PART 20
दोनों के चेहरे एक-दूसरे से इतनी करीब थे कि साँसें आपस में उलझ रही थीं।
आरव का लंड स्नेहा की जांघ पर दबाव बना रहा था। स्नेहा के होंठ हल्के से कांप रहे थे। उसकी नज़रें आरव के होंठों पर आ टिकीं।
आरव का सीना तेज़ी से ऊपर-नीचे हो रहा था।
स्नेहा का चेहरा अब और करीब आ गया। दोनों के होंठों के बीच अब शायद एक इंच का भी फासला नहीं था।
स्नेहा ने अपनी आँखें धीरे से बंद कर लीं। आरव की साँसें भारी हो गईं। वो पूरी तरह से सुन्न था, लेकिन आरव होंठों को पीने के लिए आगे की तरफ हल्का सा झुका।
उनके होंठ बस एक-दूसरे को छूने ही वाले थे कि...
धड़! धड़! धड़!
किसी ने दरवाजा खड़काना शुरू कर दिए।
"ओए पिंटू! खोल गेट! अबे कितनी देर लगाएगा?"
स्नेहा झट से पीछे हटी। वो हड़बड़ा कर बिस्तर के दूसरे कोने पर खिसक गई और उसने रजाई सीधा अपने गले तक खींच ली। उसका सीना ज़ोर से धड़क रहा था।
आरव की हालत तो और भी खराब थी। वो झट से उठकर बैठ गया।
"अबे पिंटू! सो गया क्या बे?" बाहर से फिर आवाज़ आई और साथ में दरवाज़े के हैंडल को ज़ोर से हिलाने की आवाज़।
आरव ने जल्दी से एक तकिया अपनी गोद में रखा ताकि उसकी लंड की हालत छुप सके।
उसने स्नेहा की तरफ देखा। स्नेहा बस रजाई पकड़े हुए दरवाज़े की तरफ देख रही थी।
"दी... मैं... मैं देखता हूँ," आरव की आवाज़ पूरी तरह से फटी हुई थी।
उसने बिस्तर से उतरने से पहले अपनी टी-शर्ट को नीचे की तरफ खींचा। फिर कुर्सी पर पड़ी अपनी जैकेट उठाई और उसे पहनकर ज़िप आधी बंद कर ली। उसने खुद को थोड़ा नॉर्मल किया और जाकर दरवाज़े की कुंडी खोल दी।
दरवाज़ा खुलते ही शराब की बदबू अंदर आई।
सामने एक पच्चीस-छब्बीस साल का लड़का खड़ा था। उसने स्वेटर पहना हुआ था और उसकी आँखें आधी बंद थीं।
"अबे पिंटू... तूने इतनी देर..." उस लड़के ने बोलना शुरू किया, लेकिन फिर उसने आँखें खोलकर आरव को देखा।
आरव की हाइट और उसके चौड़े कंधों को देखकर वो लड़का एक कदम पीछे हो गया।
"भैया, आप गलत रूम में आ गए हैं। ये पिंटू का रूम नहीं है," आरव ने शांत आवाज़ में कहा, लेकिन वो दरवाज़े के बीचों-बीच खड़ा था ताकि वो लड़का अंदर ना आ सके।
उस शराबी ने अपनी आँखें सिकोड़ीं। उसने दरवाजे के ऊपर लगा नंबर देखा। "अरे... ये 204 है? शिट यार। पिंटू तो 205 में है।"
"जी। आप प्लीज वहाँ चेक कर लीजिए," आरव ने दरवाज़ा बंद करने की कोशिश की।
लेकिन उस शराबी लड़के ने थोड़ा सा साइड होकर कमरे के अंदर झांक लिया। बेडसाइड लैंप की रोशनी में उसे बिस्तर पर बैठी स्नेहा दिख गई। स्नेहा के बाल बिखरे हुए थे, चेहरा लाल था और वो रजाई को कसकर पकड़े हुए थी। उस सन्नाटे और दोनों की हालत देखकर कोई भी बता सकता था कि कमरे में क्या चल रहा था।
उस शराबी लड़के के चेहरे पर एक मुस्कान आ गई।
"ओह हो! बॉस! समझ गया, समझ गया," उस लड़के ने आरव के कंधे पर हाथ मारते हुए आँख मारी। "अरे भाई, रोमांस चल रहा है यहाँ तो। और मैंने कबाब में हड्डी बनके पूरा मूड खराब कर दिया!"
"भैया, आप प्लीज जाइये यहाँ से," आरव ने उसका हाथ अपने कंधे से हटाया।
"अरे जा रहा हूँ मेरे भाई! गुस्सा क्यों कर रहा है?" वो लड़का हँसते हुए पीछे हटा। फिर उसने थोड़ा झुक कर स्नेहा की तरफ हाथ हिलाया। "सॉरी मैम ! माफ़ी चाहता हूँ!। गलत टाइम पे एंट्री मार दी। आप लोग अपना रोमांस चालू रखो। सॉरी मैम, भाई को डिस्टर्ब कर दिया मैंने। कैरी ऑन! कैरी ऑन!"।
आरव ने बिना एक सेकंड और लगाए, झट से दरवाज़ा बंद किया और अंदर से लॉक कर दिया।
'खटॅक!'
कमरे में सन्नाटा छा गया।
आरव दरवाज़े से पीठ टिकाकर खड़ा था। उसकी साँसें तेज़ चल रही थीं। उसे समझ नहीं आ रहा था कि वो स्नेहा से नज़रें कैसे मिलाएगा।
आरव ने धीरे से मुड़कर बिस्तर की तरफ देखा।
स्नेहा रजाई के अंदर सिकुड़ी हुई थी। उसकी नज़रें बिस्तर की चादर पर गड़ी थीं। वो आरव की तरफ देख भी नहीं रही थी। अभी कुछ मिनट पहले वो दोनों क्या करने वाले थे? अगर वो आदमी ना आता, तो आज इस कमरे में वो कौन सी हद पार कर जाते?
आरव बिस्तर की तरफ आया।
"दी..." आरव के मुँह से बस इतना ही निकला।
स्नेहा ने तुरंत अपना हाथ उठाया, जैसे कह रही हो कि अभी कुछ मत बोलो। उसने बिना आरव की तरफ देखे रजाई के अंदर ही अपनी करवट बदल ली और दीवार की तरफ मुँह करके लेट गई।
आरव वहीं खड़ा रहा। उसे समझ नहीं आ रहा था कि वो क्या करे। उसने धीरे से अपनी जैकेट उतारी और कुर्सी पर रख दी।
वो बिस्तर के दूसरे किनारे पर जाकर लेट गया।
उसने हाथ बढ़ाकर बेडसाइड लैंप का स्विच बंद कर दिया। कमरे में अब अँधेरा था। बाहर शिलॉन्ग की ठंडी हवा खिड़की से टकरा रही थी।
"गुड नाईट दी," आरव ने बहुत ही दबी हुई आवाज़ में कहा।
कुछ सेकंड तक कोई जवाब नहीं आया। फिर रजाई के उस पार से एक बहुत ही कांपती हुई आवाज़ आई।
"गुड नाईट।"
कमरे में अँधेरा था, लेकिन नींद दोनों में से किसी की भी आँखों में नहीं थी। आरव सीधे लेटकर छत को घूर रहा था, और स्नेहा दीवार की तरफ मुँह किए अपनी आँखों को कसकर बंद किए हुए थी। दोनों की धड़कनें अभी भी नॉर्मल नहीं हुई थीं ।