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Adultery मिस्टर वारिस - Adultery, Incest, Thriller

कहानी के लिये क्या सुझाव है?

  • बहोत अच्छी

    Votes: 43 62.3%
  • अच्छी है

    Votes: 20 29.0%
  • ठीक नही

    Votes: 1 1.4%
  • कुछ कमियां है (कमेंट में बताएंगे)

    Votes: 3 4.3%
  • लिखना बंद कर दे तु!!

    Votes: 2 2.9%

  • Total voters
    69

WriterTeja

New Member
45
439
54
● Season 1 Episode 7
कहानी आगे…


सुबह 7 बजे…


मेरी नींद खुली तो नानी बेड पर नही थी। मैं उठा और वॉशरूम की ओर चलने लगा। पास जाते ही बाथरूम से पानी की आवाज आने लगी। मुझे लगा नानी नहा रही थी। पर पानी के साथ और भी आवाज आ रही थी,नानी की सिसकिया।


"आह उम्म, विकि मेरे लल्ला उम्म, ऐसे की चूस उम्म,.."


इस घर मे और कौन सा विकि पैदा हो गया बे रातोरात? मैं दरवाजे के पास जाके दादी को पुकारा पर दादी कामलीला में लीन थी, इतनि की दरवाजा खुला है इसका भी उनको अंदाजा नही। दरवाजा खुला? क्यो? सेक्स के लिए इतना खुला अप्रोच नानी नही देगी। उम्र के हिसाब से सेफ्टी ली होगी। वैसे भी नाना के बाद अकेली ही रहती है कमरे में तो आदत से भूल गयी होगी कि आज मैं भी इसी कमरे में हु।


मैंने आहिस्ता आहिस्ता अंदर चला गया। नानी टब के ऊपर कॉर्नर में बैठ एक हाथ से चुचे मसल रही थी और चूत सहला रही थी । उसकी आंख बंद और मन का मोह लब्ज पर बोल रहा था,"आह विकि ममम विकि विकि मेरी चूत को चाट आह,ममममम हम्ममम्म…"


मैंने हल्के अंग से उसकी चूत पर जीभ लगाई। चूत की गर्मी ने मेरी पूरी रूह को दहला दिया। उनकी चुत के रस ने जैसे जीभ को ही पिघला दिया। मैं हल्के से नानी की चूत को चाट रहा था। नानी काफी साफ सुधरा रहना पसंद करती थो तो इसके चूत पे बाल नही थे।


कुछ देर चाटने के बाद मेरा एक हाथ जोश में उनके चुचे पर गया और मैं चूचा दबाने लगा। वो जैसे उसी मदहोशी में थी और बार बार मुझे उनको चुदने का आमंत्रण दे रही थी। काफी देर के चुसाई के बाद उन्होंने पानी छोड़ा और होश में आई। सामने देखा तो मैं आशा नंगा।


वो चौक गयी। अपने अंग को छुपाने की नाकाम कोशिश करने लगी।


"विकि, तुम तुम यहाँ क्या कर रहे हो" नजर चुराते हुए नानी बोली," बाहर निकला अभी!"


"वाह, अभी तो किसी को विकि के आने की बहोत तलभ थी, अभी धक्के मार निकलवा रही है, ये नाइंसाफी है।" मैं टोंट मारा।


नानी पूरी तरह शर्म से मुह झुकाए थी," विकि ये गलत है..ये अच्छा नही है अपने रिश्ते के लिए।तुम जावो प्लीज"


" उस दिन ऑर्गेजम ,आज मैस्टरबेशन? ये नानी कई सालों से प्यार न पाए हुए औरत का रूप है। उसे नकार के सच्चाई नही बदलेगी। "मैं।


"पर ये सही नही…" वो।


" तुम्हारी वासना का भूखा रहना भी गलत है। तुम्हारा मेरे बारे में सोचना ही गलत है। अभी तुम मेरे बारे में इस तरह बेताब हो ये मेरेतक मालूम होना भी गलत है। अभी मुझे मालूम है कि मेरी प्यारी नानी तकलीफ में है और मैं कुछ नही कर पाऊंगा… ये सब सही नही है।" मैं थोड़ा अग्रेसिवह था।


नानी एकदम सी चुप हो गयी। उसको बोलने लायक कुछ बचा ही नही। मैं वहां से निकल के बाहर आया और सीधा फार्म हाउस गया।


फार्म हाउस का पक्का रस्ता किसी कारण जाम था तो मैं बाजू के कच्चे रास्ते से जाने लगा। कुछ दूरी जाने के बाद रास्ते पर कोई दौड़ता हुआ नजर आया। रस्ता जंगल का था और दौड़ने वाला शहर का दिख रहा था। उसकी ओर देख ये तो नही लग रहा था कि वो जॉगिंग के लिए आया होगा। मैं उसको पास कर आगे निकल गया। पर जैसे ही आगे गया , मैंने आयने से उसपे नजर डाली। तो वो रजिया निकली। मैंने अगले कॉर्नर पे जाकर गाड़ी रोकी और फार्म हाउस का केमेरा चेक किया।


मेरे जाने के बाद वहां बहोत कुछ घट गया था। दादी ने जुनैद को अपने हवस के लपेटे में ले लिया था। और उसमें मौका देख रजिया फार्म हाउस से रफूचक्कर हुई थी। पर ये गयी कहा थी।


तभी रजिया दौड़ती हुई आते दिखी। गाड़ी के बाजू में आते ही मैंने झट से दरवाजा खोला। वो हड़बड़ाई।


"ये क्या बत्तीमीजी…." आधे में ही उसे रुकना पड़ा क्योंकि उसको तबतक अहसास हो गया कि सामने वाला बत्तीमीज मैं हु। उसके पैर दौड़के थके ही थे कि मुझे देख लड़खड़ाने लगे? उसको बहोत ज्यादा प्यास लगी थी। मैंने उनको पानी दिया।


"मालिक आप, यहां…" वो बहोत ज्यादा घबराई। जिस तरह पकड़े जाने पर भी ये लोग नही रुक रहे अपनी हरकतों से तो मुझे बईमानि करनी पड़ेगी ऐसे लगा।


"कल रात से तुम्हारे पीछे हु, अभी मालूम पड़ा।" मैन ब्लफ किया। उसने बड़ा सा घूंट गले मे लिटाया जो बया कर गया कि वो हार्ट अटैक से काफी दूर नही।


वो,"मालिक, वो वो.." मैं बात काटते हुए, " तुम बहोत बेशर्म हो ये तुम अच्छी तरह से जानती हो । कितनी बार रंगे हाथों मिलने के बाद भी हरकते नही बदलती। कौन थे वो लोग जीनसे मिलने गयी थीं?" मैंने फिरसे ब्लफ किया।


"वो मालिक वो.. .. .. " वो हकला रही थी।


" क्यो नाम नही याद आ रहा? याद दिला दु!?" मैं भड़के स्वर में।


" वो आपके पापा के परिवार वाले है" वो फट से बोल पड़ी। " आपके इस तरफ हो जाने से उनका बोर्ड में से शेअर कम हो सकता है और इसकी वजह से .." वो कुछ ज्यादा ही जानती थी इस बिजनेस के बारे में।


" तुम कुछ ज्यादा ही जानती हो इस झमेले के बारे में। चलो गाड़ी में बैठो। तुझसे बहोत कुछ जानना हैं।" उसे गाड़ी में बिठाकर मैं सुनसान पहाड़ी ले गया।


" अभी फटाफट बकना चालू कर दो आंटी, अभी मुझमे सहनशीलता बाकी नही, मुझे थोड़ा भी तुम्हारे झूट बोलने का डाउट आया तो पहाड़ी से नीचे की हवाई सैर करवाऊंगा।" मैंने गाड़ी रोकते ही गुस्सेल रोख से पाठशाला लेनी चालू किया।


" नही नही, बताती हु। हुआ यूं, वॉल्टन ये एक होटल इंडस्ट्री का जानामाना कॉरपोरेट है। इसके अंतर्गत अनेक फर्म का एक बोर्ड बनता है और उसमें झुनझुनवाला कॉर्पोरेशन 40%(ZVC), हर्मन कॉर्परेशन 25% (HNC) और सिंधा कॉर्पोरेशन 25%(SDC) ये तीन परिवारोका शेअर और साथ मे पब्लिक शेअर 10% शेअर के भागीदार है। झुनझुनवाला का 20 % तुम्हारे नाना और 20% तुम्हारे नानी का है। तुम्हारे असली जनदाता पिता तुम्हारे नानी के सौतेले बेटे मतलब दादी के साथ रिश्ता रख पैदा किये बेटे है। उनका हक 20 % तुम्हारे पापा को जाने वाला था। एक हाथ बहुमत आने के लिए उन्होंने आपकी मा को छोड़ दुसरी शादी की मानसी सिंधा से। सिंधा और हर्मन का कोई रूल रिवाज नही था, एक था जिसमे था कि लड़की हुई तो उसका पति या उसके बेटे को जो उसके पति का अंश हो उसको मिलेगा, बेटी हुई तो उसके पति या बेटे को। इस तरह से तुम्हारे पापा के खुद के 45 % हो जाते। फिर कोई बच्चा पैदा कर उसकी शादी हर्मन के वारिस से कर कुछ % वहां से लेते याफिर पब्लिक शेअर खरीद लेते। पर हुआ यूं कि टाइमिंग चुका और तुम्हारे पापा नाना के जाने से पहले ही तुम्हारी माँ को तलाक दे दिए। फिर नाना ने पहले ही अपने शेअर अपने पोते के नाम कर दिया वकील की मद्त से। "


"इतने साल में मानसी को बेटी हुई । अभी दो रास्ते थे, या तो तुम उनके पास जाओ बेटा बन याफिर जमाई बन। याफिर तुम्हारा कत्ल कर दूसरे बेटे के लिए ट्राय करते याफिर, झूठा तैयार कर लेते। तुम्हारे सौतेले पति को बच्चा हो नही सकता तो वहां से खतरा नही था। अभी तुम्हारे २०% और पब्लिक के 10% टारगेट पर है। अभी दादी ने भी अपने 20% आपके नाम कर दिए है। तो 40 पूरे। सभी बोर्ड डायरेक्टर के दावेदार में आपका रेप्युटेशन, कोलिफिकेशन सही है तो आपका बोर्ड पर चु आना तय है। आपको सिर्फ पब्लिक ओपिनियन और शेयर खरीदने है। बाकी मैं इसमे सिर्फ अपना काम इमान से कर रही हु। मैं नौकर हु और दादी का कहना मां रही थी। आखिर में एक ही बोल सकती हूं परफेक्ट कोलिफाइड विथ मोस्ट शेअर होल्डर होने के वजह से आपकी जान पर हमला होना रुकेगा नही, इसबार सिंधा हुए, हर्मन बाकी है। उनके साथ जुड़े लोग अलग से। बस मेरे पास इतनाही है" वो बड़ी सांस छोड़ शांत हुई।


मेरा सर चकराने लगा था," ये पब्लिक ओपिनियन, शेअर कैसे खरीदते है। और सबसे जरूरी बात तुम कहा गयी थी अभी?" मैंने सवाल बढाया।


" पब्लिक ओपिनियन पब्लिक प्रभावी आदमी जैसे सोशियल मीडिया स्टार, फ़िल्म स्टार, समाजसेवी लोग, राजनेताओं के आड़े में कमाए जाते है। ये पब्लिक शेअर के असली होल्डर यही लोग होते है। ब्यूटी पार्लर, मॉल, रियल इस्टेट इनके कई कॉन्ट्रैक्ट पोलिटिकल लोक और एफिलेटेड एम्बेसडर प्रभावी लोक रहते है। किसके पास कितने है ये ऑक्शन पे मालूम होता है। इसके लिए वॉल्टन का निष्पक्ष एडमिनिस्ट्रेशन काम करता है। और रही बात मुझे तुम्हारे पापा ने कॉल किया था, उनको मैंने बोल दिया कि हमारी पोल खुल गयी है तो वो मुझे कहि दूर भेजने वाले थे।"


मैं,"तुम्हे ये सब दावपेंच मालूम है वो दादी को मालूम है?"


रजिया," नही!!"


"तो पागल औरत, तुम्हे हमेशा के लिए दूर भेजने के लिए बुलावा आया था। शेअर रूल के हिसाब से वो दादी को नही मारेगा, तुम्हको मार कर दादी को वैसे ही डर लगेगा। इसीलिए मेंन रोड ब्लॉक किया जिससे तुम्हारा बाहर जाने का कोई अंश न मिले और तुम्हारे खून में मैं फस जाऊ। (रजिया उनके प्लान को जानति थी, मेरे सामने सब बके ना इसलिए ये प्लान) समझी अक्ल की अंधी, जो आदमी अपने बेटे को मार सकता है वो तुम्हे चुटकी में उड़ा देगा।" मैं कुत्सित हँसा। रजिया का चेहरा देख उसको वो किस झमेले में फंसी उसका अहसास होणे के चिन्ह दिखाई दिये।


"अब मैं क्या करूँ? मालिक अब मैं क्या करूँ? कहा जाऊ? मेरा बेटा?" रजिया को जैसें सदमा सा लगा। जिसके लिए इतने पापड़ बेले अभी उसकी जान भी खतरे में जा सकती थी। वैसे जुनैद काफी माहिर था इस मौहोल से। हम स्ट्रीट फाइट में बहोत बार गैंग के झगड़ो में फस चुके थे। पर तब भी उसके लिए अभी खतरा ज्यादा था।


" मेरे प्यारे दोस्त की अम्मी हो इसलिए मैं मदद कर दूंगा। पर अब से वफादार मेरी रहोगी ये मन मे ठान लो, पलटी तो मैं ही तुम्हारा गेम कर दूंगा" मैंने फांसा डाला।


मैंने गाड़ी निकाली और कच्चे रास्ते से गेस्ट हाउस की ओर जाने लगे। कुछ रास्ता आगे जाने के बाद कोई गाड़ी हमारा कई वक्त से पीछा कर रही थी ऐसे मुझे लगा और मैने उसे चकमा दिया। एके झाड़ी में गाड़ी घुसा कर मैंने रजिया के मुह को दबाकर शांत किया।


झाड़ी के आगे कुछ अंतर पे गाड़ी रोक 2 लोग नीचे उतरे और हमे ढूंढने लगे। मैंने सेफ्टी के लिए कुछ मिलता है क्या वो गाड़ी में ढूंढने लगा तो सामने की ड्रोवहर में रिवॉल्वर थी। मैंने वो ली और रजिया को पीछे लेके रास्ते पर आया। हमे देख दोनों बेस बैट लेकर हमारी ओर भागे।


वो जैसे ही बीच रास्ते आए मैंने एक के पैर पर गोली चलाई। उसकी हालत देख दूसरा वाला सरेंडर हुआ।


"मुझे मत मारो, प्लीज मुझे मत मारो"वो गिड़गिड़ाने लगा।


"नीचे बैठ और हांथ को ऊपर कर" मैं रावडी स्टाइल में बोला। वो सरेंडर पोजिशन लिया वैसे मैने पूछा," बकते जा।"


वो," हमे कहा गया था कि कच्ची सड़क पर एक औरत दौड़ती आएगी उसको टपका देना और मेन रास्ते पर एक्सीडेंट कराके आपको यहां आने के लिए मजबूर करके, आपका उस बॉडी के साथी फ़ोटो लिकालना, पर आप थोड़ा पहिले आ गए। "


"क्या बोला था मैंने रजिया" मैं पूरे कॉन्फिडेंस में। " मेरा टाइमिंग चूक गया नही तो आज पंगा था। रजिया ठंडी पड़ गयी थी। मैंने उसको उसके साथी के साथ चुपचाप शहर छोड़ने बोला और उनको वहां से छोड़ दिया। उनको मार कर पूरे अंडरवर्ल्ड से पंगा नही लेना था। और मैं घुमा रजिया की ओर।


"रजिया आंटी, रजिया…" मेरे पुकारने के सदमे में वो मुझे कस के गले लग गयी। उसका शरीर डर से ठंडा पड़ गया था। " मुझे बचा लो मालिक, मुझे बचा लो, पूरी जिंदगी दासी बन जाऊंगी, बस मुझे मरना नही है। मुझे बचालो।" मेरे बाहों में वो रोने लगीं उसकी पकड़ मजबूत हो रही थी।


मैंने उसको गाड़ी में बैठाया और जुनैद को कॉल किया। उसको सब घटनाए समझाई और दादी को हवेली ले जाने बोला। उनके जान पर भी आने की संभावना थी। और जुनैद के भी। हम फार्म हाउस पहुंचने तक दोनों निकल गए थे।


मैं रजिया को लेके बेडरूम में गया और उसे फ्रेश होने बोला। मैं भी उसके बाद फ्रेश होने की तैयारी किया। उसको बाथरूम में छोड़ मैंने फार्म हाउस का मुआयना किया। कोई अन्य केमेरा, कोई डिवाइस, कोई खतरा है क्या? ये सब मुआयना करते वक्त मैं बाथरूम तक आ गया।


बाथरूम के अंदर शॉवर में रजिया खड़ी थी। बेहद खूबसूरत औरत थी रजिया। सावला रंग, गोरिया से भी ज्यादा जच रहा था और उतनाही उसे मादक बना रहा था। रजिया उम्र में ज्यादा थी पर शरीर उसका सुडौल था। गांड उभरी थी। चुचे भी काफी गोलाई में थे। चुट पर थोडेसे बाल, निप्पल्स तो अंगूर को भी शर्मा दे।



मैं उसी मदहोशी में जाके उसको पीछे से चिपका।


"मालिक आप क्या कर रहे हो…" वो हड़बड़ाई!!


"कुछ नही, दासी के यौन का रसपान करने की दिल मे इच्छा उमड़ आयी है" मैं हवसी स्वर में बोल गया।


"पर मैं तो ठहरी बूढ़ी और ऊपर से मा…."वो आगे कुछ बिन बुनियादी संस्कारी भाषण दे उसके पहले मैंने उनको अपनी ओर खींचा और बड़े बड़े गोले दबा दिए।


"आह, मालिक, ममम" वो सीसकी। मैंने फिर दबाया, निपल्स नोचा वो फिर वैसे ही सिस्काई। मैं उसके पूरे बदन पर ओंठो से अपने हवस की छांव छोड़ रहा था। मेरा लन्ड पेंट के अंदर से ही उनकी गांड के छेद में घुसने की पूरी कोशिश में था। मैंने शॉवर बन्द कर उसे बाहर लाया और बेड पर धकेला। बेड पर गिरते ही उसकी चुट कि दशा भी खुले गुफा की तरह हो गयी।


मैं नंगा होकर उसके ऊपर गया और ……


______ पढ़ते रहिये आगे, मिलते है जल्द______




भैयाजी, नाम के नही काम के भी लेखक है तो कुछ कॉन्ट्रैक्ट पूरे करने होते है नोव्हेल्स के, इसलिए इस स्टोरी में कभी कबार देरी हो जाएगी। विलंब के लिए क्षमा। स्टोरी अभिप्राय जरूर देना 😀✌️
 

MAD DEVIL

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● Season 1 Episode 7
कहानी आगे…


सुबह 7 बजे…


मेरी नींद खुली तो नानी बेड पर नही थी। मैं उठा और वॉशरूम की ओर चलने लगा। पास जाते ही बाथरूम से पानी की आवाज आने लगी। मुझे लगा नानी नहा रही थी। पर पानी के साथ और भी आवाज आ रही थी,नानी की सिसकिया।


"आह उम्म, विकि मेरे लल्ला उम्म, ऐसे की चूस उम्म,.."


इस घर मे और कौन सा विकि पैदा हो गया बे रातोरात? मैं दरवाजे के पास जाके दादी को पुकारा पर दादी कामलीला में लीन थी, इतनि की दरवाजा खुला है इसका भी उनको अंदाजा नही। दरवाजा खुला? क्यो? सेक्स के लिए इतना खुला अप्रोच नानी नही देगी। उम्र के हिसाब से सेफ्टी ली होगी। वैसे भी नाना के बाद अकेली ही रहती है कमरे में तो आदत से भूल गयी होगी कि आज मैं भी इसी कमरे में हु।


मैंने आहिस्ता आहिस्ता अंदर चला गया। नानी टब के ऊपर कॉर्नर में बैठ एक हाथ से चुचे मसल रही थी और चूत सहला रही थी । उसकी आंख बंद और मन का मोह लब्ज पर बोल रहा था,"आह विकि ममम विकि विकि मेरी चूत को चाट आह,ममममम हम्ममम्म…"


मैंने हल्के अंग से उसकी चूत पर जीभ लगाई। चूत की गर्मी ने मेरी पूरी रूह को दहला दिया। उनकी चुत के रस ने जैसे जीभ को ही पिघला दिया। मैं हल्के से नानी की चूत को चाट रहा था। नानी काफी साफ सुधरा रहना पसंद करती थो तो इसके चूत पे बाल नही थे।


कुछ देर चाटने के बाद मेरा एक हाथ जोश में उनके चुचे पर गया और मैं चूचा दबाने लगा। वो जैसे उसी मदहोशी में थी और बार बार मुझे उनको चुदने का आमंत्रण दे रही थी। काफी देर के चुसाई के बाद उन्होंने पानी छोड़ा और होश में आई। सामने देखा तो मैं आशा नंगा।


वो चौक गयी। अपने अंग को छुपाने की नाकाम कोशिश करने लगी।


"विकि, तुम तुम यहाँ क्या कर रहे हो" नजर चुराते हुए नानी बोली," बाहर निकला अभी!"


"वाह, अभी तो किसी को विकि के आने की बहोत तलभ थी, अभी धक्के मार निकलवा रही है, ये नाइंसाफी है।" मैं टोंट मारा।


नानी पूरी तरह शर्म से मुह झुकाए थी," विकि ये गलत है..ये अच्छा नही है अपने रिश्ते के लिए।तुम जावो प्लीज"


" उस दिन ऑर्गेजम ,आज मैस्टरबेशन? ये नानी कई सालों से प्यार न पाए हुए औरत का रूप है। उसे नकार के सच्चाई नही बदलेगी। "मैं।


"पर ये सही नही…" वो।


" तुम्हारी वासना का भूखा रहना भी गलत है। तुम्हारा मेरे बारे में सोचना ही गलत है। अभी तुम मेरे बारे में इस तरह बेताब हो ये मेरेतक मालूम होना भी गलत है। अभी मुझे मालूम है कि मेरी प्यारी नानी तकलीफ में है और मैं कुछ नही कर पाऊंगा… ये सब सही नही है।" मैं थोड़ा अग्रेसिवह था।


नानी एकदम सी चुप हो गयी। उसको बोलने लायक कुछ बचा ही नही। मैं वहां से निकल के बाहर आया और सीधा फार्म हाउस गया।


फार्म हाउस का पक्का रस्ता किसी कारण जाम था तो मैं बाजू के कच्चे रास्ते से जाने लगा। कुछ दूरी जाने के बाद रास्ते पर कोई दौड़ता हुआ नजर आया। रस्ता जंगल का था और दौड़ने वाला शहर का दिख रहा था। उसकी ओर देख ये तो नही लग रहा था कि वो जॉगिंग के लिए आया होगा। मैं उसको पास कर आगे निकल गया। पर जैसे ही आगे गया , मैंने आयने से उसपे नजर डाली। तो वो रजिया निकली। मैंने अगले कॉर्नर पे जाकर गाड़ी रोकी और फार्म हाउस का केमेरा चेक किया।


मेरे जाने के बाद वहां बहोत कुछ घट गया था। दादी ने जुनैद को अपने हवस के लपेटे में ले लिया था। और उसमें मौका देख रजिया फार्म हाउस से रफूचक्कर हुई थी। पर ये गयी कहा थी।


तभी रजिया दौड़ती हुई आते दिखी। गाड़ी के बाजू में आते ही मैंने झट से दरवाजा खोला। वो हड़बड़ाई।


"ये क्या बत्तीमीजी…." आधे में ही उसे रुकना पड़ा क्योंकि उसको तबतक अहसास हो गया कि सामने वाला बत्तीमीज मैं हु। उसके पैर दौड़के थके ही थे कि मुझे देख लड़खड़ाने लगे? उसको बहोत ज्यादा प्यास लगी थी। मैंने उनको पानी दिया।


"मालिक आप, यहां…" वो बहोत ज्यादा घबराई। जिस तरह पकड़े जाने पर भी ये लोग नही रुक रहे अपनी हरकतों से तो मुझे बईमानि करनी पड़ेगी ऐसे लगा।


"कल रात से तुम्हारे पीछे हु, अभी मालूम पड़ा।" मैन ब्लफ किया। उसने बड़ा सा घूंट गले मे लिटाया जो बया कर गया कि वो हार्ट अटैक से काफी दूर नही।


वो,"मालिक, वो वो.." मैं बात काटते हुए, " तुम बहोत बेशर्म हो ये तुम अच्छी तरह से जानती हो । कितनी बार रंगे हाथों मिलने के बाद भी हरकते नही बदलती। कौन थे वो लोग जीनसे मिलने गयी थीं?" मैंने फिरसे ब्लफ किया।


"वो मालिक वो.. .. .. " वो हकला रही थी।


" क्यो नाम नही याद आ रहा? याद दिला दु!?" मैं भड़के स्वर में।


" वो आपके पापा के परिवार वाले है" वो फट से बोल पड़ी। " आपके इस तरफ हो जाने से उनका बोर्ड में से शेअर कम हो सकता है और इसकी वजह से .." वो कुछ ज्यादा ही जानती थी इस बिजनेस के बारे में।


" तुम कुछ ज्यादा ही जानती हो इस झमेले के बारे में। चलो गाड़ी में बैठो। तुझसे बहोत कुछ जानना हैं।" उसे गाड़ी में बिठाकर मैं सुनसान पहाड़ी ले गया।


" अभी फटाफट बकना चालू कर दो आंटी, अभी मुझमे सहनशीलता बाकी नही, मुझे थोड़ा भी तुम्हारे झूट बोलने का डाउट आया तो पहाड़ी से नीचे की हवाई सैर करवाऊंगा।" मैंने गाड़ी रोकते ही गुस्सेल रोख से पाठशाला लेनी चालू किया।


" नही नही, बताती हु। हुआ यूं, वॉल्टन ये एक होटल इंडस्ट्री का जानामाना कॉरपोरेट है। इसके अंतर्गत अनेक फर्म का एक बोर्ड बनता है और उसमें झुनझुनवाला कॉर्पोरेशन 40%(ZVC), हर्मन कॉर्परेशन 25% (HNC) और सिंधा कॉर्पोरेशन 25%(SDC) ये तीन परिवारोका शेअर और साथ मे पब्लिक शेअर 10% शेअर के भागीदार है। झुनझुनवाला का 20 % तुम्हारे नाना और 20% तुम्हारे नानी का है। तुम्हारे असली जनदाता पिता तुम्हारे नानी के सौतेले बेटे मतलब दादी के साथ रिश्ता रख पैदा किये बेटे है। उनका हक 20 % तुम्हारे पापा को जाने वाला था। एक हाथ बहुमत आने के लिए उन्होंने आपकी मा को छोड़ दुसरी शादी की मानसी सिंधा से। सिंधा और हर्मन का कोई रूल रिवाज नही था, एक था जिसमे था कि लड़की हुई तो उसका पति या उसके बेटे को जो उसके पति का अंश हो उसको मिलेगा, बेटी हुई तो उसके पति या बेटे को। इस तरह से तुम्हारे पापा के खुद के 45 % हो जाते। फिर कोई बच्चा पैदा कर उसकी शादी हर्मन के वारिस से कर कुछ % वहां से लेते याफिर पब्लिक शेअर खरीद लेते। पर हुआ यूं कि टाइमिंग चुका और तुम्हारे पापा नाना के जाने से पहले ही तुम्हारी माँ को तलाक दे दिए। फिर नाना ने पहले ही अपने शेअर अपने पोते के नाम कर दिया वकील की मद्त से। "


"इतने साल में मानसी को बेटी हुई । अभी दो रास्ते थे, या तो तुम उनके पास जाओ बेटा बन याफिर जमाई बन। याफिर तुम्हारा कत्ल कर दूसरे बेटे के लिए ट्राय करते याफिर, झूठा तैयार कर लेते। तुम्हारे सौतेले पति को बच्चा हो नही सकता तो वहां से खतरा नही था। अभी तुम्हारे २०% और पब्लिक के 10% टारगेट पर है। अभी दादी ने भी अपने 20% आपके नाम कर दिए है। तो 40 पूरे। सभी बोर्ड डायरेक्टर के दावेदार में आपका रेप्युटेशन, कोलिफिकेशन सही है तो आपका बोर्ड पर चु आना तय है। आपको सिर्फ पब्लिक ओपिनियन और शेयर खरीदने है। बाकी मैं इसमे सिर्फ अपना काम इमान से कर रही हु। मैं नौकर हु और दादी का कहना मां रही थी। आखिर में एक ही बोल सकती हूं परफेक्ट कोलिफाइड विथ मोस्ट शेअर होल्डर होने के वजह से आपकी जान पर हमला होना रुकेगा नही, इसबार सिंधा हुए, हर्मन बाकी है। उनके साथ जुड़े लोग अलग से। बस मेरे पास इतनाही है" वो बड़ी सांस छोड़ शांत हुई।


मेरा सर चकराने लगा था," ये पब्लिक ओपिनियन, शेअर कैसे खरीदते है। और सबसे जरूरी बात तुम कहा गयी थी अभी?" मैंने सवाल बढाया।


" पब्लिक ओपिनियन पब्लिक प्रभावी आदमी जैसे सोशियल मीडिया स्टार, फ़िल्म स्टार, समाजसेवी लोग, राजनेताओं के आड़े में कमाए जाते है। ये पब्लिक शेअर के असली होल्डर यही लोग होते है। ब्यूटी पार्लर, मॉल, रियल इस्टेट इनके कई कॉन्ट्रैक्ट पोलिटिकल लोक और एफिलेटेड एम्बेसडर प्रभावी लोक रहते है। किसके पास कितने है ये ऑक्शन पे मालूम होता है। इसके लिए वॉल्टन का निष्पक्ष एडमिनिस्ट्रेशन काम करता है। और रही बात मुझे तुम्हारे पापा ने कॉल किया था, उनको मैंने बोल दिया कि हमारी पोल खुल गयी है तो वो मुझे कहि दूर भेजने वाले थे।"


मैं,"तुम्हे ये सब दावपेंच मालूम है वो दादी को मालूम है?"


रजिया," नही!!"


"तो पागल औरत, तुम्हे हमेशा के लिए दूर भेजने के लिए बुलावा आया था। शेअर रूल के हिसाब से वो दादी को नही मारेगा, तुम्हको मार कर दादी को वैसे ही डर लगेगा। इसीलिए मेंन रोड ब्लॉक किया जिससे तुम्हारा बाहर जाने का कोई अंश न मिले और तुम्हारे खून में मैं फस जाऊ। (रजिया उनके प्लान को जानति थी, मेरे सामने सब बके ना इसलिए ये प्लान) समझी अक्ल की अंधी, जो आदमी अपने बेटे को मार सकता है वो तुम्हे चुटकी में उड़ा देगा।" मैं कुत्सित हँसा। रजिया का चेहरा देख उसको वो किस झमेले में फंसी उसका अहसास होणे के चिन्ह दिखाई दिये।


"अब मैं क्या करूँ? मालिक अब मैं क्या करूँ? कहा जाऊ? मेरा बेटा?" रजिया को जैसें सदमा सा लगा। जिसके लिए इतने पापड़ बेले अभी उसकी जान भी खतरे में जा सकती थी। वैसे जुनैद काफी माहिर था इस मौहोल से। हम स्ट्रीट फाइट में बहोत बार गैंग के झगड़ो में फस चुके थे। पर तब भी उसके लिए अभी खतरा ज्यादा था।


" मेरे प्यारे दोस्त की अम्मी हो इसलिए मैं मदद कर दूंगा। पर अब से वफादार मेरी रहोगी ये मन मे ठान लो, पलटी तो मैं ही तुम्हारा गेम कर दूंगा" मैंने फांसा डाला।


मैंने गाड़ी निकाली और कच्चे रास्ते से गेस्ट हाउस की ओर जाने लगे। कुछ रास्ता आगे जाने के बाद कोई गाड़ी हमारा कई वक्त से पीछा कर रही थी ऐसे मुझे लगा और मैने उसे चकमा दिया। एके झाड़ी में गाड़ी घुसा कर मैंने रजिया के मुह को दबाकर शांत किया।


झाड़ी के आगे कुछ अंतर पे गाड़ी रोक 2 लोग नीचे उतरे और हमे ढूंढने लगे। मैंने सेफ्टी के लिए कुछ मिलता है क्या वो गाड़ी में ढूंढने लगा तो सामने की ड्रोवहर में रिवॉल्वर थी। मैंने वो ली और रजिया को पीछे लेके रास्ते पर आया। हमे देख दोनों बेस बैट लेकर हमारी ओर भागे।


वो जैसे ही बीच रास्ते आए मैंने एक के पैर पर गोली चलाई। उसकी हालत देख दूसरा वाला सरेंडर हुआ।


"मुझे मत मारो, प्लीज मुझे मत मारो"वो गिड़गिड़ाने लगा।


"नीचे बैठ और हांथ को ऊपर कर" मैं रावडी स्टाइल में बोला। वो सरेंडर पोजिशन लिया वैसे मैने पूछा," बकते जा।"


वो," हमे कहा गया था कि कच्ची सड़क पर एक औरत दौड़ती आएगी उसको टपका देना और मेन रास्ते पर एक्सीडेंट कराके आपको यहां आने के लिए मजबूर करके, आपका उस बॉडी के साथी फ़ोटो लिकालना, पर आप थोड़ा पहिले आ गए। "


"क्या बोला था मैंने रजिया" मैं पूरे कॉन्फिडेंस में। " मेरा टाइमिंग चूक गया नही तो आज पंगा था। रजिया ठंडी पड़ गयी थी। मैंने उसको उसके साथी के साथ चुपचाप शहर छोड़ने बोला और उनको वहां से छोड़ दिया। उनको मार कर पूरे अंडरवर्ल्ड से पंगा नही लेना था। और मैं घुमा रजिया की ओर।


"रजिया आंटी, रजिया…" मेरे पुकारने के सदमे में वो मुझे कस के गले लग गयी। उसका शरीर डर से ठंडा पड़ गया था। " मुझे बचा लो मालिक, मुझे बचा लो, पूरी जिंदगी दासी बन जाऊंगी, बस मुझे मरना नही है। मुझे बचालो।" मेरे बाहों में वो रोने लगीं उसकी पकड़ मजबूत हो रही थी।


मैंने उसको गाड़ी में बैठाया और जुनैद को कॉल किया। उसको सब घटनाए समझाई और दादी को हवेली ले जाने बोला। उनके जान पर भी आने की संभावना थी। और जुनैद के भी। हम फार्म हाउस पहुंचने तक दोनों निकल गए थे।


मैं रजिया को लेके बेडरूम में गया और उसे फ्रेश होने बोला। मैं भी उसके बाद फ्रेश होने की तैयारी किया। उसको बाथरूम में छोड़ मैंने फार्म हाउस का मुआयना किया। कोई अन्य केमेरा, कोई डिवाइस, कोई खतरा है क्या? ये सब मुआयना करते वक्त मैं बाथरूम तक आ गया।


बाथरूम के अंदर शॉवर में रजिया खड़ी थी। बेहद खूबसूरत औरत थी रजिया। सावला रंग, गोरिया से भी ज्यादा जच रहा था और उतनाही उसे मादक बना रहा था। रजिया उम्र में ज्यादा थी पर शरीर उसका सुडौल था। गांड उभरी थी। चुचे भी काफी गोलाई में थे। चुट पर थोडेसे बाल, निप्पल्स तो अंगूर को भी शर्मा दे।



मैं उसी मदहोशी में जाके उसको पीछे से चिपका।


"मालिक आप क्या कर रहे हो…" वो हड़बड़ाई!!


"कुछ नही, दासी के यौन का रसपान करने की दिल मे इच्छा उमड़ आयी है" मैं हवसी स्वर में बोल गया।


"पर मैं तो ठहरी बूढ़ी और ऊपर से मा…."वो आगे कुछ बिन बुनियादी संस्कारी भाषण दे उसके पहले मैंने उनको अपनी ओर खींचा और बड़े बड़े गोले दबा दिए।


"आह, मालिक, ममम" वो सीसकी। मैंने फिर दबाया, निपल्स नोचा वो फिर वैसे ही सिस्काई। मैं उसके पूरे बदन पर ओंठो से अपने हवस की छांव छोड़ रहा था। मेरा लन्ड पेंट के अंदर से ही उनकी गांड के छेद में घुसने की पूरी कोशिश में था। मैंने शॉवर बन्द कर उसे बाहर लाया और बेड पर धकेला। बेड पर गिरते ही उसकी चुट कि दशा भी खुले गुफा की तरह हो गयी।


मैं नंगा होकर उसके ऊपर गया और ……


______ पढ़ते रहिये आगे, मिलते है जल्द______




भैयाजी, नाम के नही काम के भी लेखक है तो कुछ कॉन्ट्रैक्ट पूरे करने होते है नोव्हेल्स के, इसलिए इस स्टोरी में कभी कबार देरी हो जाएगी। विलंब के लिए क्षमा। स्टोरी अभिप्राय जरूर देना 😀✌️
Pyasi Dadi
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Pyasi Nani
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Pyasi Maa
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Or in sb ke bech me fsaa apna Hero Q ki ye khel sirf Hawas ka ni Daulat ka hai
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Lekin ek bat smj ni aay Hero ka baap kha gyb hai samne kb aayga
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Ho na ho Daulat ke is khel me DADI ya NANI inme se he koi asli Khiladi hai Shatranj ka jo khel khelrha hai Q ki mujhe yhe kirdar lgte hai khel ke jha se ye suru hua hai
.
Waise Hero bi smart hai khe na khe se information nikal le rha hai family or unke background ki ab Dadi to pehle niche aagy Hero ke ab jldi he Nani ka number bi aayga lekin abi to Rajiya tyaar hai
.
Yr in sb me Hero ki Maa bi ahem hai bhle apne real pati ke sath ni hai but janti to hai wo bi apne ex pati ke bare me bhale ghr me hai lekin jankari to apne bete ki bi thi use khe na khe suru ki mulakat me uska rona natak ni tha ye bat alag hai apne second pati ke gal me chaatee pdne se Darr gy thi 😉😉😉😉
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UPDATE MJEDAR HAI
PLZ BHAI KUCH STORY KO FAST KRO JANE Q INTZAAR NI HOTA HAI YR AB ORR
JLDI update Dene ki koshish krna bhai
 

Naik

Well-Known Member
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● Season 1 Episode 7
कहानी आगे…


सुबह 7 बजे…


मेरी नींद खुली तो नानी बेड पर नही थी। मैं उठा और वॉशरूम की ओर चलने लगा। पास जाते ही बाथरूम से पानी की आवाज आने लगी। मुझे लगा नानी नहा रही थी। पर पानी के साथ और भी आवाज आ रही थी,नानी की सिसकिया।


"आह उम्म, विकि मेरे लल्ला उम्म, ऐसे की चूस उम्म,.."


इस घर मे और कौन सा विकि पैदा हो गया बे रातोरात? मैं दरवाजे के पास जाके दादी को पुकारा पर दादी कामलीला में लीन थी, इतनि की दरवाजा खुला है इसका भी उनको अंदाजा नही। दरवाजा खुला? क्यो? सेक्स के लिए इतना खुला अप्रोच नानी नही देगी। उम्र के हिसाब से सेफ्टी ली होगी। वैसे भी नाना के बाद अकेली ही रहती है कमरे में तो आदत से भूल गयी होगी कि आज मैं भी इसी कमरे में हु।


मैंने आहिस्ता आहिस्ता अंदर चला गया। नानी टब के ऊपर कॉर्नर में बैठ एक हाथ से चुचे मसल रही थी और चूत सहला रही थी । उसकी आंख बंद और मन का मोह लब्ज पर बोल रहा था,"आह विकि ममम विकि विकि मेरी चूत को चाट आह,ममममम हम्ममम्म…"


मैंने हल्के अंग से उसकी चूत पर जीभ लगाई। चूत की गर्मी ने मेरी पूरी रूह को दहला दिया। उनकी चुत के रस ने जैसे जीभ को ही पिघला दिया। मैं हल्के से नानी की चूत को चाट रहा था। नानी काफी साफ सुधरा रहना पसंद करती थो तो इसके चूत पे बाल नही थे।


कुछ देर चाटने के बाद मेरा एक हाथ जोश में उनके चुचे पर गया और मैं चूचा दबाने लगा। वो जैसे उसी मदहोशी में थी और बार बार मुझे उनको चुदने का आमंत्रण दे रही थी। काफी देर के चुसाई के बाद उन्होंने पानी छोड़ा और होश में आई। सामने देखा तो मैं आशा नंगा।


वो चौक गयी। अपने अंग को छुपाने की नाकाम कोशिश करने लगी।


"विकि, तुम तुम यहाँ क्या कर रहे हो" नजर चुराते हुए नानी बोली," बाहर निकला अभी!"


"वाह, अभी तो किसी को विकि के आने की बहोत तलभ थी, अभी धक्के मार निकलवा रही है, ये नाइंसाफी है।" मैं टोंट मारा।


नानी पूरी तरह शर्म से मुह झुकाए थी," विकि ये गलत है..ये अच्छा नही है अपने रिश्ते के लिए।तुम जावो प्लीज"


" उस दिन ऑर्गेजम ,आज मैस्टरबेशन? ये नानी कई सालों से प्यार न पाए हुए औरत का रूप है। उसे नकार के सच्चाई नही बदलेगी। "मैं।


"पर ये सही नही…" वो।


" तुम्हारी वासना का भूखा रहना भी गलत है। तुम्हारा मेरे बारे में सोचना ही गलत है। अभी तुम मेरे बारे में इस तरह बेताब हो ये मेरेतक मालूम होना भी गलत है। अभी मुझे मालूम है कि मेरी प्यारी नानी तकलीफ में है और मैं कुछ नही कर पाऊंगा… ये सब सही नही है।" मैं थोड़ा अग्रेसिवह था।


नानी एकदम सी चुप हो गयी। उसको बोलने लायक कुछ बचा ही नही। मैं वहां से निकल के बाहर आया और सीधा फार्म हाउस गया।


फार्म हाउस का पक्का रस्ता किसी कारण जाम था तो मैं बाजू के कच्चे रास्ते से जाने लगा। कुछ दूरी जाने के बाद रास्ते पर कोई दौड़ता हुआ नजर आया। रस्ता जंगल का था और दौड़ने वाला शहर का दिख रहा था। उसकी ओर देख ये तो नही लग रहा था कि वो जॉगिंग के लिए आया होगा। मैं उसको पास कर आगे निकल गया। पर जैसे ही आगे गया , मैंने आयने से उसपे नजर डाली। तो वो रजिया निकली। मैंने अगले कॉर्नर पे जाकर गाड़ी रोकी और फार्म हाउस का केमेरा चेक किया।


मेरे जाने के बाद वहां बहोत कुछ घट गया था। दादी ने जुनैद को अपने हवस के लपेटे में ले लिया था। और उसमें मौका देख रजिया फार्म हाउस से रफूचक्कर हुई थी। पर ये गयी कहा थी।


तभी रजिया दौड़ती हुई आते दिखी। गाड़ी के बाजू में आते ही मैंने झट से दरवाजा खोला। वो हड़बड़ाई।


"ये क्या बत्तीमीजी…." आधे में ही उसे रुकना पड़ा क्योंकि उसको तबतक अहसास हो गया कि सामने वाला बत्तीमीज मैं हु। उसके पैर दौड़के थके ही थे कि मुझे देख लड़खड़ाने लगे? उसको बहोत ज्यादा प्यास लगी थी। मैंने उनको पानी दिया।


"मालिक आप, यहां…" वो बहोत ज्यादा घबराई। जिस तरह पकड़े जाने पर भी ये लोग नही रुक रहे अपनी हरकतों से तो मुझे बईमानि करनी पड़ेगी ऐसे लगा।


"कल रात से तुम्हारे पीछे हु, अभी मालूम पड़ा।" मैन ब्लफ किया। उसने बड़ा सा घूंट गले मे लिटाया जो बया कर गया कि वो हार्ट अटैक से काफी दूर नही।


वो,"मालिक, वो वो.." मैं बात काटते हुए, " तुम बहोत बेशर्म हो ये तुम अच्छी तरह से जानती हो । कितनी बार रंगे हाथों मिलने के बाद भी हरकते नही बदलती। कौन थे वो लोग जीनसे मिलने गयी थीं?" मैंने फिरसे ब्लफ किया।


"वो मालिक वो.. .. .. " वो हकला रही थी।


" क्यो नाम नही याद आ रहा? याद दिला दु!?" मैं भड़के स्वर में।


" वो आपके पापा के परिवार वाले है" वो फट से बोल पड़ी। " आपके इस तरफ हो जाने से उनका बोर्ड में से शेअर कम हो सकता है और इसकी वजह से .." वो कुछ ज्यादा ही जानती थी इस बिजनेस के बारे में।


" तुम कुछ ज्यादा ही जानती हो इस झमेले के बारे में। चलो गाड़ी में बैठो। तुझसे बहोत कुछ जानना हैं।" उसे गाड़ी में बिठाकर मैं सुनसान पहाड़ी ले गया।


" अभी फटाफट बकना चालू कर दो आंटी, अभी मुझमे सहनशीलता बाकी नही, मुझे थोड़ा भी तुम्हारे झूट बोलने का डाउट आया तो पहाड़ी से नीचे की हवाई सैर करवाऊंगा।" मैंने गाड़ी रोकते ही गुस्सेल रोख से पाठशाला लेनी चालू किया।


" नही नही, बताती हु। हुआ यूं, वॉल्टन ये एक होटल इंडस्ट्री का जानामाना कॉरपोरेट है। इसके अंतर्गत अनेक फर्म का एक बोर्ड बनता है और उसमें झुनझुनवाला कॉर्पोरेशन 40%(ZVC), हर्मन कॉर्परेशन 25% (HNC) और सिंधा कॉर्पोरेशन 25%(SDC) ये तीन परिवारोका शेअर और साथ मे पब्लिक शेअर 10% शेअर के भागीदार है। झुनझुनवाला का 20 % तुम्हारे नाना और 20% तुम्हारे नानी का है। तुम्हारे असली जनदाता पिता तुम्हारे नानी के सौतेले बेटे मतलब दादी के साथ रिश्ता रख पैदा किये बेटे है। उनका हक 20 % तुम्हारे पापा को जाने वाला था। एक हाथ बहुमत आने के लिए उन्होंने आपकी मा को छोड़ दुसरी शादी की मानसी सिंधा से। सिंधा और हर्मन का कोई रूल रिवाज नही था, एक था जिसमे था कि लड़की हुई तो उसका पति या उसके बेटे को जो उसके पति का अंश हो उसको मिलेगा, बेटी हुई तो उसके पति या बेटे को। इस तरह से तुम्हारे पापा के खुद के 45 % हो जाते। फिर कोई बच्चा पैदा कर उसकी शादी हर्मन के वारिस से कर कुछ % वहां से लेते याफिर पब्लिक शेअर खरीद लेते। पर हुआ यूं कि टाइमिंग चुका और तुम्हारे पापा नाना के जाने से पहले ही तुम्हारी माँ को तलाक दे दिए। फिर नाना ने पहले ही अपने शेअर अपने पोते के नाम कर दिया वकील की मद्त से। "


"इतने साल में मानसी को बेटी हुई । अभी दो रास्ते थे, या तो तुम उनके पास जाओ बेटा बन याफिर जमाई बन। याफिर तुम्हारा कत्ल कर दूसरे बेटे के लिए ट्राय करते याफिर, झूठा तैयार कर लेते। तुम्हारे सौतेले पति को बच्चा हो नही सकता तो वहां से खतरा नही था। अभी तुम्हारे २०% और पब्लिक के 10% टारगेट पर है। अभी दादी ने भी अपने 20% आपके नाम कर दिए है। तो 40 पूरे। सभी बोर्ड डायरेक्टर के दावेदार में आपका रेप्युटेशन, कोलिफिकेशन सही है तो आपका बोर्ड पर चु आना तय है। आपको सिर्फ पब्लिक ओपिनियन और शेयर खरीदने है। बाकी मैं इसमे सिर्फ अपना काम इमान से कर रही हु। मैं नौकर हु और दादी का कहना मां रही थी। आखिर में एक ही बोल सकती हूं परफेक्ट कोलिफाइड विथ मोस्ट शेअर होल्डर होने के वजह से आपकी जान पर हमला होना रुकेगा नही, इसबार सिंधा हुए, हर्मन बाकी है। उनके साथ जुड़े लोग अलग से। बस मेरे पास इतनाही है" वो बड़ी सांस छोड़ शांत हुई।


मेरा सर चकराने लगा था," ये पब्लिक ओपिनियन, शेअर कैसे खरीदते है। और सबसे जरूरी बात तुम कहा गयी थी अभी?" मैंने सवाल बढाया।


" पब्लिक ओपिनियन पब्लिक प्रभावी आदमी जैसे सोशियल मीडिया स्टार, फ़िल्म स्टार, समाजसेवी लोग, राजनेताओं के आड़े में कमाए जाते है। ये पब्लिक शेअर के असली होल्डर यही लोग होते है। ब्यूटी पार्लर, मॉल, रियल इस्टेट इनके कई कॉन्ट्रैक्ट पोलिटिकल लोक और एफिलेटेड एम्बेसडर प्रभावी लोक रहते है। किसके पास कितने है ये ऑक्शन पे मालूम होता है। इसके लिए वॉल्टन का निष्पक्ष एडमिनिस्ट्रेशन काम करता है। और रही बात मुझे तुम्हारे पापा ने कॉल किया था, उनको मैंने बोल दिया कि हमारी पोल खुल गयी है तो वो मुझे कहि दूर भेजने वाले थे।"


मैं,"तुम्हे ये सब दावपेंच मालूम है वो दादी को मालूम है?"


रजिया," नही!!"


"तो पागल औरत, तुम्हे हमेशा के लिए दूर भेजने के लिए बुलावा आया था। शेअर रूल के हिसाब से वो दादी को नही मारेगा, तुम्हको मार कर दादी को वैसे ही डर लगेगा। इसीलिए मेंन रोड ब्लॉक किया जिससे तुम्हारा बाहर जाने का कोई अंश न मिले और तुम्हारे खून में मैं फस जाऊ। (रजिया उनके प्लान को जानति थी, मेरे सामने सब बके ना इसलिए ये प्लान) समझी अक्ल की अंधी, जो आदमी अपने बेटे को मार सकता है वो तुम्हे चुटकी में उड़ा देगा।" मैं कुत्सित हँसा। रजिया का चेहरा देख उसको वो किस झमेले में फंसी उसका अहसास होणे के चिन्ह दिखाई दिये।


"अब मैं क्या करूँ? मालिक अब मैं क्या करूँ? कहा जाऊ? मेरा बेटा?" रजिया को जैसें सदमा सा लगा। जिसके लिए इतने पापड़ बेले अभी उसकी जान भी खतरे में जा सकती थी। वैसे जुनैद काफी माहिर था इस मौहोल से। हम स्ट्रीट फाइट में बहोत बार गैंग के झगड़ो में फस चुके थे। पर तब भी उसके लिए अभी खतरा ज्यादा था।


" मेरे प्यारे दोस्त की अम्मी हो इसलिए मैं मदद कर दूंगा। पर अब से वफादार मेरी रहोगी ये मन मे ठान लो, पलटी तो मैं ही तुम्हारा गेम कर दूंगा" मैंने फांसा डाला।


मैंने गाड़ी निकाली और कच्चे रास्ते से गेस्ट हाउस की ओर जाने लगे। कुछ रास्ता आगे जाने के बाद कोई गाड़ी हमारा कई वक्त से पीछा कर रही थी ऐसे मुझे लगा और मैने उसे चकमा दिया। एके झाड़ी में गाड़ी घुसा कर मैंने रजिया के मुह को दबाकर शांत किया।


झाड़ी के आगे कुछ अंतर पे गाड़ी रोक 2 लोग नीचे उतरे और हमे ढूंढने लगे। मैंने सेफ्टी के लिए कुछ मिलता है क्या वो गाड़ी में ढूंढने लगा तो सामने की ड्रोवहर में रिवॉल्वर थी। मैंने वो ली और रजिया को पीछे लेके रास्ते पर आया। हमे देख दोनों बेस बैट लेकर हमारी ओर भागे।


वो जैसे ही बीच रास्ते आए मैंने एक के पैर पर गोली चलाई। उसकी हालत देख दूसरा वाला सरेंडर हुआ।


"मुझे मत मारो, प्लीज मुझे मत मारो"वो गिड़गिड़ाने लगा।


"नीचे बैठ और हांथ को ऊपर कर" मैं रावडी स्टाइल में बोला। वो सरेंडर पोजिशन लिया वैसे मैने पूछा," बकते जा।"


वो," हमे कहा गया था कि कच्ची सड़क पर एक औरत दौड़ती आएगी उसको टपका देना और मेन रास्ते पर एक्सीडेंट कराके आपको यहां आने के लिए मजबूर करके, आपका उस बॉडी के साथी फ़ोटो लिकालना, पर आप थोड़ा पहिले आ गए। "


"क्या बोला था मैंने रजिया" मैं पूरे कॉन्फिडेंस में। " मेरा टाइमिंग चूक गया नही तो आज पंगा था। रजिया ठंडी पड़ गयी थी। मैंने उसको उसके साथी के साथ चुपचाप शहर छोड़ने बोला और उनको वहां से छोड़ दिया। उनको मार कर पूरे अंडरवर्ल्ड से पंगा नही लेना था। और मैं घुमा रजिया की ओर।


"रजिया आंटी, रजिया…" मेरे पुकारने के सदमे में वो मुझे कस के गले लग गयी। उसका शरीर डर से ठंडा पड़ गया था। " मुझे बचा लो मालिक, मुझे बचा लो, पूरी जिंदगी दासी बन जाऊंगी, बस मुझे मरना नही है। मुझे बचालो।" मेरे बाहों में वो रोने लगीं उसकी पकड़ मजबूत हो रही थी।


मैंने उसको गाड़ी में बैठाया और जुनैद को कॉल किया। उसको सब घटनाए समझाई और दादी को हवेली ले जाने बोला। उनके जान पर भी आने की संभावना थी। और जुनैद के भी। हम फार्म हाउस पहुंचने तक दोनों निकल गए थे।


मैं रजिया को लेके बेडरूम में गया और उसे फ्रेश होने बोला। मैं भी उसके बाद फ्रेश होने की तैयारी किया। उसको बाथरूम में छोड़ मैंने फार्म हाउस का मुआयना किया। कोई अन्य केमेरा, कोई डिवाइस, कोई खतरा है क्या? ये सब मुआयना करते वक्त मैं बाथरूम तक आ गया।


बाथरूम के अंदर शॉवर में रजिया खड़ी थी। बेहद खूबसूरत औरत थी रजिया। सावला रंग, गोरिया से भी ज्यादा जच रहा था और उतनाही उसे मादक बना रहा था। रजिया उम्र में ज्यादा थी पर शरीर उसका सुडौल था। गांड उभरी थी। चुचे भी काफी गोलाई में थे। चुट पर थोडेसे बाल, निप्पल्स तो अंगूर को भी शर्मा दे।



मैं उसी मदहोशी में जाके उसको पीछे से चिपका।


"मालिक आप क्या कर रहे हो…" वो हड़बड़ाई!!


"कुछ नही, दासी के यौन का रसपान करने की दिल मे इच्छा उमड़ आयी है" मैं हवसी स्वर में बोल गया।


"पर मैं तो ठहरी बूढ़ी और ऊपर से मा…."वो आगे कुछ बिन बुनियादी संस्कारी भाषण दे उसके पहले मैंने उनको अपनी ओर खींचा और बड़े बड़े गोले दबा दिए।


"आह, मालिक, ममम" वो सीसकी। मैंने फिर दबाया, निपल्स नोचा वो फिर वैसे ही सिस्काई। मैं उसके पूरे बदन पर ओंठो से अपने हवस की छांव छोड़ रहा था। मेरा लन्ड पेंट के अंदर से ही उनकी गांड के छेद में घुसने की पूरी कोशिश में था। मैंने शॉवर बन्द कर उसे बाहर लाया और बेड पर धकेला। बेड पर गिरते ही उसकी चुट कि दशा भी खुले गुफा की तरह हो गयी।


मैं नंगा होकर उसके ऊपर गया और ……


______ पढ़ते रहिये आगे, मिलते है जल्द______




भैयाजी, नाम के नही काम के भी लेखक है तो कुछ कॉन्ट्रैक्ट पूरे करने होते है नोव्हेल्स के, इसलिए इस स्टोरी में कभी कबार देरी हो जाएगी। विलंब के लिए क्षमा। स्टोरी अभिप्राय जरूर देना 😀✌️
Bahot badhiya shaandar update
Rajia ko itna sab pata kia bahot ziada padhi likhi h ya fir or kuch
Baherhal jo bhi ho ab rajia gundo fas chuki h
Dekhte h aage kia hota h
 

Skb21

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● Season 1 Episode 7
कहानी आगे…


सुबह 7 बजे…


मेरी नींद खुली तो नानी बेड पर नही थी। मैं उठा और वॉशरूम की ओर चलने लगा। पास जाते ही बाथरूम से पानी की आवाज आने लगी। मुझे लगा नानी नहा रही थी। पर पानी के साथ और भी आवाज आ रही थी,नानी की सिसकिया।


"आह उम्म, विकि मेरे लल्ला उम्म, ऐसे की चूस उम्म,.."


इस घर मे और कौन सा विकि पैदा हो गया बे रातोरात? मैं दरवाजे के पास जाके दादी को पुकारा पर दादी कामलीला में लीन थी, इतनि की दरवाजा खुला है इसका भी उनको अंदाजा नही। दरवाजा खुला? क्यो? सेक्स के लिए इतना खुला अप्रोच नानी नही देगी। उम्र के हिसाब से सेफ्टी ली होगी। वैसे भी नाना के बाद अकेली ही रहती है कमरे में तो आदत से भूल गयी होगी कि आज मैं भी इसी कमरे में हु।


मैंने आहिस्ता आहिस्ता अंदर चला गया। नानी टब के ऊपर कॉर्नर में बैठ एक हाथ से चुचे मसल रही थी और चूत सहला रही थी । उसकी आंख बंद और मन का मोह लब्ज पर बोल रहा था,"आह विकि ममम विकि विकि मेरी चूत को चाट आह,ममममम हम्ममम्म…"


मैंने हल्के अंग से उसकी चूत पर जीभ लगाई। चूत की गर्मी ने मेरी पूरी रूह को दहला दिया। उनकी चुत के रस ने जैसे जीभ को ही पिघला दिया। मैं हल्के से नानी की चूत को चाट रहा था। नानी काफी साफ सुधरा रहना पसंद करती थो तो इसके चूत पे बाल नही थे।


कुछ देर चाटने के बाद मेरा एक हाथ जोश में उनके चुचे पर गया और मैं चूचा दबाने लगा। वो जैसे उसी मदहोशी में थी और बार बार मुझे उनको चुदने का आमंत्रण दे रही थी। काफी देर के चुसाई के बाद उन्होंने पानी छोड़ा और होश में आई। सामने देखा तो मैं आशा नंगा।


वो चौक गयी। अपने अंग को छुपाने की नाकाम कोशिश करने लगी।


"विकि, तुम तुम यहाँ क्या कर रहे हो" नजर चुराते हुए नानी बोली," बाहर निकला अभी!"


"वाह, अभी तो किसी को विकि के आने की बहोत तलभ थी, अभी धक्के मार निकलवा रही है, ये नाइंसाफी है।" मैं टोंट मारा।


नानी पूरी तरह शर्म से मुह झुकाए थी," विकि ये गलत है..ये अच्छा नही है अपने रिश्ते के लिए।तुम जावो प्लीज"


" उस दिन ऑर्गेजम ,आज मैस्टरबेशन? ये नानी कई सालों से प्यार न पाए हुए औरत का रूप है। उसे नकार के सच्चाई नही बदलेगी। "मैं।


"पर ये सही नही…" वो।


" तुम्हारी वासना का भूखा रहना भी गलत है। तुम्हारा मेरे बारे में सोचना ही गलत है। अभी तुम मेरे बारे में इस तरह बेताब हो ये मेरेतक मालूम होना भी गलत है। अभी मुझे मालूम है कि मेरी प्यारी नानी तकलीफ में है और मैं कुछ नही कर पाऊंगा… ये सब सही नही है।" मैं थोड़ा अग्रेसिवह था।


नानी एकदम सी चुप हो गयी। उसको बोलने लायक कुछ बचा ही नही। मैं वहां से निकल के बाहर आया और सीधा फार्म हाउस गया।


फार्म हाउस का पक्का रस्ता किसी कारण जाम था तो मैं बाजू के कच्चे रास्ते से जाने लगा। कुछ दूरी जाने के बाद रास्ते पर कोई दौड़ता हुआ नजर आया। रस्ता जंगल का था और दौड़ने वाला शहर का दिख रहा था। उसकी ओर देख ये तो नही लग रहा था कि वो जॉगिंग के लिए आया होगा। मैं उसको पास कर आगे निकल गया। पर जैसे ही आगे गया , मैंने आयने से उसपे नजर डाली। तो वो रजिया निकली। मैंने अगले कॉर्नर पे जाकर गाड़ी रोकी और फार्म हाउस का केमेरा चेक किया।


मेरे जाने के बाद वहां बहोत कुछ घट गया था। दादी ने जुनैद को अपने हवस के लपेटे में ले लिया था। और उसमें मौका देख रजिया फार्म हाउस से रफूचक्कर हुई थी। पर ये गयी कहा थी।


तभी रजिया दौड़ती हुई आते दिखी। गाड़ी के बाजू में आते ही मैंने झट से दरवाजा खोला। वो हड़बड़ाई।


"ये क्या बत्तीमीजी…." आधे में ही उसे रुकना पड़ा क्योंकि उसको तबतक अहसास हो गया कि सामने वाला बत्तीमीज मैं हु। उसके पैर दौड़के थके ही थे कि मुझे देख लड़खड़ाने लगे? उसको बहोत ज्यादा प्यास लगी थी। मैंने उनको पानी दिया।


"मालिक आप, यहां…" वो बहोत ज्यादा घबराई। जिस तरह पकड़े जाने पर भी ये लोग नही रुक रहे अपनी हरकतों से तो मुझे बईमानि करनी पड़ेगी ऐसे लगा।


"कल रात से तुम्हारे पीछे हु, अभी मालूम पड़ा।" मैन ब्लफ किया। उसने बड़ा सा घूंट गले मे लिटाया जो बया कर गया कि वो हार्ट अटैक से काफी दूर नही।


वो,"मालिक, वो वो.." मैं बात काटते हुए, " तुम बहोत बेशर्म हो ये तुम अच्छी तरह से जानती हो । कितनी बार रंगे हाथों मिलने के बाद भी हरकते नही बदलती। कौन थे वो लोग जीनसे मिलने गयी थीं?" मैंने फिरसे ब्लफ किया।


"वो मालिक वो.. .. .. " वो हकला रही थी।


" क्यो नाम नही याद आ रहा? याद दिला दु!?" मैं भड़के स्वर में।


" वो आपके पापा के परिवार वाले है" वो फट से बोल पड़ी। " आपके इस तरफ हो जाने से उनका बोर्ड में से शेअर कम हो सकता है और इसकी वजह से .." वो कुछ ज्यादा ही जानती थी इस बिजनेस के बारे में।


" तुम कुछ ज्यादा ही जानती हो इस झमेले के बारे में। चलो गाड़ी में बैठो। तुझसे बहोत कुछ जानना हैं।" उसे गाड़ी में बिठाकर मैं सुनसान पहाड़ी ले गया।


" अभी फटाफट बकना चालू कर दो आंटी, अभी मुझमे सहनशीलता बाकी नही, मुझे थोड़ा भी तुम्हारे झूट बोलने का डाउट आया तो पहाड़ी से नीचे की हवाई सैर करवाऊंगा।" मैंने गाड़ी रोकते ही गुस्सेल रोख से पाठशाला लेनी चालू किया।


" नही नही, बताती हु। हुआ यूं, वॉल्टन ये एक होटल इंडस्ट्री का जानामाना कॉरपोरेट है। इसके अंतर्गत अनेक फर्म का एक बोर्ड बनता है और उसमें झुनझुनवाला कॉर्पोरेशन 40%(ZVC), हर्मन कॉर्परेशन 25% (HNC) और सिंधा कॉर्पोरेशन 25%(SDC) ये तीन परिवारोका शेअर और साथ मे पब्लिक शेअर 10% शेअर के भागीदार है। झुनझुनवाला का 20 % तुम्हारे नाना और 20% तुम्हारे नानी का है। तुम्हारे असली जनदाता पिता तुम्हारे नानी के सौतेले बेटे मतलब दादी के साथ रिश्ता रख पैदा किये बेटे है। उनका हक 20 % तुम्हारे पापा को जाने वाला था। एक हाथ बहुमत आने के लिए उन्होंने आपकी मा को छोड़ दुसरी शादी की मानसी सिंधा से। सिंधा और हर्मन का कोई रूल रिवाज नही था, एक था जिसमे था कि लड़की हुई तो उसका पति या उसके बेटे को जो उसके पति का अंश हो उसको मिलेगा, बेटी हुई तो उसके पति या बेटे को। इस तरह से तुम्हारे पापा के खुद के 45 % हो जाते। फिर कोई बच्चा पैदा कर उसकी शादी हर्मन के वारिस से कर कुछ % वहां से लेते याफिर पब्लिक शेअर खरीद लेते। पर हुआ यूं कि टाइमिंग चुका और तुम्हारे पापा नाना के जाने से पहले ही तुम्हारी माँ को तलाक दे दिए। फिर नाना ने पहले ही अपने शेअर अपने पोते के नाम कर दिया वकील की मद्त से। "


"इतने साल में मानसी को बेटी हुई । अभी दो रास्ते थे, या तो तुम उनके पास जाओ बेटा बन याफिर जमाई बन। याफिर तुम्हारा कत्ल कर दूसरे बेटे के लिए ट्राय करते याफिर, झूठा तैयार कर लेते। तुम्हारे सौतेले पति को बच्चा हो नही सकता तो वहां से खतरा नही था। अभी तुम्हारे २०% और पब्लिक के 10% टारगेट पर है। अभी दादी ने भी अपने 20% आपके नाम कर दिए है। तो 40 पूरे। सभी बोर्ड डायरेक्टर के दावेदार में आपका रेप्युटेशन, कोलिफिकेशन सही है तो आपका बोर्ड पर चु आना तय है। आपको सिर्फ पब्लिक ओपिनियन और शेयर खरीदने है। बाकी मैं इसमे सिर्फ अपना काम इमान से कर रही हु। मैं नौकर हु और दादी का कहना मां रही थी। आखिर में एक ही बोल सकती हूं परफेक्ट कोलिफाइड विथ मोस्ट शेअर होल्डर होने के वजह से आपकी जान पर हमला होना रुकेगा नही, इसबार सिंधा हुए, हर्मन बाकी है। उनके साथ जुड़े लोग अलग से। बस मेरे पास इतनाही है" वो बड़ी सांस छोड़ शांत हुई।


मेरा सर चकराने लगा था," ये पब्लिक ओपिनियन, शेअर कैसे खरीदते है। और सबसे जरूरी बात तुम कहा गयी थी अभी?" मैंने सवाल बढाया।


" पब्लिक ओपिनियन पब्लिक प्रभावी आदमी जैसे सोशियल मीडिया स्टार, फ़िल्म स्टार, समाजसेवी लोग, राजनेताओं के आड़े में कमाए जाते है। ये पब्लिक शेअर के असली होल्डर यही लोग होते है। ब्यूटी पार्लर, मॉल, रियल इस्टेट इनके कई कॉन्ट्रैक्ट पोलिटिकल लोक और एफिलेटेड एम्बेसडर प्रभावी लोक रहते है। किसके पास कितने है ये ऑक्शन पे मालूम होता है। इसके लिए वॉल्टन का निष्पक्ष एडमिनिस्ट्रेशन काम करता है। और रही बात मुझे तुम्हारे पापा ने कॉल किया था, उनको मैंने बोल दिया कि हमारी पोल खुल गयी है तो वो मुझे कहि दूर भेजने वाले थे।"


मैं,"तुम्हे ये सब दावपेंच मालूम है वो दादी को मालूम है?"


रजिया," नही!!"


"तो पागल औरत, तुम्हे हमेशा के लिए दूर भेजने के लिए बुलावा आया था। शेअर रूल के हिसाब से वो दादी को नही मारेगा, तुम्हको मार कर दादी को वैसे ही डर लगेगा। इसीलिए मेंन रोड ब्लॉक किया जिससे तुम्हारा बाहर जाने का कोई अंश न मिले और तुम्हारे खून में मैं फस जाऊ। (रजिया उनके प्लान को जानति थी, मेरे सामने सब बके ना इसलिए ये प्लान) समझी अक्ल की अंधी, जो आदमी अपने बेटे को मार सकता है वो तुम्हे चुटकी में उड़ा देगा।" मैं कुत्सित हँसा। रजिया का चेहरा देख उसको वो किस झमेले में फंसी उसका अहसास होणे के चिन्ह दिखाई दिये।


"अब मैं क्या करूँ? मालिक अब मैं क्या करूँ? कहा जाऊ? मेरा बेटा?" रजिया को जैसें सदमा सा लगा। जिसके लिए इतने पापड़ बेले अभी उसकी जान भी खतरे में जा सकती थी। वैसे जुनैद काफी माहिर था इस मौहोल से। हम स्ट्रीट फाइट में बहोत बार गैंग के झगड़ो में फस चुके थे। पर तब भी उसके लिए अभी खतरा ज्यादा था।


" मेरे प्यारे दोस्त की अम्मी हो इसलिए मैं मदद कर दूंगा। पर अब से वफादार मेरी रहोगी ये मन मे ठान लो, पलटी तो मैं ही तुम्हारा गेम कर दूंगा" मैंने फांसा डाला।


मैंने गाड़ी निकाली और कच्चे रास्ते से गेस्ट हाउस की ओर जाने लगे। कुछ रास्ता आगे जाने के बाद कोई गाड़ी हमारा कई वक्त से पीछा कर रही थी ऐसे मुझे लगा और मैने उसे चकमा दिया। एके झाड़ी में गाड़ी घुसा कर मैंने रजिया के मुह को दबाकर शांत किया।


झाड़ी के आगे कुछ अंतर पे गाड़ी रोक 2 लोग नीचे उतरे और हमे ढूंढने लगे। मैंने सेफ्टी के लिए कुछ मिलता है क्या वो गाड़ी में ढूंढने लगा तो सामने की ड्रोवहर में रिवॉल्वर थी। मैंने वो ली और रजिया को पीछे लेके रास्ते पर आया। हमे देख दोनों बेस बैट लेकर हमारी ओर भागे।


वो जैसे ही बीच रास्ते आए मैंने एक के पैर पर गोली चलाई। उसकी हालत देख दूसरा वाला सरेंडर हुआ।


"मुझे मत मारो, प्लीज मुझे मत मारो"वो गिड़गिड़ाने लगा।


"नीचे बैठ और हांथ को ऊपर कर" मैं रावडी स्टाइल में बोला। वो सरेंडर पोजिशन लिया वैसे मैने पूछा," बकते जा।"


वो," हमे कहा गया था कि कच्ची सड़क पर एक औरत दौड़ती आएगी उसको टपका देना और मेन रास्ते पर एक्सीडेंट कराके आपको यहां आने के लिए मजबूर करके, आपका उस बॉडी के साथी फ़ोटो लिकालना, पर आप थोड़ा पहिले आ गए। "


"क्या बोला था मैंने रजिया" मैं पूरे कॉन्फिडेंस में। " मेरा टाइमिंग चूक गया नही तो आज पंगा था। रजिया ठंडी पड़ गयी थी। मैंने उसको उसके साथी के साथ चुपचाप शहर छोड़ने बोला और उनको वहां से छोड़ दिया। उनको मार कर पूरे अंडरवर्ल्ड से पंगा नही लेना था। और मैं घुमा रजिया की ओर।


"रजिया आंटी, रजिया…" मेरे पुकारने के सदमे में वो मुझे कस के गले लग गयी। उसका शरीर डर से ठंडा पड़ गया था। " मुझे बचा लो मालिक, मुझे बचा लो, पूरी जिंदगी दासी बन जाऊंगी, बस मुझे मरना नही है। मुझे बचालो।" मेरे बाहों में वो रोने लगीं उसकी पकड़ मजबूत हो रही थी।


मैंने उसको गाड़ी में बैठाया और जुनैद को कॉल किया। उसको सब घटनाए समझाई और दादी को हवेली ले जाने बोला। उनके जान पर भी आने की संभावना थी। और जुनैद के भी। हम फार्म हाउस पहुंचने तक दोनों निकल गए थे।


मैं रजिया को लेके बेडरूम में गया और उसे फ्रेश होने बोला। मैं भी उसके बाद फ्रेश होने की तैयारी किया। उसको बाथरूम में छोड़ मैंने फार्म हाउस का मुआयना किया। कोई अन्य केमेरा, कोई डिवाइस, कोई खतरा है क्या? ये सब मुआयना करते वक्त मैं बाथरूम तक आ गया।


बाथरूम के अंदर शॉवर में रजिया खड़ी थी। बेहद खूबसूरत औरत थी रजिया। सावला रंग, गोरिया से भी ज्यादा जच रहा था और उतनाही उसे मादक बना रहा था। रजिया उम्र में ज्यादा थी पर शरीर उसका सुडौल था। गांड उभरी थी। चुचे भी काफी गोलाई में थे। चुट पर थोडेसे बाल, निप्पल्स तो अंगूर को भी शर्मा दे।



मैं उसी मदहोशी में जाके उसको पीछे से चिपका।


"मालिक आप क्या कर रहे हो…" वो हड़बड़ाई!!


"कुछ नही, दासी के यौन का रसपान करने की दिल मे इच्छा उमड़ आयी है" मैं हवसी स्वर में बोल गया।


"पर मैं तो ठहरी बूढ़ी और ऊपर से मा…."वो आगे कुछ बिन बुनियादी संस्कारी भाषण दे उसके पहले मैंने उनको अपनी ओर खींचा और बड़े बड़े गोले दबा दिए।


"आह, मालिक, ममम" वो सीसकी। मैंने फिर दबाया, निपल्स नोचा वो फिर वैसे ही सिस्काई। मैं उसके पूरे बदन पर ओंठो से अपने हवस की छांव छोड़ रहा था। मेरा लन्ड पेंट के अंदर से ही उनकी गांड के छेद में घुसने की पूरी कोशिश में था। मैंने शॉवर बन्द कर उसे बाहर लाया और बेड पर धकेला। बेड पर गिरते ही उसकी चुट कि दशा भी खुले गुफा की तरह हो गयी।


मैं नंगा होकर उसके ऊपर गया और ……


______ पढ़ते रहिये आगे, मिलते है जल्द______




भैयाजी, नाम के नही काम के भी लेखक है तो कुछ कॉन्ट्रैक्ट पूरे करने होते है नोव्हेल्स के, इसलिए इस स्टोरी में कभी कबार देरी हो जाएगी। विलंब के लिए क्षमा। स्टोरी अभिप्राय जरूर देना 😀✌️
Bahut hi jabardast update

Agle update k intjar me
 
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