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Incest खेल-खेल में बेटी को चोदा

abmg

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बेटी की सील तोड़ कर मैं हद से ज़्यादा खुश था। नम्रता ने यह कह कर, कि उसने जितना सोचा था मैंने उससे बढ़िया किया, मुझे और भी खुश किया। 2 घंटा बाद ही जब उसे कुतिया के पोज में चोदना शुरू किया तो उसने कहा,


“पापा, तुम जब इतना बढ़िया शॉट मारते हो, चोदते हो तो फिर तुम्हारी पत्नी राघव और बेटे से भी छोटे उम्र के लड़के से क्यों चुदवाती है?” मैंने अपने तरीक़े से ज़ोरदार धक्का लगाते हुए पूछा कि उसे किसने बताया।

बेटी ने तुरंत जवाब दिया,
“किसने बताया, उस रंडी को राघव से चुदवाते हुए मैंने खुद देखा। अपने बर्थडे पार्टी की रात ही मैं तुमसे चुदवाना चाहती थी। तुम्हें ढूंढने के लिए छत पर गई तो देखा कि तुम संध्या मैडम को चोद रहे थे। मैंने तुम दोनों की पहले राउंड की पूरी चुदाई देखी। उसके बाद भी तुम वहीं उस कुतिया से चिपके रहे तो ग़ुस्से से नीचे आई। मां के रुम से किसी मर्द की आवाज़ सुनाई दी तो मैंने खिड़की से झांक कर देखा।
कुतिया इतनी बेशर्म है कि ग़ैर मर्द से चुदवाते हुए भी खिड़की को खुला रखा था। अंदर झांका तो देखा कि तुम्हारी पत्नी, मेरी मां उपर से उस हाथी को चोद रही थी। मुझे उस हाथी राघव का लंड भी दिखाई पड़ा। ना तो तुम्हारे लंड जैसा लंबा है, ना ही बहुत मोटा ही। कुछ देर चुदाई देखने के बाद अपने इसी बेड पर आकर सो गई। जब नींद खुली तो तुम्हें अपने बग़ल में सोये देख बहुत खुश हुई। तुम जब मेरे बग़ल में सो सकते थे फिर मुझे चोदा क्यों नहीं?”
मुझे भी तीन महिने पहले की वो रात आ गई। संध्या ने 2 बार चुदवा कर और एक बार गांड मरवा कर मुझे चूस लिया था। बेटी को पीछे से चोदते हुए दोनों हाथ को नीचे बढ़ा कर दोनों चूचियों को दबाते, सहलाते हुए, चोदते हुआ बोला, “एक तो संध्या ने बहुत मेहनत करवाई। मैं उसे तब से चोद रहा हूं जब वो कॉलेज में पढ़ती थी। पहले अपने रुम में गया तो देखा कि दरवाज़ा अंदर से बंद था। खिड़की से भी देखा, रुम में अंधेरा था।
मैंने ध्यान नहीं दिया कि अणिमा अकेली थी या कोई उसके साथ था। आगे बढ़ा तो तुम्हारा रुम खुला देखा। मैं तुम्हारे बग़ल में लेट कर तुम्हारी खुबसूरती को निहारता रहा। तुम इतनी प्यारी और मासूम दिख रही थी, कि चोदने की बात छोड़ो, तुम्हें हाथ भी नहीं लगाया। तुम मेरी बेटी हो यही सोचते हुए खुश होकर सो गया।”
बेटी ने उस रात की बात पूरी की।
“जब मेरी नींद खुली तो तुम्हें बग़ल में देख कर बहुत खुश हुई। मैंने तुम्हारे पजामे का नाड़ा खोला और लंड को हाथ में लेकर सहलाने लगी। कुछ ही देर में लंड वैसा ही टाईट हो गया जैसा अभी कुतिया के अंदर है। कुछ देर सहलाने के बाद मैंने सुपाड़ा को चूसना शुरु किया। कितना देर चूसा मालूम नहीं लेकिन तुम झड़ने लगे, और मेरे प्यारे कुत्ते मुझे आश्चर्य है कि तुम्हें मालूम नहीं पड़ा। तुम खर्राटे मार कर सोते रहे और तुम्हारी कुतिया ने रस की एक-एक बूंद पेट के अंदर ले ली।
उसके बाद भी मेरा मन नहीं भरा। मैं नंगी होकर तुम्हारे उपर आ गई। दोनों चूचियों के बीच लंड को रगड़ा, चूचियों को तुम्हारे होंठो से रगड़ा। इतना ही नहीं चूत को भी तुम्हारे होंठों पर रगड़ा। लेकिन मालूम नहीं संध्या मैडम ने तुम्हें क्या खिला दिया था कि तुम बेहोश हो कर सोये थे। चूत को तुम्हारे होंठों से इतना रगड़ा की मैं भी झड़ गई, और फिर कपड़े पहन कर बाहर आई तो देखा कि राघव सिर्फ़ एक जांघिया पहन कर अकेले बैठ चाय पी रहा था।”
बेटी की बातों ने मुझे बहुत ही ज़्यादा गर्म कर दिया था। मैं और तेज़ी से पेलते हुए पूछा,
“वो बेटीचोद तुम्हें देख कर घबरा गया होगा?”
नम्रता ने चूतड़ों को पीछे की तरफ़ ठेला और बोली, “नहीं, वो बिल्कुल नहीं घबराया। मुझे अपने बग़ल में बिठाया। मैंने उससे सीधा पूछा कि वो मेरी मां को कब से चोद रहा था, तो मालूम उसने क्या जवाब दिया?”
“क्या जवाब दिया?”
बोलते हुए ज़ोर का धक्का मारा।
“आह मेरे प्यारे कुत्ते, तुमने इस कुतिया को फिर से ठंडा कर दिया। अंदर रस मत गिराना, इस बार मुझे चूसना है। मेरे पूछने पर उसने कहा कि वो तुम्हारी पत्नी को तुम दोनों की शादी के 4 महिने बाद से ही चोद रहा था। उसने पूरे विश्वास के साथ कहा कि हम दोनों भाई बहन उसके ही बच्चे हैं।”

बेटी की बात ख़त्म हुई और मैंने लंड बाहर खींच कर नम्रता को झट से पलटा और पूरा लंड उसके मुंह में पेलने लगा। लड़की ने दिखाने के लिए भी मुझे नहीं रोका। एक हाथ से लंड को जड़ से पकड़ कर चूसने लगी, और दूसरे हाथ से मेरे अंडों को सहलाते हुए दबाने लगी। मैं बहुत एक्साइटेट था ही, उसके माथे को दोनों हाथों से पकड़ लंड पर दबाया और लंड ने रस फेंकना शुरू किया।
जब सारा रस निकल गया तब उसने लंड को बाहर ठेला। अपना मुंह खोला। उसके मुंह में लंड का रस भरा था। मुझे दिखाते हुए कुतिया, मेरी बेटी सारा रस निगल गई। मैंने उसे अपनी बाहों में बांधा और होंठों को कई बार चूस कर बोला, “मेरी प्यारी कुतिया बेटी, तेरी वो रंडी मां भी बोलेगी तब भी मैं नहीं मानूंगा कि तुम दोनों मेरे बच्चे नहीं हो।”

लेकिन मेरी बेटी का प्लान कुछ और था। “जिस दिन कुतिया बोलेगी कि हमारा बाप वो हाथी राघव है, मैं उन दोनों के सामने तुम्हारे साथ ऐसा ही चुदाई का खेल खेलूंगी जैसा आज खेला है। हरामी, इतना देर तो रोड का कुत्ता भी नहीं चोदता है। अब तुम कहीं बाहर जाओ, मैं नहीं चाहती कि रंडी आज हमें साथ देखे। आज तुमने अपनी कुतिया बेटी को बहुत खुश किया है, रात में एक बढ़िया इनाम दूंगी।”

मैंने उसे मनाने की बहुत कोशिश की लेकिन साली भी अपनी मां जैसी ही ज़िद्दी थी। मैं कपड़े पहन कर और साथ में पत्नी का मोबाइल फ़ोन लेकर बाहर निकल गया। उस समय शाम का 6:15 हो रहे थे। मैंने बेटी के साथ चार घंटे से ज़्यादा मस्ती मारी।
क़िस्मत से पत्नी का मोबाइल फ़ोन हाथ लगा था। राघव मेरी पत्नी को 24 साल से चोद रहा था और मुझे मालूम नहीं। मैंने फ़ैसला किया कि राघव से ही पुछूंगा और उसके सामने उसकी बहू, अपनी स्पेशल माल संध्या को भी चोदूंगा। कार को मेन रोड पर लाया तो मुझे अपने खास दोस्त प्रेम की याद आ गई।

प्रेम मेरी ही उम्र का था। हम दोनों बचपन के दोस्त हैं। पचास से ज़्यादा माल को हमने साथ चोदा है। मैंने उसके घर की सभी माल को चोदा है। मैंने उसे अपनी मां और दोनों बहनों को चोदने में मदद की। तीनों ने कहा कि प्रेम भी बढ़िया चुदाई करता है। मेरी मां तो अब नहीं है लेकिन दोनों बहन जब भी आती है प्रेम से चुदवाती है। मेरी पत्नी को पटाने की प्रेम ने बहुत कोशिश की, लेकिन अणिमा ने उसे अब तक हाथ भी लगाने नहीं दिया है।

मैंने कार प्रेम के दुकान के सामने रोकी। देखते ही मेरे पास आया। मेरा हाथ पकड़ कर बोला, “नरेन, मेरी बेटी और बहन जब से ससुराल से आई है तुमसे चुदवाने की ज़िद कर रही है। कल पूरा दिन हमारे साथ गुज़ारो और दोनों के साथ-साथ शीला ( प्रेम की पत्नी) को भी खुश करो।”

मैंने अणिमा का मोबाइल फ़ोन दिया और कहा कि फ़ोन में जितना भी विडियो है सब एक पेनड्राईब में ट्रांसफ़र कर दे। मैंने मुस्कुराते हुए वार्न किया कि विडियो को खोलने या देखने की कोशिश ना करे।
“प्रेम, सारे विडियो कॉपी कर दो, एक भी विडियो डिलीट नहीं होना चाहिए और उपर से 3-4 गंदी से गंदी विडियो डाल दे। अगर तेरी कोई अपनी चुदाई की विडियो है तो वो भी डाल दे। रंडी अणिमा को तेरा चेहरा पसंद नहीं है तो कोई बात नहीं, तेरी चुदाई देख कर कुतिया जरुर तुमसे चुदवायेगी, वैसे भी बहुत जल्द तेरा लंड मेरी पत्नी की बूर में घुसेगा।”

प्रेम ने बहुत कोशिश की थी लेकिन अणिमा अब उससे बात भी नहीं करती थी। उसने दुःखी होकर कहा,‌ “यार जले पर नमक क्यों छिड़क रहे हो? तेरी मैडम को तेरे ही जैसा खुबसूरत, बढ़िया दिखने वाले आदमी का लंड चाहिए, मेरे जैसे बदसूरत लोगों का नहीं। तेरी बहनों और आंटी ( मेरी मां) को मेरे लंड का जादू मालूम था।इसलिए तीनों कुतिया मुझसे चुदवाती रही। यार, अणिमा भी एक बार मुझसे चुदवा ले तो रंडी खुद बार बार चुदवाने आयेगी।”

मुझे अपनी बेटी के साथ की चुदाई की मस्ती की याद आई तो मैंने प्रेम से कहा कि वो मेरी बेटी को पटाने की कोशिश करे।
“यार, विश्वास रख, अणिमा बहुत जल्द तुमसे चुदवायेगी। नम्रता भी जवान हो गई है, मुझे लगता है कि चुदवाने भी लगी है। उसे पटा वो जल्दी पट जाएगी।”
लेकिन प्रेम को मेरी बेटी नहीं पत्नी ही चाहिए थी। प्रेम ने कहा, “तुझे पता है कि मुझे बड़ी उम्र की माल ही बढ़िया लगती है। अपनी बेटी नम्रता को तू ही चोद। फ़ोन की बैटरी बहुत कमजोर हो गई है। बदल दूं।”

मैंने बैटरी बदलने के लिए कहा। कुछ देर बाद उसने फ़ोन और एक पेनड्राइव मुझे दिया और साथ में एक कैप्सूल भी दिया। प्रेम ने मुझसे कैप्सूल को चलाने के लिए कहा और यह भी कहा कि कल-परसों आकर उसे कैप्सूल का असर बताऊं।
प्रेम का मोबाइल फ़ोन का दूकान था। साथ ही वो पॉर्न से संबंधित सब कुछ बेचता था। ताक़त और स्टैमिना बढ़ाने बाली दवा भी रखता था। मुझे विश्वास था कि वो कुछ ऐसा नहीं देगा जिससे मुझे नुक़सान हो। मैंने कैप्सूल को चबाया और कार को राघव के घर की ओर ले गया।

मैंने जब संध्या के घर के दरवाज़े पर नॉक किया तो उस समय शाम का 7:15 हुए थे। संध्या ने दरवाज़ा खोला और देखते ही मुझसे चिपक गई। वो ज़ोर से बोली, “बाप रे, उस हाथी से जान बची। मेरी समझ में नहीं आता है कि अणिमा को चोदने के बाद कोई किसी दूसरी औरत को छू भी कैसे सकता है। तुमने उसे चोदना बंद कर दिया है कि रंडी हर दूसरे दिन मेरे ससुर को मारने आती है और उसके जाने के बेटीचोद मुझे रगड़ता रहता है?”
“अणिमा इसलिए मेरे पास आती रहती है कि उसे मैं और मेरा लंड बहुत ज़्यादा पसंद है, नरेन से ज़्यादा बढ़िया लगता है।”
आवाज़ सुन कर मैंने नज़र उठाया तो देखा कि हमसे कुछ ही दूर संध्या का ससुर राघव नंगा खड़ा था। मेरी बेटी नम्रता ने ठीक ही उसका नाम हाथी रखा था। पहलवान से भी मोटा था। मेरा वजन 75 से 80 केजी के बीच रहता था जब कि राघव का वजन 100 केजी से कम नहीं था। उसके लंड पर तब भी गीलापन था।

बिना कुछ बोले मैंने दरवाज़ा को बंद किया और वहीं संध्या को नंगा कर दिया। मैंने भी झटपट अपने कपड़े उतारे और संध्या को कमर से पकड़ कर उपर उठाया। संध्या को मालूम था कि उसे क्या करना था। उसने दोनों हाथों को मेरे गले में फसाया और टांगों से मेरी कमर को जकड़ा।
रुम के अंदर जाते हुए कहा, “अंकल, आपकी बहू ठीक ही कह रही है कि जब मेरी पत्नी अणिमा आपसे रोज़ चुदवा कर जाती है, फिर आप मेरी इस पत्नी को क्यों परेशान करते हैं? मैं संध्या को अपने घर ले जाता हूं, और आपकी रंडी को आप के पास भेज देता हूं। दिन में उसे अपने बैंक में चोदिए और रात में घर में गांड मारिए। चल रानी अपने राजा को खुश कर।”

मैं डाइनिंग टेबल के एक कुर्सी पर बैठा और देखते ही देखते मेरा लंड संध्या की बुर के अंदर-बाहर होने लगा। ससुर के सामने संध्या बुर को मेरे लंड पर उछालने लगी और मैं बारी-बारी से चूचियों को चूसने लगा। राघव लंड को सहलाते हुए हमारी चुदाई देखता रहा। मैंने संध्या को साथ ले जाने की बात की जो शायद राघव को पसंद नहीं आई थी।
अपना ढीले लंड को सहलाते हुए बोला, “भले ही अणिमा पिछले 23-24 सालों से मुझसे और दूसरों से भी चुदवा रही है, लेकिन वो तुम्हें बहुत प्यार करती है। तुम जब 6-6 महिना के लिए ट्रेनिंग पर जाते थे, तो मैं ही उसके साथ हर रात गुज़ारता था। सच कहें तो मैंने तुम्हारी पत्नी को तुमसे ज़्यादा चोदा है। इसके बाबजूद भी मुझे मालूम है कि अणिमा तुम्हें छोड़ कर मेरे पास आकर रहने के लिए नहीं आयेगी। लेकिन अगर वो आई तो उसके साथ नम्रता भी आयेगी।”

मैं जो पूछना चाहता था वो राघव ने खुद बता दिया कि वो अणिमा को 23-24 साल से चोद रहा था। मुझे नम्रता के साथ की चुदाई की याद आई। मैंने उसे और दुःखी करने का सोचा। संध्या के कमर को पकड़ कर लंड पर उछालते हुए बोला, “आपने जब अणिमा को पहली बार चोदा था तब वो नम्रता से छोटी थी। अगर नम्रता भी आप के पास आना चाहेंगी तो मैं उसे एक बार भी नहीं रोकूंगा। नम्रता अपनी मां से ज़्यादा मस्त माल है और आपकी बेटी है, मैं उसे जल्दी चोदूंगा आप उसे भी चोद लेना।”
मेरी बात सुनते ही राघव का चेहरा लाल हो गया। उसने ग़ुस्से से कहा,
“मैं इतना घटिया आदमी नहीं हूं कि अपनी बेटी को चोदूं।”

मुझे राघव को परेशान करना बढ़िया लगने लगा। 2-3 बार चूचियों को चूसने के बाद बोला,
“अगर अणिमा ने भी कहा कि नम्रता आपकी बेटी है तो अपने इस लंड की कसम मैं ही नम्रता को चोदूंगा। वैसे भी आपको मेरा जूठन खाने की आदत है।
अणिमा और उसकी मां को 4 महिना चोद कर चूस लिया, तब आपने उन्हें चोदना शुरू किया।
आपकी बहन भूमिका की सील तोड़ी, 7-7 महिना लगातार चोदा, तब आपने अपनी बहन की चूत में लंड पेला। भूमिका से पूछ लीजिएगा, उसकी बेटी करिश्मा का पहला मर्द मैं ही हूं। अब जो हो गया सो हो गया। अब तक आप मेरे पीछे आकर मेरी पत्नी को चोदते हैं। लेकिन अब से आप जब चाहो मेरे घर आकर अणिमा को चोदो। आप चाहो तो हर रात मेरे ही घर में मेरी पत्नी को चोदो। नम्रता चार महीने पहले ही आप को अणिमा की चुदाई करते देख चुकी है।

आप अणिमा को चोदो या ना चोदो अब से अगर आपने मेरी पहली पत्नी, संध्या को छुआ भी तो अगले ही दिन आपके बैंक के सारे डाईरेक्टर ही नहीं सारे स्टाफ़ को मालूम हो जायेगा कि आप ने अणिमा को सिर्फ चोदने के लिए ही नौकरी पर रखा है। खुद तो चोदते ही हो दूसरे डाईरेक्टर से भी चुदवाते हो।”
राघव: जावेरी ने बहुत खुशामद किया तो मैंने अणिमा से कहा, और वो खुद ही उसके पास जाने लगी। आज भी उसने पहले जावेरी से चुदवाया उसके बाद मेरे पास आई।
कुछ देर की चुप्पी के बाद राघव ने बहुत दुखी होकर कहा,
“तीन महिने से एक दूसरे डाईरेक्टर जोशी के बेटे अशोक से भी चुदवाने लगी है। नरेन, मैं अब तुम्हारी संध्या को हाथ नहीं लगाऊंगा, लेकिन प्लीज़ मेरी अणिमा और मुझे बदनाम मत करो।”

सारी बात अपने आप साफ़ हो गई। मैंने फिर उसे धमकी दी,
“अणिमा या नम्रता को जितना चोदना है चोदो लेकिन अब अगर संध्या को हाथ भी लगाया तो मुझसे बुरा और कोई नहीं होगा। हमें डिस्टर्ब मत करो, देखो तुम्हारी बहू को कितना ख़ुश करता हूं।”
 
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मेरी पत्नी के सबसे पुराने आशिक, 63 साल के पहलवान से दिखने वाले आदमी ने मुझसे खुशामद किया कि मैं उसे और अपनी पत्नी को बदनाम ना करुं। मैंने उससे वादा लिया कि अब वो अपने बहु को कभी नहीं चोदेगा।


पहले तो संध्या ने मुझे कुर्सी पर ही उपर से चोदा। उसके बाद मैंने बिना बुर से लंड निकाले संध्या को उठाया और बग़ल में रखे सोफ़ा पर लिटाया और चोदने लगा। संध्या ज़ोर-ज़ोर से सिसकारी मारती हुई मस्ती लेती रही। दरवाज़ा पर नॉक किए बिना कोई अंदर घुसा और एक आदमी की आवाज़ सुनाई दी,

“नरेन भैया, कितने दिनों बाद ये खूबसूरत नजारा देखने को मिल रहा है। बाबू जी भी संध्या को चोदते हैं। लेकिन संध्या के चेहरे पर उस समय उदासी रहती है। पर देखिये, अभी मेरी पत्नी का चेहरा कितना खिल उठा है। कितना चमक रहा है।
बाबू जी, आपने अपनी बहु को बहुत चोद लिया। संध्या को चैन से नरेन के साथ मस्ती मारने दीजिए और आप उस घटिया रंडी अणिमा को चोदते रहिए। नरेन भैया, आप उस कुतिया को घर से निकाल क्यों नहीं देते? मेरी बहन नम्रता को भी अपने जैसा रंडी बना देगी।”

संध्या को लगातार चोदते हुए बोला, “क्या करुं? कैसे निकालूँ घर से? विमल, वो औरत तुम्हारे बाबू जी की असल पत्नी है। तुम्हारी छोटी मां है।” विमल को अणिमा कभी पसंद नहीं आई। विमल अपनी पत्नी की चूचियों को सहलाते बोला, “मेरे लंड में दम होता तो उस कुतिया की गांड में लंड घुसाये रखता। आज ही मालूम हुआ कि साली विनोद ( मेरा बेटा ) से भी छोटे उम्र के आदमी से चुदवा रही है।”

मेरे साथ संध्या बहुत ही खुश रहती थी।संध्या ने चूतड़ उचकाते हुए कहा, “विमल, जब 63 साल का बुड्ढा, तेरे बाबू जी का लंड अणिमा की बुर में घुसने के लिए हमेशा तैयार रहता है, तो कोई भी जवान आदमी उसे चोदेगा। तेरा ये भाई शाम से ही बुर में लंड घुसा कर बैठा है। खाना नहीं बना पाउंगी, बाहर से ले आओ।”

कुछ देर और चोद कर लंड बाहर निकाल लिया। प्रेम ने जो कैप्सूल दिया था उसका असर दिखाई देना शुरू हो गया था। अपने पति और ससुर के सामने संध्या ने लंड को चूसा भी, फिर भी लंड से पानी नहीं निकला। एक बार फिर राघव से कहा कि वो संध्या को ना चोदे। इस बार संध्या के पति ने भी अपने बाप को मना किया। राघव ने क़सम खाई कि अब वो संध्या को कभी परेशान नहीं करेगा।
घर वापस लौटते समय सोचा कि घर जाकर रात भर अणिमा को चोदूंगा। लेकिन आदमी सोचता कुछ और है और होता कुछ और है। रात के साढ़े नौ बजे घर लौटा। घर के अंदर घुसा तो देखा कि अणिमा ऐसा गाउन पहन कर बैठी थी, जिससे उसकी चूचियां और जांघें साफ़-साफ़ दिख रही थी। मुझे लगा कि वो कुछ प्लान कर के बैठी थी।

मैंने उसे मोबाइल फ़ोन वापस करते हुए कहा, “तुम फ़ोन को ऐसे फेंक कर कैसे बैंक चली गई? 12 बजे वापस आया तो सोफ़ा के नीचे गिरा हुआ देखा। फ़ोन डेड हो गया था। प्रेम ने नया बैटरी डाल दिया है। वो तुम्हें चोदने के लिए पागल है। जल्दी से एक पूरी रात उसके लिए निकालो।”
अणिमा कुछ देर तक मुझे घूरती रही। वो जरुर समझ गई होगी कि मैंने उसकी आज की चुदाई का विडियो जरुर देख लिया होगा। बिना किसी भूमिका के बोली, “आज मुझे अशोक को अपने साथ सुलाने दो तो कल की पूरी रात प्रेम के साथ नंगी रहूंगी।”
कहां तो मैं खुद उसे रात भर चोदना चाहता था, और कहां वो अपने नये यार को साथ सुलाने की परमिशन मांग रही थी। मैंने परमिशन दे दी।

“बुला लो, लेकिन कल की रात प्रेम के साथ।”
मेरी बात सुन कर वो खड़ी हुई, और मुझे गले लगा कर चूमा। मेरा एक हाथ पकड़ कर अपनी बुर पर दबाया। अणिमा बोली,
“तुमने मेरा ध्यान रखना शुरु कर दिया है, इसलिए जल्दी तुम्हें एक नई माल मिलेगी। रात में हमारे रुम में ताक -झांक मत करना। घर में किरण है, उसे पटा कर चोदो। हाथ मुंह धो लो, खाना लगाती हूं।”
वो किचन गई। मैंने कमरे में जाकर ड्रेस बदला। सिर्फ़ एक हाउस कोट जैसा गाउन पहना। अंडरवियर नहीं पहना और पेनड्राईव लेकर बेटी के रुम में गया। दोनों लड़कियां, नम्रता और किरण एक साथ मुझ पर झपटी। एक साथ बोली, “हमारी क्रीज़ बल्ले का शॉट खाने के लिए तैयार है, कहां थे इतनी देर? बल्ला निकालो, और शॉट मारना शुरु करो।”

दोनों चुदाई के मूड में थी। दोनों ने फ़्रॉक पहना था। एक साथ दोनों अपनी चूचियों को मेरी बांह और छाती से रगड़ती हुई मेरे गालों और होंठों को चूमने लगी। मैंने अपना दोनों हाथ एक साथ फ़्रॉक के नीचे घुसाये, और मैं मुस्कुराया। किसी ने पैंटी नहीं पहनी थी। दोनों की चूत को मसलते हुए मैंने कहा, “रंडिओं, घर की सब से बड़ी रंडी अभी किचन में ही है। मैं जल्दी से उसे बेडरूम में भेज कर दोनों की क्रीज़ में रात भर अपने इस बल्ला से शॉट मारुंगा। तब तक तुम दोनों इस पेनड्राईव की विडियो को देखो। तुम्हारे लिए खास सिनेमा डलवा कर लाया हूं।”

एक बार ज़ोर से दोनों की चूत को मसल कर हाथ बाहर किया और एक साथ दोनों की चूचियों को कई बार दबाया। मैंने उन्हें पेनड्राईव दिया और हाउस कोट के पल्ले को फैलाया। किरण ने बेड से उतर कर लंड को पकड़ लिया। एक बार टिप को चूस कर बोली,
“नम्रता, तुमने जैसा कहा था उससे बहुत ही बढ़िया लंड है। अंकल जल्दी से आकर चोदो।”
नम्रता पेनड्राईव को अपने लैपटॉप में लगाने लगी। किरण की चूचियों को बढ़िया से दबा कर बाहर आ गया। अणिमा किचन में ही थी। मुझे देखते ही बोली,
“मैंने खाना लगा दिया है। अशोक इंतज़ार कर रहा है, मैं उसके पास जाती हूं। विश्वास रखो, कल रात प्रेम के साथ रहूंगी और दो-तीन दिन के अंदर तुम्हें एक बहुत बढ़िया माल मिलेगी।”

मैंने पत्नी को विश्वास दिलाया कि उसे कोई डिस्टर्ब नहीं करेगा, कोई ताक-झांक नहीं करेगा, वो आराम से अशोक के साथ मस्ती मारे। मैं खाना खाने लगा और अणिमा के बारे में सोचने लगा। ऐसा नहीं कि मुझे अणिमा की एडल्टरी के बारे में पहले नहीं मालूम था। मेरे जैसा उसने भी शादी के 4-5 महीने बाद ही दूसरे के साथ चुदवाना शुरु कर दिया था।
लेकिन पहले कभी नहीं सुना कि अणिमा का किसी के साथ लंबा संबंध रहा हो। पर राघव और अणिमा के संबंध के बारे मुझे कुछ भी मालूम नहीं था। जब कि अणिमा को बढ़िया से मालूम था कि मेरा संध्या और ग्रेसी के साथ संबंध काफ़ी पुराना था। खैर, अब सब कुछ साफ़ था। एक राघव को छोड़ अणिमा दूसरे सभी मर्दों के साथ सिर्फ़ चुदाई का खेल खेलती थी।

खाना खाने के बाद मैं नम्रता के रुम में गया तो देखा कि दोनों कुतिया नम्रता और किरण नंगी होकर सिनेमा देख रही थी। मैंने यह देख कर लंबी सॉंस ली कि वे अणिमा का नहीं कुछ दूसरा ही विडियो देख रही थी। मैंने हाउसकोट उतार कर फेंका और ज़ोर से पूछा, “मेरा बल्ला शॉट मारने के लिए तैयार है, किस की क्रीज़ में बैटिंग करूं? “
लड़कियों ने पहले ही फ़ैसला कर लिया था। नम्रता, मेरी बेटी ने कहा कि दिन के जैसा पहले मैं कुतिया की चूत चाटूं, और बाद में कुतिया को चोदूं। किरण ने बिना मेरी तरफ़ देखें कहा कि लंड चूसने के साथ वो देखना चाहती है कि नम्रता मेरा लंबा और मोटा लंड कैसे संभालेगी। मतलब साफ़ था, मेरी बेटी ने अपनी सहेली को पापा के साथ की चुदाई के बारे में सब बता दिया था।

लैपटॉप पर जो सिनेमा चल रही थी, उसमें सामुहिक चुदाई चल रही थी। कोई चुदवा रही थी तो किसी की गांड में लंड घुसा था। एक औरत एक साथ तीन लंड संभाल रही थी, एक बुर में, दूसरा गांड में, और तीसरे लंड को चूस रही थी।
नम्रता ने शाम जैसा ही कुतिया का पोज लिया। मैं नीचे खड़ा होकर बेटी की चूत को चूसने-चाटने लगा। इसके बाबजूद भी नम्रता सिनेमा देखती रही। लेकिन किरण नीचे उतरी और मेरे सामने बैठ कर लंड को पकड़ कर चूसने लगी।
मैंने हंसते हुए कहा, “किरण, बहुत बढ़िया से लंड चूस रही हो, लगता है कि लंड चूसने का बहुत अनुभव हो गया है।”
लेकिन लड़की ने कोई जवाब नहीं दिया। मैंने पहले जैसा ही बेटी की चूत को ओरल का पूरा मज़ा दिया। 25 मिनट के ओरल के बाद बेटी ने मुझे डांटते हुए कहा, “कुत्ता, कुछ बोल नहीं रही तो चाटते ही रहोगे? बेटीचोद तुझे मालूम था कि घर में तेरी 2-2 चुदाई की भूखी कुतिया बैठी है, फिर उस रंडी, संध्या मैडम को 2 घंटा क्यों चोदा? बस ऐसे ही धक्का मारता रह, अपनी रंडी मां के यार राघव हाथी का फ़ोन आया था। उससे बात करने के बाद से तेरी पत्नी बहुत दुखी है।”

मतलब मेरे वहां से निकलने के बाद राघव ने अणिमा को फ़ोन किया होगा। सारी बात बताई होगी। चुदाई करते हुए चूतड़ों पर लगातार चांटा मारता रहा लेकिन बेटी ने एक बार भी मना नहीं किया। बेटी की एक ही दिन में तीसरी बार चोदते हुए बोला, “एक तो मैंने संध्या को राघव के सामने ही चोदा। दूसरा मैंने उस बेटीचोद से क़सम ली कि अब वो अपनी बहु संध्या को हाथ भी नहीं लगायेगा।”
किरण हमारी, बाप-बेटी की चूदाई देखती हुई सब सुन रही थी। उसने कमेंट किया, “खुद तो अपनी बेटी को चोद रहे हो और दूसरे को बहु को चोदने से मना कर रहे हो? जब से घर में भाभी आई है मेरे पापा ने अपनी पत्नी को चोदना छोड़ दिया है। भैया ट्रेनिंग के लिए विदेश गये हैं और भाभी अपने ससुर से चुदवा रही है।”

बेटी को चोदते हुए किरण की चूचियों को चूस कर कहा, “बहुत ही मस्त चूची है तेरी। तेरी भाभी की तरह अगर संध्या को भी ससुर से चुदवाने में मज़ा आता, तो मैं कभी नहीं मना करता। संध्या को ससुर की चुदाई में ख़ुशी नहीं आती है, डर से चुदवाती है।”
किरण मेरी बात को समझ गई। उसने अपने चूचियों पर से मेरा हाथ हटाया और चूत पर दबाया। उसकी चूत गीली हो गई थी। उधर सिनेमा भी ख़त्म हो गया। बेटी ने लैपटॉप को बंद कर कहा कि, “तेरे घर से जाने के बाद बबली ( प्रेम की बेटी ) का फ़ोन आया था। कुतिया ने कहा कि कल सुबह तुम्हें वहां भेज दूं।
साली खुद तो चुदवायेगी ही, उसकी मां शीला आंटी और बुआ सुधा भी चुदवायेगी। मैंने कह दिया है कि तुम्हारी एक बहुत ज़रूरी मीटिंग है। तुम हम दोनों के साथ 11 बजे के बाद से शाम तक संगम होटल में रहोगे। एक बढ़िया रुम बुक कर लेना। एक ही दिन में चूत ढीला कर दोगे क्या? बहुत शॉट मार लिया तुमने, अब जल्दी से लंड बाहर निकाल कर मुझे चुसवाओ।”

खुब तेज़ी से 8-10 धक्का मार कर मैंने लंड बाहर खींचा। फचाक की आह से लंड बाहर निकला और बग़ल में बैठी लड़की किरण ने लंड को पकड़ लिया। नम्रता या मैं कुछ बोलता किरण ने लंड को जड़ से पकड़ा और चाटने लगी। सुबह नम्रता की हरकतों को देख कर मैंने सोचा था कि साली पहले से चुदवा रही थी, लेकिन मैं ग़लत था। इसलिए किरण के बारे में कुछ नहीं सोचा। किरण की दोनों चूचियों को सहलाते और दबाते हुए देखता रहा कि लड़की कैसे चाट रही थी।
नम्रता की कुछ देर पहले बोली हुई बात याद आ गई। उसने पूछा, “नरेन, संध्या को तुम चोदते हो, वो बेटीचोद हाथी चोदता है, फिर विमल भैया क्या करता है? अपने बाप से गांड मरवाता है क्या?”

मैंने एक हाथ बढ़ा कर बेटी की चूचियों को सहलाया। मैंने जवाब दिया, “मैं सच बहुत ही क़िस्मत वाला हूं कि तुम दोनों जैसी मस्त प्यारी कुतिया मुझ जैसे बुड्ढे कुत्ते को मिली हो। मैं जब कॉलेज में पढ़ता था तभी अपने ही घर में उसकी सील भी वैसे ही तोड़ी जैसे आज तुम्हारी तोड़ी।
तीसरी बार चुदवाने के बाद बहुत गाली देकर गई कि मेरे जैसे निर्दयी आदमी के पास दोबारा कभी नहीं आयेगी। लेकिन अगले ही दिन कॉलेज जाने के बदले मेरे पास आ गई। मुझे भी कॉलेज नहीं जाने दिया। दिन भर मुझसे चुदवाती रही। कॉलेज की छुट्टी के समय घर गई। वो तो घर चली गई, लेकिन तुम्हारी दादी और बुआ रश्मि ने मुझे रात भर लूटा। उन दोनों ने दिन में मेरी और संध्या की चुदाई देखी थी।

रश्मि भी तुम्हारी तरह कुंवारी ही थी। ऐसा एक साल से ज़्यादा चला। रश्मि की शादी हो गई तो मैं भी संध्या से शादी करने की ज़िद करने लगा। संध्या के घर वाले बहुत अमीर थे। संध्या भी बहुत रोई लेकिन उन्होंने हमारी शादी नहीं होने दी। एक महीने के अंदर उसकी शादी विमल से हो गई। जिस रात संध्या की शादी हो रही थी घर की मेरी दोनों रंडी ने मेरी छोटी बहन कांता को अपने सामने मुझसे चुदवाया।
नम्रता: कांता बुआ तो बहुत ही सुंदर है।
मैं दोनों की चूचियों का मज़ा लेता हुआ बोलता रहा, “सुंदर है, लेकिन तुम दोनों कुतिया से कम। तीनों हरामजादी मुझे इतना परेशान करने लगी कि मैं होस्टल में रहने लगा। प्रेम भी होस्टल आ गया। कांता की शादी हो गई। अगली छुट्टी में हम घर गये और कांता ने अपने सामने तीन दिनों में प्रेम की मां और उसकी दोनों बहनों को मुझसे चुदवाया। कुछ महीनें बाद मैं और प्रेम एक दूसरे के घर की सभी औरतों को मिल कर चोदने लगे।”

नम्रता ने फिर टोका,
“लेकिन प्रेम अंकल देखने में बेकार हैं।” मैंने बेटी की चूत को मसला और जबाब दिया, “अपनी रश्मि और कांता बुआ से पुछना, 25 साल हो गया है, जब भी दोनों रंडी आती है तो प्रेम से जरुर चुदवाती है। तू भी एक बार उससे चुदवा ले, तुझे भी बहुत पसंद आयेगा। मर्दों की ख़ूबसूरती उनके चेहरे या बदन में नहीं होती है उनके लंड और चुदाई करने के तरीक़े में होती है।”
मैंने अपनी बेटी के दिमाग़ में दूसरे से चुदवाने की बात डाली और कुतिया तैयार भी हो गई। उसने कहा, “एक कुत्ता दूसरे कुत्ते के चुदाई की तारीफ़ कर रहा है, तो भी जरुर बढ़िया होगा। ज़रूरत होगी तो तुम्हारे दोस्त से भी चुदवा लूंगी। पहले बताओ की वो कुतिया संध्या वापस तुम्हारे पास कैसे आई?”
किरण आधा से ज़्यादा लंबाई को मुंह में लेकर लंड को प्यार से चूस रही थी।
 
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