परदेशी प्यार भागा- 8
मनु ने पूछा, मतलब?
तो बॉबी बोली- जैसा-जैसा मैने तुम्हारे साथ किया है, वैसा ही तुम मेरे साथ भी करो।
इतना कहकर बॉबी लेट गई और मनु का मन तो नहीं हो रहा था, मगर उसके सामने बॉबी की बात मानने के अलावा कोई और रास्ता था भी नहीं। उसने पहले बारी-बारी बॉबी की चूंचियों को दबाया और फिर उन्हें चूसने लगी। बॉबी की चूंचियां चूसने में उसे भी मजा आने लगा। बॉबी उसके सिर पर हाथ रखकर सहला रही थी। काफी देर तक मनु उसकी चूंचिया ही चूसती रही तो बॉबी बोली,
बस कर मेरी लाड़ो अब क्या खा जाएगी, इन्हें। नीचे आ जरा मेरी चूत पर भी अपनी जीभ का कमाल दिखा।
मनु नीचे सरक गई, मगर वह झिझक रही थी। बॉबी की चूत पर मुंह लगाने में उसे घिन सी आ रही थी। वह सोच रही थी कि इसी अंग से पेशाब की जाती है, वह इसे कैसे चूम सकती है। बॉबी ने जब देखा कि मनु का हाथ तो उसकी चूत पर है, मगर वह वैसे ही बैठी है तो उसने कहा,
क्या हुआ मनु, तू चाटती क्यों नहीं?
दीदी मुझे घिन सी आ रही है। मैं नहीं चाट पाउंगी। प्लीज आप ही मेरी चूत तो चाटो न। मैं हाथ से सहलाकर आपको मजा देती हूं।
बॉबी ने कहा, वाह हाथ से कहीं मजा आता है। देख मनु ये तो सौदा है। तू मुझे पूरा मजा दे, तभी मैं तुझे मजा दूंगी। नहीं तो तेरी मर्जी मैं तो चली सोने।
बॉबी ने इतना कहकर मुंह घूमा लिया तो मनु बोली, अरे दीदी आप तो नाराज हो रही हो।
नाराज नहीं होउं तो क्या करूं। अभी जब मैं तेरी चूत चाट रही थी तो कैसे उछल-उछलकर मजा ले रही थी। मेरी बारी आई तो तुझे घिन आने लगी।
ठीक है दीदी, तुम कहती हो तो मैं भी चाट लूंगी।
अरे वाह बॉबी चहककर बोली। यह हुई न बात।
इसके बाद बॉबी फिर चित होकर लेट गई। मनु को उसकी टांगे भी नहीं फैलानी पड़ी। बॉबी ने खुद ही खोल दी। इसके बाद मनु ने उसकी चूत पर मुंह रख दिया और चूमने लगी। बॉबी की चूत पर पहले मुंह लगाने में उसे घिन आ रही थी, मगर जब चूमना शुरू किया तो चूमती ही चली गई। चूमने के साथ जीभ से आहिस्ता-आहिस्ता चाटने भी लगी। मनु ने कुछ देर बॉबी की चूत को चाटा। इसके बाद बोली
दीदी अब मेरी बारी है।
बॉबी बोली रुक, हम दोनों एक साथ एक-दूसरे को मजा देंगे।
इसके बाद बॉबी ने मनु को एक करवट पर लिटाया और खुद अपना मुंह उलटी तरफ करके इस तरह लेटी कि मनु की चूत उसके मुंह के सामने और उसकी चूत मनु के मुंह के सामने थी। इसके बाद वह बोली,
चल शुरू हो जा मेरी जान। दिखा दे अपना पूरा हुनर।
दोनों ने एक दूसरे की चूत तो चाटना और चूसना शुरू कर दिया। काफी देर तक दोनों एक दूसरे की चूत पर अपनी जीभ से चित्रकारी सी करती रहीं।
इसके बाद बॉबी उठी और कहा अब तुझे दूसरी तरह से मजा देती हूं।
उसने मनु को लिटाया और उसकी चूत पर अपनी चूंची रगडऩे लगी। जब कभी वह निपल को मनु की चूत में घुसडऩे की कोशिश करती तो मनु को इतना मजा आता कि वह आनंद से चूत को भींच लेती। कुछ देर तक बॉबी ऐसे ही खिलवाड़ करती रही फिर बोली,
चल उठ अब मेरी बारी।
इतना कहकर बॉबी लेट गई। मनु जब बॉबी की चूत की तरफ आई और अपनी चूंची से उसे रगडऩा शुरू किया तो अचानक बॉबी को एक खयाल आया और वह बोली,
ऐसे नहीं। तू एक काम कर मेरे ऊपर लेट जा और अपनी चूत का दाना मेरी चूत पर रगड़।
मनु ने कहा मगर दीदी तुमने तो ऐसा नहीं किया था।
बॉबी बोली, अरे पगली मेरी चूत का दाना छोटा है, अंदर ही दबकर रह गया। तेरी चूत का दाना काफी उभरा हुआ है।
मनु समझ गई और वह अपनी चूत को बॉबी की चूत से मिलाकर उसके ऊपर लेट गई। इसके बाद चूत को बॉबी की चूत पर रगडऩे लगी। बॉबी को वैसा मजा तो नहीं आ रहा था जैसा कमल के लंड को चूत में लेकर आया था, मगर मजा तो आ ही रहा था। दोनों शाम ढले तक यही खेल खेलती रहीं। इसके बाद थककर एक-दूसरे की बांहों में नंगी ही सो गईं।