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चांदनी हवेली पहुंच।गई है और संध्या के।साथ मुलाकात से साफ लग रहा है कि संध्या और चांदनी बहुत पहले से एक दूसरे को जानते।है
संध्या तभी शुरू से जानती है कि अभय ही असली।अभय।है
रमन अपनी आदत के अनुसार चांदनी से फ्लर्ट करने की कोशिश में था लेकिन संध्या के कारण कामयाब नही हो पाया
शनाया भी हवेली पहुंच गई है
उधर राज खंडहर से रहस्य को जानने के लिए लगा हुआ है और राजू ने कुछ कुछ पता लगा भी लिया है
अभय ने शॉर्ट में राज को कुछ बाते बताई है अपने भागने की लेकिनराज जब तक उसकी गलतफहमी दूर करता अभय जा चुका था
लेकिन अभय ने उसे बगीचे वाले दिन का तो बता दिया लेकिन भागा वो रात को था और उस रात भी उसने दोनो को साथ देखा था
लेकिन आपने।बहुत अच्छे बगीचे वाले रायते को समेट दिया है जिसके कारण पुरानी कहानी में विवाद शुरू हुआ था
राज के कबूल नामे और कुछ चेंज से कहानी में नया ट्विस्ट आ गया की उस दिन।बगीचे सरपंचनी थी naki ठकुराइन