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Incest अपनी शादीशुदा बेटी को मां बनाया

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Uzu
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अपडेट किसी कारणवश देरी से देने के लिए आप सभी से क्षमा चाहते हैं प्रतीक्षा करने के लिए आप सभी को बहुत-बहुत धन्यवाद।

🎢🚌
 
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Mohammed Ali

Muhammad Ali 51 years I love insist
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भाग २४
अभी तक आप लोगों ने पढ़ा की आरती जिस काम के लिए ससुराल गई थी वह काम नहीं हो पाया और अब वह वापस मायके आ गई है और अपने बाप राजनाथ के गले लगा कर रोने लगती है, फिर राजनाथ उसको समझा बुझा कर चुप कराता है तो आरती अपने आप को संभालते हुए कहती है कि शायद मेरी किस्मत में ही नहीं लिखा है मेरा माँ बना।

राजनाथ - ऐसा कुछ नहीं है तु गलत मत सोच तू जरूर माँ बनेगी।

आरती - क्या आपको अभी भी लग रहा है कि मैं मन बना पाऊँगी ।

राजनाथ - क्यों नहीं मुझे पूरा यकीन और विश्वास है कि तू जरूर माँ बनेगी।


आरती - यह तो आप मेरा मन बहलाने के लिए कह रहे हैं मुझे तो अब और कोई रास्ता नहीं दिख रहा जिससे मैं माँ बना पाऊंगी जो भी एक रास्ता था डॉक्टर वाला वह अभी काम नहीं आया।

राजनाथ - तू फिकर मत कर ऊपर वाला एक रास्ता बंद करता है तो और कई रास्ते बनाकर रखता है और तुम्हारे लिए भी कोई ना कोई रास्ता जरूर बना रखा होगा , और मुझे अभी एक रास्ता दिख रहा है।

आरती - कौन सा रास्ता ।

राजनाथ - तुम्हें याद है तुम्हारी दादी किसी बाबा का नाम बता रही थी और कह रही थी की वह बहुत बड़े और जाने-माने बाबा है , जिन औरतों का बच्चा नहीं होता वह उनका इलाज करते हैं , और कह रही थी कि जिन औरतों को बहुत सालों से बच्चा नहीं हो रहा था वहाँ पर इलाज कराने के बाद उनका बच्चा हुआ।


आरती- हाँ दादी उस दिन बोल तो रही थी लेकिन क्या आपको लगता है कि वहाँ जाने से कोई फायदा होगा।

राजनाथ - मुझे यह तो नहीं पता कि वहाँ जाने से काम होगा कि नहीं लेकिन एक बार जाकर देखना चाहिए शायद काम बन जाए आज ही मैं माँ से बात करता हूँ क्या कहती है फिर वहां जाने के बारे में सोचेंगे।

दोनों बाप बेटी बात कर ही रहे होते हैं कि तभी दादी बाहर से आ जाती है और। आरती को देखते ही कहती है अरे आरती बेटा तू आ गई कैसी है तू।


आरती - मैं ठीक हूँ दादी आप कैसी हो मैं भी ठीक हूँ बेटा और दामाद जी कैसे हैं।

आरती - वह भी ठीक हैं।

दादी - जब से तू यहाँ से गई पूरा घर सूना सूना लग रहा था। और तुम्हारी बाप की तो ऐसी हालत हो गई थी कि ना ठीक से काम कर थ और ना ही ठीक से खाना खाता था जब भी मैं इसको खाना खाने के लिए देती थी तो एक दो निवाला खाता था और पूरा खाना छोड़ देता था।

आरती - क्या आप सच कह रही हो बाबूजी खाना नहीं खा रहे थे।

दादी - और नहीं तो क्या मैं झूठ बोल रही हूँ तो सामने बैठा है पूछ लो उसी से ।

आरती राजनाथ से कुछ पूछती उससे पहले राजनाथ बोलता है अरे माँ तुम यह सब बात क्या लेकर बैठ गई मुझे तुमसे कुछ बात करनी है।


दादी - क्या बात करनी है।

राजनाथ - बात-बहुत जरूरी है लेकिन अभी नहीं शाम को वापस आऊंगा तब बात करूंगा अभी मैं कहीं जा रहा हूँ इतना बोलकर वह चला जाता है।

उसको जाते ही दादी कहती हैं बेचारा राजू पता नहीं इसका क्या होगा।

तो आरती दादी के बात सुनकर कहती है।क्यों बाबूजी को क्या होगा।


दादी - क्या होगा यह तो मैं नहीं जानती लेकिन इस बार जब तुम यहाँ से गई तो वह कुछ ज्यादा ही उदास रहने लग गया था। इससे पहले मैं उसको कभी इतना उदास रहते हुए नहीं देखी थी, जब तुम्हारी शादी हुई थी और तुम यहाँ से गई थी उस वक्त इतना उदास नहीं रहता था इस बार तुम जबसे यहां रहने आई हो तब से उसको तुमसे कुछ ज्यादा ही लगाव हो गया है, शायद अब उसको अकेलापन महसूस होने लगा है क्योंकि तुम्हारे अलावा उसका और है ही कौन, एक तुम्हारी माँ थी वह भी नहीं रही ,अब मैं भी कितना दिन रहूंगी, और तू भी चली जाएगी वह बेचारा अकेला रह जाएगा।

दादी- की बात सुनकर आरती सोचने लगती है की दादी सही कह रही है मेरे अलावा और उनका है ही कौन मैं भी चली जाऊंगी यहाँ से तो उनका ख्याल कौन रखेगा कोई बेटा बहू भी नहीं है जो उनका ख्याल रखेगा दादी आप फिकर मत कीजिए मैं उनको छोड़कर कहीं नहीं जाऊंगी।

दादी - बेटा तुम्हारे कहने से क्या होगा तुम ससुराल तो जाओगी आखिर तुमको एक दिन यहाँ से तो जाना ही पड़ेगा।

आरती - मैं नहीं जाऊंगी ।

दादी -हाँ नहीं जाएगी तुम्हारे कहने से होगा अच्छा यह सब बातें छोड़ उधर घर का सारा काम पड़ा है जा जल्दी से वह सब खत्म कर और शाम होने वाली है खाना भी जल्दी से बना लो राजू ने दोपहर में खाना नहीं खाया है उसे भूख लगी होगी ।


फिर आरती घर का काम करने के लिए चली जाती है घर का सारा काम खत्म करने के बाद खाना बनाने में लग जाती और शाम का खाना जल्दी बना लेती हैं राजनाथ भी शाम को घर जल्दी आ जाता है फिर आरती राजनाथ के पास जाती है और कहती है कि खाना खाएंगे कि आज भी भूखे रहेंगे।

राजनाथ - क्यों आज क्यों भूखा रहूंगा।

आरती- एक बीवी अपने पति पर जिस तरह से गुस्सा दिखाती है उसी तरह से गुस्सा होते हुए कहती है आपको भूखा रहने की आदत जो पड़ गई मेरे जाने के बाद ज्यादा हीरो बन रहे थे अभी खाना खा लीजिए उसके बाद में आपसे बात करूंगी इतना बोलकर वह दादी को बुलाने के लिए चली जाती है।

उसके जाने के बाद राजनाथ सोचता है कि इसको क्या हो गया यह क्यों गुस्सा हो रही है माँ ने इसको मेरी खाने वाली बात बता दी इस वजह से शायद गुस्सा हो रही है मेरे ऊपर।


आरती- फिर दोनों मांँ बेटे को खाना देती है और दोनों खाना खाने लगते हैं तभी राजनाथ अपनी माँ से कहता है माँ तुम उस दिन किसी बाबा के बारे में बता रही थी कौन है वह बाबा और कहाँ रहते हैं क्या नाम है उनका।

माँ - नाम क्या यह तो मुझे ठीक से नहीं पता लेकिन उनको पहाड़ी वाले बाबा कहते हैं क्योंकि वह जिस जगह पर रहते हैं उस जगह का नाम काली पहाड़ी है और वह ऐसे वैसे बाबा नहीं है वह बहुत बड़े बाबा हैं वह कोई और बीमारी का इलाज नहीं करते हैं वह सिर्फ उसी का इलाज करते हैं और जो भी उनके पास इलाज के लिए जाता है उसको वह पहले ही देख कर बता देंगे किसका होगा कि नहीं होगा जिसको बच्चा होने का रहेगा उसका इलाज करेंगे और जिसका नहीं होने के रहेगा वह मना कर देंगे मैं तो तुमको कब से कह रही हूँ की आरती को एक बार ले जाकर उनके पास दिखाओ लेकिन तुम मेरी बात सुनता ही कहाँ है। राजनाथ मैं भी यही सोच रहा था इस बार वही जाकर दिखाने के लिए लेकिन वह जगह है कहाँ पर।

माँ - वह जगह यहाँ से थोड़ी दूर है वहां जाने के लिए तीन-चार घंटे लगते हैं गाड़ी से और वह बाबा जी जगह पर रहते हैं वहाँ अगल-बगल में और कोई गांव नहीं है वहाँ चारों तरफ जंगल ही जंगल है और उधर सब सवारी वाली गाड़ी सही जाते हैं और बाबा जी जगह पर रहते हैं वहाँ जाने के लिए थोड़े दूर चलकर भी जाना पड़ता है।


राजनाथ - इधर से तो हम लोग गाड़ी से चले जाएंगे लेकिन उधर जो चलकर जाना पड़ेगा वहाँ हम लोग कैसे जाएंगे।

माँ - तुम दोनों को जाने में दिक्कत होगी इसलिए मैं एक काम करती हूं मैं ही इसको लेकर चली जाती हूं फिर बाद में जाने का होगा तो तुम इसके साथ चले जाना फिर तो इसको रास्ता मालूम ही रहेगा और बाबा के साथ मेरी जान पहचान भी है उनको मालूम होगा कि ये मेरी पोती है तो और अच्छे से इलाज करेंगे।

राजनाथ - तुम ठीक कर रही हो माँ तुम्ही इसके साथ चली जाना जब जाने का होगा मुझे बता देना।

यह सब बात करते करते दोनों का खाना भी हो गया खाना खाने के बाद राजनाथ उठकर अपने कमरे में सोने के लिए चला गया।

फिर आरती ने भी खाना खाया और बाकी जो काम था खत्म करके फिर एक कटोरी में तेल गर्म करती है और लेकर राजनाथ के कमरे में जाती है तो देखी है राजनाथ आंख बंद करके सोया हुआ तो आरती समझ जाती है क्या सोने का नाटक कर रहे हैं तो उसके बेड के करीब जाती है और कहती है क्या बात है आज बहुत जल्दी नींद आ गई और दिन तो नींद ही नहीं आती थी रात भर यह सब नाटक छोड़िए मुझे पता है आप जाग रहे हैं मुझे आपसे बात करनी है उठीए जल्दी राजनाथ मुस्कुराते हुए अपनी आंखें खोलता है और कहता है क्या हुआ क्या बात करनी है मेरी बेटी को।


आरती - मुझे यह बताइए कि मेरे जाने के बाद आप खाना क्यों नहीं खा रहे थे ।

राजनाथ - अरे किसने तुझे बोला कि मैं खाना नहीं खा रहा था मैं खाना नहीं खाता तो क्या मैं जिंदा रह पाता।


आरती - अच्छे से खाना और जिंदा रहने के लिए खाना दोनों में बहुत अंतर है और आप जिंदा रहने के लिए खाना खा रहे थे मैं आपसे पूछ रही हूँ कि आप अच्छे से खाना क्यों नहीं खा रहे थे।

राजनाथ - अरे तुम्हें किसने बताया कि मैं अच्छे से खाना नहीं खा रहा था।

आरती - और दादी जो बोल रही थी क्या झूठ बोल रही थी।

राजनाथ - तुम भी दादी की बात पकड़ कर बैठी हो तुम्हें पता है की उसको बढ़ा चढ़ा कर बोलने की आदत है भूख जितना रहेगा उतना ही तो खाऊंगा की उससे ज्यादा खाऊंगा।

आरती - वही तो मैं पूछ रही हूं कि मेरे जाने के बाद आपको भी भूख क्यों नहीं लग रही थी मैं यहां रहती हूं तो आपको तो बहुत भूख लगती है।

राजनाथ - सोचता है कि अब माफी मांग लेने में ही भलाई है ऐसे यह नहीं छोड़ेगी और कहता है अच्छा सॉरी बाबा मुझसे गलती हो गई अब से ऐसा नहीं होगा अब कभी भी भूखा नहीं रहूंगा भूख नहीं भी रहेगी रहेगी तब भी खा लूंगा लेकिन आज मुझे माफ कर दे।

आरती - पक्का आज के बाद कभी भूखा नहीं रहेंगे।

राजनाथ - पक्का मेरी माँ पक्का आज के बाद कभी भूखा नहीं रहूंगा।


आरती - तो ठीक है आज माफ कर देता हूँ ।

अब मालिश करवाएंगे कि नहीं करवाएंगे!


राजनाथ - नेकी और पूछ पूछ मालिश के लिए तो एक महीने से तड़प रहा हूं आज रात भर मालिश करेगी तो रात भर करवाऊंगा !

आरती अच्छा जो एक महीने का बाकी है वह आज ही पूरा करवा लेंगे क्या और आज मैं सोंगी भी नहीं

राजनाथ - और नहीं तो क्या मैं एक महीने से जाग रहा हूँ तो क्या तुम मेरे लिए एक रात नहीं जाग सकती।

आरती - एक रात क्या मैं आपके लिए कई रात जाग सकती हूँ आप कह कर तो देखिए फिर वह मालिश करने लगती है।

आरती- की बात सुनकर राजनाथ का मन गदगद हो जाता है और सोचता है कितना प्यार करती है मेरी बेटी मुझे फिर वह आरती को ऊपर से नीचे तक देखने लगता है तभी उसकी नजर उसकी पतली कमर और पेट पर जाता है जिसको देखकर उसके मन में ख्याल आता है कि काश इसको कोई मेरे जैसा मर्द मिलता जो इसकी जवान खूबसूरत बदन को मसल मसल के मजे लेता और इसकी सटा हुआ पेट है उसको फूला देता और एक मेरा दामाद है जिनको इतनी खूबसूरत बीवी मिली है और वह कुछ कर नहीं पा रहा है यह सब सोंचते हुए और मालिश करते हुए आधा घंटा बीत जाता है तो राजनाथ कहता है कि बेटा बहुत देर हो गई अब छोड़ दे जा जाकर सो जा।

तो आरती कहती है क्यों क्या हुआ अभी तो आधा ही घंटा हुआ है अभी तो पूरी रात बाकी है।

राजनाथ - अरे बेटा वह तो मैं मजाक में बोला था जितनी देर तक तुमने मालिश किया उतना मेरे लिए काफी है अब तू भी थक गई होगी जा जाकर आराम कर और सो जा और करने का होगा तो कल दोपहर में कर लेना।

आरती - अच्छा ठीक है जा रही हूं लेकिन कल दोपहर में जल्दी आजा आ जाना।

राजनाथ - अच्छा ठीक है आ जाऊंगा।

.............
Nais
 

Mohammed Ali

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भाग २६

अभी तक आप लोगों ने पढ़ा की बाबा आरती से कहतें हैं कि तुमको माँ बनना है तो तुमको अपने पिताजी के साथ संबंध बनाना पड़ेगा।


बाबा की बात सुनकर आरती हैरान हो जाती है कि बाबा ऐसे कैसे कह रहे हैं ।

आरती - बाबा लेकिन यह सब कैसे हो सकता है।


बाबा- हो सकता है अगर तुम चाहोगी तो ।

आरती- बाबा क्या यह गलत नहीं है एक पिता पुत्री का आपस में संबंध बनाना।


बाबा - बिल्कुल भी गलत नहीं है तुम उसे बेटी की नजरिए से नहीं एक स्त्री की नजरिए से देखो और सोचो कि वो वह पुरुष है जो तुमको दुनिया की सबसे अनमोल खुशी दे सकता है जो कोई और पुरुष तुम्हें नहीं दे सकता।

एक स्त्री के लिए माँ बनना उसके लिए दुनिया की सबसे बड़ी खुशी होती है ।


क्या तुम उस खुशी को पाना नहीं चाहोगी अगर तुम यह सोच रही हो कि तुम अपने पति को छोड़कर किसी दूसरे पुरुष से शादी करके मांँ बन जाओगी तो यह तुम्हारा सोचा भूल है तुम दुनिया के किसी भी मर्द से शादी कर लो फिर भी तुम माँ नही बन पाओगी।

बाबा की बात सुनकर आरती सोंचने लगती है की क्या जवाब दे।

बाबा आरती को चुप देखकर कहते हैं पुत्री तुम आराम से सोच समझ लो उसके बाद तुम अपना निर्णय लो मैं तुमसे अभी तुम्हें निर्णय सुनाने के लिए नहीं कह रहा हूँ तुम जितना भी समय लेना चाहती हो लेलो अभी से लेकर कल सुबह तक अगर तुमको और भी वक्त चाहिए तो तुम वापस घर जाकर भी सोच समझ लेना उसके बाद आना। इसमें मेरा कोई फायदा नहीं है सिर्फ तुम्हारा ही फायदा है हमने तुमको यह सारी बातें साफ-साफ इसलिए बता दी क्योंकि तुम्हारी दादी और हमारा पुराना जान पहचान है इसलिए मैंने सारी बातें साफ-साफ तुमको बता दिया और हाँ यह बात तुम अपने दादी से मत कहना ,इस बारे में सिर्फ तुमको ही निर्णय लेना है अब तुम जाओ।

फिर आरती बाबा के कमरे से बाहर आ जाती है, तो बाहर आते ही उसकी दादी उसे पूछने लगती है कि क्या कहा बाबा ने ,तो आरती को समझ में नहीं आता की दादी को क्या जवाब दें तो वह कहती है कि अभी उन्होंने कुछ बताया नहीं है फिर से देखेंगे उसके बाद बताएंगे।

दादी - फिर कब देखेंगे ।

आरती - अभी कुछ देर बाद देखेंगे इतना बोलकर वह वहाँ से निकाल कर घर के पीछे एकांत में जाकर बैठ जाती है और सोचने लगती है कि बाबा जो कह रहे हैं क्या मुझे वैसा करना चाहिए कि नहीं। अगर मैं ऐसा करती हूँ तो क्या मैं माँ बन जाऊंगी।


अगर बाबा इतना विश्वास के साथ कह रहे हैं तो कुछ तो सच्चाई होगी उनकी बातों में और इतने सारे लोग आज यहां आए हुए थे आखिर उनकी बातों में सच्चाई होगी तभी तो आए हुए थे यह सब सोच विचार करने के बाद फिर वह आधा घंटे मे बाबा के पास जाती है ।

तो बाबा उसको देखकर कहते हैं क्या बात है पुत्री।


तो आरती कहती है बाबा मैं आपसे बात करना चाहती हूँ।

बाबा - हाँ बोलो क्या बात करना चाहती हो।


आरती - बाबा आपने जो कहा करने के लिए अगर मैं वैसा करने के लिए तैयार हो जाऊंगी तो क्या मेरे बाबूजी वह सब करने के लिए तैयार होंगे।

बाबा - पुत्रि यह बात तो तुम्हारे पिताजी से मिलने के बाद ही मालूम होगा कि वह तैयार होंगे कि नहीं लेकिन उससे पहले तुमको निर्णय करना होगा कि तुम उसके लिए तैयार हो कि नहीं पहले तुम अपना निर्णय पक्का करो की तुम यह सब करने के लिए तैयार हो।

आरती - बाबा अगर आप इतना विश्वास के साथ कह रहे हैं तो मैं आपकी बात मानने के लिए तैयार हूँ लेकिन बाबा अगर यह सब बात दूसरे लोग जानेंगे तो वह क्या सोचेंगे हमारे बारे में।

बाबा - तुम्हारी यह बात तुम दोनों के अलावा और किसी को नहीं मालूम होगा यह बात सिर्फ तुम दोनों के ही बीच में रहेगी। सिर्फ तुम्हें मालूम होगा कि उस बच्चे का पिता कौन है और और यह सब करने से तुम दोनों बाप बेटी का रिश्ता खत्म नहीं होगा जैसे तुम दोनों आज पिता पुत्री हो कल भी तुम दोनों ऐसे ही दुनिया के सामने एक आदर्श पिता पुत्री की तरह ही रहोगी और भले ही उस बच्चे का बाप तुम्हारा पिता होगा लेकिन दुनिया वालों की नजर मे उस बच्चे का बाप तुम्हारा पति ही कहलाएगा ।

और आज तक जो शारीरिक सुख तुम्हें तुम्हारे पति से नहीं मिला वह सुख अब तुम्हारे पिता से तुमको मिलेगा अब और क्या चाहिए तुम्हें।


बाबा की यह बात सुनकर आरती शर्मा जाती है और अपनी नज़रें नीचे कर लेती है और कहती है बाबा अब हमको क्या करना होगा।

बाबा - अब तुमको करना यह है कि तुमको अपने पिताजी को लेकर यहाँ पर आना होगा इसलिए अब तुम यहाँ से जाओऔर अगले हफ्ते अपने पिताजी को साथ में लेकर आना, अब तुम अपने दादी को यहाँ बुलाओ फिर वह अपने दादी को अंदर बुलाती है तो बाबा उसे कहते हैं की माँ जी मैंने इसको अच्छे से देख लिया है और अब अगले हफ्ते इसको फिर से आना होगा इसलिए अब आप लोग जाइए और अगले हफ़्ते इसको अपने पिताजी के साथ भेजें दीजिएगा अब आपके हैरान होने की जरूरत नहीं है।

दादी - बाबा हम जिस काम के लिए आपके पास आए हैं वह काम तो होगा ना

बाबा - क्यों नहीं होगा जरूर होगा आप ऊपर वाले पर भरोसा रखिए।


दादी - बस अब आपके ही ऊपर भरोसा है अब आप ही कुछ कर सकते हैं।

बाबा - आप जिस भरोसे के साथ यहां आई है आपका भरोसा टूटेगा नहीं और आपकी पोती जरूर माँ बनेगी और आप उसके बच्चे को अपनी गोद में खेलाओगी ।

दादी- बाबा मैं कब से चाह रही हूं कि ऐसा हो लेकिन हो तब ना।


बाबा- क्यों नहीं होगा जरूर होगा अब आप बेफिक्र होकर यहां से जाइए।

फिर वह दोनों दादी और पोती वापस घर आ जाती है तो राजनाथ अभी घर में नहीं था कहीं बाहर गया हुआ था फिर शाम हो जाती शाम होने के बाद राजनाथ वापस घर आता है और आते ही अपनी माँ के पास जाता है और वहाँ क्या-क्या हुआ वह सब पूछने लगता है और पूछता है कि बाबा ने क्या कहा।

तो राजनाथ की मां कहती है कि अभी तो कुछ भी नहीं बताया अगले हफ्ते फिर बुलाया है अब तुम इसके साथ में चले जाना।

राजनाथ - ठीक है मैं चला जाऊंगा लेकिन आज उन्होंने कुछ भी नहीं बताया।

राजनाथ की माँ उन्होंने बस इतना ही कहा कि आप लोग जिस काम के लिए आई हो वह काम हो जाएगा।।

राजनाथ - ठीक है जब जाने का होगा मैं इसके साथ चला जाऊंगा इतना बोला और फिर उसने रात का खाना खाया और फिर सोने के लिए अपने कमरे में चला गया , उसके बाद आरती ने भी खाना खाया और खाना खाने के बाद वह राजनाथ को मालिश करने के लिए जाने ही वाली थी कि , उसके दिमाग में बाबा वाली बात घूमने लगती है और वह सोचने लगती है कि आज तक मैं अपने बाबूजी के सामने एक आदर्श बेटी बनी हुई थी ,और अब कुछ दिनों के बाद में मैं उनके साथ में उनके बिस्तर पर सोऊंगीं वह भी बिना कपड़ों के पूरी नंगी और फिर बाबूजी मेरे साथ वह सब करेंगे जो एक पति अपनी पत्नी के साथ करता है।

यह सब सोचते ही आरती का शरीर गन गना जाता है और वह शीहर उठती है फिर वह धीरे-धीरे राजनाथ के कमरे में जाने लगती है और जैसे ही दरवाजे के पास पहुंचती है तो राजनाथ उसकी पायल की आवाज सुनकर समझ जाता है की आरती आ रही है तो वह सोने का नाटक करने लगता है और आँख बंद करके सो जाता है।

तभी आरती कमरे में जाती है तो देखती है कि बाबूजी सो गए हैं तो वह उसके बीशतर के करीब जाते हुए कहती क्या बात है आज बड़ी जल्दी नींद आ गई और दिन बिना मालिश के नींद नहीं आती थी और आज कैसे बिना मालिश की नींद आ गई।

तभी राजनाथ अपनी आँख खोलते हुए कहता है कहाँ किसे नींद आ गई।

तो आरती कहती है अरे अभी तो आप सो रहे थे फिर जाग कैसे गए।

राजनाथ - सोया हुआ नहीं था सोने की कोशिश कर रहा था।

आरती - क्यों सोने की कोशिश क्यों कर रहे थे।

राजनाथ - मैंने सोचा किया आज तुम थक गई होगी तो शायद मालिश करने के लिए नहीं आओगी तो इसलिए मैं सोने की कोशिश कर रहा था।

आरती - आज मैं आपसे एक बात कह देता हूं मैं कितनी भी थक जाऊं या मुझे कुछ भी हो जाए लेकिन आपको मेरे रहते हुए बिना मालिश के सोने नहीं दूंगी।

राजनाथ - इतना प्यार करती है तू मुझसे।


आरती- क्यों आपको कोई शक है।

राजनाथ -नहीं मुझे कोई शक नहीं मुझे पता है कि मेरी बेटी मुझसे कितना प्यार करती है और मैं भी उसे उतना ही प्यार करता हूं।


आरती - यह तो कुछ दिन के बाद ही पता चल जाएगा कि आप मुझसे कितना प्यार करते हैं।

राजनाथ - कैसे पता चल जाएगा।


आरती - बस पता चल जाएगा ऐसे ही।

राजनाथ -अच्छा तुमने बताया नहीं की बाबा ने आज क्या कहा।


बाबा - ने आरती से यह सब बात बताने के लिए मना किया था और कहा था कि यह सब बात तुम अपने पिताजी को अभी मत बताना वह जब यहां आएगा तो मैं खुद उसे बता दूंगा।

आरती मन ही मन सोचती है और कहती कि बाबा ने तो बहुत कुछ बताया है लेकिन आपको वह सब नहीं बता सकती और वह कहती है कि बाबा ने अभी कुछ बताया नहीं इस बार जाऊंगी तब बताएंगे।

राजनाथ- तो कब जाना है वहां।

आरती -बाबा ने रविवार को आने के लिए कहा है उसे दिन भीड़ कम रहती है तो उसी दिन आने के लिए कहा।

राजनाथ - तो ठीक है उसी दिन चलेंगे

आरती राजनाथ की मालिश करते हुए उसके पूरे बदन को देखने लगती है और मन ही मन सोचती है कि बाबूजी का शरीर कितना मजबूत और हट्टा कट्टा है जब यह मेरे ऊपर चढे़गें तो मेरी तो हालात ही खराब हो जाएगी यह इतने तगड़े हैं और मैं इतनी पतली कैसे मैं इनका वजन सह पाऊंगी।


(अगला भाग पेज नंबर 91 में)
So good
 

Mohammed Ali

Muhammad Ali 51 years I love insist
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भाग २५
अभी तक आप लोगों ने पढ़ा की आरती अपने बाप राजनाथ की मालिश करने के बाद वह अपने कमरे में चली गई सोने के लिए।


इधर राजनाथ आज बहुत खुश था और उसका खुश होने का कारण थी उसकी बेटी ।

वही बेटी जो बीवी की तरह उसका हर चीज का ख्याल रखती है।

बीवी जैसी बेटी को अपने पास पाकर उसे बहुत खुशी हो रही थी और आज एक महीने के बाद उसके पास वह वापस आ ई हुई है।

और वह इसी खुशी में अपना हांथ अपने लूंगी के अंदर में डाल कर अपने लंड को सहलाने लगता है और उसका लंड धीरे-धीरे खड़ा होने लगता है और देखते ही देखते कुछ ही देर में पूरा जोश में आ जाता है।


और सांप की तरह फूफकारने लगता है लेकिन राजनाथ ने अपने लंड को खड़ा तो कर दिया था लेकिन उसको शांत कैसे करेगा इसके आगे उसे कुछ समझ में नहीं आ रहा है।

उसको शांत करने का दो ही तरीका पहला तरीका है एक अपनी बेटी का नाम लेते हुए मुळ मार कर अपना बीज बाहर गिरा दे ।

लेकिन वह ऐसा नहीं करेगा क्योंकि वह , अपने अनमोल बीज को बाहर गिरा कर बर्बाद नहीं करना चाहता है ,


और दूसरा तरीका यह है कि उसको किसी चूत के अंदर डालकर उसको अच्छे से चुदाई करें और उसके अंदर अपना बीज गिरा दे लेकिन इस वक्त उसके लिए ऐसा करना संभव नहीं है ।

क्योंकि उसको चुदाई करने के लिए उसको चूत चाहिए और वह चूत उसकी बेटी का है लेकिन वह उसके साथ ऐसा कर नहीं सकता, क्योंकि वह उसकी बेटी है।


इसमें उसका दो मन है एक मन कहता है कि वह अपनी बेटी के साथ सेक्स करें और दूसरा मन कहता है कि नहीं यह गलत है ऐसा नहीं करना चाहिए और इसी कस्म कस में वह आगे नहीं बढ़ पा रहा है।

लेकिन उसका उसकी बेटी के साथ जो छेड़छाड़ और हंसी मजाक चल रहा है उसको इसमें भी बहुत आनंद आ रहा है और ऐसा आनंद वह आगे भी लेते रहना चाहता है ।

इन्हीं हसीन ख्यालों को अपने आँखों में बसाए हुए उसे नींद आ जाती है।

फिर वह दूसरे दिन सुबह सो कर उठा और उठकर बाहर घूमने फिरने के लिए निकल गया फिर घूम फिर के वापस आया और नाश्ता पानी करके अपने काम के लिए निकल गया।

फिर वह दोपहर में वापस खाना खाने के लिए घर आता है तो आरती उसको खाने के लिए कहती है ।

और फिर उसको खाना देने के लिए जाती है तो जैसे ही वह राजनाथ के करीब पहुंचती है तो राजनाथ के नाक में एक बहुत ही सुंदर खुशबू उसके नाक में चली जाती है।


और वह खुशबू थी आरती की जो अभी कुछ देर पहले ही नहा धोकर आई थी।

उसकी खुशबू इतनी मनमोक थी कि राजनाथ ने उसको सुंघा तो उसको अलग ही दुनिया अलग ही सुख का एहसास होने लगा फिर उसने खाना खाया और खाकर वहीं बरामदे में चौकी के ऊपर बैठकर आराम करने लगाता है।

तो कुछ देर के बाद में देखता है की आरती कमरे से निकल कर उसके तरफ आ रही है तो वह उसको ऊपर से नीचे तक उसकी खूबसूरत बदन को देखने लगता है।


तो आरती उसको देखते हुए समझ जाती है कि राजनाथ उसको देख रहा है तो वह उसके पास आते हुए पूछती है कि ऐसे क्यों देख रहे हैं आप हमको ।

राजनाथ यही देख रहा हूं कि तू एक महीने अपने ससुराल का खाना खाकर आई हो तो कुछ मोटी हुई हो कि नहीं यही देख रहा था।

आरती तो आपने क्या देखा मोटी हुई हूँ कि नहीं।

राजनाथ इस तरह से कुछ पता नहीं चल रहा है मेरा मतलब है साड़ी में ढका हुआ है इस वजह से पता नहीं चल रहा है।


आरती मुस्कुराते हुए कहती है तो कैसे पता चलेगा क्या साड़ी उतारने से पता चलेगा।

तो राजनाथ मन ही मन मुस्कुराता है कहता है कहता है कि हाँ साड़ी उतारने के बाद तो अच्छी तरह से पता चलेगा।

आरती फिर से मुस्कुराते हुए कहती है कि सिर्फ साड़ी उतारने से हो जाएगा या कुछ और भी उतारना पड़ेगा।

राजनाथ यह तुम्हारे ऊपर है कि तुम क्या-क्या उतरोगी।

आरती थोड़ा इठलाते लाते हूए कहती है यह क्या बात हुई देखना आपको है तो आप ही बताएंगे ना की क्या-क्या उतारना पड़ेग।


दोनों बाप बेटी के बीच में यह सब बात चल ही रहा था कि तभी दादी गेट के बाहर से आवाज देने लगती है गेट खोलने के लिए दादी की आवाज सुनकर दोनों बाप बेटी हड़बड़ा जाते हैं।

फिर आरती गेट खोलने के लिए चली जाती है और राजनाथ वहीं लेट कर आराम करने लगता है

दादी अंदर आते हुआ आरती से पूछती है राजू आया कि नहीं तो आरती जवाब देती हाँ बाबूजी आए हुए हैं और वह खाना खाकर आराम कर रहे हैं।

तो वह राजनाथ के पास जाती है औ आवाज देती है राजू राजू सो गया क्या।

राजनाथ नहीं माँ जाग रहा हूँ बोलो क्या बोलो क्या बोलना चाहती हो।

दादी बोलना क्या हम लोग कल ही बाबा के पास जाएंगे कल का दिन अच्छा है।

राजनाथ ठीक है माँ कल ही जाना चाहती हो तो चली जाना।

फिर दोनों दादी और पोती बाबा के पास जाने के लिए निकल जाती है 3 घंटे की यात्रा के बाद वहाँ पहुंचती हैं तो देखती है कि वहां काफी भीड़ है।


पहले हीं से वहाँ काफी लोग आए हुए थे। इतनी भीड़ देखकर आरती को कुछ समझ में नहीं आता है की यहाँ क्या हो रहा है क्या यह सभी लोग यहाँ इलाज कराने के लिए आई है कुछ और करने के लिए ।

उनमें से कुछ औरतों के गोद में बच्चे भी थे तो उसने एक दो से पूछा तो उन्होंने बताया कि उनका भी बहुत सालों से बच्चा नहीं हो रहा था तो उन्होंने यहाँ पर जाकर इलाज कराया तो उनका बच्चा हुआ इसलिए वह बच्चे को लेकर यहाँ बाबा को दिखाने के लिए आई हुई हैं।


फिर उसकी दादी उसको वहीं बैठने के लिए बोलकर वह अंदर बाबा के पास चली गई अंदर गई तो बाबा ने उसको एक दो बार गौर से देखा तो वह उसको पहचान गए और बोले अरे माँ जी आप बहुत दिनों के बाद कैसी हो आप और कैसे आना हुआ ।

दादी बस बाबा जी हम बहुत अच्छे हैं और हम आप ही के पास कुछ काम से आए हैं ।


बाबा आप अकेली आई हो या आपके साथ में और कोई है।

दादी मेरे साथ में मेरी पोती है हम उसी को आपके पास लेकर आए हैं।

बाबा अच्छा-अच्छा ठीक है आप दोनों बाहर कुछ देर प्रतीक्षा कीजिए मैं फिर आप लोगों को बुलाता हूँ ।

दादी जी ठीक है और वह बाहर आ गई कुछ देर इंतजार करने के बाद बाबा ने उन दोनों को अंदर बुलाया फिर बाबा ने आरती को अपने पास बिठाकर उसका हाथ पकड़ा और अपनी आँखें बंद कर के कुछ मंत्र पढ़ने लगे।


कुछ देर मंत्र पढ़ने के बाद बाबा ने अपनी आँख खोली और दादी की तरफ देखते हुए बोले कि इसको बाद में अच्छे से देखना पड़ेगा इसलिए आज रात आप दोनों को यहीं रुकना होगा यह सब भीड़ खत्म होने के बाद मैं इसको शाम को अच्छे से देखूंगा इसलिए आप लोग अभी यहीं पर खाना-वाना खाकर आराम कीजिए ।

दादी बोलती अच्छा बाबा ठीक है आप जैसा बोलेंगे वैसा ही करेंगे।


फिर शाम को बाबा आरती को अपने कमरे में बुलाते हैं और कहते हैं कि तुम माँ तो बन सकती हो लेकिन इसमे एक बहुत बड़ी समस्या है जिस वजह से तुम माँ नहीं बन पा रही हो और वह समस्या है तुम्हारी मायके की यानी तुम्हारे पिताजी के घर की समस्या है जिस वजह से तुम माँ नहीं बन पा रही हो ।

आरती बाबा को आश्चर्य से देखते हुए कहती है की बाबा मेरे बाबूजी के घर में ऐसी क्या समस्या है जिस वजह से मैं माँ नही बन पा रही हूँ थोड़ा हमको साफ-साफ बताइए।


बाबा तुम्हारे पिताजी कितने भाई हैं ।

आरती मेरे बाबूजी अकेले हैं उनका और कोई भाई नहीं है ।

बाबा और तुम्हारे पिताजी के कितने बेटे हैं।


आरती जी उनका कोई बेटा नहीं है सिर्फ मैं उनकी एक बेटी हूँ और कोई नहीं है ।

बाबा बस यही समस्या है कि तुम्हारे पिताजी का कोई बेटा नहीं है ।

आरती मतलब।


बाबा मतलब यह कि उनका उनके बाद उनके। बस वंश को आगे बढा़ने वाला कोई नहीं है और जब तक उनके वंश को आगे बढ़ने वाला कोई नहीं आएगा तब तक तुम माँ नही बन पाओगी मेरा मतलब है जब तक उनका कोई बेटा नहीं होगा तब तक तुम माँ नहीं बन पाओगी।

आरती बाबा यह आप क्या कह रहे हैं क्या मेरे बाबूजी को फिर से शादी करना पड़ेगा।

बाबा शादी करना तो बहुत आसान काम है वह अभी शादी करके आसानी से एक बेटे का बाप बन सकता है लेकिन इसमें भी एक समस्या है।

आरती इसमें क्या समस्या है।

बाबा इसमें समस्या यह है कि अगर तुम्हारा बाप दोबारा शादी करता है तो उसकी मृत्यु हो सकती है अगर वह दोबारा शादी करेगा करेगा और जैसे ही बेटे का बाप बनेगा वैसे ही उसकी मृत्यु हो जाएगी क्या तुम अपने आप की मृत्यु का कारण बनना चाहोगी।

आरती बाबा यह आप क्या कर रहे हैं मैं कभी भी ऐसा नहीं करूंगी आरती यह बात सुनकर उदास हो जाती है और कुछ देर चुप रहने के बाद कहती है बाबा जी इसका मतलब अब मैं कभी माँ नही बना पाऊंगी।

बाबा तुम माँ अभी भी बन सकती हो इसके लिए तुमको बहुत हिम्मत करनी पड़ेगी।

आरती बाबा क्या करना पड़ेगा हमको।

बाबा सिर्फ तुमको नहीं तुम दोनों को एक दूसरे की मदद करनी पड़ेगी तुम उसकी मदद करोगी और वह तुम्हारा मदद करेगा तुम उसके जरिए से माँ बनोगी और वह तुम्हारे जरिए से बाप बनेगा।


आरती बाबा यह आप क्या कह रहे हैं मैं कुछ समझी नहीं।

बाबा मेरा कहने का मतलब यह है कि जो काम तुम माँ बनने के लिए अपने पति के साथ करती हो वही काम तुमको अपने पिताजी के साथ करना पड़ेगा पड़ेगा मेरा मतलब है कि तुम दोनों को आपस में संबंध बनाना पड़ेगा।

आरती बाबा की बात को समझ जाती है और आश्चर्य चकित भी होती है कि बाबा यह क्या कह रहे हैं और हैरानी से बाबा की ओर देखते हुए कहती है बाबा यह आप क्या कह रहे हैं।

बाबा मैं वही कह रहा हूँ जो तुम समझ रही है।

आरती लेकिन बाबा यह कैसे हो सकता है मैं उनके साथ ऐसा कैसे कर सकती हूँ मैं उनकी बेटी हूँ और वह मेरे बाबूजी हैं।

बाबा मुझे पता है कि तुम उनकी बेटी हो और वह तुम्हारे पिताजी है लेकिन इसके अलावा तुम्हारे पास और कोई रास्ता नहीं है अगर तुम माँ बनना चाहती हो तो ऐसा तुम दोनों को करना ही पड़ेगा जब तक तुम दोनों का दोस् नहीं कटेगा तब तक तुम माँ नही बन पाओगी।

(अगला भाग पेज नंबर 80 मे)
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भाग २७
अभी तक आप लोगों ने पढ़ा की आरती राजनाथ की मालिश करते हुए उसके हठे कठे गठीले बदन को देख कर मन ही मन सोचती है की बाबूजी का इतना मजबूत और भारी शरीर है जब मैं ईनके नीचे आऊंगी और यह मेरे ऊपर चढ़ेंगे और अपनी ताकत आजमाएंगे तब मेरी हालत क्या होगी पता नहीं ।

लेकिन यह सब जो मैं सोच रही हूँ..... क्या ऐसा होगा क्या बाबू जी यह सब के लिए मानेंगे या नहीं यह तो इनको वाहाँ लेकर जाने के बाद ही मालूम होगा की क्या होने वाला है।


आरती यह सब सोंचते हुए उसकी मालिश पूरी हो गई फिर वह सोने के लिए अपने कमरे में चली गई।

फिर दूसरे दिन सुबह उठकर अपना काम खत्म करने के बाद नहाने के लिए गई और नहाने के बाद उसके दिमाग में एक ख्याल आया और उसने अपने खोले हुए कपड़े वहीं वॉशरूम में खूंटी के उपर टांग के रख देती ह यह सोचकर कि जब बाबूजी अपना पैर हाथ धोने के लिए आएंगे तो ईसको देखेंगे और देखने के बाद उनकी प्रती क्रीया
क्या होगी वह कुछ बोलते हैं की नहीं यह जानने के लिए उसने अपने कपड़े वहीं टांग दिये और उसने अपनी ब्रा और पैंटी को ऊपर रख दिया ताकि राजनाथ उसे देख सके।

उसके बाद दोपहर को राजनाथ घर आया तो आरती ने उसे कहा बाबूजी आप पैर हांथ धो लीजिए मैं आपके लिए खाना लेकर आती हूँ।


उसके बाद राजनाथ पैर हांथ धोने के लिए वॉशरूम में गया तो जैसे उसने अपना गमछा कंधे से उतार के कुटी पर टांगने गया तो वहाँ आरती के कपड़े देखकर वह चौंक गया की आरती के कपड़े यहाँ क्यों रखे हुए हैं यह तो खोला हुआ कपड़ा लग रहा है लेकिन उसने यह सब कपड़े यहाँ क्यों रखे हैं यहाँ तो वो अपने कपड़े कभी नहीं रखती थी वह कुछ और सोचता कि उसकी नजर ब्रा और पैंटी पर टिक जाती है फिर उसके मन में उत्सुकता होती है उस ब्रा पैंटी को छूकर देखने की क्योंकि उसने इससे पहले कभी भी आरती की खोली हुई ब्रा और पैंटी नहीं देखी थी इस वजह से उसके अंदर उत्सुकता ज्यादा होने लगती है फिर वह उस पैंटी को उठाकर देखने लगता है कि इसमें आरती की चूत से निकली हुई कोई निशानी है कि नहीं।

फिर वह चड्डी को उलट के देखा तो उसमे दोनों टांगों के बीच वाले हिस्से पर कुछ दाग नजर आता है उसको देखने से ऐसा लग रहा था कि वहां पर कोई तरल पदार्थ गिरा है जो अब सूख चुका और सूखने की वजह से हार्ड हो गया है यह दाग उस चीज़ का था कि जब आरती है रात में राजनाथ की मालिश कर रही थी तब उसका तंदुरुस्त बदन को देखकर उसके अंदर सेक्स करने की जो भावना जगी थी उसी भावना की वजह से उसकी योनि की पानी की कुछ बूँदे बह के बाहर आ गई थी यह दाग उसी की है।

राजनाथ उसको देख कर समझ जाता है कि यह क्या चीज का दाग है क्योंकि एक मर्द को अच्छी तरह से पता होता है कि एक स्त्री की योनि से क्या चीज निकलता है राजनाथ तो इन सब चीजों का पुराना खिलाड़ी है।


राजनाथ उस पैंटी को नाक के करीब लाकर उस दाग वाली जगह को सूंघता है तो उसके नाक में एक मादक सि गंध समा जाती है और वह उस गंध को सुंघते ही मदहोश होने लगता है आज बहुत सालो के बाद उसको ऐसी गंध सुंघने को मिली थी ।

उसकी बीबी के मरने के कइ साल बाद उसको
आज ऐसा मौका मिला था।

राजनाथ को यह सब करते हुए 10 मिनट बीत जाते हैं लेकिन वह सेक्स की वासना में इतना खो चुका था कि उसे होंश नहीं रहता है वह क्या करने आया था और क्या कर रहा है ।

उधर आरती यह सोचने लगती है कि बाबूजी को गए हुए इतनी देर हो गई लेकिन अभी तक पैर हांथ धोकर नहीं आए लगता है उन्होंने मेरे कपड़े देख लिए लेकिन उनको इतना टाइम क्यों लग रहा है पैर हाथ धोने में तो इतनी टाइम नहीं लगता है आखिर ये वहाँ कर क्या रहे हैं।

तभी राजनाथ की आंख खुलती है और वह होश में आता है तो देखता हैं कि ये मैं क्या कर रहा हूं मैं यहां पैर हाँथ धोने के लिए आया था और यह मैं क्या करने लग गया फिर वह उस पैंटी को उसी जगह पर रख देता है और फिर पैर हांथ धोने के बाद वह वापस आ जाता है।


तो आरती उससे पूछती है की बड़ी देर लगा दिया आज पैर धोने में ।

राजनाथ -- कहता है कि हांँ आज थोड़ा गंदा ज्यादा था इस वजह से देर हो गई धोने में ।

आरती -- मुस्कुराती और कहती ठीक है आप बैठीए मैं आपके लिए खाना लेकर आती हूँ फिर वह जैसे ही किचन से खाना लेकर आ रही होती है की।

तभी राजनाथ की नजर उस पर पड़ती है तो उसको देख कर देखता ही रह जाता है। उसके खुले हुए बाल , उसकी मांग में हल्की सी लाल सिंदूर ,और उसके पलू के पीछे झाँकती हुई उसकी पतली कमर और उसकी गदराई जवानी वह एक वासना में लिपटी हुई कामदेवी लग रही थी जो कीसी भी पुरूष को समोहीत कर सकती है यह सब देखकर राजनाथ की भूख मर चुकी थी अब उसे कुछ और चीज़ की भूख लग चुकी थी और वह भूख थी सेक्स और वासना की।


और उस भूख को मिटाने के लिए जो खाना चाहिए वह खाना उसकी बेटी के पास है और वह उससे मांग नहीं सकता फिर मजबूरी में अपने आप को समझाता है और फिर खाना खाने की कोशिश करता है लेकिन उसको खाने की इच्छा नहीं हो रही थी।

फिर उसने थोड़ा सा खाना खाया बाकी सारा खान उसी तरह छोड़ दीया और खाने पर से उठकर अपना हांथ धोने के बाद अपने कमरे में सोने के लिए चला जाता है।

आरती को थोड़ा आश्चर्य होता है कि बाबूजी ने खाना क्यों छोड़ दिया और कुछ बताया भी नहीं।

फिर वह राजनाथ के कमरे में जाति और पूछती है बाबूजी क्या हुआ आपने खाना क्यों छोड़ दिया खाना अच्छा नहीं है क्या।

राजनाथ -- नहीं बेटा खाना तो बहुत अच्छा है।

आरती -- तो फिर आपने खाना क्यों छोड़ दियाआपकी तबीयत ठीक नहीं है क्या।

राजनाथ -- नहीं बेटा तबीयत तो ठीक है बस भूख नहीं है।

आरती -- ऐसे कैसे भूख नहीं है आज सुबह मे नाश्ता भी ठीक से नहीं किया था और अब कह रहे हैं कि भूख नहीं है आप कुछ छुपा रहे हैं मुझसे ।

अब वह उसे क्या बताएं कि वह क्या छुपा रहा है यह बात उसे बता भी नहीं सकता था तो वह बात टालने के लिए कह देता है कि मेरा माथा थोड़ा दर्द कर रहा है इसलिए खाने का मन नहीं किया।


आरती -- क्या माथा दर्द कर रहा है आपने मुझे पहले क्यों नहीं बताया दवा ला देती आपके लिए फिर वह अपना हाथ बढ़ा कर उसके माथे को छूकर देखी और बोली की माथा गरम तो नहीं है फिर दर्द कैसे कर रहा और वह उसी के बीशतर पर बैठते हुए कहती है लाइए मैं आपका माथा दबा देती हूँ कुछ आराम मिलेगा।

और वह जैसे ही उसके बगल बैठी वैसे ही उसकी बदन की खुशबू सीधे उसके नाक से होते हुए उसके मन मसक्त में छाने लगता है और उसे परम आनंद की अनुभूति होने लगता है और वह सोचने लगता है कि बस ईस आनंद की अनुभूति ऐसे ही मिलती रहे और वह अपना सर और उसके करीब ले जाता है ताकि उसकी खुशबू अच्छे से ले सके लेकिन उसकी यह खुशी ज्यादा देर नहीं रहती।

क्योंकि कुछ ही देर बाद उसकी मांँ बाहर से आ जाती है और फिर आरती को उठकर जाना पड़ता है ।

और राजनाथ अपनी माँ पर गुस्सा होते हुए मन ही मन सोचा है और कहता है कि माँ को भी अभी आना था कुछ देर बाद आती तो क्या हो जाता।


फिर वह उस खूबसूरत पल के ख्यालों में खो जाता है जो अभी कुछ देर पहले उसको प्राप्त हो रहा था ।

फिर 2 दिन के बाद दोनों बाप बेटी बाबा के पास जाने के लिए दोनों निकलते हैं।


जब वहां पहुंचे तो देखा की बाबा आश्रम के बाहर चबूतरे पर बैठकर आराम कर रहे थे क्योंकि आज रविवार था और आज के दिन उनका आश्रम बंद रहता है इसलिए आज कोई नहीं आया हुआ था और वह अकेले बैठे आराम कर रहे थे।

जैसे उन्होंने आरती को दिखा तो बोले अरे पुत्री तुम।


आरती-- जी बाबा आपने हम लोगों को चार दिन के बाद आने के लिए कहा था।

बाबा -- अच्छा अच्छा बहुत अच्छा किया जो आ गए। यह सब बात कर ही रहे होते हैं कि तभी आश्रम के घर के अंदर से एक महिला स्त्री निकल कर के बाहर आती है जो दिखने में खूबसूरत लग रही थी और उसकी उम्र है 26 27 की होगी और उसके गोद में एक दो ढाई साल की बच्ची भी थी और वह बाबा के पास आती है और कहती है पिताजी आपके लिए चाय लाऊँ ।

बाबा --हाँ बेटा चाय लेकर आओ लेकिन सिर्फ मेरे लिए नहीं इनके लिए भी लेकर आना यह हमारे मेहमान है।


फिर वह अंदर चली जाती है तो बाबा उसके तरफ देखते हुए कहते हैं कि ये हमरी बेटी है पूर्णिमा आज ही सुबह अपने ससुराल से आई है ।

फिर बाबा आरती से कहते हैं पुत्री तुम अंदर जाओ पूर्णिया से बातें वातें करो तब तक हम दोनों बाहर से टहल कर आते हैं ।

फिर आरती वहां से उठकर अंदर पूर्णिमा के पास चली जाती है।

फिर बाबा और राजनाथ भी वहां से उठकर आश्रम के पीछे बने गार्डन में घूमने के लिए जाते हैं और फिर घूमते घूमते एक जगह पर बैठ जाते हैं ।

फिर बाबा राजनाथ को वह सब बात बताने लगते हैं जिसके लिए उन्होंने उसे बुलाया था।

फिर वह राजनाथ से कहते हैं कि आपकी बेटी को माँ बनने में एक बहुत बड़ी समस्या है और वह समस्या आप ही दूर कर सकते हैं ।


राजनाथ -- ऐसी क्या समस्या है।

बाबा-- समस्या यह है कि आपके खानदान में आपके अलावा और कोई मर्द नहीं है और ना ही आपका कोई भाई है सबसे बड़ा समस्या की आपका कोई बेटा भी नहीं है इसका मतलब यह है कि आपके बाद आपके वंश को बढ़ाने वाला और कोई मर्द नहीं है और जब तक आपके वंश को बढ़ाने वाला नहीं आएगा तब तक आपकी बेटी माँ नही बन पाएगी । इसका मतलब यह है क्या जब तक आपका कोई बेटा नहीं होगा तब तक वह माँ नही बन पाएगी।

राजनाथ -- लेकिन बाबा अब इस उम्र में मेरा बेटा कहां से आएगा और मेरी बीवी भी गुजर गई है तो मेरा बेटा कहां से होगा क्या मुझे दोबारा शादी करनी पड़ेगी इस उम्र में।

बाबा -- शादी तो तुम अभी भी इस उम्र में भी कर सकते हो लेकिन इसमें भी समस्या है अगर तुम दोबारा शादी करते हो तो तुम्हारी मृत्यु हो सकती है मैं तुम्हारा और तुम्हारी बेटी की कुंडली देखी है और मुझे उसमें साफ-साफ दिख रहा है की जब तुम दोबारा शादी करोगे और जैसे ही तुम आप बनोगे वैसे ही तुम्हारी मृत्यु हो जाएगी इसलिए तुम दोबारा शादी भी नहीं कर सकते।


राजनाथ -- बाबा जी तो क्या इसका और कोई उपाय नहीं हो सकता।

बाबा -- उपाय है उपाय क्यों नहीं है इसीलिए तो हमने तुम्हें यहां बुलाया है और उपाय यह है कि जो काम तुम अपनी पत्नी के साथ करते थेअब वही काम तुमको अपनी बेटी के साथ करना पड़ेगा तुमको उसके साथ संबंध बनाना पड़ेगा मेरा मतलब है उसके साथ संभोग करना पड़ेगा।

राजनाथ -- यह बात सुनते ही एक दम से चौंक जाता है उसे अपने कानों पर यकीन ही नहीं होता कि उसने क्या सुना है लेकिन वह फिर से वही बात बाबा जी से पूछता है कि बाबा आपने क्या कहा मैंने ठीक से सुना नही ।

बाबा -- तुमने बिलकुल ठीक सुना है मैं वही कहा है जो तुमने सुना है तुमको अपनी बेटी के साथ संभोग करना पड़ेगा तब वह माँ बनेगी और तुम बाप बनोगे इस तरह से तुम दोनों का काम हो जाएगा।

राजनाथ को अभी भी यकीन नहीं हो रहा है कि बाबा यह क्या कह रहे हैं तो वह कहता है बाबा जी आप क्या कर रहे हैं ऐसे कैसे हो सकते हैं मैं उसके साथ ऐसा कैसे कर सकता हूं वह मेरी बेटी है।

बाबा -- मुझे पता है कि वह तुम्हारी बेटी है लेकिन वह एक स्त्री भी है और वह इस वक्त अपने जीवन काल की सबसे उच्चतम अवस्था में है और इस अवस्था में जो एक स्त्री को शारीरिक सुख चाहिए वह उसे नहीं मिल पा रहा है वह सुख तुम उसे दे सकते हो।

राजनाथ -- लेकिन बाबा जी मेरे लिए यह सब करना उचित नहीं होगा मैं ऐसा नहीं कर सकता।



(अगला भाग पेज नंबर 95 में)
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राभाग २८
अभी तक आप लोगों ने पढ़ा की बाबा राजनाथ से कहते हैं कि आरती तभी माँ बन पाएगी जब तुम उसके साथ संभोग करोगे ।

राजनाथ बाबा की बात सुनकर कहता की नहीं मैं ऐसा नहीं करस कता वो मेरी बेटी मैं उसके साथ ऐसा नहीं कर सकता ।

बाबा अगर तुम ऐसा नहीं कर सकते तो फिर आरती कभी माँ नही बन पाएगी क्या तुम उसको जीवन भर बाँझ बनकर रहते हुए देखना चाहते हो।
राजनाथ लेकिन बाबा इसका और कोई दूसरा उपाय तो होगा।

बाबा - इसका और कोई दूसरा उपाय नहीं है सिर्फ एक ही रास्ता है कि तुम उसके साथ संभोग करो और उसको माँ बनाओ अगर तुम उसका दुसरा विवाह भी करा दोगे तब भी वह माँ नही बन पाएगी कयोंकि उसकी कुडंली में लीखा हुआ है कि सिर्फ
तुम उसको गर्भवती करके माँ बना सकते हो।

राजनाथ - लेकिन बाबा क्या यह गलत नहीं है एक पिता अपनी बेटी के साथ संभोग कैसे कर सकता है।

बाबा - किसने कहा कि एक पीता पुत्री आपस में संबंध नही बना सकते क्या ऐसा कोई किताब में लिखा नहीं लिखा है कयोंकि यह सब रीति रिवाज ईनसानो ने बनाई है दुनिया वालों के लिए लेकिन इसके बावजूद भी ऐसे कितने बाप बेटी हैं जो इस रिश्ते को नहीं मानते हैं और आपस में संबंध बनाते हैं और संभोग का आनंद लेते हैं और कीसी को पता भी नही चलता और अगर तुम दोनों ऐसा करते हो तो वह भी किसी को पता नहीं चलेगा यह बात सिर्फ तुम दोनों के बीच में ही रहेगी और तुम्हें तो खुश होना चाहिए की यह अवसर तुम्हें मिल रहा है वह भी इस उम्र में ऐसे खुश किस्मत लोग बहुत कम ही होते हैं जिनको जीवन के इस पड़ाव में एक जवान इस्त्री की जवानी का रस चखने को मिलता है ।

बाबा की यह सब बात सुनकर राजनाथ के मन मे जो आसकां और संकोच थी अब वह खतम हो गई थी और मन ही मन सोचने लगा कि अब मैं अपनी बेटी आरती की जवानी का मजा ले सकता हूँ , फिर वह बाबा से कहता है कि बाबा यह सब तो ठीक है लेकिन क्या आरती यह सब करने के लिए तैयार होगी ,क्या उसको यह सब के बारे मे पता है।

बाबा - नही अभी उसको इस बारे मे पता नहीं है, लेकिन क्या वो ये सब करने के लिए तैयार होगी या नहीं ये तो मैं तुम्हें नहीं बता सकता लेकिन इतना जरूर कहूंगा कि एक इसत्री के लिए माँ बनना संसार की सबसे बड़ी खुशी होती है और उस खुशी को पाने के लिए वह कुछ भी कर सकती है। तुम्हारी बेटी भी यह कभी नहीं चाहेगी की वह जीवन भर अपने ऊपर बाँझ का कलंक लेकर जीए। लेकिन इस से पहले तुमको नीरनय लेना होगा कि क्या तुम इसके लिए तैयार हो।

राजनाथ - बाबा जी आप जो बोल रहे हैं वो मैं करने के लिए तैयार हूँ लेकिन अगर मैं उसके साथ ऐसा करूंगा तो उसे लगेगा मैं उसकी मजबूरी का फायदा उठा रहा हूँ और मेरी जो सम्मान है उसकी नजर मे वह खतम हो जाएगी, क्या कोई ऐसा तरीका नहीं है जीस्से उसे लगे कि मैं उसकी मजबूरी का फायदा नहीं उठा रहा हूँ और मेरी सम्मान भी उसकी नजर मे बनी रहे।

बाबा - हम समझ गए कि तुम क्या चाहते हो तुम यह चाहते हो कि तुम्हारी बेटी को ऐसा लगे कि तुमको इस बारे में कुछ पता नहीं है और वह खुद अपने मुंह से तुकको ये सब करने के लिए कहे क्या अही चाहते हो ना तुम।

राजनाथ - आपने तो मेरे मन की बात जान ली लेकिन क्या ऐसा हो सकता है ।

बाबा - हो सकता है क्यों नहीं हो सकता बिलकुल हो सकता है।

राजनाथ - लेकिन केसे ।


बाबा - मैं ऐसा उपाय बताऊंगा की उसको लगेगा की तुम को इस बारे में कुछ पता नहीं है और तुम एक सरीफ बाप की तरह अनजान बने रहोगे और फिर वह एक पत्नी की तरह तुमको मनाएगी और तुम पहले ना ना करोगे फिर उसकी जीद्द के सामने हार मानते हुए तुम हाँ बोलोगे और इस तरह से तुम्हारी इजत भी बनी रहेगी और तुम दोनों का काम भी हो जाएगा।

राजनाथ- ठीक है बाबा जी आप जैसा कहेगें वैसा ही होगा।

बाबा - तो ठीक अब मैं तुम्हारी बेटी से बात करूंगा उसके बाद बताउंगा की आगे क्या करना है।

इधर आरती और पूर्णिमा आपस में बात कर रही है पूर्णिमा आरती से पुछती है की बच्चे के लिए आई हो।

आरती -जी बच्चे के लिए ही आई हूँ।

पूर्णिमा- सादी के कितने साल हूए है।

आरती - जी तीन साल हो रहे हैं।


पूर्णिमा- चिंता मत करो यहाँ आई आ गई हो अब सब ठीक हो जाएगा ।

आरती - यही आस लेकर तो यहाँ आई हूँ अब बाबा ही बताएगें की मेरी किस्मत में माँ बनना लिखा है कि नहीं, ये आपकी बेटी है।

पूर्णिमा - हाँ हमरी बेटी है यह भी हमारी सादी के बहुत साल बाद हुई है हम भी आपकी तरह परेशान हो गए थे फिर हमने पीता जी से इस बारे में बात की तो फिर उन्होंने हमारा उपचार किया और फिर उन्हीं के आशीर्वाद से हमरी बेटी पैदा हुई और हम माँ बने।

इसके बाद बाबा और राजनाथ वापस आश्रम मे आते हैं और राजनाथ से कहते हैं आरती को बुलाईए हम उससे बात करेंगे फिर उसके बाद बताएंगे की आगे क्या करना है ।

फिर राजनाथ आरती को बुलाता है और फिर दोनों बाप बेटी कमरे के अंदर बाबा के पास जाते हैं तो बाबा राजनाथ से कहते हैं कि तुम बाहर जाकर बैठो हमको इस्से अकेले में बात करनी है फिर राजनाथ कमरे से बाहर आ जाता है ।

उसके बाद बाबा आरती से कहते हैं कि हमने तुम्हारे पिताजी से बात की लेकीन उनको उस बारे मे कुछ नहीं बताया उनसे बात करके ऐसा लगा कि वह एक बहुत सीधे और सरीफ इंसान हैं उनको यह सब करने के लिए मनाना मुश्किल होगा इसलिए उनको मनाने के लिए कोई दूसरा उपाय करना होगा।

आरती- बाबा की बात सुनकर थोड़ा चिन्तित होती और पुछती है कौनसा उपाय करना होगा।

बाबा - अभी बताता हूँ की क्या करना होगा तूम दोनों को जो कुछ भी करना होगा वह सब हम एक कागज मे लिखकर तुमको दे दूँगा और तुम दोनों से एक वच्चन भी ले लूँगा ताकि बाद में तुम्हारे पिताजी मना ना कर सके और तमको भी थोडी़ मेहनत करनी पडे़गी जिससे वो तुम्हारी तरफ आकर्षित हो और तुमको यह सब मर्यादा में रहते हुए करना पड़ेगा उसे मालुम नही होना चाहिए की तुमको इस बारे में पता है ,उसको लगना चाहिए कि तुम वही कर रही हो जो हमने तुमको लीख कर दिया है।

आरती- जी बाबा जी आप जैसा कहगें वैसा हीं करूंगी।

बाबा -तो ठीक आज तुम लोगों को यहीं रुकना पड़ेगा क्योंकि कुछ दवा और तेल बनाकर दूँगा इस लिए आज यहीं रुकना पड़ेगा।

आरती- जी बाबा जी आप कह रहे हैं तो रूक जाएंगे।

फिर साम होती है उसके बाद रात का खाना बनता है फिर सभी लोग खाना खाते हैं खाने के बाद सब सो जाते हैं तभी कुछ देर के बाद आरती पेशाब करने के लिए आश्रम के पीछे जाती है और पेशाब करके वापस आ रही होती है तभी उसकी कान में कुछ आवाज़ आती है तो वह खड़ी हो कर सुनने लगती है कि यह आवाज़ कहाँ से आ रही है तो वह देखती है कि आश्रम के एक कमरे में झरोखा है और उसी के अंदर लाईट जल रही है ये आवाज़ सायद उसी के अंदर से आ रही है ।

फिर वह पास जाकर झरोखे के अंदर झांक कर देखने लगती है तो वह देखती है कि बाबा लेटे हुए हैं और उनकी बेटी पूर्णिमा उनकी मालिश कर रही है तभी आरती कुछ ऐसा देखती है कि वह देखते ही चौंक जाती है।

वह देखती है कि बाबा आपने एक हांथ से पूर्णिमा के कमर और पेट को सहला रहे हैं और धीरे धीरे अपने हांथ को ऊपर छाती के पास ले जाते हैं और उसकी चूची को सहलाने लगते हैं।


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Bahut hi acchi
 

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राभाग २८
अभी तक आप लोगों ने पढ़ा की बाबा राजनाथ से कहते हैं कि आरती तभी माँ बन पाएगी जब तुम उसके साथ संभोग करोगे ।

राजनाथ बाबा की बात सुनकर कहता की नहीं मैं ऐसा नहीं करस कता वो मेरी बेटी मैं उसके साथ ऐसा नहीं कर सकता ।

बाबा अगर तुम ऐसा नहीं कर सकते तो फिर आरती कभी माँ नही बन पाएगी क्या तुम उसको जीवन भर बाँझ बनकर रहते हुए देखना चाहते हो।
राजनाथ लेकिन बाबा इसका और कोई दूसरा उपाय तो होगा।

बाबा - इसका और कोई दूसरा उपाय नहीं है सिर्फ एक ही रास्ता है कि तुम उसके साथ संभोग करो और उसको माँ बनाओ अगर तुम उसका दुसरा विवाह भी करा दोगे तब भी वह माँ नही बन पाएगी कयोंकि उसकी कुडंली में लीखा हुआ है कि सिर्फ
तुम उसको गर्भवती करके माँ बना सकते हो।

राजनाथ - लेकिन बाबा क्या यह गलत नहीं है एक पिता अपनी बेटी के साथ संभोग कैसे कर सकता है।

बाबा - किसने कहा कि एक पीता पुत्री आपस में संबंध नही बना सकते क्या ऐसा कोई किताब में लिखा नहीं लिखा है कयोंकि यह सब रीति रिवाज ईनसानो ने बनाई है दुनिया वालों के लिए लेकिन इसके बावजूद भी ऐसे कितने बाप बेटी हैं जो इस रिश्ते को नहीं मानते हैं और आपस में संबंध बनाते हैं और संभोग का आनंद लेते हैं और कीसी को पता भी नही चलता और अगर तुम दोनों ऐसा करते हो तो वह भी किसी को पता नहीं चलेगा यह बात सिर्फ तुम दोनों के बीच में ही रहेगी और तुम्हें तो खुश होना चाहिए की यह अवसर तुम्हें मिल रहा है वह भी इस उम्र में ऐसे खुश किस्मत लोग बहुत कम ही होते हैं जिनको जीवन के इस पड़ाव में एक जवान इस्त्री की जवानी का रस चखने को मिलता है ।

बाबा की यह सब बात सुनकर राजनाथ के मन मे जो आसकां और संकोच थी अब वह खतम हो गई थी और मन ही मन सोचने लगा कि अब मैं अपनी बेटी आरती की जवानी का मजा ले सकता हूँ , फिर वह बाबा से कहता है कि बाबा यह सब तो ठीक है लेकिन क्या आरती यह सब करने के लिए तैयार होगी ,क्या उसको यह सब के बारे मे पता है।

बाबा - नही अभी उसको इस बारे मे पता नहीं है, लेकिन क्या वो ये सब करने के लिए तैयार होगी या नहीं ये तो मैं तुम्हें नहीं बता सकता लेकिन इतना जरूर कहूंगा कि एक इसत्री के लिए माँ बनना संसार की सबसे बड़ी खुशी होती है और उस खुशी को पाने के लिए वह कुछ भी कर सकती है। तुम्हारी बेटी भी यह कभी नहीं चाहेगी की वह जीवन भर अपने ऊपर बाँझ का कलंक लेकर जीए। लेकिन इस से पहले तुमको नीरनय लेना होगा कि क्या तुम इसके लिए तैयार हो।

राजनाथ - बाबा जी आप जो बोल रहे हैं वो मैं करने के लिए तैयार हूँ लेकिन अगर मैं उसके साथ ऐसा करूंगा तो उसे लगेगा मैं उसकी मजबूरी का फायदा उठा रहा हूँ और मेरी जो सम्मान है उसकी नजर मे वह खतम हो जाएगी, क्या कोई ऐसा तरीका नहीं है जीस्से उसे लगे कि मैं उसकी मजबूरी का फायदा नहीं उठा रहा हूँ और मेरी सम्मान भी उसकी नजर मे बनी रहे।

बाबा - हम समझ गए कि तुम क्या चाहते हो तुम यह चाहते हो कि तुम्हारी बेटी को ऐसा लगे कि तुमको इस बारे में कुछ पता नहीं है और वह खुद अपने मुंह से तुकको ये सब करने के लिए कहे क्या अही चाहते हो ना तुम।

राजनाथ - आपने तो मेरे मन की बात जान ली लेकिन क्या ऐसा हो सकता है ।

बाबा - हो सकता है क्यों नहीं हो सकता बिलकुल हो सकता है।

राजनाथ - लेकिन केसे ।


बाबा - मैं ऐसा उपाय बताऊंगा की उसको लगेगा की तुम को इस बारे में कुछ पता नहीं है और तुम एक सरीफ बाप की तरह अनजान बने रहोगे और फिर वह एक पत्नी की तरह तुमको मनाएगी और तुम पहले ना ना करोगे फिर उसकी जीद्द के सामने हार मानते हुए तुम हाँ बोलोगे और इस तरह से तुम्हारी इजत भी बनी रहेगी और तुम दोनों का काम भी हो जाएगा।

राजनाथ- ठीक है बाबा जी आप जैसा कहेगें वैसा ही होगा।

बाबा - तो ठीक अब मैं तुम्हारी बेटी से बात करूंगा उसके बाद बताउंगा की आगे क्या करना है।

इधर आरती और पूर्णिमा आपस में बात कर रही है पूर्णिमा आरती से पुछती है की बच्चे के लिए आई हो।

आरती -जी बच्चे के लिए ही आई हूँ।

पूर्णिमा- सादी के कितने साल हूए है।

आरती - जी तीन साल हो रहे हैं।


पूर्णिमा- चिंता मत करो यहाँ आई आ गई हो अब सब ठीक हो जाएगा ।

आरती - यही आस लेकर तो यहाँ आई हूँ अब बाबा ही बताएगें की मेरी किस्मत में माँ बनना लिखा है कि नहीं, ये आपकी बेटी है।

पूर्णिमा - हाँ हमरी बेटी है यह भी हमारी सादी के बहुत साल बाद हुई है हम भी आपकी तरह परेशान हो गए थे फिर हमने पीता जी से इस बारे में बात की तो फिर उन्होंने हमारा उपचार किया और फिर उन्हीं के आशीर्वाद से हमरी बेटी पैदा हुई और हम माँ बने।

इसके बाद बाबा और राजनाथ वापस आश्रम मे आते हैं और राजनाथ से कहते हैं आरती को बुलाईए हम उससे बात करेंगे फिर उसके बाद बताएंगे की आगे क्या करना है ।

फिर राजनाथ आरती को बुलाता है और फिर दोनों बाप बेटी कमरे के अंदर बाबा के पास जाते हैं तो बाबा राजनाथ से कहते हैं कि तुम बाहर जाकर बैठो हमको इस्से अकेले में बात करनी है फिर राजनाथ कमरे से बाहर आ जाता है ।

उसके बाद बाबा आरती से कहते हैं कि हमने तुम्हारे पिताजी से बात की लेकीन उनको उस बारे मे कुछ नहीं बताया उनसे बात करके ऐसा लगा कि वह एक बहुत सीधे और सरीफ इंसान हैं उनको यह सब करने के लिए मनाना मुश्किल होगा इसलिए उनको मनाने के लिए कोई दूसरा उपाय करना होगा।

आरती- बाबा की बात सुनकर थोड़ा चिन्तित होती और पुछती है कौनसा उपाय करना होगा।

बाबा - अभी बताता हूँ की क्या करना होगा तूम दोनों को जो कुछ भी करना होगा वह सब हम एक कागज मे लिखकर तुमको दे दूँगा और तुम दोनों से एक वच्चन भी ले लूँगा ताकि बाद में तुम्हारे पिताजी मना ना कर सके और तमको भी थोडी़ मेहनत करनी पडे़गी जिससे वो तुम्हारी तरफ आकर्षित हो और तुमको यह सब मर्यादा में रहते हुए करना पड़ेगा उसे मालुम नही होना चाहिए की तुमको इस बारे में पता है ,उसको लगना चाहिए कि तुम वही कर रही हो जो हमने तुमको लीख कर दिया है।

आरती- जी बाबा जी आप जैसा कहगें वैसा हीं करूंगी।

बाबा -तो ठीक आज तुम लोगों को यहीं रुकना पड़ेगा क्योंकि कुछ दवा और तेल बनाकर दूँगा इस लिए आज यहीं रुकना पड़ेगा।

आरती- जी बाबा जी आप कह रहे हैं तो रूक जाएंगे।

फिर साम होती है उसके बाद रात का खाना बनता है फिर सभी लोग खाना खाते हैं खाने के बाद सब सो जाते हैं तभी कुछ देर के बाद आरती पेशाब करने के लिए आश्रम के पीछे जाती है और पेशाब करके वापस आ रही होती है तभी उसकी कान में कुछ आवाज़ आती है तो वह खड़ी हो कर सुनने लगती है कि यह आवाज़ कहाँ से आ रही है तो वह देखती है कि आश्रम के एक कमरे में झरोखा है और उसी के अंदर लाईट जल रही है ये आवाज़ सायद उसी के अंदर से आ रही है ।

फिर वह पास जाकर झरोखे के अंदर झांक कर देखने लगती है तो वह देखती है कि बाबा लेटे हुए हैं और उनकी बेटी पूर्णिमा उनकी मालिश कर रही है तभी आरती कुछ ऐसा देखती है कि वह देखते ही चौंक जाती है।

वह देखती है कि बाबा आपने एक हांथ से पूर्णिमा के कमर और पेट को सहला रहे हैं और धीरे धीरे अपने हांथ को ऊपर छाती के पास ले जाते हैं और उसकी चूची को सहलाने लगते हैं।


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Nais
 

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जभाग २९
अभी तक आप लोगों ने पढ़ा की आरती खिड़की के अंदर झांक कर देखती है कि बाबा बीशतर पर लेटे हुए हैं,और पूर्णिमा उनकी मालिश मालिश कर रही है ।

तभी आरती कुछ ऐसा देखती है कि एक पल के लिए उसे अपनी आंख पर भरोसा नहीं होता कि यह मैं क्या देख रही हूँ, देखती है कि बाबा अपनी बेटी पूर्णिमा की कमर और पेट को सहला रहे हैं और सहलाते हुए बोल रहे हैं कि इस बार बहुत वक्त लगादी वापस आने मे।

तो पूर्णिमा जवाब देती है कि तो क्या करती हमरी सास बीमार हो गई थी और अकेली थी तो छोड़ के कैसे आ जाती।

बाबा - तुम्हारी सास बीमार हो गई तो तुम उसका ख्याल रखने के लिए वहाँ रूक गई और यहाँ मै तुम्हारे बिना बीमार पड़ जाता हूँ सो उसका क्या।

पूर्णिमा - क्यों आप मेरे बीना क्यों बीमार पड़ेंगे।

बाबा - जब खाना नही मिले गा तो बीमार नहीं पडु़गां क्या।

पूर्णिमा - क्यों आपको टाइम से खाना नहीं मिलता है क्या ।

बाबा - टाइम की बात छोडो़ यहाँ खाना ही नहीं मिलता तो तुम टाइम की बात कर रही हो।

पूर्णिमा - क्यों खाना क्यों नहीं मिलता है ।

बाबा - अरे हम उस खाने की बात नही कर रहे हैं हम दूसरे वाले खाने की बात कर रहे हैं जो तुम खीलाती हो।

पूर्णिमा - अपने बाप की बात समझ गई लेकिन फिर भी अनजान बनते हुए कहती है कि दुसरा वाला खाना हम भी तो वही खाना खीलाते हैं। हम कौनसा दुसरा खाना खीलाते है।


बाबा - अरे पेट में खाने वाले खाने की बात नही कर रहा हैं हम अपने लंड की खाने की बात कर रहे हैं।

पूर्णिमा - छी छी कितने बेशर्म हो गये हो आप।

बाबा - अरे इसमें बेशरम की क्या बात हम कुछ गलत थोड़ी बोले हैं।

पूर्णिमा - नही नही आपने तो बहुत अच्छा बोला सभी बाप अपनी बेटी से इसी तरह बोलते होगें।

बाबा - सभी बाप अपनी बेटी से इस तरह बात करते हैं कि नहीं यह तो हमे नही पता लेकिन हम अपनी बेटी के साथ ऐसी बात कर सकते हैं क्योंकी हमरी बेटी सिर्फ बेटी नहीं है वो हमरी बीवी भी है ।

पूर्णिमा - अच्छा हम आपके बीवी हैं कब आपने हमसे सादी की जो हम आपके बीवी हो गये।


बाबा - सादी नही की है तो क्या हुआ लेकिन तुम मेरी बीवी वाले सारे काम कर रही हो तो फिर बीवी हुई की नहीं।

पूर्णिमा - अच्छा तो आप मुझे अपनी बीवी मानते हैं ।
बाबा हम तुमको बीवी से भी बढ़कर मानते हैं क्योंकि जो खुशी ओर प्यार तुमने हमको दीया है वह कोई और नहीं दे सकता।

पूर्णिमा - झूठी तारीफ करना कोई आपसे सीखे।

बाबा- हम कोई झूठी तारीफ नही कर रहें हैं बिलकुल सही कह रहे हैं क्योंकि जो मजा हमको तुम्हारे साथ करने मे आता है वह कीसी ओर के साथ करने मे कभी नहीं आता ।

पूर्णिमा - मुस्कराते हुए क्या करने मे मजा आता है।

बाबा - तुम्हारी चूदाई करने मे।

पूर्णिमा - छी कितने गंदे और बेशरम हो गये हो आप ।
बाबा ए लो तुमही तो पूछ रही हो कि क्या करने में मजा आता है और जब बता रहे हैं तो तुमको गंदा लग रहा है।

पूर्णिमा - अच्छा यह सब छोडी़ए ओर यह बताइए की वो दोनों बाप बेटी जो आई हुई उनका क्या हुआ।

बाबा - उसकी भी यही समस्या है उसका पति उसको बच्चा नहीं दे पा रहा है हमने उसको इस समस्या का उपाय बता दिया है।

पूर्णिमा - कौनसा उपाय बता दिया।

बाबा -हमने उसे यही बताया की तुम्हारा पति तुमको माँ नही बना पाएगा अगर तुम माँ बनना चाहती हो तो तुमको अपने पिताजी के साथ संबंध बनाना पड़ेगा।

पूर्णिमा- इतना कहा और वह तैयार हो गई।


बाबा - पहले वो मना कर रही थी लेकिन जब हमने उसे समझाया तो वह मान गई ओर मानती क्यों नहीं इसके अलावा उसके पास और कोई रास्ता भी नहीं है और इसमें उन दोनों बाप बेटी का फायदा है उसको तो बच्चा मिलेगा ही लेकिन उसके बाप ने उसको पाल पोस कर बड़ा करने मे जो दुख तकलीफ उठाया है उसका फल तो उसे मीलना चाहिए क्योंकि जब उसकी बेटी बहुत छोटी थी तभी उसकी बीबी उसको छोड़ कर इस दुनिया से चली गई और उसके जाने के बाद उसने अपने अंदर से संभोग और काम वासना की इच्छा को ना चाहते हुए भी त्याग दीया और दूसरी शादी नही की, यह सोचकर कि उसकी बेटी को कोई तकलीफ ना हो और उसने अकेले ही अपनी बेटी को पाल पोस कर बड़ा किया, जब वह अपनी बेटी के लिए इतना त्याग कर सकता है तो उसकी बेटी का भी फर्ज बनता है कि जिस खुशी को उसके बाप ने उसके लिए त्यागी है, वह खुशी उसे वापस लौटाए और यह तभी होगा जब वह उसके साथ संभोग करेगी और उसको परम आनंद की अनुभूति का एहसास कराएगी।

और अब तू भी हमको परम आनंद की अनुभूति का एहसास कराओ और जलदी से अपने चूत का दर्शन करा दो। बाबा उसकी चूची को दबाते हुए कहते हैं ए तुम्हारा दूध पहले से बड़ा लग रहा है लगताहै इसमें दूध भर गया है आज हम भी तुम्हारा दूध पीकर देखेगें की कैसा लगता है ।

पूर्णिमा - क्या आप हमारा दूध पीएगें अपनी बेटी का दूध पीएगें।

बाबा - हाँ आज हम अपनी बेटी का दूध पीकर देखेगें की कीतना स्वादिष्ट है हमारी बेटी का दूध।

पूर्णिमा - शरमाते हुए पीता जी आप बहुत बदमाश होते जा रहे हो कोई बाप अपनी बेटी का दूध पीता है क्या।

बाबा - अरे तो इसमें गलत क्या है जब सबकुछ कर सकते हैं तो दूध पीने में कैसी शरम अब शरमाना छोडो़ और जलदी से अपने खजाने का दर्शन करा दो सुबह से इंतजार कर रहे हैं कि कब शाम होगी और तुम अपने खजाने का दर्शन कराओगी और हम अपनी भूख मिटाएगें।

पूर्णिमा - आज आप उसकी दर्शन नही कर पाएगें।

बाबा - क्यों काहे नही करपाएगें दर्शन।

पूर्णिमा - काहेकी वहाँ लाल पानी बह रहा है मतलब मेरा माहवारी चालू है इसलिए आज दर्शन नही
कर पाएगें।

बाबा - तू मजाक कर रही है मेरे साथ ।

पूर्णिमा - नही पीता जी हम मजाक नहीं कर रहे हैं। सच कह रहे हैं।

बाबा - यार तुम मेरे साथ ऐसा नहीं कर सकती ।

पूर्णिमा - पीता जी इसमें हमारी क्या गलती हमने उस्से थोड़ाहीं कहा कि आज ही आ जाओ और हमारे पीता जी और तरसाओ।

बाबा - तुमने यह सब जानबूझकर किया हमको तरसाने के लिए नहीं तो तुम आज यहाँ नही आती
दो दिन के बाद आती ।

पूर्णिमा - पीता जी हमको थोड़हीं पता था की आजहीं आ जाएगा से जब हम आज यहाँ आने की तैयारी कर रही थी तभी अचानक से बहना चालू हो गया अब इसमे हमरी क्या गलती है।
पूर्णिमा मुस्कराते हुए लगता है इसको आपसे कोई दुश्मनी है सायद उसे पता था की आज मैं यहाँ आने वाली हूँ तो वह भी चुपके से आ गया अब आप नाराज मत होईए दो दिन की तो बात है दो दिन बरदासत कर लीजिए।

बाबा - दो दिन यहाँ एक पल बर्दासत नही हो रहा है और तुम दो दिन की बात कर रही हो।

तभी उसकी बेटी जाग जाती है और रोने लगती तो वह उसको चुप कराने लगती है ।उधर आरती खिड़की के बाहर से यह सब अभी तक देख रही थी और डर रही थी कि बाबूजी हमको ढूँढते हूए इधर ना आ जाएं इसलिए फिर वो वहाँ से चली जाती है ।

इधर पूर्णिमा अपनी बेटी को फिर से सुला देती है और फिर से मालिश करने लगती है और कहती है पिताजी आपके लिए एक खुशख़बरी है। हमरी सास कह रही थी की अब उसको एक पोता चाहिए और वह हमसे कह रही थी कि जलदी से हमको पोता दे दो।

बाबा - तुम्हारी सास को पोता चाहिए तो दे दो हमको काहे बता रही हो।

पूर्णिमा - ओ हो पिताजी अब गुस्सा थूक भी दीजिए हमने जानबूझकर ऐसा नहीं किया है अगर आपको लगता है कि हमने जानबूझकर किया है तो हम आपसे माफी मांगते हैं हमे माफ कर दीजिए आगे से ऐसा नहीं होगा।


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भाग ३०
अभी तक आप लोगों ने पढ़ा की बाबा पूर्णिमा से कहते हैं की जल्दी से अपनी चूत की दर्शन कराव अब और बरदाश्त नही हो रहा है।

पूर्णिमा - अभी आपको उसका दर्शन नही मिलेगा इसलिए आपको बरदाश्त करना पड़ेगा।

बाबा - लेकिन क्यों••••••••••

पूर्णिमा - इसलिए की माहवारी चालू हो गया है इसलिए अभी दो दिन और इंतजार करना पड़ेगा।

यह बात सुनते ही उनको झटका सा लगता है मानो उनकी बेटी ने उनको खड़े लंड पर धोखा दे दिया हो और वह गुस्सा हो जाते हैं।
पूर्णिमा उनको मनाने की कोशिश करती है लेकिन वह मानने को तैयार नहीं होते लेकिन अब कर भी क्या सकते थे अपना मन मार के सो जाते हैं।

उधर आरती यह सब देखकर पहले आसचर्य और हैरान होती है फिर यह सोचकर खुश होती है कि आगर बाबा अपनी बेटी के साथ यह सब कर सकते हैं तो फिर मेरे बाबूजी क्यों नहीं कर सकते यह सब सोचते हुए वह सो जाति है।



फिर सुबह होती है सभी लोग अपना नीत क्रीया करने के बाद फिर सभी लोग चाय नाश्ता करते हैं फिर बाबा आरती को अपने कमरे में बुलाते हैं उसको सब समझाते हैं कि कैसे क्या करना है और कुछ जड़ी बूटी की दवा देते हैं दोनों को खाने के लिए और तेल देते हैं मालिश करने के लिए इसको कैसे इस्तेमाल करना है वह सब एक कागज में लिख देते हैं और कहते हैं कि यहां से जाने के बाद और कुछ जानना और पूछना हो तो फोन करके हमसे पूछ लेना।अब अपने पिताजी को भी अंदर बोलावो उनको भी समझा देता हूं फिर राजनाथ को अंदर बुलाती है तो राजनाथ अंदर आता है और पूछता जी बाबा जी हमारा काम हो गया ।

बाबा- हाँ आप लोगों का काम तो हमने कर दिया है अब आप लोगों को करना है और कैसे करना है यह सब हमने इसे समझा दिया है और कुछ दवाइयां भी दी है उसे कैसे इस्तेमाल करना है वह सब मैंने लिख दिया है और इस काम में आपको इसका साथ देना पड़ेगा अगर आप साथ नहीं देंगे तो काम अधूरा रह जाएगा इसलिए मैं आपसे पूछता हूं आप इसका साथ देंगे कि नहीं।

राजनाथ - क्यों नहीं मेरे लायक जो भी होगा वह मैं जरूर करूंगा अगर मेरे मदद करने से मेरी बेटी का घर बसता है तो मैं जरूर करूंगा।

बाबा - हमको आपसे यही उम्मीद थी कि आप जरूर अपनी बेटी की मदद करें क्योंकि सिर्फ आप ही उसकी मदद कर सकते हैं अरे आपका कर्तव्य भी बनता है क्या आप उसकी मदद करें।

उसके बाद दोनों बाप बेटी घर जाने के लिए वहां से निकल पड़ते हैं और पतले रास्ते से कुछ दूर चलकर मुख्य सड़क पर आते हैं और एक जगह पर बैठकर किसी गाड़ी का इंतजार करने लगते हैं तभी वहीं पर एक कुत्ता और कुत्तिया उसी रास्ते से चलते हुए आते हैं और बाप बेटी के सामने खड़े हो जाते हैं इसमें से कुत्ता देखने काफी हट्टा कट्टा और कुत्तिया दुबली पतली थी सायद अभी-अभी जवानी की दहलीज पर कदम रख रही थी इतने में ही कुत्ता जो था वह कुत्तिया की योनि को सुनने लगता है और चाटने लगता है यह देख कर दोनों बाप बेटी एक दूसरे की तरफ देखते हैं तो आरती अपने आप से नजर मिलते ही वह शर्मा जाती है और दूसरी तरफ अपनी नजरें कर लेती है और राजनाथ को भी यह देखकर थोड़ा अजीब लगता है लेकिन उसे अच्छा भी लगता है और वह तिरछी नजरों से दोनों को देख रहा होता है और आरती भी तिरछी नजरों से उन दोनों को देखने की कोशिश करती है कि क्या कर रहे इतने में कुत्ता दो-तीन बार उसकी उसकी योनि को सुंघता और चाटता है फिर अपना गुलाबी लंड निकालकर उसके ऊपर चढ़ जाता है और उसकी योनि मे घुसाने की कोशिश करने लगता है लेकिन वह घूस नही पाता फिर वह उतर जाता है और फिर से उसकी योनि को सुंघने और चाटने लगता है और एक बार फिर से उसके उपर चढ़ जाता है और घुसाने की कोशिश करने लगता है और इस बार वह अपनी मेहनत में सफल हो जाता है और अपना मोटा गुलाबी लंड उसकी टाईट योनि मे घुसा देता है लंड घुसते ही कुत्तीया चिल्लाने लगती है कांय कांय कांय कांय•••••••••••
फिर दोनों बाप बेटी उन दोनों को देखने लगते हैं और देखते हैं कि दोनों कुत्ता और कुत्तिया एक दूसरे से जुड़ चूके हैं क्योंकि कुत्ता का लंड कुत्तीया की योनि में फंस चुका था यह देखकर आरती को बहुत शर्म आती है और फिर अपने आप की तरफ देखती है तो फिर से दोनों बाप बेटी की नजर एक दूसरे से मिल जाती है और आरती शर्मा के फिर से अपना मुंह दूसरे तरफ कर लेती है राजनाथ यह देखकर मन ही मन मुस्कुराता है और कुत्ता कुतिया की तरफ देखते हुए कहता है कि शायद पहली बार है इसका इसलिए इतना चिल्ला रही है तो आरती भी दूसरी तरफ मुंह किए हुए मुस्कुराती और कहती आपको कैसे पता की पहली बार है

राजनाथ - उसके चिल्लाने से पता चल रहा है की पहली बार है यह तो तुम्हें भी मालूम होगा कि जब पहली बार में कितना दर्द होता है।

आरती- मुस्कुराते हुए मुझे तो मालूम नहीं है कि दर्द होता है कि नहीं शायद आपको इस बारे में ज्यादा मालूम है।

राजनाथ - क्यों जब तुम्हारे साथ ऐसा पहली बार हुआ था तो क्या उस वक़्त दर्द नहीं हुआ था

आरती - नहीं मेरे साथ ए सब नहीं हुआ था।

राजनाथ - ठीक है अगर नहीं बताना चाहती तो कोई बात नहीं लेकिन ऐसा तो हर लड़की के साथ होता है जिसकी शादी होती है


राजनाथ- कुछ देर चुप रहने के बाद मेहनत का फल बेचारे को मिल ही गया।

आरती- अच्छा ऐसा क्या मेहनत किया उस बेचारे ने जो आप उसे बेचारा बोल रहे हैं ।

राजनाथ - अरे देखा नही उसने अपना सामान अंदर घुसाने के लिए कितनी बार कोशिश की तब जाकर उसको सफलता मिली।

आरती- आह हाहा हाहा बहुत मेहनत की उस बेचारे ने ।और उस बेचारी को जो इतनी तकलीफ हुई और हो रही उसके लिए आपके मूह से एक शब्द नहीं नीकला आखीर मर्द तो मर्द ही होते हैं उनको औरत की तकलीफ थोड़ी नजर आएगी।

राजनाथ - अरे नहीं मेरा कहने का मतलब ऐसा नहीं था ।

आरती- आपका कहने का मतलब क्या था वो मैं अच्छे से समझती हूँ आप मर्दों को सिर्फ मजे लेने से मतलब रहता है औरत पर तरस खाना तो दूर हर मर्द औरत को तड़पाना अपनी शान समझता है जब तक औरत चीखे चीलाये नहीं तब तक उनको मजा नहीं आता।

राजनाथ - तुमसे जीत पाना बहुत मुश्किल है।

आरती- यह कोई हार जीत वाली बात नही है जो सच है वही मैने बोली है ।

राजनाथ - मुस्कुराता हैं और कहता है की तुम्हारी एक बात बिल्कुल सही है।

आरती- कौन सी बात, ••••••••••

राजनाथ - वही की जब तक औरत cheekhe chillaye नही तब तक मर्द को मजा नहीं आता है।

आरती- उसकी तरफ देखते हुए बोली अब आई ना असली बात ज़ुबान पे।

राजनाथ - अरे मैं अपनी बात थोड़ी कर रहा हूं मैं तो दूसरे मर्दों की बात कह रहा हूँ।

आरती - हाँ हाँ आप अपने बारे में नहीं दूसरे मर्दों के बारे में कह रहे हैं आप दूसरे मर्दों के जैसे थोड़ही हैं आप तो सीधे साधे साधु महात्मा हैं । फिर धीरे से मुस्कराते हुए कहती है कितने सीधे साधे हैं यह तो जब टाईम आएगा तभी पता चलेगा ना अभी मैं आपको थोड़ी कुछ बोलूगीं।

राजनाथ - क्या टाइम आएगा तब पता चलेगा मैं कुछ समझा नहीं••••••••••••

आरती- अभी आपको समझ में नहीं आएगा जब टाइम आएगा तब ठीक समझ जाइएगा ।

राजनाथ - उसकी बात समझ जाता है और मन ही मन मुस्कराने लगता है।

उधर कुत्ता और कुत्तिया दोनों आपस में जुड़े हुए थे और मुंह खोलकर दोनों हाफ रहे थे और कुत्तिया अपने आप को छुड़ाने के लिए बहुत कोशिश कर रही थी और छटपटा रही थी लेकिन शायद उसको मालूम नहीं था कि उसको इससे इतनी जल्दी छुटकारा नहीं मिलने वाला है इसी तरह 15-20 मिनट गुजर गए तब जाकर कुत्ते का लंड कुत्तीय की चूत से बाहर निकला जो अभी भी काफी बड़ा और मोटा दिख रहा था एकदम गुलाबी रंग जैसा चमक रहा था और उस्से पानी भी टपक रहा था उधर कुत्तिया की योनि में मोटा लंड घुसने की वजह से काफी फूल गया था और उसके अंदर से भी वीर्य का मीश्रण लार बनकर चु रहा था। राजनाथ यह सब देख रहा था फिर वह आरती के तरफ देखता है तो आरती भी कुत्ता और कुत्तीया को ही देख रही थी तभी राजनाथ कहता है की इनका काम तो हो गया अब हमारा काम कब होगा पता नहीं यह दो अर्थी बात राजनाथ ने जान बुझ कर बोला वह

यह बात सुनते ही आरती चौंक जाती है और हैरानी भरी नजरों से उसके तरफ देखती है तो। राजनाथ समझ जाता है और बात को संभालते हुए बोलता है अरे मैं गाडी के बारे मे कह रहा था कि पता नहीं अब हमारी गाडी कब आएगी। राजनाथ ने जान बुझ कर दो अर्थी वाला बात बोला था यह जानने के लिए की आरती समझती है कि नहीं राजनाथ मन ही मन बहुत खुश होता कि आरती मेरी बात को समझ गई।

तभी यात्री वाली गाड़ी वहां आ जाती है और दोनों बाप बेटी उसमें चढ़ने लगते हैं तो देखते हैं कि गाडी के अंदर काफी भीड़ है और कहीं बैठने की जगह नहीं है



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Yahan Tak aapki Kahani bahut acchi hai aapane bahut Achcha likha hai is Kahani Ko aage badhaie
 
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