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Thriller कातिल रात

Ajju Landwalia

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#10

"तुम मेरी बात सुन रही हो न" मैने जब काफी देर तक सौम्या की कोई आवाज नही आई तो पूछा।

"मैं सुन रही हूँ! तुम मुझे पूरी बात बताओ" सौम्या ने बोला तो मैं उसे कल शाम को उसके आफिस से निकलने के बाद से कल रात तक का पूरा वाक्या बताता चला गया।

"दो दिन से मेरे मोबाइल पर अनजान नंबर से काल तो आ रही थी, लेकिन मैंने रिसीव नही किये थे, आफिस के फोन पर जब फोन आया होगा तो शायद मैं उस समय आफिस में नही होउंगी" सौम्या ने मेरी पूरी बात सुनने के बाद बोला।

"वैसे मेरी सलाह है कि मेघना या देविका तुम से मिलने की कोशिश करे तो उनसे मिलना मत, और तुम्हारी सिक्युरिटी की क्या व्यवस्था है" मैने आखिर में सौम्या से पूछा।

"चार बाउंसर रहते है मेरे साथ, जिनमे से दो के पास पिस्टल भी होती है" सौम्या ने मुझे बताया।

"उन लोगो को अलर्ट पर रखना ,इस वक़्त तुम्हारी सुरक्षा में कोई चूक नही होनी चाहिए"मैने सौम्या को चेताया।

"आज एक बार तुम भी मेरे पास आ जाओ, मुझे देविका के बारे में और भी कुछ बात करनी है" सौम्या ने मुझे बोला तो मैंने शाम के समय आने की हामी भरके फोन को काट दिया।

मैने फोन काटते ही फोन को एक तरफ उछाला और सुबह के नित्यकर्म से निर्वित होने के लिए
बाथरूम की ओर बढ़ा ही था कि फोन एक बार फिर से बज उठा था।
फोन थाने से देवप्रिय का था।

"ग्यारह बजे तक थाने आ जाओ, वो दोनो लडकिया भी तब तक थाने पहुंच जाएगी" देवप्रिय ने आदेशात्मक स्वर में बोला।

"जो आज्ञा जनाब, बन्दा समय पर हाजिर हो जायेगा" मैंने देवप्रिय को बोला।

"रागिनी मैडम को साथ लेकर आना, वो भी कल रात की घटना की चश्मदीद है" देवप्रिय ने फिर से बोला।

"जी वो भी आ रही है, उसे मैने सुबह ही फोन कर दिया था।

"ठीक है" ये बोलकर उसने फोन काल की इति श्री कर दी।

इस बार मैंने कुछ पल फोन को घूरा,..मुझे अंदेशा था की कहीं बाथरूम की तरफ जाते हुए इसका पुलिस सायरन फिर से न बज उठे।

लेकिन जब फोन खामोशी से मेरा मुंह चिढ़ाता रहा तो मैंने फोन को अपने बिस्तर में उछाला बाथरूम में घुस गया।

घँटे भर के भीतर ही बन्दा चकाचक हो कर खुद को शीशे में निहार रहा था। तभी दरवाजे की बेल बजी, मैने घड़ी की ओर देखा।

ये वक़्त रागिनी के आने का था। मैने जाकर दरवाजा खोला तो रागिनी अपनी क़ातिल मुस्कान बिखेरती हुई मेरी ओर ही देख रही थी।

"आ गई हुजूरे आला" मैंने रागिनी के सम्मान में अपने सिर को हल्का सा नवाते हुए बोला।

"आप बुलाये और हम न आये,ऐसी गुस्ताखी करके कम से कम मै अपनी सैलरी तो खतरे में नही डाल सकती हूँ" रागिनी की आते ही बकलोली शुरू हो चुकी थी।

"अच्छा किस महीने तेरी सैलरी नही मिली" मैने दिखावटी गुस्से में बोला।

"वो तो मैं कही से कोई भी पेमेंट आती है, तो अपनी सैलरी पहले ही काट कर बाकी पेमेंट तुम्हे देती हूँ, नही तो हर महीने ही मेरी सैलरी नही आती" रागिनी ने मुझे चिढ़ाने वाले अंदाज में बोला।

"ये तुम बोल रही हो" मैने आहत निग़ाहों से उसकी और देखा।

मेरे इस तरह बोलने से रागिनी ने शरारती नजरो से मेरी ओर देखा।

"मैं तो तुम्हे अपनी कंपनी के साथ साथ अपने घर की भी मालकिन बनाने की सोच रहा था" मैने उसकी शरारती मुस्कान को देखकर बोला।

"क्यो दुनिया से सन्यास लेकर क्या हिमालय पर जाना है तपस्या करने, जो सब कुछ मेरे नाम करके जाना चाहते हो" रागिनी ने ना समझ बनते हुए बोला।

"घर की मालकिन कोई तभी बनता है क्या, जब कोई अपना घर किसी के नाम करके सन्यासी बन जाता है" मैने हल्के से खीज भरे स्वर में बोला। मै जानता था कि वो इस वक़्त मेरे मजे ले रही है, लेकिन मैं भी कुछ सोचकर उसे मजे लेने देने रहा था।

"हाँ! मैने तो यही सुना है कि घर के मालिक तो ऐसे ही बनते है" रागिनी ने मुस्करा कर बोला।

"एक तरीका और है घर की मालकिन बनने का" इस बार मैं भी जवाब में मुस्कराया।

"अच्छा बताओ फिर, और कौन सा तरीका है" रागिनी ने मुझे तकते हुए पूछा।

"लड़की शादी करके भी किसी के घर की मालकिन बन सकती है" मैने मुस्कराते हुए बोला।

"हाये दैया! तो तुम इस रास्ते से चलती गाड़ी में चढ़ने की कोशिश कर रहे हो" रागिनी ने अचानक से अपने तेवर बदलते हुए बोला।

"क्या मतलब" मैं उसकी प्रतिक्रिया से बौखला सा गया था।

"मतलब ये की माना कि सुबह उठकर आज तुम नहा लिए हो, लेकिन अभी भी चेहरे पर वो चमक नही आई कि रागिनी दौड़कर तुम्हारे गले मे वरमाला डाल दे, चाहो तो एक बार फिर से शीशे में अपने चेहरे की चमक को चेक कर लो"

रागिनी की बात सुनकर मैं न रोने में था न हँसने में, एक तरीके से वो घुमा फिरा कर बोल रही थी, की जाकर अपनी शक्ल आईने में देखकर आओ, ये मुंह और मसूर की दाल, खैर इस हालात पर कहावतें तो ढेर सारी याद आ रही थी, लेकिन हर कहावत को याद करके खुद पर ही जूते पड़ते हुए महसूस होते।

"बेटा कुंवारी ही रहेगी पूरी उम्र, जिसने रोमेश की कद्र नही की उसकी कद्र कभी इस जमाने ने भी की" मैने झल्ला कर बोला तो रागिनी खिलखिला कर हँस पड़ी।

"मेरे बैग में से नाश्ता निकालो! मैं भी करके नही आई हूँ! इतने मैं कॉफ़ी बना कर ला हूँ" ये बोलकर वो बकलोल बिना मेरी तरफ देखे ही किचन में घुस गई।

मै नाश्ते की बात सुनकर मुस्करा दिया था। जो बात मैं सुबह उसे फोन पर नही कह सका था, वो इच्छा उसने बिना बोले ही पूरी कर दी थी।

*********
मैं इस वक़्त कुमार गौरव के फ्लैट की घँटी बजा रहा था। दरवाजा कोई पांच मिनट के बाद एक लगभग पचपन साल की महिला ने खोला।

जो कि अपनी सूरत से ही बता रही थी कि वे कुमार की माता जी है! असली कुमार गौरव की जबरा फैन। उन्होंने दरवाजा खोलते ही हमारी और सवालिया निगाहों से देखा।

"कुमार साहब से मिलना था" उनके कुछ पूछने से पहले ही मैं बोल पड़ा था।

"वो तो बेटा कल से घर पर नही लौटा है, अपनी बवाना वाली फैक्ट्री में गया था,अक्सर जब काम ज्यादा होता है तो रात को वही रुक जाता है" कुमार की माता जी ने एक ही बार मे पूरी कैफियत दे डाली थी।

"कल से आपकी उनकी फोन पर कोई बात हुई है" मैने साधारण भाव से पूछा।

"बेटा बात तो नही हुई उससे, एक बार रात को मैंने फोन भी किया था, लेकिन उस वक़्त फोन स्विच ऑफ आ रहा था" माताजी ने उसी साधारण भाव मे जवाब दिया।

"ठीक है माताजी! अगर कुमार साहब आये तो उन्हें बोलना की वो एक बार रोमेश को फोन कर ले" ये बोलकर मैं उन्हें नमस्कार करके उनके दरवाजे से रुखसत होकर अपनी गाड़ी में जाकर बैठ गया।

जैसे ही रागिनी गाड़ी में सवार हुई, मैने कुमार का नंबर अपने मोबाइल से मिला दिया। फोन इस वक़्त आउट ऑफ कवरेज एरिया बता रहा था। मैने एक बार रागिनी की ओर देखा। रागिनी के चेहरे पर भी इस वक़्त कई सवालों की रेखाएं देखी जा सकती थी।

"कुमार के साथ कुछ गलत न हुआ हो" रागिनी के मुंह से बरबस ही निकला।

"शायद वही हो रहा है जो हम लोग सोच रहे थे" मैंने हल्की सी चिंता भरे स्वर में बोला।

"शायद उससे भी कुछ ज्यादा बड़ा होने वाला है" रागिनी मेरी तरफ देखकर बोली।

"चलो थाने चलते है, देवप्रिय से भी मिलना है" मैने रागिनी की ओर देखते हुए बोला।

"नही! मेघना और देविका ने देवप्रिय के साथ मिलकर ये जाल बुना है, थाने जाने से पहले हमें शर्मा जी को एक बार पूरी बात बता देनी चाहिए, और शर्मा जी से बात करने के बाद हमे सबसे पहले कुमार को ढूंढना होगा" रागिनी ने अपने दिमाग के सारे घोड़े खोल दिये थे।

"दिमाग तो आला दर्जे का लगाया है इन दोनों कुड़ियो ने, लेकिन वो भूल गए कि उनका पाला रोमेश से पड़ा है"

मेरी बात सुनकर रागिनी ने अपना गला खंखारा। मानो कह रही हो कि सिर्फ तुम ही तुम नही हो, हम भी साथ मे है, पाला हमसे भी पड़ा है।
मै उसकी इस अदा को देखकर हल्का सा मुस्करा दिया।

मैने उसी समय एसी पी निरंजन शर्मा का नम्बर अपने फोन से डायल कर दिया।

तभी काल वेटिंग में देवप्रिय का नंबर भी चमकने लगा था। लेकिन तभी शर्मा जी ने मेरा फोन रिसीव कर लिया था।

"कहो रोमेश कैसे याद किया" शर्मा जी ने आत्मीयता भरें स्वर में पूछा।

"आपकी रहमुनाई की जरूरत पड़ गयी है जनाब, आपसे मिलना है, बहुत जरुरी" मैने शर्मा जी को बोला।

"मिलना है तो आ जाओ, अब तुम्हारे इलाके में ही आ गया हूँ, यही पुलिस लाइन में आ जाओ, मैं शाम तक यही हूँ" शर्मा जी ने मुझे बोला।

"जी जनाब मैं कुछ देर में हाजिर होता हूँ" ये बोलकर मैने फोन काटा ही था कि देवप्रिय का फ़ोन नंबर फिर से चमक उठा। इस बार मैंने फोन उठाने में कोई कोताही नही की।

"तुम्हे ग्यारह बजे आने को बोला था, तुम अभी तक आये नही, और फोन भी नही उठा रहे हो" उसने गुस्से भरे स्वर में बोला।

"जिस वक्त आपका फोन कॉल वेटिंग में बज रहा था, इस समय आपके हाकिम एसी पी निरंजन शर्मा का फोन आया हुआ था, उन्हें मुझ से कोई जरूरी काम है, इसलिए अभी मुझें शर्मा जी के पास पुलिस लाइंस जाना पड़ रहा है, वहां से फ्री होते ही आपके दरबार मे हाजिर होता हूँ" मैंने जान बूझकर शर्मा जी का नाम उसके सामने लिया था।

"ठीक है यार! जैसे ही वहाँ से फ्री होते हो, सीधा मेरे पास ही आना" देवप्रिय के तेवर एक दम से किसी झाग की मानिंद बैठ चुके थे।

"बिल्कुल हाजिर होता हूँ जनाब! तब तक आप उन दोनों दस्यु सुंदरियों के साथ चाय कॉफी का शगन मेला करो" ये बोलकर मैने फोन काट दिया।

मैंने देखा कि रागिनी मेरी तरफ ही देखकर मन्द मन्द मुस्करा रही थी।

देवप्रिय की छुट्टी:

पुलिस लाइन पहुंचने में हमे कोई आधा घन्टा लगा था। वजह थी सुबह मिलने वाला ट्रैफिक जाम, जो अब दिल्ली की सड़कों पर हमेशा ही मिलने लगा था।

एसी पी निरंजन शर्मा जी ने मेरे पहुंचते ही अपने कक्ष में मुझें बुलवा लिया था।

मुझे ये कहने में कोई संकोच नही है कि मैंने तो शर्मा जी की सिर्फ एक बंसल मर्डर केस में मदद की थी, जिसकी वजह से शर्मा जी तरक्की पाकर अपने इंस्पेक्टर के ओहदे से एसी पी की कुर्सी तक पहुंच गए थे, लेकिन उसके बाद शर्मा जी ने मेरी अनेक मौकों पर मदद की।

जब जब भी मुझे उनकी जरूरत पड़ी, उन्होंने मेरी मदद करने में कभी आना कानी नही की। वो अपने महकमे के काम मे कितने ही मसरूफ क्यो न हो, वो इस नाचीज़ के लिए हमेशा वक्त निकाल लेते थे।

इस वक़्त मैं शर्मा जी को अपनी पूरी आपबीती सुना चुका था, और शर्मा जी पूरी गंभीरता से मेरी बात को सुनकर मेरी ओर ही देख रहे थे।

"तुम्हारी कहानी तो मुझे समझ मे आ रही है, लेकिन सबसे बड़ा पेंच इसमे यही फँसा है कि पिस्टल की गुमशुदगी की रिपोर्ट पुलिस में करवाने के बाद पिस्टल का तुम्हारे ही घर से बरामद होना! अब अगर इस पिस्टल से कोई वारदात हो चुकी है तो, पहली फुर्सत में पुलिस तुम्हे ही गिरफ्तार करेगी" शर्मा जी ने साफ शब्दों में बोला।

"लेकिन मालिक मैं तो बेकसूर हूँ, आपके रहते हुए आपके ही इलाके में एक बेकसूर इंसान को फांसी चढ़ाने का इंतजाम कैसे किया जाता है" मैने विनय भरे स्वर में शर्मा जी की ओर देखते हुए बोला।

"वर्तमान हालात में मैं अपने किसी मातहत को तुम्हारे खिलाफ कोई कार्यवाही करने से तो नही रोक सकता, लेकिन इतना जरूर कर सकता हूँ, की इस कार्यवाही में मैं समय लगवा दू, लेकिन उस समय का सदुपयोग तुम्हे खुद की बेगुनाही साबित करने में करना होगा" शर्मा जी ने पहेली सी बुझाई।

"क्या मतलब" मै और खुलकर समझना चाहता था।

"मतलब ये की इस केस में तुम्हे अपनी मदद खुद ही करनी होगी, फिर रागिनी तो है ही तुम्हारे साथ, मुझें पूरी उम्मीद है कि तुम इस मुसीबत से भी बाहर आ जाओगे" शर्मा जी ने इस बार रागिनी पर नजर डालते हुए बोला।

"लेकिन देवप्रिय तो पहली फुर्सत में मुझे उठा कर जेल में ठूंस देगा, फिर मैं अपनी मदद कैसे कर पाऊंगा" मैंने शर्मा जो को बोला।

"तुम थाने जाओ, तुम्हारे वहां पहुंचने तक तुम्हारे केस में वहां का पूरा निजाम बदल चुका होगा, कोई भी तुम्हे नाहक परेशान नही करेगा, तुम्हारी तत्काल गिरफ्तारी को जब तक मेरे बस में होगा, मैं रोकने की कोशिश करूंगा, इस वक्त इससे ज्यादा मैं तुम्हारी कोई मदद नहीं कर पाऊंगा" शर्मा जी ने अपनी मजबूरी बताई।

लेकिन वो ये बोलकर सिर्फ यही जता रहे थे कि वे मेरी ज्यादा मदद करने में असमर्थ है, लेकिन मैं जानता था कि उनकी ये मदद मेरे लिये कितनी बड़ी मददगार होने वाली थी।

मैं जेल से बाहर रहकर तो रागिनी के साथ मिलकर अपने खिलाफ बड़ी से बड़ी साजिस को बेनकाब कर सकता था, लेकिन जेल में जाने के बाद मैं कुछ भी करनें में असमर्थ था।

मुझे गिरफ्तारी से बचाए रखना ही इस वक़्त मेरे लिए वरदान साबित होने वाली थी। मैने शर्मा जी का तहेदिल से शुक्रिया अदा किया और वहां से विदा ली।

अब मैं पहले थाने जाकर देवप्रिय का ही सामना करना चाहता था।


जारी रहेगा_____✍️

Bahut hi shandar update he Raj_sharma Bhai

Kumar gaurav ke sath kuch na kuch hadsa ho chuka he..............

ACP Sharma se milke romesh ne ek tarah se apni jamanat karwa li he........

Ab devpriya uske case ka incharge nahi rahega, as per ACP sharma.......

Agli dhamakdar update ki pratiksha rahegi bhai
 

Avaran

एवरन
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रिव्यू की शुरुआत की जाए

पिछले तीनों अपडेट के रिव्यू एक साथ ही,
अच्छा गहराई वाला रिव्यू आएगा, कुर्सी की पेटी बाँध लीजिए क्योंकि जब हम रिव्यू लिखते हैं तो लोग बोलते हैं लिखो तो ऐसा रिव्यू लिखो, वरना न लिखो।

बहुत कुछ घटित हो गया है, कहानी के रहस्य कुछ उजागर हुए, तो कुछ अभी भी बचे हुए हैं। हमें इसका मुख्य प्लॉट स्पष्ट हो चुका है, कहानी के खलनायक भी कुछ हद तक सामने आ गए हैं। कौन सच्चा, कौन झूठा ये भी सामने आ गया है, पर मुख्य सवाल यही है कि क्या ये सब ही खलनायक हैं, या अभी मुख्य खलनायक का आना बाकी है?

जिसका अंदेशा कम था, वो भी हुआ। एक तरह से आश्चर्य हुआ मुझे।

अब सोचा जा रहा होगा कि किस तरह की घुमा-फिरा कर बातें कर रहा हूँ मैं, तो चीज़ें स्पष्ट करता हूँ।

देवप्रिया कमीना था, वो हमें पता था, पर ये नहीं पता था कि इतना इस तरह दुश्मन खेमे से मिलीभगत कर बैठेगा। इसकी क्या रोमेश से रंजिश थी पहले या जलनखोर है ये कि रोमेश को पुलिस में इतनी पहचान है, इसलिए ये उसकी ऊँचाई से जलन रखता है। ज़्यादा कुछ नहीं, पैसे ही वजह होंगे इसके पीछे। मेरा एक ही अनुमान है कि देवप्रिया के पीछे इन सभी सम्मिलित चीज़ों का योगदान है।

मेघना–अनामिका… मेरा अनुमान वैसे तो कम ही ज़्यादा गलत जाता है, लेकिन यहाँ मैं ज़्यादा गलत था कि मेघना और अनामिका को कुछ ज़्यादा ही सज्जन समझ बैठा। ये दोनों बालिकाएँ कात्ये महा चालाक और धूर्त हैं, जो लोगों को धोखा देना जानती हैं। ऐसे लोगों को गरम तेल में फ्राई किया जाना चाहिए।


मेरा सवाल अब यही है कि पहले चलो मान कर चलते हैं कि मेघना अनामिका इन लोगों को फँसाने आई हैं, तो क्या रोमेश निठल्ला, नकारा, बद्दिमाग है जो इनके जाल-साज़ी में फँस गया?


सच बोलूँ, रोमेश की डिटेक्टिव स्किल्स से मैं तो प्रभावित नहीं हुआ। ये कैसा डिटेक्टिव आया है जो अपने घर से पिस्टल लेकर जाने वाले के बारे में जान नहीं पाया, उल्टा दूसरों के इशारों पर इधर से उधर घूम रहा है।

मेरे सवाल अब सामने आते हैं कि पिस्टल घर में वापस आई कैसे। चलो मान लिया जाए कि वो पिस्टल अनामिका या चुराने वाले ने वापस किचन में रख दी।

तो वो आया तो दरवाज़े से नहीं होगा, क्योंकि उधर से आता तो सामने ढाबे के CCTV से मालूम चल जाता। इतना स्मार्ट है रोमेश कि ये चेक करे कि मेन गेट से आया या कहीं और से।

वो जो भी आया होगा, बैक गेट या खिड़की के रास्ते। तो रोमेश ने खिड़की और दूसरी जगहों की तलाशी क्यों नहीं ली कि आने वाला आया कैसे? कुछ तो सुराग होना चाहिए था। फिंगरप्रिंट के भरोसे नहीं रहना चाहिए रोमेश को, क्योंकि ये संभव है कि जिसने भी उस पिस्टल से कांड किया, उसने ऐसे ही नहीं उठाया होगा पिस्टल को। ग्लव्स का इस्तेमाल ज़रूर किया होगा पिस्टल में।

अब आते हैं कुमार गौरव के ऊपर—ये भैंसाहब ग़ज़ब टोपीबाज़ हैं। कभी लगता है इसके साथ गलत हुआ, तो कभी लगता है सारे फ़साद की जड़ ही यही है।

अब देखो क्या हुआ होगा कुमार के साथ। जहाँ तक सब सोच रहे हैं कि कुमार गौरव मारा गया, तो मेरा सोचना डिफरेंट है, क्योंकि राइटर चाहता है कि सबको लगे कुमार मर गया। जबकि मैं ठहरा अलग इंसान जो दिखाया जा रहा है, मैं वो नहीं देखता, अपनी अलग ही सोच है।

कुमार मेरे अनुसार मारा नहीं गया है, उसे किडनैप किया गया है। क्योंकि इतने जल्दी विलेन थोड़े हमारे नायक को फँसाएगा। वो तो अभी रोमेश के मज़े ले रहा है। रोमेश को एक प्यादा बनाया है विलेन ने। डिटेक्टिव लोग हमेशा क्लू से विलेन का पता लगाते हैं और इस बात को विलेन जानता है। इसलिए वो फेक क्लू प्लांट कर रहा है ताकि रोमेश उसके अनुसार चले। यही रोमेश की सबसे बड़ी गलती है वो क्लू के हिसाब से नहीं चले, बल्कि खुद कुछ अलग तरह से सोचे, तभी वो सफल जाएगा।

अब आते हैं रागिनी और रोमेश के प्रेम प्रसंग के बारे में क्या हुआ इनके प्रेम प्रसंग का? लग तो रहा है रोमेश भैया के अरमानों पर पानी फिर गया है। मैडम मानने वाली नहीं हैं इतनी जल्दी, बहुत पापड़ बेलने पड़ जाएँगे। एक बार को मुझे लगा मैडम का चक्कर कहीं और चल रहा है।

सौम्या - कहा था मैंने, ये मैडम का रोल इस कहानी में ज़्यादा महत्वपूर्ण है, जिसकी वजह भी बताई थी। अब देखो, यहाँ लोगों को सिंपल लग रहा है कि सौम्या की दुश्मनी की वजह से रोमेश भी फँस रहा है।

लेकिन मैं ठहरा महापुरुष जहाँ सबका सोचना खत्म, वहाँ से हम सोचना चालू करते हैं। सिंपल बात नहीं होगी कि सौम्या के मैटर के अलावा भी कुछ न कुछ इसके पीछे ज़रूर होगा, कि मेघना और अनामिका वापस आईं।

सौम्या को सबसे ज़्यादा सेफ्टी चाहिए, तो रोमेश बाबू उनके घर ही क्यों न रुक जाएँ। इस बहाने कुछ अलग, अनोखा देखने को मिलेगा हमें। वैसे भी सौम्या मैडम का मिज़ाज कुछ अलग सा है।

कुल मिलाकर शानदार अपडेट।
अगले की प्रतीक्षा।


@Raj_sharma आ गया रिव्यू
vihan27 मानते हो ना, जू का ब्रो लेजेंड है
 
Last edited:

TheBlackBlood

Keep calm and carry on...
Supreme
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"मतलब ये की माना कि सुबह उठकर आज तुम नहा लिए हो, लेकिन अभी भी चेहरे पर वो चमक नही आई कि रागिनी दौड़कर तुम्हारे गले मे वरमाला डाल दे, चाहो तो एक बार फिर से शीशे में अपने चेहरे की चमक को चेक कर लो"

रागिनी की बात सुनकर मैं न रोने में था न हँसने में, एक तरीके से वो घुमा फिरा कर बोल रही थी, की जाकर अपनी शक्ल आईने में देखकर आओ, ये मुंह और मसूर की दाल, खैर इस हालात पर कहावतें तो ढेर सारी याद आ रही थी, लेकिन हर कहावत को याद करके खुद पर ही जूते पड़ते हुए महसूस होते।
Haan! Pahle ye chhichhori harkate kar lo kyoki ye zyada zaruri hai, hat lauda :buttkick:
"चलो थाने चलते है, देवप्रिय से भी मिलना है" मैने रागिनी की ओर देखते हुए बोला।

"नही! मेघना और देविका ने देवप्रिय के साथ मिलकर ये जाल बुना है, थाने जाने से पहले हमें शर्मा जी को एक बार पूरी बात बता देनी चाहिए, और शर्मा जी से बात करने के बाद हमे सबसे पहले कुमार को ढूंढना होगा" रागिनी ने अपने दिमाग के सारे घोड़े खोल दिये थे।

"दिमाग तो आला दर्जे का लगाया है इन दोनों कुड़ियो ने, लेकिन वो भूल गए कि उनका पाला रोमेश से पड़ा है"

मेरी बात सुनकर रागिनी ने अपना गला खंखारा। मानो कह रही हो कि सिर्फ तुम ही तुम नही हो, हम भी साथ मे है, पाला हमसे भी पड़ा है।
मै उसकी इस अदा को देखकर हल्का सा मुस्करा दिया।
Dear detective zara explain karoge ki tumhe kaise pata chala ki dono laundiyo ne devpriya ke sath mil kar ye jaal buna hai....matlab kuch bhi :roll:

Aur fir jab ye pata chal hi Gaya to ACP Sharma ki rahnumaai lene kyo chal diye be, saboot ke sath seena chauda kar ke seedhe thane pahuch Jana tha aur devpriya ki aankho me aankhen daal kar unki saari kartoot expose kar deni chahiye thi...kya yaar sahi bol rela tha apan ki ye detective kahlane ke laayak hi nahi hai. Ekdam noob harkate hain iski :D
मैं जेल से बाहर रहकर तो रागिनी के साथ मिलकर अपने खिलाफ बड़ी से बड़ी साजिस को बेनकाब कर सकता था, लेकिन जेल में जाने के बाद मैं कुछ भी करनें में असमर्थ था।
Ohh really....I mean itna talent hai tumme???? Aur koi talent ho ya na ho lekin joke mast maara hai:lotpot:


Anyway....Kumar Gaurav gayab hai...uske bare me ab kya hi bole apan, matlab ki according to romesh jab ye sara kiya dhara un do laundiyo aur devpriya ka hi hai to zaahir hai Kumar Gaurav ke gayab hone ke pichhe bhi unhi ka hath hoga.... :D

ACP ki maujoodgi me in jaal bunne walo se puchha jaye ki ye sab in logo ne kyo kiya, and one more thing...jab ye khulasa ho hi gaya hai to saumya ko ab kisse aur kis baat khatra??? :roll:

Overall mast funny type update tha ye, keep it up :thumbup:
 

Raj_sharma

यतो धर्मस्ततो जयः ||❣️
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रोमेश तो बहुत शातिर निकला..... किसी केस में उलझाने से पहले ही अपना पूरा बचाव कर लिया.....


खैर अगर कोई पंगा हुआ तो लगता नहीं कि devpiray रोमेश बाबु को बख़्शीश करेंगे....


अगले अंक की बहुत बेसब्री से इंतजार कर रहे हैं.....
Devpriya ka tod to londe ne pahle hi nikaal liya 😁
Thank you very much for your valuable review and support bhai, sath bane rahiye :hug:
 

Raj_sharma

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Bhut hi badhiya update Bhai
Romesh bhai ne to pahle hi apni suraksha ka intejam kar liya
Dhekte hai police station Jane ke baad kya hota hai
Bilkul, door ki kodi rakhi hai romesh ne, waise asli khiladi wahi hota hai jo hamesha ek patta chupa kar rakhta hai 😎
Thank you very much for your valuable review and support bhai :hug:
 

Raj_sharma

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Esa lagata hai Romesh Babu is bar pakka kahe naa kahe fasne Wale hai Q ki Devika or Meghana ke jaal me Devpriya to lattu ho gya hai
Waise bhi kehawat hai ladki ke aansoo me badi takat hoti hai ache se ache ko ghayal kar deti hai fir ye to Devpriy hai jo pehli najar me ghayal ho gye the Devika or Meghana ke 😉😉
.
Lekin kya Saumya bhi khatre ke nishan par hai or kya Kumar Gaurav kya khatre me hai ya nipat gya hoga pata nahi Jane Hamare Romesh Babu ka kya hoga ab
Devika aur meghna dono hi saatir khiladi hain, aur saja yafta mujrim bhi, unke liye kisi ko faasna koi muskil kaam nahi hai, jab romesh ko fasa sakti hai , to kisi or ko fasaana to minutes ka kaam hai 😄 khair Saumya aur kumaar ki jindgi bhi khatre me hi hai .
Thank you very much for your wonderful review and support bhai :hug:
 

Raj_sharma

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Raj_sharma

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अपडेट तो बढ़िया है. पढ़ कर वाकई अच्छा लगा.

पर ये भी लगा की इस वाले अपडेट में कुछ लाइन (dialogues) की आवश्यकता नहीं थी... नहीं भी होते तो काम चलता. (बुरा मत मानना, ऐसा मेरा विचार है.)

बाकी, लेखक महोदय को जो सही लगे.


Waiting for the next update. ♥️
Mitra wo lekhak hi kya jo kewal प्रशंसा सुनकर खुश हो जाए । मजा तो तभी है जब अच्छा ओर बुरा दोनों सुनने को मिले। 😄
तभी तो पता लगता कि आप कितने पानी मै हो।
साथ बने रहिए। रिव्यू के लिए बोहोत -2 धन्यवाद भाई 🙏🏼
 

Raj_sharma

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Bahut hi shandar update he Raj_sharma Bhai

Kumar gaurav ke sath kuch na kuch hadsa ho chuka he..............

ACP Sharma se milke romesh ne ek tarah se apni jamanat karwa li he........

Ab devpriya uske case ka incharge nahi rahega, as per ACP sharma.......

Agli dhamakdar update ki pratiksha rahegi bhai
Kumar gayab hai, idhar acp ki vajah se saara nijaam bhi badal jayega, kuch bada hone ki aasanka hai. 😎 Thank you very much for your wonderful review and superb support bhai :hug:
 

DEVIL MAXIMUM

"सर्वेभ्यः सर्वभावेभ्यः सर्वात्मना नमः।"
Prime
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रिव्यू की शुरुआत की जाए

पिछले तीनों अपडेट के रिव्यू एक साथ ही,
अच्छा गहराई वाला रिव्यू आएगा, कुर्सी की पेटी बाँध लीजिए क्योंकि जब हम रिव्यू लिखते हैं तो लोग बोलते हैं लिखो तो ऐसा रिव्यू लिखो, वरना न लिखो।

बहुत कुछ घटित हो गया है, कहानी के रहस्य कुछ उजागर हुए, तो कुछ अभी भी बचे हुए हैं। हमें इसका मुख्य प्लॉट स्पष्ट हो चुका है, कहानी के खलनायक भी कुछ हद तक सामने आ गए हैं। कौन सच्चा, कौन झूठा ये भी सामने आ गया है, पर मुख्य सवाल यही है कि क्या ये सब ही खलनायक हैं, या अभी मुख्य खलनायक का आना बाकी है?

जिसका अंदेशा कम था, वो भी हुआ। एक तरह से आश्चर्य हुआ मुझे।

अब सोचा जा रहा होगा कि किस तरह की घुमा-फिरा कर बातें कर रहा हूँ मैं, तो चीज़ें स्पष्ट करता हूँ।

देवप्रिया कमीना था, वो हमें पता था, पर ये नहीं पता था कि इतना इस तरह दुश्मन खेमे से मिलीभगत कर बैठेगा। इसकी क्या रोमेश से रंजिश थी पहले या जलनखोर है ये कि रोमेश को पुलिस में इतनी पहचान है, इसलिए ये उसकी ऊँचाई से जलन रखता है। ज़्यादा कुछ नहीं, पैसे ही वजह होंगे इसके पीछे। मेरा एक ही अनुमान है कि देवप्रिया के पीछे इन सभी सम्मिलित चीज़ों का योगदान है।

मेघना–अनामिका… मेरा अनुमान वैसे तो कम ही ज़्यादा गलत जाता है, लेकिन यहाँ मैं ज़्यादा गलत था कि मेघना और अनामिका को कुछ ज़्यादा ही सज्जन समझ बैठा। ये दोनों बालिकाएँ कात्ये महा चालाक और धूर्त हैं, जो लोगों को धोखा देना जानती हैं। ऐसे लोगों को गरम तेल में फ्राई किया जाना चाहिए।


मेरा सवाल अब यही है कि पहले चलो मान कर चलते हैं कि मेघना अनामिका इन लोगों को फँसाने आई हैं, तो क्या रोमेश निठल्ला, नकारा, बद्दिमाग है जो इनके जाल-साज़ी में फँस गया?


सच बोलूँ, रोमेश की डिटेक्टिव स्किल्स से मैं तो प्रभावित नहीं हुआ। ये कैसा डिटेक्टिव आया है जो अपने घर से पिस्टल लेकर जाने वाले के बारे में जान नहीं पाया, उल्टा दूसरों के इशारों पर इधर से उधर घूम रहा है।

मेरे सवाल अब सामने आते हैं कि पिस्टल घर में वापस आई कैसे। चलो मान लिया जाए कि वो पिस्टल अनामिका या चुराने वाले ने वापस किचन में रख दी।

तो वो आया तो दरवाज़े से नहीं होगा, क्योंकि उधर से आता तो सामने ढाबे के CCTV से मालूम चल जाता। इतना स्मार्ट है रोमेश कि ये चेक करे कि मेन गेट से आया या कहीं और से।

वो जो भी आया होगा, बैक गेट या खिड़की के रास्ते। तो रोमेश ने खिड़की और दूसरी जगहों की तलाशी क्यों नहीं ली कि आने वाला आया कैसे? कुछ तो सुराग होना चाहिए था। फिंगरप्रिंट के भरोसे नहीं रहना चाहिए रोमेश को, क्योंकि ये संभव है कि जिसने भी उस पिस्टल से कांड किया, उसने ऐसे ही नहीं उठाया होगा पिस्टल को। ग्लव्स का इस्तेमाल ज़रूर किया होगा पिस्टल में।

अब आते हैं कुमार गौरव के ऊपर—ये भैंसाहब ग़ज़ब टोपीबाज़ हैं। कभी लगता है इसके साथ गलत हुआ, तो कभी लगता है सारे फ़साद की जड़ ही यही है।

अब देखो क्या हुआ होगा कुमार के साथ। जहाँ तक सब सोच रहे हैं कि कुमार गौरव मारा गया, तो मेरा सोचना डिफरेंट है, क्योंकि राइटर चाहता है कि सबको लगे कुमार मर गया। जबकि मैं ठहरा अलग इंसान जो दिखाया जा रहा है, मैं वो नहीं देखता, अपनी अलग ही सोच है।

कुमार मेरे अनुसार मारा नहीं गया है, उसे किडनैप किया गया है। क्योंकि इतने जल्दी विलेन थोड़े हमारे नायक को फँसाएगा। वो तो अभी रोमेश के मज़े ले रहा है। रोमेश को एक प्यादा बनाया है विलेन ने। डिटेक्टिव लोग हमेशा क्लू से विलेन का पता लगाते हैं और इस बात को विलेन जानता है। इसलिए वो फेक क्लू प्लांट कर रहा है ताकि रोमेश उसके अनुसार चले। यही रोमेश की सबसे बड़ी गलती है वो क्लू के हिसाब से नहीं चले, बल्कि खुद कुछ अलग तरह से सोचे, तभी वो सफल जाएगा।

अब आते हैं रागिनी और रोमेश के प्रेम प्रसंग के बारे में क्या हुआ इनके प्रेम प्रसंग का? लग तो रहा है रोमेश भैया के अरमानों पर पानी फिर गया है। मैडम मानने वाली नहीं हैं इतनी जल्दी, बहुत पापड़ बेलने पड़ जाएँगे। एक बार को मुझे लगा मैडम का चक्कर कहीं और चल रहा है।

सौम्या - कहा था मैंने, ये मैडम का रोल इस कहानी में ज़्यादा महत्वपूर्ण है, जिसकी वजह भी बताई थी। अब देखो, यहाँ लोगों को सिंपल लग रहा है कि सौम्या की दुश्मनी की वजह से रोमेश भी फँस रहा है।

लेकिन मैं ठहरा महापुरुष जहाँ सबका सोचना खत्म, वहाँ से हम सोचना चालू करते हैं। सिंपल बात नहीं होगी कि सौम्या के मैटर के अलावा भी कुछ न कुछ इसके पीछे ज़रूर होगा, कि मेघना और अनामिका वापस आईं।

सौम्या को सबसे ज़्यादा सेफ्टी चाहिए, तो रोमेश बाबू उनके घर ही क्यों न रुक जाएँ। इस बहाने कुछ अलग, अनोखा देखने को मिलेगा हमें। वैसे भी सौम्या मैडम का मिज़ाज कुछ अलग सा है।

कुल मिलाकर शानदार अपडेट।
अगले की प्रतीक्षा।


@Raj_sharma आ गया रिव्यू
vihan27 मानते हो ना, जू का ब्रो लेजेंड है
Bhai tera Review ek update ke barabar ka hota hai
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Story try kyo nahi karte ho bhai 😂😂😂
 
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