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Erotica साइको कविता (psycho Kavita)

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vakharia

ℜ𝔬𝔪 𝔅𝔞𝔯𝔬
Supreme
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काफी समय से आपकी कहानी एपिसोड दर एपिसोड पढ़ रहा था पर प्रतिक्रिया तब देना चाहता था जब कहानी एक मुकम्मल पड़ाव पर हो..

बहुत समय बाद कोई ऐसी कहानी मिली है जो सीधे दिमाग पर असर करती है। यह कहानी अपने प्लॉट या ट्विस्ट से आगे निकलकर आपके रचनात्मक दिमाग का परिचय देती है, जिसने इसे गढ़ा है।

कहानी में आपने एक बेहद निर्मम और पारदर्शी दुनिया रची है। कविता के किरदार को आपने पागल की जगह एक टूटा हुआ इंसान बनाया है और यही कहानी को अलग स्तर पर ले जाता है। किसी कैरेक्टर को साइको दिखाना आसान काम है। उससे अजीब हरकतें करवा लो या बिना बात चीखने-चिल्लाने दो। पर आपने कविता को एक इतिहास, एक बचपन और एक गहरा दर्द दिया है। जब वह सालों बाद वीरू के सीने पर सिर रखकर सोती है, तो उस पल में एक इंसान की पूरी ज़िंदगी की थकान नज़र आती है। वह सुकून और नींद बिना किसी मेलोड्रामा के बहुत कुछ कह जाती है।

वीरू एक जिगोलो, जुआरी और चोर है। पर स्टीरियोटाइप जरा भी नहीं लगता। कविता की आवाज़ सुनते ही उसका दिल पर हाथ रख लेना.. औरतों को अपना जिस्म बेचने वाले इस आदमी के अंदर भी कहीं कुछ कच्चा और मासूम बचा हुआ है। वह किसी की आवाज़ पर ठिठक जाता है। इस विरोधाभास को बिना किसी स्पष्टीकरण के छोड़ देना ही इस किरदार की असली ताकत है।

वह दृश्य जहाँ कविता अपनी योनि को नई दोस्त कहकर वीरू से मिलवाती है, वह मुझे बेहद असरदार लगा। यहाँ सेक्स शारीरिक जरूरत से आगे बढ़कर एक बच्ची का खेल बन गया है, जो प्यार पाने और किसी को अपने करीब बांधने की एक हताश कोशिश कर रही है। इस दृश्य में जो हवस खोजेगा, वह एक सतही पाठक ही हो सकता है। असल में वह एक ऐसी लड़की है जो प्यार को कैद करना जानती है पर उसे पनपने देना नहीं जानती। वह वीरू को जितना बांधती है, खुद भी उसी कैद में घुटती है।

रूपा का किरदार भी शानदार ग्रे शेड में लिखा है। वह पूरी तरह खलनायिका या मददगार के खांचे में फिट नहीं होती। वह एक औरत से प्यार भी करती है, चिढ़ती भी है और बचाती भी है। कविता के साथ लेस्बियन दृश्य और उसके बाद वीरू को कविता के शरीर के बारे में बताने वाले हिस्से में एक अजीब से विकृत मातृत्व की छाया नजर आती है। जैसे कोई माँ अपनी बेटी को सुहागरात के लिए तैयार कर रही हो। आपने रूपा को एक साधारण साइड कैरेक्टर से कहीं ऊपर उठा दिया है।

कहानी का सबसे व्यक्तिगत और झकझोरने वाला हिस्सा कविता का रोना है। एनल सेक्स के बाद जब वह टूटकर फर्श पर गिरती है, तो आपने उस दर्द को केवल लिखकर खत्म नहीं किया। आप उसकी हिचकी, कफ, सिसकियों और दीवार का सहारा लेने तक की बारीकियों में गए। किरदारों का दर्द कहानी का अस्त्र होने के बजाय उनका स्वाभाविक हिस्सा बन गया।

कुछ जगहों पर कहानी एक लूप में फंसती दिखती है। वीरू का बंधना, कविता का उसे छेड़ना और फिर से बंधना, यह पैटर्न बीच-बीच में अपनी ताजगी खो देता है। हो सकता है यह जानबूझकर किया गया हो क्योंकि कविता खुद भी एक ही पैटर्न में जी रही है जहाँ प्यार की तड़प, डर और फिर वही कोशिश बार-बार होती है। लेकिन एक पाठक के तौर पर कभी-कभी मन करता है कि यह चक्र टूटे।

कविता का एक मशहूर RJ होना और उस आवाज़ को कभी सीधे न सुनाना आपकी एक बहुत स्मार्ट चाल है। असल में कहानी उस आवाज़ की है ही नहीं, कहानी उस इंसान की है जिसे कभी सुना ही नहीं गया।

आपने सेक्स को हथियार, भाषा, बहाना और दवा सब कुछ बना दिया है। कविता के लिए यह प्यार पाने की ज़िद है, वीरू के लिए पैसा और रूपा के लिए नियंत्रण। सबसे अच्छी बात यह है कि आप इन तीनों को कोई नैतिक चश्मा पहनाकर जज नहीं करते, आप बस उनकी ज़रूरतें बेपर्दा करते हैं।

यह कहानी अपनी अस्थिरता में बेहद स्थिर है। कविता जितनी विक्षिप्त है, उतनी ही समझदार भी है। उसे प्यार करना मुश्किल है पर उससे नफरत करना नामुमकिन है। लिखते रहिए। यह कहानी जितनी खुरदरी है उतनी ही जीवंत भी है। यह ज़ेहन में अटकने वाली कहानी है।

ऐसे ही लिखते रहिए..

सस्नेह सविनय..

वखारिया
 

Raj_sharma

यतो धर्मस्ततो जयः ||❣️
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कोई मेरी बात को समझता ही नहीं है, में जा रहा हूं वापसी 😏
Samajhne ki jarurat tumko hai dost, tum kisi ka disrespect nahi kar sakte :madno: Wo bhi agar Thread owner hai to bilkul nahi.
kewal apni raay, ya Review de sakte ho, but kisi ko abuse karne ka tumko adhikaar nahi hai :nope:
 
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Raj_sharma

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Samajhne ki jarurat tumko hai dost, tum kisi ka disrespect nahi kar sakte :madno: Wo bhi agar Thread owner hai to bilkul nahi.
kewal apni raay, ya Review de sakte ho, but kisi ko abuse karne ka tumko adhikaar nahi hai :nope:
तुम दूसरी दिशा में जा रहे हो मेरे दोस्त, में तो यह पूछ रहा था कि ये शैतान जो हैं ये कोई नया है या वो पुराने वाले हमारी शैतान भाभी है?
और तुम भी शायद नए हो, में एक पुराने राज शर्मा को जनता था।
तुम जो गाली की बात कर रहे हो ना, उसके बारे में तो में कुछ कह ही नहीं रहा हूं क्योंकि वो इसी लायक है।
 
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Carry0

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Sahi baat hai. Incest se aachi to erotic n comedy ho to kia hi baat hoti hai. Warna Maa Behan karate raho jis se samaj per bhi negative impact pade hai.
ऐसी बात नहीं है भाई, में भी अच्छी कहानी लिख सकता हूं, में लिखता भी हूं, दूसरे प्लेटफॉर्म्स पर, वहां पर में रोज के 200-300 रूपए कमा लेता हूं, अपनी कहानियों से. वैसी कहानी अगर में यहां लिखूंगा तो पढ़ने वाला ही कोई नहीं होगा 😁, क्योंकि वो एक दम शुद्ध कहानियां हैं और दूसरी बात वहां पर में लिखता हूं तो पैसे मिलते हैं।

हां यह बात में मानता हूं कि मुझे लिखना कम आता है और इतना अच्छा भी में नहीं लिख पाता हूं।


बुरा मत मान जाना मेरे दोस्त
लेकिन जो आप कह रहे हो कि भाई बहन पर लिखना आसान है, तो एक बार मेरी कहानी पूरी होने दो फिर में तुमसे पूछूंगा की ये जो में लिखा हूं , वो लिखना आसान है या मुश्किल।
 

Shetan

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Sahi baat hai. Incest se aachi to erotic n comedy ho to kia hi baat hoti hai. Warna Maa Behan karate raho jis se samaj per bhi negative impact pade hai.
Aapne Problem ki nabz pakad li,. aur Forum ke admis ko yah sochana chaahiye aur iska koyi hal niklanan chaahiye varana story writers ka interest bhi kam hoga aur regular readers ka to km ho hi raha hai . ek story post karne me mujhe 3-4 ghante lagte hain site itani slow hai aur agar meri posts lambi bhi hoti hain aur pictures bhi kaafi to ye sb maamle ko aur uljha rhi hain aur admin ko shaayd koyi fark nahi pad raha kyonki unhe ad. revenue mil rhaha hai
मै कुछ एक forum पर नजर बनाए हुए हु. क्यों की मुझे मेरी स्टोरी चोरी होने का डर था. तभी मेने कुछ XForum की कमिया महसूस की. ज्यादातर आज कल इस forum की स्टोरी राइटर दूसरे सभी forum पर भी पोस्ट कर रहे है. फिर इस फोरम पर नया कुछ नहीं.

जबकि दूसरे फोरम incentive के रूप मे एहमियत दे रहे है. वेल्यू, logo बहोत कुछ.

आज कल लोग पेज ज्यादा बदल बदल कर पढ़ने के लिए कुछ नया ढूढ़ते है. जो अधूरा ना हो. कम्पलीट स्टोरी. ऐसे मे ज्यादातर दूसरी स्टोरी पर रीडर्स के रिव्यू कमेंट के निचे सिग्नेचर होता. जिसमे वो अपनी स्टोरी की एडवरटाइजमेंटके जरिये लिंक डाले रखता. जिस से ऊस राइटर को कभी नाए रीडर्स भी मिल जाते.

पर कुछ यहां के कामयाब राइटर. जिनके पास बस अपने नाम के सहारे कई सारे रीडर्स है. सिर्फ उनकी राय के कारण सिग्नेचर फॉरमैट टैब मे तब्दील हो गया. अब तो रिव्यू कमेंटस को भी वो लोग टैब ही करवा रहे है.

ऊपर से दूसरे अचीवमेंट लोगों और लाइक्स पोस्ट वगेरा का स्कोर भी हटवा दिया गया है.

जिसका असर फोरम पर रीडर्स का आभाव हुआ है. गेस्ट रीडर्स फोरम पर चल रही एडवरटाइजमेंट के कारण परेशान होकर दूसरे फोरम पर जा रहे है. क्यों की यहां की स्टोरी उन्हें वहा भी मिल जा रही है.

फोरम प्रमोट नहीं डीमैट हो रहा है
 

Shetan

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काफी समय से आपकी कहानी एपिसोड दर एपिसोड पढ़ रहा था पर प्रतिक्रिया तब देना चाहता था जब कहानी एक मुकम्मल पड़ाव पर हो..

बहुत समय बाद कोई ऐसी कहानी मिली है जो सीधे दिमाग पर असर करती है। यह कहानी अपने प्लॉट या ट्विस्ट से आगे निकलकर आपके रचनात्मक दिमाग का परिचय देती है, जिसने इसे गढ़ा है।

कहानी में आपने एक बेहद निर्मम और पारदर्शी दुनिया रची है। कविता के किरदार को आपने पागल की जगह एक टूटा हुआ इंसान बनाया है और यही कहानी को अलग स्तर पर ले जाता है। किसी कैरेक्टर को साइको दिखाना आसान काम है। उससे अजीब हरकतें करवा लो या बिना बात चीखने-चिल्लाने दो। पर आपने कविता को एक इतिहास, एक बचपन और एक गहरा दर्द दिया है। जब वह सालों बाद वीरू के सीने पर सिर रखकर सोती है, तो उस पल में एक इंसान की पूरी ज़िंदगी की थकान नज़र आती है। वह सुकून और नींद बिना किसी मेलोड्रामा के बहुत कुछ कह जाती है।

वीरू एक जिगोलो, जुआरी और चोर है। पर स्टीरियोटाइप जरा भी नहीं लगता। कविता की आवाज़ सुनते ही उसका दिल पर हाथ रख लेना.. औरतों को अपना जिस्म बेचने वाले इस आदमी के अंदर भी कहीं कुछ कच्चा और मासूम बचा हुआ है। वह किसी की आवाज़ पर ठिठक जाता है। इस विरोधाभास को बिना किसी स्पष्टीकरण के छोड़ देना ही इस किरदार की असली ताकत है।

वह दृश्य जहाँ कविता अपनी योनि को नई दोस्त कहकर वीरू से मिलवाती है, वह मुझे बेहद असरदार लगा। यहाँ सेक्स शारीरिक जरूरत से आगे बढ़कर एक बच्ची का खेल बन गया है, जो प्यार पाने और किसी को अपने करीब बांधने की एक हताश कोशिश कर रही है। इस दृश्य में जो हवस खोजेगा, वह एक सतही पाठक ही हो सकता है। असल में वह एक ऐसी लड़की है जो प्यार को कैद करना जानती है पर उसे पनपने देना नहीं जानती। वह वीरू को जितना बांधती है, खुद भी उसी कैद में घुटती है।

रूपा का किरदार भी शानदार ग्रे शेड में लिखा है। वह पूरी तरह खलनायिका या मददगार के खांचे में फिट नहीं होती। वह एक औरत से प्यार भी करती है, चिढ़ती भी है और बचाती भी है। कविता के साथ लेस्बियन दृश्य और उसके बाद वीरू को कविता के शरीर के बारे में बताने वाले हिस्से में एक अजीब से विकृत मातृत्व की छाया नजर आती है। जैसे कोई माँ अपनी बेटी को सुहागरात के लिए तैयार कर रही हो। आपने रूपा को एक साधारण साइड कैरेक्टर से कहीं ऊपर उठा दिया है।

कहानी का सबसे व्यक्तिगत और झकझोरने वाला हिस्सा कविता का रोना है। एनल सेक्स के बाद जब वह टूटकर फर्श पर गिरती है, तो आपने उस दर्द को केवल लिखकर खत्म नहीं किया। आप उसकी हिचकी, कफ, सिसकियों और दीवार का सहारा लेने तक की बारीकियों में गए। किरदारों का दर्द कहानी का अस्त्र होने के बजाय उनका स्वाभाविक हिस्सा बन गया।

कुछ जगहों पर कहानी एक लूप में फंसती दिखती है। वीरू का बंधना, कविता का उसे छेड़ना और फिर से बंधना, यह पैटर्न बीच-बीच में अपनी ताजगी खो देता है। हो सकता है यह जानबूझकर किया गया हो क्योंकि कविता खुद भी एक ही पैटर्न में जी रही है जहाँ प्यार की तड़प, डर और फिर वही कोशिश बार-बार होती है। लेकिन एक पाठक के तौर पर कभी-कभी मन करता है कि यह चक्र टूटे।

कविता का एक मशहूर RJ होना और उस आवाज़ को कभी सीधे न सुनाना आपकी एक बहुत स्मार्ट चाल है। असल में कहानी उस आवाज़ की है ही नहीं, कहानी उस इंसान की है जिसे कभी सुना ही नहीं गया।

आपने सेक्स को हथियार, भाषा, बहाना और दवा सब कुछ बना दिया है। कविता के लिए यह प्यार पाने की ज़िद है, वीरू के लिए पैसा और रूपा के लिए नियंत्रण। सबसे अच्छी बात यह है कि आप इन तीनों को कोई नैतिक चश्मा पहनाकर जज नहीं करते, आप बस उनकी ज़रूरतें बेपर्दा करते हैं।

यह कहानी अपनी अस्थिरता में बेहद स्थिर है। कविता जितनी विक्षिप्त है, उतनी ही समझदार भी है। उसे प्यार करना मुश्किल है पर उससे नफरत करना नामुमकिन है। लिखते रहिए। यह कहानी जितनी खुरदरी है उतनी ही जीवंत भी है। यह ज़ेहन में अटकने वाली कहानी है।

ऐसे ही लिखते रहिए..

सस्नेह सविनय..

वखारिया
वाह क्या शानदार रिव्यू दिया है. ऐसा जबरदस्त रिव्यू तो मुझे पहेली बार मिला. बहोत बहोत धन्यवाद. ऊपर से मुझे खुशी इस बात की है की आप स्टोरी कंटिन्यू पढ़ भी रहे हो. इसके लिए एक और बार धन्यवाद.

यह स्टोरी मुझे money Heist, Wednesday, शानदार इन सब को मिलकर एक स्टोरी का कॉन्सेप्ट सुजा. और मेने साईको कविता लिखना शुरू किया. अब स्टोरी एन्ड की तरफ है. उम्मीद है की आप आगे भी मेरा हौसला बढ़ेंगे.
 
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Shetan

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Shetan aka chudail :VQ:
Congratulations 🎊 for new thread ✨
वाह पंडितजी. स्टोरी खतम होने वाली है. और अब congratulation विश कर रहे हो. चलो फिर भी बहोत बहोत धन्यवाद.
 
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Raj_sharma

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वाह पंडितजी. स्टोरी खतम होने वाली है. और अब congratulation विश कर रहे हो. चलो फिर भी बहोत बहोत धन्यवाद.
Hamka maafi daido maidam, hum aapka gunahgaar hu, bekaar hu, Aadat se laachaar hu, :pray:
 
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Raj_sharma

यतो धर्मस्ततो जयः ||❣️
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तुम दूसरी दिशा में जा रहे हो मेरे दोस्त, में तो यह पूछ रहा था कि ये शैतान जो हैं ये कोई नया है या वो पुराने वाले हमारी शैतान भाभी है?
और तुम भी शायद नए हो, में एक पुराने राज शर्मा को जनता था।
तुम जो गाली की बात कर रहे हो ना, उसके बारे में तो में कुछ कह ही नहीं रहा हूं क्योंकि वो इसी लायक है।
Deko Carry0, pahli baat to ye clear kar du ki ye wahi shetan ji hai jo tumhe meri sayri wali thread pe mili thi, doosri baat main bhi wahi Raj hu, and sabse important baat, tum ab bhi kisi writer ki dis respect nahi kar sakte, and is baar isko warning hi samajhna. Aur ab is topic per yaha or koi discussion nahi hoga, agar aapko baat karni ho to chit chat thread me milo.
Dhanyawaad
 
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