• If you are trying to reset your account password then don't forget to check spam folder in your mailbox. Also Mark it as "not spam" or you won't be able to click on the link.

Erotica फागुन के दिन चार

🔥 Read Next Hot Story →
Discover more exclusive stories

komaalrani

Well-Known Member
25,431
69,910
304
फागुन के दिन चार

भाग -५३ गुड्डी और रंजी --मस्ती ही मस्ती पृष्ठ ५०१

अपडेट पोस्टेड

कृपया पढ़ें, लाइक करें और कमेंट जरूर करें
 
Last edited:

Sutradhar

Member
372
1,018
123
पिक्चर

Gemini-Generated-Image-q7f0omq7f0omq7f0.png



जब हम लोग हाल में पहुँचे तो बस पिक्चर शुरू ही होने वाली थी।



बुकिंग पे काउंटर वाले ने बोला की क्या हम बाक्स का टिकट लेंगे, पिक्चर बस शुरू होने वाली है। मेरा ध्यान पीछे था। वो कत्थई सूट वाल भी टिकट विंडो की ओर बढ़ रहा था मैं नहीं चाहता थी की वो हाल में भी हमारे पीछे रहे।



बाक्स में घुसते ही गुड्डी और रंजी की चांदी हो गई और मेरा सोना। रंजी ने घुसते ही सोफे का एक कोना पकड़ा, मैं बीच में और गुड्डी दूसरे कोने पे, और मेरी सैंडविच बन गई।



फरमाइशें, ताने, शिकायतें, कोल्ड-ड्रिंक नहीं पिलाया, बिना पाप कार्न खिलाये पिक्चर का मजा क्या? ऐसी कंजूसी। कम से कम मूंगफली ही खरीद दी होती। और दोनों नदिदियां, लालीपाप चूसे जा रही थी।


PKD-4-Cinema-Gemini-Generated-Image-v5mkr1v5mkr1v5mk.png


मैंने भी पलट वार किया- “अकेले अकेक्ले लालीपाप खाए जा रही हो मुझे आफर भी नहीं किया…” मैं बोला।

“च च। सारी भैय्या गलती हो गई। लो ना…” और रंजी ने एक बार मुझे दिखाकर लालीपाप सक किया, फिर निकालकर अपने होंठों पे उसे एक ओर से दूसरे ओर तक लगाया। और सीधे मेरे मुँह में। उसके थूक, मुख रस से लिथड़ा, लिपटा लालीपाप अलग ही रस था।

गुड्डी ने दूसरी ओर से मुझे कोंचा- “हे क्या रंजी का ही लोगे?”
Girl-3ac8a50e2c348307d4e7ee69cfd743a3.jpg


उसकी अदा और शिकायत के अंदाज से साफ था की वो “क्या लेने…” का जिक्र कर रही है। और उसने अपने मुँह से निकालकर लालीपाप मुझे आफर किया।

रंजी कौन सीधी थी, कल रात का किस्सा उसे पूरे डिटेल के साथ गुड्डी ने बता दिया था तो वो भी तेल पानी ले के पिल पड़ी," कमीनी तेरी तो ले ली न मेरे भैया ने रगड़ रगड़ के, अब मेरी ले रहे हैं तो तेरी क्यों सुलग रही है,"

बड़ी अदा से लॉलीपॉप चूसती गुड्डी शाहाना अंदाज में बोली " बिन्नो, सुलगने वाली चीज तो मैंने बहुत पहले पांच रूपये की वीट से साफ़ कर दी है, एकदम मक्खन मलाई है, और न बिस्वास हो अपने इस भैया कम भतार ज्यादा से पूछ लो, "

“अरे यार एक साथ दोनों का कैसे लूँगा?” मेरे मुँह से निकल गया और आफत हो गई।

“क्यों दोनों का एक साथ नहीं ले सकते क्या?” बड़े भोलेपन से रंजी ने पूछा।
Girl-K-HD-wallpaper-ketika-sharma-actor-model-tolly-thumbnail.jpg


“क्यों नहीं ले सकते। बल्की लेंगे ही अभी देखना तुम। और वो नहीं लेंगे तो हम दोनों तो सहेलियां हैं जरूर साथ-साथ लेंगे…”

गुड्डी बोली और अपना इरादा उसने अगले पल साफ कर दिया।जंगबहादुर पर तो रिक्शे पर से ही बौराये थे, दो टीनेजर दर्जा ११ वाली, दोनों सेक्सी हॉट, तो किसका नहीं फनफनायेगा, और ऊपर से बनारस वाली गुड्डी पहले तो हलके हलके फिर खुल के सोफे पे बैठते ही, जींस के ऊपर से जंगबहादुर की चम्पी तेल मालिश कर रही थी और वो सुनते भी उसी की थे। चड्डी गुड्डी ने पहनने नहीं दी थी तो तम्बू तो तनना ही था।
बैठते ही गुड्डी के एक हाथ ने सीधे मेरे जंगबहादुर को मेरे पैंट के ऊपर से ही कब्जे में ले लिया था और अब उसने खींचकर रंजी का भी हाथ वहीं रख दिया।

पिक्चर शुरू हो गई थी लेकिन पिक्चर किसे देखनी थी।दो दो टीनेजर्स के हाथ फनफनाये नागराज पर, और मेरा हाथ मेरी ममेरी बहन की कच्ची अमिया पर, उफ़ क्या स्वाद था।
A-cinematic-atmospheric-scene.jpg


तभी कोल्ड ड्रिंक्स वाला अन्दर आया। मेरी तो आफत हो गई।

दोनों एक साथ, कोल्ड ड्रिंक्स, पाप कार्न और ना जाने क्या-क्या? और मेरी जेब से पैसा निकालकर गुड्डी ने कोल्ड-ड्रिंक वाले को दे दिया। पर्स और कार्ड तो टिकट खरीदने के बाद उसी के कब्जे में था। लेकिन मेरी बचत भी हो गई।

और बचत भी हो गई।


वो भी दो तरह से, एक तो उन दोनों बिलियों के झगड़ों से कुछ देर के लिए निजात मिली।

दूसरी मेरी चमकी।

उस कत्थई सूट वाले को मैंने कोल्ड-ड्रिंक शाप पे इसी लड़के से बात करते देखा था। तो उसीने उसे कुछ पे करके यहाँ भेजा होगा। ये देखने के लिए की हमलोग कर क्या कर रहे हैं। मैं सिर्फ ठरकी पने की एक्टिंग कर रहा हूँ या वास्तव में। और वो एकदम सही टाइम पे आया।

गुड्डी का हाथ तो पहले ही मेरे जंगे शेरे को और जगा रहा था, अब उसने रंजी का हाथ भी खींचकर वहीं रख दिया था। मेरा एक हाथ तो रंजी के हाल्टर टाप के अन्दर था और दूसरा गुड्डी का जोबन मर्दन कर रहा था। और जैसे ही वो बाहर गया। मुझे मालूम था की वो हाल खुलासा कत्थई सूट वाले को बयान करेगा। उसके बाद तो क्या नहीं हुआ।

रंजी कोल्ड-ड्रिंक खतम करने के बाद थोड़ा सा उठी बोतल सीट के नीचे रखने के लिए और गुड्डी ने मुझे जोर से आँख मारकर उसकी जगह पुश कर दिया और अब जो वो बैठी तो सीधे मेरी गोद में।



“क्यों मजा आ रहा है सिंहासन पे बैठने में…” गुड्डी ने उसे छेड़ा।

“और क्या? तू सोचती है तू ही बैठ सकती है…” मेरे जाग गए शेर पे अपने कैपरी फाड़ते चूतड़ों को जोर-जोर से रगड़ते वो बोली- “और फिर गुड्डी को जोर से आँख मारकर बोली- “लेकिन बिचारा सिंह तो अभी पिंजड़े में कैद है।'
girl-1fd72442752dca92ca5da243c984dee2.jpg


“तो खोल दे ना…” गुड्डी ने उसे चिढ़ाया-

“लेकिन दहाड़ता हुआ निकलेगा तो बस। गुफा ढूँढ़ेगा…”

पहले तो मेरे दोनों हाथ हाल्टर टाप के ऊपर से ही उसके उरोजों को सहलाते रहे लेकिन बायां हाथ थोड़ा ज्यादा बोल्ड था। पहले उंगलियां फिर पूरी हथेली। पहले तो सिर्फ स्पर्श सुख। एक किशोरी के नवल यौवन कमल का स्पर्श ही मुझे और रंजी दोनों को गिनगिना गया। फिर हिम्मत करके मैंने थोड़ा सा दबाया। जब रंजी कुछ नहीं बोली तो मेरी उंगली ने उसके निपल को फ्लिक किया। एकदम कड़क और अब मुझे ग्रीन सिगनल मिल गया था की उसे भी मुझसे कम मजा नहीं मिल रहा है। फिर तो दूसरे हाथ ने। और अब टाप सरक के नीचे। ब्रा का कवच तो था भी नहीं और दोनों उरोज मेरी मुट्ठी में।

मैंने जब एक साथ दोनों निपल अंगूठे और तरजनी के बीच में लेकर रोल किया तो उसने पहली बार कसकर सिसकी भरी और अपनी दोनों जाँघों को सिकोड़ लिया। लेकिन अब मैं रुकने वाला नहीं था। मेरे होंठ भी मैदान में आ गये थे। उसके गर्दन पे, हल्के-हल्के बटरफ्लाई किसेज गाल पे और एक हाथ जोबन को अब कसकर दबा रहा था मसल रहा था और दूसरा उसके निपल को कभी फ्लिक करता, कभी पुल करता कभी, रोल करता।



“क्या करते हो…” वो बोली, कुछ शिकायत से, कुछ मजे से कुछ दावत देते। बहुत हल्की सिसकी लेते वो बोली।

भले हम लोग बाक्स में हों और कोई हम लोगों को नहीं देख सकता हो। लेकिन आवाज तो जाती ही और। और लोगों को फिल्म देखने में डिस्टर्ब होता न तो इसलिए मैंने अपने होंठ सीधे रंजी के रसीले होंठों पे। वो भीगे होंठ तेरे और श्योर होने के लिए मेरी जीभ उसके मुँह में घुस गई।

गुड्डी खाली नहीं बैठी थी। उसके होंठ मेरे इयर को किस कर रहे थे, जीभ कभी मेरे कान पे कभी गरदन पे और कभी गालों पे। मेरी आग को और हवा दे रही थी। गुड्डी के होंठ मेरे पैंट में बंद दहाड़ते सिंह को और उकसा रहे थे कभी वो उसे प्यार से सहलाती, तो कभी जोर से दबा देती। लेकिन वो कोई भेदभाव नहीं कर रही थी।



मेरी गोद में बैठी रंजी की प्यारी-प्यारी चुनमुनिया पे भी वो बीच-बीच में हाथ फिरा दे रही थी। और उसका असर मेरे और रंजी दोनों पे हो रहा था। मारे जोश के मैं अब बिना रुके उसके गदराये किशोर उभार कस-कसकर दबा रहा था और रंजी भी लम्बी-लम्बी साँसें ले रही थी, जोर-जोर से अपनी जांघें भींच रही थी और मेरे होंठ में अपने होंठ भींचे होने के बावजूद उसकी सिसकी निकल रही थी और वो और कस-कसकर अपने नितम्ब मेरे तने हुए लिंग पे रगड़ रही थी।



तभी दरवाजा खुला और वो कोल्ड-ड्रिंक वाला आया। न मैंने रंजी के टाप से अपना हाथ हटाया और ना गुड्डी ने मेरे शेर से। सिर्फ रंजी ने अपनी टांगें उठा दी और।

वो सीट के नीचे से सारी बाटल्स ले गया।

उसके जाते ही रंजी को मेरे गोद से गुड्डी ने धकेला- “हे कित्ती देर तक सिंहासन का मजा लेगी चल उतर…” गुड्डी बोली“तो क्या तू बैठेगी सिंहासन पर?” रंजी सरक के मेरी बायीं और फिर से सोफे पे बैठते हुए बोली।

“ना सिंह को आजाद करूँगी…” गुड्डी मेरी गोद में झुकते हुए बोली और मेरे सम्हलने के पहले ही गुड्डी ने जिप खोल दी।

जैसे स्प्रिंग वाले चाकू का विज्ञापन निकलता है। बटन दबावो, झटके से 8 इंच का चाकू बाहर। बस वैसा ही हुआ। वो तुरंत उछलकर बाहर, सुपाड़ा पहले से ही खुला था। चंदा भाभी की शिक्षा और आदेश के अनुसार। (उन्होंने पहले दिन ही बनारस में समझाया था। सुपाड़ा हमेशा खुला रखना। कपड़े से रगड़ खाकर वो थोड़ा नंब हो जाएगा। और डिस्चार्ज होने का टाइम देर से हो जाएगा) गुड्डी ने उसे अंगूठे और तरजनी से रगड़ा और वो जोश से पागल हो गया।

कोमल जी

शानदार अपडेट, बस आपके वापस आने की देर थी।

सभी कहानियां मानो पुनर्जीवित हो गई हो और पाठक भी।

सादर
 

komaalrani

Well-Known Member
25,431
69,910
304
  • Like
Reactions: Sutradhar

Rajizexy

Punjabi Doc💊
Supreme
54,688
55,709
354
Super duper gazab erotic kamuk madak mega updates
फागुन के दिन चार

भाग -५३ गुड्डी और रंजी --मस्ती ही मस्ती पृष्ठ ५०१

अपडेट पोस्टेड

कृपया पढ़ें, लाइक करें और कमेंट जरूर करें
Super duper gazab erotic kamuk madak mega updates , awesome writing skills
👌👌👌👌👌👌👌
🌶️🌶️🌶️🌶️🌶️🌶️
💦💦💦💦💦
 
  • Like
Reactions: Sutradhar

komaalrani

Well-Known Member
25,431
69,910
304
छुटकी - होली दीदी की ससुराल में

भाग ११९ - रतजगा में धमाल पृष्ठ १२३२

बारह हजार से अधिक शब्द, आठ भाग, पचास से अधिक चित्र मेगा अपडेट


अपडेट पोस्टेड कृपया पढ़ें, लाइक करें और कमेंट जरूर करें
 
  • Like
Reactions: Sutradhar
🔥 Read Next Hot Story →
Discover more exclusive stories

komaalrani

Well-Known Member
25,431
69,910
304
जोरू का गुलाम भाग २६३ पृष्ठ १६६२

मिसेज मोइत्रा और उनके दामाद

११, ५२५ शब्द -सुपर मेगा अपडेट पोस्टेड

कृपया पढ़ें, लाइक करें और कमेंट जरूर करें
 
  • Like
Reactions: Sutradhar

malikarman

Nood AV not allowed
4,746
3,761
158
पिक्चर

Gemini-Generated-Image-q7f0omq7f0omq7f0.png



जब हम लोग हाल में पहुँचे तो बस पिक्चर शुरू ही होने वाली थी।



बुकिंग पे काउंटर वाले ने बोला की क्या हम बाक्स का टिकट लेंगे, पिक्चर बस शुरू होने वाली है। मेरा ध्यान पीछे था। वो कत्थई सूट वाल भी टिकट विंडो की ओर बढ़ रहा था मैं नहीं चाहता थी की वो हाल में भी हमारे पीछे रहे।



बाक्स में घुसते ही गुड्डी और रंजी की चांदी हो गई और मेरा सोना। रंजी ने घुसते ही सोफे का एक कोना पकड़ा, मैं बीच में और गुड्डी दूसरे कोने पे, और मेरी सैंडविच बन गई।



फरमाइशें, ताने, शिकायतें, कोल्ड-ड्रिंक नहीं पिलाया, बिना पाप कार्न खिलाये पिक्चर का मजा क्या? ऐसी कंजूसी। कम से कम मूंगफली ही खरीद दी होती। और दोनों नदिदियां, लालीपाप चूसे जा रही थी।


PKD-4-Cinema-Gemini-Generated-Image-v5mkr1v5mkr1v5mk.png


मैंने भी पलट वार किया- “अकेले अकेक्ले लालीपाप खाए जा रही हो मुझे आफर भी नहीं किया…” मैं बोला।

“च च। सारी भैय्या गलती हो गई। लो ना…” और रंजी ने एक बार मुझे दिखाकर लालीपाप सक किया, फिर निकालकर अपने होंठों पे उसे एक ओर से दूसरे ओर तक लगाया। और सीधे मेरे मुँह में। उसके थूक, मुख रस से लिथड़ा, लिपटा लालीपाप अलग ही रस था।

गुड्डी ने दूसरी ओर से मुझे कोंचा- “हे क्या रंजी का ही लोगे?”
Girl-3ac8a50e2c348307d4e7ee69cfd743a3.jpg


उसकी अदा और शिकायत के अंदाज से साफ था की वो “क्या लेने…” का जिक्र कर रही है। और उसने अपने मुँह से निकालकर लालीपाप मुझे आफर किया।

रंजी कौन सीधी थी, कल रात का किस्सा उसे पूरे डिटेल के साथ गुड्डी ने बता दिया था तो वो भी तेल पानी ले के पिल पड़ी," कमीनी तेरी तो ले ली न मेरे भैया ने रगड़ रगड़ के, अब मेरी ले रहे हैं तो तेरी क्यों सुलग रही है,"

बड़ी अदा से लॉलीपॉप चूसती गुड्डी शाहाना अंदाज में बोली " बिन्नो, सुलगने वाली चीज तो मैंने बहुत पहले पांच रूपये की वीट से साफ़ कर दी है, एकदम मक्खन मलाई है, और न बिस्वास हो अपने इस भैया कम भतार ज्यादा से पूछ लो, "

“अरे यार एक साथ दोनों का कैसे लूँगा?” मेरे मुँह से निकल गया और आफत हो गई।

“क्यों दोनों का एक साथ नहीं ले सकते क्या?” बड़े भोलेपन से रंजी ने पूछा।
Girl-K-HD-wallpaper-ketika-sharma-actor-model-tolly-thumbnail.jpg


“क्यों नहीं ले सकते। बल्की लेंगे ही अभी देखना तुम। और वो नहीं लेंगे तो हम दोनों तो सहेलियां हैं जरूर साथ-साथ लेंगे…”

गुड्डी बोली और अपना इरादा उसने अगले पल साफ कर दिया।जंगबहादुर पर तो रिक्शे पर से ही बौराये थे, दो टीनेजर दर्जा ११ वाली, दोनों सेक्सी हॉट, तो किसका नहीं फनफनायेगा, और ऊपर से बनारस वाली गुड्डी पहले तो हलके हलके फिर खुल के सोफे पे बैठते ही, जींस के ऊपर से जंगबहादुर की चम्पी तेल मालिश कर रही थी और वो सुनते भी उसी की थे। चड्डी गुड्डी ने पहनने नहीं दी थी तो तम्बू तो तनना ही था।
बैठते ही गुड्डी के एक हाथ ने सीधे मेरे जंगबहादुर को मेरे पैंट के ऊपर से ही कब्जे में ले लिया था और अब उसने खींचकर रंजी का भी हाथ वहीं रख दिया।

पिक्चर शुरू हो गई थी लेकिन पिक्चर किसे देखनी थी।दो दो टीनेजर्स के हाथ फनफनाये नागराज पर, और मेरा हाथ मेरी ममेरी बहन की कच्ची अमिया पर, उफ़ क्या स्वाद था।
A-cinematic-atmospheric-scene.jpg


तभी कोल्ड ड्रिंक्स वाला अन्दर आया। मेरी तो आफत हो गई।

दोनों एक साथ, कोल्ड ड्रिंक्स, पाप कार्न और ना जाने क्या-क्या? और मेरी जेब से पैसा निकालकर गुड्डी ने कोल्ड-ड्रिंक वाले को दे दिया। पर्स और कार्ड तो टिकट खरीदने के बाद उसी के कब्जे में था। लेकिन मेरी बचत भी हो गई।

और बचत भी हो गई।


वो भी दो तरह से, एक तो उन दोनों बिलियों के झगड़ों से कुछ देर के लिए निजात मिली।

दूसरी मेरी चमकी।

उस कत्थई सूट वाले को मैंने कोल्ड-ड्रिंक शाप पे इसी लड़के से बात करते देखा था। तो उसीने उसे कुछ पे करके यहाँ भेजा होगा। ये देखने के लिए की हमलोग कर क्या कर रहे हैं। मैं सिर्फ ठरकी पने की एक्टिंग कर रहा हूँ या वास्तव में। और वो एकदम सही टाइम पे आया।

गुड्डी का हाथ तो पहले ही मेरे जंगे शेरे को और जगा रहा था, अब उसने रंजी का हाथ भी खींचकर वहीं रख दिया था। मेरा एक हाथ तो रंजी के हाल्टर टाप के अन्दर था और दूसरा गुड्डी का जोबन मर्दन कर रहा था। और जैसे ही वो बाहर गया। मुझे मालूम था की वो हाल खुलासा कत्थई सूट वाले को बयान करेगा। उसके बाद तो क्या नहीं हुआ।

रंजी कोल्ड-ड्रिंक खतम करने के बाद थोड़ा सा उठी बोतल सीट के नीचे रखने के लिए और गुड्डी ने मुझे जोर से आँख मारकर उसकी जगह पुश कर दिया और अब जो वो बैठी तो सीधे मेरी गोद में।



“क्यों मजा आ रहा है सिंहासन पे बैठने में…” गुड्डी ने उसे छेड़ा।

“और क्या? तू सोचती है तू ही बैठ सकती है…” मेरे जाग गए शेर पे अपने कैपरी फाड़ते चूतड़ों को जोर-जोर से रगड़ते वो बोली- “और फिर गुड्डी को जोर से आँख मारकर बोली- “लेकिन बिचारा सिंह तो अभी पिंजड़े में कैद है।'
girl-1fd72442752dca92ca5da243c984dee2.jpg


“तो खोल दे ना…” गुड्डी ने उसे चिढ़ाया-

“लेकिन दहाड़ता हुआ निकलेगा तो बस। गुफा ढूँढ़ेगा…”

पहले तो मेरे दोनों हाथ हाल्टर टाप के ऊपर से ही उसके उरोजों को सहलाते रहे लेकिन बायां हाथ थोड़ा ज्यादा बोल्ड था। पहले उंगलियां फिर पूरी हथेली। पहले तो सिर्फ स्पर्श सुख। एक किशोरी के नवल यौवन कमल का स्पर्श ही मुझे और रंजी दोनों को गिनगिना गया। फिर हिम्मत करके मैंने थोड़ा सा दबाया। जब रंजी कुछ नहीं बोली तो मेरी उंगली ने उसके निपल को फ्लिक किया। एकदम कड़क और अब मुझे ग्रीन सिगनल मिल गया था की उसे भी मुझसे कम मजा नहीं मिल रहा है। फिर तो दूसरे हाथ ने। और अब टाप सरक के नीचे। ब्रा का कवच तो था भी नहीं और दोनों उरोज मेरी मुट्ठी में।

मैंने जब एक साथ दोनों निपल अंगूठे और तरजनी के बीच में लेकर रोल किया तो उसने पहली बार कसकर सिसकी भरी और अपनी दोनों जाँघों को सिकोड़ लिया। लेकिन अब मैं रुकने वाला नहीं था। मेरे होंठ भी मैदान में आ गये थे। उसके गर्दन पे, हल्के-हल्के बटरफ्लाई किसेज गाल पे और एक हाथ जोबन को अब कसकर दबा रहा था मसल रहा था और दूसरा उसके निपल को कभी फ्लिक करता, कभी पुल करता कभी, रोल करता।



“क्या करते हो…” वो बोली, कुछ शिकायत से, कुछ मजे से कुछ दावत देते। बहुत हल्की सिसकी लेते वो बोली।

भले हम लोग बाक्स में हों और कोई हम लोगों को नहीं देख सकता हो। लेकिन आवाज तो जाती ही और। और लोगों को फिल्म देखने में डिस्टर्ब होता न तो इसलिए मैंने अपने होंठ सीधे रंजी के रसीले होंठों पे। वो भीगे होंठ तेरे और श्योर होने के लिए मेरी जीभ उसके मुँह में घुस गई।

गुड्डी खाली नहीं बैठी थी। उसके होंठ मेरे इयर को किस कर रहे थे, जीभ कभी मेरे कान पे कभी गरदन पे और कभी गालों पे। मेरी आग को और हवा दे रही थी। गुड्डी के होंठ मेरे पैंट में बंद दहाड़ते सिंह को और उकसा रहे थे कभी वो उसे प्यार से सहलाती, तो कभी जोर से दबा देती। लेकिन वो कोई भेदभाव नहीं कर रही थी।



मेरी गोद में बैठी रंजी की प्यारी-प्यारी चुनमुनिया पे भी वो बीच-बीच में हाथ फिरा दे रही थी। और उसका असर मेरे और रंजी दोनों पे हो रहा था। मारे जोश के मैं अब बिना रुके उसके गदराये किशोर उभार कस-कसकर दबा रहा था और रंजी भी लम्बी-लम्बी साँसें ले रही थी, जोर-जोर से अपनी जांघें भींच रही थी और मेरे होंठ में अपने होंठ भींचे होने के बावजूद उसकी सिसकी निकल रही थी और वो और कस-कसकर अपने नितम्ब मेरे तने हुए लिंग पे रगड़ रही थी।



तभी दरवाजा खुला और वो कोल्ड-ड्रिंक वाला आया। न मैंने रंजी के टाप से अपना हाथ हटाया और ना गुड्डी ने मेरे शेर से। सिर्फ रंजी ने अपनी टांगें उठा दी और।

वो सीट के नीचे से सारी बाटल्स ले गया।

उसके जाते ही रंजी को मेरे गोद से गुड्डी ने धकेला- “हे कित्ती देर तक सिंहासन का मजा लेगी चल उतर…” गुड्डी बोली“तो क्या तू बैठेगी सिंहासन पर?” रंजी सरक के मेरी बायीं और फिर से सोफे पे बैठते हुए बोली।

“ना सिंह को आजाद करूँगी…” गुड्डी मेरी गोद में झुकते हुए बोली और मेरे सम्हलने के पहले ही गुड्डी ने जिप खोल दी।

जैसे स्प्रिंग वाले चाकू का विज्ञापन निकलता है। बटन दबावो, झटके से 8 इंच का चाकू बाहर। बस वैसा ही हुआ। वो तुरंत उछलकर बाहर, सुपाड़ा पहले से ही खुला था। चंदा भाभी की शिक्षा और आदेश के अनुसार। (उन्होंने पहले दिन ही बनारस में समझाया था। सुपाड़ा हमेशा खुला रखना। कपड़े से रगड़ खाकर वो थोड़ा नंब हो जाएगा। और डिस्चार्ज होने का टाइम देर से हो जाएगा) गुड्डी ने उसे अंगूठे और तरजनी से रगड़ा और वो जोश से पागल हो गया।
Nice update
Par mera connection aapki story se toot gaya hai
Mujhe aapki Holi wali story bahut pasand hai
Jisme heroine ghar ke bahut logon se chudwati hai
 

komaalrani

Well-Known Member
25,431
69,910
304
छुटकी - होली दीदी की ससुराल में

भाग 219 -- बुच्ची और लीला -दोनों ने लीला, ----खेला चोर सिपाही का पृष्ठ १२४३

मेगा अपडेट, १२ हजार से अधिक शब्द, पोस्टेड

कृपया पढ़ें, लाइक करें और कमेंट जरूर करें
 
  • Like
Reactions: Sutradhar
Top