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Tabassum Sk
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  • बरसों से तन्हा एक जलते चिराग़ को,
    नई-सी आँधी बुझा गई।
    तेरे प्यार को दिल में सँभाल रखा था,
    इन तन्हाइयों में दिल धड़क उठा,
    और धड़कते-धड़कते दहलीज़ लाँघ गई।
    फ़िज़ाओं में बेचैनी है
    आवारा-सी चल रही हवाएँ हैं
    मैं अकेली ही ठीक हूँ इस दुनिया में
    मोहल्ले में मेरी बिगड़ी हुई बातें चल रही हैं.
    vakharia
    vakharia
    फ़िज़ाओं की बेचैनी से कह दो, तेरे सुकून का अंदाज़ा क्या लगाएँगी,
    तू खुद में एक समंदर है, ये आवारा हवाएँ तुझे क्या डराएँगी।
    और मोहल्ले की बातों पे बस मुस्कुरा दे, ये तो दस्तूर है ज़माने का,
    जो तेरे मुकाम तक पहुँच न सके, वो महफ़िलें तेरी ही बुराई गाएँगी।
    एक पल तेरी पलकों में ठहर गई थी मैं,
    अब उम्र भर तेरी यादों में बिखर रही हूँ।
    वो पल मेरी ज़िंदगी का सबसे हसीन पन्ना था,
    अब उसी की तलाश में पूरी किताब पलट रही हूँ।
    Iraada kar liya, ab kisi ko muh na lagayenge,
    Ab bas unhi se nazrein milayenge.
    Iraada kar liya, ab kisi se dil na lagayenge,
    Ab bas unhi ke ho kar reh jayenge
    वो रात भी गुज़र गई पर तुम नहीं आए,
    एक अरसा हुआ हमें तुम्हारी याद में रोए।
    सुबह रिमझिम बरसती रही ये बारिश,
    और हम भीगते हुए बस तुम्हारी याद में खोए।
    "जब उनसे नज़रें मिलीं, तो लोगों ने 'नयन मटका' कहा,
    जब उनसे हँसकर बात हुई, तो लोगों ने 'बेशर्म' कहा।
    जब उनके साथ हम घूमने-फिरने लगे, तो लोगों ने 'बेहया' कहा,
    जब उनके बिस्तर पे हम मिले, तो लोगों ने 'बाज़ारू' कहा..."
    vakharia
    vakharia
    नज़रों में जिनके खोट हो, वो नयन मटका ही देखेंगे,
    जो खुद घुटन के आदी हैं, वो हँसी को बेशर्म ही कहेंगे।
    दबी हैं जिनकी अपनी हसरतें, झूठी रवायतों के बोझ तले...
    वो तुम्हारे इस बेबाक इश्क़ को, जलन में बाज़ारू ही कहेंगे।
    अब मैं अपनी दास्तान किसको सुनाऊँ?
    अब अपनी ये जवानी किसे दिखाऊँ?
    जब दिल ही लूट लिया उसने...
    तो अब किसी चोर को मैं मुँह क्यों लगाऊँ.
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