सब किताबी बातें हैं जो तूफान थमने पर अच्छी लगती हैं, तूफान औरत के लिए खास कर एक बैचेन अतृप्त औरत के लिए जवानी में हर पल उमड़ता रहता है। जिसका कोई साहिल नहीं ऐसा एक समंदर, जो चाहिए वो मिलता नहीं और जो मिल रहा है वो काफी नहीं। ये बात चाहे सिर्फ 5% अतृप्त औरत पर लागू हो लेकिन परम सत्य है।
शरीर का सत्य शरीर ही जानता है, बातों से तृप्ति नहीं मिलती है।
किसी किसी खास औरत को ही ये नसीब होती है वरना प्यास ही उनकी नियति है चाहे वो मुंह से कह सके या न कह सके।