बडा ही सुंदर लाजवाब और शानदार मदहोशी से भरपूर मदमस्त अपडेट है मजा आ गयारमेश ने उँगली तेज़ करते हुए कहा,
“लेकिन माँ… गाँव वाले क्या कहेंगे? बच्चा गोरा होगा तो सब समझ जाएँगे कि वह लूई का है।” फनलवर की रचना।
सासुमा ने कराहते हुए जवाब दिया,
“अरे पगले… गाँव वाले सब जानते हैं। लेकिन कोई कुछ नहीं बोलेगा। हमारे गाँव का रिवाज है, मेहमान को पूरी खातिरदारी करनी चाहिए। अगर लूई जानकी को फलित कर दे तो हम सब मिलकर बच्चे को अपना लेंगे। तू पिता कहलाएगा, लूई तो चला जाएगा। वह तो आज है कल नहीं,समझा?”
रमेश ने माँ की गांड में दो उँगलियाँ डालते हुए फुसफुसाया,
“आपको सच में मंजूर है माँ? जानकी को लूई चोदे और उसके पेट में गोरा बच्चा आए?”
सासुमा ने गहरी सिसकारी भरते हुए कहा,
“हाँ बेटा… मुझे पूरी तरह मंजूर है। बल्कि मैं तो यही चाहती हूँ कि लूई जानकी को बार-बार चोदे। जितनी बार चाहे। तू भी देखना… जब लूई जानकी की चूत में अपना मोटा लंड डालेगा, तब जानकी कितनी चीखेगी और कितना दूध निकलेगा उसके थनों से। उसे फलित होने में देर हो उतना अच्छा है। एक बार जानकी का खेत फलित हो गया तो जानकी उसे छूने भी नहीं देगी। जानकी सब से ज्यादा तुम्हे चाहती है।”
रमेश की उँगलियाँ अब तेज़ी से माँ की गांड में अंदर-बाहर हो रही थीं। उसने उत्तेजित स्वर में कहा,
“माँ… आपकी बातें सुनकर मेरा भी लंड खड़ा हो रहा है।” मैत्री की मदद से लिखा गया एपिसोड।
सासुमा ने मुस्कुराते हुए कहा,
“तो अच्छा है। मैं किस के लिए हूँ? अब चुपचाप अपनी उँगलियों से माँ की गांड चोद और सोच कि लूई तेरी बीवी की चूत चोद रहा है। कल सुबह तक शायद जानकी लूई के वीर्य से भर जाए।”
रमेश ने माँ की गांड में उँगलियाँ चलाते हुए उनका बदन और करीब खींच लिया। सासुमा ने पलटकर अपनी छाती रमेश की तरफ़ कर दी। उनके भारी थन अब पूरी तरह खुले हुए थे।
रमेश ने बिना एक पल गँवाए एक थन को मुँह में ले लिया और ज़ोर-ज़ोर से चूसने लगा।
“आह्ह्ह्… हाँ बेटा… चूस… अपनी माँ के थनों को अच्छे से चूस…” सासुमा ने आह भरते हुए कहा।
रमेश थन चूसते हुए ही भरी हुई आवाज़ में बोला,
“माँ… जानकी को लूई चोद रहा होगा… यह सोचकर मेरा लंड फटने को तैयार है। लूई का मोटा गोरा लंड जानकी की चूत में घुस जाएगा… और वह चीखेगी… ‘और चोदो लूई… मेरी चूत फाड़ दो…लेकिन कभी-कभी मेरा अन्दर का मर्द मुझे बाहरी मर्द से जानकी का चुदवाना पसंद नहीं करता।”
सासुमा ने रमेश के सिर को अपने थन पर ज़ोर से दबाते हुए अश्लीलता से बोलीं,
“हाँ बेटा… सोच… अगर तेरे पिताजी होते तो जानकी की चूत नहीं मारते? यह अपना रिवाज के अनुसार घर की बहु सब की नहीं होती? अब तू यही सोच.... के लूई भी अपना ही कोई है ....... लूई का लंड तेरी बीवी की चूत में पूरा घुसा हुआ है। जानकी की टाँगें फैली हुई हैं, चूत फैल गई है, और लूई उसे जोर-जोर से पेल रहा है। तेरा क्या हाल होगा तब? देखेगा चुपचाप बैठकर? मेरे खेत तो तेरे लिए लिहे हुए है।”
रमेश ने दूसरे थन को मुँह में भरते हुए कराहा,
“माँ… मुझे तो बहुत मजा आएगा। जानकी की चूत लूई के वीर्य से भर जाएगी… गोरा बच्चा पेट में आएगा… और मैं सब जानते हुए भी चुप रहूँगा।”
सासुमा ने हँसते हुए अपनी गांड को रमेश की उँगलियों पर और ज़ोर से दबाया और बोलीं,
“बहुत अच्छा सोच रहा है तू। तू नपुंसक तो नहीं है बेटा, तेरा लंड तो बस दिखाने भर का है। लूई का लंड असली है। वह जानकी को अच्छे से फलित कर देगा। तुझे क्या चिंता? तू तो बस जानकी के थन चूस लेना और लूई का वीर्य वाली चूत चाट लेना।”
रमेश ने माँ के थन को काटते हुए उत्तेजित स्वर में कहा,
“माँ… आपकी बातें सुनकर मेरा लंड दर्द कर रहा है। जानकी जब लूई के नीचे पड़ी चीख रही होगी, तब मैं क्या करूँगा?”
सासुमा ने रमेश के बाल खींचते हुए कामुकता से बोलीं,
“तू मेरे पास आएगा… मेरी गांड में उँगली डालेगा… और मेरे थन चूसते हुए मुठ मारेगा। या फिर जानकी की चूत से लूई का वीर्य निकालकर पी लेगा। समझा?” निर्मात्री फनलवर है।
रमेश माँ के थन को चूसते हुए ही बोला,
“जी माँ… मैं वैसा ही करूँगा। जानकी को लूई चोदे… और मैं माँ की गांड चोदते हुए मज़ा लूँगा।”
सासुमा ने संतुष्ट स्वर में कहा,
“बहुत अच्छा बेटा… अब चुपचाप माँ के थन चूस और सो जा। कल सुबह तक शायद जानकी लूई के वीर्य से गर्भवती हो जाए।”
रमेश अपनी माँ के थनों को चूसता हुआ, उनकी गांड में उँगली डाले हुए धीरे-धीरे सो गया।
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यही तक दोस्तों।
अगला एपिसोड आपके कोमेंट्स आने के बाद।
तब तक के लिए Funlover की ओर से जय भारत।।
अगले रोमांचकारी धमाकेदार और चुदाईदार अपडेट की प्रतिक्षा रहेगी जल्दी से दिजिएगा