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Fantasy लुइ के पन्ने!

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Ashiq Baba

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आपके इतने विस्तृत, गहन और सराहनापूर्ण विचार साझा करने के लिए हृदय से धन्यवाद। यह जानकर अत्यंत खुशी हुई कि कहानी के विभिन्न पहलू, गांव की परंपरा, सामाजिक प्रतिष्ठा की होड़, विदेशी मेहमान की उपस्थिति, और सासु माँ के जटिल मनोभाव, आप तक उसी प्रभाव के साथ पहुँच पाए, जैसा उनका उद्देश्य था। आपने कहानी के जिन पहलुओं पर ध्यान दिया और जिस तरह पात्रों की मनःस्थिति को समझा, उससे लगा कि आपने कहानी को केवल पढ़ा नहीं, बल्कि उसे पूरी तरह महसूस भी किया।


आपने सासु माँ के चरित्र और उनकी भूमिका का जो विश्लेषण किया, वह वास्तव में रोचक है। हर पाठक अपने अनुभव और दृष्टिकोण के अनुसार पात्रों को समझता है, और यही किसी कहानी की सबसे बड़ी उपलब्धि होती है कि वह अलग-अलग व्याख्याओं के लिए स्थान छोड़ती है। सासु माँ के किरदार को लेकर आपकी व्याख्या खास तौर पर दिलचस्प लगी। कई बार पात्र अपने संवादों से कम और अपने व्यवहार से ज़्यादा कहानी कहते हैं, और जब पाठक उन पर इतनी बारीकी से नज़र डालते हैं, तो लेखक की मेहनत सफल महसूस होती है।


आपके उत्साह और निरंतर समर्थन के लिए पुनः धन्यवाद। आगे की कहानी में भी पात्रों के रिश्तों, मनोभावों और घटनाक्रम को रोचक ढंग से आगे बढ़ाने का प्रयास रहेगा। आशा है कि आने वाले अध्याय भी आपको इसी तरह पसंद आएंगे। कौन किस सीमा तक जाएगा और परिस्थितियाँ किस मोड़ पर ले जाएँगी, इसका आनंद कहानी के साथ-साथ ही मिलेगा। उम्मीद है, आने वाले अध्याय भी आपकी उत्सुकता बनाए रखेंगे।


इतना सुंदर और प्रेरणादायक फीडबैक देने के लिए आपका हार्दिक धन्यवाद। ऐसे ही अपने विचार साझा करते रहिए, यही उत्साह आगे बेहतर लिखने की प्रेरणा देता है।


स्नेह और शुभकामनाओं सहित।
पाठको के कमैंट्स पर इतनी विस्तृत धन्यवाद रूपी प्रतिक्रिया देना एक नेक और सच्चे कलमकार के ही गुण हो सकते है । सराहना के लिए आवक बहुत बहुत धन्यवाद ।
 

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पाठको के कमैंट्स पर इतनी विस्तृत धन्यवाद रूपी प्रतिक्रिया देना एक नेक और सच्चे कलमकार के ही गुण हो सकते है । सराहना के लिए आवक बहुत बहुत धन्यवाद ।
Welcome
 

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चलिए दोस्तों कहानी में आगे बढ़ते है।

Chaliye dosto kahaani ko aage jaante hai.
 
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सासुमा संतुष्ट मुस्कान के साथ थोड़ा पीछे हटीं और बोलीं,

“बहुत अच्छी बहू है मेरी। लूई, इसे खूब मज़ा दो। मैं देख रही हूँ।”
फनलवर की प्रस्तुति।

लूई ने जानकी के दोनों थनों को पूरी तरह खाली कर दिया था। उसने इतनी ज़ोर और लगन से चूसा कि जानकी के थन अब ढीले और थोड़े लटक गए थे। निप्पल लाल और सूजे हुए थे। लूई के मुँह और ठोड़ी पर दूध लगा हुआ था।

साथ ही उसकी मोटी उँगली जानकी की गांड में अच्छे से घुस रही थी। वह धीरे-धीरे लेकिन गहरी अंदर-बाहर कर रहा था। जानकी की टाँगें काँप रही थीं। वह दीवार का सहारा लेकर सिसकार रही थी।

“आह्ह्ह्… लूई… बस… बहुत हो गया…” जानकी ने काँपती आवाज़ में कहा, लेकिन उसका शरीर उल्टा लूई की उँगली के साथ हिल रहा था।

काफी देर हो चुकी थी। शादी का उत्सव अब समाप्त होने को था। बाराती और परिवार वाले धीरे-धीरे घर की तरफ़ जाने लगे थे।

सासुमा पास आईं। उन्होंने मुस्कुराते हुए कहा,

“बस बहुत हो गया दोनों। काफी देर हो गई है। अब चलो घर चले।”

उन्होंने जानकी के थनों को देखा जो अब पूरी तरह खाली थे, फिर लूई की उँगली को जो अभी भी जानकी की गांड में थी। सासुमा ने हल्का सा मुस्कुराकर कहा,

“अच्छे से खाली कर दिया ना गोरे बाबा? मेरी बहू के थन और गांड दोनों?”

इतने में रमेश देवरों के साथ वहाँ आ पहुँचा। उसकी नज़र सबसे पहले जानकी के ढीले पड़े थनों पर गई, फिर लूई की उँगली पर जो धीरे-धीरे जानकी की गांड से बाहर आ रही थी।

रमेश का चेहरा थोड़ा बदल गया।

सासुमा ने तुरंत स्थिति संभाली। वे रमेश के पास गईं और बहुत ही खुलकर, कामुकता भरे स्वर में बोलीं:

“अरे रमेश बेटा… देख रहे हो ना? तुम्हारी बीवी ने आज अच्छे से मेहमान की खातिरदारी की है। देखो, इसके थन कितने खाली हो गए हैं। लूई ने पूरा दूध पी लिया।”

रमेश चुपचाप देखता रहा।

सासुमा ने मुस्कुराते हुए आगे कहा,

“और हाँ… लूई सिर्फ़ थन ही नहीं चूस रहा था। मैंने खुद इसे कहा था कि बहू की गांड को भी सहलाओ। गाय को दुहते समय पीछे से सहलाना ज़रूरी होता है ना? वैसे ही मैंने लूई से कहा, अपनी उँगली से जानकी की गांड को अच्छे से चोदो। देखो, अभी भी उँगली निकाल रहा है।”
लेखिका फनलवर है।

रमेश ने थोड़ा गला साफ़ किया और बोला, “माँ… यह…”

सासुमा ने उसे बीच में ही टोक दिया और बहुत ही कामुक अंदाज़ में बोलीं,

“शर्मा मत बेटा। यह हमारा रिवाज है। गोरा मेहमान है, उसे पूरी संतुष्टि देनी चाहिए। जानकी ने बहुत अच्छे से दिया। देखो, इसका लंड भी कितना खड़ा है। जानकी ने इसे भी हाथ से दुहा है।”

जानकी शर्म से सिर झुकाए खड़ी थी। सासुमा ने जानकी की पीठ सहलाते हुए रमेश से कहा,

“रमेश, तुझे गर्व होना चाहिए। तेरी बीवी ने आज मेहमान को इतना खुश किया है। थन भी दिए, गांड भी खिलाई। अब तू भी इसे घर ले जाकर अच्छे से चोद लेना। आज इसकी चूत भी बहुत गीली है।”

रमेश ने जानकी को देखा। जानकी ने शर्माते हुए आँखें मिलाईं।

सासुमा ने अंत में मुस्कुराते हुए कहा,

“चलो अब, सब घर चलें। रात अभी बाकी है। लूई को भी साथ ले चलो। जानकी आज रात दोनों को संभालेगी, पति को भी और मेहमान को भी।”

रमेश ने कुछ नहीं कहा, बस सिर हिला दिया।
संपादिका मैत्री पटेल है।

आखिरकार सब लोग घर की तरफ़ चल दिए। जानकी का पल्लू अब ठीक किया हुआ था, लेकिन उसके थन अभी भी ढीले थे और साड़ी पर दूध के निशान बाकी थे। लूई उसके बगल में चल रहा था, जबकि रमेश थोड़ा पीछे था।

सासुमा आगे-आगे चल रही थीं, मुस्कुराते हुए।



********************************************.


जुड़े रहिए दोस्तों।


Funlover.

 

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रात काफी निकल चुकी थी। शादी का शोर-शराबा अब पूरी तरह शांत हो चुका था। पूरा गाँव नींद में डूबा हुआ था।

जब सब घर पहुँचे, तो सासुमा ने पहले से ही इंतज़ाम कर रखा था। उन्होंने जानकी और लूई के लिए अंदर वाले बड़े कमरे में एक मोटा गद्दा बिछा दिया था। बिस्तर पर नई चादर बिछी हुई थी और तकिए भी लगे थे।
फनलवर का निर्माण।

रमेश भी जानकी और लूई के साथ उसी बिस्तर पर सो गया। तीनों एक ही बिस्तर पर लेटे हुए थे, बीच में जानकी, एक तरफ लूई और दूसरी तरफ रमेश।

लूई अब बहुत बेचैन था। उसका लंड पूरी रात से खड़ा था। जानकी के थन चूसने, गांड सहलाने और उँगली करने के बाद भी उसे जानकी की चूत चाहिए थी। लेकिन रमेश के साथ होने की वजह से वह कुछ नहीं कर पा रहा था। उसने कई बार जानकी की जाँघ पर हाथ रखा, लेकिन जानकी ने धीरे से उसे रोक दिया।

आखिरकार, जब सबके साँसें भारी हो गईं, लूई ने अपना हाथ जानकी की साड़ी के अंदर सरकाया। उसने जानकी की गांड को सहलाया और फिर धीरे से अपनी मोटी उँगली उसके गांड के छेद में डाल दी।

“हम्म्म…” जानकी ने दबी हुई सिसकारी भरी, लेकिन कुछ नहीं कहा। लूई ने जानकी के एक थन को मुँह में ले लिया और धीरे-धीरे चूसते हुए अपनी उँगली को जानकी की गांड में हिलाने लगा। जानकी ने आँखें बंद कर लीं और लूई के सिर को अपने थन पर दबाए रखा।

दोनों इसी हालत में सो गए, लूई जानकी का थन मुँह में लिए और उँगली उसकी गांड में डाले हुए।
निर्मात्री फनलवर है।

देर रात को रमेश चुपचाप उठा और माँ के कमरे में आ गया। सासुमा जाग रही थीं। उन्होंने रमेश को देखते ही मुस्कुरा दिया और बिना कुछ कहे अपनी साड़ी और पेटीकोट ऊपर कर लिया। फिर पीठ रमेश की तरफ़ करके लेट गईं, अपनी मोटी गांड उसे दिखाते हुए।

रमेश बिस्तर पर लेट गया। उसने अपनी माँ की गांड को दोनों हाथों से फैलाया और थूक से अपनी उँगली गीली करके सीधे उनके गांड के छेद में धीरे से डाल दी।

“आह्ह्… हाँ बेटा…” सासुमा ने आह भरते हुए कहा।

रमेश उँगली को धीरे-धीरे अंदर-बाहर करते हुए बोला,

“माँ… जानकी और लूई अब बहुत आगे बढ़ गए हैं। मैंने देखा… लूई सोते हुए भी जानकी का थन मुँह में लिए हुए है और अपनी उँगली उसकी गांड में डाले हुए है। जानकी भी चुपचाप उसे सब कुछ दे रही है।”

सासुमा ने अपनी गांड पीछे की तरफ़ दबाते हुए कामुक स्वर में कहा,

“तो? तुझे बुरा लग रहा है?”

रमेश ने उँगली को और गहरी डालते हुए थोड़ी हिचकिचाहट के साथ बोला,

“बुरा नहीं लग रहा माँ… लेकिन डर जुरूर लग रहा है। लूई बहुत भूखा है। मुझे लगता है कि अब वह जानकी की चूत में अपना लंड डालकर अपना बच्चा दे देगा। जानकी भी उसे रोक नहीं पाएगी।”
एडिटेड बाय मैत्री पटेल।

सासुमा ने हल्का सा हँसकर अपनी गांड को और ज़ोर से पीछे दबाया और बोलीं,

“तो डालने दे बेटा… गोरे का बीज है। मजबूत और स्वस्थ बच्चा होगा। जानकी को तो बच्चा चाहिए ही है। तेरे से अब तक नहीं हो पा रहा, सालों से एक बच्चा भी नहीं दे पाया। अब अगर लूई दे दे तो क्या बुराई है?”



*********************************************************.....


बने रहिये दोस्तों।


Funlover.


 
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रमेश ने उँगली तेज़ करते हुए कहा,

“लेकिन माँ… गाँव वाले क्या कहेंगे? बच्चा गोरा होगा तो सब समझ जाएँगे कि वह लूई का है।”
फनलवर की रचना।

सासुमा ने कराहते हुए जवाब दिया,

“अरे पगले… गाँव वाले सब जानते हैं। लेकिन कोई कुछ नहीं बोलेगा। हमारे गाँव का रिवाज है, मेहमान को पूरी खातिरदारी करनी चाहिए। अगर लूई जानकी को फलित कर दे तो हम सब मिलकर बच्चे को अपना लेंगे। तू पिता कहलाएगा, लूई तो चला जाएगा। वह तो आज है कल नहीं,समझा?”

रमेश ने माँ की गांड में दो उँगलियाँ डालते हुए फुसफुसाया,

“आपको सच में मंजूर है माँ? जानकी को लूई चोदे और उसके पेट में गोरा बच्चा आए?”

सासुमा ने गहरी सिसकारी भरते हुए कहा,

“हाँ बेटा… मुझे पूरी तरह मंजूर है। बल्कि मैं तो यही चाहती हूँ कि लूई जानकी को बार-बार चोदे। जितनी बार चाहे। तू भी देखना… जब लूई जानकी की चूत में अपना मोटा लंड डालेगा, तब जानकी कितनी चीखेगी और कितना दूध निकलेगा उसके थनों से। उसे फलित होने में देर हो उतना अच्छा है। एक बार जानकी का खेत फलित हो गया तो जानकी उसे छूने भी नहीं देगी। जानकी सब से ज्यादा तुम्हे चाहती है।”

रमेश की उँगलियाँ अब तेज़ी से माँ की गांड में अंदर-बाहर हो रही थीं। उसने उत्तेजित स्वर में कहा,

“माँ… आपकी बातें सुनकर मेरा भी लंड खड़ा हो रहा है।”
मैत्री की मदद से लिखा गया एपिसोड।

सासुमा ने मुस्कुराते हुए कहा,

“तो अच्छा है। मैं किस के लिए हूँ? अब चुपचाप अपनी उँगलियों से माँ की गांड चोद और सोच कि लूई तेरी बीवी की चूत चोद रहा है। कल सुबह तक शायद जानकी लूई के वीर्य से भर जाए।”

रमेश ने माँ की गांड में उँगलियाँ चलाते हुए उनका बदन और करीब खींच लिया। सासुमा ने पलटकर अपनी छाती रमेश की तरफ़ कर दी। उनके भारी थन अब पूरी तरह खुले हुए थे।

रमेश ने बिना एक पल गँवाए एक थन को मुँह में ले लिया और ज़ोर-ज़ोर से चूसने लगा।

“आह्ह्ह्… हाँ बेटा… चूस… अपनी माँ के थनों को अच्छे से चूस…” सासुमा ने आह भरते हुए कहा।

रमेश थन चूसते हुए ही भरी हुई आवाज़ में बोला,

“माँ… जानकी को लूई चोद रहा होगा… यह सोचकर मेरा लंड फटने को तैयार है। लूई का मोटा गोरा लंड जानकी की चूत में घुस जाएगा… और वह चीखेगी… ‘और चोदो लूई… मेरी चूत फाड़ दो…लेकिन कभी-कभी मेरा अन्दर का मर्द मुझे बाहरी मर्द से जानकी का चुदवाना पसंद नहीं करता।”

सासुमा ने रमेश के सिर को अपने थन पर ज़ोर से दबाते हुए अश्लीलता से बोलीं,

“हाँ बेटा… सोच… अगर तेरे पिताजी होते तो जानकी की चूत नहीं मारते? यह अपना रिवाज के अनुसार घर की बहु सब की नहीं होती? अब तू यही सोच.... के लूई भी अपना ही कोई है ....... लूई का लंड तेरी बीवी की चूत में पूरा घुसा हुआ है। जानकी की टाँगें फैली हुई हैं, चूत फैल गई है, और लूई उसे जोर-जोर से पेल रहा है। तेरा क्या हाल होगा तब? देखेगा चुपचाप बैठकर? मेरे खेत तो तेरे लिए लिहे हुए है।”

रमेश ने दूसरे थन को मुँह में भरते हुए कराहा,

“माँ… मुझे तो बहुत मजा आएगा। जानकी की चूत लूई के वीर्य से भर जाएगी… गोरा बच्चा पेट में आएगा… और मैं सब जानते हुए भी चुप रहूँगा।”

सासुमा ने हँसते हुए अपनी गांड को रमेश की उँगलियों पर और ज़ोर से दबाया और बोलीं,

“बहुत अच्छा सोच रहा है तू। तू नपुंसक तो नहीं है बेटा, तेरा लंड तो बस दिखाने भर का है। लूई का लंड असली है। वह जानकी को अच्छे से फलित कर देगा। तुझे क्या चिंता? तू तो बस जानकी के थन चूस लेना और लूई का वीर्य वाली चूत चाट लेना।”

रमेश ने माँ के थन को काटते हुए उत्तेजित स्वर में कहा,

“माँ… आपकी बातें सुनकर मेरा लंड दर्द कर रहा है। जानकी जब लूई के नीचे पड़ी चीख रही होगी, तब मैं क्या करूँगा?”

सासुमा ने रमेश के बाल खींचते हुए कामुकता से बोलीं,

“तू मेरे पास आएगा… मेरी गांड में उँगली डालेगा… और मेरे थन चूसते हुए मुठ मारेगा। या फिर जानकी की चूत से लूई का वीर्य निकालकर पी लेगा। समझा?”
निर्मात्री फनलवर है।

रमेश माँ के थन को चूसते हुए ही बोला,

“जी माँ… मैं वैसा ही करूँगा। जानकी को लूई चोदे… और मैं माँ की गांड चोदते हुए मज़ा लूँगा।”

सासुमा ने संतुष्ट स्वर में कहा,

“बहुत अच्छा बेटा… अब चुपचाप माँ के थन चूस और सो जा। कल सुबह तक शायद जानकी लूई के वीर्य से गर्भवती हो जाए।”

रमेश अपनी माँ के थनों को चूसता हुआ, उनकी गांड में उँगली डाले हुए धीरे-धीरे सो गया।



*************************************************************************


यही तक दोस्तों।

अगला एपिसोड आपके कोमेंट्स आने के बाद।

तब तक के लिए
Funlover की ओर से जय भारत।।


 

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दोस्तों आपके मनोरजन के लिए ऊपर मैंने 3 अपडेट्स दिए है।

आशा है की आप सब को पसंद आएगा।

आपके टिका-टिपण्णी की अपेक्षा सह........
 

Funlover

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Chaliye dosto upar ke 3 updates ko HINGLISH me padhate hai.
 
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सासुमा संतुष्ट मुस्कान के साथ थोड़ा पीछे हटीं और बोलीं,

“बहुत अच्छी बहू है मेरी। लूई, इसे खूब मज़ा दो। मैं देख रही हूँ।”
फनलवर की प्रस्तुति।

लूई ने जानकी के दोनों थनों को पूरी तरह खाली कर दिया था। उसने इतनी ज़ोर और लगन से चूसा कि जानकी के थन अब ढीले और थोड़े लटक गए थे। निप्पल लाल और सूजे हुए थे। लूई के मुँह और ठोड़ी पर दूध लगा हुआ था।

साथ ही उसकी मोटी उँगली जानकी की गांड में अच्छे से घुस रही थी। वह धीरे-धीरे लेकिन गहरी अंदर-बाहर कर रहा था। जानकी की टाँगें काँप रही थीं। वह दीवार का सहारा लेकर सिसकार रही थी।

“आह्ह्ह्… लूई… बस… बहुत हो गया…” जानकी ने काँपती आवाज़ में कहा, लेकिन उसका शरीर उल्टा लूई की उँगली के साथ हिल रहा था।

काफी देर हो चुकी थी। शादी का उत्सव अब समाप्त होने को था। बाराती और परिवार वाले धीरे-धीरे घर की तरफ़ जाने लगे थे।

सासुमा पास आईं। उन्होंने मुस्कुराते हुए कहा,

“बस बहुत हो गया दोनों। काफी देर हो गई है। अब चलो घर चले।”

उन्होंने जानकी के थनों को देखा जो अब पूरी तरह खाली थे, फिर लूई की उँगली को जो अभी भी जानकी की गांड में थी। सासुमा ने हल्का सा मुस्कुराकर कहा,

“अच्छे से खाली कर दिया ना गोरे बाबा? मेरी बहू के थन और गांड दोनों?”

इतने में रमेश देवरों के साथ वहाँ आ पहुँचा। उसकी नज़र सबसे पहले जानकी के ढीले पड़े थनों पर गई, फिर लूई की उँगली पर जो धीरे-धीरे जानकी की गांड से बाहर आ रही थी।

रमेश का चेहरा थोड़ा बदल गया।

सासुमा ने तुरंत स्थिति संभाली। वे रमेश के पास गईं और बहुत ही खुलकर, कामुकता भरे स्वर में बोलीं:

“अरे रमेश बेटा… देख रहे हो ना? तुम्हारी बीवी ने आज अच्छे से मेहमान की खातिरदारी की है। देखो, इसके थन कितने खाली हो गए हैं। लूई ने पूरा दूध पी लिया।”

रमेश चुपचाप देखता रहा।

सासुमा ने मुस्कुराते हुए आगे कहा,

“और हाँ… लूई सिर्फ़ थन ही नहीं चूस रहा था। मैंने खुद इसे कहा था कि बहू की गांड को भी सहलाओ। गाय को दुहते समय पीछे से सहलाना ज़रूरी होता है ना? वैसे ही मैंने लूई से कहा, अपनी उँगली से जानकी की गांड को अच्छे से चोदो। देखो, अभी भी उँगली निकाल रहा है।”
लेखिका फनलवर है।

रमेश ने थोड़ा गला साफ़ किया और बोला, “माँ… यह…”

सासुमा ने उसे बीच में ही टोक दिया और बहुत ही कामुक अंदाज़ में बोलीं,

“शर्मा मत बेटा। यह हमारा रिवाज है। गोरा मेहमान है, उसे पूरी संतुष्टि देनी चाहिए। जानकी ने बहुत अच्छे से दिया। देखो, इसका लंड भी कितना खड़ा है। जानकी ने इसे भी हाथ से दुहा है।”

जानकी शर्म से सिर झुकाए खड़ी थी। सासुमा ने जानकी की पीठ सहलाते हुए रमेश से कहा,

“रमेश, तुझे गर्व होना चाहिए। तेरी बीवी ने आज मेहमान को इतना खुश किया है। थन भी दिए, गांड भी खिलाई। अब तू भी इसे घर ले जाकर अच्छे से चोद लेना। आज इसकी चूत भी बहुत गीली है।”

रमेश ने जानकी को देखा। जानकी ने शर्माते हुए आँखें मिलाईं।

सासुमा ने अंत में मुस्कुराते हुए कहा,

“चलो अब, सब घर चलें। रात अभी बाकी है। लूई को भी साथ ले चलो। जानकी आज रात दोनों को संभालेगी, पति को भी और मेहमान को भी।”

रमेश ने कुछ नहीं कहा, बस सिर हिला दिया।
संपादिका मैत्री पटेल है।

आखिरकार सब लोग घर की तरफ़ चल दिए। जानकी का पल्लू अब ठीक किया हुआ था, लेकिन उसके थन अभी भी ढीले थे और साड़ी पर दूध के निशान बाकी थे। लूई उसके बगल में चल रहा था, जबकि रमेश थोड़ा पीछे था।

सासुमा आगे-आगे चल रही थीं, मुस्कुराते हुए।



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बहुत ही जबरदस्त शानदार लाजवाब और अद्भुत मदमस्त अपडेट है भाई मजा आ गया
 
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रात काफी निकल चुकी थी। शादी का शोर-शराबा अब पूरी तरह शांत हो चुका था। पूरा गाँव नींद में डूबा हुआ था।

जब सब घर पहुँचे, तो सासुमा ने पहले से ही इंतज़ाम कर रखा था। उन्होंने जानकी और लूई के लिए अंदर वाले बड़े कमरे में एक मोटा गद्दा बिछा दिया था। बिस्तर पर नई चादर बिछी हुई थी और तकिए भी लगे थे।
फनलवर का निर्माण।

रमेश भी जानकी और लूई के साथ उसी बिस्तर पर सो गया। तीनों एक ही बिस्तर पर लेटे हुए थे, बीच में जानकी, एक तरफ लूई और दूसरी तरफ रमेश।

लूई अब बहुत बेचैन था। उसका लंड पूरी रात से खड़ा था। जानकी के थन चूसने, गांड सहलाने और उँगली करने के बाद भी उसे जानकी की चूत चाहिए थी। लेकिन रमेश के साथ होने की वजह से वह कुछ नहीं कर पा रहा था। उसने कई बार जानकी की जाँघ पर हाथ रखा, लेकिन जानकी ने धीरे से उसे रोक दिया।

आखिरकार, जब सबके साँसें भारी हो गईं, लूई ने अपना हाथ जानकी की साड़ी के अंदर सरकाया। उसने जानकी की गांड को सहलाया और फिर धीरे से अपनी मोटी उँगली उसके गांड के छेद में डाल दी।

“हम्म्म…” जानकी ने दबी हुई सिसकारी भरी, लेकिन कुछ नहीं कहा। लूई ने जानकी के एक थन को मुँह में ले लिया और धीरे-धीरे चूसते हुए अपनी उँगली को जानकी की गांड में हिलाने लगा। जानकी ने आँखें बंद कर लीं और लूई के सिर को अपने थन पर दबाए रखा।

दोनों इसी हालत में सो गए, लूई जानकी का थन मुँह में लिए और उँगली उसकी गांड में डाले हुए।
निर्मात्री फनलवर है।

देर रात को रमेश चुपचाप उठा और माँ के कमरे में आ गया। सासुमा जाग रही थीं। उन्होंने रमेश को देखते ही मुस्कुरा दिया और बिना कुछ कहे अपनी साड़ी और पेटीकोट ऊपर कर लिया। फिर पीठ रमेश की तरफ़ करके लेट गईं, अपनी मोटी गांड उसे दिखाते हुए।

रमेश बिस्तर पर लेट गया। उसने अपनी माँ की गांड को दोनों हाथों से फैलाया और थूक से अपनी उँगली गीली करके सीधे उनके गांड के छेद में धीरे से डाल दी।

“आह्ह्… हाँ बेटा…” सासुमा ने आह भरते हुए कहा।

रमेश उँगली को धीरे-धीरे अंदर-बाहर करते हुए बोला,

“माँ… जानकी और लूई अब बहुत आगे बढ़ गए हैं। मैंने देखा… लूई सोते हुए भी जानकी का थन मुँह में लिए हुए है और अपनी उँगली उसकी गांड में डाले हुए है। जानकी भी चुपचाप उसे सब कुछ दे रही है।”

सासुमा ने अपनी गांड पीछे की तरफ़ दबाते हुए कामुक स्वर में कहा,

“तो? तुझे बुरा लग रहा है?”

रमेश ने उँगली को और गहरी डालते हुए थोड़ी हिचकिचाहट के साथ बोला,

“बुरा नहीं लग रहा माँ… लेकिन डर जुरूर लग रहा है। लूई बहुत भूखा है। मुझे लगता है कि अब वह जानकी की चूत में अपना लंड डालकर अपना बच्चा दे देगा। जानकी भी उसे रोक नहीं पाएगी।”
एडिटेड बाय मैत्री पटेल।

सासुमा ने हल्का सा हँसकर अपनी गांड को और ज़ोर से पीछे दबाया और बोलीं,

“तो डालने दे बेटा… गोरे का बीज है। मजबूत और स्वस्थ बच्चा होगा। जानकी को तो बच्चा चाहिए ही है। तेरे से अब तक नहीं हो पा रहा, सालों से एक बच्चा भी नहीं दे पाया। अब अगर लूई दे दे तो क्या बुराई है?”



*********************************************************.....


बने रहिये दोस्तों।


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बहुत ही मस्त शानदार लाजवाब और अद्भुत मदमस्त अपडेट है मजा आ गया
 
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