भाग -8
मोबाइल की रिंग टोन से मेरी नींद खुली, अालसी हाव भाव के साथ उठी देखा की मां का कॉल था
मां - अरे अंजू कहां रह गई तू, कब से कॉल कर रही हूं 9 बजने को है और बारिश भी थम गयी है पर तू अभी तक घर नहीं पुहंची
मां ने शिकायत भरे लब्जो में कहा
मैं - हां मां, आ रही हूं बस थोडी देर में
मां- ठीक है लेकिन जल्दी आ
मैं - अच्छा अब, फोन रखो आती हूँ
और मैंने कॉल काट दिया, घडी देखा तो सच में 9 बजने वाले है
मेरी बातें सुन कर मेहता सर की भी, नींद खुल गई
मेरा पूरा बदन पूरा दुख रहा था रात की चुदाई के बाद
सर- किसका कॉल था
मैं -मॉम का ,और सर मुझको घर छोड़ देंगे न
सर- क्या तुम कॉलेज नहीं जाओगी आज
मैं - सर, नहीं मेरा अंग अंग दुख रहा है
सर- कौन सा अंग में दर्द है, आओ तेरा दर्द मिटा देता हूँ
और एैसा बोलकर सर ने मुझे पीछे से अपने बाहों में खींच लिया
चूकि हमदोनो अभी भी बिस्तर में ही थे और बिना कपडों के
फिर से सर ने मेरी गोलाईयों को नापने लगे
मैं आजाद होना चाहती थी पर सर ने मुझे अपनी बलिष्ठ भुजाओं में कैद रखा है
सर तबाड तोड चुम्बनों की झड़ी लगा दी
मैं -सर छोडिए, मुझे क्या कर रहे हो
सर मेरी चूची दबाते हुये किस करते रहे
सर जी का लंड पूरा खड़ा हो गया था
मैं - अभी नहीं, प्लीज..... प्लीज सर बाद में
सर- पर सुबह का नास्ता बाकी है
सर ने डबल मिंनिग में ये बोला
मैं -ठीक है, नास्ता कराती हूं
सर ने मुझे थोडा ढीला कर दिया, मैनें भी सर को हल्के से धक्का दिया और उसके कैद से निकल कर मुस्कुराहते हुए बिस्तर से उठने लगी
सर भी बिस्तर पर 1 तरफ लुडक गये और हंसने लगे
मैनें शरीर पर 1 सफेद चादर ओढ़े हुए उठ गई

मेहता सर का लंड अब भी टाईट था मुझे लंड को देखकर सर पर तरस आ रहा था और हंसी भी,
मैं सीधे बाथरूम में गई फिर फ्रेस हो कर किचन में कॉफी बनाया
तब तक सर जी भी तैयार होने लगे क्योंकि देर हो रही थी घर के लिए
फिर साथ में कॉफी पिया
सर ने एक कार मेकेनिक को कॉल कर बुला लिया था,
बाहर वे कार को ठीक कराने लगे, वैसे कार में कोई खराबी नहीं हुई थी पर मुझे दिखाने के लिए ही मेकेनिक को बुला लिया था, क्योंकि रात में सर ने कहा था कि कार खराब है
मैं अंदर कमरे में तैयार होने लगी,
तैयार हो कर मैं बाहर आई तो सर अंदर चले गए
मैं बाहर के सोफे में बैठ गयी, बैठते समय ही मेरा अांचल सरक गया, डीपकट ब्लाउज के कारण मेरे सीने के उभार साफ साफ दिखने लगा
मैं ने गौर किया मेकेनिक का ध्यान काम से हट कर मेरे सीने में उसका ज्यादा ध्यान था
उसकी नजरे बता रही है कि वो मेरे बदन के हरेक अंगो को अपनी ऑखों की कैमरे से सारा माप उतार रहा था
मेरी गोरी बाहें, पतली चिकनी कमर और गहरी नाभी देखकर तो मेकेनिक की हालत पतली हो गई
उसके लंड की अकड़न उसके पैंट पर नजर आ रहा थी
गले के हलक में थूक अटक गयी थी जैसे उसकी
अगर सर जी नहीं रहते तो लगता है मेकेनिक मुझे दबोज कर लंड मेरे बूर में पेल ही देता ,क्यों कि
मैं बहुत ही सेक्सी लग रही थी
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कुछ देर में सर तैयार हो कर बाहर आये
सर- तो गाडी पूरी तरह से ठीक हो गया न
मेकेनिक - हां,, साहब सब टाईट कर दिया अब पूरी तरह से ठीक हो गया है
सर- हम्म, कितना पैसा हुआ तुम्हारा
मेकेनिक - 1000 रूपया हो गया साहब
सर- इतना ज्यादा
मेकेनिक - घर आने का चार्ज तो लगेगा साहब
सर- ठीक है ठीक है ये लो
सर ने उसे पैसा दिया और फिर कार स्टार्ट किया
मैं कार में बैठ गयी, और हमलोग निकल गये मेरे घर की ओर
आधे घंटे में हम लोग पुहंच गए
मैं रास्ते से ही मां को कॉल कर दिया
मां ने गेट खोला
सर- प्रणाम मां जी
मां- नमस्ते, बाबू काफी देर कर दी
सर- हां वो कार खराब थी तो मेकेनिक को बुला कर ठीक करवाया, इस वजह से लेट हो गया
मां- वो, कोई बात नहीं, थोड़ी चिंता हो गई थी
वैसे अंजू की वजह से आपको बहुत परेशानी उठानी पडी
सर- नहीं नहीं वैसी बात नहीं है, क्या कर सकते हैं मौसम के आगे
मां- जी, बाबू
मैं किचन में जाकर नास्ता बनाने लग गयी
मैं नास्ता लेकर हॉल में पुहंची सब ने मिल कर नास्ता किया फिर
सर- अच्छा मैं चलता हूं मां जी
मां- तू नहीं जायेगी अंजू
मैं -नहीं मां ,मैं हो सके तो दोपहर के बाद या फिर कल ही जाऊगी
मां- क्यों
अब मैं कैसे मां को बताती की कल रात की चुदाई के कारण मेरा बदन दर्द कर रहा है
मैं चुपचाप कमरे में चेंज करने चली गई
सर- ठीक है अंजू तुम बाद में ही आना
मैं (कमरे के अंदर से ही) -हां सर जी, रूकिये चेंज कर रही हूं बाहर आती हूँ तब चले जाना
सर ने कपड़े चेंज की बात सुनकर नजरें धीरे से मेरे कमरे की ओर कर दी पर दरवाजा बंद था
मैं कपड़े बदलने के बाद सर को बाहर छोडने निकली
मां अंदर चली गई थी

जाने से पहले सर ने मौका देख कर सीधे मेरे चूची दबाते हुये क्योंकि मां अपने कमरे में चली गई थी
मैं -सर कोई देख लेगा
सर- देखने दो
मैं - सर जी जाईये देर हो जाएगा
उसके बाद सर चले गए
मैं कमरे में जाकर लेट कर रात की घटना के बारे में याद करने लगी
To be continued......