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Incest आह..तनी धीरे से.....दुखाता.

Lovely Anand

Love is life
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आह ....तनी धीरे से ...दुखाता
(Exclysively for Xforum)
यह उपन्यास एक ग्रामीण युवती सुगना के जीवन के बारे में है जोअपने परिवार में पनप रहे कामुक संबंधों को रोकना तो दूर उसमें शामिल होती गई। नियति के रचे इस खेल में सुगना अपने परिवार में ही कामुक और अनुचित संबंधों को बढ़ावा देती रही, उसकी क्या मजबूरी थी? क्या उसके कदम अनुचित थे? क्या वह गलत थी? यह प्रश्न पाठक उपन्यास को पढ़कर ही बता सकते हैं। उपन्यास की शुरुआत में तत्कालीन पाठकों की रुचि को ध्यान में रखते हुए सेक्स को प्रधानता दी गई है जो समय के साथ न्यायोचित तरीके से कथानक की मांग के अनुसार दर्शाया गया है।

इस उपन्यास में इंसेस्ट एक संयोग है।
अनुक्रमणिका
भाग 126 (मध्यांतर)
भाग 127 भाग 128 भाग 129 भाग 130 भाग 131 भाग 132
भाग 133 भाग 134 भाग 135 भाग 136 भाग 137 भाग 138
भाग 139 भाग 140 भाग141 भाग 142 भाग 143 भाग 144 भाग 145 भाग 146 भाग 147 भाग 148 भाग 149 भाग 150 भाग 151 भाग 152 भाग 153 भाग 154
 
Last edited:

Shubham babu

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भाग 157

“हैप्पी बर्थडे टू यू, सूरज!”

सूरज खुशी से खिल उठा। । नीली जींस और सफेद टी-शर्ट सचमुच बहुत खूबसूरत थी। उसने सोनी के हाथ चूमे, फिर झुककर अपने बाएँ हाथ से उनके पैर छुए और खुशी-खुशी बोला,

“थैंक यू, मौसी।पर मौसी मेरा जन्मदिन तो कल है।”

“कोई बात नहीं आज यह रख ले कल एक और खूबसूरत उपहार दूंगी”

एक और खूबसूरत उपहार सोनी ने यह बात बिना सोचे समझे कही थी पर नियति ने उसके शब्द पकड़ लिए और उसके चेहरे पर एक कामुक मुस्कान दौड़ गई….

कुछ होने वाला था सूरज की किस्मत पलटने वाली थी…उसकी मायूसी खुशी में बदलने वाली थी…


अब आगे..

युवाओं में जन्मदिन का उत्साह देखने लायक होता है। सूरज भी इससे अछूता नहीं था। अंगूठे की चोट की पीड़ा को भुलाकर वह सोनी द्वारा लाए गए कपड़ों को उत्साह से अपने बदन पर पहनकर देखने लगा। अंगूठे की पीड़ा इसमें आड़े आ रही थी पर उत्साह कायम था। कपड़े न केवल बेहद खूबसूरत थे, बल्कि उनकी चमक से अंदाज़ा लगाया जा सकता था कि वे महंगे भी होंगे। सोनी का यह स्नेह सूरज के चेहरे पर मुस्कान ले आया। सच तो यह था कि केवल सोनी ही नहीं, घर का हर सदस्य सूरज को बेहद प्यार करता था। वह घर का सबसे होनहार बेटा था और कुछ ही समय में डॉक्टर बनने वाला था। डॉक्टर बनना पूरे परिवार के लिए सिर्फ एक उपलब्धि नहीं, बल्कि गर्व और सम्मान की बात थी।

उधर शाहिद जिसने सूरज पर हाथ उठाया था पूरे परिवार के लिए अब एक तरह का विलेन बन चुका था। लेकिन राजा, जो उम्र में सूरज से छोटा जरूर था, उसने शाहिद से बदला लेने की ठान ली थी। उसका बदमाशी में अंदाज़ ऐसा था जैसे वह खुद गैंग ऑफ़ वासेपुर के नवाजुद्दीन सिद्दीकी की तरह किसी बड़े खेल का हिस्सा हो।

इस बीच, सूरज अपने आने वाले कल अपने जन्म दिन के बारे में सोच रहा था। कल उसे समय निकालकर रोज़ी से भी मिलना था। एक तरफ वह अपनी मर्दानगी पर लगे सवालों को लेकर झिझक महसूस करता था, लेकिन अब धीरे-धीरे वह रोज़ी के लिए कुछ खास महसूस करने लगा था।

घर में सभी कल सूरज के जन्मदिन की तैयारियों के बारे में बात कर रहे थे। सुगना, हमेशा की तरह, सूरज के लिए तरह-तरह के व्यंजन बनाने में व्यस्त थी, और पूरा परिवार बड़े उत्साह और आनंद के साथ इसका इंतजार कर रहा था। सूरज परिवार के लिए सिर्फ एक बेटा ही नहीं, बल्कि घर की खुशी और ऊर्जा का केंद्र भी था।

कल शाम को, घर में एक पारिवारिक पार्टी होने वाली थी। कुछ मेहमान भी इसमें शरीक होने वाले थे। पूरे घर में खुशियों की हलचल थी—हँसी, बातचीत और व्यंजनों की खुशबू से माहौल भर गया था। सूरज अपने कमरे में बैठा थोड़ी-सी घबराहट और उत्साह के मिश्रित भाव के साथ सोच रहा था कि कल का दिन कितना खास होने वाला है।

डिनर के बाद हॉल में हल्की पीली रोशनी फैली हुई थी। टीवी बंद था, मगर घर में अपनापन और हँसी तैर रही थी। सूरज सोफ़े पर सबके बीच बैठा था। उसका जादुई अंगूठा कपड़े के पीछे हल्दी के लेप में लिपटा हुआ, जैसे चुपचाप अपनी ऊर्जा वापस बुला रहा हो। सूरज न जाने क्या सोच कर मुस्कुरा रहा था।

मालती की नज़र सीधे सूरज पर टिक गई।

मालती:

“सूरज, क्या हुआ क्यों मुस्कुरा रहे हो”

सूरज:

(हल्की हँसी के साथ)

“कुछ नहीं दीदी, बस थकान है।”

मालती ने भौंहें उठाईं।

मालती:

“थकान से आदमी मुस्कुराता है क्या?”

सामने कुर्सी पर बैठे विकास (जो सभी युवाओं का मौसा था ) ने गला साफ़ किया और मुस्कुराते हुए बोला—

“अरे मालती, छोड़ो उसे। ये उम्र ही ऐसी होती है वैसे भी कल उसका जन्मदिन है कुछ सपने संजो रहा होगा।”

सूरज ने राहत की साँस ली, मगर वो ज़्यादा देर की नहीं थी।

“ आप ही बताइए… क्या आपको भी नहीं लग रहा कि इसमें कुछ चल रहा है?” मालती ने राजू की तरफ देखते हुए कहा। राजू और मालती के बीच खिचड़ी पक रही थी अपितु यह कहा जाए कि पक चुकी थी पर इसका अंदाजा परिवार में किसी को नहीं था।

राजू:

(हँसते हुए)

“लग तो रहा है। आँखों में चमक है और होठों पर मुस्कुराहट। ये सब बिना वजह नहीं आता।”

सूरज झेंप गया।

सूरज:

“राजू भैया, आप भी दीदी की तरफ़ हो गए।”

राजू:

“मैं किसी की तरफ़ नहीं हूँ , बस ज़िंदगी की तरफ़ हूँ। जब दिल किसी को पसंद करने लगे, तो आदमी थोड़ा बदल ही जाता है।”

हॉल में हल्की हँसी गूंज गई।

छोटा भाई राजा चुटकी ले बैठा—

“मतलब पक्का कुछ है!”

मालती ने मौका नहीं छोड़ा।

“तो नाम तो बता दो कम से कम।”

सूरज कुछ पल चुप रहा। फिर बोला—

सूरज:

“अभी नाम लेने का वक्त नहीं आया है।”

सूरज ने रीमा की तरफ देखा। रीमा लाली की पुत्री थी और वह सूरज को मन ही मनपसंद करती थी यद्यपि सूरज उस उम्र में थोड़ा छोटा था परंतु फिर भी वह सूरज को चाहती थी।

सुगना रसोई से आवाज़ देती हैं—

“अब बस करो तुम लोग। कल उसका जन्मदिन है। उसे तंग मत करो।

मालती मुस्कुरा कर पीछे हट गई।

अब हाई कमान का आर्डर आ चुका है कोई सूरज भैया को छेड़ेगा नहीं। छोटी मधु ने खड़े होकर सबको नसीहत दी और सबको अंताक्षरी खेलने के लिए आमंत्रित कर लिया।

सूरज ने हल्की मुस्कान के साथ अपने लिपटे हुए अंगूठे को देखा उसे बार-बार ही महसूस हो रहा था कि कल उसकी दिनचर्या में इस अंगूठे का कितना अहम रोल था। आज पेंट पहनते समय उसे काफी दिक्कत हुई थी और कल तो दिन भर उसे इस दर्द के साथ ही रहना था।

रात के 11:00 बज चुके थे। सोनी सुगना भी बच्चों के साथ बातें कर रहे थे। कुछ लोग अभी भी उत्साह में थे, कुछ जम्हाईया ले रहे थे पर इस सजी हुई महफ़िल से हटने को कोई तैयार नहीं था। और जाए भी कैसे? सबका प्रिय सूरज, बस एक घंटे बाद, अपने जन्मदिन की शुरुआत करने वाला था। सभी उसे “हैप्पी बर्थडे” कहने का इंतजार कर रहे थे।

बातचीत कभी सोनी और विकास की अमेरिका यात्रा पर जाती, युवाओं के अमेरिका को लेकर उत्साह स्वाभाविक रूप से था। कभी सुगना और लाली सलेमपुर और सीतापुर की पुरानी यादों में खो जाती, और कभी बच्चे सरयू सिंह की अकाल मृत्यु के बारे में जानना चाहते। पर हमेशा की तरह, सुगना ऐसे सवालों को टाल देती। कभी-कभी वह दुखी भी हो जाती और सभी को यह एहसास दिलाती कि कुछ बातें ना पूछना ही बेहतर है।

लोग जितना सूरज से प्यार करते थे, उससे ज्यादा सुगना का सम्मान। यद्यपि यह हवेली सोनी और विकास की थी, लेकिन घर में सबसे अधिक सम्मान सुगना का ही था। वह घर की मालकिन तो न थी पर मुखिया अवश्य थी। सुगना की बात सभी के लिए मान्य थी, और क्यों नहीं—वह सबका उतना ही ख्याल रखती थी, चाहे वह सूरज हो या परिवार का सबसे दुष्ट बेटा, राजा। राजा भी जानता था कि वह गलत है, पर सुगना के प्यार की वजह से वह भी सहज और शांत महसूस करता था।

महफ़िल में हँसी, यादें और बातचीत का सिलसिला चलता रहा। हर कोई, चाहे बड़ा हो या छोटा, अपने अपने अनुभवों और भावनाओं में खोया था। लेकिन सबके दिलों में एक बात तय थी सूरज सबका प्यारा था और अपनी मां सुगना की जान था।

की सुइयाँ धीरे-धीरे बारह बजने को तैयार थीं। कुछ सेकंड पहले ही बच्चों का उत्साह शिखर पर था। सभी उठकर एक साथ “10… 9… 8… 7…” चिल्लाने लगे। आवाज़ धीरे-धीरे तेज़ होती गई और आखिरकार

“हैप्पी बर्थडे टू यू,

हैप्पी बर्थडे टू यू”

की गूंज के साथ सभी ने सूरज को बारी-बारी से गले लगाया।

छोटी मधु ने बड़े भाई के पैर छुए। छोटा राजा भागकर फ्रिज से बड़ा-सा केक निकाल लाया और थोड़ी ही देर में सूरज ने उस खूबसूरत केक को काटा। हमेशा की तरह केक पर पहला हक उसकी माँ का था। सुगना ने बेहद प्यार से सूरज के माथे को चूमा। दूसरा केक उसने अपनी सोनी मौसी को खिलाया और फिर धीरे-धीरे सभी बड़ों को बारी-बारी से केक खिलाया। सबसे आख़िर में उसने अपनी छोटी बहन मधु को केक खिलाया।

नियति मुस्कुराते हुए सूरज और मधु दोनों को साथ देख रही थी। उन्हें साथ देखकर नियति एक बार फिर विधाता को याद कर रही थी, जिन्होंने उनके भाग्य में न जाने क्यों वह लिख दिया था, जो निश्चित ही एक पाप था।

बहरहाल, धीरे-धीरे सूरज के जन्मदिन का यह छोटा-सा सेलिब्रेशन समाप्त हुआ और सब अपने-अपने कमरों में जाने लगे। सुगना, सोनी और सूरज अब सूरज के कमरे में आ चुके थे। सुगना और सोनी ने सूरज को बहुत प्यार किया और उसे ढेर सारी शुभकामनाएँ दीं। सुगना के ज़ेहन में अब भी सूरज की शारीरिक कमी का ख्याल घूम जाता था, और वह दुखी हो जाती थीं। आज सूरज 21 वर्ष का हो चुका था।

कुछ देर और बातचीत करने के बाद सुगना और सोनी दोनों ने एक बार फिर सूरज को शुभकामनाएँ दीं, उसके माथे पर हाथ फेरा और अपने-अपने कमरों की ओर चल पड़ीं।

अभी सुगना और सोनी हाल में ही पहुँची थीं कि सूरज ने अंदर अपने लिहाफ़ को ऊपर खींचने की कोशिश की और गलती से अपने चोटिल अंगूठे का सहारा ले लिया। सूरज के मुँह से एक हल्की-सी कराह निकल गई।

सुगना और सोनी वापस सूरज के कमरे में आ गईं। सूरज उनके आने का कारण समझ गया। उसने गर्दन बाहर निकालकर कहा,

“अरे, कोई बात नहीं। अंगूठा लिहाफ़ से टकरा गया था।”

सोनी को अचानक अपनी उस दवा की याद आ गई, जो सूरज के अंगूठे पर लगानी थी। उसने कहा,

“दीदी, आप जाकर सो जाइए। मैं सूरज के अंगूठे पर वह दवा लगा दूँगी। मुझे विश्वास है इससे दर्द में ज़रूर राहत मिलेगी।”

सुगना ने भी साथ रुकने की बात कही, तो सोनी बोली,

“दीदी, आप पूरी तरह थक चुकी हैं। रसोई में इतने पकवान बनाना कोई आसान काम नहीं होता। आपको आराम करना चाहिए, दवा मैं लगा दूँगी।”

सोनी ने सुगना के कंधे थामकर उसे धीरे-धीरे उसके कमरे की ओर भेज दिया। सुगना और सोनी का आपसी स्नेह इस उम्र तक भी बना हुआ था।

कुछ देर बाद सोनी दवा लेकर सूरज के कमरे में पहुँची।

नियति, सोनी और सूरज को एक साथ देखकर मुस्कुरा रही थी। सोनी ने अपने शुरुआती दिनों में नर्स के रूप में काम किया था, इसलिए उसे चिकित्सा का कुछ ज्ञान था। आज नर्स सोनी, डॉक्टर बनकर सूरज के अंगूठे पर मलहम लगाने आई थी।

जैसे ही सोनी ने सूरज के अंगूठे की पट्टी हटाई, चूने और हल्दी का सूखा लेप भी पट्टी के साथ निकल आया। हल्दी का थोड़ा-सा अंश अब भी अंगूठे पर लगा था। सोनी ने अपनी कोमल उँगलियों से उसे धीरे-धीरे साफ़ किया।

सूरज को एक अजीब-सी अनुभूति हुई, जैसे अंगूठे में हल्का-सा करंट दौड़ गया हो। सोनी ने अपनी उँगलियों पर मलहम निकाला और सूरज के अंगूठे पर लगा दिया। जैसे ही उसने अंगूठे को अपने अंगूठे और तर्जनी के बीच लेकर हल्के से सहलाया, सूरज के पूरे शरीर में फिर एक सिहरन-सी दौड़ गई।

अचानक सूरज ने महसूस किया कि उसके लिंग में हलचल हो रही।

लिंग की रक्त कोशिकाओ में रक्त प्रवाह अचानक तेज हो गया था सूरज के लिंग में अचानक तनाव आना शुरू हो गया था सूरज आश्चर्यचकित था। जैसे-जैसे सोनी सूरज के अंगूठे को सहलाए जा रही थी वैसे वैसे सूरज के लिंग का तनाव बढ़ता जा रहा था यह तनाव सुखद था। लिंग में तनाव आना वैसे भी सुखद अनुभूति देता है। सूरज ने सोनी से नजर बचाकर अपना दूसरा हाथ लिहाफ के अंदर ले जाकर इस आश्चर्य को महसूस करना चाहा।

सूरज का लंड तनकर खड़ा हो चुका था। सूरज के लिंग में आशातीत वृद्धि हुई थी और शायद इसी कारण सूरज को अपना हाथ लिहाफ के अंदर ले जाना पड़ा था।


सोनी ने सूरज के हाथों की हलचल उसकी जांघों के बीच देख ली लिहाफ सूरज की इस हरकत को छुपा पाने में नाकाम रहा था।

सोने की उंगलियां रुक गई और सूरज ने सोने की आंखों को अपनी कमर की तरफ देखते हुए देख लिया।

सूरज झेंप गया परंतु उसने स्थिति संभाली और बोला…मौसी यह कौन सा मलहम है

सोनी ने अपने दूसरे हाथ से मलहम का डिब्बा सूरज की ओर दिखाई परंतु अब भी वह चिंतित थी बचपन में सूरज के अंगूठे को सहलाए जाने से होने वाली प्रतिक्रिया उसे याद आ रही थी हे भगवान …कहीं वह सच तो नहीं। सोनी का कलेजा धक-धक करने लगा उसे एक अनजाना डर सताने लगा उसके हाथ रुक गए सूरज ने फिर एक बार उसका ध्यान अपनी और खींचा।

“मौसी यह अंगूठे के पीछे ज्यादा मलहम लगा है इसे फैला दीजिए।”

सोनी ने अनमने ढंग से उसे मलहम को चारों तरफ बराबरी से लगा दिया और सूरज के लिंग का तनाव और आकार को और भी ज्यादा बढ़ा दिया।

लिंग के तनाव का असर सूरज के चेहरे पर भी दिखाई पड़ने लगा उसका मासूम चेहरा वासना से तमतमा उठा था। सोनी को पक्का यकीन हो गया की निश्चित ही बचपन की वह घटना आज दोबारा रिपीट हो चुकी है उसने सूरज का हाथ छोड़ दिया और हड़बड़ी में वहां से उठते हुए बोली..

अब सो जाओ एक बार फिर हैप्पी बर्थडे टू यू

सोनी ने धड़कते हुए कलेजे के बावजूद अपने होठों पर मुस्कुराहट लाई और सूरज के कमरे से बाहर निकल गई जाते समय उसने दरवाजा बंद कर दिया।

सोनी को बचपन की बातें पूरी तरह याद आ चुकी थी इस तनाव का निदान क्या था उसे यह भी याद आ चुका था। क्या उसे अपने होंठ सूरज के…. हे भगवान नहीं नहीं ऐसा नहीं हो सकता। जितना ही वह इस बारे में सोचती उतना ही उसका दिल घबराने लगता। अपने मन में घबराहट और तेज धड़कनों के साथ सोनी बिस्तर पर आ चुकी थी पर दिमाग में वही बातें घूम रही थी।

उधर अपनी मौसी सोनी के जाने के बाद सूरज बिस्तर पर से उठा उसने दरवाजा लॉक किया और वापस बिस्तर पर आकर अपने लंड को आजाद कर दिया। लंड अंडरवियर से बाहर आते ही उछलकर खड़ा हो गया।

सूरज अपने खड़े लंड को देखकरआश्चर्यचकित था। इतना सुंदर लंड तो उसने पोर्न वेबसाइट पर भी नहीं देखा था। लगभग 2 इंच व्यास और आठ इंच लंबी कद काठी का वह लंड एक खूबसूरत सुपड़ा लिए हुए था। जो उसकी खूबसूरती को और भी बढ़ा रहा था। लंड पर तनीहुई उभरी नसें यह साबित कर रही थी की यह न सिर्फ कसरत्ती है अपितु कसरत करने के लिए ही बना है।

सूरज ने अपने हाथ से उसे सहलाने की कोशिश की यह अनुभूति अनुपम थी विशिष्ट थी। आज पहली बार अपने जीवन में वह अपने खड़े लंड को सहला रहा था। सूरज आनंद के सागर में गोते लगाने लगा। किसी युवा द्वारा अपने लंड को सहलाना स्वतः ही उत्तेजना और कल्पनाओं को जन्म देता है।

सूरज को अपने लंड को सहलाने बेहद मजा आ रहा था और हो भी क्यों ना सूरज की कल्पनाएं परवान चढ़ने लगी उसे रोजी का ध्यान आया…

उसने अपना मोबाइल उठाया ..

रोजी का मैसेज मोबाइल पर आया हुआ था

हैप्पी बर्थडे माय लव…

सूरज ने उसे थैंक यू नोट भेजा। वह चाहता तो था कि अपने खड़े लंड को एक बार रोजी को दिखाएं और अपनी मर्दानगी साबित करे पर यह संभव नहीं था। फिर भी उसने अपने मोबाइल से अपने खड़े लंड की फोटो ली और उसे अपने मोबाइल में छुपा लिया।

रोजी सुबह-सुबह के लिए रोज पार्क में जाती थी वह पार्क सूरज की हवेली से ज्यादा दूर नहीं था अचानक सूरज के दिमाग में कुछ आया और उसने रोजी को एक बार फिर मैसेज किया।

कल जॉगिंग के लिए जाओगी क्या?

उधर रोजी अब तक सो चुकी थी जवाब आने की उम्मीद नहीं थी सूरज ने मोबाइल किनारे रख दिया और अपनी जांघों के बीच खिले हुए फूल को अपनी हथेली से पड़कर एक बार फिर निहारने लगा।

सूरज अपने लंड को बड़े प्रेम से सहला रहा था कभी वह उसके ऊपर उभर रही सांप जैसी नसों को छूता कभी उसके सुपाड़े के पीछे उस अति संवेदनशील जगहों को। हर बार उसके शरीर में एक सुखद अनुभूति होती जैसे-जैसे सूरज अपने लंड को सहलाता गया वासना अपने आयाम बढ़ाती गई वह बार-बार रोजी को नग्न और नग्न करने की कोशिश करता परंतु यह कठिन था दरअसल इसके पूर्व सूरज ने कभी भी अपनी वासना को फलीभूत नहीं किया था।


वैसे भी जब लंड में तनाव ही ना हो तो कामुक कल्पनाओं का क्या फायदा। पर आज स्थितियां अलग थीं

सूरज ने अपनी वासना के तूफान को और हवा दी लंड सूरज की हथेलियों द्वारा मसला जा रहा था…उत्तेजना ने उत्कर्ष प्राप्त किया और सूरज के लंड से वीर्य की धार फूट पड़ी आह…..मौ…सी………..

सूरज का लंड लगातार वीर्य उगलता रहा और सूरज के लिहाफ पर उसके छींटे गिरते रहे…

सूरज के लिए हस्तमैथुन का यह पहला अनुभव था जितना सुख उसने आज महसूस किया था यह अनोखा था अद्भुत था सूरज को उसके जन्मदिन का उपहार मिल चुका था…

सूरज कुछ देर उसी स्थिति में रहा अपने लंड का यह रूप उसके लिए अनोखा था वह मर्दानगी से भरा हुआ था। सूरज का स्वाभिमान आज अपने चरम पर था अब तक उसने अपने लंड में तनाव न आने को लेकर जितनी चिंता की थी एक पल में ही वह सब खुशियों में बदल गया था।

सूरज ने अपने लंड की तरफ देखा वह अब भी वैसे ही तना हुआ था। सूरज ने अब तक जो पढ़ाई की थी या जो समझा था उसके अनुसार वीर्य स्खलन के बाद लंड को वापस सामान्य स्थिति में आ जाना चाहिए था परंतु लंड का तनाव यथावत था।

सूरज ने उसे वापस अंडरवियर में कैद करने की कोशिश की परंतु यह कठिन था। सूरज को यकीन ही नहीं हो रहा था कि ऐसा कैसे हो सकता है उसने इधर-उधर ध्यान भटकाया पर स्थिति जस की तस थी। लंड का तनाव कम होने का नाम ही नहीं ले रहा था। सूरज तने हुए लंड के साथ सूरज अब असहज महसूस करने लगा।

पर इन खुशियों को साझा करने वाला कोई भी ना था उसे अचानक रोजी का ध्यान आया। उसने मोबाइल उठाया पर रोजी का कोई मैसेज नहीं था।

सूरज ने एक बार फिर अपने इतने हुए लंड को अपना हाथों से सहलाना शुरू किया और कुछ ही देर की मेहनत के पश्चात एक बार फिर वीर्य स्खलन करने में कामयाब रहा परंतु जिस उद्देश्य के लिए यह किया गया था उसमें आनंद कम और लिंग का तनाव घटना प्राथमिकता थी। पर दुर्भाग्य दोबारा वीर्य स्खलन होने के बावजूद लिंग का तनाव कम न हुआ।

सूरज पूरी तरह थक चुका था लगातार दो बार हस्तमैथुन कर उसका शरीर शिथिल पड़ चुका था परंतु लिंग वैसे ही तनाव हुआ था सूरज की धड़कनें बढ़ी हुई थी उसने लिहाफ अपने बदन पर डाला और अपना ध्यान उसे तने हुए लिंग से हटाने की कोशिश की पर शायद यह संभव नहीं था जब लिंग में तनाव चरम पर होता है मनुष्य को और कुछ नहीं सोचता है आप अपना ध्यान चाह कर भी नहीं हटा सकते यही स्थिति सूरज की थी रात के दो बज चुके थे और सूरज अब भी अपनी खुशियों से जूझ रहा था। थकावट से कभी उसकी आंखें नींद से बोझिल होती परंतु उसके लंड का तनाव उसे सोने नहीं दे रहा था।

सुबह के 5:00 बज चुके थे अचानक मोबाइल पर ट्रिंग की आवाज हुई। सूरज ने मोबाइल उठाया यह रोजी का ही मैसेज था


हां आ रही हूं क्यों पूछ रहे हो

मैं भी आ रहा हूं सूरज ने रिप्लाई किया

अरे वह तो बर्थडे बॉय से सुबह-सुबह ही मुलाकात होगी चलो मैं तैयार होकर आता हूं सी यू

रोजी का मैसेज स्पष्ट था दोबारा रिप्लाई करने की जरूरत नहीं थी सूरज भी बिस्तर से उठा उसकी आंखें नींद पूरी नहीं होने की वजह से लाल थी पर लंड अभी उसी तरह तना हुआ था।

सूरज ने बड़ी मुश्किल से अपनी नित्य कर्म निपटा ए तने हुए लंड की वजह से उसे कई दिक्कतों का सामना करना पड़ रहा है वह तैयार हुआ बड़ी मुश्किल से लैंड को अपने पेट में कैद करने की कोशिश की पर उसका आकार और तनाव छुपाने लायक नहीं था सूरज ने सबसे ढीली डाली शर्ट पहनी और उसके ऊपर एक आवरण सा दे दिया।

एक तरफ सूरज के मन में खुशी थी कि उसके लंड में आज पहली बार तनाव आया था पर लगातार तनाव ने उसके मन में चिंता की लकीरें डाल दी थी।

सूरज ने अपनी मोटरसाइकिल उठाई और कुछ ही देर में रोजी के पास पार्क में पहुंच गया रोजी उसका इंतजार कर रही थी रोजी ने उसे एक खूबसूरत सा फूल दिया और बोला


Happy b day to you ..हमेशा इस फूल की तरह ही हंसते मुस्कुराते रहना

सूरज ने अपनी बाहें खोल दी और रोजी सूरज से सटती चली गई। सूरज की मजबूत बाहों ने रोजी को अपने आगोश में ले लिया दोनों प्रेमिका एक दूसरे से बेहद करीब आ गए। सूरज ने अपने हाथ से रोजी की कमर को सहारा देकर अपनी ओर खींचा और पहली बार रोजी ने अपने नाभि के नीचे एक तने और कठोर अंग को महसूस किया यह निश्चित ही सूरज का तनाव हुआ था। रोजी सहम गई उसने सर उठाकर सूरज के चेहरे की तरफ देखा सूरज ने पहले तो उसके माथे को चुम्मा और धीरे-धीरे उसके होंठ रोजी के होठों से सट गए।


चुंबनों की प्रगाढ़ता बढ़ती गई और रोजी की मन में कुछ हलचल होने लगी। अचानक रोजी ने अपना हाथ नीचे किया और सूरज के लंड में आए इस तनाव को महसूस करने की कोशिश की। रोजी की कोमल हथेलियां सूरज के लंड को पेट के ऊपर से ही महसूस कर रही थी। लंड का आकार और तनाव दोनों ही रोजी को आश्चर्यचकित कर रहा था। वह एक तरफ शर्मा भी रही थी दूसरी तरफ इस तनाव को देखकर खुश भी हो रही थी। सूरज की मर्दानगी को लेकर जो प्रश्न उसके अंतर्मन में पिछले कुछ दिनों से उठ रहे थे वह सब अचानक ही शांत हो गए थे। सूरज एक पूर्ण मर्द की भांति उसके समक्ष उपस्थित था रोजी ने सूरज के चुंबनों का प्रति उत्तर और भी आत्मीयता से देना शुरू कर दिया तथा अपनी हथेली से उसके लंड को दबाकर और सहलाकर उसका जायजा लेने की कोशिश की सूरज ने उसका हाथ पकड़ लिया और उससे अलग होते हुए बोला

अरे यह पब्लिक प्लेस है कंट्रोल करो…

दोनों मुस्कुराने लगे सूरज ने अपने शर्ट ठीक की और दोनों पार्क में तरह-तरह की बातें करते हुए घूमने लगे परंतु आज खुशियों का दिन था सूरज के लिंग के तनाव ने न सिर्फ सूरज को शहीद कर दिया था बल्कि अब रोगी के मन में भी तंगी फूटने लगी थी सूरज जैसे मर्द को अपनी जिंदगी में पाकर वह बेहद प्रसन्न थी बेहद खुश थी…

आज कॉलेज आओगे क्या ? रोजी ने पूछा

नहीं आज तो मुश्किल है आज बर्थडे मना लेते हैं


सूरज ने मुस्कुराते हुए जवाब दिया। सुबह के 6:30 बज चुके थे जॉगिंग का टाइम पूरा हो चुका था अब बिछड़ने का वक्त था। बिछड़ते वक़्त सूरज और रोजी एक बार फिर आलिंगन बद्ध हुए। सूरज मैं एक बार फिर रोजी को चूमने की कोशिश की रोजी ने उसे निराश ना किया इस बार उसने फिर सूरज के लंड पर हाथ लगाने की कोशिश की और उसके आश्चर्य का ठिकाना ना रहा लंड पूरी तरह तना हुआ था…

रोजी को यह यकीन ही नहीं हो रहा था कि यह तुरंत ही कैसे खड़ा हो गया था.. वह तुरंत सूरत से अलग हुई और बोली..

आज तो छोटे मियां पूरे जोश में दिखाई पड़ रहे हैं उसकी आंखों ने नीचे झुक कर सूरज को उसकी बात पूरी तरह समझा दी.. सूरज मुस्कुरा कर रह गया.

उसे सूरज की स्थिति का ज्ञान नहीं था यह तनाव अब सूरज के मानसिक तनाव का कारण बन चुका था।

सूरज वापस घर आ चुका था अभी भी घर में सब सो ही रहे थे सिर्फ सुगना और सोनी जगे हुए थे और हवेली के खूबसूरत हाल में चाय पी रहे थे। सूरज को अंदर आते देख सुगना खुश हो गई। सुगना ने सूरज को अपने पास बुलाया और बगल में बैठा लिया। सूरज सकुचा रहा था उसने अपनी शर्ट ठीक की बने हुए लंड को यथासंभव छुपाने की कोशिश की पर सामने बैठी अपनी मौसी से छुपा पाने में नाकाम रहा। सोनी की यह बेहद असहज लगा ऐसा लग रहा था जैसे सूरज में अपनी पेट में कोई बड़ा खीरा छुपाया हुआ हो…

आ बैठ …अरे इतनी सुबह-सुबह कहां चले गए थे…

सुगना ने सूरज के माथे पर प्यार से हाथ फिरते हुए कहा

कुछ नहीं थोड़ा टहलने का मन कर रहा था बाहर ही घूम रहा था।

यह तेरी आंखें लाल क्यों है नींद नहीं आई क्या? सुगना ने सूरज की आंखों में लाल डोरे देखते हुए कहा…

सूरत हड़बड़ा गया यह लाल डोरे कुछ तो अनिद्रा की वजह से और कुछ सूरज के तने हुए लंड की वजह से भी..

कुछ नहीं मां सब ठीक है मुझे भी चाय पीनी है सूरज ने बात टालते हुए कहा

ठीक है मैं लेकर आती हूं।

सुगना रसोई में चाय लेने चली गई इधर सोनी ने सूरज को असहज देखकर अपने सोफे से उठकर सूरज के पास आ गई और उसकी हाथों को अपने हथेली में लेकर सहलाते हुए बोली।

क्या हुआ बर्थडे बॉय आज टेंशन में क्यों है?

कुछ नहीं मौसी सब ठीक है बस थोड़ा नींद डिस्टर्ब हुई थी..

सूरज ने बात टालने की कोशिश की..


क्यों क्या हो गया? …सोनी ने सूरज की आंखों में आंखें डालते हुए पूछा।

सूरज ने कुछ नहीं कहा अपनी गर्दन झुका ली


मुझे कुछ नहीं बोलना..

तभी सोनी ने सूरज के टूटे हुए अंगूठे को अपनी कोमल उंगलियों से सहलाते हुए पूछा

और अंगूठे का दर्द कैसा है?

सोने की अंगूठा सहलाए जाने से सूरज के लंड में एक और तेज करंट दौड़ी और उसके लंड का तनाव और आकार और भी बढ़ गया…

सूरज के मुंह से कराह निकल गई…

सूरज ने अपना अंगूठा सोनी के हाथ से खींच लिया और बोला

मौसी अब बस..

यह कराह अंगूठे के दर्द की वजह से नहीं थी अपितु लंड में आए बेहद तनाव की वजह से थी।

सूरज ने अपना हाथ नीचे किया और तनाव से फट रहे लंड को अपने पैंट में और जगह देने की कोशिश की।

सूरज के शर्ट का आवरण हटते ही सोनी ने सूरज के पेट के अंदर आए उसे अप्रत्याशित उभार को देख लिया जो कतई सामान्य नहीं था। उसका आकार यह निश्चित तौर पर बता रहा था कि यह सूरज का लिंग है। लिंग… पर इतना बड़ा? सूरज तो अभी नया-नया युवा था। यह उभार अप्रत्याशित था सोनी घबरा गई। सोने के चेहरे पर हवाईया उड़ने लगी।

इतनी सुबह-सुबह अपनी मां और मौसी के पास बैठे सूरज के लंड में इतना तनाव आना अप्रत्याशित था।

अचानक उसे बचपन की वह घटना पूरी तरह याद आ गई जब वह बचपन में सूरज के अंगूठे को मजाक मजाक में सहलाया करती थी और…. फिर …. जैसे-जैसे सोनी को वह घटना याद आती गई सोने के चेहरे पर शिकन आते गई

हे भगवान मुझसे यह क्या हो गया…

सूरज अब और असहज हो चुका था वह अपने रूम में जाने के लिए उठा। तभी सुगना चाय लेकर आ चुकी थी

अरे बैठ पहले चाय पी ले.. फिर जाना..

सूरज से अपने लंड का तनाव और सहा नहीं जा रहा था फिर भी उसने अपनी मां की बात मान ली और बड़ी मुश्किल से बैठकर अपने बने हुए लंड को छुपाते हुए जल्दी जल्दी चाय पीने लगा।

उधर सोनी का कलेजा धक-धक कर रहा था उसे अब यकीन हो चला था कि सूरज के लिंग में आया हुआ तनाव निश्चित ही उसके अंगूठे सहलाए जाने के कारण हुआ था।

सोनी मन ही मन सोच रही थी पर तब तो सूरज एक बालक था अब तो तने हुए लिंग को शिथिल करने का उपाय सर्वविदित था। क्या सूरज को हस्तमैथुन के बारे में नहीं मालूम था? क्या सूरज ने इस तनाव को कम करने के लिए हस्तमैथुन नहीं किया होगा…

प्रश्न जटिल था सूरज की असहज स्थिति देखकर सोनी स्वयं परेशान हो गई थी इस प्रश्न का उत्तर जानना जरूरी था। सूरज के लिंग का तनाव कम करने का उपाय सोनी को बखूबी याद था पर ……

हे भगवान…. यह असंभव था….

पुत्र समान जवान सूरज का लंड ……चूमना……सोनी की रूह कांप उठी…अनिष्ट की आशंका से सोनी के माथे पर पसीने की बूंद चालक आई…थी…



अगला एपिसोड डायरेक्ट मैसेज पर उपलब्ध होगा..

जुड़े रहें…
Maza hi aa gya badhiya 👌 👌 👌
 

Iron Man

Try and fail. But never give up trying
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भाग 157

“हैप्पी बर्थडे टू यू, सूरज!”

सूरज खुशी से खिल उठा। । नीली जींस और सफेद टी-शर्ट सचमुच बहुत खूबसूरत थी। उसने सोनी के हाथ चूमे, फिर झुककर अपने बाएँ हाथ से उनके पैर छुए और खुशी-खुशी बोला,

“थैंक यू, मौसी।पर मौसी मेरा जन्मदिन तो कल है।”

“कोई बात नहीं आज यह रख ले कल एक और खूबसूरत उपहार दूंगी”

एक और खूबसूरत उपहार सोनी ने यह बात बिना सोचे समझे कही थी पर नियति ने उसके शब्द पकड़ लिए और उसके चेहरे पर एक कामुक मुस्कान दौड़ गई….

कुछ होने वाला था सूरज की किस्मत पलटने वाली थी…उसकी मायूसी खुशी में बदलने वाली थी…


अब आगे..

युवाओं में जन्मदिन का उत्साह देखने लायक होता है। सूरज भी इससे अछूता नहीं था। अंगूठे की चोट की पीड़ा को भुलाकर वह सोनी द्वारा लाए गए कपड़ों को उत्साह से अपने बदन पर पहनकर देखने लगा। अंगूठे की पीड़ा इसमें आड़े आ रही थी पर उत्साह कायम था। कपड़े न केवल बेहद खूबसूरत थे, बल्कि उनकी चमक से अंदाज़ा लगाया जा सकता था कि वे महंगे भी होंगे। सोनी का यह स्नेह सूरज के चेहरे पर मुस्कान ले आया। सच तो यह था कि केवल सोनी ही नहीं, घर का हर सदस्य सूरज को बेहद प्यार करता था। वह घर का सबसे होनहार बेटा था और कुछ ही समय में डॉक्टर बनने वाला था। डॉक्टर बनना पूरे परिवार के लिए सिर्फ एक उपलब्धि नहीं, बल्कि गर्व और सम्मान की बात थी।

उधर शाहिद जिसने सूरज पर हाथ उठाया था पूरे परिवार के लिए अब एक तरह का विलेन बन चुका था। लेकिन राजा, जो उम्र में सूरज से छोटा जरूर था, उसने शाहिद से बदला लेने की ठान ली थी। उसका बदमाशी में अंदाज़ ऐसा था जैसे वह खुद गैंग ऑफ़ वासेपुर के नवाजुद्दीन सिद्दीकी की तरह किसी बड़े खेल का हिस्सा हो।

इस बीच, सूरज अपने आने वाले कल अपने जन्म दिन के बारे में सोच रहा था। कल उसे समय निकालकर रोज़ी से भी मिलना था। एक तरफ वह अपनी मर्दानगी पर लगे सवालों को लेकर झिझक महसूस करता था, लेकिन अब धीरे-धीरे वह रोज़ी के लिए कुछ खास महसूस करने लगा था।

घर में सभी कल सूरज के जन्मदिन की तैयारियों के बारे में बात कर रहे थे। सुगना, हमेशा की तरह, सूरज के लिए तरह-तरह के व्यंजन बनाने में व्यस्त थी, और पूरा परिवार बड़े उत्साह और आनंद के साथ इसका इंतजार कर रहा था। सूरज परिवार के लिए सिर्फ एक बेटा ही नहीं, बल्कि घर की खुशी और ऊर्जा का केंद्र भी था।

कल शाम को, घर में एक पारिवारिक पार्टी होने वाली थी। कुछ मेहमान भी इसमें शरीक होने वाले थे। पूरे घर में खुशियों की हलचल थी—हँसी, बातचीत और व्यंजनों की खुशबू से माहौल भर गया था। सूरज अपने कमरे में बैठा थोड़ी-सी घबराहट और उत्साह के मिश्रित भाव के साथ सोच रहा था कि कल का दिन कितना खास होने वाला है।

डिनर के बाद हॉल में हल्की पीली रोशनी फैली हुई थी। टीवी बंद था, मगर घर में अपनापन और हँसी तैर रही थी। सूरज सोफ़े पर सबके बीच बैठा था। उसका जादुई अंगूठा कपड़े के पीछे हल्दी के लेप में लिपटा हुआ, जैसे चुपचाप अपनी ऊर्जा वापस बुला रहा हो। सूरज न जाने क्या सोच कर मुस्कुरा रहा था।

मालती की नज़र सीधे सूरज पर टिक गई।

मालती:

“सूरज, क्या हुआ क्यों मुस्कुरा रहे हो”

सूरज:

(हल्की हँसी के साथ)

“कुछ नहीं दीदी, बस थकान है।”

मालती ने भौंहें उठाईं।

मालती:

“थकान से आदमी मुस्कुराता है क्या?”

सामने कुर्सी पर बैठे विकास (जो सभी युवाओं का मौसा था ) ने गला साफ़ किया और मुस्कुराते हुए बोला—

“अरे मालती, छोड़ो उसे। ये उम्र ही ऐसी होती है वैसे भी कल उसका जन्मदिन है कुछ सपने संजो रहा होगा।”

सूरज ने राहत की साँस ली, मगर वो ज़्यादा देर की नहीं थी।

“ आप ही बताइए… क्या आपको भी नहीं लग रहा कि इसमें कुछ चल रहा है?” मालती ने राजू की तरफ देखते हुए कहा। राजू और मालती के बीच खिचड़ी पक रही थी अपितु यह कहा जाए कि पक चुकी थी पर इसका अंदाजा परिवार में किसी को नहीं था।

राजू:

(हँसते हुए)

“लग तो रहा है। आँखों में चमक है और होठों पर मुस्कुराहट। ये सब बिना वजह नहीं आता।”

सूरज झेंप गया।

सूरज:

“राजू भैया, आप भी दीदी की तरफ़ हो गए।”

राजू:

“मैं किसी की तरफ़ नहीं हूँ , बस ज़िंदगी की तरफ़ हूँ। जब दिल किसी को पसंद करने लगे, तो आदमी थोड़ा बदल ही जाता है।”

हॉल में हल्की हँसी गूंज गई।

छोटा भाई राजा चुटकी ले बैठा—

“मतलब पक्का कुछ है!”

मालती ने मौका नहीं छोड़ा।

“तो नाम तो बता दो कम से कम।”

सूरज कुछ पल चुप रहा। फिर बोला—

सूरज:

“अभी नाम लेने का वक्त नहीं आया है।”

सूरज ने रीमा की तरफ देखा। रीमा लाली की पुत्री थी और वह सूरज को मन ही मनपसंद करती थी यद्यपि सूरज उस उम्र में थोड़ा छोटा था परंतु फिर भी वह सूरज को चाहती थी।

सुगना रसोई से आवाज़ देती हैं—

“अब बस करो तुम लोग। कल उसका जन्मदिन है। उसे तंग मत करो।

मालती मुस्कुरा कर पीछे हट गई।

अब हाई कमान का आर्डर आ चुका है कोई सूरज भैया को छेड़ेगा नहीं। छोटी मधु ने खड़े होकर सबको नसीहत दी और सबको अंताक्षरी खेलने के लिए आमंत्रित कर लिया।

सूरज ने हल्की मुस्कान के साथ अपने लिपटे हुए अंगूठे को देखा उसे बार-बार ही महसूस हो रहा था कि कल उसकी दिनचर्या में इस अंगूठे का कितना अहम रोल था। आज पेंट पहनते समय उसे काफी दिक्कत हुई थी और कल तो दिन भर उसे इस दर्द के साथ ही रहना था।

रात के 11:00 बज चुके थे। सोनी सुगना भी बच्चों के साथ बातें कर रहे थे। कुछ लोग अभी भी उत्साह में थे, कुछ जम्हाईया ले रहे थे पर इस सजी हुई महफ़िल से हटने को कोई तैयार नहीं था। और जाए भी कैसे? सबका प्रिय सूरज, बस एक घंटे बाद, अपने जन्मदिन की शुरुआत करने वाला था। सभी उसे “हैप्पी बर्थडे” कहने का इंतजार कर रहे थे।

बातचीत कभी सोनी और विकास की अमेरिका यात्रा पर जाती, युवाओं के अमेरिका को लेकर उत्साह स्वाभाविक रूप से था। कभी सुगना और लाली सलेमपुर और सीतापुर की पुरानी यादों में खो जाती, और कभी बच्चे सरयू सिंह की अकाल मृत्यु के बारे में जानना चाहते। पर हमेशा की तरह, सुगना ऐसे सवालों को टाल देती। कभी-कभी वह दुखी भी हो जाती और सभी को यह एहसास दिलाती कि कुछ बातें ना पूछना ही बेहतर है।

लोग जितना सूरज से प्यार करते थे, उससे ज्यादा सुगना का सम्मान। यद्यपि यह हवेली सोनी और विकास की थी, लेकिन घर में सबसे अधिक सम्मान सुगना का ही था। वह घर की मालकिन तो न थी पर मुखिया अवश्य थी। सुगना की बात सभी के लिए मान्य थी, और क्यों नहीं—वह सबका उतना ही ख्याल रखती थी, चाहे वह सूरज हो या परिवार का सबसे दुष्ट बेटा, राजा। राजा भी जानता था कि वह गलत है, पर सुगना के प्यार की वजह से वह भी सहज और शांत महसूस करता था।

महफ़िल में हँसी, यादें और बातचीत का सिलसिला चलता रहा। हर कोई, चाहे बड़ा हो या छोटा, अपने अपने अनुभवों और भावनाओं में खोया था। लेकिन सबके दिलों में एक बात तय थी सूरज सबका प्यारा था और अपनी मां सुगना की जान था।

की सुइयाँ धीरे-धीरे बारह बजने को तैयार थीं। कुछ सेकंड पहले ही बच्चों का उत्साह शिखर पर था। सभी उठकर एक साथ “10… 9… 8… 7…” चिल्लाने लगे। आवाज़ धीरे-धीरे तेज़ होती गई और आखिरकार

“हैप्पी बर्थडे टू यू,

हैप्पी बर्थडे टू यू”

की गूंज के साथ सभी ने सूरज को बारी-बारी से गले लगाया।

छोटी मधु ने बड़े भाई के पैर छुए। छोटा राजा भागकर फ्रिज से बड़ा-सा केक निकाल लाया और थोड़ी ही देर में सूरज ने उस खूबसूरत केक को काटा। हमेशा की तरह केक पर पहला हक उसकी माँ का था। सुगना ने बेहद प्यार से सूरज के माथे को चूमा। दूसरा केक उसने अपनी सोनी मौसी को खिलाया और फिर धीरे-धीरे सभी बड़ों को बारी-बारी से केक खिलाया। सबसे आख़िर में उसने अपनी छोटी बहन मधु को केक खिलाया।

नियति मुस्कुराते हुए सूरज और मधु दोनों को साथ देख रही थी। उन्हें साथ देखकर नियति एक बार फिर विधाता को याद कर रही थी, जिन्होंने उनके भाग्य में न जाने क्यों वह लिख दिया था, जो निश्चित ही एक पाप था।

बहरहाल, धीरे-धीरे सूरज के जन्मदिन का यह छोटा-सा सेलिब्रेशन समाप्त हुआ और सब अपने-अपने कमरों में जाने लगे। सुगना, सोनी और सूरज अब सूरज के कमरे में आ चुके थे। सुगना और सोनी ने सूरज को बहुत प्यार किया और उसे ढेर सारी शुभकामनाएँ दीं। सुगना के ज़ेहन में अब भी सूरज की शारीरिक कमी का ख्याल घूम जाता था, और वह दुखी हो जाती थीं। आज सूरज 21 वर्ष का हो चुका था।

कुछ देर और बातचीत करने के बाद सुगना और सोनी दोनों ने एक बार फिर सूरज को शुभकामनाएँ दीं, उसके माथे पर हाथ फेरा और अपने-अपने कमरों की ओर चल पड़ीं।

अभी सुगना और सोनी हाल में ही पहुँची थीं कि सूरज ने अंदर अपने लिहाफ़ को ऊपर खींचने की कोशिश की और गलती से अपने चोटिल अंगूठे का सहारा ले लिया। सूरज के मुँह से एक हल्की-सी कराह निकल गई।

सुगना और सोनी वापस सूरज के कमरे में आ गईं। सूरज उनके आने का कारण समझ गया। उसने गर्दन बाहर निकालकर कहा,

“अरे, कोई बात नहीं। अंगूठा लिहाफ़ से टकरा गया था।”

सोनी को अचानक अपनी उस दवा की याद आ गई, जो सूरज के अंगूठे पर लगानी थी। उसने कहा,

“दीदी, आप जाकर सो जाइए। मैं सूरज के अंगूठे पर वह दवा लगा दूँगी। मुझे विश्वास है इससे दर्द में ज़रूर राहत मिलेगी।”

सुगना ने भी साथ रुकने की बात कही, तो सोनी बोली,

“दीदी, आप पूरी तरह थक चुकी हैं। रसोई में इतने पकवान बनाना कोई आसान काम नहीं होता। आपको आराम करना चाहिए, दवा मैं लगा दूँगी।”

सोनी ने सुगना के कंधे थामकर उसे धीरे-धीरे उसके कमरे की ओर भेज दिया। सुगना और सोनी का आपसी स्नेह इस उम्र तक भी बना हुआ था।

कुछ देर बाद सोनी दवा लेकर सूरज के कमरे में पहुँची।

नियति, सोनी और सूरज को एक साथ देखकर मुस्कुरा रही थी। सोनी ने अपने शुरुआती दिनों में नर्स के रूप में काम किया था, इसलिए उसे चिकित्सा का कुछ ज्ञान था। आज नर्स सोनी, डॉक्टर बनकर सूरज के अंगूठे पर मलहम लगाने आई थी।

जैसे ही सोनी ने सूरज के अंगूठे की पट्टी हटाई, चूने और हल्दी का सूखा लेप भी पट्टी के साथ निकल आया। हल्दी का थोड़ा-सा अंश अब भी अंगूठे पर लगा था। सोनी ने अपनी कोमल उँगलियों से उसे धीरे-धीरे साफ़ किया।

सूरज को एक अजीब-सी अनुभूति हुई, जैसे अंगूठे में हल्का-सा करंट दौड़ गया हो। सोनी ने अपनी उँगलियों पर मलहम निकाला और सूरज के अंगूठे पर लगा दिया। जैसे ही उसने अंगूठे को अपने अंगूठे और तर्जनी के बीच लेकर हल्के से सहलाया, सूरज के पूरे शरीर में फिर एक सिहरन-सी दौड़ गई।

अचानक सूरज ने महसूस किया कि उसके लिंग में हलचल हो रही।

लिंग की रक्त कोशिकाओ में रक्त प्रवाह अचानक तेज हो गया था सूरज के लिंग में अचानक तनाव आना शुरू हो गया था सूरज आश्चर्यचकित था। जैसे-जैसे सोनी सूरज के अंगूठे को सहलाए जा रही थी वैसे वैसे सूरज के लिंग का तनाव बढ़ता जा रहा था यह तनाव सुखद था। लिंग में तनाव आना वैसे भी सुखद अनुभूति देता है। सूरज ने सोनी से नजर बचाकर अपना दूसरा हाथ लिहाफ के अंदर ले जाकर इस आश्चर्य को महसूस करना चाहा।

सूरज का लंड तनकर खड़ा हो चुका था। सूरज के लिंग में आशातीत वृद्धि हुई थी और शायद इसी कारण सूरज को अपना हाथ लिहाफ के अंदर ले जाना पड़ा था।


सोनी ने सूरज के हाथों की हलचल उसकी जांघों के बीच देख ली लिहाफ सूरज की इस हरकत को छुपा पाने में नाकाम रहा था।

सोने की उंगलियां रुक गई और सूरज ने सोने की आंखों को अपनी कमर की तरफ देखते हुए देख लिया।

सूरज झेंप गया परंतु उसने स्थिति संभाली और बोला…मौसी यह कौन सा मलहम है

सोनी ने अपने दूसरे हाथ से मलहम का डिब्बा सूरज की ओर दिखाई परंतु अब भी वह चिंतित थी बचपन में सूरज के अंगूठे को सहलाए जाने से होने वाली प्रतिक्रिया उसे याद आ रही थी हे भगवान …कहीं वह सच तो नहीं। सोनी का कलेजा धक-धक करने लगा उसे एक अनजाना डर सताने लगा उसके हाथ रुक गए सूरज ने फिर एक बार उसका ध्यान अपनी और खींचा।

“मौसी यह अंगूठे के पीछे ज्यादा मलहम लगा है इसे फैला दीजिए।”

सोनी ने अनमने ढंग से उसे मलहम को चारों तरफ बराबरी से लगा दिया और सूरज के लिंग का तनाव और आकार को और भी ज्यादा बढ़ा दिया।

लिंग के तनाव का असर सूरज के चेहरे पर भी दिखाई पड़ने लगा उसका मासूम चेहरा वासना से तमतमा उठा था। सोनी को पक्का यकीन हो गया की निश्चित ही बचपन की वह घटना आज दोबारा रिपीट हो चुकी है उसने सूरज का हाथ छोड़ दिया और हड़बड़ी में वहां से उठते हुए बोली..

अब सो जाओ एक बार फिर हैप्पी बर्थडे टू यू

सोनी ने धड़कते हुए कलेजे के बावजूद अपने होठों पर मुस्कुराहट लाई और सूरज के कमरे से बाहर निकल गई जाते समय उसने दरवाजा बंद कर दिया।

सोनी को बचपन की बातें पूरी तरह याद आ चुकी थी इस तनाव का निदान क्या था उसे यह भी याद आ चुका था। क्या उसे अपने होंठ सूरज के…. हे भगवान नहीं नहीं ऐसा नहीं हो सकता। जितना ही वह इस बारे में सोचती उतना ही उसका दिल घबराने लगता। अपने मन में घबराहट और तेज धड़कनों के साथ सोनी बिस्तर पर आ चुकी थी पर दिमाग में वही बातें घूम रही थी।

उधर अपनी मौसी सोनी के जाने के बाद सूरज बिस्तर पर से उठा उसने दरवाजा लॉक किया और वापस बिस्तर पर आकर अपने लंड को आजाद कर दिया। लंड अंडरवियर से बाहर आते ही उछलकर खड़ा हो गया।

सूरज अपने खड़े लंड को देखकरआश्चर्यचकित था। इतना सुंदर लंड तो उसने पोर्न वेबसाइट पर भी नहीं देखा था। लगभग 2 इंच व्यास और आठ इंच लंबी कद काठी का वह लंड एक खूबसूरत सुपड़ा लिए हुए था। जो उसकी खूबसूरती को और भी बढ़ा रहा था। लंड पर तनीहुई उभरी नसें यह साबित कर रही थी की यह न सिर्फ कसरत्ती है अपितु कसरत करने के लिए ही बना है।

सूरज ने अपने हाथ से उसे सहलाने की कोशिश की यह अनुभूति अनुपम थी विशिष्ट थी। आज पहली बार अपने जीवन में वह अपने खड़े लंड को सहला रहा था। सूरज आनंद के सागर में गोते लगाने लगा। किसी युवा द्वारा अपने लंड को सहलाना स्वतः ही उत्तेजना और कल्पनाओं को जन्म देता है।

सूरज को अपने लंड को सहलाने बेहद मजा आ रहा था और हो भी क्यों ना सूरज की कल्पनाएं परवान चढ़ने लगी उसे रोजी का ध्यान आया…

उसने अपना मोबाइल उठाया ..

रोजी का मैसेज मोबाइल पर आया हुआ था

हैप्पी बर्थडे माय लव…

सूरज ने उसे थैंक यू नोट भेजा। वह चाहता तो था कि अपने खड़े लंड को एक बार रोजी को दिखाएं और अपनी मर्दानगी साबित करे पर यह संभव नहीं था। फिर भी उसने अपने मोबाइल से अपने खड़े लंड की फोटो ली और उसे अपने मोबाइल में छुपा लिया।

रोजी सुबह-सुबह के लिए रोज पार्क में जाती थी वह पार्क सूरज की हवेली से ज्यादा दूर नहीं था अचानक सूरज के दिमाग में कुछ आया और उसने रोजी को एक बार फिर मैसेज किया।

कल जॉगिंग के लिए जाओगी क्या?

उधर रोजी अब तक सो चुकी थी जवाब आने की उम्मीद नहीं थी सूरज ने मोबाइल किनारे रख दिया और अपनी जांघों के बीच खिले हुए फूल को अपनी हथेली से पड़कर एक बार फिर निहारने लगा।

सूरज अपने लंड को बड़े प्रेम से सहला रहा था कभी वह उसके ऊपर उभर रही सांप जैसी नसों को छूता कभी उसके सुपाड़े के पीछे उस अति संवेदनशील जगहों को। हर बार उसके शरीर में एक सुखद अनुभूति होती जैसे-जैसे सूरज अपने लंड को सहलाता गया वासना अपने आयाम बढ़ाती गई वह बार-बार रोजी को नग्न और नग्न करने की कोशिश करता परंतु यह कठिन था दरअसल इसके पूर्व सूरज ने कभी भी अपनी वासना को फलीभूत नहीं किया था।


वैसे भी जब लंड में तनाव ही ना हो तो कामुक कल्पनाओं का क्या फायदा। पर आज स्थितियां अलग थीं

सूरज ने अपनी वासना के तूफान को और हवा दी लंड सूरज की हथेलियों द्वारा मसला जा रहा था…उत्तेजना ने उत्कर्ष प्राप्त किया और सूरज के लंड से वीर्य की धार फूट पड़ी आह…..मौ…सी………..

सूरज का लंड लगातार वीर्य उगलता रहा और सूरज के लिहाफ पर उसके छींटे गिरते रहे…

सूरज के लिए हस्तमैथुन का यह पहला अनुभव था जितना सुख उसने आज महसूस किया था यह अनोखा था अद्भुत था सूरज को उसके जन्मदिन का उपहार मिल चुका था…

सूरज कुछ देर उसी स्थिति में रहा अपने लंड का यह रूप उसके लिए अनोखा था वह मर्दानगी से भरा हुआ था। सूरज का स्वाभिमान आज अपने चरम पर था अब तक उसने अपने लंड में तनाव न आने को लेकर जितनी चिंता की थी एक पल में ही वह सब खुशियों में बदल गया था।

सूरज ने अपने लंड की तरफ देखा वह अब भी वैसे ही तना हुआ था। सूरज ने अब तक जो पढ़ाई की थी या जो समझा था उसके अनुसार वीर्य स्खलन के बाद लंड को वापस सामान्य स्थिति में आ जाना चाहिए था परंतु लंड का तनाव यथावत था।

सूरज ने उसे वापस अंडरवियर में कैद करने की कोशिश की परंतु यह कठिन था। सूरज को यकीन ही नहीं हो रहा था कि ऐसा कैसे हो सकता है उसने इधर-उधर ध्यान भटकाया पर स्थिति जस की तस थी। लंड का तनाव कम होने का नाम ही नहीं ले रहा था। सूरज तने हुए लंड के साथ सूरज अब असहज महसूस करने लगा।

पर इन खुशियों को साझा करने वाला कोई भी ना था उसे अचानक रोजी का ध्यान आया। उसने मोबाइल उठाया पर रोजी का कोई मैसेज नहीं था।

सूरज ने एक बार फिर अपने इतने हुए लंड को अपना हाथों से सहलाना शुरू किया और कुछ ही देर की मेहनत के पश्चात एक बार फिर वीर्य स्खलन करने में कामयाब रहा परंतु जिस उद्देश्य के लिए यह किया गया था उसमें आनंद कम और लिंग का तनाव घटना प्राथमिकता थी। पर दुर्भाग्य दोबारा वीर्य स्खलन होने के बावजूद लिंग का तनाव कम न हुआ।

सूरज पूरी तरह थक चुका था लगातार दो बार हस्तमैथुन कर उसका शरीर शिथिल पड़ चुका था परंतु लिंग वैसे ही तनाव हुआ था सूरज की धड़कनें बढ़ी हुई थी उसने लिहाफ अपने बदन पर डाला और अपना ध्यान उसे तने हुए लिंग से हटाने की कोशिश की पर शायद यह संभव नहीं था जब लिंग में तनाव चरम पर होता है मनुष्य को और कुछ नहीं सोचता है आप अपना ध्यान चाह कर भी नहीं हटा सकते यही स्थिति सूरज की थी रात के दो बज चुके थे और सूरज अब भी अपनी खुशियों से जूझ रहा था। थकावट से कभी उसकी आंखें नींद से बोझिल होती परंतु उसके लंड का तनाव उसे सोने नहीं दे रहा था।

सुबह के 5:00 बज चुके थे अचानक मोबाइल पर ट्रिंग की आवाज हुई। सूरज ने मोबाइल उठाया यह रोजी का ही मैसेज था


हां आ रही हूं क्यों पूछ रहे हो

मैं भी आ रहा हूं सूरज ने रिप्लाई किया

अरे वह तो बर्थडे बॉय से सुबह-सुबह ही मुलाकात होगी चलो मैं तैयार होकर आता हूं सी यू

रोजी का मैसेज स्पष्ट था दोबारा रिप्लाई करने की जरूरत नहीं थी सूरज भी बिस्तर से उठा उसकी आंखें नींद पूरी नहीं होने की वजह से लाल थी पर लंड अभी उसी तरह तना हुआ था।

सूरज ने बड़ी मुश्किल से अपनी नित्य कर्म निपटा ए तने हुए लंड की वजह से उसे कई दिक्कतों का सामना करना पड़ रहा है वह तैयार हुआ बड़ी मुश्किल से लैंड को अपने पेट में कैद करने की कोशिश की पर उसका आकार और तनाव छुपाने लायक नहीं था सूरज ने सबसे ढीली डाली शर्ट पहनी और उसके ऊपर एक आवरण सा दे दिया।

एक तरफ सूरज के मन में खुशी थी कि उसके लंड में आज पहली बार तनाव आया था पर लगातार तनाव ने उसके मन में चिंता की लकीरें डाल दी थी।

सूरज ने अपनी मोटरसाइकिल उठाई और कुछ ही देर में रोजी के पास पार्क में पहुंच गया रोजी उसका इंतजार कर रही थी रोजी ने उसे एक खूबसूरत सा फूल दिया और बोला


Happy b day to you ..हमेशा इस फूल की तरह ही हंसते मुस्कुराते रहना

सूरज ने अपनी बाहें खोल दी और रोजी सूरज से सटती चली गई। सूरज की मजबूत बाहों ने रोजी को अपने आगोश में ले लिया दोनों प्रेमिका एक दूसरे से बेहद करीब आ गए। सूरज ने अपने हाथ से रोजी की कमर को सहारा देकर अपनी ओर खींचा और पहली बार रोजी ने अपने नाभि के नीचे एक तने और कठोर अंग को महसूस किया यह निश्चित ही सूरज का तनाव हुआ था। रोजी सहम गई उसने सर उठाकर सूरज के चेहरे की तरफ देखा सूरज ने पहले तो उसके माथे को चुम्मा और धीरे-धीरे उसके होंठ रोजी के होठों से सट गए।


चुंबनों की प्रगाढ़ता बढ़ती गई और रोजी की मन में कुछ हलचल होने लगी। अचानक रोजी ने अपना हाथ नीचे किया और सूरज के लंड में आए इस तनाव को महसूस करने की कोशिश की। रोजी की कोमल हथेलियां सूरज के लंड को पेट के ऊपर से ही महसूस कर रही थी। लंड का आकार और तनाव दोनों ही रोजी को आश्चर्यचकित कर रहा था। वह एक तरफ शर्मा भी रही थी दूसरी तरफ इस तनाव को देखकर खुश भी हो रही थी। सूरज की मर्दानगी को लेकर जो प्रश्न उसके अंतर्मन में पिछले कुछ दिनों से उठ रहे थे वह सब अचानक ही शांत हो गए थे। सूरज एक पूर्ण मर्द की भांति उसके समक्ष उपस्थित था रोजी ने सूरज के चुंबनों का प्रति उत्तर और भी आत्मीयता से देना शुरू कर दिया तथा अपनी हथेली से उसके लंड को दबाकर और सहलाकर उसका जायजा लेने की कोशिश की सूरज ने उसका हाथ पकड़ लिया और उससे अलग होते हुए बोला

अरे यह पब्लिक प्लेस है कंट्रोल करो…

दोनों मुस्कुराने लगे सूरज ने अपने शर्ट ठीक की और दोनों पार्क में तरह-तरह की बातें करते हुए घूमने लगे परंतु आज खुशियों का दिन था सूरज के लिंग के तनाव ने न सिर्फ सूरज को शहीद कर दिया था बल्कि अब रोगी के मन में भी तंगी फूटने लगी थी सूरज जैसे मर्द को अपनी जिंदगी में पाकर वह बेहद प्रसन्न थी बेहद खुश थी…

आज कॉलेज आओगे क्या ? रोजी ने पूछा

नहीं आज तो मुश्किल है आज बर्थडे मना लेते हैं


सूरज ने मुस्कुराते हुए जवाब दिया। सुबह के 6:30 बज चुके थे जॉगिंग का टाइम पूरा हो चुका था अब बिछड़ने का वक्त था। बिछड़ते वक़्त सूरज और रोजी एक बार फिर आलिंगन बद्ध हुए। सूरज मैं एक बार फिर रोजी को चूमने की कोशिश की रोजी ने उसे निराश ना किया इस बार उसने फिर सूरज के लंड पर हाथ लगाने की कोशिश की और उसके आश्चर्य का ठिकाना ना रहा लंड पूरी तरह तना हुआ था…

रोजी को यह यकीन ही नहीं हो रहा था कि यह तुरंत ही कैसे खड़ा हो गया था.. वह तुरंत सूरत से अलग हुई और बोली..

आज तो छोटे मियां पूरे जोश में दिखाई पड़ रहे हैं उसकी आंखों ने नीचे झुक कर सूरज को उसकी बात पूरी तरह समझा दी.. सूरज मुस्कुरा कर रह गया.

उसे सूरज की स्थिति का ज्ञान नहीं था यह तनाव अब सूरज के मानसिक तनाव का कारण बन चुका था।

सूरज वापस घर आ चुका था अभी भी घर में सब सो ही रहे थे सिर्फ सुगना और सोनी जगे हुए थे और हवेली के खूबसूरत हाल में चाय पी रहे थे। सूरज को अंदर आते देख सुगना खुश हो गई। सुगना ने सूरज को अपने पास बुलाया और बगल में बैठा लिया। सूरज सकुचा रहा था उसने अपनी शर्ट ठीक की बने हुए लंड को यथासंभव छुपाने की कोशिश की पर सामने बैठी अपनी मौसी से छुपा पाने में नाकाम रहा। सोनी की यह बेहद असहज लगा ऐसा लग रहा था जैसे सूरज में अपनी पेट में कोई बड़ा खीरा छुपाया हुआ हो…

आ बैठ …अरे इतनी सुबह-सुबह कहां चले गए थे…

सुगना ने सूरज के माथे पर प्यार से हाथ फिरते हुए कहा

कुछ नहीं थोड़ा टहलने का मन कर रहा था बाहर ही घूम रहा था।

यह तेरी आंखें लाल क्यों है नींद नहीं आई क्या? सुगना ने सूरज की आंखों में लाल डोरे देखते हुए कहा…

सूरत हड़बड़ा गया यह लाल डोरे कुछ तो अनिद्रा की वजह से और कुछ सूरज के तने हुए लंड की वजह से भी..

कुछ नहीं मां सब ठीक है मुझे भी चाय पीनी है सूरज ने बात टालते हुए कहा

ठीक है मैं लेकर आती हूं।

सुगना रसोई में चाय लेने चली गई इधर सोनी ने सूरज को असहज देखकर अपने सोफे से उठकर सूरज के पास आ गई और उसकी हाथों को अपने हथेली में लेकर सहलाते हुए बोली।

क्या हुआ बर्थडे बॉय आज टेंशन में क्यों है?

कुछ नहीं मौसी सब ठीक है बस थोड़ा नींद डिस्टर्ब हुई थी..

सूरज ने बात टालने की कोशिश की..


क्यों क्या हो गया? …सोनी ने सूरज की आंखों में आंखें डालते हुए पूछा।

सूरज ने कुछ नहीं कहा अपनी गर्दन झुका ली


मुझे कुछ नहीं बोलना..

तभी सोनी ने सूरज के टूटे हुए अंगूठे को अपनी कोमल उंगलियों से सहलाते हुए पूछा

और अंगूठे का दर्द कैसा है?

सोने की अंगूठा सहलाए जाने से सूरज के लंड में एक और तेज करंट दौड़ी और उसके लंड का तनाव और आकार और भी बढ़ गया…

सूरज के मुंह से कराह निकल गई…

सूरज ने अपना अंगूठा सोनी के हाथ से खींच लिया और बोला

मौसी अब बस..

यह कराह अंगूठे के दर्द की वजह से नहीं थी अपितु लंड में आए बेहद तनाव की वजह से थी।

सूरज ने अपना हाथ नीचे किया और तनाव से फट रहे लंड को अपने पैंट में और जगह देने की कोशिश की।

सूरज के शर्ट का आवरण हटते ही सोनी ने सूरज के पेट के अंदर आए उसे अप्रत्याशित उभार को देख लिया जो कतई सामान्य नहीं था। उसका आकार यह निश्चित तौर पर बता रहा था कि यह सूरज का लिंग है। लिंग… पर इतना बड़ा? सूरज तो अभी नया-नया युवा था। यह उभार अप्रत्याशित था सोनी घबरा गई। सोने के चेहरे पर हवाईया उड़ने लगी।

इतनी सुबह-सुबह अपनी मां और मौसी के पास बैठे सूरज के लंड में इतना तनाव आना अप्रत्याशित था।

अचानक उसे बचपन की वह घटना पूरी तरह याद आ गई जब वह बचपन में सूरज के अंगूठे को मजाक मजाक में सहलाया करती थी और…. फिर …. जैसे-जैसे सोनी को वह घटना याद आती गई सोने के चेहरे पर शिकन आते गई

हे भगवान मुझसे यह क्या हो गया…

सूरज अब और असहज हो चुका था वह अपने रूम में जाने के लिए उठा। तभी सुगना चाय लेकर आ चुकी थी

अरे बैठ पहले चाय पी ले.. फिर जाना..

सूरज से अपने लंड का तनाव और सहा नहीं जा रहा था फिर भी उसने अपनी मां की बात मान ली और बड़ी मुश्किल से बैठकर अपने बने हुए लंड को छुपाते हुए जल्दी जल्दी चाय पीने लगा।

उधर सोनी का कलेजा धक-धक कर रहा था उसे अब यकीन हो चला था कि सूरज के लिंग में आया हुआ तनाव निश्चित ही उसके अंगूठे सहलाए जाने के कारण हुआ था।

सोनी मन ही मन सोच रही थी पर तब तो सूरज एक बालक था अब तो तने हुए लिंग को शिथिल करने का उपाय सर्वविदित था। क्या सूरज को हस्तमैथुन के बारे में नहीं मालूम था? क्या सूरज ने इस तनाव को कम करने के लिए हस्तमैथुन नहीं किया होगा…

प्रश्न जटिल था सूरज की असहज स्थिति देखकर सोनी स्वयं परेशान हो गई थी इस प्रश्न का उत्तर जानना जरूरी था। सूरज के लिंग का तनाव कम करने का उपाय सोनी को बखूबी याद था पर ……

हे भगवान…. यह असंभव था….

पुत्र समान जवान सूरज का लंड ……चूमना……सोनी की रूह कांप उठी…अनिष्ट की आशंका से सोनी के माथे पर पसीने की बूंद चालक आई…थी…



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Shaandar update
 

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Dream girl
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भाग 157

“हैप्पी बर्थडे टू यू, सूरज!”

सूरज खुशी से खिल उठा। । नीली जींस और सफेद टी-शर्ट सचमुच बहुत खूबसूरत थी। उसने सोनी के हाथ चूमे, फिर झुककर अपने बाएँ हाथ से उनके पैर छुए और खुशी-खुशी बोला,

“थैंक यू, मौसी।पर मौसी मेरा जन्मदिन तो कल है।”

“कोई बात नहीं आज यह रख ले कल एक और खूबसूरत उपहार दूंगी”

एक और खूबसूरत उपहार सोनी ने यह बात बिना सोचे समझे कही थी पर नियति ने उसके शब्द पकड़ लिए और उसके चेहरे पर एक कामुक मुस्कान दौड़ गई….

कुछ होने वाला था सूरज की किस्मत पलटने वाली थी…उसकी मायूसी खुशी में बदलने वाली थी…


अब आगे..

युवाओं में जन्मदिन का उत्साह देखने लायक होता है। सूरज भी इससे अछूता नहीं था। अंगूठे की चोट की पीड़ा को भुलाकर वह सोनी द्वारा लाए गए कपड़ों को उत्साह से अपने बदन पर पहनकर देखने लगा। अंगूठे की पीड़ा इसमें आड़े आ रही थी पर उत्साह कायम था। कपड़े न केवल बेहद खूबसूरत थे, बल्कि उनकी चमक से अंदाज़ा लगाया जा सकता था कि वे महंगे भी होंगे। सोनी का यह स्नेह सूरज के चेहरे पर मुस्कान ले आया। सच तो यह था कि केवल सोनी ही नहीं, घर का हर सदस्य सूरज को बेहद प्यार करता था। वह घर का सबसे होनहार बेटा था और कुछ ही समय में डॉक्टर बनने वाला था। डॉक्टर बनना पूरे परिवार के लिए सिर्फ एक उपलब्धि नहीं, बल्कि गर्व और सम्मान की बात थी।

उधर शाहिद जिसने सूरज पर हाथ उठाया था पूरे परिवार के लिए अब एक तरह का विलेन बन चुका था। लेकिन राजा, जो उम्र में सूरज से छोटा जरूर था, उसने शाहिद से बदला लेने की ठान ली थी। उसका बदमाशी में अंदाज़ ऐसा था जैसे वह खुद गैंग ऑफ़ वासेपुर के नवाजुद्दीन सिद्दीकी की तरह किसी बड़े खेल का हिस्सा हो।

इस बीच, सूरज अपने आने वाले कल अपने जन्म दिन के बारे में सोच रहा था। कल उसे समय निकालकर रोज़ी से भी मिलना था। एक तरफ वह अपनी मर्दानगी पर लगे सवालों को लेकर झिझक महसूस करता था, लेकिन अब धीरे-धीरे वह रोज़ी के लिए कुछ खास महसूस करने लगा था।

घर में सभी कल सूरज के जन्मदिन की तैयारियों के बारे में बात कर रहे थे। सुगना, हमेशा की तरह, सूरज के लिए तरह-तरह के व्यंजन बनाने में व्यस्त थी, और पूरा परिवार बड़े उत्साह और आनंद के साथ इसका इंतजार कर रहा था। सूरज परिवार के लिए सिर्फ एक बेटा ही नहीं, बल्कि घर की खुशी और ऊर्जा का केंद्र भी था।

कल शाम को, घर में एक पारिवारिक पार्टी होने वाली थी। कुछ मेहमान भी इसमें शरीक होने वाले थे। पूरे घर में खुशियों की हलचल थी—हँसी, बातचीत और व्यंजनों की खुशबू से माहौल भर गया था। सूरज अपने कमरे में बैठा थोड़ी-सी घबराहट और उत्साह के मिश्रित भाव के साथ सोच रहा था कि कल का दिन कितना खास होने वाला है।

डिनर के बाद हॉल में हल्की पीली रोशनी फैली हुई थी। टीवी बंद था, मगर घर में अपनापन और हँसी तैर रही थी। सूरज सोफ़े पर सबके बीच बैठा था। उसका जादुई अंगूठा कपड़े के पीछे हल्दी के लेप में लिपटा हुआ, जैसे चुपचाप अपनी ऊर्जा वापस बुला रहा हो। सूरज न जाने क्या सोच कर मुस्कुरा रहा था।

मालती की नज़र सीधे सूरज पर टिक गई।

मालती:

“सूरज, क्या हुआ क्यों मुस्कुरा रहे हो”

सूरज:

(हल्की हँसी के साथ)

“कुछ नहीं दीदी, बस थकान है।”

मालती ने भौंहें उठाईं।

मालती:

“थकान से आदमी मुस्कुराता है क्या?”

सामने कुर्सी पर बैठे विकास (जो सभी युवाओं का मौसा था ) ने गला साफ़ किया और मुस्कुराते हुए बोला—

“अरे मालती, छोड़ो उसे। ये उम्र ही ऐसी होती है वैसे भी कल उसका जन्मदिन है कुछ सपने संजो रहा होगा।”

सूरज ने राहत की साँस ली, मगर वो ज़्यादा देर की नहीं थी।

“ आप ही बताइए… क्या आपको भी नहीं लग रहा कि इसमें कुछ चल रहा है?” मालती ने राजू की तरफ देखते हुए कहा। राजू और मालती के बीच खिचड़ी पक रही थी अपितु यह कहा जाए कि पक चुकी थी पर इसका अंदाजा परिवार में किसी को नहीं था।

राजू:

(हँसते हुए)

“लग तो रहा है। आँखों में चमक है और होठों पर मुस्कुराहट। ये सब बिना वजह नहीं आता।”

सूरज झेंप गया।

सूरज:

“राजू भैया, आप भी दीदी की तरफ़ हो गए।”

राजू:

“मैं किसी की तरफ़ नहीं हूँ , बस ज़िंदगी की तरफ़ हूँ। जब दिल किसी को पसंद करने लगे, तो आदमी थोड़ा बदल ही जाता है।”

हॉल में हल्की हँसी गूंज गई।

छोटा भाई राजा चुटकी ले बैठा—

“मतलब पक्का कुछ है!”

मालती ने मौका नहीं छोड़ा।

“तो नाम तो बता दो कम से कम।”

सूरज कुछ पल चुप रहा। फिर बोला—

सूरज:

“अभी नाम लेने का वक्त नहीं आया है।”

सूरज ने रीमा की तरफ देखा। रीमा लाली की पुत्री थी और वह सूरज को मन ही मनपसंद करती थी यद्यपि सूरज उस उम्र में थोड़ा छोटा था परंतु फिर भी वह सूरज को चाहती थी।

सुगना रसोई से आवाज़ देती हैं—

“अब बस करो तुम लोग। कल उसका जन्मदिन है। उसे तंग मत करो।

मालती मुस्कुरा कर पीछे हट गई।

अब हाई कमान का आर्डर आ चुका है कोई सूरज भैया को छेड़ेगा नहीं। छोटी मधु ने खड़े होकर सबको नसीहत दी और सबको अंताक्षरी खेलने के लिए आमंत्रित कर लिया।

सूरज ने हल्की मुस्कान के साथ अपने लिपटे हुए अंगूठे को देखा उसे बार-बार ही महसूस हो रहा था कि कल उसकी दिनचर्या में इस अंगूठे का कितना अहम रोल था। आज पेंट पहनते समय उसे काफी दिक्कत हुई थी और कल तो दिन भर उसे इस दर्द के साथ ही रहना था।

रात के 11:00 बज चुके थे। सोनी सुगना भी बच्चों के साथ बातें कर रहे थे। कुछ लोग अभी भी उत्साह में थे, कुछ जम्हाईया ले रहे थे पर इस सजी हुई महफ़िल से हटने को कोई तैयार नहीं था। और जाए भी कैसे? सबका प्रिय सूरज, बस एक घंटे बाद, अपने जन्मदिन की शुरुआत करने वाला था। सभी उसे “हैप्पी बर्थडे” कहने का इंतजार कर रहे थे।

बातचीत कभी सोनी और विकास की अमेरिका यात्रा पर जाती, युवाओं के अमेरिका को लेकर उत्साह स्वाभाविक रूप से था। कभी सुगना और लाली सलेमपुर और सीतापुर की पुरानी यादों में खो जाती, और कभी बच्चे सरयू सिंह की अकाल मृत्यु के बारे में जानना चाहते। पर हमेशा की तरह, सुगना ऐसे सवालों को टाल देती। कभी-कभी वह दुखी भी हो जाती और सभी को यह एहसास दिलाती कि कुछ बातें ना पूछना ही बेहतर है।

लोग जितना सूरज से प्यार करते थे, उससे ज्यादा सुगना का सम्मान। यद्यपि यह हवेली सोनी और विकास की थी, लेकिन घर में सबसे अधिक सम्मान सुगना का ही था। वह घर की मालकिन तो न थी पर मुखिया अवश्य थी। सुगना की बात सभी के लिए मान्य थी, और क्यों नहीं—वह सबका उतना ही ख्याल रखती थी, चाहे वह सूरज हो या परिवार का सबसे दुष्ट बेटा, राजा। राजा भी जानता था कि वह गलत है, पर सुगना के प्यार की वजह से वह भी सहज और शांत महसूस करता था।

महफ़िल में हँसी, यादें और बातचीत का सिलसिला चलता रहा। हर कोई, चाहे बड़ा हो या छोटा, अपने अपने अनुभवों और भावनाओं में खोया था। लेकिन सबके दिलों में एक बात तय थी सूरज सबका प्यारा था और अपनी मां सुगना की जान था।

की सुइयाँ धीरे-धीरे बारह बजने को तैयार थीं। कुछ सेकंड पहले ही बच्चों का उत्साह शिखर पर था। सभी उठकर एक साथ “10… 9… 8… 7…” चिल्लाने लगे। आवाज़ धीरे-धीरे तेज़ होती गई और आखिरकार

“हैप्पी बर्थडे टू यू,

हैप्पी बर्थडे टू यू”

की गूंज के साथ सभी ने सूरज को बारी-बारी से गले लगाया।

छोटी मधु ने बड़े भाई के पैर छुए। छोटा राजा भागकर फ्रिज से बड़ा-सा केक निकाल लाया और थोड़ी ही देर में सूरज ने उस खूबसूरत केक को काटा। हमेशा की तरह केक पर पहला हक उसकी माँ का था। सुगना ने बेहद प्यार से सूरज के माथे को चूमा। दूसरा केक उसने अपनी सोनी मौसी को खिलाया और फिर धीरे-धीरे सभी बड़ों को बारी-बारी से केक खिलाया। सबसे आख़िर में उसने अपनी छोटी बहन मधु को केक खिलाया।

नियति मुस्कुराते हुए सूरज और मधु दोनों को साथ देख रही थी। उन्हें साथ देखकर नियति एक बार फिर विधाता को याद कर रही थी, जिन्होंने उनके भाग्य में न जाने क्यों वह लिख दिया था, जो निश्चित ही एक पाप था।

बहरहाल, धीरे-धीरे सूरज के जन्मदिन का यह छोटा-सा सेलिब्रेशन समाप्त हुआ और सब अपने-अपने कमरों में जाने लगे। सुगना, सोनी और सूरज अब सूरज के कमरे में आ चुके थे। सुगना और सोनी ने सूरज को बहुत प्यार किया और उसे ढेर सारी शुभकामनाएँ दीं। सुगना के ज़ेहन में अब भी सूरज की शारीरिक कमी का ख्याल घूम जाता था, और वह दुखी हो जाती थीं। आज सूरज 21 वर्ष का हो चुका था।

कुछ देर और बातचीत करने के बाद सुगना और सोनी दोनों ने एक बार फिर सूरज को शुभकामनाएँ दीं, उसके माथे पर हाथ फेरा और अपने-अपने कमरों की ओर चल पड़ीं।

अभी सुगना और सोनी हाल में ही पहुँची थीं कि सूरज ने अंदर अपने लिहाफ़ को ऊपर खींचने की कोशिश की और गलती से अपने चोटिल अंगूठे का सहारा ले लिया। सूरज के मुँह से एक हल्की-सी कराह निकल गई।

सुगना और सोनी वापस सूरज के कमरे में आ गईं। सूरज उनके आने का कारण समझ गया। उसने गर्दन बाहर निकालकर कहा,

“अरे, कोई बात नहीं। अंगूठा लिहाफ़ से टकरा गया था।”

सोनी को अचानक अपनी उस दवा की याद आ गई, जो सूरज के अंगूठे पर लगानी थी। उसने कहा,

“दीदी, आप जाकर सो जाइए। मैं सूरज के अंगूठे पर वह दवा लगा दूँगी। मुझे विश्वास है इससे दर्द में ज़रूर राहत मिलेगी।”

सुगना ने भी साथ रुकने की बात कही, तो सोनी बोली,

“दीदी, आप पूरी तरह थक चुकी हैं। रसोई में इतने पकवान बनाना कोई आसान काम नहीं होता। आपको आराम करना चाहिए, दवा मैं लगा दूँगी।”

सोनी ने सुगना के कंधे थामकर उसे धीरे-धीरे उसके कमरे की ओर भेज दिया। सुगना और सोनी का आपसी स्नेह इस उम्र तक भी बना हुआ था।

कुछ देर बाद सोनी दवा लेकर सूरज के कमरे में पहुँची।

नियति, सोनी और सूरज को एक साथ देखकर मुस्कुरा रही थी। सोनी ने अपने शुरुआती दिनों में नर्स के रूप में काम किया था, इसलिए उसे चिकित्सा का कुछ ज्ञान था। आज नर्स सोनी, डॉक्टर बनकर सूरज के अंगूठे पर मलहम लगाने आई थी।

जैसे ही सोनी ने सूरज के अंगूठे की पट्टी हटाई, चूने और हल्दी का सूखा लेप भी पट्टी के साथ निकल आया। हल्दी का थोड़ा-सा अंश अब भी अंगूठे पर लगा था। सोनी ने अपनी कोमल उँगलियों से उसे धीरे-धीरे साफ़ किया।

सूरज को एक अजीब-सी अनुभूति हुई, जैसे अंगूठे में हल्का-सा करंट दौड़ गया हो। सोनी ने अपनी उँगलियों पर मलहम निकाला और सूरज के अंगूठे पर लगा दिया। जैसे ही उसने अंगूठे को अपने अंगूठे और तर्जनी के बीच लेकर हल्के से सहलाया, सूरज के पूरे शरीर में फिर एक सिहरन-सी दौड़ गई।

अचानक सूरज ने महसूस किया कि उसके लिंग में हलचल हो रही।

लिंग की रक्त कोशिकाओ में रक्त प्रवाह अचानक तेज हो गया था सूरज के लिंग में अचानक तनाव आना शुरू हो गया था सूरज आश्चर्यचकित था। जैसे-जैसे सोनी सूरज के अंगूठे को सहलाए जा रही थी वैसे वैसे सूरज के लिंग का तनाव बढ़ता जा रहा था यह तनाव सुखद था। लिंग में तनाव आना वैसे भी सुखद अनुभूति देता है। सूरज ने सोनी से नजर बचाकर अपना दूसरा हाथ लिहाफ के अंदर ले जाकर इस आश्चर्य को महसूस करना चाहा।

सूरज का लंड तनकर खड़ा हो चुका था। सूरज के लिंग में आशातीत वृद्धि हुई थी और शायद इसी कारण सूरज को अपना हाथ लिहाफ के अंदर ले जाना पड़ा था।


सोनी ने सूरज के हाथों की हलचल उसकी जांघों के बीच देख ली लिहाफ सूरज की इस हरकत को छुपा पाने में नाकाम रहा था।

सोने की उंगलियां रुक गई और सूरज ने सोने की आंखों को अपनी कमर की तरफ देखते हुए देख लिया।

सूरज झेंप गया परंतु उसने स्थिति संभाली और बोला…मौसी यह कौन सा मलहम है

सोनी ने अपने दूसरे हाथ से मलहम का डिब्बा सूरज की ओर दिखाई परंतु अब भी वह चिंतित थी बचपन में सूरज के अंगूठे को सहलाए जाने से होने वाली प्रतिक्रिया उसे याद आ रही थी हे भगवान …कहीं वह सच तो नहीं। सोनी का कलेजा धक-धक करने लगा उसे एक अनजाना डर सताने लगा उसके हाथ रुक गए सूरज ने फिर एक बार उसका ध्यान अपनी और खींचा।

“मौसी यह अंगूठे के पीछे ज्यादा मलहम लगा है इसे फैला दीजिए।”

सोनी ने अनमने ढंग से उसे मलहम को चारों तरफ बराबरी से लगा दिया और सूरज के लिंग का तनाव और आकार को और भी ज्यादा बढ़ा दिया।

लिंग के तनाव का असर सूरज के चेहरे पर भी दिखाई पड़ने लगा उसका मासूम चेहरा वासना से तमतमा उठा था। सोनी को पक्का यकीन हो गया की निश्चित ही बचपन की वह घटना आज दोबारा रिपीट हो चुकी है उसने सूरज का हाथ छोड़ दिया और हड़बड़ी में वहां से उठते हुए बोली..

अब सो जाओ एक बार फिर हैप्पी बर्थडे टू यू

सोनी ने धड़कते हुए कलेजे के बावजूद अपने होठों पर मुस्कुराहट लाई और सूरज के कमरे से बाहर निकल गई जाते समय उसने दरवाजा बंद कर दिया।

सोनी को बचपन की बातें पूरी तरह याद आ चुकी थी इस तनाव का निदान क्या था उसे यह भी याद आ चुका था। क्या उसे अपने होंठ सूरज के…. हे भगवान नहीं नहीं ऐसा नहीं हो सकता। जितना ही वह इस बारे में सोचती उतना ही उसका दिल घबराने लगता। अपने मन में घबराहट और तेज धड़कनों के साथ सोनी बिस्तर पर आ चुकी थी पर दिमाग में वही बातें घूम रही थी।

उधर अपनी मौसी सोनी के जाने के बाद सूरज बिस्तर पर से उठा उसने दरवाजा लॉक किया और वापस बिस्तर पर आकर अपने लंड को आजाद कर दिया। लंड अंडरवियर से बाहर आते ही उछलकर खड़ा हो गया।

सूरज अपने खड़े लंड को देखकरआश्चर्यचकित था। इतना सुंदर लंड तो उसने पोर्न वेबसाइट पर भी नहीं देखा था। लगभग 2 इंच व्यास और आठ इंच लंबी कद काठी का वह लंड एक खूबसूरत सुपड़ा लिए हुए था। जो उसकी खूबसूरती को और भी बढ़ा रहा था। लंड पर तनीहुई उभरी नसें यह साबित कर रही थी की यह न सिर्फ कसरत्ती है अपितु कसरत करने के लिए ही बना है।

सूरज ने अपने हाथ से उसे सहलाने की कोशिश की यह अनुभूति अनुपम थी विशिष्ट थी। आज पहली बार अपने जीवन में वह अपने खड़े लंड को सहला रहा था। सूरज आनंद के सागर में गोते लगाने लगा। किसी युवा द्वारा अपने लंड को सहलाना स्वतः ही उत्तेजना और कल्पनाओं को जन्म देता है।

सूरज को अपने लंड को सहलाने बेहद मजा आ रहा था और हो भी क्यों ना सूरज की कल्पनाएं परवान चढ़ने लगी उसे रोजी का ध्यान आया…

उसने अपना मोबाइल उठाया ..

रोजी का मैसेज मोबाइल पर आया हुआ था

हैप्पी बर्थडे माय लव…

सूरज ने उसे थैंक यू नोट भेजा। वह चाहता तो था कि अपने खड़े लंड को एक बार रोजी को दिखाएं और अपनी मर्दानगी साबित करे पर यह संभव नहीं था। फिर भी उसने अपने मोबाइल से अपने खड़े लंड की फोटो ली और उसे अपने मोबाइल में छुपा लिया।

रोजी सुबह-सुबह के लिए रोज पार्क में जाती थी वह पार्क सूरज की हवेली से ज्यादा दूर नहीं था अचानक सूरज के दिमाग में कुछ आया और उसने रोजी को एक बार फिर मैसेज किया।

कल जॉगिंग के लिए जाओगी क्या?

उधर रोजी अब तक सो चुकी थी जवाब आने की उम्मीद नहीं थी सूरज ने मोबाइल किनारे रख दिया और अपनी जांघों के बीच खिले हुए फूल को अपनी हथेली से पड़कर एक बार फिर निहारने लगा।

सूरज अपने लंड को बड़े प्रेम से सहला रहा था कभी वह उसके ऊपर उभर रही सांप जैसी नसों को छूता कभी उसके सुपाड़े के पीछे उस अति संवेदनशील जगहों को। हर बार उसके शरीर में एक सुखद अनुभूति होती जैसे-जैसे सूरज अपने लंड को सहलाता गया वासना अपने आयाम बढ़ाती गई वह बार-बार रोजी को नग्न और नग्न करने की कोशिश करता परंतु यह कठिन था दरअसल इसके पूर्व सूरज ने कभी भी अपनी वासना को फलीभूत नहीं किया था।


वैसे भी जब लंड में तनाव ही ना हो तो कामुक कल्पनाओं का क्या फायदा। पर आज स्थितियां अलग थीं

सूरज ने अपनी वासना के तूफान को और हवा दी लंड सूरज की हथेलियों द्वारा मसला जा रहा था…उत्तेजना ने उत्कर्ष प्राप्त किया और सूरज के लंड से वीर्य की धार फूट पड़ी आह…..मौ…सी………..

सूरज का लंड लगातार वीर्य उगलता रहा और सूरज के लिहाफ पर उसके छींटे गिरते रहे…

सूरज के लिए हस्तमैथुन का यह पहला अनुभव था जितना सुख उसने आज महसूस किया था यह अनोखा था अद्भुत था सूरज को उसके जन्मदिन का उपहार मिल चुका था…

सूरज कुछ देर उसी स्थिति में रहा अपने लंड का यह रूप उसके लिए अनोखा था वह मर्दानगी से भरा हुआ था। सूरज का स्वाभिमान आज अपने चरम पर था अब तक उसने अपने लंड में तनाव न आने को लेकर जितनी चिंता की थी एक पल में ही वह सब खुशियों में बदल गया था।

सूरज ने अपने लंड की तरफ देखा वह अब भी वैसे ही तना हुआ था। सूरज ने अब तक जो पढ़ाई की थी या जो समझा था उसके अनुसार वीर्य स्खलन के बाद लंड को वापस सामान्य स्थिति में आ जाना चाहिए था परंतु लंड का तनाव यथावत था।

सूरज ने उसे वापस अंडरवियर में कैद करने की कोशिश की परंतु यह कठिन था। सूरज को यकीन ही नहीं हो रहा था कि ऐसा कैसे हो सकता है उसने इधर-उधर ध्यान भटकाया पर स्थिति जस की तस थी। लंड का तनाव कम होने का नाम ही नहीं ले रहा था। सूरज तने हुए लंड के साथ सूरज अब असहज महसूस करने लगा।

पर इन खुशियों को साझा करने वाला कोई भी ना था उसे अचानक रोजी का ध्यान आया। उसने मोबाइल उठाया पर रोजी का कोई मैसेज नहीं था।

सूरज ने एक बार फिर अपने इतने हुए लंड को अपना हाथों से सहलाना शुरू किया और कुछ ही देर की मेहनत के पश्चात एक बार फिर वीर्य स्खलन करने में कामयाब रहा परंतु जिस उद्देश्य के लिए यह किया गया था उसमें आनंद कम और लिंग का तनाव घटना प्राथमिकता थी। पर दुर्भाग्य दोबारा वीर्य स्खलन होने के बावजूद लिंग का तनाव कम न हुआ।

सूरज पूरी तरह थक चुका था लगातार दो बार हस्तमैथुन कर उसका शरीर शिथिल पड़ चुका था परंतु लिंग वैसे ही तनाव हुआ था सूरज की धड़कनें बढ़ी हुई थी उसने लिहाफ अपने बदन पर डाला और अपना ध्यान उसे तने हुए लिंग से हटाने की कोशिश की पर शायद यह संभव नहीं था जब लिंग में तनाव चरम पर होता है मनुष्य को और कुछ नहीं सोचता है आप अपना ध्यान चाह कर भी नहीं हटा सकते यही स्थिति सूरज की थी रात के दो बज चुके थे और सूरज अब भी अपनी खुशियों से जूझ रहा था। थकावट से कभी उसकी आंखें नींद से बोझिल होती परंतु उसके लंड का तनाव उसे सोने नहीं दे रहा था।

सुबह के 5:00 बज चुके थे अचानक मोबाइल पर ट्रिंग की आवाज हुई। सूरज ने मोबाइल उठाया यह रोजी का ही मैसेज था


हां आ रही हूं क्यों पूछ रहे हो

मैं भी आ रहा हूं सूरज ने रिप्लाई किया

अरे वह तो बर्थडे बॉय से सुबह-सुबह ही मुलाकात होगी चलो मैं तैयार होकर आता हूं सी यू

रोजी का मैसेज स्पष्ट था दोबारा रिप्लाई करने की जरूरत नहीं थी सूरज भी बिस्तर से उठा उसकी आंखें नींद पूरी नहीं होने की वजह से लाल थी पर लंड अभी उसी तरह तना हुआ था।

सूरज ने बड़ी मुश्किल से अपनी नित्य कर्म निपटा ए तने हुए लंड की वजह से उसे कई दिक्कतों का सामना करना पड़ रहा है वह तैयार हुआ बड़ी मुश्किल से लैंड को अपने पेट में कैद करने की कोशिश की पर उसका आकार और तनाव छुपाने लायक नहीं था सूरज ने सबसे ढीली डाली शर्ट पहनी और उसके ऊपर एक आवरण सा दे दिया।

एक तरफ सूरज के मन में खुशी थी कि उसके लंड में आज पहली बार तनाव आया था पर लगातार तनाव ने उसके मन में चिंता की लकीरें डाल दी थी।

सूरज ने अपनी मोटरसाइकिल उठाई और कुछ ही देर में रोजी के पास पार्क में पहुंच गया रोजी उसका इंतजार कर रही थी रोजी ने उसे एक खूबसूरत सा फूल दिया और बोला


Happy b day to you ..हमेशा इस फूल की तरह ही हंसते मुस्कुराते रहना

सूरज ने अपनी बाहें खोल दी और रोजी सूरज से सटती चली गई। सूरज की मजबूत बाहों ने रोजी को अपने आगोश में ले लिया दोनों प्रेमिका एक दूसरे से बेहद करीब आ गए। सूरज ने अपने हाथ से रोजी की कमर को सहारा देकर अपनी ओर खींचा और पहली बार रोजी ने अपने नाभि के नीचे एक तने और कठोर अंग को महसूस किया यह निश्चित ही सूरज का तनाव हुआ था। रोजी सहम गई उसने सर उठाकर सूरज के चेहरे की तरफ देखा सूरज ने पहले तो उसके माथे को चुम्मा और धीरे-धीरे उसके होंठ रोजी के होठों से सट गए।


चुंबनों की प्रगाढ़ता बढ़ती गई और रोजी की मन में कुछ हलचल होने लगी। अचानक रोजी ने अपना हाथ नीचे किया और सूरज के लंड में आए इस तनाव को महसूस करने की कोशिश की। रोजी की कोमल हथेलियां सूरज के लंड को पेट के ऊपर से ही महसूस कर रही थी। लंड का आकार और तनाव दोनों ही रोजी को आश्चर्यचकित कर रहा था। वह एक तरफ शर्मा भी रही थी दूसरी तरफ इस तनाव को देखकर खुश भी हो रही थी। सूरज की मर्दानगी को लेकर जो प्रश्न उसके अंतर्मन में पिछले कुछ दिनों से उठ रहे थे वह सब अचानक ही शांत हो गए थे। सूरज एक पूर्ण मर्द की भांति उसके समक्ष उपस्थित था रोजी ने सूरज के चुंबनों का प्रति उत्तर और भी आत्मीयता से देना शुरू कर दिया तथा अपनी हथेली से उसके लंड को दबाकर और सहलाकर उसका जायजा लेने की कोशिश की सूरज ने उसका हाथ पकड़ लिया और उससे अलग होते हुए बोला

अरे यह पब्लिक प्लेस है कंट्रोल करो…

दोनों मुस्कुराने लगे सूरज ने अपने शर्ट ठीक की और दोनों पार्क में तरह-तरह की बातें करते हुए घूमने लगे परंतु आज खुशियों का दिन था सूरज के लिंग के तनाव ने न सिर्फ सूरज को शहीद कर दिया था बल्कि अब रोगी के मन में भी तंगी फूटने लगी थी सूरज जैसे मर्द को अपनी जिंदगी में पाकर वह बेहद प्रसन्न थी बेहद खुश थी…

आज कॉलेज आओगे क्या ? रोजी ने पूछा

नहीं आज तो मुश्किल है आज बर्थडे मना लेते हैं


सूरज ने मुस्कुराते हुए जवाब दिया। सुबह के 6:30 बज चुके थे जॉगिंग का टाइम पूरा हो चुका था अब बिछड़ने का वक्त था। बिछड़ते वक़्त सूरज और रोजी एक बार फिर आलिंगन बद्ध हुए। सूरज मैं एक बार फिर रोजी को चूमने की कोशिश की रोजी ने उसे निराश ना किया इस बार उसने फिर सूरज के लंड पर हाथ लगाने की कोशिश की और उसके आश्चर्य का ठिकाना ना रहा लंड पूरी तरह तना हुआ था…

रोजी को यह यकीन ही नहीं हो रहा था कि यह तुरंत ही कैसे खड़ा हो गया था.. वह तुरंत सूरत से अलग हुई और बोली..

आज तो छोटे मियां पूरे जोश में दिखाई पड़ रहे हैं उसकी आंखों ने नीचे झुक कर सूरज को उसकी बात पूरी तरह समझा दी.. सूरज मुस्कुरा कर रह गया.

उसे सूरज की स्थिति का ज्ञान नहीं था यह तनाव अब सूरज के मानसिक तनाव का कारण बन चुका था।

सूरज वापस घर आ चुका था अभी भी घर में सब सो ही रहे थे सिर्फ सुगना और सोनी जगे हुए थे और हवेली के खूबसूरत हाल में चाय पी रहे थे। सूरज को अंदर आते देख सुगना खुश हो गई। सुगना ने सूरज को अपने पास बुलाया और बगल में बैठा लिया। सूरज सकुचा रहा था उसने अपनी शर्ट ठीक की बने हुए लंड को यथासंभव छुपाने की कोशिश की पर सामने बैठी अपनी मौसी से छुपा पाने में नाकाम रहा। सोनी की यह बेहद असहज लगा ऐसा लग रहा था जैसे सूरज में अपनी पेट में कोई बड़ा खीरा छुपाया हुआ हो…

आ बैठ …अरे इतनी सुबह-सुबह कहां चले गए थे…

सुगना ने सूरज के माथे पर प्यार से हाथ फिरते हुए कहा

कुछ नहीं थोड़ा टहलने का मन कर रहा था बाहर ही घूम रहा था।

यह तेरी आंखें लाल क्यों है नींद नहीं आई क्या? सुगना ने सूरज की आंखों में लाल डोरे देखते हुए कहा…

सूरत हड़बड़ा गया यह लाल डोरे कुछ तो अनिद्रा की वजह से और कुछ सूरज के तने हुए लंड की वजह से भी..

कुछ नहीं मां सब ठीक है मुझे भी चाय पीनी है सूरज ने बात टालते हुए कहा

ठीक है मैं लेकर आती हूं।

सुगना रसोई में चाय लेने चली गई इधर सोनी ने सूरज को असहज देखकर अपने सोफे से उठकर सूरज के पास आ गई और उसकी हाथों को अपने हथेली में लेकर सहलाते हुए बोली।

क्या हुआ बर्थडे बॉय आज टेंशन में क्यों है?

कुछ नहीं मौसी सब ठीक है बस थोड़ा नींद डिस्टर्ब हुई थी..

सूरज ने बात टालने की कोशिश की..


क्यों क्या हो गया? …सोनी ने सूरज की आंखों में आंखें डालते हुए पूछा।

सूरज ने कुछ नहीं कहा अपनी गर्दन झुका ली


मुझे कुछ नहीं बोलना..

तभी सोनी ने सूरज के टूटे हुए अंगूठे को अपनी कोमल उंगलियों से सहलाते हुए पूछा

और अंगूठे का दर्द कैसा है?

सोने की अंगूठा सहलाए जाने से सूरज के लंड में एक और तेज करंट दौड़ी और उसके लंड का तनाव और आकार और भी बढ़ गया…

सूरज के मुंह से कराह निकल गई…

सूरज ने अपना अंगूठा सोनी के हाथ से खींच लिया और बोला

मौसी अब बस..

यह कराह अंगूठे के दर्द की वजह से नहीं थी अपितु लंड में आए बेहद तनाव की वजह से थी।

सूरज ने अपना हाथ नीचे किया और तनाव से फट रहे लंड को अपने पैंट में और जगह देने की कोशिश की।

सूरज के शर्ट का आवरण हटते ही सोनी ने सूरज के पेट के अंदर आए उसे अप्रत्याशित उभार को देख लिया जो कतई सामान्य नहीं था। उसका आकार यह निश्चित तौर पर बता रहा था कि यह सूरज का लिंग है। लिंग… पर इतना बड़ा? सूरज तो अभी नया-नया युवा था। यह उभार अप्रत्याशित था सोनी घबरा गई। सोने के चेहरे पर हवाईया उड़ने लगी।

इतनी सुबह-सुबह अपनी मां और मौसी के पास बैठे सूरज के लंड में इतना तनाव आना अप्रत्याशित था।

अचानक उसे बचपन की वह घटना पूरी तरह याद आ गई जब वह बचपन में सूरज के अंगूठे को मजाक मजाक में सहलाया करती थी और…. फिर …. जैसे-जैसे सोनी को वह घटना याद आती गई सोने के चेहरे पर शिकन आते गई

हे भगवान मुझसे यह क्या हो गया…

सूरज अब और असहज हो चुका था वह अपने रूम में जाने के लिए उठा। तभी सुगना चाय लेकर आ चुकी थी

अरे बैठ पहले चाय पी ले.. फिर जाना..

सूरज से अपने लंड का तनाव और सहा नहीं जा रहा था फिर भी उसने अपनी मां की बात मान ली और बड़ी मुश्किल से बैठकर अपने बने हुए लंड को छुपाते हुए जल्दी जल्दी चाय पीने लगा।

उधर सोनी का कलेजा धक-धक कर रहा था उसे अब यकीन हो चला था कि सूरज के लिंग में आया हुआ तनाव निश्चित ही उसके अंगूठे सहलाए जाने के कारण हुआ था।

सोनी मन ही मन सोच रही थी पर तब तो सूरज एक बालक था अब तो तने हुए लिंग को शिथिल करने का उपाय सर्वविदित था। क्या सूरज को हस्तमैथुन के बारे में नहीं मालूम था? क्या सूरज ने इस तनाव को कम करने के लिए हस्तमैथुन नहीं किया होगा…

प्रश्न जटिल था सूरज की असहज स्थिति देखकर सोनी स्वयं परेशान हो गई थी इस प्रश्न का उत्तर जानना जरूरी था। सूरज के लिंग का तनाव कम करने का उपाय सोनी को बखूबी याद था पर ……

हे भगवान…. यह असंभव था….

पुत्र समान जवान सूरज का लंड ……चूमना……सोनी की रूह कांप उठी…अनिष्ट की आशंका से सोनी के माथे पर पसीने की बूंद चालक आई…थी…



अगला एपिसोड डायरेक्ट मैसेज पर उपलब्ध होगा..

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बहुत ही कामुक और उम्दा अपडेट आनन्द बाबू वाकई में आपकी।लेखनी कमाल की है प्रतीक्षा है अगले रसप्रद अपडेट की जिसे पढ़कर रससागर से रस की बूंदे छलक आए अगला अपडेट जल्दी दीजियेगा अब इंतजार करना कठिन लगता है
 

nagendra8352

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भाग 157

“हैप्पी बर्थडे टू यू, सूरज!”

सूरज खुशी से खिल उठा। । नीली जींस और सफेद टी-शर्ट सचमुच बहुत खूबसूरत थी। उसने सोनी के हाथ चूमे, फिर झुककर अपने बाएँ हाथ से उनके पैर छुए और खुशी-खुशी बोला,

“थैंक यू, मौसी।पर मौसी मेरा जन्मदिन तो कल है।”

“कोई बात नहीं आज यह रख ले कल एक और खूबसूरत उपहार दूंगी”

एक और खूबसूरत उपहार सोनी ने यह बात बिना सोचे समझे कही थी पर नियति ने उसके शब्द पकड़ लिए और उसके चेहरे पर एक कामुक मुस्कान दौड़ गई….

कुछ होने वाला था सूरज की किस्मत पलटने वाली थी…उसकी मायूसी खुशी में बदलने वाली थी…


अब आगे..

युवाओं में जन्मदिन का उत्साह देखने लायक होता है। सूरज भी इससे अछूता नहीं था। अंगूठे की चोट की पीड़ा को भुलाकर वह सोनी द्वारा लाए गए कपड़ों को उत्साह से अपने बदन पर पहनकर देखने लगा। अंगूठे की पीड़ा इसमें आड़े आ रही थी पर उत्साह कायम था। कपड़े न केवल बेहद खूबसूरत थे, बल्कि उनकी चमक से अंदाज़ा लगाया जा सकता था कि वे महंगे भी होंगे। सोनी का यह स्नेह सूरज के चेहरे पर मुस्कान ले आया। सच तो यह था कि केवल सोनी ही नहीं, घर का हर सदस्य सूरज को बेहद प्यार करता था। वह घर का सबसे होनहार बेटा था और कुछ ही समय में डॉक्टर बनने वाला था। डॉक्टर बनना पूरे परिवार के लिए सिर्फ एक उपलब्धि नहीं, बल्कि गर्व और सम्मान की बात थी।

उधर शाहिद जिसने सूरज पर हाथ उठाया था पूरे परिवार के लिए अब एक तरह का विलेन बन चुका था। लेकिन राजा, जो उम्र में सूरज से छोटा जरूर था, उसने शाहिद से बदला लेने की ठान ली थी। उसका बदमाशी में अंदाज़ ऐसा था जैसे वह खुद गैंग ऑफ़ वासेपुर के नवाजुद्दीन सिद्दीकी की तरह किसी बड़े खेल का हिस्सा हो।

इस बीच, सूरज अपने आने वाले कल अपने जन्म दिन के बारे में सोच रहा था। कल उसे समय निकालकर रोज़ी से भी मिलना था। एक तरफ वह अपनी मर्दानगी पर लगे सवालों को लेकर झिझक महसूस करता था, लेकिन अब धीरे-धीरे वह रोज़ी के लिए कुछ खास महसूस करने लगा था।

घर में सभी कल सूरज के जन्मदिन की तैयारियों के बारे में बात कर रहे थे। सुगना, हमेशा की तरह, सूरज के लिए तरह-तरह के व्यंजन बनाने में व्यस्त थी, और पूरा परिवार बड़े उत्साह और आनंद के साथ इसका इंतजार कर रहा था। सूरज परिवार के लिए सिर्फ एक बेटा ही नहीं, बल्कि घर की खुशी और ऊर्जा का केंद्र भी था।

कल शाम को, घर में एक पारिवारिक पार्टी होने वाली थी। कुछ मेहमान भी इसमें शरीक होने वाले थे। पूरे घर में खुशियों की हलचल थी—हँसी, बातचीत और व्यंजनों की खुशबू से माहौल भर गया था। सूरज अपने कमरे में बैठा थोड़ी-सी घबराहट और उत्साह के मिश्रित भाव के साथ सोच रहा था कि कल का दिन कितना खास होने वाला है।

डिनर के बाद हॉल में हल्की पीली रोशनी फैली हुई थी। टीवी बंद था, मगर घर में अपनापन और हँसी तैर रही थी। सूरज सोफ़े पर सबके बीच बैठा था। उसका जादुई अंगूठा कपड़े के पीछे हल्दी के लेप में लिपटा हुआ, जैसे चुपचाप अपनी ऊर्जा वापस बुला रहा हो। सूरज न जाने क्या सोच कर मुस्कुरा रहा था।

मालती की नज़र सीधे सूरज पर टिक गई।

मालती:

“सूरज, क्या हुआ क्यों मुस्कुरा रहे हो”

सूरज:

(हल्की हँसी के साथ)

“कुछ नहीं दीदी, बस थकान है।”

मालती ने भौंहें उठाईं।

मालती:

“थकान से आदमी मुस्कुराता है क्या?”

सामने कुर्सी पर बैठे विकास (जो सभी युवाओं का मौसा था ) ने गला साफ़ किया और मुस्कुराते हुए बोला—

“अरे मालती, छोड़ो उसे। ये उम्र ही ऐसी होती है वैसे भी कल उसका जन्मदिन है कुछ सपने संजो रहा होगा।”

सूरज ने राहत की साँस ली, मगर वो ज़्यादा देर की नहीं थी।

“ आप ही बताइए… क्या आपको भी नहीं लग रहा कि इसमें कुछ चल रहा है?” मालती ने राजू की तरफ देखते हुए कहा। राजू और मालती के बीच खिचड़ी पक रही थी अपितु यह कहा जाए कि पक चुकी थी पर इसका अंदाजा परिवार में किसी को नहीं था।

राजू:

(हँसते हुए)

“लग तो रहा है। आँखों में चमक है और होठों पर मुस्कुराहट। ये सब बिना वजह नहीं आता।”

सूरज झेंप गया।

सूरज:

“राजू भैया, आप भी दीदी की तरफ़ हो गए।”

राजू:

“मैं किसी की तरफ़ नहीं हूँ , बस ज़िंदगी की तरफ़ हूँ। जब दिल किसी को पसंद करने लगे, तो आदमी थोड़ा बदल ही जाता है।”

हॉल में हल्की हँसी गूंज गई।

छोटा भाई राजा चुटकी ले बैठा—

“मतलब पक्का कुछ है!”

मालती ने मौका नहीं छोड़ा।

“तो नाम तो बता दो कम से कम।”

सूरज कुछ पल चुप रहा। फिर बोला—

सूरज:

“अभी नाम लेने का वक्त नहीं आया है।”

सूरज ने रीमा की तरफ देखा। रीमा लाली की पुत्री थी और वह सूरज को मन ही मनपसंद करती थी यद्यपि सूरज उस उम्र में थोड़ा छोटा था परंतु फिर भी वह सूरज को चाहती थी।

सुगना रसोई से आवाज़ देती हैं—

“अब बस करो तुम लोग। कल उसका जन्मदिन है। उसे तंग मत करो।

मालती मुस्कुरा कर पीछे हट गई।

अब हाई कमान का आर्डर आ चुका है कोई सूरज भैया को छेड़ेगा नहीं। छोटी मधु ने खड़े होकर सबको नसीहत दी और सबको अंताक्षरी खेलने के लिए आमंत्रित कर लिया।

सूरज ने हल्की मुस्कान के साथ अपने लिपटे हुए अंगूठे को देखा उसे बार-बार ही महसूस हो रहा था कि कल उसकी दिनचर्या में इस अंगूठे का कितना अहम रोल था। आज पेंट पहनते समय उसे काफी दिक्कत हुई थी और कल तो दिन भर उसे इस दर्द के साथ ही रहना था।

रात के 11:00 बज चुके थे। सोनी सुगना भी बच्चों के साथ बातें कर रहे थे। कुछ लोग अभी भी उत्साह में थे, कुछ जम्हाईया ले रहे थे पर इस सजी हुई महफ़िल से हटने को कोई तैयार नहीं था। और जाए भी कैसे? सबका प्रिय सूरज, बस एक घंटे बाद, अपने जन्मदिन की शुरुआत करने वाला था। सभी उसे “हैप्पी बर्थडे” कहने का इंतजार कर रहे थे।

बातचीत कभी सोनी और विकास की अमेरिका यात्रा पर जाती, युवाओं के अमेरिका को लेकर उत्साह स्वाभाविक रूप से था। कभी सुगना और लाली सलेमपुर और सीतापुर की पुरानी यादों में खो जाती, और कभी बच्चे सरयू सिंह की अकाल मृत्यु के बारे में जानना चाहते। पर हमेशा की तरह, सुगना ऐसे सवालों को टाल देती। कभी-कभी वह दुखी भी हो जाती और सभी को यह एहसास दिलाती कि कुछ बातें ना पूछना ही बेहतर है।

लोग जितना सूरज से प्यार करते थे, उससे ज्यादा सुगना का सम्मान। यद्यपि यह हवेली सोनी और विकास की थी, लेकिन घर में सबसे अधिक सम्मान सुगना का ही था। वह घर की मालकिन तो न थी पर मुखिया अवश्य थी। सुगना की बात सभी के लिए मान्य थी, और क्यों नहीं—वह सबका उतना ही ख्याल रखती थी, चाहे वह सूरज हो या परिवार का सबसे दुष्ट बेटा, राजा। राजा भी जानता था कि वह गलत है, पर सुगना के प्यार की वजह से वह भी सहज और शांत महसूस करता था।

महफ़िल में हँसी, यादें और बातचीत का सिलसिला चलता रहा। हर कोई, चाहे बड़ा हो या छोटा, अपने अपने अनुभवों और भावनाओं में खोया था। लेकिन सबके दिलों में एक बात तय थी सूरज सबका प्यारा था और अपनी मां सुगना की जान था।

की सुइयाँ धीरे-धीरे बारह बजने को तैयार थीं। कुछ सेकंड पहले ही बच्चों का उत्साह शिखर पर था। सभी उठकर एक साथ “10… 9… 8… 7…” चिल्लाने लगे। आवाज़ धीरे-धीरे तेज़ होती गई और आखिरकार

“हैप्पी बर्थडे टू यू,

हैप्पी बर्थडे टू यू”

की गूंज के साथ सभी ने सूरज को बारी-बारी से गले लगाया।

छोटी मधु ने बड़े भाई के पैर छुए। छोटा राजा भागकर फ्रिज से बड़ा-सा केक निकाल लाया और थोड़ी ही देर में सूरज ने उस खूबसूरत केक को काटा। हमेशा की तरह केक पर पहला हक उसकी माँ का था। सुगना ने बेहद प्यार से सूरज के माथे को चूमा। दूसरा केक उसने अपनी सोनी मौसी को खिलाया और फिर धीरे-धीरे सभी बड़ों को बारी-बारी से केक खिलाया। सबसे आख़िर में उसने अपनी छोटी बहन मधु को केक खिलाया।

नियति मुस्कुराते हुए सूरज और मधु दोनों को साथ देख रही थी। उन्हें साथ देखकर नियति एक बार फिर विधाता को याद कर रही थी, जिन्होंने उनके भाग्य में न जाने क्यों वह लिख दिया था, जो निश्चित ही एक पाप था।

बहरहाल, धीरे-धीरे सूरज के जन्मदिन का यह छोटा-सा सेलिब्रेशन समाप्त हुआ और सब अपने-अपने कमरों में जाने लगे। सुगना, सोनी और सूरज अब सूरज के कमरे में आ चुके थे। सुगना और सोनी ने सूरज को बहुत प्यार किया और उसे ढेर सारी शुभकामनाएँ दीं। सुगना के ज़ेहन में अब भी सूरज की शारीरिक कमी का ख्याल घूम जाता था, और वह दुखी हो जाती थीं। आज सूरज 21 वर्ष का हो चुका था।

कुछ देर और बातचीत करने के बाद सुगना और सोनी दोनों ने एक बार फिर सूरज को शुभकामनाएँ दीं, उसके माथे पर हाथ फेरा और अपने-अपने कमरों की ओर चल पड़ीं।

अभी सुगना और सोनी हाल में ही पहुँची थीं कि सूरज ने अंदर अपने लिहाफ़ को ऊपर खींचने की कोशिश की और गलती से अपने चोटिल अंगूठे का सहारा ले लिया। सूरज के मुँह से एक हल्की-सी कराह निकल गई।

सुगना और सोनी वापस सूरज के कमरे में आ गईं। सूरज उनके आने का कारण समझ गया। उसने गर्दन बाहर निकालकर कहा,

“अरे, कोई बात नहीं। अंगूठा लिहाफ़ से टकरा गया था।”

सोनी को अचानक अपनी उस दवा की याद आ गई, जो सूरज के अंगूठे पर लगानी थी। उसने कहा,

“दीदी, आप जाकर सो जाइए। मैं सूरज के अंगूठे पर वह दवा लगा दूँगी। मुझे विश्वास है इससे दर्द में ज़रूर राहत मिलेगी।”

सुगना ने भी साथ रुकने की बात कही, तो सोनी बोली,

“दीदी, आप पूरी तरह थक चुकी हैं। रसोई में इतने पकवान बनाना कोई आसान काम नहीं होता। आपको आराम करना चाहिए, दवा मैं लगा दूँगी।”

सोनी ने सुगना के कंधे थामकर उसे धीरे-धीरे उसके कमरे की ओर भेज दिया। सुगना और सोनी का आपसी स्नेह इस उम्र तक भी बना हुआ था।

कुछ देर बाद सोनी दवा लेकर सूरज के कमरे में पहुँची।

नियति, सोनी और सूरज को एक साथ देखकर मुस्कुरा रही थी। सोनी ने अपने शुरुआती दिनों में नर्स के रूप में काम किया था, इसलिए उसे चिकित्सा का कुछ ज्ञान था। आज नर्स सोनी, डॉक्टर बनकर सूरज के अंगूठे पर मलहम लगाने आई थी।

जैसे ही सोनी ने सूरज के अंगूठे की पट्टी हटाई, चूने और हल्दी का सूखा लेप भी पट्टी के साथ निकल आया। हल्दी का थोड़ा-सा अंश अब भी अंगूठे पर लगा था। सोनी ने अपनी कोमल उँगलियों से उसे धीरे-धीरे साफ़ किया।

सूरज को एक अजीब-सी अनुभूति हुई, जैसे अंगूठे में हल्का-सा करंट दौड़ गया हो। सोनी ने अपनी उँगलियों पर मलहम निकाला और सूरज के अंगूठे पर लगा दिया। जैसे ही उसने अंगूठे को अपने अंगूठे और तर्जनी के बीच लेकर हल्के से सहलाया, सूरज के पूरे शरीर में फिर एक सिहरन-सी दौड़ गई।

अचानक सूरज ने महसूस किया कि उसके लिंग में हलचल हो रही।

लिंग की रक्त कोशिकाओ में रक्त प्रवाह अचानक तेज हो गया था सूरज के लिंग में अचानक तनाव आना शुरू हो गया था सूरज आश्चर्यचकित था। जैसे-जैसे सोनी सूरज के अंगूठे को सहलाए जा रही थी वैसे वैसे सूरज के लिंग का तनाव बढ़ता जा रहा था यह तनाव सुखद था। लिंग में तनाव आना वैसे भी सुखद अनुभूति देता है। सूरज ने सोनी से नजर बचाकर अपना दूसरा हाथ लिहाफ के अंदर ले जाकर इस आश्चर्य को महसूस करना चाहा।

सूरज का लंड तनकर खड़ा हो चुका था। सूरज के लिंग में आशातीत वृद्धि हुई थी और शायद इसी कारण सूरज को अपना हाथ लिहाफ के अंदर ले जाना पड़ा था।


सोनी ने सूरज के हाथों की हलचल उसकी जांघों के बीच देख ली लिहाफ सूरज की इस हरकत को छुपा पाने में नाकाम रहा था।

सोने की उंगलियां रुक गई और सूरज ने सोने की आंखों को अपनी कमर की तरफ देखते हुए देख लिया।

सूरज झेंप गया परंतु उसने स्थिति संभाली और बोला…मौसी यह कौन सा मलहम है

सोनी ने अपने दूसरे हाथ से मलहम का डिब्बा सूरज की ओर दिखाई परंतु अब भी वह चिंतित थी बचपन में सूरज के अंगूठे को सहलाए जाने से होने वाली प्रतिक्रिया उसे याद आ रही थी हे भगवान …कहीं वह सच तो नहीं। सोनी का कलेजा धक-धक करने लगा उसे एक अनजाना डर सताने लगा उसके हाथ रुक गए सूरज ने फिर एक बार उसका ध्यान अपनी और खींचा।

“मौसी यह अंगूठे के पीछे ज्यादा मलहम लगा है इसे फैला दीजिए।”

सोनी ने अनमने ढंग से उसे मलहम को चारों तरफ बराबरी से लगा दिया और सूरज के लिंग का तनाव और आकार को और भी ज्यादा बढ़ा दिया।

लिंग के तनाव का असर सूरज के चेहरे पर भी दिखाई पड़ने लगा उसका मासूम चेहरा वासना से तमतमा उठा था। सोनी को पक्का यकीन हो गया की निश्चित ही बचपन की वह घटना आज दोबारा रिपीट हो चुकी है उसने सूरज का हाथ छोड़ दिया और हड़बड़ी में वहां से उठते हुए बोली..

अब सो जाओ एक बार फिर हैप्पी बर्थडे टू यू

सोनी ने धड़कते हुए कलेजे के बावजूद अपने होठों पर मुस्कुराहट लाई और सूरज के कमरे से बाहर निकल गई जाते समय उसने दरवाजा बंद कर दिया।

सोनी को बचपन की बातें पूरी तरह याद आ चुकी थी इस तनाव का निदान क्या था उसे यह भी याद आ चुका था। क्या उसे अपने होंठ सूरज के…. हे भगवान नहीं नहीं ऐसा नहीं हो सकता। जितना ही वह इस बारे में सोचती उतना ही उसका दिल घबराने लगता। अपने मन में घबराहट और तेज धड़कनों के साथ सोनी बिस्तर पर आ चुकी थी पर दिमाग में वही बातें घूम रही थी।

उधर अपनी मौसी सोनी के जाने के बाद सूरज बिस्तर पर से उठा उसने दरवाजा लॉक किया और वापस बिस्तर पर आकर अपने लंड को आजाद कर दिया। लंड अंडरवियर से बाहर आते ही उछलकर खड़ा हो गया।

सूरज अपने खड़े लंड को देखकरआश्चर्यचकित था। इतना सुंदर लंड तो उसने पोर्न वेबसाइट पर भी नहीं देखा था। लगभग 2 इंच व्यास और आठ इंच लंबी कद काठी का वह लंड एक खूबसूरत सुपड़ा लिए हुए था। जो उसकी खूबसूरती को और भी बढ़ा रहा था। लंड पर तनीहुई उभरी नसें यह साबित कर रही थी की यह न सिर्फ कसरत्ती है अपितु कसरत करने के लिए ही बना है।

सूरज ने अपने हाथ से उसे सहलाने की कोशिश की यह अनुभूति अनुपम थी विशिष्ट थी। आज पहली बार अपने जीवन में वह अपने खड़े लंड को सहला रहा था। सूरज आनंद के सागर में गोते लगाने लगा। किसी युवा द्वारा अपने लंड को सहलाना स्वतः ही उत्तेजना और कल्पनाओं को जन्म देता है।

सूरज को अपने लंड को सहलाने बेहद मजा आ रहा था और हो भी क्यों ना सूरज की कल्पनाएं परवान चढ़ने लगी उसे रोजी का ध्यान आया…

उसने अपना मोबाइल उठाया ..

रोजी का मैसेज मोबाइल पर आया हुआ था

हैप्पी बर्थडे माय लव…

सूरज ने उसे थैंक यू नोट भेजा। वह चाहता तो था कि अपने खड़े लंड को एक बार रोजी को दिखाएं और अपनी मर्दानगी साबित करे पर यह संभव नहीं था। फिर भी उसने अपने मोबाइल से अपने खड़े लंड की फोटो ली और उसे अपने मोबाइल में छुपा लिया।

रोजी सुबह-सुबह के लिए रोज पार्क में जाती थी वह पार्क सूरज की हवेली से ज्यादा दूर नहीं था अचानक सूरज के दिमाग में कुछ आया और उसने रोजी को एक बार फिर मैसेज किया।

कल जॉगिंग के लिए जाओगी क्या?

उधर रोजी अब तक सो चुकी थी जवाब आने की उम्मीद नहीं थी सूरज ने मोबाइल किनारे रख दिया और अपनी जांघों के बीच खिले हुए फूल को अपनी हथेली से पड़कर एक बार फिर निहारने लगा।

सूरज अपने लंड को बड़े प्रेम से सहला रहा था कभी वह उसके ऊपर उभर रही सांप जैसी नसों को छूता कभी उसके सुपाड़े के पीछे उस अति संवेदनशील जगहों को। हर बार उसके शरीर में एक सुखद अनुभूति होती जैसे-जैसे सूरज अपने लंड को सहलाता गया वासना अपने आयाम बढ़ाती गई वह बार-बार रोजी को नग्न और नग्न करने की कोशिश करता परंतु यह कठिन था दरअसल इसके पूर्व सूरज ने कभी भी अपनी वासना को फलीभूत नहीं किया था।


वैसे भी जब लंड में तनाव ही ना हो तो कामुक कल्पनाओं का क्या फायदा। पर आज स्थितियां अलग थीं

सूरज ने अपनी वासना के तूफान को और हवा दी लंड सूरज की हथेलियों द्वारा मसला जा रहा था…उत्तेजना ने उत्कर्ष प्राप्त किया और सूरज के लंड से वीर्य की धार फूट पड़ी आह…..मौ…सी………..

सूरज का लंड लगातार वीर्य उगलता रहा और सूरज के लिहाफ पर उसके छींटे गिरते रहे…

सूरज के लिए हस्तमैथुन का यह पहला अनुभव था जितना सुख उसने आज महसूस किया था यह अनोखा था अद्भुत था सूरज को उसके जन्मदिन का उपहार मिल चुका था…

सूरज कुछ देर उसी स्थिति में रहा अपने लंड का यह रूप उसके लिए अनोखा था वह मर्दानगी से भरा हुआ था। सूरज का स्वाभिमान आज अपने चरम पर था अब तक उसने अपने लंड में तनाव न आने को लेकर जितनी चिंता की थी एक पल में ही वह सब खुशियों में बदल गया था।

सूरज ने अपने लंड की तरफ देखा वह अब भी वैसे ही तना हुआ था। सूरज ने अब तक जो पढ़ाई की थी या जो समझा था उसके अनुसार वीर्य स्खलन के बाद लंड को वापस सामान्य स्थिति में आ जाना चाहिए था परंतु लंड का तनाव यथावत था।

सूरज ने उसे वापस अंडरवियर में कैद करने की कोशिश की परंतु यह कठिन था। सूरज को यकीन ही नहीं हो रहा था कि ऐसा कैसे हो सकता है उसने इधर-उधर ध्यान भटकाया पर स्थिति जस की तस थी। लंड का तनाव कम होने का नाम ही नहीं ले रहा था। सूरज तने हुए लंड के साथ सूरज अब असहज महसूस करने लगा।

पर इन खुशियों को साझा करने वाला कोई भी ना था उसे अचानक रोजी का ध्यान आया। उसने मोबाइल उठाया पर रोजी का कोई मैसेज नहीं था।

सूरज ने एक बार फिर अपने इतने हुए लंड को अपना हाथों से सहलाना शुरू किया और कुछ ही देर की मेहनत के पश्चात एक बार फिर वीर्य स्खलन करने में कामयाब रहा परंतु जिस उद्देश्य के लिए यह किया गया था उसमें आनंद कम और लिंग का तनाव घटना प्राथमिकता थी। पर दुर्भाग्य दोबारा वीर्य स्खलन होने के बावजूद लिंग का तनाव कम न हुआ।

सूरज पूरी तरह थक चुका था लगातार दो बार हस्तमैथुन कर उसका शरीर शिथिल पड़ चुका था परंतु लिंग वैसे ही तनाव हुआ था सूरज की धड़कनें बढ़ी हुई थी उसने लिहाफ अपने बदन पर डाला और अपना ध्यान उसे तने हुए लिंग से हटाने की कोशिश की पर शायद यह संभव नहीं था जब लिंग में तनाव चरम पर होता है मनुष्य को और कुछ नहीं सोचता है आप अपना ध्यान चाह कर भी नहीं हटा सकते यही स्थिति सूरज की थी रात के दो बज चुके थे और सूरज अब भी अपनी खुशियों से जूझ रहा था। थकावट से कभी उसकी आंखें नींद से बोझिल होती परंतु उसके लंड का तनाव उसे सोने नहीं दे रहा था।

सुबह के 5:00 बज चुके थे अचानक मोबाइल पर ट्रिंग की आवाज हुई। सूरज ने मोबाइल उठाया यह रोजी का ही मैसेज था


हां आ रही हूं क्यों पूछ रहे हो

मैं भी आ रहा हूं सूरज ने रिप्लाई किया

अरे वह तो बर्थडे बॉय से सुबह-सुबह ही मुलाकात होगी चलो मैं तैयार होकर आता हूं सी यू

रोजी का मैसेज स्पष्ट था दोबारा रिप्लाई करने की जरूरत नहीं थी सूरज भी बिस्तर से उठा उसकी आंखें नींद पूरी नहीं होने की वजह से लाल थी पर लंड अभी उसी तरह तना हुआ था।

सूरज ने बड़ी मुश्किल से अपनी नित्य कर्म निपटा ए तने हुए लंड की वजह से उसे कई दिक्कतों का सामना करना पड़ रहा है वह तैयार हुआ बड़ी मुश्किल से लैंड को अपने पेट में कैद करने की कोशिश की पर उसका आकार और तनाव छुपाने लायक नहीं था सूरज ने सबसे ढीली डाली शर्ट पहनी और उसके ऊपर एक आवरण सा दे दिया।

एक तरफ सूरज के मन में खुशी थी कि उसके लंड में आज पहली बार तनाव आया था पर लगातार तनाव ने उसके मन में चिंता की लकीरें डाल दी थी।

सूरज ने अपनी मोटरसाइकिल उठाई और कुछ ही देर में रोजी के पास पार्क में पहुंच गया रोजी उसका इंतजार कर रही थी रोजी ने उसे एक खूबसूरत सा फूल दिया और बोला


Happy b day to you ..हमेशा इस फूल की तरह ही हंसते मुस्कुराते रहना

सूरज ने अपनी बाहें खोल दी और रोजी सूरज से सटती चली गई। सूरज की मजबूत बाहों ने रोजी को अपने आगोश में ले लिया दोनों प्रेमिका एक दूसरे से बेहद करीब आ गए। सूरज ने अपने हाथ से रोजी की कमर को सहारा देकर अपनी ओर खींचा और पहली बार रोजी ने अपने नाभि के नीचे एक तने और कठोर अंग को महसूस किया यह निश्चित ही सूरज का तनाव हुआ था। रोजी सहम गई उसने सर उठाकर सूरज के चेहरे की तरफ देखा सूरज ने पहले तो उसके माथे को चुम्मा और धीरे-धीरे उसके होंठ रोजी के होठों से सट गए।


चुंबनों की प्रगाढ़ता बढ़ती गई और रोजी की मन में कुछ हलचल होने लगी। अचानक रोजी ने अपना हाथ नीचे किया और सूरज के लंड में आए इस तनाव को महसूस करने की कोशिश की। रोजी की कोमल हथेलियां सूरज के लंड को पेट के ऊपर से ही महसूस कर रही थी। लंड का आकार और तनाव दोनों ही रोजी को आश्चर्यचकित कर रहा था। वह एक तरफ शर्मा भी रही थी दूसरी तरफ इस तनाव को देखकर खुश भी हो रही थी। सूरज की मर्दानगी को लेकर जो प्रश्न उसके अंतर्मन में पिछले कुछ दिनों से उठ रहे थे वह सब अचानक ही शांत हो गए थे। सूरज एक पूर्ण मर्द की भांति उसके समक्ष उपस्थित था रोजी ने सूरज के चुंबनों का प्रति उत्तर और भी आत्मीयता से देना शुरू कर दिया तथा अपनी हथेली से उसके लंड को दबाकर और सहलाकर उसका जायजा लेने की कोशिश की सूरज ने उसका हाथ पकड़ लिया और उससे अलग होते हुए बोला

अरे यह पब्लिक प्लेस है कंट्रोल करो…

दोनों मुस्कुराने लगे सूरज ने अपने शर्ट ठीक की और दोनों पार्क में तरह-तरह की बातें करते हुए घूमने लगे परंतु आज खुशियों का दिन था सूरज के लिंग के तनाव ने न सिर्फ सूरज को शहीद कर दिया था बल्कि अब रोगी के मन में भी तंगी फूटने लगी थी सूरज जैसे मर्द को अपनी जिंदगी में पाकर वह बेहद प्रसन्न थी बेहद खुश थी…

आज कॉलेज आओगे क्या ? रोजी ने पूछा

नहीं आज तो मुश्किल है आज बर्थडे मना लेते हैं


सूरज ने मुस्कुराते हुए जवाब दिया। सुबह के 6:30 बज चुके थे जॉगिंग का टाइम पूरा हो चुका था अब बिछड़ने का वक्त था। बिछड़ते वक़्त सूरज और रोजी एक बार फिर आलिंगन बद्ध हुए। सूरज मैं एक बार फिर रोजी को चूमने की कोशिश की रोजी ने उसे निराश ना किया इस बार उसने फिर सूरज के लंड पर हाथ लगाने की कोशिश की और उसके आश्चर्य का ठिकाना ना रहा लंड पूरी तरह तना हुआ था…

रोजी को यह यकीन ही नहीं हो रहा था कि यह तुरंत ही कैसे खड़ा हो गया था.. वह तुरंत सूरत से अलग हुई और बोली..

आज तो छोटे मियां पूरे जोश में दिखाई पड़ रहे हैं उसकी आंखों ने नीचे झुक कर सूरज को उसकी बात पूरी तरह समझा दी.. सूरज मुस्कुरा कर रह गया.

उसे सूरज की स्थिति का ज्ञान नहीं था यह तनाव अब सूरज के मानसिक तनाव का कारण बन चुका था।

सूरज वापस घर आ चुका था अभी भी घर में सब सो ही रहे थे सिर्फ सुगना और सोनी जगे हुए थे और हवेली के खूबसूरत हाल में चाय पी रहे थे। सूरज को अंदर आते देख सुगना खुश हो गई। सुगना ने सूरज को अपने पास बुलाया और बगल में बैठा लिया। सूरज सकुचा रहा था उसने अपनी शर्ट ठीक की बने हुए लंड को यथासंभव छुपाने की कोशिश की पर सामने बैठी अपनी मौसी से छुपा पाने में नाकाम रहा। सोनी की यह बेहद असहज लगा ऐसा लग रहा था जैसे सूरज में अपनी पेट में कोई बड़ा खीरा छुपाया हुआ हो…

आ बैठ …अरे इतनी सुबह-सुबह कहां चले गए थे…

सुगना ने सूरज के माथे पर प्यार से हाथ फिरते हुए कहा

कुछ नहीं थोड़ा टहलने का मन कर रहा था बाहर ही घूम रहा था।

यह तेरी आंखें लाल क्यों है नींद नहीं आई क्या? सुगना ने सूरज की आंखों में लाल डोरे देखते हुए कहा…

सूरत हड़बड़ा गया यह लाल डोरे कुछ तो अनिद्रा की वजह से और कुछ सूरज के तने हुए लंड की वजह से भी..

कुछ नहीं मां सब ठीक है मुझे भी चाय पीनी है सूरज ने बात टालते हुए कहा

ठीक है मैं लेकर आती हूं।

सुगना रसोई में चाय लेने चली गई इधर सोनी ने सूरज को असहज देखकर अपने सोफे से उठकर सूरज के पास आ गई और उसकी हाथों को अपने हथेली में लेकर सहलाते हुए बोली।

क्या हुआ बर्थडे बॉय आज टेंशन में क्यों है?

कुछ नहीं मौसी सब ठीक है बस थोड़ा नींद डिस्टर्ब हुई थी..

सूरज ने बात टालने की कोशिश की..


क्यों क्या हो गया? …सोनी ने सूरज की आंखों में आंखें डालते हुए पूछा।

सूरज ने कुछ नहीं कहा अपनी गर्दन झुका ली


मुझे कुछ नहीं बोलना..

तभी सोनी ने सूरज के टूटे हुए अंगूठे को अपनी कोमल उंगलियों से सहलाते हुए पूछा

और अंगूठे का दर्द कैसा है?

सोने की अंगूठा सहलाए जाने से सूरज के लंड में एक और तेज करंट दौड़ी और उसके लंड का तनाव और आकार और भी बढ़ गया…

सूरज के मुंह से कराह निकल गई…

सूरज ने अपना अंगूठा सोनी के हाथ से खींच लिया और बोला

मौसी अब बस..

यह कराह अंगूठे के दर्द की वजह से नहीं थी अपितु लंड में आए बेहद तनाव की वजह से थी।

सूरज ने अपना हाथ नीचे किया और तनाव से फट रहे लंड को अपने पैंट में और जगह देने की कोशिश की।

सूरज के शर्ट का आवरण हटते ही सोनी ने सूरज के पेट के अंदर आए उसे अप्रत्याशित उभार को देख लिया जो कतई सामान्य नहीं था। उसका आकार यह निश्चित तौर पर बता रहा था कि यह सूरज का लिंग है। लिंग… पर इतना बड़ा? सूरज तो अभी नया-नया युवा था। यह उभार अप्रत्याशित था सोनी घबरा गई। सोने के चेहरे पर हवाईया उड़ने लगी।

इतनी सुबह-सुबह अपनी मां और मौसी के पास बैठे सूरज के लंड में इतना तनाव आना अप्रत्याशित था।

अचानक उसे बचपन की वह घटना पूरी तरह याद आ गई जब वह बचपन में सूरज के अंगूठे को मजाक मजाक में सहलाया करती थी और…. फिर …. जैसे-जैसे सोनी को वह घटना याद आती गई सोने के चेहरे पर शिकन आते गई

हे भगवान मुझसे यह क्या हो गया…

सूरज अब और असहज हो चुका था वह अपने रूम में जाने के लिए उठा। तभी सुगना चाय लेकर आ चुकी थी

अरे बैठ पहले चाय पी ले.. फिर जाना..

सूरज से अपने लंड का तनाव और सहा नहीं जा रहा था फिर भी उसने अपनी मां की बात मान ली और बड़ी मुश्किल से बैठकर अपने बने हुए लंड को छुपाते हुए जल्दी जल्दी चाय पीने लगा।

उधर सोनी का कलेजा धक-धक कर रहा था उसे अब यकीन हो चला था कि सूरज के लिंग में आया हुआ तनाव निश्चित ही उसके अंगूठे सहलाए जाने के कारण हुआ था।

सोनी मन ही मन सोच रही थी पर तब तो सूरज एक बालक था अब तो तने हुए लिंग को शिथिल करने का उपाय सर्वविदित था। क्या सूरज को हस्तमैथुन के बारे में नहीं मालूम था? क्या सूरज ने इस तनाव को कम करने के लिए हस्तमैथुन नहीं किया होगा…

प्रश्न जटिल था सूरज की असहज स्थिति देखकर सोनी स्वयं परेशान हो गई थी इस प्रश्न का उत्तर जानना जरूरी था। सूरज के लिंग का तनाव कम करने का उपाय सोनी को बखूबी याद था पर ……

हे भगवान…. यह असंभव था….

पुत्र समान जवान सूरज का लंड ……चूमना……सोनी की रूह कांप उठी…अनिष्ट की आशंका से सोनी के माथे पर पसीने की बूंद चालक आई…थी…



अगला एपिसोड डायरेक्ट मैसेज पर उपलब्ध होगा..

जुड़े रहें…

भाग 157

“हैप्पी बर्थडे टू यू, सूरज!”

सूरज खुशी से खिल उठा। । नीली जींस और सफेद टी-शर्ट सचमुच बहुत खूबसूरत थी। उसने सोनी के हाथ चूमे, फिर झुककर अपने बाएँ हाथ से उनके पैर छुए और खुशी-खुशी बोला,

“थैंक यू, मौसी।पर मौसी मेरा जन्मदिन तो कल है।”

“कोई बात नहीं आज यह रख ले कल एक और खूबसूरत उपहार दूंगी”

एक और खूबसूरत उपहार सोनी ने यह बात बिना सोचे समझे कही थी पर नियति ने उसके शब्द पकड़ लिए और उसके चेहरे पर एक कामुक मुस्कान दौड़ गई….

कुछ होने वाला था सूरज की किस्मत पलटने वाली थी…उसकी मायूसी खुशी में बदलने वाली थी…


अब आगे..

युवाओं में जन्मदिन का उत्साह देखने लायक होता है। सूरज भी इससे अछूता नहीं था। अंगूठे की चोट की पीड़ा को भुलाकर वह सोनी द्वारा लाए गए कपड़ों को उत्साह से अपने बदन पर पहनकर देखने लगा। अंगूठे की पीड़ा इसमें आड़े आ रही थी पर उत्साह कायम था। कपड़े न केवल बेहद खूबसूरत थे, बल्कि उनकी चमक से अंदाज़ा लगाया जा सकता था कि वे महंगे भी होंगे। सोनी का यह स्नेह सूरज के चेहरे पर मुस्कान ले आया। सच तो यह था कि केवल सोनी ही नहीं, घर का हर सदस्य सूरज को बेहद प्यार करता था। वह घर का सबसे होनहार बेटा था और कुछ ही समय में डॉक्टर बनने वाला था। डॉक्टर बनना पूरे परिवार के लिए सिर्फ एक उपलब्धि नहीं, बल्कि गर्व और सम्मान की बात थी।

उधर शाहिद जिसने सूरज पर हाथ उठाया था पूरे परिवार के लिए अब एक तरह का विलेन बन चुका था। लेकिन राजा, जो उम्र में सूरज से छोटा जरूर था, उसने शाहिद से बदला लेने की ठान ली थी। उसका बदमाशी में अंदाज़ ऐसा था जैसे वह खुद गैंग ऑफ़ वासेपुर के नवाजुद्दीन सिद्दीकी की तरह किसी बड़े खेल का हिस्सा हो।

इस बीच, सूरज अपने आने वाले कल अपने जन्म दिन के बारे में सोच रहा था। कल उसे समय निकालकर रोज़ी से भी मिलना था। एक तरफ वह अपनी मर्दानगी पर लगे सवालों को लेकर झिझक महसूस करता था, लेकिन अब धीरे-धीरे वह रोज़ी के लिए कुछ खास महसूस करने लगा था।

घर में सभी कल सूरज के जन्मदिन की तैयारियों के बारे में बात कर रहे थे। सुगना, हमेशा की तरह, सूरज के लिए तरह-तरह के व्यंजन बनाने में व्यस्त थी, और पूरा परिवार बड़े उत्साह और आनंद के साथ इसका इंतजार कर रहा था। सूरज परिवार के लिए सिर्फ एक बेटा ही नहीं, बल्कि घर की खुशी और ऊर्जा का केंद्र भी था।

कल शाम को, घर में एक पारिवारिक पार्टी होने वाली थी। कुछ मेहमान भी इसमें शरीक होने वाले थे। पूरे घर में खुशियों की हलचल थी—हँसी, बातचीत और व्यंजनों की खुशबू से माहौल भर गया था। सूरज अपने कमरे में बैठा थोड़ी-सी घबराहट और उत्साह के मिश्रित भाव के साथ सोच रहा था कि कल का दिन कितना खास होने वाला है।

डिनर के बाद हॉल में हल्की पीली रोशनी फैली हुई थी। टीवी बंद था, मगर घर में अपनापन और हँसी तैर रही थी। सूरज सोफ़े पर सबके बीच बैठा था। उसका जादुई अंगूठा कपड़े के पीछे हल्दी के लेप में लिपटा हुआ, जैसे चुपचाप अपनी ऊर्जा वापस बुला रहा हो। सूरज न जाने क्या सोच कर मुस्कुरा रहा था।

मालती की नज़र सीधे सूरज पर टिक गई।

मालती:

“सूरज, क्या हुआ क्यों मुस्कुरा रहे हो”

सूरज:

(हल्की हँसी के साथ)

“कुछ नहीं दीदी, बस थकान है।”

मालती ने भौंहें उठाईं।

मालती:

“थकान से आदमी मुस्कुराता है क्या?”

सामने कुर्सी पर बैठे विकास (जो सभी युवाओं का मौसा था ) ने गला साफ़ किया और मुस्कुराते हुए बोला—

“अरे मालती, छोड़ो उसे। ये उम्र ही ऐसी होती है वैसे भी कल उसका जन्मदिन है कुछ सपने संजो रहा होगा।”

सूरज ने राहत की साँस ली, मगर वो ज़्यादा देर की नहीं थी।

“ आप ही बताइए… क्या आपको भी नहीं लग रहा कि इसमें कुछ चल रहा है?” मालती ने राजू की तरफ देखते हुए कहा। राजू और मालती के बीच खिचड़ी पक रही थी अपितु यह कहा जाए कि पक चुकी थी पर इसका अंदाजा परिवार में किसी को नहीं था।

राजू:

(हँसते हुए)

“लग तो रहा है। आँखों में चमक है और होठों पर मुस्कुराहट। ये सब बिना वजह नहीं आता।”

सूरज झेंप गया।

सूरज:

“राजू भैया, आप भी दीदी की तरफ़ हो गए।”

राजू:

“मैं किसी की तरफ़ नहीं हूँ , बस ज़िंदगी की तरफ़ हूँ। जब दिल किसी को पसंद करने लगे, तो आदमी थोड़ा बदल ही जाता है।”

हॉल में हल्की हँसी गूंज गई।

छोटा भाई राजा चुटकी ले बैठा—

“मतलब पक्का कुछ है!”

मालती ने मौका नहीं छोड़ा।

“तो नाम तो बता दो कम से कम।”

सूरज कुछ पल चुप रहा। फिर बोला—

सूरज:

“अभी नाम लेने का वक्त नहीं आया है।”

सूरज ने रीमा की तरफ देखा। रीमा लाली की पुत्री थी और वह सूरज को मन ही मनपसंद करती थी यद्यपि सूरज उस उम्र में थोड़ा छोटा था परंतु फिर भी वह सूरज को चाहती थी।

सुगना रसोई से आवाज़ देती हैं—

“अब बस करो तुम लोग। कल उसका जन्मदिन है। उसे तंग मत करो।

मालती मुस्कुरा कर पीछे हट गई।

अब हाई कमान का आर्डर आ चुका है कोई सूरज भैया को छेड़ेगा नहीं। छोटी मधु ने खड़े होकर सबको नसीहत दी और सबको अंताक्षरी खेलने के लिए आमंत्रित कर लिया।

सूरज ने हल्की मुस्कान के साथ अपने लिपटे हुए अंगूठे को देखा उसे बार-बार ही महसूस हो रहा था कि कल उसकी दिनचर्या में इस अंगूठे का कितना अहम रोल था। आज पेंट पहनते समय उसे काफी दिक्कत हुई थी और कल तो दिन भर उसे इस दर्द के साथ ही रहना था।

रात के 11:00 बज चुके थे। सोनी सुगना भी बच्चों के साथ बातें कर रहे थे। कुछ लोग अभी भी उत्साह में थे, कुछ जम्हाईया ले रहे थे पर इस सजी हुई महफ़िल से हटने को कोई तैयार नहीं था। और जाए भी कैसे? सबका प्रिय सूरज, बस एक घंटे बाद, अपने जन्मदिन की शुरुआत करने वाला था। सभी उसे “हैप्पी बर्थडे” कहने का इंतजार कर रहे थे।

बातचीत कभी सोनी और विकास की अमेरिका यात्रा पर जाती, युवाओं के अमेरिका को लेकर उत्साह स्वाभाविक रूप से था। कभी सुगना और लाली सलेमपुर और सीतापुर की पुरानी यादों में खो जाती, और कभी बच्चे सरयू सिंह की अकाल मृत्यु के बारे में जानना चाहते। पर हमेशा की तरह, सुगना ऐसे सवालों को टाल देती। कभी-कभी वह दुखी भी हो जाती और सभी को यह एहसास दिलाती कि कुछ बातें ना पूछना ही बेहतर है।

लोग जितना सूरज से प्यार करते थे, उससे ज्यादा सुगना का सम्मान। यद्यपि यह हवेली सोनी और विकास की थी, लेकिन घर में सबसे अधिक सम्मान सुगना का ही था। वह घर की मालकिन तो न थी पर मुखिया अवश्य थी। सुगना की बात सभी के लिए मान्य थी, और क्यों नहीं—वह सबका उतना ही ख्याल रखती थी, चाहे वह सूरज हो या परिवार का सबसे दुष्ट बेटा, राजा। राजा भी जानता था कि वह गलत है, पर सुगना के प्यार की वजह से वह भी सहज और शांत महसूस करता था।

महफ़िल में हँसी, यादें और बातचीत का सिलसिला चलता रहा। हर कोई, चाहे बड़ा हो या छोटा, अपने अपने अनुभवों और भावनाओं में खोया था। लेकिन सबके दिलों में एक बात तय थी सूरज सबका प्यारा था और अपनी मां सुगना की जान था।

की सुइयाँ धीरे-धीरे बारह बजने को तैयार थीं। कुछ सेकंड पहले ही बच्चों का उत्साह शिखर पर था। सभी उठकर एक साथ “10… 9… 8… 7…” चिल्लाने लगे। आवाज़ धीरे-धीरे तेज़ होती गई और आखिरकार

“हैप्पी बर्थडे टू यू,

हैप्पी बर्थडे टू यू”

की गूंज के साथ सभी ने सूरज को बारी-बारी से गले लगाया।

छोटी मधु ने बड़े भाई के पैर छुए। छोटा राजा भागकर फ्रिज से बड़ा-सा केक निकाल लाया और थोड़ी ही देर में सूरज ने उस खूबसूरत केक को काटा। हमेशा की तरह केक पर पहला हक उसकी माँ का था। सुगना ने बेहद प्यार से सूरज के माथे को चूमा। दूसरा केक उसने अपनी सोनी मौसी को खिलाया और फिर धीरे-धीरे सभी बड़ों को बारी-बारी से केक खिलाया। सबसे आख़िर में उसने अपनी छोटी बहन मधु को केक खिलाया।

नियति मुस्कुराते हुए सूरज और मधु दोनों को साथ देख रही थी। उन्हें साथ देखकर नियति एक बार फिर विधाता को याद कर रही थी, जिन्होंने उनके भाग्य में न जाने क्यों वह लिख दिया था, जो निश्चित ही एक पाप था।

बहरहाल, धीरे-धीरे सूरज के जन्मदिन का यह छोटा-सा सेलिब्रेशन समाप्त हुआ और सब अपने-अपने कमरों में जाने लगे। सुगना, सोनी और सूरज अब सूरज के कमरे में आ चुके थे। सुगना और सोनी ने सूरज को बहुत प्यार किया और उसे ढेर सारी शुभकामनाएँ दीं। सुगना के ज़ेहन में अब भी सूरज की शारीरिक कमी का ख्याल घूम जाता था, और वह दुखी हो जाती थीं। आज सूरज 21 वर्ष का हो चुका था।

कुछ देर और बातचीत करने के बाद सुगना और सोनी दोनों ने एक बार फिर सूरज को शुभकामनाएँ दीं, उसके माथे पर हाथ फेरा और अपने-अपने कमरों की ओर चल पड़ीं।

अभी सुगना और सोनी हाल में ही पहुँची थीं कि सूरज ने अंदर अपने लिहाफ़ को ऊपर खींचने की कोशिश की और गलती से अपने चोटिल अंगूठे का सहारा ले लिया। सूरज के मुँह से एक हल्की-सी कराह निकल गई।

सुगना और सोनी वापस सूरज के कमरे में आ गईं। सूरज उनके आने का कारण समझ गया। उसने गर्दन बाहर निकालकर कहा,

“अरे, कोई बात नहीं। अंगूठा लिहाफ़ से टकरा गया था।”

सोनी को अचानक अपनी उस दवा की याद आ गई, जो सूरज के अंगूठे पर लगानी थी। उसने कहा,

“दीदी, आप जाकर सो जाइए। मैं सूरज के अंगूठे पर वह दवा लगा दूँगी। मुझे विश्वास है इससे दर्द में ज़रूर राहत मिलेगी।”

सुगना ने भी साथ रुकने की बात कही, तो सोनी बोली,

“दीदी, आप पूरी तरह थक चुकी हैं। रसोई में इतने पकवान बनाना कोई आसान काम नहीं होता। आपको आराम करना चाहिए, दवा मैं लगा दूँगी।”

सोनी ने सुगना के कंधे थामकर उसे धीरे-धीरे उसके कमरे की ओर भेज दिया। सुगना और सोनी का आपसी स्नेह इस उम्र तक भी बना हुआ था।

कुछ देर बाद सोनी दवा लेकर सूरज के कमरे में पहुँची।

नियति, सोनी और सूरज को एक साथ देखकर मुस्कुरा रही थी। सोनी ने अपने शुरुआती दिनों में नर्स के रूप में काम किया था, इसलिए उसे चिकित्सा का कुछ ज्ञान था। आज नर्स सोनी, डॉक्टर बनकर सूरज के अंगूठे पर मलहम लगाने आई थी।

जैसे ही सोनी ने सूरज के अंगूठे की पट्टी हटाई, चूने और हल्दी का सूखा लेप भी पट्टी के साथ निकल आया। हल्दी का थोड़ा-सा अंश अब भी अंगूठे पर लगा था। सोनी ने अपनी कोमल उँगलियों से उसे धीरे-धीरे साफ़ किया।

सूरज को एक अजीब-सी अनुभूति हुई, जैसे अंगूठे में हल्का-सा करंट दौड़ गया हो। सोनी ने अपनी उँगलियों पर मलहम निकाला और सूरज के अंगूठे पर लगा दिया। जैसे ही उसने अंगूठे को अपने अंगूठे और तर्जनी के बीच लेकर हल्के से सहलाया, सूरज के पूरे शरीर में फिर एक सिहरन-सी दौड़ गई।

अचानक सूरज ने महसूस किया कि उसके लिंग में हलचल हो रही।

लिंग की रक्त कोशिकाओ में रक्त प्रवाह अचानक तेज हो गया था सूरज के लिंग में अचानक तनाव आना शुरू हो गया था सूरज आश्चर्यचकित था। जैसे-जैसे सोनी सूरज के अंगूठे को सहलाए जा रही थी वैसे वैसे सूरज के लिंग का तनाव बढ़ता जा रहा था यह तनाव सुखद था। लिंग में तनाव आना वैसे भी सुखद अनुभूति देता है। सूरज ने सोनी से नजर बचाकर अपना दूसरा हाथ लिहाफ के अंदर ले जाकर इस आश्चर्य को महसूस करना चाहा।

सूरज का लंड तनकर खड़ा हो चुका था। सूरज के लिंग में आशातीत वृद्धि हुई थी और शायद इसी कारण सूरज को अपना हाथ लिहाफ के अंदर ले जाना पड़ा था।


सोनी ने सूरज के हाथों की हलचल उसकी जांघों के बीच देख ली लिहाफ सूरज की इस हरकत को छुपा पाने में नाकाम रहा था।

सोने की उंगलियां रुक गई और सूरज ने सोने की आंखों को अपनी कमर की तरफ देखते हुए देख लिया।

सूरज झेंप गया परंतु उसने स्थिति संभाली और बोला…मौसी यह कौन सा मलहम है

सोनी ने अपने दूसरे हाथ से मलहम का डिब्बा सूरज की ओर दिखाई परंतु अब भी वह चिंतित थी बचपन में सूरज के अंगूठे को सहलाए जाने से होने वाली प्रतिक्रिया उसे याद आ रही थी हे भगवान …कहीं वह सच तो नहीं। सोनी का कलेजा धक-धक करने लगा उसे एक अनजाना डर सताने लगा उसके हाथ रुक गए सूरज ने फिर एक बार उसका ध्यान अपनी और खींचा।

“मौसी यह अंगूठे के पीछे ज्यादा मलहम लगा है इसे फैला दीजिए।”

सोनी ने अनमने ढंग से उसे मलहम को चारों तरफ बराबरी से लगा दिया और सूरज के लिंग का तनाव और आकार को और भी ज्यादा बढ़ा दिया।

लिंग के तनाव का असर सूरज के चेहरे पर भी दिखाई पड़ने लगा उसका मासूम चेहरा वासना से तमतमा उठा था। सोनी को पक्का यकीन हो गया की निश्चित ही बचपन की वह घटना आज दोबारा रिपीट हो चुकी है उसने सूरज का हाथ छोड़ दिया और हड़बड़ी में वहां से उठते हुए बोली..

अब सो जाओ एक बार फिर हैप्पी बर्थडे टू यू

सोनी ने धड़कते हुए कलेजे के बावजूद अपने होठों पर मुस्कुराहट लाई और सूरज के कमरे से बाहर निकल गई जाते समय उसने दरवाजा बंद कर दिया।

सोनी को बचपन की बातें पूरी तरह याद आ चुकी थी इस तनाव का निदान क्या था उसे यह भी याद आ चुका था। क्या उसे अपने होंठ सूरज के…. हे भगवान नहीं नहीं ऐसा नहीं हो सकता। जितना ही वह इस बारे में सोचती उतना ही उसका दिल घबराने लगता। अपने मन में घबराहट और तेज धड़कनों के साथ सोनी बिस्तर पर आ चुकी थी पर दिमाग में वही बातें घूम रही थी।

उधर अपनी मौसी सोनी के जाने के बाद सूरज बिस्तर पर से उठा उसने दरवाजा लॉक किया और वापस बिस्तर पर आकर अपने लंड को आजाद कर दिया। लंड अंडरवियर से बाहर आते ही उछलकर खड़ा हो गया।

सूरज अपने खड़े लंड को देखकरआश्चर्यचकित था। इतना सुंदर लंड तो उसने पोर्न वेबसाइट पर भी नहीं देखा था। लगभग 2 इंच व्यास और आठ इंच लंबी कद काठी का वह लंड एक खूबसूरत सुपड़ा लिए हुए था। जो उसकी खूबसूरती को और भी बढ़ा रहा था। लंड पर तनीहुई उभरी नसें यह साबित कर रही थी की यह न सिर्फ कसरत्ती है अपितु कसरत करने के लिए ही बना है।

सूरज ने अपने हाथ से उसे सहलाने की कोशिश की यह अनुभूति अनुपम थी विशिष्ट थी। आज पहली बार अपने जीवन में वह अपने खड़े लंड को सहला रहा था। सूरज आनंद के सागर में गोते लगाने लगा। किसी युवा द्वारा अपने लंड को सहलाना स्वतः ही उत्तेजना और कल्पनाओं को जन्म देता है।

सूरज को अपने लंड को सहलाने बेहद मजा आ रहा था और हो भी क्यों ना सूरज की कल्पनाएं परवान चढ़ने लगी उसे रोजी का ध्यान आया…

उसने अपना मोबाइल उठाया ..

रोजी का मैसेज मोबाइल पर आया हुआ था

हैप्पी बर्थडे माय लव…

सूरज ने उसे थैंक यू नोट भेजा। वह चाहता तो था कि अपने खड़े लंड को एक बार रोजी को दिखाएं और अपनी मर्दानगी साबित करे पर यह संभव नहीं था। फिर भी उसने अपने मोबाइल से अपने खड़े लंड की फोटो ली और उसे अपने मोबाइल में छुपा लिया।

रोजी सुबह-सुबह के लिए रोज पार्क में जाती थी वह पार्क सूरज की हवेली से ज्यादा दूर नहीं था अचानक सूरज के दिमाग में कुछ आया और उसने रोजी को एक बार फिर मैसेज किया।

कल जॉगिंग के लिए जाओगी क्या?

उधर रोजी अब तक सो चुकी थी जवाब आने की उम्मीद नहीं थी सूरज ने मोबाइल किनारे रख दिया और अपनी जांघों के बीच खिले हुए फूल को अपनी हथेली से पड़कर एक बार फिर निहारने लगा।

सूरज अपने लंड को बड़े प्रेम से सहला रहा था कभी वह उसके ऊपर उभर रही सांप जैसी नसों को छूता कभी उसके सुपाड़े के पीछे उस अति संवेदनशील जगहों को। हर बार उसके शरीर में एक सुखद अनुभूति होती जैसे-जैसे सूरज अपने लंड को सहलाता गया वासना अपने आयाम बढ़ाती गई वह बार-बार रोजी को नग्न और नग्न करने की कोशिश करता परंतु यह कठिन था दरअसल इसके पूर्व सूरज ने कभी भी अपनी वासना को फलीभूत नहीं किया था।


वैसे भी जब लंड में तनाव ही ना हो तो कामुक कल्पनाओं का क्या फायदा। पर आज स्थितियां अलग थीं

सूरज ने अपनी वासना के तूफान को और हवा दी लंड सूरज की हथेलियों द्वारा मसला जा रहा था…उत्तेजना ने उत्कर्ष प्राप्त किया और सूरज के लंड से वीर्य की धार फूट पड़ी आह…..मौ…सी………..

सूरज का लंड लगातार वीर्य उगलता रहा और सूरज के लिहाफ पर उसके छींटे गिरते रहे…

सूरज के लिए हस्तमैथुन का यह पहला अनुभव था जितना सुख उसने आज महसूस किया था यह अनोखा था अद्भुत था सूरज को उसके जन्मदिन का उपहार मिल चुका था…

सूरज कुछ देर उसी स्थिति में रहा अपने लंड का यह रूप उसके लिए अनोखा था वह मर्दानगी से भरा हुआ था। सूरज का स्वाभिमान आज अपने चरम पर था अब तक उसने अपने लंड में तनाव न आने को लेकर जितनी चिंता की थी एक पल में ही वह सब खुशियों में बदल गया था।

सूरज ने अपने लंड की तरफ देखा वह अब भी वैसे ही तना हुआ था। सूरज ने अब तक जो पढ़ाई की थी या जो समझा था उसके अनुसार वीर्य स्खलन के बाद लंड को वापस सामान्य स्थिति में आ जाना चाहिए था परंतु लंड का तनाव यथावत था।

सूरज ने उसे वापस अंडरवियर में कैद करने की कोशिश की परंतु यह कठिन था। सूरज को यकीन ही नहीं हो रहा था कि ऐसा कैसे हो सकता है उसने इधर-उधर ध्यान भटकाया पर स्थिति जस की तस थी। लंड का तनाव कम होने का नाम ही नहीं ले रहा था। सूरज तने हुए लंड के साथ सूरज अब असहज महसूस करने लगा।

पर इन खुशियों को साझा करने वाला कोई भी ना था उसे अचानक रोजी का ध्यान आया। उसने मोबाइल उठाया पर रोजी का कोई मैसेज नहीं था।

सूरज ने एक बार फिर अपने इतने हुए लंड को अपना हाथों से सहलाना शुरू किया और कुछ ही देर की मेहनत के पश्चात एक बार फिर वीर्य स्खलन करने में कामयाब रहा परंतु जिस उद्देश्य के लिए यह किया गया था उसमें आनंद कम और लिंग का तनाव घटना प्राथमिकता थी। पर दुर्भाग्य दोबारा वीर्य स्खलन होने के बावजूद लिंग का तनाव कम न हुआ।

सूरज पूरी तरह थक चुका था लगातार दो बार हस्तमैथुन कर उसका शरीर शिथिल पड़ चुका था परंतु लिंग वैसे ही तनाव हुआ था सूरज की धड़कनें बढ़ी हुई थी उसने लिहाफ अपने बदन पर डाला और अपना ध्यान उसे तने हुए लिंग से हटाने की कोशिश की पर शायद यह संभव नहीं था जब लिंग में तनाव चरम पर होता है मनुष्य को और कुछ नहीं सोचता है आप अपना ध्यान चाह कर भी नहीं हटा सकते यही स्थिति सूरज की थी रात के दो बज चुके थे और सूरज अब भी अपनी खुशियों से जूझ रहा था। थकावट से कभी उसकी आंखें नींद से बोझिल होती परंतु उसके लंड का तनाव उसे सोने नहीं दे रहा था।

सुबह के 5:00 बज चुके थे अचानक मोबाइल पर ट्रिंग की आवाज हुई। सूरज ने मोबाइल उठाया यह रोजी का ही मैसेज था


हां आ रही हूं क्यों पूछ रहे हो

मैं भी आ रहा हूं सूरज ने रिप्लाई किया

अरे वह तो बर्थडे बॉय से सुबह-सुबह ही मुलाकात होगी चलो मैं तैयार होकर आता हूं सी यू

रोजी का मैसेज स्पष्ट था दोबारा रिप्लाई करने की जरूरत नहीं थी सूरज भी बिस्तर से उठा उसकी आंखें नींद पूरी नहीं होने की वजह से लाल थी पर लंड अभी उसी तरह तना हुआ था।

सूरज ने बड़ी मुश्किल से अपनी नित्य कर्म निपटा ए तने हुए लंड की वजह से उसे कई दिक्कतों का सामना करना पड़ रहा है वह तैयार हुआ बड़ी मुश्किल से लैंड को अपने पेट में कैद करने की कोशिश की पर उसका आकार और तनाव छुपाने लायक नहीं था सूरज ने सबसे ढीली डाली शर्ट पहनी और उसके ऊपर एक आवरण सा दे दिया।

एक तरफ सूरज के मन में खुशी थी कि उसके लंड में आज पहली बार तनाव आया था पर लगातार तनाव ने उसके मन में चिंता की लकीरें डाल दी थी।

सूरज ने अपनी मोटरसाइकिल उठाई और कुछ ही देर में रोजी के पास पार्क में पहुंच गया रोजी उसका इंतजार कर रही थी रोजी ने उसे एक खूबसूरत सा फूल दिया और बोला


Happy b day to you ..हमेशा इस फूल की तरह ही हंसते मुस्कुराते रहना

सूरज ने अपनी बाहें खोल दी और रोजी सूरज से सटती चली गई। सूरज की मजबूत बाहों ने रोजी को अपने आगोश में ले लिया दोनों प्रेमिका एक दूसरे से बेहद करीब आ गए। सूरज ने अपने हाथ से रोजी की कमर को सहारा देकर अपनी ओर खींचा और पहली बार रोजी ने अपने नाभि के नीचे एक तने और कठोर अंग को महसूस किया यह निश्चित ही सूरज का तनाव हुआ था। रोजी सहम गई उसने सर उठाकर सूरज के चेहरे की तरफ देखा सूरज ने पहले तो उसके माथे को चुम्मा और धीरे-धीरे उसके होंठ रोजी के होठों से सट गए।


चुंबनों की प्रगाढ़ता बढ़ती गई और रोजी की मन में कुछ हलचल होने लगी। अचानक रोजी ने अपना हाथ नीचे किया और सूरज के लंड में आए इस तनाव को महसूस करने की कोशिश की। रोजी की कोमल हथेलियां सूरज के लंड को पेट के ऊपर से ही महसूस कर रही थी। लंड का आकार और तनाव दोनों ही रोजी को आश्चर्यचकित कर रहा था। वह एक तरफ शर्मा भी रही थी दूसरी तरफ इस तनाव को देखकर खुश भी हो रही थी। सूरज की मर्दानगी को लेकर जो प्रश्न उसके अंतर्मन में पिछले कुछ दिनों से उठ रहे थे वह सब अचानक ही शांत हो गए थे। सूरज एक पूर्ण मर्द की भांति उसके समक्ष उपस्थित था रोजी ने सूरज के चुंबनों का प्रति उत्तर और भी आत्मीयता से देना शुरू कर दिया तथा अपनी हथेली से उसके लंड को दबाकर और सहलाकर उसका जायजा लेने की कोशिश की सूरज ने उसका हाथ पकड़ लिया और उससे अलग होते हुए बोला

अरे यह पब्लिक प्लेस है कंट्रोल करो…

दोनों मुस्कुराने लगे सूरज ने अपने शर्ट ठीक की और दोनों पार्क में तरह-तरह की बातें करते हुए घूमने लगे परंतु आज खुशियों का दिन था सूरज के लिंग के तनाव ने न सिर्फ सूरज को शहीद कर दिया था बल्कि अब रोगी के मन में भी तंगी फूटने लगी थी सूरज जैसे मर्द को अपनी जिंदगी में पाकर वह बेहद प्रसन्न थी बेहद खुश थी…

आज कॉलेज आओगे क्या ? रोजी ने पूछा

नहीं आज तो मुश्किल है आज बर्थडे मना लेते हैं


सूरज ने मुस्कुराते हुए जवाब दिया। सुबह के 6:30 बज चुके थे जॉगिंग का टाइम पूरा हो चुका था अब बिछड़ने का वक्त था। बिछड़ते वक़्त सूरज और रोजी एक बार फिर आलिंगन बद्ध हुए। सूरज मैं एक बार फिर रोजी को चूमने की कोशिश की रोजी ने उसे निराश ना किया इस बार उसने फिर सूरज के लंड पर हाथ लगाने की कोशिश की और उसके आश्चर्य का ठिकाना ना रहा लंड पूरी तरह तना हुआ था…

रोजी को यह यकीन ही नहीं हो रहा था कि यह तुरंत ही कैसे खड़ा हो गया था.. वह तुरंत सूरत से अलग हुई और बोली..

आज तो छोटे मियां पूरे जोश में दिखाई पड़ रहे हैं उसकी आंखों ने नीचे झुक कर सूरज को उसकी बात पूरी तरह समझा दी.. सूरज मुस्कुरा कर रह गया.

उसे सूरज की स्थिति का ज्ञान नहीं था यह तनाव अब सूरज के मानसिक तनाव का कारण बन चुका था।

सूरज वापस घर आ चुका था अभी भी घर में सब सो ही रहे थे सिर्फ सुगना और सोनी जगे हुए थे और हवेली के खूबसूरत हाल में चाय पी रहे थे। सूरज को अंदर आते देख सुगना खुश हो गई। सुगना ने सूरज को अपने पास बुलाया और बगल में बैठा लिया। सूरज सकुचा रहा था उसने अपनी शर्ट ठीक की बने हुए लंड को यथासंभव छुपाने की कोशिश की पर सामने बैठी अपनी मौसी से छुपा पाने में नाकाम रहा। सोनी की यह बेहद असहज लगा ऐसा लग रहा था जैसे सूरज में अपनी पेट में कोई बड़ा खीरा छुपाया हुआ हो…

आ बैठ …अरे इतनी सुबह-सुबह कहां चले गए थे…

सुगना ने सूरज के माथे पर प्यार से हाथ फिरते हुए कहा

कुछ नहीं थोड़ा टहलने का मन कर रहा था बाहर ही घूम रहा था।

यह तेरी आंखें लाल क्यों है नींद नहीं आई क्या? सुगना ने सूरज की आंखों में लाल डोरे देखते हुए कहा…

सूरत हड़बड़ा गया यह लाल डोरे कुछ तो अनिद्रा की वजह से और कुछ सूरज के तने हुए लंड की वजह से भी..

कुछ नहीं मां सब ठीक है मुझे भी चाय पीनी है सूरज ने बात टालते हुए कहा

ठीक है मैं लेकर आती हूं।

सुगना रसोई में चाय लेने चली गई इधर सोनी ने सूरज को असहज देखकर अपने सोफे से उठकर सूरज के पास आ गई और उसकी हाथों को अपने हथेली में लेकर सहलाते हुए बोली।

क्या हुआ बर्थडे बॉय आज टेंशन में क्यों है?

कुछ नहीं मौसी सब ठीक है बस थोड़ा नींद डिस्टर्ब हुई थी..

सूरज ने बात टालने की कोशिश की..


क्यों क्या हो गया? …सोनी ने सूरज की आंखों में आंखें डालते हुए पूछा।

सूरज ने कुछ नहीं कहा अपनी गर्दन झुका ली


मुझे कुछ नहीं बोलना..

तभी सोनी ने सूरज के टूटे हुए अंगूठे को अपनी कोमल उंगलियों से सहलाते हुए पूछा

और अंगूठे का दर्द कैसा है?

सोने की अंगूठा सहलाए जाने से सूरज के लंड में एक और तेज करंट दौड़ी और उसके लंड का तनाव और आकार और भी बढ़ गया…

सूरज के मुंह से कराह निकल गई…

सूरज ने अपना अंगूठा सोनी के हाथ से खींच लिया और बोला

मौसी अब बस..

यह कराह अंगूठे के दर्द की वजह से नहीं थी अपितु लंड में आए बेहद तनाव की वजह से थी।

सूरज ने अपना हाथ नीचे किया और तनाव से फट रहे लंड को अपने पैंट में और जगह देने की कोशिश की।

सूरज के शर्ट का आवरण हटते ही सोनी ने सूरज के पेट के अंदर आए उसे अप्रत्याशित उभार को देख लिया जो कतई सामान्य नहीं था। उसका आकार यह निश्चित तौर पर बता रहा था कि यह सूरज का लिंग है। लिंग… पर इतना बड़ा? सूरज तो अभी नया-नया युवा था। यह उभार अप्रत्याशित था सोनी घबरा गई। सोने के चेहरे पर हवाईया उड़ने लगी।

इतनी सुबह-सुबह अपनी मां और मौसी के पास बैठे सूरज के लंड में इतना तनाव आना अप्रत्याशित था।

अचानक उसे बचपन की वह घटना पूरी तरह याद आ गई जब वह बचपन में सूरज के अंगूठे को मजाक मजाक में सहलाया करती थी और…. फिर …. जैसे-जैसे सोनी को वह घटना याद आती गई सोने के चेहरे पर शिकन आते गई

हे भगवान मुझसे यह क्या हो गया…

सूरज अब और असहज हो चुका था वह अपने रूम में जाने के लिए उठा। तभी सुगना चाय लेकर आ चुकी थी

अरे बैठ पहले चाय पी ले.. फिर जाना..

सूरज से अपने लंड का तनाव और सहा नहीं जा रहा था फिर भी उसने अपनी मां की बात मान ली और बड़ी मुश्किल से बैठकर अपने बने हुए लंड को छुपाते हुए जल्दी जल्दी चाय पीने लगा।

उधर सोनी का कलेजा धक-धक कर रहा था उसे अब यकीन हो चला था कि सूरज के लिंग में आया हुआ तनाव निश्चित ही उसके अंगूठे सहलाए जाने के कारण हुआ था।

सोनी मन ही मन सोच रही थी पर तब तो सूरज एक बालक था अब तो तने हुए लिंग को शिथिल करने का उपाय सर्वविदित था। क्या सूरज को हस्तमैथुन के बारे में नहीं मालूम था? क्या सूरज ने इस तनाव को कम करने के लिए हस्तमैथुन नहीं किया होगा…

प्रश्न जटिल था सूरज की असहज स्थिति देखकर सोनी स्वयं परेशान हो गई थी इस प्रश्न का उत्तर जानना जरूरी था। सूरज के लिंग का तनाव कम करने का उपाय सोनी को बखूबी याद था पर ……

हे भगवान…. यह असंभव था….

पुत्र समान जवान सूरज का लंड ……चूमना……सोनी की रूह कांप उठी…अनिष्ट की आशंका से सोनी के माथे पर पसीने की बूंद चालक आई…थी…



अगला एपिसोड डायरेक्ट मैसेज पर उपलब्ध होगा..

Wonderful update. Waiting for next
 

Lovely Anand

Love is life
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अच्छा लगा पुराने और कई नए पाठकों को देखकर जुड़े रहिए
 

rajeev13

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अच्छा लगा पुराने और कई नए पाठकों को देखकर जुड़े रहिए
ये सब सुगना पर आई दूसरी जवानी का कमाल है, पाठकों को जहां मां-बेटे के व्यभिचार की कहानी दिखती है वहां बढ़ चढ़ कर भाग लेते है और उस पर आपकी लेखन शैली का जादू शायद यही वजह है पुराने पाठक वापिस लौट रहे है !
 

vedinician

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भाग 157

“हैप्पी बर्थडे टू यू, सूरज!”

सूरज खुशी से खिल उठा। । नीली जींस और सफेद टी-शर्ट सचमुच बहुत खूबसूरत थी। उसने सोनी के हाथ चूमे, फिर झुककर अपने बाएँ हाथ से उनके पैर छुए और खुशी-खुशी बोला,

“थैंक यू, मौसी।पर मौसी मेरा जन्मदिन तो कल है।”

“कोई बात नहीं आज यह रख ले कल एक और खूबसूरत उपहार दूंगी”

एक और खूबसूरत उपहार सोनी ने यह बात बिना सोचे समझे कही थी पर नियति ने उसके शब्द पकड़ लिए और उसके चेहरे पर एक कामुक मुस्कान दौड़ गई….

कुछ होने वाला था सूरज की किस्मत पलटने वाली थी…उसकी मायूसी खुशी में बदलने वाली थी…


अब आगे..

युवाओं में जन्मदिन का उत्साह देखने लायक होता है। सूरज भी इससे अछूता नहीं था। अंगूठे की चोट की पीड़ा को भुलाकर वह सोनी द्वारा लाए गए कपड़ों को उत्साह से अपने बदन पर पहनकर देखने लगा। अंगूठे की पीड़ा इसमें आड़े आ रही थी पर उत्साह कायम था। कपड़े न केवल बेहद खूबसूरत थे, बल्कि उनकी चमक से अंदाज़ा लगाया जा सकता था कि वे महंगे भी होंगे। सोनी का यह स्नेह सूरज के चेहरे पर मुस्कान ले आया। सच तो यह था कि केवल सोनी ही नहीं, घर का हर सदस्य सूरज को बेहद प्यार करता था। वह घर का सबसे होनहार बेटा था और कुछ ही समय में डॉक्टर बनने वाला था। डॉक्टर बनना पूरे परिवार के लिए सिर्फ एक उपलब्धि नहीं, बल्कि गर्व और सम्मान की बात थी।

उधर शाहिद जिसने सूरज पर हाथ उठाया था पूरे परिवार के लिए अब एक तरह का विलेन बन चुका था। लेकिन राजा, जो उम्र में सूरज से छोटा जरूर था, उसने शाहिद से बदला लेने की ठान ली थी। उसका बदमाशी में अंदाज़ ऐसा था जैसे वह खुद गैंग ऑफ़ वासेपुर के नवाजुद्दीन सिद्दीकी की तरह किसी बड़े खेल का हिस्सा हो।

इस बीच, सूरज अपने आने वाले कल अपने जन्म दिन के बारे में सोच रहा था। कल उसे समय निकालकर रोज़ी से भी मिलना था। एक तरफ वह अपनी मर्दानगी पर लगे सवालों को लेकर झिझक महसूस करता था, लेकिन अब धीरे-धीरे वह रोज़ी के लिए कुछ खास महसूस करने लगा था।

घर में सभी कल सूरज के जन्मदिन की तैयारियों के बारे में बात कर रहे थे। सुगना, हमेशा की तरह, सूरज के लिए तरह-तरह के व्यंजन बनाने में व्यस्त थी, और पूरा परिवार बड़े उत्साह और आनंद के साथ इसका इंतजार कर रहा था। सूरज परिवार के लिए सिर्फ एक बेटा ही नहीं, बल्कि घर की खुशी और ऊर्जा का केंद्र भी था।

कल शाम को, घर में एक पारिवारिक पार्टी होने वाली थी। कुछ मेहमान भी इसमें शरीक होने वाले थे। पूरे घर में खुशियों की हलचल थी—हँसी, बातचीत और व्यंजनों की खुशबू से माहौल भर गया था। सूरज अपने कमरे में बैठा थोड़ी-सी घबराहट और उत्साह के मिश्रित भाव के साथ सोच रहा था कि कल का दिन कितना खास होने वाला है।

डिनर के बाद हॉल में हल्की पीली रोशनी फैली हुई थी। टीवी बंद था, मगर घर में अपनापन और हँसी तैर रही थी। सूरज सोफ़े पर सबके बीच बैठा था। उसका जादुई अंगूठा कपड़े के पीछे हल्दी के लेप में लिपटा हुआ, जैसे चुपचाप अपनी ऊर्जा वापस बुला रहा हो। सूरज न जाने क्या सोच कर मुस्कुरा रहा था।

मालती की नज़र सीधे सूरज पर टिक गई।

मालती:

“सूरज, क्या हुआ क्यों मुस्कुरा रहे हो”

सूरज:

(हल्की हँसी के साथ)

“कुछ नहीं दीदी, बस थकान है।”

मालती ने भौंहें उठाईं।

मालती:

“थकान से आदमी मुस्कुराता है क्या?”

सामने कुर्सी पर बैठे विकास (जो सभी युवाओं का मौसा था ) ने गला साफ़ किया और मुस्कुराते हुए बोला—

“अरे मालती, छोड़ो उसे। ये उम्र ही ऐसी होती है वैसे भी कल उसका जन्मदिन है कुछ सपने संजो रहा होगा।”

सूरज ने राहत की साँस ली, मगर वो ज़्यादा देर की नहीं थी।

“ आप ही बताइए… क्या आपको भी नहीं लग रहा कि इसमें कुछ चल रहा है?” मालती ने राजू की तरफ देखते हुए कहा। राजू और मालती के बीच खिचड़ी पक रही थी अपितु यह कहा जाए कि पक चुकी थी पर इसका अंदाजा परिवार में किसी को नहीं था।

राजू:

(हँसते हुए)

“लग तो रहा है। आँखों में चमक है और होठों पर मुस्कुराहट। ये सब बिना वजह नहीं आता।”

सूरज झेंप गया।

सूरज:

“राजू भैया, आप भी दीदी की तरफ़ हो गए।”

राजू:

“मैं किसी की तरफ़ नहीं हूँ , बस ज़िंदगी की तरफ़ हूँ। जब दिल किसी को पसंद करने लगे, तो आदमी थोड़ा बदल ही जाता है।”

हॉल में हल्की हँसी गूंज गई।

छोटा भाई राजा चुटकी ले बैठा—

“मतलब पक्का कुछ है!”

मालती ने मौका नहीं छोड़ा।

“तो नाम तो बता दो कम से कम।”

सूरज कुछ पल चुप रहा। फिर बोला—

सूरज:

“अभी नाम लेने का वक्त नहीं आया है।”

सूरज ने रीमा की तरफ देखा। रीमा लाली की पुत्री थी और वह सूरज को मन ही मनपसंद करती थी यद्यपि सूरज उस उम्र में थोड़ा छोटा था परंतु फिर भी वह सूरज को चाहती थी।

सुगना रसोई से आवाज़ देती हैं—

“अब बस करो तुम लोग। कल उसका जन्मदिन है। उसे तंग मत करो।

मालती मुस्कुरा कर पीछे हट गई।

अब हाई कमान का आर्डर आ चुका है कोई सूरज भैया को छेड़ेगा नहीं। छोटी मधु ने खड़े होकर सबको नसीहत दी और सबको अंताक्षरी खेलने के लिए आमंत्रित कर लिया।

सूरज ने हल्की मुस्कान के साथ अपने लिपटे हुए अंगूठे को देखा उसे बार-बार ही महसूस हो रहा था कि कल उसकी दिनचर्या में इस अंगूठे का कितना अहम रोल था। आज पेंट पहनते समय उसे काफी दिक्कत हुई थी और कल तो दिन भर उसे इस दर्द के साथ ही रहना था।

रात के 11:00 बज चुके थे। सोनी सुगना भी बच्चों के साथ बातें कर रहे थे। कुछ लोग अभी भी उत्साह में थे, कुछ जम्हाईया ले रहे थे पर इस सजी हुई महफ़िल से हटने को कोई तैयार नहीं था। और जाए भी कैसे? सबका प्रिय सूरज, बस एक घंटे बाद, अपने जन्मदिन की शुरुआत करने वाला था। सभी उसे “हैप्पी बर्थडे” कहने का इंतजार कर रहे थे।

बातचीत कभी सोनी और विकास की अमेरिका यात्रा पर जाती, युवाओं के अमेरिका को लेकर उत्साह स्वाभाविक रूप से था। कभी सुगना और लाली सलेमपुर और सीतापुर की पुरानी यादों में खो जाती, और कभी बच्चे सरयू सिंह की अकाल मृत्यु के बारे में जानना चाहते। पर हमेशा की तरह, सुगना ऐसे सवालों को टाल देती। कभी-कभी वह दुखी भी हो जाती और सभी को यह एहसास दिलाती कि कुछ बातें ना पूछना ही बेहतर है।

लोग जितना सूरज से प्यार करते थे, उससे ज्यादा सुगना का सम्मान। यद्यपि यह हवेली सोनी और विकास की थी, लेकिन घर में सबसे अधिक सम्मान सुगना का ही था। वह घर की मालकिन तो न थी पर मुखिया अवश्य थी। सुगना की बात सभी के लिए मान्य थी, और क्यों नहीं—वह सबका उतना ही ख्याल रखती थी, चाहे वह सूरज हो या परिवार का सबसे दुष्ट बेटा, राजा। राजा भी जानता था कि वह गलत है, पर सुगना के प्यार की वजह से वह भी सहज और शांत महसूस करता था।

महफ़िल में हँसी, यादें और बातचीत का सिलसिला चलता रहा। हर कोई, चाहे बड़ा हो या छोटा, अपने अपने अनुभवों और भावनाओं में खोया था। लेकिन सबके दिलों में एक बात तय थी सूरज सबका प्यारा था और अपनी मां सुगना की जान था।

की सुइयाँ धीरे-धीरे बारह बजने को तैयार थीं। कुछ सेकंड पहले ही बच्चों का उत्साह शिखर पर था। सभी उठकर एक साथ “10… 9… 8… 7…” चिल्लाने लगे। आवाज़ धीरे-धीरे तेज़ होती गई और आखिरकार

“हैप्पी बर्थडे टू यू,

हैप्पी बर्थडे टू यू”

की गूंज के साथ सभी ने सूरज को बारी-बारी से गले लगाया।

छोटी मधु ने बड़े भाई के पैर छुए। छोटा राजा भागकर फ्रिज से बड़ा-सा केक निकाल लाया और थोड़ी ही देर में सूरज ने उस खूबसूरत केक को काटा। हमेशा की तरह केक पर पहला हक उसकी माँ का था। सुगना ने बेहद प्यार से सूरज के माथे को चूमा। दूसरा केक उसने अपनी सोनी मौसी को खिलाया और फिर धीरे-धीरे सभी बड़ों को बारी-बारी से केक खिलाया। सबसे आख़िर में उसने अपनी छोटी बहन मधु को केक खिलाया।

नियति मुस्कुराते हुए सूरज और मधु दोनों को साथ देख रही थी। उन्हें साथ देखकर नियति एक बार फिर विधाता को याद कर रही थी, जिन्होंने उनके भाग्य में न जाने क्यों वह लिख दिया था, जो निश्चित ही एक पाप था।

बहरहाल, धीरे-धीरे सूरज के जन्मदिन का यह छोटा-सा सेलिब्रेशन समाप्त हुआ और सब अपने-अपने कमरों में जाने लगे। सुगना, सोनी और सूरज अब सूरज के कमरे में आ चुके थे। सुगना और सोनी ने सूरज को बहुत प्यार किया और उसे ढेर सारी शुभकामनाएँ दीं। सुगना के ज़ेहन में अब भी सूरज की शारीरिक कमी का ख्याल घूम जाता था, और वह दुखी हो जाती थीं। आज सूरज 21 वर्ष का हो चुका था।

कुछ देर और बातचीत करने के बाद सुगना और सोनी दोनों ने एक बार फिर सूरज को शुभकामनाएँ दीं, उसके माथे पर हाथ फेरा और अपने-अपने कमरों की ओर चल पड़ीं।

अभी सुगना और सोनी हाल में ही पहुँची थीं कि सूरज ने अंदर अपने लिहाफ़ को ऊपर खींचने की कोशिश की और गलती से अपने चोटिल अंगूठे का सहारा ले लिया। सूरज के मुँह से एक हल्की-सी कराह निकल गई।

सुगना और सोनी वापस सूरज के कमरे में आ गईं। सूरज उनके आने का कारण समझ गया। उसने गर्दन बाहर निकालकर कहा,

“अरे, कोई बात नहीं। अंगूठा लिहाफ़ से टकरा गया था।”

सोनी को अचानक अपनी उस दवा की याद आ गई, जो सूरज के अंगूठे पर लगानी थी। उसने कहा,

“दीदी, आप जाकर सो जाइए। मैं सूरज के अंगूठे पर वह दवा लगा दूँगी। मुझे विश्वास है इससे दर्द में ज़रूर राहत मिलेगी।”

सुगना ने भी साथ रुकने की बात कही, तो सोनी बोली,

“दीदी, आप पूरी तरह थक चुकी हैं। रसोई में इतने पकवान बनाना कोई आसान काम नहीं होता। आपको आराम करना चाहिए, दवा मैं लगा दूँगी।”

सोनी ने सुगना के कंधे थामकर उसे धीरे-धीरे उसके कमरे की ओर भेज दिया। सुगना और सोनी का आपसी स्नेह इस उम्र तक भी बना हुआ था।

कुछ देर बाद सोनी दवा लेकर सूरज के कमरे में पहुँची।

नियति, सोनी और सूरज को एक साथ देखकर मुस्कुरा रही थी। सोनी ने अपने शुरुआती दिनों में नर्स के रूप में काम किया था, इसलिए उसे चिकित्सा का कुछ ज्ञान था। आज नर्स सोनी, डॉक्टर बनकर सूरज के अंगूठे पर मलहम लगाने आई थी।

जैसे ही सोनी ने सूरज के अंगूठे की पट्टी हटाई, चूने और हल्दी का सूखा लेप भी पट्टी के साथ निकल आया। हल्दी का थोड़ा-सा अंश अब भी अंगूठे पर लगा था। सोनी ने अपनी कोमल उँगलियों से उसे धीरे-धीरे साफ़ किया।

सूरज को एक अजीब-सी अनुभूति हुई, जैसे अंगूठे में हल्का-सा करंट दौड़ गया हो। सोनी ने अपनी उँगलियों पर मलहम निकाला और सूरज के अंगूठे पर लगा दिया। जैसे ही उसने अंगूठे को अपने अंगूठे और तर्जनी के बीच लेकर हल्के से सहलाया, सूरज के पूरे शरीर में फिर एक सिहरन-सी दौड़ गई।

अचानक सूरज ने महसूस किया कि उसके लिंग में हलचल हो रही।

लिंग की रक्त कोशिकाओ में रक्त प्रवाह अचानक तेज हो गया था सूरज के लिंग में अचानक तनाव आना शुरू हो गया था सूरज आश्चर्यचकित था। जैसे-जैसे सोनी सूरज के अंगूठे को सहलाए जा रही थी वैसे वैसे सूरज के लिंग का तनाव बढ़ता जा रहा था यह तनाव सुखद था। लिंग में तनाव आना वैसे भी सुखद अनुभूति देता है। सूरज ने सोनी से नजर बचाकर अपना दूसरा हाथ लिहाफ के अंदर ले जाकर इस आश्चर्य को महसूस करना चाहा।

सूरज का लंड तनकर खड़ा हो चुका था। सूरज के लिंग में आशातीत वृद्धि हुई थी और शायद इसी कारण सूरज को अपना हाथ लिहाफ के अंदर ले जाना पड़ा था।


सोनी ने सूरज के हाथों की हलचल उसकी जांघों के बीच देख ली लिहाफ सूरज की इस हरकत को छुपा पाने में नाकाम रहा था।

सोने की उंगलियां रुक गई और सूरज ने सोने की आंखों को अपनी कमर की तरफ देखते हुए देख लिया।

सूरज झेंप गया परंतु उसने स्थिति संभाली और बोला…मौसी यह कौन सा मलहम है

सोनी ने अपने दूसरे हाथ से मलहम का डिब्बा सूरज की ओर दिखाई परंतु अब भी वह चिंतित थी बचपन में सूरज के अंगूठे को सहलाए जाने से होने वाली प्रतिक्रिया उसे याद आ रही थी हे भगवान …कहीं वह सच तो नहीं। सोनी का कलेजा धक-धक करने लगा उसे एक अनजाना डर सताने लगा उसके हाथ रुक गए सूरज ने फिर एक बार उसका ध्यान अपनी और खींचा।

“मौसी यह अंगूठे के पीछे ज्यादा मलहम लगा है इसे फैला दीजिए।”

सोनी ने अनमने ढंग से उसे मलहम को चारों तरफ बराबरी से लगा दिया और सूरज के लिंग का तनाव और आकार को और भी ज्यादा बढ़ा दिया।

लिंग के तनाव का असर सूरज के चेहरे पर भी दिखाई पड़ने लगा उसका मासूम चेहरा वासना से तमतमा उठा था। सोनी को पक्का यकीन हो गया की निश्चित ही बचपन की वह घटना आज दोबारा रिपीट हो चुकी है उसने सूरज का हाथ छोड़ दिया और हड़बड़ी में वहां से उठते हुए बोली..

अब सो जाओ एक बार फिर हैप्पी बर्थडे टू यू

सोनी ने धड़कते हुए कलेजे के बावजूद अपने होठों पर मुस्कुराहट लाई और सूरज के कमरे से बाहर निकल गई जाते समय उसने दरवाजा बंद कर दिया।

सोनी को बचपन की बातें पूरी तरह याद आ चुकी थी इस तनाव का निदान क्या था उसे यह भी याद आ चुका था। क्या उसे अपने होंठ सूरज के…. हे भगवान नहीं नहीं ऐसा नहीं हो सकता। जितना ही वह इस बारे में सोचती उतना ही उसका दिल घबराने लगता। अपने मन में घबराहट और तेज धड़कनों के साथ सोनी बिस्तर पर आ चुकी थी पर दिमाग में वही बातें घूम रही थी।

उधर अपनी मौसी सोनी के जाने के बाद सूरज बिस्तर पर से उठा उसने दरवाजा लॉक किया और वापस बिस्तर पर आकर अपने लंड को आजाद कर दिया। लंड अंडरवियर से बाहर आते ही उछलकर खड़ा हो गया।

सूरज अपने खड़े लंड को देखकरआश्चर्यचकित था। इतना सुंदर लंड तो उसने पोर्न वेबसाइट पर भी नहीं देखा था। लगभग 2 इंच व्यास और आठ इंच लंबी कद काठी का वह लंड एक खूबसूरत सुपड़ा लिए हुए था। जो उसकी खूबसूरती को और भी बढ़ा रहा था। लंड पर तनीहुई उभरी नसें यह साबित कर रही थी की यह न सिर्फ कसरत्ती है अपितु कसरत करने के लिए ही बना है।

सूरज ने अपने हाथ से उसे सहलाने की कोशिश की यह अनुभूति अनुपम थी विशिष्ट थी। आज पहली बार अपने जीवन में वह अपने खड़े लंड को सहला रहा था। सूरज आनंद के सागर में गोते लगाने लगा। किसी युवा द्वारा अपने लंड को सहलाना स्वतः ही उत्तेजना और कल्पनाओं को जन्म देता है।

सूरज को अपने लंड को सहलाने बेहद मजा आ रहा था और हो भी क्यों ना सूरज की कल्पनाएं परवान चढ़ने लगी उसे रोजी का ध्यान आया…

उसने अपना मोबाइल उठाया ..

रोजी का मैसेज मोबाइल पर आया हुआ था

हैप्पी बर्थडे माय लव…

सूरज ने उसे थैंक यू नोट भेजा। वह चाहता तो था कि अपने खड़े लंड को एक बार रोजी को दिखाएं और अपनी मर्दानगी साबित करे पर यह संभव नहीं था। फिर भी उसने अपने मोबाइल से अपने खड़े लंड की फोटो ली और उसे अपने मोबाइल में छुपा लिया।

रोजी सुबह-सुबह के लिए रोज पार्क में जाती थी वह पार्क सूरज की हवेली से ज्यादा दूर नहीं था अचानक सूरज के दिमाग में कुछ आया और उसने रोजी को एक बार फिर मैसेज किया।

कल जॉगिंग के लिए जाओगी क्या?

उधर रोजी अब तक सो चुकी थी जवाब आने की उम्मीद नहीं थी सूरज ने मोबाइल किनारे रख दिया और अपनी जांघों के बीच खिले हुए फूल को अपनी हथेली से पड़कर एक बार फिर निहारने लगा।

सूरज अपने लंड को बड़े प्रेम से सहला रहा था कभी वह उसके ऊपर उभर रही सांप जैसी नसों को छूता कभी उसके सुपाड़े के पीछे उस अति संवेदनशील जगहों को। हर बार उसके शरीर में एक सुखद अनुभूति होती जैसे-जैसे सूरज अपने लंड को सहलाता गया वासना अपने आयाम बढ़ाती गई वह बार-बार रोजी को नग्न और नग्न करने की कोशिश करता परंतु यह कठिन था दरअसल इसके पूर्व सूरज ने कभी भी अपनी वासना को फलीभूत नहीं किया था।


वैसे भी जब लंड में तनाव ही ना हो तो कामुक कल्पनाओं का क्या फायदा। पर आज स्थितियां अलग थीं

सूरज ने अपनी वासना के तूफान को और हवा दी लंड सूरज की हथेलियों द्वारा मसला जा रहा था…उत्तेजना ने उत्कर्ष प्राप्त किया और सूरज के लंड से वीर्य की धार फूट पड़ी आह…..मौ…सी………..

सूरज का लंड लगातार वीर्य उगलता रहा और सूरज के लिहाफ पर उसके छींटे गिरते रहे…

सूरज के लिए हस्तमैथुन का यह पहला अनुभव था जितना सुख उसने आज महसूस किया था यह अनोखा था अद्भुत था सूरज को उसके जन्मदिन का उपहार मिल चुका था…

सूरज कुछ देर उसी स्थिति में रहा अपने लंड का यह रूप उसके लिए अनोखा था वह मर्दानगी से भरा हुआ था। सूरज का स्वाभिमान आज अपने चरम पर था अब तक उसने अपने लंड में तनाव न आने को लेकर जितनी चिंता की थी एक पल में ही वह सब खुशियों में बदल गया था।

सूरज ने अपने लंड की तरफ देखा वह अब भी वैसे ही तना हुआ था। सूरज ने अब तक जो पढ़ाई की थी या जो समझा था उसके अनुसार वीर्य स्खलन के बाद लंड को वापस सामान्य स्थिति में आ जाना चाहिए था परंतु लंड का तनाव यथावत था।

सूरज ने उसे वापस अंडरवियर में कैद करने की कोशिश की परंतु यह कठिन था। सूरज को यकीन ही नहीं हो रहा था कि ऐसा कैसे हो सकता है उसने इधर-उधर ध्यान भटकाया पर स्थिति जस की तस थी। लंड का तनाव कम होने का नाम ही नहीं ले रहा था। सूरज तने हुए लंड के साथ सूरज अब असहज महसूस करने लगा।

पर इन खुशियों को साझा करने वाला कोई भी ना था उसे अचानक रोजी का ध्यान आया। उसने मोबाइल उठाया पर रोजी का कोई मैसेज नहीं था।

सूरज ने एक बार फिर अपने इतने हुए लंड को अपना हाथों से सहलाना शुरू किया और कुछ ही देर की मेहनत के पश्चात एक बार फिर वीर्य स्खलन करने में कामयाब रहा परंतु जिस उद्देश्य के लिए यह किया गया था उसमें आनंद कम और लिंग का तनाव घटना प्राथमिकता थी। पर दुर्भाग्य दोबारा वीर्य स्खलन होने के बावजूद लिंग का तनाव कम न हुआ।

सूरज पूरी तरह थक चुका था लगातार दो बार हस्तमैथुन कर उसका शरीर शिथिल पड़ चुका था परंतु लिंग वैसे ही तनाव हुआ था सूरज की धड़कनें बढ़ी हुई थी उसने लिहाफ अपने बदन पर डाला और अपना ध्यान उसे तने हुए लिंग से हटाने की कोशिश की पर शायद यह संभव नहीं था जब लिंग में तनाव चरम पर होता है मनुष्य को और कुछ नहीं सोचता है आप अपना ध्यान चाह कर भी नहीं हटा सकते यही स्थिति सूरज की थी रात के दो बज चुके थे और सूरज अब भी अपनी खुशियों से जूझ रहा था। थकावट से कभी उसकी आंखें नींद से बोझिल होती परंतु उसके लंड का तनाव उसे सोने नहीं दे रहा था।

सुबह के 5:00 बज चुके थे अचानक मोबाइल पर ट्रिंग की आवाज हुई। सूरज ने मोबाइल उठाया यह रोजी का ही मैसेज था


हां आ रही हूं क्यों पूछ रहे हो

मैं भी आ रहा हूं सूरज ने रिप्लाई किया

अरे वह तो बर्थडे बॉय से सुबह-सुबह ही मुलाकात होगी चलो मैं तैयार होकर आता हूं सी यू

रोजी का मैसेज स्पष्ट था दोबारा रिप्लाई करने की जरूरत नहीं थी सूरज भी बिस्तर से उठा उसकी आंखें नींद पूरी नहीं होने की वजह से लाल थी पर लंड अभी उसी तरह तना हुआ था।

सूरज ने बड़ी मुश्किल से अपनी नित्य कर्म निपटा ए तने हुए लंड की वजह से उसे कई दिक्कतों का सामना करना पड़ रहा है वह तैयार हुआ बड़ी मुश्किल से लैंड को अपने पेट में कैद करने की कोशिश की पर उसका आकार और तनाव छुपाने लायक नहीं था सूरज ने सबसे ढीली डाली शर्ट पहनी और उसके ऊपर एक आवरण सा दे दिया।

एक तरफ सूरज के मन में खुशी थी कि उसके लंड में आज पहली बार तनाव आया था पर लगातार तनाव ने उसके मन में चिंता की लकीरें डाल दी थी।

सूरज ने अपनी मोटरसाइकिल उठाई और कुछ ही देर में रोजी के पास पार्क में पहुंच गया रोजी उसका इंतजार कर रही थी रोजी ने उसे एक खूबसूरत सा फूल दिया और बोला


Happy b day to you ..हमेशा इस फूल की तरह ही हंसते मुस्कुराते रहना

सूरज ने अपनी बाहें खोल दी और रोजी सूरज से सटती चली गई। सूरज की मजबूत बाहों ने रोजी को अपने आगोश में ले लिया दोनों प्रेमिका एक दूसरे से बेहद करीब आ गए। सूरज ने अपने हाथ से रोजी की कमर को सहारा देकर अपनी ओर खींचा और पहली बार रोजी ने अपने नाभि के नीचे एक तने और कठोर अंग को महसूस किया यह निश्चित ही सूरज का तनाव हुआ था। रोजी सहम गई उसने सर उठाकर सूरज के चेहरे की तरफ देखा सूरज ने पहले तो उसके माथे को चुम्मा और धीरे-धीरे उसके होंठ रोजी के होठों से सट गए।


चुंबनों की प्रगाढ़ता बढ़ती गई और रोजी की मन में कुछ हलचल होने लगी। अचानक रोजी ने अपना हाथ नीचे किया और सूरज के लंड में आए इस तनाव को महसूस करने की कोशिश की। रोजी की कोमल हथेलियां सूरज के लंड को पेट के ऊपर से ही महसूस कर रही थी। लंड का आकार और तनाव दोनों ही रोजी को आश्चर्यचकित कर रहा था। वह एक तरफ शर्मा भी रही थी दूसरी तरफ इस तनाव को देखकर खुश भी हो रही थी। सूरज की मर्दानगी को लेकर जो प्रश्न उसके अंतर्मन में पिछले कुछ दिनों से उठ रहे थे वह सब अचानक ही शांत हो गए थे। सूरज एक पूर्ण मर्द की भांति उसके समक्ष उपस्थित था रोजी ने सूरज के चुंबनों का प्रति उत्तर और भी आत्मीयता से देना शुरू कर दिया तथा अपनी हथेली से उसके लंड को दबाकर और सहलाकर उसका जायजा लेने की कोशिश की सूरज ने उसका हाथ पकड़ लिया और उससे अलग होते हुए बोला

अरे यह पब्लिक प्लेस है कंट्रोल करो…

दोनों मुस्कुराने लगे सूरज ने अपने शर्ट ठीक की और दोनों पार्क में तरह-तरह की बातें करते हुए घूमने लगे परंतु आज खुशियों का दिन था सूरज के लिंग के तनाव ने न सिर्फ सूरज को शहीद कर दिया था बल्कि अब रोगी के मन में भी तंगी फूटने लगी थी सूरज जैसे मर्द को अपनी जिंदगी में पाकर वह बेहद प्रसन्न थी बेहद खुश थी…

आज कॉलेज आओगे क्या ? रोजी ने पूछा

नहीं आज तो मुश्किल है आज बर्थडे मना लेते हैं


सूरज ने मुस्कुराते हुए जवाब दिया। सुबह के 6:30 बज चुके थे जॉगिंग का टाइम पूरा हो चुका था अब बिछड़ने का वक्त था। बिछड़ते वक़्त सूरज और रोजी एक बार फिर आलिंगन बद्ध हुए। सूरज मैं एक बार फिर रोजी को चूमने की कोशिश की रोजी ने उसे निराश ना किया इस बार उसने फिर सूरज के लंड पर हाथ लगाने की कोशिश की और उसके आश्चर्य का ठिकाना ना रहा लंड पूरी तरह तना हुआ था…

रोजी को यह यकीन ही नहीं हो रहा था कि यह तुरंत ही कैसे खड़ा हो गया था.. वह तुरंत सूरत से अलग हुई और बोली..

आज तो छोटे मियां पूरे जोश में दिखाई पड़ रहे हैं उसकी आंखों ने नीचे झुक कर सूरज को उसकी बात पूरी तरह समझा दी.. सूरज मुस्कुरा कर रह गया.

उसे सूरज की स्थिति का ज्ञान नहीं था यह तनाव अब सूरज के मानसिक तनाव का कारण बन चुका था।

सूरज वापस घर आ चुका था अभी भी घर में सब सो ही रहे थे सिर्फ सुगना और सोनी जगे हुए थे और हवेली के खूबसूरत हाल में चाय पी रहे थे। सूरज को अंदर आते देख सुगना खुश हो गई। सुगना ने सूरज को अपने पास बुलाया और बगल में बैठा लिया। सूरज सकुचा रहा था उसने अपनी शर्ट ठीक की बने हुए लंड को यथासंभव छुपाने की कोशिश की पर सामने बैठी अपनी मौसी से छुपा पाने में नाकाम रहा। सोनी की यह बेहद असहज लगा ऐसा लग रहा था जैसे सूरज में अपनी पेट में कोई बड़ा खीरा छुपाया हुआ हो…

आ बैठ …अरे इतनी सुबह-सुबह कहां चले गए थे…

सुगना ने सूरज के माथे पर प्यार से हाथ फिरते हुए कहा

कुछ नहीं थोड़ा टहलने का मन कर रहा था बाहर ही घूम रहा था।

यह तेरी आंखें लाल क्यों है नींद नहीं आई क्या? सुगना ने सूरज की आंखों में लाल डोरे देखते हुए कहा…

सूरत हड़बड़ा गया यह लाल डोरे कुछ तो अनिद्रा की वजह से और कुछ सूरज के तने हुए लंड की वजह से भी..

कुछ नहीं मां सब ठीक है मुझे भी चाय पीनी है सूरज ने बात टालते हुए कहा

ठीक है मैं लेकर आती हूं।

सुगना रसोई में चाय लेने चली गई इधर सोनी ने सूरज को असहज देखकर अपने सोफे से उठकर सूरज के पास आ गई और उसकी हाथों को अपने हथेली में लेकर सहलाते हुए बोली।

क्या हुआ बर्थडे बॉय आज टेंशन में क्यों है?

कुछ नहीं मौसी सब ठीक है बस थोड़ा नींद डिस्टर्ब हुई थी..

सूरज ने बात टालने की कोशिश की..


क्यों क्या हो गया? …सोनी ने सूरज की आंखों में आंखें डालते हुए पूछा।

सूरज ने कुछ नहीं कहा अपनी गर्दन झुका ली


मुझे कुछ नहीं बोलना..

तभी सोनी ने सूरज के टूटे हुए अंगूठे को अपनी कोमल उंगलियों से सहलाते हुए पूछा

और अंगूठे का दर्द कैसा है?

सोने की अंगूठा सहलाए जाने से सूरज के लंड में एक और तेज करंट दौड़ी और उसके लंड का तनाव और आकार और भी बढ़ गया…

सूरज के मुंह से कराह निकल गई…

सूरज ने अपना अंगूठा सोनी के हाथ से खींच लिया और बोला

मौसी अब बस..

यह कराह अंगूठे के दर्द की वजह से नहीं थी अपितु लंड में आए बेहद तनाव की वजह से थी।

सूरज ने अपना हाथ नीचे किया और तनाव से फट रहे लंड को अपने पैंट में और जगह देने की कोशिश की।

सूरज के शर्ट का आवरण हटते ही सोनी ने सूरज के पेट के अंदर आए उसे अप्रत्याशित उभार को देख लिया जो कतई सामान्य नहीं था। उसका आकार यह निश्चित तौर पर बता रहा था कि यह सूरज का लिंग है। लिंग… पर इतना बड़ा? सूरज तो अभी नया-नया युवा था। यह उभार अप्रत्याशित था सोनी घबरा गई। सोने के चेहरे पर हवाईया उड़ने लगी।

इतनी सुबह-सुबह अपनी मां और मौसी के पास बैठे सूरज के लंड में इतना तनाव आना अप्रत्याशित था।

अचानक उसे बचपन की वह घटना पूरी तरह याद आ गई जब वह बचपन में सूरज के अंगूठे को मजाक मजाक में सहलाया करती थी और…. फिर …. जैसे-जैसे सोनी को वह घटना याद आती गई सोने के चेहरे पर शिकन आते गई

हे भगवान मुझसे यह क्या हो गया…

सूरज अब और असहज हो चुका था वह अपने रूम में जाने के लिए उठा। तभी सुगना चाय लेकर आ चुकी थी

अरे बैठ पहले चाय पी ले.. फिर जाना..

सूरज से अपने लंड का तनाव और सहा नहीं जा रहा था फिर भी उसने अपनी मां की बात मान ली और बड़ी मुश्किल से बैठकर अपने बने हुए लंड को छुपाते हुए जल्दी जल्दी चाय पीने लगा।

उधर सोनी का कलेजा धक-धक कर रहा था उसे अब यकीन हो चला था कि सूरज के लिंग में आया हुआ तनाव निश्चित ही उसके अंगूठे सहलाए जाने के कारण हुआ था।

सोनी मन ही मन सोच रही थी पर तब तो सूरज एक बालक था अब तो तने हुए लिंग को शिथिल करने का उपाय सर्वविदित था। क्या सूरज को हस्तमैथुन के बारे में नहीं मालूम था? क्या सूरज ने इस तनाव को कम करने के लिए हस्तमैथुन नहीं किया होगा…

प्रश्न जटिल था सूरज की असहज स्थिति देखकर सोनी स्वयं परेशान हो गई थी इस प्रश्न का उत्तर जानना जरूरी था। सूरज के लिंग का तनाव कम करने का उपाय सोनी को बखूबी याद था पर ……

हे भगवान…. यह असंभव था….

पुत्र समान जवान सूरज का लंड ……चूमना……सोनी की रूह कांप उठी…अनिष्ट की आशंका से सोनी के माथे पर पसीने की बूंद चालक आई…थी…



अगला एपिसोड डायरेक्ट मैसेज पर उपलब्ध होगा..

जुड़े रहें…
Bahut hi behtreen update lovely ji
Agle update please send karein ...
 
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