एक दिन हम अपनी पढ़ाई खत्म कर सोने से पहले बेड पर बैठ बाते कर रहे थे। तभी मैने सूरज से पूछा कि सूरज तुम्हे मेरी मम्मी ही क्यों पसंद आई। मेरे मन में सूरज से अपनी मम्मी के बारे में जानने की उत्सुकता थी। सूरज थोड़ी देर चुप रहा फिर बोला देखो रोहित मेरे अंदर आंटी को लेकर कोई लस्ट नही है। उस दिन जब मैंने आंटी को देखा को देखा तो उन पर से अपनी नजरे हटा ही नही पाया। गहरे हरे रंग की साड़ी के साथ पूरे वैवाहिक श्रृंगार मैं आंटी रंभा अप्सरा से कम नहीं लग रही थी मानो किसी ऋषि की तपस्या को भंग करने के लिए धरती पर भेजा गया हो। दूध से चमकती उनकी गोरी त्वचा, भरे हुए स्तनमंडल और स्वच्छंदता से उबार लिए उनके नितम्ब जैसे किसी मूर्तिकार द्वारा बड़े सिद्दत से तराशी हुई कोई संगमरमर की मूरत हो। ये सब मुझे आंटी की तरफ किसी मृग की तरह आकर्षित कर रही थी। सॉरी रोहित अगर तुम्हे बुरा लगा हो। सूरज मुझे नही पता था की तुम मम्मी को इतना प्यार करते हो। मुझे बहुत पसंद है की मेरी मम्मी को इतना प्यार करने वाला मेरा दोस्त होगा। मैं तुम्हे एक मम्मी से तुम्हे जरूर मिलाऊंगा।
अगले दिन कॉलेज में मम्मी का मेरे पास फोन आता है। मम्मी ने मुझे बताया कि तुम्हारे पापा एक साल के लिए दूसरे देश में बिजनेस के लिए जा रहे है। पापा ने मुझे तुम्हारे पास रहने के लिए बोला है। मुझे यह सुनकर बड़ी खुशी हुई। मम्मी ने मुझे बताया कि वो एक सप्ताह में हमारे फ्लैट में रहने आ जायेगी। इस बात के साथ ही मेरे दिमाग में आइडिया आया कि मम्मी और सूरज को पास लाने का ये अच्छा अवसर होगा। मैने रातों को ये बात सूरज को बताई तो वह मन ही मन बहुत खुश हुआ पर मेरे सामने दिखाने से थोड़ा डर रहा था। में मन में मम्मी को जवान लड़के के साथ देखने की कल्पना में खो गया।
अगले दिन शाम को सूरज और मैं अपने कमरे पर मम्मी के आने का इंतजार कर रहे थे। मम्मी ने चार बजे आने को बोला था, पर ट्रैफिक में फसने के कारण उन्हें आने में देरी हो रही थी। मैने चोरी छिपे सूरज की और देखा तो वो उत्सुकता से गेट पर नजर रख मम्मी के आने का इंतजार कर रहा था। सात बजे हमारे फ्लैट की डोरबेल बजी मैं तुरंत गेट खोलने के लिए भागा। मम्मी को मैने खुशी से गले लगा लिया। उन्हे अंदर लेकर अपने कमरे में आया। सूरज की नजरो के आगे उसकी मन सुंदरी खड़ी थी। उसने आकर मम्मी के पैर छुए पर सामान्य से ज्यादा देर वह झुका रहा। शायद उसने पैरो की कोमल स्पर्श को महसूस किया। उस दिन मम्मी ने आने से पहले अपने मखमली पैरो में गुलाबी रंग की नेलपॉलिश लगाई थी। मम्मी मेरे कमरे में आकर बेड पर बैठ गई। मैने मम्मी को पानी आदि देकर बात करने लगा। पापा के जाने के कारण अब मम्मी को हमारे साथ ही रहना था। मम्मी ने कमरे का जायजा लेकर पूछा कि बेटा पर हम यहां कैसे रहेंगे एक साथ। मम्मी आप और मैं एक रूम में रह लेंगे सूरज दूसरे कमरे में रह लेगा। मम्मी को इस तरह रहना पसंद नहीं आया उन्होंने मुझे और सूरज को एक साथ और खुद दूसरे कमरे में अकेले रहने के लिए बोला ताकि हम दोनो रात को पढ़ाई कर सके और साथ ही उन्हें भी दूसरे कमरे में थोड़ी निजता मिल सके। दूसरे कमरे में रहकर वो आसानी से कपड़े बदल सकती थी। मुझे इसमें कोई परेशानी नहीं है मम्मी पर सूरज इसके लिए मानेगा तो हम ऐसा कर सकते है।
सूरज – मुझे कोई परेशानी नहीं वैसे भी हम दोनो अभी भी साथ में एक कमरे में रहते है। आंटी आप दूसरे कमरे में आराम से रह सकती है।
रात को खाना खाकर मम्मी अपने कमरे में सोने चली गई। मैं और सूरज भी अपने कमरे में आकर लेट गए। में आगे की योजना के बारे में सोचने लगा। सूरज मम्मी को पसंद करता था पर वो उससे आगे कुछ नहीं करना चाहता था। बस मम्मी उसकी कल्पना तक ही सीमित थी उस कल्पना में उसने मम्मी को लेकर सभी सीमाओं को लांघ दिया होगा लेकिन वास्तिविकता में कुछ भी करने से डरता है। लेकिन में उसकी कल्पनाओं की सभी घटनाओं को आंखो सामने देखना चाहता था। इसके लिए मुझे मम्मी और सूरज दोनो को एक दूसरे की ओर आकर्षित करना होगा।
अगले दिन जब मम्मी रसोई में काम कर रही थी तभी मम्मी ने मुझे मदद के लिए आवाज दी। मैने सोचा ये अच्छा मौका है। इसलिए मैने सूरज को मम्मी को मदद करने के लिए बोला। जब सूरज रसोई में पहुंचा तो मम्मी उपर रखे एक डब्बे को उतारने की कोशिश कर रही थी पर वह मम्मी के हाथ नही आ रहा था। मैं चुपके से उन दोनो को रसोई में देखने लगा। तभी सूरज ने मम्मी को नीचे उतरने के लिए कहकर खुद उस स्टूल पर चढ़ गया जिस पर चढ़कर मम्मी डब्बा उतने का प्रयास कर रही थी। सूरज ने मम्मी को डब्बा लेकर मम्मी को दिया इस बीच सूरज को उपर से मम्मी के ब्लाउज में कैद सख्ती के साथ तने हुए उरेजों का मनमोहन नजारा दिखाई दिया। कुछ पल के लिए उसकी आंखे उस गहरी घाटी में गोते लगाने लगी। पर तभी मम्मी ने सूरज को धन्यवाद कहने के लिए नजरे ऊपर की तो सूरज एकदम से झेंप गया। वह नीचे उतर जाने ही वाला था की मम्मी ने उसे रोका और पूछा। रोहित क्या कर रहा है।
सूरज– आंटी वो काम में थोड़ा व्यस्त था तो मुझे मदद के लिए भेज दिया।
मम्मी– वो बचपन से ही कामचोर है। चलो अब तुम आ गए हो तो मेरा एक काम और कर दो ये सब्जियां धो दो।
सूरज सब्जियां लेकर वाशबेसिन में सब्जियां धोने लगा। तभी कुछ देर बाद मम्मी की नजर उस पर गई। हंसते हुए सूरज को बोलती है बेटा ऐसे भी कोई सब्जी धोता है तुम बस पानी से डाल रहे हो। ऐसे तो इनपर लगे केमिकल नही हटेंगे। आगे बढ़ते हुए मम्मी सूरज के हाथ से सब्जी लेती है। इस बीच सूरज को मम्मी के हाथो का अच्छा स्पर्श मिलता है। मम्मी सब्जी को अच्छे से रगड़कर साफ करते हुए बताती है ऐसे साफ करते है। मेरी और क्या देख रहे हो बेटा यहां देखो। दरअसल जब मम्मी सब्जी धो रही थी तब सूरज मम्मी को देख रहा था। उसके बाद सूरज अच्छे से सब्जी साफ करता है।