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Adultery छुटकी - होली दीदी की ससुराल में

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komaalrani

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छुटकी - होली दीदी की ससुराल में

भाग 219 -- बुच्ची और लीला -दोनों ने लीला, ----खेला चोर सिपाही का पृष्ठ १२४३

मेगा अपडेट, १२ हजार से अधिक शब्द, पोस्टेड

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Shetan

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मीना -रीना
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"तुम सब खाली चकर-चकर बतिया रही हो! अरे, शादी-ब्याह का घर है, कुछ नाच-वाच ना होई? अरे, दूल्हे की दर्जन भर बहनें बैठी हैं, ? चलो, बाँधो पैर में घुँघरू!"

कल की बुच्ची और चुनिया के नाच की आज दिन भर तारीफ़ हुई थी।


लेकिन एक तो बुच्ची को इतना कसकर, रगड़कर और निहुराकर सूरजु ने चोदा था कि उसकी टाँगें मुश्किल से ज़मीन पर पड़ रही थीं।

फिर मीना और रीना ने पहले ही कह दिया था कि आज वे डांस करेंगी। भैया की शादी में डांस के लिए वे दोनों बम्बई-लखनऊ से पूरी तैयारी करके आई थीं, और मीना ने तो बकायदा डांस का कोर्स भी कर रखा था।

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लेकिन पूनम दीदी ने साफ़ बोल दिया,

"मीना यार, फ़िल्मी गानों पे गाँव की शादी में डांस नहीं होता। यहाँ तो जितनी खुलकर मस्ती हो, उतना ही मज़ा है।"

मीना के सामने ही उसकी माँ, सुशीला चाची ने अपनी ननद कान्ति बुआ के पेटीकोट का नाड़ा खोला नहीं, बल्कि तोड़ दिया था और हाथ डालकर सीधे उनकी बिलिया पे हल्दी लगाई थी। तो समझ तो वह भी गई थी।

वैसे भी, शादी-ब्याह के घर में ऐसी कच्ची कलियों को सिखाने वाले बहुत होते हैं, और गाँव में रसीली भाभियों की कोई कमी नहीं थी।

मीना अभी कुछ दिन पहले ही दर्जा नौ में गई थी। चेहरा इतना भोला कि लगे अभी दूध के दाँत भी नहीं टूटे होंगे; खूब गोरा रंग, लेकिन लंबाई में अपनी क्लास की लड़कियों से पूरे दो इंच बड़ी—पूरी ५ फीट ३ इंच की! उभारों के मामले में भी वह अपनी सहेलियों से दो नंबर आगे थी—एकदम टेनिस की गेंदें, कड़ी-कड़ी! और खूब पतली कमर पर वह जोबन बेहद ज़बरदस्त और उभारदार लगता था। उस पर उसका टॉप भी एकदम टाइट और छोटा था, जिससे उसकी गोरी और खूब गहरी नाभि साफ़ दिखती थी।

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गाँव की भौजाइयां खूब खेली-खाई थीं, चाल देखकर लच्छन बता दें। सो, उसकी गहरी नाभि देखकर उन्होंने पक्का फ़ैसला दे दिया—

ननद रानी की बुर भी बहुत गहरी होगी, और एक बार बस दुकान खुल जाए तो फिर शटर डाउन नहीं होगा!’


लेकिन दुकान अभी खुली नहीं थी, माल एकदम सील-पैक था, यह भी सबने टटोलकर पता कर लिया था। बड़ी उम्र की औरतें भी उसे देख-देखकर रसीली हो रही थीं, क्योंकि इस उम्र की लड़कियों से चुसवाने-चटवाने का मज़ा ही कुछ और होता है।

मीना को यह गाना आज ही उनके पड़ोस की एक भाभी ने सिखाया था। मीना ने फ़र्श पर पड़ा एक दुपट्टा उठाया, उसका घूँघट बनाया और अपनी आने वाली भाभी की एक्टिंग करते हुए शुरू हो गई। ढोलक पर बुच्ची थी, साथ में रमा चम्मच से ढोलक की थाप काट रही थी।


गाने में रीना, चुनिया, रंजीता के साथ गाँव की भाभियाँ भी ज़ोर-ज़ोर से सुर मिलाने लगीं:

"तेरे भैया ने मसल डाली कली ये गुलाब की, खोल डाली बंद थी जो बोतल शराब की,

तेरे भैया ने मसल डाली कली ये गुलाब की, खोल डाली बंद थी जो बोतल शराब की।

ऐसा मसला है तेरे भैया ने मुझे, ऐसा मसला है तेरे भैया ने मुझे, बड़ा दरद मुझे, बड़ा दरद मुझे,
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ऐसा मसला है तेरे भैया ने मुझे, ऐसा मसला है तेरे भैया ने मुझे, बड़ा दरद मुझे, बड़ा दरद मुझे।

अरे ननद रानी, कल रात हुई बड़ी मुश्किल, अरे ननद रानी, कल रात हुई बड़ी मुश्किल!

पहले-पहले चोली खोली, चूस गया नारंगी हमारी, अरे चूस गया नारंगी हमारी, नारंगी हमारी!

लहंगे में फिर हाथ डाला धीरे से हमारे, धीरे से हमारे, धीरे से हमारे..."


और डांस करते हुए मीना ने अपने टॉप से छलकते उभारों को सहलाया, हल्के से दबाया और स्कर्ट को थोड़ा सा सरकाकर दिखाया, तो महफ़िल में क्या ज़बरदस्त सीटियाँ बजीं!

शीतल मौसी तो एकदम पागल हो गईं और खुद भी उठकर साथ देने लगीं। सूरजु की मौसी पुरानी लेस्बो थीं और ख़ास तौर से ऐसी कच्ची कलियों की शौकीन थीं, सो उनकी बुलबुल अंदर ही अंदर फुदकने लगी।
और शीतल मौसी बैठी तो रीना, मीना की चचेरी बहन, पक्की दोस्त, चंदौली वाली की बेटी उठ खड़ी हुयी और उन दोनों टीनेजर्स ने क्या धमाल मचाया, लग रहा था नाच नाच के आज छत तोड़ देंगी, कभी एक दूसरे से चिपक जातीं, जैसे दुलहा दुल्हन पहली रात में चिपके हों तो कभी दूर हट के रीना अपने छोटे छोटे जुबना मटका के ललचा के अपनी बहन को उकसाती जैसे पहली रात को आने वाली उनकी भाभी उनके भैया को तरसाती, दोनों डांस सीख भी रही थीं, और आज मिल के कई गाँव वाले गानों पे तैयारी भी की थी,
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सुधा भाभी ने मुंह में दो ऊँगली डाल के क्या जबरदस्त सीटी बजायी, आम के बगीचे को पार कर गयी होगी और ऊपर से बोलीं,

" जियो राजा बनारस, जियों मेरी छमिया, दालमंडी की सब पतुरिया मात "

मीना ने फिर अपनी आने वाली भाभी (सूरजु भैया की दर्जा दस में पढ़ने वाली दुलहिनिया) की एक्टिंग करते हुए चेहरे पर ढेर सारे दर्द के भाव लाए, एक ज़ोरदार चक्कर काटा और घुँघरू छनकाते हुए लाइन दुहराई:

"ऐसा मसला है तेरे भैया ने मुझे, ऐसा मसला है तेरे भैया ने मुझे, बड़ा दरद मुझे, बड़ा दरद मुझे..."

"अरे भौजी! मेरे भैया से मसलवाने के लिए ही तो तोहरे अम्मा-बाबू भेजे हैं। अब मसलवाना-रगड़वाना तो पड़ेगा ही!"

गाँव की एक लड़की सुनीता ज़ोर से बोली,


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तो सब ननदों ने आसमान सिर पर उठा लिया। लेकिन रमा ने गाने की अगली लाइन शुरू की और मीना ने फिर थिरकना शुरू किया:

"...लहंगे में फिर हाथ डाला धीरे से हमारे, धीरे से हमारे, धीरे से हमारे।

ननदी, मैंने उसे रोका कर के बहाना, कुण्डी तो लगा दे सैंया, ज़रा रुक जाना, ज़रा रुक जाना!

चोली मेरी खोल डाली, चला न बहाना, लहंगा मेरा खींच लिया, निकला सयाना, निकला सयाना!

फिर उसी तरह से ननदी मुझे निचोड़ा, कस-कस के चलाया तेरे भैया ने अपना हथौड़ा, अरे अपना हथौड़ा!
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ऐसा मसला है तेरे भैया ने मुझे, ऐसा मसला है तेरे भैया ने मुझे, बड़ा दरद मुझे, बड़ा दरद मुझे..."


खूब हल्ला-हंगामा हुआ।रीना अब आकर अपनी मम्मी चंदौली वाली के पास बैठ गयीं, .



लेकिन अगला गाना शुरू होने के पहले उत्तर पट्टी की एक बहू अपनी ननद का नाच में साथ देने के लिए उठ खड़ी हुई।

उसने अबकी लड़के का भेष बनाया—एक गिरी हुई साड़ी उठाकर उसकी पगड़ी बाँध ली और मीना के साथ आ गई।

वह थीं चंदा भाभी। गाँव की सब लड़कियाँ उनसे काँपती थीं, क्योंकि हर रतजगे में, चाहे वह दूल्हा बनें या दुल्हन, ननदों को बिना अच्छी तरह नँगा किए और निसुती नचाए छोड़ती नहीं थीं। जितना रात में मर्द नई दुल्हनों को रगड़ते थे, उससे ज़्यादा वे दुल्हनें और भाभियाँ उन मर्दों की बहनों (अपनी ननदों) को रगड़कर हिसाब बराबर कर लेती थीं; और उनमें सबसे आगे थीं चंदा भौजी!

गाना एक बार फिर रमा ने शुरू किया, लेकिन साथ में अबकी मँजू भाभी और रामपुर वाली भी थीं।

सीन वही था—आने वाली सूरजु की दुलहिनिया की पहली रात का। मीना नई नवेली भाभी का रोल कर रही थी और चंदा भौजी मर्द का।

गाना शुरू हुआ:

"धीरे-धीरे डालो राजा, तेल लगाय ले, धीरे-धीरे डालो राजा, तेल लगाय ले।

मेरी तो राजा छोटी सी डिबिया, छोटी सी डिबिया, इतना मत जोर लगा, राजा टूट जाएगी खटिया..."
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मीना मस्त डांस कर रही थी—कभी अपने छोटे से जोबन को उभारती, तो कभी कमर के धक्के लगाती, तो कभी स्कर्ट को पकड़कर कसके गोल चक्कर काटती। साथ में मर्द बनी चंदा भाभी भी पूरे रंग में थीं।मीना का भी टॉप खुला, और चंदा भाभी ने खुद अपनी चोली उतार के फेंक दी, देवर का बियाह जब तक निसुती हो कर खुली छत पर न नाचे, नंदों को नंगी न करे तो कौन देवर के बियाह क मस्ती, और एकदम पहली रात का मर्दों का एक्शन चंदा भाभी कर रही थीं मीना को चिपका के चंदा भाभी वो धक्के मार रही थी, कभी टाँगे अपनी ननद की लपेट लेती, कभी फैला देतीं, क्या सूरजु रगड़ेंगे पहली रात को अपनी दुलहिनिया को , जितना मर्द बनी चंदा भाभी, दुल्हिन बनी मीना को रगड़ रही थीं।


भरौटी की एक भौजाई ने चंदा भाभी से कहा, "अरे चंदा, ज़रा ननद की डिबिया तो दिखा दो!"

बस, एक हाथ से कसकर चंदा ने मीना की पतली कमरिया पकड़ी और इससे पहले कि वह कुँवारी शहरी ननद कुछ समझ पाती, चंदा ने उसकी स्कर्ट सीधे कमर तक उठा दी!

वहाँ बैठी खेली-खाई औरतों की धड़कन एक पल के लिए थम गई।

क्या मस्त डिबिया थी! एकदम सीलबंद, लेकिन पावरोटी की तरह फूली हुई। और साफ़ दिख रहा था कि झाँटें आज ही साफ़ की गई थीं—एक रोयाँ भी नहीं था। दोनों फाँकें एकदम ऐसे चिपकी थीं जैसे लाख ज़ोर लगा लो, अलग होने वाली नहीं हैं।


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चंदा समझदार और दमदार भौजाई थी; उसने असल देहाती दाँव मारते हुए पहले ही ननद की दोनों टाँगों के बीच अपनी टाँग डाल दी और उन्हें फैला दिया, जिससे वह लाख कोशिश करके भी अपनी जाँघें चिपका न पाए और सब लोग अच्छी तरह से उस बिन-चुदी चूत का नज़ारा ले सकें।

अहिराने की किसी भौजाई ने महुआ वाले पाउच की देसी दारू चंदा भाभी की हथेली में उड़ेल दी, और चंदा ने सबको दिखाते हुए धीरे-धीरे उस कच्ची अमिया की कली पर वह महुए वाली मसलनी शुरू कर दी।

"अरे, अंदर पेल!" सब भाभियाँ एक साथ चिल्लाने लगीं।

"आज सब ननदें चोदी जाएँगी! रोज़ इन सबके भाई हमें चढ़ाते हैं, तो आज हम सब चढ़ेंगी!" मँजू भाभी ज़ोर से बोलीं।

मुश्किल से दोनों फाँकें खुलीं, लेकिन चंदा भाभी की लाख कोशिश के बाद भी एक पोर मुश्किल से अंदर घुसा, और मीना की चीख और सिसकी एक साथ फूट पड़ी।

चार-पाँच मिनट की इस भयंकर मस्ती के बाद गाना फिर शुरू हुआ। स्कर्ट ने डिबिया को वापस ढँक लिया, लेकिन अब तो सबने उसे देख ही लिया था। मीना ने फिर से डांस शुरू किया और रमा ज़ोर-ज़ोर से ढोलक बजाने लगी:

"दोनों टाँगें मेरी राजा ऊपर उठाय ले, गोदी में लेके पूरा अंदर घुसाय दे, पूरा अंदर घुसाय दे।


जाँघों के बीच मेरा टपके पसीना, जाँघों के बीच मेरा टपके पसीना, दर्द से मेरा धड़के है सीना।

हौले-हौले कर ले राजा, तू अंदर घुसाई दे, धीरे-धीरे राजा तू पूरा अंदर धँसाय दे। धीरे-धीरे डालो राजा, तेल लगाय ले, धीरे-धीरे डालो राजा, तेल लगाय ले..."


भाभियों ने ज़ोरदार हंगामा काटा। अब ढोलक पूरी तरह से भाभियों के कब्ज़े में पहुँच चुकी थी और एक से बढ़कर एक गालियाँ ननदों का नाम ले-लेकर गाई जाने लगीं, यहाँ तक कि सास को भी नहीं छोड़ा जा रहा था!
हर बार तो बुची फस्ती है. पर इस बार नई तितली. कैसे उसे डांस के लिए माना लिया. और पहनवा दिए घुघरु. अरे मुजरा करवाओगी क्या. मज़ा आ गया. वो गाना पहले से एक सिख के आई थी. और गाने के जरिये बिना ब्याहे कौन कौन भतार बनेगा समझा दिआ. लास्ट तक तो बेचारी की डिबिया तक हाथ भी पहोचवा दिया.

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तितलियों के तो किस्से आते रहेंगे. कोई ठकुराइन का भी सीन बनाओ. वहा ब्याह मे मौसा फूफा बहोत लोग आए होंगे.

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Aaa
 
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komaalrani

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वाह कोमलजी वाह. शिला साली बड़ी जबरदस्त चालक है. पहले तो बुची का दर्द बाटा. उसकी चुत के सेकाई सेवा पानी की. और फिर ऑफर रख दिया की उसके पांच दिन वाली छुट्टी है तो तब तक उसके यारो को बुची संभाल ले. बुची भी नखड़ा कर रही थी. पर मेले वाला किस्सा याद करते ललचा रही थी. बुची ने भी सब खुद ही कबूला की शिला के यार कैसे बुची पर डोरे डाल रहे थे. मुन्ना सुनील सब. सुनील तो ज्यादा ही ललचा रहा था. शिला ने तो वादा किया की खुद भी साथ खड़ी रहेगी. बुची का भी तो मन हो रहा है. पर नाटक कर रही है. अरे छिनार बन ही गई है. तो क्या नाटक. एक साथ सब का लेगी. गचक के.....

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आपकी एक एक लाइन एक एक पिक्स अद्भुत होती हैं

आप आ गयीं है तो उम्मीद है बाकी पुराने मित्र पाठक भी वापस आएंगे और यह कहानी फिर रफ्तार पकड़ सकेगी, बिना कमेंट के कहानी लिखना सूने हाल में बांसुरी बजाने सा लगता है।


बहुत बहुत आभार, धन्यवाद।
 
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ilaa

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कोमल जी,

कोमल जी एक ही दिल है,
कितनी बार आप को दे,

आपके प्रत्येक शब्द दिल कोएकदम तार तार कर देते हैं ।
दिल में एक गुदगुदी, काम रस से पूर्ण।
आप के लेखन कला का कोई जवाब नहीं है ,
आपकी तारीफ करना मतलब सूरज को दीपक दिखाना। आपकी तारीफ के लिए शब्द कम पड़ जाते हैं ।
हम आपके लेखन कला में जादू है, जो हर बार एक अलग रूप में प्रदर्शित होती है।
हम सोचते हैं ,अब इसके बाद क्या ?
लेकिन आप हर बार एक नया कीर्तिमान स्थापित करते हैं। अपने ही कीर्तिमान को ध्वस्त करते हैं।
लेखन कला को नई उचाई तक ले जा रहे हैं, उसके लिए आप को कोटि कोटि नमन करते हैं।

हम सोचते हैं इसके बाद लेखक क्या लिखेगा, लेकिन फिर आप के लेखन कला का जादू चलता है, फिर एहसास होता नहीं" पिक्चर अभी बाकी है मेरे दोस्त"।
हर अपडेट ,हर एक पोस्ट ,एक अलग ही दिशा में लेकर जाता है। एक अलग ही एहसास होता है।
एक दूसरे से मिलकर भी यह दूसरे से जुड़ा रहते हैं।

अभी तो सूरज बाबू ने बुच्ची और लीला को ही लिया है ,अभी तो बहुत सारे कारनामे बाकी है।
सूरज बाबू के भी और बुच्ची के भी।
शीला अभी इंतजार कर रही हैं बुच्ची की लेने वालो की गिनती बढ़ाने में


अगले अपडेट का इंतजार


देर से comment देने के लिए क्षमा प्रार्थी हैं।

आप का बहुत बहुत धन्यवाद

आपकी लेखनी सदा हमारा मनोरंजन करती रहे । आप को और आपके परिवार को सुरक्षित रखें ,स्वस्थ रखें ईश्वर से यही कामना है।
 
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ilaa

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कोमल जी,

कोमल जी एक ही दिल है,
कितनी बार आप को दे,

आपके प्रत्येक शब्द दिल को एकदम तार तार कर देते हैं ।
दिल में एक गुदगुदी, काम रस से पूर्ण।
आप के लेखन कला का कोई जवाब नहीं है ,
आपकी तारीफ करना मतलब सूरज को दीपक दिखाना। आपकी तारीफ के लिए शब्द कम पड़ जाते हैं ।
हम आपके लेखन कला में जादू है, जो हर बार एक अलग रूप में प्रदर्शित होती है।
हम सोचते हैं ,अब इसके बाद क्या ?
लेकिन आप हर बार एक नया कीर्तिमान स्थापित करते हैं। अपने ही कीर्तिमान को ध्वस्त करते हैं।
लेखन कला को नई उचाई तक ले जा रहे हैं, उसके लिए आप को कोटि कोटि नमन करते हैं।

हम सोचते हैं इसके बाद लेखक क्या लिखेगा, लेकिन फिर आप के लेखन कला का जादू चलता है, फिर एहसास होता नहीं" पिक्चर अभी बाकी है मेरे दोस्त"।
हर अपडेट ,हर एक पोस्ट ,एक अलग ही दिशा में लेकर जाता है। एक अलग ही एहसास होता है।
एक दूसरे से मिलकर भी यह दूसरे से जुड़ा रहते हैं।

अभी तो सूरज बाबू ने बुच्ची और लीला को ही लिया है ,अभी तो बहुत सारे कारनामे बाकी है।
सूरज बाबू के भी और बुच्ची के भी।
शीला अभी इंतजार कर रही हैं बुच्ची की लेने वालो की गिनती बढ़ाने में


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देर से comment देने के लिए क्षमा प्रार्थी हैं।

आप का बहुत बहुत धन्यवाद

आपकी लेखनी सदा हमारा मनोरंजन करती रहे । आप को और आपके परिवार को सुरक्षित रखें ,स्वस्थ रखें ईश्वर से यही कामना है।
 
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भाग 219 -- बुच्ची और लीला -दोनों ने लीला
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खेला चोर सिपाही का

३३,७४, ३६६
इमरतिया ने बोला था कि मटमंगरा में सब औरतें, लड़कियाँ सिर्फ साड़ी-ब्लाउज़ पहनकर आएंगी।

अब शहर वाली तो सब टॉप-स्कर्ट में थीं, और गाँव में भी आधी लड़कियाँ या तो फ्रॉक या शलवार-कुरता पहनती थीं, तो साड़ी-ब्लाउज़ कैसे?

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रमा, शीतल मौसी की लड़की, जो बम्बई से आयी थी और अंग्रेजी स्कूल में इंटर में पढ़ती थी, स्कर्ट-टॉप, तरह-तरह के ड्रेस और एक-दो शलवार-कुर्ती लायी थी, वही सबसे पहले चिल्लाई,


"अरे, साड़ी तो चलिए मम्मी, मौसी, मामी, भाभी किसी की ले लेंगे, लेकिन ब्लाउज़, वो भी मेरे नाप का कहाँ से मिलेगा?"



"अरे तो मत पहनना ब्लाउज़, बिन्नो, मेरे देवरों का भला हो जाएगा," मंजू भाभी ने अपनी ननद को चिढ़ाया।

"और तेरे भाइयों के साथ तेरी भाभी के भाइयों का भी; बस साड़ी उठायी, झलक दिखला दी, लौंडों को भी आराम। आँचल हटाया, मसल दिया।"

रामपुर वाली को तो हरदम अपने भाइयों के फायदे की चिंता रहती थी—गप्पू और उसके दोस्तों की, तो वो और जोर से खुश होकर बोलीं।

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लेकिन बड़ी ठकुराइन ने मामला सुलझा दिया, और बहुओं को डांटके बोलीं,

"तुम सब ना मेरी प्यारी-प्या प्यारी बेटियों को चिढ़ा रही हो। तुम सब अपने मायके में उघारे घूमती होगी? अरे, कल से दरजी लगेंगे, दुल्हन के और बाकी लोगों के कपड़े सिलने आएँगी दर्जिने, तो तुम सब भी अपने-अपने ब्लाउज़ सिलवा लेना, एकदम लेटेस्ट फैशन का, अपनी-अपनी नाप के कम से कम तीन-चार।"

लेकिन भाभियों का चिढ़ाना कम नहीं हो रहा था,


"अरे, दरजी का लड़का तो हमारी ननद का यार है। उसको जोबन का उभार, नाप सब याद है, बिना नाप लिए बना देगा। हाँ-हाँ, चूँची के लिए सिलवाई में गुलाबो ले लेगा ।"



और उसी झांय-झांय के बीच पीछे की ओर से पता नहीं कहाँ से एक पुलिस का दरोगा पूरी वर्दी में, मोटा तेल पिलाया डंडा लेकर और साथ में दो-तीन कांस्टेबल आ गए और जोर से बोले,

"हमको चोरी की रपट मिली है। बड़े महंगे गहने चोरी हुए हैं और खबर है कि चोर सब यहीं छिपे हैं। सब की तलाशी होगी।"

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सब औरतें-लड़कियाँ दुबककर बैठ गईं एक-दूसरे से चिपककर। जो लड़कियाँ गाँव में रतजगा देख चुकी थीं, उन्हें तो अंदाज था, लेकिन जो शहर से आयीं थीं, उन्हें कुछ समझ में नहीं आ रहा था।

रीना दुलारी से चिपकके बैठी थी, सुधा भाभी कहीं निकल गयी थीं।

दरोगा गाली देकर बात कर रहा था, और बार-बार अपने हाथ का डंडा घुमाता, सबको हड़काता,

"जो चोर हो कबूल कर ले, वरना सबकी नंगा झोरी होगी। और जिसके पास से गहने पकड़े जाएंगे, जेल तो बाद में जाएगा, यहीं मार-मारके चूतड़ लाल कर दूंगा।"

उसके पुलिस वाले भी साथ-साथ घूम रहे थे—कभी किसी औरत को पकड़के उठा देते, उसके ब्लाउज़ में हाथ डाल देते और फिर बोलते,

"नहीं, कुछ नहीं मिला, ये सब छिनार जबरदस्त चोर हैं।"



तब तक एक कांस्टेबल की निगाह रीना पर पड़ी जो एकदम दुबकी दुलारी के पीछे छिपी थी, और उस कांस्टेबल ने कसके कलाई पकड़कर एक झटके में खड़ा किया।
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रीना सहमके खड़ी हो गयी, सर झुकाये, पैरों से जमीन खुरचते हुए। दरोगा ने उसकी ठुड्डी पकड़कर सर ऊपर किया और एक कांस्टेबल ने टॉर्च से उसके चेहरे पे रौशनी डाली और बोला,

"साहब, यही लगती है, यही बताया था। चेहरे से चुदवासी और छिनार लगती है और खूब गोरी है, जबरदस्त नमक है।"

"बोल साली, माल कहाँ रखा है? साली, गाँड़ में भी रखा होगा तो ये डंडा डालकर निकाल लूंगा, दे दे सीधे से," दरोगा ने हड़काया और एक सिपाही से बोला,

"अबे, ये छिनार ऐसे नहीं बोलेगी। इसके टॉप में हाथ डालकर देख, ये सब चोरनी बड़ी-बड़ी चूँची के बीच में ही सब रखती हैं।"



और एक सिपाही ने टॉप के अंदर हाथ डाल दिया, और मन भरकर जोबन दबाए-मसले।


बाकी के दो सिपाहियों ने रीना के हाथ कसकर पकड़ रखे थे। और जिसने टॉप में हाथ डाला था, उस सिपाही ने हाथ बाहर निकाला तो उसके हाथ में एक अंगूठी थी, जो पहले उसने दरोगा को दिखाया, फिर सब औरतों को।

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दरोगा ने स्कर्ट उठाकर उसके चूतड़ पर एक हाथ कसकर मारा और गरजा, "बोल, कितनों से चुदी है?"

"नहीं, नहीं, किसी से नहीं," रीना ने कबूला।



"तो इतना चौड़ा भोंसड़ा कैसे हो गया कि चोरी का सब माल अपने भोंसड़े में रखा है?" दरोगा चीखा, "चल, टाँगे फैला।"

और दरोगा ने अपना हाथ उस अंग्रेजी स्कूल वाली लड़की की स्कर्ट में डाल दिया। कुछ देर जाँघें सहलाईं, और एक फिर झटके में रीना की चुनमुनिया दबोच लिया, और सोचा



" साला, बड़ी किस्मत वाला होगा जो इसकी बुर चोदेगा। कैसे फूली-फूली फांकें हैं, एकदम चिपकी, कसी; साली लौंडे को दबोच लेगी।

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बड़की ठकुराइन सही कह रही थी, जब खुले खेत में इसे अहिराने वाले रगड़ेंगे ना और इसके चूतड़ से रगड़-रगड़कर ढेले टूटेंगे, तब इसकी चूत का पानी निकलेगा और फिर ये लंड की दीवानी हो जायेगी, खुद लौंडों के पीछे-पीछे भागेगी।"

"ये देख, मैं कह रही थी ना तेरी चूत नहीं भोंसड़ा है, देख क्या निकला!"

सबकी आँखें फटी रह गईं—एक बड़ी सी चूड़ी, बल्कि चूड़ा। पूरे पौने तीन इंच का व्यास होगा।



"ये तो साली चार बच्चों की माँ के भी भोंसड़े में नहीं आता, जरूर तू नम्बरी चुदक्कड़ है," दरोगा ने हड़काया।



तब तक एक सिपाही बोल पड़ा, "अरे, इस साली ने अपनी गाँड़ में भी छुपाया होगा चोरी का माल।"

"निहुर साली!" दरोगा गरजा, और जबरदस्ती पकड़कर झुका दिया,
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और उस सिपाही ने स्कर्ट उठा दिया। गोरे-गोरे, गोल-गोल, खूब भरे हुए चूतड़ एकदम मस्त लग रहे थे, बीच का कसा छेद एकदम दुबदुबा रहा था। सब भाभियों की निगाहें कुँवारी ननद के चिकने चूतड़ों पर और एकदम टाइट गाँड़ पे अटकी थीं।

"बोल, और कौन था चोरी में तेरे साथ? और इतनी बड़ी चोरी तू अकेले तो कर नहीं सकती," दरोगा ने ललकारा और अपनी बेंत रीना के पिछवाड़े के छेद पर सटाकर गरजा,

"साली, तेरी गाँड़ को तेरे भोंसड़े से भी चौड़ा कर दूंगा। ये दरोगा का डंडा है, गाँड़ में से जाएगा और मुंह में से निकलेगा। बोल साली, कौन थी तेरे साथ?"

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अब अपनी ननद को बचाने दुलारी आगे आयी—वही जिसने लाइट जाने पर, सुलाकी के आने पर रीना का टॉप उतरवाकर सुधा भाभी के साथ खुलकर गुब्बारों का मजा लिया था, और दरोगा जी से बोली,

"हुजूर के गोड़ पड़ती हूँ, हमको मार लीजिए। ये हमारी ननद गऊ है गऊ। ये तो खराब संगत में पड़कर... और चोरनी के साथ, और सबसे बड़ा तो चोर का सरदार है, बहुत बड़ी-बड़ी चोरी करता है।"

और तब तक रीना समझ गयी थी कि ये सब भाभियों की बदमाशी है, क्योंकि बजाय घबराने के सब भाभियाँ मुस्करा रही थीं; और यहाँ तक कि उसकी मम्मी भी, उनके चेहरे पे भी कोई परेशानी नहीं थी।

और जिस तरह से उस पुलिस वाले ने मजे ले-लेकर रीना के उभार दबाये थे, वो छुअन रीना पहचान गयी थी—सुधा भाभी, जिन्होंने बत्ती जाने पर भी दुलारी के साथ खुलकर उसका जोबन मर्दन किया था।

जब जबरदस्ती दरोगा ने रीना को पकड़कर झुकाया, तो रीना ने दरोगा के पैरों में लगे सुहागिन औरतों वाले महावर को देख लिया और पायल भी चौड़ी सी, और बाकी पुलिस वाले भी उसी तरह थे; और उसने अंदाज लगा लिया था कि रमुआ बहू दरोगा बनी है।

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"अरे बता दो ना, नहीं तो दरोगा साहेब बहुत सख्त हैं, अपनी बहन-मह्तारी भी नहीं छोड़ते, तुम्हारे भैया की तरह,

" दुलारी ने झुकी हुई रीना को समझाया और पकड़कर खड़ा कर दिया।



"जो दरोगा जी मेरे साथ थीं, वो मीना थी और लीला और वो जो देखने में छोटी है लेकिन सेंध उसी ने लगाई थी—इमली।"

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रीना भी अब ऐक्टिंग कर रही थी और अपनी उम्र वाली सब लड़कियों को उसने लपेट लिया, "और असली सरदार वो हैं," दुलारी ने दूल्हे की माँ की ओर इशारा किया।



लेकिन दरोगा के मन में कुछ और चल रहा था, रीना से उसने पूछा,


"साली, अगर तू चुदी नहीं है, तो इतनी मोटी चूड़ी तेरे भोंसड़े से कैसे निकली?"

पुलिस कांस्टेबल बनी सुधा भाभी ने एक हाथ रीना के चूतड़ पे दिया और हड़काया, "चल बता सब लौंडों के नाम जो आजकल घर में हैं, जिनको झुक-झुककर जोबना दिखा-दिखाकर खिला रही थी।"

और रीना ने सब नाम एक साथ सुना दिए—"गप्पू भैया, बिट्टू भैया, रवि भैया, नंदू भैया, चंदू भैया..." पूरे दर्जन भर लड़कों का नाम रीनू ने सुना दिया।
"साली, एक-एक लड़के का नाम मालूम है और लंड का तुझे अकाल पड़ा है! चल बोल, किसका-किसका लंड घोंटेगी?"

दुलारी ने कान में बोला, "जल्दी से हाँ बोल दे, वरना और रगड़ाई होगी।"

रीना ने बोला, लेकिन कांस्टेबल ने एक-एक लड़के का नाम ले-लेकर रीना से कहलवाया और तीन-तीन बार जोर से।

और उसके बाद हमला दूल्हे की माँ पर हुआ।

और क्या न हुआ, दूल्हे की महतारी के साथ।
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तलाशी के नाम पर दरोगा बनी रमुआ बहू ने दूल्हे की माई की बुरिया में पूरी तीन ऊँगली घुसाई और सब भौजाई कने लगी, " अरे जब तीन तीन ऊँगली बिना तेल के जा रहा था तो हमरे देवर क लौंड़ा लेने में सासु जी काहें इतना छिनरपन कर रही हो "

" बोलो लेगी दूल्हे का गपागप, वरना पूरी मुट्ठी पेलूँगी अभी कोहनी तक ," रमुआ बहू बोली।

" अरे पेल दो, ....बचपन क छिनार हैं हमार ननद " बड़ी मामी बोलीं।


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अब दरोगा और सिपाहियों के बाकी औरतें लड़कियां भी आ गयी थी, दोनों सिपाहियों ने पकड़ के दूल्हे की माँ की टांग फैला रही थी।


मंजू भाभी साथ में अपनी ननदो, मीना, रूपा , रमा को लेकर बैठीं जो पहली बार ये सब देख रही थीं, मंजू भाभी और रामपुर वाली दोनों एक साथ अपनी सास से बोलीं

" अरे मान जाइये न, हमार देवर बहुत अच्छा है, बहुत प्यार से ठेलेगा, मजा आ जाएगा "

" अरे भौजी, माना पचासों मरद का घोंटा होगा, गदहा घोडा कुल लिया होगा लेकिन एक बार मेरे भतीजे का ले लीजिये न अंदर, सब को भूल जायेगीं "

चिढ़ाते, उकसाते नीतू ननद बोली जो सूरजु से मुश्किल से डेढ़ दो साल बड़ी थी और जिसके मरद का आज खूब मजे लेकर बड़की ठकुराईन ने दो बार घोंटा था

पूरे दस बार बड़की ठकुराइन से सब उनकी बहुओं, ननदों, भाभियों ने कबुलवाया तब जाकर मुन्ना बहू ने उँगलियाँ बाहर निकाली,



उसके बाद तो चार पांच स्वांग और हुए, फुलवा पर भूत चढ़ा और उसी के बहाने जितनी कुँवारी ननदियाँ चाहे गाँव की हो या शहर की सब की खुल के उस ने रगड़ाई की,

शीतल मौसी धोबन बन के आयी और वो तो खुल के आज मीना के पीछे पड़ी थी, पूनम और चननिया भी चुड़िहारिन और बिसाती बन के आयीं और भाभियों के साथ खूब मस्ती की।



आज तय हुआ था की गाना जल्दी खत्म हो, रात में ' और भी बहुत से काम ' थे लेकिन तब भी एक बज गया, धीरे धीरे सब लोग छत से उतर कर चले गए, आज इमरतिया के घर पर भी कुछ काम था तो वो भी चली गयी , मंजू भाभी, मुन्ना बहू और पूनम कोहबर की ओर चले गए, उसके पहले मंजू भाभी ने दूल्हे के कमरे का ताला खोल दिया था, छत के एक कोने पे लीला से बुच्ची कुछ खुसुर फुसुर कर रही थी और लीला खिलखिला रही थी, और सर हिला के हाँ हाँ का इशारा कर रही थी।



सूरजु की माई ने हल्के से खुले दरवाजे से अपने बेटे को देखा और उसकी छाती गज भर हो गई।

लेकिन वो जोर से मुस्करायीं,


" स्साला, इसकी बुआ को गदहे से चुदवाउ, हमी से नौटंकी।"
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Ab ratjaga karne ki baari Suraj ki. Jab tk subah ka suraj nhi ayega, yeh suraj apne kaam par lag jayega
 

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सुरजू

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सुरजू पूरी तरह से चादर ओढ़े थे, हलके हलके खर्राटे की आवाज ले रहे थे। और खूंटा हाथ भर का खड़ा था, खूब मोटा सा, जैसे तम्बू में बम्बू लगा हो। पर वह समझ गई कि उनका बेटा एकदम जाग गया है और सोने की नौटंकी कर रहा है। उसने कभी खर्राटे नहीं लिया और जैसे वो खूंटा पागल हो रहा था, वो समझ गयी वो चोदने के लिए पागल हो रहा था।



बस सूरज की माई को यही नहीं पता था कि ये खूंटा इतना जबरदस्त क्यों खड़ा है।



सूरजु ने आज जो इमरतिया ने खिड़की में छेद किये थे उससे आज भी सब नाच गाना देखा, एक से एक कच्ची अमिया के कपडे उतरते देखे, और मन तो उसका सबका लेने का कर रहा था, चाहे बहिन हो चाहे भौजाई,

लेकिन सबसे ज्यादा हालत तब खराब हुयी जब पुलिस वाले स्वांग में सुधा भाभी और फुलवा ने माई की दोनों टाँगे फैलाई


और वो छेद दिखा,जिसमे से वो निकले थे, उनकी माई की बुर

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क्या चिकनी मांसल जाँघे, गोरी गोरी और उसके बीच पावरोटी सी फूली मस्त बुर,
आज खेल तमाशे में किसकी किसकी बुर उन्होंने नहीं देखी, एकदम साफ़ साफ़, चोर सिपाही वाले खेला में तो रीना और मीना के साथ लीला की, एकदम कसी बिन चुदी, ठीक से झांटे भी नहीं आयी थीं, दोनों फांके एकदम भींच के बंद थी, लीला की, फिर पूनम और गाँव की लड़कियों ने मंजू भाभी और रामपुर वाली की भी टाँगे पकड़ के खुलवायीं,सुशीला चाची ने कांती बूआ की, लेकिन जब सुधा भाभी और रमुआ बहू ने कस कर माँ की टाँगे फैलाई,

सूरजु का कलेजा मुंह को आगया, मस्ती से एकदम पागल, क्या चीज थी, एकदम मक्खन, बस उन का मन मचल गया, बस एक बार मिल जाए
, सूरजु का बस यही मन हो रहा था, कुछ हो,… ये छेद मिल जाए, एक बार मिल जाए ,

लंड एकदम तूफ़ान हो गया था, लोहे का रॉड और रौशनी में सब एकदम साफ़ दिख रहा था , सीने की धड़कन तेज हो गयी थी
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और जब सूरज की भाभियों ने, और सूरज की माई की भाभियों ने सूरज की माई से कबूल करवाया की सूरज का लौंड़ा वो लेंगी, मारे खशी के सूरज से रहा नहीं जा रहा था,



एक से एक बड़े दंगल उसने जीते थे लेकिन ऐसी ख़ुशी उसको नहीं मिली जब माई बोलीं

" हाँ घोटूँगी लौड़ा , निचोड़ के रख दूंगी "



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और वो सुन के ये जो खड़ा हुआ है, तो बैठने का नाम नहीं ले रहा है।

कांती बूआ, छोटी मामी, बड़ी मामी तो माई को चिढ़ा रही थीं तो चलो उन लोगों का ननद भौजाई का रिश्ता है, बचपन से वो देखता है उसी को लोग के माई से बूआ भी मामी भी मजाक करती थी, " अरे अपने भाई का नन्दोई का घोंट ली हो तो हमरे भांजा का कब घोटोगी ?"

लेकिन आज तो सूरजु की भौजाइयां, सिर्फ रिश्ते वाली नहीं, गाँव की यहाँ तक कहारिन और भरौटी की भी जो उसकी भौजाई लगती थीं, एकदम माई के पीछे पड़ी थी,


" हमरे देवर का एक बार घोंट लो, पचासों मर्दो का जो लीला होगा, सब भुलाय जाओगी "

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रमुआ बहू जबरदस्त दरोगा बनी थी, वो और सुधा भाभी कस के माई क गोड़ फैलाई थीं, एकदम साफ़ साफ़ दिख रहा था और माई भी ,

" ले आओ अपने देवर को उस स्साले बहन चोद क खुदे गांड फटती है, बहन चोदने, भौजाई चोदने में और यहाँ बहुत फरक है , निचोड़ के रख दूंगी "

सैयदायिन भौजी, पठान टोले वाली उसकी ओर से बोलीं, " अरे हमार देवर पहलवान है, दस जिला में कुश्ती जीत चूका है, एक बार चढ़ेगा न तो "

उनकी बात काट के माई बोलीं " अरे तो चढ़ जाए न , लेकिन पहले भौजाई और बहिनियों से फुर्सत मिले तब न "
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और बहिन का नाम सुन के बुच्ची बोल पड़ी,
"हमरे भाई क कुछ न कहिये, एक बार सामना हुआ न तो चल नहीं पाइयेगा , ऐसा रगड़ रगड़ के , "

लेकिन माई उसी के पीछे पड़ गयीं, हँसते हुए चिढ़ाया " जइसन तोहार हाल किया था, इमरतिया का सहारा लेकर उतर रही थी सीढ़ी से , तुमने तो ले लिया न "

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" अरे मैं तो छोट बहिन हूँ, पूरे चौदह साल से राखी बाँध रही हूँ , तो मैं नहीं लूंगी तो कौन लेगा " घमंड से बुच्ची बोली और जोड़ा, " लेकिन एक बार आप भी ट्राई कर लीजिये तो पता चलेगा "

" ४८ घंटा का टाइम है, घोंट ला हमरे देवर का नहीं तो मुट्ठी जायेगी अंदर " उंगलियाते हुए रमुआ बहू बोली "
" एक नहीं दोनों मुट्ठी जायेगी, इस भोंसडे में , एकलौते बेटवा क बियाह है " मुन्ना बहू बोली

" अरे हमरे भाई क एक बार ले लीजिये फिर दोनों मुट्ठी का पता भीनहीं चलेगा " पूनम, अहिराने वाली ने चिढ़ाया। आज शाम को ही पूनम खुद उसके ऊपर चढ़ के

बार बार सूरजु के सामने वही पिक्चर चल रही थी और खूंटा बैठने का नाम नहीं ले रहा था , झूठ मूठ का चादर तान के वो खर्राटे भरने की ऐक्टिंग कर रहे थे लेकिन आँख के सामने बस वही आ रहा था

सूरजु की माई ने बुच्ची और लीला को बुला के कहा,

" अभी मैं नीचे जा रही हूँ, छत का ताला बंद कर लेना और लीलवा सुबह तुम अकेले आके अपने भैया को चाय नाश्ता करा देना, बुच्ची को कुछ और काम होगा। "

लीला ने ख़ुशी से सर हिलाया।

फिर सूरजु की महतारी दोनों लड़कियाँ से बोली,

" देख रही हो अपने बहनचोद भाई को झंडा खड़ा है , जाके तुम दोनों झंडा झुकाओगी तभी ये सो पायेगा आज रात। "

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यह कहकर वो मुड़ीं, लेकिन बुच्ची की बात सुनकर रुक गईं। बुच्ची का मुंह भी अब खुल गया था। वो हंस कर चिढ़ाते बोली

" अरे बहनचोद तो हमारा भाई है ही, लेकिन देखिये बहनचोद से भी ज्यादा मादरचोद हो जाएगा और एक बार नहीं बार बार मादरचोद होगा हम दोनों का ये भाई : "



बड़की ठकुराइन के नीचे उतरने पर बुच्ची ने सीढ़ी के दरवाजे पर बड़ा सा ताला लगाया, अब नीचे से कोई नहीं आ सकता था। छत एकदम सूनी थी और कोहबर की रखवाली वाली भी कोहबर के अंदर बंद हो गई थी।



बुच्ची ने लीला की ओर देखा वो किशोई थोड़ी सी शर्मायी, फिर बुच्ची का हाथ पकड़ के हलके से दबा दिया और दोनों किशोरियां सूरजु के कमरे के अंदर घुस गयीं।



लाज से चांदनी भी बादलो में छुप गयी।
Leela
सुरजू

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सुरजू पूरी तरह से चादर ओढ़े थे, हलके हलके खर्राटे की आवाज ले रहे थे। और खूंटा हाथ भर का खड़ा था, खूब मोटा सा, जैसे तम्बू में बम्बू लगा हो। पर वह समझ गई कि उनका बेटा एकदम जाग गया है और सोने की नौटंकी कर रहा है। उसने कभी खर्राटे नहीं लिया और जैसे वो खूंटा पागल हो रहा था, वो समझ गयी वो चोदने के लिए पागल हो रहा था।



बस सूरज की माई को यही नहीं पता था कि ये खूंटा इतना जबरदस्त क्यों खड़ा है।



सूरजु ने आज जो इमरतिया ने खिड़की में छेद किये थे उससे आज भी सब नाच गाना देखा, एक से एक कच्ची अमिया के कपडे उतरते देखे, और मन तो उसका सबका लेने का कर रहा था, चाहे बहिन हो चाहे भौजाई,

लेकिन सबसे ज्यादा हालत तब खराब हुयी जब पुलिस वाले स्वांग में सुधा भाभी और फुलवा ने माई की दोनों टाँगे फैलाई


और वो छेद दिखा,जिसमे से वो निकले थे, उनकी माई की बुर

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क्या चिकनी मांसल जाँघे, गोरी गोरी और उसके बीच पावरोटी सी फूली मस्त बुर,
आज खेल तमाशे में किसकी किसकी बुर उन्होंने नहीं देखी, एकदम साफ़ साफ़, चोर सिपाही वाले खेला में तो रीना और मीना के साथ लीला की, एकदम कसी बिन चुदी, ठीक से झांटे भी नहीं आयी थीं, दोनों फांके एकदम भींच के बंद थी, लीला की, फिर पूनम और गाँव की लड़कियों ने मंजू भाभी और रामपुर वाली की भी टाँगे पकड़ के खुलवायीं,सुशीला चाची ने कांती बूआ की, लेकिन जब सुधा भाभी और रमुआ बहू ने कस कर माँ की टाँगे फैलाई,

सूरजु का कलेजा मुंह को आगया, मस्ती से एकदम पागल, क्या चीज थी, एकदम मक्खन, बस उन का मन मचल गया, बस एक बार मिल जाए
, सूरजु का बस यही मन हो रहा था, कुछ हो,… ये छेद मिल जाए, एक बार मिल जाए ,

लंड एकदम तूफ़ान हो गया था, लोहे का रॉड और रौशनी में सब एकदम साफ़ दिख रहा था , सीने की धड़कन तेज हो गयी थी
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और जब सूरज की भाभियों ने, और सूरज की माई की भाभियों ने सूरज की माई से कबूल करवाया की सूरज का लौंड़ा वो लेंगी, मारे खशी के सूरज से रहा नहीं जा रहा था,



एक से एक बड़े दंगल उसने जीते थे लेकिन ऐसी ख़ुशी उसको नहीं मिली जब माई बोलीं

" हाँ घोटूँगी लौड़ा , निचोड़ के रख दूंगी "



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और वो सुन के ये जो खड़ा हुआ है, तो बैठने का नाम नहीं ले रहा है।

कांती बूआ, छोटी मामी, बड़ी मामी तो माई को चिढ़ा रही थीं तो चलो उन लोगों का ननद भौजाई का रिश्ता है, बचपन से वो देखता है उसी को लोग के माई से बूआ भी मामी भी मजाक करती थी, " अरे अपने भाई का नन्दोई का घोंट ली हो तो हमरे भांजा का कब घोटोगी ?"

लेकिन आज तो सूरजु की भौजाइयां, सिर्फ रिश्ते वाली नहीं, गाँव की यहाँ तक कहारिन और भरौटी की भी जो उसकी भौजाई लगती थीं, एकदम माई के पीछे पड़ी थी,


" हमरे देवर का एक बार घोंट लो, पचासों मर्दो का जो लीला होगा, सब भुलाय जाओगी "

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रमुआ बहू जबरदस्त दरोगा बनी थी, वो और सुधा भाभी कस के माई क गोड़ फैलाई थीं, एकदम साफ़ साफ़ दिख रहा था और माई भी ,

" ले आओ अपने देवर को उस स्साले बहन चोद क खुदे गांड फटती है, बहन चोदने, भौजाई चोदने में और यहाँ बहुत फरक है , निचोड़ के रख दूंगी "

सैयदायिन भौजी, पठान टोले वाली उसकी ओर से बोलीं, " अरे हमार देवर पहलवान है, दस जिला में कुश्ती जीत चूका है, एक बार चढ़ेगा न तो "

उनकी बात काट के माई बोलीं " अरे तो चढ़ जाए न , लेकिन पहले भौजाई और बहिनियों से फुर्सत मिले तब न "
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और बहिन का नाम सुन के बुच्ची बोल पड़ी,
"हमरे भाई क कुछ न कहिये, एक बार सामना हुआ न तो चल नहीं पाइयेगा , ऐसा रगड़ रगड़ के , "

लेकिन माई उसी के पीछे पड़ गयीं, हँसते हुए चिढ़ाया " जइसन तोहार हाल किया था, इमरतिया का सहारा लेकर उतर रही थी सीढ़ी से , तुमने तो ले लिया न "

Bucchi-coming-down-Quill-Bot-generated-image-6.png


" अरे मैं तो छोट बहिन हूँ, पूरे चौदह साल से राखी बाँध रही हूँ , तो मैं नहीं लूंगी तो कौन लेगा " घमंड से बुच्ची बोली और जोड़ा, " लेकिन एक बार आप भी ट्राई कर लीजिये तो पता चलेगा "

" ४८ घंटा का टाइम है, घोंट ला हमरे देवर का नहीं तो मुट्ठी जायेगी अंदर " उंगलियाते हुए रमुआ बहू बोली "
" एक नहीं दोनों मुट्ठी जायेगी, इस भोंसडे में , एकलौते बेटवा क बियाह है " मुन्ना बहू बोली

" अरे हमरे भाई क एक बार ले लीजिये फिर दोनों मुट्ठी का पता भीनहीं चलेगा " पूनम, अहिराने वाली ने चिढ़ाया। आज शाम को ही पूनम खुद उसके ऊपर चढ़ के

बार बार सूरजु के सामने वही पिक्चर चल रही थी और खूंटा बैठने का नाम नहीं ले रहा था , झूठ मूठ का चादर तान के वो खर्राटे भरने की ऐक्टिंग कर रहे थे लेकिन आँख के सामने बस वही आ रहा था

सूरजु की माई ने बुच्ची और लीला को बुला के कहा,

" अभी मैं नीचे जा रही हूँ, छत का ताला बंद कर लेना और लीलवा सुबह तुम अकेले आके अपने भैया को चाय नाश्ता करा देना, बुच्ची को कुछ और काम होगा। "

लीला ने ख़ुशी से सर हिलाया।

फिर सूरजु की महतारी दोनों लड़कियाँ से बोली,

" देख रही हो अपने बहनचोद भाई को झंडा खड़ा है , जाके तुम दोनों झंडा झुकाओगी तभी ये सो पायेगा आज रात। "

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यह कहकर वो मुड़ीं, लेकिन बुच्ची की बात सुनकर रुक गईं। बुच्ची का मुंह भी अब खुल गया था। वो हंस कर चिढ़ाते बोली

" अरे बहनचोद तो हमारा भाई है ही, लेकिन देखिये बहनचोद से भी ज्यादा मादरचोद हो जाएगा और एक बार नहीं बार बार मादरचोद होगा हम दोनों का ये भाई : "



बड़की ठकुराइन के नीचे उतरने पर बुच्ची ने सीढ़ी के दरवाजे पर बड़ा सा ताला लगाया, अब नीचे से कोई नहीं आ सकता था। छत एकदम सूनी थी और कोहबर की रखवाली वाली भी कोहबर के अंदर बंद हो गई थी।



बुच्ची ने लीला की ओर देखा वो किशोई थोड़ी सी शर्मायी, फिर बुच्ची का हाथ पकड़ के हलके से दबा दिया और दोनों किशोरियां सूरजु के कमरे के अंदर घुस गयीं।



लाज से चांदनी भी बादलो में छुप गयी।
Leela ne jo aaj tak nhi leela, wo aj raat me leelegi. Har jagah se Leelegi, uper se , niche se, aage se, piche se. Bada soch samajh kar naam rakha hai Leela ka
 

Rajizexy

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Supreme
54,690
55,709
354
कोमल जी,

कोमल जी एक ही दिल है,
कितनी बार आप को दे,

आपके प्रत्येक शब्द दिल को एकदम तार तार कर देते हैं ।
दिल में एक गुदगुदी, काम रस से पूर्ण।
आप के लेखन कला का कोई जवाब नहीं है ,
आपकी तारीफ करना मतलब सूरज को दीपक दिखाना। आपकी तारीफ के लिए शब्द कम पड़ जाते हैं ।
हम आपके लेखन कला में जादू है, जो हर बार एक अलग रूप में प्रदर्शित होती है।
हम सोचते हैं ,अब इसके बाद क्या ?
लेकिन आप हर बार एक नया कीर्तिमान स्थापित करते हैं। अपने ही कीर्तिमान को ध्वस्त करते हैं।
लेखन कला को नई उचाई तक ले जा रहे हैं, उसके लिए आप को कोटि कोटि नमन करते हैं।

हम सोचते हैं इसके बाद लेखक क्या लिखेगा, लेकिन फिर आप के लेखन कला का जादू चलता है, फिर एहसास होता नहीं" पिक्चर अभी बाकी है मेरे दोस्त"।

हर अपडेट ,हर एक पोस्ट ,एक अलग ही दिशा में लेकर जाता है। एक अलग ही एहसास होता है।
एक दूसरे से मिलकर भी यह दूसरे से जुड़ा रहते हैं।

अभी तो सूरज बाबू ने बुच्ची और लीला को ही लिया है ,अभी तो बहुत सारे कारनामे बाकी है।
सूरज बाबू के भी और बुच्ची के भी।
शीला अभी इंतजार कर रही हैं बुच्ची की लेने वालो की गिनती बढ़ाने में


अगले अपडेट का इंतजार


देर से comment देने के लिए क्षमा प्रार्थी हैं।

आप का बहुत बहुत धन्यवाद


आपकी लेखनी सदा हमारा मनोरंजन करती रहे । आप को और आपके परिवार को सुरक्षित रखें ,स्वस्थ रखें ईश्वर से यही कामना है।
Agreed ,u r 💯% right.Aap ne mere views ujagar kr diye.My Komal didi is a gem
 
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Rajizexy

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छुटकी - होली दीदी की ससुराल में

भाग 219 -- बुच्ची और लीला -दोनों ने लीला, ----खेला चोर सिपाही का पृष्ठ १२४३


मेगा अपडेट, १२ हजार से अधिक शब्द, पोस्टेड

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Awesome super duper gazab updates
👌👌👌👌👌👌👌
🫟🫟🫟🫟🫟
💯💯💯
Aap dhanya ho didi,itna vistrit aur long updates, pta nhi kese likh leti ho.
Sorry didi,I am not able to be punctual at your stories these days somehow
but u r in my heart & will remain there always 💋
 
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