मीठा पानी 18
किसी समय हरीश के बाप यानी शामु के दादा ने खेत मे ये ढाणी बनवाई थी। उनका मन था कि उनका सारा परिवार खेत मे रहे। इसीलिए इस ढाणी को किसी बड़े घर की तरह ही बनवाया था। खेत के बीचो बीच बने इस घर मे 4 कमरे और एक गोदाम है। एक टॉयलेट और बाथरूम भी बना हुआ है। ढाणी के पिछे टिन का शेड बना हुआ है जिसके निचे ट्रैक्टर, गाड़ी, खेत के यन्त्र आदि रखे जा सकते है। शेड के आगे थोड़ी जगह साफ करके रखी गयी है ताकि रात मे बाहर सोया जा सके। मच्छर नहीं है तो बाहर सोने का आनंद लिया जा सकता है. पास ही पड़े मटके मे ठंडा पानी रखा गया है. कुल मिलाकर एक घर मे जितनी सुविधाएं होनी चाहिए वे सब है.
अंधेरा होने लगा था तो शामू एक मेज जो कि अंदर पड़ा हुआ था, को उठा लाया. और एक चारपाई रख दी. माया खेत देख रही थी. बढ़ी हुई फसल मे घूम रही थी. शामु ने फ़ूड कूलर को उठाकर बाहर चारपाई के पास रख दिया जिसमे बियर ठंडी हो रही थी. चारो और फसल होने के कारण कोई भी नहीं देख सकता के अंदर क्या हो रहा है. बाहर बैठने का एक फायदा यह भी था कि अगर कोई पशु आया तो उन्हें आवाज आ जाएगी.
दूसरी तरफ जमुना काकी के घर औरते इकट्ठा होना शुरू हो गई थी. जब तक सगाई होगी, रोज गीत गाये जायेंगे, राजस्थान मे हर समारोह के लिए लोक गीतों का भंडार है. लीला को अपनी सहेली माया कि कमी जरूर महसूस हो रही थी. पर वह जानती थी कि अगर कोई जरूरी काम ना होता तो वो जरूर आती. सीता भी बन ठन के शामू द्वारा दी गयी नथनी, और राजपूती लेहंगा पहनकर आयी थी. जमना, जो हमेसा सादे कपड़े पहनती है, वह भी आज नया सुट पहनकर बैठी थी. गीत सुरु हो गए थे और एक औरत लीला को मेहंदी लगा रही थी.
माया खेत घूमकर आ गयी थी और आकर चारपाई पर बैठी थी और मोबाइल चला रही थी. शामू वहाँ नहीं था. वह बैठने से पहले पक्का कर लेना चाहता था कि उनके आस पास कोई व्यक्ति या खेत मे कोई पशु नहीं है. जब उसे यकीन हो गया कि कोई नहीं है तो वह वापस आकर माया के साथ बैठ गया.
"कहा गए थे भैया?"
"देख के आया हूँ कही कोई है तो नहीं"
"फिर?"
"कोई नहीं है"
"एक बात बताओ भैया" माया ने पूछा
"पूछ"
"कोई आ जाये और हम पार्टी कर रहे हो तो क्या होगा"
"होगा क्या, पापा को पता चल जायेगा" बोलकर शामु जोर से हँसा
"भैया, मजाक मत करो, सच बताओ, मुझे डर लग रहा है"
"तू क्यों टेंसन ले रही है,मैं हूँ ना, तू बस एन्जॉय कर"
"हम्म, फिर ठीक है "
"रुक लाडो, कमरे मे हुक्का पड़ा है, मैं भर लेता हूँ"
"सिगरेट नहीं लाये?"
"लाया हूँ ना, चल फिर वही पीते है, मन किया तो बाद मे भर लूंगा"
"निकालो फिर बोतल"माया ने हसकर बोला. शामू को भी हसीं आ गयी.
"अभी देख " बोलकर शामू ने कूलर का ढक्कन खोला और एक बोतल निकाल ली.
"लाडो, अंदर कमरे मे कांच के गिलास पड़े है वो ले आ"
माया उठी और गिलास लेकर का गयी. उसने उन्हें पहले पानी मारकर धोया और फिर वापिस चारपाई पर बैठ गयी.
"लाओ भैया, आज मैं बनाती हूँ"
"क्या बात है, आज तो कमाल ही हो गया" शामू ने मुस्कुराते हुए बोतल माया को देदी. माया ने बोतल का ढक्कन उखाड़ा और दोनों गिलास भर दिए. चियर्स करते हुए दोनों ने गिलास खाली कर दिया. साथ मे चखना चलने लगा. दोनों बाते करने लगे और थोड़ी देर बाद दुसरा पेग्ग भी ख़त्म हुआ. इसी क्रम मे उन्होंने चार पेग लगा लिए.
दोनों को नशा चढ़ चूका था थोड़ा थोड़ा और अब बातो मे हसीं घुल गयी थी.
"आज वही बैठेगी?" शामू ने चेहरे पर मुस्कुराहट लेकर पूछा तो माया भी मुस्कुरा पड़ी. फिर वहा से उठी और शामू कि और आई. शाम पालथी मारकर बैठा था. जब माया उसके पास आई तो शामू ने अपनी दोनों टांगे फैला ली और माया दोनों टांगो के बीच बैठ गयी. पहाड़ जैसे भाई के आँचल मे उसकी बहन किसी बच्ची जैसी लग रही थी.
"अब ठीक है"शामू ने कहा और उसके पेट पर अपना एक हाथ रख दिया.
"भैया सिगरेट जलाओ" माया ने बोला तो शामू ने पैकेट मे से एक निकाल कर उसे माया के होठों पर लगाया तो माया ने उसकी तरफ देखा.
"आज इसकी शुरुआत भी तू ही कर" शामू बोला तो माया ने अपने होंठ खोल दिए. उसके हलकी लाली लगे होंठ बहुत ही कामुक लग रहे थे. महिलाओ के होंठ शामू की कमज़ोरी थी. उसकी दोनों अंगुलिया माया के होठों को छू रही थी जिससे उसने सिगरेट पकड़ रखी थी.
शामू ने लाइटर निकला और माया ने सिगरेट को होठों मे जकड लिया. लाइटर जलते ही माया ने सिगरेट जला ली और शामु के हाथ से ही पिने लगी. माया ने दो तीन कस मारकर सिगरेट को आजाद किया जिस पर थोड़ा सा माया का थूक लग गया था. अब शामू ने दो तीन कस मारकर वापिस अपनी बहन के होठों पर लगा दी. माया ने एक कस मारा और फिर धुंआ उड़ाकर दूसरा कस मारा पर इस बार उसने धुंआ मुंह मे ही रखा. धुंआ मुंह मे रखकर उसने ऊपर शामू के चेहरे की तरफ देखा तो शामू ने निचे माया के चेहरे की तरफ देखकर अपना मुंह खोल दिया. माया ने फिर सारा धुंआ अपने भाई के मुंह मे छोड़ दिया जिसका आंनद ये दोनों ऐसे ही लेते है. बारी बारी से उन दोनों ने कस भरा और एक दूसरे के मुंह मे छोड़ दिया. सिगरेट ख़तम हुई तो माया ने पांचवा पेग्ग बना लिया. अब पेग्ग एक ही बार मे ना पीकर दोनों सिप सिप करते हुए पी रहे थे. दोनों सुरूर मे झूम रहे थे. थोड़ी थोड़ी हिचकी आ रही थी. माया पेग्ग पीते हुए थोड़ी सी उठी और चारपाई पर शामू के पेरो के बीच मे घुटनो के बल खड़ी हो गयी. फिर वह शामू की और घूम गयी और अपने दोनों हाथ शामू के कंधो पर रख दिए. उसका गिलास खाली हो चुका था और शामू ने भी अपना गिलास खाली कर दिया और निचे रख दिया. फिर अपने हाथो से अपनी बहन की कमर पकड़ ली. माया का चेहरा शामू के चेहरे से यही कोई दो तीन इंच की दुरी पर था.
"अब बताओ भैया, कौन है वो जिसके लिए वो गिफ्ट रखा है आपने अपनी अलमारी मे?" माया के चेहरे पर मुस्कुराहट खेलने लगी.
"कोनसा गिफ्ट? याद ही नहीं आ रहा" शामू ने माया की कमर को थोड़ा सा भींच कर कहा और कहते हुए थोड़ा सा हस दिया. हालांकि उसे सब याद था.
"अच्छा, भूल गए?"माया को भी पता था शामू मजाक मे कह रहा है.
"हाँ, कोनसा गिफ्ट, बता ना"
"अब बताते हो या नहीं" माया ने शामू का कान थोड़ा सा मरोड़ कर कहा.
शामू ने माया को अपने करीब किया और बोला
"क्या था वो गिफ्ट लाडो? बता ना"
माया के गाल लाल हो गए पर नशा चढ़ चूका था. और अपने भाई के इतना करीब होने से उत्तेजना चरम पर थी.
"ब्रा और पैंटी भैया. आपकी अलमारी मे"
शामू ने दुबारा अपनी बहन की कमर को भींचा और फिर एक हाथ निचे सरका कर उसके भारी नितम्ब पर रख दिया. माया को इससे कोई समस्या नहीं थी.
"है एक लाडो, अच्छी दोस्त है"
"सिर्फ दोस्त है?" माया का एक हाथ अब शामू के गाल पर था.
"अभी तक तो बस दोस्त ही है"
"और आगे?" माया की आवाज धिमी थी. थोड़ी थोड़ी हवा से उसके बाल उड़कर उसके चेहरे पर आ रहे थे और शामू एक हाथ से उन्हें हटा रहा था. उसका दूसरा हाथ अब अपनी बहन के नितम्बो पर फिर रहा था.
"तू बता, आगे बढू या छोड़ दू उसे?"
"दोस्त तक ठीक है, उससे आगे नहीं" और माया ने शामू का गाल चुम लिया.
"नहीं बढ़ता, फीर वो गिफ्ट देना है उसे या नहीं?" शामु ने पूछा और अब उसका हाथ अपनी बहन के नितम्ब को थोड़ा थोड़ा सहला रहा था.
"नहीं देना, ऐसा कोई भी गिफ्ट किसी को नहीं देना आगे से "
"और तुझे?" शामू ने माया को अपने से लगा लिया था. माया के स्तन अपने भाई के सीने मे जा धसे.
"हाँ, बस मुझे ही दोगे अब से हर गिफ्ट "
शामु ने माया का गाल चूमा और फिर गले पर एक चुम्बन अंकित कर दिया. माया के शरीर मे सिहरन दौड़ गयी. फिर शामू ने चेहरा ऊपर किया और माया की आँखों मे देखा जो उसे ही देख रही थी.
"और मेरा गिफ्ट लाडो?" बोलते हुए शामू ने माया के नितम्बो को अपने दोनों हाथो मे भरा, नितम्बो के दोनों पाटो को विपरीत दिशा मे खिंचा. माया ने शामू की आँखों मे देखते हुए अपने रसीले होठों को अपने भाई के होठों से चिपका दिया.