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Incest बेटे की ख्वाहिश

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Rajizexy

Punjabi Doc💊
Supreme
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354
BB
Aapka yeh comment padhkar sach mein mera dil khush ho gaya! Mujhe bilkul yakin nahi ho raha ki aapko meri kahani itni acchi lagi. Ek writer ke liye isse bada koi reward nahi ho sakta. Itna pyaar dene ke liye bohot bohot shukriya! ❤️"
U r welcome Ridhima dear 💋
vese mai bhi ek writer hun
& I love to appreciate good writing skills.
 
Last edited:

sunoanuj

Well-Known Member
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189
बहुत ही उम्दा और बेहतरीन कहानी है !
हर अपडेट एक से बढ़कर एक…….,
 
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Gorgeous Ridhimaa

रिद्धिमा ✨
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एकदम उम्मीद के मुताबिक बेहतरीन अपडेट....मां ने आज पहली बार अपने बेटे की प्रति सेक्सूल भावना के साथ ,उसको साथ मिलन का सपना देखा

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और अपने आप को अपने बेटे का नाम लेके तृप्त किया । वो गोलू के लिंग के ख्याल से ही पागल हो चुकी है।

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और जैसा मैंने कहा था , उसकी मां की योनि अपने बेटे के लिंग के लिए गीली हो ही गई।

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मां का वो गोलू के लन्ड को याद कर के यूं चरम सुख को प्राप्त होना...... उफ्फफ....मजेदार...। और चरम सुख प्राप्त होते ही मां का अपने ही विचारों से जद्दोजह्द करना काफी पसंद आया । वो गोलू का लिंग अब अपने योनि में लेना भी चाहती है , मगर मां की मर्यादा उसे इसकी इजाज़त नहीं दे रहे। देखते है आखिर दोनों का मिलन होगा कैसे !.....

अपडेट के लिए धन्यवाद।
Thanks ☺️
 
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Gorgeous Ridhimaa

रिद्धिमा ✨
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Update 13

बिस्तर पर उस कड़े तकिए को अपनी जाँघों के बीच भींचकर, सिर्फ कल्पनाओं के सहारे हासिल किए गए उस जादुई चरम सुख के बाद मेरे पूरे वजूद में एक असीम, मीठी सी शिथिलता उतर आई थी। बदन का रोम-रोम जैसे रस में नहाया हुआ था और इसी मदहोशी में मेरी आँख लग गई थी। दोपहर की मेरी वह गहरी, मखमली नींद तब खुली जब मुख्य दरवाज़े पर गोलू के आने की आहट हुई। मैंने धड़कते दिल से दीवार घड़ी की तरफ देखा.. शुक्र था, उसके पापा के दफ्तर से लौटने में अभी काफी वक्त बाकी था। मैंने बिना एक पल गंवाए बिस्तर छोड़ा, और अपने भीतर सुलगती उस अनजानी आंच को छुपाते हुए, झटपट अपनी सूती साड़ी, ब्लाउज और पेटीकोट को बदन पर कसा और कमरे से बाहर आ गई।

जैसे ही मैंने कुंडी खोली, सामने मेरा जवां बेटा गोलू खड़ा था। बाहर हो रही हल्की बूंदाबांदी की वजह से उसके घने, रेशमी बाल थोड़े भीगे हुए थे, जिससे कुछ लटें उसके माथे पर चिपक गई थीं। इस रूप में वह जितना मासूम लग रहा था, उसके चौड़े होते कंधे उसकी जवां मर्दानगी का उतना ही तीखा अहसास दे रहे थे। घर के उस एकांत सन्नाटे में, मैंने जैसे ही कुंडी वापस चढ़ाई, गोलू ने बिना कुछ कहे मुझे अपनी बाहों के घेरे में ले लिया। हम दोनों सीधे लिविंग रूम के बड़े सोफे पर आ गए, जहाँ वह पूरी तरह मेरे ऊपर लेट गया।

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साड़ी के पतले, मखमली कपड़े के पार से मुझे उसकी छाती का वह भारी उभार और उसकी तेज़ चलती धड़कनें अपने सीने की गहराइयों में साफ महसूस हो रही थीं। मेरा माँ का दिल और एक औरत का वजूद दोनों एक साथ पिघलने लगे। मैं अपनी उँगलियों को उसके भीगे, महकते हुए बालों में फँसाकर बड़े लाड़ और बेपनाह चाहत से उसके सिर को सहला रही थी। कमरे की हवा में एक अजीब सा नशा घुलने लगा था।

तभी गोलू ने अपनी मतवाली आँखें मेरी आँखों में डालीं और बहुत ही भीमी, रेशमी आवाज़ में बुदबुदाया, "मम्मी... अपनी आँखें बंद करो ना... मैं आपके लिए कुछ बहुत मीठा लाया हूँ।"

मैंने एक गहरी सांस लेकर अपनी पलकें मूँद लीं। लेकिन अगले ही पल, जैसे ही गोलू ने मेरे होठों की संवेदनशील त्वचा पर किसी बहुत ही ठंडी, गीली और रसदार चीज़ का स्पर्श कराया, तो उस अनजाने अहसास से एक पल के लिए तो मेरा पूरा बदन अंदर तक काँप उठा। मुझे लगा कहीं इस बंद कमरे में वह अपनी मर्यादाओं को पूरी तरह भूल तो नहीं रहा। मगर जैसे ही मैंने अपनी आँखें खोलीं, सामने गोलू की उँगलियों के बीच एक सुर्ख लाल, रसीली स्ट्रॉबेरी थी।

अपनी उस बढ़ती हुई घबराहट और बदन की कुलबुलाहट को छुपाने के लिए, मैंने झट से उस स्ट्रॉबेरी को अपने होठों के बीच भींचकर एक गहरी बाइट ले ली। वह फल इस कदर रसीला था कि कटते ही उसका गाढ़ा, सुगन्धित मीठा रस मेरे होठों के कोनों से छलक पड़ा। उसकी कुछ ठंडी बूंदें रिसती हुई मेरे गोरे गालों से होकर, मेरी बेहद संवेदनशील और नंगी गर्दन की त्वचा पर फिसलती चली गईं।

यह देखते ही गोलू के चेहरे के हाव-भाव पूरी तरह बदल गए। उसकी मासूम नज़रों में अब एक आदिम और गहरा आकर्षण जाग चुका था। वह एक पल भी दूर नहीं हटा। उसने अपनी गर्म नाक और तपते हुए होंठ सीधे मेरी गर्दन और गालों पर बहते हुए उस रसीले दाग पर टिका दिए। वह बहुत ही लाड़, पागलपन और एक अनजाने हक़ से चूसते हुए उस मीठे रस को अपने होठों से साफ करने लगा। जब उसकी ज़बान और होठों की वह तपती हुई, गीली छुअन सीधे मेरी त्वचा को चीरती हुई मेरे भीतर उतरी, तो साड़ी के भीतर सिमटा मेरा पूरा वजूद घुटनों तक पूरी तरह पानी-पानी हो गया, और मेरे मुँह से एक बेहद मादक, दबी हुई सिसकारी निकल गई।

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सोफे के उस संकरे दायरे में, गोलू के होठों की वह गीली और तपती हुई छुअन मेरी गर्दन पर किसी जादुई सम्मोहन की तरह रेंग रही थी। वह स्ट्रॉबेरी का मीठा रस नहीं, बल्कि मेरे भीतर दबी हुई वह कामुक आग थी जिसे उसका जवां बदन धीरे-धीरे सोख रहा था। जब उसकी ज़बान मेरी गर्दन के उस बेहद नाज़ुक हिस्से को छूती, तो साड़ी के भीतर मेरी जाँघों के बीच एक अजीब सी मखमली जलन उभर आती, जो मुझे अंदर तक बेबस कर रही थी। मैं आँखें बंद किए, उसके रेशमी बालों को अपनी उँगलियों में जकड़े बस एक बेजान नाव की तरह उसकी तीव्र मर्दानगी के बहाव में बहती जा रही थी।

रस साफ़ करते-करते गोलू की साँसें अब पूरी तरह से भारी और गर्म हो चुकी थीं। उसकी नाक की वह तपती हुई हवा जब मेरी छाती के ऊपरी गोरे हिस्से पर बिखरने लगी, तो बदन का रोम-रोम सिहर उठा। तभी, गोलू ने अपनी बाहें मेरी पीठ के नीचे डालीं और मुझे और भी शिद्दत से अपने सीने में भींच लिया। उस अचानक आए भारी दबाव की वजह से, सोफे के किनारे लगी मेरी साड़ी का पल्लू धीरे से सरक कर नीचे फर्श पर जा गिरा। पल्लू के हटते ही, मेरी छाती का वह पूरा भरा-पूरा और सुडौल उभार, जो सिर्फ पतले ब्लाउज के भीतर कैद था, सीधे गोलू के जवां सीने के ठीक सामने पूरी तरह बेपर्दा हो गया।

"मम्मी... उफ़्फ़, आप कितनी... कितनी खुशबूदार हो..." गोलू ने मदहोशी में डूबते हुए सीधे मेरी गर्दन के पास फुसफुसाया।

उसकी उँगलियाँ अब शांत नहीं थीं। मेरे गोरे और चिकने कंधों को सहलाते हुए, उसका एक हाथ धीरे-धीरे नीचे सरका और सीधे मेरे ब्लाउज के सबसे ऊपरी बटन पर जाकर टिक गया। उस नाज़ुक स्पर्श को महसूस करते ही मेरी आँखें एक झटके में खुल गईं। लाज और खौफ की एक ठंडी लहर मेरे सीने से होते हुए पूरे बदन में उतर गई। एक माँ के रूप में मर्यादा की आखिरी ज़ंजीर मेरे दिमाग को झकझोरने लगी कि मैं अपने ही बेटे को कहाँ तक बढ़ने दे रही हूँ।

"गो... गोलू... रुक मेरे बच्चे... यह गलत है, बस कर..." मैंने कांपते हाथों से उसके मजबूत कंधों को पकड़कर पीछे धकेलने की कमज़ोर कोशिश की।

लेकिन गोलू पर तो जैसे मेरी इस सुडौल काया का कोई आदिम भूत सवार था। उसने मेरी आँखों में सीधे देखा, जहाँ उसकी आँखों की वह भूखी और दीवानी चमक मेरे भीतर की प्यासी औरत को पूरी तरह पहचान चुकी थी। उसने बिना कुछ बोले, अपनी कांपती हुई उँगलियों से मेरे ब्लाउज के पहले बटन को पकड़ लिया और उसे धीरे से खोलने के लिए हरकत शुरू कर दी।

'टिक...' की उस बारीक आवाज़ के साथ ही जैसे बंद कमरे के सन्नाटे में मेरी सांसें पूरी तरह अटक गईं। ब्लाउज का गला आगे से थोड़ा ढीला होकर खुला, तो ठंडी हवा सीधे मेरे स्तनों के बीच की गोरी दरार को छूने लगी। सुबह की पैंटी वाली वह गाढ़ी मर्दाना खुशबू अब इस बंद कमरे की हवा में पूरी तरह हावी हो चुकी थी, और मैं चाहकर भी खुद को इस खूबसूरत तड़प से दूर नहीं कर पा रही थी।
लेकीन में उसके नीचे किसी मछली की तरह शर्म से मछल रही थी।

हमारी उस हल्की सी खींचतान के बीच, जब गोलू ने उतावली में हाथ बढ़ाया, तो मेरे ब्लाउज का दूसरा बटन भी एक झटके के साथ टूटकर फर्श पर जा गिरा। उस बटन के टूटते ही, ब्लाउज का अगला हिस्सा पूरी तरह से बिखर गया और मेरे दोनों गोरे, मोटे स्तनों का भारी उभार आधे से ज़्यादा सामने बेपर्दा होकर बाहर छलक आया। अपने वक्षस्थल को इस तरह खुला देखकर मैंने उसे एक लाड़ भरी डांट लगाई, "बदमाश! इन्हें आराम से खोला भी तो जा सकता था, ऐसे तोड़ क्यों दिए तूने?"

मैंने उससे यह बात ऐसे लहजे में कही, जैसे कि मैं तो उसे खुद अपने हाथों से अपना ब्लाउज खोलने देने वाली थी। मेरी इस डांट पर उसने अपनी बड़ी-बड़ी आँखें उठाईं और बेहद मासूमियत से हकबकाते हुए कहा, "मुम्मा... वो... वो ये आपके इतने बड़े और भारी हो गए हैं ना, तभी अचानक दबाव से टूट गए..."

उसकी यह भोली दलील सुनकर मैं अभी कुछ सोच ही पाती कि उसने बिना एक पल गंवाए अपना चेहरा आगे बढ़ाया और ब्लाउज से बाहर निकले मेरे उस आधे खुले, गोरे हिस्से पर अपना पूरा मुँह रख दिया। उसकी ज़बान और गर्म होठों का वह सीधा, रसीला स्पर्श जैसे ही मेरी त्वचा से टकराया, मेरे मुँह से एक बेहद तेज़ और मादक 'आह...' निकल गई। बदन में करंट दौड़ गया और मैंने कांपते हाथों से उसके कंधे पकड़कर उसे काफी मनाने और पीछे हटाने की कोशिश की, "गोलू... बस कर मेरे बच्चे, छोड़ मुझे..."

लेकिन वह कहाँ मानने वाला था। सोफे पर पूरी तरह मेरे ऊपर लेटे हुए उसने अपनी मजबूत बाहों से मुझे कसकर जकड़ रखा था। वह आगे कुछ नहीं कर रहा था, बस मेरे खुले बदन से आती उस मखमली, स्त्री-सुलभ खुशबू को अपने भीतर गहराई तक खींचकर बेहद खुश और शांत हो रहा था। उसके चेहरे का वह सुकून देखकर मेरी ममता और कामुकता दोनों एक साथ पिघल रही थीं।

लेकिन ठीक उसी पल, लिविंग रूम के मुख्य दरवाज़े पर अचानक ज़ोर से डोरबेल बज उठी।

घंटी की वह आवाज़ सुनते ही हम दोनों के होश उड़ गए और हम फटाक से एक-दूसरे से अलग हुए। मेरा दिल खौफ के मारे गले में आ गया। मुझे लगा पक्का यह उसके पापा ही होंगे, जो दफ्तर से जल्दी लौट आए हैं। मैंने बिना एक सेकंड गंवाए फर्श से अपनी साड़ी का पल्लू उठाया, उसे बहुत सलीके से अपने खुले हुए स्तनों के ऊपर लपेटा और टूटे हुए बटनों के उस हिस्से को पूरी तरह छुपाते हुए घबराती हुई साँसों के साथ जाकर दरवाजा खोला।

लेकिन जैसे ही दरवाजा खुला, सामने का नज़ारा देखकर मेरे पैर वहीं ठिठक गए। वहाँ मेरे पति नहीं, बल्कि मेरी बड़ी बहन कुसुम दीदी और जीजू खड़े थे।
 

sexsarkar

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बिस्तर पर उस कड़े तकिए को अपनी जाँघों के बीच भींचकर, सिर्फ कल्पनाओं के सहारे हासिल किए गए उस जादुई चरम सुख के बाद मेरे पूरे वजूद में एक असीम, मीठी सी शिथिलता उतर आई थी। बदन का रोम-रोम जैसे रस में नहाया हुआ था और इसी मदहोशी में मेरी आँख लग गई थी। दोपहर की मेरी वह गहरी, मखमली नींद तब खुली जब मुख्य दरवाज़े पर गोलू के आने की आहट हुई। मैंने धड़कते दिल से दीवार घड़ी की तरफ देखा.. शुक्र था, उसके पापा के दफ्तर से लौटने में अभी काफी वक्त बाकी था। मैंने बिना एक पल गंवाए बिस्तर छोड़ा, और अपने भीतर सुलगती उस अनजानी आंच को छुपाते हुए, झटपट अपनी सूती साड़ी, ब्लाउज और पेटीकोट को बदन पर कसा और कमरे से बाहर आ गई।

जैसे ही मैंने कुंडी खोली, सामने मेरा जवां बेटा गोलू खड़ा था। बाहर हो रही हल्की बूंदाबांदी की वजह से उसके घने, रेशमी बाल थोड़े भीगे हुए थे, जिससे कुछ लटें उसके माथे पर चिपक गई थीं। इस रूप में वह जितना मासूम लग रहा था, उसके चौड़े होते कंधे उसकी जवां मर्दानगी का उतना ही तीखा अहसास दे रहे थे। घर के उस एकांत सन्नाटे में, मैंने जैसे ही कुंडी वापस चढ़ाई, गोलू ने बिना कुछ कहे मुझे अपनी बाहों के घेरे में ले लिया। हम दोनों सीधे लिविंग रूम के बड़े सोफे पर आ गए, जहाँ वह पूरी तरह मेरे ऊपर लेट गया।

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साड़ी के पतले, मखमली कपड़े के पार से मुझे उसकी छाती का वह भारी उभार और उसकी तेज़ चलती धड़कनें अपने सीने की गहराइयों में साफ महसूस हो रही थीं। मेरा माँ का दिल और एक औरत का वजूद दोनों एक साथ पिघलने लगे। मैं अपनी उँगलियों को उसके भीगे, महकते हुए बालों में फँसाकर बड़े लाड़ और बेपनाह चाहत से उसके सिर को सहला रही थी। कमरे की हवा में एक अजीब सा नशा घुलने लगा था।

तभी गोलू ने अपनी मतवाली आँखें मेरी आँखों में डालीं और बहुत ही भीमी, रेशमी आवाज़ में बुदबुदाया, "मम्मी... अपनी आँखें बंद करो ना... मैं आपके लिए कुछ बहुत मीठा लाया हूँ।"

मैंने एक गहरी सांस लेकर अपनी पलकें मूँद लीं। लेकिन अगले ही पल, जैसे ही गोलू ने मेरे होठों की संवेदनशील त्वचा पर किसी बहुत ही ठंडी, गीली और रसदार चीज़ का स्पर्श कराया, तो उस अनजाने अहसास से एक पल के लिए तो मेरा पूरा बदन अंदर तक काँप उठा। मुझे लगा कहीं इस बंद कमरे में वह अपनी मर्यादाओं को पूरी तरह भूल तो नहीं रहा। मगर जैसे ही मैंने अपनी आँखें खोलीं, सामने गोलू की उँगलियों के बीच एक सुर्ख लाल, रसीली स्ट्रॉबेरी थी।

अपनी उस बढ़ती हुई घबराहट और बदन की कुलबुलाहट को छुपाने के लिए, मैंने झट से उस स्ट्रॉबेरी को अपने होठों के बीच भींचकर एक गहरी बाइट ले ली। वह फल इस कदर रसीला था कि कटते ही उसका गाढ़ा, सुगन्धित मीठा रस मेरे होठों के कोनों से छलक पड़ा। उसकी कुछ ठंडी बूंदें रिसती हुई मेरे गोरे गालों से होकर, मेरी बेहद संवेदनशील और नंगी गर्दन की त्वचा पर फिसलती चली गईं।

यह देखते ही गोलू के चेहरे के हाव-भाव पूरी तरह बदल गए। उसकी मासूम नज़रों में अब एक आदिम और गहरा आकर्षण जाग चुका था। वह एक पल भी दूर नहीं हटा। उसने अपनी गर्म नाक और तपते हुए होंठ सीधे मेरी गर्दन और गालों पर बहते हुए उस रसीले दाग पर टिका दिए। वह बहुत ही लाड़, पागलपन और एक अनजाने हक़ से चूसते हुए उस मीठे रस को अपने होठों से साफ करने लगा। जब उसकी ज़बान और होठों की वह तपती हुई, गीली छुअन सीधे मेरी त्वचा को चीरती हुई मेरे भीतर उतरी, तो साड़ी के भीतर सिमटा मेरा पूरा वजूद घुटनों तक पूरी तरह पानी-पानी हो गया, और मेरे मुँह से एक बेहद मादक, दबी हुई सिसकारी निकल गई।

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सोफे के उस संकरे दायरे में, गोलू के होठों की वह गीली और तपती हुई छुअन मेरी गर्दन पर किसी जादुई सम्मोहन की तरह रेंग रही थी। वह स्ट्रॉबेरी का मीठा रस नहीं, बल्कि मेरे भीतर दबी हुई वह कामुक आग थी जिसे उसका जवां बदन धीरे-धीरे सोख रहा था। जब उसकी ज़बान मेरी गर्दन के उस बेहद नाज़ुक हिस्से को छूती, तो साड़ी के भीतर मेरी जाँघों के बीच एक अजीब सी मखमली जलन उभर आती, जो मुझे अंदर तक बेबस कर रही थी। मैं आँखें बंद किए, उसके रेशमी बालों को अपनी उँगलियों में जकड़े बस एक बेजान नाव की तरह उसकी तीव्र मर्दानगी के बहाव में बहती जा रही थी।

रस साफ़ करते-करते गोलू की साँसें अब पूरी तरह से भारी और गर्म हो चुकी थीं। उसकी नाक की वह तपती हुई हवा जब मेरी छाती के ऊपरी गोरे हिस्से पर बिखरने लगी, तो बदन का रोम-रोम सिहर उठा। तभी, गोलू ने अपनी बाहें मेरी पीठ के नीचे डालीं और मुझे और भी शिद्दत से अपने सीने में भींच लिया। उस अचानक आए भारी दबाव की वजह से, सोफे के किनारे लगी मेरी साड़ी का पल्लू धीरे से सरक कर नीचे फर्श पर जा गिरा। पल्लू के हटते ही, मेरी छाती का वह पूरा भरा-पूरा और सुडौल उभार, जो सिर्फ पतले ब्लाउज के भीतर कैद था, सीधे गोलू के जवां सीने के ठीक सामने पूरी तरह बेपर्दा हो गया।

"मम्मी... उफ़्फ़, आप कितनी... कितनी खुशबूदार हो..." गोलू ने मदहोशी में डूबते हुए सीधे मेरी गर्दन के पास फुसफुसाया।

उसकी उँगलियाँ अब शांत नहीं थीं। मेरे गोरे और चिकने कंधों को सहलाते हुए, उसका एक हाथ धीरे-धीरे नीचे सरका और सीधे मेरे ब्लाउज के सबसे ऊपरी बटन पर जाकर टिक गया। उस नाज़ुक स्पर्श को महसूस करते ही मेरी आँखें एक झटके में खुल गईं। लाज और खौफ की एक ठंडी लहर मेरे सीने से होते हुए पूरे बदन में उतर गई। एक माँ के रूप में मर्यादा की आखिरी ज़ंजीर मेरे दिमाग को झकझोरने लगी कि मैं अपने ही बेटे को कहाँ तक बढ़ने दे रही हूँ।

"गो... गोलू... रुक मेरे बच्चे... यह गलत है, बस कर..." मैंने कांपते हाथों से उसके मजबूत कंधों को पकड़कर पीछे धकेलने की कमज़ोर कोशिश की।

लेकिन गोलू पर तो जैसे मेरी इस सुडौल काया का कोई आदिम भूत सवार था। उसने मेरी आँखों में सीधे देखा, जहाँ उसकी आँखों की वह भूखी और दीवानी चमक मेरे भीतर की प्यासी औरत को पूरी तरह पहचान चुकी थी। उसने बिना कुछ बोले, अपनी कांपती हुई उँगलियों से मेरे ब्लाउज के पहले बटन को पकड़ लिया और उसे धीरे से खोलने के लिए हरकत शुरू कर दी।

'टिक...' की उस बारीक आवाज़ के साथ ही जैसे बंद कमरे के सन्नाटे में मेरी सांसें पूरी तरह अटक गईं। ब्लाउज का गला आगे से थोड़ा ढीला होकर खुला, तो ठंडी हवा सीधे मेरे स्तनों के बीच की गोरी दरार को छूने लगी। सुबह की पैंटी वाली वह गाढ़ी मर्दाना खुशबू अब इस बंद कमरे की हवा में पूरी तरह हावी हो चुकी थी, और मैं चाहकर भी खुद को इस खूबसूरत तड़प से दूर नहीं कर पा रही थी।
लेकीन में उसके नीचे किसी मछली की तरह शर्म से मछल रही थी।

हमारी उस हल्की सी खींचतान के बीच, जब गोलू ने उतावली में हाथ बढ़ाया, तो मेरे ब्लाउज का दूसरा बटन भी एक झटके के साथ टूटकर फर्श पर जा गिरा। उस बटन के टूटते ही, ब्लाउज का अगला हिस्सा पूरी तरह से बिखर गया और मेरे दोनों गोरे, मोटे स्तनों का भारी उभार आधे से ज़्यादा सामने बेपर्दा होकर बाहर छलक आया। अपने वक्षस्थल को इस तरह खुला देखकर मैंने उसे एक लाड़ भरी डांट लगाई, "बदमाश! इन्हें आराम से खोला भी तो जा सकता था, ऐसे तोड़ क्यों दिए तूने?"

मैंने उससे यह बात ऐसे लहजे में कही, जैसे कि मैं तो उसे खुद अपने हाथों से अपना ब्लाउज खोलने देने वाली थी। मेरी इस डांट पर उसने अपनी बड़ी-बड़ी आँखें उठाईं और बेहद मासूमियत से हकबकाते हुए कहा, "मुम्मा... वो... वो ये आपके इतने बड़े और भारी हो गए हैं ना, तभी अचानक दबाव से टूट गए..."

उसकी यह भोली दलील सुनकर मैं अभी कुछ सोच ही पाती कि उसने बिना एक पल गंवाए अपना चेहरा आगे बढ़ाया और ब्लाउज से बाहर निकले मेरे उस आधे खुले, गोरे हिस्से पर अपना पूरा मुँह रख दिया। उसकी ज़बान और गर्म होठों का वह सीधा, रसीला स्पर्श जैसे ही मेरी त्वचा से टकराया, मेरे मुँह से एक बेहद तेज़ और मादक 'आह...' निकल गई। बदन में करंट दौड़ गया और मैंने कांपते हाथों से उसके कंधे पकड़कर उसे काफी मनाने और पीछे हटाने की कोशिश की, "गोलू... बस कर मेरे बच्चे, छोड़ मुझे..."

लेकिन वह कहाँ मानने वाला था। सोफे पर पूरी तरह मेरे ऊपर लेटे हुए उसने अपनी मजबूत बाहों से मुझे कसकर जकड़ रखा था। वह आगे कुछ नहीं कर रहा था, बस मेरे खुले बदन से आती उस मखमली, स्त्री-सुलभ खुशबू को अपने भीतर गहराई तक खींचकर बेहद खुश और शांत हो रहा था। उसके चेहरे का वह सुकून देखकर मेरी ममता और कामुकता दोनों एक साथ पिघल रही थीं।

लेकिन ठीक उसी पल, लिविंग रूम के मुख्य दरवाज़े पर अचानक ज़ोर से डोरबेल बज उठी।

घंटी की वह आवाज़ सुनते ही हम दोनों के होश उड़ गए और हम फटाक से एक-दूसरे से अलग हुए। मेरा दिल खौफ के मारे गले में आ गया। मुझे लगा पक्का यह उसके पापा ही होंगे, जो दफ्तर से जल्दी लौट आए हैं। मैंने बिना एक सेकंड गंवाए फर्श से अपनी साड़ी का पल्लू उठाया, उसे बहुत सलीके से अपने खुले हुए स्तनों के ऊपर लपेटा और टूटे हुए बटनों के उस हिस्से को पूरी तरह छुपाते हुए घबराती हुई साँसों के साथ जाकर दरवाजा खोला।

लेकिन जैसे ही दरवाजा खुला, सामने का नज़ारा देखकर मेरे पैर वहीं ठिठक गए। वहाँ मेरे पति नहीं, बल्कि मेरी बड़ी बहन कुसुम दीदी और जीजू खड़े थे।
Badhiya update, गोलू और रिद्धिमा के बीच का रिश्ता रंग लाने लगा है । रिद्धिमा अब शर्म और मर्यादा छोड़ के गोलू के साथ एक अलग रिश्ते में जुड़ने के लिए मन बना चुकी है। मगर बाहर से दर्शा ऐसा रही है कि उसे ये सब गोलू के साथ नहीं कारण । शायद पति से अभी भी डरती हो या उसको धोखा नहीं देना चाहती हो ,मगर उसके चाहने से क्या होता है वो तो गोलू का लिंग चख चुकी है अपने चुत से । अकस्मात हो सही मगर बेटे के लिंग का साइज उसे अब अच्छे से पता है। आज गोलू उसके लिए मां को तैयार ही कर रह था ओर मिलन के ही लेता अगर मौसी और मौसा गेट पे दस्तक ना देते ।

गोलू ने जो मां को स्ट्रॉबेरी खिलाई वो बहुत मादक कर देने वाला क्षण था। आपकी लेखनी काफी अच्छी है और एक इमोशनल कनेक्ट करवाती है ।

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अगले अपडेट का प्रतीक्षा रहेगा।....
 
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Badhiya update, गोलू और रिद्धिमा के बीच का रिश्ता रंग लाने लगा है । रिद्धिमा अब शर्म और मर्यादा छोड़ के गोलू के साथ एक अलग रिश्ते में जुड़ने के लिए मन बना चुकी है। मगर बाहर से दर्शा ऐसा रही है कि उसे ये सब गोलू के साथ नहीं कारण । शायद पति से अभी भी डरती हो या उसको धोखा नहीं देना चाहती हो ,मगर उसके चाहने से क्या होता है वो तो गोलू का लिंग चख चुकी है अपने चुत से । अकस्मात हो सही मगर बेटे के लिंग का साइज उसे अब अच्छे से पता है। आज गोलू उसके लिए मां को तैयार ही कर रह था ओर मिलन के ही लेता अगर मौसी और मौसा गेट पे दस्तक ना देते ।

गोलू ने जो मां को स्ट्रॉबेरी खिलाई वो बहुत मादक कर देने वाला क्षण था। आपकी लेखनी काफी अच्छी है और एक इमोशनल कनेक्ट करवाती है ।

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अगले अपडेट का प्रतीक्षा रहेगा।....
Itne khoobsurat comment ke liye dil se thank you...☺️ Aur ye photo uff perfect ♥️
 
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