उसके होठ घूमते हुए उनके अंडो पे कस गये। राजासाहब ने अपने हाथ उसके बालों मे घुसा दिया। मेनका ने लंड को हाथ मे भर ज़ोर-जोर से हिलाना शुरू कर दिया। वो अपने होठ अंडो से हटा उनके लंड पे लाई,राजासाहब को लगा की वो उनका लंड मुँह मे लेने वाली है तो उन्होने ने अपनी कमर उचकाई पर मेनका ने उनको तड़पाते हुए मुँह हटा लिया। अब वो मुँह नीचे लाती और लंड के सिरे के पास लाइ जैसे ही राजासाहब घुसाने को होते तो मुँह वापस खींच लेती। राजासाहब तो तड़प से पागल हो गये। उन्होने उसका सिर पकड़ अपने लंड पे लगा दिया और इस बार अपना लंड एक बार फिर उसके मुँह मे पूरा घुसा दिया।
मेनका ने उनका लंड अपनी मुट्ठी मे भर लिया और हिलाते हुए लगी चूसने। राजासाहब के लिए बात अब बर्दाश्त से बाहर हो गयी थी। उन्होने उसके सर को पकड़ नीचे से ज़ोर-जोर से कमर हिलाते हुए उसके मुँह मे अपना वीर्या गिरा दिया। मेनका उनका वीर्य पीने लगी जिसकी एक बूँद उसके होंठो के कोने से निकल कर उसकी ठुड्डी पे आ गयी। पूरा लंड चाट कर साफ़ करने के बाद वो उठी और अपनी ठुड्डी पे गिर आई उस बूँद को एक उंगली से पोछा और उस उंगली को मुँह मे ले चूसने लगी।
उसकी ये कातिल हरकत देख राजासाहब ने हाथ बढ़ा कर उसे खीच कर अपने उपर ले लिया और उसे चूमने लगे और अपने वीर्य का स्वाद चखने लगे। आज मेनका उन्हे तडपाने के मूड मे थी। जैसे ही राजासाहब ने उसके बदन पे अपनी बहो की गिरफ़्त मज़बूत की वो हँसती हुई अलग हो गयी। उन्होने हाथ बढ़ाया तो वो छितक कर अलग हो बेड से उतर गयी।
राजासाहब उठे और उसकी साडी का पल्लू पकड़ कर उसे अपने पास खींच लिया।,"छोडो ना...मुझे नींद आ रही है।",मेनका उन्हे तड़पाने के इरादे से बोली।
"झूठ मत बोलो,चलो आ जाओ।",वो उसे फिर से बिस्तर पे ले जाने लगे।
"उउन्न्न...नही....नो",मेनका फिर मचली तो राजासाहब ने एक हाथ से उसकी कमर को जकड़ा और दूसरे से उसकी साडी खींच दी।
"ऊन्न्न्ह्ह...बदमाश कहीं के!",मेनका ने उनके सीने पे बनावटी गुस्से मे मुक्के मारे। अगले ही पल उसका पेटिकोट भी ज़मीन पे था और थोड़ी दे बाद वो केवल एक पेंटी मे अपने नंगे ससुर की बाहों मे उनके बिस्तर मे पड़ी उन्हे चूम रही थी। चूमते हुए राजासाहब ने उसकी पीठ पे हाथ फेरते हुए उसकी पेंटी मे हाथ डाल उसकी गांड को दबाने लगे। और उसकी गांड के छेद से खेलने लगे।
थोड़ी देर गांड दबाने के बाद उन्होने ने उसकी पेंटी को घुटनो तक सरका दिया और फिर अपनी टांग उठा कर उसकी पेंटी मे फँसा उसे पूरी तरह से अपनी बहू के जिस्म से अलग कर दिया। अब वो उसकी चूचियाँ चूस रहे थे और हाथ पीछे से उसकी गांड दबाने के बाद उसकी चूत मे घुस उसके दाने को रगड़ रहा था। मेनका जोश मे कमर हिलाने लगी। विश्वा की मौत के पहले उसकी गोरी चूचियाँ उसके ससुर की लव बाइट्स से भरी हुई थी,पर इधर एक महीने मे वो वापस बेदाग हो गयी थी। राजासाहब आज इस ग़लती को सुधारने मे लगे हुए थे और उसके सीने पे अपने होठों के निशान पे निशान छोड़े जा रहे थे। उनकी उंगली की रागड़ाई ने मेनका को फिर से झड़वा दिया।
राजासाहब ने उसे लिटाया और उसकी चूचिया चूमते हुए नीचे उसके पेट पे आ गये,थोड़ी देर तक उनका मुँह उसके पेट और नाभि पे घूमता रहा और फिर वो उसकी जाँघो के बीच आ गये और उसकी टाँगे अपने कंधों पे चढ़ा ली। वो झुक कर उसकी चूत के आस-पास चूमने लगे। मेनका ने अपनी उंगलियो मे उनके बाल पकड़ लिए और बेचैनी से मचलने लगी। चूमते हुए जैसे ही राजासाहब के होंठो ने उसकी चूत को छुआ उसकी कमर हिलने लगी। राजासाहब की जीभ ने उसकी चूत को चाटना चालू कर दिया और उनके हाथ उसकी चूचियो और उनके निपल्स से खेलने लगे। मेनका अपने ससुर के सिर को अपनी भारी जाँघो मे दबा कर उनका मुँह अपनी चूत पे भींचने लगी। "ऊओ...ऊऊहह...या...ष्ह...!"
राजासाहब ने चाट-चाट कर उसकी चूत का सारा रस पी लिया। बीच-बिच मे वो अपने होठ उसकी चूत से हटा उसकी आंद्रूणई जाँघो को चूमने-चूसने लगते और कही भी अपने होंठो के निशान छोड़ देते। उनके हाथ उसकी बाहरी जाँघो को मज़बूती से थामे दबाते,सहलाते और फिर वापस उसकी मस्त चूचियो पे लग जाते। मेनका अपने ससुर की जीभ की चुदाई से 3 बार झड़ी। अब राजासाहब का लंड फिर से तैयार था।
वो उठे और घुटनो के बल अपनी बहू की जाँघो के बीच बैठ गये। उन्होने अपना लंड उसकी चूत की दरार पे एक बार फिराया तो मेनका ने धीरे से अपनी कमर उचका उसे अपने अंदर लेने की कोशिश की। राजासाहब ने अपना लंड उसकी चूत पे ररड़ना शुरू किया। मेनका बेचैन हो गयी,वो चाहती थी की राजासाहब अब उसे अपने नीचे दबा कर उसे जम कर चोदे पर वो तो बस लंड उसकी चूत पे रगड़ कर उसे तडपा रहे थे।
बने रहिये दोस्तों...............
Funlove.
जय भारत।।