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Erotica नियति से बंधी नीतू

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नियति से बंधी नीतू - Part 3

वहाँ दीवार से सटकर रो रही नीतू के पास बसव आया और उसे जल्दी से वहाँ से चलने को कहा। उसने उसे उतावलेपन से नीचे की मंजिल पर लाया। उस पल नीतू को न जाने क्यों ऐसा नहीं लगा कि वह केवल लहंगे और ब्लाउज में बसव के सामने है, न उसे शर्मिंदगी हुई और न ही खुद पर गुस्सा आया। उसने बसव के हाथ से अपनी साड़ी ली और पहन ली। बसव ने उसका बैग उठाया और उसके साथ इमारत के बाहर आया, फिर उसे अपनी बाइक के पास ले गया। बाइक पर चढ़कर स्टार्ट करने के बाद उसने नीतू को बैठने को कहा। नीतू के बैठने के बाद वह सीधे नीतू के घर के पास आकर बाइक रोक दी। नीतू उतरी, बसव से अपना बैग लिया और उसे अंदर आने के लिए बुलाया। नीतू ने घर का ताला खोला और अंदर कदम रखते ही बसव के सामने हाथ जोड़कर उसके पैरों पर गिर पड़ी। बसव तुरंत पीछे हटा और बोला, "यह क्या कर रही हैं आप?" नीतू ने कहा, "अगर आप सही समय पर नहीं आते, तो आज उस पापी ने मेरी जिंदगी बर्बाद कर दी होती। आपका यह ऋण मैं सात जन्मों में भी नहीं चुका सकती।" बसव बोला, "आप ऋण, मदद वगैरह की बातें न करें, यह मेरा कर्तव्य ही था। अगर आज आपको कुछ हो जाता, तो मैं यहाँ आकर भी आपको नहीं बचा पाता, इस मलाल में शायद मेरी जान ही चली जाती।" नीतू बसव की बातों से कृतज्ञता भरी मुस्कान बिखेरते हुए उसकी ओर देख रही थी, तभी उसकी नजर बसव की बाँह पर पड़ी, जहाँ मजदूर के चाकू के वार से हुआ घाव था। नीतू तुरंत कमरे से मेडिकल बॉक्स लाई और पहले बसव के घाव को रुई से साफ किया, फिर उस पर क्रीम लगाई, पाउडर डाला, रुई रखकर पट्टी बाँध दी। बसव को बैठे रहने को कहकर वह उसके लिए शरबत ले आई। बसव ने पूछा, "यह सब क्यों?" तो नीतू ने नकली गुस्से से कहा, "चुपचाप पिएँ, कुछ मत बोलें।" बसव ने उससे जूस लिया और उसकी आँखों में देखते हुए एक ही घूँट में जूस पी लिया। फिर गिलास नीचे रखते हुए बोला, "मैं अब चलता हूँ।" नीतू ने फिर से धन्यवाद दिया और कहा कि कल जब दूध लाएँ, तो यहीं नाश्ता करके जाना। बसव हँसते हुए बोला, "जैसा आप कहें, वरना आप गुस्से में मुझे ही पीट देंगी।" नीतू भी चेहरे पर कई भावों के साथ मुस्कुराई।

उस रात सोते समय नीतू ने अपने पति को दिन की घटना बताई, लेकिन यह छिपा लिया कि उस पर बलात्कार की कोशिश हुई थी। उसने कहा, "एक नशेड़ी ने रास्ते में रोककर बदतमीजी की, तभी हमारे घर दूध देने वाला व्यक्ति आ गया और उसने उसे सबक सिखाकर मेरी मदद की और मुझे घर तक छोड़ गया।" हरीश एक पल के लिए डर और घबराहट में बोला, "तुझे कुछ नहीं हुआ न?" उसने नीतू का चेहरा और हाथ देखकर जाँच शुरू की। नीतू ने उसे तसल्ली देते हुए कहा, "मुझे कुछ नहीं हुआ, मैं ठीक हूँ। तुम व्यर्थ घबराओ मत। सही समय पर दूध वाला आ गया।" हरीश ने राहत की साँस लेते हुए कहा, "फिलहाल तुझे कुछ नहीं हुआ, यही काफी है। कल रविवार है, मैं यहाँ ट्रेनिंग रूम में ही रहूँगा। जब दूध वाला आए, उसे घर में बिठाकर मुझे फोन करना, मैं उसे धन्यवाद देना चाहता हूँ।" नीतू ने कहा, "ठीक है, अब तुम सो जाओ, मुझे भी नींद आ रही है।" फिर वह पति की ओर पीठ करके खुली आँखों से दिन की भयावह घटनाओं को याद करने लगी। कैसे उस मजदूर ने आसानी से उसकी साड़ी और लहंगा उतार दिया और उसके स्तनों को जोर से दबा दिया। अगर दूध वाला सही समय पर न आता, तो मजदूर उसकी कच्छी उतारने में भी कामयाब हो जाता। बसव ने जिस तरह उसकी रक्षा की, उसे याद करते हुए नीतू के होंठों पर हल्की मुस्कान उभरी। अनजाने में उसका बायाँ हाथ उसकी जाँघों के मिलन स्थल, यानी काम पुष्प को नाइटी के ऊपर से सहलाने लगा और वह सो गई।

सुबह उठकर नित्य कर्म पूरे करने के बाद नीतू नाश्ता तैयार करने गई। उसे याद आया कि उसने आज दूध वाले को यहीं नाश्ता करने का न्योता दिया है, इसलिए उसने हमेशा से थोड़ा ज्यादा बनाया। जब सभी नाश्ते के लिए बैठे, तो छोटे बेटे ने पूछा, "मम्मी, आज गाजर का हलवा बनाया है, क्या खास है?" नीतू ने कहा, "कुछ नहीं सूरी, तुझे पसंद है इसलिए बनाया, बस।" पति और बच्चों को विदा करने के बाद, जो नीतू कभी इंतज़ार नहीं करती थी, वह आज दूध वाले का बेसब्री से इंतज़ार कर रही थी। थोड़ी देर बाद "दूध" की आवाज़ सुनकर वह दौड़कर आई और मुस्कुराते हुए उसका स्वागत किया। उसने उसे अंदर आने का न्योता दिया। घर में आए बसव को उसने कहा, "हाथ-पैर धो लीजिए, नाश्ता करेंगे।" उसने बाथरूम दिखाया। जब बसव वहाँ गया, तो नीतू भी हल्की मुस्कान के साथ नाश्ता लाने रसोई की ओर गई। बाथरूम में हाथ-पैर धोते समय बसव की नज़र वहाँ हेंगर पर लटक रहे भूरे रंग के ब्रा पर पड़ी। बाथरूम का दरवाज़ा बंद होने के कारण उसने ब्रा को हाथ में लिया और पहले उसे नाक के पास लाकर उसकी खुशबू सूँघी, जो उसकी सपनों की रानी के वक्ष स्थल की थी। उस सुगंध ने उसके पुरुषत्व के प्रतीक को सिर उठाने पर मजबूर कर दिया। बसव ने ब्रा के कप्स को फैलाकर देखा और सोचा, "यही मेरी रानी के स्तनों को बाँधे रखते हैं।" उसने ब्रा के कप्स को चूमा और उसे वापस हेंगर पर टांगकर बाहर आ गया।

नीतू पिछले कुछ दिनों से दो मोटी किताबें रोज़ दो-दो बार पढ़ रही थी और पुरुष शरीर के हर पहलू को अच्छी तरह समझ चुकी थी। जब बसव बाहर आया, तो नीतू की नज़र उसके चेहरे से नीचे सरकी। उसे उसकी कमर से थोड़ा नीचे कुछ ऐसा दिखा जैसे कोई बड़ा डंडा रखा हो। अगले ही पल उसे समझ आ गया कि वह क्या है और शर्म से उसने सिर झुका लिया। नीतू ने बसव को नाश्ता परोसा और डाइनिंग टेबल पर उसके सामने वाली कुर्सी पर बैठकर उससे हर बात पूछकर जानने लगी। बसव ने बताया, "घर में बेटा और पत्नी के साथ रहता हूँ, माता-पिता स्वर्गवासी हो चुके हैं। घर में चालीस गायें हैं, जिनमें से पंद्रह गायों का दूध मैं चुनिंदा घरों में सप्लाई करता हूँ। पच्चीस गायों का दूध मेरा बेटा रोज़ शहर की डेयरी में डालता है। बाकी पाँच गायों के दूध से घर के लिए जरूरत भर दूध रखकर बचा हुआ दूध मेरी पत्नी मक्खन निकालने के लिए इस्तेमाल करती है।" उसने आगे बताया, "गाँव में दस एकड़ का बगीचा है, जिसमें नारियल, आम, अनार, चीकू, केला और थोड़ी ज्यादा मात्रा में सब्जियाँ और साग उगाते हैं। बेटा कुछ मजदूरों के साथ उसकी देखभाल करता है। मैं सिर्फ शहर की दुकानों में उनकी बिक्री का ध्यान रखता हूँ।" नीतू खुशी से बोली, "तो फिर हमें आपके बगीचे की सब्जियाँ और फल लेने के लिए दुकान पर ही जाना होगा?" बसव ने सिर खुजाया, नाश्ता आधा छोड़कर बाहर गया और एक बड़ा बैग लेकर लौटा, जिसे उसने नीतू को थमा दिया। नीतू ने बैग खोलकर देखा तो उसमें नारियल, सब्जियाँ, साग, कुछ चीकू, अनार और केले थे। नीतू ने आश्चर्य से बसव की ओर देखकर पूछा, "इसे आप शहर की दुकान में देने के बजाय मुझे क्यों दे रहे हैं?" बसव ने नाश्ता खाते हुए कहा, "यह दुकान के लिए नहीं, आपके लिए लाया हूँ।" नीतू ने कहा कि उसे इसका पैसा लेना होगा, लेकिन बसव ने साफ मना कर दिया और कहा, "यह मुमकिन नहीं। मैं किसी के घर सप्लाई नहीं करता। यह सिर्फ आपके लिए लाया हूँ। अगर आप मना करेंगी, तो मुझे दुख होगा। पैसों की बात किसी भी हाल में बीच में नहीं लानी है।" नीतू हँसते हुए बैग को रसोई में रखकर लौट आई।
 

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नियति से बंधी नीतू - Part 4

नीतू ने बात आगे बढ़ाते हुए कहा, "इतने दिन हो गए, मैंने आपका नाम भी नहीं पूछा।" बसव हँसते हुए बोला, "मेरा नाम बसव है।" बसव सब्जी उपमा और गाजर का हलवा खाते हुए बोला, "मेरी पत्नी भी उपमा बनाती है, लेकिन आपके बनाए उपमा का स्वाद लाजवाब है। यह गाजर का हलवा तो बयान ही नहीं किया जा सकता, अमृत का मिश्रण लगता है।" उसकी तारीफ सुनकर नीतू शरमाते हुए बोली, "थैंक्स।" उसने देखा कि बसव की थाली में हलवा खत्म हो गया है, तो उसने फिर से हलवा और उपमा परोस दिया। बसव ने कहा, "बस, काफी हो गया। मैंने दो बार थाली भरकर खा लिया।" लेकिन नीतू नहीं मानी, तो बसव ने उसका हाथ पकड़कर कहा, "बस, काफी है।" बसव के स्पर्श से नीतू को अपनी जाँघों के बीच काम बट्टल में वीणा की तार छेड़ने जैसा मधुर सुखद अनुभव हुआ। उसके भाव कुएँ से आठ-दस बूँदें अमृत की छलक पड़ीं, जिसने उसकी कच्छी को गीला कर दिया। उस स्पर्श के मधुर अनुभव में तैर रही नीतू का ध्यान तब टूटा, जब बसव ने पूछा कि थाली कहाँ धोए। उसने बसव के हाथ से थाली छीनते हुए कहा, "मैं हूँ तो आप थाली क्यों धोएँ? जाइए, हाथ धो लीजिए। मैं कॉफी बनाकर लाती हूँ।" वह रसोई की ओर चली गई और बसव बाथरूम की ओर।

बाथरूम में हाथ धोने के बाद बसव ने फिर से नीतू की कल पहनी और आज नहाते समय उतारी गई भूरी ब्रा को हाथ में लिया। उसकी खुशबू सूँघकर उसने ब्रा के कप्स को दो-दो बार चूमा और उसे वापस हेंगर पर टांगकर बाहर आ गया। नीतू ने दोनों के लिए कॉफी बनाकर लाई और उसे देकर दोनों सोफे पर बैठकर बातें करने लगे। बसव ने कॉफी की भी बहुत तारीफ की। नीतू बोली, "आप बस यों ही तारीफ कर रहे हैं। मैं इतना अच्छा नहीं बनाती।" बसव ने उसकी बात बीच में काटकर कहा, "नहीं, मैं यों ही नहीं कह रहा। आपके हाथ का स्वाद साक्षात् अन्नपूर्णेश्वरी जैसा है, बहुत ही लाजवाब। खाते समय मन को पूरी तृप्ति मिलती है।" नीतू हँसते हुए बोली, "अगर ऐसा है, तो अब से रोज़ आपको यहीं नाश्ता करना होगा, वरना मैं समझूँगी कि आप झूठ बोल रहे हैं।" बसव बोला, "रोज़ अमृत मिले तो कौन मना करेगा? लेकिन मेरे लिए नाश्ता बनाने से आपको तकलीफ होगी, यही मन को खलता है।" नीतू बोली, "मुझे कोई तकलीफ नहीं होगी। अपने लोगों के लिए नाश्ता बनाते समय थोड़ा ज्यादा बनाना ही तो है। आप ऐसा कहेंगे तो मुझे बुरा लगेगा।" उसने नाराज़ होने का मुँह बनाया। बसव ने माफी माँगते हुए कहा, "अब से रोज़ मैं यहीं नाश्ता करूँगा। अब खुश तो हैं न?" वह हँसा तो नीतू भी मुस्कुराई।

नीतू हँसते हुए बोली, "आपका मन बहुत अच्छा है, यह मुझे कल की घटना में ही समझ आ गया था।" बसव बोला, "उस घटना को कड़वी याद समझकर भूल जाइए। सिर्फ अच्छी बातें ही अपने मन में याद रखिए। मैं रोज़ शहर के बाज़ार जाता हूँ। आपको कुछ चाहिए हो तो दूध देने के समय बता दें या मुझे फोन कर दें, मैं खुद पहुँचा दूँगा।" उसने अपना फोन नंबर दिया। नीतू ने अपने फोन में उसका नंबर डायल किया। जब बसव का फोन बजा, तो उसने कहा, "यह मेरा नंबर है। मेरा नाम नीतू के नाम से सेव कर लीजिए।" बसव ने नंबर सेव करते समय उसे "ड्रीम गर्ल" के नाम से सेव किया और बोला, "कोई भी काम हो या कुछ करवाना हो, किसी भी समय बिना झिझक मुझे फोन करें, मैं कर दूँगा।" नीतू ने उसे धन्यवाद दिया और कहा, "आप बहुत परोपकारी लगते हैं।" बसव ने सिर झुकाकर कहा, "ऐसा कुछ नहीं, सिर्फ आपको कहा है, आप हमारे अपने हैं।" फिर वह जाने की बात कहकर वहाँ से चला गया।

बसव के जाने के बाद नीतू उसकी हथेली के स्पर्श और जाते समय कहे गए "आप हमारे अपने हैं" शब्दों को याद करते हुए कल्पनालोक में तैर रही थी। रोज़ धोने वाले कपड़े लाकर वॉशिंग मशीन में डालने के बाद, जब कोई काम नहीं बचा, तो वह कमरे में जाकर लेट गई। तभी उसका ध्यान फिर से उन मोटी किताबों की ओर गया। उसने किताब उठाई और रोज़ बिना नागा पढ़ी जाने वाली दूधवाले की कहानी वाला पेज खोलकर लेटते हुए पढ़ना शुरू किया। आज उस कहानी को पढ़ते समय नीतू को एक अलग तरह का अनुभव हो रहा था। उसने पूरे मन से कहानी के किरदारों की जगह खुद को और बसव को कल्पना करते हुए पढ़ना शुरू किया, जिससे उसका शरीर पहले से कहीं ज्यादा उत्तेजित हो उठा। रोज़ कहानी पढ़ते समय वह अपनी काम वाटिका को नाइटी के ऊपर से सहलाती थी, लेकिन आज बसव के स्पर्श और "आप हमारे अपने हैं" शब्दों को याद करते हुए उसने एक कदम आगे बढ़ाया। नीतू ने अपनी हथेली को जाँघों पर रखा और अनजाने में उसकी हथेली ने नाइटी को ऊपर उठाना शुरू कर दिया। जब नाइटी पूरी तरह कमर तक आ गई, तो और ज्यादा उत्तेजित नीतू ने अपनी काली सलवार को भी ऊपर उठाना शुरू कर दिया। जब नीतू की नाइटी और सलवार दोनों कमर तक ऊपर चढ़ गए, तो उसकी सुंदर टाँगें और मजबूत जाँघें पूरी तरह नग्न हो गईं।

नीतू कहानी पढ़ते हुए खुद को बसव की बाहों में बंधन में कल्पना कर रही थी। उसने अपनी दाहिनी हथेली को हरी कच्छी में छिपे रति सुख के काम पुष्प पर रखा और धीरे-धीरे उसे सहलाना शुरू किया। कहानी के दृश्यों में खुद को बसव के साथ कल्पना करने के कारण नीतू ने अपनी काम वाटिका को हथेली से बहुत तेजी से रगड़ना शुरू कर दिया। उसके मुँह से जोर-जोर से "अम्मा... आह... आह... हाँ... हाँ... और... हाँ... ऐसे ही... अय्यो, रुक नहीं पा रही!" की चीखें निकलने लगीं। पहली बार उसने बसव का नाम भी लिया, "आ बसव, मैं बहुत तड़प रही हूँ, आ मेरी प्यास बुझा... आआ... आह... हाँ... बसव... हाँ... बसव!" चीखते हुए एक मिनट तक उसने अपने अमृत रस को बाहर निकाला और निढाल होकर बिस्तर पर आँखें मूंदकर तेजी से साँसें छोड़ने लगी, जैसे वह पहाड़ चढ़कर आई हो। नीतू को इस नए तरह के बादलों में तैरने वाले सुखद अनुभव से सामान्य स्थिति में लौटने में पंद्रह मिनट लग गए।

जब नीतू की तेज साँसें नियंत्रण में आईं, तो उसने उठकर नीचे देखा। उसकी नाइटी और सलवार कमर तक चढ़ी हुई थीं, टाँगें नग्न थीं, और उसकी हरी कच्छी उसके ही अमृत रस से पूरी तरह भीगी हुई थी। साथ ही उसकी काली सलवार और नाइटी भी हल्की-सी गीली हो गई थीं। आज न जाने क्या हुआ कि नीतू को नाइटी और सलवार तो छोड़ो, अपनी पूरी तरह भीगी और गीली कच्छी को भी बदलने का मन नहीं हुआ। वह इस नए सुख को अनुभव करने लगी।

एक घंटे तक लेटने के बाद नीतू उठी और रसोई के काम करने लगी। रस से पूरी तरह भीगी कच्छी उसे सुखद एहसास दे रही थी, जिससे वह रोमांचित थी। काम खत्म करके कमरे में कदम रखते ही उसके मन में फिर से उसी सुख में तैरने की इच्छा जगी। उसने बक्सा खोला। नीतू ने मोटी किताब को बाएँ हाथ में लिया और फिर से दूधवाले की कहानी पढ़ते हुए अपनी कल्पनालोक में बसव को याद करने लगी। बिना किसी झिझक के उसने नाइटी और सलवार को कमर तक ऊपर उठा लिया। पहले से ही उसके यौवन रस से भीगी कच्छी पर उंगलियों से काम पुष्प को रगड़ना शुरू किया। इस बार भी वह बसव का नाम ही अपने होंठों पर बुदबुदा रही थी और बीच-बीच में "हाँ... हूँ... हूँ... आह... आह..." की सिसकारियाँ भर रही थी। वह कामोत्तेजना के शिखर पर पहुँच गई और पहले से थोड़ा ज्यादा अमृत रस निकालकर फिर से अपनी कच्छी, सलवार और नाइटी को गीला कर लिया। वह किसी दूसरी दुनिया में तैरते हुए सो गई।

शाम को जब पति और बच्चे आए और दरवाजा खटखटाया, तो नीतू जागी। अपनी अर्धनग्न अवस्था देखकर वह शरमाई और जल्दी से नाइटी को नीचे सरकाकर दरवाजा खोलकर उनका स्वागत किया। सभी के लिए कॉफी और दूध बनाने रसोई की ओर कदम बढ़ाते समय, दो-दो बार अमृत निकालने के परिणामस्वरूप पूरी तरह भीगी और गीली कच्छी उसे पहले कभी न हुआ एक नया उत्साहपूर्ण अनुभव दे रही थी। जब पति और बच्चे कोचिंग क्लास के लिए गए, तो नीतू ने मुख्य दरवाजा बंद किया, कमरे की खिड़की और दरवाजा लगाया, और बड़े शीशे के सामने खड़ी हो गई। उसने नाइटी की ज़िप नीचे खींची। नाइटी के निचले हिस्से को पकड़कर ऊपर उठाते समय उसे लगा जैसे बसव ही उसकी नाइटी उठा रहा हो, जिससे उसके शरीर में उत्तेजना बढ़ने लगी। नाइटी को उतारकर बिस्तर पर रखा, फिर सलवार की डोरी ढीली करके उसे भी शरीर से अलग किया। अब वह केवल पीली ब्रा और हरी कच्छी में थी। शीशे में अपने रूप और लावण्य से चमकते शरीर को देखकर वह खुद ही शरमा रही थी। नीतू ने अपने शरीर में बढ़ते ताप को शांत करने के लिए फिर से जाँघों के मिलन स्थल पर हाथ डाला और उंगलियों से अमृत से भरी वाटिका को रगड़ना शुरू किया। उसका मन फिर से बसव की ओर झुका, और उसकी याद में वह तेजी से उंगलियों को कच्छी के ऊपर रगड़ने लगी। जब वह स्खलन की स्थिति तक पहुँची, तो उसके पैर काँपने लगे और उसे कमजोरी महसूस हुई। वह कमरे की जमीन पर ही बैठ गई और जोर-जोर से रगड़ते हुए उस दिन तीसरी बार अमृत निकालकर अपनी कच्छी को और गीला कर लिया।

बीस मिनट तक जमीन पर ही आधी खुली आँखों के साथ निढाल अवस्था में लेटी रही। फिर उसने अपनी कच्छी को छूकर देखा। उसकी कच्छी पूरी तरह कामरस से भीगी हुई थी, और उसकी उंगलियों पर भी कुछ रस के अंश लग गए। नीतू ने उंगली उठाकर देखा और कुछ सोचते हुए उसे नाक के पास लाकर उसकी खुशबू ली, जिससे उसके अंदर एक और इच्छा जगी। नाक से उंगली को होंठों के बीच लाकर उसने मुँह खोला और उंगली को अंदर डालकर अपने ही रस से भीगी उंगली को चूसा। इससे उसके पूरे शरीर में रोमांच की बिजली दौड़ गई। इस तरह तीन-चार बार उंगली से कच्छी को सहलाकर नीतू ने अपने रस का स्वाद लेना शुरू कर दिया।

रात को खाना खाकर सोते समय नीतू दिन की अपनी हरकतों को याद करने लगी और यह सोचने लगी कि उसने जो किया, वह सही था या पति के साथ विश्वासघात। उसका दिल कह रहा था कि वह पति के साथ धोखा कर रही है, लेकिन उसका मन और शरीर का हर कण यह तर्क दे रहा था कि उसने जो किया, वही सही है। केवल पैसा और ऐश्वर्य से ही शांतिपूर्ण जीवन नहीं जिया जा सकता। इस समय जब तुम अपनी यौवन की इच्छाओं से तड़प रही हो, तुम्हारे शरीर को तुम्हारे पति के कमाए पैसे की नहीं, बल्कि उसकी बाहों में बंधकर नलने वाले अनुभव की जरूरत है। तुमने कितनी बार उसे यह समझाने की कोशिश की, लेकिन उसे इसमें कोई रुचि ही नहीं है। अब तुम्हारे इस कामोत्तेजना के अत्यधिक ताप से तड़प रहे शरीर को ठंडा करने का एकमात्र सहारा बसव है। तुम खुद सोचो, अगर कल बसव सही समय पर आकर तुम्हें नहीं बचाता, तो वह नशेड़ी तुम्हारे इस शरीर का भोग कर चुका होता। तुम्हारी साड़ी और सलवार उतारने के बाद वह तुम्हारी कच्छी भी उतार देता और तुम्हारे पति के अलावा किसी ने न देखे तुम्हारे शरीर को नग्न देख लेता। बिना किसी दया के वह तुम्हारा बलात्कार कर देता। तब तुम क्या करतीं? आत्महत्या ही एकमात्र रास्ता बचा था, है ना? तब तुम्हारे परिवार का क्या होता? तुम्हारे आश्रय में रहने वाले बच्चों का क्या होता? तुम्हारे पति को तुम्हारे अलावा और कौन सहारा देता और सांत्वना देता? तुम खुद सोचो। बसव ने न केवल तुम्हारा मान और जीवन बचाया, बल्कि तुम्हारे पूरे परिवार, तुम्हारी दुनिया को बचाया है। केवल उसकी कल्पना में तुम अपने शरीर का ताप शांत करने की कोशिश कर रही हो, यह काफी नहीं है। तुम्हें उसे अपने शरीर पर हाथ फेरने का अवसर भी देना होगा। अभी भी कुछ तय न कर पाने की उलझन में पड़ी नीतू ने खुद से सवाल किया, "मैं उससे कैसे कहूँ कि आ, मेरी काम की ज्वाला को शांत कर?" इसके जवाब में उसका मन ही बोला, "ऐसा पुरुष जो औरत के शरीर के सामने हार न माने, वह कोटि में एक होता है, और तुम्हारा पति भी उनमें से एक है। तुम्हारे जैसा रसीला फल मिले, तो पुरुष कुछ भी करने को तैयार हो जाता है, लेकिन यहाँ तुम्हारा पति ही तुम्हें उस नजर से नहीं देख रहा, क्या विडंबना है। तुम्हारे जैसी आकर्षक काया से ऋषियों की तपस्या भी भंग की जा सकती है, इतनी मादकता से भरा यौवन तुममें ठाठें मार रहा है, फिर बसव की क्या बात। कल से ही अपनी मोहक जाल को उसकी ओर फेंक। जब तक तुम्हारी इच्छा पूरी न हो, उसे छोड़ना मत। उसे अपनी काया का जलवा दिखाओ। उसके साथ यों ही हँसो, मादकता से होंठ काटकर नखरे दिखाओ, उसके सामने इठलाओ, वह खुद तुम्हारे जाल में फँस जाएगा। तब तुम्हें उसकी कल्पना में रगड़ने की जरूरत ही नहीं पड़ेगी।" नीतू सोने से पहले सोच रही थी कि अपने पति को अपनी ओर आकर्षित करने में वह पूरी तरह असफल रही है, लेकिन बसव को किसी भी तरह अपने वश में करके अपने शरीर में उठ रहे उत्तेजना के तूफान को शांत करना ही होगा। बसव के लिए अपनी जाँघों के बीच स्वर्ग का द्वार खोल देने का पक्का इरादा लेकर नीतू नींद में खो गई।

अगले दिन रविवार को हरीश ने बच्चों के साथ कोचिंग क्लास जाने से पहले कहा कि जब बसव आए, तो उसे फोन करना, वह उसे धन्यवाद देना चाहता है। नीतू को निराशा हुई, लेकिन उसने "ठीक है" कहा। अभी बसव के आने में कुछ समय बाकी था, तो नीतू कमरे में गई और नाइटी ऊपर उठाकर सलवार की डोरी ढीली करके उसे उतार दिया। बसव के आने से पहले उसकी कल्पना करते हुए एक बार रगड़ने की इच्छा हुई। वह बिस्तर पर लेट गई और बसव को याद करते हुए दस मिनट तक अपनी काम वाटिका को रगड़ा, जिससे उसके यौवन रस से उसकी नीली कच्छी गीली हो गई। बसव की कल्पना से निकले रस से भीगी कच्छी पहनकर उसके सामने जाने की सोचकर नीतू के शरीर में रोमांच छा गया। नीतू उठी, बाथरूम में मुँह धोकर बाहर आई। तभी बसव को उत्तेजित करने का विचार आया। उसने सुबह नहाने से पहले उतारी हुई हरी कच्छी को बाल्टी से निकाला और उसे हेंगर पर पूरी तरह फैलाकर टांग दिया। उसने सोचा कि जब बसव नाश्ता करने से पहले हाथ धोने आएगा और उसे मेरी कच्छी दिखेगी, तो वह क्या करेगा, यह मैं देखूँगी। वह मुस्कुराई।
 

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नियति से बंधी नीतू - Part 5

कुछ देर बाद जब बसव आया, तो नीतू ने उसे अंदर बुलाया और हाथ-पैर धोकर आने को कहकर नाश्ता लाने रसोई की ओर चली गई। बसव ने बाथरूम में हाथ-पैर धोए और उसकी नजर हेंगर की ओर गई। उसने सोचा कि शायद आज भी अपनी सपनों की रानी की ब्रा देखने का मौका मिलेगा। लेकिन हेंगर पर लटक रही चीज को देखकर वह खुश हो गया। उसे तुरंत समझ आ गया कि यह औरत की कच्छी है, और इस घर में नीतू के अलावा बाकी तीनों पुरुष हैं, यानी यह उसकी रानी की कच्छी है। बसव ने हेंगर पर लटकी हरी कच्छी को हाथ में लिया और उसे नाक के पास लाकर सूँघा। पिछले दिन तीन बार अपने यौवन रस से उस कच्छी को भिगो चुकी नीतू की कच्छी से ऐसी मंत्रमुग्ध कर देने वाली खुशबू आ रही थी कि बसव का शरीर कामोत्तेजना से भरने लगा। उसने सोचा, अगर मेरी सपनों की रानी की कच्छी ऐसी खुशबू दे रही है, तो इस कच्छी को पहनने वाली जाँघों का मिलन स्थल कितना महक रहा होगा। बसव यह भी भूल गया कि वह कहाँ है। उसने नीतू की उतारी हुई कच्छी को सूँघते हुए अपनी जीभ से कच्छी के अंदरूनी हिस्से को चाट लिया।

जैसे ही बसव बाथरूम में गया, नीतू चुपके से पीछे के रास्ते बाथरूम की खिड़की के पास गई और छिपकर अंदर का दृश्य देखने लगी। बसव को अपनी कच्छी पकड़कर सूँघते और उसके अंदरूनी हिस्से को चाटते देखकर नीतू के शरीर में काम की ज्वाला भड़कने लगी। अगला दृश्य देखकर वह हक्का-बक्का रह गई। बसव ने कच्छी सूँघते हुए अपनी पायजामे से अपने खड़े लंड को बाहर निकाला। नीतू ने चमकता हुआ आठ इंच लंबा और मोटा, शानदार आकार का लंड देखा, जिससे उसे आश्चर्य और खुशी दोनों हुए। बसव ने बाएँ हाथ में पकड़ी कच्छी को नीचे लाकर अपने लंड पर रगड़ना शुरू किया। यह देखकर नीतू को लगा जैसे उसके जाँघों के मिलन स्थल पर बसव का लंड रगड़ रहा हो। करीब दस मिनट तक बसव ने अपने लंड को आगे-पीछे करते हुए नीतू की कल्पना में सुख के शिखर को छुआ और दूध की मलाई जैसा गाढ़ा वीर्य छोड़ते हुए नीतू की हरी कच्छी के अंदरूनी हिस्से में उड़ेलना शुरू किया। बसव के लंड से सात-आठ बार छूटा वीर्य छह-सात चम्मच के बराबर था, जो नीतू की कच्छी के अंदरूनी हिस्से में जमा हो गया। बसव को अचानक ख्याल आया कि वह कहाँ है। उसने तुरंत कच्छी को हेंगर पर टाँगा और सोचा कि अगर नीतू को पता चला, तो वह मेरे बारे में क्या सोचेगी। बाथरूम से बाहर आने से पहले ही नीतू रसोई के दरवाजे पर मौजूद थी। बसव ने आते ही नीतू की ओर बिना देखे कहा, "आज कुछ जरूरी काम था, मुझे अभी याद आया। मुझे जल्दी जाना है, कल नाश्ता करूँगा।" वह जाने लगा, लेकिन नीतू ने उसे रोक लिया। उसने कहा, "ऐसे कैसे चले जाएँगे? अगर नाश्ता करने का समय नहीं है, तो कोई बात नहीं। मैं डिब्बे में डाल देती हूँ। मैंने प्यार से बनाया है।" बसव को उस डर में भी यह जानकर खुशी हुई कि नीतू ने उसके लिए प्यार से बनाया है। उसने "ठीक है" कहा।

बसव के जाने के बाद नीतू ने पति को फोन करके कहा कि उन्हें कुछ काम था, इसलिए वह जल्दी में चले गए, आपको आने की जरूरत नहीं है। फिर उसने फोन काट दिया। नीतू जल्दी से बाथरूम में गई और हेंगर पर टँगी अपनी हरी कच्छी को हाथ में लिया। अंदरूनी हिस्से को देखा, तो उसमें दूध की मलाई जैसा बसव का वीर्य जमा हुआ था। नीतू ने पहले कच्छी को बसव की तरह नाक के पास लाकर सूँघा। पुरुष के वीर्य की गंध ने उसके शरीर में काम की आग को और भड़का दिया। दस बार कच्छी को सूँघने के बाद नीतू ने दो उंगलियों से अपनी कच्छी में तैर रहे बसव के गाढ़े वीर्य को थोड़ा सा लिया और उसे अपने होंठों के पास लाई।

जब नीतू ने अपनी तर्जनी और मध्यमा उंगली को अपने होंठों के पास देखा, तो दोनों पर बसव के वीर्य के हल्के-हल्के चिपके हुए निशान दिखाई दिए। एक-दो मिनट सोचने के बाद, उसने धीरे से अपनी जीभ बाहर निकाली और थोड़ा सा वीर्य चाटा, तो उसे नमकीन-सा स्वाद लगा। अपने जीवन में पहली बार अपने पति के वीर्य को भी न चाटने वाली नीतू ने बसव के वीर्य को चाटते ही यह सोचकर कि वह क्या कर रही है, उसके शरीर में रोमांच की एक लहर-सी दौड़ गई। नीतू ने दोनों उंगलियों को पूरी तरह अपने मुँह में डाल लिया और उसमें चिपके वीर्य को चाटकर गले के रास्ते अपने पेट में उतार लिया। उसी तरह दो बार और हरे रंग के कांच से बसव के वीर्य को उंगली से लेकर चाटना शुरू किया। जब नीतू की नजर कांच पर पड़ी, तो दूध की मलाई जितना गाढ़ा वीर्य कांच में थोड़ा ही समाया था, और अभी भी लगभग तीन चम्मच जितना वीर्य कांच के अंदर जमा होकर तैर रहा था। नीतू के मन में एक विचार आया, और उसने कांच को फिर से हैंगर पर टांगकर अपनी नाइटी को ऊपर उठाया और नीले रंग का कच्छा उतार दिया। नीतू ने अपने नीले कच्छे को एक तरफ रखा और कल के दिन तीन बार अपने ही अमृत रस से भीगा हुआ और अब बसव के वीर्य से भरा हुआ हरा कच्छा हाथ में लेकर पहन लिया। जब हरे कच्छे के अंदर का बसव का वीर्य उसकी योनि को छूआ, तो नीतू को एक रोमांचक अनुभव हुआ, जो उसे नवरसों का आनंद दे रहा था। नीतू कमरे के अंदर के आईने के सामने खड़ी होकर नाइटी को कमर तक ऊपर उठाकर बसव के वीर्य से सजा हुआ हरा कच्छा और उसमें अपनी योनि को देख रही थी, तो वह हिस्सा पूरी तरह गीला होकर उसकी जांघों के मिलन-स्थल पर चिपक गया था। उसी सुखद अनुभव के साथ बिस्तर पर लेटकर नीतू ने अपनी जांघों को फैलाया और उंगली से अपनी योनि पर रगड़ते हुए बसव के वीर्य को चारों ओर सजाने लगी। केवल दो-तीन मिनट की रगड़ में ही नीतू अपनी कामोत्तेजना के चरम पर पहुंच गई और अपने कामरस को निकालकर चारों ओर फैले बसव के वीर्य के साथ मिला दिया।

बीस मिनट बाद होश में आकर उठी नीतू फिर से आईने के सामने खड़ी होकर नाइटी को ऊपर उठाकर गीले-मुड़े हरे कच्छे को देखते हुए... "बसव, आज तेरा वीर्य मेरे यौवन रस के साथ मिल गया। अब बस तुझे मेरे अंदर प्रवेश करके मेरी गर्भभूमि में अपने वीर्य का बीज बोना है, और वह भी जल्द ही होगा, मुझे पता है। तुझमें भी मेरे लिए काम की भावना है, यह मुझे आज बाथरूम में हुई घटना से समझ आ गया। तुझे जितना जल्दी हो सके अपनी जांघों के बीच लेकर समागम का सुख अनुभव करने की इच्छा मेरे अंदर और मजबूत हो गई..." कहते हुए वह शरमा गई।

दोपहर का खाना बनाकर खत्म करने तक पति और बच्चे घर लौट आए थे। बसव के वीर्य से तर और फिर अपने अमृत रस के साथ मिलकर पूरी तरह गीले कच्छे को पहनकर पति के सामने खड़ी होने पर नीतू को एक पल के लिए अपराध-बोध होने लगा। उसका अंतर्मन... "तू क्यों अपराधी की तरह सोच रही है? तूने कोई गलती नहीं की। पति के प्रति तेरा प्यार और सम्मान जरा भी कम नहीं हुआ, लेकिन तेरे शरीर में उबल रही काम की ज्वाला को शांत करने वाला मॉनसून का पानी तेरा पति नहीं दे रहा, इसलिए तू उसे कहीं और से चाह रही है। यह तेरा दोष नहीं, तेरा पति एक मर्द की तरह सोचने के बजाय साधु-संत बनकर तेरी काम की इच्छा को नजरअंदाज कर रहा है। इसलिए किसी भी अपराध की भावना को अपने मन से निकाल दे..." नीतू ने अपने मन की बात सुनकर सारी चिंताओं को त्याग दिया और पति और बच्चों के साथ उस दिन को खुशी से बिताया।

अगले दिन पति और बच्चों को विदा करके कमरे में गई नीतू ने पिछले दिन उतारकर रखा हुआ नीला कच्छा पहना और फिर से बसव और उसके लंड की कल्पना करते हुए रगड़ना शुरू किया, और अपने कामामृत रस को निकालकर कच्छे को गीला कर लिया। कुछ देर सुधरने के बाद नीतू बिस्तर से उठकर बाथरूम में गई और गीले नीले कच्छे को उतारकर हैंगर पर टांग दिया और अपनी लहंगा भी उतार फेंकी। नाइटी के अंदर सिर्फ लाल ब्रा ही पहने होने से उसका 90 प्रतिशत शरीर नग्न था, जो उसे एक नया अनुभव दे रहा था। बसव के आने का समय बीत चुका था, लेकिन वह अभी तक नहीं आया था, जिसके लिए नीतू बेचैन हो रही थी।

नीतू के घर से थोड़ी दूरी पर एक पेड़ के नीचे खड़ा बसव कल की घटना को याद कर रहा था, जब उसने अनजाने में नीतू के कच्छे को सूंघा और उसमें अपना वीर्य डाल दिया था। नीतू जब धोने के लिए कच्छा लेगी, तो वह जरूर उसमें अपने वीर्य को देखेगी। वह मेरे बारे में क्या सोच रही होगी, मुझे डर लग रहा है, क्या करूं, जाऊं या नहीं, समझ नहीं आ रहा। अगर उसके घर नहीं गया, तो बेचारों को आज और कल सुबह के लिए दूध नहीं मिलेगा, और अगर गया, तो नीतू कैसे प्रतिक्रिया देगी, यह डर है। वह अपनी ही सोच में डूबा था कि उसका फोन बजा। बसव ने फोन देखा, तो नीतू ने खुद कॉल किया था। बसव ने थोड़ा हिचकते हुए फोन उठाया और "हलो" कहा, तो नीतू ने कहा... "क्या आज हमारे घर को भूल गए? मैं यहाँ बर्तन लेकर इंतजार कर रही हूँ कि आप कब आएंगे और दूध भरेंगे, लेकिन आपका आने का कोई लक्षण ही नहीं दिख रहा..." उसने पूरी तरह डबल मीनिंग में कहा। बसव उसके बात का मतलब समझने की कोशिश में नहीं गया, बल्कि यह जानकर खुश हुआ कि नीतू नाराज नहीं है और बोला... "नहीं, थोड़ा लेट हो गया, मैं अभी आ रहा हूँ, आप दरवाजा खोलने तक मैं वहाँ पहुँच जाऊँगा..."

बसव जब घर के पास पहुँचा, तो नीतू दरवाजे पर ही उसका रास्ता देख रही थी। बसव को अंदर बुलाकर... "क्या राय साहब को मेरे बनाए नाश्ते का एक दिन में ही मन भर गया? कल भी नहीं खाया, और आaज भी आने का कोई लक्षण नहीं था..." कहते हुए मुँह फुलाकर नाटक कर रही थी। नीतू के चेहरे की मासूमियत और चंचलता देखकर बसव को उसे वहीँ गले लगाकर चूमने की इच्छा हुई, लेकिन संयम रखने की सोचकर अपनी भावनाओं को दबा लिया। बसव ने घर में प्रवेश करके कहा... "आप आज मुझे भगाने के लिए डंडा लेकर पीछे पड़ें, तब तक मैं यहाँ से नहीं जाऊँगा..." यह सुनकर नीतू के चेहरे पर खुशी की मुस्कान छा गई। बसव ने दूध का कैन उसे दिया और कहा... "मैं हाथ-पैर धोकर आता हूँ, पेट में बहुत जोर की भूख लगी है, आज आपके हाथ का नाश्ता गले तक खाना है..." कहते हुए बाथरूम की ओर चला गया।
 
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नियति से बंधी नीतू - Part 6

नीतू ने दूध का कैन किचन में रखा और धीरे से पीछे के दरवाजे से बाहर निकलकर बसव की नजरों से बचते हुए एक खंभे के पीछे खड़ी होकर बाथरूम के अंदर झाँकने लगी। बसव ने हाथ-पैर धोए और हैंगर की ओर मुड़ा, तो वहाँ नीला कच्छा टंगा हुआ दिखा। बसव यह सोच रहा था कि कच्छा उठाए या नहीं, और यह देखकर खंभे के पीछे छिपी नीतू अपने मन में कह रही थी... "उठा लो बसव, तुम्हारे लिए मैंने अपने अमृत रस से तर किया हुआ कच्छा खुद टांगा है..." नीतू के मन की बात बसव तक पहुँची या नहीं, लेकिन उसने अपने दाहिने हाथ से नीला कच्छा उठा लिया। कच्छे का निचला हिस्सा गीला देखकर बसव ने उसे अपनी नाक के पास ले जाकर सूंघा, तो उसके शरीर में बिजली-सी दौड़ गई। गाँव के मजबूत मर्द के साथ रति-क्रीड़ा में अनुभवी बसव को तुरंत समझ आ गया कि कच्छा उसकी सपनों की रानी के कामरस से गीला है। बसव ने एक पल भी देर न करते हुए अपने होंठों और जीभ से कच्छे के अंदरूनी हिस्से को पूरी तरह चाट लिया और उसे चूमने लगा। यह सब खंभे के पीछे से देख रही नीतू को ऐसा लग रहा था जैसे बसव उसकी योनि को ही चाट और चूम रहा हो।

बसव से अब रहा नहीं गया, और उसने अपने पायजामे से अपना तना हुआ लंड बाहर निकाला और उस पर नीतू का नीला कच्छा पकड़कर आगे-पीछे करने लगा। यह सब खंभे के पीछे से देख रही नीतू ने भी नाइटी के ऊपर से अपनी जांघों के मिलन-स्थल को रगड़ना शुरू कर दिया। बसव के विशाल लंड को देखते हुए अपनी योनि को जोर-जोर से रगड़ रही नीतू ज्यादा देर तक नहीं टिक पाई और अपने कामरस को निकालने लगी। नीतू की योनि से निकला अमृत बिना किसी लहंगे या कच्छे की रुकावट के थोड़ा-सा पीछे के आँगन की जमीन पर भी टपक गया। बसव के आने के डर से नीतू अपनी स्खलन से कमजोर हुई टांगों को जबरदस्ती चलाकर हॉल में आई और सोफे पर बैठकर अपनी साँसों को नियंत्रित करने लगी। नीतू के टांगे हुए नीले कच्छे में अभी भी सूखा नहीं था उसका कामरस, जिसकी सुगंध के प्रभाव से बसव ने कल से भी ज्यादा वीर्य निकाला और नीतू के कच्छे के अंदरूनी हिस्से को पूरी तरह भरकर फिर से हैंगर पर टांगकर बाहर आ गया।

डाइनिंग टेबल पर बैठे बसव की नजर नाश्ता परोस रही नीतू की गुलाबी नाइटी पर पड़ी। नाइटी कमर से थोड़ा नीचे और नीतू के कोमल नितंबों के हिस्से में गीली होकर एक बड़ा धब्बा बन गया था। बसव ने सोचा कि जब वह घर आया था, तब यह धब्बा नहीं था। पैर खुजाने के बहाने नीचे झुका बसव ने देखा कि नाइटी का वह हिस्सा अभी भी गीला था। उसने उस ओर मुँह करके साँस खींची, तो उसे स्त्री के कामरस की सुगंध मिली। क्या मैं बाथरूम में था, तब नीतू ने बाहर स्खलन किया? कैसे? क्या सोचकर? क्या उसने मुझे कच्छा सूंघते और हस्तमैथुन करते देख लिया? कल मैंने उसके कच्छे को गंदा किया था, फिर भी आज उसका कच्छा हैंगर पर टंगा था। इसका मतलब बिना कुछ कहे वह मुझे इस तरह सिग्नल दे रही है? जितना जल्दी हो सके, मुझे यह पता लगाना होगा। यह सोचकर उसने नाश्ता खाया और हाथ धोने गया। बाथरूम में नीतू के नीले कच्छे के अलावा कोई और कपड़ा नहीं था, जो उसने खुद टांगा था। बाथरूम की खिड़की खुली थी, और बाहर आँगन का हिस्सा देखकर उसने समझा कि खंभे के पीछे खड़े होने पर बाथरूम के अंदर से नहीं दिखेगा, लेकिन वहाँ से बाथरूम के अंदर देखा जा सकता है। बसव की बुद्धि तेजी से काम करने लगी। इसका मतलब नीतू ने मुझे हस्तमैथुन करते हुए खंभे के पीछे से देखने की संभावना ज्यादा है। मेरे जाने के बाद वह वीर्य से भरे कच्छे का क्या करती है, यह कैसे पता करूँ? उसने चारों ओर देखना शुरू किया। घर के पीछे का कंपाउंड सात-आठ फीट ऊँचा था, और उस पर ग्रिल लगाकर पूरी तरह सुरक्षित किया गया था ताकि कोई अंदर न घुस सके। पीछे की खाली साइट से बाथरूम दिख सकता है, यह हिसाब लगाकर उसने तय किया कि आज ही वहाँ जाकर बाथरूम के अंदर झाँकेगा।

नीतू ने जो कॉफी दी, उसे पीते हुए और इधर-उधर की बातें करते हुए बसव ने फैसला किया कि वह पीछे की साइट पर जाकर बाथरूम के अंदर झाँकेगा। वहीं नीतू के मन में यह हिसाब था कि अगर बसव जल्दी चला जाए, तो वह कच्छे में जमा वीर्य का स्वाद चख सकती है। कॉफी पीने के बाद बसव के "फिर आता हूँ" कहकर जाने के तुरंत बाद नीतू ने मुख्य दरवाजा बंद किया और बाथरूम की ओर दौड़ी। उसने अपना कच्छा उठाया और बसव के वीर्य को सूंघने के बाद तीन-चार बार उंगली से वीर्य लेकर चाटकर उसका स्वाद लिया। नीतू ने फिर से कल की तरह बसव के वीर्य से भरा कच्छा पहन लिया और बाहर आई। बसव पीछे की खाली साइट पर पहुँचा और कंपाउंड के पास पड़े दो बड़े पत्थरों को एक के ऊपर एक रखकर उन पर खड़ा हो गया। जब उसने घर के अंदर झाँका, तो बाथरूम की खिड़की दिखी, लेकिन नीतू वहाँ नहीं थी, और हैंगर पर उसने टांगा हुआ नीला कच्छा भी गायब था। बसव को एक बात समझ आ गई कि नीतू को पता है कि मैं उसके कच्छे में वीर्य डाल रहा हूँ, लेकिन वह उस कच्छे का क्या करती है, यही सवाल उसके दिमाग में घूमने लगा। कल किसी भी तरह यह पता लगाना है। अगर नीतू काम की आग में तड़प रही है, तो उसकी जांघों के बीच मेरा रास्ता आसान हो जाएगा, वरना और क्या-क्या करना पड़ेगा, यह सोचकर वह अपने घर की ओर चल पड़ा।

उस दिन भी नीतू ने बसव के लंड की कल्पना करते हुए दो बार अपनी योनि को बसव के वीर्य से सजे नीले कच्छे पर रगड़ा और अपने अमृत रस की धार छोड़कर वीर्य के साथ मिला दिया। अगले दिन दूध देने आए बसव को बाथरूम में हैंगर पर टंगा हुआ पीला कच्छा दिखा। आज भी बसव ने उस पीले कच्छे में अपना वीर्य डाला और नाश्ता करने के बाद अपनी गाड़ी को पीछे की साइट की ओर मोड़ा। दौड़कर पत्थरों पर खड़ा होकर बाथरूम में झाँका, तो नीतू नहीं दिखी और हैंगर पर टंगा पीला कच्छा भी गायब था। अगले तीन-चार दिन भी यही दोहराया गया। हर बार बसव पीछे की साइट पर पहुँचकर झाँकता, लेकिन हैंगर पर होना चाहिए वाला कच्छा गायब होता, और उसे समझ नहीं आया कि आखिर वह कच्छा कहाँ जाता है।

रविवार के दिन जब बसव दूध देने आया, तो ट्रेनिंग क्लास को छुट्टी देकर हरीश भी घर पर ही था। हरीश ने बसव का बहुत आत्मीयता से स्वागत किया और उस दिन अपनी पत्नी की मदद के लिए बहुत आभार व्यक्त करते हुए नीतू से नाश्ता लाने को कहा। बसव जब हाथ धोने बाथरूम में गया, तो हैंगर पर आज कोई कपड़ा नहीं था, वह खाली था। उदास चेहरे के साथ बाहर आया बसव ने देखा कि नीतू विजयी मुस्कान बिखेर रही थी, जिसे उसने तिरछी नजर से देख लिया। हरीश से बात करते समय भी नीतू जानबूझकर इधर-उधर अपने उभरे हुए गोल नितंबों को ऊपर-नीचे हिलाते हुए घूम रही थी, जिसे देखकर बसव का लंड पायजामे में ही सिर उठाकर फुफकार रहा था, लेकिन उसका पति घर पर होने के कारण हस्तमैथुन करने का मौका भी नहीं था। बसव ने नाश्ता खाया और घर लौटने के रास्ते में सोचने लगा... पति घर पर था, इसलिए शायद नीतू ने आज अपना कच्छा नहीं टांगा। अगर कल फिर से पहले की तरह हैंगर पर कच्छा टंगा हुआ मिला, तो यह पक्का हो जाएगा कि नीतू निश्चित रूप से मेरे साथ आँखमिचौली खेल रही है। जो भी हो, कल पूरी बात समझ में आ जाएगी। यह हिसाब लगाते हुए वह अपने घर पहुँच गया।
 

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नियति से बंधी नीतू - Part 7

नीतू अपने पति के साथ घर के लिए जरूरी सामान और साज-सज्जा लेने मार्केट की ओर निकली। हरीश जब किताब की दुकान में कुछ किताबें खरीदने रुका, तो नीतू ने कहा कि वह अभी आती है और महिलाओं द्वारा चलाई जा रही महिलाओं के अंडरगारमेंट्स की दुकान में घुस गई। करीब आधे घंटे बाद बाहर आई नीतू के हाथ में चार बैग देखकर हरीश ने कहा, "क्या मैडम, फुल शॉपिंग मूड में हैं, ऐसा लगता है।" नीतू ने अपने चेहरे पर नकली गुस्सा दिखाते हुए कहा, "ओह, आपको अपनी कमाई के बर्बाद होने की चिंता हो रही है, ठीक है, मैं सब वापस कर आती हूँ।" हरीश ने उसके सामने हाथ जोड़कर कहा, "नहीं-नहीं, मैं तो मजाक में कह रहा था, मैं कमाता ही तुम्हारे और बच्चों के लिए हूँ।" वहाँ से घर के लिए जरूरी किराना और सब्जियाँ लेकर लौटते समय नीतू ने फिर से मार्केट आने की बात कही, तो हरीश ने सहमति में सिर हिलाया। मार्केट से लाए बैग को घर पर रखकर नीतू ने अपने खरीदे हुए कपड़ों को सावधानी से अपनी अलमारी में रखा और हरीश के साथ फिर से मार्केट की ओर निकल गई। इस बार हरीश और बच्चों के लिए कपड़े, और तीनों के लिए बनियान-जांघिया खरीदकर बाहर आए। हरीश ने नीतू से पूछा, "तुम कुछ नहीं लोगी?" तो नीतू ने कहा, "मैं पहले ही नाइटी और जरूरी चीजें खरीद चुकी हूँ, और कुछ नहीं चाहिए।" हरीश ने उसकी बात न मानते हुए जबरदस्ती उसे महिलाओं के कपड़ों की दुकान में ले गया। नीतू दुकान में टाइट चूड़ीदार टॉप्स और लेगिंग्स की ओर देख रही थी, क्योंकि अब तक उसने केवल सलवार-कमीज जैसे ढीले-ढाले चूड़ीदार ही पहने थे। दुकान की तीन महिलाओं ने नीतू की ओर देखकर उसके रूप, सौंदर्य और देह की बनावट को मन ही मन जलन के साथ देखा, फिर भी मुस्कुराते हुए स्वागत किया और कई तरह के चूड़ीदार दिखाए। नीतू को उनमें से केवल दो ही पसंद आए। हरीश ने कहा कि पाँच-छह जोड़ी और ले लो, लेकिन नीतू ने कहा कि रंग पसंद नहीं आ रहे। तब दुकान की लड़की ने कहा, "मैडम, हमारे पास ड्रेस मटेरियल भी हैं, अगर आप सिलवाना चाहें तो देख लीजिए।" नीतू ने मना किया, लेकिन हरीश के आग्रह पर मटेरियल देखे, तो छह-सात जोड़ी रंगों का कॉम्बिनेशन उसे बहुत पसंद आया। नीतू ने उन्हें ले लिया और पूछा कि दुकान का टेलर कौन है। दुकान की लड़की ने कहा, "मैडम, हमारे पास टेलर नहीं है," और एक विजिटिंग कार्ड देते हुए बताया, "आज रविवार है, छुट्टी है। कल आप माप के लिए एक जोड़ी ड्रेस इस पते पर ले जाइए। यहाँ से दो गलियाँ आगे 'लेडीज़ टेलर' का बोर्ड है, वे बहुत अच्छे से सिलाई करते हैं।" दोनों ने उसे धन्यवाद कहा और सभी के लिए खरीदे गए कपड़ों के साथ घर लौट गए।

आज रविवार को नीतू ने पूरा दिन पति और बच्चों के साथ बिताया, इसलिए उसे एक बार भी अपनी रोजमर्रा की कामुक गतिविधियों की ओर ध्यान नहीं गया। सभी का प्यार, बातचीत और साथ ने आज नीतू के शरीर में छिपी कामुकता को प्यार से परास्त कर दिया था।

सोमवार को हरीश स्कूल जाने से पहले नीतू से बोला, "शाम को ड्रेस सिलवाने के लिए चलते हैं।" नीतू हँसते हुए बोली, "मैं कितनी बार अकेले मार्केट नहीं गई? उस दिन किसी शराबी ने रास्ते में परेशान किया था, तो क्या मैं उसकी वजह से घर में बैठी रहूँ? आप चिंता न करें, मैं सब संभाल लूँगी, निश्चिंत होकर जाइए।" उसने हरीश को विदा किया।

नीतू दरवाजा बंद करके कमरे में जाने ही वाली थी कि "दूध" की आवाज सुनाई दी। वह जल्दी से बाथरूम में गई और बाल्टी से पिछले दिन पहना हुआ लाल कच्छा उठाकर हैंगर पर टांग दिया। दरवाजे पर खड़े बसव को अंदर बुलाकर उससे दूध का कैन लिया, तो वह सीधे हाथ-पैर धोने चला गया। बसव बाथरूम में घुसा और खिड़की के बाहर खंभा साफ दिखे, ऐसा खड़ा हुआ। उसने हैंगर पर टंगे लाल कच्छे को हाथ में लिया। बसव ने कच्छे को नाक के पास ले जाकर नीतू की स्त्रीत्व की सुगंध को सूंघा और सिर उठाकर तिरछी नजर से खिड़की के बाहर देख रहा था। एक मिनट बाद आँगन के खंभे के पास हरे रंग का कपड़ा दिखा, और उसे याद आया कि घर में घुसते समय नीतू ने हरी नाइटी पहनी थी। बसव मन ही मन हँसा। बाथरूम का दृश्य नीतू को साफ दिखे, ऐसा खिड़की के सामने खड़ा होकर बसव ने पायजामे से अपना तना हुआ लंड बाहर निकाला। बसव के हाथ में नीतू के काम-पात्र की सुगंध से भरा लाल कच्छा था, और उसे यह भी पता था कि बाहर खंभे की ओट में नीतू उसका लंड देख रही है। इस सोच ने बसव के लंड को उसके अधिकतम आकार में खड़ा कर दिया।

बसव लाल कच्छे के अंदरूनी हिस्से को अपने लंड पर रगड़ते हुए बोला... "नीतू, मेरी सोनी... मेरी प्यारी कनी... मेरी सपनों की रानी... कब मुझे तुम्हारे शरीर से तुम्हारा पहना हुआ कच्छा उतारने का मौका मिलेगा, उस दिन मेरा जन्म सार्थक हो जाएगा। तुम्हारा पहना हुआ कच्छा ही इतनी सुगंध दे रहा है, तो तुम्हारी जांघों का मिलन-स्थल कितनी खुशबू से महक रहा होगा... आह... मेरी रानी... मेरी कामदेवी... मेरी रात्रि-रानी... तुम्हारे शरीर को चूमने का मेरा सपना कब पूरा होगा..." वह थोड़ा जोर से बोलते हुए अपने लंड को आगे-पीछे कर रहा था। बसव की बड़बड़ाहट सुन रही नीतू के शरीर में भी काम की ज्वाला भड़क उठी, और उसकी योनि से सात-आठ बूँदें अमृत-रस टपक गईं। कुछ देर बाद... "नीतू, मेरी डार्लिंग!" चिल्लाते हुए बसव ने आठ-दस बार अपने लंड से वीर्य छोड़ा और लाल कच्छे के अंदरूनी हिस्से को भरकर उसे हैंगर पर टांगकर बाहर आ गया। नीतू ने भी बसव को पहली बार अपना नाम पुकारते हुए सुना, जब वह कच्छे को सूंघकर लंड हिला रहा था। इससे उसके शरीर में रोमांच हुआ और उसने मन में एक निश्चय किया।

नाश्ता करने के बाद जाने वाले बसव को रोककर नीतू ने पूछा, "आप आज भी मार्केट जा रहे हैं?" बसव ने कहा, "मैंने पहले ही कहा था, कुछ भी चाहिए तो बिना झिझक मुझे बताइए, लेकिन लगता है आपने मुझे अपना नहीं समझा, इसलिए मुझे नहीं बतातीं।" नीतू ने कहा, "नहीं, ऐसा नहीं है, आप गलत समझ रहे हैं। मैंने आपको अपना ही माना है, लेकिन कोई काम नहीं था, इसलिए नहीं बताया। आज मुझे टेलर के पास ड्रेस सिलवाने के लिए देना है। अगर आप मार्केट जा रहे हैं, तो मैं भी चलूँगी, बस इतना पूछा।" बसव को खुशी से नाचने का मन हुआ, लेकिन खुद को शांत करते हुए बोला, "बस आधा घंटा, घर जाकर दूध के कैन रखकर आता हूँ, आप भी तैयार रहिए।" बाहर निकलते समय उसने देखा कि उसकी बाइक नहीं थी, तो नीतू ने इसके बारे में पूछा। बसव ने कहा, "बाइक लाया था, लेकिन तीन गलियाँ आगे एक परिचित ने मार्केट जाने के लिए ले लिया। उनके लौटने तक मैं आपके घर दूध देकर नाश्ता करके चला जाता।" बसव ने आज किसी भी तरह यह जानने के लिए कि नीतू बाथरूम में उसके वीर्य से भरे कच्छे का क्या करती है, बाइक को थोड़ी दूरी पर खड़ा करके पैदल आया था। क्योंकि पिछले हफ्ते हर दिन वह बाइक खड़ी करके पीछे की साइट पर जाकर नीतू के घर में झाँकता था, लेकिन तब तक न तो नीतू दिखती थी और न ही वीर्य से भरा कच्छा, इसलिए उसने बाइक खड़ी करने का समय बचाने के लिए पैदल आने का फैसला किया।
 

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नियति से बंधी नीतू - Part 8

जैसे ही बसव ने देखा कि नीतू ने मुख्य दरवाजा बंद किया, वह एक ही साँस में पीछे की साइट पर दौड़ा और अपने रखे हुए बड़े पत्थर पर खड़ा होकर ग्रिल के जरिए घर के अंदर देखने लगा। दो मिनट तक साँस रोककर बाथरूम में नजर गड़ाए बसव ने देखा कि नीतू वहाँ आई। नीतू ने हैंगर पर टंगे अपने लाल कच्छे को हाथ में लिया और अंदरूनी हिस्से को देखा, जिसमें पहले से कहीं ज्यादा बसव का वीर्य जमा था। नीतू ने कच्छे को नाक के पास ले जाकर चार-पाँच बार वीर्य की गंध खींची, फिर उंगलियों से वीर्य उठाकर अपने होंठों पर लगाया और मुँह में डालकर चाट लिया। इसी तरह तीन बार बसव का वीर्य चाटने के बाद नीतू ने सोचा कि आज उसे बसव के साथ मार्केट जाना है, इसलिए यह गीला कच्छा पहनना संभव नहीं है, लेकिन अगर इसे ऐसे ही छोड़ दिया, तो लौटने तक कच्छा सारा वीर्य सोख लेगा। एक मिनट सोचकर उसने कच्छे को ही मुँह के पास ले जाकर जीभ निकाली और बसव का वीर्य चाटने लगी। घर के पीछे ग्रिल पर चढ़कर यह सब देख रहा बसव आश्चर्य के साथ बहुत खुश हुआ। नीतू का उसके वीर्य को बिना किसी घृणा के चाटने का दृश्य देखकर उसे यकीन हो गया कि उसका जीवन भर का सपना, नीतू की जांघों के बीच जाकर उसकी योनि में प्रवेश करके स्वर्ग में तैरने की इच्छा, निश्चित रूप से पूरी होगी। लेकिन नीतू खुद आगे नहीं बढ़ेगी, मुझे ही कुछ करना होगा ताकि वह बिस्तर पर चढ़े, यह निश्चय करके वह नीतू को मार्केट ले जाने के लिए तैयार होने अपने घर की ओर निकल गया।

दरवाजा खटखटाने पर जैसे ही वह खुला, नीले रंग की साड़ी में अप्सरा की तरह चमक रही नीतू का सौंदर्य देखकर बसव मंत्रमुग्ध होकर खुद को भूल गया। नीतू ने दो-तीन बार उसे पुकारा, तब वह सपनों की दुनिया से वास्तविकता में लौटा और बोला, "मैंने अब तक सुना था कि अप्सराएँ स्वर्ग में होती हैं, लेकिन आज मैं अपने सामने अप्सरा से भी सुंदर स्त्री को देख रहा हूँ। सचमुच, आप बहुत सुंदर लग रही हैं, मेरी नजर ही लग जाएगी।" नीतू शरमाकर सिर झुकाकर मुस्कुराई। घर को ताला लगाकर बाहर आई, तो उसने देखा कि बसव बाइक की जगह कार लाया है। उसने सवालिया नजरों से उसकी ओर देखा। नीतू के मन को समझते हुए बसव बोला, "बाहर बारिश होने वाली है, आपको बारिश में भीगने देना कैसे ठीक होगा, इसलिए कार ले आया।" यह कहते हुए उसने आगे का दरवाजा उसके लिए खोल दिया। बसव के जवाब से पूरी तरह खुश नीतू ड्रेस मटेरियल वाले बैग के साथ बैठ गई, और बसव ने गाड़ी चलाते हुए उसके बताए पते की ओर बढ़ गया।

टेलर की दुकान पर पहुँचकर अंदर गई नीतू ने देखा कि सामने 65 साल का एक बूढ़ा खड़ा है। उसने टेलर के बारे में पूछा, तो उसने कहा, "मैं ही हूँ।" नीतू ने ड्रेस मटेरियल उसके सामने रखे और साथ लाया हुआ माप का चूड़ीदार दिया। सब कुछ देखने के बाद बूढ़े टेलर ने पूछा, "इसी माप और डिजाइन में सिलना है या नए फैशन के तरीके से तैयार करना है?" दुकान में कदम रखने वाले छह फीट लंबे, हट्टे-कट्टे बसव ने कहा, "यह बहुत पुराने स्टाइल का है, कोई नया स्टाइल दिखाइए।" टेलर ने नीतू की ओर देखा, और उसकी सहमति के बाद उनके सामने नए-नए डिजाइन वाले चूड़ीदार की तस्वीरों वाली किताब रख दी। दोनों उसे पलट रहे थे, तभी बसव ने खुद से तीन-चार डिजाइन दिखाए, जिन्हें देखकर नीतू को शर्मिंदगी हुई। क्योंकि उनमें टॉप दोनों तरफ कमर तक कटा हुआ था और शरीर से पूरी तरह चिपका हुआ डिजाइन था, जो उसके पूरे शरीर की बनावट को सबके सामने जाहिर कर देता। यह जानते हुए कि इस तरह का डिजाइन चूड़ीदार पहनने पर उसकी देह की बनावट स्पष्ट दिखेगी, नीतू ने उसी तरह सिलवाने को कहा। उन डिजाइनों और नीतू के दिए माप वाले चूड़ीदार को देखकर टेलर ने कहा, "इस तरह सिलना हो, तो यह माप वाला चूड़ीदार काम नहीं आएगा। इसके लिए नए सिरे से माप लेना होगा, क्योंकि टॉप को पूरी तरह फिटिंग चाहिए, तो शरीर का सटीक माप जरूरी है।" नीतू के चेहरे पर निराशा देखकर बसव बोला, "ठीक है, तो नया माप ले लीजिए।" टेलर ने सिर हिलाते हुए कहा, "अगर आप चूड़ीदार पहने होते, तो आसान होता। साड़ी में माप लेने में समय लगेगा और आपको भी तकलीफ हो सकती है, सोच लीजिए।" बसव का फोन बजा और बात करने के बाद उसने नीतू की ओर देखकर कहा, "मुझे भी आधे घंटे का काम है, अब क्या करें? कल आएँ या आज ही माप दे दें?" नीतू ने टेलर की ओर मुड़कर पूछा, "आधा घंटा माप लेने के लिए काफी नहीं है?" टेलर ने "हूँ" कहते हुए सिर हिलाया। नीतू ने बसव से कहा, "आप अपना काम निपटाकर आइए, मैं माप देकर यहीं इंतजार करूँगी।" बसव ने जितना जल्दी हो सके आने की बात कहकर कार वहीं छोड़ दी और मंडी की ओर पैदल चला गया। अप्सरा जैसी सुंदरी के शरीर को साड़ी में मापने पर क्या-क्या हो सकता है, यह पहले से जानने वाले टेलर की आँखों में चमक दिखाई दी।

टेलर खुशी से नीतू को अंदर की माप लेने वाली जगह पर ले गया। टेलर ने कहा कि वह टेप लाता है और दुकान के सामने के कांच के दरवाजे को आगे सरकाकर ताला लगा दिया। नीतू के इंतजार करने की जगह पर आकर टेलर ने वहाँ के पर्दे को एक तरफ खींचकर दुकान के कांच के दरवाजे से झाँकने पर भी कुछ न दिखे, ऐसा छिपा दिया। टेलर ने पहले नीतू की गर्दन, कंधे, बाँह और गर्दन से जांघों तक की लंबाई का माप लिया, फिर सबसे महत्वपूर्ण छाती के हिस्से की परिधि का माप लेने की तैयारी की। टेलर ने कहा, "मैडम, आपकी पहनी हुई साड़ी की वजह से माप लेना संभव नहीं हो रहा।" तुरंत नीतू ने कहा, "कल फिर से आना संभव नहीं है, आप किसी भी तरह आज ही माप ले लीजिए।" टेलर को भी यही चाहिए था, इसलिए उसने कहा, "एक तरीका है, अगर आप साड़ी का पल्लू नीचे सरका दें, तो सटीक माप लेना संभव होगा, वरना साड़ी की वजह से माप में कमी-बेशी हो सकती है। फिर आप ही आएँगी और कहेंगी कि मैंने सिला हुआ चूड़ी टॉप सही नहीं है।" नीतू टेलर की बात सुनकर असमंजस में पड़ गई कि अब क्या करे। टेलर ने अपना अगला दाँव चलाते हुए कहा, "इसलिए मैंने पहले ही कहा था कि साड़ी में चूड़ी का माप लेना संभव नहीं है। अब अगर आप माप लेने में सहयोग नहीं करेंगी, तो मैं कपड़ा कैसे सिलूँ? आप ही सोचिए, अब आपकी मर्जी।" नीतू को कोई और रास्ता न दिखा, तो उसने कंधे के पास साड़ी का पल्लू समेटकर ब्लाउज में लगी सेफ्टी पिन निकाली। अगले ही पल ढीली हुई नीली साड़ी का पल्लू सर्र से नीचे सरक गया। नीतू पहली बार किसी परपुरुष के सामने खुद पल्लू सरकाकर ब्लाउज में खड़ी थी। टेलर नीतू के यौवन और सौंदर्य से भरे रूप और उसके यौवन के कलशों को हल्के नीले ब्लाउज में देखकर मंत्रमुग्ध हो गया। टेलर ने उसकी शारीरिक कामुकता को उभारने की तरकीब निकालते हुए पहले कमर का माप लेने के बहाने धीरे-धीरे उंगलियों से सहलाना शुरू किया, तो नीतू के शरीर में आग लगने लगी। टेलर की उंगलियाँ उसकी गहरी नाभि के आसपास धीरे-धीरे घूमते हुए नाभि के अंदर थोड़ा घुसने और बाहर आने लगीं, जिससे नीतू के मुँह से अनायास ही कामोन्माद की सिसकारियाँ निकलने लगीं।

टेलर ने उसके पेट को सहलाते हुए ऊपर सरककर नीतू की उन्नत छाती तक पहुँचा और उसका माप लेने को तैयार हुआ। टेलर की उंगलियों के सहलाने से नीतू के शरीर में भड़की काम की आग को और भड़काने की जरूरत टेलर को थी। नीतू के स्तनों के निचले हिस्से को अंगूठे से हल्के से दबाते हुए माप लेते समय भी वह उसे गौर से देख रहा था। जब टेलर की उंगली ने उसके उभरे हुए स्तनों पर टेप रखा, तो नीतू ने आँखें बंद कर तेजी से साँस लेना शुरू कर दिया। टेलर ने उसके स्तनों पर टेप को इधर-उधर सरकाते हुए उसे और उत्तेजित करना शुरू किया। दो मिनट बाद नीतू के मुँह से सिसकारी की आवाज निकलने लगी, यह देखकर टेलर ने विजयी मुस्कान बिखेरी और अपनी दाहिनी हथेली को उसके बाएँ स्तन पर पूरी तरह रख दिया। टेलर की हथेली धीमी गति से गोलाकार में घूमने लगी, तो नीतू के मुँह से सिसकारी की आवाज और तेज होने लगी। यह सही समय समझकर टेलर ने अपनी बायीं हथेली को नीतू के पेट पर रखकर उंगली से नाभि को कुरेदते हुए साड़ी की चुन्नटों को पेटीकोट के साथ लगी सेफ्टी पिन निकालकर पेटीकोट के अंदर से साड़ी को बाहर खींच लिया। पहले से ही पल्लू कमर के पास लटक रहा था, और चुन्नटें ढीली होने के साथ पूरी साड़ी खुलकर उसके पैरों के पास ढेर हो गई। उस क्षण नीतू आँखें बंद किए टेलर के सामने हल्के नीले ब्लाउज और काले पेटीकोट में खड़ी थी।
 

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नियति से बंधी नीतू - Part 9

टेलर ने अपनी दोनों हथेलियों को नीतू के स्तनों पर रखकर हल्के से सहलाते हुए ब्लाउज का पहला हुक खोला, तो नीतू ने आँखें खोलकर सवालिया नजरों से उसकी ओर देखा। टेलर ने दाँत चमकाते हुए कहा, "मैडम, इस ब्लाउज का मटेरियल बहुत मोटा है, माप सही नहीं मिल रहा।" फिर से उसके स्तनों को लयबद्ध तरीके से सहलाना शुरू किया, तो किसी अनियंत्रित सुख में तैरने लगी नीतू कुछ कह न सकी और आँखें बंद करके उस सुखद अनुभव का आनंद लेने लगी। नीतू की बंद आँखों को हरी झंडी समझकर टेलर ने बहुत चालाकी से उंगलियाँ चलाते हुए नीतू के ब्लाउज के चार हुक खोल दिए और आखिरी हुक पकड़ा। नीतू ने आँखें खोलकर अपने हाथों से टेलर के हाथों को हटाने की कोशिश की और मना करने के लिए सिर हिलाया। टेलर को डर था कि कहीं यह सुनहरा मौका हाथ से न निकल जाए, इसलिए उसने नीतू की आँखों में आँखें डालकर उसके एक स्तन को पकड़कर दो बार ऑटो की तरह "पॉम-पॉम" दबाया। नीतू ने उसके हमले से "आह... हाँ..." की सिसकारी निकाली और टेलर के हाथों पर उसकी पकड़ भी ढीली पड़ गई। टेलर ने मौके का फायदा उठाकर नीतू के ब्लाउज का आखिरी हुक भी खोलकर उसे दोनों तरफ सरकाया, तो हल्के नीले रंग की ब्रा में छिपे गोरे, गोल रसीले आम जैसे स्तन दिखाई दिए। नीतू अपनी स्थिति समझ पाती, इससे पहले ही टेलर, जिसकी लंबाई उसके सीने तक थी, ने अपना मुँह उसके दोनों गोल स्तनों के बीच की घाटी में डाल दिया। 14-15 साल बाद किसी पुरुष के होंठों का स्पर्श उसके स्तनों के बीच के हिस्से पर हुआ, तो नीतू अपनी संयम खोने की स्थिति में पहुँच गई। टेलर को स्तनों की कोमलता का अनुभव स्वर्ग में तैरने जैसा लगा, और उसने जीभ निकालकर नीतू के स्तनों की घाटी में बन रही पसीने की बूँदों को चाटना शुरू कर दिया। 65 साल के बूढ़े टेलर के कामुक हमले से नीतू संभलने की कोशिश कर रही थी, तभी उसका दाहिना हाथ एक स्तन को दबाने लगा, जबकि बायाँ हाथ उसकी पीठ को सहलाते हुए उभरे हुए कोमल नितंबों पर घूमने लगा।

टेलर ने अपना मुँह स्तनों से ऊपर उठाकर नीतू के शहद भरे होंठों के करीब ले जाने की कोशिश की, लेकिन 5 फीट 9 इंच लंबी नीतू के सामने केवल 5 फीट 3 इंच का कद वाला टेलर ऐसा न कर सका। टेलर का बायाँ हाथ काले पेटीकोट के ऊपर रूई जैसे मुलायम नितंबों को सहलाते और दबाते हुए स्पर्श सुख का मधुर अनुभव ले रहा था, और दाहिना हाथ, जो स्तनों को दबा रहा था, उसे कमर के पास ले जाकर काले पेटीकोट की नाड़ी के गाँठ को ढीला करने की कोशिश कर रहा था। नीतू अचानक अपने कामुक उन्माद की स्थिति से जागी और टेलर को खुद से दूर धकेलकर तेजी से ब्लाउज के हुक लगाए। साड़ी उठाने की कोशिश की, तो देखा कि उसकी पहनी साड़ी पूरी तरह खुलकर जमीन पर गिरी हुई थी। नीतू ने एक बार गुस्से से टेलर की ओर देखा और साड़ी उठाकर पहनना शुरू किया। टेलर को बेसर हुआ कि रसीले आम जैसे स्त्री के स्वाद का मजा नहीं ले सका, फिर भी उसने कहा, "मैडम, बस एक माप और लेना है।" उसने साड़ी को हाथ में पकड़कर कहा। नीतू ने सोचा कि उसने उसकी छाती, कमर, नितंबों को खूब दबाया, बस एक माप ही तो लेना है। उसने कहा, "ठीक है, जल्दी ले लीजिए।" टेलर ने उसकी छाती की परिधि और अन्य माप नोट कर लिए।

पर्दे के पीछे से बाहर आया टेलर दुकान का कांच का दरवाजा खोलने लगा, तो नीतू भी उसके पास आकर खड़ी हो गई। टेलर ने उसकी ओर देखते हुए एक आखिरी दाँव मारा और कहा, "मैडम, आप बहुत सुंदर हैं, आपका शरीर बहुत मुलायम है और सुगंधित परिमल से भरा है। मेरे जैसे 65 साल के बूढ़े में भी यौवन बाकी है, यह समझाने वाली कामुकता आपके शरीर में छिपी है। इसके सबूत के लिए एक बार नीचे देखिए।" यह कहकर उसने पायजामे से सात इंच का तना हुआ लंड निकालकर दिखाया। नीतू पहले से ही बसव के लंड के आकार से प्रभावित थी, और अब इतने करीब से उसी के बराबर आकार का लंड देखकर वह अपना नियंत्रण खोने की स्थिति में लौट रही थी। टेलर उसके बहुत करीब आया और नीतू की आँखें, जो उसके लंड को घूर रही थीं, उसका हाथ पकड़कर अपने लंड पर रख दिया। जीवन में अपने पति के लंड को भी न छूने वाली नीतू को टेलर के लंड के स्पर्श से पूरे शरीर में बिजली का संचार होने जैसा अनुभव हुआ। टेलर बाहर भी नजर रख रहा था और दूर से बसव को आते देखकर उसने लंड को पायजामे में डाल लिया और नीतू से धीमी आवाज में कहा, "सोमवार को चूड़ीदार लेने अकेले आइए, तब मैं अपने कोबरा का अच्छे से दर्शन करवाऊँगा और आपको उसकी सवारी का मौका भी दूँगा।" नीतू यह सुनकर हैरान थी कि पहली मुलाकात में ही टेलर उसे भोगने की बात कर रहा था। वह कुछ कह पाती, इससे पहले टेलर ने तेजी से उसके स्तनों को दबाया और साड़ी के ऊपर से उसकी योनि को सहलाया, तो नीतू के मुँह से कामोन्माद की एक सिसकारी निकल गई। बसव दुकान में घुसा और पूछा, "माप दे दिया?" नीतू ने "हूँ" कहकर सिर हिलाया और टेलर की ओर मुड़कर पूछा, "चूड़ीदार कब मिलेगा?" टेलर, जो पूरी तरह हरामी था, ने कहा, "अगले हफ्ते मैं खुद फोन करके बता दूँगा, अपना फोन नंबर दे जाइए।" नीतू को मजबूरी में नंबर देना पड़ा। बसव के पीछे दुकान से बाहर कदम रख रही नीतू के नितंबों को एक बार दबाकर और उनकी घाटी में उंगली डालकर टेलर ने फुसफुसाया, "मैं फोन करूँगा, अकेले आना, स्वर्ग की यात्रा करवाऊँगा।"

बसव ने अपनी कार सोने की दुकान के सामने खड़ी की और नीतू के साथ दुकान में जाकर वहाँ के कर्मचारी से पायल दिखाने को कहा। नीतू की मदद से बसव ने सबसे सुंदर पायल चुनी, जो झल-झल की मधुर ध्वनि निकाल रही थी, और उसे पैक करवाया। नीतू ने पूछा, "पायल किसके लिए?" तो बसव ने संक्षेप में जवाब दिया, "मेरे लिए बहुत जरूरी व्यक्ति के लिए।" दुकान से बाहर निकलकर पास के जूस सेंटर में ठंडा पेय पीकर दोनों घर की ओर रवाना हुए।

नीतू के पीछे घर में घुसा बसव अपनी जेब से पायल का पैकेट निकालकर उसके हाथ में देते हुए बोला, "मेरी ओर से पहली छोटी-सी भेंट स्वीकार करो।" नीतू ने इसे जरूरी न होने की बात कहकर मना करने की कोशिश की, तो बसव ने उसे जबरदस्ती सोफे पर बिठाया और उसके सामने घुटनों के बल बैठ गया। नीतू का पैर उठाकर अपनी गोद में रखकर बसव ने खुद पायल उसके दोनों पैरों में पहनाई और कहा, "अब पायलें वाकई बहुत सुंदर लग रही हैं।" उसकी तारीफ सुनकर नीतू शरमाते हुए सिर झुकाकर हल्के से मुस्कुराई, तो बसव ने तय कर लिया कि आज चाहे कुछ भी हो, आगे बढ़ना है। उसने नीतू के मुलायम पैर, जो अभी भी उसकी गोद में था, को एक प्यारा सा चुम्बन दिया। नीतू की ओर देखा, तो वह इस मधुर पल को तन्मयता से अनुभव करते हुए आँखें बंद किए थी। बसव ने उसके दोनों पैरों को बारी-बारी से चूमते हुए कोमल पंजों को मुँह में डालकर चूसा, तो नीतू ने थोड़ा जोर से "आह... हाँ..." की सिसकारी भरी।

बसव ने समझ लिया कि इससे बेहतर मौका नहीं मिलेगा। उसने नीतू का हाथ पकड़कर उसे खड़ा किया और उसकी आँखों में आँखें डालकर उसके मनमोहक सौंदर्य से चमकते चेहरे को अपनी हथेलियों में पकड़ लिया। नीतू को अंदाजा था कि आगे क्या होने वाला है, और उसने आँखें बंद कर लीं। बसव ने उसके चेहरे के करीब जाकर शहद से भरे गुलाबी होंठों पर अपने रूखे होंठ रखकर अपनी मुहर लगा दी। एक मिनट तक होंठों को होंठों से जोड़े रखने के बाद बसव ने अपने होंठों को खोलकर नीतू के Frames: नीतू के गुलाबी पंखुड़ियों जैसे होंठों का शहद चूसने और स्वाद लेने लगा। नीतू के मन में एक पल के लिए पति के प्रति विश्वासघात का द्वंद्व हुआ, लेकिन उसके शरीर की इच्छा ने धीरे-धीरे उसे शांत कर दिया। वह मानसिक रूप से तैयार हो गई कि अगर बसव इससे आगे बढ़ता है, तो वह पूरी तरह सहयोग करेगी और खुद को समर्पित कर देगी। पाँच मिनट तक होंठों का मिलन हुआ, और साँस लेने में तकलीफ होने पर दोनों अलग हुए और तेजी से साँस लेने लगे। नीतू का हाथ पकड़कर बसव ने उसकी आँखों में देखा और कहा, "अगर मैंने कुछ गलत किया, तो मुझे माफ कर देना, लेकिन तुम्हारे सान्निध्य से दूर रहना मेरे बस में नहीं है। अगर तुमने मना कर दिया, तो मेरी जिंदगी में रुचि ही खत्म हो जाएगी। तुम्हारी गोद की निकटता में स्वर्गीय सुख के मधुर पल बिताना मेरी इच्छा है। तुम्हारा फैसला जो भी हो, अभी बता दो। अगर तुम मना करती हो, तो कल से मैं तुम्हें अपनी शक्ल भी दिखाने की कोशिश नहीं करूँगा, लेकिन घर में सही समय पर दूध मिलता रहे, इसका मैं ध्यान रखूँगा।" नीतू ने अपनी मन की इच्छा सोची... कई दिनों से हर रोज परेशान करने वाली कामोत्तेजना को शांत करने का समय नजदीक आ चुका है। अगर अब पीछे हट गई, तो बसव का सान्निध्य फिर कभी नहीं मिलेगा। उसने बसव के होंठों पर एक छोटा सा चुम्बन देकर कमरे के अंदर भाग गई। नीतू के सहमत होने की खुशी में बसव उछल पड़ा और मुख्य दरवाजे को मजबूत करके कमरे में कदम रखा। उसने कमरे का दरवाजा भी बंद कर दिया और आईने के सामने हथेलियों से मुँह ढँककर मुस्कुरा रही नीतू को पीछे से गले लगा लिया।

नीतू पहली बार पूरे मन से अपने पति के अलावा किसी परपुरुष की बाहों में बंधी थी, जिससे उसके पूरे शरीर में रोमांच की लहर दौड़ गई। बसव ने नीतू की नीली साड़ी को एक तरफ सरकाकर अपनी हथेली को उसके सपाट पेट पर रखा और सहलाते हुए उसकी गर्दन के पास अपने रूखे होंठों से चुम्बन दिया। नीतू की अत्यंत मुलायम त्वचा को अपने होंठों से चूमते हुए वह ब्लाउज में नग्न गर्दन के दोनों किनारों पर चुम्बनों की बौछार करता रहा। नीतू को अपनी ओर घुमाकर उसके गालों को हथेलियों में भरने वाले बसव ने उसकी बंद आँखों पर चुम्बन देते हुए कहा, "नीतू, मेरी सोनी, अगर तुम आँखें नहीं खोलकर मेरी ओर नहीं देखतीं, तो मैं अभी चला जाऊँगा।" यह कहकर उसने अपने दोनों हाथ उसके गालों से हटा लिए। बसव के दूर होने से नीतू ने सोचा कि उसके शरीर में भड़की काम की ज्वाला को शांत करने वाला और कौन होगा। उसने आँखें खोलकर देखा कि बसव उससे दूर हटकर पीठ फेरकर खड़ा था। नीतू ने पीछे से उसे जोर से गले लगा लिया।

बसव उसकी ओर मुड़ा और उसके चेहरे की ओर झुका, तो नीतू शरमाकर फिर से आँखें बंद कर ले गई। कुछ देर तक कुछ न होने पर उसने धीरे से आँखें खोलीं और बसव को चुपचाप अपनी ओर देखते पाया। उसने ऐसी नजरों से देखा जैसे कह रही हो, "तुम चुपचाप क्यों खड़े हो, मेरे शरीर को चाहो।" उसकी भावनाओं का जवाब देते हुए बसव ने कहा, "अगर तुम एक बार फिर आँखें बंद कर लेतीं, तो मैं निश्चित रूप से यहाँ से चला जाऊँगा।" नीतू ने सिर हिलाकर मना किया। दोनों एक-दूसरे की आँखों में देर तक देखते रहे। बसव ने नीतू की लचकती कमर को अपनी दोनों हथेलियों से पकड़कर उसे अपने करीब खींचा और उसके काँपते होंठों पर अपने रूखे होंठों की मुहर लगा दी। शादी के शुरुआती एक-दो साल ही हरीश ने उसके होंठों का स्वाद चखा था, और आज 15 साल बाद नीतू बसव को अपने होंठों का शहद चूसने का मौका दे रही थी। दस मिनट तक दोनों के होंठ और जीभ आपस में उलझे, दोनों के मुँह का लार एक हो गया। अलग होने के बाद शरम से सिर झुकाकर मुस्कुराती नीतू बसव के अगले कदम का इंतजार करने लगी।

बसव ने उसे ज्यादा इंतजार न करवाते हुए अपनी हथेलियाँ नीतू के कंधों पर ले जाकर साड़ी का पल्लू और ब्लाउज को जोड़ने वाली पिन निकाली और पल्लू को नीचे सरका दिया। नीतू ने उसका जरा भी विरोध नहीं किया और अपने पल्लू को कंधे से अलग होते देखती रही। यह देखकर बसव का उत्साह दोगुना हो गया। उसी उत्साह में उसने उसकी लचकती कमर को सहलाते हुए साड़ी की चुन्नटों को पेटीकोट के साथ जोड़ने वाली पिन भी निकाल दी। नीतू की नीली साड़ी का पल्लू पकड़कर बसव ने खींचना शुरू किया, तो नीतू पूरी तरह सहयोग करते हुए खड़ी जगह पर ही घूमती गई, और साड़ी सर्पिलाकार में खुलती चली गई। बसव ने नीतू के शरीर से साड़ी खींचकर हाथ में ली और उसे नाक के पास ले जाकर जोर से साँस खींची, नीतू की स्त्रीत्व की सुगंध को अपने अंदर समेटते हुए आनंद लिया। नीतू ने आज टेलर के बाद बसव के हाथों दूसरी बार किसी परपुरुष से अपनी साड़ी खुलवाई थी।

बसव ने सामने हल्के नीले ब्लाउज और काले पेटीकोट में खड़ी नीतू को देखा, जो शिल्पित मूर्ति को भी मात देने वाली देहयष्टि प्रदर्शित कर रही थी। वह उसे ऊपर से नीचे और आगे-पीछे घुमाकर आँखें और मुँह खोलकर देखता रहा। नीतू को बहुत शरम आ रही थी, लेकिन वह बसव को नाराज नहीं करना चाहती थी, इसलिए उसने अपने अर्धनग्न शरीर को ढकने की कोशिश नहीं की और आँखें खुली रखकर उसकी हरकतों को गौर से देख रही थी। बसव बिस्तर के पास आया और किनारे पर बैठकर नीतू की कमर पकड़कर उसे अपने करीब खींचा। उसके चमकते सपाट पेट को सहलाते हुए उसने अपने होंठ उसकी गहरी नाभि पर रखकर एक लंबा चुम्बन दिया। बसव के होंठों का स्पर्श नाभि पर होते ही नीतू के मुँह से कामोन्माद की "आह... म्म... हाँ..." जैसी सिसकारियाँ निकलने लगीं। नीतू ने अपने हाथों से बसव का सिर पकड़ा और उसकी उंगलियाँ उसके बालों में डालकर सहलाने लगीं, उसे अपनी नाभि की ओर जोर से दबाकर इस आनंददायक सुख का मजा ले रही थी। जब बसव की जीभ नीतू की गहरी नाभि में प्रवेश कर चारों ओर घूमने लगी, तो उसके मुँह से कामोन्माद की सिसकारियाँ और तेज हो गईं। नीतू की नाभि को चाटते हुए बसव के हाथ ऊपर सरके और उसके मुलायम, उन्नत स्तनों को छुआ। जैसे ही स्पर्श हुआ, नीतू की योनि से चार-पाँच बूँदें अमृत-रस टपकने लगीं।

नीतू का हाथ पकड़कर बसव ने उसे बिस्तर पर अपने बगल में बिठाया और उसके सुंदर चेहरे को देखते हुए हथेलियों में पकड़कर उसके होंठों की ओर झुका। बसव ने नीतू के रसभरे होंठों पर कब्जा कर लिया और तन्मयता से चूसते हुए उनके शहद का स्वाद लिया। बसव की जीभ ने नीतू के मुँह के अंदरूनी हिस्से को चाटा और फिर उसकी जीभ के साथ सरस खेल शुरू किया। नीतू के होंठों को चूसते हुए बसव का दाहिना हाथ उसके बाएँ स्तन को पूरी तरह घेर ले गया। बसव का स्पर्श उसके स्तन पर होते ही नीतू के शरीर में बिजली का प्रवाह हुआ और वह एक पल के लिए काँप उठी। बसव ने पहले धीरे-धीरे नीतू के स्तन के आसपास सहलाया, फिर हल्के से दबाना शुरू किया। नीतू के होंठों का स्वाद लेते हुए बसव ने दोनों हाथों से उसके स्तनों को पकड़कर धीरे-धीरे दबाना शुरू किया।

पहले धीरे-धीरे शुरू हुआ नीतू के स्तनों का मर्दन बाद में आटा गूँथने की तरह तेज होता गया, और उसके मुँह से कामोन्माद की सिसकारियाँ और तीव्र हो गईं। पंद्रह मिनट तक रूई से भी मुलायम और मूसंबी जैसे आकार के स्तनों को मन भर दबाने के बाद बसव ने अपनी उंगलियों से नीतू के नीले ब्लाउज का पहला हुक खोला। फिर दूसरा, तीसरा, चौथा हुक खोलकर पाँचवें और आखिरी हुक को पकड़ा। बसव ने उसकी आँखों में देखते हुए उसे भी खोलकर ब्लाउज को दोनों तरफ सरका दिया। जैसे ही ब्लाउज का पर्दा हटा, बसव की आँखों के सामने नीतू के खूबसूरत, गोरे, गोल, मुलायम स्तन नीली ब्रा में कैद दिखाई दिए। नीतू की ब्रा के कप थोड़े चौड़े थे, जिससे उसके स्तनों का तीन-चौथाई हिस्सा ढकने में सफल थे, लेकिन उनके बीच की गहरी घाटी स्पष्ट दिख रही थी। बसव ने अपनी जिंदगी में पत्नी के अलावा पाँच अन्य औरतों के साथ शारीरिक संबंध बनाए थे, लेकिन नीतू जैसी दुर्लभ सुंदरी के आसपास भी नहीं भटका था। बसव ने देर न करते हुए नीतू की स्त्रीत्व की निशानी, उभरे हुए गोल स्तनों की ओर झुककर एक मीठा चुम्बन दिया। टेलर के बाद बसव के होंठों ने जब नीतू के स्तनों पर चुम्बन दिया, तो उसके शरीर में वीणा बजने जैसा अनुभव हुआ। जब उसने ब्लाउज को कंधे से नीचे सरकाने की कोशिश की, तो नीतू ने अपनी बाँहें लंबी करके ब्लाउज को अपने शरीर से अलग करने में उसका साथ दिया। बसव ने नीतू का ब्लाउज उसके शरीर से खोलकर जमीन पर फेंक दिया और उसकी ओर झुककर नीली ब्रा के ऊपर एक स्तन को पकड़कर दबाने लगा, जबकि दूसरे स्तन पर मुँह लगाया। जैसे ही बसव के मुँह में उसका एक स्तन गया, नीतू की जांघों के बीच की योनि में झनझनाहट हुई और छह-सात बूँदें अमृत-रस टपककर उसकी कच्छी को भिगो गईं। पंद्रह मिनट तक उसके स्तनों को बारी-बारी से एक को दबाते और दूसरे पर मुँह लगाकर चूसते हुए खेलने के बाद बसव ने उसे पीठ के बल बिस्तर पर लिटा दिया। नीतू के लेटते ही काले पेटीकोट में उभरे गोल नितंबों को देखकर बसव के हाथ खुद-ब-खुद एक-एक नितंब को अपनी हथेलियों में समेटकर जोर से दबाने लगे। नीतू के मुँह से लगातार कामोन्माद की चीखें निकल रही थीं, और वह जीवन में पहली बार अपने नितंबों को दबवाने के हर पल का आनंद ले रही थी।

नीतू के कोमल शरीर पर झुका बसव उसकी कमर को चाटने के बाद दाँतों से हल्के से काटते हुए उसकी सुडौल कमर के दोनों किनारों पर अपनी काम की मुहर लगा दी। नीतू ने सोचा कि वैसे भी पति को उसके शरीर की जाँच करने का मौका नहीं है, इसलिए बसव जैसे चाहे उसका शरीर भोग ले, बस उसकी कामाग्नि को शांत कर दे। उसने बसव को रोकने की कोशिश नहीं की। नीतू की कमर और लंबी पीठ की मुलायम त्वचा पर बन रही पसीने की बूँदों को, जो मोती की तरह दिख रही थीं, बसव ने अपनी जीभ से चाटकर स्वाद लिया और नीली ब्रा की पट्टियों और हुक के पास पहुँचा। बसव ने नीली ब्रा की इलास्टिक पट्टी को दाँतों से काटकर खींचा और छोड़ते ही वह "पट... पट..." की आवाज के साथ नीतू की पीठ से टकराई, जिससे उसके मुँह से "आह... आह... आह..." की आवाजें निकलीं।
 
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