tumhe kaise pata chala ki dono laundiyo ne devpriya ke sath mil kar ye jaal buna hai....matlab kuch bhi :roll:
Ye usk kuch past sexperience bhi ho skta hai be, ab ju ke jitna samajhdaar na sahi, per detective to hai :dazed:
Aur fir jab ye pata chal hi Gaya to ACP Sharma ki rahnumaai lene kyo chal diye be, saboot ke sath seena chauda kar ke seedhe thane pahuch Jana tha aur devpriya ki aankho me aankhen daal kar unki saari kartoot expose kar deni chahiye thi...kya yaar sahi bol rela tha apan ki ye detective kahlane ke laayak hi nahi hai. Ekdam noob harkate hain iski :D
Sala ijjat ka faaluda kar diye ho be ju romesh bbu ki :haha:
Ohh really....I mean itna talent hai tumme???? Aur koi talent ho ya na ho lekin joke mast maara hai:lotpot:
:D
Anyway....Kumar Gaurav gayab hai...uske bare me ab kya hi bole apan, matlab ki according to romesh jab ye sara kiya dhara un do laundiyo aur devpriya ka hi hai to zaahir hai Kumar Gaurav ke gayab hone ke pichhe bhi unhi ka hath hoga.... :D
Maybe, 99% to yahich lag raha hai, baaki hakikat ky hai ye apun vhi nhi jaanta :nana:
ACP ki maujoodgi me in jaal bunne walo se puchha jaye ki ye sab in logo ne kyo kiya, and one more thing...jab ye khulasa ho hi gaya hai to saumya ko ab kisse aur kis baat khatra??? :roll:
Usk pati Rajiv bansal bhi jinda hai, and obviously jail me hai, vut hai to jinda, And kya pata ye devika and meghna ko usi ne inke peeche lagya ho to??:?:
Overall mast funny type update tha ye, keep it up :thumbup:
Thank you very much for your wonderful review and support bhai :hug:
 

Raj_sharma

यतो धर्मस्ततो जयः ||❣️
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#11

लगभग आधे घँटे के बाद ही हम रोहिणी के थाने में पहुंच चुके थे।

थाने में घुसते ही हेल्प डेस्क पर बैठी हुई मैडम से मैंने देवप्रिय के बारे में पूछा। उन्होंने बताया कि देवप्रिय दूसरी मंजिल पर अपने कमरे में ही था।

मैं और रागिनी दो सीढिया एक साथ फर्लांगते हुए जल्दी से ऊपर पहुँचे।

देवप्रिय इस वक़्त अकेला ही अपनी कुर्सी पर अधलेटी अवस्था में अपने सामने एक और कुर्सी लगाकर उस पर अपने पांव टिकाए हुए छत की ओर घूरते हुए किसी गहरी सोच में डूबा हुआ था।

जैसे ही हमने कमरे में कदम रखा उसका ध्यान भंग हुआ और उसकी नजर हम दोनों पर पड़ गई।

मुझ पर नजर पड़ते ही उसके चेहरे पर एक अजीब सी मुस्कान ख़िल उठी।

"तुम्हारा इको सिस्टम तो बहुत मजबूत है बॉस, मुझे अपने केस से ही हटवा दिया, ताकि तुम जेल जाने से बच जाओ"

मेरे लिये ये खबर खुद नई थी, लेकिन तभी मेरे कान में शर्मा जी के वे शब्द गूंज उठे थे, जिसमे उन्होने बोला था कि मेरे थाने पहुंचने तक मेरे केस में सारा निजाम बदल चुका होगा।

अब मुस्कराने की और उसे उसका इको सिस्टम समझाने की बारी मेरी थी।

"जब सामने वाले का सामना किसी जंग खाये हुए सिस्टम से हो तो, फिर अपने इको सिस्टम का प्रयोग करना ही पड़ता हैं" मैने कुटिल स्वर में उसे बोला।

"कहना क्या चाहते हो, साफ साफ बोलो" देवप्रिय को मेरी बात समझ नही आई थी।

"तुम्हे कैसे पता कि तुम मुझे जेल ही भेजोगे, उन दोनों लड़कियों से मिलकर कौन सी खिचड़ी पका रहे हो, मुझे सब पता है, कल रात को मेरे घर से निकल कर वे दोनो लडकिया कहाँ गई थी, और आप कहाँ गए थे"

मैंने ऐसे ही अँधेरे में तीर छोड़ा। लेकिन मेरी बात सुनकर जिस प्रकार से सकपकाया था, उससे मुझें तीर निशाने पर लगने का एहसास हो गया था। मैंने तुरन्त उसे दूसरी चोट दी।

"जनाब! जासूस हूँ कोई घसियारा नही हूँ, नाम रोमेश है मेरा सबकी ख़बर रखता हूँ, और आप क्या समझते हो वो सजा-याफ्ता मुजरिम लडकिया आपसे वफादारी निभाएगी क्या, इसलिए उनके साथ मिलकर मुझे किसी झूठे केस में फंसाने की कोशिश करने से बाज आ जाओ, नही तो रोमेश इस प्लेटिनम का वो दसवां ग्रह है, जो अगर किसी की कुंडली में आकर बैठ गया न, तो उस इंसान की कुंडली के सारे ग्रह एक साथ उल्टी चाल चलने लगते है"

ये बोलकर मैं उसके कमरे में रुका नही, क्यो कि मै जानता था कि इस वक़्त उसके बस में बाकी कुछ था नही और अपनी पुलिसिया धौंस में वो बस मुझ पर झपट ही सकता था।

लेकिन मैं अभी इस पुलिसिये के साथ बात को ज्यादा नही बढ़ाना चाहता था, क्यो कि मै नही चाहता था, की एक पुलिसिये के चक्कर में थाने का पूरा स्टाफ ही मेरे खिलाफ हो जाये।

कुछ भी था, अभी गर्दन तो मेरी फंसी ही हुई थी। मैं वहां से निकल कर सीढियो से तेजी से उतरते हुए थाने के इंचार्ज माहेश्वरी साहब के कमरे में घुस चुका था।

इस वक़्त वो एक फ़ाइल में बड़ी गहराई से उलझे हुए थे। मुझ पर नजर पड़ते ही उन्होने अपने सामने पड़ी हुई कुर्सियों पर हमे बैठने का इशारा किया।

उनका इशारा मिलते ही मैं और रागिनी उन कुर्सियों पर विराजमान हो गए। माहेश्वरी साहब ने भी कुछ ही पलों में अपनी नजर फ़ाइल से हटा ली थी।

"अपने केस के सिलसिले में तुम भगवान सिंह से मिल लो, अब वो तुम्हारे उस पिस्टल की गुत्थी को सुलझाएंगे" माहेश्वरी साहब ने केस देवप्रिय से लेकर भगवान सिंह को दे दिया था।

"ठीक है सर! मैं मिल लेता हूँ भगवान सिंह से, और उन्हें पूरे केस के बारे में शुरू से अवगत करवा देता हूँ" मैंने कुर्सी से उठने का उपक्रम किया।

"एक बात का ध्यान रखो रोमेश! अगर तुम बेकसूर हो तो तुम्हारे साथ इस थाने का कोई भी स्टाफ गलत नही कर सकता, उसकी जिम्मेदारी मैं लेता हूँ, मुझें इस बात का इल्म है कि इस शहर में तुम्हारे धंधे की वजह से तुम्हारे दुश्मनों की कोई कमी नही होगी, और वे लोग तुम्हारे साथ कुछ गलत करने की भी फिराक में होंगे, लेकिन यकीन मानो हम तुम्हारी स्थिति को भी ध्यान में रखकर ही कोई कार्यवाही करेगे" माहेश्वरी साहब ने मुझें भरोसा दिया।

"ठीक है सर! मैं जानता हूँ कि आपके रहते हुए मेरे साथ कुछ भी गलत नही हो सकता है" मैं बोलते हुए अपनी सीट छोड़ चुका था।

"चलिये! उम्मीद है की अगली बार कोई शिकायत हुई तो पहले सीधा मेरे पास आओगे" ये बोलकर माहेश्वरी साहब ने मेरी ओर अपना हाथ बढ़ाया, जिसे मैंने तत्काल अपने हाथ से थामा और गर्मजोशी से हाथ मिलाकर वहां से रुखसत हो गया।

भगवान सिंह का कमरा नीचे ही थोड़ा सा अंदर जाकर था। जिस वक्त मैं उनके कमरे में पहुंचा, उस वक्त वे भी किसी केस की चार्जशीट तैयार करने में व्यस्त थे।

"आप ही भगवान सिंह है जनाब" मैंने जानते बुझते भी उनसे पूछा।

"मैं ही भगवान सिंह हूँ! आप कौन है" भगवान सिंह ने मेरे साथ साथ रागिनी पर भी नजर डालते हुए पूछा।

"जी मेरा नाम रोमेश है और माहेश्वरी जी ने मुझें आपके पास भेजा है" मैंने भगवान सिंह को पूरी इज्जत बख्शते हुए बोला।

"आजा भाई रोमेश बैठ जा, मैं तो कब से तुम्हारे आने का इंतजार कर रहा था" भगवान सिंह अब अपने हाथ के कागजों को एक तरफ रखकर मुझ से पूरी तरह से मुखातिब हो चुका था।

"जी आपसे ही मिलने के लिए आया हूँ" मैंने जवाब दिया।

"जितना मुझे हमारे साथी देव ने तुम्हारे केस के बारे में बताया है, उस हिसाब से तो आप पर अभी तो कोई केस बनता नही है, अब पिस्टल आपके घर से गुम हुई और आपके ही घर से बरामद हो गई, इस गुमशुदगी के पीरियड में अगर उस पिस्टल से कोई वारदात नही हुई है तो, तुम लंबी तानकर सोना, लेकिन भाई अगर कुछ गड़बड़ हो गई तो फिर पुलिस के सवालो के घेरे में तो तुम आ ही जाओगे" भगवान सिंह ने पूरी साफगोई से वही बोला, जो उसे बोलना चाहिये था।

"जी ये तो मैं भी जानता हूँ, लेकिन मेरी पिस्टल के गायब होने से लेकर उसके मेरे ही घर से बरामद होने तक में एक लड़की की संदिग्ध भूमिका है, उस लड़की के साथ एक लड़की और शामिल है, जिसे मैंने इसी थाने में एक केस में जेल भिजवाया था, उन दोनों लड़कियों ने मुझे फ़साने के लिए कोई साजिश रची, अगर उन दोनों लड़कियों से अच्छी तरह से पूछताछ हो जाये तो इस पूरे मामले से पर्दा उठ सकता है" मैने भगवान सिंह को बोला।

"उन लड़कियों से मैं मिल चुका हूँ, आपकी पिस्टल की एक बार फोरेंसिक रिपोर्ट आ जाये, और उस पिस्टल पर उनमे से किसी के भी फिंगरप्रिंट मिल जाये, मैं एक मिनट नही लगाऊंगा, उनको घर से उठाने में, अब सिर्फ शक की बिना पर भी मैं जब तक उन दोनों से कोई पूछताछ नही कर सकता, जब तक उस पिस्टल से की हुई कोई वारदात सांमने नही आ जाती" भगवान सिंह एक एक बात बहुत नाप तौल कर बोल रहा था।

मेरे पास अभी तक उसकी किसी भी बात से असहमत होने का कोई कारण नही था।

तभी दरवाजे से आती हुई एक आवाज ने मुझे चौंका दिया था। हम तीनों की निगाहें एक साथ ही दरवाजे की ओर उठी थी।

दरवाजे पर कुमार की माता जी एक दूसरे लड़के के साथ खड़ी होकर अंदर आने की इजाजत मांग रही थी।

उनको वहां देखते ही मेरा मन आशंकाओं के बादलों से घिर चुका था।

"आ जाइये मैडम" तब तक भगवान सिंह उन्हें अंदर आने के लिये बोल चुका था।

वे दोनो अंदर आकर हमारे बगल वाली कुर्सियों पर ही बैठ चुके थे। उन माताजी ने बैठते ही कुछ पलों तक मुझे और रागिनी को घूरा।

"तुम तो वही हो न बेटा जो आज दिन में मेरे बेटे गौरव को पूछने के लिए आये थे" माता जी ने मेरी तरफ देखते हुए बोला।

"हां माता जी! मैं वही हूँ! क्या हुआ अभी तक गौरव घर पर नही आया क्या" मैने आशंकित स्वर में पूछा।

"बेटा न तो उसका फोन ही मिल रहा है और न ही वो अपनी बवाना वाली फैक्ट्री में है, मैं तो उसी की रिपोर्ट लिखवाने आई हूँ" माता जी ने बोला।

"क्या माजरा है, तुम जानते हो इन्हें रोमेश साहब" भगवान सिंह ने मुझ से पूछा, जो अभी तक मूक दर्शक बना हुआ हमे देख रहा था।

मैंने इस बार कुमार के बारे में तसल्ली से भगवान सिंह को समझाया।

"ठीक है मैडम! आप अपने बेटे का एक फ़ोटो और उसका कहाँ और किन लोगों के साथ उठना बैठना है, वो सब एक पेपर पर लिख कर दीजिए, साथ में उनका मोबाइल नंबर भी दीजिये, मैं उसके फोन की लोकेशन ट्रेस करवाने की कोशिश करता हूँ" भगवान सिंह ने एक ही बार मे सब कुछ बोल दिया था।

"जी मै अभी आपको सब लिखकर दे देता हूँ, आप बस मेरे कजिन को जल्द से जल्द ढूंढ दीजिये" माता जी के साथ आये हुए उस किशोर उम्र के लड़के ने अधीर स्वर में बोला।

"चिंता मत करो बच्चे, हम तुम्हारे भाई को ढूंढने में जी जान लगा देंगे" भगवान सिंह ने उस लड़के को सांत्वना भरे स्वर में बोला।

तभी भगवान सिंह के फोन की घँटी बज उठी। भगवान सिंह ने फोन सुनते हुए ही अजीब सी नजरो से हम सभी की ओर देखा। उसके बाद उसने फोन रखते ही उस कमरे में धमाका कर दिया।

"एक युवक की लाश मिली है, आप सभी को मेरे साथ चलना होगा, उस युवक की शिनाख्त करने के लिये"

भगवान सिंह ने अचानक से बोला ही था कि कुर्सी पर बैठी हुई माता जी एकदम गश ख़ाकर कुर्सी से नीचे गिर पड़ी।

मै जल्दी से माता जी को सम्हालने के लिए झुका, तब तक भगवान सिंह भी माता जी को उठाने की कोशिश करने लगा था।

रागिनी भगवान सिंह की टेबल पर रखा हुआ पानी के जग को उठाकर उससे पानी के छींटे माता जी के चेहरे पर मारने लगी थी।

गुमशुदा गौरव :

कुमार की माता जी को, चेहरे पर पानी पड़ते ही तत्काल होश आ गया था, रागिनी ने उनका सिर अपनी गोद मे ले लिया था।

"मैं किसी महिला सिपाही की ड्यूटी इनकी देखभाल के लिए लगाता हूँ, बेटा तुम हमारे साथ चलना" भगवान सिंह ने माता जी के साथ आये हुए उस लड़के को बोला।

"आंटी जी आप घबराए मत! भगवान न करे कि कुमार के साथ कुछ बुरा हुआ हो, वो कोई और भी तो हो सकता है, आप सलामत रहिये" रागिनी ने माता जी को दिलासा देते हुए बोला।

माता जी होश में जरूर आ गई थी, किंतु अभी तक उनके मुंह से कोई आवाज नही निकली थी, वे बस सूनी आँखों से सभी को निहारे जा रही थी।

तभी भगवान सिंह ने एक महिला सिपाही के साथ कमरे में प्रवेश किया।

"संतोष! जब तक हम वापिस नही आ जाते, तब तक इन माता जी की देखभाल करना, और इनके लिए कुछ ठंडा वगेरह मंगवाकर इन्हें पिला देना, हम लोग एक कॉल पर जा रहे है" भगवान सिंह ने उन संतोष नाम की सिपाही को बोला।

"जी जनाब! आप बेफिक्र होकर जाइये, मैं मैडम का पूरा ध्यान रखूंगी" संतोष ने भगवान सिंह की बात का जवाब दिया।

उसके बाद हम सभी लोग जल्दी से उस जगह के लिए निकल गए जहां किसी युवक की लाश मिलने की कॉल भगवान सिंह के फोन पर आई थी।

कोई बीस मिनट के बाद हम लोग सेक्टर 28 के पास एक वीरान इलाके में पहुंचे थे।

इस एरिया में अभी लोगो की बसावट काफी कम थी। लेकिन यहां पर दिल्ली के वाहनों के लाइसेंस बनने की वजह से वाहनो की आवा जाही लगी रहती थी।

दूर से ही हमारी नजर एक जगह पर लोगो की भीड़ पर पड़ चुकी थी। भगवान सिंह ने अपनी गाड़ी को उसी भीड़ के पास जा कर रोका था।
हमने भी अपनी गाड़ी को भगवान सिंह की गाड़ी के पीछे ही पार्क किया और भगवान सिंह के साथ ही उस भीड़ की तरफ बढ़ गए।

भगवान सिंह के साथ थाने से चार कांसटेबल भी थे। पुलिस को देखते ही भीड़ ने अब तीतर बितर होना शुरू कर दिया था।

वो एक खाली प्लाट था, जिसमे काफी झाड़ झंखाड़ उग आए थे, ऐसी ही एक झाड़ियों के पीछे से एक युवक के दोनो पाँव बाहर की तरफ नजर आ रहे थे।

दिल की धड़कने सिर्फ गौरव के भाई की ही नही मेरी भी बड़ी हुई थी। अगर ये लाश गौरव की हुई तो अपनी भी व्हाट लगना निश्चित था।

लेकिन पाँव को जब मैंने गौर से देखा तो मुझे वे पाँव गौरव के डीलडौल से जुदा प्रतीत हुए।

लेकिन तब तक भगवान सिंह और उसके साथ एक कांस्टेबल उस लाश तक पहुंच चुके थे, बाकी कांस्टेबल वहां लगी हुई भीड़ की हटाने में मशगूल हो चुके थे।

मै और रागिनी गौरव के भाई का हाथ पकड़े हुए लाश के नजदीक पहुंचे। लाश को देखते ही वो लड़का मुझ से लिपट गया।

"ये गौरव भैया नही हैं"उसने लिपटे हुए इतना ही बोला था, उसकी दोबारा से उस लाश को देखने की हिम्मत नही हो रही थी।

मैने भी उस लाश को देखकर भले ही ये सोचकर राहत की सांस ली थी कि ये गौरव की लाश नही है, लेकिन उस लाश को देखकर भी मन मे एक अफसोस तो उभरा था, क्यो कि कोई तो था, जिसे इस बेरहमी से मारा गया था।


जारी रहेगा_____✍️
 

Raj_sharma

यतो धर्मस्ततो जयः ||❣️
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304
Superb updates....

Kon fasana chahega Romesh ko? Aur Kyu?

Ye story bhi aapki baki stories ki bahut achi h suspense and thrill se bhari .
Dete. Romesh wahi h kya jo pichili story mei tha .
dono story aapas mei link h bhi h kya ya us story ka prequel h ye

Ye update kaafi mazedaar aur suspense-filled tha.
Soumya–Ragini–Romesh ki nok-jhok ne mood light rakha,
lekin Devika ka track story ko ekdum dark thriller mode me le gaya.

Devika ka Kumar se blackmail hona,
Kumar ki car chura lena,
Romesh ki pistol lekar bhaag jana,
aur car me khoon milna—
ye saari cheezein dikhati hain ki wo koi bada game khel rahi hai.

Romesh bhi dheere-dheere uske trap me fas raha hai,
shayad kisi purane dushman ki chaal ho.

Overall update grippy, fast-paced aur interesting tha.
Next update me toh blast pakka hai.

Awesome update and excellent writing and nice story

:congrats: start new story

Bahut hi badhiya update diya hai Raj_sharma bhai....
Nice and beautiful update....

तितली…या … भँवरा … और मधु?

Bahut hi badhiya update diya hai Raj_sharm bhai....
Nice and beautiful update....

Nice update....

Bhut hi badhiya update Bhai
Ye Devika aur meghna kisi badi planning me hai
Dhekte hai ab ye kahani aage kya mod leti hai

dono update lajawab ..................... the sarkar .............. :happy:

Agli KADI ka intazar rahega ........... sarkar Mahoday ...

रोमेश तो बहुत शातिर निकला..... किसी केस में उलझाने से पहले ही अपना पूरा बचाव कर लिया.....


खैर अगर कोई पंगा हुआ तो लगता नहीं कि devpiray रोमेश बाबु को बख़्शीश करेंगे....


अगले अंक की बहुत बेसब्री से इंतजार कर रहे हैं.....

Esa lagata hai Romesh Babu is bar pakka kahe naa kahe fasne Wale hai Q ki Devika or Meghana ke jaal me Devpriya to lattu ho gya hai
Waise bhi kehawat hai ladki ke aansoo me badi takat hoti hai ache se ache ko ghayal kar deti hai fir ye to Devpriy hai jo pehli najar me ghayal ho gye the Devika or Meghana ke 😉😉
.
Lekin kya Saumya bhi khatre ke nishan par hai or kya Kumar Gaurav kya khatre me hai ya nipat gya hoga pata nahi Jane Hamare Romesh Babu ka kya hoga ab

यार तुम्हे तो वाचक के स्थान पर लेखक होना चाहिए, देव प्रिय आगे से लोला और पीछे से डंडा डालके गपा गप करता रहेगा।

Mazedaar update

अपडेट तो बढ़िया है. पढ़ कर वाकई अच्छा लगा.

पर ये भी लगा की इस वाले अपडेट में कुछ लाइन (dialogues) की आवश्यकता नहीं थी... नहीं भी होते तो काम चलता. (बुरा मत मानना, ऐसा मेरा विचार है.)

बाकी, लेखक महोदय को जो सही लगे.


Waiting for the next update. ♥️

Bahut hi shandar update he Raj_sharma Bhai

Kumar gaurav ke sath kuch na kuch hadsa ho chuka he..............

ACP Sharma se milke romesh ne ek tarah se apni jamanat karwa li he........

Ab devpriya uske case ka incharge nahi rahega, as per ACP sharma.......

Agli dhamakdar update ki pratiksha rahegi bhai

रिव्यू की शुरुआत की जाए

पिछले तीनों अपडेट के रिव्यू एक साथ ही,
अच्छा गहराई वाला रिव्यू आएगा, कुर्सी की पेटी बाँध लीजिए क्योंकि जब हम रिव्यू लिखते हैं तो लोग बोलते हैं लिखो तो ऐसा रिव्यू लिखो, वरना न लिखो।

बहुत कुछ घटित हो गया है, कहानी के रहस्य कुछ उजागर हुए, तो कुछ अभी भी बचे हुए हैं। हमें इसका मुख्य प्लॉट स्पष्ट हो चुका है, कहानी के खलनायक भी कुछ हद तक सामने आ गए हैं। कौन सच्चा, कौन झूठा ये भी सामने आ गया है, पर मुख्य सवाल यही है कि क्या ये सब ही खलनायक हैं, या अभी मुख्य खलनायक का आना बाकी है?

जिसका अंदेशा कम था, वो भी हुआ। एक तरह से आश्चर्य हुआ मुझे।

अब सोचा जा रहा होगा कि किस तरह की घुमा-फिरा कर बातें कर रहा हूँ मैं, तो चीज़ें स्पष्ट करता हूँ।

देवप्रिया कमीना था, वो हमें पता था, पर ये नहीं पता था कि इतना इस तरह दुश्मन खेमे से मिलीभगत कर बैठेगा। इसकी क्या रोमेश से रंजिश थी पहले या जलनखोर है ये कि रोमेश को पुलिस में इतनी पहचान है, इसलिए ये उसकी ऊँचाई से जलन रखता है। ज़्यादा कुछ नहीं, पैसे ही वजह होंगे इसके पीछे। मेरा एक ही अनुमान है कि देवप्रिया के पीछे इन सभी सम्मिलित चीज़ों का योगदान है।

मेघना–अनामिका… मेरा अनुमान वैसे तो कम ही ज़्यादा गलत जाता है, लेकिन यहाँ मैं ज़्यादा गलत था कि मेघना और अनामिका को कुछ ज़्यादा ही सज्जन समझ बैठा। ये दोनों बालिकाएँ कात्ये महा चालाक और धूर्त हैं, जो लोगों को धोखा देना जानती हैं। ऐसे लोगों को गरम तेल में फ्राई किया जाना चाहिए।


मेरा सवाल अब यही है कि पहले चलो मान कर चलते हैं कि मेघना अनामिका इन लोगों को फँसाने आई हैं, तो क्या रोमेश निठल्ला, नकारा, बद्दिमाग है जो इनके जाल-साज़ी में फँस गया?


सच बोलूँ, रोमेश की डिटेक्टिव स्किल्स से मैं तो प्रभावित नहीं हुआ। ये कैसा डिटेक्टिव आया है जो अपने घर से पिस्टल लेकर जाने वाले के बारे में जान नहीं पाया, उल्टा दूसरों के इशारों पर इधर से उधर घूम रहा है।

मेरे सवाल अब सामने आते हैं कि पिस्टल घर में वापस आई कैसे। चलो मान लिया जाए कि वो पिस्टल अनामिका या चुराने वाले ने वापस किचन में रख दी।

तो वो आया तो दरवाज़े से नहीं होगा, क्योंकि उधर से आता तो सामने ढाबे के CCTV से मालूम चल जाता। इतना स्मार्ट है रोमेश कि ये चेक करे कि मेन गेट से आया या कहीं और से।

वो जो भी आया होगा, बैक गेट या खिड़की के रास्ते। तो रोमेश ने खिड़की और दूसरी जगहों की तलाशी क्यों नहीं ली कि आने वाला आया कैसे? कुछ तो सुराग होना चाहिए था। फिंगरप्रिंट के भरोसे नहीं रहना चाहिए रोमेश को, क्योंकि ये संभव है कि जिसने भी उस पिस्टल से कांड किया, उसने ऐसे ही नहीं उठाया होगा पिस्टल को। ग्लव्स का इस्तेमाल ज़रूर किया होगा पिस्टल में।

अब आते हैं कुमार गौरव के ऊपर—ये भैंसाहब ग़ज़ब टोपीबाज़ हैं। कभी लगता है इसके साथ गलत हुआ, तो कभी लगता है सारे फ़साद की जड़ ही यही है।

अब देखो क्या हुआ होगा कुमार के साथ। जहाँ तक सब सोच रहे हैं कि कुमार गौरव मारा गया, तो मेरा सोचना डिफरेंट है, क्योंकि राइटर चाहता है कि सबको लगे कुमार मर गया। जबकि मैं ठहरा अलग इंसान जो दिखाया जा रहा है, मैं वो नहीं देखता, अपनी अलग ही सोच है।

कुमार मेरे अनुसार मारा नहीं गया है, उसे किडनैप किया गया है। क्योंकि इतने जल्दी विलेन थोड़े हमारे नायक को फँसाएगा। वो तो अभी रोमेश के मज़े ले रहा है। रोमेश को एक प्यादा बनाया है विलेन ने। डिटेक्टिव लोग हमेशा क्लू से विलेन का पता लगाते हैं और इस बात को विलेन जानता है। इसलिए वो फेक क्लू प्लांट कर रहा है ताकि रोमेश उसके अनुसार चले। यही रोमेश की सबसे बड़ी गलती है वो क्लू के हिसाब से नहीं चले, बल्कि खुद कुछ अलग तरह से सोचे, तभी वो सफल जाएगा।

अब आते हैं रागिनी और रोमेश के प्रेम प्रसंग के बारे में क्या हुआ इनके प्रेम प्रसंग का? लग तो रहा है रोमेश भैया के अरमानों पर पानी फिर गया है। मैडम मानने वाली नहीं हैं इतनी जल्दी, बहुत पापड़ बेलने पड़ जाएँगे। एक बार को मुझे लगा मैडम का चक्कर कहीं और चल रहा है।

सौम्या - कहा था मैंने, ये मैडम का रोल इस कहानी में ज़्यादा महत्वपूर्ण है, जिसकी वजह भी बताई थी। अब देखो, यहाँ लोगों को सिंपल लग रहा है कि सौम्या की दुश्मनी की वजह से रोमेश भी फँस रहा है।

लेकिन मैं ठहरा महापुरुष जहाँ सबका सोचना खत्म, वहाँ से हम सोचना चालू करते हैं। सिंपल बात नहीं होगी कि सौम्या के मैटर के अलावा भी कुछ न कुछ इसके पीछे ज़रूर होगा, कि मेघना और अनामिका वापस आईं।

सौम्या को सबसे ज़्यादा सेफ्टी चाहिए, तो रोमेश बाबू उनके घर ही क्यों न रुक जाएँ। इस बहाने कुछ अलग, अनोखा देखने को मिलेगा हमें। वैसे भी सौम्या मैडम का मिज़ाज कुछ अलग सा है।

कुल मिलाकर शानदार अपडेट।
अगले की प्रतीक्षा।


@Raj_sharma आ गया रिव्यू
vihan27 मानते हो ना, जू का ब्रो लेजेंड है

Haan! Pahle ye chhichhori harkate kar lo kyoki ye zyada zaruri hai, hat lauda :buttkick:

Dear detective zara explain karoge ki tumhe kaise pata chala ki dono laundiyo ne devpriya ke sath mil kar ye jaal buna hai....matlab kuch bhi :roll:

Aur fir jab ye pata chal hi Gaya to ACP Sharma ki rahnumaai lene kyo chal diye be, saboot ke sath seena chauda kar ke seedhe thane pahuch Jana tha aur devpriya ki aankho me aankhen daal kar unki saari kartoot expose kar deni chahiye thi...kya yaar sahi bol rela tha apan ki ye detective kahlane ke laayak hi nahi hai. Ekdam noob harkate hain iski :D

Ohh really....I mean itna talent hai tumme???? Aur koi talent ho ya na ho lekin joke mast maara hai:lotpot:


Anyway....Kumar Gaurav gayab hai...uske bare me ab kya hi bole apan, matlab ki according to romesh jab ye sara kiya dhara un do laundiyo aur devpriya ka hi hai to zaahir hai Kumar Gaurav ke gayab hone ke pichhe bhi unhi ka hath hoga.... :D

ACP ki maujoodgi me in jaal bunne walo se puchha jaye ki ye sab in logo ne kyo kiya, and one more thing...jab ye khulasa ho hi gaya hai to saumya ko ab kisse aur kis baat khatra??? :roll:

Overall mast funny type update tha ye, keep it up :thumbup:

Update posted friends :declare:
 

Darkk Soul

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#11

लगभग आधे घँटे के बाद ही हम रोहिणी के थाने में पहुंच चुके थे।

थाने में घुसते ही हेल्प डेस्क पर बैठी हुई मैडम से मैंने देवप्रिय के बारे में पूछा। उन्होंने बताया कि देवप्रिय दूसरी मंजिल पर अपने कमरे में ही था।

मैं और रागिनी दो सीढिया एक साथ फर्लांगते हुए जल्दी से ऊपर पहुँचे।

देवप्रिय इस वक़्त अकेला ही अपनी कुर्सी पर अधलेटी अवस्था में अपने सामने एक और कुर्सी लगाकर उस पर अपने पांव टिकाए हुए छत की ओर घूरते हुए किसी गहरी सोच में डूबा हुआ था।

जैसे ही हमने कमरे में कदम रखा उसका ध्यान भंग हुआ और उसकी नजर हम दोनों पर पड़ गई।

मुझ पर नजर पड़ते ही उसके चेहरे पर एक अजीब सी मुस्कान ख़िल उठी।

"तुम्हारा इको सिस्टम तो बहुत मजबूत है बॉस, मुझे अपने केस से ही हटवा दिया, ताकि तुम जेल जाने से बच जाओ"

मेरे लिये ये खबर खुद नई थी, लेकिन तभी मेरे कान में शर्मा जी के वे शब्द गूंज उठे थे, जिसमे उन्होने बोला था कि मेरे थाने पहुंचने तक मेरे केस में सारा निजाम बदल चुका होगा।

अब मुस्कराने की और उसे उसका इको सिस्टम समझाने की बारी मेरी थी।

"जब सामने वाले का सामना किसी जंग खाये हुए सिस्टम से हो तो, फिर अपने इको सिस्टम का प्रयोग करना ही पड़ता हैं" मैने कुटिल स्वर में उसे बोला।

"कहना क्या चाहते हो, साफ साफ बोलो" देवप्रिय को मेरी बात समझ नही आई थी।

"तुम्हे कैसे पता कि तुम मुझे जेल ही भेजोगे, उन दोनों लड़कियों से मिलकर कौन सी खिचड़ी पका रहे हो, मुझे सब पता है, कल रात को मेरे घर से निकल कर वे दोनो लडकिया कहाँ गई थी, और आप कहाँ गए थे"

मैंने ऐसे ही अँधेरे में तीर छोड़ा। लेकिन मेरी बात सुनकर जिस प्रकार से सकपकाया था, उससे मुझें तीर निशाने पर लगने का एहसास हो गया था। मैंने तुरन्त उसे दूसरी चोट दी।

"जनाब! जासूस हूँ कोई घसियारा नही हूँ, नाम रोमेश है मेरा सबकी ख़बर रखता हूँ, और आप क्या समझते हो वो सजा-याफ्ता मुजरिम लडकिया आपसे वफादारी निभाएगी क्या, इसलिए उनके साथ मिलकर मुझे किसी झूठे केस में फंसाने की कोशिश करने से बाज आ जाओ, नही तो रोमेश इस प्लेटिनम का वो दसवां ग्रह है, जो अगर किसी की कुंडली में आकर बैठ गया न, तो उस इंसान की कुंडली के सारे ग्रह एक साथ उल्टी चाल चलने लगते है"

ये बोलकर मैं उसके कमरे में रुका नही, क्यो कि मै जानता था कि इस वक़्त उसके बस में बाकी कुछ था नही और अपनी पुलिसिया धौंस में वो बस मुझ पर झपट ही सकता था।

लेकिन मैं अभी इस पुलिसिये के साथ बात को ज्यादा नही बढ़ाना चाहता था, क्यो कि मै नही चाहता था, की एक पुलिसिये के चक्कर में थाने का पूरा स्टाफ ही मेरे खिलाफ हो जाये।

कुछ भी था, अभी गर्दन तो मेरी फंसी ही हुई थी। मैं वहां से निकल कर सीढियो से तेजी से उतरते हुए थाने के इंचार्ज माहेश्वरी साहब के कमरे में घुस चुका था।

इस वक़्त वो एक फ़ाइल में बड़ी गहराई से उलझे हुए थे। मुझ पर नजर पड़ते ही उन्होने अपने सामने पड़ी हुई कुर्सियों पर हमे बैठने का इशारा किया।

उनका इशारा मिलते ही मैं और रागिनी उन कुर्सियों पर विराजमान हो गए। माहेश्वरी साहब ने भी कुछ ही पलों में अपनी नजर फ़ाइल से हटा ली थी।

"अपने केस के सिलसिले में तुम भगवान सिंह से मिल लो, अब वो तुम्हारे उस पिस्टल की गुत्थी को सुलझाएंगे" माहेश्वरी साहब ने केस देवप्रिय से लेकर भगवान सिंह को दे दिया था।

"ठीक है सर! मैं मिल लेता हूँ भगवान सिंह से, और उन्हें पूरे केस के बारे में शुरू से अवगत करवा देता हूँ" मैंने कुर्सी से उठने का उपक्रम किया।

"एक बात का ध्यान रखो रोमेश! अगर तुम बेकसूर हो तो तुम्हारे साथ इस थाने का कोई भी स्टाफ गलत नही कर सकता, उसकी जिम्मेदारी मैं लेता हूँ, मुझें इस बात का इल्म है कि इस शहर में तुम्हारे धंधे की वजह से तुम्हारे दुश्मनों की कोई कमी नही होगी, और वे लोग तुम्हारे साथ कुछ गलत करने की भी फिराक में होंगे, लेकिन यकीन मानो हम तुम्हारी स्थिति को भी ध्यान में रखकर ही कोई कार्यवाही करेगे" माहेश्वरी साहब ने मुझें भरोसा दिया।

"ठीक है सर! मैं जानता हूँ कि आपके रहते हुए मेरे साथ कुछ भी गलत नही हो सकता है" मैं बोलते हुए अपनी सीट छोड़ चुका था।

"चलिये! उम्मीद है की अगली बार कोई शिकायत हुई तो पहले सीधा मेरे पास आओगे" ये बोलकर माहेश्वरी साहब ने मेरी ओर अपना हाथ बढ़ाया, जिसे मैंने तत्काल अपने हाथ से थामा और गर्मजोशी से हाथ मिलाकर वहां से रुखसत हो गया।

भगवान सिंह का कमरा नीचे ही थोड़ा सा अंदर जाकर था। जिस वक्त मैं उनके कमरे में पहुंचा, उस वक्त वे भी किसी केस की चार्जशीट तैयार करने में व्यस्त थे।

"आप ही भगवान सिंह है जनाब" मैंने जानते बुझते भी उनसे पूछा।

"मैं ही भगवान सिंह हूँ! आप कौन है" भगवान सिंह ने मेरे साथ साथ रागिनी पर भी नजर डालते हुए पूछा।

"जी मेरा नाम रोमेश है और माहेश्वरी जी ने मुझें आपके पास भेजा है" मैंने भगवान सिंह को पूरी इज्जत बख्शते हुए बोला।

"आजा भाई रोमेश बैठ जा, मैं तो कब से तुम्हारे आने का इंतजार कर रहा था" भगवान सिंह अब अपने हाथ के कागजों को एक तरफ रखकर मुझ से पूरी तरह से मुखातिब हो चुका था।

"जी आपसे ही मिलने के लिए आया हूँ" मैंने जवाब दिया।

"जितना मुझे हमारे साथी देव ने तुम्हारे केस के बारे में बताया है, उस हिसाब से तो आप पर अभी तो कोई केस बनता नही है, अब पिस्टल आपके घर से गुम हुई और आपके ही घर से बरामद हो गई, इस गुमशुदगी के पीरियड में अगर उस पिस्टल से कोई वारदात नही हुई है तो, तुम लंबी तानकर सोना, लेकिन भाई अगर कुछ गड़बड़ हो गई तो फिर पुलिस के सवालो के घेरे में तो तुम आ ही जाओगे" भगवान सिंह ने पूरी साफगोई से वही बोला, जो उसे बोलना चाहिये था।

"जी ये तो मैं भी जानता हूँ, लेकिन मेरी पिस्टल के गायब होने से लेकर उसके मेरे ही घर से बरामद होने तक में एक लड़की की संदिग्ध भूमिका है, उस लड़की के साथ एक लड़की और शामिल है, जिसे मैंने इसी थाने में एक केस में जेल भिजवाया था, उन दोनों लड़कियों ने मुझे फ़साने के लिए कोई साजिश रची, अगर उन दोनों लड़कियों से अच्छी तरह से पूछताछ हो जाये तो इस पूरे मामले से पर्दा उठ सकता है" मैने भगवान सिंह को बोला।

"उन लड़कियों से मैं मिल चुका हूँ, आपकी पिस्टल की एक बार फोरेंसिक रिपोर्ट आ जाये, और उस पिस्टल पर उनमे से किसी के भी फिंगरप्रिंट मिल जाये, मैं एक मिनट नही लगाऊंगा, उनको घर से उठाने में, अब सिर्फ शक की बिना पर भी मैं जब तक उन दोनों से कोई पूछताछ नही कर सकता, जब तक उस पिस्टल से की हुई कोई वारदात सांमने नही आ जाती" भगवान सिंह एक एक बात बहुत नाप तौल कर बोल रहा था।

मेरे पास अभी तक उसकी किसी भी बात से असहमत होने का कोई कारण नही था।

तभी दरवाजे से आती हुई एक आवाज ने मुझे चौंका दिया था। हम तीनों की निगाहें एक साथ ही दरवाजे की ओर उठी थी।

दरवाजे पर कुमार की माता जी एक दूसरे लड़के के साथ खड़ी होकर अंदर आने की इजाजत मांग रही थी।

उनको वहां देखते ही मेरा मन आशंकाओं के बादलों से घिर चुका था।

"आ जाइये मैडम" तब तक भगवान सिंह उन्हें अंदर आने के लिये बोल चुका था।

वे दोनो अंदर आकर हमारे बगल वाली कुर्सियों पर ही बैठ चुके थे। उन माताजी ने बैठते ही कुछ पलों तक मुझे और रागिनी को घूरा।

"तुम तो वही हो न बेटा जो आज दिन में मेरे बेटे गौरव को पूछने के लिए आये थे" माता जी ने मेरी तरफ देखते हुए बोला।

"हां माता जी! मैं वही हूँ! क्या हुआ अभी तक गौरव घर पर नही आया क्या" मैने आशंकित स्वर में पूछा।

"बेटा न तो उसका फोन ही मिल रहा है और न ही वो अपनी बवाना वाली फैक्ट्री में है, मैं तो उसी की रिपोर्ट लिखवाने आई हूँ" माता जी ने बोला।

"क्या माजरा है, तुम जानते हो इन्हें रोमेश साहब" भगवान सिंह ने मुझ से पूछा, जो अभी तक मूक दर्शक बना हुआ हमे देख रहा था।

मैंने इस बार कुमार के बारे में तसल्ली से भगवान सिंह को समझाया।

"ठीक है मैडम! आप अपने बेटे का एक फ़ोटो और उसका कहाँ और किन लोगों के साथ उठना बैठना है, वो सब एक पेपर पर लिख कर दीजिए, साथ में उनका मोबाइल नंबर भी दीजिये, मैं उसके फोन की लोकेशन ट्रेस करवाने की कोशिश करता हूँ" भगवान सिंह ने एक ही बार मे सब कुछ बोल दिया था।

"जी मै अभी आपको सब लिखकर दे देता हूँ, आप बस मेरे कजिन को जल्द से जल्द ढूंढ दीजिये" माता जी के साथ आये हुए उस किशोर उम्र के लड़के ने अधीर स्वर में बोला।

"चिंता मत करो बच्चे, हम तुम्हारे भाई को ढूंढने में जी जान लगा देंगे" भगवान सिंह ने उस लड़के को सांत्वना भरे स्वर में बोला।

तभी भगवान सिंह के फोन की घँटी बज उठी। भगवान सिंह ने फोन सुनते हुए ही अजीब सी नजरो से हम सभी की ओर देखा। उसके बाद उसने फोन रखते ही उस कमरे में धमाका कर दिया।

"एक युवक की लाश मिली है, आप सभी को मेरे साथ चलना होगा, उस युवक की शिनाख्त करने के लिये"

भगवान सिंह ने अचानक से बोला ही था कि कुर्सी पर बैठी हुई माता जी एकदम गश ख़ाकर कुर्सी से नीचे गिर पड़ी।

मै जल्दी से माता जी को सम्हालने के लिए झुका, तब तक भगवान सिंह भी माता जी को उठाने की कोशिश करने लगा था।

रागिनी भगवान सिंह की टेबल पर रखा हुआ पानी के जग को उठाकर उससे पानी के छींटे माता जी के चेहरे पर मारने लगी थी।

गुमशुदा गौरव :

कुमार की माता जी को, चेहरे पर पानी पड़ते ही तत्काल होश आ गया था, रागिनी ने उनका सिर अपनी गोद मे ले लिया था।

"मैं किसी महिला सिपाही की ड्यूटी इनकी देखभाल के लिए लगाता हूँ, बेटा तुम हमारे साथ चलना" भगवान सिंह ने माता जी के साथ आये हुए उस लड़के को बोला।

"आंटी जी आप घबराए मत! भगवान न करे कि कुमार के साथ कुछ बुरा हुआ हो, वो कोई और भी तो हो सकता है, आप सलामत रहिये" रागिनी ने माता जी को दिलासा देते हुए बोला।

माता जी होश में जरूर आ गई थी, किंतु अभी तक उनके मुंह से कोई आवाज नही निकली थी, वे बस सूनी आँखों से सभी को निहारे जा रही थी।

तभी भगवान सिंह ने एक महिला सिपाही के साथ कमरे में प्रवेश किया।

"संतोष! जब तक हम वापिस नही आ जाते, तब तक इन माता जी की देखभाल करना, और इनके लिए कुछ ठंडा वगेरह मंगवाकर इन्हें पिला देना, हम लोग एक कॉल पर जा रहे है" भगवान सिंह ने उन संतोष नाम की सिपाही को बोला।

"जी जनाब! आप बेफिक्र होकर जाइये, मैं मैडम का पूरा ध्यान रखूंगी" संतोष ने भगवान सिंह की बात का जवाब दिया।

उसके बाद हम सभी लोग जल्दी से उस जगह के लिए निकल गए जहां किसी युवक की लाश मिलने की कॉल भगवान सिंह के फोन पर आई थी।

कोई बीस मिनट के बाद हम लोग सेक्टर 28 के पास एक वीरान इलाके में पहुंचे थे।

इस एरिया में अभी लोगो की बसावट काफी कम थी। लेकिन यहां पर दिल्ली के वाहनों के लाइसेंस बनने की वजह से वाहनो की आवा जाही लगी रहती थी।

दूर से ही हमारी नजर एक जगह पर लोगो की भीड़ पर पड़ चुकी थी। भगवान सिंह ने अपनी गाड़ी को उसी भीड़ के पास जा कर रोका था।
हमने भी अपनी गाड़ी को भगवान सिंह की गाड़ी के पीछे ही पार्क किया और भगवान सिंह के साथ ही उस भीड़ की तरफ बढ़ गए।

भगवान सिंह के साथ थाने से चार कांसटेबल भी थे। पुलिस को देखते ही भीड़ ने अब तीतर बितर होना शुरू कर दिया था।

वो एक खाली प्लाट था, जिसमे काफी झाड़ झंखाड़ उग आए थे, ऐसी ही एक झाड़ियों के पीछे से एक युवक के दोनो पाँव बाहर की तरफ नजर आ रहे थे।

दिल की धड़कने सिर्फ गौरव के भाई की ही नही मेरी भी बड़ी हुई थी। अगर ये लाश गौरव की हुई तो अपनी भी व्हाट लगना निश्चित था।

लेकिन पाँव को जब मैंने गौर से देखा तो मुझे वे पाँव गौरव के डीलडौल से जुदा प्रतीत हुए।

लेकिन तब तक भगवान सिंह और उसके साथ एक कांस्टेबल उस लाश तक पहुंच चुके थे, बाकी कांस्टेबल वहां लगी हुई भीड़ की हटाने में मशगूल हो चुके थे।

मै और रागिनी गौरव के भाई का हाथ पकड़े हुए लाश के नजदीक पहुंचे। लाश को देखते ही वो लड़का मुझ से लिपट गया।

"ये गौरव भैया नही हैं"उसने लिपटे हुए इतना ही बोला था, उसकी दोबारा से उस लाश को देखने की हिम्मत नही हो रही थी।

मैने भी उस लाश को देखकर भले ही ये सोचकर राहत की सांस ली थी कि ये गौरव की लाश नही है, लेकिन उस लाश को देखकर भी मन मे एक अफसोस तो उभरा था, क्यो कि कोई तो था, जिसे इस बेरहमी से मारा गया था।


जारी रहेगा_____✍️

Nice update. 👍

अभी के लिए इतना ही कह सकता हूँ.

और निःसंदेह वो जिस किसी भी लाश थी, वो कभी तो किसी का कुछ न कुछ तो रहा ही होगा. सोच कर ही बुरा लग रहा है.
ज़रूरी नहीं की हर लाश रोमेश के केस के साथ जुड़ा हो.. पर, देखते हैं... आगे क्या होता है?

अगले अपडेट की प्रतीक्षा है. जल्दी लाना.
 

Luckyloda

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लगभग आधे घँटे के बाद ही हम रोहिणी के थाने में पहुंच चुके थे।

थाने में घुसते ही हेल्प डेस्क पर बैठी हुई मैडम से मैंने देवप्रिय के बारे में पूछा। उन्होंने बताया कि देवप्रिय दूसरी मंजिल पर अपने कमरे में ही था।

मैं और रागिनी दो सीढिया एक साथ फर्लांगते हुए जल्दी से ऊपर पहुँचे।

देवप्रिय इस वक़्त अकेला ही अपनी कुर्सी पर अधलेटी अवस्था में अपने सामने एक और कुर्सी लगाकर उस पर अपने पांव टिकाए हुए छत की ओर घूरते हुए किसी गहरी सोच में डूबा हुआ था।

जैसे ही हमने कमरे में कदम रखा उसका ध्यान भंग हुआ और उसकी नजर हम दोनों पर पड़ गई।

मुझ पर नजर पड़ते ही उसके चेहरे पर एक अजीब सी मुस्कान ख़िल उठी।

"तुम्हारा इको सिस्टम तो बहुत मजबूत है बॉस, मुझे अपने केस से ही हटवा दिया, ताकि तुम जेल जाने से बच जाओ"

मेरे लिये ये खबर खुद नई थी, लेकिन तभी मेरे कान में शर्मा जी के वे शब्द गूंज उठे थे, जिसमे उन्होने बोला था कि मेरे थाने पहुंचने तक मेरे केस में सारा निजाम बदल चुका होगा।

अब मुस्कराने की और उसे उसका इको सिस्टम समझाने की बारी मेरी थी।

"जब सामने वाले का सामना किसी जंग खाये हुए सिस्टम से हो तो, फिर अपने इको सिस्टम का प्रयोग करना ही पड़ता हैं" मैने कुटिल स्वर में उसे बोला।

"कहना क्या चाहते हो, साफ साफ बोलो" देवप्रिय को मेरी बात समझ नही आई थी।

"तुम्हे कैसे पता कि तुम मुझे जेल ही भेजोगे, उन दोनों लड़कियों से मिलकर कौन सी खिचड़ी पका रहे हो, मुझे सब पता है, कल रात को मेरे घर से निकल कर वे दोनो लडकिया कहाँ गई थी, और आप कहाँ गए थे"

मैंने ऐसे ही अँधेरे में तीर छोड़ा। लेकिन मेरी बात सुनकर जिस प्रकार से सकपकाया था, उससे मुझें तीर निशाने पर लगने का एहसास हो गया था। मैंने तुरन्त उसे दूसरी चोट दी।

"जनाब! जासूस हूँ कोई घसियारा नही हूँ, नाम रोमेश है मेरा सबकी ख़बर रखता हूँ, और आप क्या समझते हो वो सजा-याफ्ता मुजरिम लडकिया आपसे वफादारी निभाएगी क्या, इसलिए उनके साथ मिलकर मुझे किसी झूठे केस में फंसाने की कोशिश करने से बाज आ जाओ, नही तो रोमेश इस प्लेटिनम का वो दसवां ग्रह है, जो अगर किसी की कुंडली में आकर बैठ गया न, तो उस इंसान की कुंडली के सारे ग्रह एक साथ उल्टी चाल चलने लगते है"

ये बोलकर मैं उसके कमरे में रुका नही, क्यो कि मै जानता था कि इस वक़्त उसके बस में बाकी कुछ था नही और अपनी पुलिसिया धौंस में वो बस मुझ पर झपट ही सकता था।

लेकिन मैं अभी इस पुलिसिये के साथ बात को ज्यादा नही बढ़ाना चाहता था, क्यो कि मै नही चाहता था, की एक पुलिसिये के चक्कर में थाने का पूरा स्टाफ ही मेरे खिलाफ हो जाये।

कुछ भी था, अभी गर्दन तो मेरी फंसी ही हुई थी। मैं वहां से निकल कर सीढियो से तेजी से उतरते हुए थाने के इंचार्ज माहेश्वरी साहब के कमरे में घुस चुका था।

इस वक़्त वो एक फ़ाइल में बड़ी गहराई से उलझे हुए थे। मुझ पर नजर पड़ते ही उन्होने अपने सामने पड़ी हुई कुर्सियों पर हमे बैठने का इशारा किया।

उनका इशारा मिलते ही मैं और रागिनी उन कुर्सियों पर विराजमान हो गए। माहेश्वरी साहब ने भी कुछ ही पलों में अपनी नजर फ़ाइल से हटा ली थी।

"अपने केस के सिलसिले में तुम भगवान सिंह से मिल लो, अब वो तुम्हारे उस पिस्टल की गुत्थी को सुलझाएंगे" माहेश्वरी साहब ने केस देवप्रिय से लेकर भगवान सिंह को दे दिया था।

"ठीक है सर! मैं मिल लेता हूँ भगवान सिंह से, और उन्हें पूरे केस के बारे में शुरू से अवगत करवा देता हूँ" मैंने कुर्सी से उठने का उपक्रम किया।

"एक बात का ध्यान रखो रोमेश! अगर तुम बेकसूर हो तो तुम्हारे साथ इस थाने का कोई भी स्टाफ गलत नही कर सकता, उसकी जिम्मेदारी मैं लेता हूँ, मुझें इस बात का इल्म है कि इस शहर में तुम्हारे धंधे की वजह से तुम्हारे दुश्मनों की कोई कमी नही होगी, और वे लोग तुम्हारे साथ कुछ गलत करने की भी फिराक में होंगे, लेकिन यकीन मानो हम तुम्हारी स्थिति को भी ध्यान में रखकर ही कोई कार्यवाही करेगे" माहेश्वरी साहब ने मुझें भरोसा दिया।

"ठीक है सर! मैं जानता हूँ कि आपके रहते हुए मेरे साथ कुछ भी गलत नही हो सकता है" मैं बोलते हुए अपनी सीट छोड़ चुका था।

"चलिये! उम्मीद है की अगली बार कोई शिकायत हुई तो पहले सीधा मेरे पास आओगे" ये बोलकर माहेश्वरी साहब ने मेरी ओर अपना हाथ बढ़ाया, जिसे मैंने तत्काल अपने हाथ से थामा और गर्मजोशी से हाथ मिलाकर वहां से रुखसत हो गया।

भगवान सिंह का कमरा नीचे ही थोड़ा सा अंदर जाकर था। जिस वक्त मैं उनके कमरे में पहुंचा, उस वक्त वे भी किसी केस की चार्जशीट तैयार करने में व्यस्त थे।

"आप ही भगवान सिंह है जनाब" मैंने जानते बुझते भी उनसे पूछा।

"मैं ही भगवान सिंह हूँ! आप कौन है" भगवान सिंह ने मेरे साथ साथ रागिनी पर भी नजर डालते हुए पूछा।

"जी मेरा नाम रोमेश है और माहेश्वरी जी ने मुझें आपके पास भेजा है" मैंने भगवान सिंह को पूरी इज्जत बख्शते हुए बोला।

"आजा भाई रोमेश बैठ जा, मैं तो कब से तुम्हारे आने का इंतजार कर रहा था" भगवान सिंह अब अपने हाथ के कागजों को एक तरफ रखकर मुझ से पूरी तरह से मुखातिब हो चुका था।

"जी आपसे ही मिलने के लिए आया हूँ" मैंने जवाब दिया।

"जितना मुझे हमारे साथी देव ने तुम्हारे केस के बारे में बताया है, उस हिसाब से तो आप पर अभी तो कोई केस बनता नही है, अब पिस्टल आपके घर से गुम हुई और आपके ही घर से बरामद हो गई, इस गुमशुदगी के पीरियड में अगर उस पिस्टल से कोई वारदात नही हुई है तो, तुम लंबी तानकर सोना, लेकिन भाई अगर कुछ गड़बड़ हो गई तो फिर पुलिस के सवालो के घेरे में तो तुम आ ही जाओगे" भगवान सिंह ने पूरी साफगोई से वही बोला, जो उसे बोलना चाहिये था।

"जी ये तो मैं भी जानता हूँ, लेकिन मेरी पिस्टल के गायब होने से लेकर उसके मेरे ही घर से बरामद होने तक में एक लड़की की संदिग्ध भूमिका है, उस लड़की के साथ एक लड़की और शामिल है, जिसे मैंने इसी थाने में एक केस में जेल भिजवाया था, उन दोनों लड़कियों ने मुझे फ़साने के लिए कोई साजिश रची, अगर उन दोनों लड़कियों से अच्छी तरह से पूछताछ हो जाये तो इस पूरे मामले से पर्दा उठ सकता है" मैने भगवान सिंह को बोला।

"उन लड़कियों से मैं मिल चुका हूँ, आपकी पिस्टल की एक बार फोरेंसिक रिपोर्ट आ जाये, और उस पिस्टल पर उनमे से किसी के भी फिंगरप्रिंट मिल जाये, मैं एक मिनट नही लगाऊंगा, उनको घर से उठाने में, अब सिर्फ शक की बिना पर भी मैं जब तक उन दोनों से कोई पूछताछ नही कर सकता, जब तक उस पिस्टल से की हुई कोई वारदात सांमने नही आ जाती" भगवान सिंह एक एक बात बहुत नाप तौल कर बोल रहा था।

मेरे पास अभी तक उसकी किसी भी बात से असहमत होने का कोई कारण नही था।

तभी दरवाजे से आती हुई एक आवाज ने मुझे चौंका दिया था। हम तीनों की निगाहें एक साथ ही दरवाजे की ओर उठी थी।

दरवाजे पर कुमार की माता जी एक दूसरे लड़के के साथ खड़ी होकर अंदर आने की इजाजत मांग रही थी।

उनको वहां देखते ही मेरा मन आशंकाओं के बादलों से घिर चुका था।

"आ जाइये मैडम" तब तक भगवान सिंह उन्हें अंदर आने के लिये बोल चुका था।

वे दोनो अंदर आकर हमारे बगल वाली कुर्सियों पर ही बैठ चुके थे। उन माताजी ने बैठते ही कुछ पलों तक मुझे और रागिनी को घूरा।

"तुम तो वही हो न बेटा जो आज दिन में मेरे बेटे गौरव को पूछने के लिए आये थे" माता जी ने मेरी तरफ देखते हुए बोला।

"हां माता जी! मैं वही हूँ! क्या हुआ अभी तक गौरव घर पर नही आया क्या" मैने आशंकित स्वर में पूछा।

"बेटा न तो उसका फोन ही मिल रहा है और न ही वो अपनी बवाना वाली फैक्ट्री में है, मैं तो उसी की रिपोर्ट लिखवाने आई हूँ" माता जी ने बोला।

"क्या माजरा है, तुम जानते हो इन्हें रोमेश साहब" भगवान सिंह ने मुझ से पूछा, जो अभी तक मूक दर्शक बना हुआ हमे देख रहा था।

मैंने इस बार कुमार के बारे में तसल्ली से भगवान सिंह को समझाया।

"ठीक है मैडम! आप अपने बेटे का एक फ़ोटो और उसका कहाँ और किन लोगों के साथ उठना बैठना है, वो सब एक पेपर पर लिख कर दीजिए, साथ में उनका मोबाइल नंबर भी दीजिये, मैं उसके फोन की लोकेशन ट्रेस करवाने की कोशिश करता हूँ" भगवान सिंह ने एक ही बार मे सब कुछ बोल दिया था।

"जी मै अभी आपको सब लिखकर दे देता हूँ, आप बस मेरे कजिन को जल्द से जल्द ढूंढ दीजिये" माता जी के साथ आये हुए उस किशोर उम्र के लड़के ने अधीर स्वर में बोला।

"चिंता मत करो बच्चे, हम तुम्हारे भाई को ढूंढने में जी जान लगा देंगे" भगवान सिंह ने उस लड़के को सांत्वना भरे स्वर में बोला।

तभी भगवान सिंह के फोन की घँटी बज उठी। भगवान सिंह ने फोन सुनते हुए ही अजीब सी नजरो से हम सभी की ओर देखा। उसके बाद उसने फोन रखते ही उस कमरे में धमाका कर दिया।

"एक युवक की लाश मिली है, आप सभी को मेरे साथ चलना होगा, उस युवक की शिनाख्त करने के लिये"

भगवान सिंह ने अचानक से बोला ही था कि कुर्सी पर बैठी हुई माता जी एकदम गश ख़ाकर कुर्सी से नीचे गिर पड़ी।

मै जल्दी से माता जी को सम्हालने के लिए झुका, तब तक भगवान सिंह भी माता जी को उठाने की कोशिश करने लगा था।

रागिनी भगवान सिंह की टेबल पर रखा हुआ पानी के जग को उठाकर उससे पानी के छींटे माता जी के चेहरे पर मारने लगी थी।

गुमशुदा गौरव :

कुमार की माता जी को, चेहरे पर पानी पड़ते ही तत्काल होश आ गया था, रागिनी ने उनका सिर अपनी गोद मे ले लिया था।

"मैं किसी महिला सिपाही की ड्यूटी इनकी देखभाल के लिए लगाता हूँ, बेटा तुम हमारे साथ चलना" भगवान सिंह ने माता जी के साथ आये हुए उस लड़के को बोला।

"आंटी जी आप घबराए मत! भगवान न करे कि कुमार के साथ कुछ बुरा हुआ हो, वो कोई और भी तो हो सकता है, आप सलामत रहिये" रागिनी ने माता जी को दिलासा देते हुए बोला।

माता जी होश में जरूर आ गई थी, किंतु अभी तक उनके मुंह से कोई आवाज नही निकली थी, वे बस सूनी आँखों से सभी को निहारे जा रही थी।

तभी भगवान सिंह ने एक महिला सिपाही के साथ कमरे में प्रवेश किया।

"संतोष! जब तक हम वापिस नही आ जाते, तब तक इन माता जी की देखभाल करना, और इनके लिए कुछ ठंडा वगेरह मंगवाकर इन्हें पिला देना, हम लोग एक कॉल पर जा रहे है" भगवान सिंह ने उन संतोष नाम की सिपाही को बोला।

"जी जनाब! आप बेफिक्र होकर जाइये, मैं मैडम का पूरा ध्यान रखूंगी" संतोष ने भगवान सिंह की बात का जवाब दिया।

उसके बाद हम सभी लोग जल्दी से उस जगह के लिए निकल गए जहां किसी युवक की लाश मिलने की कॉल भगवान सिंह के फोन पर आई थी।

कोई बीस मिनट के बाद हम लोग सेक्टर 28 के पास एक वीरान इलाके में पहुंचे थे।

इस एरिया में अभी लोगो की बसावट काफी कम थी। लेकिन यहां पर दिल्ली के वाहनों के लाइसेंस बनने की वजह से वाहनो की आवा जाही लगी रहती थी।

दूर से ही हमारी नजर एक जगह पर लोगो की भीड़ पर पड़ चुकी थी। भगवान सिंह ने अपनी गाड़ी को उसी भीड़ के पास जा कर रोका था।
हमने भी अपनी गाड़ी को भगवान सिंह की गाड़ी के पीछे ही पार्क किया और भगवान सिंह के साथ ही उस भीड़ की तरफ बढ़ गए।

भगवान सिंह के साथ थाने से चार कांसटेबल भी थे। पुलिस को देखते ही भीड़ ने अब तीतर बितर होना शुरू कर दिया था।

वो एक खाली प्लाट था, जिसमे काफी झाड़ झंखाड़ उग आए थे, ऐसी ही एक झाड़ियों के पीछे से एक युवक के दोनो पाँव बाहर की तरफ नजर आ रहे थे।

दिल की धड़कने सिर्फ गौरव के भाई की ही नही मेरी भी बड़ी हुई थी। अगर ये लाश गौरव की हुई तो अपनी भी व्हाट लगना निश्चित था।

लेकिन पाँव को जब मैंने गौर से देखा तो मुझे वे पाँव गौरव के डीलडौल से जुदा प्रतीत हुए।

लेकिन तब तक भगवान सिंह और उसके साथ एक कांस्टेबल उस लाश तक पहुंच चुके थे, बाकी कांस्टेबल वहां लगी हुई भीड़ की हटाने में मशगूल हो चुके थे।

मै और रागिनी गौरव के भाई का हाथ पकड़े हुए लाश के नजदीक पहुंचे। लाश को देखते ही वो लड़का मुझ से लिपट गया।

"ये गौरव भैया नही हैं"उसने लिपटे हुए इतना ही बोला था, उसकी दोबारा से उस लाश को देखने की हिम्मत नही हो रही थी।

मैने भी उस लाश को देखकर भले ही ये सोचकर राहत की सांस ली थी कि ये गौरव की लाश नही है, लेकिन उस लाश को देखकर भी मन मे एक अफसोस तो उभरा था, क्यो कि कोई तो था, जिसे इस बेरहमी से मारा गया था।


जारी रहेगा_____✍️
रोमेश बाबु शायद बाल बाल बच गये.....

Qki अगर gourav ki लाश नहीं मिली तो ऐसा ना हो कि इस व्यक्ति को रोमेश की पिस्टल से मारा गया हो....
 

Avaran

एवरन
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रिव्यू की शुरुआत की जाए

मैं हमेशा गलत रहूँ, यह हो नहीं सकता।
क्या कहा था मैंने कि कुमार गौरव किडनैप ही हुआ है, बस उससे ज़्यादा नहीं। ऐसे ही हमको लोग सलाम नहीं ठोकते,अब यहाँ होना यह है कि कुमार गौरव को उठवाया तो मेघना और अनामिका ने ही है, मुझे ऐसा लगता है।या फिर ऐसा शक पैदा करवाया जा रहा है।
यह नया लड़का आने का क्या मतलब रहा?

कुमार के कज़िन को भी लेकर आए हो, तो ऐसे तो नहीं लेकर आए होंगे।शायद कुछ न कुछ वजह रही होगी, कुछ होने वाला है।कहीं ऐसा तो नहीं कि कुमार को पारिवारिक जायदाद के लिए उसके कज़िन ने ही उठवा लिया हो।

अब आते हैं आगे।
मुझे एक विचार आया, मैंने नहीं सोचा था कि यह विचार मेरे दिमाग को हिला देगा, बहुत खतरनाक विचार था ,सोमया के पति के बारे में अभी यह बताया नहीं है ना कि उसका क्या हुआ।

अब देखो, जहाँ तक मुझे लगता है, उसका पति भी इसके पीछे होना चाहिए। क्योंकि रोमेश ने उसकी ज़िंदगी की जो वाट लगाई थी, उसी चीज़ का बदला लेने के लिए उसने मेघना और देविका से हाथ भी मिलाया है ,सोमया और रोमेश को बर्बाद करने का।

अब अगर मैं सोचूँ कि इस सब से गौरव का सोमया और राजीव से लिंक क्यों है,तो सिर्फ़ देविका वाला बदला ही वजह नहीं हो सकती।गौरव के पीछे इसमें सोमया और राजीव का कनेक्शन भी होगा।
क्योंकि बिज़नेस से जुड़े मुद्दे भी तो हुए थे।

देविका ने जो फ़ाइलों को इधर-उधर किया था,उसको लेकर राजीव को गौरव से इश्यू हो सकता है।एक और अहम बात पर गौर करना चाहिए ,सोमया और गौरव बिज़नेस प्रतिद्वंदी भी हैं।इसीलिए तो यह खेला हुआ था।

वैसे एक बार को मान लें कि गौरव ने सोमया की जासूसी कंपनी में करवाई थी,तो इस हिसाब से दोनों में टकराव दिखना चाहिए था।मतलब यहाँ आधा सच और आधा झूठ है।

अब मुझे भगवान सिंह पर शक की वजह अभी नहीं मिल रही है कि उसकी भी इसमें कोई हिस्सेदारी होगी।
इस अपडेट में हमें रोमेश की डिटेक्टिव स्किल की कुछ झलकें दिख गई हैं,साथ ही उसकी चतुराई भी। देवप्रिय को उसने मस्त हड़का दिया।

अब ये सीधे तौर पर रोमेश को दिक्कत नहीं दे सकता,
लेकिन हाँ जब पिस्टल फ़ॉरेंसिक में गई थी,
उस समय अगर कुछ छेड़छाड़ हुई हो तो कहा नहीं जा सकता।

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लगभग आधे घँटे के बाद ही हम रोहिणी के थाने में पहुंच चुके थे।

थाने में घुसते ही हेल्प डेस्क पर बैठी हुई मैडम से मैंने देवप्रिय के बारे में पूछा। उन्होंने बताया कि देवप्रिय दूसरी मंजिल पर अपने कमरे में ही था।

मैं और रागिनी दो सीढिया एक साथ फर्लांगते हुए जल्दी से ऊपर पहुँचे।

देवप्रिय इस वक़्त अकेला ही अपनी कुर्सी पर अधलेटी अवस्था में अपने सामने एक और कुर्सी लगाकर उस पर अपने पांव टिकाए हुए छत की ओर घूरते हुए किसी गहरी सोच में डूबा हुआ था।

जैसे ही हमने कमरे में कदम रखा उसका ध्यान भंग हुआ और उसकी नजर हम दोनों पर पड़ गई।

मुझ पर नजर पड़ते ही उसके चेहरे पर एक अजीब सी मुस्कान ख़िल उठी।

"तुम्हारा इको सिस्टम तो बहुत मजबूत है बॉस, मुझे अपने केस से ही हटवा दिया, ताकि तुम जेल जाने से बच जाओ"

मेरे लिये ये खबर खुद नई थी, लेकिन तभी मेरे कान में शर्मा जी के वे शब्द गूंज उठे थे, जिसमे उन्होने बोला था कि मेरे थाने पहुंचने तक मेरे केस में सारा निजाम बदल चुका होगा।

अब मुस्कराने की और उसे उसका इको सिस्टम समझाने की बारी मेरी थी।

"जब सामने वाले का सामना किसी जंग खाये हुए सिस्टम से हो तो, फिर अपने इको सिस्टम का प्रयोग करना ही पड़ता हैं" मैने कुटिल स्वर में उसे बोला।

"कहना क्या चाहते हो, साफ साफ बोलो" देवप्रिय को मेरी बात समझ नही आई थी।

"तुम्हे कैसे पता कि तुम मुझे जेल ही भेजोगे, उन दोनों लड़कियों से मिलकर कौन सी खिचड़ी पका रहे हो, मुझे सब पता है, कल रात को मेरे घर से निकल कर वे दोनो लडकिया कहाँ गई थी, और आप कहाँ गए थे"

मैंने ऐसे ही अँधेरे में तीर छोड़ा। लेकिन मेरी बात सुनकर जिस प्रकार से सकपकाया था, उससे मुझें तीर निशाने पर लगने का एहसास हो गया था। मैंने तुरन्त उसे दूसरी चोट दी।

"जनाब! जासूस हूँ कोई घसियारा नही हूँ, नाम रोमेश है मेरा सबकी ख़बर रखता हूँ, और आप क्या समझते हो वो सजा-याफ्ता मुजरिम लडकिया आपसे वफादारी निभाएगी क्या, इसलिए उनके साथ मिलकर मुझे किसी झूठे केस में फंसाने की कोशिश करने से बाज आ जाओ, नही तो रोमेश इस प्लेटिनम का वो दसवां ग्रह है, जो अगर किसी की कुंडली में आकर बैठ गया न, तो उस इंसान की कुंडली के सारे ग्रह एक साथ उल्टी चाल चलने लगते है"

ये बोलकर मैं उसके कमरे में रुका नही, क्यो कि मै जानता था कि इस वक़्त उसके बस में बाकी कुछ था नही और अपनी पुलिसिया धौंस में वो बस मुझ पर झपट ही सकता था।

लेकिन मैं अभी इस पुलिसिये के साथ बात को ज्यादा नही बढ़ाना चाहता था, क्यो कि मै नही चाहता था, की एक पुलिसिये के चक्कर में थाने का पूरा स्टाफ ही मेरे खिलाफ हो जाये।

कुछ भी था, अभी गर्दन तो मेरी फंसी ही हुई थी। मैं वहां से निकल कर सीढियो से तेजी से उतरते हुए थाने के इंचार्ज माहेश्वरी साहब के कमरे में घुस चुका था।

इस वक़्त वो एक फ़ाइल में बड़ी गहराई से उलझे हुए थे। मुझ पर नजर पड़ते ही उन्होने अपने सामने पड़ी हुई कुर्सियों पर हमे बैठने का इशारा किया।

उनका इशारा मिलते ही मैं और रागिनी उन कुर्सियों पर विराजमान हो गए। माहेश्वरी साहब ने भी कुछ ही पलों में अपनी नजर फ़ाइल से हटा ली थी।

"अपने केस के सिलसिले में तुम भगवान सिंह से मिल लो, अब वो तुम्हारे उस पिस्टल की गुत्थी को सुलझाएंगे" माहेश्वरी साहब ने केस देवप्रिय से लेकर भगवान सिंह को दे दिया था।

"ठीक है सर! मैं मिल लेता हूँ भगवान सिंह से, और उन्हें पूरे केस के बारे में शुरू से अवगत करवा देता हूँ" मैंने कुर्सी से उठने का उपक्रम किया।

"एक बात का ध्यान रखो रोमेश! अगर तुम बेकसूर हो तो तुम्हारे साथ इस थाने का कोई भी स्टाफ गलत नही कर सकता, उसकी जिम्मेदारी मैं लेता हूँ, मुझें इस बात का इल्म है कि इस शहर में तुम्हारे धंधे की वजह से तुम्हारे दुश्मनों की कोई कमी नही होगी, और वे लोग तुम्हारे साथ कुछ गलत करने की भी फिराक में होंगे, लेकिन यकीन मानो हम तुम्हारी स्थिति को भी ध्यान में रखकर ही कोई कार्यवाही करेगे" माहेश्वरी साहब ने मुझें भरोसा दिया।

"ठीक है सर! मैं जानता हूँ कि आपके रहते हुए मेरे साथ कुछ भी गलत नही हो सकता है" मैं बोलते हुए अपनी सीट छोड़ चुका था।

"चलिये! उम्मीद है की अगली बार कोई शिकायत हुई तो पहले सीधा मेरे पास आओगे" ये बोलकर माहेश्वरी साहब ने मेरी ओर अपना हाथ बढ़ाया, जिसे मैंने तत्काल अपने हाथ से थामा और गर्मजोशी से हाथ मिलाकर वहां से रुखसत हो गया।

भगवान सिंह का कमरा नीचे ही थोड़ा सा अंदर जाकर था। जिस वक्त मैं उनके कमरे में पहुंचा, उस वक्त वे भी किसी केस की चार्जशीट तैयार करने में व्यस्त थे।

"आप ही भगवान सिंह है जनाब" मैंने जानते बुझते भी उनसे पूछा।

"मैं ही भगवान सिंह हूँ! आप कौन है" भगवान सिंह ने मेरे साथ साथ रागिनी पर भी नजर डालते हुए पूछा।

"जी मेरा नाम रोमेश है और माहेश्वरी जी ने मुझें आपके पास भेजा है" मैंने भगवान सिंह को पूरी इज्जत बख्शते हुए बोला।

"आजा भाई रोमेश बैठ जा, मैं तो कब से तुम्हारे आने का इंतजार कर रहा था" भगवान सिंह अब अपने हाथ के कागजों को एक तरफ रखकर मुझ से पूरी तरह से मुखातिब हो चुका था।

"जी आपसे ही मिलने के लिए आया हूँ" मैंने जवाब दिया।

"जितना मुझे हमारे साथी देव ने तुम्हारे केस के बारे में बताया है, उस हिसाब से तो आप पर अभी तो कोई केस बनता नही है, अब पिस्टल आपके घर से गुम हुई और आपके ही घर से बरामद हो गई, इस गुमशुदगी के पीरियड में अगर उस पिस्टल से कोई वारदात नही हुई है तो, तुम लंबी तानकर सोना, लेकिन भाई अगर कुछ गड़बड़ हो गई तो फिर पुलिस के सवालो के घेरे में तो तुम आ ही जाओगे" भगवान सिंह ने पूरी साफगोई से वही बोला, जो उसे बोलना चाहिये था।

"जी ये तो मैं भी जानता हूँ, लेकिन मेरी पिस्टल के गायब होने से लेकर उसके मेरे ही घर से बरामद होने तक में एक लड़की की संदिग्ध भूमिका है, उस लड़की के साथ एक लड़की और शामिल है, जिसे मैंने इसी थाने में एक केस में जेल भिजवाया था, उन दोनों लड़कियों ने मुझे फ़साने के लिए कोई साजिश रची, अगर उन दोनों लड़कियों से अच्छी तरह से पूछताछ हो जाये तो इस पूरे मामले से पर्दा उठ सकता है" मैने भगवान सिंह को बोला।

"उन लड़कियों से मैं मिल चुका हूँ, आपकी पिस्टल की एक बार फोरेंसिक रिपोर्ट आ जाये, और उस पिस्टल पर उनमे से किसी के भी फिंगरप्रिंट मिल जाये, मैं एक मिनट नही लगाऊंगा, उनको घर से उठाने में, अब सिर्फ शक की बिना पर भी मैं जब तक उन दोनों से कोई पूछताछ नही कर सकता, जब तक उस पिस्टल से की हुई कोई वारदात सांमने नही आ जाती" भगवान सिंह एक एक बात बहुत नाप तौल कर बोल रहा था।

मेरे पास अभी तक उसकी किसी भी बात से असहमत होने का कोई कारण नही था।

तभी दरवाजे से आती हुई एक आवाज ने मुझे चौंका दिया था। हम तीनों की निगाहें एक साथ ही दरवाजे की ओर उठी थी।

दरवाजे पर कुमार की माता जी एक दूसरे लड़के के साथ खड़ी होकर अंदर आने की इजाजत मांग रही थी।

उनको वहां देखते ही मेरा मन आशंकाओं के बादलों से घिर चुका था।

"आ जाइये मैडम" तब तक भगवान सिंह उन्हें अंदर आने के लिये बोल चुका था।

वे दोनो अंदर आकर हमारे बगल वाली कुर्सियों पर ही बैठ चुके थे। उन माताजी ने बैठते ही कुछ पलों तक मुझे और रागिनी को घूरा।

"तुम तो वही हो न बेटा जो आज दिन में मेरे बेटे गौरव को पूछने के लिए आये थे" माता जी ने मेरी तरफ देखते हुए बोला।

"हां माता जी! मैं वही हूँ! क्या हुआ अभी तक गौरव घर पर नही आया क्या" मैने आशंकित स्वर में पूछा।

"बेटा न तो उसका फोन ही मिल रहा है और न ही वो अपनी बवाना वाली फैक्ट्री में है, मैं तो उसी की रिपोर्ट लिखवाने आई हूँ" माता जी ने बोला।

"क्या माजरा है, तुम जानते हो इन्हें रोमेश साहब" भगवान सिंह ने मुझ से पूछा, जो अभी तक मूक दर्शक बना हुआ हमे देख रहा था।

मैंने इस बार कुमार के बारे में तसल्ली से भगवान सिंह को समझाया।

"ठीक है मैडम! आप अपने बेटे का एक फ़ोटो और उसका कहाँ और किन लोगों के साथ उठना बैठना है, वो सब एक पेपर पर लिख कर दीजिए, साथ में उनका मोबाइल नंबर भी दीजिये, मैं उसके फोन की लोकेशन ट्रेस करवाने की कोशिश करता हूँ" भगवान सिंह ने एक ही बार मे सब कुछ बोल दिया था।

"जी मै अभी आपको सब लिखकर दे देता हूँ, आप बस मेरे कजिन को जल्द से जल्द ढूंढ दीजिये" माता जी के साथ आये हुए उस किशोर उम्र के लड़के ने अधीर स्वर में बोला।

"चिंता मत करो बच्चे, हम तुम्हारे भाई को ढूंढने में जी जान लगा देंगे" भगवान सिंह ने उस लड़के को सांत्वना भरे स्वर में बोला।

तभी भगवान सिंह के फोन की घँटी बज उठी। भगवान सिंह ने फोन सुनते हुए ही अजीब सी नजरो से हम सभी की ओर देखा। उसके बाद उसने फोन रखते ही उस कमरे में धमाका कर दिया।

"एक युवक की लाश मिली है, आप सभी को मेरे साथ चलना होगा, उस युवक की शिनाख्त करने के लिये"

भगवान सिंह ने अचानक से बोला ही था कि कुर्सी पर बैठी हुई माता जी एकदम गश ख़ाकर कुर्सी से नीचे गिर पड़ी।

मै जल्दी से माता जी को सम्हालने के लिए झुका, तब तक भगवान सिंह भी माता जी को उठाने की कोशिश करने लगा था।

रागिनी भगवान सिंह की टेबल पर रखा हुआ पानी के जग को उठाकर उससे पानी के छींटे माता जी के चेहरे पर मारने लगी थी।

गुमशुदा गौरव :

कुमार की माता जी को, चेहरे पर पानी पड़ते ही तत्काल होश आ गया था, रागिनी ने उनका सिर अपनी गोद मे ले लिया था।

"मैं किसी महिला सिपाही की ड्यूटी इनकी देखभाल के लिए लगाता हूँ, बेटा तुम हमारे साथ चलना" भगवान सिंह ने माता जी के साथ आये हुए उस लड़के को बोला।

"आंटी जी आप घबराए मत! भगवान न करे कि कुमार के साथ कुछ बुरा हुआ हो, वो कोई और भी तो हो सकता है, आप सलामत रहिये" रागिनी ने माता जी को दिलासा देते हुए बोला।

माता जी होश में जरूर आ गई थी, किंतु अभी तक उनके मुंह से कोई आवाज नही निकली थी, वे बस सूनी आँखों से सभी को निहारे जा रही थी।

तभी भगवान सिंह ने एक महिला सिपाही के साथ कमरे में प्रवेश किया।

"संतोष! जब तक हम वापिस नही आ जाते, तब तक इन माता जी की देखभाल करना, और इनके लिए कुछ ठंडा वगेरह मंगवाकर इन्हें पिला देना, हम लोग एक कॉल पर जा रहे है" भगवान सिंह ने उन संतोष नाम की सिपाही को बोला।

"जी जनाब! आप बेफिक्र होकर जाइये, मैं मैडम का पूरा ध्यान रखूंगी" संतोष ने भगवान सिंह की बात का जवाब दिया।

उसके बाद हम सभी लोग जल्दी से उस जगह के लिए निकल गए जहां किसी युवक की लाश मिलने की कॉल भगवान सिंह के फोन पर आई थी।

कोई बीस मिनट के बाद हम लोग सेक्टर 28 के पास एक वीरान इलाके में पहुंचे थे।

इस एरिया में अभी लोगो की बसावट काफी कम थी। लेकिन यहां पर दिल्ली के वाहनों के लाइसेंस बनने की वजह से वाहनो की आवा जाही लगी रहती थी।

दूर से ही हमारी नजर एक जगह पर लोगो की भीड़ पर पड़ चुकी थी। भगवान सिंह ने अपनी गाड़ी को उसी भीड़ के पास जा कर रोका था।
हमने भी अपनी गाड़ी को भगवान सिंह की गाड़ी के पीछे ही पार्क किया और भगवान सिंह के साथ ही उस भीड़ की तरफ बढ़ गए।

भगवान सिंह के साथ थाने से चार कांसटेबल भी थे। पुलिस को देखते ही भीड़ ने अब तीतर बितर होना शुरू कर दिया था।

वो एक खाली प्लाट था, जिसमे काफी झाड़ झंखाड़ उग आए थे, ऐसी ही एक झाड़ियों के पीछे से एक युवक के दोनो पाँव बाहर की तरफ नजर आ रहे थे।

दिल की धड़कने सिर्फ गौरव के भाई की ही नही मेरी भी बड़ी हुई थी। अगर ये लाश गौरव की हुई तो अपनी भी व्हाट लगना निश्चित था।

लेकिन पाँव को जब मैंने गौर से देखा तो मुझे वे पाँव गौरव के डीलडौल से जुदा प्रतीत हुए।

लेकिन तब तक भगवान सिंह और उसके साथ एक कांस्टेबल उस लाश तक पहुंच चुके थे, बाकी कांस्टेबल वहां लगी हुई भीड़ की हटाने में मशगूल हो चुके थे।

मै और रागिनी गौरव के भाई का हाथ पकड़े हुए लाश के नजदीक पहुंचे। लाश को देखते ही वो लड़का मुझ से लिपट गया।

"ये गौरव भैया नही हैं"उसने लिपटे हुए इतना ही बोला था, उसकी दोबारा से उस लाश को देखने की हिम्मत नही हो रही थी।

मैने भी उस लाश को देखकर भले ही ये सोचकर राहत की सांस ली थी कि ये गौरव की लाश नही है, लेकिन उस लाश को देखकर भी मन मे एक अफसोस तो उभरा था, क्यो कि कोई तो था, जिसे इस बेरहमी से मारा गया था।


जारी रहेगा_____✍️
Bhut hi badhiya update Bhai
Chalo romesh babu ka devpriy se to picha chuta
Agar ye lash Kumar ki nahi hai to kiski hai
Aur kahi aesa na ho ki iska khun romesh babu ki pistol se huva ho
 
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