डॉक्टर्स से राजासाहब को कुछ खास बात नही पता चली। इस वक़्त वो सेंटर के लॉन मे एक चेर पे बैठे थे और उनके सामने उस रात की ड्यूटी वाला गार्ड खड़ा था,"हुज़ूर, हमने सचमुच विश्वजीत साहब को बाहर जाते हुए नही देखा था और ना ही हम गेट से हीले थे या सोए थे।"
"देखो,हम तुम पे कोई इल्ज़ाम लगाने नही आए हैं,हम तो बस ये जानना चाहते हैं कि उस रात क्या हुआ था।"
गार्ड ने उन्हे वही सब बातें बताई जो डॉक्टर पुरन्दारे,उनका स्टाफ और पोलिसेवाले कह रहे थे।
"...तो उस रात कुछ भी ऐसा नही घटा था जिस से की किसी अनहोनी की आशंका होती।"
"जी नही,साहब। बस थोड़ी देर के लिए बिजली गयी थी जिसे बेस्कॉम वाले ठीक कर गये थे।"
"क्या? बिजली गयी थी! पूरी बात बताओ।"
गार्ड ने उन्हे पूरा किस्सा सुना दिया।
"तुमने ये बात पोलीस को बताई थी।?" फनलव द्वारा निर्मित.
"जी,साहब।"
"ह्म्म। अच्छा,जेनरेटर ठीक करने जो आदमी बेसमेंट मे गया था,क्या तुम भी उस के साथ गये थे?"
"नही,साहब। उसने हमे माना कर दिया। कहने लगा कि हम परेशान ना हो,वो काम कर देगा बस छोटी सी गड़बड़ है। साहब, हमने उस वक़्त भी गेट नही छोडा था,और बिजली ठीक करने भी वॅन के साथ बस एक आदमी आया था और दस मिनिट मे चला भी गया था..और जाते वक़्त वो अकेला ही था।"
"तुमने उसकी शक्ल देखी थी?"
"कुछ ठीक से याद नही साहब।बहुत अंधेरा था...नाटा,काला सा आदमी था।"
राजासाहब पूरी तैयारी के साथ आए थे,"क्या ये था?",अपना ब्रीफकेस खोल जब्बार की तस्वीर निकाल गार्ड के सामने कर उन्होने पूचछा।
"पक्का नही कह सकते,साहब...पर हां इसी तरह का था।"
राजासाहब के लिए इतना काफ़ी था। थोड़ी देर बाद वो पोलीस स्टेशन मे विश्वा के केस के इन्वेस्टिगेशन ऑफीसर के सामने बैठे थे,"।।। उस रात शायद बिजली भी गयी थी उस इलाक़े की?"
"जी,ऐसा बहुत कामन है उस एरिया मे। नया बसा है ना! होते रहते हैं पावरकट्स और वैसे भी उस रात बिजली ठीक करने वाला आदमी बेस्कॉम की यूनिफॉर्म और वन के साथ था। मैने सारे रेकॉर्ड्स चेक किए थे बेस्कॉम की कोई भी वॅन गायब या चोरी की रिपोर्ट नही थी। सो,मुझे लगता है कि वो आंगल नही है। मुझे पक्का यकीन है गार्ड सो रहा था और आपका बेटा निकल गया और उसकी बदक़िस्मती की ग़लत लोगो के हथ्थे चढ़ गया।"
"ह्म्म,एनीवे,थॅंक यू ऑफीसर। आपने जो भी किया है उसके लिए मैं ज़िंदगी भर आपका आभारी रहूँगा।",राजासाहब ने अपना हाथ ऑफीसर की ओर बढ़ाया।
"जस्ट डूयिंग माइ जॉब,राजासाहब। मेरा भरोसा करिए,मुजरिम को तो मैं पकड़ कर रहूँगा।",उसने राजासाहब से हाथ मिलाया।
राजासाहब उस से विदा ले एरपोर्ट चल पड़े, उनका काम हो गया था। गार्ड से बात करके उन्हे यकीन हो गया था कि जब्बार ही उनके बेटे का कातिल है। उन्होने जानबूझ कर ऑफीसर को जब्बार का फोटो या उस पे शक़ होने की बात नही बताई थी। अब वो जब्बार को अपने हाथो से सज़ा देने की ठान चुके थे। एरपोर्ट पहुँच कर उन्होने मेनका को फोन मिलाया,"हमारा काम हो गया है।हम अगली फ्लाइट से आ रहे हैं।"
"सीधा हमे लेने आना।" फनलव की प्रस्तुति.
"ठीक है,मेरी जान।"
मेनका के माता-पिता चाहते तो नही थे कि उनकी बेटी इतनी जल्दी वापस जाए पर मेनका ने ऑफीस मे ज़रूरी काम का बहाना बना दिया था। उसके माता-पिता को भी लगा कि उनकी विधवा बेटी का मन काम के बहाने ही सही बहल तो रहा है,सो उन्होने ने भी उसे रोकने के लिए ज़्यादा ज़िद नही की। अब मेनका अपने मायके मे बेसब्री से राजासाहब का इंतेज़ार कर रही थी।
क्रमशः।।।।।।।।।।।।।।।।।।।।।।।।।।।।।।।
बने रहिये................
आज के लिए बस यही तक। फिर मिलेंगे एक नए अध्याय के साथ।
तब तक के लिए फनलव की तरफ से जय भारत।।