• If you are trying to reset your account password then don't forget to check spam folder in your mailbox. Also Mark it as "not spam" or you won't be able to click on the link.

Adultery छुटकी - होली दीदी की ससुराल में

🔥 Read Next Hot Story →
Discover more exclusive stories

komaalrani

Well-Known Member
25,431
69,847
304
छुटकी - होली दीदी की ससुराल में

भाग 219 -- बुच्ची और लीला -दोनों ने लीला, ----खेला चोर सिपाही का पृष्ठ १२४३

मेगा अपडेट, १२ हजार से अधिक शब्द, पोस्टेड

कृपया पढ़ें, लाइक करें और कमेंट जरूर करें
 
Last edited:

komaalrani

Well-Known Member
25,431
69,847
304
छुटकी - होली दीदी की ससुराल में

भाग 219 -- बुच्ची और लीला -दोनों ने लीला
Police-inspector-with-constables-image-2.jpg


खेला चोर सिपाही का

३३,७४, ३६६
इमरतिया ने बोला था कि मटमंगरा में सब औरतें, लड़कियाँ सिर्फ साड़ी-ब्लाउज़ पहनकर आएंगी।

अब शहर वाली तो सब टॉप-स्कर्ट में थीं, और गाँव में भी आधी लड़कियाँ या तो फ्रॉक या शलवार-कुरता पहनती थीं, तो साड़ी-ब्लाउज़ कैसे?

Girl-Top-IMG-20230323-212509.jpg


रमा, शीतल मौसी की लड़की, जो बम्बई से आयी थी और अंग्रेजी स्कूल में इंटर में पढ़ती थी, स्कर्ट-टॉप, तरह-तरह के ड्रेस और एक-दो शलवार-कुर्ती लायी थी, वही सबसे पहले चिल्लाई,

"अरे, साड़ी तो चलिए मम्मी, मौसी, मामी, भाभी किसी की ले लेंगे, लेकिन ब्लाउज़, वो भी मेरे नाप का कहाँ से मिलेगा?"



"अरे तो मत पहनना ब्लाउज़, बिन्नो, मेरे देवरों का भला हो जाएगा," मंजू भाभी ने अपनी ननद को चिढ़ाया।

"और तेरे भाइयों के साथ तेरी भाभी के भाइयों का भी; बस साड़ी उठायी, झलक दिखला दी, लौंडों को भी आराम। आँचल हटाया, मसल दिया।"

रामपुर वाली को तो हरदम अपने भाइयों के फायदे की चिंता रहती थी—गप्पू और उसके दोस्तों की, तो वो और जोर से खुश होकर बोलीं।

Teej-0b3ef127d67d67346c1bbafe720bde05.jpg


लेकिन बड़ी ठकुराइन ने मामला सुलझा दिया, और बहुओं को डांटके बोलीं,

"तुम सब ना मेरी प्यारी-प्या प्यारी बेटियों को चिढ़ा रही हो। तुम सब अपने मायके में उघारे घूमती होगी? अरे, कल से दरजी लगेंगे, दुल्हन के और बाकी लोगों के कपड़े सिलने आएँगी दर्जिने, तो तुम सब भी अपने-अपने ब्लाउज़ सिलवा लेना, एकदम लेटेस्ट फैशन का, अपनी-अपनी नाप के कम से कम तीन-चार।"

लेकिन भाभियों का चिढ़ाना कम नहीं हो रहा था,

"अरे, दरजी का लड़का तो हमारी ननद का यार है। उसको जोबन का उभार, नाप सब याद है, बिना नाप लिए बना देगा। हाँ-हाँ, चूँची के लिए सिलवाई में गुलाबो ले लेगा ।"



और उसी झांय-झांय के बीच पीछे की ओर से पता नहीं कहाँ से एक पुलिस का दरोगा पूरी वर्दी में, मोटा तेल पिलाया डंडा लेकर और साथ में दो-तीन कांस्टेबल आ गए और जोर से बोले,

"हमको चोरी की रपट मिली है। बड़े महंगे गहने चोरी हुए हैं और खबर है कि चोर सब यहीं छिपे हैं। सब की तलाशी होगी।"

Police-Inspector-Gemini-Generated-Image-gy0dpjgy0dpjgy0d.png


सब औरतें-लड़कियाँ दुबककर बैठ गईं एक-दूसरे से चिपककर। जो लड़कियाँ गाँव में रतजगा देख चुकी थीं, उन्हें तो अंदाज था, लेकिन जो शहर से आयीं थीं, उन्हें कुछ समझ में नहीं आ रहा था।

रीना दुलारी से चिपकके बैठी थी, सुधा भाभी कहीं निकल गयी थीं।

दरोगा गाली देकर बात कर रहा था, और बार-बार अपने हाथ का डंडा घुमाता, सबको हड़काता,

"जो चोर हो कबूल कर ले, वरना सबकी नंगा झोरी होगी। और जिसके पास से गहने पकड़े जाएंगे, जेल तो बाद में जाएगा, यहीं मार-मारके चूतड़ लाल कर दूंगा।"

उसके पुलिस वाले भी साथ-साथ घूम रहे थे—कभी किसी औरत को पकड़के उठा देते, उसके ब्लाउज़ में हाथ डाल देते और फिर बोलते,

"नहीं, कुछ नहीं मिला, ये सब छिनार जबरदस्त चोर हैं।"



तब तक एक कांस्टेबल की निगाह रीना पर पड़ी जो एकदम दुबकी दुलारी के पीछे छिपी थी, और उस कांस्टेबल ने कसके कलाई पकड़कर एक झटके में खड़ा किया।
chor-sipahi-Quill-Bot-generated-image-3.png



रीना सहमके खड़ी हो गयी, सर झुकाये, पैरों से जमीन खुरचते हुए। दरोगा ने उसकी ठुड्डी पकड़कर सर ऊपर किया और एक कांस्टेबल ने टॉर्च से उसके चेहरे पे रौशनी डाली और बोला,

"साहब, यही लगती है, यही बताया था। चेहरे से चुदवासी और छिनार लगती है और खूब गोरी है, जबरदस्त नमक है।"

"बोल साली, माल कहाँ रखा है? साली, गाँड़ में भी रखा होगा तो ये डंडा डालकर निकाल लूंगा, दे दे सीधे से," दरोगा ने हड़काया और एक सिपाही से बोला,

"अबे, ये छिनार ऐसे नहीं बोलेगी। इसके टॉप में हाथ डालकर देख, ये सब चोरनी बड़ी-बड़ी चूँची के बीच में ही सब रखती हैं।"



और एक सिपाही ने टॉप के अंदर हाथ डाल दिया, और मन भरकर जोबन दबाए-मसले।

बाकी के दो सिपाहियों ने रीना के हाथ कसकर पकड़ रखे थे। और जिसने टॉप में हाथ डाला था, उस सिपाही ने हाथ बाहर निकाला तो उसके हाथ में एक अंगूठी थी, जो पहले उसने दरोगा को दिखाया, फिर सब औरतों को।

Reena-and-Police-Gemini-Generated-Image-q6tq6lq6tq6lq6tq.png


दरोगा ने स्कर्ट उठाकर उसके चूतड़ पर एक हाथ कसकर मारा और गरजा, "बोल, कितनों से चुदी है?"

"नहीं, नहीं, किसी से नहीं," रीना ने कबूला।



"तो इतना चौड़ा भोंसड़ा कैसे हो गया कि चोरी का सब माल अपने भोंसड़े में रखा है?" दरोगा चीखा, "चल, टाँगे फैला।"

और दरोगा ने अपना हाथ उस अंग्रेजी स्कूल वाली लड़की की स्कर्ट में डाल दिया। कुछ देर जाँघें सहलाईं, और एक फिर झटके में रीना की चुनमुनिया दबोच लिया, और सोचा



" साला, बड़ी किस्मत वाला होगा जो इसकी बुर चोदेगा। कैसे फूली-फूली फांकें हैं, एकदम चिपकी, कसी; साली लौंडे को दबोच लेगी।

Pussy-wet-virgin-pussy.jpg


बड़की ठकुराइन सही कह रही थी, जब खुले खेत में इसे अहिराने वाले रगड़ेंगे ना और इसके चूतड़ से रगड़-रगड़कर ढेले टूटेंगे, तब इसकी चूत का पानी निकलेगा और फिर ये लंड की दीवानी हो जायेगी, खुद लौंडों के पीछे-पीछे भागेगी।"

"ये देख, मैं कह रही थी ना तेरी चूत नहीं भोंसड़ा है, देख क्या निकला!"

सबकी आँखें फटी रह गईं—एक बड़ी सी चूड़ी, बल्कि चूड़ा। पूरे पौने तीन इंच का व्यास होगा।



"ये तो साली चार बच्चों की माँ के भी भोंसड़े में नहीं आता, जरूर तू नम्बरी चुदक्कड़ है," दरोगा ने हड़काया।



तब तक एक सिपाही बोल पड़ा, "अरे, इस साली ने अपनी गाँड़ में भी छुपाया होगा चोरी का माल।"

"निहुर साली!" दरोगा गरजा, और जबरदस्ती पकड़कर झुका दिया,
chor-sipahi-reena-download-2.jpg

और उस सिपाही ने स्कर्ट उठा दिया। गोरे-गोरे, गोल-गोल, खूब भरे हुए चूतड़ एकदम मस्त लग रहे थे, बीच का कसा छेद एकदम दुबदुबा रहा था। सब भाभियों की निगाहें कुँवारी ननद के चिकने चूतड़ों पर और एकदम टाइट गाँड़ पे अटकी थीं।

"बोल, और कौन था चोरी में तेरे साथ? और इतनी बड़ी चोरी तू अकेले तो कर नहीं सकती," दरोगा ने ललकारा और अपनी बेंत रीना के पिछवाड़े के छेद पर सटाकर गरजा,

"साली, तेरी गाँड़ को तेरे भोंसड़े से भी चौड़ा कर दूंगा। ये दरोगा का डंडा है, गाँड़ में से जाएगा और मुंह में से निकलेगा। बोल साली, कौन थी तेरे साथ?"

A-photorealistic-cinematic-sho.jpg


अब अपनी ननद को बचाने दुलारी आगे आयी—वही जिसने लाइट जाने पर, सुलाकी के आने पर रीना का टॉप उतरवाकर सुधा भाभी के साथ खुलकर गुब्बारों का मजा लिया था, और दरोगा जी से बोली,

"हुजूर के गोड़ पड़ती हूँ, हमको मार लीजिए। ये हमारी ननद गऊ है गऊ। ये तो खराब संगत में पड़कर... और चोरनी के साथ, और सबसे बड़ा तो चोर का सरदार है, बहुत बड़ी-बड़ी चोरी करता है।"

और तब तक रीना समझ गयी थी कि ये सब भाभियों की बदमाशी है, क्योंकि बजाय घबराने के सब भाभियाँ मुस्करा रही थीं; और यहाँ तक कि उसकी मम्मी भी, उनके चेहरे पे भी कोई परेशानी नहीं थी।

और जिस तरह से उस पुलिस वाले ने मजे ले-लेकर रीना के उभार दबाये थे, वो छुअन रीना पहचान गयी थी—सुधा भाभी, जिन्होंने बत्ती जाने पर भी दुलारी के साथ खुलकर उसका जोबन मर्दन किया था।

जब जबरदस्ती दरोगा ने रीना को पकड़कर झुकाया, तो रीना ने दरोगा के पैरों में लगे सुहागिन औरतों वाले महावर को देख लिया और पायल भी चौड़ी सी, और बाकी पुलिस वाले भी उसी तरह थे; और उसने अंदाज लगा लिया था कि रमुआ बहू दरोगा बनी है।

mahawar-download-1.jpg


"अरे बता दो ना, नहीं तो दरोगा साहेब बहुत सख्त हैं, अपनी बहन-मह्तारी भी नहीं छोड़ते, तुम्हारे भैया की तरह,

" दुलारी ने झुकी हुई रीना को समझाया और पकड़कर खड़ा कर दिया।



"जो दरोगा जी मेरे साथ थीं, वो मीना थी और लीला और वो जो देखने में छोटी है लेकिन सेंध उसी ने लगाई थी—इमली।"

JPG-chor-sipahi-1122download.jpg


रीना भी अब ऐक्टिंग कर रही थी और अपनी उम्र वाली सब लड़कियों को उसने लपेट लिया, "और असली सरदार वो हैं," दुलारी ने दूल्हे की माँ की ओर इशारा किया।



लेकिन दरोगा के मन में कुछ और चल रहा था, रीना से उसने पूछा,

"साली, अगर तू चुदी नहीं है, तो इतनी मोटी चूड़ी तेरे भोंसड़े से कैसे निकली?"

पुलिस कांस्टेबल बनी सुधा भाभी ने एक हाथ रीना के चूतड़ पे दिया और हड़काया, "चल बता सब लौंडों के नाम जो आजकल घर में हैं, जिनको झुक-झुककर जोबना दिखा-दिखाकर खिला रही थी।"

और रीना ने सब नाम एक साथ सुना दिए—"गप्पू भैया, बिट्टू भैया, रवि भैया, नंदू भैया, चंदू भैया..." पूरे दर्जन भर लड़कों का नाम रीनू ने सुना दिया।
"साली, एक-एक लड़के का नाम मालूम है और लंड का तुझे अकाल पड़ा है! चल बोल, किसका-किसका लंड घोंटेगी?"

दुलारी ने कान में बोला, "जल्दी से हाँ बोल दे, वरना और रगड़ाई होगी।"

रीना ने बोला, लेकिन कांस्टेबल ने एक-एक लड़के का नाम ले-लेकर रीना से कहलवाया और तीन-तीन बार जोर से।

और उसके बाद हमला दूल्हे की माँ पर हुआ।

और क्या न हुआ, दूल्हे की महतारी के साथ।
Police-inspector-image-4.jpg


तलाशी के नाम पर दरोगा बनी रमुआ बहू ने दूल्हे की माई की बुरिया में पूरी तीन ऊँगली घुसाई और सब भौजाई कने लगी, " अरे जब तीन तीन ऊँगली बिना तेल के जा रहा था तो हमरे देवर क लौंड़ा लेने में सासु जी काहें इतना छिनरपन कर रही हो "

" बोलो लेगी दूल्हे का गपागप, वरना पूरी मुट्ठी पेलूँगी अभी कोहनी तक ," रमुआ बहू बोली।

" अरे पेल दो, ....बचपन क छिनार हैं हमार ननद " बड़ी मामी बोलीं।


Teej-01abfe5e-8920-4df6-897b-2b32459367ee.jpg


अब दरोगा और सिपाहियों के बाकी औरतें लड़कियां भी आ गयी थी, दोनों सिपाहियों ने पकड़ के दूल्हे की माँ की टांग फैला रही थी।


मंजू भाभी साथ में अपनी ननदो, मीना, रूपा , रमा को लेकर बैठीं जो पहली बार ये सब देख रही थीं, मंजू भाभी और रामपुर वाली दोनों एक साथ अपनी सास से बोलीं

" अरे मान जाइये न, हमार देवर बहुत अच्छा है, बहुत प्यार से ठेलेगा, मजा आ जाएगा "

" अरे भौजी, माना पचासों मरद का घोंटा होगा, गदहा घोडा कुल लिया होगा लेकिन एक बार मेरे भतीजे का ले लीजिये न अंदर, सब को भूल जायेगीं "

चिढ़ाते, उकसाते नीतू ननद बोली जो सूरजु से मुश्किल से डेढ़ दो साल बड़ी थी और जिसके मरद का आज खूब मजे लेकर बड़की ठकुराईन ने दो बार घोंटा था

पूरे दस बार बड़की ठकुराइन से सब उनकी बहुओं, ननदों, भाभियों ने कबुलवाया तब जाकर मुन्ना बहू ने उँगलियाँ बाहर निकाली,



उसके बाद तो चार पांच स्वांग और हुए, फुलवा पर भूत चढ़ा और उसी के बहाने जितनी कुँवारी ननदियाँ चाहे गाँव की हो या शहर की सब की खुल के उस ने रगड़ाई की,

शीतल मौसी धोबन बन के आयी और वो तो खुल के आज मीना के पीछे पड़ी थी, पूनम और चननिया भी चुड़िहारिन और बिसाती बन के आयीं और भाभियों के साथ खूब मस्ती की।



आज तय हुआ था की गाना जल्दी खत्म हो, रात में ' और भी बहुत से काम ' थे लेकिन तब भी एक बज गया, धीरे धीरे सब लोग छत से उतर कर चले गए, आज इमरतिया के घर पर भी कुछ काम था तो वो भी चली गयी , मंजू भाभी, मुन्ना बहू और पूनम कोहबर की ओर चले गए, उसके पहले मंजू भाभी ने दूल्हे के कमरे का ताला खोल दिया था, छत के एक कोने पे लीला से बुच्ची कुछ खुसुर फुसुर कर रही थी और लीला खिलखिला रही थी, और सर हिला के हाँ हाँ का इशारा कर रही थी।



सूरजु की माई ने हल्के से खुले दरवाजे से अपने बेटे को देखा और उसकी छाती गज भर हो गई।

लेकिन वो जोर से मुस्करायीं,

" स्साला, इसकी बुआ को गदहे से चुदवाउ, हमी से नौटंकी।"
Teej-MIL-934d4791-dc6b-48b1-b933-021790616943.jpg
 
Last edited:

komaalrani

Well-Known Member
25,431
69,847
304
सुरजू

Sleeping-wood-download.jpg


सुरजू पूरी तरह से चादर ओढ़े थे, हलके हलके खर्राटे की आवाज ले रहे थे। और खूंटा हाथ भर का खड़ा था, खूब मोटा सा, जैसे तम्बू में बम्बू लगा हो। पर वह समझ गई कि उनका बेटा एकदम जाग गया है और सोने की नौटंकी कर रहा है। उसने कभी खर्राटे नहीं लिया और जैसे वो खूंटा पागल हो रहा था, वो समझ गयी वो चोदने के लिए पागल हो रहा था।



बस सूरज की माई को यही नहीं पता था कि ये खूंटा इतना जबरदस्त क्यों खड़ा है।



सूरजु ने आज जो इमरतिया ने खिड़की में छेद किये थे उससे आज भी सब नाच गाना देखा, एक से एक कच्ची अमिया के कपडे उतरते देखे, और मन तो उसका सबका लेने का कर रहा था, चाहे बहिन हो चाहे भौजाई,

लेकिन सबसे ज्यादा हालत तब खराब हुयी जब पुलिस वाले स्वांग में सुधा भाभी और फुलवा ने माई की दोनों टाँगे फैलाई


और वो छेद दिखा,जिसमे से वो निकले थे, उनकी माई की बुर

pussy-tumblr-l7buoi-BJk-U1qzcueeo1-1280.jpg


क्या चिकनी मांसल जाँघे, गोरी गोरी और उसके बीच पावरोटी सी फूली मस्त बुर,
आज खेल तमाशे में किसकी किसकी बुर उन्होंने नहीं देखी, एकदम साफ़ साफ़, चोर सिपाही वाले खेला में तो रीना और मीना के साथ लीला की, एकदम कसी बिन चुदी, ठीक से झांटे भी नहीं आयी थीं, दोनों फांके एकदम भींच के बंद थी, लीला की, फिर पूनम और गाँव की लड़कियों ने मंजू भाभी और रामपुर वाली की भी टाँगे पकड़ के खुलवायीं,सुशीला चाची ने कांती बूआ की, लेकिन जब सुधा भाभी और रमुआ बहू ने कस कर माँ की टाँगे फैलाई,

सूरजु का कलेजा मुंह को आगया, मस्ती से एकदम पागल, क्या चीज थी, एकदम मक्खन, बस उन का मन मचल गया, बस एक बार मिल जाए
, सूरजु का बस यही मन हो रहा था, कुछ हो,… ये छेद मिल जाए, एक बार मिल जाए ,

लंड एकदम तूफ़ान हो गया था, लोहे का रॉड और रौशनी में सब एकदम साफ़ दिख रहा था , सीने की धड़कन तेज हो गयी थी
pussy-wet.jpg


और जब सूरज की भाभियों ने, और सूरज की माई की भाभियों ने सूरज की माई से कबूल करवाया की सूरज का लौंड़ा वो लेंगी, मारे खशी के सूरज से रहा नहीं जा रहा था,



एक से एक बड़े दंगल उसने जीते थे लेकिन ऐसी ख़ुशी उसको नहीं मिली जब माई बोलीं

" हाँ घोटूँगी लौड़ा , निचोड़ के रख दूंगी "



Teej-MIL-02538c5fbc4c735997cce36bc6fabfcc-high.webp


और वो सुन के ये जो खड़ा हुआ है, तो बैठने का नाम नहीं ले रहा है।

कांती बूआ, छोटी मामी, बड़ी मामी तो माई को चिढ़ा रही थीं तो चलो उन लोगों का ननद भौजाई का रिश्ता है, बचपन से वो देखता है उसी को लोग के माई से बूआ भी मामी भी मजाक करती थी, " अरे अपने भाई का नन्दोई का घोंट ली हो तो हमरे भांजा का कब घोटोगी ?"

लेकिन आज तो सूरजु की भौजाइयां, सिर्फ रिश्ते वाली नहीं, गाँव की यहाँ तक कहारिन और भरौटी की भी जो उसकी भौजाई लगती थीं, एकदम माई के पीछे पड़ी थी,

" हमरे देवर का एक बार घोंट लो, पचासों मर्दो का जो लीला होगा, सब भुलाय जाओगी "

Teej-1cc6dc9d2444c4f195150891c1d334fd.jpg


रमुआ बहू जबरदस्त दरोगा बनी थी, वो और सुधा भाभी कस के माई क गोड़ फैलाई थीं, एकदम साफ़ साफ़ दिख रहा था और माई भी ,

" ले आओ अपने देवर को उस स्साले बहन चोद क खुदे गांड फटती है, बहन चोदने, भौजाई चोदने में और यहाँ बहुत फरक है , निचोड़ के रख दूंगी "

सैयदायिन भौजी, पठान टोले वाली उसकी ओर से बोलीं, " अरे हमार देवर पहलवान है, दस जिला में कुश्ती जीत चूका है, एक बार चढ़ेगा न तो "

उनकी बात काट के माई बोलीं " अरे तो चढ़ जाए न , लेकिन पहले भौजाई और बहिनियों से फुर्सत मिले तब न "
Teej-MIL-IMG-20251209-184011.jpg

और बहिन का नाम सुन के बुच्ची बोल पड़ी,
"हमरे भाई क कुछ न कहिये, एक बार सामना हुआ न तो चल नहीं पाइयेगा , ऐसा रगड़ रगड़ के , "

लेकिन माई उसी के पीछे पड़ गयीं, हँसते हुए चिढ़ाया " जइसन तोहार हाल किया था, इमरतिया का सहारा लेकर उतर रही थी सीढ़ी से , तुमने तो ले लिया न "

Bucchi-coming-down-Quill-Bot-generated-image-6.png


" अरे मैं तो छोट बहिन हूँ, पूरे चौदह साल से राखी बाँध रही हूँ , तो मैं नहीं लूंगी तो कौन लेगा " घमंड से बुच्ची बोली और जोड़ा, " लेकिन एक बार आप भी ट्राई कर लीजिये तो पता चलेगा "

" ४८ घंटा का टाइम है, घोंट ला हमरे देवर का नहीं तो मुट्ठी जायेगी अंदर " उंगलियाते हुए रमुआ बहू बोली "
" एक नहीं दोनों मुट्ठी जायेगी, इस भोंसडे में , एकलौते बेटवा क बियाह है " मुन्ना बहू बोली

" अरे हमरे भाई क एक बार ले लीजिये फिर दोनों मुट्ठी का पता भीनहीं चलेगा " पूनम, अहिराने वाली ने चिढ़ाया। आज शाम को ही पूनम खुद उसके ऊपर चढ़ के

बार बार सूरजु के सामने वही पिक्चर चल रही थी और खूंटा बैठने का नाम नहीं ले रहा था , झूठ मूठ का चादर तान के वो खर्राटे भरने की ऐक्टिंग कर रहे थे लेकिन आँख के सामने बस वही आ रहा था

सूरजु की माई ने बुच्ची और लीला को बुला के कहा,

" अभी मैं नीचे जा रही हूँ, छत का ताला बंद कर लेना और लीलवा सुबह तुम अकेले आके अपने भैया को चाय नाश्ता करा देना, बुच्ची को कुछ और काम होगा। "

लीला ने ख़ुशी से सर हिलाया।

फिर सूरजु की महतारी दोनों लड़कियाँ से बोली,

" देख रही हो अपने बहनचोद भाई को झंडा खड़ा है , जाके तुम दोनों झंडा झुकाओगी तभी ये सो पायेगा आज रात। "

Teej-MIL-20230327-160400.jpg


यह कहकर वो मुड़ीं, लेकिन बुच्ची की बात सुनकर रुक गईं। बुच्ची का मुंह भी अब खुल गया था। वो हंस कर चिढ़ाते बोली

" अरे बहनचोद तो हमारा भाई है ही, लेकिन देखिये बहनचोद से भी ज्यादा मादरचोद हो जाएगा और एक बार नहीं बार बार मादरचोद होगा हम दोनों का ये भाई : "



बड़की ठकुराइन के नीचे उतरने पर बुच्ची ने सीढ़ी के दरवाजे पर बड़ा सा ताला लगाया, अब नीचे से कोई नहीं आ सकता था। छत एकदम सूनी थी और कोहबर की रखवाली वाली भी कोहबर के अंदर बंद हो गई थी।



बुच्ची ने लीला की ओर देखा वो किशोई थोड़ी सी शर्मायी, फिर बुच्ची का हाथ पकड़ के हलके से दबा दिया और दोनों किशोरियां सूरजु के कमरे के अंदर घुस गयीं।



लाज से चांदनी भी बादलो में छुप गयी।
 
Last edited:

komaalrani

Well-Known Member
25,431
69,847
304
बुच्ची और लीला
Buchi-and-Lila-on-roof-Quill-Bot-generated-image-1.png


दरवाजा खोलकर दोनों किशोरियां घुसीं, लेकिन चौखट डाँकने के पहले दोनों ही बांकी हिरणियां पल भर के लिए सहम गयीं,

कुछ डर, कुछ उत्सुकता, कुछ हिचक और घबराहट, और जानती दोनों थीं, आगे क्या होना है, एक अनभोगा सुख लेकिन उसके पहले दर्द, बहुत ढेर सारा दर्द।



वे चौखट डाँक कर दोनों जवानी के खुलकर खेलने के आँगन में प्रवेश करने वाली थीं,

बाहर छत पर अब एकदम शांति थी, चांदनी झुककर प्यारी सी मीठी मुस्कान के साथ छत बुहार रही थी, हल्की हल्की हवा चल रही थी, देह में सिहरन मच रही थी, गाँव से आई हुई टोले मोहल्ले की लड़कियां औरतें अपने-अपने घर कब की पहुँच चुकी थीं।

छत से आम की घनी बाग एक एकरंगी परछाई सी दिखती थी,

जिसमें कितनी बार बुच्ची ने आम के पुराने पेड़ों पर चढ़कर चौकीदारी की थी और नीचे उसकी सहेली के यार हचक-हचक के कभी अगवाड़े तो कभी पिछवाड़े, और बिट्टू तो शीलवा के चूतड़ का जबरदस्त रसिया था, बिना गांड मारे छोड़ता नहीं था और ऊपर से पेड़ पर बैठी, बुच्ची सब साफ-साफ देखती, बिट्टू को उकसाती, चिढ़ाती,
A-young-teen-rural-Indian-girl-1.jpg


"अबे स्साले आधा बचा है, पेल पूरा। बाकी क्या अपनी बहिनियां, सरला के लिए बचा रखा है?"

मोटा मूसल होने के साथ खूब रगड़-रगड़ के गांड मारता था वो, दसों बार देखा था उसने वो पिछवाड़े का खेल, हाँ उसके भी पिछवाड़े में कांटे चुभते और चूतड़ तो उसके शीला से भी जबरदस्त, कसर-मसर, शीला के सब यार उसपर दीवाने थे।



लेकिन बुच्ची जानती थी, अब उसका भी पिछवाड़ा आज निशाने पर आएगा।

और उसका डर इसलिए भी ज्यादा था कि उसके भैया का ऐसा वैसा सांप नहीं था, फनफनाया काला नाग, बल्कि लंबा मोटा अजगर।

आज दिन में स्साले कमीने ने ऐसे रगड़ के अपनी बहन को चोदा था, घंटे भर तक तो खड़ा नहीं रहा जा रहा था।

किसी तरह वो तो इमरतिया भौजी का हाथ पकड़कर सहारा लेकर किसी तरह सीढ़ी से उतरी, लग रहा था कि बुर में मोटी सी खपच्ची धंसी है, और वो तो भला है उसकी सहेली शीला का। नीचे ही मिल गयी, सांझ ढल रही थी, जब वो उसे हाथ पकड़कर अपने घर ले गयी, फिटकरी डालकर गुनगुने पानी से देर तक सेंका, ऊँगली में गाय का घी लगाकर सीधे अंदर तक, जहाँ-जहाँ छिला था, आराम से लगाया, और हंसकर एक चुनमुनिया में चूमकर बोली, "

"जा मेरी राजकुमारी, बस तीन-चार घंटे संतोष कर लो, उसके बाद तो एक से एक मोटे लौड़े घोंटना, मजे के अलावा कुछ नहीं होगा। एकदम वैसे ही नयी ताज़ी और मुलायम रहेगी, फूली पावरोटी की तरह।"


Two-beautiful-adult-village-wo.jpg


सच में बहुत बदमाश है शीला, लेकिन अच्छी भी बहुत है और समझदार भी।

उसके तरीके से आराम भी मिला बुच्ची को, आज चुनिया ने बहुत उकसाया, मुन्ना बहू और मंजू भाभी भी बोलीं, लेकिन आज नाचने के लिए बुच्ची ने घूँघरू नहीं बाँधा, इतनी तेज चिलख उठ रही थी।

शीला ने चार-पांच घंटे के लिए बोला था लेकिन वो फिटकरी वाला पानी लगाए सात-आठ घंटे से ज्यादा हो गया। आधी रात तो तभी हो गयी थी, जब मुन्ना बहू दरोगा बनकर आयी थीं।

मतलब अब बुच्ची घपाघप करवा सकती थी।



पर बुच्ची को लग रहा था अब भैया बिना गांड मारे छोड़ने वाले नहीं है, वैसे तो कोई भौजाई सुनती तो हंसकर कहती,



"अरे मार लेने दे न, भाई है तेरे, राखी तू बांधेगी, नेग तू लेगी,.... तो स्साली गांड कौन मरवाएगा?"

और इमरतिया भौजी तो सबसे ज्यादा कोठरी में भैया को उकसा रही थीं, जब वो आज सांझ की घोड़ी बनाकर निहुरा के उसे पेल रहे थे, भैया को चिढ़ा रही थीं , उकसा रही थीं


Teej-Gao-4bda149f17899767dd8caf3be3f77582-high.webp


"अरे आगे क कुंवा का बहिनिया क मजा ले रहे हो लेकिन अभी पिछवाड़े का पोखरा बाकी है, बिना बहिनिया की गांड मारे भाई बहिन का असली रिश्ता नहीं होता।"



बुच्ची ने मुड़कर देखा, जिस तरह से भैया ललचा रहा था, लेकिन साथ में लजा रहा था, बुच्ची उसके मन की बात समझ गयी, मन तो उसका किया मुड़कर भैया को चूमकर बोले,



"अरे भैय्या, तेरी छोटी बहिनिया हूँ, ले लेना उसका भी मजा, हाँ दर्द होगा तो बर्दास्त कर लुंगी। छोटी बहन भाई के लिए इतना भी नहीं कर सकती।"



लेकिन वो कुछ बोलती, उसके पहले ही स्साले भैया ने इतने कस-कस धक्का मारा, चार इंच मोटा मूसल, आधे इंच की बिल में रगड़ता-देरता जो घुसा, दर्द के मारे बुच्ची जो चिल्लाई, गाँव के सबसे बाहर की चमरौटी, पासी टोला और पठानटोला में भी आवाज गयी होगी।



और ऊपर से आज भैया की माई (बुच्ची की मामी) ने जिस तरह से मुन्ना बहू, दुलारी और बसंती सब के सामने बुच्ची के पिछवाड़े ऊँगली करते हुए कहा,

"अरे भाई चोद, ये किसके लिए बचा रखी है?"

और प्यार से दुलराकर, रमुआ बहू और दुलारी को सुनाती हुई बुच्ची से बोलीं,

"अरे सुन, अभी तो पूरी रात बाकी है। आज तो तू, पूनम और लीला कोहबर में ही रहोगी, तो बस जैसे गाना-बजाना ख़तम हो, तो पीछे वाला बाजा बजवा लेना।"
Teej-MIL-Reshma-Pasupuleti-1.jpg


मुन्ना बहू ने बुच्ची को गरियाते हुए बोला,

"हे छिनार, छिनरपन मत कर! छिनार के जने, अपने बहनचोद, मादरचोद भाई से बोल देना, अगवाड़े का रास्ता तुम खोले हो तो क्या पिछवाड़े के लिए भौजी के भैया को बुलाऊँ?"

बुच्ची का पिछवाड़े का छेद दुबदुबा रहा था,


asshole-20231015-213053.jpg


घबराहट भी हो रही थी और मन भी कर रहा था, ठीक है भैया का मोटा है बल्कि बहुत मोटा है लेकिन उसका भाई भी तो है। और शीलवा तो कितनी बार उसके सामने पिछवाड़े घोंटती है, चिल्लाती वो भी है लेकिन यार उसके बिना गांड मारे छोड़ते नहीं, कुछ सोचकर बुच्ची मुस्करा पड़ी।



उसे कांती बुआ की बात याद आई, जब सूरजु भैया के मामा उनके पीछेपेल रहे थे और कांती बुआ (बुच्ची की सगी बड़ी मौसी) अपने छोटी बहन की,... बुच्ची की माई का किस्सा बता रही थीं कि कैसे सूरजु की माई की शादी के चार दिन बाद, चौथी लेकर जो सूरजु के दोनों मामा आए थे तो उन्होंने हचक के, दोनों ने मिलकर, दो दिन में छह बार चढ़ाई की और सूरजु के मामा ने जोड़ा और चार बार गांड मारी सो अलग, यानी दस बार।



और उस समय बुच्ची अभी जिस उम्र की है उससे पूरे चौदह महीने छोटी थीं, तो माई ने घोंट लिया पिछवाड़े तो बेटी क्यों पीछे रहेगी।



और बुच्ची की माई ने खुद ही कहा था, बुच्ची की माई के बड़े बहनोई, आए थे अरे वही कांती बुआ के मरद, आए थे, करीब साल भर पहले, माँ बेटी साथ खड़ी थीं, तो बुच्ची को देखकर अपनी साली से, बुच्ची की माई से बोले,

"एकदम तोहार परछाई हो बुच्चिया, एकदम तोहार रूप जोबन मिला है।"



बुच्ची की माई खुश, अपनी बिटिया को दुलार से चिपकाकर एक हाथ उसके कच्चे टिकोरे पर रखकर, दुलार से चूमकर अपने जीजा को चिढ़ाते बोलीं,

"नजर जिन लगावा हमरे बिटिया को, ...मुर्गा फड़फड़ा रहा है का? अरे हमरे ऐसी नहीं, हमरो नंबर डकाई।"

और फिर हलके से बुच्ची के बस आते हुए चूजों को दबाकर, सहलाकर बोलीं, "अरे हमसे भी गद्दर होगा ये।"
Teej-MIL-ad6807f2cc9770c844daf1171c31c024.jpg

बुच्ची लजा गई

लेकिन जब आज उसने सुना कि उसकी माई के पिछवाड़े दो दिन में चार बार सूरजु भैया के मामा लोग चढ़े थे, उसकी भी हिम्मत बढ़ गई और सर झटककर उसने सब बातों को एक ओर झटक दिया, और छत पर देखा।



सीढ़ी पर मोटा सा ताला लटक रहा था, बुच्ची ने खुद बंद किया था।



कोहबर में कोहबर रखवाने वाली, मंजू भाभी, मुन्ना बहू और पूनम अंदर रजाई में धंस चुकी थीं, दरवाजा अंदर से बंद था। दूर-दूर तक गाँव में सोवता पड़ा था।



उधर लीला भी सोच भी रही थी, घबरा भी रही थी, चुमुनिया में चींटी भी काट रही


Girl-Y-e2a62bb0aa27acf56be0d9fd2e674182.jpg


आज शाम को उसने पूनम दी को भैया के साथ मस्ती करते देखा था, वो तो खुद ही अपनी साड़ी साया उठाकर भैया के खूंटे पर चढ़ गयीं, कितना मोटा था, लीला की कलाई से भी ज्यादा, और पूनम दी ने लीला से कहा कि वो पूनम दी का कन्धा पकड़कर दबाए और धीरे-धीरे तिल-तिल पूनम दी की प्यारी गौरेया, मुंह खोलकर उस चारे को घोंट रही थी।



"हे सुन स्साले, ये मत कहना कि तुझसे पहले अपने मरद को दे दिया तुझे बिन फटी चूत नहीं मिली, मैं तो हाथ पर लेकर घूम रही थी, पर गांडू तुझी ने लंगोट पहन लिया था। और तुझे झिल्ली फाड़ने का शौक है ना, तो ये लीला है न, फाड़ न इसकी। चीखेगी, चिंचियाएगी, खूब चूतड़ पटकेगी, हाथ पैर फेंकेगी नयी बछिया की तरह, तो सांड़ कौन बछिया को बिना पेले छोड़ता है, तू भी मत छोड़ना, बिना फाड़े इसकी झिल्ली। "



लीला देख रही थी इंजन के मोटे पिस्टन की तरह सूरजु भैया का ऊपर-नीचे पूनम की बिल में जा रहा था



WOT-212995-railing-penis-rock-hard.gif



लेकिन आधे से ज्यादा नहीं घुस पाया तो भैया ने पलटी मार दी और पूनम दी नीचे,

फिर क्या आंधी-तूफान की तरह, जैसे किसी हुड़कती बछिया पर पहली बार सांड चढ़ता है।



चार-पांच धक्के में भैया ने जड़ तक पेल दिया और नीचे से पूनम दी खुश होकर बोल रही थीं,

"अरे छिनार के पूत, भले मेरे मर्द ने पेल दिया है लेकिन साले का बीज मैंने नहीं लिया है, बच्चेदानी में, यहाँ दवा बंद करके आयी हूँ, और मेरा पेट तुझे ही फुलाना होगा, सब बीज तेरा अंदर लुंगी।"



दुबारा भैया ने पूनम दी को जब घोड़ी बनाकर पेला उसके पहले पूनम दी ने न सिर्फ लीला से पकड़वाया भी था और चूसते समय, दो-चार चुस्सी लीला ने भी ली थी,


FFM-BJ-1809215505240069d067b2b02791b5aa774a5e57.gif


मन तो उसका बहुत हो रहा था और खासतौर पर जिस तरह से वो पूनम दी के चेहरे पर खुशी छलक रही थी, जब भैया पेलते थे तो दर्द के मारे वो चीखती थीं लेकिन कुछ देर में ही सिसकने लगाती थीं मजे से।



एक बात और लीला ने देखी, पेल वो पूनम दी को रहे थे अपनी बचपन की सहेली को लेकिन बार-बार उनकी निगाह लीला की कच्ची अमिया से चिपक जाती थीं, और दूने जोश से धक्का मारते थे वो और पूनम दी भी उसी तरह नीचे से चूतड़ उठाकर बोलती थीं,

"अबे स्साले बहनचोद तुझे लीलवा की लेनी है न दे देगी, अरे आज ही दे देगी, मेरी छोटी बहिनिया है, कल सूरज निकलने के पहले ही अपनी कोरी गुल्लक तुझसे फुड़वा लेगी, क्यों लीलवा, लीलेगी न।"



तो लीलवा ने भी तय कर लिया आज और अभी लील कर रहेगी, बुच्ची और लीला एक दूसरे का हाथ पकड़कर चौखट डाँक गयीं, मुड़कर बुच्ची ने पहले तो कमरे की ऊपर की सिटकिनी लगा दी, फिर नीचे कु
ण्डी भी।
 
Last edited:

komaalrani

Well-Known Member
25,431
69,847
304
4
बुच्ची -- लीला

Two-grok-image-xhnhb5x.jpg


और सुरज भैया



जैसे सूरजु भैया की माई ने देखा था एकदम उसी तरह, सर से पैर तक चादर से ढंके, लेकिन खूंटा हाथ भर का खड़ा था और चादर किसी तम्बू की तरह तना था। ( और अगर उनकी माई को पता चल जाता की उनके पूत का मोटा मूसल काहें फड़फड़फा रहा है तो उनका ३८ का सीना ४२ का हो जाता। उनके पूत अपनी महतारी के बारे में ही सोच रहे थे,

जो सुलाकी ने बोला था, “ऐसे... ऐसे चढ़ेगी... बेटा का मोटा लंड माई की चूत में घुसेगा...घुसा... और घुसा... पूरा घुसा... अब मलाई निकलेगी... बेटा की गाढ़ी, गर्म मलाई माई की चूत में भर जाएगी..। कब मिलेगा वह मौका,)


Sulaki-4b33c1c7-3070-40be-9260-b1540f04498d.png



और उनके पूत ने भले ही सुलाकी का खुला खेल आज पहली बार देखा हो, लेकिन मालूम उसे भी था बियाह शादी में सुलाकी का कहा एक तो कभी झूठ नहीं होता और दूसरे औरतें कभी भी सुलाकी का कहना टालती नहीं, सुलाकी कुछ भी कह के जाए .




बुच्ची और लीला ने एक दूसरे को देखा दोनों किशोरियां मुस्करायीं, समझ दोनों गयीं थीं भैया स्साला नौटंकी कर रहा है।


बिन बोले, लीला ने बुच्ची की आँखों में आँखे डालकर एक शरारत भरा सवाल किया, और बुच्ची की मुस्कराहट ने छोटी बहन को जवाब दे दिया। बस एक झटके में लीला ने सरजू भैया का चादर खींच के दूर फेंक दिया, और दोनों किशोरियां शैतानी से मुस्कराने लगी, लेकिन निगाह दोनों की एक ही जगह थी।



खड़ा मोटा मूसल, जैसे हवा में लहराता बांस, हरियर कड़ा, मोटा, बित्ते भर से तो पक्का लम्बा था, डेढ़ बित्ते से कम नहीं था,


cock-thick-huge-dick.jpg


लीला का मन एक पल के लिए दहस गया, लम्बाई से ज्यादा मोटाई और खुला पहलवान छाप सुपाड़ा देखकर, ली;लीलवा की मुट्ठी के बराबर होगा, और लीलवा की बिल में उसकी सखियाँ सींक भी नहीं ठेल पाती थीं।

लीला ने बुच्ची की ओर देखा,

साल भर ही तो बड़ी थी और आज सांझ को ही मजे-मजे से घोंट गई थी, जड़ तक।

बुच्ची ने आँखों ही आँखों में लीला को दिलासा दिया, लीला लेगी तू भी।



और लीला को दुलारी भौजी की बात याद आयी जब सुलाकी आयी थी, एकदम अँधेरा हो गया था तो दुलारी भौजी ने सुशीला चाची की बिटिया, मीना, अरे लीला क समौरिया है, सहर से आयी है अंग्रेजी स्कूल में पढ़ती है, ओहि क टॉप खींचा, और कस कस के दुनो छोट छोट चूँची मसलत रगड़त बोलीं,

" अरे ननद रानी, अपनी महतारी क बुरिया से निकली हो न, तो कउनो लौंड़ा बच्चे इतना बड़ा नहीं होता तो जउन बुर बच्चा उगल देती है उसके लिए दुनिया क कउनो लौंड़ा मोट पातर नहीं होता। अरे तनी हिम्मत करा, एक दो दिन में तोहरो गुलाबो गाँव क एक से एक गन्ना चूस के निकाल देंगी "


Teej-05b3cb5fffb5f31e8b574926bf3e91b6.jpg


लीलवा का डर कम हो गया लेकिन मन अब बहुत जोर से कर रहा था, बुर एकदम लासा हो रही थी,



उसे एक बदमाशी सूझी, बुच्ची को देख के और एक झटके में उसने बुच्ची का टॉप खींच के दूर फेंक दिया, और हलके से बोली

" दीदी तोहार भैया तो एकदम नंग धड़ंग तो बहिनिया भी "
Bucchi-5-download.jpg


बुच्ची तो एकदम खुश, यही तो वो चाहती थी और जवाब में उसने लीला की फ्राक पकड़ के उतार दी और बोली,

" एकदम, लेकिन छोटकी बहिनिया किससे छुपा रही हैं, भैया तो सो रहे हैं "

और लीला ने बुच्ची की स्कर्ट खींच दी तो बच्ची ने लीला को बाँहों में बांध लिया और क्या कस के चुम्मी ली।

कोहबर के रखवाने में मंजू भाभी, इमरतिया और मुन्ना बहू ने उसे कन्या रस चूसने में उस्ताद बना दिया और उसके पहले शीलवा के साथ भी कितनी बार, हाँ हर बार लड़का शीलवा बनती थी। और अब तो सब भौजाइयां तो मौका पाते ही बुच्ची के साथ, खैर ननद के ऊपर तो भौजाई का हक ही है लेकिन अब बड़ी उम्र वाली भी, छोटी मामी, यहाँ एक की शीतल मौसी, सब के हाथ में बुच्ची को देख के खुजली मचती।



और अब लीला भी चुम्मी का जवाब चुम्मी से दे रही थी।

थी तो अभी कच्ची लेकिन जब अपनी भुआजाइ मुन्ना बहू के साथ रोपनी में जाती थी तो बड़ी उम्र की औरतों ने अपनी चुसनी चूसा चूसा के पेटीकोट के अंदर की चुसनी के रस का चस्का लगा दिया था


Lez-69cz-T3-J7-Ru-Ofplez-Zf-Xje-UNQUk-Sdtbp-Avu-Rptx-LUVkqm-BZL2t-AP1g3-Xgfzwk-Hb9-N6-Jfe-Htb-VDh-Y.gif


थोड़ी देर में दोनों लड़कियां सूरजु भैया के बगल में करीब करीब सटी लेटी थी, लीला नीचे, बुच्ची ऊपर सिक्स्टी नाइन वाली पोजीशन में, बुच्ची का सर और लीला की रसमलाई एकदम सूरजु दूल्हा के सर के पास ही थी।

बुच्ची को भाभियों ने चूत चूसना अच्छे से सीखा दिया था,

सीधे सुरंग में मत घुसना, तो पहले आराम से लीला की बुच्ची ने जाँघे फैलायीं, हलके से उँगलियों से सहलाया, और जोर से दबा के जाँघों को और फैलाया।

लीला की बुर दुब दुबा रही थी, खूब मांसल फांके रस से डूबी, एकदम चिपकी, अबतक सहेलियों ने, भाभियों ने बहुत कोशिश की लेकिन कोई ऊँगली का एक पोर भी नहीं घुसा पाया। बुच्ची ने बस जीभ की फांक से दरारों के बीच सहलाया, ऊपर से नीचे, नीचे से ऊपर एक बार , दो बार , दस बार, एक तार की मीठी चाशनी बहने लगी


lez-pussy-kiss.jpg


" उफ्फ्फ, ओह्ह नहीं दी दीदी छोड़ न ओह्ह कैसा लग रहा है उफ्फ्फ " बुच्ची धीरे धीरे सिसक रही थी।



बुच्ची ने देखा कनखियों से भैया चुपके-चुपके ललचाई नज़रों से लीला की खुली जांघे देख रहे हैं।

बुच्ची ने अब पूरी ताकत से लीला की चिपकी फांके दोनों हाथों से जोर लगा कर खोल दी, बुलबुल ने चोंच चियार दी, बस जरा सी चोंच खुली थी, अंदर गुलाबी रसीली दीवालें दिख रही थीं /

बेचारे सूरज की उस कच्ची कली की कच्ची चूत को देख के हालत खराब हो रही थी, जैसे ताज़ी जलेबी रस में डूबी हो,
guddi-pussy-r-GYWN8ob-Ml.jpg


सूरजु की हालत देख के बुच्ची को बहुत मजा आ रहा था, और झट से उसने लीला की मुश्किल से खुली चूत को अपनी हथेली में छिपा लिया और बहुत हलके से फुसफुसा के अपने भैया से बोला,


" क्यों भैया चाहिए लीलवा की, एकदम कच्ची है, बहुत मजा आएगा इसकी फाड़ने में



सूरजु भैया का चेहरा चमक गया, वो मुस्कुराने लगे।

" अरे देगी देगी, मेरी छोटी बहन की तरह है, नहीं देगी तो जबरदस्ती लेलेना, है न मस्त चुनमुनिया "

बुच्ची ने लीला की बिल पर से हाथ उठाते हुए सूरजु भैया को ललचाया।



एक बाल के बराबर दरार दिख रही थी बस। गुलाबी, एकदम मक्खन-चिकनी, झांटे बस आ ही रही थीं।



" ऐसी नहीं मिलेगी मेरी छोटी बहन की, मुंह खोल के मांगना पड़ेगा, और मेरी हर शर्त माननी पड़ेगी " हंस के भैया को चिढ़ाते बुच्ची ने उकसाया



" दिलवा दे यार, सच्ची बहुत मस्त लग रही है " भाई के बोल फूटे।

" मेरी सब बात माननी होगी, तब मिलेगी ये कच्ची कली" हंसकर बुच्ची ने अपने भाई को चिढ़ाया।



Bucchi-1-download.jpg


और हलके हलके हथेली से लीला की बुर सहलाने लगी, ऊँगली से बस दरार को खोद देती, कभी दोनों निचले होंठों को फैला के लीला की कसी चूत के अंदर का नजारा दिखा देती, एकदम चिपकी।

बेचारे सूरजु की हालत खराब हो रही थी और न सिर्फ लीलवा की बिल देख के बल्कि लीलवा की शैतानी से भी।


लीला के होंठ तो नीचे से बुच्ची की बिल से की छूसँ चुसाई कर रहे थे पर उस बदमाश लड़की का हाथ सूरजु के खड़े खूंटे पे, पहले तो उसने मुट्ठी से पकड़ने की कोशिश की पर वो बहुत ही मोटा था, पर लीला तो छिनरों के गाँव की, उसने अंगूठे से हलके हलके खुले मोटे सुपाड़े को छेड़ना शुरू कर दिया



सुपाड़ा फड़फड़ा रहा था। अभी अभी सुलाकी का फिर चोर सिपाही जो सूरजु ने देखा था एक से एक भदेस गाने सुने थे उसकी हालत वैसे ही खराब थी।



और फिर लीलवा ने कोशिश कर के मुट्ठी में पकड़ ही लिया और हलके हलके आगे पीछे,



बुच्ची कस कस के लीला की बुर चूस रही थी और लीला अब एकदम झड़ने के कगार पर थी, देह उसकी तूफ़ान के पत्ते की तरह काँप रही थी , आँखे बंद हुयी जा रही थीं और वो जोर जोर से सिसक रही थी



और चूसना बंद कर के चूत फैला के सूरजु को साफ़ साफ दिखाते हुए बुच्ची ने फिर पुछा,


" लास्ट चांस भैया, बोल बुच्ची की, अपनी छोटी बहन की सब बात चुपचाप मानोगे की नहीं, अगर ये माल चाहिए, बंद दरवाजा खोलना है तो बोल साफ़ साफ़ "

pussy-teen-IMG-0293.jpg


" हाँ यार, बुच्ची तेरी सब बात मानूंगा, दिलवा दे न। सब बात जो कहेगी, कितनी मस्त गुलाबी कसी कसी " थूक घोंटते हुए बड़ी मुश्किल से सूरजु ने कबूला , मन उनका जबरदस्त कर रहा था ,

" चल यार भाई है तो इतना तो करना ही पड़ेगा " बुच्ची बोली और अब वो लीला की बिल छू भी देती तो वो झड़ जाती, इतना गरमा गयी थी।

बुच्ची लीला के ऊपर से उठ गई , लेकिन उसका भाई भी कम कमीना नहीं था।



आँखे बंद कर के वो भी झूठ मूठ का सोने का नाटक करने लगा, हाँ मूसल अब एकदम पागल हो रहा था
 
Last edited:
🔥 Read Next Hot Story →
Discover more exclusive stories

komaalrani

Well-Known Member
25,431
69,847
304
लीला

Girl-Y-c50712ddf34e02aba13f9849f29000f6.jpg


लेकिन बुच्ची के भाई से ज्यादा लीला गर्मायी थी,


एक तो बुच्ची की जीभ ने जिस तरह लीला की कुँवारी चिकनी चूत को चाटा था,

फिर वो सूरजु के मोटे कड़े खूंटे को देख के ललचा रही थी, और उसने तय कर लिया था, अब चाहे फ़टे चाहे चीथड़े हो जाएँ, वो तो अभी घोंट के रहेगी। फिर वो बंसती भौजी यही तो शहर वाली मीना को समझा रही थीं,

"अरे नन्दो, फटने वाली चीज तो फटेगी ही, आज नहीं तो कल, फिर क्या इन्तजार करना। जितना जल्दी फ़टे उतना ज्यादा मजा "
Teej-Gao-Wet-2895b611d702694556a25aa01aa875d8.jpg


तो लीला अब फड़वाने के लिए न सिर्फ तैयार थी बल्कि व्याकुल हो रही थी।

और पहल उसी ने की, बुच्ची को उकसाया, " दी, तेरे भैया बहुत निन्दासे हो रहे हैं, लेकिन ये तो जगा है "

फनफनाते हुए खूंटे की ओर इशारा करके वो गाँव की किशोरी बोली।



सही है। आदमी झूठ बोल सकता है, लेकिन उसका लंड कभी झूठ नहीं बोलता।

बुच्ची अब बिंदास हो गई थी। लड़की की अक्ल असल में एक बार हचक के चुदने के बाद ही खुलती है और अक्ल जितनी जल्दी आ जाए उतना अच्छा।



बुच्ची बात से ज्यादा काम में विश्वास रखती थी और भौजाइयों ने सीखा दिया था की खड़े लंड को देख के भी जो लड़की कुछ न करे उससे बड़ी बेवकूफ कोई नहीं।

तो बस बुच्ची ने एक हाथ से भाई के मोटे खूंटे को पकड़ा, और जीभ से बस खुले बौराये सुपाडे को चाटने लगी,

BJ-Lick-IMG-6336.jpg



लीला स्कूल की उस नदीदी लड़की की तरह ललचा रही थी, जो दूसरी लड़की को लॉलीपॉप लिक करती देखती है और सोचती है

कमीनी एक लिक तो दे ही सकती है, ....अकेले अकेले,

पर बुच्ची अकेले अकेले टाइप नहीं थी, और उसने इशारे से लीला को बुलाया और फिर दोनों कच्ची उम्र की किशोरियां मिल के उस मुस्टंडे को चाटने लगीं,

बुच्ची ने लीला का हाथ पकड़ के अपने भैया का खूंटा पकड़ा भी दिया, एकदम गरम दहकता लोहे की रॉड की तरह कड़ा,



छूकर ही लीला की सुरमेदानी में आग लग गई, मन कसक रहा था अंदर लेने के लिए।


FFM-G-mainthumb-vertical.jpg


उधर बुच्ची थोड़ी देर कस कस के सुपाड़ा चूसती थी, फिर अपना मुंह हटा के उसे लीला को ऑफर कर देती थी और देखा देखी लीला भी खूब बड़ा सा मुंह खोल के, गड़प।



ऐसा नहीं है की बुच्ची मजे नहीं लेती थी, सुपाड़ा लीला के मुंह में तो चर्मदण्ड बुच्ची चाटती थी,

इतना मोटा सुपाड़ा तो सपड़ सपड़ बाएं से लीला और दाएं से बुच्ची, गन्ना लीला ने गटका

तो दोनों रसगुल्लों का रस बुच्ची बारी बारी से,


b-J-BALL-tumblr-nc7a1u-Ed-Ht1tmuzbzo1-r1-400.webp


और बुच्ची पक्की छिनार, सच में अपनी महा छिनार माई का भी नंबर डकाने वाली, और ऊपर से भाभियों ने सिखा पढ़ा के पक्का कर दिया,

भैया का लम्बा चमचम चूसते चाटते, उसकी उँगलियाँ भी कभी भैया के जाँघों पर सरकती, फिसलतीं तो कभी बदमाश बुच्ची, भैया की पिछवाड़े की दरार में सेंध लगाने की कोशिश करती

पांच मिनट की दोनों की शरारत में सूरजु भैया की हालत खराब हो गई।



लीला लाख कोशिश कर के पूरा सुपाड़ा मुंह में नहीं ले पा रही थी, और बार बार यही सोच रही थी की इतने चौड़े मुंह में तो घुस नहीं पा रहा है, चींटी की बिल ऐसी बुरिया में कहाँ से घुस पायेगा।


BJ-slow-dick-sucking4.gif


" हे लीलवा पूरा ले न " भैया उठ गए थे और लीला का सर पूरी ताकत से अपने फहराते झंडे पर दबाते बोले , बेचारे मन तो उनका बहुत कर रहा था उस कच्ची कली का निवान करने का, वो तो बुच्ची से भी छोटी थी और बुच्ची की झिल्ली फाड़ने में जब इतना मजा आया तो इस स्साली की खूब दबाकर फाड़ने में तो एकदम ही,

" अरे लीलवा ले लेगी, और खाली मुंह में नहीं लेगी, नीचे वाले में भी लेगी अभी देखना , मेरी छोटी बहन है। और तुम क्या इतनी लंबी मीनार खड़ी किए हो का खाली अपनी महतारी के लिए ? वो तो सुलाकी बोल ही गयी है खुद चढ़ेंगी इस कुतुबमीनार पे आम की बगिया में :

बुच्ची ने चिढ़ाया और भैया के साथ खुद भी लीला के कंधे को दबाया



गप्प, सुपाड़ा अंदर चला गया था और तिल तिल करके बाकी मौसल भी आधा करीब चार पांच इंच लीला के मुंह में,


BJ-deep-tumblr-oun1nvj-Q051rflx78o1-400.gif


लीला गों गों कर रही थी, आँखे बाहर उबल रही थीं, मुंह फटा जा रहा था, लेकिन इस गाँव की लडकियां हिम्मती थीं, भाई, बाप, मामा सब का,



पर थोड़ी देर में लीला ने मुंह बाहर निकाल के सूरजु को चिढ़ाया

" भैया खाली ऊपर वाले मुंह में डालोगे या "


Bucchi-3-download.jpg


और दोनों शरीर लड़कियां भाई को छोड़ के भाग खड़ी हुयी, और बुच्ची बोली,


" भैया जिसको पहले पकड़ेंगे उसकी पहले लेंगे "



सूरजु लीला की ओर बढे लेकिन वो कन्नी काट के निकल गयी, फिर दूसरी बार पकड़ी गयी तो सूरजु दूल्हे के कान में कुछ फुसफुसाया और मछली की तरह फिसल कर सरक गयी,

और दोनों लड़कियां कमरे के दोनों कोनो पे और अंगूठा दिखा के हंस रही थीं

" लास्ट चांस " लीला बोली और एक बार वो फिर लपके, लीला की ओर
 
Last edited:

komaalrani

Well-Known Member
25,431
69,847
304
और बुच्ची पकड़ी गयी
Girl-14eab749b3e2d5326703166681c36515.jpg


लेकिन सूरजु अखाड़े के माने पहलवान,, बीसो दांव पेंच जानते थे, और ये कल की लड़कियां, लपके वो लीला की ओर लेकिन दबोच लिया उन्होंने बुच्चीको ।



बुच्ची सोच रही थी, भैया तो अभी लीला के पीछे पड़े हैं, और वो कमरे से छत की ओर खुले वाली खिड़की के पास खड़ी थी।

बुच्ची ने खिड़की खोल दी और चांदनी छिटक कर उसके चेहरे और देह से छलकती हुई पूरे कमरे में फैल गई थी। बाहर खुली छत ( जहाँ थोड़े देर पहले जबरदस्त नाच गाना और मस्ती हुयी थी ) और उसके पास अँधेरे में खोये, आम के घने बाग़, गन्ने के ऐसे खेत जिस में दिन में हाथी छुप जाए और सरसराती बँसवाड़ी दिख रही थी।


Bucchi-in-window-A-cinematic-late-night-scene-i-1.jpg


खिड़की को पकड़ के झुकी थी की पीछे से सूरजु भैया ने पकड़ लिया और वो कमीनी लीला भी उसे चिढ़ाने आ गयी

Bucchi-Bend-nude-A-cinematic-late-night-scen.jpg


" भैया देखिये दीदी पहले से ही निहुर करके घोड़ी बनी खड़ी हैं, पेलवाने के लिए ब्याकुल "

लीला हँसते हुए सूरजु को उकसाते हुए बोली।



जैसे साँड़ चढ़ता है बछिया पर सूरजु ने अपनी छोटकी बहिनिया को पीछे से छाप लिया, दोनों हाथ से छोट छोट जोबना दबोचा, पैरों से झुकी हुयी बछिया के पैरों को फैलाया, और सटाने के लिए लीला पहले से तैयार खड़ी थी।


शाम को पांच छह घंटे पहले इसी कमरे में इसी खिड़की पर निहुरी पूनम दीदी को पेलते उसने सूरजु दूल्हे को देखा था, एकदम बगल में खड़ी हो के और उसे ये भी मालूम था की कडुवा तेल की शीशी कहाँ रखी है।

लीला ने ढेर सारा तेल हथेली पे चुपड़ा, कुछ भैया के खूंटे पे लगाया, कुछ बुच्ची की बिल के मोहाने पे और बुच्ची की दोनों फांके फैला के सीधे शीशी का मुंह लगा के थोड़ा तेल बिलिया को पिला दिया और बुच्ची की दुबदबाती बुर पे, फांके फैला के दूल्हे का मोटा सुपाड़ा फंसा दिया।

पहला धक्का,



Doggy-Fucking-IMG-7622.jpg

"उईईई उईईई नहीं ओह्ह्ह जान गयीईइ अरे भैय्या आराम से ओह्ह नहीं , आह उफ्फ्फ्फ़ "

बुच्ची की चीख छत से दूर, आम की बाग़ और गन्ने के खेत पार, जो चांदी की हँसुली सी पतली सी नदी थी, गाँव को अपनी गोद में समेटे, दुबकाये, वहां तक पहुन्ह्च गयी।



लेकिन लौंडा सीख गया था, एक तो इमरतिया भौजी, मंजू भाभी और रामपुर वाली भौजी ऐसी सिखवइया और सबसे बढ़कर बड़की ठकुराइन ऐसी महतारी,


उसे अब मालूम पड़ गया था की लौंडियों की चीख से न तो रुकना चाहिए न हदसना चाहिए, जितना जोर से चीखे, रोये, माई बाप करें, उतना ही और जोर से ठोंकना चाहिए, और जब तक सुपाड़ा अंदर न घुस जाए, पूरी तरह, कस के चांप के रखना चाहिए, चाहे जितना छटपटायें, हाथ गोड़ फेंके, ठेलते रहना चाहिए, पेलते रहना चाहिए।



तो बुच्ची कहरती रही, सिसकती रही, लेकिन सूरजु बहिनिया की बिलिया में घुसाता रहा, जब तक मुट्ठी ऐसा पूरा सुपाड़ा अंदर नहीं चला गया।
Fucking-doggy-CU-17776725.jpg


लीला आँखे फाड़े देख रही थी, ऐसा नहीं उसने चुदाई नहीं देखी थी पहले, गाँव देहात की लड़की, कितनी बार,

पर पहले आज पूनम दीदी की इतनी नजदीक से देखी, पर वो तो चलो साल भर की ब्याहता थी, बुच्ची दीदी तो उससे मुश्किल से साल भर की बड़ी, बिल इतनी कसी की ऊँगली न जाए और कैसे मोटा सुपाड़ा भैया का अपने, रोते कराहते घोंट ही गयीं /


OK-Bucchi-Bend-fucking-A-cinematic-late-night-scene-i-3.jpg


लीला को लगा अब वो भी दर्द तो बहुत होगा लेकिन घोंट लेगी और जब उसने बुच्ची के चेहरे की ओर देखा तो दर्द जैसे घुल रहा था और एक अलग ढंग की ख़ुशी आ रही थी, हलकी सी मुस्कराहट से मुड़ के उन्होंने पहले अपने भैया को फिर लीला को देखा और हलकी सी दर्द भरी मुस्कराहट से लीला को गरियाया,

" छिनार, अभी तुझे इसी लौंड़े से न चुदवाया, तेरी झिल्ली न फड़वायी तो मेरा नाम बुच्ची नहीं "

" अरे दीदी पेलवा दीजियेगा अपने यार का लंड, लेकिन पहले आप तो घोंटिये "

लीला ने हलके से झुकी बुच्ची के चूतड़ सहलाते हुए कहा और जैसे इशारा पाकर सूरजु भैया ने पूरी ताकत से धक्का मार दिया



चुदाई फूल स्पीड में शुरू हो गयी थी।


fucking-doggy-tumblr-oo3hqulo-Zz1w49qypo1-500.gif


कैसे कोई तूफ़ान मेल के इंजन में पिस्टन अंदर बाहर हो रहा था, घचर घचर, घचर घचर, रगड़ता दरेररता अंदर घुस रहा था,

लीला कभी उस कैसे संकरे छेद में घुस रहे मोटे बांस को देखती, आंगन में नीचे माण्डव में जो बांस लगा था उससे तो सूरजु भैया का मोटा ही होगा



तो कभी बुच्ची के चेहरे को देखती, देह अभी भी दर्द से तड़प रही थी, ऐंठ रही थी,

पर चेहरे पर क्या जबरदस्त ख़ुशी थी जैसे जिन्दगी भर का सपना पूरा हो गया हो। कभी अपने दांतो से कस के होंठों को काट के चीख रोकती तो कभी दोनों हाथों से खुली खिड़की को इतना कस के पकड़ लेती जैसे उसे अंदाज हो गया हो की अगला धक्का जो आएगा, वो पहले से भी तूफानी होगा,



और हो भी यही रहा था , दस बारह ताबतोड़ धक्को के बाद, हथौड़ा करीब २/३, छह सात इंच अंदर घुस गया था, और वैसे तो सात आठ घंटे पहले ही भाई ने अपनी छोटी बहन को हचक के चोदा था और सब मलाई अंदर उंडेली थी, जो अभी तक बची थी। लेकिन बहन की बिलिया ऐसी थी भाई के खूंटे को निचोड़ने पर लगी थी।

पर सूरजु ने गियर बदला ,



आज छोटी मामी आई थीं, ऊपर सूरजु के कमरे में, पूनम और लीला के जाने के बाद। जब गाना शुरू हुआ था उसके पहले और दस मिनट में बीस ट्रिक सिखा के चली गईं।

Teej-5fcfc82f3a3c97dcf8eecd979587ed95.jpg


छोटी मामी का बियाह हुए मुश्किल से चार साल हुआ था, और छोटे मामा सबसे छोटे थे, तो छोटी मामी का कोई देवर नहीं, बस उन्होंने सूरजु को ही अपना देवर बना लिया।



छोटी मामी कुछ ज्यादा ही उसे छेड़ती थीं, घर क्या मोहल्ले टोले की सबसे नयी बहु, और सूरजु के पीछे तो हाथ धो के, जितना वो लजाधुर उतना ही छोटी मामी उन के पीछे, छोटी सी चोली पहनती और जोबन छलकते रहते, बियाह के बाद नयी दुल्हिन तो दूल्हे की मलाई घोट के मरद की देह लग के रस की छलकती गागर हो जाती हैं। छोटी मामी तो वैसे रस क पुतली, कम उम्र में शादी, गौना सब हो गया, उमरिया क बारी, जोबन का भारी, जोबन सम्हलाते नहीं सम्हलता था, और ऊपर से जिसके ऊपर उन्हें रगड़ने मसलने की जिम्मेदारी थी वो दस दिन में ही नौकरी पर चला गया,



और बाकी लौंडो की तरह सूरजु भी ललचाते थे, लेकिन झिझकते थे तो बस चोरी छिपी, कनखियों से और फिर तो छोटी मामी पीछे पड़ गयीं

" हे तोहार मामा तो चले गए तो अब भानजे से ही काम चलाऊंगी, सीधे से नहीं मानोगी तो जबरदस्ती, वो का कहते हैं रेप। अरे खड़ा वड़ा तो होता होगा, पानी कभी निकला,…? “


teej-2-desktop-wallpaper-shriya-saran-navel-shriya-saran-saree-navel-shriya-saran-hot-navel-shriya-s.jpg


और एक दिन फागुन लगा था, उसी दिन, सूरजु अकेले पहुँच गए ननिहाल और छोटी मामी पीछे पड़ गयी, " कच्ची कली लगते हो, सील तो तेरी टूटी नहीं है, लेकिन कउनो बहिन भौजाई चुम्मा उम्मा दी की नहीं " और जब तक सूरजु सम्हले, हलके से धक्का देकर बिस्तर पर और खुद ऊपर चढ़कर क्या जबरदस्त चुम्मा लिया छोटी मामी ने। अपने दोनों रसीले होंठों के बीच सूरजु के होंठ दबाकर पांच मिनट तो चूसा होगा।



परसों शाम को आयी थीं, सूरजु नीचे आंगन में, सब औरतें लड़कियां भी। अपनी ननद, से गले मिलने के बाद सूरजु को देख के सीधे दोनों ऊँगली से छेद बना के एक ऊँगली उसमे डाल के, सबके सामने चुदाई का इंटनेशनल सिंबल, हचक हचक के और सूरजु को छेड़ते बोलीं,

" तैयारी हो गयी, नए माल के साथ, कुछ प्रैक्टिस हो रही है, रोज "



सूरजु की माई अब उन्हें फरक नहीं पड़ता था की जवान बेटा सामने खड़ा है, शादी बियाह का घर, अब हंसी मजाक नहीं होगा तो कब होगा, अपनी भौजाई, सूरजु की छोटी मामी को छेड़ते बोलीं,



" तोहरे इन्तजार था, तोहरे ऐस मायके क खेली खायी कहाँ मिलेगी, सिखानवेवाली ८४ आसन "

तो पहली बात छोटी मामी ने बताई आज चुम्मा, और समझाया भी गाल पे, और चूँची पे चुम्मा तो कुल मरद ले लेते हैं, असली बात है बाकी देह में कहाँ लेना है, और खाली माल को गरम करने के लिए नहीं पेलते समय भी। फिर छोटी मामी ने कान की लोर से लेकर, गले के पिछले हिस्से, कंधे, पीठ के ऊपरी हिस्से से लेकर कांख और चूतड़ तक बीसो जगहें बताई कुछ की प्रैक्टिस कराई और साफ़ साफ़ बोला जब निहुरा के लो किसी की तो जरूर ट्राई करना



और अब सूरजु ने गियर बदल दिया, चुम्मी की बारिश, और बीच बीच में सूरजु के होंठ गर्दन के निचले हिस्से पे बुच्ची को चूमते, और बस जैसे कोई सितार पर मींड बजा रहा हो, होंठ बिना अलग हुए हलके से मेरुदंड को सहलाते छूते और उँगलियाँ जैसे तबले पर बहुत हलके से थाप दे रही हों,



उसी तरह बुच्ची के छोटे छोटे चूजों की तरह उरोजों पर बस कभी छूती कभी सहला देतीं,


Nip-suck-m-ldpwiqacxt-E-Ai-mh-HEvf-Xow-FTp-QTSn5f-39197251b.gif


चुम्बन यात्रा गोल नितम्बों पर पहुँच के रुकी और एक बार फिर गालों पर



बुच्ची पिघल रही थी, सिसक रही थी, मजे के नए द्वार खुल रहे थे, मस्ती का यह पाठ उसने कभी सोचा भी नहीं था, पूरी देह लग रहा था सितार पर कोई झाला बजा रहा हो, लेकिन सूरजु ने अचानक कस के कचकचा के बुच्ची का गाल काट लिया, ठीक उसी जगह पर जहाँ अभी भी गाल काटने का गहरा निशान था।



( और यह बात भी छोटी मामी ने सिखाई थी, जिस स्साली को चोदो,चाहे लड़की हो या औरत ऐसे चोदो की कमरे से निकल के चल न पाए। लेकिन उससे भी जरूरी बात पक्का निशान दे दो। अब हर कोई बुर खोल के मलाई तो चेक नहीं करेगा, तो ऐसी जगह निशान दो, जहाँ वह लाख कोशिश करे तो भी न छिपा पाए। गाल पहले चूस चूस कर के लाल कर दो और फिर उसी जगह पर, असली खेल चूसना है, गाल जहां फूला हो, बस वहीं होंठों के बीच भरकर, घडी देखकर कम से कम एक मिनट तक चूसते रहो, फिर छोड़ने के पहले हलके से दांत लगा लो, और फिर दो चार मिनट बाद थोड़ा पेलने के बाद, एकदम उसी जगह पर उसी तरह से चूस के अबकी कचकचा के काट लो। कम से कम पांच बार और उसके कमरे से निकलने के पहले चूमा लेते हुए एक बार फिर उन्ही जगहों पर,



love-bite-OIP.jpg



और दूसरी जगह है चूँची। तो छोटी छोटी लड़कियां भी अपनी चूँची झलकाती फिरती हैं तो बड़ी उम्र की औरतें तो शादी बियाह में आधा जोबन उघारे फिरती हैं, तो बस चूँची के ऊपर के हिस्से पे एकदम उसी तरह। छोटी मामी ने पांच जगहें बताई थीं और सूरजु ने वहीं चुन चुन के अपनी छोटी बहन पे अपना निशान लगाना शरू किया,

bite-on-boobs-666-6-images.jpg


बुच्ची मुस्करायी और फिर क्या गालियां दी उसने अपने भाई को,

" ओह्ह मादरचोद, तेरी माँ का भोंसड़ा नहीं है, स्साले तेरी माँ के भोंसडे में अपने सूरजु भैया का मोटा लंड घुसवाउ, क्या करतें हो भैया, ओह्ह्ह्ह "

और सूरजु ने जवाब अपने ढंग से दिया, खूंटा सुपाडे तक निकाल के बाहर कर लिया और क्या जबरदस्त धक्का मारा, दूसरे धक्के में ही हथोड़ा उसकी बहन बुच्ची के बच्चेदानी पर,

बुच्ची तूफ़ान में पत्ते की तरह काँप रही थी , कस कर खुली खिड़की को उसने पकड़ रखा था



बुर बुरी तरह फैली थी, बार बार सिकुड़ फ़ैल रही थी, मोटे हथौड़े की चोट से बच्चेदानी एकदम हिल गयी थी,

बुच्ची की साँसे तेजी से चल रही थीं, आँखे बंद हो गयी थीं, देह सिहर रही थी, रोयें सब खड़े थे, वो तेजी से झड़ रही थी, देह में जैसे एक लहर चले, किनारे से टकरा के रुके, फिर दूसरी मजे की लहर चालू हो जाए, एक के बाद के



सूरजु भइया एकदम जड़ तक धंसे, बिना कुछ किये बस अपनी बहन को कस के पकडे, देह से देह चिपकी,



चार पांच मिनट के बाद धक्के फिर शुरू हुए लेकिन लीला ने देखा की भैया की निगाह बार बार दी के पिछवाड़े वाले छेद पर पड़ रही थी, वो मुस्कराने लगी और समझ गयी भैया का क्या मन कर रहा है।
 
Last edited:

komaalrani

Well-Known Member
25,431
69,847
304
बुच्ची का पिछवाड़ा
ass-hole-tumblr-5b71438c9989417bf0d9048382a12572-5d60af17-400.webp


गोल गोल छेद, लेकिन एकदम कसा, अगल बगल भी सिकुड़ा, जैसे किसी ने मुट्ठी बंद कर रखी हो और जिद्द पर अडी हो, जान चली जाए पर मुट्ठी नहीं खुलेगी। और

मस्त फूले फूले चूतड़, जैसे दो पहाड़ों के बीच कोई दर्रा छिपा हो,



भैया का मन कर रहा था लेकिन हिम्मत नहीं पड़ रही थी, पर लीलवा थी न, मुंहफट बोल पड़ी,

" अरे भैया ललचाइये मत ले लीजिये, आपकी छोटी बहन की ही तो है, बुच्ची दी एकदम मना नहीं करेंगी "



लेकिन बुच्ची दी, छिनार नहीं पक्की जन्म की छिनार, महा छिनार की बिटिया, मन तो उस छिनार का भी कर रहा था, और वो जानती भी थी आज बिना गाँड़ मरवाये, इस कमरे से वो निकल नहीं सकती, लेकिन वो मौके पे चौक्का मारने वाली, बड़ी जोर से चीखी



" नहीं भैया उधर नहीं, वहां नहीं घुसेगा " लेकिन आज लीलवा भी मुन्ना बहु की ननद, एकदम गर्मायी, बुच्ची को चिढ़ाती बोली

" अरे तोहार भैया पत्थर क दीवार में घुसाए दें तो घुस जाएगा, और तोहसे पूछ थोड़े रही हूँ, बता रही हूँ "
cute-girl-picture-for-dp.jpg


" अरे चूत मरानो, बहुत तोहरी बुरिया में आग लगी है न , आज और अभी अपने भैया से तोहार बुरिया कुटवाइब तो तोहार गर्मी ठंडी होगी, जब भैया तोहार झिल्ली फाड़ेंगे न "

बुच्ची गरियाते हुए बोली,

लेकिन बुच्ची की बात बीच में रह गयी और लीला ने अपने कोमल किशोर हाथ से भैया का खूंटा बुरिया से निकाल के गोल दरवाजे पर लगा दिया


anal-cu-IMG-20230629-195640.jpg



और बुच्ची से बोली,

" चलिए दी आपकी ये शर्त मान ली मैंने, आप बस एक बार गाँड़ मरवा लीजिये अभी, फिर भैया से क्या, आप जिससे जिससे, जहां जहाँ कहिये चुदवा लुंगी। और झिल्ली का क्या आज नहीं तो कल फटनी है तो आज ही फट जाये , और कोई शर्त हो तो वो भी बता दीजिये, मुझसे, आपके भैया से "

" अरे उस मादरचोद, बेटा चोद के पूत से कह दो, मेरे पिछवाड़े सेंध लगाने के पहले एक शर्त उस को भी भी माननी होगी । "

बुच्ची ने मौके का फायदा उठाया,



चूत और गाँड़ दो ऐसी चीजें है औरत के पास जिसके लिए मरद से जो चाहे वो मनवा ले,

और सरजू तो न जाने कब से अपनी छोटी बहिनिया क छोट छोट चूतड़ देख कर लपलपात रहे, और अब सुपाड़ा ने एक बार गाँड़ की महक सूंघ ली थी तो वो रुकने वाला नहीं था, तुरंत उन्होंने हाँ कर दी।

लेकिन बुच्ची ऐसे छोड़ने वाली नहीं थी, और बुच्ची ने अपने भैया से कबुलवा लिया की अपनी महतारी की भी वो हचक हचक के गाँड़ मारेंगे और वही अमवा वाली बगिया में, भैया ने हामी भर दी।
छोटे से छेद के लिए आदमी क्या नहीं कबूल लेता, लेकिन उसकी बहन ऐसी सीधी नहीं थी।

बुच्ची ने पांच बार कबुलवाया और लीला की हामी भरवाई की बड़की ठकुराइन, सूरजु की माई की गाँड़ सूरजु भैया जरूर मारेंगे और वो भी बस दो तीन दिन में बरात जाने के पहले।


Bucchi-019fd057-1f40-7b9f-b09c-755af532eeb1-raw.png


लेकिन लीला गवाह बनने के साथ एक काम और कर रही थी।

तेल की शीशी उसने उठा ली और बुच्ची के पिछवाड़े के छेद को अच्छी तरह से फैला के बस सीधे बोतल ही घुसेड़ दी।

बुच्ची निहुरी तो थी ही, सीधे बोतल से ढरक कर सरसों का तेल, सरकता हुआ, बुच्ची रानी की गाँड़ में और जब तक आधी बोतल खाली नहीं हो गयी, लीलवा पकडे रही। सरजू ने भी कस के बुच्ची को दबा दिया जिससे दोनों चूतड़ हवा में उठे और सर एकदम निहुरा, बाकी का काम गुरुत्वकर्षण शक्ति ने किया। लीला ने बोतल निकाल के हाथ में लेकर काफी तेल गुदा द्वार के मुहाने पर

और बाकी सूरजु के सुपाडे पर चुपड़ दिया,



सूरजु को भी इमरतिया ने पीछे की भी बीसो तरकीबें सिखाई थीं और न जांगर की कमी थी न औजार कमजोर था। बस पूरी ताकर से उसने अपनी किशोर दर्जा नौ वाली बहिनिया के पिछवाड़े का दरवाजा दोनों हाथ लगा के खोल दिया, दोनों हाथ के अंगूठे लगा दिया और सुपाड़ा सटाने का फंसने का काम लीलवा ने किया।

बुच्ची चिल्ला रही थी, चीख रही थी, गरिया रही थी, अभी से लग रहा था पिछवाड़े किसी ने एक पसेरी लाल मिर्चा कूट दिया है ,



" स्साली रंडी,;लीलवा अभी जब घोड़े का लंड लीलेगी,... अभी जब तेरी झिल्ली फटेगी न, तो नौ नौ आंसू बहायेगी, रो रो के बुरी हालत होगी तेरी। जिस खूंटे को इतना दुलरा रही है न वही तेरी सहेली की चीथड़े चीथड़े करेगा "


anal-ruff-tumblr-26a1d7cb3852b47940100b34c0b1ff37-32b0ef07-500.webp


लीला मुस्कुरा रही थी, खूंटे के बेस को उसने कस के पकड़ रखा था।



और सूरजु ने पूरा जोर लगाया,

( छोटी मामी ने आज यह भी बात बताई थी, चाहे किसी कच्ची उम्र वाली की झिल्ली फाड़नी हो किसी लौण्डे/ लौंडिया की गाँड़ मारनी हो, दो बातें, एक तो अर्जुन की तरह चिड़िया की आँख मतलब लौंडिया क छेद पे ध्यान दो और दूसरे जितना देह में जितना जांगर हो, उससे ज्यादा ताकत लगा के ठेलो, चूतड़ का जोर, कमर का जोर और यही परीछा है मरद की )



और जांगर की कमी तो उनमे थी नहीं, इमरतिया भैजी ऐसी घाट घाट का पानी पी, की चूल चूल ढीली हो गयी और ऊपर से जो खीर और हलवा और दस तरह की वीर्यवर्धक, कामोत्तेजक ताकत की चीज उनकी माई खुद बनवा बनवा के अपने पूत को खिलवा रही थीं, जो एकदम ही कमजोर हो वो भी साँड़ हो जाए और सूरजु में तो पहले से ही दस साँड़ का बल था।



कस के भैया ने अपनी दर्जा नौ मेम पढ़ने वाली सुकुवार छोट बहिनिया की पतली कटीली कमरिया दोनों हाथों से पकड़ी, सुपाड़ा अच्छी तरह से फंस गया था और भैया ने बहन की गाँड़ में मोटा मूसल ठेलना शुरू कर दिया।



बुच्ची ने कस के खिड़की पकड़ रखी थी। पहले से ही उस छोरी ने दांतो से होंठ को भींच रखा था रु तय किया था कुछ भी हो वो चिल्लायेगी नहीं, आँखों में आंसू नाच रहे थे, दरेरता, चीरता फाड़ता अंदर मोटा सुपाड़ा किसी हैवी बुलडोजर की तरह रास्ता बनाता आगे बढ़ रहा था, धीमे धीमे रगड़ता, घिसटता, और

anal-pain-19433470.gif

जब वह रुका तो बुच्ची ने राहत की साँस ली, उसे लगा की काम हो गया , अब एक बार वो मोटू अंदर घुस गया है तो बस काम शुरू और जितना दर्द होना था हो गया,



और यही गलतिया नई लड़कियां करती हैं



बुर में एक बार लंड थोड़ा भी ले लिया तो सोचती है बेडा पार पर असली दिन में तारे तो जब झिल्ली फटती है तब दिखते हैं।

उसी तरह पिछवाड़े भी असली जंग तो खैबर के दर्रे पर होती है। अब अंदर वाला छल्ला पार होता है तो जिसने जिन्नगी भर गाँड़ मरवाई होती है उसकी भी चीख निकल जाती है।


सूरजु रुक गए थे, कितना भी जोर लगाओ आगे नहीं बढ़ रहा था। ;लग रहा था कि आगे कोई लोहे का जंगी फाटक है।



लीला अपने ढंग से उन्हें उकसा रही थी।

पीछे से उस कच्ची कली ने सूरजु को दबोच रखा था और अपने छोटे छोटे जोबन दूल्हे की पीठ पे रगड़ रही थी, कभी उँगलियों से उनके खूंटे के बेस को छू देती तो कभी नाख़ून से नीचे लटक रहे दोनों रसगुल्लों को खुरच देती।



एक किशोरी झुकी हुयी अपने कोरे पिछवाड़े में मूसल ले रही है और दूसरी पीठ से चिपकी, इससे ज्यादा कौन मरद को गरम कर सकता है



सूरजु को भाभियों ने हर हाल के लिए तैयार किया था , " आगे न जा पाओ तो पीछे आओ, एक लम्बी सांस लो और फिर पूरी ताकत लगा दो "



उन्होंने बस वही किया और छल्ला पार तो नहीं हुआ लेकिन सुपाड़ा उसमे फंस गया, और उस पहलवान के लिए उतना काफी था, वो ठेलते रहे धकेलते रहे



बुच्ची चीखती रही, चिल्लाती रही और आंसू अब गाल से सरकर जोबन को भिगो रहे थे।


anal-doggy-gif-slow.gif


लेकिन सूरजु ठेलते रहे, पेलते रहे और जब आधा लंड अंदर हो गया तभी वो रुके और फिर उन्होंने चुम्बन वर्षा शुरू कर दी। बुच्ची को भी दर्द का अहसास धीरे धीरे धीरे कम होने लगा।



लेकिन लीला अपने काम में लग गयी, उसने सूरजु को इशारा किया और उन्होंने अपनी छोटी बहन की कमर पकड़ के चूतड़ और ऊपर कर दी, एकदम तिरछी, सर नीचे की ओर, और लीला ने फिर वही कडुवा तेल की बोतल गाँड़ के छेद में लगायी, खूंटा अंदर घुसा था, फिर भी एक ऊँगली से लीला ने थोड़ा और फैलाया, फिर बूँद बूँद, सरकते हुए, जैसे बांस की ढरकी से जानवरों के मुंह में दवा डालते हैं, एकदम उसी तरह बुच्ची के भैया और भतार के बांस के सहारे सरसों का तेल बूँद बूँद एकदम अंदर तक, बुच्ची के पिछवाड़े,



कुछ आराम मिला, कुछ छरछराया, और गाँड़ जब एकदम चपचप करने लगी तो लीला रुकी और फिर सूरजु का जितना खूंटा था उसपे हाथ में लगा सब तेल चुपड़ दिया।



बस गाँड़ मरौवल जबरदस्त शरू हो गयी,



बुच्ची चीख रही थी, चूतड़ पटक रही थी, देह उसकी ऐंठ रही थी, दर्द से चेहरा न जाने कैसा हो गया था, लग रहा था अब वो दर्द से बेहोश हो जायेगी, लेकिन सूरजु पेलते गए धकेलते गए, ठेलते रहे और यह बात भी मंजू भाभी ने समझायी थी

" देवर बुर चुदाई में और गाँड़ मारने में बहुत फर्क है , एक में आगे पीछे कर के चोदोगो तो दुलहिनिया को मजा आएगा, लेकिन गाँड़ मारते समय उसकी गाँड़ में बस ठेलते रहना, जब तक जड़ तक न घुस जाए।"


Teej-e84983e6ae349dd69694566b494fea23-webp.webp


और सूरजु का हाथ भर का तो था भी,

पर कुछ देर में बुच्ची की चीखें सिसकियों में बदल गईं और अब वो भी धक्कों का जवाब धक्के से देने लगी।

और लड़की को पिछवाड़े का मजा कब आता है इसकी पहचान भी इमरतिया भौजी ने बताई थी, 'समझ लो देवर जब जैसे कोई मुट्ठी में तोहार लंड पकड़ के कस कस के दबाये, भींचे, उसी तरह अगर कउनो तोहार माल जब अपनी गाँड़ में कस के गाँड़ सिकोड़ के उसे निचोड़ ले, दबा दे, भींच ले तो समझ ले मजे में वो पागल हो रही है।



बुच्ची मजे में पागल हो रही थी, और सूरजु भी समझ गए थे बस स्पीड दूनी हो गयी, कभी सिर्फ आगे पीछे तो कभी हाथ में पकड़ कर गोल गोल घुमाते गोल छेद के अंदर और कभी पूरा तेल कर ऊँगली दो दो बुर के अंदर


anal-doggy-CU-19120662.gif


बुच्ची गिनगिनाने लगी, दोनों छेदो में एक साथ रगड़ाई हो रही थी, चूँची भी रगड़ी जा रही थी, गाल भी काटा जा रहा था, कभी वो चीखती कभी वो सिसकती



छेद में आते जाते मूसल को देख कर लीला भी पागल हो रही थी, बुच्ची की मस्ती में चूर देख को देख कर वो समझ गयी थी, क्यों उसकी सहेलियां, भौजाइयां, जैसे ही कोई मरद कहता है टांग फ़ैलाने के लिए राजी हो जाती हैं, असली मजा तो लड़की को ही मिलता है अगर ढंग का चोदवैया हो तो,



बीस मिनट से ऊपर नॉन स्टॉप और फिर पहले बुच्ची झड़ी और जैसे उसकी बुर ने पिचकना शुरू किया पीछे भी, फिर अब सूरजु के लिए भी रुकना मुश्किल था, वो भी, अपनी बहन के पिछवाड़े,



और बहन के गोल दरवाजे में मलाई गिराने का मजा ही अलग है और अगर बहन छोटी हो कच्ची कोरी किशोरी हो, अभी जवानी के दरवाजे की सांकल खटखटा रही हो तो कहना ही क्या



दोनों भाई बहन दस मिनट से ऊपर ऐसे ही चिपके रहे और जब सूरजु भैया ने अपना मूसल निकाल के बाहर किया तो सफेदा भरहरा कर बुच्ची के गोल दरवाजे से बाहर निकला।



बुच्ची ने भैया को देखा फिर अचानक शर्मा गयी, पर उसे मुन्ना बहु की सीख याद आ गयी और अपनी सहेली शीलवा को देखा भी था कई बार आम की बाग़ में गन्ने के खेत में



गाँड़ मरौवल तब तक पूरी नहीं होती,



जब तक जिसकी गाँड़ मारी गयी हो, चाहे लौंडा हो या लौंडिया

चूस चूस कर चाट चाट कर औजार फिर से इस्तेमाल लायक चिकना न कर दे, और जो भी लगा हो वो एकदम साफ़

तो बुच्ची ने भी, लेकिन बुच्ची थी बदमाश , उसने न सिर्फ साफ़ सूफ किया बल्कि चूस चूस के औजार फिर से टनटना दिया।

बीच बीच में इंटरवल भी होता लेकिन बस बीस पचीस मिनट में औजार तैयार था और अब लीलवा का नंबर था,




सूरजु भी सोच रहे थे आज एक दिन में दो झिल्ली फाड़ने को मिल रही है , सांझ की जून बहिनिया की बुच्ची की , और उससे भी उम्र में बारी, लीलवा,
 
Last edited:

komaalrani

Well-Known Member
25,431
69,847
304
लीलवा की ले ली
Jiju-fucking.jpg




आधे घंटे से भी कम समय में भैया का खूंटा फिर से फनफना गया और लीलवा पनिया भी गई, और मान भी गई।


छिनरपना किया, हाथ गोड़ पटका, लेकिन कुछ बुच्चिया की जीभ ऊँगली का कमाल, और कुछ सूरजु ने जांगर दिखाया, जोर जबरदस्ती की, बस



लीलवा मिटटी के फर्श पर लेटी थी, टांग फैलाये, जाँघे चौड़ी किये और बुर चियारे, और उसकी बिन फटी बुर में सरसो के तेल की बोतल लेकर बुच्ची चढ़ी थी, बड़ी मुश्किल से चिड़िया की चोंच खुली, अंदर की गुलाबी झलक दिखी और सूरजु और उसके आदरणीय मूसलचंद दोनों पागल।


बुच्ची ने एक हाथ की उँगलियों से बुलबुल की चोंच फैला रखी थी और दूसरे हाथ से बूँद बूँद तेल गिरा रही थी।

उस कोमल सुरंग में तेल भर कर छलकने लगा, बुर चपचचप करने लगी, तो अपनी बायीं हथेली से बुच्ची ने दोनों फांको को चिपका दिया हलके हलके मसलने लगी, जैसे कोई पूड़ी के लिए आटा गूंथ रहा हो।



अब उसके बाद भैया का नंबर था, तो बचा खुचा तेल पहले डंडे पर लगा फिर उस चर्मदण्ड की एकलौती आँख खोल के तेल चुआने लगी।



बस अब खेल शुरू होने वाला था, एक खिलाड़ी के लिए पहली बार था, लेकिन देखा उसने कई बार था, अपनी भौजी मुन्ना बहु से लेकर अभी थोड़ी देर पहले इसी कमरे में अहिराने वाली पूनम दीदी को सूरजु भैया के साथ ही।



दूसरा खिलाडी भी नया था, और उसने ज्यादा देखा भी नहीं था। शेर उसका लंगोटा खुलने के बाद ही महीने दो महीने पहले पिंजड़े से निकला था लेकिन अब धीरे धीरे आदम मतलब औरत खोर होता जा रहा था, दो दिन में भी इमरतिया भौजी, बुच्ची और अब लीलवा का नंबर,



और जांगर तो उस जैसा दस पांच गाँव में नहीं था किसी में, पहले लजाधुर था लेकिन अब किसको पाए किसकी न फाड़ दे वाली हालत थी

इमरतिया ने कच्ची कली फाड़ने पर जितना ज्ञान दिया था उतना अखाड़े के गुरु ने भी कोई दांव नहीं सिखाया था, तो बस,



लीलवा की टाँगे सूरजु के कंधे पर, जाँघे खूब फैली और बुच्ची ने बहन का काम पूरा किया, अपने भाई का मोटा खूंटा पकड़ के, उसका सूपड़ा अपनी मुंहबोली छोटी बहन के निचले मुंह पे सटा के शरारत से रगड़ा और फिर फिर पूरी ताकत से दोनों फांके फैला के चर्मदण्ड का मुख मुंड लगा दिया, भैया ने कमर का थोड़ा सा जोर बढ़ाया, लीला की दोनों कलाई पकड़ के फिर से पुरी ताकत से पुश किया,



लीला छटपटा रही थी छूटने के लिए तड़प रही थी लेकिन सूरजु ने कस के दोनों कलाई पकड़ रखी थी लीला की और बुच्ची अपने भैया का खूंटा पकड़ के धकेल रही थी। लीला के चेहरे पर जाड़े की रात में पसीना आ गया, पर न तो बुच्ची पसीजी न सूरजु पसीजे, वो ठेलते रहे, धकेलते रहे और थोड़ी देर में मदन बाण का मुंड उस कच्ची कली की खूब फैली फांको के बीच धंस गया।



दर्द के मारे लीला की आँखे बंद थी और अब उसे मालूम था की अब आगे क्या होने वाला है,

बुच्ची की आँखों में एक अजीब ख़ुशी और चमक थी, और अपने भैया से उसने आँखों ही आँखों में हाई फाइव किया, और सूरजु की आँखों में एक अजीब नशा देखा, जैसे किसी शिक़ारी के चंगुल में कोई शिक़ार आ गया हो, और अब वो बच के जा नहीं सकता हो



बुच्ची ने भैया को छोड़ दिया, लीला का सर अपनी गोद में रखा और थोड़ी देर सर सहलाती रही, झुक के डर से सूख रहे लीला के होंठों पर चुम्मी लेती रही, कभी अपनी जीभ घुसा देती और एक बार और झुकी और बुच्ची ने अपनी छोटी छोटी चूँची लीला के मुंह में डाल दी, फिर पूरी ताकत से अपने जोबन को उस कच्ची कली के मुंह में पेलते हुए बुच्ची ने अपना पूरा वजन लीला की देह पर रख कर उसे पूरी ताकत से दबाते हुए, सूरजु को इशारा किया

" ठोंक दो "



सूरजु ने भी अपने दोनों हाथों से उस बारी उमरिया वाली की कच्ची ककड़ी ऐसी कलाइयां उसी पहलवान वाली ताकत से पकड़ रखी थी जैसे दंगल में वो जकड़ता था और आज तक कोई उससे हाथ नहीं छुड़ा पाया।

खुली खिड़की से आती चांदनी, मिट्टी के फर्श पर लेटी छटपटाती मुन्ना बहू की कच्ची कोरी ननद, उसके मुंह में अपनी चूँची ठेले, अपना पूरा बोझ उसपे डाले बुच्ची और कलाई पहलवान के हाथों में



और सूरजु ने मूसल ठोंक दिया, लेकिन इंच भर भी न घुसा होगा।



दर्द से लीला तड़प रही थी , देह ऐंठ रही थी, पार आवाज निकलती कैसे मुंह में बुच्ची ने पूरी ताकत से अपनी चूँची ठेल रखी थी,



सरजू ने फिर धक्का लगाया, कमर का चूतड़ का पूरा जोर लगा दिया



थोड़ा और सरका, था भी तो उसका लीला की कलाई से भी मोटा, चूत धीरे धीरे फ़ैल रही थी, लग रहा था अब फटी, तब फटी, जहाँ ऊँगली नहीं घुस पाती थी वहां मोटा बांस जा रहा था,



सूरजु ने धकेलना बंद नहीं किया, हाँ उसने भी भी आँख बंद कर के पूरा ध्यान धक्के पर लगाया, दो मिनट चार मिनट



सुपाड़ा अब एकदम अटक गया था, एक दो इंच और अंदर घुस गया था, और बुच्ची और सूरजु दोनों जानते थे अब स्साली लीलवा लाख चूतड़ पटके लंड बिना चोदे, झीली फाड़े, सफ़ेद रंग की दूध दही की उलटी किये बाहर नहीं आने वाला था।





और बुच्ची ने लीला को छोड़ दिया, मोटी मोटी चूँची, बेचारी लीला के मुंह से निकाल ली। हाँ अभी भी पूरी ताकत से दोनों कंधो को पकडे रही और मुस्करा कर अपने भाई को देखा जिसका सुपाड़ा और मोटा लंड अब अच्छी तरह उस बिन फटी बुर में पैबस्त था। दोनों भाई बहन मुस्कराये,



सूरजु को कई भौजाइयों ने समझा दिया था " तेरा मूसल हथोड़े से भी तगड़ा है तो नए माल में घुसेड़ के थोड़ी देर छोड़ देना, उसका दर्द कुछ कम हो जाये, बिलिया को मूसल की आदत पड़ जाए, दो चार मिनट ऐसी ही, फिर जब बो मुस्कराये तो बस घचक के पेलना, बिना झिल्ली फाड़े छोड़ना मत,



सूरजु ने ठेलना बंद कर दिया, अब आगे जा भी नहीं पा रहा था। और दो मिनट रुककर लीला ने आँखें खोलीं, दर्द तैर रहा था और बड़ी कमजोर सी मुस्कान से मुस्कुराई। जाँघे अभी भी फटी पड़ रही थी लेकिन बिल को मूसल की हलकी सी आदत हो रही थी थी, वो बेचारी सोच रही थी बस अब दर्द की घडी ख़त्म हो गयी।



बुच्ची की ओर देखकर उसने गुहार लगाई, " दी भैया को बोलिये बस थोड़ी देर के लिए निकाल लें बस ज़रा सा, फिर भले ही, एकदम सहा नहीं जा रहा था "



बुच्ची मुस्करायी। चिड़िया अब अच्छी तरह बहेलिया के जाल में फंस गई है। थोड़ा सा पंख फड़फड़ाएगी, तो फड़फड़ा ले।



उसने मुस्करा कर अपने भाई से बड़े भोलेपन से बोला, " भैया बेचारी कह रही है, जरा सा निकालने के लिए तो बस जरा सा ही निकालना, निकाल लो न थोड़ा सा फिर भले ही पूरा बांस ठेल देना "

a

बेचारी लीला समझ नहीं पायी, बुच्ची को देख कर मुस्करा कर हामी में सर हिलाया और धीरे से बुदबुदायी, " हाँ बस थोड़ी देर "



लेकिन सूरजु ने बुच्ची की बात समझ ली, दस कदम आगे बढ़ने के लिए कभी दो कदम पीछे भी हटना पड़ता है। बस लंड थोड़ा सा पीछे घसीटा , सुपाड़ा बस फंसा रहा गया था, दो मिनट गहरी सांस ली जैसे सांड फुफकारता है, खुर जमीन में रगड़ता है, धुल उड़ाता है और फिर,



क्या ताकत है सूरजु की देह में बुच्ची की आँखे फटी रह गयीं हो, जैसे कोई दस मंजिला ईमारत एक हाइड्रा झटके में तोड़ दे



सूरजु ने कस के लीला की पतली कमर अपने दोनों मजबूत हाथों से जकड़ रखी थी और जैसा कोई तगड़ा श्रमिक लोहे के फाब्डे से पथरीली जमीन खोद रहा हो, चोट पर चोट मार रहा हो, धक्के पर धक्के लग रहे, वो मोटा रैम अंदर सरकता हुआ घुस रहा था। सूरजु पेलता रहा, धकेलता रहा, ठेलता रहा, अब उसकी मांसल कसरती देह पर भी पसीने की बूंदे एक नौ लड़ी माला की तरह आ गयी थी।



वो फिर रुका और थोड़ा सा पीछे खिंच कर क्या ताकत से उसने धक्का मारा,



लग रहा था लीला बेहोश हो गयी, उसकी देह अजीब ऐंठ रही थी, पर न बुच्ची उधर देख रही था न सूरजु। बुच्ची कसी बुर में से बूँद बूँद पसीजती लाल लाल बूंदे देख रही थी, जिसने पहले बुर की फांको को लाल किया, फिर सूरजु के खूंटे को और लीला की जांघ धीरे धीरे लाल होने लगी।



सूरजु की निगाह लीला की खूब कड़ी पथराई छोटी सी चूँची पर चिपकी थी, बस एक हाथ से वो कमर पकडे रहा, दूसरा हाथ लीला के उभार पर , और अबकी जब पिस्टन निकला तो लाल भभुका।



और लीला को कुछ राहत मिली, दर्द से देह अभी भी चूर थी, पर उसने आँखे खोल दी और जांघ पर खून देख जोर से चिल्लाई

" अरे माई रे, जान गयी रे माई, बहुत दर्द हो रहा है, उफ्फ्फ, दीदी बचाय लो , उईईईईई नहीं, भैया निकाल लो , ओह्ह्ह्हह्ह "



झिल्ली फट गई थी।


pussy-blood-ruptured-467139896.jpg


और बुच्ची ने झुक के लीला को चूम के कहा, " अरे पगली अब काहें रो रही है , झिल्ली तो फट गयी, जितना दर्द था ख़तम। अब तो मजा लो बस मजा "

लेकिन बुच्ची झूठ बोल रही थी।

अब की जब एक हाथ से चूँची और दूसरे से कमर पकड़ के सूरजु ने ठेला, तो जहाँ झिल्ली फटी थी जब उसे रगड़ते मोटा मूसल दुबारा अंदर गया तो बस लीला की जान नहीं निकली और वो जोर से चीखी,



" उईईई उईईई नहीं ओफ़्फ़्फ़्फ़ माई रे, जान गयी, उफ्फ्फ ओह्ह्ह्ह "

पर अब सूरजु की इन चीखों में ही मजा आने लगा था, कच्ची कली को चोदने का झिल्ली को फाड़ने का फायदा ही क्या जब तक लौंडिया रोये नहीं, चीखे नहीं नौ नौ टसुए न बहाये, आँख से आंसू निकल के गाल को भिगो दे और चूँची पे आ के रुके। उसजे अगला धक्का और जोर से मारा



नहीं नहीं भैया, उईईई अब नहीं रुक जाओ ओह्ह बस बस



चीखें बँसवाड़ी के पार पहुँच रही थी और नीचे कमरे में लेटी सूरजु की महतारी के पास भी, जितना जोर से लीला चीखती थीं, उतना ही बड़की ठकुराइन का मन हुलसता था। सीना उनका गज भर का हो गया। मुन्ना बहू आज ही लीलवा को पटा के लायी और आज ही उनके मुन्ना ने उसकी झिल्ली फाड़ दी। बस ऐसे ही पांच छह और की झिल्ली फाड़ दे उनका दुलारा, बरात जाने के पहले, तो जो उनके मन में डर था, इअतना लजाधुर है, इतने दिन से लंगोट बाँध के रखे था पहलवानी में, तो कहीं ससुराल में मजाक न उड़े, पहली रात को नाक न कटा दे, और बंस बढ़ाने के लिए ये सब काम सीखना भी तो जरूरी है। इमलिया भी मस्त लग रही थी, नामक तो लीला से भी ज्यादा है, खूब खटमिट्ठी। दुलरिया को बोला तो है, अरे सब काम गान का भौजाई नहीं करेंगी तो कौन करेगा।



लीला ने दुबारा चीख मारी अबकी हथौड़ा साढ़े बच्चेदानी पे पड़ा था, और वो कांपने लगी। बांस जड़ तक अंदर घुस गया था, और सूरजु ने पोजीशन कुछ रुक कर बदल दी, अब वो लीला को दुहरा कर के पेल रहा था।



करीब आधे घंटे तक लगातार बिना रुके चुदाई चली। लीला की चीखे सिसकियों में बदल गयीं , मजे से वो पागल हो रही थी, कभी खुद मुंह उठा के भैया को चूम लेती तो कभी मस्ती में अपने नाखून उसके पीठ में धंसा देती, कभी कभी धक्के का जवाब धक्के से भी देती



और जब बारिश हुयी तो लीला उसके पहले तीन बार झड़ चुकी थी। और सूरजु ने उसे कस के दबोच रखा था, सब माल मलाई बिल में गयी और फिर धीरे धीरे रिसती हुयी, लीला की जाँघों पर बाहर निकली।



कुछ देर बाद बुच्ची ने किसी तरह दोनों को अलग किया और जब बुच्ची लीला के साथ सूरजु के कमरे से बाहर निकल कर कोहबर वाले कमरे में गयी तो ढाई से ऊपर हो रहा था। किसी तरह एक दूसरे को कभी सहारा देती कभी दीवाल का सहारा लेती दोनों कोहबर वाले कमरे में पहुंची, जहाँ पूनम दीदी , मंजू भाभी और मु
न्ना बहू एक दूसरे से चिपकी सो रही थीं
 
Last edited:
🔥 Read Next Hot Story →
Discover more exclusive stories
Top