अपडेट -- 6
राजू भले ही सुनीता को अभी तक चोद नही पाया था......लेकीन उसे सुनीता की गांड और चुचीयां दबाने में बहुत मजा आया......वो अपने सनद मे लेटा था....
'तभी रमती बाहर से आते हुइ दीखाई दी.....रमती बाहर से सीधा ओसार में आकर खाट पर बैठ जाती है......! रमती को देखते ही राजू के अँदर एक हलचल सी पैदा होने लगती है!!
राजू ने रमती को देखते हुए थोड़ा मजा लेना चाहा , तो उसने बोला-
राजू - अरे मेरी धन्नो.....आज कल बहुत खुजली हो..... रही है!!
राजू की बात सुनकर , रमती ने गुस्से में एक नज़र राजू की तरफ देखा .....लेकीन कुछ बोली नही!! एक बार के लीये तो राजू की गांड फट गयी थी.....लेकीन जब रमती कुछ बोली नही तो वो कुछ सोचने लगा-
राजू (मन में) - इस साली को कीतना भी बोलू.....कुछ नही कहेगी , और कीसी से नही कहेगी......और ये कुछ बताती भी है कीसी से तो इसका कोयी भरोसा भी तो नही करेगा......क्यूकीं मां जानती है की ये बहुत चुगलीखोर औरत है.....तब इसे और गंदा बोलना चाहीये.......मजा आयेगा......ये बुर तो चुदवायेगी नही साली पता है!!
......रमती खाट पर बैठी - बैठी , वो अपना पैर राजू की तरफ करके लेट जाती है....और अपने दोनो पैर मोड़ लेती है!!
राजू सनद में लेटा , रमती को जब देखा की वो अपने पैर मोड़ कर लेटी है और उसके घुटने तक उसकी साड़ी चढ़ी थी .....और उसके घुटने पर चढ़ी दोनो टागें फैला कर रखने की वजह से उसके बुर का नज़ारा देखा जा सकता है .....साड़ीयो के अंदर से!!
राजू तो मस्त हो जाता है.....उससे रहा नही गया, रमती की बुर देखने की इच्छा से पागल हो कर , वो जैसे ही खाट पर से उठा ......रमती ने अपने दोनो घुटने चीपका लीये.....जीससे बुर देखने वाला दरवाजा बंद हो गया !
राजू मनमान कर फीर खाट पर लेट जाता है....और जैसे ही वो लेटता है, रमती अपने घुटने फीर खोल देती है!!
राजू फीर उठा.....लेकीन रमती फीर अपने घुटने चीपका लेती.....ऐसा तीन चार बार हुआ , राजू खाट पर लेटे हुए सोचा की .....चाची ने तो अपना मुह साड़ीयोँ से ढ़का है.....तो इसका मतलब उसे साड़ी के अँदर से हल्का - हल्का दीख रहा है.....ये बात है। जब मै उठता हू तब उसे दीख जाता जीसकी वज़ह से वो अपने घुटने बंद कर लेती है!!
राजू कुछ देर लेटा रहा.......फीर उसके दीमाग में आयडीया आया......
वो झट से खाट पर से उठ कर खड़ा हो गया.....उसके उठते ही , रमती ने अपने घुटने चीपका लीये.......ये देख कर राजू मुस्कुराया और सोचा , मेरी धन्नो मुह पर साड़ी डाल कर तू सब देख रही है......और तू सोच रही है की , मुझे लग रहा है की तू कुछ नही देख रही है......ठीक है धन्नो अब देख मैं कैसे मजा लेता हूं!!
राजू खड़े - खडे अपने गमछे के उपर से अपना लंड मसलने लगता है.....उसे पता था की उसकी चाची सब देख रही है उसे साड़ी के अंदर से झलक रहा है......ये सोचते ही की वो चाची के सामने अपना लंड मसल रहा है.....और उसकी चाची देख रही है तो , उसका लंड फनफना कर खड़ा हो गया.....
राजू ने अपना गमछा नीकाल दीया .....अब वो सीर्फ चड्ढी पर था .....और उसका लंड उसकी चड्ढ़ी फाड़ कर बाहर नीकलने को तैरार था......
राजू ने चड्ढी के उपर से ही अपने लडं को सहलाते हुए , अपनी चाची की तरफ देखते हुए मुस्कुरा कर बोला--
राजू - मेरी धन्नो......देख अपना घोड़ां और ये कहते हुए उसने अपनी चड्ढी नीचे सरका दी.....
'राजू जो भी बोलता वो रमती सब सुन रही थी , और उसने मुह पर साड़ी डालकर ना दीखने का जो बहाना था वो भी राजू समझ गया था की इसे दीखाई दे रहा है.......
राजू के चड्ढी नीचे करते ही......उसका 9 इंच का लबां और मोटा लंड सर उठाये खड़ा था......॥ इतना मोटां और लंबा लंड देखकर जरुर रमती की सास अटक गयी होगी.....!
......लेकीन तभी राजू को कीसी के आने की आहट सुनायी पड़ी, उसने झट से अपना चड्ढी उपर कीया और गमछा लगा कर खाट पर लेट गया!!
उसके लेटते ही......आंचल रमती के पास आयी!
आंचल - मां......उठ , चल नहा ले......मै आगंन में पानी रख देती हूं!
.......इतना कहकर.....आचंल वंहा से चली जाती है!!
कुछ देर बाद रमती उठ कर खाट पर बैठ जाती है.......राजू उसे ही देख रहा था ! लेकीन रमती उसके तरफ नही देखती......
तभी आंचल पानी ले कर आती है और आगनं में रखकर बाहर चली जाती है.....
रमती भी उठकर , बगल वाले कमरे में चली जाती है , और अपना साया और साड़ी लेकर आगंन में नहाने चली जाती है......राजू भी कुछ सोचा और वो भी आँगन में आकर अपने आगन के बगल वाले कमरे में घुस जाता है!!
रमती ने राजू को कमरे में जाते हुए देख कर कुछ सोचने लगी.....तभी आंचल वहा आ जाती है!!
आचंल - ये ले साबुन मां ......और जल्दी नहा , मुझे भूख लगी है!!
आचलं ने ऐसा इसलीये बोला क्यूकीं जब रमती आंगन में नहाती है.....तो आचंल को सनद में बैठना पड़ता है ताकी कोयी आगंन में आ ना पाये.......और कोयी मर्द खासकर , राजू या फीर उसके पापा आते भी तो आंचल पहले ही बोल देती की मां नहा रहा रही है!! लेकीन आचंल को कहा पता था की....राजू तो पहले ही आंगन के बगल वाले कमरे में घुस कर एक छोटे से झरोखे के पास तैयार बैठा है......ये बात तो रमती ही जानती थी!!
रमती - तू जा जाकर खाना खा ले......
आचंल - लेकीन मां कोयी आ गया तो......
रमती - कोयी नही आयेगा , मै सनद का दरवाजा बंद कर लूगीं!
रमती के मुहं से ये बात सुनकर तो......राजू के लंड ने झटके मारने लगे.....वो अंदर एक छोटे से झरोखे के पास बैठा आगंन के नजारे देख रहा था.......
आंचल के जाते ही.......रमती ने सनद का दरवाजा बंद कर दीया.......और इधर राजू अपनी चाची को नंगी देखने के लीये बेहाल था!!
राजू ने कमरे के अंदर से धीरे से कहा-
राजू - चल मेरी धन्नो......नंगी हो जा!
राजू की आवाज , रमती के कानो में पड़ते ही.....रमती ने झरोखे की तरफ गुस्से में मुह बना कर बोली-
रमती - लाज , शरम सब धो के पी लीया है.....हरामी ने!
रमती के गुस्से वाली नज़र देखकर तो , राजू की फट गयी.....लेकीन फीर उसने सोचा जो होगा देखा जायेगा.....
राजू ने भी धीरे से कहा-
राजू - नाटक मत कर रंडी साली......जल्दी नंगी हो जा.......
रमती ने राजू की बात सुनके कुछ बोला तो नही .....लेकीन अपना मुह बनाये , अपनी साड़ी नीकाल कर बगल में रख देती है!!
रमती के उपर अब साया और ब्लाउज था.....उसके ब्लाउज में कसी बड़ी चुचीयां देखकर राजू की हालत खराब हो गयी.....उसे अपनी चाची को गंदी गंदी गालीया देने में बहुत मजा आता ......
रमती ने अपना ब्लाउज उतारा दीया.......
राजू उसकी बड़ी - बड़ी चुचीयां लाल रंग की ब्रा में देख कर पागल हो गया......उसका लंड फुफकारने लगा....
राजू - उफ......सली, क्या मस्त चुचीयां है.....
रमती गुस्से में अपने ब्रा भी उतार देती है.....उसकी बड़ी - बड़ी चुचीयां.....आजाद हो जाती है......इतनी मस्त और बड़ी चुचीया राजू ने आज तक नही देखी थी.....राजू को पसीने आने लगे....उसने अपना लंड हाथ में लीया और उसे आगे पीछे करते हुए नज़ारा देखने लगा!
रमती अब अपने उपर पानी डालकर नहाने लगी......वो अपनी चुचीयों में रगड़ - रगड़ कर साबुन लगाती , जीसे देख कर राजू बेकाबू हो जाता और लंड जोर - जोर से हीलाता!
रमती को उस अवस्था में देखकर तो कोयी भी पागल हो जाता.....रमती ने साबुन लगाते हुई खड़ी हुई और अपने पेटी कोट का नाड़ा खोल दीया.......
पेटीकोट सरक कर नीचे गीर गयी.......राजू की आंखे फटी की फटी रह गयी.....इतनी मोटी और बड़ी गांड लाल रग की चड्ढी में क्या मस्त लग रही थी.......राजू के तो होश ही उड़ गये .....वो अपना लंड और जोर से हीलाते हुए बोला-
राजू - साली मजा आ गया......क्या गांड है रे !! इस चड्ढी को भी उतार साली-
राजू की बात सुनकर......रमती गुस्से में बोली हरामी अपनी हद मत पार कर......इतनी गंदी - गंदी गालीया कब से दे रहा है.....शरम नही आ रही तूझे!
राजू - शरमाउगां तो तूझे चोदूगां कैसे?
रमती अपने उपर पानी डालते हुए बोली-
रमती - चोदने का सपना देख रहा है तू.....सपना ही रहेगा!!
राजू - तूझे तो कुतीया बना कर चोदूगां.....!
रमती - छी......बद्तमीज......
इतना कहकर रमती वहां से चली जाती है.....और राजू अपना लंड हीलाता रहता है!!
राजू भले ही सुनीता को अभी तक चोद नही पाया था......लेकीन उसे सुनीता की गांड और चुचीयां दबाने में बहुत मजा आया......वो अपने सनद मे लेटा था....
'तभी रमती बाहर से आते हुइ दीखाई दी.....रमती बाहर से सीधा ओसार में आकर खाट पर बैठ जाती है......! रमती को देखते ही राजू के अँदर एक हलचल सी पैदा होने लगती है!!
राजू ने रमती को देखते हुए थोड़ा मजा लेना चाहा , तो उसने बोला-
राजू - अरे मेरी धन्नो.....आज कल बहुत खुजली हो..... रही है!!
राजू की बात सुनकर , रमती ने गुस्से में एक नज़र राजू की तरफ देखा .....लेकीन कुछ बोली नही!! एक बार के लीये तो राजू की गांड फट गयी थी.....लेकीन जब रमती कुछ बोली नही तो वो कुछ सोचने लगा-
राजू (मन में) - इस साली को कीतना भी बोलू.....कुछ नही कहेगी , और कीसी से नही कहेगी......और ये कुछ बताती भी है कीसी से तो इसका कोयी भरोसा भी तो नही करेगा......क्यूकीं मां जानती है की ये बहुत चुगलीखोर औरत है.....तब इसे और गंदा बोलना चाहीये.......मजा आयेगा......ये बुर तो चुदवायेगी नही साली पता है!!
......रमती खाट पर बैठी - बैठी , वो अपना पैर राजू की तरफ करके लेट जाती है....और अपने दोनो पैर मोड़ लेती है!!
राजू सनद में लेटा , रमती को जब देखा की वो अपने पैर मोड़ कर लेटी है और उसके घुटने तक उसकी साड़ी चढ़ी थी .....और उसके घुटने पर चढ़ी दोनो टागें फैला कर रखने की वजह से उसके बुर का नज़ारा देखा जा सकता है .....साड़ीयो के अंदर से!!
राजू तो मस्त हो जाता है.....उससे रहा नही गया, रमती की बुर देखने की इच्छा से पागल हो कर , वो जैसे ही खाट पर से उठा ......रमती ने अपने दोनो घुटने चीपका लीये.....जीससे बुर देखने वाला दरवाजा बंद हो गया !
राजू मनमान कर फीर खाट पर लेट जाता है....और जैसे ही वो लेटता है, रमती अपने घुटने फीर खोल देती है!!
राजू फीर उठा.....लेकीन रमती फीर अपने घुटने चीपका लेती.....ऐसा तीन चार बार हुआ , राजू खाट पर लेटे हुए सोचा की .....चाची ने तो अपना मुह साड़ीयोँ से ढ़का है.....तो इसका मतलब उसे साड़ी के अँदर से हल्का - हल्का दीख रहा है.....ये बात है। जब मै उठता हू तब उसे दीख जाता जीसकी वज़ह से वो अपने घुटने बंद कर लेती है!!
राजू कुछ देर लेटा रहा.......फीर उसके दीमाग में आयडीया आया......
वो झट से खाट पर से उठ कर खड़ा हो गया.....उसके उठते ही , रमती ने अपने घुटने चीपका लीये.......ये देख कर राजू मुस्कुराया और सोचा , मेरी धन्नो मुह पर साड़ी डाल कर तू सब देख रही है......और तू सोच रही है की , मुझे लग रहा है की तू कुछ नही देख रही है......ठीक है धन्नो अब देख मैं कैसे मजा लेता हूं!!
राजू खड़े - खडे अपने गमछे के उपर से अपना लंड मसलने लगता है.....उसे पता था की उसकी चाची सब देख रही है उसे साड़ी के अंदर से झलक रहा है......ये सोचते ही की वो चाची के सामने अपना लंड मसल रहा है.....और उसकी चाची देख रही है तो , उसका लंड फनफना कर खड़ा हो गया.....
राजू ने अपना गमछा नीकाल दीया .....अब वो सीर्फ चड्ढी पर था .....और उसका लंड उसकी चड्ढ़ी फाड़ कर बाहर नीकलने को तैरार था......
राजू ने चड्ढी के उपर से ही अपने लडं को सहलाते हुए , अपनी चाची की तरफ देखते हुए मुस्कुरा कर बोला--
राजू - मेरी धन्नो......देख अपना घोड़ां और ये कहते हुए उसने अपनी चड्ढी नीचे सरका दी.....
'राजू जो भी बोलता वो रमती सब सुन रही थी , और उसने मुह पर साड़ी डालकर ना दीखने का जो बहाना था वो भी राजू समझ गया था की इसे दीखाई दे रहा है.......
राजू के चड्ढी नीचे करते ही......उसका 9 इंच का लबां और मोटा लंड सर उठाये खड़ा था......॥ इतना मोटां और लंबा लंड देखकर जरुर रमती की सास अटक गयी होगी.....!
......लेकीन तभी राजू को कीसी के आने की आहट सुनायी पड़ी, उसने झट से अपना चड्ढी उपर कीया और गमछा लगा कर खाट पर लेट गया!!
उसके लेटते ही......आंचल रमती के पास आयी!
आंचल - मां......उठ , चल नहा ले......मै आगंन में पानी रख देती हूं!
.......इतना कहकर.....आचंल वंहा से चली जाती है!!
कुछ देर बाद रमती उठ कर खाट पर बैठ जाती है.......राजू उसे ही देख रहा था ! लेकीन रमती उसके तरफ नही देखती......
तभी आंचल पानी ले कर आती है और आगनं में रखकर बाहर चली जाती है.....
रमती भी उठकर , बगल वाले कमरे में चली जाती है , और अपना साया और साड़ी लेकर आगंन में नहाने चली जाती है......राजू भी कुछ सोचा और वो भी आँगन में आकर अपने आगन के बगल वाले कमरे में घुस जाता है!!
रमती ने राजू को कमरे में जाते हुए देख कर कुछ सोचने लगी.....तभी आंचल वहा आ जाती है!!
आचंल - ये ले साबुन मां ......और जल्दी नहा , मुझे भूख लगी है!!
आचलं ने ऐसा इसलीये बोला क्यूकीं जब रमती आंगन में नहाती है.....तो आचंल को सनद में बैठना पड़ता है ताकी कोयी आगंन में आ ना पाये.......और कोयी मर्द खासकर , राजू या फीर उसके पापा आते भी तो आंचल पहले ही बोल देती की मां नहा रहा रही है!! लेकीन आचंल को कहा पता था की....राजू तो पहले ही आंगन के बगल वाले कमरे में घुस कर एक छोटे से झरोखे के पास तैयार बैठा है......ये बात तो रमती ही जानती थी!!
रमती - तू जा जाकर खाना खा ले......
आचंल - लेकीन मां कोयी आ गया तो......
रमती - कोयी नही आयेगा , मै सनद का दरवाजा बंद कर लूगीं!
रमती के मुहं से ये बात सुनकर तो......राजू के लंड ने झटके मारने लगे.....वो अंदर एक छोटे से झरोखे के पास बैठा आगंन के नजारे देख रहा था.......
आंचल के जाते ही.......रमती ने सनद का दरवाजा बंद कर दीया.......और इधर राजू अपनी चाची को नंगी देखने के लीये बेहाल था!!
राजू ने कमरे के अंदर से धीरे से कहा-
राजू - चल मेरी धन्नो......नंगी हो जा!
राजू की आवाज , रमती के कानो में पड़ते ही.....रमती ने झरोखे की तरफ गुस्से में मुह बना कर बोली-
रमती - लाज , शरम सब धो के पी लीया है.....हरामी ने!
रमती के गुस्से वाली नज़र देखकर तो , राजू की फट गयी.....लेकीन फीर उसने सोचा जो होगा देखा जायेगा.....
राजू ने भी धीरे से कहा-
राजू - नाटक मत कर रंडी साली......जल्दी नंगी हो जा.......
रमती ने राजू की बात सुनके कुछ बोला तो नही .....लेकीन अपना मुह बनाये , अपनी साड़ी नीकाल कर बगल में रख देती है!!
रमती के उपर अब साया और ब्लाउज था.....उसके ब्लाउज में कसी बड़ी चुचीयां देखकर राजू की हालत खराब हो गयी.....उसे अपनी चाची को गंदी गंदी गालीया देने में बहुत मजा आता ......
रमती ने अपना ब्लाउज उतारा दीया.......
राजू उसकी बड़ी - बड़ी चुचीयां लाल रंग की ब्रा में देख कर पागल हो गया......उसका लंड फुफकारने लगा....
राजू - उफ......सली, क्या मस्त चुचीयां है.....
रमती गुस्से में अपने ब्रा भी उतार देती है.....उसकी बड़ी - बड़ी चुचीयां.....आजाद हो जाती है......इतनी मस्त और बड़ी चुचीया राजू ने आज तक नही देखी थी.....राजू को पसीने आने लगे....उसने अपना लंड हाथ में लीया और उसे आगे पीछे करते हुए नज़ारा देखने लगा!
रमती अब अपने उपर पानी डालकर नहाने लगी......वो अपनी चुचीयों में रगड़ - रगड़ कर साबुन लगाती , जीसे देख कर राजू बेकाबू हो जाता और लंड जोर - जोर से हीलाता!
रमती को उस अवस्था में देखकर तो कोयी भी पागल हो जाता.....रमती ने साबुन लगाते हुई खड़ी हुई और अपने पेटी कोट का नाड़ा खोल दीया.......
पेटीकोट सरक कर नीचे गीर गयी.......राजू की आंखे फटी की फटी रह गयी.....इतनी मोटी और बड़ी गांड लाल रग की चड्ढी में क्या मस्त लग रही थी.......राजू के तो होश ही उड़ गये .....वो अपना लंड और जोर से हीलाते हुए बोला-
राजू - साली मजा आ गया......क्या गांड है रे !! इस चड्ढी को भी उतार साली-
राजू की बात सुनकर......रमती गुस्से में बोली हरामी अपनी हद मत पार कर......इतनी गंदी - गंदी गालीया कब से दे रहा है.....शरम नही आ रही तूझे!
राजू - शरमाउगां तो तूझे चोदूगां कैसे?
रमती अपने उपर पानी डालते हुए बोली-
रमती - चोदने का सपना देख रहा है तू.....सपना ही रहेगा!!
राजू - तूझे तो कुतीया बना कर चोदूगां.....!
रमती - छी......बद्तमीज......
इतना कहकर रमती वहां से चली जाती है.....और राजू अपना लंड हीलाता रहता है!!