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Thanks priya jiNice update

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अजीब किस्सा है देविका का जाने इसका असली मकसद क्या है इस बार का#06
चार बजे तक हम लोग सौम्या के राजेंदर प्लेस वाले आफिस में उसके केबिन में मौजूद थे।
सौम्या ने अपनी कुर्सी से उठकर बाकायदा गले लगाकर स्वागत किया था, जब सौम्या मुझे गले से लगा रही थी तो मैने रागिनी को इशारा करके अपना जलवा दिखाया था।
जवाब में रागिनी ने बड़ी अजीब सी हरकत की थी, उसने चिढ़ाने वाले अंदाज में अपनी जीभ को हल्का सा बाहर निकाला था।
"यार तुम्हे कभी मेरी याद आती है या नही, या हमारे रिलेशन सिर्फ प्रोफेशनल है" सौम्या ने मुझें मेरी कुर्सी पर बिठाते हुए कहा।
"नही सौम्या! तुम्हे तो मैने हमेशा अपना माना है, इसलिए हक से तुम्हारे पास चला आता हूँ" मैंने सौम्या के हाथ को अपने हाथ मे लेते हुए कहा।
"अगर अपना मानते तो आज इतने महीनों के बाद मिलने नही आते, और मुझे आज भी यकीन है कि तुम बिना काम के तो नही आये होंगे" सौम्या ने कुर्सी पर बैठते हुए बोला।
"काम के सिलसिले में ये नही आये है, सौम्या मैडम, काम के सिलसिले में मैं आपसे मिलने आई हूँ" तभी रागिनी ने मुझे धर्मसंकट से निकाला।
क्यो कि सौम्या की ऐसी अपन्त्व भरी शिकायत सुनकर अब मेरा साहस नही हो रहा था कि मैं उसे बोल पाऊं की मै आज भी तुमसे काम की वजह से ही मिलने आया हूँ।
"क्यो रोमेश साहब की डिटेक्टिव एजेंसी बन्द हो रही है क्या, जो तुम्हे काम के लिये मेरे पास आना पड़ा, चिन्ता मत करो, मैं रोमेश की एजेंसी बन्द नही होने दूँगी, जब तक मैं जीवित हूँ" सौम्या ने मुस्कराते हुए बोला।
"नही! सौम्या तुम्हे गलतफहमी हो रही है, मैं एक केस के सिलसिले में तुमसे मिलने आई हूँ" रागिनी ने सौम्या के उस मजाक का जवाब दिया।
"इसका मतलब तुमने अपनी एक अलग डिटेक्टिव एजेंसी खोल ली है, यार ये तो बड़ा झोल कर दिया तुमने, अब कल को कोई केस देना होगा तो मैं किसको दूँगी, एक मेरी छोटी बहन है और एक मेरा प्रिंस चार्मिंग है"सौम्या ये बोलकर फिर से मुस्कराई।
रागिनी ने आहत नजरों से सौम्या की ओर देख़ा।
"सौम्या! पहले कॉफी मंगवा लो, क्यो कि आज तुम बहुत फनी मूड में लग रही हो" रागिनी ने सौम्या को मुस्कराते हुए बोला।
"चलो कॉफी तो पिलाऊंगी ही, पहले ये बताओ क्या काम है तुम्हे" इस बार सौम्या ने किंचित गंभीर स्वर में बोला।
"तुम्हारी कंपनी में एक देविका नाम की लड़की काम करती थी, जिसने कंपनी के साथ दो करोड़ का फ्रॉड किया था" रागिनी ने ये बोलकर सौम्या की तरफ देखा।
"हाँ! लेकिन उसे तो हमने जेल भिजवा दिया था" सौम्या को उस लड़की के बारे में याद था।
"वो लड़की इस वक़्त जेल से बाहर है, शायद जमानत पर आई हो, कल रात को वो लड़की रोमेश के घर पर आई और रोमेश का पिस्टल चुराकर वहाँ से भाग गई" रागिनी ही सौम्या को सब बता रही थी।
"क्या? रोमेश के रहते हुए रोमेश का पिस्टल लेकर भाग गई, आई कान्ट बिलीव" सौम्या ने सिर से रागिनी की बात को नकारा।
"ये सच है, इसमे थोड़ी सी मेरी बेवकूफी थी, जिस वजह से वो पिस्टल ले जाने में कामयाब हो गई" इस बार मैंने सौम्या को यकीन दिलाया।
सौम्या अवाक सी मेरी ओर देखती रह गई।
तभी चपरासी ने कॉफी और स्नैक्स की ट्रे के साथ केबिन में प्रवेश किया।
सौम्या, देविका और मेघना-6
"तुम जरूर उसकी खूबसूरती पर मर मिटे होंगे, वो ज़ालिम चीज ही ऐसी है" सौम्या अजीब सी मुस्कान के साथ बोली।
"इन जनाब की यही आदत एक दिन या तो तिहाड़ भिजवायेगी, या फिर हमेशा के लिए कहीं और का टिकट करवाएगी, किसी भी खूबसूरत लड़की को देखते ही ये साहब दिमाग की बजाय किसी और तरीके से ही सोचने लग जाते है"रागिनी ने मेरे कुछ बोलने से पहले ही सौम्या के सामने भाजी पाड़ा कर दिया था।
मैने आहत नजरों से रागिनी की तरफ देखा। लेकिन रागिनी के हावभाव में कोई परिवर्तन नही आया था।
"ये बात तो रागिनी सही कह रही है रोमेश, तुम कई बार बहुत लापरवाही करते हो, बस किस्मत के धनी हो जो हर बार मुसीबतों से निकल जाते हो" सौम्या और रागिनी नाम की ये दोनों खूबसूरत बालाएं जो भी बोल रही थी, वो मेरे भले के लिए ही बोल रही थी।
इसलिये मैं चाहकर भी उनकी बातों का विरोध नही कर पा रहा था, लेकिन अब मेरा उन दोनो की बात
का रुख मोड़ना जरूरी हो गया था, नही तो अभी इनका ये 'रोमेश पुराण' ख़त्म होने का नाम नही लेने वाला था।
"मेरे ख्याल से हम यहां देविका के बारे में बात करने आये थे, न कि मेरे बारे में वार्तालाप करने आये थे" मैंने हल्का सामुस्कराते हुए बोला।
"देविका के बारे में बताने के लिये ज्यादा कुछ नही है, लेकिन वो जिंदगी जीने के लिए हर हथकंडे अपनाने में यकीन रखती थी।
"हमे उसके बैकग्राउंड के बारे में जानना है, जिससे हमें ये पता लग सके कि वो कहां कहां पाई जा सकती है" इस बार रागिनी ने बात को आगे बढ़ाया।
"वो सब जानकारी तो उसके बायोडाटा में मिल जायेगी, लेकिन उसमे उसकी कोई व्यक्तिगत जानकारी नही होगी, सब प्रोफेशनल ही होगी" सौम्या ने कुछ सोचते हुए बोला।
"मुझे धोखाधड़ी के उस केस की फ़ाइल मिल सकती है, जो तुमने उस पर किया था।
"वो तो तुम हमारी लीगल सेल से ले सकते हो, वहां रोशनी नाम की एडवोकेट मिलेगी, मैं उन्हें बोल दूँगी, लेकिन वो बहुत चालाक लड़की है, उसने गिने चुने दिनों में ही मेरी कमजोरी का पता लगा लिया था, उसके बाद उसने मुझें मेरे घर तक अप्रोच किया था, लेकिन जब से मेघना वाला केस हुआ है, मैं अब आफिस के स्टाफ को घर तक नही लेकर जाती हूँ, लेकिन वो दो तीन बार मुझे होटल के कमरे में मिली थी, तब उसके बारे में कुछ उसकी निजी बाते पता चली थी" ये बोलकर सौम्या एक पल को चुप हो गई थी।
सौम्या की कमजोरी कई बार उसके लिए बहुत घातक सिद्ध हो चुकी थी। सौम्या एक अजीबो गरीब बीमारी से पीड़ित थी, वो बीमारी थी उसका निम्फो मानियाक होना! इस बीमारी में इंसान के जिस्म की हवस कभी पूरी नही होती थी, इसी वजह से सौम्या चाहें पुरुष हो या औरत, किसी के साथ भी शारीरिक सम्बंध बनाने में गुरेज नही करती थी।
उसकी इसी लत के चलते उसके पति राजीव बंसल ने अपने पिता और अपनी सौतेली माँ के कत्ल के साथ साथ सौम्या को भी ठिकाने लगाने का सोच लिया था, वो तो आपके इस खाकसारकी बदौलत सौम्या की जान बच गई थी, अन्यथा राजीव बंसल अपने इरादों में लगभग कामयाब हो ही गया था ।
राजीव बंसल के बाद सौम्या के आफिस में ही काम करने वाली लड़की मेघना ने भी सौम्या की इसी आदत का फायदा उठाया और सौम्या के घर मे ही डेरा जमा लिया, एक बार तो मेघना ने भी सौम्या की जान लेनें की साजिस रची थी, लेकिन इस बार भी आपके इस अदना से सेवक रोमेश ने वक़्त रहते मेघना की साजिस पर से पर्दा हटा दिया था, जिस वजह से सौम्या एक बार फिर बाल बाल बची!
"मुझे पता नही उसने मुझे जो कुछ बताया था, वो सच है या झूठ, लेकिन अगर वो जानकारी तुम लोगो के कुछ काम आ सके तो मैं तुम लोगों को बता सकती हूँ" सौम्या ने ये बोलकर हमारी और देखा।"
उससे जुड़ी हर जानकारी हमारे काम की हो सकती है, अब उसने सच बोला है या झूठ ये तो हमारी जांच में पता चल ही जायेगा" मैने सौम्या की ओर देखते हुए बोला।
"जब वो दूसरी बार मुझे संग्रीला में मिली थी तो उसने मुझें बताया था कि कोई आदमी उसे ब्लैकमेल कर रहा हैं, और वो उसे अब तक दो लाख रु दे चुकी हैं, उसके बावजूद अब वो एक साथ दस लाख की डिमांड कर रहा है, उसने इस बारे में मुझ से मदद मांगी थी, लेकिन मैने उसे ठीक उसी प्रकार से मना कर दिया था, जिस प्रकार से मैने मेघना को पांच लाख देने से मना कर दिया था" सौम्या ने मुझे बताया।
"फिर जैसे मेघना ने उस बात से नाराज हो कर तुम्हारी हत्या की साजिस रची थी, ठीक वैसे ही इस बन्दी ने दूसरा रास्ता अख्तियार किया और तुम्हारे डेटा को ही तुम्हारी राइवल कंपनी को बेच दिया" रागिनी ने सौम्या को बोला।
"रागिनी कॉर्पोरेट में ये सब चलता रहता है, डेटा चोरी करवाना, टेंडर के बारे में किसी लूप होल को जानना, यहां तक कि किसी सरकारी टेंडर के बाद तो विरोधी पार्टियों से धरने प्रदर्शन करवाना तक राइवल कंपनियों के हथकंडे होते है, कॉर्पोरेट की जासूसी में आ जाओ, यहां ज्यादा मज़ा है" सौम्या ने रागिनी की ओर देखकर बोला।
"जिस दिन शहर में मर्डर होने बन्द हो जायेगे, उस दिन कॉरपोरेट के लिए जासूसी करने लगूंगी" रागिनी ने मुस्कराते हुए जवाब दिया।
"तुम्हे देविका ने सिर्फ ब्लेकमेलिंग के बारे में ही बताया था, या ब्लेकमेलर के बारे में भी बताया था" मैंने बातचीत को फिर से देविका के बारे में लाने के लिए बोला।
"पूरा नाम नही जानती मैं, बस किसी कुमार के बारे में बार बार बोल रही थी, उस दिन उसने कुछ ज्यादा ही पीली थी, इसलिए पूरी रात वो उस कुमार को ही गाली देती रही थी" सौम्या ने जब कुमार के नाम का जिक्र किया था तो मेरी नजरो के आगे कुमार गौरव का चेहरा घूम गया था।
"देविका की जानकारी के एक कुमार को तो हम भी जानते है" रागिनी भी उसी कुमार गौरव के बारे में सोच रही थी।
"वो कुमार जिंदा है, अभी तक, वो तो उस दिन नशे में उसे बार बार मार डालने की बात कर रही थी" सौम्या ने आश्चर्य से बोला।
"उसी बन्दे की गाड़ी उसने कल रात को चुराई थी, उसी गाड़ी में बैठकर वो मेरे घर आई, और फिर उसी गाड़ी में किसी के खून के धब्बे आज पुलिस को मिले है" मैने सौम्या को बोला।"
“ये तो कोई खतरनाक खेल, खेल रही है, एक तीर से कई शिकार करना चाह रही है" सौम्या ने मेरी ओर हैरानी से देखते हुए कहा।
"लेकिन लाख टके का सवाल ये है सौम्या की वो मेरा शिकार क्यो करना चाहती हैं, मेरी उससे क्या दुश्मनी है" मैंने सौम्या की ओर देखकर बोला।
"शायद कोई जेल में बन्द कोई तुम्हारा सताया हुआ इंसान तुम्हे किसी झमेले में फंसाकर तुमसे बदला लेना चाहता हो" सौम्या ने भी वही सोचा जो अभी तक हम भी सोच रहे थे।
"ठीक है सौम्या! ऐसे सताए हुए इंसान को भी जल्दी ही ढूंढ लूँगा मै, अभी तो तुम मुझे उस फ्रॉड केस की फ़ाइल दिलवाओ, और देविका का बॉयो डाटा भी दो" मै अब वहां से चलने के उपक्रम में था।
"कहीं जाने का इरादा है क्या, आज तुम दोनो मेरे साथ मेरे घर चलो, साथ मे डिनर करेगे" सौम्या ने आग्रह पूर्वक कहा।
"डिनर के लिये फिर कभी आयेगे सौम्या! अभी तो हमे उस कुमार को दोबारा टटोलना पड़ेगा, जिसके बारे में अभी तुमने बताया है" मैंने सौम्या को बोला।
"फिर कभी तो तुम साल भर के बाद ही आओगे, मेरी एक बात समझ नही आती की तुम मुझ से इतना दूर दूर क्यो भागतें हो" सौम्या ने शिकायती लहजें में बोला।
"यार मैं तो हुश्न का शैदाई इंसान हूँ, मैं क्यो तुमसे दूर भागूँगा, बस अभी तक हमारे सितारे नही मिले है" मैने ये बोलकर सौम्या को टालने का प्रयास किया।
"ठीक है रोमेश, मैं तुम्हे ज्यादा नही कहूंगी, लेकिन उस केस फ़ाइल को लेने के लिए तुम्हे फिर से आना पड़ेगा, मैं अभी एच आर डिपार्टमेंट से देविका का बॉयो डाटा मंगवा देती हूँ" ये बोलकर सौम्या ने इंटरकॉम पर किसी को कुछ हिदायत दी।
उसके बाद हम लोग देविका का बॉयो डाटा आने का इंतजार करने लगे।
जारी रहेगा______![]()
#01
बारिश: (रात 8 बजे!)
इस बार दिल्ली की सर्दियों में बारिश अपना अलग ही स्यापा कर रही थी।
कहने वाले तो कहने लगे थे कि, दिल्ली भी बारिश के मामले में अब मुम्बई बनती जा रही है।
एक तो जनवरी के पहले सप्ताह की कड़ाके की सर्दी और उस पर ये बारिश का कहर।
मैं उसी सर्दी की मार से बचने के लिए इस वक़्त अपने फ्लैट में अपने बेड पर और अपनी ही रजाई में लिपट कर अपनी सर्दी को दूर भगाने का प्रयास कर रहा था।
अब आप भी सोच रहे होंगे की ये कौन अहमक इंसान है,जो बेवजह दिल्ली के मौसम का आँखों देख़ा हाल सुना रहा है।
वैसे तो अभी तक आपने अपने इस सेवक को पहचान ही लिया होगा , लेकिन फिर भी मैं आपको बता दूं कि मैं “रोमेश!” दिल्ली में एक छोटा मोटा जासूसी का धंधा करता हूँ…न न मैं कोई राॅ का एजेंट नही हूँ,मैं तो एक प्राइवेट डिटेक्टिव हूँ, जो सिर्फ कत्ल के केस में ही अपनी टांग घुसाता है।
जासूसी के बाकी धंधो मसलन, शक धोखा, पीछा, तलाक जैसे सड़क छाप धंधों से मैं दूर ही रहता हूँ।
बन्दे को बचपन से ही जासूसी उपन्यास पढ़ने का शौक इस कदर था, की जिस उम्र में मुझें स्कूल की किताबें पढ़नी चाहिए थी,उस उम्र में मैं दिन रात जासूसी किस्से कहानिया पढ़ा करता था।
इसी वजह से अपुन का मन भी सिर्फ जासूसी में ही अपना मुकाम बनाने का करने लगा था।
वैसे तो आपका ये सेवक जासूसी में दिल्ली से लेकर मेरठ आगरा ,मुम्बई और राजस्थान तक अपने झंडे गाड़ चुका था ,और आज किसी परिचय का मोहताज नही था , लेकिन मेरी एक नकचढ़ी सेक्रेटरी है,जिसका नाम रागिनी है, वो बन्दे की इस काबलियत की जरा भी कदर नही करती है,उसकी नजर में अपन आज भी घर की मुर्गी दाल बराबर है, लेकिन उसकी महिमा का बखान मैं बाद में करूँगा, इस वक़्त आपके इस जिल्ले-इलाही के फ्लैट को कोई बुरी तरह से पीट रहा था।
दरवाजा इतनी बेतरतीबी से पीटा जा रहा था कि, मानो कोई दरवाजा तोड़कर अंदर घुसना चाहता हो, मैं हड़बड़ाकर अपनी रजाई में से निकला और दराज में से अपनी पिस्टल निकालकर अपने बरमूडा में फँसाई और तेज कदमो दरवाजे की ओर बढ़ा और दरवाजे के पास जाकर ठिठक गया।
"कौन है,क्यो दरवाजा तोड़ने पर आमादा हो "मैंने बन्द दरवाजे के पीछे से ही बोला।
"दरवाजा खोलो ! मैं बहुत बड़ी मुसिबत में हूँ" ये किसी लड़की की घबराई हुई आवाज थी।
अब एक तो लड़की और ऊपर से मुसीबतजदा, और ऊपर से गुहार भी उस इंसान से लगा रही थी,जो मुसीबतजदा लड़कियों का सबसे बड़ा खैरख्वाह था,तो अब दरवाजा खोलना तो बनता था, सो मैंने दरवाजा खोला और फोरन से पेश्तर खोला।
दरवाजा खोलते ही मुझे यू लगा मानो कोई आंधी तूफान कमरे में घुस आया हो, वो लडकी डेढ़ सौ किलोमीटर की रफ्तार से कमरे में घुसी और सीधा मेरे बेड पर बैठ गई।
मै किंककर्तव्यमूढ़ सा बस उस
लड़की की ओर देखता रहा, उस मोहतरमा में एक बार भी मुझ से अंदर आने के लिए पूछना गवांरा नही समझा था।
"दरवाजा बंद करो न, ऐसे क्या देख रहे हो, कभी कोई लडकी नही देखी क्या" उस लड़की की आवाज जैसे ही मेरे कानो में पड़ी, मैंने हड़बड़ा कर दरवाजे को बन्द कर दिया।
दरवाजा बंद करते ही मेरी नजर उस लड़की पर पहली बार पूरी नजर पड़ी थी। लड़की उची लंबे कद
की बेइंतेहा खूबसूरत थी।
उसके कटीले नैन नक्श पर उसका मक्खन में सिंदूर मिला रंग तो कयामत ही ढा रहा था।
उसे ध्यान से देखते ही मेरे दिल की घण्टिया किसी मंदिर के घड़ियाल की तरह से बजने लगी थी।
पता नही साला ये अपनी उम्र का तकाजा था या अभी तक कुंवारा रहने का नतीजा था कि,आजकल अपुन को हर लड़की खूबसूरत लगती थी।
मुझे इस तरह से कुत्ते की तरह से अपनी तरफ घूरते हुए देखकर वो लड़की अब बेचैनी से अपना पहलू बदलने लगी थी।
"हो गया हो तो, अब इधर भी आ जाओ" उस लड़की को शायद ऐसी कुत्ती निग़ाहों का अच्छा खासा तजुर्बा था।
होता भी क्यो नही, जो जलवा उसकी खूबसूरती का था, उसके मद्देनजर तो जिसने भी डाली होगी मेरे जैसी कुत्ति नजर ही डाली होगी।
लेकिन आपके इस सेवक ने लड़की के बोलते ही अपनी इस छिछोरी हरकत पर ब्रेक लगाई,और चहलकदमी करता हुआ उसके सामने आकर खड़ा हो गया।
एक तो साला सर्दी का मौसम, ऊपर से कड़कड़ाती बरसात, और अब ये कहर बरपाती मेरे ही बेड पर बैठी हुई मोहतरमा, मेरी जगह कोई और होता तो अभी तक इस खूबसूरत बला के साथ पूरी रात की योजना अपने ख्यालों में बना चुका होता, लेकिन अपनी नजर भले ही कितनी भी कुत्ती हो, दिल शीशे की तरह से साफ है।
"कौन हो तुम, और इतनी बरसात में मेरे पास क्यो आई हो" मै अब उसकी सुंदरता के खुमार से कुछ कुछ निकलते हुए बोला।
"मेरी जान खतरे में है,मुझे कोई मारना चाहता है" उस लड़की की आवाज में फिर से घबराहट का पुट आ चुका था।
"लेकिन आपको मेरे बारे में किसने बताया कि मैं मुसीबतजदा हसीनाओं की मदद आधी रात को भी सिर के बल चल कर करता हूँ" मैं अब अपनी जासूस वाली फोम में आता जा रहा था।
"मैं आपको नही जानती, मेरे पीछे तो कुछ लोग लगे हुए थे, मैं तो उनसे बचने के लिए आपके फ्लैट का दरवाजा पीटने लगी थी" उन मोहतरमा ने जो बोला था, वो मेरे लिए अनपेक्षित था ।
ऐसे कोई जबकि सर्दियो के दिनों में आठ बजते ही आधी रात का आलम लगने लगता है, क्यो किसी अंजान के घर मे ऐसे घुसेगा और न सिर्फ घुसेगा बल्कि आकर आराम से आकर बेड पर भी बैठ जाएगा।
"आप हो कौन, और कौन लोग है जो आपकीं जान लेना चाहते है" मैंने एक स्वभाविक सवाल किया।
"मेरा नाम अनामिका है, मै यही आपके इलाके के सेक्टर ग्यारह में रहती हूँ, मैं इधर किसी काम से आई थी, लेकिन जब मैं घर वापिस जा रही थी, तो मैंने देखा कि चार लोग मेरा पीछा कर रहे थे, मैं उन्हें देख कर घबरा गई और भागने लगी, तभी आपके फ्लैट पर नजर पड़ी, आपकी लाइट भी जली हुई थी, तो आपके फ्लैट का दरवाजा पीटने लगी" अनामिका ने बोला।
"उन लोगो को आपने पहले भी कभी अपने पीछे आते हुए देखा है, या आज ही देखा था" मै अब उससे सवाल जवाब करने के मूड में आ गया था।
"उन लोगो को तो मैंने आज ही देखा था, लेकिन मुझे कई दिनों से लग रहा है कि कोई मेरा पीछा कर रहा है" अनामिका ने रहस्यमय तरीके से बोला।
"ऐसा लगने का कोई कारण भी तो होना चाहिए, क्या आपको किसी से अपनी जान का खतरा है" मैंने उसके जवाब में से ही सवाल ढूंढा।
"खतरा तो मेरी जान को बहुत है, मुझे नही पता कि मौत किस पल मेरा शिकार कर ले" अनामिका की आवाज से ही ये बोलते हुए उसका डर झलक रहा था।
"कौन लेना चाहता है तुम्हारी जान" मैंने फिर से उसी सवाल को घुमा फिरा कर पूछा।
"धीरज!पूरा नाम उसका धीरज खत्री है" अनामिका ने मुझे उस बन्दे का नाम बताया।
"आप धीरज को कैसे जानती है" मेरा ये पूछना स्वभाविक था।
"किसी समय वो मेरा बॉयफ्रेंड था, लेकिन जल्दी ही मुझे ये एहसास ही गया कि मैंने गलत आदमी से प्यार कर लिया है, उसके बाद मैंने उससे अपने रिलेशन ख़त्म कर लिये, और दूसरी जगह शादी कर ली, उसके बाद से वो बन्दा मेरी जान का दुश्मन बना हुआ है" अनामिका ने पूरी बात बताई।
"देखिए मैं एक डिटेक्टिव हूँ… मेरा पाला हर रोज ऐसे लोगो से ही पड़ता है, आप मेरा ये कार्ड रख लीजिए, और कल मेरे आफिस आकर मुझे सभी कुछ डिटेल में बताइये, हो सकता है, इसके बाद आपका बॉयफ्रेंड फिर कभी आपको परेशान न करे" मैंने उसको विश्वास दिलवाने वाले शब्दो मे बोला।
"अगर आपने सच मे मेरा उस आदमी से पीछा छुड़ा दिया तो, आपको आपके वजन के बराबर नोट से तोल दूँगी" अनामिका ने उत्साहित स्वर में बोला।
"लेकिन मैडम इतना बता दीजिए कि वो नोट दस के होंगे या दो हजार के होंगे" मैंने उसकी बात का झोल पकड़ते हुए बोला।
मेरी बात सुनकर वो नाजनीन न केवल मुस्कराई बल्कि खिलखिलाकर हँस भी पड़ी।
"आप बहुत हाजिर जवाब हो रोमेश साहब" अनामिका ने मेरा नाम मेरे विजिटिंग कार्ड पर पढ़ते हुए बोला।
"चलिये अब मैं आपको आपके घर छोड़ देता हूँ, वैसे भी रात अब गहरी होती जा रही है" मैंने अनामिका की तरफ देख कर बोला।
"काफी शरीफ आदमी मालूम पड़ते हो रोमेश साहब, वरना मौसम तो आशिकाना है" उस जालिम ने एकाएक ऐसी बात बोलकर मेरे दिल के तारों को झंकृत कर दिया।
"इस मौसम की वजह से ही तो बोल रहा हूँ, आपके कपडे गीले हो चुके है, घर आपका पास में ही है, मैं अपको घर छोड़ देता हूँ, ताकि आप इन गीले कपड़ो से छुटकारा पा सको" मैंने अनामिका की बात को एक नया मोड़ दिया।
"लेकिन मैं अभी घर नही जाना चाहती हूँ, मेरे पति भी आज घर पर नही है, और मुझे ऐसे हालात में डर भी बहुत लगेगा"
अनामिका अब सीधे सीधे मेरे गले पड़ रही थी। जबकि मेरी छटी इंद्री मुझे बार बार सचेत कर रही थी।
मुझे न जाने क्यो ये लडकी खुद को जो बता रही थी,वो नही लग रही थी।
लेकिन इस बार उसने जो बहाना बनाया था, उसने मुझे कुछ बोलने लायक नही छोड़ा था।
"लेकिन देवी जी, ये बन्दा यहां अकेला रहता है, कल को किसी को पता चलेगा तो आपकी बदनामी नही होगी" मैने वो बात बोली, जो आजकल के जमाने मे अपनी अहमियत खो चुकी थी।
मेरी इस बात को अनामिका की हँसी ने सही भी साबित कर दिया था।
"किस जमाने मे जी रहे हो रोमेश बाबू, आजकल किसके पास इतनी फुर्सत है कि कोई मेरी रातों का हिसाब रखें कि मैं अपनी रात कहाँ किसके साथ बिताकर आ रही हूँ.. यार अब ये फालतू की बाते बन्द करो, और अगर एक कप कॉफी पिला सकते हो तो पिला दो" अनामिका मेरे गले पड़ने में कामयाब हो चुकी थी।
मैं मरता क्या न करता के अंदाज में अपने किचन की ओर चल दिया।
कॉफी की जरूरत तो मुझे भी थी। इसलिए मैंने कॉफी के लिये कोई आना कानी नही की।
मैंने अपने बरमूडा से अपनी पिस्टस्ल को निकाल कर दराज में डाला और कॉफी बनाने के वास्ते किचन की ओर चल दिया।
मै कोई दस मिनट के बाद काफी बनाकर जब बैडरूम में पहुंचा तो अनामिका वहां नही थी।
मैंने इधर उधर नजर दौड़ाई, लेकिन वो कहीं नजर नही आई। मैंने बाथरूम की तरफ देखा, उसका दरवाजा भी बाहर से ही लॉक था।
मैने दरवाजे पर नजर डाली, दरवाजा इस वक़्त हल्का सा खुला हुआ था। मुझे तत्काल इस बात का ध्यान हो आया कि दरवाजा मैंने अनामिका के घर मे घुसते ही बन्द कर दिया था।
अब दरवाजा खुला होने का मतलब था कि चिड़िया फुर्र हो चुकी थी।
मैंने दोनो कॉफी के कप टेबल पर रखे, और अपने बेड पर धम्म से बैठ गया।
मेरी समझ मे नही आ रहा था की मेरे फ्लैट में आने का उसका मकसद क्या था, और वो जिस तरह से एकाएक गायब हुई है, उसके पीछे उसका उद्देश्य क्या था।
अचानक ही मेरे दिमाग मे एक बिजली सी कौंधी और मै अपनी जगह से उछल कर खड़ा हो गया।
मैंने तत्काल कमरे में अपनी नजर घुमाई। घर की सभी चीजें अपने स्थान पर यथावत थी।
फिर मैंने दराजो को खंगालना शुरू किया। दराज में नजर पड़ते ही मेरे होश फाख्ता हो चुके थे।
आपके इस सेवक की पिस्टल दराज से गायब थी।
जारी रहेगा________![]()
start new storyKahani qqge badhegi to sabkuch saaf hone lagega dost. Sath bane rahiye, thanks for your valuable reviewअजीब किस्सा है देविका का जाने इसका असली मकसद क्या है इस बार का
.
खेर मजेदार अपडेट रहा इस बार भी रमेश बाबू धीरे धीरे डिटेल के साथ आगे बढ़ते जा रहे है

Thank you sanju bhaistart new story

Bhut hi badhiya update Bhai#07
जब सौम्या के आफिस से निकले तो शाम के सात बज चुके थे। मैंने गाड़ी में बैठते ही रागिनी की तरफ देखा।
"तुम्हे घर छोड़ दूं क्या "मैने रागिनी को बोला।
"मेरी गाड़ी तुम्हारे फ्लैट पर खड़ी है, मैं वहां से गाड़ी लेकर ही घर चली जाउंगी" रागिनी की बात सुनकर मैने गाड़ी को अपने घर की और दौडा दिया।
मैं अभी मधुबन चौक से सीधा अंबेडकर हॉस्पिटल की तरफ जा रहा था। सेक्टर आठ के मेट्रो स्टेशन को पार करते ही एक लाल बत्ती पर मैने अपनी गाड़ी को रोका।
तभी एक गाड़ी बिल्कुल मेरे करीब आकर रुकी।
अचानक से मेरी उस गाड़ी की तरफ नजर पड़ी तो जो लड़की मेरी ओर देखकर मुस्करा रही थी, उसे देखकर मेरे होश उड़ गए थे। वो मेघना थी। वो मुझे देखकर लगातार मुस्कराए जा रही थी।
मैंने एक गहरी नजर भरकर उसे देखा। मेरी ये समझ मे नही आ रहा था, की वो जेल से बाहर कब आई।
"घर जा रहे हो" तभी मेघना ने मेरी ओर देखकर बोला।
"हां! अभी तो मेरा इराद घर जाने का ही था, लेकिन अब तुम्हे देखकर इरादा बदल दिया है, अब आज की शाम तुम्हारे साथ बिताने का इरादा है" अभी मैने बोला ही था कि वो तीन मिनट की लालबत्ती अब हरी बत्ती में बदल चुकी थी, और मेघना ने गाड़ी को तेजी से आगे बढ़ा दिया था।
मैंने भी उसके पीछे गाड़ी को दौड़ाया, लेकिन उसका इरादा मुझे देखकर भागने का नही था, उसने थोड़ी सी आगे जाकर गाड़ी को साइड में लगा दिया।
मैने भी उसके पीछे ही गाड़ी को रोका और अपनी गाड़ी से उतरकर मेघना की गाड़ी की ओर लपका।
रागिनी लपक कर ड्राइविंग सीट पर आ गई थी। उसने मेरे साथ बाहर आने का कोई प्रयास नही किया था। मैं मेघना की गाड़ी के पास उसकी ड्राइविंग सीट की तरफ पहुंचा।
"तुम मेरे साथ गाड़ी में आओ रोमेश, रागिनी को बोलो वो हमारे पीछे पीछे आ जाये, तुमसे कुछ बहुत जरुरी बात करनी है" मेघना ने मेरी और देखकर बोला।
"बाते तो मुझे भी तुमसे बहुत सारी करनी है, मैं आता हूँ अभी" ये बोलकर मैं रागिनी के पास जाकर उसे गाड़ी को पीछे लेकर आने के लिए बोला और वापिस आकर मैं मेघना की गाड़ी में आकर बैठ गया।
"जेल से कब बाहर आई तुम" मैंने गाड़ी में बैठते ही मेघना से पूछा।
"थोड़ी सेटिंग करके जमानत लेकर आई हूँ" मेघना ने संक्षेप में उत्तर दिया।
"यहां कैसे! इतेफाक से मिली हो, या फिर पीछा कर रही हो" मैंने हल्की सी मुस्कान के साथ पूछा।
"समझ लो पीछा ही कर रही हूँ! एक जरुरी काम था तुमसे" मेघना ने मेरी ओर देखकर बोला।
"मुझ से क्या काम आ गया तुम्हे, और मेरा पीछा क्या सौम्या के आफिस से ही कर रही हो" मैने उसकी तरफ देखकर बोला।
"हॉं ! जब तुम सौम्या के आफिस में जा रहे थे, तो मैं भी सौम्या से मिलने के लिए ही जा रही थी, लेकिन तुम्हे वहां जाते हुए देखकर मैं वापिस पार्किंग में आकर अपनी गाड़ी में बैठ गई थी" मेघना का व्यवहार मेरी समझ में नही आ रहा था।
"तुम्हे मुझ से क्या काम है" मैने अब उससे काम पूछना ही सही समझा।
"मेरी एक फ्रेंड मुसीबत में है, उसे तुम्हारी मदद चाहिए रोमेश" मेघना ने मेरी ओर कातर दृष्टि से देखते हुए बोला।
"तुम्हारी कौन सी फ्रेंड मुसीबत में है" मैंने असमंजस में उसकी ओर देखा।
"मैं उसी से मिलवाने के लिए तुम्हे लेकर जा रही हूँ" मैने देखा कि मेघना रिठालाका मेट्रो स्टेशन भी पार करके सेक्टर चौबीस की ओर अपनी गाड़ी को मोड़ चुकी थी।
मैने एक बार घूमकर देखा। रागिनी बदस्तूर हमारे पीछे ही आ रही थी। कोई दस मिनट उस सेक्टर में ही
गाड़ी को घुमाने के बाद उसने एक फ्लैट के बाहर गाड़ी रोक दी।
"इसी फ्लैट के फर्स्ट फ्लोर पर जाना है" मेघना ने गाड़ी के दरवाजे ओपन करते हुए बोला।
मैंने देखा कि रागिनी भी मेघना की गाड़ी के पीछे गाड़ी लगा चुकी थी, और गाड़ी से उतरकर मेरे नजदीक आकर खड़ी हो गई थी।
मेघना ने भी अपनी गाड़ी को लॉक किया और उस फ्लैट की पहली मंजिल की ओर बढ़ गई। हम दोनों भी उसी के नक्शेकदम पर चल पड़े थे। पहली मंजिल पर पहुंच कर मेघना ने बेल बजाई।
कोई दो मिनट के बाद एक जोडी कदमो की आवाज दरवाजे के करीब आती हुई सुनाई दी।
दरवाजा खुला और दरवाजे पर इस वक़्त मेरी नजर में अनामिका, कुमार गौरव की नजर में मल्लिका और पुलिस फ़ाइल में देविका के नाम से पाई जाने वाली वही खूबसूरत जाॅनिसार, नरगिस ए मस्ताना खड़ी हुई थी, और मेरी ओर देखकर मंद मंद मुस्करा थी।
उसे वहां देखकर मेरे होठो पर भी एक कुटिल मुस्कान थिरकने लगी थी।
उलझती गुत्थी।
देविका की वो मुस्कान कुछ ही पल में लुप्त हो गई और उसने हमारे अन्दर आने के लिए रास्ता छोड़ दिया।
मैं लगातार उसी को घूरते हुए सोफे पर जाकर बैठ गया।
उसकी वही कातिल मुस्कान एक बार फिर से उसके होठो पर थिरकने लगी थी।
"तुम दोनो एक दूसरे को पहले से जानते हो क्या, ये देविका तुम्हे देखकर बहुत मुस्करा रही है" मेघना ने अनजान स्वर में बोला।
"ये तो यही मोहतरमा बतायेगी की ये मुझे कैसे जानती है, लेकिन मैं इतना जरूर जानता हूँ, की ये लड़की मुझे बेवकूफ बनाकर मेरे घर से मेरा पिस्टल चुराकर भागी है" मैने मेघना की ओर देखते हुए ही, ये बोला ही था कि रागिनी अपनी जगह से उठी और अपनी पिस्टल को उसने देविका की कनपटी पर लगा दिया।
"वो पिस्टल निकाल कर लाओ, जहां भी उसे छुपा कर रखा है, वरना यकीन मानो गोली चलाते हुए मेरा हाथ कदापि नही कांपता" रागिनी का इस तरीके से उसके पिस्टल लगाने का उद्देश्य मैं समझ गया था, ये देविका के ऊपर एक मनोवैज्ञानिक दवाव बनाने का तरीका था।
"ये तुम क्या कर रही हो रागिनी, आराम से बैठकर बात करो, अगर सच मे इसके पास रोमेश की पिस्टल है, तो मैं उसे वापिस दिलवा दूँगी" मेघना ने घबराए हुए स्वर में कहा।
वैसे भी मेघना ने रागिनी के जलवो को अपनी आंखों से देखा हुआ था।
"आराम से बात तभी होंगी मेघना, जब ये पहले रोमेश सर का पिस्टल हमारे हवाले कर देगी, और साथ मे ये भी बतायेगी की उस पिस्टल को चुराने के पीछे इसका क्या मन्तव्य था" रागिनी मेघना की बात सुनने के कतई मूड में नही थी।
"मैने कोई पिस्टल नही चुराई, हॉं ये सच है कि मैं उस दिन रोमेश के फ्लैट में गई थी, लेकिन मैं उस वक़्त अपनी जान बचाने के लिए वहाँ घुसी थी" देविका ने सिरे से झूठ बोला।
"मैंने तुम्हारे सामने अपनी पिस्टल को अपनी दराज में डाला था, तुमने मुझे कॉफी बनाने के लिए बोला, जब मैं तुम्हारे लिए कॉफी बनाने के लिए गया तो तुम मुझे बिना बताए वहां से जा चुकी थी, तब मैंने सोचा कि शायद तुम कोई चोर थी, और कुछ चुराने के लिए मेरे घर में घुसी थी, फिर मैंने अपना सामान चेक किया तो दराज में से मुझे अपनी पिस्टल गायब मिली थी" मैने उसे उस रात का एक एक वाक्य याद दिलाया।
"लेकिन अगर मैंने पिस्टल चुराई होती तो मैं खुद तुम्हें अपने घर पर क्यो बुलाती, पूछ लो मेघना से, मैने ही मेघना को तुमसे मिलवाने के लिए फ़ोर्स किया था" देविका ने अपनी बेगुनाही का तर्क रखा।
"तुम दोनो ही सौम्या की कंपनी में काम करती थी, दोनो ने ही सौम्या के साथ कुछ न कुछ गलत किया है, जेल में तुम दोनो ने जरूर सौम्या के खिलाफ कोई नई खिचड़ी पकाई होगी!, अब क्यो कि मेघना तो अच्छी तरह से जानती है कि अगर सौम्या किसी मुसीबत में फंसती है तो वो रोमेश जी को जरूर याद करेगी, इसलिए तुम लोगो ने पहले रोमेश को ही रास्ते से हटाने का प्लान बनाया होगा" सोच के मामले में रागिनी इस वक़्त मुझ से भी चार कदम आगे चल रही थी।
"यार मैं अपने मामले में रोमेश को कोई गुनाहगार मानती ही नही हूँ, मेरे ही कर्म गलत थे, तो मुझे तो सजा मिलनी ही थी, लेकिन मैं हमेशा रोमेश को अपना सबसे अच्छा दोस्त ही समझती हूँ, तभी मैने जेल में भी किसी को कोई मदद की जरूरत होती है तो, रोमेश का नाम ही सभी को बताती हूँ" मेघना ने मेरी दोस्ती का दम भरा।
लेकिन फिलहाल की परिस्थितयो में उसकी इस दोस्ती के दम में कोई दम नही था।
"मैने तुम्हारे सामने अपना पिस्टल अपनी दराज में रखा था, तुम्हारे सामने किसी और आदमी ने मेरे फ्लैट मंर कदम नही रखा था, न तुम्हारे जाने के बाद कोई और मेरे फ़्लैट में आया, फिर अगर मेरी पिस्टल को तुम नही लेकर गई तो उसे जमीन निगल गयी या आसमान खा गया" मैने क्षुब्ध स्वर में बोला।
"तुमने ध्यान से चेक किया है कि वो पिस्टल तुम्हारे घर मे नही है" इस बार मेघना बीच मे बोली।
"इतना बड़ा बेवकूफ तो हूं नही की बिना घर मे चेक किए ही मैं थाने तक मे जाकर रिपोर्ट लिखवा दूंगा" मैने हल्के से गुस्से में मेघना की ओर देखकर बोला।
"एक बार हम लोग जाकर तुम्हारे घर पर ही उस पिस्टल को ढूंढ़े, हो सकता है, पिस्टल वही पर हो और तुम बिना वजह इधर उधर मारे फिर रहे हो" ये बात देविका ने बोली।
मेरे साथ साथ रागिनी ने भी उसे हैरानी से देखा।
"यार इस पिस्टल को हटा लो, इस पिस्टल को देख देख कर मेरी हार्टबीट बढ़ रही है, कहीं ये बेगुनाह बेमौत न मारी जाए" मेघना ने रागिनी की ओर देखते हुए बोला।
इस बार मेघना की रिक्वेस्ट भरी आवाज सुनकर रागिनी ने भी अपनी पिस्टल को देविका की खोपड़ी से हटा लिया।
"रोमेश सर! एक बार इसकी तमन्ना भी इसके सामने अपने घर की तलाशी करवा कर पूरी कर दो, पिस्टल अगर वहाँ नही मिलती है तो, इसको उसी समय पुलिस के हवाले कर दो" रागिनी ने अब देविका के पास से मेरी ओर आते हुए कहा।
"ये तरीका सही रहेगा" मैंने रागिनी की बात से सहमति जताई।
"लेकिन मुझे पुलिस के हवाले क्यो करोगे, तुम मेरी तलाशी ले लो, मेरे पूरे घर की तलाशी ले लो, जब मैंने कुछ किया ही नही तो मैं फिर से जेल क्यो जाऊं" देविका ने पुलिस बुलाने की बात का पुरजोर विरोध किया।
"लेकिन तुम्हारी हिस्ट्री के बारे में अभी तक जो सुना है, उस हिसाब से तो तुम आदतन अपराधी हो" मैने देविका को हिक़ारत से देखते हुए बोला।
"सिर्फ सुना है न, कभी अपनी आंखों से मेरे खिलाफ कोई सबूत देखा है" देविका ने विश्वास भरी दृष्टि से मेरी ओर देखा।
"हमारी गुड बुक में तो अब आई हो तुम देविका, तो अब सबूत भी ढूंढ लेगे" रागिनी ने उसी के अंदाज में उसे जवाब दिया।
"कुछ तो तुम्हारे बारे में कुमार गौरव ने बताया है, कुछ पुलिस फ़ाइल से पता चला है, बाकी बचा खुचा सौम्या ने बता दिया, इसके बाद भी तुम सबूत की बात कर रही हो" मैने हैरानी से देविका को देखा।
"इसी कुमार गौरव के बारे में ही तो तुमसे बात करने के लिए मेघना के जरिये, तुम्हे यहाँ बुलाया है रोमेश बाबू, मैं तो खुद उस कुमार की सताई हुई हूँ! मैं तो खुद पीड़िता हूँ, जिसे एक योजना बद्व तरीक़े से हर किसी की नजर में गुनाहगार बना दिया है" देविका ने विक्टिम कार्ड खेला।
लेकिन अब मेरी दिलचस्पी उसकी बातों में जाग चुकी थी। मैं अब उसका भी सच उसके मुंह से सुनना चाहता था।
जारी रहेगा______![]()
Congratulations bro
Intejar hai 1st update ka bhai agar ho sake to background rural rakhna
Congratulations
New chapter, new vibe, can’t wait to see your creativity light up the pages....
Good luck Raj_sharma![]()
Nice update....
Update
Ramesh The Great Sahab Ne To Apne dushmanon ki puri mahfil jail mein bhej rakhi hai aur uske bavjud poochh Rahe Hain Ki Mera Dushman kaun ho sakta hai
Shaandar update
sarkar ... aap bhi koi naya thread chalu karo sarkar ................ aap ki skill ke bahut diwane hai ..... yaha par
Update :- 2, 3, 4 and 5
Kafi shandaar tarike se case ki investigation ko darshaya hai bro...maza aa gaya
Idhar ke update read karne ke baad to filhaal yahi lagta hai ki wo laundiya kisi aise vyakti ka mohra ho sakti hai jiski romesh se personal dushmani hai...jaisa ki romesh aur ragini ne khud bhi kaboola hai. Iske alawa dusra koi reason filhal dikh nahi raha. Baaki dekhte hain
SI devpriya pakka ghar me apni biwi se rojana pitta hoga aur modern zamane ki nayi nayi gaaliya sunta hoga is liye uska lahja aisa hai...ghar par biwi par jor nahi to kahi aur jor chalaao...bechara
Kumar Gaurav...kya hero banega re tu, ek ladki se choona lagwa liya..hat lauda
Anyway interesting case hai bro...aise cases wali stories padhne me maza aata hai..isi liye thriller prefix me murder Mystery aur suspense se sarabor story pasand hai apan ko
Sare update shandaar aur lajawaab the, keep it up men![]()
Wonderful update and nice story
Ye story bhi aapki baki stories ki bahut achi h suspense and thrill se bhari .
Dete. Romesh wahi h kya jo pichili story mei tha .
dono story aapas mei link h bhi h kya ya us story ka prequel h ye
Ye update kaafi mazedaar aur suspense-filled tha.
Soumya–Ragini–Romesh ki nok-jhok ne mood light rakha,
lekin Devika ka track story ko ekdum dark thriller mode me le gaya.
Devika ka Kumar se blackmail hona,
Kumar ki car chura lena,
Romesh ki pistol lekar bhaag jana,
aur car me khoon milna—
ye saari cheezein dikhati hain ki wo koi bada game khel rahi hai.
Romesh bhi dheere-dheere uske trap me fas raha hai,
shayad kisi purane dushman ki chaal ho.
Overall update grippy, fast-paced aur interesting tha.
Next update me toh blast pakka hai.
Bahut hi gazab ki update he Raj_sharma Bhai
Devika ke kisse aur bhi milenge..........
Romesh ka koi purana dushman hi jo devika se milkar use fansana chahta he........
Keep posting Bro
Bahut hi shaandar update diya hai Raj_sharma bhai....
Nice and lovely update....
Bhut hi shandar update bhai
Ye kumar to tedi kheer nikla
Aur ye romesh ka kon purana dushman ho sakta hai
Shaandar update
रिव्यू का शुभारंभ करें।
इंटरेस्टिंग… इंटरेस्टिंग…
देवप्रिय और रोमेेश के बीच एक टकराव समाप्त होते दिख रहा है। अच्छा है, दोनों की मंज़िल एक ही है रोमेश को पिस्टल ढूँढनी है और देवप्रिय को मर्डरर का पता लगाना है, जिसमें दोनों अहम भूमिका निभाएँगे। इसलिए बेहतर होगा कि दोनों साथ में ही काम करें।
एक बात पूछनी थी बीच में कुमार 5, मेघना 6 , ये किस चीज़ से संबंधित हैं क्या यह किरदारों की संख्या है
सौम्य नई हीरोइन। हम्म हम्म… सौम्या को देखकर रागिनी के जो भाव थे, वे अच्छी तरह बयान कर रहे थे कि उसके दिल में रोमेश के लिए क्या चल रहा है।
सौम्या के रोमेश के साथ इस तरह फ्लर्टी अंदाज़ का शुरू में ही खुलासा हो गया कि उसे कोई डिसऑर्डर है।
वैसे अगर स्टोरी थ्रिलर प्रीफिक्स में है, और अगर यह एडल्ट्री प्रीफिक्स में होती, तो सौम्या की यह कंडीशन रीडर्स का मज़ा बढ़ा देती। वैसे एक आध सीन ऐसा मिल जाए तो मुझे सरप्राइज नहीं होगा। रोमेश के साथ सौम्या का आखिर डिसऑर्डर बताया है, तो कहानी के अंदर उसकी कुछ न कुछ ज़रूरत तो ज़रूर होगी।
साथ ही मेघना दोनों अपडेट्स में इस लड़की का ज़िक्र आया। पॉसिबल है इस मैटर में उसका कहीं न कहीं इन्वॉल्वमेंट हो। वरना दो बार उसका नाम आना सेंस नहीं बनाता। कुछ तो गड़बड़ है मेघना में।
कुमार कुमार इस खेल में कौन विक्टिम है, कौन मुजरिम, पता लगाना मुश्किल है। देविका को कुमार ने परेशान किया, ओह सेंस बना रही हैं बातें।
कुमार ने कहीं ऐसा तो नहीं कि एकतरफा चीज़ें देविका के बारे में बताई हों? अब मुझे लग रहा है कि देविका ब्लैकमेल की वजह से ये सब कर रही है।
मोहरा देविका है चला कोई और रहा है।
ओवरऑल शानदार अपडेट, हमेशा की तरह।
Awesome update and excellent writing and nice story
रागिनी-रोमेश
रागनी तो हरियाणा मैं होवे भाई
Lajawab update Hamesha Ki Tarah hi
waiting for next ...Bro.........
Nice update
अजीब किस्सा है देविका का जाने इसका असली मकसद क्या है इस बार का
.
खेर मजेदार अपडेट रहा इस बार भी रमेश बाबू धीरे धीरे डिटेल के साथ आगे बढ़ते जा रहे है
start new story

Abhi kuch kah nahi sakte dost, lekin lagta kuch aisa hi hai.Bhut hi badhiya update Bhai
Devika akir karna kya chahti hai
Kahi usne pistol ko bina romesh babu ko pata chale vapis uske ghar me to nahi rakh diya
Ye to ab aage hi pata chalega

Bahut hi badhiya update diya hai Raj_sharma bhai....#07
जब सौम्या के आफिस से निकले तो शाम के सात बज चुके थे। मैंने गाड़ी में बैठते ही रागिनी की तरफ देखा।
"तुम्हे घर छोड़ दूं क्या "मैने रागिनी को बोला।
"मेरी गाड़ी तुम्हारे फ्लैट पर खड़ी है, मैं वहां से गाड़ी लेकर ही घर चली जाउंगी" रागिनी की बात सुनकर मैने गाड़ी को अपने घर की और दौडा दिया।
मैं अभी मधुबन चौक से सीधा अंबेडकर हॉस्पिटल की तरफ जा रहा था। सेक्टर आठ के मेट्रो स्टेशन को पार करते ही एक लाल बत्ती पर मैने अपनी गाड़ी को रोका।
तभी एक गाड़ी बिल्कुल मेरे करीब आकर रुकी।
अचानक से मेरी उस गाड़ी की तरफ नजर पड़ी तो जो लड़की मेरी ओर देखकर मुस्करा रही थी, उसे देखकर मेरे होश उड़ गए थे। वो मेघना थी। वो मुझे देखकर लगातार मुस्कराए जा रही थी।
मैंने एक गहरी नजर भरकर उसे देखा। मेरी ये समझ मे नही आ रहा था, की वो जेल से बाहर कब आई।
"घर जा रहे हो" तभी मेघना ने मेरी ओर देखकर बोला।
"हां! अभी तो मेरा इराद घर जाने का ही था, लेकिन अब तुम्हे देखकर इरादा बदल दिया है, अब आज की शाम तुम्हारे साथ बिताने का इरादा है" अभी मैने बोला ही था कि वो तीन मिनट की लालबत्ती अब हरी बत्ती में बदल चुकी थी, और मेघना ने गाड़ी को तेजी से आगे बढ़ा दिया था।
मैंने भी उसके पीछे गाड़ी को दौड़ाया, लेकिन उसका इरादा मुझे देखकर भागने का नही था, उसने थोड़ी सी आगे जाकर गाड़ी को साइड में लगा दिया।
मैने भी उसके पीछे ही गाड़ी को रोका और अपनी गाड़ी से उतरकर मेघना की गाड़ी की ओर लपका।
रागिनी लपक कर ड्राइविंग सीट पर आ गई थी। उसने मेरे साथ बाहर आने का कोई प्रयास नही किया था। मैं मेघना की गाड़ी के पास उसकी ड्राइविंग सीट की तरफ पहुंचा।
"तुम मेरे साथ गाड़ी में आओ रोमेश, रागिनी को बोलो वो हमारे पीछे पीछे आ जाये, तुमसे कुछ बहुत जरुरी बात करनी है" मेघना ने मेरी और देखकर बोला।
"बाते तो मुझे भी तुमसे बहुत सारी करनी है, मैं आता हूँ अभी" ये बोलकर मैं रागिनी के पास जाकर उसे गाड़ी को पीछे लेकर आने के लिए बोला और वापिस आकर मैं मेघना की गाड़ी में आकर बैठ गया।
"जेल से कब बाहर आई तुम" मैंने गाड़ी में बैठते ही मेघना से पूछा।
"थोड़ी सेटिंग करके जमानत लेकर आई हूँ" मेघना ने संक्षेप में उत्तर दिया।
"यहां कैसे! इतेफाक से मिली हो, या फिर पीछा कर रही हो" मैंने हल्की सी मुस्कान के साथ पूछा।
"समझ लो पीछा ही कर रही हूँ! एक जरुरी काम था तुमसे" मेघना ने मेरी ओर देखकर बोला।
"मुझ से क्या काम आ गया तुम्हे, और मेरा पीछा क्या सौम्या के आफिस से ही कर रही हो" मैने उसकी तरफ देखकर बोला।
"हॉं ! जब तुम सौम्या के आफिस में जा रहे थे, तो मैं भी सौम्या से मिलने के लिए ही जा रही थी, लेकिन तुम्हे वहां जाते हुए देखकर मैं वापिस पार्किंग में आकर अपनी गाड़ी में बैठ गई थी" मेघना का व्यवहार मेरी समझ में नही आ रहा था।
"तुम्हे मुझ से क्या काम है" मैने अब उससे काम पूछना ही सही समझा।
"मेरी एक फ्रेंड मुसीबत में है, उसे तुम्हारी मदद चाहिए रोमेश" मेघना ने मेरी ओर कातर दृष्टि से देखते हुए बोला।
"तुम्हारी कौन सी फ्रेंड मुसीबत में है" मैंने असमंजस में उसकी ओर देखा।
"मैं उसी से मिलवाने के लिए तुम्हे लेकर जा रही हूँ" मैने देखा कि मेघना रिठालाका मेट्रो स्टेशन भी पार करके सेक्टर चौबीस की ओर अपनी गाड़ी को मोड़ चुकी थी।
मैने एक बार घूमकर देखा। रागिनी बदस्तूर हमारे पीछे ही आ रही थी। कोई दस मिनट उस सेक्टर में ही
गाड़ी को घुमाने के बाद उसने एक फ्लैट के बाहर गाड़ी रोक दी।
"इसी फ्लैट के फर्स्ट फ्लोर पर जाना है" मेघना ने गाड़ी के दरवाजे ओपन करते हुए बोला।
मैंने देखा कि रागिनी भी मेघना की गाड़ी के पीछे गाड़ी लगा चुकी थी, और गाड़ी से उतरकर मेरे नजदीक आकर खड़ी हो गई थी।
मेघना ने भी अपनी गाड़ी को लॉक किया और उस फ्लैट की पहली मंजिल की ओर बढ़ गई। हम दोनों भी उसी के नक्शेकदम पर चल पड़े थे। पहली मंजिल पर पहुंच कर मेघना ने बेल बजाई।
कोई दो मिनट के बाद एक जोडी कदमो की आवाज दरवाजे के करीब आती हुई सुनाई दी।
दरवाजा खुला और दरवाजे पर इस वक़्त मेरी नजर में अनामिका, कुमार गौरव की नजर में मल्लिका और पुलिस फ़ाइल में देविका के नाम से पाई जाने वाली वही खूबसूरत जाॅनिसार, नरगिस ए मस्ताना खड़ी हुई थी, और मेरी ओर देखकर मंद मंद मुस्करा थी।
उसे वहां देखकर मेरे होठो पर भी एक कुटिल मुस्कान थिरकने लगी थी।
उलझती गुत्थी।
देविका की वो मुस्कान कुछ ही पल में लुप्त हो गई और उसने हमारे अन्दर आने के लिए रास्ता छोड़ दिया।
मैं लगातार उसी को घूरते हुए सोफे पर जाकर बैठ गया।
उसकी वही कातिल मुस्कान एक बार फिर से उसके होठो पर थिरकने लगी थी।
"तुम दोनो एक दूसरे को पहले से जानते हो क्या, ये देविका तुम्हे देखकर बहुत मुस्करा रही है" मेघना ने अनजान स्वर में बोला।
"ये तो यही मोहतरमा बतायेगी की ये मुझे कैसे जानती है, लेकिन मैं इतना जरूर जानता हूँ, की ये लड़की मुझे बेवकूफ बनाकर मेरे घर से मेरा पिस्टल चुराकर भागी है" मैने मेघना की ओर देखते हुए ही, ये बोला ही था कि रागिनी अपनी जगह से उठी और अपनी पिस्टल को उसने देविका की कनपटी पर लगा दिया।
"वो पिस्टल निकाल कर लाओ, जहां भी उसे छुपा कर रखा है, वरना यकीन मानो गोली चलाते हुए मेरा हाथ कदापि नही कांपता" रागिनी का इस तरीके से उसके पिस्टल लगाने का उद्देश्य मैं समझ गया था, ये देविका के ऊपर एक मनोवैज्ञानिक दवाव बनाने का तरीका था।
"ये तुम क्या कर रही हो रागिनी, आराम से बैठकर बात करो, अगर सच मे इसके पास रोमेश की पिस्टल है, तो मैं उसे वापिस दिलवा दूँगी" मेघना ने घबराए हुए स्वर में कहा।
वैसे भी मेघना ने रागिनी के जलवो को अपनी आंखों से देखा हुआ था।
"आराम से बात तभी होंगी मेघना, जब ये पहले रोमेश सर का पिस्टल हमारे हवाले कर देगी, और साथ मे ये भी बतायेगी की उस पिस्टल को चुराने के पीछे इसका क्या मन्तव्य था" रागिनी मेघना की बात सुनने के कतई मूड में नही थी।
"मैने कोई पिस्टल नही चुराई, हॉं ये सच है कि मैं उस दिन रोमेश के फ्लैट में गई थी, लेकिन मैं उस वक़्त अपनी जान बचाने के लिए वहाँ घुसी थी" देविका ने सिरे से झूठ बोला।
"मैंने तुम्हारे सामने अपनी पिस्टल को अपनी दराज में डाला था, तुमने मुझे कॉफी बनाने के लिए बोला, जब मैं तुम्हारे लिए कॉफी बनाने के लिए गया तो तुम मुझे बिना बताए वहां से जा चुकी थी, तब मैंने सोचा कि शायद तुम कोई चोर थी, और कुछ चुराने के लिए मेरे घर में घुसी थी, फिर मैंने अपना सामान चेक किया तो दराज में से मुझे अपनी पिस्टल गायब मिली थी" मैने उसे उस रात का एक एक वाक्य याद दिलाया।
"लेकिन अगर मैंने पिस्टल चुराई होती तो मैं खुद तुम्हें अपने घर पर क्यो बुलाती, पूछ लो मेघना से, मैने ही मेघना को तुमसे मिलवाने के लिए फ़ोर्स किया था" देविका ने अपनी बेगुनाही का तर्क रखा।
"तुम दोनो ही सौम्या की कंपनी में काम करती थी, दोनो ने ही सौम्या के साथ कुछ न कुछ गलत किया है, जेल में तुम दोनो ने जरूर सौम्या के खिलाफ कोई नई खिचड़ी पकाई होगी!, अब क्यो कि मेघना तो अच्छी तरह से जानती है कि अगर सौम्या किसी मुसीबत में फंसती है तो वो रोमेश जी को जरूर याद करेगी, इसलिए तुम लोगो ने पहले रोमेश को ही रास्ते से हटाने का प्लान बनाया होगा" सोच के मामले में रागिनी इस वक़्त मुझ से भी चार कदम आगे चल रही थी।
"यार मैं अपने मामले में रोमेश को कोई गुनाहगार मानती ही नही हूँ, मेरे ही कर्म गलत थे, तो मुझे तो सजा मिलनी ही थी, लेकिन मैं हमेशा रोमेश को अपना सबसे अच्छा दोस्त ही समझती हूँ, तभी मैने जेल में भी किसी को कोई मदद की जरूरत होती है तो, रोमेश का नाम ही सभी को बताती हूँ" मेघना ने मेरी दोस्ती का दम भरा।
लेकिन फिलहाल की परिस्थितयो में उसकी इस दोस्ती के दम में कोई दम नही था।
"मैने तुम्हारे सामने अपना पिस्टल अपनी दराज में रखा था, तुम्हारे सामने किसी और आदमी ने मेरे फ्लैट मंर कदम नही रखा था, न तुम्हारे जाने के बाद कोई और मेरे फ़्लैट में आया, फिर अगर मेरी पिस्टल को तुम नही लेकर गई तो उसे जमीन निगल गयी या आसमान खा गया" मैने क्षुब्ध स्वर में बोला।
"तुमने ध्यान से चेक किया है कि वो पिस्टल तुम्हारे घर मे नही है" इस बार मेघना बीच मे बोली।
"इतना बड़ा बेवकूफ तो हूं नही की बिना घर मे चेक किए ही मैं थाने तक मे जाकर रिपोर्ट लिखवा दूंगा" मैने हल्के से गुस्से में मेघना की ओर देखकर बोला।
"एक बार हम लोग जाकर तुम्हारे घर पर ही उस पिस्टल को ढूंढ़े, हो सकता है, पिस्टल वही पर हो और तुम बिना वजह इधर उधर मारे फिर रहे हो" ये बात देविका ने बोली।
मेरे साथ साथ रागिनी ने भी उसे हैरानी से देखा।
"यार इस पिस्टल को हटा लो, इस पिस्टल को देख देख कर मेरी हार्टबीट बढ़ रही है, कहीं ये बेगुनाह बेमौत न मारी जाए" मेघना ने रागिनी की ओर देखते हुए बोला।
इस बार मेघना की रिक्वेस्ट भरी आवाज सुनकर रागिनी ने भी अपनी पिस्टल को देविका की खोपड़ी से हटा लिया।
"रोमेश सर! एक बार इसकी तमन्ना भी इसके सामने अपने घर की तलाशी करवा कर पूरी कर दो, पिस्टल अगर वहाँ नही मिलती है तो, इसको उसी समय पुलिस के हवाले कर दो" रागिनी ने अब देविका के पास से मेरी ओर आते हुए कहा।
"ये तरीका सही रहेगा" मैंने रागिनी की बात से सहमति जताई।
"लेकिन मुझे पुलिस के हवाले क्यो करोगे, तुम मेरी तलाशी ले लो, मेरे पूरे घर की तलाशी ले लो, जब मैंने कुछ किया ही नही तो मैं फिर से जेल क्यो जाऊं" देविका ने पुलिस बुलाने की बात का पुरजोर विरोध किया।
"लेकिन तुम्हारी हिस्ट्री के बारे में अभी तक जो सुना है, उस हिसाब से तो तुम आदतन अपराधी हो" मैने देविका को हिक़ारत से देखते हुए बोला।
"सिर्फ सुना है न, कभी अपनी आंखों से मेरे खिलाफ कोई सबूत देखा है" देविका ने विश्वास भरी दृष्टि से मेरी ओर देखा।
"हमारी गुड बुक में तो अब आई हो तुम देविका, तो अब सबूत भी ढूंढ लेगे" रागिनी ने उसी के अंदाज में उसे जवाब दिया।
"कुछ तो तुम्हारे बारे में कुमार गौरव ने बताया है, कुछ पुलिस फ़ाइल से पता चला है, बाकी बचा खुचा सौम्या ने बता दिया, इसके बाद भी तुम सबूत की बात कर रही हो" मैने हैरानी से देविका को देखा।
"इसी कुमार गौरव के बारे में ही तो तुमसे बात करने के लिए मेघना के जरिये, तुम्हे यहाँ बुलाया है रोमेश बाबू, मैं तो खुद उस कुमार की सताई हुई हूँ! मैं तो खुद पीड़िता हूँ, जिसे एक योजना बद्व तरीक़े से हर किसी की नजर में गुनाहगार बना दिया है" देविका ने विक्टिम कार्ड खेला।
लेकिन अब मेरी दिलचस्पी उसकी बातों में जाग चुकी थी। मैं अब उसका भी सच उसके मुंह से सुनना चाहता था।
जारी रहेगा______![]()