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Adultery अनुभूति

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nitya bansal3

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बिन बुलाए आ जाता है सवाल भी नहीं करता
ये तेरा ख्याल भी किसी का ख्याल भी नहीं करता l


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nitya bansal3

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माना कि हमारी तपिश आप तक नही पहुँचती..
इसका मतलब ये नही कि हम सुलगते नहीं.. !!!

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nitya bansal3

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प्रेम में
देह का धर्म
वासना नहीं होता,

देह का धर्म तो रूह के लिए एक पवित्र मंदिर बन जाना है।

तुम्हें पहली बार देखा,

तो लगा जैसे किसी ऋषि की सदियों पुरानी तपस्या फूल बनकर मेरे सामने खिल उठी हो।

तुम्हारी आँखें भागीरथी की निर्मल धारा थीं,

और तुम्हारी मुस्कान, हरसिंगार की वह पहली पंखुड़ी, जो भोर के माथे पर ईश्वर स्वयं रख देता है।

मैंने तुम्हारा हाथ थामा,

तो लगा जैसे अलकनंदा अपनी समूची यात्रा लेकर संगम की ओर बढ़ चली हो।

तुमने धीरे से अपना माथा मेरे कंधे पर रख दिया।

उस क्षण न चाँद आकाश में था, न तारे अपनी जगह—

सब मानो हमारी धड़कनों के चारों ओर परिक्रमा कर रहे थे।

शीतल हवा तुम्हारे केशों में उलझकर मेरे चेहरे तक आती रही,

जैसे कोई सूफ़ी फ़कीर इश्क़ की ख़ानक़ाह में चंदन और इत्र की महक बिखेर रहा हो।

मैंने तुम्हारे ललाट को अपने स्नेह का मौन स्पर्श दिया,

और लगा मानो मंदिर की पहली आरती मेरे ही भीतर जल उठी हो।

उस निकटता में न कोई अधीरता थी, न कोई अधिकार—

सिर्फ़ वह विश्वास, जो दो आत्माओं को एक-दूसरे का आश्रय बना देता है।

प्रेम में देह का धर्म यही तो है—

कि एक स्पर्श डर को विश्वास में बदल दे,

एक आलिंगन बरसों की तन्हाई को घर दे दे,

और दो धड़कनें इतनी निकट आ जाएँ कि उनके बीच मौन भी प्रेम का मंत्र जपने लगे।

क्योंकि देह केवल त्वचा का विस्तार नहीं,

वह उस दीपक का पात्र है, जिसमें आत्मा की लौ जलती है।

और जब प्रेम अपने सबसे निर्मल रूप में खिलता है,

तो देह फूल की पंखुड़ी बन जाती है,

रूह उसकी सुगंध,

और दोनों मिलकर ऐसी इबादत रचते हैं,

जिसे न मंदिर पूरी तरह समझ पाता है, न मस्जिद,

उसे केवल दो प्रेमी समझते हैं—

जो एक-दूसरे को छूने से पहले एक-दूसरे की आत्मा को प्रणाम करना जानते हैं।

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mastmast123

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सब किताबी बातें हैं जो तूफान थमने पर अच्छी लगती हैं, तूफान औरत के लिए खास कर एक बैचेन अतृप्त औरत के लिए जवानी में हर पल उमड़ता रहता है। जिसका कोई साहिल नहीं ऐसा एक समंदर, जो चाहिए वो मिलता नहीं और जो मिल रहा है वो काफी नहीं। ये बात चाहे सिर्फ 5% अतृप्त औरत पर लागू हो लेकिन परम सत्य है।
शरीर का सत्य शरीर ही जानता है, बातों से तृप्ति नहीं मिलती है।
किसी किसी खास औरत को ही ये नसीब होती है वरना प्यास ही उनकी नियति है चाहे वो मुंह से कह सके या न कह सके।
 

nitya bansal3

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छोटी सी इस जिंदगी में रखा क्या है
अगर इश्क भी यहां बुरा है तो फ़िर अच्छा क्या है..!!


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nitya bansal3

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कभी-कभी प्रेमियों के मध्य फासले उनकी इच्छा के विरुद्ध होते हैं
वो चाहते है निकटता प्रेम में , एक दूसरे के नैनों में देख
बिना शब्दों के संवाद करना ।
उन्हें छू कर एहसास करना कि प्रेम कोई स्वप्न नहीं अपितु
मेरे समक्ष है , सत्य है
जाने कितने भावों को प्रेम में मुखमंडल पर आते जाते देखना
जो कि दूर से देखना संभव ही नहीं ।
जाने कितने क्षणों को समेट अपनी स्मृतियों में सजा लेना
ताकि जब निकट ना हो तब भी हम उन पलों को पुनःजी सके
किंतु भाग्य के कारण प्रेम को हार जाते हैं, दोनों के मध्य
मीलों के फासले आ जाते है ।
नियति में लिखे गए को हम चाह कर भी बदल नहीं पाते है ।

🖤🍁🖤


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nitya bansal3

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💕💕
मेरी साड़ी जितनी फिसलती है...
तुम्हारी नज़रें उससे भी ज़्यादा। 😈

🤩जो दिख रहा है, बस वही मत देखो...
असली खेल तो नज़रों का है। 😏

😱मुझे छेड़ना आसान है...

संभालना थोड़ा मुश्किल पड़ जाता है। 😉

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nitya bansal3

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उसने पूछा मोहब्बत की कश्मकश क्या
# है....

मैने कहा..बांहों में समंदर रूह प्यासी ..!

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nitya bansal3

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पुरुष में वासना की उत्पति पानी के बुलबुले की तरह क्षणिक होती है, किन्तु स्त्री में यह एक लहर कि तरह होती जो बहुत गहराई तक जाती है... और सहज शांत भी नहीं होती... इसे शांत करने के लिये कुशलता व अनुभव की जरूरत होती है... जब कोई पुरूष इसे करने में परांगत हो जाता है... तब स्त्री स्वयं ही उसे आमंत्रण देती है और प्रेम मे लीन होकर स्वयं को सौप देती है..!

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nitya bansal3

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कुछ लोग ज़िंदगी में बहुत देर से आते हैं और जब आते हैं तो लगता है “अब क्या ही नया होगा”, और फिर धीरे-धीरे एहसास होता है कि हम बरसों से बस इन्हीं का इंतज़ार कर रहे थे।

शुरू में बातें मामूली होती हैं - खाना खाया?, आज कैसा दिन था? पर फिर ये छोटी-छोटी बातें आदत बन जाती हैं।सुबह की पहली गुड मॉर्निंग और रात की आखिरी गुड नाइट के बीच, हर लम्हा साथ बाँटना सबसे खूबसूरत रिवाज़ बन जाता है।अपनी हर खुशी, हर छोटी जीत, हर बेवजह की टेंशन... सब कुछ बिना सोचे उन्हें बता देना दिन का सबसे सुकून भरा हिस्सा लगने लगता है।

और फिर एक दिन अचानक समझ आता है। प्रेम किसी को पा लेने का शोर नहीं है।प्रेम किसी के साथ “खुद जैसा” हो जाने का नाम है। जहाँ दिखावा नहीं, जहाँ चुप्पी भी बात करती है, जहाँ तुम बिना कहे भी समझ जाते हो।

उनके साथ तुम्हें खुद को साबित नहीं करना पड़ता। तुम जैसे हो वैसे ही पूरे लगते हो।तुम्हारी कमियों के साथ भी वो तुम्हें मुकम्मल कर देते हैं।उनकी मौजूदगी में दिल को एक अजीब सी शांति मिलती है,ना बेचैनी, ना डर, बस एक गहरा सुकून।

शायद हर इंसान की ज़िंदगी में एक ऐसा इंसान ज़रूर आना चाहिए।जो देर से आए,पर आकर सब्र का फल बन जाए। जिसके साथ बैठकर वक्त रुक जाए, और जिसके बिना वक्त काटना मुश्किल हो जाए।

क्योंकि कुछ लोग किस्मत से नहीं आते... वो दुआ बनकर आते हैं और जब वो आ जाएं, तो ज़िंदगी फिर पहले जैसी नहीं रहती।



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