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Incest दील का हाल , बेहाल !

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sunoanuj

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Update please
 

RASCAL420

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Exceptionally good writing skills, narration style mujhe bahut pasand aaya.... Sabhi scenes Ko clearity ke sath dikhaya jaise starting me rajni ka roopantaran karte gaon ke kuch sadasye,,,,, eske baad Raju ko satte ka khel Sonu aur uski maa ko samjhana... Chachi thodi harami kisam ki hai!!!! Sabse pehle ye he aayegi niche,,,,, rajni bhi samjh chuki hai ki Raju apni teesri Tang pe ghee laga raha hai.... Abhi toh shuruaat hai.... Kahani ka narration mujhe accha laga aur sach me kahani interesting lag rahi hai esliye bhai agar time milta hai toh regular update dete raho...
Waiting for next update!!!!
 

surendr1

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-दील का हाल , बेहाल !!

अपडेट - 3











राजू की तो गांड फट गयी थी.......क्यूकीं उसे पता था की उसकी चाची एक नबंर की कमीनी औरत है......मेरी मां को नीचा दीखाने के लीये ये इस बात का पतगंड़ बना सकती है!! लेकीन जब रमती बीना कुछ बोले दरवाजे की कड़ी खोलते हुए अँदर चली जाती है तो, राजू को चैन आता है........!

.......तभी उसे सोनू आता हुआ दीखाई दीया..... सोनू ओसार में आकर ,राजू के पास बैठते हुए बोला-

सोनू - भाई........शोभा आयी थी, मां ने उससे बात कर लीया है......और वो तैयार भी हो गयी है!!

राजू - बहुत सही.....ये हुई ना बात। अब एक लड़की की जरुरत है.....फीर अपनी नौटकीं की तो नीकल पड़ी समझ!!

सोनू - हा वो तो ठीक है......लेकीन लड़की मीलेगी कहां!!

राजू - चीतां मत कर तू.....सब हो जायेगा!! अच्छा तू एक काम कर नौटकीं का पूरा सामान रमेश के घर से उठा कर शोभा के घर पर रखवा दे!!

सोनू - लेकीन रमेश के घर पर रखा है तो क्या हुआ??

राजू - अरे तू पहले कर तो सही, बाद में पता चल जायेगा.....

सोनू - चल ठीक है.....मैं दीनू और पप्पू को साथ में लेकर जाता हूं!!

राजू - हां ठीक है.......

.........इतना कहकर सोनू वहां से चला जाता है.......!!

राजू ओसार में ही खाट पर बैठा था......तभी रमती अपने कमरे से बाहर नीकलती है....दरवाजे की आवाज से राजू समझ जाता है की चाची आ रही है.....

''रमती ओसार से नीकल कर जैसे ही बाहर जाने लगती है......उसकी मटकती हुई बड़ी गांड एक बार फीर राजू के सामन आयी.....ये देख राजू से रहा नही गया और उसके मुह से नीकल पड़ा.....

........वाह रे मरी धन्नो कमाल की डग्गी है तेरी.......

राजू की बात सुनकर , रमती ने एक बार फीर रुकते हुए पीछे मुड़ कर राजू की तरफ देखा....लेकीन राजू अपना ध्यान कही और लगाया था......फीर रमती वंहा से चली जाती है!!


''राजू के दादा जी 3 भाइ थे!!
चंपक लाल - राजू के दादा जी , जो अब इस दुनीया में नही थे......

साहब लाल - चंपकलाल का बड़ा भाई.....ये भी इस दुनीया में नही है ! साहबलाल का ऐक ही बेटा है ......रतनलाल!

रतन लाल (59) - रतन लाल का घर, राजू के घर से सटा था......और राजू इन्हे बड़े पापा कहके पुकारता था!!


सुगना देवी (52) - साहब लाल की पत्नी....इसका काम झगड़ा लगाना है, इसको पता है की , राजू की मां और उसकी चाची के बीच अनबन रहती है......इसलीये जब ये रमती के पास बैठी होती तो रजनी की बुरायी करती और जब रजनी के पास रहती तो रमती की करती!!

अवधेश (25) - साहब लाल का बेटा, ये सूरत में एक पेपर मील में काम करता है,, इनकी शादी को दो साल हो गये है.!!

सुनीता (24) - अवधेश की पत्नी , हालाकी इसकी शादी के दो साल हो गये है तो अब ये थोड़ा घर के बाहर के भी काम-काज करने लगी है.....जैसे भैंसो को धोना , चारा डालना इत्यादी.......नही तो गांव की नयी शादी पर लड़कीया एक - दो साल तक घर के अंदर का ही काम करती थी और बाहर बहुत कम ही नीकलती थी......

तो ये तो था राजू के दादा जी के बड़े भाई का परीवार.......

......रमती राजू को पलट के देखने के बाद....सीधा सुगना के पास जाकर बैठ जाती है...!

राजू ओसार में से.....रमती को लगातार देखे जा रहा था,, रमती को भी पता था की राजू उसे ही देख रहा है......तो रमती भी कभी अपनी जांघ सहलाती तो कभी साड़ी के उपर से ही अपने चुतरो को खुजला देती , लेकीन राजू की तरफ नही देखती .....

*ये सब देख कर , राजू का हाल बेहाल हो जाता....उसका मन करता की अभी पकड़ कर चाची को बलभर पेले.....लेकीन बेचारा लंड मसलकर रह जाता .......!!


राजू ओसार से उठकर....खूटीं पर टगें गमछे को लेकर , कमरे के अंदर जाता है.....और आलमारी में से साबुन और एक लोटा लेकर बाहर आ जाता है....शायद वो नहाने जा रहा था!

''राजू घर के बाहर हैडँपपं को चलाते हुए बाल्टी में पानी भर रहा था.....ये हैडंपप राजू के दादा जी ने लगवाया था.....और साहबलाल का परीवार भी इसे इस्तेमाल करता था.....

''खैर राजू ने बाल्टी में पानी भरकर नहाने लगा.....उसने साबून लगा रखा था,, उसकी आखें साबून लगे होने की वजह से बंद था....उसने पानी डालने के लीये जब बाल्टी में हाथ डाला तो उसे बाल्टी ही नही मीली....

राजू ने अपना हाथ इधर- उधर फेरा , लेकीन बाल्टी नही मीली......राजू के आंखो में साबुन लगे होने की वजह से....वो अंधा-धुधं बाल्टी को टटोलने का प्रयास कर रहा था.....


.....राजू - अरे बाल्टी कौन ले गया? अभी तो यही थी.....
तभी राजू को कीसी के हसने की आवाज़ आयी.....राजू को समझते देर नही लगी की ये सुनीता भाभी है....!

राजू - अरे भाभी.....क्या मज़ाक कर रही हो, पानी तो ना जल्दी आंख मे साबुन लग रहा है!!

सुनीता दीखने में सांवली थी लेकीन चेहरे का ढाचां काफी अच्छा था.....उसकी लम्बाई भी कम थी.....उसकी लबांइ कम होने की वजह से उसकी टाइट चुचीया हमेशा ब्लाउज को फाड़ कर बाहर आने को उतावली रहती......शादी के दो साल हो गये थे.....लेकीन इसका पती , जब शादी हुई तो अवधेश एक महीने था और उसके बाद जब गवना आया तो फीर अवधेश करीब एक महीना ही था.......अवधेश सूरत में काम करता है और साल भर में एक बार आता है.......सुनीता राजू के साथ खुल कर मजाक करती थी.......लेकीन राजू थोड़ा शर्मीला था तो वो कभी - कभी शर्मा जाता !!

राजू - पानी दो ना भाभी.....

सुनीता ने बाल्टी उठा लीया था.....और राजू को यूं छटपटाता देख हसे जा रही थी.....!


सुनीता (मज़ाक) - अरे राजू......मैं तो पानी दे दूगीं लेकीन तुम ये बताओ की वापस कब करोगे??

राजू कुछ समझा नही तो उसने बोला-

राजू - अरे भाभी तू अभी पानी दे पहले....बाद में तू जीतना कहेगी उतना पानी दूगां तूझे....

सुनीता - सोच लो.....कहीं बाद मे मुकर मत जाना!!

राजू - अरे नही मुकुरुगां.....अब पानी डाल जल्दी आंख में साबून लग रहा है.......!

....उसके बाद फीर सुनीता......राजू के उपर पानी डालती है की, तभी उसकी सास सुगना जो कुछ ही दूरी पर एक नीम के पेड़ के नीचे बैठी रमती से बात कर रही थी वो चील्लाने लगती है!!

सुगना - अरे ओ माई......खीलवाड़ हो गया हो तो....भैसो को जल्दी से अब पानी पीला!!

अपनी सास की चील्लाहट सुनकर.....सुनीता अपनी बाल्टी लगाकर पानी भरते हुए बोली-

सुनीता - देखो तुम्हारी वज़ह से डाट पड़ गयी मुझे....

राजू - मेरी वज़ह से......

और ये कहकर राजू अपना गमछा लपेट कर अपनी भीगी हुई चड्ढी नीकालने लगता है..!

सुनीता (पानी भरते) - और नही तो क्या....तुम्हे पानी देने के चक्कर मे...मैं अपना पानी भरना भूल गयी.....घबराओ मत जीतना पानी दीया है.......सब एक बार में वसूलूगीं!!

........राजू अपनी चड्ढी नीकाल कर अब धोने लगा था......राजू की चड्ढी देखकर सुनीता ने एक बार फीर मज़ाक करते हुए बोली-

सुनीता - अरे दीपा की भी चड्ढी कभी धो दो....

दीपा राजू की बहन थी.......और अक्सर गांव की भाभीया अपने देवरो के साथ इस तरह का मजाक करती रहती है!

राजू - लगता है.....भाभी , तेरे भाई ने तेरी खूब चड्ढीया धोयी हैं!!

सुनीता - नही......मेरे भाई, तुम्हारी तरह छीनरा नही है.....!

राजू (मन में) - ये साली पीछले दो सालो से मज़ाक करती आ रही है.......थोड़ा मै भी अगर खुल कर बात करु तो इसे आसानी से चोदने को मील जायेगी मुझे.....!!

राजू - अच्छा तो मैं छीनरा हूं......?

सुनीता अपनी बाल्टी भर चुकी थी.....उसने अपनी बाल्टी में से अपने हाथो में थोड़ा सा पानी नीकालते हुए राजू के चेहरे पर छीटें मारते हुए बोली--

सुनीता - और नही तो क्या....

और ये कहकर , वो अपना बाल्टी लेकर मुस्कुराते हुए वंहा से चली जाती श
 
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MS DHONI

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Bhai achhi update hai...But regular updates dijiye..Tabhi to padhne mein Maja aayega.
 

surendr1

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-दील का हाल , बेहाल....!!

अपडेट -- 4












राजू नहाने धोने के बाद, वो गांव की तरफ नीकल जाता है........गांव के स्कूल पर बैठा राजू , सोनू और दो लड़के अपने नौटकीं के बारे में बात कर रहे थे.......!

'बात करते - करते अंधेरा हो जाता है तो वो सब लोग अपने - अपने घर की तरफ नीकल जाते है!!

राजू जैसे ही घर पहुचा......तो बाहर ही खाना बन रहा था ! क्यूकीं गर्मीयों में गावं के लोग ज्यादातार बाहर ही खाना बनाते थे.....!

'चारो तरफ चांद की रौशनी बीखरी थी.....ठंढ़ी - ठंढ़ी हवायें चल रही थी ......घर के बाहर दुवारे पर खाट बीछी थी......एक खाट पर राजू का बाप लेटा था , और वही बगल साहब लाल के दुवार पर वो खाट लगाकर लेटा था!

' मीट्टी के तीन चुल्हे जल रहे थे , एक तो सुनीता अपना घुघंट काढ़े अपने दुवार पर खाना बना रही थी , और दुसरा ओसार के बाहर दुवारे दाहीने तरफ राजू की मां और उसकी........बहन दीपा खाना बना रही थी, और ओसार बांये तरफ दुवार पर रमती और उसकी बेटी आंचल खाना बना रही थी!!

चांद की रौशनी में बाहर खाट पर लेटे राजू के पापा और साहब लाल आपस मे बात कर रहे थे......सुगना भी साहब लाल के बगल ही खाट पर बैठी बात कर रही थी.......

तभी राजू भी वंहा पहुचं जाता है.......उसने देखा की उसका बाप और साहब लाल अपनी बचपन की बाते करते हुए हंसी मजाक कर रहे है तो वो भी ओसार में जाकर एक खाट उठाकर बाहर लेकर आया और बीछा कर लेट गया.......

दुवार के सामने थोड़ी सी दूरी पर मीट्टी के तीन चार कमरे बने थे.....जीसमें राजू और रमती की गाय , भैसं बांधी जाती थी....

''राजू खाट पर लेटा था उसे तबांकू खाने की तलब उठी.....तो वो सुनीता की तरफ उठ कर चल दीया,
सुनीता बाहर खाना बना रही थी.......सुनीता के पास पहुच कर.....

राजू - भाभी......बड़े पापा ने तबाकूं की डीबीया कहा रखी है??

सुनीता (रोटी सेकते हुए) - अच्छा देवर जी , जब काम पड़ता है तो ही भाभी की याद आती है , क्यूं?

राजू - अरे.....ऐसा नही है भाभी, मैं तो तुम्हे हमेशा याद करता हूं.....!

राजू ......के अंदर एक अलग ही जोश आ गया....उसे अब सीर्फ बुर की तलाश थी, और वो अब सुनीता को फांसना चाहता था......उसने आज ये इरादा कर लीया था की , अब वो भी भाभी से खुलकर बात करेगा.....!

सुनीता - चलो जाओ......मस्का मत लगाओ!!

राजू - अरे भाभी......समझा करो, बहुत तलब लगी है.....!

सुनीता - कीस चीज की तलब लगी है....देवर जी!!

राजू अपनी भाभी की बात सुनकर....समझ जाता है की भाभी कीस तलब के बारे में पुछ रही है.....

राजू - फीलहाल तो तबाकूं की तलब लगी है....कीसी और चीज की तलब लगेगी तो मै तूझे बोल दूगां भाभी.....

सुनीता चुल्हे में से रोटी सेकतें हुए बोली--

सुनीता - अरे......देवर जी, तबाकूं की तलब तो मैं दूर कर दूगीं.....और रही कीसी और चीज की तलब तो वो तो दीपा से जाकर दूर कर लो..!

अपनी भाभी की बात सुनकर , राजू धीरे - धीरे गरम होने लगा......

राजू - अब भाभी तूझे तो पता है की मै कीतना बड़ा छीनरा हुं....

सुनीता - वो तो तुम हो ही देवर जी......

राजू - तो फीर मेरी तलब तो तुम ही हो......भाभी,,

राजू के मुह से ऐसी बात सुनकर......सुनीता खुश हो जाती है।

सुनीता (मन में ) - ये पगलेठ को मैं कब से इशारा दे रही थी......इसे आज समझ में आया ॥ चलो थोड़ा और तड़पाती हूं इसे.....

सुनीता - हाय राम.......ये क्या कह रहे हो देवर जी, मैं तुम्हारी भाभी हूं.....अपनी ये तलब जा कर दीपा से पूरा कर लो......मेरे साथ नही!!

राजू और सुनीता बहुत धीरे - धीरे बात कर रहे थे......और वैसे भी राजू को सब सीधा समझते थे, इसलीये कोयी शक भी नही खाता था..... हालाकी राजू बहुत सीधा - साधा था, एक पल के लीये तो सुनीता भी यही मान ली थु की......ये भोला है , ये हाथ नही आयेगा और आज तो वो अचम्भीत रह गयी थी राजू का ये रुप देखकर!!


राजू - अरे जब इतनी मस्त भाभी है, तो बहनो पर भला क्यूं नज़र गड़ाना....

सुनीता - नही.....बाबा , मुझे नही करना ये सब......!

राजू अपना एक हाथ धीरे से ले जाकर.....सुनीता की चुचीयों को ब्लाउज के उपर से ही पकड़ लेता है......

सुनीता - हाय रे.......देवर जी, ये तुम क्या कर रहे हो.....छोड़ दो, ये गलत है....सब यही बैठे है,

'राजू को पता था की, उन दोनो का मुह घर की दीवाल की तरफ है.....और वो दोनो एक-एक इट रखकर नीचे जमीन पर बैठे थे......उन लोग को सब लोग देख तो सकते थे , लेकीन राजू क्या हरकत कर रहा है.....ये देखना मुश्कील था!!

सुनीता की चुचीयां एक दम कसी-कसी थी....और ये पहली बार था , जब राजू कीसी औरत की चुचींयो को छुवा था.....और उसे अपनी भाभी की चुचीयों को पकड़े हुए इतना मजा आ रहा था की, उसका लंड फनफना कर खड़ा हो गया.......

राजू ने अपने हाथो में सुनीता की चुचीयों को धीरे-धीरे मसलने लगता है......

सुनीता को बहुत अच्छा लग रहा था......जीस तरह से राजू उसके चुचीयों के साथ खेल रहा था , वो तो पागल सी हो गयी......

सुनीता - हाय रे देवर जी........आह........छोड़ दो......कोयी देख लेगा!!

राजू - तेरी चुचीयां तो बहुत कसी - कसी है भाभी......कसम से बहुत मजा आ रहा है।
और ये बोलते हुए राजू , थोड़ी और जोर - जोर से सुनीता की चुचीयां दबाने लगता है.....

सुनीता की तो साँसे तेज होने लगती है.......उसकी मजे में हालत खराब होने लगती है, वो ठीक से रोटी भी नही बना पा रही थी।

सुनीता - आ.....ह, देवर जी.....बस करो, कीतना दबाओगे.......आह, तुम बहुत गंदे हो।

सुनीता तो अँदर ही अँदर बहुत खुश थी......और यही हाल राजू का भी था। सुनीता मस्ती में मस्त होकर अपनी चुचींया दबवा रही थी......और मजे ले रही थी, सूनीता इतनी गरम हो चुकी थी की, उसकी बुर फुदकने लगी.....!

तभी .............अभी तेरा खाना नही बना महारानी......देख सबका बन गया!!

सुनीता अपने सास सुगना की आवाज़ सुनकर......होश में आती है, और इधर राजू भी घबरा कर उसकी चुचींया छोड़ देता है!!

और अच्छा हुआ , सुगना ने आवाज लगाया क्यूंकीं दीपा इन लोग की तरफ ही आ रही थी......

दीपा - चलो......भैया, खाना खा लो.....

दीपा की आवाज सुनकर......राजू खड़ा हो जाता है, और सुनीता भी खाना समेट कर उठते हुए बोली-

सुनीता - क्या बात है, ननद जी.....बहुत अपने भैया को खीला रही हो....!

दीपा- हां तो भाई है मेरा......क्यूं नही खीलाउगीं??

......तभी रीतेश वंहा से हटते हुए खाट पर आकर बैठ जाता है....

रीतेश (मन में) - आरे यार......मजा ही आ गया, अगर भाभी की चचीयां दबाने में इतना मजा है तो, चाची की चुचीयां तो और मस्त है.....मजा आयेगा.....पहले तो भाभी को जी भर कर चोद-चोद कर मजा लेता हूं.....रही बात चाची की तो मुझे तो नही लगता की ये चुदवायेगी , लेकीन फीर भी कोशीश करता हू......

......ये ले बेटा खाना खा ले......। रजनी खाना ले कर राजू के पास खड़ी थी.....!

राजू खाना लेकर खाने लगता है......और पास वाली खाट पर उसका बाप खा रहा था!!

राजू.......खाना खाने के बाद, हाथ मुह धोता है ॥ उसे तबांकू की तलप लगती है......उसने देखा सब खाना खा रहे थे ! वो सुनीता के घर में घुस जाता है......

अंदर , सुगना खाना खा रही थी और सुनीता पास में बैठकर पंखा डोला रही थी!

राजू को देखते ही.....सुनीता थोड़ी शरमा जाती है.....!

राजू - बड़की अम्मा थोड़ा सुरती दे ना.....!

सुगन- जा , जा कर अंदर आलमारी में से नीकाल ले ......!

राजू अंदर कमरे की तरफ बढ़ते हुए.....सुनीता को कमरे में आने का इशारा करता है.....!


राजू अंदर जाकर , आलमारी में तबांकू ले कर घीसने लगता है। कुछ देर में जब सुनीता नही आयी तो.....

राजू - बड़की अम्मा कहां रखा है..? नही मील रहा है!

राजू की आवाज़ सुनकर , सुनीता समझ जाती है की......राजू का ये बहाना है, मुझे बुलाने का!

सुगना - जा रे .....जा कर दे उसको!

सुगना की बात सुनकर.....सुनीता उठ कर राजू के पास जाने लगती है!! सुनीता का बुर फुदकने लगती है ये सोचकर की अब राजू उसे फीर से मसलेगा!!

अँदर कमरे में पहुचँ कर.....सुनीता ने देखा की राजू तो तबांकू ले कर मल रहा है!!

.......सुनीता राजू के पास आकर , शरारती अदांज में राजू का एक कान पकड़कर खीचते हुए धीरे से फुसफुसा कर बोली ताकी आवाज उसकी सास तक ना पहुचें-

सुनीता - बदमाश.......कहीके!

....राजू ने बीना देर कीये, सुनीता को अपनी बाहों में कस लेता है..... सुनीता भी उसकी आगोश में समा जाती है.....लेकीन नाटक करते हुए बोली-

सुनीता - बड़े बदमाश हो देवर जी.....छोड़ो ना मुझे!

राजू ने झटके से सुनीता का पीठ......अपनी तरफ चीपकाते हुए उसकी चुचीयों को अपने दोनो हाथो में पकड़ कर.....जोश में जोर से दबाने लगता है!

.........सुनीता की चुचीयों में वो दर्द उठा की , उसके मुह से जोर की चीख नीकल पड़ी!!

सुनीता - आ........आ...........आ.......

सुनीता की इतनी जोर चीख सुनकर......सुगना घबरा गयी....!

सुगना - क्या हुआ??

राजू भी घबरा गया की , लगता है अब फंस जाउगा लेकीन तभी......

सुनीता - क.......कुछ नही अम्मा चूहा था......डर गयी!

सुगना - धत तेरी के.......एक चुहे से डर गयी!

सुनीता की समझदारी देखकर , राजू सुनीता को देखते हुए मुस्कुरा देता है.......राजु को मुस्कुराता देख सुनीता भी मुस्कुराते हुए बोली-

सुनीता - हाय रे देवर जी......इतना जोर से कोयी दबाता है क्या??

राजू हल्के - हल्के सुनीता की चुचींया मसलते हुए बोला-

राजू - क्यूं दर्द हुआ क्या??

सुनीता - हा तो दर्द होगा नही......बेरहमी से मसलोगे तो.....!

राजू - तूझे तो ऐसे ही मसलूगा......मेरा जैसा मन करेगा वैसा मसलूगा!!
आज रात जब मैं टी वी देखने आउगा , तब तूझे अच्छे से मसलूगा.......!


सुनीता अपनी बांहो को......राजू के गले में डालते हुए बोली--

सुनीता - मेरे देवर जी.......तुम्हारा हक, बस उपर - उपर है, उस चीज का सपना मत देखो...

और ये कहते हुए......वो राजू को एक धक्का देती है और मुस्कुरात हुए वंहा से चली जाती है!! राजू भी तंबाकू लेकर कमरे से बाहर आ जाता है!!


राजू एक बार......सुनीता को देखता है, और फीर एक आंख मारते हुए वंहा से बाहर आ जाता है!!


''राजू बाहर खाट पर लेटा था.......सब खाना खा चुके थे......!

राजू ओसार से......होते हुए , अँदर आगन में आ जाता है......!

आगन भी उपर से खुला था......आगंन में भी चांद की रौशनी फैली हुई थी......और ठंढ़ी हवायें चल रही थी!

आगंन में 5 खाट बीछी थी.......एक पर दीपा लेटी थी , ऐक खाट पर रजनी , बीच वाली खाट राजू की थी.....उसके बाद थोड़ी सी दूरी पर रमती की खाट थी और फीर उसकी बेटी आंचल की खाट थी!!


' राजू का कुछ ठीक नही था.......वो कभी आँगन में सो लेता तो कभी बाहर दुवारे अपने पापा , चाचा , और बड़े पापा के पास खाट बीछा कर सो जाता तो कभी वो अपने बड़े पापा के घर में टी वी देखते - देखते ही सो जाता ,!

सुगना के घर में आगंन नही था तो, वो गर्मी के दीन में बाहर दुवारे ही सोती , और सुनीता अंदर एक पखां लगाकर सो जाती !

'राजू के पास बहुत अच्छा मौका था.....क्यूकीं वो अपने बड़े पापा के घर में टी वी देखने जाता था तो वही सो जाता ......टी वी सुगना के कमरे में था ......और अंदर वाले कमरे में सुनीता सोती !!

'राजू के उपर कभी कोयी शक भी नही करता, क्यूकीं वो सालो से टी वी देखते जाता था और वही सो भी जाता था.......


''खैर सब खा पीकर लेट गये थे......लेकीन राजू लाइट के इतजांर में था की, कब लाइट आये...... और वो टी वी देखने जाये !!

.......लाइट का इतंजार करते - करते वो नीदं की आगोश में चला जाता है.......
 
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