सासुमा संतुष्ट मुस्कान के साथ थोड़ा पीछे हटीं और बोलीं,
“बहुत अच्छी बहू है मेरी। लूई, इसे खूब मज़ा दो। मैं देख रही हूँ।” फनलवर की प्रस्तुति।
लूई ने जानकी के दोनों थनों को पूरी तरह खाली कर दिया था। उसने इतनी ज़ोर और लगन से चूसा कि जानकी के थन अब ढीले और थोड़े लटक गए थे। निप्पल लाल और सूजे हुए थे। लूई के मुँह और ठोड़ी पर दूध लगा हुआ था।
साथ ही उसकी मोटी उँगली जानकी की गांड में अच्छे से घुस रही थी। वह धीरे-धीरे लेकिन गहरी अंदर-बाहर कर रहा था। जानकी की टाँगें काँप रही थीं। वह दीवार का सहारा लेकर सिसकार रही थी।
“आह्ह्ह्… लूई… बस… बहुत हो गया…” जानकी ने काँपती आवाज़ में कहा, लेकिन उसका शरीर उल्टा लूई की उँगली के साथ हिल रहा था।
काफी देर हो चुकी थी। शादी का उत्सव अब समाप्त होने को था। बाराती और परिवार वाले धीरे-धीरे घर की तरफ़ जाने लगे थे।
सासुमा पास आईं। उन्होंने मुस्कुराते हुए कहा,
“बस बहुत हो गया दोनों। काफी देर हो गई है। अब चलो घर चले।”
उन्होंने जानकी के थनों को देखा जो अब पूरी तरह खाली थे, फिर लूई की उँगली को जो अभी भी जानकी की गांड में थी। सासुमा ने हल्का सा मुस्कुराकर कहा,
“अच्छे से खाली कर दिया ना गोरे बाबा? मेरी बहू के थन और गांड दोनों?”
इतने में रमेश देवरों के साथ वहाँ आ पहुँचा। उसकी नज़र सबसे पहले जानकी के ढीले पड़े थनों पर गई, फिर लूई की उँगली पर जो धीरे-धीरे जानकी की गांड से बाहर आ रही थी।
रमेश का चेहरा थोड़ा बदल गया।
सासुमा ने तुरंत स्थिति संभाली। वे रमेश के पास गईं और बहुत ही खुलकर, कामुकता भरे स्वर में बोलीं:
“अरे रमेश बेटा… देख रहे हो ना? तुम्हारी बीवी ने आज अच्छे से मेहमान की खातिरदारी की है। देखो, इसके थन कितने खाली हो गए हैं। लूई ने पूरा दूध पी लिया।”
रमेश चुपचाप देखता रहा।
सासुमा ने मुस्कुराते हुए आगे कहा,
“और हाँ… लूई सिर्फ़ थन ही नहीं चूस रहा था। मैंने खुद इसे कहा था कि बहू की गांड को भी सहलाओ। गाय को दुहते समय पीछे से सहलाना ज़रूरी होता है ना? वैसे ही मैंने लूई से कहा, अपनी उँगली से जानकी की गांड को अच्छे से चोदो। देखो, अभी भी उँगली निकाल रहा है।” लेखिका फनलवर है।
रमेश ने थोड़ा गला साफ़ किया और बोला, “माँ… यह…”
सासुमा ने उसे बीच में ही टोक दिया और बहुत ही कामुक अंदाज़ में बोलीं,
“शर्मा मत बेटा। यह हमारा रिवाज है। गोरा मेहमान है, उसे पूरी संतुष्टि देनी चाहिए। जानकी ने बहुत अच्छे से दिया। देखो, इसका लंड भी कितना खड़ा है। जानकी ने इसे भी हाथ से दुहा है।”
जानकी शर्म से सिर झुकाए खड़ी थी। सासुमा ने जानकी की पीठ सहलाते हुए रमेश से कहा,
“रमेश, तुझे गर्व होना चाहिए। तेरी बीवी ने आज मेहमान को इतना खुश किया है। थन भी दिए, गांड भी खिलाई। अब तू भी इसे घर ले जाकर अच्छे से चोद लेना। आज इसकी चूत भी बहुत गीली है।”
रमेश ने जानकी को देखा। जानकी ने शर्माते हुए आँखें मिलाईं।
सासुमा ने अंत में मुस्कुराते हुए कहा,
“चलो अब, सब घर चलें। रात अभी बाकी है। लूई को भी साथ ले चलो। जानकी आज रात दोनों को संभालेगी, पति को भी और मेहमान को भी।”
रमेश ने कुछ नहीं कहा, बस सिर हिला दिया। संपादिका मैत्री पटेल है।
आखिरकार सब लोग घर की तरफ़ चल दिए। जानकी का पल्लू अब ठीक किया हुआ था, लेकिन उसके थन अभी भी ढीले थे और साड़ी पर दूध के निशान बाकी थे। लूई उसके बगल में चल रहा था, जबकि रमेश थोड़ा पीछे था।
सासुमा आगे-आगे चल रही थीं, मुस्कुराते हुए।
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