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Incest अपनी शादीशुदा बेटी को मां बनाया

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Uzu
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अपडेट किसी कारणवश देरी से देने के लिए आप सभी से क्षमा चाहते हैं प्रतीक्षा करने के लिए आप सभी को बहुत-बहुत धन्यवाद।

🎢🚌
 
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Mohammed Ali

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 भाग १९

आरती- कोई जुताई करने वाला है ही नहीं तो साफ किसके लिए करूंगी।

राजनाथ- क्यों दामाद जी जुताई नहीं करते क्या।

आरती- आपके दामाद की जुताई करते तो अब तक उसमें फसल उग गया होता और आप नाना भी बन गए होते और फसल उगाने के लिए खेत की जुताई अच्छे से होनी चाहिए और बीज भी तो अच्छी क्वालिटी की होनी चाहिए तभी तो फसल उगेगा। और जुताई करने के लिए हल भी तो तगड़ा होना चाहिए

राजनाथ- जब मेरी शादी हुई थी तुम्हारी मां के साथ और वह पहली बार मेरे घर आई थी तो मैंने उसकी खेत की ऐसे जुताई की थी कि पहले ही महीने में प्रेग्नेंट हो गई थी और 9 महीने के बाद उसके खेत से फसल भी निकल आया था और वह खूबसूरत फसल थी तुम जो आज खुद अपने खेत से फसल उगाने के लायक हो गई है।


यह बात सुनते हैं आरती शर्मा जाती है अपनी नज़रें नीचे करके बोलती है हर किसी के पास आपके जैसा थोड़ी है।

राजनाथ - को उसकी बात समझ में नहीं आता है तो वह पूछता है मेरे जैसा मतलब।

आरती- फिर से कहती है मतलब आपके जैसा लंबा तगड़ा हल सब के पास थोड़ी है जो पहले ही जुताई में फसल उग जाएगा।

राजनाथ - चौंकते हुए तुम्हें कैसे पता मेरे हाल के बारे में।

आरती - ने तो राजनाथ की हल को देख चुकी थी बाथरूम में पेशाब करते हुए तो वह बात को संभालते हुए कहती है नहीं मैं तो अंदाज से कह रही हूं अभी आपने कहा ना की मम्मी शादी करके आई थी तो पहले ही महीने में प्रेग्नेंट कर दिया था जब लंबा तगड़ा होगा तभी तो पहले ही जुताई में माँ को प्रेग्नेंट कर दिया था।

राजनाथ - यह तो मुझे नहीं पता कि लंबा तगड़ा है कि नहीं लेकिन जो सच था वह मैंने तुमको बताया।

आरती - क्यों आपको अपने हल के बारे में नहीं पता कि वह कैसा है।


राजनाथ - वो तो पता है लेकिन मैं यह थोड़ी कह सकता हूँ कि मेरा सबसे लंबा तगड़ा है हो सकता है किसी के पास मेरे से भी लंबा तगड़ा होगा।

आरती- मुस्कुराते हुए मतलब आप मानते हैं की आपका नंबर तगड़ा है।

राजनाथ - फिर वही बात मैंने कब कहा कि मेरा लंबा तगड़ा हाँ इतना कह सकता हूं कि काम चलाने के लायक है।

आरती - मुस्कुराते हुए फिर से कहती अच्छा आप मुझे बताइए मैं डिसाइड करूंगी की लंबा तगड़ा है कि काम चलाने लायक है।

राजनाथ - चौंकते हुए यह तुम कैसी बात कर रही हो मैं तुम्हें नहीं बता सकता।

आरती - अरे मैं दिखाने के लिए थोड़ी कह रही हूँ मैं तो साइज पूछ रही हूँ साइज़ तो आप बता सकते हैं ना।

राजनाथ- नहीं मैं वह भी नहीं बता सकता।


आरती - लेकिन क्यों क्यों नहीं बता सकते।

राजनाथ- क्योंकि तुम मेरी बेटी हो इसलिए मैं तुम्हें नहीं बता सकता।

आरती - बेटी हूँ तो क्या हुआ मैं कोई बच्ची नहीं हूँ मैं बड़ी हो गई हूं और मेरी शादी भी हो गई है और मुझे पता है ई सबके बारे में।

राजनाथ- फिर भी मैं तुम्हें नहीं बता सकता क्योंकि तुम मेरी बेटी हो बीवी नहीं और यह सब बात अपनी बीवी के साथ की जाती है किसी और के साथ नहीं।

आरती - थोड़ा गुस्सा होते हैं अच्छा आप अपने बारे में नहीं बता सकते लेकिन आपने जो मेरा सब कुछ देख लिया उसका क्या।

राजनाथ- वो तो मैंने गलती से देखा है जानबूझकर थोड़ी देखा है और उसके लिए मैंने तुमसे माफी भी मांगी है।


आरती - गलती से देखे हो या जानबूझकर देखे हो लेकिन देखी तो है ना इसलिए आप बच नहीं सकते मैं जो पूछ रही हूँ आपको बताना पड़ेगा।

राजनाथ - नहीं बिल्कुल भी नहीं मैं कुछ नहीं बताऊंगा।

आरती - गुस्सा होते हुए ठीक है आप नहीं बताएंगे तो मत बताइए और वह चुपचाप मालिश करने लगती है।

राजनाथ- आरती को चुपचाप देखकर उसको निहारने लगता है और मन ही मन कहता है कि बहुत जिद्दी लड़की जब तक इसको नहीं बताऊंगा यह नहीं मानेगी फिर वह आरती से कहता है देखो बेटा तुम जो कह रही हो वह सही नहीं है मैं तुम्हें वह सब नहीं बता सकता।

आरती - मैं आपसे कहां कुछ पूछ रही हूँ मुझे पता है आप कुछ नहीं बताएंगे इसीलिए मैं आपसे अब कुछ नहीं पूछूंगी।

राजनाथ- अच्छा ठीक है जब तुम नहीं मान रही हो तो मैं बता दूंगा लेकिन मैं जो तुमसे पूछूंगा वह तुमको बताना पड़ेगा।

आरती- क्या चीज पूछेंगे।

राजनाथ- वही जो तुम मझसे पूछ रही हो वही सब के बारे में पूछूंगा।

आरती - ठीक है पूछीए।


राजनाथ-- दामाद जी का साइज कितना है।

आरती - आपको तो पता है उसके साइज के बारे में जब मैं डॉक्टर को बता रही थी तो आपने तो सुनी थी हमारी बात।

राजनाथ - मुझे याद नहीं है फिर से बाताओ।


आरती - यही करीब 5 इंच का होगा।

राजनाथ - अब तुम मेरा शायज जानना चाहती हो तो सुनो मेरा साइज उससे थोड़ा बड़ा है 8 या 9 के करीब होगा।

आरती - इतनी सी बात बताने के लिए आपने मुझे इतना परेशान किया अब आपको दिखाना भी पड़ेगा।

राजनाथ- नहीं यह नहीं हो सकता तुमने मुझे साइज पूछी थी अब यह दिखाने वाली बात कहां से आ गई।

आरती- इसलिए कि आपने मुझे इतना परेशान किया उसके लिए आपको दिखाना पड़ेगा।

राजनाथ - अब तुम मुझे ब्लैकमेल कर रही हो यह सही नहीं है।

आरती - आप जो भी समझ लीजिए।

राजनाथ - ठीक है दिखाऊँगा लेकिन अभी नहीं बाद में।

आरती- मुस्कुराते हुए बाद में दिखाएंगे पक्का।


राजनाथ- हाँ पक्का।

आरती - तो ठीक है।

राजनाथ- मैंने तुमको एक बात बताना तो भूल ही गया आज तुम्हारे मामा का फोन आया था।

आरती - क्या शेखर मामा ने फोन किया था क्या कह रहे थे ।

राजनाथ - कह रहे थे की उनकी बेटी खुशबू की शादी फिक्स हो गई है।


आरती - क्या खुशबू की शादी फिक्स हो गई कब है शादी।

राजनाथ - कह रहे थे अगले महीने शादी है और हम सबको बुलाया है।

आरती - क्या सब जाएंगे तो यहां घर में कौन रहेगा।

राजनाथ - हाँ रघु नहीं आया तो एक आदमी को यहाँ रहना पड़ेगा तो दादी रह जाएगीऔर हम दोनों चलेंगे।

आरती- कुछ सोचने के बाद कहती हैं नहीं मैं नहीं जाऊंगी आप लोग चले जाइए मैं यहीं रहूंगी।


राजनाथ- क्यों तू क्यों नहीं जाएगी।

आरती - नहीं मैं नहीं जाऊंगी वहां हमारे सभी रिश्तेदार आएंगे और देखेगें तो क्य कहेंगे और मेरे पास कपड़े भी अच्छे नहीं हैं।

राजनाथ- बस इतनी सी बात कितने कपड़े चाहिए तुम्हें कल मार्केट चलना जितना कपड़ा चाहिए तुम्हें दिला दूंगा और रही बात रिश्तेदारों की तो मैं तुम्हें दावे के साथ कह रहा हूँ की हमारे रिश्ते में कोई भी लड़की तुमसे ज्यादा खूबसूरत नहीं है जो भी तुमको देखेगा वह सब तुम्हारी तारीफ करेंगे ठीक है अब बहुत टाइम हो गया है अब तुम भी जाकर सो जाओ।

फिर आरती सोने के लिए चली जाती है और राजनाथ भी सो जाता है एक-दो दिन इसी तरह गुजर जाता है फिर दोनों शादी में जाने के लिए तैयारी करने लगते हैं।


एक दिन राजनाथ आरती को मार्केट लेकर जाता है कपड़े दिलाने के लिए और एक बड़ा शोरूम में लेकर जाता है जहां आरती अपने पसंद के बहुत सारा कपड़ा लेती है तो राजनाथ पूछता है कि सब हो गया की और कुछ बाकी है तो आरती कहती है कि नहीं अब हो गया और कुछ नहीं लेना है अब चलिए फिर राजनाथ काउंटर पर जाकर पेमेंट करता है और दोनों बाहर जाने लगते हैं जैसे ही शोरूम से बाहर आते हैं तो राजनाथ कहता है सब कुछ लिया लेकिन जो असल चीज है वो तो तुमने लिया ही नहीं।

आरती- कहती है कौन सी असल चीज।

राजनाथ- वही अंदर मे जो पहनती हो ब्रा और पैंटी तो तुमने लिया ही नहीं।

आरती - शरमाते हुए कहती है अंदर में आपने उस टाइम याद दिलाया नहीं अब चलिए बाद में ले लेंगे अभी बहुत भीड़ है।

राजनाथ - अरे भीड़ है तो क्या हुआ चलो अभी ले लेंगे।

आरती - नहीं मैं नहीं जाऊंगी मुझे शर्म आएगी।

राजनाथ - ठीक है तुम मत मांगना मैं मांग लूंगा साथ में चलो फिर दोनों अंदर जाते हैं और ब्रा और पैंटी के काउंटर पर जाते हैं जहां एक लड़की खड़ी हुई थी फिर वह दोनों को देखकर बोलती है बोलिए मैम क्या चाहिए आपको।

आरती शरम के मारे कुछ नहीं बोलती तो राजनाथ कहता है की ब्रा और पैंटी दिखाइए।

तो लड़की पूछती है कौन सी साइज की चाहिए आपको।

राजनाथ- 32 की दे दीजिए।

लड़की - कौन से कलर में चाहिए और कितनी फीस चाहिए।

राजनाथ- आपके पास जितना कलर है उसमें से एक-एक पीस दे दीजिए।


फिर वह सभी कलर की एक-एक पीस निकाल कर ब्रा और पैंटी दे देती है।

ब्रा और पैंटी लेकर दोनों शोरूम से बाहर आ जाते हैं।


आरती राजनाथ से कहती है कि इतना सारा लेने की क्या जरूरत थी दो-चार पीस ले ते, तो हो जाता।

राजनाथ - तुमको कोई टेंशन ना हो इसलिए जब तुम कोई भी कलर की साड़ी और ब्लाउज पहनो तो तुमको कलर मैचिंग करने में दिक्कत ना हो इसलिए।

फिर दोनों वापस घर आ जाते हैं।

फिर रात में खाना-वाना खाने के बाद आरती जब मालिश करने के लिए जाती है तो राजनाथ पूछता है कपड़ा जो खरीद के लाई है उसको पहन के फाइटिंग चेक किया कि नहीं।


आरती - नहीं अभी ब्लाउज सिलवाया कहां है ब्लाउज सिलवाना पड़ेगा और लहंगा का ऊपर वाला चोली भी सिलवाना पड़ेगा।

राजनाथ- अरे मैं उस कपड़े की बात नहीं कर रहा हूँ मैं अंदर वाले कपड़े की बात कर रहा हूँ उसकी फिटिंग चेक की कि नहीं।

आरती -नहीं उसकी फिटिंग क्या चेक करूंगी 32 साइज का है मेरा हो जाता है।

राजनाथ- फिर भी चेक कर लेना चाहिए उतना सारा है बाद में बड़ा छोटा हो गया तो।

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(अगला अपडेट पेज नंबर 54 में मिलेगा)
Kya baat hai
 

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भाग २०
राजनाथ आरती से पूछता है उस ब्रा और पेंटी के बारे में जो आज ही उसने आरती को एक दर्जन खरीद कर दिया था उसी की साइज के बारे में की पहन कर देखा कि नहीं।

आरती जवाब देती है कि नहीं पहनकर तो नहीं देखा और पहन कर देखने की क्या जरूरत है साइज देखकर लिया है तो ठीक ही होगा।

राजनाथ फिर भी एक बार पहन कर देख लेना चाहिए कहीं अगर बड़ा छोटा हो गया तो फिर बाद में दिक्कत होगा।

आरती ठीक है आप कह रहे हैं तो पहन कर देख लूंगी फिर आरती मुस्कुराते हुए कहती है क्या आप आप भी ब्रा और पैंटी की फिटिंग देखेंगे।

राजनाथ नहीं मै क्यों देखुंगा तुम खुद पहन कर देख लो की फिटिंग सही है कि नहीं।


आरती क्यों आप नहीं देखेंगे उसकी फिटिंग।

राजनाथ नहीं मैं क्यों देखूंगा तुम्हारे कपड़े हैं तुम खुद पहन कर देख सकती हो की फिटिंग सही है कि नहीं तो फिर मैं क्यों देखुंगा।


आरती तो फिर आपने इससे पहले वाली ब्रा और पैंटी की फिटिंग क्यों देखी थी।

राजनाथ वह तो मैंने पहली बार तुम्हारे लिए लाया था तो मुझे तुम्हारी साइज के बारे में पता नहीं था इसलिए मैने पूछा था की फिटिंग सही है कि नहीं मैंने तुमको दिखाने के लिए नहीं कहा था वो तो तुमने खुद अपनी मर्जी से दिखाई थी इसलिए मैंने देखा था।


आरती अच्छा तो मैं अपनी मर्जी से दिखाऊंगी तो आप देखेंगे।

राजनाथ नहीं मैं नहीं देखूंगा क्योंकि देखने की जरूरत नहीं।

आरती ठीक है नहीं देखना चाहते हैं तो मत देखिए अब आपका मालिश हो गया अब मैं जा रही हूँ सोने के लिए


फिर वह चली जाती है सोने के लिए उसके जाने के बाद राजनाथ सोचने लगता है है कि क्या मैने सही किया उसको मना करके या मुझे हाँ बोल देना चाहिए उधर आरती अपने बेड पर सोते हुए सोचने लगती है कि क्या बाबूजी सच में देखना नहीं चाहते या सिर्फ ऊपरी मन से मुझे दिखाने के लिए ऐसा कह रहे हैं क्योंकि मैं उनकी बेटी हूँ इसलिए या फिर वो मुझे देखना चाह रहे हो लेकिन बाप बेटी के रिश्ते की वजह से वो पीछे हट रहे हैं नहीं तो दुनिया में ऐसा इंसान या मर्द नहीं होगा कि वो इतना शरीफ हो कि उसके सामने एक जवान और खूबसूरत लड़की आकर उसको अपनी बदन की खूबसूरती दिखाएं और उसे देखने से मना कर दे।

आरती अपने आप को अपनी बदन की खूबसूरती दिखाने के लिए तैयार थी लेकिन राजनाथ अभी भी झिझक रहा था वह आगे बढ़ने से लेकिन आरती धीरे-धीरे अपने बाप के प्रति आकर्षित हो रही थी और वह मन ही मन चाह रही थी कि राजनाथ उसकी बदन की खूबसूरती को देखें और उसकी तारीफ करें और ऐसी सोच उसके दिल और दिमाग में आने का एक ही कारण था कि जो प्यार और दुलार उसके पति से मिलना चाहिए वह नहीं मिल रहा था और दूसरी वजह यह थी कि वह राजनाथ के घर में अकेली और उसके साथ रह रही यहां उन दोनों को कोई डिस्टर्ब करने वाला नहीं था दादी थी लेकिन वह इतना समझ नहीं पाती थी इन दोनों बाप बेटी के बीच में क्या चल रहा है और उसका ज्यादा वक्त इधर-उधर घूमने में ही बीत जाता है इस वजह से दोनों बाप बेटी को उससे कोई ज्यादा फर्क भी नहीं पड़ रहा था और जब एक जवान मर्द और एक जवान औरत दोनों एक ही साथ एक ही घर में लंबे समय तक रहते हैं तो स्वाभाविक तौर पर दोनों एक दूसरे के प्रति आकर्षित हो ही जाएंगे चाहे उन दोनों के बीच कोई भी रिश्ता हो जैसे-जैसे दोनों एक दूसरे के करीब आते जाएंगे वैसे-वैसे दोनों के दिल और दिमाग पर जिस्म की भूख हावी होने लगे लगेगा और यह भूख इतना बढ़ जाएगा कि दोनों को एक दूसरे की जिस्म की भूख मिटाना ही पड़ेगा।

और आज आरती और राजनाथ के साथ यही हो रहा है कि ना चाहते हुए भी दोनों एक दूसरे के प्रति आकर्षित हो रहे हैं इसी वजह से राजनाथ जब अपनी बेटी को और उसकी बदन को देखा है तो उसके मन में भी आता है कि वह बाप बेटी के रिश्ते की दीवार को गिरा दे लेकिन वह अपने आप को यह सोचकर रोक लेता है कि दुनिया और समाज वाले क्या सोचेंगे और फिर वह मेरी बेटी है मैं अपनी बेटी के साथ ऐसा नहीं कर सकता।

लेकिन दूसरी तरफ आरती को इन सब बातों से कोई फर्क नहीं पड़ रहा था की दुनिया और समाज वाले मेरे बारे में क्या सोचेंगे और नहीं उसको इस रिश्ते से कोई फर्क पड़ रहा था कि वह दोनों बाप बेटी है।

और इसी तरह दोनों बाप बेटी अपने अपने ख्यालों में खोए हुए दोनों को नींद आ जाती है फिर सुबह उठकर सब अपने-अपने काम में लग जाते हैं राजनाथ सुबह नाश्ता पानी करके कहीं बाहर चला जाता है अपने काम से इधर आरती अपना खाना-वाना बनाने में लग जाती है खाना बनाने के बाद वह नहाने धोने में लग जाती है नहाने के बाद और अपना नाश्ता करती है और नाश्ता करके फिर कुछ देर आराम करने लगती है तब तक दोपहर हो जाता है और फिर राजनाथ भी घर आ जाता है और फिर आरती उसको खाना खाने के लिए कहती है और फिर उसको खाना लाकर देती है।

फिर राजनाथ चुपचाप खाना खाने लगता है खाते-खाते पूछता है की दादी कहां गई है तो आरती जवाब देती कि पता नहीं सुबह नाश्ता करके निकली हुई है किसी के घर में बैठी हुई होगी।

राजनाथ तुमने खाना खाया कि नहीं।

आरती आपने खाना खाया नहीं मैं ही पहले खा लूंगी सुबह नाश्ता किया है आपके खाने के बाद खा लूंगी।

राजनाथ खाना खाने के बाद वही बरामदे में चौकी के ऊपर लेट कर आराम करने लगता है आरती राजनाथ को लेते हुए देखकर उसके दिमाग में ख्याल आता है की दादी अभी घर में नहीं है और सिर्फ हम दोनों ही बाप बेटी हैं तो क्यों ना इस पल का थोड़ा बहुत फायदा उठा लिया जाए यह सोचकर वो राजनाथ के पास जाती है और कहती है बाबूजी सो गए क्या तो राजनाथ अपनी आंख बंद कर लेटा हुआ था तो आंख खोल कर आरती को देखते हुए कहता है नहीं क्यों क्या हुआ।

आरती नहीं मैं पूछ रही थी कि आपका पैर दबा दूं क्या मैं सोच रही थी की आप आप बाहर से आए हैं तो थक गए होंगे इसलिए दबा देती हूं।

राजनाथ उसकी आंखों में देखते हुए कहता है क्या बात है आज मेरे ऊपर बड़ा प्यार आ रहा है क्या बात हो गई आज।

आरती कुछ नहीं क्या बात होगी आप मेरे बाबूजी हैं आपके ऊपर प्यार नहीं आएगा तो किसके ऊपर आएगा आप मेरे लिए इतना सब कुछ करते हैं तो क्या मैं आपका पैर भी नहीं दबा सकती।


राजनाथ वह तो ठीक है लेकिन मुझे तो अभी थकान महसूस नहीं हो रही है अगर फिर भी तो दबाना चाह रही है तो दबा दो लेकिन दादी आ गई तो फिर क्या होगा।

आरती तो क्या होगा मैं बोल दूंगी की पैर ही तो दबा रही हूं और कुछ थोड़ी कर रही हूं।

राजनाथ वो तुमको नहीं वह मुझे चार बात सुनाएगी और रहेगी कि ऐसा क्या कमाई करता है कि रात में भी पैर दबवाता और दिन में भी दबवा रहा है इसलिए जा और देख कर आवो कि बाहर वाला गेट बंद है कि नहीं फिर आरती संगे संग जाती है बाहर वाला गेट बंद करके आ जाती है और कहती है कि मैं गेट बंद कर दिया अब आपको कोई दिक्कत तो नहीं होगी ना।

राजनाथ नहीं अब मुझे कोई दिक्कत नहीं होगी अब तुम जितना पैर दबाना चाहती है दबा सकती हो और मुस्कुरा देता है और आरती भी मुस्कुराने लगती है और फिर वह झुक कर उसकी तरफ मुंह करके उसका पैर दबाने लगती है तो उसके बाल जो थे वह बार-बार नीचे सामने की तरफ गिर जा रहे थे क्योंकि आज वह नहाई हुई थी तो उसने अपने बाल को अभी तक बांधी नहीं थी इस वजह से उसका बाल बार-बार नीचे गिर जा रहा था और उसके बाल से शैंपू और उसकी बदन की खुशबू की मिश्रण जो था वो सीधा राजनाथ के नाक में घुस रहा था और वह जैसे ही उसको सूंघता है और वह सब कुछ भूल कर अलग ही दुनिया में खोने लगता है तभी आरती अपने बाल को लपेटकर पीछे मुड़कर बांध लेती है सभी राजनाथ उसकी तरफ देखा है तो देख कर चौंक जाता क्योंकि जब वह झूक कर उसका पैर दबा रही होती है तो उसके ब्लाउज के ऊपर से उसके दोनों छाती यानी उसके दोनों दूध उसको साफ-साफ नजर आ रहा था उसका ब्लाउज का गला बड़ा था इस वजह से उसका पूरा का पूरा दूध लटका हुआ नजर आ रहा था सिर्फ उसका काला भाग और निप्पल जो होता है वही नजर नहीं आ रहा था बाकि पूरा नजर आ रहा था उसको देखते ही राजनाथ का लंड टाइट होने लगता है वो तो वह तो अच्छा था कि उसने आज लंगोट बांध रखा था नहीं तो आज वो अपनी बेटी के सामने अपने लंड को खड़ा होने से नहीं रोक पाता राजनाथ को जैसे ही यह ख्याल आया कि उसने लंगोट बांध रखा है तो वह रिलैक्स हो गया की आरती को मेरे बारे में नहीं पता चलेगा कि मैं उसके बारे में क्या सोच रहा हूं अब वह और अच्छे से अपनी बेटी के

बदन को छुप छुप कर देखने लगा और लंगोट के अंदर उसका लंड सीधा होने के लिए बेचैन हो रहा था लेकिन वह बेचारा सीधा खड़ा नहीं हो पा रहा था।

तभी आरती देख लेती है कि बाबूजी छुप छुप के मेरे दूध को देख रहे हैं और वह दूसरी तरफ मुंह करके मुस्कुराने लगती है और यह देखकर उसे भी अच्छा लगने लगता है इधर बाप बेटी का यह सब चल ही रहा था कि तभी गेट के बाहर से दादी की आवाज आती है और वह कहती है गेट खोलने के लिए और दोनों बाप बेटी उसकी आवाज सुनकर हड़बड़ा जाते हैं।

राजनाथ कहता है कि अभी गेट नहीं लगा हुआ हो तो वो मुझे देखते ही चार बात सुना देती जा और जल्दी से गेट खोल दे नहीं तो गुस्सा होगी फिर आरती मुस्कुराते हुए गेट खोलने के लिए चली जाती है और राजनाथ चुपचाप आँख बंद करके सो जाता है और आरती गेट खोलते ही दादी से कहती है दादी कहाँ थी इतनी देर कब से इंतजार कर रही हूँ चलो जल्दी से खाना खा लो मैं भी अभी तक नहीं खाई हूँ फिर दोनों दादी और पोती खाना खाने लगती है और राजनाथ कुछ देर आराम करने के बाद वह भी कहीं निकल जाता है घूमने के लिए।

आरती खाना खाने के बाद कुछ देर आराम करने के लिए वह अपने कमरे में जाकर सो जाती है तभी उसकी याद आता है कि बाबूजी ने ब्रा और पैंटी पहन कर देखने के लिए कहा था फिर वह बेड से उठती है और अलमारी के पास जाकर अलमारी खोल के उसमें से एक पीस ब्रा और पैंटी निकालती है पहनने के लिए फिर साड़ी और ब्लाउज खोलकर ब्रा और पैंटी पहन कर देखती है तो फिटिंग बिल्कुल सही था फिर वह सोचती है कि बाबूजी ने तो देखने के लिए मना किया फिर उनको बताऊंगी कैसे मोबाइल भी नहीं है कि उसमें तस्वीर निकाल कर उनको दिखा देती फिर शाम को जब राजनाथ घर आता है और खाना-वाना खाने के बाद सोने के लिए चला जाता है फिर आरती भी कुछ देर के बाद खाना खाकर उसकी मालिश करने के लिए जाती है और जाकर चुपचाप मालिश करने लगती है फिर कुछ देर इसी तरह बीत जाता है और दोनों बाप बेटी एक दूसरे से कोई बात नहीं कर रहे थे आरती सोच रही थी कि इनको बताऊँ कि नहीं ब्रा और पैंटी के बारे में।

राजनाथ भी अपने मन मे यही सोच रहा था कि पूछूं कि नहीं पूछूं कुछ देर के बाद खामोशी तोड़ते हुए पूछ ही लेता है और आरती से कहता है कि पहन के देखा कि नहीं ।

आरती अनजान बनते हुए कहती है आप क्या पहनने के बारे में पूछ रहे हैं।

राजनाथ अरे ब्रा और पेंटी के बारे में पूछ रहा हूँ पहन कर देखी कि नहीं।

आरती अच्छा आप क्यों पूछ रहे हैं आपने तो कल ही मना कर दिया था कि आप नहीं देखेंगे तो फिर पूछ क्यों रहे अगर आप जानना चाहते हैं फिटिंग के बारे में तो मैं नहीं बताऊंगी अगर आप जानना चाहते हैं तो खुद आपको अपनी आँखों से देखना पड़ेगा अगर आप नहीं देखना चाहते तो मत देखिए मैं क्या कर सकती हूँ।

राजनाथ हार मानते हुए कहता है अच्छा बाबा मैं हार मान गया मैं तुमसे बहस नहीं कर सकता अब तुम जो कहोगी मैं वही करूंगा अब यह बताओ कि कब दिखाओगीअपनी ब्रा और पैंटी की फीटिंग।

आरती कब क्या दिखाऊंगी अभी देख लीजिए।

राजनाथ अभी कहां से दिखाओगी क्या मोबाइल में तस्वीर खींचकर रखी है जो अभी दिखाओगी।

आरती मोबाइल की जरूरत नहीं है मैं खुद आपके सामने खड़ी हूं तो मोबाइल की क्या जरूरत है।
राजनाथ को समझ में नहीं आता है कि यह क्या बोल रही है तो वह कहता है कि मैं कुछ समझ नहीं तुम क्या कह रही हो।

आरती मैं यह कह रही हूँ कि जब मैं खुद आपके सामने ब्रा और पैंटी पहनकर खड़ी हूं तो मोबाइल की क्या जरूरत है खुद अपनी आंखों से देख लीजिए।

यह बात सुनते ही राजनाथ चौक जाता है और चौंकते हुए कहता है ए तुम क्या कह रही हो ए कैसे हो सकता है।


आरती क्यों नहीं हो सकता मोबाइल में देख सकते हो तो ऐसे क्यों नहीं देख सकते और ऐसे देखने से तो और अच्छे से नजर आएगा।

राजनाथ वह तो ठीक है लेकिन मैं तुमको इस हालत में नहीं देख सकत यह गलत है।

आरती अच्छा ब्रा और पैंटी में देखना गलत है लेकिन पूरा नंगा देखना गलत नहीं है।

राजनाथ मैंने तुम्हें कब नंगा देखा है जो तुम कह रही हो की नंगा देखने में कोई गलत नहीं है।

आरती अच्छा नहाते वक्त आपने मुझे वॉशरूम में नंगा नहीं देखा है।

 राजनाथ वह तो मैं गलती से देखा था जानबूझकर थोड़ी देखा थ।

आरती जानबूझकर देखा है या गलती से देखा देखा तो है ना फिर ब्रा और पैंटी में देखना क्या गलत है।

राजनाथ लेकिन।

आरती लेकिन वेकिन छोड़िए देखना है तो बोलिए नहीं तो मैं जा रही हूँ सोने के लिए।

राजनाथ ठीक है अगर तुम नहीं मान रही हो और दिखाना ही चाह रही हो तो दिखा ही दो ।

आरती में क्या दिखाऊंगी आप खुद देख लीजिए।

राजनाथ नहीं अगर तुम खुद दिखाओगी तो दिखाओ नहीं तो फिर मैं भी नहीं देखूंगा।

आरती ठीक है मैं ही दिखा देती हूँ लेकिन आप अपनी आंख बंद कीजिए मैं जब तक ना कहूं खोलने के लिए राजनाथ अपनी आंख बंद कर लेता है और आरती अपनी साड़ी और ब्लाउज खोलने लगती है और खोलकर अलग कर देती है पूरी तरह ब्रा और पैंटी में खड़ी हो जाती है और फिर धीरे से कहती है कि आप अपनी आंख खोल लीजिए राजनाथ जैसे ही अपनी आंख खोलता है और सामने अपनी बेटी को ब्रा और पैंटी में देखकर दंग रह जाता है और उसको लगता है कि एक कुंवारी लड़की अभी-अभी जवान हो रही है वह उसके सामने खड़ी है इसको देखकर ऐसा लग रहा है कि जैसे इसको अभी किसी ने छुआ भी नहीं है राजनाथ उसकी बॉडी को ऊपर से नीचे तक निहारते हुए देख रहा था और आरती चुपचाप अपनी नज़रें झुका कर खड़ी हुई थी शर्म के मारे और वह कुछ बोल भी नहीं पा रही थी कुछ देर इसी तरह खड़ी रहने के बाद आरती धीरे से कहती है की बाबूजी अब मैं साड़ी पहन लूं तो राजनाथ कहता हैं हां हां पहन लो फिर वह साड़ी और ब्लाउज पहनकर फिर वहां से निकल के अपने कमरे में चली जाती है।

उसको जाने के बाद राजनाथ एकदम बेचैन हो जाता है उसका लंड पजामे के अंदर में उछल रहा था और राजनाथ को समझ में नहीं आ रहा था कि वह क्या करें उधर आरती अपने कमरे में जाकर बेड पर लेट कर सोचने लगती है और कहती है कि मैं यह सब अपने बाबूजी के सामने कैसे किया यह सोचकर उसका शरीर शर्म के मारे सिहर जाता है फिर दूसरे दिन सुबह होती है सुबह के बाद दोपहर होती है और दोपहर में राजनाथ कहीं बाहर से आता है तो आरती उसको खाना खाने के लिए देती है जैसे ही आरती किचन से खाना लेकर आ रही होती है तो राजनाथ उसको देख रहा होता है जैसे ही वह खाना देने के लिए झुकती है तो राजनाथ को उसकी दोनों दूध नजर आ जाता है राजनाथ उसको देखकर मुस्कराने लगता है तो आरती भी समझ जाती है कि बाबूजी क्यों मुस्कुरा रहे हैं अभी मुस्कुराते हुए वहां से चली जाती है फिर वह खाना खाते हो आरती से पूछता है दादी घर में नहीं है क्या तो आरती जवाब देती नहीं वह कहीं गई हुई घूमने के लिए राजनाथ खाना खाने के बाद फिर आराम करने लगता है तो आरती उसके पास जाती है और मुस्कुराते हुए पूछती है कि पैर दबा दूं क्या तो राजनाथ भी मुस्कुराते हुए कहता है अब तुम दबाने के लिए आई हो तो दबा दो पूछने की क्या जरूरत।


आरती पैर दबाने लगती है तो राजनाथ कहता है कि कल रात को तुमने जो दिखाया वह ठीक से नहीं देख पाया।

आरती क्यों क्यों नहीं देख पाए अच्छे से तो दिखाया था फिर भी बोल रहे हैं कि नहीं देख पाए।

राजनाथ वो रात का टाइम था ना इस वजह से ठीक से नजर नहीं आ रहा था।

आरती मतलब आप कहना क्या चाह रहे।

राजनाथ मेरा मतलब है कि अगर अभी दिखाओगी तो अच्छे से और क्लियर दिखेगा अगर तुम दिखाना चाहोगी तो अगर नहीं दिखाना चाहती है तो कोई बात नहीं


आरती मुस्कुराते हुए अच्छा पहले देखना नहीं चाहते थे और अब अच्छे से देखना है अगर दादी आ गई तो।

 राजनाथ दादी आएगी तो क्या होगा गेट तो अंदर से बंद रहेगा ।

तो जाइए देख लीजिए कि गेट अंदर से बंद है कि नहीं राजनाथ झट से उठता है और गेट बंद करके आता है और कहता है कि बंद है अब कोई दिक्कत नहीं होगा और वह चौकी पर बैठकर आरती को देखने लगता है और आरती चुपचाप खड़ी थी तो राजनाथ उसको कहता है कि अब क्या सोच रही है अब तो दिखा दो।

आरती धीरे से कहती है मैं नहीं दिखाऊंगी आप खुद देख लीजिए।

राजनाथ ऊपर का कपड़ा उतारोगी तभी तो देखूंगा मेरा मतलब है साड़ी और ब्लाउज खोलोगी तभी तो देखूंगा।

आरती मैं नहीं खोलूंगी आप खुद खोल लीजिए।

राजनाथ यह क्या बात है रात में तो तुमने अपने से खुद खोल कर दिखाया था और अभी मुझे खोलने के लिए कह रही हो।

आरती इसलिए की रात में मैंने आपको दिखाया था और अभी आप देखना चाह रहे हैं इसलिए आपको ही खोलना पड़ेगा।
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(अगला अपडेट पेज नंबर 64 में मिलेगा)
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Mohammed Ali

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51
3
8
Na
भाग २१
नमस्कार सभी पाठकों को आप सभी लोगों ने धैर्य के साथ इंतजार किया उसके लिए आप सभी को धन्यवाद।

तो आईए कहानी को आगे बढ़ते हैं अभी तक आप लोगों ने पढ़ा कि राजनाथ दोपहर में आरती से कहता है ब्रा और पैंटी पहन कर दिखाने के लिए , ,जबकि आरती रात में ही ब्रा और पैंटी पहन कर दिखा चुकी थी, लेकिन राजनाथ फिर से मजे लेने के लिए उसे दिन में पहन कर दिखाने के लिए बोल रहा है , यह कहकर कि वह रात में अच्छे से देख नहीं पाया इसलिए वह अभी देखना चाहता है ।

आरती _उसकी बात सुनकर मना नहीं करती लेकिन कहती है की दादी बाहर गई हुई है अगर वह आ गई तो।

राजनाथ_ आ जाएगी तो क्या होगा गेट अंदर से बंद कर देंगे आएगी तो बाहर से आवाज देगी तब खोल देंगे ।

आरती_ मुस्कुराते हुए अच्छा तो दादी बाहर खड़ी रहेगी और आप अंदर में अपनी बेटी की ब्रा और पैंटी की फिटिंग देखेंगे।राजनाथ अरे कपड़े के ही फिटिंग तो देखूंगा और कुछ तो नहीं देखूंगा इसमें गलत क्या है ।

आरती - फिर से मुस्कुराते हैं अरे मैं कहाँ कह रही हूँ कि यह गलत है मैं तो बस आप आपका तारीफ कर रही हूँ।

राजनाथ- मेरी तारीफ छोड़ो और अब जल्दी से दिखा दो आरती हाँ हाँ दिखा दूँगी पहले गेट तो बंद करके आईए।

राजनाथ - उठकर जाता है और गेट बंद करके जल्दी से वापस आ जाता है आकर बरामदे में चौकी पड़ा हुआ था उसी पर बैठ जाता है और वही साइड में आरती खड़ी हुई थी , राजनाथ थोड़ी देर चुप रहने के बाद आरती से कहता है कि अब क्यों चुपचाप खड़ी हो अब तो गेट बंद हो गया है तो किसका इंतजार कर रही हो अब तो दिखा दो।

आरती - भी आज कुछ अलग मूड में थी तो वह भी राजनाथ को और छेड़ना चाहती थी इसलिए वह कहती है कि हाँ हाँ तो देख लीजिए मैं कहाँ मना कर रही हूँ , तो राजनाथ कहता अरे देखूंगा तब जब तुम दिखाओगी मेरा मतलब है ऊपर के कपड़े उतारोगी तभी तो देखूंगा ऐसे कैसे देखूंगा , तभी आरती थोड़ा इठलाते हुए कहती है मैं नहीं उतारूंगी आप खुद उतार लीजिए ।

राजनाथ यह क्या बात हुई अभी तुम खुद दिखाने के लिए तैयार हुई थी और अब तुम बहाने बना रही हो ।

आरती मैं बहाना नहीं बना रही हूँ और यह कोई बहाना नहीं है अगर आपको फल खाना है तो थोडी बहुत तो मेहनत करनी ही पड़ेगी।

राजनाथ - अरे इसमें फल खाने की बात कहाँ से आ गई मैं फल खाने की बात थोड़ी कह रहा हूँ मैं तो सिर्फ फल दिखाने के लिए कह रहा हूँ बलकि फल भी दिखाने के लिए नहीं कह रहा फल के ऊपर जो कवर लगा हुआ है उसको दिखाने के लिए कह रहा हूँ।

आरती - आप जिसको देखाने की बात कह रहे हैं वह भी कोई मामूली चीज नहीं है उसको भी देखने के लिए सब तड़पते हैं और आपको इतनी आसानी से देखने को मिल रहा है फिर भी आप थोड़ी सी मेहनत नहीं करना चाहते इसलिए आज आपको थोड़ी सी मेहनत तो करनी ही पड़ेगी।

राजनाथ - मन में सोंचते हुए ए अब ऐसे नहीं मानेगी तो कहता है ठीक है लेकिन तुमको मेरी एक बात माननी पड़ेगी बोलो मानोगी कि नहीं।

आरती- बोलिए क्या बात है ।

राजनाथ- बात यह है कि इस बार तुम खुद ही खोल कर दिखा दो और अगर इसके बाद फिर कभी मुझे देखना होगा तो मैं खुद मेहनत कर लूँगा मेरा मतलब है मैं खुद तुम कहोगी तो मैं खुद खोल कर देख लूँगा।

राजनाथ- की बात सुनकर आरती मन ही मन कहती है कि मुझे पता था कि इतना आसानी से नहीं मानेंगे फिर वह कहती है ठीक है सिर्फ इस बार अगली बार के लिए अपनी बात याद रखीएगा।

राजनाथ- हाँ हाँ पक्का याद रखूँगा।

आरती- ठीक है अपनी आँखें बंद कीजिए।

राजनाथ- आँख क्यों बंद करनी है।

आरती -बंद कीजिए ना मुझे शर्म आ रही है।

राजनाथ- इसमें शर्माने की क्या बात है अच्छा ठीक है बंद कर लेता हूँ।

आरती- अपने कपड़े खोलने लगती है तभी उसका ब्लाउज का हूँक फंस जाता है तो थोड़ा टाइम लगता है तो राजनाथ पूछता है हो गया कितना टाइम लगाती हो।

आरती- थोड़ा सबर कीजिए यह आपका गंजी और पैजामा नहीं है कि फट से खोलकर निकाल दिया साड़ी और ब्लाउज है इसमें हूँक लगा हुआ रहता है इसको खोलने में टाइम लगता है अगर आपको जल्दी है तो आकर खुद ही खोल दीजिए राजनाथ अच्छा ठीक है तुम आराम से खोलो मैं तो बस ऐसे ही पूछ रहा था , तभी आरती कहती है हो गया है अब आप अपनी आँखें खोल लीजिए , राजनाथ क्या हो गया जैसे हो वह अपनी आँखें खोलता है और अपनी जवान बेटी को ब्रा और पैंटी में देखा है तो उसका मन एकदम उछलने लगता है और उसका मन करने लगता है कि वह अपनी बेटी को बाहों में भर ले और उसे बिस्तर पर ले जाकर उसके जिस्म के साथ खूब खेल , लेकिन वह जानता था कि वह ऐसा नहीं कर सकता इसलिए वह अपनी इच्छा को अपने मन में दबाते हुए वह सिर्फ अपनी आँखों से ही देखकर मजा लेने लगता है , और उसकी नजर उसके ब्रा में से निकले हुए आधे दूध को देखने लगता है और धीरे-धीरे उसकी नजर छाती पर से नाभि पर नाभि से फिर नीचे उसकी पैंटी पर जाता है और जैसे ही उसकी नजर उसकी दोनों टांगों के बीच उसकी फुली हुई चूत पर जाता है तो उसका लँड पजामे के अंदर में उछलने की कोशिश करता है लेकिन वह उछल नहीं पता , क्योंकि वह लंगोट में कसा हुआ था इस वजह से वह उछल नहीं पा रहा था। राजनाथ अपनी बेटी को इस रूप में देखकर वह अपने पुराने दिनों में खो गया था , जब मेरी बीवी शादी होकर आई थी तब बिल्कुल इसी तरह दिख रही थी लेकिन समय-समय की बात है उस वक्त में जो चाह रहा था वह कर पा रहा था लेकिन आज मैं चाहकर भी कुछ नहीं कर पा रहा हूँ , तभी आरती धीरे से कहती है कैसी लगी फिटिंग सही है कि नहीं राजनाथ उसकी बात को सुन नहीं पता , आरती फिर से कहती है बाबूजी बताइए ना फिटिंग कैसी है राजनाथ थोड़ा चौंकते हुए हाँ हाँ फिटिंग बहुत अच्छी है और तुम इसमें बहुत अच्छी लग रही हो राजनाथ कुछ सेकेंड बाद फिटिंग तो अच्छी है लेकिन थोड़ी टाइट लग रही है।

आरती- टाइट लग रही है क्या चीज टाइट लग रही है ब्रा या पैंटी।

राजनाथ- मुस्कुराते हुए ब्रा और पैंटी भी टाइट लग रही है और वो दोनों भी टाइट लग रही है।

आरती- क्या मतलब मैं समझी नहीं आपकी बात ब्रा और पैंटी भी टाइट लग रही है और वह दोनों भी टाइट लग रही है वह दोनों क्या है।

राजनाथ- वही दोनों जो ब्रा और पैंटी के अंदर में है मैं उन दोनों की बात कर रहा हूँ ।

आरती- राजनाथ की डबल मीनिंग वाली बात को समझ जाती है लेकिन फिर भी अनजान बनते हुए कहती है यह आप क्या कर रहे हैं मैं कुछ समझ नहीं पा रही हूँँ ब्रा और पैंटी के अंदर में क्या कुछ-कुछ भी तो नहीं है।

राजनाथ- अगर तुम ठीक से सोचोगी तो तुम्हें समझ में आएगा लेकिन कोई बात नहीं अगर तुमको समझ में नहीं आ रहा है तो फिर कभी बाद में समझ लेना लेकिन तुम्हारे ऊपर yah कपड़े बहुत अच्छे लग रहे हैं ।

आरती- आपने कहा कि वह दोनों भी टाइट है तो आपको कैसे पता कि वो दोनों भी टाइट है नाहीं अपने उसे छुआ है नाहीं ठीक से देखा है फिर आप कैसे कह सकते हैं की ढीला है कि टाइट है।

राजनाथ - इतना तजुर्बा तो है कि आम को देखकर बता सकता हूँ कि वह पका हुआ है कि कच्चा है ।

आरती - ठीक है मैं आपकी यह बात मान लेती हूँ की आपको इतने साल का तजुर्बा है और आप दूर से देख कर बता सकते हैं कि कच्चा है या पक्का लेकिन आप उसे आम के बारे में कैसे बता सकते हैं जो अंदर में छुपा हुआ है मेरा मतलब है नीचे वाले के बारे में वह तो आपको दिखाई नहीं दे रहा है तो आप उसके बारे में यह बात कैसे कह सकते हैं।

राजनाथ- मुस्कुराते हुए मैं इसलिए कह सकता हूं कि जो ऊपर वाले को ढीला नहीं कर पाया है वह नीचे वाले को क्या ढीला करेगा इसलिए मेरा तजुर्बा कहता है कि नीचे वाला भी टाइट ही होगा।

आरती- मुस्कुराते हुए अच्छा तो आप अंदाजे में तीर चला रहे हैं आप पूरा यकीन के साथ यह बात नहीं कह सकते ।

राजनाथ- नहीं मैं यकीन के साथ तो नहीं कह सकता लेकिन मेरा जो तजुर्बा कहता है वह मैंने तुमको बताया अब तुम ही बता सकती हो कि मेरा बात सही है या गलत ।

आरती- मैं कैसे बता सकती हूँ।

राजनाथ -तुम नहीं बताओगी तो और कौन बताएगा वह तुम्हारा चीज है तो तुम ही बताओगे ना और अगर तुम नहीं बता सकती तो फिर जो उसको देखेगा वही बता सकता है।

आरती - अच्छा कौन देखेगा उसको।

राजनाथ - मैं कैसे बता सकता हूँ तभी राजनाथ की माँ
बाहर से गेट खोलने की आवाज देती है , आरती उसकी बात सुनकर घबरा जाती और कहती है दादी आ गई अब क्या होगा, राजनाथ क्या होगा कुछ नहीं तुम अपने कपड़े लेकर कमरे में जाकर पहनो तब तक मैं गेट खोलता हूँ और उसे बता दूँगा की आरती घर में कुछ काम कर रही है।

आरती- अपने कपड़े लेकर कमरे के अंदर में जाने लगती है तो राजनाथ उसको जाते हुए देख रहा है और मन में सोच रहा है कि कुछ देर और इसी तरह मेरे साथ में रहती तो और अच्छा होता है लेकिन माँ को भी अभी आना था कुछ देर बाद आती तो क्या बिगड़ जाता फिर वह उठकर गेट खोलने के लिए चला जाता है जैसे ही गेट खोलता है तो उसकी माँ पूछती है की आरती कहाँ गई , राजनाथ कहीं नहीं घर में है कुछ काम कर रही होगी इसलिए मुझे बोली खोलने के लिए तो मैं आकर खोल दिया, फिर कुछ देर में आरती अपने कपड़े पहन कर बाहर आती है तो दादी पूछती है क्या काम कर रही थी जो गेट खोल नहीं खोल सकती और अपने बापू को भेज दिया गेट खोलने के लिए आरती कुछ नहीं दादी कपड़े चेंज कर रहे थे इसलिए मैं नहीं जा पाई तभि राजनाथ की तरफ देखती है तो राजनाथ उसको देखकर हल्का-हल्का मुस्कुरा रहा था तो आरती उसको देखकर शर्मा के अपनी नज़रें नीचे कर लेती है, तभी दादी कहती है कि मुझे भूख लगी है जा मेरा खाना लेकर आओ फिर दादी को खाना देती है फिर इसी तरह शाम गुजरती है फिर रात में खाना-वाना खाने के बाद जब राज नाथ को मालिश करने के लिए जाती है तो कहती है कि आज मैं ज्यादा देर तक मालिश नहीं कर पाऊंगी क्योंकि मेरे कमर मे और कमर नीचे दर्द कर रहा है ।

राजनाथ- क्यों क्या हुआ।

आरती - कुछ नहीं लगता है आने वाला है।

राजनाथ- क्या आने वाला है।

आरती- वही जो हर महीने आता है महीना पीरियड जब भी आने वाला रहता है तो इसी तरह दर्द करता है ।

राजनाथ - तो फिर दर्द का दवा क्यों नहीं खाती।

आरती - दर्द का दवा खाने से क्या होगा थोड़ा बहुत तो दर्द करेगा ही yah तो सभी औरतों के साथ होता है ।

राजनाथ- फिर तो तुमको तो अब जाना पड़ेगा।

आरती- कहाँ जाना पड़ेगा।

राजनाथ- ससुराल जाना पड़ेगा और कहाँ जाना पड़ेगा डॉक्टर के पास से जो दवा लेकर आई है उसको तो चालू करना पड़ेगा ना।

आरती -मैं नहीं जाने वाली हूँ जब तक लेने के लिए नहीं आएगा तब तक मैं नहीं जाऊंगी मैं इतनी गिरी भी नहीं हूं कि खुद चली जाऊंगी ।

राजनाथ - ठीक है मैं दामाद जी को फोन करके आने के लिए कहता हूँ , फिर आरती मालिश करके सोने के लिए चली जाती है और फिर सुबह होने से पहले ही उसका पीरियड चालू हो जाता है , सुबह नाश्ता करने के टाइम राजनाथ आरती से पूछता है कि पीरियड चालू हो गया , तो आरती कहती है कि हाँ चालू हो गया है।

नाश्ता करने के बाद राजनाथ अपने दामाद को फोन लगाता है और डॉक्टर वाली बात सब उसको बताता है और उसको आकर आरती को ले जाने के लिए कहता है फिर उसका दामाद दूसरे दिन आरती को लेने के लिए आ जाता है , आरती को जाने का मन नहीं था लेकिन वह मजबूरी में उसको जाना पड़ता है , जाने से पहले राजनाथ उसको दवा कैसे खाना है क्या करना है सब उसको समझा देता है।..........

(अगला अपडेट पेज नंबर 67 में मिलेगा)
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नमस्कार सभी पाठकों को आप सभी लोगों ने धैर्य के साथ इंतजार किया उसके लिए आप सभी को धन्यवाद।

तो आईए कहानी को आगे बढ़ते हैं अभी तक आप लोगों ने पढ़ा कि राजनाथ दोपहर में आरती से कहता है ब्रा और पैंटी पहन कर दिखाने के लिए , ,जबकि आरती रात में ही ब्रा और पैंटी पहन कर दिखा चुकी थी, लेकिन राजनाथ फिर से मजे लेने के लिए उसे दिन में पहन कर दिखाने के लिए बोल रहा है , यह कहकर कि वह रात में अच्छे से देख नहीं पाया इसलिए वह अभी देखना चाहता है ।

आरती _उसकी बात सुनकर मना नहीं करती लेकिन कहती है की दादी बाहर गई हुई है अगर वह आ गई तो।

राजनाथ_ आ जाएगी तो क्या होगा गेट अंदर से बंद कर देंगे आएगी तो बाहर से आवाज देगी तब खोल देंगे ।

आरती_ मुस्कुराते हुए अच्छा तो दादी बाहर खड़ी रहेगी और आप अंदर में अपनी बेटी की ब्रा और पैंटी की फिटिंग देखेंगे।राजनाथ अरे कपड़े के ही फिटिंग तो देखूंगा और कुछ तो नहीं देखूंगा इसमें गलत क्या है ।

आरती - फिर से मुस्कुराते हैं अरे मैं कहाँ कह रही हूँ कि यह गलत है मैं तो बस आप आपका तारीफ कर रही हूँ।

राजनाथ- मेरी तारीफ छोड़ो और अब जल्दी से दिखा दो आरती हाँ हाँ दिखा दूँगी पहले गेट तो बंद करके आईए।

राजनाथ - उठकर जाता है और गेट बंद करके जल्दी से वापस आ जाता है आकर बरामदे में चौकी पड़ा हुआ था उसी पर बैठ जाता है और वही साइड में आरती खड़ी हुई थी , राजनाथ थोड़ी देर चुप रहने के बाद आरती से कहता है कि अब क्यों चुपचाप खड़ी हो अब तो गेट बंद हो गया है तो किसका इंतजार कर रही हो अब तो दिखा दो।

आरती - भी आज कुछ अलग मूड में थी तो वह भी राजनाथ को और छेड़ना चाहती थी इसलिए वह कहती है कि हाँ हाँ तो देख लीजिए मैं कहाँ मना कर रही हूँ , तो राजनाथ कहता अरे देखूंगा तब जब तुम दिखाओगी मेरा मतलब है ऊपर के कपड़े उतारोगी तभी तो देखूंगा ऐसे कैसे देखूंगा , तभी आरती थोड़ा इठलाते हुए कहती है मैं नहीं उतारूंगी आप खुद उतार लीजिए ।

राजनाथ यह क्या बात हुई अभी तुम खुद दिखाने के लिए तैयार हुई थी और अब तुम बहाने बना रही हो ।

आरती मैं बहाना नहीं बना रही हूँ और यह कोई बहाना नहीं है अगर आपको फल खाना है तो थोडी बहुत तो मेहनत करनी ही पड़ेगी।

राजनाथ - अरे इसमें फल खाने की बात कहाँ से आ गई मैं फल खाने की बात थोड़ी कह रहा हूँ मैं तो सिर्फ फल दिखाने के लिए कह रहा हूँ बलकि फल भी दिखाने के लिए नहीं कह रहा फल के ऊपर जो कवर लगा हुआ है उसको दिखाने के लिए कह रहा हूँ।

आरती - आप जिसको देखाने की बात कह रहे हैं वह भी कोई मामूली चीज नहीं है उसको भी देखने के लिए सब तड़पते हैं और आपको इतनी आसानी से देखने को मिल रहा है फिर भी आप थोड़ी सी मेहनत नहीं करना चाहते इसलिए आज आपको थोड़ी सी मेहनत तो करनी ही पड़ेगी।

राजनाथ - मन में सोंचते हुए ए अब ऐसे नहीं मानेगी तो कहता है ठीक है लेकिन तुमको मेरी एक बात माननी पड़ेगी बोलो मानोगी कि नहीं।

आरती- बोलिए क्या बात है ।

राजनाथ- बात यह है कि इस बार तुम खुद ही खोल कर दिखा दो और अगर इसके बाद फिर कभी मुझे देखना होगा तो मैं खुद मेहनत कर लूँगा मेरा मतलब है मैं खुद तुम कहोगी तो मैं खुद खोल कर देख लूँगा।

राजनाथ- की बात सुनकर आरती मन ही मन कहती है कि मुझे पता था कि इतना आसानी से नहीं मानेंगे फिर वह कहती है ठीक है सिर्फ इस बार अगली बार के लिए अपनी बात याद रखीएगा।

राजनाथ- हाँ हाँ पक्का याद रखूँगा।

आरती- ठीक है अपनी आँखें बंद कीजिए।

राजनाथ- आँख क्यों बंद करनी है।

आरती -बंद कीजिए ना मुझे शर्म आ रही है।

राजनाथ- इसमें शर्माने की क्या बात है अच्छा ठीक है बंद कर लेता हूँ।

आरती- अपने कपड़े खोलने लगती है तभी उसका ब्लाउज का हूँक फंस जाता है तो थोड़ा टाइम लगता है तो राजनाथ पूछता है हो गया कितना टाइम लगाती हो।

आरती- थोड़ा सबर कीजिए यह आपका गंजी और पैजामा नहीं है कि फट से खोलकर निकाल दिया साड़ी और ब्लाउज है इसमें हूँक लगा हुआ रहता है इसको खोलने में टाइम लगता है अगर आपको जल्दी है तो आकर खुद ही खोल दीजिए राजनाथ अच्छा ठीक है तुम आराम से खोलो मैं तो बस ऐसे ही पूछ रहा था , तभी आरती कहती है हो गया है अब आप अपनी आँखें खोल लीजिए , राजनाथ क्या हो गया जैसे हो वह अपनी आँखें खोलता है और अपनी जवान बेटी को ब्रा और पैंटी में देखा है तो उसका मन एकदम उछलने लगता है और उसका मन करने लगता है कि वह अपनी बेटी को बाहों में भर ले और उसे बिस्तर पर ले जाकर उसके जिस्म के साथ खूब खेल , लेकिन वह जानता था कि वह ऐसा नहीं कर सकता इसलिए वह अपनी इच्छा को अपने मन में दबाते हुए वह सिर्फ अपनी आँखों से ही देखकर मजा लेने लगता है , और उसकी नजर उसके ब्रा में से निकले हुए आधे दूध को देखने लगता है और धीरे-धीरे उसकी नजर छाती पर से नाभि पर नाभि से फिर नीचे उसकी पैंटी पर जाता है और जैसे ही उसकी नजर उसकी दोनों टांगों के बीच उसकी फुली हुई चूत पर जाता है तो उसका लँड पजामे के अंदर में उछलने की कोशिश करता है लेकिन वह उछल नहीं पता , क्योंकि वह लंगोट में कसा हुआ था इस वजह से वह उछल नहीं पा रहा था। राजनाथ अपनी बेटी को इस रूप में देखकर वह अपने पुराने दिनों में खो गया था , जब मेरी बीवी शादी होकर आई थी तब बिल्कुल इसी तरह दिख रही थी लेकिन समय-समय की बात है उस वक्त में जो चाह रहा था वह कर पा रहा था लेकिन आज मैं चाहकर भी कुछ नहीं कर पा रहा हूँ , तभी आरती धीरे से कहती है कैसी लगी फिटिंग सही है कि नहीं राजनाथ उसकी बात को सुन नहीं पता , आरती फिर से कहती है बाबूजी बताइए ना फिटिंग कैसी है राजनाथ थोड़ा चौंकते हुए हाँ हाँ फिटिंग बहुत अच्छी है और तुम इसमें बहुत अच्छी लग रही हो राजनाथ कुछ सेकेंड बाद फिटिंग तो अच्छी है लेकिन थोड़ी टाइट लग रही है।

आरती- टाइट लग रही है क्या चीज टाइट लग रही है ब्रा या पैंटी।

राजनाथ- मुस्कुराते हुए ब्रा और पैंटी भी टाइट लग रही है और वो दोनों भी टाइट लग रही है।

आरती- क्या मतलब मैं समझी नहीं आपकी बात ब्रा और पैंटी भी टाइट लग रही है और वह दोनों भी टाइट लग रही है वह दोनों क्या है।

राजनाथ- वही दोनों जो ब्रा और पैंटी के अंदर में है मैं उन दोनों की बात कर रहा हूँ ।

आरती- राजनाथ की डबल मीनिंग वाली बात को समझ जाती है लेकिन फिर भी अनजान बनते हुए कहती है यह आप क्या कर रहे हैं मैं कुछ समझ नहीं पा रही हूँँ ब्रा और पैंटी के अंदर में क्या कुछ-कुछ भी तो नहीं है।

राजनाथ- अगर तुम ठीक से सोचोगी तो तुम्हें समझ में आएगा लेकिन कोई बात नहीं अगर तुमको समझ में नहीं आ रहा है तो फिर कभी बाद में समझ लेना लेकिन तुम्हारे ऊपर yah कपड़े बहुत अच्छे लग रहे हैं ।

आरती- आपने कहा कि वह दोनों भी टाइट है तो आपको कैसे पता कि वो दोनों भी टाइट है नाहीं अपने उसे छुआ है नाहीं ठीक से देखा है फिर आप कैसे कह सकते हैं की ढीला है कि टाइट है।

राजनाथ - इतना तजुर्बा तो है कि आम को देखकर बता सकता हूँ कि वह पका हुआ है कि कच्चा है ।

आरती - ठीक है मैं आपकी यह बात मान लेती हूँ की आपको इतने साल का तजुर्बा है और आप दूर से देख कर बता सकते हैं कि कच्चा है या पक्का लेकिन आप उसे आम के बारे में कैसे बता सकते हैं जो अंदर में छुपा हुआ है मेरा मतलब है नीचे वाले के बारे में वह तो आपको दिखाई नहीं दे रहा है तो आप उसके बारे में यह बात कैसे कह सकते हैं।

राजनाथ- मुस्कुराते हुए मैं इसलिए कह सकता हूं कि जो ऊपर वाले को ढीला नहीं कर पाया है वह नीचे वाले को क्या ढीला करेगा इसलिए मेरा तजुर्बा कहता है कि नीचे वाला भी टाइट ही होगा।

आरती- मुस्कुराते हुए अच्छा तो आप अंदाजे में तीर चला रहे हैं आप पूरा यकीन के साथ यह बात नहीं कह सकते ।

राजनाथ- नहीं मैं यकीन के साथ तो नहीं कह सकता लेकिन मेरा जो तजुर्बा कहता है वह मैंने तुमको बताया अब तुम ही बता सकती हो कि मेरा बात सही है या गलत ।

आरती- मैं कैसे बता सकती हूँ।

राजनाथ -तुम नहीं बताओगी तो और कौन बताएगा वह तुम्हारा चीज है तो तुम ही बताओगे ना और अगर तुम नहीं बता सकती तो फिर जो उसको देखेगा वही बता सकता है।

आरती - अच्छा कौन देखेगा उसको।

राजनाथ - मैं कैसे बता सकता हूँ तभी राजनाथ की माँ
बाहर से गेट खोलने की आवाज देती है , आरती उसकी बात सुनकर घबरा जाती और कहती है दादी आ गई अब क्या होगा, राजनाथ क्या होगा कुछ नहीं तुम अपने कपड़े लेकर कमरे में जाकर पहनो तब तक मैं गेट खोलता हूँ और उसे बता दूँगा की आरती घर में कुछ काम कर रही है।

आरती- अपने कपड़े लेकर कमरे के अंदर में जाने लगती है तो राजनाथ उसको जाते हुए देख रहा है और मन में सोच रहा है कि कुछ देर और इसी तरह मेरे साथ में रहती तो और अच्छा होता है लेकिन माँ को भी अभी आना था कुछ देर बाद आती तो क्या बिगड़ जाता फिर वह उठकर गेट खोलने के लिए चला जाता है जैसे ही गेट खोलता है तो उसकी माँ पूछती है की आरती कहाँ गई , राजनाथ कहीं नहीं घर में है कुछ काम कर रही होगी इसलिए मुझे बोली खोलने के लिए तो मैं आकर खोल दिया, फिर कुछ देर में आरती अपने कपड़े पहन कर बाहर आती है तो दादी पूछती है क्या काम कर रही थी जो गेट खोल नहीं खोल सकती और अपने बापू को भेज दिया गेट खोलने के लिए आरती कुछ नहीं दादी कपड़े चेंज कर रहे थे इसलिए मैं नहीं जा पाई तभि राजनाथ की तरफ देखती है तो राजनाथ उसको देखकर हल्का-हल्का मुस्कुरा रहा था तो आरती उसको देखकर शर्मा के अपनी नज़रें नीचे कर लेती है, तभी दादी कहती है कि मुझे भूख लगी है जा मेरा खाना लेकर आओ फिर दादी को खाना देती है फिर इसी तरह शाम गुजरती है फिर रात में खाना-वाना खाने के बाद जब राज नाथ को मालिश करने के लिए जाती है तो कहती है कि आज मैं ज्यादा देर तक मालिश नहीं कर पाऊंगी क्योंकि मेरे कमर मे और कमर नीचे दर्द कर रहा है ।

राजनाथ- क्यों क्या हुआ।

आरती - कुछ नहीं लगता है आने वाला है।

राजनाथ- क्या आने वाला है।

आरती- वही जो हर महीने आता है महीना पीरियड जब भी आने वाला रहता है तो इसी तरह दर्द करता है ।

राजनाथ - तो फिर दर्द का दवा क्यों नहीं खाती।

आरती - दर्द का दवा खाने से क्या होगा थोड़ा बहुत तो दर्द करेगा ही yah तो सभी औरतों के साथ होता है ।

राजनाथ- फिर तो तुमको तो अब जाना पड़ेगा।

आरती- कहाँ जाना पड़ेगा।

राजनाथ- ससुराल जाना पड़ेगा और कहाँ जाना पड़ेगा डॉक्टर के पास से जो दवा लेकर आई है उसको तो चालू करना पड़ेगा ना।

आरती -मैं नहीं जाने वाली हूँ जब तक लेने के लिए नहीं आएगा तब तक मैं नहीं जाऊंगी मैं इतनी गिरी भी नहीं हूं कि खुद चली जाऊंगी ।

राजनाथ - ठीक है मैं दामाद जी को फोन करके आने के लिए कहता हूँ , फिर आरती मालिश करके सोने के लिए चली जाती है और फिर सुबह होने से पहले ही उसका पीरियड चालू हो जाता है , सुबह नाश्ता करने के टाइम राजनाथ आरती से पूछता है कि पीरियड चालू हो गया , तो आरती कहती है कि हाँ चालू हो गया है।

नाश्ता करने के बाद राजनाथ अपने दामाद को फोन लगाता है और डॉक्टर वाली बात सब उसको बताता है और उसको आकर आरती को ले जाने के लिए कहता है फिर उसका दामाद दूसरे दिन आरती को लेने के लिए आ जाता है , आरती को जाने का मन नहीं था लेकिन वह मजबूरी में उसको जाना पड़ता है , जाने से पहले राजनाथ उसको दवा कैसे खाना है क्या करना है सब उसको समझा देता है।..........

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तो आईए कहानी को आगे बढ़ते हैं अभी तक आप लोगों ने पढ़ा कि राजनाथ दोपहर में आरती से कहता है ब्रा और पैंटी पहन कर दिखाने के लिए , ,जबकि आरती रात में ही ब्रा और पैंटी पहन कर दिखा चुकी थी, लेकिन राजनाथ फिर से मजे लेने के लिए उसे दिन में पहन कर दिखाने के लिए बोल रहा है , यह कहकर कि वह रात में अच्छे से देख नहीं पाया इसलिए वह अभी देखना चाहता है ।

आरती _उसकी बात सुनकर मना नहीं करती लेकिन कहती है की दादी बाहर गई हुई है अगर वह आ गई तो।

राजनाथ_ आ जाएगी तो क्या होगा गेट अंदर से बंद कर देंगे आएगी तो बाहर से आवाज देगी तब खोल देंगे ।

आरती_ मुस्कुराते हुए अच्छा तो दादी बाहर खड़ी रहेगी और आप अंदर में अपनी बेटी की ब्रा और पैंटी की फिटिंग देखेंगे।राजनाथ अरे कपड़े के ही फिटिंग तो देखूंगा और कुछ तो नहीं देखूंगा इसमें गलत क्या है ।

आरती - फिर से मुस्कुराते हैं अरे मैं कहाँ कह रही हूँ कि यह गलत है मैं तो बस आप आपका तारीफ कर रही हूँ।

राजनाथ- मेरी तारीफ छोड़ो और अब जल्दी से दिखा दो आरती हाँ हाँ दिखा दूँगी पहले गेट तो बंद करके आईए।

राजनाथ - उठकर जाता है और गेट बंद करके जल्दी से वापस आ जाता है आकर बरामदे में चौकी पड़ा हुआ था उसी पर बैठ जाता है और वही साइड में आरती खड़ी हुई थी , राजनाथ थोड़ी देर चुप रहने के बाद आरती से कहता है कि अब क्यों चुपचाप खड़ी हो अब तो गेट बंद हो गया है तो किसका इंतजार कर रही हो अब तो दिखा दो।

आरती - भी आज कुछ अलग मूड में थी तो वह भी राजनाथ को और छेड़ना चाहती थी इसलिए वह कहती है कि हाँ हाँ तो देख लीजिए मैं कहाँ मना कर रही हूँ , तो राजनाथ कहता अरे देखूंगा तब जब तुम दिखाओगी मेरा मतलब है ऊपर के कपड़े उतारोगी तभी तो देखूंगा ऐसे कैसे देखूंगा , तभी आरती थोड़ा इठलाते हुए कहती है मैं नहीं उतारूंगी आप खुद उतार लीजिए ।

राजनाथ यह क्या बात हुई अभी तुम खुद दिखाने के लिए तैयार हुई थी और अब तुम बहाने बना रही हो ।

आरती मैं बहाना नहीं बना रही हूँ और यह कोई बहाना नहीं है अगर आपको फल खाना है तो थोडी बहुत तो मेहनत करनी ही पड़ेगी।

राजनाथ - अरे इसमें फल खाने की बात कहाँ से आ गई मैं फल खाने की बात थोड़ी कह रहा हूँ मैं तो सिर्फ फल दिखाने के लिए कह रहा हूँ बलकि फल भी दिखाने के लिए नहीं कह रहा फल के ऊपर जो कवर लगा हुआ है उसको दिखाने के लिए कह रहा हूँ।

आरती - आप जिसको देखाने की बात कह रहे हैं वह भी कोई मामूली चीज नहीं है उसको भी देखने के लिए सब तड़पते हैं और आपको इतनी आसानी से देखने को मिल रहा है फिर भी आप थोड़ी सी मेहनत नहीं करना चाहते इसलिए आज आपको थोड़ी सी मेहनत तो करनी ही पड़ेगी।

राजनाथ - मन में सोंचते हुए ए अब ऐसे नहीं मानेगी तो कहता है ठीक है लेकिन तुमको मेरी एक बात माननी पड़ेगी बोलो मानोगी कि नहीं।

आरती- बोलिए क्या बात है ।

राजनाथ- बात यह है कि इस बार तुम खुद ही खोल कर दिखा दो और अगर इसके बाद फिर कभी मुझे देखना होगा तो मैं खुद मेहनत कर लूँगा मेरा मतलब है मैं खुद तुम कहोगी तो मैं खुद खोल कर देख लूँगा।

राजनाथ- की बात सुनकर आरती मन ही मन कहती है कि मुझे पता था कि इतना आसानी से नहीं मानेंगे फिर वह कहती है ठीक है सिर्फ इस बार अगली बार के लिए अपनी बात याद रखीएगा।

राजनाथ- हाँ हाँ पक्का याद रखूँगा।

आरती- ठीक है अपनी आँखें बंद कीजिए।

राजनाथ- आँख क्यों बंद करनी है।

आरती -बंद कीजिए ना मुझे शर्म आ रही है।

राजनाथ- इसमें शर्माने की क्या बात है अच्छा ठीक है बंद कर लेता हूँ।

आरती- अपने कपड़े खोलने लगती है तभी उसका ब्लाउज का हूँक फंस जाता है तो थोड़ा टाइम लगता है तो राजनाथ पूछता है हो गया कितना टाइम लगाती हो।

आरती- थोड़ा सबर कीजिए यह आपका गंजी और पैजामा नहीं है कि फट से खोलकर निकाल दिया साड़ी और ब्लाउज है इसमें हूँक लगा हुआ रहता है इसको खोलने में टाइम लगता है अगर आपको जल्दी है तो आकर खुद ही खोल दीजिए राजनाथ अच्छा ठीक है तुम आराम से खोलो मैं तो बस ऐसे ही पूछ रहा था , तभी आरती कहती है हो गया है अब आप अपनी आँखें खोल लीजिए , राजनाथ क्या हो गया जैसे हो वह अपनी आँखें खोलता है और अपनी जवान बेटी को ब्रा और पैंटी में देखा है तो उसका मन एकदम उछलने लगता है और उसका मन करने लगता है कि वह अपनी बेटी को बाहों में भर ले और उसे बिस्तर पर ले जाकर उसके जिस्म के साथ खूब खेल , लेकिन वह जानता था कि वह ऐसा नहीं कर सकता इसलिए वह अपनी इच्छा को अपने मन में दबाते हुए वह सिर्फ अपनी आँखों से ही देखकर मजा लेने लगता है , और उसकी नजर उसके ब्रा में से निकले हुए आधे दूध को देखने लगता है और धीरे-धीरे उसकी नजर छाती पर से नाभि पर नाभि से फिर नीचे उसकी पैंटी पर जाता है और जैसे ही उसकी नजर उसकी दोनों टांगों के बीच उसकी फुली हुई चूत पर जाता है तो उसका लँड पजामे के अंदर में उछलने की कोशिश करता है लेकिन वह उछल नहीं पता , क्योंकि वह लंगोट में कसा हुआ था इस वजह से वह उछल नहीं पा रहा था। राजनाथ अपनी बेटी को इस रूप में देखकर वह अपने पुराने दिनों में खो गया था , जब मेरी बीवी शादी होकर आई थी तब बिल्कुल इसी तरह दिख रही थी लेकिन समय-समय की बात है उस वक्त में जो चाह रहा था वह कर पा रहा था लेकिन आज मैं चाहकर भी कुछ नहीं कर पा रहा हूँ , तभी आरती धीरे से कहती है कैसी लगी फिटिंग सही है कि नहीं राजनाथ उसकी बात को सुन नहीं पता , आरती फिर से कहती है बाबूजी बताइए ना फिटिंग कैसी है राजनाथ थोड़ा चौंकते हुए हाँ हाँ फिटिंग बहुत अच्छी है और तुम इसमें बहुत अच्छी लग रही हो राजनाथ कुछ सेकेंड बाद फिटिंग तो अच्छी है लेकिन थोड़ी टाइट लग रही है।

आरती- टाइट लग रही है क्या चीज टाइट लग रही है ब्रा या पैंटी।

राजनाथ- मुस्कुराते हुए ब्रा और पैंटी भी टाइट लग रही है और वो दोनों भी टाइट लग रही है।

आरती- क्या मतलब मैं समझी नहीं आपकी बात ब्रा और पैंटी भी टाइट लग रही है और वह दोनों भी टाइट लग रही है वह दोनों क्या है।

राजनाथ- वही दोनों जो ब्रा और पैंटी के अंदर में है मैं उन दोनों की बात कर रहा हूँ ।

आरती- राजनाथ की डबल मीनिंग वाली बात को समझ जाती है लेकिन फिर भी अनजान बनते हुए कहती है यह आप क्या कर रहे हैं मैं कुछ समझ नहीं पा रही हूँँ ब्रा और पैंटी के अंदर में क्या कुछ-कुछ भी तो नहीं है।

राजनाथ- अगर तुम ठीक से सोचोगी तो तुम्हें समझ में आएगा लेकिन कोई बात नहीं अगर तुमको समझ में नहीं आ रहा है तो फिर कभी बाद में समझ लेना लेकिन तुम्हारे ऊपर yah कपड़े बहुत अच्छे लग रहे हैं ।

आरती- आपने कहा कि वह दोनों भी टाइट है तो आपको कैसे पता कि वो दोनों भी टाइट है नाहीं अपने उसे छुआ है नाहीं ठीक से देखा है फिर आप कैसे कह सकते हैं की ढीला है कि टाइट है।

राजनाथ - इतना तजुर्बा तो है कि आम को देखकर बता सकता हूँ कि वह पका हुआ है कि कच्चा है ।

आरती - ठीक है मैं आपकी यह बात मान लेती हूँ की आपको इतने साल का तजुर्बा है और आप दूर से देख कर बता सकते हैं कि कच्चा है या पक्का लेकिन आप उसे आम के बारे में कैसे बता सकते हैं जो अंदर में छुपा हुआ है मेरा मतलब है नीचे वाले के बारे में वह तो आपको दिखाई नहीं दे रहा है तो आप उसके बारे में यह बात कैसे कह सकते हैं।

राजनाथ- मुस्कुराते हुए मैं इसलिए कह सकता हूं कि जो ऊपर वाले को ढीला नहीं कर पाया है वह नीचे वाले को क्या ढीला करेगा इसलिए मेरा तजुर्बा कहता है कि नीचे वाला भी टाइट ही होगा।

आरती- मुस्कुराते हुए अच्छा तो आप अंदाजे में तीर चला रहे हैं आप पूरा यकीन के साथ यह बात नहीं कह सकते ।

राजनाथ- नहीं मैं यकीन के साथ तो नहीं कह सकता लेकिन मेरा जो तजुर्बा कहता है वह मैंने तुमको बताया अब तुम ही बता सकती हो कि मेरा बात सही है या गलत ।

आरती- मैं कैसे बता सकती हूँ।

राजनाथ -तुम नहीं बताओगी तो और कौन बताएगा वह तुम्हारा चीज है तो तुम ही बताओगे ना और अगर तुम नहीं बता सकती तो फिर जो उसको देखेगा वही बता सकता है।

आरती - अच्छा कौन देखेगा उसको।

राजनाथ - मैं कैसे बता सकता हूँ तभी राजनाथ की माँ
बाहर से गेट खोलने की आवाज देती है , आरती उसकी बात सुनकर घबरा जाती और कहती है दादी आ गई अब क्या होगा, राजनाथ क्या होगा कुछ नहीं तुम अपने कपड़े लेकर कमरे में जाकर पहनो तब तक मैं गेट खोलता हूँ और उसे बता दूँगा की आरती घर में कुछ काम कर रही है।

आरती- अपने कपड़े लेकर कमरे के अंदर में जाने लगती है तो राजनाथ उसको जाते हुए देख रहा है और मन में सोच रहा है कि कुछ देर और इसी तरह मेरे साथ में रहती तो और अच्छा होता है लेकिन माँ को भी अभी आना था कुछ देर बाद आती तो क्या बिगड़ जाता फिर वह उठकर गेट खोलने के लिए चला जाता है जैसे ही गेट खोलता है तो उसकी माँ पूछती है की आरती कहाँ गई , राजनाथ कहीं नहीं घर में है कुछ काम कर रही होगी इसलिए मुझे बोली खोलने के लिए तो मैं आकर खोल दिया, फिर कुछ देर में आरती अपने कपड़े पहन कर बाहर आती है तो दादी पूछती है क्या काम कर रही थी जो गेट खोल नहीं खोल सकती और अपने बापू को भेज दिया गेट खोलने के लिए आरती कुछ नहीं दादी कपड़े चेंज कर रहे थे इसलिए मैं नहीं जा पाई तभि राजनाथ की तरफ देखती है तो राजनाथ उसको देखकर हल्का-हल्का मुस्कुरा रहा था तो आरती उसको देखकर शर्मा के अपनी नज़रें नीचे कर लेती है, तभी दादी कहती है कि मुझे भूख लगी है जा मेरा खाना लेकर आओ फिर दादी को खाना देती है फिर इसी तरह शाम गुजरती है फिर रात में खाना-वाना खाने के बाद जब राज नाथ को मालिश करने के लिए जाती है तो कहती है कि आज मैं ज्यादा देर तक मालिश नहीं कर पाऊंगी क्योंकि मेरे कमर मे और कमर नीचे दर्द कर रहा है ।

राजनाथ- क्यों क्या हुआ।

आरती - कुछ नहीं लगता है आने वाला है।

राजनाथ- क्या आने वाला है।

आरती- वही जो हर महीने आता है महीना पीरियड जब भी आने वाला रहता है तो इसी तरह दर्द करता है ।

राजनाथ - तो फिर दर्द का दवा क्यों नहीं खाती।

आरती - दर्द का दवा खाने से क्या होगा थोड़ा बहुत तो दर्द करेगा ही yah तो सभी औरतों के साथ होता है ।

राजनाथ- फिर तो तुमको तो अब जाना पड़ेगा।

आरती- कहाँ जाना पड़ेगा।

राजनाथ- ससुराल जाना पड़ेगा और कहाँ जाना पड़ेगा डॉक्टर के पास से जो दवा लेकर आई है उसको तो चालू करना पड़ेगा ना।

आरती -मैं नहीं जाने वाली हूँ जब तक लेने के लिए नहीं आएगा तब तक मैं नहीं जाऊंगी मैं इतनी गिरी भी नहीं हूं कि खुद चली जाऊंगी ।

राजनाथ - ठीक है मैं दामाद जी को फोन करके आने के लिए कहता हूँ , फिर आरती मालिश करके सोने के लिए चली जाती है और फिर सुबह होने से पहले ही उसका पीरियड चालू हो जाता है , सुबह नाश्ता करने के टाइम राजनाथ आरती से पूछता है कि पीरियड चालू हो गया , तो आरती कहती है कि हाँ चालू हो गया है।

नाश्ता करने के बाद राजनाथ अपने दामाद को फोन लगाता है और डॉक्टर वाली बात सब उसको बताता है और उसको आकर आरती को ले जाने के लिए कहता है फिर उसका दामाद दूसरे दिन आरती को लेने के लिए आ जाता है , आरती को जाने का मन नहीं था लेकिन वह मजबूरी में उसको जाना पड़ता है , जाने से पहले राजनाथ उसको दवा कैसे खाना है क्या करना है सब उसको समझा देता है।..........

(अगला अपडेट पेज नंबर 67 में मिलेगा)
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भाग २१
नमस्कार सभी पाठकों को आप सभी लोगों ने धैर्य के साथ इंतजार किया उसके लिए आप सभी को धन्यवाद।

तो आईए कहानी को आगे बढ़ते हैं अभी तक आप लोगों ने पढ़ा कि राजनाथ दोपहर में आरती से कहता है ब्रा और पैंटी पहन कर दिखाने के लिए , ,जबकि आरती रात में ही ब्रा और पैंटी पहन कर दिखा चुकी थी, लेकिन राजनाथ फिर से मजे लेने के लिए उसे दिन में पहन कर दिखाने के लिए बोल रहा है , यह कहकर कि वह रात में अच्छे से देख नहीं पाया इसलिए वह अभी देखना चाहता है ।

आरती _उसकी बात सुनकर मना नहीं करती लेकिन कहती है की दादी बाहर गई हुई है अगर वह आ गई तो।

राजनाथ_ आ जाएगी तो क्या होगा गेट अंदर से बंद कर देंगे आएगी तो बाहर से आवाज देगी तब खोल देंगे ।

आरती_ मुस्कुराते हुए अच्छा तो दादी बाहर खड़ी रहेगी और आप अंदर में अपनी बेटी की ब्रा और पैंटी की फिटिंग देखेंगे।राजनाथ अरे कपड़े के ही फिटिंग तो देखूंगा और कुछ तो नहीं देखूंगा इसमें गलत क्या है ।

आरती - फिर से मुस्कुराते हैं अरे मैं कहाँ कह रही हूँ कि यह गलत है मैं तो बस आप आपका तारीफ कर रही हूँ।

राजनाथ- मेरी तारीफ छोड़ो और अब जल्दी से दिखा दो आरती हाँ हाँ दिखा दूँगी पहले गेट तो बंद करके आईए।

राजनाथ - उठकर जाता है और गेट बंद करके जल्दी से वापस आ जाता है आकर बरामदे में चौकी पड़ा हुआ था उसी पर बैठ जाता है और वही साइड में आरती खड़ी हुई थी , राजनाथ थोड़ी देर चुप रहने के बाद आरती से कहता है कि अब क्यों चुपचाप खड़ी हो अब तो गेट बंद हो गया है तो किसका इंतजार कर रही हो अब तो दिखा दो।

आरती - भी आज कुछ अलग मूड में थी तो वह भी राजनाथ को और छेड़ना चाहती थी इसलिए वह कहती है कि हाँ हाँ तो देख लीजिए मैं कहाँ मना कर रही हूँ , तो राजनाथ कहता अरे देखूंगा तब जब तुम दिखाओगी मेरा मतलब है ऊपर के कपड़े उतारोगी तभी तो देखूंगा ऐसे कैसे देखूंगा , तभी आरती थोड़ा इठलाते हुए कहती है मैं नहीं उतारूंगी आप खुद उतार लीजिए ।

राजनाथ यह क्या बात हुई अभी तुम खुद दिखाने के लिए तैयार हुई थी और अब तुम बहाने बना रही हो ।

आरती मैं बहाना नहीं बना रही हूँ और यह कोई बहाना नहीं है अगर आपको फल खाना है तो थोडी बहुत तो मेहनत करनी ही पड़ेगी।

राजनाथ - अरे इसमें फल खाने की बात कहाँ से आ गई मैं फल खाने की बात थोड़ी कह रहा हूँ मैं तो सिर्फ फल दिखाने के लिए कह रहा हूँ बलकि फल भी दिखाने के लिए नहीं कह रहा फल के ऊपर जो कवर लगा हुआ है उसको दिखाने के लिए कह रहा हूँ।

आरती - आप जिसको देखाने की बात कह रहे हैं वह भी कोई मामूली चीज नहीं है उसको भी देखने के लिए सब तड़पते हैं और आपको इतनी आसानी से देखने को मिल रहा है फिर भी आप थोड़ी सी मेहनत नहीं करना चाहते इसलिए आज आपको थोड़ी सी मेहनत तो करनी ही पड़ेगी।

राजनाथ - मन में सोंचते हुए ए अब ऐसे नहीं मानेगी तो कहता है ठीक है लेकिन तुमको मेरी एक बात माननी पड़ेगी बोलो मानोगी कि नहीं।

आरती- बोलिए क्या बात है ।

राजनाथ- बात यह है कि इस बार तुम खुद ही खोल कर दिखा दो और अगर इसके बाद फिर कभी मुझे देखना होगा तो मैं खुद मेहनत कर लूँगा मेरा मतलब है मैं खुद तुम कहोगी तो मैं खुद खोल कर देख लूँगा।

राजनाथ- की बात सुनकर आरती मन ही मन कहती है कि मुझे पता था कि इतना आसानी से नहीं मानेंगे फिर वह कहती है ठीक है सिर्फ इस बार अगली बार के लिए अपनी बात याद रखीएगा।

राजनाथ- हाँ हाँ पक्का याद रखूँगा।

आरती- ठीक है अपनी आँखें बंद कीजिए।

राजनाथ- आँख क्यों बंद करनी है।

आरती -बंद कीजिए ना मुझे शर्म आ रही है।

राजनाथ- इसमें शर्माने की क्या बात है अच्छा ठीक है बंद कर लेता हूँ।

आरती- अपने कपड़े खोलने लगती है तभी उसका ब्लाउज का हूँक फंस जाता है तो थोड़ा टाइम लगता है तो राजनाथ पूछता है हो गया कितना टाइम लगाती हो।

आरती- थोड़ा सबर कीजिए यह आपका गंजी और पैजामा नहीं है कि फट से खोलकर निकाल दिया साड़ी और ब्लाउज है इसमें हूँक लगा हुआ रहता है इसको खोलने में टाइम लगता है अगर आपको जल्दी है तो आकर खुद ही खोल दीजिए राजनाथ अच्छा ठीक है तुम आराम से खोलो मैं तो बस ऐसे ही पूछ रहा था , तभी आरती कहती है हो गया है अब आप अपनी आँखें खोल लीजिए , राजनाथ क्या हो गया जैसे हो वह अपनी आँखें खोलता है और अपनी जवान बेटी को ब्रा और पैंटी में देखा है तो उसका मन एकदम उछलने लगता है और उसका मन करने लगता है कि वह अपनी बेटी को बाहों में भर ले और उसे बिस्तर पर ले जाकर उसके जिस्म के साथ खूब खेल , लेकिन वह जानता था कि वह ऐसा नहीं कर सकता इसलिए वह अपनी इच्छा को अपने मन में दबाते हुए वह सिर्फ अपनी आँखों से ही देखकर मजा लेने लगता है , और उसकी नजर उसके ब्रा में से निकले हुए आधे दूध को देखने लगता है और धीरे-धीरे उसकी नजर छाती पर से नाभि पर नाभि से फिर नीचे उसकी पैंटी पर जाता है और जैसे ही उसकी नजर उसकी दोनों टांगों के बीच उसकी फुली हुई चूत पर जाता है तो उसका लँड पजामे के अंदर में उछलने की कोशिश करता है लेकिन वह उछल नहीं पता , क्योंकि वह लंगोट में कसा हुआ था इस वजह से वह उछल नहीं पा रहा था। राजनाथ अपनी बेटी को इस रूप में देखकर वह अपने पुराने दिनों में खो गया था , जब मेरी बीवी शादी होकर आई थी तब बिल्कुल इसी तरह दिख रही थी लेकिन समय-समय की बात है उस वक्त में जो चाह रहा था वह कर पा रहा था लेकिन आज मैं चाहकर भी कुछ नहीं कर पा रहा हूँ , तभी आरती धीरे से कहती है कैसी लगी फिटिंग सही है कि नहीं राजनाथ उसकी बात को सुन नहीं पता , आरती फिर से कहती है बाबूजी बताइए ना फिटिंग कैसी है राजनाथ थोड़ा चौंकते हुए हाँ हाँ फिटिंग बहुत अच्छी है और तुम इसमें बहुत अच्छी लग रही हो राजनाथ कुछ सेकेंड बाद फिटिंग तो अच्छी है लेकिन थोड़ी टाइट लग रही है।

आरती- टाइट लग रही है क्या चीज टाइट लग रही है ब्रा या पैंटी।

राजनाथ- मुस्कुराते हुए ब्रा और पैंटी भी टाइट लग रही है और वो दोनों भी टाइट लग रही है।

आरती- क्या मतलब मैं समझी नहीं आपकी बात ब्रा और पैंटी भी टाइट लग रही है और वह दोनों भी टाइट लग रही है वह दोनों क्या है।

राजनाथ- वही दोनों जो ब्रा और पैंटी के अंदर में है मैं उन दोनों की बात कर रहा हूँ ।

आरती- राजनाथ की डबल मीनिंग वाली बात को समझ जाती है लेकिन फिर भी अनजान बनते हुए कहती है यह आप क्या कर रहे हैं मैं कुछ समझ नहीं पा रही हूँँ ब्रा और पैंटी के अंदर में क्या कुछ-कुछ भी तो नहीं है।

राजनाथ- अगर तुम ठीक से सोचोगी तो तुम्हें समझ में आएगा लेकिन कोई बात नहीं अगर तुमको समझ में नहीं आ रहा है तो फिर कभी बाद में समझ लेना लेकिन तुम्हारे ऊपर yah कपड़े बहुत अच्छे लग रहे हैं ।

आरती- आपने कहा कि वह दोनों भी टाइट है तो आपको कैसे पता कि वो दोनों भी टाइट है नाहीं अपने उसे छुआ है नाहीं ठीक से देखा है फिर आप कैसे कह सकते हैं की ढीला है कि टाइट है।

राजनाथ - इतना तजुर्बा तो है कि आम को देखकर बता सकता हूँ कि वह पका हुआ है कि कच्चा है ।

आरती - ठीक है मैं आपकी यह बात मान लेती हूँ की आपको इतने साल का तजुर्बा है और आप दूर से देख कर बता सकते हैं कि कच्चा है या पक्का लेकिन आप उसे आम के बारे में कैसे बता सकते हैं जो अंदर में छुपा हुआ है मेरा मतलब है नीचे वाले के बारे में वह तो आपको दिखाई नहीं दे रहा है तो आप उसके बारे में यह बात कैसे कह सकते हैं।

राजनाथ- मुस्कुराते हुए मैं इसलिए कह सकता हूं कि जो ऊपर वाले को ढीला नहीं कर पाया है वह नीचे वाले को क्या ढीला करेगा इसलिए मेरा तजुर्बा कहता है कि नीचे वाला भी टाइट ही होगा।

आरती- मुस्कुराते हुए अच्छा तो आप अंदाजे में तीर चला रहे हैं आप पूरा यकीन के साथ यह बात नहीं कह सकते ।

राजनाथ- नहीं मैं यकीन के साथ तो नहीं कह सकता लेकिन मेरा जो तजुर्बा कहता है वह मैंने तुमको बताया अब तुम ही बता सकती हो कि मेरा बात सही है या गलत ।

आरती- मैं कैसे बता सकती हूँ।

राजनाथ -तुम नहीं बताओगी तो और कौन बताएगा वह तुम्हारा चीज है तो तुम ही बताओगे ना और अगर तुम नहीं बता सकती तो फिर जो उसको देखेगा वही बता सकता है।

आरती - अच्छा कौन देखेगा उसको।

राजनाथ - मैं कैसे बता सकता हूँ तभी राजनाथ की माँ
बाहर से गेट खोलने की आवाज देती है , आरती उसकी बात सुनकर घबरा जाती और कहती है दादी आ गई अब क्या होगा, राजनाथ क्या होगा कुछ नहीं तुम अपने कपड़े लेकर कमरे में जाकर पहनो तब तक मैं गेट खोलता हूँ और उसे बता दूँगा की आरती घर में कुछ काम कर रही है।

आरती- अपने कपड़े लेकर कमरे के अंदर में जाने लगती है तो राजनाथ उसको जाते हुए देख रहा है और मन में सोच रहा है कि कुछ देर और इसी तरह मेरे साथ में रहती तो और अच्छा होता है लेकिन माँ को भी अभी आना था कुछ देर बाद आती तो क्या बिगड़ जाता फिर वह उठकर गेट खोलने के लिए चला जाता है जैसे ही गेट खोलता है तो उसकी माँ पूछती है की आरती कहाँ गई , राजनाथ कहीं नहीं घर में है कुछ काम कर रही होगी इसलिए मुझे बोली खोलने के लिए तो मैं आकर खोल दिया, फिर कुछ देर में आरती अपने कपड़े पहन कर बाहर आती है तो दादी पूछती है क्या काम कर रही थी जो गेट खोल नहीं खोल सकती और अपने बापू को भेज दिया गेट खोलने के लिए आरती कुछ नहीं दादी कपड़े चेंज कर रहे थे इसलिए मैं नहीं जा पाई तभि राजनाथ की तरफ देखती है तो राजनाथ उसको देखकर हल्का-हल्का मुस्कुरा रहा था तो आरती उसको देखकर शर्मा के अपनी नज़रें नीचे कर लेती है, तभी दादी कहती है कि मुझे भूख लगी है जा मेरा खाना लेकर आओ फिर दादी को खाना देती है फिर इसी तरह शाम गुजरती है फिर रात में खाना-वाना खाने के बाद जब राज नाथ को मालिश करने के लिए जाती है तो कहती है कि आज मैं ज्यादा देर तक मालिश नहीं कर पाऊंगी क्योंकि मेरे कमर मे और कमर नीचे दर्द कर रहा है ।

राजनाथ- क्यों क्या हुआ।

आरती - कुछ नहीं लगता है आने वाला है।

राजनाथ- क्या आने वाला है।

आरती- वही जो हर महीने आता है महीना पीरियड जब भी आने वाला रहता है तो इसी तरह दर्द करता है ।

राजनाथ - तो फिर दर्द का दवा क्यों नहीं खाती।

आरती - दर्द का दवा खाने से क्या होगा थोड़ा बहुत तो दर्द करेगा ही yah तो सभी औरतों के साथ होता है ।

राजनाथ- फिर तो तुमको तो अब जाना पड़ेगा।

आरती- कहाँ जाना पड़ेगा।

राजनाथ- ससुराल जाना पड़ेगा और कहाँ जाना पड़ेगा डॉक्टर के पास से जो दवा लेकर आई है उसको तो चालू करना पड़ेगा ना।

आरती -मैं नहीं जाने वाली हूँ जब तक लेने के लिए नहीं आएगा तब तक मैं नहीं जाऊंगी मैं इतनी गिरी भी नहीं हूं कि खुद चली जाऊंगी ।

राजनाथ - ठीक है मैं दामाद जी को फोन करके आने के लिए कहता हूँ , फिर आरती मालिश करके सोने के लिए चली जाती है और फिर सुबह होने से पहले ही उसका पीरियड चालू हो जाता है , सुबह नाश्ता करने के टाइम राजनाथ आरती से पूछता है कि पीरियड चालू हो गया , तो आरती कहती है कि हाँ चालू हो गया है।

नाश्ता करने के बाद राजनाथ अपने दामाद को फोन लगाता है और डॉक्टर वाली बात सब उसको बताता है और उसको आकर आरती को ले जाने के लिए कहता है फिर उसका दामाद दूसरे दिन आरती को लेने के लिए आ जाता है , आरती को जाने का मन नहीं था लेकिन वह मजबूरी में उसको जाना पड़ता है , जाने से पहले राजनाथ उसको दवा कैसे खाना है क्या करना है सब उसको समझा देता है।..........

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अभी तक आप लोगों ने पढ़ा की राजनाथ अपने दामाद को फोन करके कहता है कि वह आकर आरती को यहां से ले जाए ताकि जो डॉक्टर ने दवा दिया है वह उसको चालू कर सके अब आगे ।

राजनाथ का दामाद आरती को लेने के लिए उसके घर आया हुआ है, और आरती भी उसके साथ जाने के लिए खुशी-खुशी तैयार हो जाती है इस उम्मीद में की डॉक्टर ने जो दवा दिया है वह काम कर जाए और ऊपर वाले की दुआ भी लग जाए ताकि उसके पेट में बच्चा रह जाए और उसके ऊपर से बाँझ होने का कलंक मिट जाए और वह दुनिया के सामने अपना सर उठा के चल सके और सबको बता सके की वो बाँझ नहीं है यही सोचकर वह अपना सामान सब पैक करके रेडी हो जाती है जाने के लिए। तभी राजनाथ
उसके पास आता है और उसको सब समझता है की दवा जैसे-जैसे खाने के लिए डॉक्टर ने बोला है वैसे ही खाना गड़बड़ मत करना।

आरती हाँ उस में सब लिखा हुआ है कैसे-कैसे खाना है मैं देख लूंगी।

राजनाथ ठीक है अगर कुछ गड़बड़ हो तो मुझे फोन करना अब चलो नहीं तो लेट हो जाएगी और आराम से जाना दोनो वहां पहुंच कर मुझे फोन कर देना की पहुंच गए हो और तुम कोई टेंशन मत लेना जो भी होगा अच्छा ही होगा तुम कभी अपने आप को अकेला मत समझना मैं हमेशा तुम्हारे साथ हूँ और रहूँगा तुमसे बढ़कर मेरे लिए और कुछ नहीं है।

यह सब बातें सुनकर आरती अपने आँखों में आंसू आने से रोक नहीं पाती है और वह उसके पास जाकर उसके गले लग कर रोने लगती है ।

राजनाथ अरे पगली यह क्या तुम तो रोने लग गई अब तुम रोना बंद कर नहीं तो मैं भी रोने लगूँगा यह बोलते हुए उसके भी आँखों में आंसू के कुछ बूँदे आ ही जाती है फिर वह अपने आप को संभालता है और आरती को चुप कराता है और उसे लेकर कमरे से बाहर आता है उसका दामाद बाहर ही खड़ा था फिर दोनों पति-पत्नी साथ में जाने के लिए निकल जाते हैं ।
राजनाथ उदास मन से अपनी बेटी को जाते हुए देखता रह जाता है और वह चली जाती है।

आरती के जाने के बाद राजनाथ अपना उदास मन को बदलने के लिए वह घर से बाहर गाँव में अपने दोस्तों यारों के पास चला जाता है फिर कुछ घंटे के बाद राजनाथ का मोबाइल बजाता है तो उसमें देखा तो उसके दामाद के नंबर से फोन आ रहा था तो वह उसे रिसीव करता है तो उधर से आवाज आती है हेलो बाबूजी मैं आरती बोल रही हूँ हम लोग यहाँ अच्छे से पहुँच गए हैं इसलिए फोन कर रही हूँ आप अपना ख्याल रखना।

राजनाथ -- हाँ बेटा तुम लोग भी अपना ख्याल रखना फिर कॉल कट जाता है, फिर राजनाथ शाम को घर वापस आता है तो घर में अपनी बेटी को ना देख कर उसकी मन फिर उदास हो जाता है और उसको वह सब बात याद आने लगता है जो आरती उसके लिए करती थी कैसे वह जब कहीं बाहर से घर में आता था तो आरती उसके लिए पानी लाती थी उसको खाने के लिए पूछती थी बाकी वह हर काम करती थी जो उसकी पत्नी उसके लिए करती थी सिर्फ एक काम के अलावा और वह कम था उसका बिस्तर गर्म करना यह काम वह कर भी नहीं सकती थी क्योंकि बीच में बाप बेटी का रिश्ता जो आ जाता था यही सब वह सोच रहा होता कि तभी उसकी माँ उसके पास आती है और उसे खाने के लिए कहती है। लेकिन वह उसे मना कर देता और कहता है कि मुझे भूख नहीं है मैं नहीं खाऊँगा लेकिन माँ के जिद करने के बाद वह खाने के लिए बैठ जाता है लेकिन थोड़ा बहुत खाता है बाकी सारा खाना छोड़ देता है फिर वह सोने के लिए चला जाता है लेकिन वहाँ भी उसे नींद कहाँ आने वाली थी घँटो बिस्तर पर करवट बदलने के बाद बहुत मुश्किल से उसे नींद आती है।

फिर जब सुबह उठा तो देखा कि उसकी माँ घर के काम मे लगी हुई है क्योंकि जब आरती रहती थी तो सारा काम वही करती थी उसके जाने की वजह से अब सारा काम उसकी दादी को करनी पड़ रही थी ।

यह देखकर राजनाथ भी घर के काम में उसके साथ में उसका सहयोग करने लगता है फिर इसी तरह एक दिन और बीत गया दिन तो किसी तरह कट जाता था लेकिन रात में राजनाथ को आरती की याद सताने लगती है।

आज जब वह बिस्तर पर लेट करवटें बदल रहा होता तो उसके मन में ख्याल आता है कि की आरती को फोन करके देखता हूँ कि वह क्या कर रही है ।

फिर वह अपने दामाद के नंबर में फोन मिलाता है जैसे ही रिंग होता है तो फट से आरती उठा लेती है , और बोलती हेलो बाबूजी मैं आरती बोल रही हूँ आप कैसे हो।

राजनाथ-- हाँ बेटा मैं ठीक हूँ तुम कैसी हो।

आरती-- मैं भी ठीक हूँ आपने खाना-वाना खाया कि नहीं और दादी कैसी है ।

राजनाथ-- हाँ बेटा मैने खाना खा लिया और दादी भी ठीक है बेटा तुमने खाना खाया कि नहीं और दामाद जी कहाँ है।

आरती --हाँ बाबूजी मैने भी खाना खा लिया है और वो भी यहीँ हैं।

राजनाथ-- बेटा मैंने कोई डिस्टर्ब तो नहीं किया ना तुम लोगों को मैं इस वक्त फोन करने के लिए डर रहा था ।

आरती-- क्यों किस लिए डर रहे थे।

राजनाथ कुछ काम कर रही होगी और मेरे फोन से डिस्टर्ब हो जाओगी
इसलिए।

आरती-- इस वक्त क्या काम करूंगी कुछ नहीं ।

राजनाथ-- अरे पगली में उस काम की बात कर रहा हूँ जो पति-पत्नी मिलकर करते हैं और वह काम रात में ही होता है ।

आरती-- राजनाथ की बात समझ जाती है और शर्मा जाती है थोड़ी देर चुप रहने के बाद कहती है यह आप क्या कह रहे हैं मुझे कुछ समझ में नहीं आ रहा है ,
और आरती का पति भी वही था तो इस वजह से वह खुलकर बात नहीं कर पा रही थी।

राजनाथ- अब तुम इतनी सी बात नहीं समझ पा रही हो तो अब मैं क्या कर सकता हूँ ठीक है अब मैं फोन रखता हूँ तुम लोग अपना काम करो यह बोलकर राजनाथ फोन काट देता है और मन ही मन मुस्कुराता है और सोचता है कि मेरी बेटी इतनी बेवकूफ तो नहीं हो सकती कि यह बात उसको समझ में ना आया हो ।

उधर आरती भी मन ही मन मुस्कुराती है और कहती है मेरे बाबूजी भी कितना चलांक और समझदार हैं।

( अगला भाग पेज नंबर 72 मे)
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भाग २२
अभी तक आप लोगों ने पढ़ा की राजनाथ अपने दामाद को फोन करके कहता है कि वह आकर आरती को यहां से ले जाए ताकि जो डॉक्टर ने दवा दिया है वह उसको चालू कर सके अब आगे ।

राजनाथ का दामाद आरती को लेने के लिए उसके घर आया हुआ है, और आरती भी उसके साथ जाने के लिए खुशी-खुशी तैयार हो जाती है इस उम्मीद में की डॉक्टर ने जो दवा दिया है वह काम कर जाए और ऊपर वाले की दुआ भी लग जाए ताकि उसके पेट में बच्चा रह जाए और उसके ऊपर से बाँझ होने का कलंक मिट जाए और वह दुनिया के सामने अपना सर उठा के चल सके और सबको बता सके की वो बाँझ नहीं है यही सोचकर वह अपना सामान सब पैक करके रेडी हो जाती है जाने के लिए। तभी राजनाथ
उसके पास आता है और उसको सब समझता है की दवा जैसे-जैसे खाने के लिए डॉक्टर ने बोला है वैसे ही खाना गड़बड़ मत करना।

आरती हाँ उस में सब लिखा हुआ है कैसे-कैसे खाना है मैं देख लूंगी।

राजनाथ ठीक है अगर कुछ गड़बड़ हो तो मुझे फोन करना अब चलो नहीं तो लेट हो जाएगी और आराम से जाना दोनो वहां पहुंच कर मुझे फोन कर देना की पहुंच गए हो और तुम कोई टेंशन मत लेना जो भी होगा अच्छा ही होगा तुम कभी अपने आप को अकेला मत समझना मैं हमेशा तुम्हारे साथ हूँ और रहूँगा तुमसे बढ़कर मेरे लिए और कुछ नहीं है।

यह सब बातें सुनकर आरती अपने आँखों में आंसू आने से रोक नहीं पाती है और वह उसके पास जाकर उसके गले लग कर रोने लगती है ।

राजनाथ अरे पगली यह क्या तुम तो रोने लग गई अब तुम रोना बंद कर नहीं तो मैं भी रोने लगूँगा यह बोलते हुए उसके भी आँखों में आंसू के कुछ बूँदे आ ही जाती है फिर वह अपने आप को संभालता है और आरती को चुप कराता है और उसे लेकर कमरे से बाहर आता है उसका दामाद बाहर ही खड़ा था फिर दोनों पति-पत्नी साथ में जाने के लिए निकल जाते हैं ।
राजनाथ उदास मन से अपनी बेटी को जाते हुए देखता रह जाता है और वह चली जाती है।

आरती के जाने के बाद राजनाथ अपना उदास मन को बदलने के लिए वह घर से बाहर गाँव में अपने दोस्तों यारों के पास चला जाता है फिर कुछ घंटे के बाद राजनाथ का मोबाइल बजाता है तो उसमें देखा तो उसके दामाद के नंबर से फोन आ रहा था तो वह उसे रिसीव करता है तो उधर से आवाज आती है हेलो बाबूजी मैं आरती बोल रही हूँ हम लोग यहाँ अच्छे से पहुँच गए हैं इसलिए फोन कर रही हूँ आप अपना ख्याल रखना।

राजनाथ -- हाँ बेटा तुम लोग भी अपना ख्याल रखना फिर कॉल कट जाता है, फिर राजनाथ शाम को घर वापस आता है तो घर में अपनी बेटी को ना देख कर उसकी मन फिर उदास हो जाता है और उसको वह सब बात याद आने लगता है जो आरती उसके लिए करती थी कैसे वह जब कहीं बाहर से घर में आता था तो आरती उसके लिए पानी लाती थी उसको खाने के लिए पूछती थी बाकी वह हर काम करती थी जो उसकी पत्नी उसके लिए करती थी सिर्फ एक काम के अलावा और वह कम था उसका बिस्तर गर्म करना यह काम वह कर भी नहीं सकती थी क्योंकि बीच में बाप बेटी का रिश्ता जो आ जाता था यही सब वह सोच रहा होता कि तभी उसकी माँ उसके पास आती है और उसे खाने के लिए कहती है। लेकिन वह उसे मना कर देता और कहता है कि मुझे भूख नहीं है मैं नहीं खाऊँगा लेकिन माँ के जिद करने के बाद वह खाने के लिए बैठ जाता है लेकिन थोड़ा बहुत खाता है बाकी सारा खाना छोड़ देता है फिर वह सोने के लिए चला जाता है लेकिन वहाँ भी उसे नींद कहाँ आने वाली थी घँटो बिस्तर पर करवट बदलने के बाद बहुत मुश्किल से उसे नींद आती है।

फिर जब सुबह उठा तो देखा कि उसकी माँ घर के काम मे लगी हुई है क्योंकि जब आरती रहती थी तो सारा काम वही करती थी उसके जाने की वजह से अब सारा काम उसकी दादी को करनी पड़ रही थी ।

यह देखकर राजनाथ भी घर के काम में उसके साथ में उसका सहयोग करने लगता है फिर इसी तरह एक दिन और बीत गया दिन तो किसी तरह कट जाता था लेकिन रात में राजनाथ को आरती की याद सताने लगती है।

आज जब वह बिस्तर पर लेट करवटें बदल रहा होता तो उसके मन में ख्याल आता है कि की आरती को फोन करके देखता हूँ कि वह क्या कर रही है ।

फिर वह अपने दामाद के नंबर में फोन मिलाता है जैसे ही रिंग होता है तो फट से आरती उठा लेती है , और बोलती हेलो बाबूजी मैं आरती बोल रही हूँ आप कैसे हो।

राजनाथ-- हाँ बेटा मैं ठीक हूँ तुम कैसी हो।

आरती-- मैं भी ठीक हूँ आपने खाना-वाना खाया कि नहीं और दादी कैसी है ।

राजनाथ-- हाँ बेटा मैने खाना खा लिया और दादी भी ठीक है बेटा तुमने खाना खाया कि नहीं और दामाद जी कहाँ है।

आरती --हाँ बाबूजी मैने भी खाना खा लिया है और वो भी यहीँ हैं।

राजनाथ-- बेटा मैंने कोई डिस्टर्ब तो नहीं किया ना तुम लोगों को मैं इस वक्त फोन करने के लिए डर रहा था ।

आरती-- क्यों किस लिए डर रहे थे।

राजनाथ कुछ काम कर रही होगी और मेरे फोन से डिस्टर्ब हो जाओगी
इसलिए।

आरती-- इस वक्त क्या काम करूंगी कुछ नहीं ।

राजनाथ-- अरे पगली में उस काम की बात कर रहा हूँ जो पति-पत्नी मिलकर करते हैं और वह काम रात में ही होता है ।

आरती-- राजनाथ की बात समझ जाती है और शर्मा जाती है थोड़ी देर चुप रहने के बाद कहती है यह आप क्या कह रहे हैं मुझे कुछ समझ में नहीं आ रहा है ,
और आरती का पति भी वही था तो इस वजह से वह खुलकर बात नहीं कर पा रही थी।

राजनाथ- अब तुम इतनी सी बात नहीं समझ पा रही हो तो अब मैं क्या कर सकता हूँ ठीक है अब मैं फोन रखता हूँ तुम लोग अपना काम करो यह बोलकर राजनाथ फोन काट देता है और मन ही मन मुस्कुराता है और सोचता है कि मेरी बेटी इतनी बेवकूफ तो नहीं हो सकती कि यह बात उसको समझ में ना आया हो ।

उधर आरती भी मन ही मन मुस्कुराती है और कहती है मेरे बाबूजी भी कितना चलांक और समझदार हैं।

( अगला भाग पेज नंबर 72 मे)
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Mohammed Ali

Muhammad Ali 51 years I love insist
51
3
8
Nis
भाग २३
अभी तक आप लोगों ने पढ़ा की आरती के जाने के बाद राजनाथ का मन बिल्कुल नहीं लग रहा था।

दिन तो किसी तरह इधर-उधर घूम के काट लेता था लेकिन रात में उसको आरती की बहुत याद आती थी।

राजनाथ आज दोपहर में खाना खाकर लेटे-लेटे सोच रहा था की आरती को गए हुए आज 15 दिन हो गए हैं ,और बहुत दिनों से फोन भी नहीं किया फोन करके हाल-चाल पूछ लेता हूँ, यह सोचकर आरती को फोन लगता है ।और उधर जैसे ही आरती के मोबाइल में राजनाथ का नंबर दीखता है तो आरती का मन एकदम से खिल उठता है और फट से फोन उठाती है, और बोलती है हेलो बाबू जी कैसे हो आप।

राजनाथ,- मैं ठीक हूँ बेटा तुम कैसी हो।

आरती- मैं भी ठीक हूँ बाबूजी आज बहुत दिनों के बाद फोन किया लगता है अपनी बेटी को भूल गए।

राजनाथ - नहीं बेटा ऐसा नहीं हो सकता मैं भला कभी अपनी बेटी को भूल सकता हूंँ ऐसा कभी नहीं होगा।

आरती - तो फिर इतने दिनों से फोन क्यों नहीं कर रहे थे।

राजनाथ - मै फोन इसलिए नहीं कर रहा था कि शायद तुम लोगों को दिक्कत होगी इसी वजह से नहीं कर रहा था ।

आरती- आपके फोन करने से हम लोग को भला क्या दिक्कत होगी।

राजनाथ - यही कहोगी कि आए हुए दो दिन भी नहीं हुआ और फोन पर फोन करना चालू कर दिया और दामाद जी भी सोचेंगे कि इतने महीने रखने के बाद भी पेट नहीं भरा और यहाँ आते के साथ फोन करना चालू कर दिया ।

आरती - वो ऐसा कुछ नहीं सोचेंगे यह आपका वह हम है और ये आपने मेरे बारे में ऐसा कैसे सोच लिया कि कि आपका फोन आने से मुझे दिक्कत होगी।

राजनाथ - अच्छा सॉरी बाबा मैं ऐसा अब नहीं सोचूंगा तुम्हारे बारे में सच कहूं तो मुझे तुम्हारी बहुत याद आती थी दिन तो किसी तरह इधर-उधर काम में व्यस्त रहने की वजह से गुजर जाता है लेकिन रात में तुम्हारी बहुत याद आती है।

आरती - क्यों रात में क्यों याद आती है।

राजनाथ-- क्यों याद आती है तुम्हें नहीं पता तुम ही तो मेरा आदत बिगाड़ के गई हो ।

आरती - कौन सी आदत।

राजनाथ-- कौन सी आदत तुम्हें नहीं पता जब भी मैं रात को खाना खाने के बाद बेड पर सोने के लिए जाता हूँ तो मुझे लगता है कि अब मेरी बेटी आरती आएगी और मेरे हाथों और पैरों की मालिश अच्छे से करेगी तब जाकर मुझे सुकून की नींद आएगी और मैं आराम से सोऊंगा लेकिन तुम तो नहीं आती सिर्फ तुम्हारी याद आती है और तुम्हारी याद में करवटें बदलते हुए सो जाता हूँ

आरती- मुझे माफ कर दीजिए बाबूजी मेरी वजह से आपको इतनी तकलीफ हो रही है मैं बहुत जल्द आऊंगी और आपकी सेवा करूंगी बस कुछ दिन और इंतजार कर लीजिए।

राजनाथ- अरे बेटा यह सब छोड़ो ए तो मेरी जिंदगी का हिस्सा है ये बताओ की तुम जो काम के लिए गई हो वो तो अच्छे से हो रहा है ना।

आरती - कौन सा काम।

राजनाथ - अरे वही जिस काम के लिए तुम वहाँ गई हो मेरा मतलब है मुझे नाना बनाने वाला काम।

यह बात सुनते ही आरती शर्मा जाती है और कुछ बोलती नहीं है ।

राजनाथ - अरे कुछ बोल क्यों नहीं रही हो दवा तो अच्छे से खा रही हो ना और दामाद जी को भी खिला रही हो कि नहीं।

आरती- हाँ दवा तो खा रही हूं और उनको भी खिला रही हूंँ।

राजनाथ -- अरे जब दवा अच्छे से खा रही हो और उनको भी खिला रही तब तो कोई दिक्कत नहीं होनी चाहिए लगता है इस बार मैं नाना बन जाऊंगा आरती कुछ जवाब नहीं देती राजनाथ अरे बोल क्यों नहीं रही हो इस बार मै नाना बन जाऊंगा ना।

आरती- शरमाते हुए मैं कैसे बताऊंगी कि आप नाना बनेंगे कि नहीं बनेंगे।

राजनाथ - अरे तुम नहीं बताओगी तो और कौन बताएगा और कौन है जो मुझे नाना बनाएगा एक तुम ही तो मेरी इकलौती बेटी हो जो मुझे नाना बन सकती हो।

आरती - वह तो ठीक है लेकिन सिर्फ मेरे हाथ में आपके नाना बनाने का रहता तो मैं आपको कब का नाना बन चुकी होती लेकिन आप अपने दामाद से भी तो पूछिए कि वह आपके नाना बन पाएगा कि नहीं।

राजनाथ- नहीं मैं उससे सब नहीं पूछ सकता।

आरती - क्यों क्यों नहीं पूछ सकते।

राजनाथ - इसलिए नहीं पूछ सकता कि मैं उसका ससुर और वह मुझसे वैसे भी बहुत शरमाता रहता है तो इस बारे में वह मुझे क्या बताएगा ।

आरती - अच्छा अपने दामाद से यह सब नहीं पूछ सकते लेकिन अपनी बेटी से पूछ सकते हो।

राजनाथ- हाँ जो बात मैं तुमसे कर सकता हूँ उससे नहीं कर सकता अच्छा यह सब छोड़ो और यह बताओ कि दामाद जी अपना काम अच्छे से कर रहा है कि नहीं ।

आरती - अब मैं आपको कैसे बताऊं कि काम अच्छे से कर रहा है कि नहीं, वह तो एक महीना के बाद ही पता चलेगा जब उसका रिजल्ट आएगा तब आप भी जान जाएंगे की आपके दामाद ने काम अच्छे से किया है कि नहीं ।

राजनाथ-- वो तो तब पता चल ही जाएगा लेकिन अभी मैं तुमसे जानना चाह रहा हूँ कि तुमको क्या लग रहा है वह अपना काम अच्छे से कर रहा है कि नहीं ।

तभी आरती के दिमाग में अपने आप को छेड़ने का आईडिया आता है और वह मुस्कुराते हुए बोलती है मैं आपको ऐसे तो नहीं बता सकती लेकिन मैं आपको एक वीडियो बनाकर भेज दूंगी आपके मोबाइल में तब आप खुद देख लेना कि आपका दामाद काम कैसे कर रहा है।

राजनाथ- छी छी यह तुम कैसी बातें कर रही है मैं तुमसे यह सब करने के लिए कहा है जो तुम ऐसी बातें कर रही हो।

आरती- अरे तो ईस में गलत क्या है आप ही तो जानना चाह रहे हैं और पूछ रहे हैं तो मुझे लगा कि अगर मैं आपको बोल कर बताऊंगी तो आप नहीं समझ पाएंगे तो मैंने सोचा की वीडियो बनाकर भेज दूंगी तो आप अच्छे से समझ जाएंगे।

राजनाथ- नहीं यह गलत है ।

आरती- क्या गलत है आप जो पूछ रहे हैं वह गलत है या मैं जो कह रही हूं वह गलत है ।

राजनाथ वीडियो बनाकर दिखाने वाली बात गलत है।

आरती- अच्छा आप उसके के बारे में पूछ रहे हैं वह गलत नहीं है और मैं उसका वीडियो बनाकर दिखा दूंगी वह गलत है।

राजनाथ- हाँ बिल्कुल गलत है ।

आरती -जरा मुझे बताएंगे कि कैसे गलत है।

राजनाथ - अच्छा मैं तुमसे एक बात पूछता हूं यह बताओ कि खाना खाना और खाना देखना एक बात है या अलग-अलग बात है।

आरती - दोनों अलग-अलग अर्थ है ।

राजनाथ - तुम्हारी और मेरी बात में भी यही अंतर है मैं खाना देखने की बात कर रहा हूं तुम खाना खाने की बात कर रही हो ठीक है अगर तुम उसके बारे में बात नहीं करना चाह रही हो तो कोई बात नहीं लेकिन तुम अपना ख्याल रखना और अपना काम अच्छे से करो बस मुझे नाना बना दो और मुझे कुछ नहीं चाहिए दादी आ रही है अब मैं फोन रखता हूं फिर मैं बाद में फोन करूंगा।

फोन कटने के बाद आरती बैठकर मन ही मन मुस्कुरा रही थी वीडियो वाली बात सोच कर की कैसे उसने बाबूजी के सामने यह बात बोल दी यह सब बात सच ही रही होती कि तभी उसके मन में ख्याल आता है कि क्या मैं ऐसा सच में कर सकती हूँ तो क्यों ना एक वीडियो बनाकर रख लेती हूं, बाद में फिर कभी अगर ऐसा मौका आया तो मैं बाबूजी को दिखा सकती हूँ, लेकिन मैं बनाऊंगी कैसे मेरे पास तो मोबाइल नहीं अगर इस मोबाइल से बनाऊंगी तो यह तो यहीं पर रह जाएगा तो फिर वहां कैसे लेकर जाऊंगी कुछ उपाय करना पड़ेगा। जब उसका पति घर आता है तो पति से कहती है कि उसे एक नया मोबाइल चाहिए और वह जिद्द करने लगती है और कहती है कि उसे एक मोबाइल चाहिए उसका पति उसकी बात मानकर उसको एक मोबाइल लेकर दे देता है।

और इसी तरह 15 दिन और गुजर जाते हैं और जिस आशा और विश्वास के साथ आरती अपने बाप का घर छोड़कर यहाँ आई थी वह आशा और विश्वास आज फिर एक बार टूट चुका था और आज उसका पीरियड फिर चालू हो गया था और उसकी माँ बनने का सपना एक बार फिर टूट चुका था और वह बहुत उदास हो गई और सोचने लगी कि क्या मुंह लेकर अपने बाबूजी के पास जाऊंगी और उनको क्या बताऊंगी।
इस बारे में अपने पति को बताती है और कहती है कि डॉक्टर ने जो दवा दिया वह तो काम नहीं किया फिर से उसके पास जाना पड़ेगा क्या आप मेरे साथ चलेंगे।

आरती का पति अशोक नहीं मैं वहाँ जाकर क्या करूंगा अगर फिर से जाना है तो तुम चली जाओ मैं नहीं जा पाऊंगा क्योंकि मेरा यहाँ काम है।

आरती जानती थी कि वह नहीं जाएगा वह तो सिर्फ इजाजत ले रही थी फिर वह अपना सामान पैक करके अपनी मायके जाने के लिए निकल जाती है और जैसे ही वहां पहुंचती है दरवाजा खटखटा आती है तो राजनाथ थी दरवाजा खुलता है जैसे ही आरती राजनाथ को देखते हैं उसे लिपटकर रोने लगती है।

राजनाथ अरे क्या हुआ मेरी बेटी को क्यों रो रही है यह बात बोलते हुए दोनों बाहों में भर लेता है और अपने सीने से लगा लेता है और इसी तरह कुछ देर दोनों बाप बेटी एक दूसरे से लिपटे हुए खड़े रहते हैं तभी राजनाथ कहता है कि अब रोना बंद कर और मुझे बताओ कि हुआ क्या है। तभी आरती कहती है कि जिस काम के लिए मैं आपको छोड़कर गई वह काम नहीं हुआ मैं आपको नाना नहीं बना सकती।

राजनाथ अरे पगली इसमें रोने की क्या बात है नहीं हुआ कोई बात नहीं कोई दूसरा उपाय या दूसरा रास्ता ढूंढेंगे तू टेंशन मत ले कोई ना कोई रास्ता जरूर निकलेगा।

(अगला भाग पेज नंबर 76 मैं मिलेगा)
Nais
 
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