Update 26
पूर्व दिशा में से सूरज अपनी सुनहरी किरण फैलाता हुआ दिन की शुरुआत करते हैं, पक्षियों अपने घोंसले से निकल कर कलरव करते हुए वातावरण मे संगीत उत्पन्न कर रहे थे,मंद मंद हवा चलने लगी थी,
(बाबुजी का घर....)
जिस कमरे में शालिनी,बाबुजी और नील सो रहे थे अब उस कमरे में हल्की हल्की धूप आ रही थी, जिससे कमरा रोशन होने लगता है, बाबुजी की नींद खुलती है और उसे सबसे पहले जो दिखता है वो है नींद में सोयी हुई शालिनी।
शालिनी के बाल बिखरे हुए थे, सिर्फ ब्लाउज घाघरा पहनने की वजह से उसकी गोरी,पतली,कटावदार कमर और गोल गहरी नाभि से सुशोभित सपाट पेट, और ब्लाउज में से आजाद होने को आपस में लड़ाई करते दूध से भरे गोल मटोल स्तन ,सोती हुई शालिनी किसी अप्सरा से कम नहीं थी

,बाबुजी से रहा नहीं जाता और वो शालिनी के चेहरे पर आये कुछ बालों को उसके चेहरे से हटाते है, जैसे ही वो बालों को हटाते है, शालिनी की नींद खुल जाती हैं, और वो बाबुजी को देखकर मुस्करा देती हैं।
शालिनी : गुड मॉर्निंग! बाबुजी, सुबह हो गई?
बाबुजी : गुड मोर्निंग, हाँ ! सुबह तो हो गई पर तुम थोड़ी देर सो जाओ,
शालिनी : नहीं अब नींद नहीं आएगी ,आपको फ्रेश होने जाना हैं तो आप जाओ, तब तक में अपने योग की तैयारी करती हूं फिर साथ मे योग करेंगे।
बाबुजी : ठीक हैं,
बाबुजी फ्रेश होने जाते हैं और शालिनी घाघरा ब्लाउज, बदलकर अपने तंग चिपके हुए योग के कपड़े पहनकर आँगन में आती हैं, वो अपनी योग मेट बिछाने के बाद उसपर बैठे प्राणयाम करती हैं

,बाबुजी भी पास आकर अपने योग कसरत करते हैं, जब योग करते समय दोनों की नजर मिलती तब दोनों मुस्करा देते, जब योग करके दोनों खटिया पर आकर बैठते है, तभी नील की रोने की आवाज आती हैं शालिनी उसे लेने जाती हैं

और नील और दुपट्टा लेकर आती हैं और खटिया पर बैठे बैठे पल्लू डालकर नील को स्तनपान करवाती हैं, थोड़ी देर बैठने के बाद बाबुजी नहाने जाने लगते है।
शालिनी : बाबुजी आप नहाने की तैयारी करो तब तक नील को दुध पिलाकर आती हूं ,
बाबुजी : नहीं बहु उसकी जरूरत नहीं है, में नहा लूँगा
शालिनी : मुझे कोई जोखिम नहीं लेना, आप बस मेरा कहना मानिये वर्ना में डांट दूंगी
शालिनी को खुद की परवाह करते और हक जताते देख बाबुजी को अच्छा लगा
बाबुजी : ठीक हैं ठीक है, जैसा तुम कहो, पर मेरे बेटे को आने दो, सब शिकायत करूंगा
शालिनी : (मज़ाक में..)आपके उसी बेटे की बात मान रही हूँ, अब उसने मना किया तो उसकी बात भी नहीं मानेंगी और उसे भी डाट दूंगी,
बाबुजी : फिर तो तुम इस घर की रानी बन गई
"घर की रानी" शब्द सुनकर शालिनी को उस प्रथा की याद आ गयी, और वो उसके बारे में सोचकर शर्माने लगती हैं
शालिनी : आप भी ना! अब जाइए और नहाने की तैयारी करो, मे अभी आती हूं।
बाबुजी अपने कपड़े निकालकर सिर्फ एक कच्छै में पानी की बाल्टी भरने लगते है, शालिनी भी नील को स्तनपान करवाकर उसे हल्की धूप में खेलने के लिए छोड़ देती हैं और खुद अपने पुराने ब्लाउज घाघरा पहनकर आती हैं, शालिनी बाबुजी को नहलाने लगती हैं ,शालिनी जब पानी का लौटा भर के बाबुजी पर डालने वाली थी तब बाबुजी का हाथ लग जाता है और पूरा पानी शालिनी के ब्लाउज पर गिरता है,

पानी ठंडा होने से शालिनी के निप्पल तन जाते है और ब्लाउज में अपने स्थान की जानकारी देने लगता है, बाबुजी का भी ध्यान उसपर जाता है और उसे निहारने लगते है, भले ही बाबुजी ने उस निप्पल को नंगा देखा हो और उसे अपने मुँह में भी लिया हो, और उसमे से निकलने वाले अमृत जैसे दुध को पीया हो पर बाबुजी के अंदर का मर्द उस सुडोल स्तन और उसकी गुलाबी निप्पल को अनदेखा नहीं कर सकता है, शालिनी भी देखती है कि बाबुजी की नजर कहा है,
शालिनी : देखो आपने क्या कर दिया?मुझे गिला कर दिया ,आप बहुत नटखट हो गए हैं, लगता है पचपन में बचपन आ गया है
बाबुजी : माफ करना, मैंने जानबूझकर नहीं किया, पूरा दिन गंभीर रहकर तो नहीं रह सकता, मुझे भी कभी कभी मज़ाक मस्ती करनी होती हैं, पहले तो कोई नहीं था, अब जब तुम और मुन्ना आ गए तो मुन्ने ने मेरे अन्दर सोये बच्चे को जगा दिया, अभी इस उम्र में बाहर मज़ाक मस्ती कर्ता फिरने से लोग मुझे पागल बोलेंगे,
शालिनी को बाबुजी की बात सही लगती हैं क्युकी बाबुजी कितने समय से अकेले रह रहे हैं, शालिनी और नीरव भी शहर रहते हैं, इधर चाचाजी थे पर परिवार परिवार होता है, और पिछले महीने से चाचाजी भी नहीं थे, अकेले अकेले मन उदास और चिड़चिड़ा हो जाता है।
शालिनी : सही कहा बाबुजी, पर अब आपको अकेले रहने की कोई जरूरत नहीं रहेगी हम अब आपके साथ ही रहेंगे, आपको जब भी मज़ाक मस्ती करने का मन करे तब आप हमारे साथ कर सकते है,
शालिनी बाबुजी को नहलाने लगती हैं, नहलाने के बाद शालिनी कमरे में जाति है और अपने कपड़े और तौलिया लेकर नहाने जाने लगती हैं तभी बाबुजी तौलिया लपेटकर कमरे में आते है ,शालिनी जब नहाकर आती हैं तब गिला तौलिया सिर पर लपेटे हुए नास्ता बनाने लगती हैं,

फिर दोनों मिलकर नास्ता करते हैं और नील को स्तनपान करवाती है,जब नास्ता कर लेते है तब बाबुजी को फोन आता है कि वो मोटर ठीक करने मैकेनिक आए हैं, बाबुजी फिर उधर जाने है और शालिनी सब काम करने लगती हैं।
सब काम निपटाकर शालिनी अपने आप को सही करके नील को थोड़ा स्तनपान करवाकर सुला देती हैं और खुद लोगों के लिए चाय बनाकर लेकर जाती हैं, उधर जाकर सब को चाय पिलाती है और जब उसे पता चलता है कि मोटर ठीक होने में समय लगेगा इसलिए वो बाबुजी को घर आकर आराम करने को कहती है, बाबुजी भी शालिनी की बात समझ जाते हैं कि शालिनी उसे घर क्यु बुला रही हैं, इसलिए बिना किसी देर के गाव के एक आदमी को उधर रखकर दोनों वापिस घर आते हैं।
शालिनी कमरे में आकर बैठ जाती है और बाबुजी को अपनी गोदी में आने का इशारा करती हैं बाबुजी भी बिना कुछ कहे अपना कर्तव्य समझकर गोदी में सिर रखकर लेट जाते है,

शालिनी ब्लाउज के हूक खोलकर पल्लू डालकर अपने ससुर के सामने दुध से भरा स्तन रख देती हैं, बाबुजी भी अपना मुँह खोलकर शालिनी के सुडोल स्तन के ऊपर सुशोभित गुलाबी निप्पल को चूसने लगते है,

शालिनी राहत की साँस लेती हैं मानो किसी प्यासे को पानी मिलता है, बाबुजी बड़े अच्छे से स्तन चूस रहे थे, शालिनी को भी अच्छा लगता था, पर जब भी वो बाबुजी को स्तनपान करवाती तब उसे चाचाजी की याद आ जाती की कैसे चाचाजी स्तनपान करते समय हल्की छेड़खानी करते रहते, कभी निप्पल को दांत से हल्का दबा देते, कभी जीभ से सहलाते, कभी तेजी से चूस लेते, कभी बड़े आराम से समय लेके स्तनपान करते, कभी अपने हाथ से शालिनी की कमर पर लपेट देते, शालिनी कहीं ना कहीं यह सब पसंद आता था और उसे याद भी आता था, स्तनपान करवाते समय शालिनी अपने स्तन को दबा देती ताकि दुध का बहाव होता रहे, थोड़ी देर बाद जब दोनों स्तनों से दुध खत्म हो गया तब बाबुजी पल्लू हटाकर अपने चेहरे को बाहर लाते हैं, और शालिनी को देख मुस्कराते हैं, शालिनी पल्लू में अपने ब्लाउज के हूक बंध करने लगती हैं और बाबुजी को दूसरे कमरे में जाकर नृत्य के लिए टीवी चालू करने को कहते है, बाबुजी दूसरे कमरे में जाते हैं और शालिनी नृत्य के लिए तैयार होती हैं।
शालिनी दूसरे कमरे में आती है और अपने मोबाइल को टीवी से जोड़कर गाना लगाती हैं, शालिनी भी उस अभिनेत्री की तरह ही नृत्य कर रही थी, एक बार तो शालिनी अभिनेत्री की तरह ही अपने पेट और कमर को एसे हिलाती है मानो पानी की तरंग बह रही थी

एसे ही अलग अलग नृत्य करके शालिनी पसीने से भीगी हुई खड़ी होकर अपनी साँसों और थकान को ठीक करने लगती हैं और बाबुजी की ओर देखकर मुस्कराने लगती हैं।

बाबुजी : यहां आकर बैठ जाओ, और आराम करो
शालिनी : आपको मेरा नृत्य कैसा लगा बाबुजी?
बाबुजी : बहुत ही बढ़िया, तुम्हारा नृत्य असली से भी ज्यादा असली था
शालिनी और बाबुजी थोड़ी देर बाद करते हैं और फिर शालिनी खाना बनाने जाती है बाबुजी भी साथ में मदद करवाने जाते हैं,

शालिनी पानी की मोटर ठीक करने आए आदमियों का भी खाना बनाती है, फिर वो नील को जगाकर उसे अपनी गोद में लेटा कर पल्लू ओढ़कर स्तनपान करवाती हैं और बाबुजी के साथ खाना खाने लगती हैं, बाबुजी खाना खाने के बाद उन आदमियों के लिए खाना लेकर जाते हैं और शालिनी घर के काम करने लगती हैं,
बाबुजी के जाने के समय शालिनी उसे खाना खिलाकर जल्दी आने को कहती है क्योंकि बाबुजी की तबीयत खराब है और धूप भी तेज है कहीं धूप में तबीयत ज्यादा खराब ना हो जाए इसकी चिंता थी, बाबुजी के जाने के बाद शालिनी सब काम निपटाकर पल्लू से पसीना पोछते हुए बेड पर आकर बैठ जाती हैं थोड़ी देर नील से खेलती है पर पेट भरे होने से नील सो जाता है, और तभी एक बचे हुए स्तन मे दुध का दबाव बढ़ जाता हैं जिसे शालिनी को दर्द होता है,

अभी बाबुजी भी नहीं थे इसलिए उसे चाचाजी की याद आती है और उसे कॉल लगाती हैं

फोन पर...
शालिनी : कैसे हो चाचाजी ?
चाचाजी : बढ़िया हूं, मुन्ना कैसा है?
शालिनी : नील अभी सोया है, आप कभी आने वाले हैं?
चाचाजी : मैं भी जल्द से जल्द आने की कोशिश करूंगा, जैसे ही सारी विधि खत्म होगी मैं तुरत आ जाऊँगा, बिरजू है वहां?
शालिनी : नहीं वो गाव में पानी की टंकी की मोटर खराब हो गई थी उसे ठीक करने शहर से लोग आए हैं इसलिये उसके पास गए हैं
चाचाजी : अच्छा,ठीक है, क्या तुम अभी वीडियो कॉल कर सकती हो?इतने दिन से तुम्हारा चेहरा नहीं देखा है ,तुम्हारा चेहरा देखने मिल जाएगा तो आनंद आएगा
शालिनी : आप भी अभी अकेले है?
चाचाजी : हाँ बच्चे सब काम से बाहर गए हैं और महिलाएं सब खाना बना रही हैं, मैं अभी सोसाइटी के बगीचे में बैठा हुआ हूं
शालिनी : ठीक है अभी वीडियो कॉल करती हूं
शालिनी वीडियो कॉल करती हैं ,जैसे ही चाचाजी शालिनी का चेहरा देखते हैं उसके चेहरा चमक उठता है और मन भी आनन्द से भर जाता है, शालिनी को भी अच्छा लग रहा था
चाचाजी : तुम्हारा चेहरा देख लिया, अब जाके सही आनंद मिला,
शालिनी : मुझे भी अच्छा लगा,
दोनों एकदूसरे से हंसी-खुशी से बात कर रहे थे, पर शालिनी का हाथ बारबार दर्द से अपने स्तन पर चला जाता, चाचाजी को भी इससे पता चल जाता है कि शालिनी के स्तन दर्द कर रहे हैं।
चाचाजी : क्या पूरे भरे हुए हैं?
शालिनी : हाँ ,सच कहूँ तो इसकी वज़ह से आपकी याद आती हैं, जब भी दर्द होता है तब आपकी गैरमौजूदगी का एहसास ज्यादा होता है, अगर आप अभी यहां होते तो आपको पूरा पीला देती और इस दर्द को ना सहना पड़ता
चाचाजी : माफ कर दो ,अगली बार से कभी अकेला नहीं छोड़ूंगा, क्या अभी तुम मुझे तुम्हारे अमृत से भरे दोनों कलश दिखा सकती हो?अगर तुम्हें ठीक लगे
शालिनी : मुझे क्या एतराज होगा, अगर आप होते तो आपको पीला देती।
शालिनी एक एक करके अपने ब्लाउज के हूक खोल देती हैं, और अपने दोनों दुध से भरे गुलाबी निप्पल से शोभायमान स्तनों को आजाद करके चाचाजी को दिखा देती हैं ,

चाचाजी के चेहरे पर एक चमक आ जाती हैं उसकी आँखें बड़ी हो जाती हैं, उसकी आँखें ना जाने कितनी ही बार देखे हुए इस सुन्दर दृश्य को देखके मानो पलक झपकाना भूल गई हो, तभी शालिनी अपने स्तन को दबा कर दुध निकालती है

जिसके छींटे मोबाइल की स्क्रीन पर गिरते हैं जिसे देख बाबुजी का मुँह अपने आप खुल जाता है,शालिनी यह देख हसने लगती हैं।
शालिनी : लगता है आपको भूख लगी है?
चाचाजी : हाँ, अब तो तुमने भूख बढ़ा दी, और मेरी तड़प भी,वहां आकर में पूरे दिन इस स्तन का दुध पाउंगा, तुम्हें बिल्कुल भी दर्द नहीं सहना पड़ेगा
शालिनी : में भी यही चाहती हूं, बहुत दर्द होता है
चाचाजी : थोड़े दिन और बस, जैसे ही यहां सब खत्म होगा में पहली सवारी पकडकर उधर आ जाऊँगा
तभी आँगन से दरवाजा खटखटाने की आवाज आती है
शालिनी : लगता है बाबुजी आ गए हैं,में बाद में फोन करूंगी, आप अपना ख्याल रखना और जल्दी से आ जाना
चाचाजी : ठीक हैं, अभी रखता हूं, बाद में बात करेंगे।
शालिनी अपने ब्लाउज के हूक बंध करके बाहर आती हैं।
शालिनी : कौन है?
बाबुजी : बहु मैं हूँ, दरवाजा खोले
शालिनी दरवाजा खोलती है और दोनों घर के अंदर आते हैं, शालिनी बाबुजी को पानी पिलाती है।
शालिनी : मोटर ठीक हुई?
बाबुजी : नहीं, अभी वो सब खाना खाने बैठे हैं और फिर थोड़ा आराम करके फिर ठीक करेंगे, बोल रहे थे 1 घंटे के भीतर हो जाएगा।
शालिनी : अच्छा है, फिर तो पानी की किल्लत नहीं होगी
बाबुजी : आज तुम्हें हुई असुविधा फिर से ना हो इसलिए मेने ठेकेदार दोस्त से बात करके कल मिस्त्री और मजदूर को बुला लिया है, जो हमारे और बलवंत के घर एक पीने के पानी का और एक कामकाज के लिए पानी की टंकी बना देंगे
शालिनी : पर चाचाजी के उधर कुआं तो है
बाबुजी : उधर सिर्फ पीने के पानी की टंकी बनायेगा
शालिनी : उसकी क्या जरूरत है?
बाबुजी : आगे कभी भी एसा कुछ हुआ तो हमको थोड़ी राहत रहेगी।
शालिनी को अच्छा लगा कि बाबुजी उसके बारे मे इतना सोच रहे हैं और उसको आगे कोई तकलीफ ना हो उसका भी ख्याल रख रहे हैं
शालिनी : चलो अभी सो जाते हैं
बाबुजी : हाँ, फिर ना जाने कब वापिस फोन आ जाए और जाना पड़े
दोनों कमरे में आते हैं, और बेड पर लेट जाते हैं
शालिनी : बाबुजी, अभी थोड़ा दर्द हो रहा है क्या आप...?
बाबुजी : हाँ, ठीक है,
बाबुजी थोड़ा नीचे सरक जाते हैं

, शालिनी पल्लू ओढ़कर ब्लाउज के हूक खोलकर स्तन को बाबुजी के सामने परोस देती हैं, शालिनी ने चाचाजी के साथ बात करते समय जब स्तन दबाये थे उसकी वजह से उसके निप्पल से दुध की बूंद टपक रही थी, जैसे ही बाबुजी दुध की बूंद को देखते हैं वो गिरकर व्यर्थ ना हो इसलिए जीभ से तुरत उसे चाट लेते हैं जिससे शालिनी की निप्पल में सिहरन दौड़ जाती है और निप्पल बड़े और कडक होने लगते है,

शालिनी का हाथ अपनेआप बाबुजी के सिर पर चला जाता है और उसे अपने स्तन की ओर धकेल ने लगती हैं, बाबुजी भी मुँह खोलकर निप्पल को मुँह में ले लेते हैं और थोड़ा जोर देते हुए चुस्की लेते हैं, जिससे दुध का प्रवाह तेज धारा बनकर बाबुजी के मुँह में समाने लगती हैं,

शालिनी को मानो सारी खुशी मिल गई हो एसा लग रहा था, बाबुजी के जल्दबाजी में चूसने से कभी कभी आवाज आती, शालिनी को तो बस स्तन खाली होने से मतलब था, वो बस आंखे बंध करके अपने सुख के सागर में गोते खा रही थी, बाबुजी एक एक करके दोनों स्तनों को चूस कर खाली करके शालिनी को दर्द से छुटकारा दिलाते है ,फिर दोनों सो जाते हैं, करीब दो घंटे बाद चाचाजी का फोन बजता है
बाबुजी : हाँ बोलो
आदमी : वो मोटर ठीक हो गई है।
बाबुजी : अच्छा! मैं अभी आता हूं
बाबुजी टंकी पर आते हैं, उधर सब मैकेनिक हाथ मुँह धो रहे थे
बाबुजी : क्या भैया, ठीक हो गई मोटर?
मैकेनिक : हाँ, एकदम फर्स्ट क्लास ,आप चालू करके देख लीजिए ताकि हम शाम होने से पहले शहर पहुच जाए।
बाबुजी मोटर चैक कर लेते है और सब मैकेनिक को धन्यवाद करते हैं और उसे गांव के चौराहे पर अपनी ओर से बढ़िया चाय पानी पिलाते और उसे रवाना करते है, फिर गांव में खबर फैला देते हैं कि 1 घंटे बाद पीने का पानी आएगा वो भी 10 मिनट
बाबुजी शालिनी को भी फोन कर देते है,करीब 1 घंटे बाद पानी आने लगता है, सब गांव वाले बाबुजी का और शालिनी का धन्यवाद करते हैं, बाबुजी घर आते हैं, देखते हैं शालिनी छत पर थी और शाम को डूबते सूरज देख रही थी, उसके बाल हल्की हल्की हवा से लहरा रहे थे ,बाबुजी पिछे आकर खड़े हो जाते हैं,

दोनों आपस में थोड़ी बहुत बातचीत करते है, कुछ समय बाद जब अंधेरा होने लगता है तब वो नीचे आने ही वाले थे कि एक जोर से आवाज आती हैं और बिजली चली जाती है,बाबुजी जब आंगन में आते ही उसका फोन बजता है जिसे उसे पता चलता है कि जो ट्रांसफॉर्मर में कुछ शॉर्ट सर्किट हो गया है, बाबुजी तुरत बिजली विभाग को जानकारी देते हैं पर वो सुबह ही आने को कहते है, बाबूजी भी अपने आदमी को फोन करके कहते है की सब को बता दे कि बिजली सुबह आएगी।
शालिनी : एक चीज़ ठीक हुई कि दूसरी बिगड़ गयी
बाबुजी : गांव में तो एसा ही होता है पर हम तो इसके आदि है पर तुम्हें थोड़ी तकलीफ होगी, पर चिंता मत करना हमारे पास एक और चार्जिंग वाला बल्ब है जिससे खाना बनाने और खाना खाने में दिक्कत नहीं होगी,
बाबुजी नील को लेकर आंगन में आकर बैठ जाते हैं और शालिनी किचन में खाना बनाती हैं, खाना खाने के बाद शालिनी सब काम करके नील को स्तनपान करवाती हैं।
बाबुजी : बहु आज यही आंगन में सो जाते हैं, कमरे में गर्मी लगेगी
शालिनी : ठीक हैं,आप खटिया बिछाए में नील का पालना ले आती हूं
बाबुजी दो खटिया लगाकर उसपर गद्दे डाल देते हैं और दो चादर भी रखते हैं ताकि मच्छर ना काटे, शालिनी नील को पालने में सुला देती हैं और वो बाबुजी को कमरे आने को कहती है।
शालिनी को बाबुजी को बाहर स्तनपान कराने में संकोच हो रहा था,इसलिए वो उसे कमरे में बुलाती है, बाबुजी भी उसके पीछे जाते हैं, शालिनी बेड पर लेट जाती हैं

और बाबुजी उसके पास आके लेट जाते हैं, शालिनी पल्लू डालकर ब्लाउज के हूक खोलने लगती हैं
बाबुजी : क्या अभी गर्मी की वजह से पल्लू हटा सकते है?अगर कोई संकोच हो तो आप रख सकती हो।
शालिनी : सही कहा आपने एसे भी इतनी गर्मी है,पल्लू ढकने से ज्यादा गर्मी होगी वैसे भी अंधेरा है,बाहर भी अंधेरा है पर बाहर थोड़ा डर रहता है
शालिनी अपने ब्लाउज के हूक खोलकर अपने गोल सुडोल दुध से भरे स्तन पर से अपने ब्लाउज का आवरण हटाती है

, बाबुजी अंधेरे में भी सटीकता से निप्पल पर मुँह लगाते हैं, बाबुजी आराम से चूसने लगते है और कब उसका हाथ शालिनी के कमर पर आ गया उसे मालूम नहीं था, शालिनी भी इसे सामन्य व्यवहार मानकर स्तनपान करवाती हैं, कभी अपने हाथ से दबाकर दुध का प्रवाह बढ़ा देती हैं ताकि सारा दुध जल्दी से निकल जाए, करीब 20 मिनट बाद बाबुजी दोनों स्तनों को चूसने के बाद सीधे लेट जाते हैं और अपनी साँसों को सामन्य करते है, शालिनी भी ब्लाउज बंध करके पल्लू से बाबुजी का चेहरा पोछ देती हैं, बाबुजी बाहर आकर खटिया पर लेट जाते हैं और शालिनी आज एक हल्का गाउन पहनती है जिसके कंधे पर सिर्फ डोरी थी, वैसे तो गाउन काफी खुला हुआ था पर शालिनी के स्तन पर तनी हुई निप्पल अपनी जगह बता रही थी

,शालिनी और बाबुजी अपनी-अपनी खटिया पर आके सो जाते हैं, रात में जब शालिनी के स्तन फिर से दुध भर जाते हैं वो बाबुजी को जगाकर कमरे में आने को कहती है, बाबुजी भी जैसे ग्वाले के पीछे भेड़ चलती है वैसे शालिनी के पीछे पीछे चलने लगते है, शालिनी बेड पर आकर बैठ जाती हैं और कंधे से गाउन की डोरी को सरका कर एक स्तन आजाद करती हैं और बाबुजी को स्तनपान करवाने लगती हैं, बारी बारी दोनों स्तन चूस कर बाबुजी शालिनी को राहत दिलाते हैं, फ़िर दोनों जाकर सो जाते हैं।
(बिजली जाने के ठीक पहले रसीला का घर..)
रसीला अपने पति से फोन पर बात कर रही थी, उसका पति आज भी काम के सिलसिले में नहीं आने वाला था, उसका देवर शहर से अभी आया था, सास बहु सब्जी काट रही थी, ससुर सुन्दरलाल खटिया पर बैठे हुए थे तभी एक जोर से आवाज आती हैं, और बिजली चली जाती हैं।
रसीला : अरे...यह कैसी आवाज थी?बिजली भी चली गई, राजू देखकर आ की क्या हुआ है?
सास : इसको भी अभी जाना था, खाना भी नहीं बनाने दिया, खाना खाने के बाद जाती तो क्या जाता इसका?
रसीला : राजू कमरे में से लालटेन जलाकर ले आ ,
राजू लालटेन जलाकर ले आता है और किचन में रख देता है और वो बाहर देखने जाता है कि क्या हुआ ,करीब 15 मिनट बाद वो घर आता है
राजू : वो ट्रांसफॉर्मर में कुछ शॉर्ट सर्किट हो गया है और बोल रहे हैं कल सुबह बिजली विभाग के लोग आयेंगे।
सास : क्या कल सुबह?यानी पूरी रात एसे काटनी पड़ेगी,हम तो कैसे भी करके सह लेगे पर मुन्नी बिचारी ये गर्मी कैसे सहन करेगी,
रसीला : कोई बात नहीं आज आँगन में सो जाएंगे
लालटेन की रोशनी में सारा परिवार खाना खाता है, रसीला अपनी बेटी को स्तनपान करवा देती हैं, और दोनों सास बहु मिलकर सारे काम करके आँगन में खटिया डालकर सोने की तैयारी करती हैं, सब काम करते समय रसीला पसीने से भीग गई थी,

तभी उसका ससुर उसके पास आता है।
सुन्दरलाल : बहु वो मुझे दुध पीना है ताकि अच्छी नींद आए।
रसीला : ठीक हैं बाबुजी चलिए,कमरे में।
दोनों कमरे में आते हैं, रसीला खिड़की के पास आकर बैठ जाती हैं जहां से चांद की हल्की रोशनी आ रही थी, सुन्दरलाल रसीला के गोदी में सिर रख देता है और रसीला आप इस ब्लाउज के बटन खोल देती हैं

और अपने गदराई जवानी के सबसे सुंदर नजराने को आजाद कर देती हैं, दोनों सफेद कबूतर फडफडा कर बाहर आते हैं, उसमे से एक पूरा दुध से भरा हुआ था और दूसरा थोड़ा भरा हुआ था, रसीला पहले पूरा भरा स्तन अपने ससुर को परोसती है ताकि उसको दर्द से राहत मिले, सुन्दरलाल भी अपने बहु के दुग्ध कलश को देखकर उसका पान करने को उतावला हो जाता है, वो सीधा उस भूरी निप्पल को अपने होठों की कैद में जकड़ लेता है और चूसने लगता है

, शालिनी की आंखे बंध हो जाती हैं और उसका हाथ अपने ससुर के बालों में फिरने लगता है, जब सुन्दरलाल पूरा स्तन चूस कर दूसरा अधूरा स्तन पीने लगता है तब राजू खिड़की पर आ जाता है।
राजू : भाभी पूरा बाबुजी को मत पीला देना, मेरे लिए भी बचाकर रखना

रसीला : देवरजी ! तुम अपनी पढ़ाई पर ध्यान दो, बाकी सारा ध्यान में रखेंगी,जब आप पढ़ाई खतम खत्म करके सोने जाएंगे तब मुझे बता देना
राजू मोबाइल में से अपनी पढ़ाई करने लगता है ,करीब 2 घंटे बाद राजू को नींद आने लगती हैं तब वो देखता है, सब लोग सो गए थे, वो धीरे से अपनी भाभी रसीला की खटिया के पास आता है और देखता है, बिखरे हुए बाल, ब्लाउज के ऊपरी बटन खुला हुआ और घाघरा घुटने तक ऊपर उठा हुआ था ,चांद की रोशनी में रसीला खूबसूरत लग रही थी, राजू काफी समय तक खड़े होकर अपनी भाभी के सौंदर्य को निहारता है, फिर वो अपने हाथ को अपनी भाभी के कंधे से झकझोरते हुए जगाता है, रसीला आंख खोलकर देखती हैं कि उसका देवर उसके स्तनों से निकलने वाले दुध को पीने की चाह में खड़ा है, उसे देख रसीला मुस्कराती है और खटिया पर बैठ कर अपने बाल सही से बांधती है

और अपने कपड़े ठीक करती हैं, और इशारा कर के राजू को कमरे में आने का इशारा करती हैं राजू कमरे में आता है और रसीला भी अपना मुँह धोकर आती हैं, राजू कमरे में अपने मोबाइल की टॉर्च चालू कर्ता है ताकि रसीला कहीं टकरा ना जाए और कोई आवाज से जगे नहीं, रसीला जहा अपने ससुर को दुध पिलाने बैठी थी उधर ही है बैठ जाती हैं और राजू भी उसकी गोद में सिर रख कर लेट जाता है।
रसीला एक एक करके ब्लाउज के बटन खोल देती हैं जैसे ही ब्लाउज खोलती है उसके दुध से भरे स्तन किसी बंध कमरे में कैद आदमी को जब बाहर निकाले तब उसे जैसी खुशी होगी वैसी खुशी से उछल पड़ते हैं, ब्लाउज में कैद होने से स्तनों के निचले हिस्से मे पसीना हो गया था पर उसपर जब ठंडी हवा का झोंका लगा तब मानो मुरझाए हुए फूल पर किसी ने पानी छिड़क दिया हो,
रसीला : अभी देखने से मन भर गया हो तो टॉर्च बंध कर दो और पीकर पेट भर लो।
राजू : क्या करूँ भाभी? हर बार नए ही लगते है।
रसीला : ना जाने क्या माया है इन औरतों के थनों में? हर एक मर्द चाहे किसी भी उम्र का हो,इसके पीछे पागल है
राजू : वो तो पता नहीं पर जब भी आपके स्तन देखता हूं तब मन खुश हो जाता है
रसीला : ठीक हैं अब जल्दी से पीने लगों ,फिर सोना भी है,
राजू रसीला की गोदी में आके लेट जाता है और स्तनों को चूसने लगता है

राजू के चूसने से रसीला की आंखे बंध हो जाती हैं और हाथ सिर पर आ जाता है, राजू भी कभी निप्पल को जीभ से सहलाता और कभी निप्पल दांत से हल्की दबा देता, जिससे रसीला की सिसकारी निकलने लगती, एक स्तन चूसने के बाद राजू खड़ा हो जाता है।
राजू : भाभी ! अब मैं बिस्तर पर लेटकर आराम से पीना चाहता हूं
रसीला : ठीक हैं
दोनों बिस्तर पर आकर लेट जाते हैं
राजू : अब मैं अपनी ईच्छा से पाउंगा
रसीला : ठीक हैं पर थोड़ा जल्दी
राजू अब अपनी भाभी के पास लेट जाता है

और जो भरा हुआ स्तन था उसे चूसने लगता है और दूसरा खाली स्तन पर अपना हाथ रखकर सहलाने लगता है, रसीला को इससे आपत्ति नहीं थी, क्योंकि वो जानती थी कि एक जवान मर्द के लिए यह समान्य बात है, और काफी दिनों से उसके पति से भी वो शारीरिक रूप से दूर थी, राजू कभी जोर जोर से चूसने लगता और स्तन को दबा देता, रसीला बस आंखे बंध करके इस सब चीज़ का आनंद ले रही थी, जोर जोर से चूसने से स्तन जल्द खाली हो जाता है
रसीला : देवरजी स्तन खाली हो गया
राजू : भाभी पर मन अभी नहीं भरा, थोड़ी देर और आपके स्तनों से खेलना है
रसीला : मुझे नींद आ रही है।
राजू : मुझे पता है पर मैं यह भी जानता हूं कि आपको आनंद मिला है मेरे चूसने से, वैसे भी मेरा हक्क है आपके स्तनों पर
रसीला : हाँ पर तब जब यह भरे हुए हो
राजू : वो हक तो मुझे अन्न प्रासन के बाद मिला पर उससे पहले भी मेरा कुछ हक थे ,वो हक मुझे अभी चाहिए।
रसीला : (मुस्कराते हुए..)ऐसा कौनसा हक है आपका ?
राजू : एक देवर का भाभी पर।
रसीला : देवर के कौन से हक आपको नहीं मिले?
राजू : जैसे कहते है ना कि " साली आधी घरवाली " वैसे" देवर यानी द्वि-वर " मतलब दूसरा वर
रसीला : अपनी कहावत मत बनाओ,
राजू : वो जो भी हो, पहले भी आप जब भैया बाहर जाते तब आप मुझे अपने पास सुलाती थी
रसीला : हाँ तो सुलाने से कभी मना किया? यहां तक अब तो दुध पिलाती हूं।
राजू : प्लीज भाभी! मेरी प्यारी भाभी! अगर आपको अच्छा ना लगे तो मुझे रोक देना, मैं आपको जाने दूंगा
रसीला : ओह मेरे भोले देवर, मुझे अच्छा लगा था जब तुम दबा कर दुध पी रहे थे, मेरी भी शारीरिक जरूरत है, पर तुम्हारे भैया बाहर रहते हैं, अपनी जरूरत पूरी करने बाहर मुँह मरने से अच्छा है घर में व्यवस्था हो तो उसका लाभ लिया जाए, मुझे कोई दिक्कत नहीं है पर अपनी मर्यादा में, ठीक है?
राजू : ठीक हैं भाभी, जैसा आप कहें।
राजू रसीला के स्तनों पर अपने चेहरे को दबाने लगता है ,कभी स्तनों के बीच चेहरे को दबाता,राजू एक स्तन को अपने मुँह में लेकर चूसने लगता है

और दूसरे स्तन को पंजा फैलाकर दबाने लगता है, दबाते दबाते अपनी दो उंगली से निप्पल को दबा देता, जिसे रसीला की सिसकारी निकल जाती, कुछ देर एसे ही स्तन चूसने के बाद वो रसीला को ब्लाउज पहनने को कहता है, रसीला को लगा राजू का मन भर गया, पर हकीकत में राजू के मन में दूसरे विचार चल रहे थे, बिस्तर पर बैठे बैठे जब रसीला ने अपने ब्लाउज को पहन लिया तब राजू उसके पीछे आ जाता है

और ब्लाउज के ऊपर से ही अपनी भाभी के स्तन दबाने लगता है, कभी वो अपने हाथ को रसीला के गर्दन, स्तनों के उभार और बालों में फिरता है।
रसीला : आह...राजू !क्या कर रहे हों?चलो अब सोने जाना हैं
रसीला के आवाज में मनाई कम और जानने की उत्सुकता ज्यादा थी कि क्या करने वाला है? यह बात राजू भी जानता था
राजू : बस भाभी आप भरोसा करे, आपको खुशी मिलेगी
रसीला बस सिसकारी ले रही थी, राजू जीभ से अपनी भाभी की पसीने वाली गर्दन को चाटने लगता है और कभी अपने दांतों से कान को हल्के से काट लेता, गर्दन को चूम कर थूक से गिला कर देता है और रसीला के सामने आ जाता है और उसे लेटा देता है, अब उसके सामने अपनी गदराई भाभी का गहरी नाभि वाला पेट था वो उसपर अपने चुंबनों की बारिश करके अपनी लार से भिगो देता है और नाभि को थूक से भर देता है

, राजू थोड़ा ऊपर आकर अपनी भाभी के ब्लाउज को खोलने लगता है, यह पहली बार था कि राजू अपने हाथों से अपनी भाभी का ब्लाउज खोल रहा था, जिससे दोनों की धड़कन तेज हो गई थी, जैसे ही ब्लाउज खुलता है और स्तनों को आजाद कर्ता है तुरत अपने दोनों हाथों से स्तनों पर हमला कर उसे दबाने लगता है, रसीला भी अपने हाथ पिछे टिकाकर जानबूझकर अपने छाती को ऊपर उठाती हैं, राजू फिर से स्तनों को अपने मुँह में लेकर चूसने लगता है और जीभ से निप्पल से खेलने लगता है
रसीला : आह ..करते रहो, मजा आ रहा है, आह..,चूस डालो, ज्यादा मुँह में लेकर चूसो,
राजू अपने मुँह को पूरा खोलकर ज्यादा से ज्यादा स्तन अपने मुँह में भरने लगता है, और कभी कभार हल्का काट लेता।
रसीला : काट मत..चाहे उतना चूस, जब भी मन करे तब चूसने आ जाना, आज से दाया स्तन पर देवर का अधिकार और बाये पर बाउजी का अधिकार,इससे तुमको कोई दिक्कत नहीं रहेगी,
राजू स्तन चूस कर फिर से अपनी भाभी की नंगी कमर पर आ जाता है और उसे चाटने लगता है फिर दोनों हाथों को कमर पर रखकर नाभि पर चुंबन की वर्षा करने लगता है, रसीला भी उसका चेहरा अपनी नाभि पर दबाने लगती है रसीला को काफी आनंद आ रहा था,
रसीला : आह ..राजू चाटते रहो चूमता रहो,मजा आ रहा है,
राजू को जब लगता है कि उसकी भाभी कामुक हो गई है तब वो उसके घाघरा को उठाने लगता है, जब उसने जांघों तक उठा दिया तब रसीला अचानक से होश में आकर उसे रोक देती हैं
रसीला : अभी नहीं राजू, फिर कभी, अभी ऊपर करो, नीचे अभी नहीं,

राजू : करने दो ना भाभी, वादा कर्ता हूं आपको मजा आएगा
रसीला : नहीं!..अभी रुक जाओ, अभी मैं खुद से कर लुंगी, तुम बस जो मिल रहा है उसपर ध्यान दो, मैं बाद में तुम्हें सब सिखा दूंगी कैसे करना है, ताकि शादी के बाद तुम्हें काम आए,
राजू : बाद में कभी?
रसीला : सोचकर...)जब तुम परीक्षा में अच्छे अंक लाकर दिखाओ तब तुम्हें नीचे की चीज़ देखने और छुने का अवसर मिलेगा, अभी तुम अपनी पढ़ाई पर ध्यान दो, दूसरी बातों पर ज्यादा ध्यान मत देना,
राजू : ठीक हैं भाभी! अब तो आपने पढ़ाई करने का एक अच्छा बहाना दिया है, मैं अच्छे से अच्छी पढ़ाई करूंगा और अच्छे नंबर लेकर दिखाऊंगा
रसीला : यह हुई ना बात, तुम अभी सिर्फ चूस मेरे स्तन को
राजू अपनी भाभी के स्तनों को चूसने लगता है और दबाने लगता है, रसीला भी अब कामुक होने लगती हैं वो अपने हाथ को घाघरा में डालकर अपनी योनि को सहलाने लगती हैं, योनि के सहलाने से जब उसकी कामुकता बढ़ने लगी तब वो राजू के सिर को ज्यादा अपने स्तनों पर दबती और उसे चूसने के लिए उकसाती, अब रसीला की कामुकता इतनी बढ़ गई थी कि अब वो काटने पर भी राजू को नहीं रोकती थी ब्लकि अपने स्तनों पर थप्पड़ मारने को कहती है, राजू भी दायें बाये, ऊपर नीचे, सभी और से थप्पड़ बरसाने लगता है जिसे रसीला का स्तन लाल हो जाता है, रसीला को इस दर्द में मजा आ रहा था जो उसे उत्तेजित कर्ता था, रसीला भी अपनी योनि में अपनी उंगली की रफ्तार बढ़ा देती हैं, जिसे कुछ ही मिनटों में उसका शरीर अकड़ने लगता है उसके निप्पल बड़े हो कर तन जाती है उसकी सांसे भी तेज होने लगती हैं, और वो अपने देवर का चेहरा अपने स्तनों में दबाने लगती हैं, कुछ पल के लिए उसके नितंबों वाला हिस्सा ऊपर उठ जाता है और जब रसीला अपने चरम सीमा पर पहुच जाती हैं तब उसकी योनि से कामरस की बाढ़ आ जाती हैं और उसके नितंब धड़ाम से नीचे आते हैं और वो निढाल होकर बेसुध सी लेट जाती हैं, राजू ने पहली बार अपनी भाभी को एसे देखा था या कहो पहली बार उसने किसी औरत को चरम सुख मिलते देखा,अपनी भाभी की एसी हालत देख उसे थोड़ा डर भी लगा था, उसे लगा उसकी भाभी को कुछ हो तो नहीं गया?वो हल्के हल्के थप्पड़ मारकर रसीला को होश में लाता है रसीला उससे पानी मांगती है, फिर पानी पीकर राजू को देखकर एक कामुक सी कातिल हंसी देती हैं, पसीने से भीगी और चरम सुख भोगकर बैठी अपनी भाभी को राजू देखता ही रहता है

, यह पल वो कभी भुलाना नहीं चाहेगा, रसीला अपने ब्लाउज को पहनकर अपने निचले होंठ को दबाते हुए कामुक हस देती हैं।

रसीला : देवरजी ! अब सोने चले,?काफी समय हो गया है, फिर पढ़ाई में अच्छे से ध्यान देना, इसके बारे मे ज्यादा मत सोचना
राजू: अब तो पढ़ाई और अच्छे से होगी ,क्योंकि अब मुझे एक उद्देश्य भी मिल गया है, बस आप अपना वादा भूल मत जाना
रसीला : हस्ते हुए...)नहीं भूलेंगे, पहले परीक्षा अच्छी दो, बाकी सब बाद में
दोनों आकर अपनी-अपनी जगह सो जाते हैं और पूरा गांव एक खामोश रात की आगोश में सोया हुआ था....