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Mitha pani 14
" अब तुम लोग और कितना समय लगाओगे तैयार होंने में? हमें वापस भी आना है"
आज शामु के ननिहाल मे हलचल मची हुई है। सारे लोग शादी की शॉपिंग करने गंगानगर जा रहे हैं। औरतें तैयार होने में बहुत समय लेती है। सबसे छोटे मामा राजेश बहुत पहले से ही अमेरिका में नौकरी कर रहे हैं। उसकी पत्नी सुनीता यही रहती है। सभी औरतों को शॉपिंग करवाने का जिम्मा सुभाष और शामु की मौसी रेखा के बेटे मोहन के सिर था। बड़े मामा प्रकाश खेती बाड़ी में व्यस्त रहने के कारण साथ नहीं जा सकते। काफी समय तक इंतजार करने के बाद भी जब वे तैयार होकर बाहर नहीं निकली तो खीज कर सुभाष ने अपनी पत्नी गौरी से कहा।
" रुकिये, चलते हैं अभी, इतनी भी क्या जल्दी है" गौरी ने जवाब दिया।
" देख ले मोहन बेटा शादी के बाद यही हाल होता है, इसीलिए कहता हुँ तू शादी मत करवाना"
" आपने क्यों करवाई थी फिर?" मोहन भी मजाक मे बोला।
" अबे तो हमें क्या पता था तुझे तो बता रहा हूं ना मैं" दोनों आंगन मे बेठे बात कर रहे थे। और घर के अंदर अलग ही माहोल था। बड़ी मामी सीमा और सबसे छोटी मामी सुनीता तैयार हो गई थी। रंग बिरंगी पोशाकें पहनकर सभी औरतें अपने आप को सबसे अच्छा दिखाने की कोशिश कर रही थी।
माया ने अपना काले रंग का चूड़ीदार सूट सलवार पहन लिया था और बाल बना रही थी। वह किसी भी सूरत में किसी फिल्मी हीरोइन से कम नहीं थी। हाथों में थोड़ी-थोड़ी चूड़ियां पहन रखी थी। गले में एक पतली सी सोने की चेन पहन रखी थी।
हाइ हील पहनने से लंबाई और भी बढ़ गयी। आज पता नहीं कितनों पर बिजली गिरने वाली थी।
अंततः सभी तैयार हो गए और निश्चय हुआ की दो गाड़ियां लेकर जाएंगे। एक को सुभाष चला लेगा और एक को मोहन। माया ने गाड़ी में बैठने से पहले शामु को मैसेज किया कि वे लोग निकल चुके हैं वह भी जल्दी पहुंच जाए।
इधर शामु भी तैयार हो चुका था। उसने अपनी काली टी-शर्ट और उसके नीचे जींस पहन ली थी। सीता खाना बना रही थी जब शामु तैयार होकर बाहर आया। जब उसने देखा कि उसकी मां खाना बना रही है तो उससे रहा नहीं गया। उसके कदम स्वत: ही रसोई की ओर चल पड़े। सीता को जब कदमों की आहट हुई तो उसे एहसास हो गया कि शामु उसकी ओर आ रहा है। किसी अंजानी चेतना से उसके चेहरे पर मुस्कुराहट आ गयी। शामु भी धीरे से सीता के पास आया और होले से उसे अपनी बाहों में ले लिया। उसके हाथ सीता के पेट पर बंध गए। शरीर पर लगाई गयी इत्र की खुशबू से सीता के नथुने भर गए। शामु ने अपने चेहरे को सीता के कंधे पर टिकाया और बोला
"जा रहा हुँ माँ, शाम तक आ जाऊँगा"
"ह्म्म्म, पैसे ले लिए?"
"हां"
"ठीक है तो फीर ध्यान से जाना"
"ठीक" कहते हुए शामु ने सीता के गाल पर एक चुंबन दिया। पर वह वहां से हटा नहीं। शायद वह किसी उम्मीद में खड़ा था। सीता को भी इसका भान हुआ और उसने अपनी गर्दन मोड़कर एक हाथ शामु के बाएं गाल पर रखा और दांये गाल पर चुंबन दे दिया और बिना कोई बात किए, बिना शामु की ओर देखे वापस अपने काम में लग गयी। उसके गाल लाल हो गये। शामु भी मुस्कुराया और सीता की कमर को दोनों हाथो से पकड़ कर हल्का सा दबाके चल दिया। सीता की सांस फूल गई थी। उसने गैस बंद की और पानी पीने चली गई।
शामु ने गाड़ी निकली और रवाना हो गया। रास्ते में उसने माया को मैसेज किया कि वह आधे घंटे में पहुंच जाएगा। माया ने जब मैसेज पढा तो वह खिलखिला गई।
माया, रचना और सबसे छोटे मामा राजेश की बेटी मंजू एक गाड़ी में मोहन के साथ आ रहे थे। जब रचना ने देखा की माया के चेहरे पर एक बड़ी मुस्कुराहट है उसने कोहनी मार कर आँखो के इशारे से पूछा कि क्या हुआ?
" भैया आज गंगानगर आ रहे हैं मुझे पार्टी देने" धीरे से माया ने बताया।
" पार्टी? पार्टी किस चीज की?" रचना को पत्ता था कि यह दोनों भाई बहन जब भी मिलते हैं पार्टी करते हैं पर अचानक गंगानगर आकर पार्टी करने की बात पर उसको अचंभा हुआ।
" वह काफी दिनों से मोबाइल लेने का कह रहे थे। कुछ दिन पहले लेकर आए है। और हमें तो बस बहाना ही चाहिए पार्टी का। तो मैंने उन्हें बताया था कि हम गंगानगर जा रहे हैं, आप भी आ जाओ यही कर लेंगे"
" अच्छा तो यह बात है वह आ रहा है और मुझे बताया भी नहीं। मिलने दे उसको आज उसकी खैर नहीं" रचना ने मजाक मे कहा तो माया को लगा कि कहीं यह सारा मामला ना गड़बड़ करदे।
" नहीं पागल किसी को नहीं बताना तुझे पार्टी चाहिए तो बाद में ले लेना भैया से"
" चल ठीक है नहीं केहती कुछ, पर तु जाएगी कैसे?"
" वह भैया संभाल लेंगे, तू बस मेरा साथ दे देना मैं कुछ कहु तो"
"ह्म्म्म, चल ठीक है, एक पार्टी उधार रही तुम दोनों पर"
थोड़ी देर बाद शहर भी आ गया। उन्होंने गाड़ी एक दुकान के सामने खड़ी की जहा से वे हमेसा कपड़े खरीदते है।
"बच्चों, हम कपडा देख लेते है तब तक तुम लोग जाकर अपनी शॉपिंग कर आओ" मौसी रेखा ने कहा।
"हमे बहुत टाइम लगेगा मौसी" माया ने कहा।
"तो हमे क्या कम लगेगा, लेनदेन के सारे कपड़े लेने है। और साथ मे ये अपने लिए भी लेंगी। तुम लोगो को जितना टाइम चाहिए लेलो। आज पूरा दिन लगने वाला है" मामा सुभाष ने बोल।
"ठीक है, चाचू, हम जाते है फिर" रचना ने कहा और वो लोग निकल गए बाजार की तरफ। रास्ते मे माया ने मोहन को बोला
"भाई, मुझे मटका चौक पर उतार दे, एक सहेली से मिलकर आना है। तब तक तुम लोग करो शॉपिंग" बोलने के साथ ही माया ने रचना को धीरे से कोहनी मारी तो रचना समझ गयी कि उसे क्या बोलना है।
"सहेली वो पार्लर वाली?"
"हां, उसने बहुत बार कहा है आने को, पर टाइम ही नही मिलता"
"तो तू नही करेगी क्या शॉपिंग?" मोहन ने पूछा।
"नही भाई, आज तुम सब करलो। मैं बाद मे रचना के साथ आकर कर लुंगी"
"चल ठीक है, आ गया मटका चौक, तू फोन कर देना मुझे फ्री होते ही"
"ठीक है"
माया गाड़ी से उतर गयी। मटका चौक गंगानगर का एक प्रसिध्द चौक है, जहां माया उउतर, और शामु को फोन किया
"हां लाडो, पहुँच गयी तू?"
"हा भैया, आप कहा पहुचे?"
"मैं शहर मे हुँ, तू कहा मिलेगी मुझे?"
"मैं मटका चौक पर उतरी हुँ, यही आ जाओ आप"
"ठीक है बस 2 मिनट मे आया"
थोड़ी देर मे शामु भी वहां पहुँच गया। पहुचते ही उसकी नजर माया पर पड़ी जो अपने मोबाइल मे वयस्त थी। काले सूट मे बहुत सुंदर लग रही थी। जब भी शामु अपनी बहन से कुछ दिनों बाद मिलता तो उसे वह बदली हुई नजर आती। उसे लगता जेसे उसकी बहन पिछली बार की तुलना मे ज्यादा खूबसूरत हो गयी है। हालांकि माया पतली नही थी न ज्यादा भरी हुई थी। उसकी लंबाई के हिसाब से एक चुस्त शरीर की स्वामिनी थी। शामु उसे देखता ही रह गया। आज उसकी बहन कुछ ज्यादा ही मस्त दिख रही थी। शामु को लगा जेसे उसके स्तन पहले से बड़े हो गए हो। माया जेसे अपनी माँ सीता की बहन जैसी दिखने लगी थी इस छोटी सी उम्र मे। शामु अपनी ख्याली दुनिया से बाहर आया और उसने ध्यान दिया कि माया का सारा ध्यान इस समय मोबाइल मे है। क्यू ना अपनी बहन को चोंकाया जाए। उसने गाड़ी एक जगह खड़ी की और पैदल माया की तरफ चल पड़ा। पास पहुचते ही उसने जोर से बोला
"ओये मोटी"
एक पल के लिए तो वो चोंक गयी दूसरे ही पल उसने अपने भाई को देख लिया। तीसरे ही पल अत्यधिक खुशी के मारे जोर से 'भैया' बोलकर वो शामु की और लपक पड़ी और अपने भाई को गले लगा लिया। सगे भाई बहन अगर पास रहे तो लड़ते रहते है पर अगर दूर रहे तो प्यार हर सीमा पार करने को उतारू रहता है। कुदरत के नियम कमाल के होते है। इंसानो का गले लगना भी कुदरत का नियम है जिसमे अगर दो औरते या दो आदमी आपस मे गले लगे तो कोई खास बात नही पर अगर एक आदमी और एक औरत गले लगे तो एक खास अनुभव होता है। भौतिकी का नियम समझ मे आ जाता है कि दबाव क्या चीज होती है।
शामु को भी ये नियम समझ मे आ रहा था। उसे यकीन हो गया था की उसकी बहन के स्तन पहले से बड़े और भारी हो चुके है। बहुत ही कामुख खुशबू आ रही थी उससे। उसने माया को बांहो मे उठा लिया और कुछ पल हवा मे रखने के बाद निचे उतार दी। फिर कशमिरी सेब जेसे गाल पर हाथ रखा और बोला
"चल गाड़ी मे चलते है, गर्मी लग रही है"
"चलो भैया"
वे दोनों गाड़ी मे बेठ गए। शामु ने गाड़ी स्टार्ट नही की और माया की तरफ मुँह करके बेठ गया।
"बोल क्या प्लान है आज का?" शामु ने पूछा
"प्लान छोड़िये भैया, पहले ये बताइये कि मै लग केसी रही हुँ?" माया ने बहुत ही प्यार से पूछा।
"तू इस दुनिया की सबसे प्यारी लड़की लग रही है लाडो, ये सूट तुझे सच मे जचता है। मेरी बहन से सुंदर कोई भी नही"
"हाये भैया, थैंक यू" कहके माया ने दुबारा शामु को गले से लगा लिया। गाड़ी के शीशे काले थे तो शामु को ये चिंता भी नही थी कि कोई देख रहा है। दोनों अलग नही हुए और उसी गले लगी अवस्था मे बात करने लगे और दोनों का चेहरा बहुत पास था इतना की साँस से साँस टकरा रही थी। और ये इनके लिए अजीब नही था। जब भी मिलते तो एसे ही चिपक कर रहते जेसे भाई बहन नही प्रेमी हो।
"हां अब बताइये भैया, क्या सोचा है आपने आज?"
"पार्टी तुझे चाहिए थी, तू ही बता"
"ह्म्म्म, बियर पिये?"
"ना ना ना, तेरे साथ बियर, मै तो नही पीने वाला, याद है पिछली बार प्रकाश मामा ने हमे पकड़ ही लिया था अगर मोहन ना होता तो। तू सब गडबड कर देती है"
"इस बार नही करुगी पक्का, प्लीज प्लीज भैया पिते है ना, आज टाइम भी है और हम घर पर भी नही है। उन सबको पुरा दिन लगने वाला है तब तक उतर भी जाएगी"
आखिर हार कर शामु बोला
"ठीक है लेकिन एक शरत पर"
"बताइये"
"तू सिर्फ एक बोतल पियेगी"
"मंजूर है, अब चले?" चेहरे पर बड़ी सी मुस्कुराहट लिए माया बोली। उसे पता था उसका भाइ उसकी हर इच्छा के आगे घुटने टेक ही देता है।
"ह्म्म्म, चल फिर" दोनों बार की और चल पड़े। जब माया को एहसास हुआ कि शामु उसे बार मे ले जा रहा है तो वो बोली
"भैया, आज बार मे नही, ठेके से लेलो गाड़ी मे पियेंगे"
इस बात पर शामु को हसी आ गयी।
"तू इतनी बड़ी पियक्कड कबसे बंन गयी लाडो?"
"क्या पियक्कड भैया, बस आपके साथ ही तो पिती हुँ"
"चल झूठी, वहां नही पीती?"
"आपकी कसम भैया, मैने आज तक बस आपके साथ ही पी है"
"ह्म्म्म, चल मान लिया" बार से थोड़ी दूर ही एक ठेका था। शामु ने गाड़ी रोकी और बोतल लेआया। 1 माया के लिए और 2अपने लिए। तीनो बोतलो को गाड़ी मे रखकर चखना लाने चला गया और उसके साथ एक सीगरेट का पैकेट भी जो वो कम ही पिता है पर बीयर के साथ लगा लेता है।
"वाह भैया, आज मजा आएगा"
"तू ज्यादा खुश मत हो, मुझे अभी भी तेरा डर लग रहा है"
"अब आप मूड ऑफ मत करो अपना, मैं नही करने वाली कोई गडबड, अब करे शुरू?"
ढक्कन खोलते हुए शामु बोला
"तू बहुत खुश दिख रही है आज, कोई खास बात?"
"है एक, पहले पैग बनाइये"
शामु ने पैग दोनों के लिए बनाया और चीयर्स किया। माया एक ही बार मे पी गयी। थोड़ी देर बात करने के बाद शामु ने दूसरा पैग बनाया। इसी तरह तीसरा पैग। तीन पैग पिते ही दोनों को थोड़ा थोड़ा सरूर होना शुरू हो गया। तो शामु ने एक हाथ माया के गाल पर रखा और पूछा
"अब बता क्या खुशी है आज" माया भी इस बात पर मुस्कुराई और बोली
"खुशी आपकी है भैया। आप कभी मेरा कहना नही टालते। मैने सिर्फ एक बार बोला आने को और आप आ गए" बोलकर माया ने शामु के हाथ जो की अभी तक उसके गाल पर था को चूम लिया। नशा चढ़ रहा था।
"तू मेरी जान है पागल, मेरी बहन से प्यारा मुझे कोन होगा बता। तू बस कह दिया कर और तेरा भाई कर देगा"
माया को बहुत प्यार आया शामु पर और वो उठकर शामु की गोद मे जाकर बेठ गयी। शामु ने सीट को पिछे कर लिया जिससे प्रयाप्त जगह बन गयी। एक हाथ माया ने शामु के कंधे पर रखा और दूसरे मे पैग पकड हुआ था। जेसे ही माया गोद मे बैठी शामु ने अपना हाथ उसकी जांघ पर रख दिया और सहलाने लगा।
"आप भी मेरी जान हो भैया" कहकर उसने शामु के गाल पर चूम लिया। शामु ने पैकेट मे से एक सीगरेट निकाल कर जला ली। दो तीन कश मारकर माया से पूछा
"पियेगी?"
माया ने मुस्कुराकर उसके हाथ से सिगरेट लेली।
"मैं शायद दुनिया मे अकेला भाई हुँ जो अपनी बहन को सीगरेट और बियर पिला रहा है" इस बात पर दोनों बहुत जोर से हँसे।
जब माया सीगरेट पी रही होती तो शामु का हाथ उसके पेट पर होता। अब सिगरेट शामु के हाथ मे थी। उसने कहा
"मुँह खोल लाडो"
माया ने मुँह खोला और शामु ने जोर से कश भरा और माया के मुँह मे छोड़ दिया। फिर माया ने भी ऐसा ही किया। धीरे धीरे तीनो बोतल खत्म हो गयी। वे दोनों लगातार बातें कर रहे थे, हंस रहे थे, बीच-बीच में एक दूसरे को चूम रहे थे। माया ने शामु की बोतल से भी एक दो पैग लगा लिए थे दोनों को बराबर सुरूर बन गया था।
"अब यही बेठे रहते है, बाहर गए तो लोग कहेंगे कि बेवड़ा और बेवड़ि जा रहे है" फिर से गाड़ी मे ठहाका गूंजा।
"एक बात बता"
"हां भैया"
"तेरे पास नीले रंग का सूट है?"
"नही, क्यू? आपको देखना था मुझे नीले सूट मे?" माया के चेहरे पर मुस्कुराहट खेल रही थी।
"हां, दिखाएगी?"शामु ने अपनी बहन के गाल पर चूम कर पूछा।
"आपके लिए जान भी हाजीर है, पर है ही नही मेरे पास" माया ने भी वापिस चूम कर जवाब दिया।
"बस इतनी सी बात, आज दिलाता हुँ तुझे नीला सूट" फिरसे शामु ने गाल चूमा।
"ठीक है, अब जब मिलेंगे तो वही पहन के आऊँगी" इस बार माया ने शामु का गाल चूमा। धीरे समय बीत रहा था। माया पूरे वक्त शामु की गोद मे रही। चूमाचाटी चलती रही। कभी दोनों गले लग जाते। कभी शामु उसे धीरे से उसकी कमर दबोच देता। उन्होंने बहुत बाते की पर जब शामु को लगा की समय ज्यादा हो रहा है तो उसने माया से कहा
"मेरी लाडो" और दोबारा अपनी बहन का गाल चूमा
"हां भैया"
"टाइम बहुत हो गया है, अब हमे चलना चाहिए"
"नही, मुझे अभी बहुत सी बाते करनी है आपके साथ"
"पर तुझे सूट भी दिलाना है और फिर तुझे वापिस भी तो जाना है"
"नही नही भैया, अभी नही"
"मैं और आ जाऊंगा फिर कभी, और वेसे भी तू लीला की शादी मे आएगी ही, तब और कर लेंगे पार्टी" शामु को पता था की वे ज्यादा लेट नही हो सकते।
"ठीक है चलते है फिर"
"तेरी आँखे लाल हो रखी है पूरी, सरूर है तो रुक जाते है"
"नही भैया, अब उतना नही है, और ये सरूर की कमी लीला की शादी मे पूरी करेंगे" माया मुस्कुराई तो शामु भी मुस्कुरा दिया। वे बाजार गए और उसने माया को एक बहुत ही सुंदर सूट दिलवाया। सूट लेने के बाद शामु माया को मटका चौक पर छोड़ने गया। गाड़ी मे से उतरने से पहले माया ने शामु को गले लगाया और दोनों गालो पर चुम्बन दिया। शामु ने गाड़ी घुमाई और निकल पड़ा दोबारा बाजार की और। उसे याद था कि उसे अपनी माँ के लिए घाघरा चोली लेना है, जिसका वादा करके आया था। माया को नही बता सकता था।
उसने एक बुटीक ढूंढा और अंदर प्रवेश किया। एक सेल्सवुमन को दिखाने के लिए कहा और बोला
"पैसे की कोई बात नही है आप बस एक अच्छा घाघरा चोली दिखाइये थोड़ा मॉडर्न टाइप मे"
सेल्सवुमन भी कहा पिछे रहने वाली थी उसने एक से बढ़कर एक दिखाये। शामु को वे सब पसंद नही आ रहे थे। अंतत: उस लड़की ने एक निकाला जो बिल्कुल वेसा था जैसा शामु ने सोचा था।
"सर, घाघरा स्ट्रेचेबल है। घुटनो तक आएगा जैसा पूरानी बॉलीवूड मूवीज मे हीरोइन पहनती थी, और ये जैसा आप बोल रहे थे चोली, जिसे वेशट्रो कहते है। ये प्वाइंटेड है"
"प्वाइंटेड मतलब?" शामु ने पूछा।
"मतलब की जब आपकी मैडम इसे पहनेगी तो उनकी ब्रेस्ट प्वाइंटेड दिखेगी। वो गाना है ना मुझको राणा जी माफ करना, उसमे ममता कुलकरनी ने पहना था एसा"
शामु बहुत खुश हुआ। उसने चुनरी लाने को कहा और आखिर मे सब तैयार था। उसने बेग उठाया, पैसे चुकाएँ और चल पड़ा।
घर जाने से पहले उसने गाड़ी के टायरो की अलाईनमेंट कारवाई और अपने घर की और निकल पड़ा।
" अब तुम लोग और कितना समय लगाओगे तैयार होंने में? हमें वापस भी आना है"
आज शामु के ननिहाल मे हलचल मची हुई है। सारे लोग शादी की शॉपिंग करने गंगानगर जा रहे हैं। औरतें तैयार होने में बहुत समय लेती है। सबसे छोटे मामा राजेश बहुत पहले से ही अमेरिका में नौकरी कर रहे हैं। उसकी पत्नी सुनीता यही रहती है। सभी औरतों को शॉपिंग करवाने का जिम्मा सुभाष और शामु की मौसी रेखा के बेटे मोहन के सिर था। बड़े मामा प्रकाश खेती बाड़ी में व्यस्त रहने के कारण साथ नहीं जा सकते। काफी समय तक इंतजार करने के बाद भी जब वे तैयार होकर बाहर नहीं निकली तो खीज कर सुभाष ने अपनी पत्नी गौरी से कहा।
" रुकिये, चलते हैं अभी, इतनी भी क्या जल्दी है" गौरी ने जवाब दिया।
" देख ले मोहन बेटा शादी के बाद यही हाल होता है, इसीलिए कहता हुँ तू शादी मत करवाना"
" आपने क्यों करवाई थी फिर?" मोहन भी मजाक मे बोला।
" अबे तो हमें क्या पता था तुझे तो बता रहा हूं ना मैं" दोनों आंगन मे बेठे बात कर रहे थे। और घर के अंदर अलग ही माहोल था। बड़ी मामी सीमा और सबसे छोटी मामी सुनीता तैयार हो गई थी। रंग बिरंगी पोशाकें पहनकर सभी औरतें अपने आप को सबसे अच्छा दिखाने की कोशिश कर रही थी।
माया ने अपना काले रंग का चूड़ीदार सूट सलवार पहन लिया था और बाल बना रही थी। वह किसी भी सूरत में किसी फिल्मी हीरोइन से कम नहीं थी। हाथों में थोड़ी-थोड़ी चूड़ियां पहन रखी थी। गले में एक पतली सी सोने की चेन पहन रखी थी।
हाइ हील पहनने से लंबाई और भी बढ़ गयी। आज पता नहीं कितनों पर बिजली गिरने वाली थी।
अंततः सभी तैयार हो गए और निश्चय हुआ की दो गाड़ियां लेकर जाएंगे। एक को सुभाष चला लेगा और एक को मोहन। माया ने गाड़ी में बैठने से पहले शामु को मैसेज किया कि वे लोग निकल चुके हैं वह भी जल्दी पहुंच जाए।
इधर शामु भी तैयार हो चुका था। उसने अपनी काली टी-शर्ट और उसके नीचे जींस पहन ली थी। सीता खाना बना रही थी जब शामु तैयार होकर बाहर आया। जब उसने देखा कि उसकी मां खाना बना रही है तो उससे रहा नहीं गया। उसके कदम स्वत: ही रसोई की ओर चल पड़े। सीता को जब कदमों की आहट हुई तो उसे एहसास हो गया कि शामु उसकी ओर आ रहा है। किसी अंजानी चेतना से उसके चेहरे पर मुस्कुराहट आ गयी। शामु भी धीरे से सीता के पास आया और होले से उसे अपनी बाहों में ले लिया। उसके हाथ सीता के पेट पर बंध गए। शरीर पर लगाई गयी इत्र की खुशबू से सीता के नथुने भर गए। शामु ने अपने चेहरे को सीता के कंधे पर टिकाया और बोला
"जा रहा हुँ माँ, शाम तक आ जाऊँगा"
"ह्म्म्म, पैसे ले लिए?"
"हां"
"ठीक है तो फीर ध्यान से जाना"
"ठीक" कहते हुए शामु ने सीता के गाल पर एक चुंबन दिया। पर वह वहां से हटा नहीं। शायद वह किसी उम्मीद में खड़ा था। सीता को भी इसका भान हुआ और उसने अपनी गर्दन मोड़कर एक हाथ शामु के बाएं गाल पर रखा और दांये गाल पर चुंबन दे दिया और बिना कोई बात किए, बिना शामु की ओर देखे वापस अपने काम में लग गयी। उसके गाल लाल हो गये। शामु भी मुस्कुराया और सीता की कमर को दोनों हाथो से पकड़ कर हल्का सा दबाके चल दिया। सीता की सांस फूल गई थी। उसने गैस बंद की और पानी पीने चली गई।
शामु ने गाड़ी निकली और रवाना हो गया। रास्ते में उसने माया को मैसेज किया कि वह आधे घंटे में पहुंच जाएगा। माया ने जब मैसेज पढा तो वह खिलखिला गई।
माया, रचना और सबसे छोटे मामा राजेश की बेटी मंजू एक गाड़ी में मोहन के साथ आ रहे थे। जब रचना ने देखा की माया के चेहरे पर एक बड़ी मुस्कुराहट है उसने कोहनी मार कर आँखो के इशारे से पूछा कि क्या हुआ?
" भैया आज गंगानगर आ रहे हैं मुझे पार्टी देने" धीरे से माया ने बताया।
" पार्टी? पार्टी किस चीज की?" रचना को पत्ता था कि यह दोनों भाई बहन जब भी मिलते हैं पार्टी करते हैं पर अचानक गंगानगर आकर पार्टी करने की बात पर उसको अचंभा हुआ।
" वह काफी दिनों से मोबाइल लेने का कह रहे थे। कुछ दिन पहले लेकर आए है। और हमें तो बस बहाना ही चाहिए पार्टी का। तो मैंने उन्हें बताया था कि हम गंगानगर जा रहे हैं, आप भी आ जाओ यही कर लेंगे"
" अच्छा तो यह बात है वह आ रहा है और मुझे बताया भी नहीं। मिलने दे उसको आज उसकी खैर नहीं" रचना ने मजाक मे कहा तो माया को लगा कि कहीं यह सारा मामला ना गड़बड़ करदे।
" नहीं पागल किसी को नहीं बताना तुझे पार्टी चाहिए तो बाद में ले लेना भैया से"
" चल ठीक है नहीं केहती कुछ, पर तु जाएगी कैसे?"
" वह भैया संभाल लेंगे, तू बस मेरा साथ दे देना मैं कुछ कहु तो"
"ह्म्म्म, चल ठीक है, एक पार्टी उधार रही तुम दोनों पर"
थोड़ी देर बाद शहर भी आ गया। उन्होंने गाड़ी एक दुकान के सामने खड़ी की जहा से वे हमेसा कपड़े खरीदते है।
"बच्चों, हम कपडा देख लेते है तब तक तुम लोग जाकर अपनी शॉपिंग कर आओ" मौसी रेखा ने कहा।
"हमे बहुत टाइम लगेगा मौसी" माया ने कहा।
"तो हमे क्या कम लगेगा, लेनदेन के सारे कपड़े लेने है। और साथ मे ये अपने लिए भी लेंगी। तुम लोगो को जितना टाइम चाहिए लेलो। आज पूरा दिन लगने वाला है" मामा सुभाष ने बोल।
"ठीक है, चाचू, हम जाते है फिर" रचना ने कहा और वो लोग निकल गए बाजार की तरफ। रास्ते मे माया ने मोहन को बोला
"भाई, मुझे मटका चौक पर उतार दे, एक सहेली से मिलकर आना है। तब तक तुम लोग करो शॉपिंग" बोलने के साथ ही माया ने रचना को धीरे से कोहनी मारी तो रचना समझ गयी कि उसे क्या बोलना है।
"सहेली वो पार्लर वाली?"
"हां, उसने बहुत बार कहा है आने को, पर टाइम ही नही मिलता"
"तो तू नही करेगी क्या शॉपिंग?" मोहन ने पूछा।
"नही भाई, आज तुम सब करलो। मैं बाद मे रचना के साथ आकर कर लुंगी"
"चल ठीक है, आ गया मटका चौक, तू फोन कर देना मुझे फ्री होते ही"
"ठीक है"
माया गाड़ी से उतर गयी। मटका चौक गंगानगर का एक प्रसिध्द चौक है, जहां माया उउतर, और शामु को फोन किया
"हां लाडो, पहुँच गयी तू?"
"हा भैया, आप कहा पहुचे?"
"मैं शहर मे हुँ, तू कहा मिलेगी मुझे?"
"मैं मटका चौक पर उतरी हुँ, यही आ जाओ आप"
"ठीक है बस 2 मिनट मे आया"
थोड़ी देर मे शामु भी वहां पहुँच गया। पहुचते ही उसकी नजर माया पर पड़ी जो अपने मोबाइल मे वयस्त थी। काले सूट मे बहुत सुंदर लग रही थी। जब भी शामु अपनी बहन से कुछ दिनों बाद मिलता तो उसे वह बदली हुई नजर आती। उसे लगता जेसे उसकी बहन पिछली बार की तुलना मे ज्यादा खूबसूरत हो गयी है। हालांकि माया पतली नही थी न ज्यादा भरी हुई थी। उसकी लंबाई के हिसाब से एक चुस्त शरीर की स्वामिनी थी। शामु उसे देखता ही रह गया। आज उसकी बहन कुछ ज्यादा ही मस्त दिख रही थी। शामु को लगा जेसे उसके स्तन पहले से बड़े हो गए हो। माया जेसे अपनी माँ सीता की बहन जैसी दिखने लगी थी इस छोटी सी उम्र मे। शामु अपनी ख्याली दुनिया से बाहर आया और उसने ध्यान दिया कि माया का सारा ध्यान इस समय मोबाइल मे है। क्यू ना अपनी बहन को चोंकाया जाए। उसने गाड़ी एक जगह खड़ी की और पैदल माया की तरफ चल पड़ा। पास पहुचते ही उसने जोर से बोला
"ओये मोटी"
एक पल के लिए तो वो चोंक गयी दूसरे ही पल उसने अपने भाई को देख लिया। तीसरे ही पल अत्यधिक खुशी के मारे जोर से 'भैया' बोलकर वो शामु की और लपक पड़ी और अपने भाई को गले लगा लिया। सगे भाई बहन अगर पास रहे तो लड़ते रहते है पर अगर दूर रहे तो प्यार हर सीमा पार करने को उतारू रहता है। कुदरत के नियम कमाल के होते है। इंसानो का गले लगना भी कुदरत का नियम है जिसमे अगर दो औरते या दो आदमी आपस मे गले लगे तो कोई खास बात नही पर अगर एक आदमी और एक औरत गले लगे तो एक खास अनुभव होता है। भौतिकी का नियम समझ मे आ जाता है कि दबाव क्या चीज होती है।
शामु को भी ये नियम समझ मे आ रहा था। उसे यकीन हो गया था की उसकी बहन के स्तन पहले से बड़े और भारी हो चुके है। बहुत ही कामुख खुशबू आ रही थी उससे। उसने माया को बांहो मे उठा लिया और कुछ पल हवा मे रखने के बाद निचे उतार दी। फिर कशमिरी सेब जेसे गाल पर हाथ रखा और बोला
"चल गाड़ी मे चलते है, गर्मी लग रही है"
"चलो भैया"
वे दोनों गाड़ी मे बेठ गए। शामु ने गाड़ी स्टार्ट नही की और माया की तरफ मुँह करके बेठ गया।
"बोल क्या प्लान है आज का?" शामु ने पूछा
"प्लान छोड़िये भैया, पहले ये बताइये कि मै लग केसी रही हुँ?" माया ने बहुत ही प्यार से पूछा।
"तू इस दुनिया की सबसे प्यारी लड़की लग रही है लाडो, ये सूट तुझे सच मे जचता है। मेरी बहन से सुंदर कोई भी नही"
"हाये भैया, थैंक यू" कहके माया ने दुबारा शामु को गले से लगा लिया। गाड़ी के शीशे काले थे तो शामु को ये चिंता भी नही थी कि कोई देख रहा है। दोनों अलग नही हुए और उसी गले लगी अवस्था मे बात करने लगे और दोनों का चेहरा बहुत पास था इतना की साँस से साँस टकरा रही थी। और ये इनके लिए अजीब नही था। जब भी मिलते तो एसे ही चिपक कर रहते जेसे भाई बहन नही प्रेमी हो।
"हां अब बताइये भैया, क्या सोचा है आपने आज?"
"पार्टी तुझे चाहिए थी, तू ही बता"
"ह्म्म्म, बियर पिये?"
"ना ना ना, तेरे साथ बियर, मै तो नही पीने वाला, याद है पिछली बार प्रकाश मामा ने हमे पकड़ ही लिया था अगर मोहन ना होता तो। तू सब गडबड कर देती है"
"इस बार नही करुगी पक्का, प्लीज प्लीज भैया पिते है ना, आज टाइम भी है और हम घर पर भी नही है। उन सबको पुरा दिन लगने वाला है तब तक उतर भी जाएगी"
आखिर हार कर शामु बोला
"ठीक है लेकिन एक शरत पर"
"बताइये"
"तू सिर्फ एक बोतल पियेगी"
"मंजूर है, अब चले?" चेहरे पर बड़ी सी मुस्कुराहट लिए माया बोली। उसे पता था उसका भाइ उसकी हर इच्छा के आगे घुटने टेक ही देता है।
"ह्म्म्म, चल फिर" दोनों बार की और चल पड़े। जब माया को एहसास हुआ कि शामु उसे बार मे ले जा रहा है तो वो बोली
"भैया, आज बार मे नही, ठेके से लेलो गाड़ी मे पियेंगे"
इस बात पर शामु को हसी आ गयी।
"तू इतनी बड़ी पियक्कड कबसे बंन गयी लाडो?"
"क्या पियक्कड भैया, बस आपके साथ ही तो पिती हुँ"
"चल झूठी, वहां नही पीती?"
"आपकी कसम भैया, मैने आज तक बस आपके साथ ही पी है"
"ह्म्म्म, चल मान लिया" बार से थोड़ी दूर ही एक ठेका था। शामु ने गाड़ी रोकी और बोतल लेआया। 1 माया के लिए और 2अपने लिए। तीनो बोतलो को गाड़ी मे रखकर चखना लाने चला गया और उसके साथ एक सीगरेट का पैकेट भी जो वो कम ही पिता है पर बीयर के साथ लगा लेता है।
"वाह भैया, आज मजा आएगा"
"तू ज्यादा खुश मत हो, मुझे अभी भी तेरा डर लग रहा है"
"अब आप मूड ऑफ मत करो अपना, मैं नही करने वाली कोई गडबड, अब करे शुरू?"
ढक्कन खोलते हुए शामु बोला
"तू बहुत खुश दिख रही है आज, कोई खास बात?"
"है एक, पहले पैग बनाइये"
शामु ने पैग दोनों के लिए बनाया और चीयर्स किया। माया एक ही बार मे पी गयी। थोड़ी देर बात करने के बाद शामु ने दूसरा पैग बनाया। इसी तरह तीसरा पैग। तीन पैग पिते ही दोनों को थोड़ा थोड़ा सरूर होना शुरू हो गया। तो शामु ने एक हाथ माया के गाल पर रखा और पूछा
"अब बता क्या खुशी है आज" माया भी इस बात पर मुस्कुराई और बोली
"खुशी आपकी है भैया। आप कभी मेरा कहना नही टालते। मैने सिर्फ एक बार बोला आने को और आप आ गए" बोलकर माया ने शामु के हाथ जो की अभी तक उसके गाल पर था को चूम लिया। नशा चढ़ रहा था।
"तू मेरी जान है पागल, मेरी बहन से प्यारा मुझे कोन होगा बता। तू बस कह दिया कर और तेरा भाई कर देगा"
माया को बहुत प्यार आया शामु पर और वो उठकर शामु की गोद मे जाकर बेठ गयी। शामु ने सीट को पिछे कर लिया जिससे प्रयाप्त जगह बन गयी। एक हाथ माया ने शामु के कंधे पर रखा और दूसरे मे पैग पकड हुआ था। जेसे ही माया गोद मे बैठी शामु ने अपना हाथ उसकी जांघ पर रख दिया और सहलाने लगा।
"आप भी मेरी जान हो भैया" कहकर उसने शामु के गाल पर चूम लिया। शामु ने पैकेट मे से एक सीगरेट निकाल कर जला ली। दो तीन कश मारकर माया से पूछा
"पियेगी?"
माया ने मुस्कुराकर उसके हाथ से सिगरेट लेली।
"मैं शायद दुनिया मे अकेला भाई हुँ जो अपनी बहन को सीगरेट और बियर पिला रहा है" इस बात पर दोनों बहुत जोर से हँसे।
जब माया सीगरेट पी रही होती तो शामु का हाथ उसके पेट पर होता। अब सिगरेट शामु के हाथ मे थी। उसने कहा
"मुँह खोल लाडो"
माया ने मुँह खोला और शामु ने जोर से कश भरा और माया के मुँह मे छोड़ दिया। फिर माया ने भी ऐसा ही किया। धीरे धीरे तीनो बोतल खत्म हो गयी। वे दोनों लगातार बातें कर रहे थे, हंस रहे थे, बीच-बीच में एक दूसरे को चूम रहे थे। माया ने शामु की बोतल से भी एक दो पैग लगा लिए थे दोनों को बराबर सुरूर बन गया था।
"अब यही बेठे रहते है, बाहर गए तो लोग कहेंगे कि बेवड़ा और बेवड़ि जा रहे है" फिर से गाड़ी मे ठहाका गूंजा।
"एक बात बता"
"हां भैया"
"तेरे पास नीले रंग का सूट है?"
"नही, क्यू? आपको देखना था मुझे नीले सूट मे?" माया के चेहरे पर मुस्कुराहट खेल रही थी।
"हां, दिखाएगी?"शामु ने अपनी बहन के गाल पर चूम कर पूछा।
"आपके लिए जान भी हाजीर है, पर है ही नही मेरे पास" माया ने भी वापिस चूम कर जवाब दिया।
"बस इतनी सी बात, आज दिलाता हुँ तुझे नीला सूट" फिरसे शामु ने गाल चूमा।
"ठीक है, अब जब मिलेंगे तो वही पहन के आऊँगी" इस बार माया ने शामु का गाल चूमा। धीरे समय बीत रहा था। माया पूरे वक्त शामु की गोद मे रही। चूमाचाटी चलती रही। कभी दोनों गले लग जाते। कभी शामु उसे धीरे से उसकी कमर दबोच देता। उन्होंने बहुत बाते की पर जब शामु को लगा की समय ज्यादा हो रहा है तो उसने माया से कहा
"मेरी लाडो" और दोबारा अपनी बहन का गाल चूमा
"हां भैया"
"टाइम बहुत हो गया है, अब हमे चलना चाहिए"
"नही, मुझे अभी बहुत सी बाते करनी है आपके साथ"
"पर तुझे सूट भी दिलाना है और फिर तुझे वापिस भी तो जाना है"
"नही नही भैया, अभी नही"
"मैं और आ जाऊंगा फिर कभी, और वेसे भी तू लीला की शादी मे आएगी ही, तब और कर लेंगे पार्टी" शामु को पता था की वे ज्यादा लेट नही हो सकते।
"ठीक है चलते है फिर"
"तेरी आँखे लाल हो रखी है पूरी, सरूर है तो रुक जाते है"
"नही भैया, अब उतना नही है, और ये सरूर की कमी लीला की शादी मे पूरी करेंगे" माया मुस्कुराई तो शामु भी मुस्कुरा दिया। वे बाजार गए और उसने माया को एक बहुत ही सुंदर सूट दिलवाया। सूट लेने के बाद शामु माया को मटका चौक पर छोड़ने गया। गाड़ी मे से उतरने से पहले माया ने शामु को गले लगाया और दोनों गालो पर चुम्बन दिया। शामु ने गाड़ी घुमाई और निकल पड़ा दोबारा बाजार की और। उसे याद था कि उसे अपनी माँ के लिए घाघरा चोली लेना है, जिसका वादा करके आया था। माया को नही बता सकता था।
उसने एक बुटीक ढूंढा और अंदर प्रवेश किया। एक सेल्सवुमन को दिखाने के लिए कहा और बोला
"पैसे की कोई बात नही है आप बस एक अच्छा घाघरा चोली दिखाइये थोड़ा मॉडर्न टाइप मे"
सेल्सवुमन भी कहा पिछे रहने वाली थी उसने एक से बढ़कर एक दिखाये। शामु को वे सब पसंद नही आ रहे थे। अंतत: उस लड़की ने एक निकाला जो बिल्कुल वेसा था जैसा शामु ने सोचा था।
"सर, घाघरा स्ट्रेचेबल है। घुटनो तक आएगा जैसा पूरानी बॉलीवूड मूवीज मे हीरोइन पहनती थी, और ये जैसा आप बोल रहे थे चोली, जिसे वेशट्रो कहते है। ये प्वाइंटेड है"
"प्वाइंटेड मतलब?" शामु ने पूछा।
"मतलब की जब आपकी मैडम इसे पहनेगी तो उनकी ब्रेस्ट प्वाइंटेड दिखेगी। वो गाना है ना मुझको राणा जी माफ करना, उसमे ममता कुलकरनी ने पहना था एसा"
शामु बहुत खुश हुआ। उसने चुनरी लाने को कहा और आखिर मे सब तैयार था। उसने बेग उठाया, पैसे चुकाएँ और चल पड़ा।
घर जाने से पहले उसने गाड़ी के टायरो की अलाईनमेंट कारवाई और अपने घर की और निकल पड़ा।