गतान्क से आगे।।।।।।।।।।।।।।।
पार्ट 8
सवेरे राजासाहब की नींद खुली तो उन्होने देखा कि वो बिस्तर पर अकेले हैं, मेनका शायद बाथरूम मे थी। वो उठकर किचन मे आ गये और अपना अंडरवेर उठा कर पहन लिया,पेंट उठा कर उसमे से मोबाइल निकाला और बॅंगलुर डॉक्टर पुरन्दारे से बात करने लगे।
खबर अच्छी थी,विश्वा अपनी लत छोड़ने की पूरी कोशिश कर रहा था। राजासाहब को खुशी हुई पर फिर मेनका का ख़याल आया तो चेहरे पे आई मुस्कान गायब हो गयी। वो जानते थे कि विश्वा आएगा तो ये सब बंद करना पड़ेगा पर वो मेनका के हुस्न और इश्क़ के दीवाने हो चुके थे। इसीलिए उन्होने ये फार्महाउस का प्रोग्राम बनाया था। वो चाहते थे कि बेटे के आने से पहले वो मेनका के साथ जम के प्यार के मज़े लूट ले।
इन्ही ख़यालों मे गुम उन्होने दुष्यंत वर्मा को फोन मिलाया,"क्या हाल है,दोस्त?"
"सब बढ़िया,तू सुना।"
"ठीक हू, उस तस्वीर वाले शख्स के बारे मे कुछ पता चला?"
"नही यार,पहुँची चीज़ लगता है। उसका कोई सुराग नही मिला है। जब्बार से भी उसके तार जुड़ते नही दिखते हैं। वैसे जब्बार आजकल शहर से बाहर गया हुआ है। कहा ये मालूम नही।"
"दोस्त,इधर जब्बार हमे परेशान नही कर रहा। इसीलिए हमे डर है कि या तो वो कोई बड़ी साज़िश रच रहा है या साज़िश की शुरुआत कर चुका है। पता नही क्यू हमारा दिल कहता है कि विश्वा को नशे की लत लगाने मे उसी का हाथ है।"
"तू अब इतनी फ़िक्र मत कर,दोस्त, सब ठीक हो जाएगा और मेरा चेला मनीष इस मामले की तह तक पहुँच तेरी सारी मुश्किल आसान कर देगा।"
"तेरे पे मुझे पूरा भरोसा है,दोस्त।"
इसके बाद दोनो दोस्तो ने कुछ इधर-उधर की बातें की और फोन काट दिया। सब ठीक हो जाएगा। हो तो जाएगा पर मेनका और उनके बीच का रिश्ता,क्या है इस रिश्ते की मंज़िल? राजासाहब के मन मे सवाल घूमड़ रहे थे की तभी मेनका वहा आ गयी।
उसने एक बाथरोब पहना हुआ था जो कि उसकी गांड तक ही आ रहा था,"मुझे कपड़े चाहिए?"
"पहने तो हुए हो।",राजासाहब का दिल उसे देखते ही फिर से हल्का हो गया और मस्ती के मूड मे आ गया।
"प्लीज़ यश,दो ना कपड़े।",मेनका बच्चों की तरह मचली।
"ओके।",राजासाहब वैसे ही केवल एक काला अंडरवेर पहने बाहर कार तक गये और एक पॅकेट लाकर उसे थमा दिया।
"ये, इसे पहनु ना पहनु सब बराबर है।",मेनका के हाथों मे एक रेड कलर की 2-पीस स्ट्रिंग बिकिनी थी।
"अरे पहन कर दिखाओ तो।"
"पहनुँगी और 2 मिनिट मे तुम उतार भी दोगे। रात भर तो मेरी हालत खराब करते रहे। अब आज मुझमे इतनी ताक़त नही है। प्लीज़ ढंग के कपड़े दो ना।"
"अरे,जान! बस एक बार इसे पहन कर दिखा दो।"राजासाहब ज़िद करने लगे।
"एक शर्त पे पहनुँगी।"
"क्या?"
"पहनने के बाद तुम मुझे बिल्कुल भी हाथ नही लगाओगे।"
"ये कैसी अजीब शर्त है?इसे पहन ने के बाद तो तुम्हे प्यार करने और ज़्यादा मज़ा आएगा।प्लीज़ छोडो ये शर्त-वर्त और पहन कर दिखाओ ना।"
"ऊंन-हुंग,शर्त मानो तो पहनुँगी।"
"ठीक है मानता हू शर्त, पर मेरी भी एक शर्त है, तुम खुद अपने कपड़े उतरोगी और फिर मैं तुम्हे तब तक प्यार करूँगा जब तक मैं चाहू।"
"ठीक है,करते रहना इंतेज़ार,खुद तो मैं कपड़े उतारने से रही।"
मेनका ने बाथरोब खोल कर अपने जिस्म से सरका दिया। अब वो पूरी नंगी थी बस गले मे वोही चैन लटक कर उसकी छातिया चूम रही थी। मेनका ने बिकिनी की पेंटी उठाई और उसे अपनी टांगो से उपर किया और अपनी चूत को ढँकते हुए अपनी कमर पर उसकी डोरियाँ बाँधने लगी। उसकी नज़रे अपने ससुर के चेहरे पर टिकी थी और होठों पे शरारत भरी मुस्कान खेल रही थी।
राजासाहब के होठ सुख गये थे। वो बस भूखी निगाहों से अपनी बहू को घूर रहे थे। मेनका ने बिकिनी का ब्रा उठाया और अपने गले मे डाल लिया और अपने हाथ पीछे ले जाकर उसकी डोरियाँ बाँधने लगी।फिर घूम कर अपनी मखमली पीठ अपने ससुर के सामने कर दी,"इसे बाँध दो ना,प्लीस! और हाँ छूना नही।"
राजासाहब के सामने उनकी बहू की लगभग नंगी पीठ थी और नीचे स्विमस्यूट की पेंटी मे मुश्किल से समाती गांड। उन्होने हाथ बढ़ा कर डोरी बाँध दी। मेनका ने खाने का समान निकाला और अपने ससुर को बैठने का इशारा किया और झुक-झुक कर अपनी चूचिया उनके मुँह के सामने छल्काते हुए उन्हे नाश्ता परोसने लगी। राजासाहब की पेट की भूख तो उनके लंड की भूख के आगे कुछ भी नही थी। जब तक दोनो कहते रहे उनकी नज़रे बिकिनी के टॉप से झँकते अपनी बहू के क्लीवेज को घुरती रही।
मेनका को अपने ससुर को तड़पाने मे बहुत मज़ा आ रहा था। वो उठी और घूम कर किचन से बाहर चली गयी। राजासाहब भी उसके पीछे-पीछे चलने लगे।
मेनका जानती थी कि उसके ससुर उसके पीछे उसके रूप के जादू से खींचे चले आ रहे हैं और शर्त के कारण उनके हाथ बँधे है। उसने उन्हे और तड़पाने की सोची और अपनी गांड थोड़ा ज़्यादा मटका के और लहरा के चलने लगी। राजासाहब का लंड उनके अंडरवेर को फाड़ कर बाहर आने को बेताब हो उठा।
मेनका फार्महाउस के पीछे बने पूल पर आ गयी,"वाउ!कितना अच्छा पूल है।"और उसने उसमे गोता लगा दिया और लगी तैरने। राजासाहब वही बैठ कर उस जलपरी को निहारने लगे। मेनका तैरते हुए आती और पानी मे उपर नीचे होती तो उसकी चूचियाँ जैसे उसके ब्रा मे से निकलने को मचल उठती।
तभी मेनका पूल के उस हिस्से मे जहा सिर्फ़ 4 फिट पानी था, आके खड़ी हो गयी थी अपने ससुर के सामने। उसके गोरे बदन पे पानी की बूंदे हीरों की तरह चमक रही थी।
"क्या हुआ,यश? तबीयत तो ठीक है ना?" कह कर उसने हाथ सर के उपर ले जाके अंगड़ाई ली। ऐसा करने से उसकी छातिया उसके ब्रा के गले मे से और ज़्यादा नुमाया हो गयी। राजासाहब बुरी तरह तड़प रहे थे पर क्या कर सकते थे,शर्त जो मानी थी।
मेनका ने फिर तैरते हुए पूल के 2 चक्कर लगाए और फिर वही आ के खड़ी हो गयी और लगी अपनी अदाओं से अपने ससुर को तड़पाने। पर इस बार राजासाहब ने भी जवाब सोच लिया था। वो खड़े हो गये और अपना अंडरवेर उतार दिया। राजासाहब का लंड फंफनता हुआ बाहर आ गया। राजासाहब ने उसे हाथ मे लिया और लगे हिलाने।
मेनका हैरत से उन्हे देखने लगी। वो पहली बार किसी मर्द को इस तरह से अपने लंड से खेलते देख रही थी। उसकी निगाहे अपने ससुर के लंड से चिपक गयी। इस लंड की तो वो दीवानी हो गयी थी। उसने राजासाहब को यूही तड़पाने के लिए शर्त दी थी पर हक़ीक़त मे वो भी हर वक़्त बस उनसे लिपट कर उनके लंड को अपने हाथों मे,अपने मुँह मे या अपनी चूत मे महसूस करना चाहती थी।
उसका हाथ अपने आप अपनी चूत पर चला गया था और उसे सहलाने लगा था। राजासाहब अपना लंड हिलाए चले जा रहे थे और मेनका की चूत गीली हुए जा रही थी। वो मस्ती मे आ रही थी और उसे अब कोई शर्त याद नही थी। उसने अपने हाथों से बिकिनी की डोरिया खोल दी और उसे पूल के पानी मे गिर जाने दिया।
राजासाहब की चाल काम कर गयी थी। वो भी पूल मे उतर गये और उसे बाहों मे भर उसे चूमने लगे। मेनका ने अपने हाथ मे उनका लंड पकड़ लिया और उनकी किस का जवाब देने लगी। राजासाहब ने उसकी गांड को दबाना चालू कर दिया तो मेनका हंसते हुए छटक कर उनसे दूर हो गयी और पानी मे तैरने लगी। राजासाहब भी उसके पीछे हो लिए और थोड़ी ही देर मे उसे पकड़ लिया।
पीछे से पकड़ के वो उस से चिपक गये और अपना लंड उसकी गांड की दरार मे अटका दिया। फिर तैरते हुए उसे कम गहराई वाली जगह लाके पूल की दीवार से लगा के पीछे से लंड चूत मे डालने लगे।
मेनका पलट गयी और उनके गले से लग गयी। अब उसकी चूत उसके ससुर के लंड के सामने थी उसने अपनी टाँगे फैला कर अपने हाथ से उनका लंड अपनी चूत मे डाला और फिर टाँगे उनकी कमर पर कस दी। दोनो के पेट के नीचे के हिस्से पानी मे थे। राजासाहब इसी तरह अपनी बहू की चूत चोदने लगे। मेनका उनसे चिपक कर मज़े के समंदर मे गोते लगाने लगी। अपने ससुर की चुदाई से ना जाने वो कितनी बार झड़ी उसे बाद मे याद भी नही था। बस इतना याद था कि उसकी चूत मे उसके ससुर का गरम वीर्या गिरा था और उसके बाद वो वैसे ही चूत मे लंड डाले उसे उठाए घर के अंदर आ गये थे और वो थक कर उनकी बाहों मे सो गयी थी।
मेनका की नींद खुली तो उसने देखा कि वो ड्रॉयिंग रूम के मखमली ईरानी गाळीचे पे लेटी थी,बगल मे उसके ससुर लेते थे और अपने ख़यालों मे खोए थे। घड़ी देखी तो 4 बज रहे थे, तो वो पिछले 4-5 घंटो से सो रही थी,और सोती भी क्यू ना,कल पूरी रात चुदाने के बाद राजासाहब ने उसे सुबह 3:30 बजे छोड़ा था। उसने करवट लेके उनके सीने पे सर रख दिया और वाहा पर के बालों से खेलने लगी,"क्या सोच रहे हो?"
"कुछ नही।",राजासाहब उसके सर पे हाथ फेरने लगे।
"ऐसी क्या बात है जो तुम मुझे बता नही रहे? उस दिन भी फोन आया और तुम भागते हुए शहर चले गये। आख़िर क्या मामला है,मैं जानना चाहती हू।",मेनका उनके सीने पे कोहनी रख उनके चेहरे को देख रही थी।
"बात तुम्हे पसंद नही आएगी।"
"मैं फिर भी सुनना चाहती हू।"
"तो सुनो मैं विश्वा के बारे मे सोच रहा था।"
मेनका मुँह घुमा कर दूसरी तरफ देखने लगी।
"देखा,मैने कहा था ना! हो गयी ना अपसेट।" उ उसके गालों को सहलाने लगे।
"फिर भी बताओ शहर शहर क्यू गये थे?"
"तो सुनो।" राजासाहब ने करवट ली तो मेनका भी करवट लेकर लेट गयी। अब दोनो एक दूसरे को देखते हुए करवट से लेते थे,"ये विश्वा की अपनी कमज़ोरी है कि वो इस बुरी लत का शिकार हुआ पर आख़िर वो कौन शख्स था जो उसे ड्रग्स देता था। मैं यही जानने की कोशिश कर रहा हू।" फिर उन्होने उसे दुष्यंत वर्मा और उनके इन्वेस्टिगेशन के बारे मे बताया।
उन्होने उसकी बाई जाँघ खींच कर अपनी दाई जाँघ पर चढ़ा दी और अपनी दाई टांग उसकी टांगो के बीच ऐसे डाल दी की लंड चूत से आ सटा। अपनी बाई हाथ उसकी गर्दन के नीचे दल उसी हाथ से उसके कंधे को सहलाने लगे और डाए हाथ से उसकी चूत को। मेनका ने अपना बाया हाथ उनकी गांड पे रख दिया और दया नीचे ले जाकर उनके लंड और अंडो को रगड़ने लगी।
"आख़िर ये जब्बार आपसे इतनी नफ़रत क्यू करता है?"
"इसका जवाब तो हम नही जानते, पहले तो सोचते थे कि वो पैसो के लिए ऐसा कर रहा है पर अब लगता है कि दुश्मनी की वजह कुछ और है। पर हमे समझ नही आता कि क्या? हम तो उसे जानते तक नही थे जब उसने हमारी मिल्स मे हंगामा करने की कोशिश की थी।"अब तक लंड तन चुका था और चूत भी गीली हो गयी थी। उन्होने अपनी बहू को लिटाया और एक बार फिर उस पर सवार हो उसकी चिकनी चूत चोदने लगे।
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अभी तक के लिए इतना ही बाकि आपके कोमेंट के बाद..........
फनलव की तरफ से शुक्रिया
जय भारत.
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