Rocky2602
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Nice update bro● Season 1 Episode 6
कहानी आगे…
कुछ भी बोलो इसमे दादी का हाथ नही पर उंगली जरूर है। उस पेनड्राइव को मुझे नजरअंदाज नही करना चाहिए था। मैं गुसैल दिमाग से गेस्ट हाउस गया। दादी वहां नही थी। दरअसल जबसे मैं आया था, दादी ,छोटी मौसी, मौसा, रजिया ( दोस्त जुनैद की माँ।) कोई दिखाई नही दिया था।
मैं सीधा जुनैद के घर गया जो शहर के बाहर था, गाँव मे। करीब 1 घण्टे का रास्ता था। मैंने जुनैद को कॉल किया, जुनैद अपनी बचकानी हरकतों को चालू करता उससे पहले मैंने उसे सारा मांजला सीधे सीधे बता दिया। करीब करीब बचपन से हम यार थे और बड़ो के घिनोने राजनीतिक खेल का जुनैद हिसा हो ही नही सकता इसकी मैं पर्सनल गेरेन्टी ले सकता था। मजाकिया मुड़ का जुनैद कुछ देर के लिए सुन्न पड़ गया। मैंने कुछ देर रुक उसे पुकारा, "हेलो जुनैद, जुनैद!!'
" क्या प्लान है तेरा। बस बोल" जुनैद का आवाज भारी हो चुका था। हद से ज्यादा गुस्सा होने के बाद वो जिस रूप में आता है ये वही रूप था।
" शांत हो!! जल्दबाजी नही। ये खेल जानलेवा है, मैं तुझे खो नही सकता। " मैं उस वक्त की गर्मी को थोड़ा कंट्रोल में लाने की कोशिश की, " तू कैफे के पास मिल, तुम्हारी माँ और मेरी दादी मेरे एक्सीडेंट के बाद गायब हैं। तुम्हारे गाव के अलावा कोई ऐसी जगह नही जहां ये बिल्कुल सेफ रह सके। या तो वो इसमे जानबूझकर है याफिर, किसी कारण फसी है। उनकी साइड सुने बिना फैसला मत कर। ठीक है?? जुनैद?? " कोई आवाज नही और कॉल कट!!
जुनैद सिर्फ टेम्परेरी कंट्रोल हो रहा था। मुझे बड़ा भाई मानता था तो, वो कुछ मनमानी हरकते करेगा मेरे कहने के बाद ऐसे लग नही रह था।
कैफे के पास वो तनतानाते हुए गाड़ी में बैठा।
" जुनैद? जुनैद?" मैं उसका मुड़ चेक कर रहा था।
"तुम मेरे मा से मिले नही। मिले उतने समय मे कभी उसको बुरखे बिना देखा नही। तुम्हे?" उसने अपनी इन्वेस्टिगेशन चालू की है इसका ये प्रमाण था।
"तुम्हारे उस दिन कॉल करने के बाद तूने जब मैं को कोल किया तब वो मेरे सामने ही थी।" मैं।
" सही!! तुम्हारा शक भी सही है, दोनों गाव के घर मे है सुबह से।" वो कांप रहा था। जुनैद मा बाप होते हुए भी अभीतक उम्रभर शहरों में खुद मेहनत कर पढ़ा था। शहर मे बड़े घर मे काम करने वाली विधवा मा के होने से होस्टल में रहना उसने चालू किया। उसका अपनी माँ से ज्यादा जिंदगी का पल मेरे साथ गुजरा था। उसे इतना गुस्सा आना तय था।
हम जुनैद के घर पहुंचे। मैं गाड़ी पार्क करने से पहले जुनैद ने जैसे कूदी लगा दी और घर मे घुस गया। मैं अभी भी बाहर था।
" जुनैद , अभी यह पर क्या कर रहा है?" रजिया।
" तुम अचानक गाव क्यो आई ? और ये औरत कौन है?" जुनैद।
" ये मेरी मालकिन है…" रजिया की बात काटते हुए।
" मालकिन ह!!? इतने बड़े घर की औरत यहां कुटिया में? आप लोगो के तो फार्म हाउस होते है?" जुनैद ने टोंट मारा।
" तुम्हे उससे क्या ? तुम इस वक्त यहां…" रजिया बात पूरी कर ले उससे पहले मैंने एंट्री ली।
मेरे आने से रजिया शोक में नीचे बैठ गयी और दादी उठ गई।
दादी," तुम?" शौक, अचरज, दुख, प्रेम, आनंद! ये तुम किस भावना की उत्पत्ति थी ये मैं उस वक्त जानने के मूड़ में नही था।
मैं, " दोनों को गाड़ी में डाल जुनैद!"
जुनैद ने दोनों को दोनों हाथों से पकड़ा और खींच के मेरी गाड़ी में डाला।
गाड़ी के बाहर**
मैं,"मेरे फार्म पे इन दोनों को अलग अलग कमरे में रखते है। तुम पिघल जावोगे इसके लिए तुम्हारे मा की पूछताछ मैं करूँगा और दादी की तुम। क्योकि इस औरत को मार डालूंगा मैं।" जुनैद को प्लान समझ आया और हम गाड़ी में बैठे।
" जुनैद बेटा मेरी बात सुन, गलत फहमी .." रजिया की बात काटते हुए जुनैद बोला," बेटा कम और एक स्पाय बनाके पाला तुमने मुझे। और किसके आगे? जिस आदमी ने ,दोस्त ने अभीतक मेरे लिये अपने जान से भी ज्यादा किया। उससे नजर मिलाने की हिम्मत नही हो रही मेरी, तो मुह बंद, मुझे कोई कुछ नही समजाएगा। "
हम लोग गेस्ट हाउस पहुंचे फार्म हाउस के दो हिस्से थे आमने सामने। एक में जुनैद दादी को ले गया और दूसरे में मै रजिया को। आमने सामने पूछताछ से वो साफ साफ नही बोलने वाली थी।
रूम में घुसते ही रजिया ने मेरे पैर पकड़ लिए।
रजिया 45 साल की सावली रंग की एक एवरेज बॉडी की मालकिन थी। भरा हुआ अंग, उछली गांड उसे कयामत बनाती थी । बुरखे के अंदर देखने की वजह से उसके सुंदरता का जायजा आजतक नही ले पाया था।
"मुझे माफ़ कर दो मालिक। मैं मजबूर थी" रजिया।
" मुझे जान से मारने तक बात पहुंची ऐसी क्या मजबूरी थी?" मैं उसको पैरो से दूर झटकते हुए बोला।
" मैं नोकर हु मालिक, जो मालकिन बोलेगी…" उसको काटते हुए मैं," जुनैद को काटने बोलेंगे ये लोग, वो कर लेगी?"
"हाय अल्ला, खुदा वास्ते ऐसे बाते मत करो मालिक" वो हड़बड़ाई।," मेरे परिवार को इससे दूर रखो।"
मैं,"ए तुम्हे सोचना था इस गंदगी में पड़ने से पहले। जितना जानती हो, जो भी जानती हो। फटफट बकना चालू करो, इसके पहले मैं भूल जाऊ की तुम मेरे दोस्त की माँ हो।"
रजिया शांत हो गयी। कोई शब्द नही। मुझे जान से मारने तक बात आ गयी मतलब बात बड़ी तो होगीं।
"ठीक है, कल सुबह तक सोचने का वक्त देता हूं, उसके बाद तुम्हारे हर गलत कदम की जिम्मेदारी तुम्हारी रहेगी।" इतना बोल मैं जुनैद की ओर चला गया।
जुनैद," ये कुछ बोलने का नाम ही नही ले रही। विकि ये मांजला बहोत बड़ा और बहोत ही घिनोना लग रहा है। घर का आदमी घर के.. और सॉरी ,मेरी माँ की वजह से.." वो रोने लगा।
उसको गले लगाते हुए," अरे ये, तू क्यो सॉरी, और ये बच्चो की तरह रोना बन्द कर। तुम्हारी अम्मी सिर्फ प्यादा है। वो ज्यादा कुछ बोली नही बिना मजबूरी वाली बात के। और मैं अंदाजा लगा सकता हु की वो मजबूरी तुम होंगे। इस उम्र में अगर ये मुझे मारने की कोशिश कर सकते है तो तुम्हारी सेफ्टी उस समय क्या होगी। जाओ, अम्मी से मिलो।
जुनैद जाते ही मैं दादी के पास जाके खड़ा हुआ,"मगरमच्छ की अम्मा , कुछ कहना है आपको?"
दादी पूरी तरह सन्नाटे में थी।
"कल वापस आऊंगा, मुझे जवाब तैयार चाहिए" रात बहोत हो गयी थी और मुझे नानी की चिंता नही बढ़ानी थी इसलिए मैं ज्यादा वक्त न निकालते हुए, जुनैद को अगला कार्यक्रम सोप निकल गया।
रात 10 बजे**
हवेली को जाने के रास्ते पर मुझे एक गाड़ीया नजर आयी। मैं उस एरिया में नया था तो कन्फर्म नही था कि किसकी और कौनसी गाड़ी पड़ोस वाले कि होगी। मैंने हर गाड़ी का नम्बर तब नोट कर लिया मोबाइल केमेरा से। मैंने आसपास की सभी जगह का जायजा करने लगा। बंगलोज का एरिया था तो दो बंगलोज में काफी अंतर था। मैं घुमके रिटर्न हवेली के अंदर आया।
मैं जैसे ही हवेली के ओर जाने वाला था उससे पहले मुझे फोन की आवाज आई। मैं चुपचाप उस ओर चला गया। वो हवेली का टैंक रूम था जहां से गार्डन, स्विमिंग को पानी सप्लाई होता था। काफी बिन भीड़भाड़ की जगह। मैं उसकी एग्जॉस्ट वाली जगह पर गया तो मुझे कुछ बाते सुनाई दी।
औरत," जानू अपने प्लान बिगड़ते जा रहे है। प्रमिला और रजिया कॉन्टेक्ट में नही है। डर के कहि छुप गयी है। आदमी लोगो को लगाया है पर कुछ पता नही।"
आदमी," पहले ही बोला था। शर्मिला देवी को पता लगने से पहले उस बच्चे को टपका दो। नही, तुमने कहा किसको क्या मालूम होगा। उसकी माँ को अभीतक उसकी कोई फिक्र नही थी पर अभी होगी।"
औरत," उस औरत को फिक्र होती तो उसके पैदा होने का पता वो पहले ही दे देती। ये प्लान तो प्रमिला (दादी) का था। वो उसका १८ साल, पूरा पढ़ाई … इन शार्ट मैनेजमेंट मेम्बर और डायरेक्टर होने के लगने वाले सभी रूल्स पूरे होने की राह देख रही थी। उसके बेटे ने तो मिट्ठी खा ली पर वो ऐसे रुकने वाली नही थी। पर तुम भी ऐसे चूतिये हो कि एक बच्चा नही पैदा कर पाए।"
आदमी," उसकी माँ दिखती भोली है पर सेक्स के मामले में काफी शौकीन है। मैं तो टिक नही पाता। और बेटा आने के बाद तो वो मुझसे दो हाथ दूरी बनाए है। क्योंकि उसके बेटे को लगेगा कि मेरे जैसे आदमी के लिए उसने उसे और उसके बाप को छोड़ दिया। जो कि सच हो सकता है।"
औरत," मुझे बता, उसपे हमला किसने किया?"
आदमी," मुझे क्या मालूम,रुको रुको,तुम्हे लगता है कि वो मैं? पागल है क्या? मैंने सिर्फ उनको उसका पीछा करने के लिए कहा था। और सुपारी मिडल मेंन को दी थी। मुझे ये भी नही मालूम कि ये वही है या नही!!"
औरत," मैं अभी बोली ना ,तू चुतीया है। बस इतना पता कर की कौन है जो हमसे भी आगे है। "
दोनों की बाते पास पास में खत्म हुई और पहले आदमी वहां से निकला। सीधी सी बात थी कि एकसाथ निकलना शक पैदा करेगा। मैं तुरन्त सामने आया गार्डन से अंधेरे से निकलने के बाद कन्फर्म हुआ कि वो चेतन था, उसकी बातों से तो अंदाजा लग गया था । अभी बारी थी औरत की मैं तो मैं ठीक दरवाजे के सामने खड़ा रहा।
दरवाजा खुला और उस औरत को सरप्राइज मिला। वो हो!! ये तो माननीय सौभाग्यवती सरिता जी, जी हा हमारी छोटी मौसी जी थी। मुझे देख उनको छत से आरपार तारे दिख रहे थे।
"विकि तुम मममम?" वो हकलाई।
"एक औरत मेरे मा के पति से अफेयर करती है, उसके बेटे का प्रोफाइलिंग करती है , वो औरत मेरी मौसी है। अभी अभी फेमिली गेटटुगेदर हुआ है, सोच रहा था अभी लाइफ में खुशियां आई है। आप लोगो को जानने की कोशिश कर रहा हु तो ये मुझे टुगेदर वाला कम और वॉरटुगेदर ज्यादा महसूस हो रहा है। क्या खिचड़ी पक रही है मौसी तुम्हारी और चेतन के बीच?"
" क्या खिचड़ी?" वो इनोसेंट बन रही थी।
"देख भेंचोद, तेरी दोनों तितलियां प्रमिला और रजिया मेरे कब्जे में है। अभी बकना चालू कर नही तो तू भी रातोरात गायब हो जाएगी। " मैंने ज्यादा बात न बढ़ाते हुए सीधे ठुकाई चालू की।
" जबान सम्भालके, तुम तमीज मत भूलो ,हा.. मैंने कुछ नही किया है!!" वो अभी भी नही मान रही थी ।
" ठीक है। तुम दोनों की बाते मैंने फोन में रिकॉर्ड की है। तुम लोगो का घर निकाला करने का वक्त आ गया। दादी और मामा को इतना सबूत बस है मेरे फैसले को मनाने के लिए" मैंने ब्लफ किया।
वो झट से मेरे पास आकर मुझे अंदर खींचा और दरवाजा बंद किया। कंट्रोल हाउस की लो पॉवर लाइट चालू कर दी।
" नही ऐसा मत करो, मैं तुम्हे जान से नही मारना चाहती थी। मैंने सिर्फ तुम्हारी माँ की गलतियो का फायदा उठाते हुए अपने बॉयफ्रेंड से शादी करवादी जिससे उसके बच्चे को तुम्हारी जगह मिल जाये और मेरे पति के हाथ से होटल की ऑथोरिटी बरक़रार रहे। तुम्हे दूर करने और नजर रखने के लिए प्रमिला मौसी और रजिया को तैयार किया। मौसी की नशा और रजिया की गरीबी दोनों हमारे काम आई। तुम्हे यहां कंट्रोल करने के लिए भी उनको बोल रखा था। पर कल से दोनों हमारे संपर्क में नही है" वो बक गयी।
" अच्छा जी!! फिर मेरे पीछे लोग क्यो?" मैं।
" हम तुम्हारी गलती की राह देख रहे थे जिससे तुम डिस्कोलिफ़ाय हो सको" वो पूरी नरमा गयी," मा कसम तुम्हे मारना नही चाहती थी।"
"पर फिर भी तुम गुनहगार हो। मेरे पैदाइश के बारे में पता था तो माँ को कुछ अच्छा एडवाइस देने से चूक गयी तुम। ऊपर से अपने बॉयफ्रेंड के साथ उसे फसके अय्याशी कर रही हो वो अलग।" मैं पूरा अपसेट था।
" प्लीज प्लीज विकि इसके बारे में किसी को मत बताना। नही तो मेरा तलाक करवा कर घर निकाला कर देगी माँ।" वो गिड़गिड़ाने लगी, "तुम जो बोलोगे वो करूँगी, बस मेरी लाइफ बर्बाद मत करो।"
इस औरत का क्या जरूरत पड़ने वाली थी? इसकी बातों में अभी भी आधी सच्चाई लग रही थी। इसको अपने हाथ रखना मतलब चार लोगों को हाथ मे रखने जैसा था। दादी,रजिया, छोटे मौसा और सौतेला बाप। पर इसे बातों से या इस धमकियों से नही कंट्रोल कर सकते थे और रेकॉर्डिंग थी नही। अभी क्या?
तभी मेरे दिमाग मे बत्ती जली। अगर रेकॉर्डिंग नही है तो अभी बना लेते है। मैंने उसको बोला "गेस्ट हाउस में मेरा वेट करो, मैं आता हूं।"
वो जाने के बाद मैने हवेली का जायजा लिया। गार्ड की पोजिशन चेक की और गेस्ट हाउस में घुसा। मौसी वही खिड़की के पास खड़ी थी।
4,3 फुट की औरत जो मेरे कंधे तक आती है। काफी मोटी थी। घर पर बैठे खाने का असर। कसे हुवे चुचे। फुटबॉल जैसी गांड। स्लीवलेस ब्लाउज और मॉडर्न सारी पहनके मॉडर्न वेश्या लग रही थी।
मैंने सारे खिड़की दरवाजे लॉक किये। एक केमेरा बेड के सामने सेट किया और कहा," मौसी, तुम्हारे मोबाइल पर एक मैसेज भेजा है उसको याद करो और केमेरा के आगे बोलो"
मेरा मेसेज पढ़ने के बाद**
"ए क्या मजाक है। मैं तुम्हारी माँ जैसी हु। ए हरकते तुम्हे शोभा नही देती..तुम हद पार कर रहे हो।, वो तिलमिलाई।
"आपको कोई ऑप्शन नही है और मेरे पास अभी वक्त, तो फटफट याद करो और चालू हो जावो।" मैं खिसका।
उसने गुस्से वाली सांसे छोड़ी और याद करना चालू किया। वो पढ़ने को चालू किया, " मैं सरिता झुनझुनवाला अपने होश में ये बता रही हु की मैंने और मेरे बॉयफ्रेंड चेतन रूखी ने मिलके सुशिला झुनझुनवाला का फायदा उठा के उसके बच्चे के ऊपर अन्याय करते हुए जायदाद को हड़पने का प्लान किया। मेरा मेरे शादी के बाद मेरे बॉयफ्रेंड के साथ शारीरिक संबंध है।"
मौसी अभी रोने लगी। मैन वीडियो क्लाउड पे डाला और वहां से जाने लगा। पर मौसी ने दौड़ते हुए मुझे रोख दिया।
"रियली रियली सॉरी विकि। ऐशो आराम और जायदाद में इतनी अंधी हुई कि इंसानियत भूल गयी। इस घर मे इतने साल रहने के बाद रिश्ते सिर्फ व्यवहार से बनते गए। प्यार के रिश्ते तो यहां मालूम ही नही। तुम्हारे आने से खुशी बहोत हुई थी पर डर था कि अगर तुम भी तुम्हारे पापा की तरह निकल गए तो? किसी की जान लेने की दूर वो सोचने का भी धैर्य नही मुझमे, मेरी करतुते माफी मिलने लायक नही है। पर रिक्वेस्ट है कि नफरत मत करो। बचपन से सबसे छोटी होने की वजह से हमेशा नीची नजरो से देखी जाती थी। जिससे प्यार किया था वो तो पूरा फट्टू था। जिससे शादी कराई वो नशेड़ी निकला। लाइफ के बारह बज गए है, उसमे अब तुम भी!!" वो रोते रोते बेड पे बैठ गयी।
ये सिन कुछ जाना पहचाना था। दादी भी ऐसे ही इमोशनल हुई थी। क्या मौसी भी वही मगरमच्छ रोना लेके फसा रही है या?? पर मेरा सिक्स सेंस काफी इमोशनल हो गया। उसके हर एक पॉइंट में दम था। पति तो नशेड़ी है। उसकी कोई संतान नही। ऐसे में घर के जायदादी मामलों में टिकाव तो लगने नही वाला इसका। मुझे अभी सच मे बुरा और सिम्पति वाला फील आ रहा था।
मालूम नही क्यो पर मैंने नीचे बैठ कर उनको अपने बाहों में लिया। मैं," ठीक है ठीक है, माफी देने में थोड़ा सोचना होगा पर मैं आपके सेफ्टी का पूरा खयाल रखूंगा ये मेरा प्रोमिस है। बस मुझे और तकलीफ देने जैसी हरकते मत कर देना, मेरा गुस्सा नही झेल पावोगी।"
उन्होंने झट से बाहों से निकलते हुए," नही कभी नही, आज से तुम्हे लाडले भांजे की तरह प्यार दूंगी। अभी से कोई चालसाजी नही। थेंक्स थेंक यू …" और उसने उस खुशी में एक लिपकिस दे दी। थोड़ी वक्त के लिए दोनों चौक गए। मौसी की लिप्स काफी मीठे थे, मुझे अच्छा लगा । पर उस हरकत से मौसी डर गई।
वो,"सोरी सोरी, वो गलती से…. प्लीज गुस्सा मत होना"
मैंने बिना कुछ बोले उनके ओंठो को चूमना और चूसना चालू किया। मौसी पहले तो हक्काबक्का रह गयी। कुछ रिस्पॉन्स नही। फिर मैंने उनको बाहों में भर के पूरे जुनून से चुम्बन लीला चालू कर दी। अभी मौसी उसमे रिस्पॉन्स देने लगी। उसके हाथ मेरे से बिलग गए। कुछ देर मौसी के ओंठो का रसपान करने के बाद हम दोनों कुछ सेकंड के लिए एक दूसरे के चेहरे को देखते रहे। कोई सिकंज नही थी गलती की। मौसी ने पल्लू को नीचे कर ब्लाउज के बटन खोल दिये। ये मिला परमिशन और दरवाजा खुला। मौसी को बेड पर सुलाक़े उनके ऊपर से उनके ओंठ चूसने लगा। एक हाथ भरे चुचो को मसल रहे थे। उनकी आँखें सिसक रही थी।
वो मुझे ऊपर से नंगा कर रही थी।मैंने ज्यादा देर न करते हुए फट से खुद को पूरा नंगा किया और वो भी नंगी हो गयी। मैं घुटनो पे था और मेरा 7 इंच लटक रहा था। उसने कुछ सेकंड के लिए मेरे लन्ड को ताड़ा। उसका चेहरा लालेलाल हो रहा था। जीभ ओंठो पर घूम रही थी। उसने हवस भरी स्माइल दी और मेरे लन्ड को मुह में लेके चूसने लगी।
पूरी प्रोफेशनल ब्लोजॉबर थी मौसी। पूरा लन्ड जैसे पोर्न स्टार के जैसे चूस रही थी। मसल रही थी। नीचे के दो अंडों को भी चाट रही थी, मुह में घोल रही थी। मैं दूसरी ओर उसके चुचो से खेल रहा था।कुछ वक्त वैसे ही चालू रहा और मैंने 69 पोजिशन का इशारा किया।
मौसी की चूत क्लीन और लाल थी।पूरी एशियन रंडी थी छोटी मौसी। ऐसे कयामत को दो गांडू लोगो ने इग्नोर कैसे किया ये समझ नही आ रहा था।
मैंने चुत की चमड़ी को मुह में लेके चूसना चालू किया। मौसी का बॉडी जैसे व्हाइब्रेट सा हो गया। कुछ देर वैसे ही चुसम चुसाई होने के बाद मौसी उठी और मेरे लन्ड के ऊपर चूत घिसनी चालू की, उनके बूब्स के बीच मेरा मुह था। चूत से पानी निकलने को जैसे शुरू हुआ मौसी ने चूत को लन्ड पे सेट कर गांड उछालना चालू किया। वो मजे से कूद रही थी। उसके मुह से काफी कम सिसकिया निकल रही थी। पूरी प्रोफेशनल रंडी। काफी देर उछलने के बाद वो हांफने लगी। मैं भी क्लोज था तो वो मेरे नीचे आई और मैंने चूत पे निशाना लगा कर खुदाई चालू की।
"आहा, ममम"
रात के सन्नाटे में कुछ गलत न हो इसलिए वो आवाज कंट्रोल कर रही थी। मैंने भी जेन्टली बात लेते हुए चूत की चुदाई जारी रखी। मेरे लन्ड की हलचल उसे चुत में महसूस हो रही थी। उसने अचानक से मुझे नीचे खींचा और एक लंबा किस किया। उस चक्कर मे मैंने अपना सफेद वीर्य अंदर ही निकाल दिया।
मैं चौक गया था पर मौसी की आंखे, मुस्कान कुछ और बया कर रही थी।
" तुम बर्थ कंट्रोल… नही नही… जान भुजके किया न!?" मैं ।
" हा!! पर इसमे कोई स्वार्थ नही है। मुझे बस मा बनना है। मेरा कोई अपना हो, मुझे मेरी बहनों से इसी की वजह से जलन होती थी कि उनके बच्चे है। मैं बचपन मे भी अकेली और बुढ़ापे में भी अकेली ये विचार से गलत रास्ते निकल गयी। पर आज तुम्हारे साथ बहोत मजा आया। तुम्हारे बच्चे की माँ बनूँगी तो मेरा जीवन सफल हो जाएगा" मौसी की आंखे उसका इनोसेंस बया कर रही थी। बड़े घर मे जितना पैसा है उतना अपनापन हो तो कितना अच्छा होता।मैंने कुछ नही कहा, बस उनके माथे पर चूमा और बेड से बाहर आकर तैयार हुआ।
मौसी," थैंक यू विकि। तुमने माफ किया या करेगा इसका मालूम नही पर चाहे मौसी हो या रखेल मान लो और ये खुशी मुझे देते रहना। तुमसे सेक्स करने से अच्छा तो तेरी बाहों में रहना मुझे बहोत कुछ दे गया। आज से ये मौसी और उसका पूरा शरीर तुम्हारा है। बस मुझे नजरअंदाज मत करना। बहोत दिनों बाद सही से जीने का मौका मिला है।"
मैंने उनको प्यार भरी स्माइल दी। मुझे अभी भी पूरा भरोसा नही था पर हर एक पर शक करके मुझे अपना बेस बनाना आसान नही था। घर के प्यादे अगर मेरे फेवर में नही रहेंगे तो राजा राज कैसे करेगा?
बारी बारी दोनों अपने अपने जगह चले गए। मैं सीधे नानी के रूम में गया। और उनकी बाजू में बेड पे सो गया। 5 मिनिट बाद दादी ने पास आकर मेरे ऊपर हाथ कसा और कान में गुड़ नाइट कहा। चुदाई से पसीना और वीर्य स्मेल बॉडी पर था उसमें एक औरत मुझे कस कर गले लगाए सोई थी ये हालत काफी डेंजर रास्ते पर ले जा सकती थी।
—- और आगे—
Nice update...● Season 1 Episode 6
कहानी आगे…
कुछ भी बोलो इसमे दादी का हाथ नही पर उंगली जरूर है। उस पेनड्राइव को मुझे नजरअंदाज नही करना चाहिए था। मैं गुसैल दिमाग से गेस्ट हाउस गया। दादी वहां नही थी। दरअसल जबसे मैं आया था, दादी ,छोटी मौसी, मौसा, रजिया ( दोस्त जुनैद की माँ।) कोई दिखाई नही दिया था।
मैं सीधा जुनैद के घर गया जो शहर के बाहर था, गाँव मे। करीब 1 घण्टे का रास्ता था। मैंने जुनैद को कॉल किया, जुनैद अपनी बचकानी हरकतों को चालू करता उससे पहले मैंने उसे सारा मांजला सीधे सीधे बता दिया। करीब करीब बचपन से हम यार थे और बड़ो के घिनोने राजनीतिक खेल का जुनैद हिसा हो ही नही सकता इसकी मैं पर्सनल गेरेन्टी ले सकता था। मजाकिया मुड़ का जुनैद कुछ देर के लिए सुन्न पड़ गया। मैंने कुछ देर रुक उसे पुकारा, "हेलो जुनैद, जुनैद!!'
" क्या प्लान है तेरा। बस बोल" जुनैद का आवाज भारी हो चुका था। हद से ज्यादा गुस्सा होने के बाद वो जिस रूप में आता है ये वही रूप था।
" शांत हो!! जल्दबाजी नही। ये खेल जानलेवा है, मैं तुझे खो नही सकता। " मैं उस वक्त की गर्मी को थोड़ा कंट्रोल में लाने की कोशिश की, " तू कैफे के पास मिल, तुम्हारी माँ और मेरी दादी मेरे एक्सीडेंट के बाद गायब हैं। तुम्हारे गाव के अलावा कोई ऐसी जगह नही जहां ये बिल्कुल सेफ रह सके। या तो वो इसमे जानबूझकर है याफिर, किसी कारण फसी है। उनकी साइड सुने बिना फैसला मत कर। ठीक है?? जुनैद?? " कोई आवाज नही और कॉल कट!!
जुनैद सिर्फ टेम्परेरी कंट्रोल हो रहा था। मुझे बड़ा भाई मानता था तो, वो कुछ मनमानी हरकते करेगा मेरे कहने के बाद ऐसे लग नही रह था।
कैफे के पास वो तनतानाते हुए गाड़ी में बैठा।
" जुनैद? जुनैद?" मैं उसका मुड़ चेक कर रहा था।
"तुम मेरे मा से मिले नही। मिले उतने समय मे कभी उसको बुरखे बिना देखा नही। तुम्हे?" उसने अपनी इन्वेस्टिगेशन चालू की है इसका ये प्रमाण था।
"तुम्हारे उस दिन कॉल करने के बाद तूने जब मैं को कोल किया तब वो मेरे सामने ही थी।" मैं।
" सही!! तुम्हारा शक भी सही है, दोनों गाव के घर मे है सुबह से।" वो कांप रहा था। जुनैद मा बाप होते हुए भी अभीतक उम्रभर शहरों में खुद मेहनत कर पढ़ा था। शहर मे बड़े घर मे काम करने वाली विधवा मा के होने से होस्टल में रहना उसने चालू किया। उसका अपनी माँ से ज्यादा जिंदगी का पल मेरे साथ गुजरा था। उसे इतना गुस्सा आना तय था।
हम जुनैद के घर पहुंचे। मैं गाड़ी पार्क करने से पहले जुनैद ने जैसे कूदी लगा दी और घर मे घुस गया। मैं अभी भी बाहर था।
" जुनैद , अभी यह पर क्या कर रहा है?" रजिया।
" तुम अचानक गाव क्यो आई ? और ये औरत कौन है?" जुनैद।
" ये मेरी मालकिन है…" रजिया की बात काटते हुए।
" मालकिन ह!!? इतने बड़े घर की औरत यहां कुटिया में? आप लोगो के तो फार्म हाउस होते है?" जुनैद ने टोंट मारा।
" तुम्हे उससे क्या ? तुम इस वक्त यहां…" रजिया बात पूरी कर ले उससे पहले मैंने एंट्री ली।
मेरे आने से रजिया शोक में नीचे बैठ गयी और दादी उठ गई।
दादी," तुम?" शौक, अचरज, दुख, प्रेम, आनंद! ये तुम किस भावना की उत्पत्ति थी ये मैं उस वक्त जानने के मूड़ में नही था।
मैं, " दोनों को गाड़ी में डाल जुनैद!"
जुनैद ने दोनों को दोनों हाथों से पकड़ा और खींच के मेरी गाड़ी में डाला।
गाड़ी के बाहर**
मैं,"मेरे फार्म पे इन दोनों को अलग अलग कमरे में रखते है। तुम पिघल जावोगे इसके लिए तुम्हारे मा की पूछताछ मैं करूँगा और दादी की तुम। क्योकि इस औरत को मार डालूंगा मैं।" जुनैद को प्लान समझ आया और हम गाड़ी में बैठे।
" जुनैद बेटा मेरी बात सुन, गलत फहमी .." रजिया की बात काटते हुए जुनैद बोला," बेटा कम और एक स्पाय बनाके पाला तुमने मुझे। और किसके आगे? जिस आदमी ने ,दोस्त ने अभीतक मेरे लिये अपने जान से भी ज्यादा किया। उससे नजर मिलाने की हिम्मत नही हो रही मेरी, तो मुह बंद, मुझे कोई कुछ नही समजाएगा। "
हम लोग गेस्ट हाउस पहुंचे फार्म हाउस के दो हिस्से थे आमने सामने। एक में जुनैद दादी को ले गया और दूसरे में मै रजिया को। आमने सामने पूछताछ से वो साफ साफ नही बोलने वाली थी।
रूम में घुसते ही रजिया ने मेरे पैर पकड़ लिए।
रजिया 45 साल की सावली रंग की एक एवरेज बॉडी की मालकिन थी। भरा हुआ अंग, उछली गांड उसे कयामत बनाती थी । बुरखे के अंदर देखने की वजह से उसके सुंदरता का जायजा आजतक नही ले पाया था।
"मुझे माफ़ कर दो मालिक। मैं मजबूर थी" रजिया।
" मुझे जान से मारने तक बात पहुंची ऐसी क्या मजबूरी थी?" मैं उसको पैरो से दूर झटकते हुए बोला।
" मैं नोकर हु मालिक, जो मालकिन बोलेगी…" उसको काटते हुए मैं," जुनैद को काटने बोलेंगे ये लोग, वो कर लेगी?"
"हाय अल्ला, खुदा वास्ते ऐसे बाते मत करो मालिक" वो हड़बड़ाई।," मेरे परिवार को इससे दूर रखो।"
मैं,"ए तुम्हे सोचना था इस गंदगी में पड़ने से पहले। जितना जानती हो, जो भी जानती हो। फटफट बकना चालू करो, इसके पहले मैं भूल जाऊ की तुम मेरे दोस्त की माँ हो।"
रजिया शांत हो गयी। कोई शब्द नही। मुझे जान से मारने तक बात आ गयी मतलब बात बड़ी तो होगीं।
"ठीक है, कल सुबह तक सोचने का वक्त देता हूं, उसके बाद तुम्हारे हर गलत कदम की जिम्मेदारी तुम्हारी रहेगी।" इतना बोल मैं जुनैद की ओर चला गया।
जुनैद," ये कुछ बोलने का नाम ही नही ले रही। विकि ये मांजला बहोत बड़ा और बहोत ही घिनोना लग रहा है। घर का आदमी घर के.. और सॉरी ,मेरी माँ की वजह से.." वो रोने लगा।
उसको गले लगाते हुए," अरे ये, तू क्यो सॉरी, और ये बच्चो की तरह रोना बन्द कर। तुम्हारी अम्मी सिर्फ प्यादा है। वो ज्यादा कुछ बोली नही बिना मजबूरी वाली बात के। और मैं अंदाजा लगा सकता हु की वो मजबूरी तुम होंगे। इस उम्र में अगर ये मुझे मारने की कोशिश कर सकते है तो तुम्हारी सेफ्टी उस समय क्या होगी। जाओ, अम्मी से मिलो।
जुनैद जाते ही मैं दादी के पास जाके खड़ा हुआ,"मगरमच्छ की अम्मा , कुछ कहना है आपको?"
दादी पूरी तरह सन्नाटे में थी।
"कल वापस आऊंगा, मुझे जवाब तैयार चाहिए" रात बहोत हो गयी थी और मुझे नानी की चिंता नही बढ़ानी थी इसलिए मैं ज्यादा वक्त न निकालते हुए, जुनैद को अगला कार्यक्रम सोप निकल गया।
रात 10 बजे**
हवेली को जाने के रास्ते पर मुझे एक गाड़ीया नजर आयी। मैं उस एरिया में नया था तो कन्फर्म नही था कि किसकी और कौनसी गाड़ी पड़ोस वाले कि होगी। मैंने हर गाड़ी का नम्बर तब नोट कर लिया मोबाइल केमेरा से। मैंने आसपास की सभी जगह का जायजा करने लगा। बंगलोज का एरिया था तो दो बंगलोज में काफी अंतर था। मैं घुमके रिटर्न हवेली के अंदर आया।
मैं जैसे ही हवेली के ओर जाने वाला था उससे पहले मुझे फोन की आवाज आई। मैं चुपचाप उस ओर चला गया। वो हवेली का टैंक रूम था जहां से गार्डन, स्विमिंग को पानी सप्लाई होता था। काफी बिन भीड़भाड़ की जगह। मैं उसकी एग्जॉस्ट वाली जगह पर गया तो मुझे कुछ बाते सुनाई दी।
औरत," जानू अपने प्लान बिगड़ते जा रहे है। प्रमिला और रजिया कॉन्टेक्ट में नही है। डर के कहि छुप गयी है। आदमी लोगो को लगाया है पर कुछ पता नही।"
आदमी," पहले ही बोला था। शर्मिला देवी को पता लगने से पहले उस बच्चे को टपका दो। नही, तुमने कहा किसको क्या मालूम होगा। उसकी माँ को अभीतक उसकी कोई फिक्र नही थी पर अभी होगी।"
औरत," उस औरत को फिक्र होती तो उसके पैदा होने का पता वो पहले ही दे देती। ये प्लान तो प्रमिला (दादी) का था। वो उसका १८ साल, पूरा पढ़ाई … इन शार्ट मैनेजमेंट मेम्बर और डायरेक्टर होने के लगने वाले सभी रूल्स पूरे होने की राह देख रही थी। उसके बेटे ने तो मिट्ठी खा ली पर वो ऐसे रुकने वाली नही थी। पर तुम भी ऐसे चूतिये हो कि एक बच्चा नही पैदा कर पाए।"
आदमी," उसकी माँ दिखती भोली है पर सेक्स के मामले में काफी शौकीन है। मैं तो टिक नही पाता। और बेटा आने के बाद तो वो मुझसे दो हाथ दूरी बनाए है। क्योंकि उसके बेटे को लगेगा कि मेरे जैसे आदमी के लिए उसने उसे और उसके बाप को छोड़ दिया। जो कि सच हो सकता है।"
औरत," मुझे बता, उसपे हमला किसने किया?"
आदमी," मुझे क्या मालूम,रुको रुको,तुम्हे लगता है कि वो मैं? पागल है क्या? मैंने सिर्फ उनको उसका पीछा करने के लिए कहा था। और सुपारी मिडल मेंन को दी थी। मुझे ये भी नही मालूम कि ये वही है या नही!!"
औरत," मैं अभी बोली ना ,तू चुतीया है। बस इतना पता कर की कौन है जो हमसे भी आगे है। "
दोनों की बाते पास पास में खत्म हुई और पहले आदमी वहां से निकला। सीधी सी बात थी कि एकसाथ निकलना शक पैदा करेगा। मैं तुरन्त सामने आया गार्डन से अंधेरे से निकलने के बाद कन्फर्म हुआ कि वो चेतन था, उसकी बातों से तो अंदाजा लग गया था । अभी बारी थी औरत की मैं तो मैं ठीक दरवाजे के सामने खड़ा रहा।
दरवाजा खुला और उस औरत को सरप्राइज मिला। वो हो!! ये तो माननीय सौभाग्यवती सरिता जी, जी हा हमारी छोटी मौसी जी थी। मुझे देख उनको छत से आरपार तारे दिख रहे थे।
"विकि तुम मममम?" वो हकलाई।
"एक औरत मेरे मा के पति से अफेयर करती है, उसके बेटे का प्रोफाइलिंग करती है , वो औरत मेरी मौसी है। अभी अभी फेमिली गेटटुगेदर हुआ है, सोच रहा था अभी लाइफ में खुशियां आई है। आप लोगो को जानने की कोशिश कर रहा हु तो ये मुझे टुगेदर वाला कम और वॉरटुगेदर ज्यादा महसूस हो रहा है। क्या खिचड़ी पक रही है मौसी तुम्हारी और चेतन के बीच?"
" क्या खिचड़ी?" वो इनोसेंट बन रही थी।
"देख भेंचोद, तेरी दोनों तितलियां प्रमिला और रजिया मेरे कब्जे में है। अभी बकना चालू कर नही तो तू भी रातोरात गायब हो जाएगी। " मैंने ज्यादा बात न बढ़ाते हुए सीधे ठुकाई चालू की।
" जबान सम्भालके, तुम तमीज मत भूलो ,हा.. मैंने कुछ नही किया है!!" वो अभी भी नही मान रही थी ।
" ठीक है। तुम दोनों की बाते मैंने फोन में रिकॉर्ड की है। तुम लोगो का घर निकाला करने का वक्त आ गया। दादी और मामा को इतना सबूत बस है मेरे फैसले को मनाने के लिए" मैंने ब्लफ किया।
वो झट से मेरे पास आकर मुझे अंदर खींचा और दरवाजा बंद किया। कंट्रोल हाउस की लो पॉवर लाइट चालू कर दी।
" नही ऐसा मत करो, मैं तुम्हे जान से नही मारना चाहती थी। मैंने सिर्फ तुम्हारी माँ की गलतियो का फायदा उठाते हुए अपने बॉयफ्रेंड से शादी करवादी जिससे उसके बच्चे को तुम्हारी जगह मिल जाये और मेरे पति के हाथ से होटल की ऑथोरिटी बरक़रार रहे। तुम्हे दूर करने और नजर रखने के लिए प्रमिला मौसी और रजिया को तैयार किया। मौसी की नशा और रजिया की गरीबी दोनों हमारे काम आई। तुम्हे यहां कंट्रोल करने के लिए भी उनको बोल रखा था। पर कल से दोनों हमारे संपर्क में नही है" वो बक गयी।
" अच्छा जी!! फिर मेरे पीछे लोग क्यो?" मैं।
" हम तुम्हारी गलती की राह देख रहे थे जिससे तुम डिस्कोलिफ़ाय हो सको" वो पूरी नरमा गयी," मा कसम तुम्हे मारना नही चाहती थी।"
"पर फिर भी तुम गुनहगार हो। मेरे पैदाइश के बारे में पता था तो माँ को कुछ अच्छा एडवाइस देने से चूक गयी तुम। ऊपर से अपने बॉयफ्रेंड के साथ उसे फसके अय्याशी कर रही हो वो अलग।" मैं पूरा अपसेट था।
" प्लीज प्लीज विकि इसके बारे में किसी को मत बताना। नही तो मेरा तलाक करवा कर घर निकाला कर देगी माँ।" वो गिड़गिड़ाने लगी, "तुम जो बोलोगे वो करूँगी, बस मेरी लाइफ बर्बाद मत करो।"
इस औरत का क्या जरूरत पड़ने वाली थी? इसकी बातों में अभी भी आधी सच्चाई लग रही थी। इसको अपने हाथ रखना मतलब चार लोगों को हाथ मे रखने जैसा था। दादी,रजिया, छोटे मौसा और सौतेला बाप। पर इसे बातों से या इस धमकियों से नही कंट्रोल कर सकते थे और रेकॉर्डिंग थी नही। अभी क्या?
तभी मेरे दिमाग मे बत्ती जली। अगर रेकॉर्डिंग नही है तो अभी बना लेते है। मैंने उसको बोला "गेस्ट हाउस में मेरा वेट करो, मैं आता हूं।"
वो जाने के बाद मैने हवेली का जायजा लिया। गार्ड की पोजिशन चेक की और गेस्ट हाउस में घुसा। मौसी वही खिड़की के पास खड़ी थी।
4,3 फुट की औरत जो मेरे कंधे तक आती है। काफी मोटी थी। घर पर बैठे खाने का असर। कसे हुवे चुचे। फुटबॉल जैसी गांड। स्लीवलेस ब्लाउज और मॉडर्न सारी पहनके मॉडर्न वेश्या लग रही थी।
मैंने सारे खिड़की दरवाजे लॉक किये। एक केमेरा बेड के सामने सेट किया और कहा," मौसी, तुम्हारे मोबाइल पर एक मैसेज भेजा है उसको याद करो और केमेरा के आगे बोलो"
मेरा मेसेज पढ़ने के बाद**
"ए क्या मजाक है। मैं तुम्हारी माँ जैसी हु। ए हरकते तुम्हे शोभा नही देती..तुम हद पार कर रहे हो।, वो तिलमिलाई।
"आपको कोई ऑप्शन नही है और मेरे पास अभी वक्त, तो फटफट याद करो और चालू हो जावो।" मैं खिसका।
उसने गुस्से वाली सांसे छोड़ी और याद करना चालू किया। वो पढ़ने को चालू किया, " मैं सरिता झुनझुनवाला अपने होश में ये बता रही हु की मैंने और मेरे बॉयफ्रेंड चेतन रूखी ने मिलके सुशिला झुनझुनवाला का फायदा उठा के उसके बच्चे के ऊपर अन्याय करते हुए जायदाद को हड़पने का प्लान किया। मेरा मेरे शादी के बाद मेरे बॉयफ्रेंड के साथ शारीरिक संबंध है।"
मौसी अभी रोने लगी। मैन वीडियो क्लाउड पे डाला और वहां से जाने लगा। पर मौसी ने दौड़ते हुए मुझे रोख दिया।
"रियली रियली सॉरी विकि। ऐशो आराम और जायदाद में इतनी अंधी हुई कि इंसानियत भूल गयी। इस घर मे इतने साल रहने के बाद रिश्ते सिर्फ व्यवहार से बनते गए। प्यार के रिश्ते तो यहां मालूम ही नही। तुम्हारे आने से खुशी बहोत हुई थी पर डर था कि अगर तुम भी तुम्हारे पापा की तरह निकल गए तो? किसी की जान लेने की दूर वो सोचने का भी धैर्य नही मुझमे, मेरी करतुते माफी मिलने लायक नही है। पर रिक्वेस्ट है कि नफरत मत करो। बचपन से सबसे छोटी होने की वजह से हमेशा नीची नजरो से देखी जाती थी। जिससे प्यार किया था वो तो पूरा फट्टू था। जिससे शादी कराई वो नशेड़ी निकला। लाइफ के बारह बज गए है, उसमे अब तुम भी!!" वो रोते रोते बेड पे बैठ गयी।
ये सिन कुछ जाना पहचाना था। दादी भी ऐसे ही इमोशनल हुई थी। क्या मौसी भी वही मगरमच्छ रोना लेके फसा रही है या?? पर मेरा सिक्स सेंस काफी इमोशनल हो गया। उसके हर एक पॉइंट में दम था। पति तो नशेड़ी है। उसकी कोई संतान नही। ऐसे में घर के जायदादी मामलों में टिकाव तो लगने नही वाला इसका। मुझे अभी सच मे बुरा और सिम्पति वाला फील आ रहा था।
मालूम नही क्यो पर मैंने नीचे बैठ कर उनको अपने बाहों में लिया। मैं," ठीक है ठीक है, माफी देने में थोड़ा सोचना होगा पर मैं आपके सेफ्टी का पूरा खयाल रखूंगा ये मेरा प्रोमिस है। बस मुझे और तकलीफ देने जैसी हरकते मत कर देना, मेरा गुस्सा नही झेल पावोगी।"
उन्होंने झट से बाहों से निकलते हुए," नही कभी नही, आज से तुम्हे लाडले भांजे की तरह प्यार दूंगी। अभी से कोई चालसाजी नही। थेंक्स थेंक यू …" और उसने उस खुशी में एक लिपकिस दे दी। थोड़ी वक्त के लिए दोनों चौक गए। मौसी की लिप्स काफी मीठे थे, मुझे अच्छा लगा । पर उस हरकत से मौसी डर गई।
वो,"सोरी सोरी, वो गलती से…. प्लीज गुस्सा मत होना"
मैंने बिना कुछ बोले उनके ओंठो को चूमना और चूसना चालू किया। मौसी पहले तो हक्काबक्का रह गयी। कुछ रिस्पॉन्स नही। फिर मैंने उनको बाहों में भर के पूरे जुनून से चुम्बन लीला चालू कर दी। अभी मौसी उसमे रिस्पॉन्स देने लगी। उसके हाथ मेरे से बिलग गए। कुछ देर मौसी के ओंठो का रसपान करने के बाद हम दोनों कुछ सेकंड के लिए एक दूसरे के चेहरे को देखते रहे। कोई सिकंज नही थी गलती की। मौसी ने पल्लू को नीचे कर ब्लाउज के बटन खोल दिये। ये मिला परमिशन और दरवाजा खुला। मौसी को बेड पर सुलाक़े उनके ऊपर से उनके ओंठ चूसने लगा। एक हाथ भरे चुचो को मसल रहे थे। उनकी आँखें सिसक रही थी।
वो मुझे ऊपर से नंगा कर रही थी।मैंने ज्यादा देर न करते हुए फट से खुद को पूरा नंगा किया और वो भी नंगी हो गयी। मैं घुटनो पे था और मेरा 7 इंच लटक रहा था। उसने कुछ सेकंड के लिए मेरे लन्ड को ताड़ा। उसका चेहरा लालेलाल हो रहा था। जीभ ओंठो पर घूम रही थी। उसने हवस भरी स्माइल दी और मेरे लन्ड को मुह में लेके चूसने लगी।
पूरी प्रोफेशनल ब्लोजॉबर थी मौसी। पूरा लन्ड जैसे पोर्न स्टार के जैसे चूस रही थी। मसल रही थी। नीचे के दो अंडों को भी चाट रही थी, मुह में घोल रही थी। मैं दूसरी ओर उसके चुचो से खेल रहा था।कुछ वक्त वैसे ही चालू रहा और मैंने 69 पोजिशन का इशारा किया।
मौसी की चूत क्लीन और लाल थी।पूरी एशियन रंडी थी छोटी मौसी। ऐसे कयामत को दो गांडू लोगो ने इग्नोर कैसे किया ये समझ नही आ रहा था।
मैंने चुत की चमड़ी को मुह में लेके चूसना चालू किया। मौसी का बॉडी जैसे व्हाइब्रेट सा हो गया। कुछ देर वैसे ही चुसम चुसाई होने के बाद मौसी उठी और मेरे लन्ड के ऊपर चूत घिसनी चालू की, उनके बूब्स के बीच मेरा मुह था। चूत से पानी निकलने को जैसे शुरू हुआ मौसी ने चूत को लन्ड पे सेट कर गांड उछालना चालू किया। वो मजे से कूद रही थी। उसके मुह से काफी कम सिसकिया निकल रही थी। पूरी प्रोफेशनल रंडी। काफी देर उछलने के बाद वो हांफने लगी। मैं भी क्लोज था तो वो मेरे नीचे आई और मैंने चूत पे निशाना लगा कर खुदाई चालू की।
"आहा, ममम"
रात के सन्नाटे में कुछ गलत न हो इसलिए वो आवाज कंट्रोल कर रही थी। मैंने भी जेन्टली बात लेते हुए चूत की चुदाई जारी रखी। मेरे लन्ड की हलचल उसे चुत में महसूस हो रही थी। उसने अचानक से मुझे नीचे खींचा और एक लंबा किस किया। उस चक्कर मे मैंने अपना सफेद वीर्य अंदर ही निकाल दिया।
मैं चौक गया था पर मौसी की आंखे, मुस्कान कुछ और बया कर रही थी।
" तुम बर्थ कंट्रोल… नही नही… जान भुजके किया न!?" मैं ।
" हा!! पर इसमे कोई स्वार्थ नही है। मुझे बस मा बनना है। मेरा कोई अपना हो, मुझे मेरी बहनों से इसी की वजह से जलन होती थी कि उनके बच्चे है। मैं बचपन मे भी अकेली और बुढ़ापे में भी अकेली ये विचार से गलत रास्ते निकल गयी। पर आज तुम्हारे साथ बहोत मजा आया। तुम्हारे बच्चे की माँ बनूँगी तो मेरा जीवन सफल हो जाएगा" मौसी की आंखे उसका इनोसेंस बया कर रही थी। बड़े घर मे जितना पैसा है उतना अपनापन हो तो कितना अच्छा होता।मैंने कुछ नही कहा, बस उनके माथे पर चूमा और बेड से बाहर आकर तैयार हुआ।
मौसी," थैंक यू विकि। तुमने माफ किया या करेगा इसका मालूम नही पर चाहे मौसी हो या रखेल मान लो और ये खुशी मुझे देते रहना। तुमसे सेक्स करने से अच्छा तो तेरी बाहों में रहना मुझे बहोत कुछ दे गया। आज से ये मौसी और उसका पूरा शरीर तुम्हारा है। बस मुझे नजरअंदाज मत करना। बहोत दिनों बाद सही से जीने का मौका मिला है।"
मैंने उनको प्यार भरी स्माइल दी। मुझे अभी भी पूरा भरोसा नही था पर हर एक पर शक करके मुझे अपना बेस बनाना आसान नही था। घर के प्यादे अगर मेरे फेवर में नही रहेंगे तो राजा राज कैसे करेगा?
बारी बारी दोनों अपने अपने जगह चले गए। मैं सीधे नानी के रूम में गया। और उनकी बाजू में बेड पे सो गया। 5 मिनिट बाद दादी ने पास आकर मेरे ऊपर हाथ कसा और कान में गुड़ नाइट कहा। चुदाई से पसीना और वीर्य स्मेल बॉडी पर था उसमें एक औरत मुझे कस कर गले लगाए सोई थी ये हालत काफी डेंजर रास्ते पर ले जा सकती थी।
—- और आगे—
Bahot badhiya shaandar update bhai● Season 1 Episode 6
कहानी आगे…
कुछ भी बोलो इसमे दादी का हाथ नही पर उंगली जरूर है। उस पेनड्राइव को मुझे नजरअंदाज नही करना चाहिए था। मैं गुसैल दिमाग से गेस्ट हाउस गया। दादी वहां नही थी। दरअसल जबसे मैं आया था, दादी ,छोटी मौसी, मौसा, रजिया ( दोस्त जुनैद की माँ।) कोई दिखाई नही दिया था।
मैं सीधा जुनैद के घर गया जो शहर के बाहर था, गाँव मे। करीब 1 घण्टे का रास्ता था। मैंने जुनैद को कॉल किया, जुनैद अपनी बचकानी हरकतों को चालू करता उससे पहले मैंने उसे सारा मांजला सीधे सीधे बता दिया। करीब करीब बचपन से हम यार थे और बड़ो के घिनोने राजनीतिक खेल का जुनैद हिसा हो ही नही सकता इसकी मैं पर्सनल गेरेन्टी ले सकता था। मजाकिया मुड़ का जुनैद कुछ देर के लिए सुन्न पड़ गया। मैंने कुछ देर रुक उसे पुकारा, "हेलो जुनैद, जुनैद!!'
" क्या प्लान है तेरा। बस बोल" जुनैद का आवाज भारी हो चुका था। हद से ज्यादा गुस्सा होने के बाद वो जिस रूप में आता है ये वही रूप था।
" शांत हो!! जल्दबाजी नही। ये खेल जानलेवा है, मैं तुझे खो नही सकता। " मैं उस वक्त की गर्मी को थोड़ा कंट्रोल में लाने की कोशिश की, " तू कैफे के पास मिल, तुम्हारी माँ और मेरी दादी मेरे एक्सीडेंट के बाद गायब हैं। तुम्हारे गाव के अलावा कोई ऐसी जगह नही जहां ये बिल्कुल सेफ रह सके। या तो वो इसमे जानबूझकर है याफिर, किसी कारण फसी है। उनकी साइड सुने बिना फैसला मत कर। ठीक है?? जुनैद?? " कोई आवाज नही और कॉल कट!!
जुनैद सिर्फ टेम्परेरी कंट्रोल हो रहा था। मुझे बड़ा भाई मानता था तो, वो कुछ मनमानी हरकते करेगा मेरे कहने के बाद ऐसे लग नही रह था।
कैफे के पास वो तनतानाते हुए गाड़ी में बैठा।
" जुनैद? जुनैद?" मैं उसका मुड़ चेक कर रहा था।
"तुम मेरे मा से मिले नही। मिले उतने समय मे कभी उसको बुरखे बिना देखा नही। तुम्हे?" उसने अपनी इन्वेस्टिगेशन चालू की है इसका ये प्रमाण था।
"तुम्हारे उस दिन कॉल करने के बाद तूने जब मैं को कोल किया तब वो मेरे सामने ही थी।" मैं।
" सही!! तुम्हारा शक भी सही है, दोनों गाव के घर मे है सुबह से।" वो कांप रहा था। जुनैद मा बाप होते हुए भी अभीतक उम्रभर शहरों में खुद मेहनत कर पढ़ा था। शहर मे बड़े घर मे काम करने वाली विधवा मा के होने से होस्टल में रहना उसने चालू किया। उसका अपनी माँ से ज्यादा जिंदगी का पल मेरे साथ गुजरा था। उसे इतना गुस्सा आना तय था।
हम जुनैद के घर पहुंचे। मैं गाड़ी पार्क करने से पहले जुनैद ने जैसे कूदी लगा दी और घर मे घुस गया। मैं अभी भी बाहर था।
" जुनैद , अभी यह पर क्या कर रहा है?" रजिया।
" तुम अचानक गाव क्यो आई ? और ये औरत कौन है?" जुनैद।
" ये मेरी मालकिन है…" रजिया की बात काटते हुए।
" मालकिन ह!!? इतने बड़े घर की औरत यहां कुटिया में? आप लोगो के तो फार्म हाउस होते है?" जुनैद ने टोंट मारा।
" तुम्हे उससे क्या ? तुम इस वक्त यहां…" रजिया बात पूरी कर ले उससे पहले मैंने एंट्री ली।
मेरे आने से रजिया शोक में नीचे बैठ गयी और दादी उठ गई।
दादी," तुम?" शौक, अचरज, दुख, प्रेम, आनंद! ये तुम किस भावना की उत्पत्ति थी ये मैं उस वक्त जानने के मूड़ में नही था।
मैं, " दोनों को गाड़ी में डाल जुनैद!"
जुनैद ने दोनों को दोनों हाथों से पकड़ा और खींच के मेरी गाड़ी में डाला।
गाड़ी के बाहर**
मैं,"मेरे फार्म पे इन दोनों को अलग अलग कमरे में रखते है। तुम पिघल जावोगे इसके लिए तुम्हारे मा की पूछताछ मैं करूँगा और दादी की तुम। क्योकि इस औरत को मार डालूंगा मैं।" जुनैद को प्लान समझ आया और हम गाड़ी में बैठे।
" जुनैद बेटा मेरी बात सुन, गलत फहमी .." रजिया की बात काटते हुए जुनैद बोला," बेटा कम और एक स्पाय बनाके पाला तुमने मुझे। और किसके आगे? जिस आदमी ने ,दोस्त ने अभीतक मेरे लिये अपने जान से भी ज्यादा किया। उससे नजर मिलाने की हिम्मत नही हो रही मेरी, तो मुह बंद, मुझे कोई कुछ नही समजाएगा। "
हम लोग गेस्ट हाउस पहुंचे फार्म हाउस के दो हिस्से थे आमने सामने। एक में जुनैद दादी को ले गया और दूसरे में मै रजिया को। आमने सामने पूछताछ से वो साफ साफ नही बोलने वाली थी।
रूम में घुसते ही रजिया ने मेरे पैर पकड़ लिए।
रजिया 45 साल की सावली रंग की एक एवरेज बॉडी की मालकिन थी। भरा हुआ अंग, उछली गांड उसे कयामत बनाती थी । बुरखे के अंदर देखने की वजह से उसके सुंदरता का जायजा आजतक नही ले पाया था।
"मुझे माफ़ कर दो मालिक। मैं मजबूर थी" रजिया।
" मुझे जान से मारने तक बात पहुंची ऐसी क्या मजबूरी थी?" मैं उसको पैरो से दूर झटकते हुए बोला।
" मैं नोकर हु मालिक, जो मालकिन बोलेगी…" उसको काटते हुए मैं," जुनैद को काटने बोलेंगे ये लोग, वो कर लेगी?"
"हाय अल्ला, खुदा वास्ते ऐसे बाते मत करो मालिक" वो हड़बड़ाई।," मेरे परिवार को इससे दूर रखो।"
मैं,"ए तुम्हे सोचना था इस गंदगी में पड़ने से पहले। जितना जानती हो, जो भी जानती हो। फटफट बकना चालू करो, इसके पहले मैं भूल जाऊ की तुम मेरे दोस्त की माँ हो।"
रजिया शांत हो गयी। कोई शब्द नही। मुझे जान से मारने तक बात आ गयी मतलब बात बड़ी तो होगीं।
"ठीक है, कल सुबह तक सोचने का वक्त देता हूं, उसके बाद तुम्हारे हर गलत कदम की जिम्मेदारी तुम्हारी रहेगी।" इतना बोल मैं जुनैद की ओर चला गया।
जुनैद," ये कुछ बोलने का नाम ही नही ले रही। विकि ये मांजला बहोत बड़ा और बहोत ही घिनोना लग रहा है। घर का आदमी घर के.. और सॉरी ,मेरी माँ की वजह से.." वो रोने लगा।
उसको गले लगाते हुए," अरे ये, तू क्यो सॉरी, और ये बच्चो की तरह रोना बन्द कर। तुम्हारी अम्मी सिर्फ प्यादा है। वो ज्यादा कुछ बोली नही बिना मजबूरी वाली बात के। और मैं अंदाजा लगा सकता हु की वो मजबूरी तुम होंगे। इस उम्र में अगर ये मुझे मारने की कोशिश कर सकते है तो तुम्हारी सेफ्टी उस समय क्या होगी। जाओ, अम्मी से मिलो।
जुनैद जाते ही मैं दादी के पास जाके खड़ा हुआ,"मगरमच्छ की अम्मा , कुछ कहना है आपको?"
दादी पूरी तरह सन्नाटे में थी।
"कल वापस आऊंगा, मुझे जवाब तैयार चाहिए" रात बहोत हो गयी थी और मुझे नानी की चिंता नही बढ़ानी थी इसलिए मैं ज्यादा वक्त न निकालते हुए, जुनैद को अगला कार्यक्रम सोप निकल गया।
रात 10 बजे**
हवेली को जाने के रास्ते पर मुझे एक गाड़ीया नजर आयी। मैं उस एरिया में नया था तो कन्फर्म नही था कि किसकी और कौनसी गाड़ी पड़ोस वाले कि होगी। मैंने हर गाड़ी का नम्बर तब नोट कर लिया मोबाइल केमेरा से। मैंने आसपास की सभी जगह का जायजा करने लगा। बंगलोज का एरिया था तो दो बंगलोज में काफी अंतर था। मैं घुमके रिटर्न हवेली के अंदर आया।
मैं जैसे ही हवेली के ओर जाने वाला था उससे पहले मुझे फोन की आवाज आई। मैं चुपचाप उस ओर चला गया। वो हवेली का टैंक रूम था जहां से गार्डन, स्विमिंग को पानी सप्लाई होता था। काफी बिन भीड़भाड़ की जगह। मैं उसकी एग्जॉस्ट वाली जगह पर गया तो मुझे कुछ बाते सुनाई दी।
औरत," जानू अपने प्लान बिगड़ते जा रहे है। प्रमिला और रजिया कॉन्टेक्ट में नही है। डर के कहि छुप गयी है। आदमी लोगो को लगाया है पर कुछ पता नही।"
आदमी," पहले ही बोला था। शर्मिला देवी को पता लगने से पहले उस बच्चे को टपका दो। नही, तुमने कहा किसको क्या मालूम होगा। उसकी माँ को अभीतक उसकी कोई फिक्र नही थी पर अभी होगी।"
औरत," उस औरत को फिक्र होती तो उसके पैदा होने का पता वो पहले ही दे देती। ये प्लान तो प्रमिला (दादी) का था। वो उसका १८ साल, पूरा पढ़ाई … इन शार्ट मैनेजमेंट मेम्बर और डायरेक्टर होने के लगने वाले सभी रूल्स पूरे होने की राह देख रही थी। उसके बेटे ने तो मिट्ठी खा ली पर वो ऐसे रुकने वाली नही थी। पर तुम भी ऐसे चूतिये हो कि एक बच्चा नही पैदा कर पाए।"
आदमी," उसकी माँ दिखती भोली है पर सेक्स के मामले में काफी शौकीन है। मैं तो टिक नही पाता। और बेटा आने के बाद तो वो मुझसे दो हाथ दूरी बनाए है। क्योंकि उसके बेटे को लगेगा कि मेरे जैसे आदमी के लिए उसने उसे और उसके बाप को छोड़ दिया। जो कि सच हो सकता है।"
औरत," मुझे बता, उसपे हमला किसने किया?"
आदमी," मुझे क्या मालूम,रुको रुको,तुम्हे लगता है कि वो मैं? पागल है क्या? मैंने सिर्फ उनको उसका पीछा करने के लिए कहा था। और सुपारी मिडल मेंन को दी थी। मुझे ये भी नही मालूम कि ये वही है या नही!!"
औरत," मैं अभी बोली ना ,तू चुतीया है। बस इतना पता कर की कौन है जो हमसे भी आगे है। "
दोनों की बाते पास पास में खत्म हुई और पहले आदमी वहां से निकला। सीधी सी बात थी कि एकसाथ निकलना शक पैदा करेगा। मैं तुरन्त सामने आया गार्डन से अंधेरे से निकलने के बाद कन्फर्म हुआ कि वो चेतन था, उसकी बातों से तो अंदाजा लग गया था । अभी बारी थी औरत की मैं तो मैं ठीक दरवाजे के सामने खड़ा रहा।
दरवाजा खुला और उस औरत को सरप्राइज मिला। वो हो!! ये तो माननीय सौभाग्यवती सरिता जी, जी हा हमारी छोटी मौसी जी थी। मुझे देख उनको छत से आरपार तारे दिख रहे थे।
"विकि तुम मममम?" वो हकलाई।
"एक औरत मेरे मा के पति से अफेयर करती है, उसके बेटे का प्रोफाइलिंग करती है , वो औरत मेरी मौसी है। अभी अभी फेमिली गेटटुगेदर हुआ है, सोच रहा था अभी लाइफ में खुशियां आई है। आप लोगो को जानने की कोशिश कर रहा हु तो ये मुझे टुगेदर वाला कम और वॉरटुगेदर ज्यादा महसूस हो रहा है। क्या खिचड़ी पक रही है मौसी तुम्हारी और चेतन के बीच?"
" क्या खिचड़ी?" वो इनोसेंट बन रही थी।
"देख भेंचोद, तेरी दोनों तितलियां प्रमिला और रजिया मेरे कब्जे में है। अभी बकना चालू कर नही तो तू भी रातोरात गायब हो जाएगी। " मैंने ज्यादा बात न बढ़ाते हुए सीधे ठुकाई चालू की।
" जबान सम्भालके, तुम तमीज मत भूलो ,हा.. मैंने कुछ नही किया है!!" वो अभी भी नही मान रही थी ।
" ठीक है। तुम दोनों की बाते मैंने फोन में रिकॉर्ड की है। तुम लोगो का घर निकाला करने का वक्त आ गया। दादी और मामा को इतना सबूत बस है मेरे फैसले को मनाने के लिए" मैंने ब्लफ किया।
वो झट से मेरे पास आकर मुझे अंदर खींचा और दरवाजा बंद किया। कंट्रोल हाउस की लो पॉवर लाइट चालू कर दी।
" नही ऐसा मत करो, मैं तुम्हे जान से नही मारना चाहती थी। मैंने सिर्फ तुम्हारी माँ की गलतियो का फायदा उठाते हुए अपने बॉयफ्रेंड से शादी करवादी जिससे उसके बच्चे को तुम्हारी जगह मिल जाये और मेरे पति के हाथ से होटल की ऑथोरिटी बरक़रार रहे। तुम्हे दूर करने और नजर रखने के लिए प्रमिला मौसी और रजिया को तैयार किया। मौसी की नशा और रजिया की गरीबी दोनों हमारे काम आई। तुम्हे यहां कंट्रोल करने के लिए भी उनको बोल रखा था। पर कल से दोनों हमारे संपर्क में नही है" वो बक गयी।
" अच्छा जी!! फिर मेरे पीछे लोग क्यो?" मैं।
" हम तुम्हारी गलती की राह देख रहे थे जिससे तुम डिस्कोलिफ़ाय हो सको" वो पूरी नरमा गयी," मा कसम तुम्हे मारना नही चाहती थी।"
"पर फिर भी तुम गुनहगार हो। मेरे पैदाइश के बारे में पता था तो माँ को कुछ अच्छा एडवाइस देने से चूक गयी तुम। ऊपर से अपने बॉयफ्रेंड के साथ उसे फसके अय्याशी कर रही हो वो अलग।" मैं पूरा अपसेट था।
" प्लीज प्लीज विकि इसके बारे में किसी को मत बताना। नही तो मेरा तलाक करवा कर घर निकाला कर देगी माँ।" वो गिड़गिड़ाने लगी, "तुम जो बोलोगे वो करूँगी, बस मेरी लाइफ बर्बाद मत करो।"
इस औरत का क्या जरूरत पड़ने वाली थी? इसकी बातों में अभी भी आधी सच्चाई लग रही थी। इसको अपने हाथ रखना मतलब चार लोगों को हाथ मे रखने जैसा था। दादी,रजिया, छोटे मौसा और सौतेला बाप। पर इसे बातों से या इस धमकियों से नही कंट्रोल कर सकते थे और रेकॉर्डिंग थी नही। अभी क्या?
तभी मेरे दिमाग मे बत्ती जली। अगर रेकॉर्डिंग नही है तो अभी बना लेते है। मैंने उसको बोला "गेस्ट हाउस में मेरा वेट करो, मैं आता हूं।"
वो जाने के बाद मैने हवेली का जायजा लिया। गार्ड की पोजिशन चेक की और गेस्ट हाउस में घुसा। मौसी वही खिड़की के पास खड़ी थी।
4,3 फुट की औरत जो मेरे कंधे तक आती है। काफी मोटी थी। घर पर बैठे खाने का असर। कसे हुवे चुचे। फुटबॉल जैसी गांड। स्लीवलेस ब्लाउज और मॉडर्न सारी पहनके मॉडर्न वेश्या लग रही थी।
मैंने सारे खिड़की दरवाजे लॉक किये। एक केमेरा बेड के सामने सेट किया और कहा," मौसी, तुम्हारे मोबाइल पर एक मैसेज भेजा है उसको याद करो और केमेरा के आगे बोलो"
मेरा मेसेज पढ़ने के बाद**
"ए क्या मजाक है। मैं तुम्हारी माँ जैसी हु। ए हरकते तुम्हे शोभा नही देती..तुम हद पार कर रहे हो।, वो तिलमिलाई।
"आपको कोई ऑप्शन नही है और मेरे पास अभी वक्त, तो फटफट याद करो और चालू हो जावो।" मैं खिसका।
उसने गुस्से वाली सांसे छोड़ी और याद करना चालू किया। वो पढ़ने को चालू किया, " मैं सरिता झुनझुनवाला अपने होश में ये बता रही हु की मैंने और मेरे बॉयफ्रेंड चेतन रूखी ने मिलके सुशिला झुनझुनवाला का फायदा उठा के उसके बच्चे के ऊपर अन्याय करते हुए जायदाद को हड़पने का प्लान किया। मेरा मेरे शादी के बाद मेरे बॉयफ्रेंड के साथ शारीरिक संबंध है।"
मौसी अभी रोने लगी। मैन वीडियो क्लाउड पे डाला और वहां से जाने लगा। पर मौसी ने दौड़ते हुए मुझे रोख दिया।
"रियली रियली सॉरी विकि। ऐशो आराम और जायदाद में इतनी अंधी हुई कि इंसानियत भूल गयी। इस घर मे इतने साल रहने के बाद रिश्ते सिर्फ व्यवहार से बनते गए। प्यार के रिश्ते तो यहां मालूम ही नही। तुम्हारे आने से खुशी बहोत हुई थी पर डर था कि अगर तुम भी तुम्हारे पापा की तरह निकल गए तो? किसी की जान लेने की दूर वो सोचने का भी धैर्य नही मुझमे, मेरी करतुते माफी मिलने लायक नही है। पर रिक्वेस्ट है कि नफरत मत करो। बचपन से सबसे छोटी होने की वजह से हमेशा नीची नजरो से देखी जाती थी। जिससे प्यार किया था वो तो पूरा फट्टू था। जिससे शादी कराई वो नशेड़ी निकला। लाइफ के बारह बज गए है, उसमे अब तुम भी!!" वो रोते रोते बेड पे बैठ गयी।
ये सिन कुछ जाना पहचाना था। दादी भी ऐसे ही इमोशनल हुई थी। क्या मौसी भी वही मगरमच्छ रोना लेके फसा रही है या?? पर मेरा सिक्स सेंस काफी इमोशनल हो गया। उसके हर एक पॉइंट में दम था। पति तो नशेड़ी है। उसकी कोई संतान नही। ऐसे में घर के जायदादी मामलों में टिकाव तो लगने नही वाला इसका। मुझे अभी सच मे बुरा और सिम्पति वाला फील आ रहा था।
मालूम नही क्यो पर मैंने नीचे बैठ कर उनको अपने बाहों में लिया। मैं," ठीक है ठीक है, माफी देने में थोड़ा सोचना होगा पर मैं आपके सेफ्टी का पूरा खयाल रखूंगा ये मेरा प्रोमिस है। बस मुझे और तकलीफ देने जैसी हरकते मत कर देना, मेरा गुस्सा नही झेल पावोगी।"
उन्होंने झट से बाहों से निकलते हुए," नही कभी नही, आज से तुम्हे लाडले भांजे की तरह प्यार दूंगी। अभी से कोई चालसाजी नही। थेंक्स थेंक यू …" और उसने उस खुशी में एक लिपकिस दे दी। थोड़ी वक्त के लिए दोनों चौक गए। मौसी की लिप्स काफी मीठे थे, मुझे अच्छा लगा । पर उस हरकत से मौसी डर गई।
वो,"सोरी सोरी, वो गलती से…. प्लीज गुस्सा मत होना"
मैंने बिना कुछ बोले उनके ओंठो को चूमना और चूसना चालू किया। मौसी पहले तो हक्काबक्का रह गयी। कुछ रिस्पॉन्स नही। फिर मैंने उनको बाहों में भर के पूरे जुनून से चुम्बन लीला चालू कर दी। अभी मौसी उसमे रिस्पॉन्स देने लगी। उसके हाथ मेरे से बिलग गए। कुछ देर मौसी के ओंठो का रसपान करने के बाद हम दोनों कुछ सेकंड के लिए एक दूसरे के चेहरे को देखते रहे। कोई सिकंज नही थी गलती की। मौसी ने पल्लू को नीचे कर ब्लाउज के बटन खोल दिये। ये मिला परमिशन और दरवाजा खुला। मौसी को बेड पर सुलाक़े उनके ऊपर से उनके ओंठ चूसने लगा। एक हाथ भरे चुचो को मसल रहे थे। उनकी आँखें सिसक रही थी।
वो मुझे ऊपर से नंगा कर रही थी।मैंने ज्यादा देर न करते हुए फट से खुद को पूरा नंगा किया और वो भी नंगी हो गयी। मैं घुटनो पे था और मेरा 7 इंच लटक रहा था। उसने कुछ सेकंड के लिए मेरे लन्ड को ताड़ा। उसका चेहरा लालेलाल हो रहा था। जीभ ओंठो पर घूम रही थी। उसने हवस भरी स्माइल दी और मेरे लन्ड को मुह में लेके चूसने लगी।
पूरी प्रोफेशनल ब्लोजॉबर थी मौसी। पूरा लन्ड जैसे पोर्न स्टार के जैसे चूस रही थी। मसल रही थी। नीचे के दो अंडों को भी चाट रही थी, मुह में घोल रही थी। मैं दूसरी ओर उसके चुचो से खेल रहा था।कुछ वक्त वैसे ही चालू रहा और मैंने 69 पोजिशन का इशारा किया।
मौसी की चूत क्लीन और लाल थी।पूरी एशियन रंडी थी छोटी मौसी। ऐसे कयामत को दो गांडू लोगो ने इग्नोर कैसे किया ये समझ नही आ रहा था।
मैंने चुत की चमड़ी को मुह में लेके चूसना चालू किया। मौसी का बॉडी जैसे व्हाइब्रेट सा हो गया। कुछ देर वैसे ही चुसम चुसाई होने के बाद मौसी उठी और मेरे लन्ड के ऊपर चूत घिसनी चालू की, उनके बूब्स के बीच मेरा मुह था। चूत से पानी निकलने को जैसे शुरू हुआ मौसी ने चूत को लन्ड पे सेट कर गांड उछालना चालू किया। वो मजे से कूद रही थी। उसके मुह से काफी कम सिसकिया निकल रही थी। पूरी प्रोफेशनल रंडी। काफी देर उछलने के बाद वो हांफने लगी। मैं भी क्लोज था तो वो मेरे नीचे आई और मैंने चूत पे निशाना लगा कर खुदाई चालू की।
"आहा, ममम"
रात के सन्नाटे में कुछ गलत न हो इसलिए वो आवाज कंट्रोल कर रही थी। मैंने भी जेन्टली बात लेते हुए चूत की चुदाई जारी रखी। मेरे लन्ड की हलचल उसे चुत में महसूस हो रही थी। उसने अचानक से मुझे नीचे खींचा और एक लंबा किस किया। उस चक्कर मे मैंने अपना सफेद वीर्य अंदर ही निकाल दिया।
मैं चौक गया था पर मौसी की आंखे, मुस्कान कुछ और बया कर रही थी।
" तुम बर्थ कंट्रोल… नही नही… जान भुजके किया न!?" मैं ।
" हा!! पर इसमे कोई स्वार्थ नही है। मुझे बस मा बनना है। मेरा कोई अपना हो, मुझे मेरी बहनों से इसी की वजह से जलन होती थी कि उनके बच्चे है। मैं बचपन मे भी अकेली और बुढ़ापे में भी अकेली ये विचार से गलत रास्ते निकल गयी। पर आज तुम्हारे साथ बहोत मजा आया। तुम्हारे बच्चे की माँ बनूँगी तो मेरा जीवन सफल हो जाएगा" मौसी की आंखे उसका इनोसेंस बया कर रही थी। बड़े घर मे जितना पैसा है उतना अपनापन हो तो कितना अच्छा होता।मैंने कुछ नही कहा, बस उनके माथे पर चूमा और बेड से बाहर आकर तैयार हुआ।
मौसी," थैंक यू विकि। तुमने माफ किया या करेगा इसका मालूम नही पर चाहे मौसी हो या रखेल मान लो और ये खुशी मुझे देते रहना। तुमसे सेक्स करने से अच्छा तो तेरी बाहों में रहना मुझे बहोत कुछ दे गया। आज से ये मौसी और उसका पूरा शरीर तुम्हारा है। बस मुझे नजरअंदाज मत करना। बहोत दिनों बाद सही से जीने का मौका मिला है।"
मैंने उनको प्यार भरी स्माइल दी। मुझे अभी भी पूरा भरोसा नही था पर हर एक पर शक करके मुझे अपना बेस बनाना आसान नही था। घर के प्यादे अगर मेरे फेवर में नही रहेंगे तो राजा राज कैसे करेगा?
बारी बारी दोनों अपने अपने जगह चले गए। मैं सीधे नानी के रूम में गया। और उनकी बाजू में बेड पे सो गया। 5 मिनिट बाद दादी ने पास आकर मेरे ऊपर हाथ कसा और कान में गुड़ नाइट कहा। चुदाई से पसीना और वीर्य स्मेल बॉडी पर था उसमें एक औरत मुझे कस कर गले लगाए सोई थी ये हालत काफी डेंजर रास्ते पर ले जा सकती थी।
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