बरसों से तन्हा एक जलते चिराग़ को,
नई-सी आँधी बुझा गई।
तेरे प्यार को दिल में सँभाल रखा था,
इन तन्हाइयों में दिल धड़क उठा,
और धड़कते-धड़कते दहलीज़ लाँघ गई।
नई-सी आँधी बुझा गई।
तेरे प्यार को दिल में सँभाल रखा था,
इन तन्हाइयों में दिल धड़क उठा,
और धड़कते-धड़कते दहलीज़ लाँघ गई।
तू खुद में एक समंदर है, ये आवारा हवाएँ तुझे क्या डराएँगी।
और मोहल्ले की बातों पे बस मुस्कुरा दे, ये तो दस्तूर है ज़माने का,
जो तेरे मुकाम तक पहुँच न सके, वो महफ़िलें तेरी ही बुराई गाएँगी।

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