भाग -6
मैं अपने कमरे में लेटकर सोचने लगी की अब इतिहास का लेक्चर क्लास मैं कहां से शुरू करूंगी

मेरे पास तो किताबें भी नहीं है और सर को मैं जुबान दे चुकी थी
मैने सोच लिया की कल मैं पुस्तक बाजार जाकर इतिहास के सारी किताबें ले लूंगी
वैसे भी कल कॉलेज बंद है
पर याद आया की सिलेबस तो सर ने दिया नहीं
मैनें मेहता सर को कॉल किया
मैं -हलो सर, वो सिलेबस नहीं दिया आपने
मेहता जी - मैं तो भूल गया सोमवार को दे दूंगा
मैं -जी सर
मेहता सर - बुक है न
मैं -नहीं है ,पर कल ले लूंगी
मेहता- हम्म... ओ. के
मेहता सर ने कहा ठीक है कल मुझे भी 1 बुक लेनी है तो साथ में चले कल
मैं - कोई दिक्कत नहीं है सर, मिलती हूं कल बॉय बॉय सर
सर-बॉय
सुबह 11 बजे सर ने कॉल कर कहा आ रहा हूँ तो मेहता सर के आने के पहले मैं तैयार हो कर इंतजार करने लगी
मां को बता दिया कि मुझे देर हो तो खाना खा लेना
कुछ देर में मेहता सर बाईक से आये
ये देखकर थोड़ा हैरान हुई की कैसे मैं सर के साथ इस बाईक पर बैठे क्योंकि वो बाईक की सीट ज्यादा बड़ी नहीं है
सर -चलो अंजू
आज मैं बहुत ही खूबसूरत साडी पहनी थी और मैं 1दम आर्कषक लग रही थी
मुझे देखते ही मेहता सर के मुँह खुले की खुले रह गये

मैं -सर मुँह बंद कर लिजिए, नहीं तो मक्खी घुस जायेगा और हंस दी
सर झेंप गये फिर गाडी स्टार्ट की और हमलोग निकल गये
रास्ते में बहुत देर तक आपस में बाते नहीं हुई
क्योंकि मुझे अजीब फील हो रहा था
सर जानबूझ कर लम्बा रास्ता लिया ताकी मेरे बूब्स का मजा ले सके जो बार बार उनके पीठ पा लग रही थी
सर -अंजू तुम आज बहुत खूबसूरत लग रही हो
मैं -थैंक्स सर, और बाकी दिन
सर-वो तो तुम हो ही
मैं -आप भी बहुत हैंडसम हैं
मेहता- शुक्रिया मैडम जी
मैं - मुझे मैडम मत बोलिए सर
मेहता- क्यों क्या बुराई है
मैं - जी सर मैं उम्र में आपसे बहुत छोटी हूँ न इसलिए
मेहता सर -अच्छा ठीक है
हम 1मॉल में गये वहां हमे चौथे मंजिल पर जाना था सो लिफ्ट ले लिया
लिफ्ट में बहुत ज्यादा भीड़ के कारण
मेहता सर और मैं एकदम चिपक से गए
खैर कुछ देर में हम पुहंच गए
सारी किताबें खरीदने के बाद हम मॉल से बाहर आ गये
मैं - अब हमें वापस चलना चाहिए
सर -हां
अभी कुछ देर चले थे कि मौसम ने करवट बदला और बहुत जोरदार बारिश होने लगी
हम एैसे जगह पर रूके आस पास कोई बचने की जगह नहीं थी
हमारे पास न तो रेनकोट न छाता था बस पेड़ की ओट में हमदोनो बारिश से बचने की नाकाम कोशिश में थे
2 घंटे बीत चूका पर बारिश और तेज हो गई
मैं तो पूरी तरह से भींग गई पूरे अंदर तक
मेरे बदन पूरा पारदर्शी हो गया मेरा अंग अंग प्रदर्शन हो रहा था पानी की बूंदे मेरे कोमल गोरे गदराये बदन से चूने लगे

अंधेरा हो चुका था, यहां से सर का मकान कुछ दूरी पर ही था
सर - ये बारिश नहीं रूकेगी किसी तरह हमे यहां से चलना चाहिए
मैं -जी
भींगते हुए हमलोग मेहता सर के घर आ गये
मेहता सर - अंजू आज की रात तुम यहीं रूक जाओ
मैं -नहीं सर, मां अकेली है कार से ड्रॉप कर सकते हैं क्या
सर- वो गाडी तो खराब है, इसलिए तो मैं आज बाईक लिया
मैं क्या करू समझ में नहीं आ रहा था, बारिश रूकने का कोई आसार नहीं लग रहा था
पर शायद सर ने गाडी के बारे में झूठ बोले थे वे किसी तरह चाहते थे की मैं रूक जाउ
सर ने कहा मैं तुम्हारी मां को कॉल कर देता हूँ
मैं -ठीक है, अब कोई रास्ता नहीं है वापस जाने का
मेहता सर अकेले रहने की वजह से छोटा ही मकान ले रखा था जिसमें 1बेडरूम का कमरा, किचन और बाथरूम था
सर - अलमारी से कपड़े लेकर बदल लो नहीं तो सर्दी लग जायेगी
मैं हां बोलकर कमरे में गई
सर ने कहा वैसे तो बीबी के गुजर जाने के बाद आज पहली बार मेरे यहां कोई गेस्ट आया है
मैं कमरे में जाकर अलमारी खोली तो केवल transparent nighty और दो तीन साडियां ही थी
मेरी तो ब्रा पेंटी सब भींग गए हैं लगता है मुझे बिना अंडरग्रामेन्ट के आज रहना होगा
कमरे के दरवाजे में कुंडी नहीं थी पर क्या करती एैसे ही बंद कर दिया और चेंज करने लगी अभी भी दरवाजा सही से बंद नहीं हुई और गेप रह गया
सर दरवाजे के पीछे से मेरी क्रिया कलाप को देखने की कोशिश में थे

अभी मैं पूरी तरह से कपड़े बदल भी नहीं पाई थी की, अचानक हवा का 1 तेज झोंका आया कि दरवाजा खुल गया और मैं मेहता सर के एकदम सामने इस अवस्था में...
मैं उस समय केवल एक पेटीकोट में थी और कमर से उपर कुछ भी नहीं
मेहता सर के मुँह से एकदम से आवाज निकली Ohh... My god what a beautiful sexy
सर 1 तावेल में थे पर तावेल खुलकर नीचे गिर गया
हमदोनो ने नहीं सोचा था कि एैसा कुछ हो जाएगा

मैं शर्म से लाल हो गई,और थोड़ा सहम गई
मैंने धीरे से दरवाजा बंद कर दियाऔर मैं अब कपड़े बदल चुकी थी
सर ने भी अपने आप को संम्भाला
To be continued......