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Incest Nazar

Aap ko story kesi lag rahi hai.......


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    35

Lucky@khan

☆ it's me ☆
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Uski Nazar Ke Jhaase Main Mat Fasna.....

Uske Ulte Pair Dekhanewaalo Ki Ulti Ginti Shuru Ho Jaati Hai........

Uski Choti AapKi Umar Chhoti Kar Degi.........


To guys pesh hai aap ke liye


New story Nazar..........

Thriller,Horror,Drama,Incenst, Love,Sex.



Note : Es Story mai Family induction nahi de raha hu kiyu ke ye Story thoda hat ke hai Jese jese Charecters aayenge Wese wese aap logo ko pata chal jaayega Agr story acchi lage to like 👍 daba ke dena or comments karna naa bhule or koi yaha faltu ki bakchodyi naa Pele

yah ek fantasy Kalpana hai jo kewal manoranjan haitu hai Ham alokiki,andhvishwash ya jaaduyi parathao mai aashtha ko samrthan yaa badhawa nahi dete.



WITTER........
✍️........... LUCKY@KHAN
 
Last edited:

MAD DEVIL

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......... Yakshini..........

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Mega Update 23




☆ Chapter : Totake ka Asar☆





अब तक................


कायर : ये तुम दोनों नई कोठी के अंदर इतना अंधेरा कियु करके रखा हुआ है .....?

रजनी : अब हमें काम सुरु करना चाहिए ,आमोदिता जल्दी से पूर्व दिशा की और मुँह करके बैठ जा...............

रजनी : क्या हुआ काम को अंजाम दे दिया ,कोई दिक्कत तो नहीं आयी ...?

आमोदिता : है मोम दे दिया , कोई दिक्कत नहीं आयी............

युग : ( मन मै ) ये कैसे हो सकता है कुवे के अंदर से झरने के पानी गिरने की आवाज कैसे सुनाई दे सकती है...........





अब आगे.............



युग यह गाना सुन ही रहा था कि तभी गाने की आवाज धीमी हो जाती है और उसे कुँए के अंदर पानी पर एक लड़की का चेहरा दिखने लग जाता है। पहले तो वह चेहरा धूंधला था पर जैसे-जैसे वो clear होते जा रहा था, उसे कुँए के पानी में एक जाना पहचाना चेहरा नज़र आने लग जाता है।


युग हैरानी के साथ कहता है.........

युग : "यामिनी तुम...!"

कुँए के पानी में यामिनी का चेहरा था, सिर्फ चेहरा ही नहीं ऐसा लग रहा था जैसे कुँए के अंदर ही यामिनी थी। यामिनी का पूरा शरीर पानी में डूबा हुआ था बस उसका चेहरा ही दिख रहा
था।

युग धीरे से कहता है...........

युग : "यामिनी तुम यहाँ पर क्या कर रही हो....?"

यामिनी फुंसफुंसाते हुए कहती है........

यामिनी : "आपका इंतजार।"

युग : "मेरा इंतजार मतलब, और तुम कुँए के अंदर कैसे गिरी?"

यामिनी कुछ जवाब नहीं देती, वो एक-टक नज़र से युग को
देखते जा रही थी। युग को तो अभी भी अपनी आँखो पर यकिन
नहीं हो रहा था कि कुँए के अंदर यामिनी थी।

युग : "तुम वहीं पर रूको मैं अभी तुम्हे कुँए से बाहर निकालता हूँ,
घबराना मत मैं आ रहा हूँ।"

यामिनी धीरे से बड़े प्यार से कहती है........

यामिनी : "हाँ युग आओ, मेरे
पास आओ, मेरे करीब आओ।"

युग कुँए के अंदर घुसने के लिए अपने पैर कुंए के अंदर
डालने ही वाला था कि तभी उसे पीछे से अभि रोक लेता है
और उसका हाथ पकड़ते हुए कहता है.........

अभी : "युग तू पागल हो गया है
क्या, कुँए के अंदर क्यों कूद रहा है?"

युग : "यार कूद नहीं रहा हूँ, बचा रहा हूँ।

अभी : "बचा रहा है! पर किसे?"

युग : "यामिनी को, यार वो कुँए के अंदर है।"

अभी : "यामिनी! कौन यामिनी?"

युग : "वही लड़की यार जिसके बारे में मैंने कल रात में बताया था,
जिसने मेरी नदी पार करने में मदद की थी, अभी जब उसे देखा
तो उसका नाम याद आया वो कुँए के अंदर है।"

अभि कुँए के अंदर देखने लग जाता है पर उसे कुछ

दिखाई नहीं देता है। वह युग पर भिन्नाते हुए कहता है..........

अभी : "ये तुझे रात में कोई दौरे-वौरे तो नहीं पड़ते ना, किस लड़की की बात कर रहा है तू, कुँए के अंदर तो कोई नहीं है।"

युग भी कुँए के अंदर देखते हुए कहता है........

युग : "अरे यहीं पर तो थी कहाँ गयी, सच में अभि यहीं पर थी मैंने उससे बात भी की थी।"

अभी : "यार युग देख रात बहुत हो चुकी है, हो सकता है तुझको देर रात तक जागने की आदत हो इसलिए ऐसा हो रहा हो, वो चीजे दिखाई दे रही हो जो यहाँ पर है ही नहीं।"

युग अभि की बात का कुछ जवाब नहीं देता है, उसे तो
अभी भी समझ नहीं आ रहा था कि उसके साथ क्या हो रहा है।

अभि कुँए के पास रखी बाल्टी उठाता है और उससे कुँए का पानी खींचकर ब्केट में भर लेता है।

युग अभी भी यामिनी के बारे में ही सोच रहा था......

युग : ( मन मै ) "हो सकता है यह सब मेरा वहम ही हो वरना यामिनी यहाँ पर कैसे आ सकती है वो भी कुँए के अंदर ।"

अभि उसे हिलाते हुए कहता है........

अभी : "अरे कहाँ खो गया, मैं कुछ बोल रहा हूँ तुझसे पानी भरकर हो गया अब चले?"

युग : "हाँ चल जल्दी।"

युग और अभि ब्केट में पानी लेकर ग्रेव्यार्ड कोठी में चले जाते है। जब वो वहाँ पर पहुँचते है तो देखते है कि कायर और कछुऐ ने सारी ही शराब पी मारी थी, उन्होने युग और अभि का पानी लाने तक का इंतजार नहीं किया था। वह दोनो शराब पीकर जमीन पर ही पसरकर गहरी नींद में सो रहे थे।

अभि उन दोनो को देखते हुए कहता है.......

अभी : "यार ये दोनो तो टल्ली हो गये अब क्या करे?"

युग : "क्या करे क्या मतलब वही जो सोचा था यक्षिणी के बारे में पता लगाते है।"

अभी : "और कितना पता लगाऐगे यार, तुने देखा था ना उन लेज़र लाईट को अपने आप जलते हुए इसका मतलब यह है कि वो यहीं पर है कहीं नहीं गयी है।"

युग : "पर यक्षिणी..."

अभी : "यार फिर यक्षिणी, तू तो यक्षिणी के पीछे हाथ धोकर ही पड़ गया है, हमे यह तो पता चल ही गया है ना कि यक्षिणी यहीं पर है।"

युग : "हाँ पर यह तो पता नहीं चला है ना कि वो कहाँ पर है, किस कमरे में।"

अभी : "यार रूम नम्बर 666 में ही होगी ना।"

युग : "पर अभी तुने देखा था ना लेज़र लाईट हर जगह जल रही थी, फिर वो एक जगह कैसे हो सकती है?"

अभि कुछ सोचते हुए कहता है

अभी : "यार हो सकता है कि यह सब उसकी शक्तियों की वजह से हो रहा हो, भूल मत उसके पास शैतानी शक्तियों के साथ-साथ दैवीय शक्ति भी है, वो बहुत

शक्तिशाली है कमरे के अंदर कैद होकर भी वो बहुत कुछ कर सकती है और ये ग्रेव्यार्ड कोठी भी तो उसका दूसरा ठिकाना ही था तो इस कोठी की चीजो पर तो उसका वश होगा ही ना।"

युग : "हाँ यार बात तो तेरी बिल्कुल सही है, पर फिर भी जब तक में पूरी तरह clear नहीं हो जाता कि यक्षिणी अपने कमरे में ही कैद है मैं satisfied नहीं हो सकता।"

अभि उबासी लेते हुए कहता है.........

अभी : आआआहह.........."तो यार तीन दिन है
ना अभी हमारे पास, पूर्णिमा आने से पहले पता लगा लेंगे कि वो किस कमरे में है, अब मैं सोने जा रहा और तू भी चल वरना क्या पता फिर तुझे वो तेरी यामिनी दिखने लगे।"

इतना कहकर अभि युग के कमरे में सोने चले जाता है

और युग भी उसके पीछे-पीछे चले जाता है।

सुबह हो गयी थी और सुबह के सात बज रहे थे। अमोदिता और रजनी किचन में थे और नाश्ते की तैयारी कर रहे थे।

अमोदिता गर्मा-गर्म भजिये तल रही थी जिसकी खुश्बू से पूरा किचन महक रहा था।

रजनी अमोदिता से पूछती है.......

रजनी : "युग का फोन आया या नहीं?"

अमोदिता उदासी के साथ कहती है......

अमोदिता : "नहीं आया मोम "

रजनी : "अरे अभी तक फोन नहीं आया, जितना मैं जानती हूँ अभी तक तो काले जादू का असर हो जाना चाहिए था, और फोन आ जाना चाहिए था।"

अमोदिता भजिया तलते हुए कहती है........

अमोदिता : "मोम ये काला जादू असर तो करेगा ना, बाकी के टोटको की तरह वेस्ट तो नहीं हो जाएगा?"

रजनी गुस्सा करते हुए कहती है.........

रजनी : माधरचोद सुबह-सुबह मेरा मुंड ख़राब ना कर "अरे नालायक लड़की, टोटके कभी व्यर्थ नहीं जाते बस उन्हें सही से करना आना चाहिए और तू संदेह मत कर, तू सब चीज़े पर संदेह कर सकती है पर

काली शक्तियों पर नहीं, तुझे नहीं पता कितनी शक्ति होती है इस काले जादू में... तू तो ये बता तुने पुड़िया को चौराहे पर ही फेका था ना?"

अमोदिता हिचकिचाते हुए कहती है.......

अमोदिता : "हाँ मोम चौराहे पर ही फेका था।"

रजनी बड़ी-बड़ा आँखे करते हुए कहती है.......

रजनी : "देख सही-सही बताना।"

अमोदिता की जुबान लड़खड़ाने लगती है और वो कहती है.........

अमोदिता : हाँ मोम वहीं फेका था कसम से।"

अमोदिता ने इतना ही कहा था कि उसका मोबाईल बजने लग जाता है।

अमोदिता अपने मोबाईल की स्क्रीन देखते हुए कहती है...........

अमोदिता : "मोम युग जी का फोन है, वो फोन कर रहे है मुझे।"

रजनी भिन्नाते हुए कहती है........

रजनी : "अरे अरे चूतिया कही की मेरा मुँह क्या देख रही है, जल्दी उठाना फोन कटेगा तब उठाएगी क्या।"

अमोदिता फोन उठाते हुए बड़े प्यार से कहती है.......


अमोदिता : "हैलो युग जी।"

युग की घबराती हुई आवाज सुनाई देती है........

युग : "है...हैलो अमोदिता कहाँ पर हो तुम?"

अमोदिता : "मैं तो युग जी घर पर हूँ।"

युग : "तो अमोदिता जल्दी से जल्दी मेरे पास आ जाओ, मुझे तुम्हारी बहुत जरूरत है।"

जैसे ही अमोदिता युग के मुँह से यह बात सुनती है वो खुशी से फूले नहीं समाती है और हड़बड़ाते हुए कहती है

अमोदिता : ह...."हाँ युग जी मैं आती हूँ, पर हुआ क्या आप बताएगे?"

युग : "अमोदिता मैं अभी तुम्हे फोन पर कुछ नहीं बता सकता तुम बस जल्दी से जल्दी मेरे पास आ जाओ, मुझे तुम्हारी सख्त जरूरत है।"

अमोदिता : "ठीक है युग जी मैं अभी निकलती हूँ यहाँ से।"

युग : "हाँ अमोदिता जल्दी आना, मैं इंतजार कर रहा हूँ तुम्हारा यहाँ पर।"

युग का फोन कट हो जाता है। जैसे ही फोन कट होता है अमोदिता खुश होते हुए रजनी से
कहती है..........

अमोदिता : "मोम आपने तो बिल्कुल ठीक कहा था, युग जी तो मेरी ही नाम की माला जपते जा रहे है, वो तो रूक ही नहीं रहे थे, कह रहे थे जल्दी से जल्दी मेरे पास आ जाओ मुझे तुम्हारी सख्त जरूरत है; ये काला जादू तो सच में काम करता है।"


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रजनी : "देखा मेरे काले जादू का कमाल; अब तू देर मत कर जल्दी जा और देखकर आ युग को किस चीज की जरूरत है और सुन उसे जो भी चाहिए हो दे देना।"

रजनी की बात सुनकर अमोदिता शर्माने लग जाती है।

रजनी अमोदिता पर गुस्सा करते हुए कहती है.......

रजनी : "अरे तू तो अभी से शर्माने लग गयी कामिनी , मेरी बात ध्यान से सुन ले ज्यादा शर्माने मत लगना जो माँगे बिना सोचे समझे दे देना मेरा मतलब समझ रही है ना तू, ये आज कल के लड़के बड़े उतावले होते है; बस एक बार युग एक गलत कदम उठा ले फिर देखना कैसे तेरी उसके साथ शादी करवाती हूँ।"

अमोदिता : "ठीक है माँ, मैं जाती हूँ आप फिक्र मत कीजिए मैं आपको शिकायत का मौका नहीं दूंगी।"

इतना कहकर अमोदिता वहाँ से ग्रेव्यार्ड कोठी की ओर जाने के लिए रवाना हो जाती है। जैसे-जैसे उसके कदम ग्रेव्यार्ड कोठी की ओर बढ़ते जा रहे थे उसके मन में ख्याली पुलाव पकते जा रहे

थे। वो सोचते जा रही थी कि युग ने उसे ग्रेव्यार्ड कोठी में क्यों बुलाया था, आखिर वो उसके साथ क्या करने वाला था।

अमोदिता : ( मन मै ) युग जी इतने बेचैन हो कर मुझे कियु बुलाया है कही वो मेरे साथ कुछ ना कर दे वैसे मोम ने बोला है जो युग जी मुझसे मांगे वो मै देदू वैसे युग जी क्या मांगेगे कही वो मुझसे किश-विश तो नहीं माँगेगे या उसके आगे और कुछ

यही सोचते हुए अमोदिता कुछ ही देर में वो ग्रेव्यार्ड कोठी पहुँच जाती है और दरवाजा खटखटाती है।

जब दरवाजा खुलता है तो वो देखती है कि दरवाजे पर कछुआ खड़ा हुआ था। अमोदिता युग के बचपन के सारे दोस्तो को जानती थी क्योंकि वो भी बचपन में युग के साथ ही स्कूल में पढ़ा करती थी, युग के दोस्त भी उसे पहचानते थे। अमोदिता कछुए को ग्रेव्यार्ड कोठी में देखकर शौक्ड हो जाती है और अपना मुँह फाड़ते हुए नेपाली में कहती है..........

अमोदिता : "अरे कछुआ तिमी, यहाँ के तपाई गर्दै हुनुहुन्छ ।"

कछुआ अमोदिता को बताता कि वो यहाँ पर क्या कर रहा है, उससे पहले ही युग की आवाज सुनाई देती है.....


युग : "अरे अमोदिता तुम आ गयी, जल्दी आओ अंदर।"

युग की आवाज सुनकर अमोदिता झट से कोठी के अंदर चली जाती है। कोठी में वो देखती है कि वहाँ पर युग खड़ा हुआ था, युग को देखकर लग रहा था कि वो बड़ी बेसब्री से अमोदिता का ही इंतजार कर रहा था।

युग अमोदिता का हाथ पकड़ते हुए कहता है........

युग : "जल्दी चलो मेरे साथ मेरे कमरे में।"

अमोदिता मन ही मन सोचने लग जाती है........

अमोदिता : "मोम ने जैसा कहा था ये तो बिल्कुल वैसा ही हो रहा है, युग जी तो बहुत तेज निकले मुझे सीधे कमरे में ले जा रहे है और इन्हे तो शर्म भी नहीं आ रही


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अपने दोस्तों के सामने ही ऐसा बोल रहे है, चलो अच्छा
ही है मेरे पास सबूत भी रहेगा की युग जी के दोस्त भी वहीं पर थे जब वो मेरे साथ वो सब कर रहे थे।"

हॉल से युग के कमरे तक जाते तक ना जाने कितने मनघड़त ख्याल अमोदिता के मन में आ गये थे और वो तो अभी भी यकिन नहीं कर पा रही थी कि काले जादू ने अपना काम कर दिया था; युग को उसका दीवाना बना दिया था।

जब अमोदिता युग के कमरे में पहुँचती है तो देखती है कि युग के बिस्तर पर अभि और कायर थे। कायर लेटा हुआ था और अभि उसके दोनो हाथ पकड़ा हुआ था, ऐसा लग रहा था जैसे वो उसे कहीं जाने से रोक रहा हो।

कायर अपने चेहरे पर एक अलग ही मुस्कान के साथ कहता है.............

कायर : "अमोदिता...अमोदिता... मेरी अमोदिता।"

कायर अमोदिता का नाम बार-बार बड़बड़ाए जा रहा था और अभि अपने हाथो से उसका मुँह बंद करने की कोशिश कर रहा था।

अमोदिता युग से कोई सवाल पूछती उससे पहले ही युग कहता है...........

युग : "वो अमोदिता देखो ना ये कायर को क्या हो गया है, जब से उठा है तुम्हारे नाम की ही माला जपे जा रहा है....."

युग अपनी बात पूरी करता उससे पहले ही कछुआ बीच में टोकते हुए कहता है........

कछुआ : "हाँ अमोदिता, इतना तो कोई भगवान को
याद नहीं करता जितनी बार सुबह से इसने तुम्हे कर लिया है।"

युग अपनी बात को आगे जारी रखते हुए कहता है.....

युग : "मैंने सोचा इसे डॉक्टर के पास ले जाऊ फिर ये अभि ने बताया कि आस-पास के गाँव में तो कोई डॉक्टर ही नहीं है, तुम ही हो जो सबका इलाज करती हो, फिर मुझे याद आया कि तुम्हारा नम्बर कल सेव किया था मैंने इसलिए तुम्हे यहाँ पर बुला लिया, अब
तुम ही देखो क्या हुआ है इस कायर को।"

अभि अपना हाथ दबाते हुए कहता है......

अभी : "हाँ अमोदिता, मैं तो थक गया हूँ इसे पकड़ के बैठने में, अगर इसे पकड़ता नहीं तो ये सीधा तुम्हारे घर आ जाता; पता नहीं क्या हुआ है इसे
तुम्हारे ही नाम की रट्ट लगाया हुआ है।"

युग की बाते सुनकर अमोदिता दंग हो गयी थी, वो यही सोच रही थी कि जो काला जादू युग पर होना चाहिए था वह कायर पर कैसे हो गया था, ऐसा कैसे हो सकता है?"

कायर अमोदिता का नाम बड़बड़ाते हुए कहता है.....

कायर : "अमोदिता... मेरी अमोदिता, मेरी प्यारी अमोदिता।"

अभि कायर के मुँह से फिर से अमोदिता का नाम सुनकर कुछ सोचते हुए कहता है.......

अभी : "यार ये कायर को किसी ने अमोदिता
के नाम की मोहिनी तो नहीं दे दी?"

अभि की बात सुनकर अमोदिता घबराने लग जाती है,
वो सोचने लग जाती है कि कहीं अभि युग के सामने उसकी पोल ना खोल दे क्योंकि अभि को सब पता था कि गाँव में क्या-क्या होता था।

युग हैरानी के साथ कहता है..........

युग : "ये मोहिनी क्या होती है यार, कोई लड़की-वड़की है क्या?"

अभि : "ये मोहिनी कोई लड़की-वड़की नहीं है
बल्कि एक प्रकार का....."

अभि अपनी बात पूरी करता उससे पहले ही कछुआ
फटाक से बीच में बोल पड़ता है........

कछुआ : "यार युग तुझे मोहिनी नहीं पता, यहाँ गाँव में तो मोहिनी देना आम बात है, अपने बंगलामुडा
और रौंगकामुचा गाँव में तो सबसे ज्यादा दी जाती है।"

युग चिढ़ते हुए कहता है..........

युग : "यार नहीं पता तभी तो पूछ रहा हूँ ना; अभिमन्यु बता ना यार क्या है ये मोहिनी?"

अभि अपनी बात को आगे जारी रखते हुए कहता है.....

अभी : "यार ये जो मोहिनी है ना ये एक प्रकार से टोना होता है, जब किसी को अपने वश में करना हो तब ये किया जाता है, ये अलग-अलग प्रकार से होता है जिसमे किसी के बाल के साथ, नाखून के
साथ या खाने में कुछ मिलाकर दिया जाता है पर इसका मेन मकसद सिर्फ एक होता है और वो है वश में करना, इसे मोहिनी देना कहा जाता है।"

अभि बोल ही रहा था कि तभी कायर फिर बड़बड़ाने लग जाता है.........

कायर : "अमोदिता.... अमोदिता... मेरी जान अमोदिता।"

कछुआ अमोदिता को घूरते हुए कहता है........

कछुआ : "पर यार एक बात समझ नहीं आयी, ये कायर अमोदिता का नाम क्यों बड़बड़ा रहा है, कायर को अमोदिता के नाम की मोहिनी किसने दी होगी
और क्यों?"

अपना नाम सुनकर अमोदिता बहुत घबरा गयी थी, उसके हाथ पैर कंपकपाने लग गये थे, वो उन्हे अपनी बातो में उलझाते हुए कहती है.........

अमोदिता : "ये तुम लोग कैसी बाते कर रहे हो, भला आज के जमाने में थोड़ी ये सब होता है, युग जी ये दोनो तो गाँव वाले है पर आप तो शहर से आए है ना तो इन दोनो की बातो पर यकीन मत
करना।"

कछुआ झट से कहता है.........

कछुआ : "तो फिर तुम ही बता दो अमोदिता कि क्यों कायर तुम्हारा नाम बड़बड़ाए जा रहा है?"

अमोदिता कुछ सोचते हुए कहती है........

अमोदिता : "वो... वो इसलिए क्योंकि जरूर पिछली रात कायर ने कोई सा ऐसा सपना देखा
होगा जिसमे मैं रही होगी और मेरी जान खतरे में रहीं होगी वही सपना कायर के दिमाग में रह गया होगा और वो मेरा नाम बड़बड़ाए जा रहा है; जो मेंटली कमजोर और इमोसनल होते है
उनके साथ अकसर यह प्रॉब्लम आती है कि नींद खुलने के बाद भी वो उनका नाम बड़बड़ाते रहते है पर कुछ वक्त बाद सब ठीक हो जाता है।"

अमोदिता की बात सुनकर युग को अपने सपने की याद आने लग जाती है जिसमे वो एक लड़की के साथ निर्वस्त्र अवस्था में रहता है और प्यार भरी बाते करता है, एक पल के लिए उसके मन में आता है कि वो अमोदिता को अपने सपने के बारे में बताए, हो सकता है कि अमोदिता उसके सपनो का कुछ तोड़ निकाल
सके पर अगले ही पर उसका मन बदल जाता है और वो सोचता है कि पता नहीं आमोदिता उसके बारे में क्या सोचे कहेगी कि युग जी कैसी-कैसी बाते करते है।

कछुआ कुछ सोचते हुए कहता है..........

कछुआ : "ये कायर तो बिन्दू को प्यार करता है, तो इसे तुम्हारे सपने कैसे आ सकते है?"

अमोदिता कछुए पर चिढ़ते हुए कहती है.........

आमोदिता : "अब वो मुझे क्या पता, सपनो पर थोड़ी किसी का बस चलता है, भूलो मत कि हम चारो बचपन में साथ एक ही स्कूल में पढ़ते थे, हो सकता है
कि बचपन की ही कोई बात याद आ गयी हो और अब मुझसे कोई सवाल मत पूछो मुझे कायर का चेकअप करने दो।"

इतना कहकर अमोदिता कायर के पास जाती है और नाटक से उसके हाथ की नब्ज चेक करते हुए कहती है आमोदिता : "नब्ज तो ठीक चल रही है, हो सकता है जो मैंने कहा था वही हुआ होगा।"

जब अमोदिता कायर का हाथ पकड़ती है तो जैसे कायर के बदन में एक बिजली सी कौंध जाती है और वो अमोदिता की आँखो में देखते हुए कहता है........

आमोदिता : "अमोदिता... मेरी अमोदिता....तुम आ गयी अमोदिता।"

इतना कहकर कायर अमोदिता के नजदीक जाने लग जाता है, तभी अभि उसे फिर से पकड़ते हुए कहता है.......

अभी : "अबे कहाँ चिपक रहा है, दूर हट अमोदिता से, काबू रख अपने आप पर।"

अमोदिता घबरा जाती है, उसके समझ नहीं आता कि वो क्या करे, तभी उसे एक तरकीब सूझती है और वो अपना हाथ कायर के माथे पर फेरते हुए कहती है.......

आमोदिता : "कायर मैं ठीक हूँ, कायर देखो मेरी तरफ भूल जाओ अपने सपने को और अब अराम करो,सो जाओ कायर सो जाओ।"

जैसे ही अमोदिता कायर के सिर पर हाथ फेरती है और उसे सोने का बोलती है कायर अमोदिता- अमोदिता बड़बड़ाते हुए ही वापस बिस्तर पर लेटने लग जाता है और सो जाता है।

अभि कछुआ और युग यह तीनो ये सब देखकर दंग रह
जाते है।

कछुआ कायर को घूरते हुए कहता है........

कछुआ : "जब से हम सोने का बोल रहे थे तब तो नहीं सोया अमोदिता के हाथ फेरते ही फट से
सो गया।"

युग हँसते हुए कहता है..........

युग : हा हा हा "यही तो जादू होता है लड़कियों के
हाथो में बेटा, मेन विल बी मेन।"

अमोदिता अपने मोबाईल में कुछ टाईप करते हुए कहती है..........

आमोदिता : "युग जी मैं ना आपको एक मेडिसिन लिखकर दे रही हूँ आप ना उसे कायर को दे देना उससे वो जल्दी ठीक हो जाएगा वरना कभी-कभी सपनो का असर देर तक रहता है।"

युग अपना मोबाईल चेक करते हुए कहता है.......

युग : "हाँ ठीक है अमोदिता ले आऊँगा ये मेडिसिन मैं।"

बेड के पास ही एक शर्ट पेंट रखी हुई थी, कछुआ उसे उठाता है और उसकी स्मेल लेते हुए कहता है........

कछुआ : "यार युग ये तेरे कपड़ो में

से तो बहुत गंदी स्मेल आ रही है तू इन्हे धोता नहीं है क्या?"

युग उन कपड़ो को देखते हुए कहता है.......

युग : "यार धोने के लिए ही तो निकाले थे पर कल बहुत काम था तो धोना भूल गया और इसमे से गंदी स्मेल इसलिए आ रही है क्योंकि मेरे ये कपड़े कायर
ने पहने हुए थे, भूल गया वो उस दिन बारिश में जब वो भीगकर आया था तो उसे मैंने अपने कपड़े पहनने के लिए दिए थे।"

कछुआ : "हाँ याद आया उसी दिन तो पहला काय्रक्रर्म जमा था बिन्दू ने टेस्टी-टेस्टी खाना भी तो भेजा था।"

जब अमोदिता की नज़र उन कपड़ो पर पड़ती है तो वो
देखती है कि वो वहीं कपड़े थे जिसमें से उसने युग का बाल निकाला था, वो समझ जाती है कि वो कपड़े कायर ने पहने थे जिस कारण युग की जगह कायर का बाल उसके हाथ लग गया था और टोटका कायर पर हो गया था। अमोदिता वहाँ के हालत देखकर समझ जाती है कि उसका अब ज्यादा देर वहाँ पर रूकना खतरे से खाली नहीं है कभी भी अभि और कछुआ उससे कोई सा भी सवाल पूछ सकते है इसलिए वो वहाँ से जाने का मन बना लेती है और युग से इजाजत लेते हुए कहती है..........

आमोदिता : "अच्छा युग जी अब मैं चलती हूँ मोम ने जल्दी लौटने बोला था।"

युग अपना सिर हिलाते हुए कहता है.........

युग : "ठीक है अमोदिता तुम्हारा थैंक्यू यहाँ पर आने के लिए, तुम नहीं होती तो पता नहीं हमारा क्या होता, हम तो परेशान ही हो गये थे।

आमोदिता : "इसमे थैंक्यू की क्या बात है युग जी, आपको जब मेरी जरूरत हो आप मुझे बुला सकते है मैं दोड़ी चले आऊँगी।"

इतना कहकर अमोदिता वहाँ से जाने लग जाती है। अँगूठे के नाखून की बली देने के कारण अमोदिता थोड़ा लंगड़ा-लंगड़ा कर चल रही थी, यह बात अभि नोटिस कर लेता है और उसे रोकते हुए कहता है.......

अमोदिता : "अरे अमोदिता..., ये तुम्हारे पैर को क्या हो गया और इस पर ये सफेद पट्टी क्यों बंधी हुई है।"

अमोदिता हकलाते हुए कहती है.........

आमोदिता : वो......"वो अभिमन्यु चोट लग
गयी थी।"

युग : "क्या कहा चोट लग गयी थी पर कैसे?"

अमोदिता बहाना बनाते हुए कहती है........

आमोदिता : "वो क्या है ना युग जी जब मैं काम कर रही थी तो सिलबट्टा का पत्थर अँगूठे पर गिर
गया था उसी से लग गयी।"

कछुआ अँगूठे को देखते हुए कहता है........

कछुआ : "सिर्फ अँगूठे पर ही चोट लगी उससे और कहीं नहीं लगी?"

अमोदिता भिन्नाते हुए कहती है..........

आमोदिता : "तो तुम क्या चाहते हो कछुआ कि हमारा पूरा पैर ही टूट जाए, तुम्हारी ना बचपन की आदत अभी तक गयी नहीं है, बचपन में भी हाथ धोकर हमारे पीछे पड़े रहते थे और अभी भी हर बात मे तुम्हे टाँग अड़ानी है अपनी।"

कछुआ कुछ नहीं कहता बस शर्म से हँसते हुए अपना सिर नीचे झुका लेता है। अमोदिता वहाँ से चले जाती है।


कुछ देर बाद....


कायर को अभी तक होश नहीं आया था। युग कछुआ और अभि उसी के पास बैठकर उसके होश में आने का इंतेज़ार कर रहे थे।

युग अपने मोबाईल पर अमोदिता का मैसेज देखते हुए कहता है..........

युग : "यार यहाँ आस-पास मेडिकल स्टोर कहाँ पर है कायर के लिए मेडिसिन लेकर आ जाते है, जब होश में आएगा और यदि ठीक नहीं हुआ तो दे देंगे

कछुआ अपने हाथ से राईट साईड इशारा करते हुए कहता है.......

कछुआ : "ये अपना मेंदिपथार है ना वहाँ पर स्टेशन के पास में ही मेडिकल स्टोर है वहाँ पर मिल जाएगी ये मेडिसीन।"

युग अपना मुँह फाड़ते हुए कहता है........

युग : "क्या कहाँ मेंदिपथार! अब मेडिसीन लेने के लिए इतने दूर जाना पड़ेगा इसमें तो बहुत वक्त लग जाएगा यार।"

कछुआ हँसते हुए कहता है : "जाना तो पड़ेगा ही ना
मेडिसीन थोड़ी अमोदिता है कि तुने आवाज लगायी और वो फट से दौड़ी चले आएगी।"

कछुए की बात सुनकर अभि भी हँसने लग जाता है।

युग कुछ नहीं कहता क्योंकि उसे पता था कछुए की बचपन से हर किसी की टाँग खींचने की आदत थी।

अभि कछुए से पूछता है........

अभी : "अरे कछुए ये एक मेडिकल स्टोर, ये अपने रौगंकामुचा गाँव में भी खुला है ना अभी एक-दो ही
महीने पहले ही।"

कछुआ कुछ याद करते हुए कहता है......

कछुआ : "हाँ यार और ये युग के बड़े पापा दिलीप अंकल ने ही तो उसका उदघाटन किया था, वैसे भी गाँव में कुछ भी चीज का इनोग्रेसन हो तो युग के बड़े
पापा को ही तो बुलाया जाता है।"

अभि : "बुलाया क्यों नहीं जाएगा, आधे पैसे युग के बड़े पापा भी तो देते है पाटनर्शिप के तौर में।"

कछुआ : "हाँ यार ये भी है, मेरे तो समझ नहीं आता कि दिलीप अंकल के पास इतना पैसा आता कहाँ से है कि इनवेस्ट पे इनवेस्ट करते जाते है, कुछ फायदा तो होता नहीं उनका।"

अभी : "फायदा कैसे नहीं होता गाँव में उनका इतना मान सम्मान जो है, भूल मत बेटा पैसा बोलता है उनके सामने किसी की जुबान नहीं खुलती।"

कछुआ : "हाँ यार ये भी है पर मुझे तो लगता है कि वो हवेली में जरूर कोई ना कोई खजाना गढ़ा हुआ है, जो उनके हाथ लग गया है,युग तू ना उस खजाने के बारे में पता कर फिर ये स्टार्टअप-विस्टार्टअप खोलने की जरूरत ही नहीं पड़ेगी, इतना पैसा होगा ना तेरे पास तू तो पैसे में खेलेगा ही साथ में हम भी खेलेंगे।"

युग परेशान होते हुए कहता है........

युग : "ये तुम दोनो किस खजाने की बात कर रहे हो और कौन सी हवेली?"

अभिमन्यु झट से कहता है : "यार वही हवेली जिसमे तेरे बड़े पापा आई मीन दिलीप अंकल रहते है, सुना है कई सालो पहले वहाँ उस हवेली में एक अघोरी रहा करता था जिसने कई सिद्धियाँ हासिल की थी और उसी की मदद से खजाने का अंबार लगा दिया था।"

युग अपना मुँह फाड़ते हुए कहता है.......

युग : "क्या कहा खजाने का अंबार!"

अभिमन्यु आगे की बात बताते हुए कहता है.......

अभी : "हाँ यार, मैंने सुना है कि वो अघोरी लोगो से गलत काम मतलब टोना-टोटका करवाता था और उसके बदले में उन्हे सोना चाँदी दिया करता था
पर उसका मेन मकसद कुछ और था।"

युग हैरानी के साथ कहता है.........

युग : "क्या था उसका मेन मकसद?"

अभि : "मैंने सुना है कि उसका मेन मकसद यह था कि वो यक्षिणी पर काबू करना चाहता था।"

अभि ने अभी इतना ही कहा था कि युग उस पर दूसरा सवाल दाग देता है........


युग : "और वो यक्षिणी पर काबू करके क्या करना चाहता था?"

अभी : "यार देख जितना हम सबको पता है यक्षिणी के बारे में उस हिसाब से यक्षिणी दूसरे लोग से आयी थी और उसे कोई सा अभिशाप मिल गया था जिस कारण वो डायन बन गयी थी, तो इस हिसाब से यक्षिणी के पास दैवीय और दैत्य दोनो शक्तियाँ थी,हो सकता है उन्ही शक्तियों को हासिल करने के लिए वो अघोरी यक्षिणी पर काबू करना चाहता था या फिर कुछ भी हो सकता है,मैं बस सुनी-सुनाई बाते बता रहा हूँ असली बात तो वो अघोरी ही बता सकता है।"

युग कुछ सोचते हुए पूछता है........

युग : "अभी इस वक्त वो अघोरी
कहाँ पर है?"

कछुआ युग के सवाल का जवाब देते हुए कहता है..........

कछुआ : "उसे तो यक्षिणी ने मार दिया।"

युग अपना मुँह फाड़ते हुए कहता है.......

युग : "क्या कहा यक्षिणी ने अघोरी को भी मार दिया!"

कछुआ अपनी बात आगे जारी रखते हुए कहता है........

कछुआ : "हाँ दादी ने तो यही बताया था मुझे कि एक पूर्णिमा की रात उस यक्षिणी और अघोरी का आमना सामना हुआ था जिसके बाद से ही अघोरी किसी को दिखा नहीं, लोगो का मानना है कि उसे
यक्षिणी ने मार दिया था और अघोरी के मरने के बाद ही तो तेरे पापा के पापा ने जमीन बेचकर वो हवेली खरीदी थी, तुझे पता है दादी बताती है कि पहले तुम लोग भी बहुत गरीब थे पर जब से वो हवेली खरीदी थी तब से तुम्हारी किस्मत चमक गयी थी।"

युग यह सब बाते सुनकर दंग रह गया था क्योंकि उसे इन सब बातो के बारे में आज से पहले कुछ नहीं पता था।

युग अपना मोबाइल देखते हुए कहता है........

युग : "यार अभी ना तुम दोनो ये सब छोड़ो वैसे भी मुझे इन खजानो में कोई इंटरेस्ट नहीं है, जो पैसे अपने दम पर हासिल किए जाते है उसकी बात ही
कुछ और होती है, अभि तू चल मेरे साथ रौंगकामुचा गाँव के मेडिकल स्टोर ।"

अभिमन्यु बेड पर से उठते हुए कहता है......

अभी : "हाँ चल।"

कछुआ डरते हुए कहता है......

कछुआ : "यार ये.... ये तुम दोनो मुझे इस ग्रेव्यार्ड कोठी में अकेला छोड़कर क्यों जा रहे हो।"

अभि कायर की तरफ इशारा करते हुए कहता है..........

अभी : "अकेले कहाँ छोड़कर जा रहे है, ये कायर है ना तेरे साथ।"

कछुआ मुँह बनाते हुए कहता है........

कछुआ : "इसका होना ना होना एक समान है, अभी ये तो बेहोश पड़ा हुआ है पता नहीं किसने इसे मोहिनी दे दी, मैं नहीं रूकने वाला इसके साथ इस ग्रेव्यार्ड
कोठी में।"

युग परेशान होते हुए कहता है.......

युग : "कछुए तू ना बड़ा परेशान करता है, एक काम करते है अभी तू यहीं पर रूक जा कछुए तू चल मेरे साथ।"

कछुआ खुश होते हुए कहता है.......

कछुआ : "हाँ ये एक दम सही है,अभि तू रूक जा यहाँ पर।"

अभि : "हाँ रूक जाऊँगा मैं तेरी तरह नहीं हूँ, डरपोक।"

युग और कछुआ वहाँ से चले जाते है।

इस तरफ जब अमोदिता अपने घर पर पहुँचती है और रजनी को सब कुछ बताती है कि टोटके का उल्टा असर हो गया है, तो रजनी अमोदिता पर बहुत गुस्सा करती है वो आग बबूला हो
जाती है।

रजनी अमोदिता पर गुस्सा करते हुए कहती है........

रजनी : माधरचोद चूतिये की उलाद "तुझसे एक काम ढंग से नहीं होता, तुझे युग का बाल लाने के लिए बोला था
और तू उस कायर का बाल लेकर आ गयी।"

अमोदिता रोते हुए कहती है.......

अमोदिता : "मोम अब मुझे थोड़ी पता था
कि युग जी के कपड़े उस कायर ने पहने हुए थे।"

रजनी : "तुझे कुछ पता ही कहाँ रहता है, पता होता तो यहाँ पर होती क्या, युग के कपड़ो में से बाल लाने की जगह उसके सिर का ही बाल तोड़ लेती।"

आमोदिता :"मोम इतना आसान थोड़ी है किसी का बाल तोड़ना, कितना कठिन होता है। "

रजनी : "तू तो ऐसे बोल रही है जैसे आज तक मैंने किसी का बाल तोड़ा ही नहीं है, तू कहे तो मैं लाकर दे दूँ तुझे युग का बाल।"

अमोदिता खुश होते हुए कहती है.......


आमोदिता : "हाँ मोम, आप पहले ही ये
कर लेती तो ऐसा कुछ नहीं होता, आप ही ले आईए ना युग जी का बाल।"

रजनी अमोदिता पर भिन्नाते हुए कहती है........

रजनी : "हाँ और युग से शादी भी मैं ही कर लेती हूँ और उसके साथ शहर भी मैं ही चले जाती हूँ और तू यहीं पर बोझ बनकर बैठी रह।"

अपनी माँ का गुस्सा देखकर अमोदिता एक दम चुप हो जाती
है। रजनी अभी भी गुस्से से फूले जा रही थी।

अमोदिता बड़ी हिम्मत करके रोता हुआ मुँह बनाकर कहती है.........

आमोदिता : "मोम प्लीज कुछ कीजिए ना, वो कायर तो मेरा ही नाम बड़बड़ाए जा रहा था, बड़ी मुश्किल से बहाना बनाकर युग जी को समझाया है और यदि कल तक कायर नॉर्मल नहीं हुआ तो
गड़बड़ हो जाएगी, कायर को देखकर ऐसा लग रहा था जैसे वो मुझे खा ही जाएगा और मैं उससे शादी नहीं करना चाहती, प्लीज मोम कुछ कीजिए।"

इतना कहकर अमोदिता रोने लग जाती है।

अमोदिता के आँसू देखकर रजनी को उस पर दया आ जाती है। रजनी भले ही
कैसी भी हो, थी तो वो एक माँ ही, माँ की ममता जाग ही जाती है रजनी आमोदिता को समझाते हुए कहती है.........


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रजनी : "अच्छा चल ठीक है अब ये मगरमच्छ के आँसू बहाना बंद कर, अब एक ही रास्ता बचा है और वो ये है हमे टोटका तोड़ना पड़ेगा तभी तेरा जादू
कायर पर से उतरेगा।

अमोदिता झट से पूछती है.........

अमोदिता : "और वो कैसे तोड़ते है मोम........?"





अब आगे.............



☆ Chapter : Yamini ki baate☆


युग सोचने लग जाता है कि वह भूंजी हुई मछली खाए या नहीं। युग कुछ फैसला कर पाता उससे पहले ही यामिनी उसे टोकते हुए कहती है.........

यामिनी : "अरे बाबू ज्यादा सोचिए मत, मैंने इसमे
कोई मोहिनी नहीं मिलाईए है; यामिनी को किसी को वश में करने के लिए मोहिनी देने की जरूरत नहीं पड़ती, उसका रूपरंग ही काफी है।"

युग सोचने लग जाता है........

युग : "ये यामिनी को मोहिनी देने के बारे में कैसे पता, यह वही सब बाते क्यों बोल रही है जो ग्रेव्यार्ड कोठी में हुई है?"

युग को उसके सीने पर लगे नाखून के खरोंच का याद आया और वो फिर बौखलाहट के साथ पूछने लग गया..........

युग : "ये सब तो ठीक है पर ये बताओ तुमने मेरी शर्ट क्यों खोली थी और मेरे सीने पर खरोंच के निशान कैसे थे?"

यामिनी धीरे से कहती है.........

यामिनी : "युग बाबू मैंने ना आपकी शर्ट आपके साथ संभोग करने के लिए खोली थी।"

यामिनी की बात सुनकर युग दंग रह गया था, उसकी आँखे फटी की फटी रह गयी थी। उस वक्त युग का चेहरा देखने लायक था, उसके तोते उड़ गये थे।




8477 Words Complete..........

Aaj se Updates Ab Hindi mai aayenge..........

Dear Readers story ke updates or majedaar ho uske liye like 👍 or 🗣️ comments karte rahiye taaki ham aap ke liye updates mai Or bhi thriller,Suspension,Sex,horror, Darama laa sake............😎
Bechari AMOODITA hr jgh se moo ki khaa rhe hi dusri trf YUG jo YAKSHANI ke bare me Jaan ke bi ni Jaan paa rha hai
.
Istrf YAMINI kn hai ky hai wo YAKSHANI hai in sb se anjaan YUG fasaa pda hai bs apne 3 dosto me aage ka kuch pta ni chl rha ky hoga
.
Abe bhai ab to YUG ko dosto ke paluuu se azaad krwa bhai story ko main point ko start kr bhai kuch to horror scene create kr jise pd ke mjaa aajay
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Or ye YUG ki MAA or FAMILY ka kuch scene dikhao bhai hota ky hai or krta ky hai HERO apna hisaab brabr kaise krega
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Ek swaalll or hai bs ek swaall
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TERA KAL KB AAYGE BEWAFFFFAAAAAAAAA #LUCKY
 
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Bechari AMOODITA hr jgh se moo ki khaa rhe hi dusri trf YUG jo YAKSHANI ke bare me Jaan ke bi ni Jaan paa rha hai
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Istrf YAMINI kn hai ky hai wo YAKSHANI hai in sb se anjaan YUG fasaa pda hai bs apne 3 dosto me aage ka kuch pta ni chl rha ky hoga
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Abe bhai ab to YUG ko dosto ke paluuu se azaad krwa bhai story ko main point ko start kr bhai kuch to horror scene create kr jise pd ke mjaa aajay
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Or ye YUG ki MAA or FAMILY ka kuch scene dikhao bhai hota ky hai or krta ky hai HERO apna hisaab brabr kaise krega
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Ab sab itni jaldi jaldi Horror,Suspension,thriller,sex dene lagunga to maza hi kya rhega yaarrr
 

MAD DEVIL

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Ab sab itni jaldi jaldi Horror,Suspension,thriller,sex dene lagunga to maza hi kya rhega yaarrr
Bhai mera mtlb story ko or aage badne se tha bs bhai ye AMOODITA or uski MAA sath ye YUG ke dosto ka bhot jada hogya ab aage ka kuch kro bhai
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Baki jaisi Teri mrji bhai
 
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Update 24





☆ Ch : Yamini ki baate ☆




अब तक.............



यामिनी : "आपका इंतजार।"

युग : "मेरा इंतजार मतलब, और तुम कुँए के अंदर कैसे गिरी....?".........

रजनी : "देखा मेरे काले जादू का कमाल; अब तू देर मत कर जल्दी जा और देखकर आ युग को किस चीज की जरूरत है और सुन उसे जो भी चाहिए हो दे देना।".........

जब अमोदिता की नज़र उन कपड़ो पर पड़ती है तो वो

देखती है कि वो वहीं कपड़े थे जिसमें से उसने युग का बाल निकाला था, वो समझ जाती है कि वो कपड़े कायर ने पहने थे जिस कारण युग की जगह कायर का बाल उसके हाथ लग गया था और टोटका कायर पर हो गया था।........




अब आगे..........




रजनी अमोदिता के सवाल का कुछ जवाब नहीं देती है। वह चुप चाप खड़ी हुई थी। उसको देखकर ऐसा लग रहा था जैसे वो किसी गहरी सोच में डूब गयी थी।

अमोदिता रजनी को हिलाते हुए कहती है.........

आमोदिता : "माँ क्या सोच रही हो तुम, बताओ ना मोम टोटका कैसे तोड़ा जाता है?"

रजनी : "टोटका कैसे तोड़ा जाता है वो मैं तुझे रात में बताऊँगी,आज रात तीन बजे तैयार रहना, और एक बात याद रखना जितना ज्यादा आसान होता है टोटका करना उससे कहीं ज्यादा कठिन होता है टोटका तोड़ना।"

रजनी की बात सुनकर अमोदिता घबराने लग जाती है और डरते हुए कहती है.........

आमोदिता : "माँ तुम मुझे डरा रही हो ना?"

रजनी अमोदिता की आँखो में देखते हुए कहती है.......



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रजनी : "मैं क्या तुझे कोई भूतनी लगती हूँ जो तुझे डराऊँगी, मैं तो बस तुझे सच्चाई से वाकिफ करवा रही हूँ, समझी।"

इस तरफ युग और कछुआ रौंगकामुचा गाँव पहुँच गये थे।

अमोदिता ने जो मेडिसीन कायर के लिए बताई थी वो उन दोनों ने ले ली थी। वो लोग वापस से बंगलामुडा गाँव जा रहे थे।

वह दोनो अभी रौंगकामुचा घाट पर पहुँचे ही थे कि तभी कछुआ का फोन बजने लग जाता है।

कछुआ अपना फोन उठाते हुए कहता है.........

कछुआ : "हैलो......क्या...अरे कैसे....?"

जैसे-जैसे कछुआ बात करते जा रहा था उसके फेश के

एक्सप्रेसन चेंज होते जा रहे थे। उसकी चेहरे की खुशी अचानक गायब हो गयी थी और गम में तब्दिल हो गयी थी।"

कछुआ फोन पर बात करते हुए कहता है........

कछुआ : "अच्छा ठीक है...मैं आ रहा हूँ....अरे गाँव में ही हूँ मैं, मुझे ज्यादा टाइम नहीं लगेगा आने में... हाँ आ रहा हूँ मैं।"

इतना कहकर कछुआ फोन कट कर देता है।

जैसे ही कछुआ फोन रखता है युग फटाक से पूछता है.........

युग : "क्या हुआ कछुए बड़ा परेशान लग रहा है, सब ठीक तो है ना.....?"

कछुआ परेशान होते हुए कहता है........

कछुआ : "यार कुछ ठीक ही तो नहीं है, दादी की तबियत खराब हो गयी है उनको लेकर मुझे हॉस्पिटल जाना पड़ेगा मेंदिपथार।"

युग : "क्या कहा दादी की तबियत खराब हो गयी पर कैसे!"

कछुआ : "पता नहीं यार माँ बता रही है कि रात से ही ठीक नहीं थी

अब ज्यादा खराब हो गयी है, तुझे तो पता ही है दादी की हालत नाजुक है कभी भी अलविदा कह सकती है।"

युग : "अच्छा ठीक है तू ज्यादा परेशान मत हो और ज्यादा कुछ सोच मत, सब ठीक हो जाऐगा, मेरी कुछ जरूरत पड़े तो बता देना अभी तू दादी को हॉस्पिटल लेकर जा जल्दी से जल्दी।"

कछुआ : "हाँ मैं निकलता हूँ।" इतना कहकर कछुआ अपने घर जाने के लिए वहाँ से निकल जाता है।

कछुए के जाने के बाद युग अकेले ही किशनोई नदी पार करने लग जाता है। नदी के पास तीन-चार लोग थे जो नदी पार कर रहे थे। युग ने अभी नदी में अपना पहला कदम ही रखा था कि तभी उसे पीछे से एक लड़की की आवाज सुनाई देती है..........

लड़की : "युग बाबू.... अरे ओ युग बाबू।"

युग लड़की की आवाज सुनकर जहाँ पर था वहीं पर रूक जाता है, उसे वह आवाज जानी पहचानी लगती है।

युग बड़बड़ाने लग जाता है..........

युग : "ये आवाज तो कहीं सुनी-सुनी लग रही है...अरे हाँ ये आवाज तो यामिनी की है।"

इतना कहकर युग पीछे मुड़ जाता है, जब वो पीछे मुड़ता है तो देखता है कि नदी के किनारे पर ही कुछ दूरी पर यामिनी खड़ी हुई थी।


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जिसने अपने दोनो हाथ में महसीर मछली पकड़ी हुई थी, जो उसके हाथ की कोहनी तक आ रही थी। वहीं पर उसने मछली

की दुकान लगाई हुई थी जिसमे बहुत सारी बड़ी-बड़ी ताजा मछली रखी हुई थी जिसे वो बेच रही थी।

यामिनी युग को अपने हाथ से इशारा करते हुए अपने पास बुलाते हुए कहती है...........

यामिनी : "अरे ओ युग बाबू जरा यहाँ पर तो आईए,

कहाँ जा रहे है आप, हमसे बिना मिले ही चले जाएगे क्या।"

युग यामिनी की आवाज सुनकर अपने कदम रोक ही नहीं पाता और बिना कुछ सोचे समझे अपने कदम यामिनी के पास बढ़ाने लग जाता है, ऐसा लग रहा था जैसे यामिनी की आवाज उसे उसकी ओर खींच रही थी।

युग यामिनी के पास जाकर उससे हैरानी के साथ पूछता है...........

युग : "यामिनी तुम यहाँ पर.....?"

यामिनी हँसते हुए कहती है..........

यामिनी : "ये मेरा ही तो बसेरा है युग बाबू, मैं यहाँ पर नही रहूँगी तो कहाँ पर रहूँगी ।"

युग अपने सिर पर हाथ रखते हुए कहता है.......

युग : "अरे हाँ मैं तो भूल ही गया था, उसी दिन तो बताया था तुमने कि तुम रौंगकामुचा घाट पर रहती हो।"

यामिनी युग की आँखो में देखते हुए कहती है......



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यामिनी : "ऐसे मत भूलिये युग बाबू आप हमें, हम कोई मामूली लड़की नहीं है जिसे आप यूँ ही भूल जाए, हम तो वो है जिसे आप जन्मो जन्मों तक

याद रखेंगे।"

युग : "क्या कहा तुमने....?"

यामिनी : "कुछ नही, कुछ नहीं।"

यामिनी युग को मछली दिखाते हुए कहती है........

यामिनी : "ये लीजिए युग बाबू मछली खाईए, अभी-अभी भूंजी है हमने " यामिनी की मछली की दुकान के पास ही एक सिगढ़ी जल रही थी जिसमे यामिनी ने वो दोनो मछली को भूँजा था। उसी सिगढ़ी के अंदर अभी भी दो तीन मछलियाँ भूंजने रखी हुई थी

युग मना करते हुए कहता है........

युग : "नहीं, नहीं मुझे नहीं खाना।"

यामिनी : "क्यों आपको भूख नहीं लगी, आपने सुबह से कुछ नहीं खाया है ना युग बाबू"

यामिनी की बात सुनकर युग हक्का-बक्का रह जाता है

उसके समझ ही नहीं आ रहा था कि यामिनी को कैसे पता था कि उसने सुबह से कुछ नहीं खाया था।

युग यामिनी पर शक करते हुए पूछता है......

युग : "तुम्हे कैसे पता कि मैंने सुबह से कुछ नहीं खाया है......?"

यामिनी हँसते हुए कहती है.........

यामिनी : "हा...हा....हा अरे बाबू ये आपका जो चेहरा

पीला पड़ रहा है ना उससे कोई भी बता देगा कि आपने सुबह से कुछ नहीं खाया है, जरा चेहरा देखिए अपना कितना सिकुड़ गया है।"

युग सोचने लग जाता है कि वह भूंजी हुई मछली खाए या नहीं। युग कुछ फैसला कर पाता उससे पहले ही यामिनी उसे टोकते हुए कहती है.........

यामिनी : "अरे बाबू ज्यादा सोचिए मत, मैंने इसमे

कोई मोहिनी नहीं मिलाईए है; यामिनी को किसी को वश में करने के लिए मोहिनी देने की जरूरत नहीं पड़ती, उसका रूपरंग ही काफी है।"

युग फिर सोचने लग जाता है..........

युग : "( मन मै ) ये यामिनी को मोहिनी देने

के बारे में कैसे पता, यह वही सब बाते क्यों बोल रही है जो ग्रेव्यार्ड कोठी में हुई है?"

यामिनी युग को टोकते हुए कहती है.......

यामिनी : "बाबू आप फिर सोच में डूब गये, आप ना बड़े सोचते है, इसांन को ज्यादा नहीं सोचना

चाहिए वरना उसके बाल पक जाते है।"

इतना कहकर यामिनी युग के हाथो में एक मछली पकड़ा देती है और कहती है.......

यामिनी : "ये लीजिए पकड़िये इसे वरना ठंडी हो

जाएगी, भूंजी मछली गर्मा-गर्म ही अच्छी लगती है वरना इसका स्वाद नहीं आता है।"

युग वह मछली पकड़ लेता है और वहीं पर जूट की रस्सी की एक कुर्सी बनी हुई थी जिसके ऊपर वो बैठ जाता है। युग जैसे ही मछली का पहला कौर खाता है, उसके टेस्ट में खो जाता है। उसने आज तक इतनी टेस्टी मछली इससे पहले कभी नहीं खाई थी।

युग मछली का अगला कौर खाते हुए कहता है.......

युग : "ये मछली तो बहुत टेस्टी है, मसाले न डले होने के बावजूद इसका स्वाद लाजवाब है।"

यामिनी अपनी आँखो से इशारा करते हुए कहती है - यामिनी : "टेस्टी क्यों नहीं होगी युग बाबू मैंने इतने प्यार से जो भूंजी है वो भी सिर्फ आपके लिए।"

युग : "क्या कहा तुमने!"

यामिनी बात को बदलते हुए कहती है.......

युग : "कुछ नहीं युग जी, आप मछली खाईए ना।"

इतना कहकर सिगढ़ी में भूंज रही मछली को यामिनी पलटने लग जाती है। युग वापस से मछली खाना शुरू कर देता है। युग मछली खा ही रहा था कि मछली खाते-खाते उसकी नज़र यामिनी के जुड़े में लगे कमल के फूल पर पड़ती है। जब वो उस कमल के फूल को देखता है तो उसे याद आता है कि उस रात

जब उसने यामिनी के जुड़े में लगे कमल के फूल की खुश्बू सूँघी थी तो उसके बाद उसके साथ क्या हुआ था उसे कुछ याद नहीं था।

युग बौखलाहट के साथ कहता है.........

युग : "यामिनी उस रात क्या हुआ था.....?"

यामिनी अंजान बनते हुए कहती है.........

यामिनी : "आप किस रात कीबात कर रहे है युग बाबू....?"

युग : "अरे वही रात जो तुमने और मैंने साथ में गुजारी थी।"

यामिनी शर्माते हुए कहती है........


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यामिनी : "ये कैसी बाते कर रहे है युग बाबू आप, हमने कहाँ आपके साथ कोई सी रात बितायी थी।"

युग : "अरे तुम भूल गयी, उस रात तुमने मुझे किशनोई नदी पार करवाई थी जब नदी ऊफान में थी, उसमे बहुत पानी भर गया था।"

यामिनी : "अच्छा तो ये बोलिए ना नदी पार करवाई थी, आप ये क्यों बोल रहे है कि रात गुजारी थी, आपको रात गुजारने का मतलब नहीं पता क्या; अच्छा हुआ यहाँ आस-पास कोई है नहीं वरना

कोई सुन लेता तो आपको नहीं पता मेरी कितनी बदनामी होती, आपका तो कुछ नहीं जाता क्योंकि आप तो एक लड़के है और शहर से आए है, सारे ताने जली-कुटी तो मुझे ही सुननी पड़ेगी क्योंकि मैं एक लड़की हूँ।"

युग चिढ़ते हुए कहता है...........

युग : "यामिनी तुम ना अब छोटी सी बात का बतंगड़ मत बनाओ और ये बताओ उस रात क्या हुआ था, जब मैंने कमल के फूल की खुश्बू सूँघी थी, उसके बाद से ही मुझे कुछ याद नहीं है।"

यामिनी युग के सवाल का जवाब देते हुए कहती है.....

यामिनी : "युग बाबू उस रात ना कमल के फूल की खुश्बू सूँघने के बाद आप ना बेहोश हो गये थे, मैं तो बहुत घबरा गयी थी समझ ही नहीं आ रहा था क्या करूँ फिर याद आया कि आपने बताया था कि आप

ग्रेव्यार्ड कोठी में रहते है, मैंने सोचा वहीं पर ले जाना ठीक होगा मैंने बड़ी मुश्किल से हिम्मत करके आपको जैसे-तैसे उठाया और ग्रेव्यार्ड कोठी के पास दरवाजे पर ले जाकर छोड़ दिया।"

युग बिचकते हुए कहता है..........

युग : "क्या कहा दरवाजे पर ले जाकर छोड़ दिया पर क्यों, तुम मुझे कोठी के अंदर क्यों नहीं ले गयी....?"

यामिनी : "अरे युग बाबू कैसी बाते कर रहे है आप, हमे आप पर भरोसा है आपके दोस्तो पर नहीं; क्या पता कब किसकी नियत बिगड़ जाए, जब हम आपको लेकर दरवाजे के पास पहुँचे थे ना

तो बाहर तक आपके दोस्तो की आवाज सुनाई दे रही थी, वो किसी कार्यक्रम को लेकर बात कर रहे थे, हम तो समझ गये थे कि वो किस कार्यक्रम की बात कर रहे है इसलिए हमने दरवाजा खटखटाया और वहाँ से चलते बने, वैसे ही शराब पीकर तो इंसान अपना आपा खो ही देता है।"

युग को कुछ हद तक यामिनी की सारी बाते बिल्कुल ठीक लग रही थी पर तभी उसे उसके सीने पर लगे नाखून के खरोंच का याद आया और वो फिर बौखलाहट के साथ पूछने लग गया..........

युग : "ये सब तो ठीक है पर ये बताओ तुमने मेरी शर्ट क्यों खोली थी और मेरे सीने पर खरोंच के निशान कैसे थे........?"

यामिनी धीरे से कहती है...........

यामिनी : "युग.....बाबू मैंने ना आपकी शर्ट आपके साथ संभोग करने के लिए खोली थी।"

यामिनी की बात सुनकर युग दंग रह गया था, उसकी आँखे फटी की फटी रह गयी थी। उसके हाथ से मछली का एक टुकड़ा छूट कर जमीन पर गिर जाता है उस वक्त युग का चेहरा देखने लायक था, उसके तोते उड़ गये थे।

युग : ( मन मै ) कही ये यक्षिणी तो नहीं है......?

यामिनी हँसते हुए कहती है.........

यामिनी : "हा.... हा..... हा......युग बाबू मैं ना मजाक कर रही थी, आप तो सच ही समझ बैठे, मैं क्या आपको बिल्ली दिखती हूँ जो आपको नोंचूगी।"

युग : "तो फिर तुम ही बताओ मेरे सीने पर खरोंच के निशान कैसे आए....?"

यामिनी : "आपकी जान बचाने के चक्कर में, उस रात जब आप बेहोश हो गये थे ना तो मेरे समझ नहीं आ रहा था मैं क्या करूँ मुझे लगा कहीं आपको दिल का दौरा तो नहीं पड़ गया इसलिए यहीं सोचकर मैंने आपकी शर्ट की बटने खोल दी और आपका सीना

मलने लग गयी और सीना मलते-मलते ही मेरे नाखून आपने सीने में लग गये, अब क्या करू लड़की हूँ ना तो नाखनू तो लम्बे होंगे ही, लम्बे नाखनू का बड़ा शौक है मुझे । "

युग के कुछ समझ नहीं आ रहा था वो क्या बोले, काफी हद तक यामिनी ने उसे उसकी बातो पर यकिन करने के लिए मजबूर कर दिया था। युग मछली खा ही रहा था कि तभी वो खाँसने लग जाता है। यामिनी के पास ही एक सुराही रखी हुई थी वो उसका पानी एक मिट्टी की गिलास में निकालती है और युग को देते हुए

कहती है............

यामिनी : "ये लीजिए युग बाबू पानी पी लीजिए।"

युग पानी पीने लग जाता है। युग पानी पी ही रहा था कि तभी उसे पानी देखकर याद आता है कि कल रात में यामिनी उसे कुँए के अंदर दिखी थी, उसका मन करता है वो यामिनी से पूछे क्या वो रात में कुँए के पास थी पर अगले ही पल वो अपने मन को

मार देता है, सोचता है नहीं वो मेरा वहम ही होगा भला यामिनी कुँए के अंदर कैसे हो सकती है।

कुछ ही देर में युग ने मछली खाकर खत्म कर ली थी और वो वहाँ से जाने के लिए तैयार हो गया था। युग अभी कुर्सी पर से उठा ही था कि तभी यामिनी उसे टोकते हुए कहती है.........

यामिनी : "अच्छा तो जा रहे है आप युग बाबू।"

युग : "हाँ"

यामिनी : "तो एक काम कीजिए ना, अपने दोस्तो के लिए भी मछली लेकर जाइए ना, वो भी तो बेचारे सुबह से भूखे है।"

युग अपनी आँखे बड़ी करते हुए कहता है.......

युग : "तुम्हे कैसे पता कि मेरे दोस्त मेरी ग्रेर्व्याड कोठी में है?"

यामिनी : "अरे युग बाबू, अब आप बारह साल बाद यहाँ पर आए है तो जाहिर सी बात है अपने दोस्तो के साथ ही ज्यादा वक्त बिता रहे होंगे ना और वैसे भी कौन होगा जो अकेले उस ग्रेव्यार्ड कोठी में रहना चाहेगा।"

युग फिर हक्का-बक्का रह जाता है। युग कुछ कह पाता उससे पहले ही यामिनी बोल पड़ती है......

यामिनी : "अब आप यही सोच रहे है ना कि मुझे कैसे पता कि आप बारह साल बाद यहाँ पर आए है,

तो ये बात मुझे क्या रौंगकामुचा और बंगलामुडा गाँव के बच्चे-बच्चे को पता है कि ग्रेव्यार्ड कोठी में जो लेखक बाबू रहते थे उनका बेटा आया है और उसने कोठी को फिर से खोल दिया है।"

इतना कहकर यामिनी गर्मा-गर्म तीन चार मछलियाँ सिगड़ी में से निकालती है उसे पत्तो में लपेटकर एक पॉलिथीन के अंदर भरकर युग को दे देती है।

युग अभी भी किसी सोच में डूबा हुआ था।

यामिनी युग को हाथो से इशारा करते हुए कहती है.....

यामिनी : "अरे बाबू फिर सोच में डूब गये, आप ना बहुत सोचते है, अब ओ ज्यादा मत सोचिये और इन मछली के दो सौ रूपए हुए है फटा फट दे दीजिए।"

युग अपने पर्स में से पैसे निकालता है और यामिनी को दे देता है। युग मछली लेकर वहाँ से चले जाता है।

इस तरफ ग्रेव्यार्ड कोठी के अंदर कायर को होश आ गया था और जब से उसे होश आया था वो अमोदिता का नाम ही बड़बड़ाए जा रहा था। अभिमन्यु उसे समझा-समझा कर थक गया था कि वो आमोदिता का नाम ना ले पर वो कुछ समझ ही नहीं रहा था।

कायर अमोदिता का नाम जपते हुए कहता है......

कायर : "कहाँ है ....कहाँ पर है मेरी अमोदिता.... वो अभी यहीं पर तो थी, कहाँ पर चले गयी?"

अभिमन्यु उसे समझाते हुए कहता है.......

अभी : "यार कायर ये तू क्या बकवास कर रहा है, अमोदिता तेरी कैसे हो सकती है, तेरी तो बिन्दू है ना भूल गया तू बिन्दू से प्यार करता है तेरी बिन्दू।"

कायर : "बिन्दू नहीं अमोदिता, मैं अमोदिता से प्यार करता हूँ।"

अभी : "अरे मेरे दोस्त तू अमोदिता से नहीं बिन्दू से प्यार करता है और याद कर बचपन के दिन, बचपन में अमोदिता तो युग पर लाईन मारती है ना, बस युग ही उसे भाव नहीं देता था, तो फिर तू ही बता अमोदिता तेरी कैसे हो सकती है।"

अभि ने इतना कहा ही था कि तभी कायर का फोन

बजने लग जाता है........

"आमी झे तोमार.......

शुधु जे तोमार.........

मेरी चाहतें तो फिजा में बहेंगी जिंदा रहेंगी होके फना ..."

रिंगटोन सुनकर ही अभिमन्यु समझ जाता है कि जरूर बिन्दू का ही फोन होगा, वो सोचने लग जाता है कि फोन कैसे उठाए यदि बिन्दू ने उससे कायर के बारे में पूछ लिया तो वो क्या जवाब देगा......?






अब आगे..............



☆ Ch : Totka todna ☆



युग हैरानी के साथ पूछता है.........

युग : " क्या हुआ, ये तेरे चेहरे पर बारह क्यों बज रहे है........?

अभी हिचकिचाते हुये कहता है........

अभी : " यार..... यार गड़बड हो गयी'

युग : "गड़बड़ हो गयी! कैसी गड़बड़.....?"

युग : "यार मुझसे ना एक बहुत बड़ी गलती हो गयी, मुझे लग रहा था कि अमावस्या तीन दिन बाद है पर वो तीन दिन बाद नहीं बल्कि कल है.........




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Update 24





☆ Ch : Yamini ki baate ☆




अब तक.............



यामिनी : "आपका इंतजार।"

युग : "मेरा इंतजार मतलब, और तुम कुँए के अंदर कैसे गिरी....?".........

रजनी : "देखा मेरे काले जादू का कमाल; अब तू देर मत कर जल्दी जा और देखकर आ युग को किस चीज की जरूरत है और सुन उसे जो भी चाहिए हो दे देना।".........

जब अमोदिता की नज़र उन कपड़ो पर पड़ती है तो वो

देखती है कि वो वहीं कपड़े थे जिसमें से उसने युग का बाल निकाला था, वो समझ जाती है कि वो कपड़े कायर ने पहने थे जिस कारण युग की जगह कायर का बाल उसके हाथ लग गया था और टोटका कायर पर हो गया था।........




अब आगे..........




रजनी अमोदिता के सवाल का कुछ जवाब नहीं देती है। वह चुप चाप खड़ी हुई थी। उसको देखकर ऐसा लग रहा था जैसे वो किसी गहरी सोच में डूब गयी थी।

अमोदिता रजनी को हिलाते हुए कहती है.........

आमोदिता : "माँ क्या सोच रही हो तुम, बताओ ना मोम टोटका कैसे तोड़ा जाता है?"

रजनी : "टोटका कैसे तोड़ा जाता है वो मैं तुझे रात में बताऊँगी,आज रात तीन बजे तैयार रहना, और एक बात याद रखना जितना ज्यादा आसान होता है टोटका करना उससे कहीं ज्यादा कठिन होता है टोटका तोड़ना।"

रजनी की बात सुनकर अमोदिता घबराने लग जाती है और डरते हुए कहती है.........

आमोदिता : "माँ तुम मुझे डरा रही हो ना?"

रजनी अमोदिता की आँखो में देखते हुए कहती है.......



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रजनी : "मैं क्या तुझे कोई भूतनी लगती हूँ जो तुझे डराऊँगी, मैं तो बस तुझे सच्चाई से वाकिफ करवा रही हूँ, समझी।"

इस तरफ युग और कछुआ रौंगकामुचा गाँव पहुँच गये थे।

अमोदिता ने जो मेडिसीन कायर के लिए बताई थी वो उन दोनों ने ले ली थी। वो लोग वापस से बंगलामुडा गाँव जा रहे थे।

वह दोनो अभी रौंगकामुचा घाट पर पहुँचे ही थे कि तभी कछुआ का फोन बजने लग जाता है।

कछुआ अपना फोन उठाते हुए कहता है.........

कछुआ : "हैलो......क्या...अरे कैसे....?"

जैसे-जैसे कछुआ बात करते जा रहा था उसके फेश के

एक्सप्रेसन चेंज होते जा रहे थे। उसकी चेहरे की खुशी अचानक गायब हो गयी थी और गम में तब्दिल हो गयी थी।"

कछुआ फोन पर बात करते हुए कहता है........

कछुआ : "अच्छा ठीक है...मैं आ रहा हूँ....अरे गाँव में ही हूँ मैं, मुझे ज्यादा टाइम नहीं लगेगा आने में... हाँ आ रहा हूँ मैं।"

इतना कहकर कछुआ फोन कट कर देता है।

जैसे ही कछुआ फोन रखता है युग फटाक से पूछता है.........

युग : "क्या हुआ कछुए बड़ा परेशान लग रहा है, सब ठीक तो है ना.....?"

कछुआ परेशान होते हुए कहता है........

कछुआ : "यार कुछ ठीक ही तो नहीं है, दादी की तबियत खराब हो गयी है उनको लेकर मुझे हॉस्पिटल जाना पड़ेगा मेंदिपथार।"

युग : "क्या कहा दादी की तबियत खराब हो गयी पर कैसे!"

कछुआ : "पता नहीं यार माँ बता रही है कि रात से ही ठीक नहीं थी

अब ज्यादा खराब हो गयी है, तुझे तो पता ही है दादी की हालत नाजुक है कभी भी अलविदा कह सकती है।"

युग : "अच्छा ठीक है तू ज्यादा परेशान मत हो और ज्यादा कुछ सोच मत, सब ठीक हो जाऐगा, मेरी कुछ जरूरत पड़े तो बता देना अभी तू दादी को हॉस्पिटल लेकर जा जल्दी से जल्दी।"

कछुआ : "हाँ मैं निकलता हूँ।" इतना कहकर कछुआ अपने घर जाने के लिए वहाँ से निकल जाता है।

कछुए के जाने के बाद युग अकेले ही किशनोई नदी पार करने लग जाता है। नदी के पास तीन-चार लोग थे जो नदी पार कर रहे थे। युग ने अभी नदी में अपना पहला कदम ही रखा था कि तभी उसे पीछे से एक लड़की की आवाज सुनाई देती है..........

लड़की : "युग बाबू.... अरे ओ युग बाबू।"

युग लड़की की आवाज सुनकर जहाँ पर था वहीं पर रूक जाता है, उसे वह आवाज जानी पहचानी लगती है।

युग बड़बड़ाने लग जाता है..........

युग : "ये आवाज तो कहीं सुनी-सुनी लग रही है...अरे हाँ ये आवाज तो यामिनी की है।"

इतना कहकर युग पीछे मुड़ जाता है, जब वो पीछे मुड़ता है तो देखता है कि नदी के किनारे पर ही कुछ दूरी पर यामिनी खड़ी हुई थी।


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जिसने अपने दोनो हाथ में महसीर मछली पकड़ी हुई थी, जो उसके हाथ की कोहनी तक आ रही थी। वहीं पर उसने मछली

की दुकान लगाई हुई थी जिसमे बहुत सारी बड़ी-बड़ी ताजा मछली रखी हुई थी जिसे वो बेच रही थी।

यामिनी युग को अपने हाथ से इशारा करते हुए अपने पास बुलाते हुए कहती है...........

यामिनी : "अरे ओ युग बाबू जरा यहाँ पर तो आईए,

कहाँ जा रहे है आप, हमसे बिना मिले ही चले जाएगे क्या।"

युग यामिनी की आवाज सुनकर अपने कदम रोक ही नहीं पाता और बिना कुछ सोचे समझे अपने कदम यामिनी के पास बढ़ाने लग जाता है, ऐसा लग रहा था जैसे यामिनी की आवाज उसे उसकी ओर खींच रही थी।

युग यामिनी के पास जाकर उससे हैरानी के साथ पूछता है...........

युग : "यामिनी तुम यहाँ पर.....?"

यामिनी हँसते हुए कहती है..........

यामिनी : "ये मेरा ही तो बसेरा है युग बाबू, मैं यहाँ पर नही रहूँगी तो कहाँ पर रहूँगी ।"

युग अपने सिर पर हाथ रखते हुए कहता है.......

युग : "अरे हाँ मैं तो भूल ही गया था, उसी दिन तो बताया था तुमने कि तुम रौंगकामुचा घाट पर रहती हो।"

यामिनी युग की आँखो में देखते हुए कहती है......



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यामिनी : "ऐसे मत भूलिये युग बाबू आप हमें, हम कोई मामूली लड़की नहीं है जिसे आप यूँ ही भूल जाए, हम तो वो है जिसे आप जन्मो जन्मों तक

याद रखेंगे।"

युग : "क्या कहा तुमने....?"

यामिनी : "कुछ नही, कुछ नहीं।"

यामिनी युग को मछली दिखाते हुए कहती है........

यामिनी : "ये लीजिए युग बाबू मछली खाईए, अभी-अभी भूंजी है हमने " यामिनी की मछली की दुकान के पास ही एक सिगढ़ी जल रही थी जिसमे यामिनी ने वो दोनो मछली को भूँजा था। उसी सिगढ़ी के अंदर अभी भी दो तीन मछलियाँ भूंजने रखी हुई थी

युग मना करते हुए कहता है........

युग : "नहीं, नहीं मुझे नहीं खाना।"

यामिनी : "क्यों आपको भूख नहीं लगी, आपने सुबह से कुछ नहीं खाया है ना युग बाबू"

यामिनी की बात सुनकर युग हक्का-बक्का रह जाता है

उसके समझ ही नहीं आ रहा था कि यामिनी को कैसे पता था कि उसने सुबह से कुछ नहीं खाया था।

युग यामिनी पर शक करते हुए पूछता है......

युग : "तुम्हे कैसे पता कि मैंने सुबह से कुछ नहीं खाया है......?"

यामिनी हँसते हुए कहती है.........

यामिनी : "हा...हा....हा अरे बाबू ये आपका जो चेहरा

पीला पड़ रहा है ना उससे कोई भी बता देगा कि आपने सुबह से कुछ नहीं खाया है, जरा चेहरा देखिए अपना कितना सिकुड़ गया है।"

युग सोचने लग जाता है कि वह भूंजी हुई मछली खाए या नहीं। युग कुछ फैसला कर पाता उससे पहले ही यामिनी उसे टोकते हुए कहती है.........

यामिनी : "अरे बाबू ज्यादा सोचिए मत, मैंने इसमे

कोई मोहिनी नहीं मिलाईए है; यामिनी को किसी को वश में करने के लिए मोहिनी देने की जरूरत नहीं पड़ती, उसका रूपरंग ही काफी है।"

युग फिर सोचने लग जाता है..........

युग : "( मन मै ) ये यामिनी को मोहिनी देने

के बारे में कैसे पता, यह वही सब बाते क्यों बोल रही है जो ग्रेव्यार्ड कोठी में हुई है?"

यामिनी युग को टोकते हुए कहती है.......

यामिनी : "बाबू आप फिर सोच में डूब गये, आप ना बड़े सोचते है, इसांन को ज्यादा नहीं सोचना

चाहिए वरना उसके बाल पक जाते है।"

इतना कहकर यामिनी युग के हाथो में एक मछली पकड़ा देती है और कहती है.......

यामिनी : "ये लीजिए पकड़िये इसे वरना ठंडी हो

जाएगी, भूंजी मछली गर्मा-गर्म ही अच्छी लगती है वरना इसका स्वाद नहीं आता है।"

युग वह मछली पकड़ लेता है और वहीं पर जूट की रस्सी की एक कुर्सी बनी हुई थी जिसके ऊपर वो बैठ जाता है। युग जैसे ही मछली का पहला कौर खाता है, उसके टेस्ट में खो जाता है। उसने आज तक इतनी टेस्टी मछली इससे पहले कभी नहीं खाई थी।

युग मछली का अगला कौर खाते हुए कहता है.......

युग : "ये मछली तो बहुत टेस्टी है, मसाले न डले होने के बावजूद इसका स्वाद लाजवाब है।"

यामिनी अपनी आँखो से इशारा करते हुए कहती है - यामिनी : "टेस्टी क्यों नहीं होगी युग बाबू मैंने इतने प्यार से जो भूंजी है वो भी सिर्फ आपके लिए।"

युग : "क्या कहा तुमने!"

यामिनी बात को बदलते हुए कहती है.......

युग : "कुछ नहीं युग जी, आप मछली खाईए ना।"

इतना कहकर सिगढ़ी में भूंज रही मछली को यामिनी पलटने लग जाती है। युग वापस से मछली खाना शुरू कर देता है। युग मछली खा ही रहा था कि मछली खाते-खाते उसकी नज़र यामिनी के जुड़े में लगे कमल के फूल पर पड़ती है। जब वो उस कमल के फूल को देखता है तो उसे याद आता है कि उस रात

जब उसने यामिनी के जुड़े में लगे कमल के फूल की खुश्बू सूँघी थी तो उसके बाद उसके साथ क्या हुआ था उसे कुछ याद नहीं था।

युग बौखलाहट के साथ कहता है.........

युग : "यामिनी उस रात क्या हुआ था.....?"

यामिनी अंजान बनते हुए कहती है.........

यामिनी : "आप किस रात कीबात कर रहे है युग बाबू....?"

युग : "अरे वही रात जो तुमने और मैंने साथ में गुजारी थी।"

यामिनी शर्माते हुए कहती है........


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यामिनी : "ये कैसी बाते कर रहे है युग बाबू आप, हमने कहाँ आपके साथ कोई सी रात बितायी थी।"

युग : "अरे तुम भूल गयी, उस रात तुमने मुझे किशनोई नदी पार करवाई थी जब नदी ऊफान में थी, उसमे बहुत पानी भर गया था।"

यामिनी : "अच्छा तो ये बोलिए ना नदी पार करवाई थी, आप ये क्यों बोल रहे है कि रात गुजारी थी, आपको रात गुजारने का मतलब नहीं पता क्या; अच्छा हुआ यहाँ आस-पास कोई है नहीं वरना

कोई सुन लेता तो आपको नहीं पता मेरी कितनी बदनामी होती, आपका तो कुछ नहीं जाता क्योंकि आप तो एक लड़के है और शहर से आए है, सारे ताने जली-कुटी तो मुझे ही सुननी पड़ेगी क्योंकि मैं एक लड़की हूँ।"

युग चिढ़ते हुए कहता है...........

युग : "यामिनी तुम ना अब छोटी सी बात का बतंगड़ मत बनाओ और ये बताओ उस रात क्या हुआ था, जब मैंने कमल के फूल की खुश्बू सूँघी थी, उसके बाद से ही मुझे कुछ याद नहीं है।"

यामिनी युग के सवाल का जवाब देते हुए कहती है.....

यामिनी : "युग बाबू उस रात ना कमल के फूल की खुश्बू सूँघने के बाद आप ना बेहोश हो गये थे, मैं तो बहुत घबरा गयी थी समझ ही नहीं आ रहा था क्या करूँ फिर याद आया कि आपने बताया था कि आप

ग्रेव्यार्ड कोठी में रहते है, मैंने सोचा वहीं पर ले जाना ठीक होगा मैंने बड़ी मुश्किल से हिम्मत करके आपको जैसे-तैसे उठाया और ग्रेव्यार्ड कोठी के पास दरवाजे पर ले जाकर छोड़ दिया।"

युग बिचकते हुए कहता है..........

युग : "क्या कहा दरवाजे पर ले जाकर छोड़ दिया पर क्यों, तुम मुझे कोठी के अंदर क्यों नहीं ले गयी....?"

यामिनी : "अरे युग बाबू कैसी बाते कर रहे है आप, हमे आप पर भरोसा है आपके दोस्तो पर नहीं; क्या पता कब किसकी नियत बिगड़ जाए, जब हम आपको लेकर दरवाजे के पास पहुँचे थे ना

तो बाहर तक आपके दोस्तो की आवाज सुनाई दे रही थी, वो किसी कार्यक्रम को लेकर बात कर रहे थे, हम तो समझ गये थे कि वो किस कार्यक्रम की बात कर रहे है इसलिए हमने दरवाजा खटखटाया और वहाँ से चलते बने, वैसे ही शराब पीकर तो इंसान अपना आपा खो ही देता है।"

युग को कुछ हद तक यामिनी की सारी बाते बिल्कुल ठीक लग रही थी पर तभी उसे उसके सीने पर लगे नाखून के खरोंच का याद आया और वो फिर बौखलाहट के साथ पूछने लग गया..........

युग : "ये सब तो ठीक है पर ये बताओ तुमने मेरी शर्ट क्यों खोली थी और मेरे सीने पर खरोंच के निशान कैसे थे........?"

यामिनी धीरे से कहती है...........

यामिनी : "युग.....बाबू मैंने ना आपकी शर्ट आपके साथ संभोग करने के लिए खोली थी।"

यामिनी की बात सुनकर युग दंग रह गया था, उसकी आँखे फटी की फटी रह गयी थी। उसके हाथ से मछली का एक टुकड़ा छूट कर जमीन पर गिर जाता है उस वक्त युग का चेहरा देखने लायक था, उसके तोते उड़ गये थे।

युग : ( मन मै ) कही ये यक्षिणी तो नहीं है......?

यामिनी हँसते हुए कहती है.........

यामिनी : "हा.... हा..... हा......युग बाबू मैं ना मजाक कर रही थी, आप तो सच ही समझ बैठे, मैं क्या आपको बिल्ली दिखती हूँ जो आपको नोंचूगी।"

युग : "तो फिर तुम ही बताओ मेरे सीने पर खरोंच के निशान कैसे आए....?"

यामिनी : "आपकी जान बचाने के चक्कर में, उस रात जब आप बेहोश हो गये थे ना तो मेरे समझ नहीं आ रहा था मैं क्या करूँ मुझे लगा कहीं आपको दिल का दौरा तो नहीं पड़ गया इसलिए यहीं सोचकर मैंने आपकी शर्ट की बटने खोल दी और आपका सीना

मलने लग गयी और सीना मलते-मलते ही मेरे नाखून आपने सीने में लग गये, अब क्या करू लड़की हूँ ना तो नाखनू तो लम्बे होंगे ही, लम्बे नाखनू का बड़ा शौक है मुझे । "

युग के कुछ समझ नहीं आ रहा था वो क्या बोले, काफी हद तक यामिनी ने उसे उसकी बातो पर यकिन करने के लिए मजबूर कर दिया था। युग मछली खा ही रहा था कि तभी वो खाँसने लग जाता है। यामिनी के पास ही एक सुराही रखी हुई थी वो उसका पानी एक मिट्टी की गिलास में निकालती है और युग को देते हुए

कहती है............

यामिनी : "ये लीजिए युग बाबू पानी पी लीजिए।"

युग पानी पीने लग जाता है। युग पानी पी ही रहा था कि तभी उसे पानी देखकर याद आता है कि कल रात में यामिनी उसे कुँए के अंदर दिखी थी, उसका मन करता है वो यामिनी से पूछे क्या वो रात में कुँए के पास थी पर अगले ही पल वो अपने मन को

मार देता है, सोचता है नहीं वो मेरा वहम ही होगा भला यामिनी कुँए के अंदर कैसे हो सकती है।

कुछ ही देर में युग ने मछली खाकर खत्म कर ली थी और वो वहाँ से जाने के लिए तैयार हो गया था। युग अभी कुर्सी पर से उठा ही था कि तभी यामिनी उसे टोकते हुए कहती है.........

यामिनी : "अच्छा तो जा रहे है आप युग बाबू।"

युग : "हाँ"

यामिनी : "तो एक काम कीजिए ना, अपने दोस्तो के लिए भी मछली लेकर जाइए ना, वो भी तो बेचारे सुबह से भूखे है।"

युग अपनी आँखे बड़ी करते हुए कहता है.......

युग : "तुम्हे कैसे पता कि मेरे दोस्त मेरी ग्रेर्व्याड कोठी में है?"

यामिनी : "अरे युग बाबू, अब आप बारह साल बाद यहाँ पर आए है तो जाहिर सी बात है अपने दोस्तो के साथ ही ज्यादा वक्त बिता रहे होंगे ना और वैसे भी कौन होगा जो अकेले उस ग्रेव्यार्ड कोठी में रहना चाहेगा।"

युग फिर हक्का-बक्का रह जाता है। युग कुछ कह पाता उससे पहले ही यामिनी बोल पड़ती है......

यामिनी : "अब आप यही सोच रहे है ना कि मुझे कैसे पता कि आप बारह साल बाद यहाँ पर आए है,

तो ये बात मुझे क्या रौंगकामुचा और बंगलामुडा गाँव के बच्चे-बच्चे को पता है कि ग्रेव्यार्ड कोठी में जो लेखक बाबू रहते थे उनका बेटा आया है और उसने कोठी को फिर से खोल दिया है।"

इतना कहकर यामिनी गर्मा-गर्म तीन चार मछलियाँ सिगड़ी में से निकालती है उसे पत्तो में लपेटकर एक पॉलिथीन के अंदर भरकर युग को दे देती है।

युग अभी भी किसी सोच में डूबा हुआ था।

यामिनी युग को हाथो से इशारा करते हुए कहती है.....

यामिनी : "अरे बाबू फिर सोच में डूब गये, आप ना बहुत सोचते है, अब ओ ज्यादा मत सोचिये और इन मछली के दो सौ रूपए हुए है फटा फट दे दीजिए।"

युग अपने पर्स में से पैसे निकालता है और यामिनी को दे देता है। युग मछली लेकर वहाँ से चले जाता है।

इस तरफ ग्रेव्यार्ड कोठी के अंदर कायर को होश आ गया था और जब से उसे होश आया था वो अमोदिता का नाम ही बड़बड़ाए जा रहा था। अभिमन्यु उसे समझा-समझा कर थक गया था कि वो आमोदिता का नाम ना ले पर वो कुछ समझ ही नहीं रहा था।

कायर अमोदिता का नाम जपते हुए कहता है......

कायर : "कहाँ है ....कहाँ पर है मेरी अमोदिता.... वो अभी यहीं पर तो थी, कहाँ पर चले गयी?"

अभिमन्यु उसे समझाते हुए कहता है.......

अभी : "यार कायर ये तू क्या बकवास कर रहा है, अमोदिता तेरी कैसे हो सकती है, तेरी तो बिन्दू है ना भूल गया तू बिन्दू से प्यार करता है तेरी बिन्दू।"

कायर : "बिन्दू नहीं अमोदिता, मैं अमोदिता से प्यार करता हूँ।"

अभी : "अरे मेरे दोस्त तू अमोदिता से नहीं बिन्दू से प्यार करता है और याद कर बचपन के दिन, बचपन में अमोदिता तो युग पर लाईन मारती है ना, बस युग ही उसे भाव नहीं देता था, तो फिर तू ही बता अमोदिता तेरी कैसे हो सकती है।"

अभि ने इतना कहा ही था कि तभी कायर का फोन

बजने लग जाता है........

"आमी झे तोमार.......

शुधु जे तोमार.........

मेरी चाहतें तो फिजा में बहेंगी जिंदा रहेंगी होके फना ..."

रिंगटोन सुनकर ही अभिमन्यु समझ जाता है कि जरूर बिन्दू का ही फोन होगा, वो सोचने लग जाता है कि फोन कैसे उठाए यदि बिन्दू ने उससे कायर के बारे में पूछ लिया तो वो क्या जवाब देगा......?






अब आगे..............



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युग हैरानी के साथ पूछता है.........

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अभी : " यार..... यार गड़बड हो गयी'

युग : "गड़बड़ हो गयी! कैसी गड़बड़.....?"

युग : "यार मुझसे ना एक बहुत बड़ी गलती हो गयी, मुझे लग रहा था कि अमावस्या तीन दिन बाद है पर वो तीन दिन बाद नहीं बल्कि कल है.........




4500 words complete...........

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I am Back......... 😎

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Mega UPDATE 25



☆ Ch : Totka todna,Dauging pendulam☆






अब तक.............



युग : "ये आवाज तो कहीं सुनी-सुनी लग रही है...अरे हाँ ये आवाज तो यामिनी की है।"

यामिनी : "अरे बाबू फिर सोच में डूब गये, आप ना बहुत सोचते है, अब ओ ज्यादा मत सोचिये और इन मछली के दो सौ रूपए हुए है फटा फट दे दीजिए।"

रिंगटोन सुनकर ही अभिमन्यु समझ जाता है कि जरूर बिन्दू का ही फोन होगा, वो सोचने लग जाता है कि फोन कैसे उठाए यदि बिन्दू ने उससे कायर के बारे में पूछ लिया तो वो क्या जवाब देगा......?





अब आगे..............




कायर का फोन लगातार बजे जा रहा था और अभि के कुछ समझ नहीं आ रहा था कि वो फोन कैसे उठाए और बिन्दु को क्या जवाब दे। अभि कुछ फैसला कर पाता उससे पहले ही वहाँ पर युग आ जाता है। जब युग कमरे के अंदर घुसता है और देखता है कि कायर का फोन बज रहा है तो वो उसका फोन
उठाते हुए कहता है..........

युग : "यार अभि ये तू क्या कर रहा है, जब से फोन बज रहा है तो उसे उठा क्यों नहीं रहा है ये तेरे हाथ के
पास ही तो रखा हुआ है...?"

इतना कहकर युग फोन उठाने लग जाता है तभी अभि उसे रोकते हुए कहता है.........

अभी : "अरे रूक जा मेरे भाई, फोन मत
उठा।"

अभि युग को रोक पाता उससे पहले ही युग फोन उठा


अभी : "ये क्या किया युग तुने बिन्दु का फोन क्यों उठा लिया, मैं जब से इसलिए नहीं उठा रहा था कि बिन्दु सुबह से दो-तीन बार कॉल कर चुकी है और हर बार वो कायर के बारे में ही पूछती है, मैं बहुत टाल चुका
हूँ पर अब समझ नहीं आता क्या बोलू इसलिए फोन नहीं उठा रहा था।"

युग परेशान होते हुए कहता है........

युग : "अब क्या करूँ यार, फोन तो उठा लिया कुछ ना कुछ तो बोलना पड़ेगा वरना उसको टेंशन हो जाएगी वो समझ जाएगी कुछ ना कुछ गड़बड़ है।"

फोन के अदंर से बिन्दु की आवाज आती है.......

बिंदु : "हैलो कायर तुमी कुछ बोल्बे की ना बोल्बे।" ( हेलो कायर तुम कुछ बोलोगे या नहीं बोलोगे )

युग अभि को फोन देते हुए कहता है.........

युग : "मैं तो बात नहीं कर रहा, यार तू ही कर।"

अभि वापस से युग को फोन थमाते हुए कहता है......

अभी : "ना बाबा ना मैं तो नहीं करने वाला, सुबह से बहुत झूठ बोल चुका हूँ अब और नहीं बोल सकता।"

बिन्दु की फिर फोन के अंदर से आवाज आती है.......

बिंदु : "तुमी कुछी बोल्छे ना केनो।" ( तुम कुछ बोलोगे या नहीं )

युग काँपते हुए मिक ऑन करता है और कहता है......

युग : "हैलो हाँ बिन्दू बोलो।"

फोन के अंदर से हैरानी के साथ बिन्दु की आवाज सुनाई देती
है

बिंदु : "कायर ये तुम्हारी आवाज को क्या हुआ, ये इतनी भारी क्यों लग रही है....?"

युग : "मैं कायर नहीं युग बोल रहा हूँ बिन्दू।"

बिंदु : "अच्छा युग तुम हो, तो फिर कायर कहाँ पर है.....?"

युग : "वो बिन्दु कायर तो वॉशरूम में है।"

बिंदु : "क्या कहा वॉशरूम में! वो आज दिन भर से वॉशरूम में ही है क्या, अभी कुछ देर पहले अभिमन्यु ने फोन उठाया था वो भी यही कह रहा था कि कायर वॉशरूम में है।"

युग सोचने लग जाता है वो क्या जवाब दे तभी वो झट से कहता है.........

युग : "वो क्या है ना रात को उसने कुछ खराब खा लिया था इसलिए उसका पेट खराब हो गया इसलिए सुबह से ही वो वॉशरूम के चक्कर लगा रहा है।"

बिंदु : "अच्छा ऐसा है, तो ठीक है जब वो आए तो उससे मेरी बात कराना।"

युग : "उससे तुम्हे कुछ जरूरी काम था क्या?"

बिंदु : "काम तो नहीं पर कुछ बात करनी थी।"

बिंदु : "अरे वही तो पूछ रहा हूँ बिन्दू क्या बात करनी है...?"

कुछ देर रूककर बिन्दु धीरे से कहती है......

बिंदु : "तुम उसे बताओगे तो नहीं ना...?"

युग : "अरे नहीं बताउँगा तुम बेफ्रिक होकर बोलो।"

बिंदु : "वैसे मुझे कायर से कुछ काम नहीं था बस उसकी याद आ रही थी।"

युग : "क्या कहा याद आ रही थी! ओए होय क्या बात है।"

बिंदु : "हाँ, वो क्या है ना मेरी कायर से रोज किसी ना किसी बहाने से बात होते रहती है पर आज सुबह से ही कुछ बात नहीं हुई तो बहुत
अजीब लग रहा था इसलिए सोचा उससे बात कर लू।"

युग : "पर कायर के सामने तो तुम ऐसा कुछ नहीं करती बल्कि उसके सामने तो तुम उसी बेज्जती करते रहती हो, उसे घास तक नहीं डालती।"

बिंदु : "वो उसकी भलाई के लिए युग, तुमने देखा है ना वो कुछ काम नहीं करता बस दिन भर बैठकर शायरियाँ लिखा करता है, अब उसे कौन समझाए शायरी लिखने से दिल तो भर जाता है पर पेट नहीं भरता, जिन्दगी जीने के लिए कुछ ना कुछ करना ही
पड़ता है, ऐसे लाईफ आगे नहीं बढ़ती।"

युग : "हाँ तुम सही कह रही हो, काश ये चीज मेरे पापा को भी पता होती तो आज मेरी ऐसी हालत नहीं हो रही होती "

बिंदु : "मतलब...?"

युग बात को पलटते हुए कहता है.......

युग : "कुछ नहीं मैं तुम्हारी बात करवाता हूँ कायर से जब वो आता है, अच्छा अब मैं रखता हूँ मुझे कुछ काम है।"

बिंदु : "हाँ ठीक है, जल्दी बात करवाना।"
युग फोन कट कर देता है। जैसे ही युग फोन कट करता है

कायर कि फिर बड़बड़ाने की आवाज सुनाई देती है......

कायर : "अमोदिता... मेरी अमोदिता कहाँ पर है, मेरी अमोदिता मुझे उससे शादी करनी है, बुलाओ मेरी अमोदिता को।"

अभि अपने हाथो से कायर का मुँह बंद करते हुए कहता
है..........

अभी : "चुप हो जा अमोदिता के दीवाने, रूक जा करवा रहा हूँ तेरी अमोदिता से शादी।"

युग : "ये अभी तक ठीक नहीं हुआ क्या....?"

अभी : "तुझे ठीक लग रहा है क्या..?"

युग : "लग तो नहीं रहा, अच्छा हुआ मै मेडिसीन ले आया इसे जल्दी से खिला देते है।"

अभि हिचकिचाते हुए कहता है........

अभी : "या........ यार गड़बड़ हो गयी।"

युग : "गड़बड़ हो गयी! कैसी गड़बड़....?"

अभी : "यार मुझसे ना एक बहुत बड़ी गलती हो गयी, मुझे लग रहा था कि अमावस्या तीन दिन बाद है पर वो तीन दिन बाद नहीं बल्कि कल ही है।"

युग अपना मुँह फाड़ते हुए कहता है.......

युग : "क्या!"

अभी : "हाँ यार मुझे भी अभी पता चला, पता नहीं ये गलती कैसे हो गयी, आज से पहले हर पूर्णिमा और अमावस्या की डेट याद रहती थी पर बस इस बार गलती हो गयी।"

युग : "इसका मतलब हमारे पास सिर्फ आज रात तक का ही वक्त है ये पता लगाने के लिए कि यक्षिणी इसी ग्रेव्यार्ड कोठी में है या नहीं, और यदि है तो किस कमरे में।"

अभी : "हाँ यार।"

युग : "ये तो बड़ी प्रॉबल्म हो गयी, एक तो वैसे ही ये कायर की

ऐसी हालत है और अब यक्षिणी के बारे में भी आज रात को ही पता करना है प्रॉब्लम तो बढ़ते जा रही है यार; अभिमन्यु तू ही बता कैसे पता लगाऐगे यक्षिणी के बारे में......?"

अभी : "जरा सोचने दे यार मुझे, अभी मेरे दिमाग में भी कुछ आईडिया नहीं आ रहा है । "

युग : "सोच ले हमारे पास बस रात तक का ही वक्त है, उससे पहले कुछ ना कुछ तो करना पड़ेगा वरना यदि यक्षिणी ने किसी को अपना शिकार बना लिया तो प्रॉब्लम हो जाएगी।"

अभी : "हाँ मैं सोचता हूँ कुछ, तू फिक्र मत कर।"

इस तरफ हवेली मै काव्या अपने बेड पर पेट के बाल लेती हुयी थी और उसके हाथों मै उसका मोबाइल था और वो किसी के नंबर पर कॉल करने के लिए सोच रही थी वो बार-बार नम्बर को देखती और उसको कॉल करने के लिए कॉल ऑप्शन पर क्लिक करने जाती पर कुछ सोच कर क्लिक नहीं करती.......


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काव्या : ( मन मै ) कॉल करू या ना करू पता नहीं मेरा कॉल उठाएगा भी या नहीं, अगर उठा लिया तो, नहीं नहीं मै उससे कोई बात नहीं करने वाली, वो फिर से वही सब बाते करने लगेगा पता नहीं कब ये लड़का सुधरेगा

काव्या ये ही अपने मन ही मन मै बड़बड़ाते हुये खुद से बात करती है तभी उसे कल की दरिषय याद आने लग जाती है कैसे युग उसे ग्रेवयाद कोठी मै दरवाजे से भीड़ा कर उसकी कमर पर अपना हाथ लगता है और उसकी चूची को घूरते हुये कहता है........


( युग : आप को किया लगता है मै आप के थप्पड़ से डर जाऊंगा कभी नहीं आप की मोम नै जो मेरे साथ किया है मै उसका बदला जरूर लूंगा मै बिना चुदे उन्हें नहीं छोड़ने वाला समझी ना आप

युग : और रही आप की बात तो आप अब बड़ी हो गयी है और आप की भी अब बड़ी बड़ी हो गयी है ऐसा ना हो की माँ से पहले बेटी को छोड़ना पड़े इसलिए मेरे बिच मै मत आना )


कल का दरिषय याद करते हुये काव्या का चहेरा गुस्से मै लाल हो गया था और वो गुस्से मै बड़बड़ाते हुये कहती है..........


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काव्या : बिच मै तो मै आयूंगी ही युग बिच मै आउंगी युग वो मेरी मोम है मेरी मोम तुम भले ही अब उनको अपनी मोम ना मानो मगर मै बिच मै आउंगी अब मै तुमको कल बताती हु काव्या कौन है

रात हो चुकी थी और रात के बारह बज रहे थे, अमोदिता और रजनी तहखाने में बैठी हुई थी। दोनो के सामने ही एक यंत्र बना हुआ था जिसके अंदर एक गोला था और उसके अंदर स्टार।

स्टार के तीनो कोनो पर एक-एक आटे के दीये बने हुए रखे हुए थे। जो जले हुए नहीं थे। रजनी और अमोदिता वहाँ पर करीब एक घंटे से बैठी हुई थी। जब से रजनी वहाँ पर आयी थी उसने

कुछ नहीं बोला था, बस वो अपनी तंत्र मंत्र यंत्र किताब के पेज पलटाये जा रही थी। एक गहरा सन्नाटा तहखाने के अदंर छाया हुआ था।

अमोदिता सन्नाटे को तोड़ते हुए कहती है........

आमोदिता : "मोम आप कुछ बोलोगी भी या नहीं, या फिर रात भर बस इस किताब के पेज पलटाते रहोगी......?"

रजनी अमोदिता की बात का कुछ जवाब नहीं देती है, वो अभी भी बस किताब के पेज पलटाए जा रही थी।

अमोदिता फिर रजनी पर दबाव बनाते हुए कहती है......

आमोदिता : "मोम मैं कुछ पूछ रही हूँ तुमसे, बताओ ना कैसे तोड़ते है वशीकरण टोटका....?"

रजनी गुस्से से अमोदिता से कहती है..........

रजनी : "चूतिया की बच्ची तू कुछ देर चुप

बैठेगी, एक तो एक काम ढंग से नहीं करती ऊपर से चुप भी बैठ नहीं सकती।"

रजनी का गुस्सा देखकर अमोदिता चुप हो जाती है।

रजनी किताब के पेज पलटा ही रही थी कि तभी वो खुश होते हुए कहती है..........

रजनी : "मिल गया।"

अमोदिता झट से पूछती है.........

आमोदिता : "क्या मिल गया मोम.....?"

रजनी : "वशीकरण तोड़ने का मंत्र, क्या है ना आज तक मैंने बस वशीकरण किया है कभी तोड़ा नहीं है इसलिए यह मंत्र मुझे ढूँढ़ना पड़ा।"

आमोदिता : "तो क्या है मोम वशीकरण तोड़ने का मंत्र, जल्दी बताईए ना....?"

रजनी किताब के पेज पर उंगली फेरते हुए कहती है.......


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रजनी : "मंत्र कुछ इस प्रकार है.......

ओह्न ह्नीं श्रीं ह्नीं बज्र कवचाय

हुम पीताम्बरे तंत्र बन्ध नाशय नाशय।


रजनी : इस मंत्र का जाप तुझे पूरे सात बार करना है।"

अमोदिता : "बस सात बार जाप करने से वशीरकण टूट जाएगा, ये तो बहुत आसान है मोम ।"

रजनी अमोदिता को रोकते हुए गुस्से से कहती है.......

रजनी : "रूक जा, रूक जा नालायक लड़की, तुझे ना हर काम की जल्दी रहती है पहले मेरी पूरी बात तो सुन लिया कर, भूल गयी सुबह मैंने तुझे

क्या बोला था, टोटका करना जितना आसान होता है उससे कहीं ज्यादा कठिन होता है उसे तोड़ना मैंने तुझे टोटका तोड़ने का बस अभी मंत्र बताया है ये नहीं बताया है कि टोटका कैसे तोड़ा जाता है।"

अमोदिता का चेहरा उतर जाता है और वो उखड़े हुए स्वर में कहती है.........

आमोदिता : "तो फिर कैसे तोड़ा जाता है मोम टोटका......?"

रजनी : "देख मैं तुझे समझाती हूँ, जिस प्रकार किसी को वश में करने के अलग-अलग तरीके होते है उसी प्रकार वशीकरण तोड़ने के भी अलग-अलग तरीके होते है, हमने जो वशीकरण किया था

वो था बाल के जरिये वशीकरण जिसमे हल्दी की गाँठ का उपयोग किया था, अब टोटका तोड़ने के लिए तुझे उस गाँठ में से कायर का बाल निकालना होगा और किशनोई नदी में प्रवाहित करना होगा।"

अमोदिता अपना मुँह फाड़ते हुए कहती है.........

आमोदिता : "ये आप क्या बोल रही हो मोम , ये कैसे पॉसिबल हो सकता है उस गाँठ को तो मैं चौराहे पर फेंक कर आ गयी थी ना कल, वो मैं कहाँ से लाऊँगी......?"

रजनी : "वहीं से जहाँ पर फेका था।"

आमोदिता : "मोम आप भी ना पता नहीं कैसी बाते करती है, भला वो गाँठ अभी भी वहीं पर रखी होगी क्या, हो सकता है कोई कुत्ता उठा कर ले गया हो या किसी इंसान ने चलते-चलते लात मारते हुए

कहीं ले गया हो।"

रजनी : "नालायक लड़की वो टोटका था और कुत्ते कभी टोटको को नहीं छू सकते, भूल मत कुत्ते आत्माओ को देख सकते है उनके पास भी एक अदृश्य शक्ति होती है, बुरी शक्तियों को महसूस

करने की और रही इंसानो की बात तो भूल मत यह गाँव है शहर नहीं अगर किसी ने उस काली पोटली को देख भी लिया होगा तो गलती से भी हाथ लगाने का सोचा भी नहीं होगा समझी।"

आमोदिता : "मोम ये तो बहुत मुश्किल है।"

रजनी : "तो तुझे क्या काला जादू चूहे-बिल्ली का खेल लगा था, इसमे कदम-कदम पर खौफ रहता है समझी, एक और बात याद रखना ये सब तुझे तीन बजे शुरू करना है और चार बजे तक खत्म करना है।"

अमोदिता हिचकिचाते हुए कहती है........

आमोदिता : "मोम ये सब तो ठीक है, मैं चौराहे पर भी चले जाऊँगी और वो पोटली भी ढूँढ़ लूँगी पर किशनोई नदी में वो ये सब प्रवाहित करना जरूरी है क्या.....?"

रजनी : "हाँ बहुत जरूरी है, शास्त्रो में कहा गया है कि सृष्टि के प्रारंभ में सिर्फ जल ही था और अंत के समय भी सिर्फ जल ही रहेगा इसलिए इसे जल में प्रवाहित करना बहुत जरूरी है, कुछ चीजे सात्वीक और तांत्रिक चीजो में एक समान होती है समझी।"

आमोदिता : "पर मोम तुमको पता है ना कल रात पूर्णिमा है और तुमने ही तो कहा था यक्षिणी को युग जी ने आजाद कर दिया होगा और वापस गेट लगा दिया होगा।"

रजनी : "अरे पागल पूर्णिमा तो कल रात है ना तो तू आज क्यों डर रही है और वैसे भी तू एक स्त्री है और यक्षिणी भी एक स्त्री कभी दूसरी स्त्री के साथ संभोग नहीं करती, उसने आज तक जितनो को भी अपना शिकार बनाया है सब मर्दों को बनाया है और किसी को नहीं समझी।"

आमोदिता : "हाँ समझ गयी।"

रजनी : "चल अब ज्यादा वक्त बबार्द मत कर, मैंने जो मंत्र बोला था उसका जाप करते हुए ये तीनो दीये जला और टोटका तोड़ने के लिए तैयार हो जा।"

अमोदिता माचिस से दिया जलाते हुए कहती है......

आमोदिता : "ओह्म........

ह्मीं श्रीं ह्नीं बज्र कवचाय

हुम पीताम्बरे तंत्र बन्ध नाशय नाशय।"

एक तरफ अमोदिता और रजनी टोटका तोड़ने की तैयारी कर रहे थे तो वहीं दूसरी तरफ युग और अभि यक्षिणी कहाँ पर है इस बारे में पता कैसे करे सोच रहे थे। कायर युग के कमरे में सोया हुआ था। युग और अभि हॉल में बैठे हुए थे। युग अभि से पूछता है.......

युग : "यार तू जब से अपने घर से लौटा है चुप चाप बैठा हुआ है बता क्यों नहीं रहा कैसे पता लगाऐगे यक्षिणी के बारे में कि वो कहाँ पर है और किस कमरे
में.....?"

अभी : "यार बता रहा हूँ, पहले तीन तो बज जाने दे।"

युग दीवार पर लगी पुरानी घड़ी में वक्त देखते हुए कहता है.........

युग : "यार अभी तीन बजने में आधा घंटा कम है और अब मैं और इंतजार नहीं कर सकता, तुने कहा था रात में बताएगा, बता ना।"

अभी : "ठीक है बताता हूँ।"

इतना कहकर अभि अपनी जेब में हाथ डालता है और

एक छोटा सा घड़ी के आकार का काला बोक्स निकालता है। जब वो उस बॉक्स को खोलता है तो उसके अंदर से एक काला धागा निकलता है, जिसमे हीलिंग क्रिस्टल काला रंग का नुकीला पत्थर

बंधा हुआ था। जो एक शंकु के आकार का था।

युग आँखे बड़ी करते हुए उस चीज को देखते हुए कहता है........

युग : "ये क्या है! ये तो मुझे किसी पेंडूलम की तरह दिख रहा है......?"

अभी : "ये पेडूंलम नहीं है युग, इसे डांउजिंग पेंडूलम कहा जाता है।"

युग : " ये डाउंजिंग पेंडूलम क्या होता है.....?"

युग : "यार अभिमन्यु चुप क्यों

खड़ा है, बता ना ये डाउजिंग पेंडुलम क्या होता है...?"


अभि डाउजिंग पेंडुलम का धागा हिलाते हुए कहता है......


अभी : "यार देख मैं ना तुझे अच्छे से समझाता हूँ, डाउजिंग या डाउस का शाब्दिक अर्थ होता है गहराई पर जाकर खोजना। डाउजिंग विधि में पेंडुलम नामक यंत्र का प्रयोग किया जाता है, इसमें एक लम्बा

धागा या चेन होती है जिसके नीचे लटकी हुई भारी नोंकदार लटकन को पेंडुलम कहते है।


अभिमन्यु अपने आस-पास देखते हुए कहता है......


अभी : "हमारे इस ब्रह्मांड में कई तरंगे मौजूद है जो एक-दूसरे से जुड़ी हुई है और हमारे मन में वह शक्ति होती है कि हम एक ही पल में इस ब्रह्मांड में कहीं भी मौजूद किसी भी तरंगो से संपर्क कर सकते है, जैसे

रेडियो अदृश्य किरणो को ग्रहण करता है ठीक उसी प्रकार पेंडुलम व्यक्ति के अचेतन मन जगह, विचार व वस्तु की अदृश्य सूक्ष्म कणो व ऊर्जा को प्राप्त कर गति करके उत्तर हम तक पहुँचाता है, पेंडुलम ब्रह्मांडीय ऊर्जा से हमें जोड़कर हमारी तर्क

बुद्धि में विश्लेषणी एवं रैखिक शक्ति को जोड़कर हमारे प्रश्नों के सही उत्तर देता है। देख डाउजिंग ना एक बहुत पुरानी विधि है जिसका उपयोग सदियो से किया जा रहा है, जब कहीं पानी की खोज करनी होती थी या फिर खजाने की तलाश या फिर बारूदी सुरंग की खोज या फिर अदृश्य शक्तियों का पता लगाना होता था सब इसी की मदद से किया जाता था,


युग : "मतलब तू इस पेंडूलम की मदद से यक्षिणी का पता लगाएगा।"


अभि : "हाँ।"

युग : "और वो कैसे.....?"

अभी : जब हम इस डाउजिंग पेंडुलम को हाथ में पकड़ते है और कोई सा सवाल करते है तो ये पेंडुलम अपने आप मुवमेंट करने

लग जाता है यदि जवाब हाँ होता है तो ये सीधे हाथ की ओर मुवमेंट करता है और यदि जवाब ना होता है तो उल्टे हाथ की ओर मुवमेंट करता है

अभि की सारी बाते सुनकर युग हँसते हुए कहता है.....

युग : "यार तू क्या पागल हो रहा है, तुझे क्या लगता है इस टेकनीक की मदद से हम यक्षिणी का पता लगा लेंगे कि वो कहाँ पर और किस कमरे में है।"

अभी : "यार तू हँस रहा है, इस टेकनीक से हम सिर्फ यक्षिणी ही नहीं बल्कि और भी कई अदृश्य शक्तियों के बारे में पता लगा सकते है

अभिमन्यु युग को डाउजिंग के बारे में बता ही रहा था कि तभी तीन घंटे बजने की आवाज सुनाई देती है। टन...टन...टन,

यह संकेत था कि रात के तीन बज चुके है।

युग दीवार पर लगी घड़ी की ओर देखते हुए कहता है.....

युग : "यार तीन बज गये, अब तेरी इस डाउजिंग पेंडुलम का यूज करे......?"

अभि : "हाँ खेल शुरू करते है।"

अभि पेंडुलम में लगे काले धागे को पकड़ता है। पहले तो पेंडूलम आगे पीछे होने लगता है पर कुछ ही देर बाद वह अपनी जगह पर रूक जाता है।

अभि फुंसफुसाते हुए कहता है.......

अभी : "यक्षिणी क्या तुम यहीं हो, यदि हो तो मुझे संकेत दो, मुझे संकेत दो यक्षिणी ।"

इतना कहकर अभि चुप हो जाता है और पेंडूलम के

मुवमेंट करने का इंतजार करने लग जाता है।

जहाँ एक तरफ अभि और युग यक्षिणी के बारे में पता

लगा रहे थे तो वहीं दूसरी तरफ अमोदिता कायर पर किया गया टोटका तोड़ने के लिए अकेले ही चौराहे पर जाने के लिए निकल पड़ी थी। टोटका उसने अकेले किया था इसलिए उसे अकेले ही चौराहे पर जाना पड़ रहा था। अमोदिता डरते-डरते अपने कदम चौराहे की ओर बढ़ा रही थी। रात का गहरा सन्नाटा सड़क पर

छाया हुआ था। आसमान में चाँद निकला हुआ था जिसकी रोशनी चारो तरफ फैल रही थी उसी की मदद से अमोदिता आगे बढ़ रही थी।

अमोदिता मन ही मन फुसफुसाते हुए कहती है.......

आमोदिता : "मैं एक सौदायीन हूँ और मुझे किसी से डर नहीं लगता, मेरा काम डरना नहीं बल्कि अपनी काले जादू की शक्तियों से डराना है।"

यही बड़बड़ाते हुए अमोदिता आगे बढ़ रही थी, कुछ ही देर में वो अपने घर के पास वाले चौराहे पर पहुँच जाती है और हल्दी की गाँठ जिसे काले कपड़े के टुकड़े में बाँधकर उसने फेंकी थी वो पुड़िया ढूँढ़ने लग जाती है। सड़क मिट्टी की बनी हुई थी जिस कारण वहाँ पर बहुत सारी धूल और छोटे-छोटे पत्थर के टुकड़े

जमा हो गये थे। उन्ही पत्थरो के टुकड़ो को अपने हाथो से हटाते हुए अमोदिता पुड़िया ढूँढ़ने लग जाती है।

अमोदिता पुड़िया ढूँढ़ते हुए कहती है.......

आमोदिता : "कहाँ चली गयी, यहीं पर तो फेकी थी मैंने, अरे कहाँ गयी यहीं पर होना चाहिए उसे, यहीं कहीं होगी।"

यही सब बड़बड़ाते हुए अमोदिता पुडिया ढूँढ़ ही रही थी कि तभी उसे लगता है जैसे उसके पीछे से कोई निकला हो। अपने पीछे हलचल महसूस होता देख अमोदिता सहम जाती है। वह धीरे-धीरे बड़ी हिम्मत के साथ पीछे पलटने लग जाती है। जब वो पीछे पलटती है तो देखती है कि उसके पीछे एक काला कुत्ता खड़ा हुआ था


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जो कि बेहद डरावाना लग रहा था। वह कुत्ता अमोदिता को घूरे जा रहा था उसके बड़े-बड़े नुकिले दाँत थे।

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उस कुत्ते की आँखे लाल हो चुकी थी जो कि एकटक नज़र से अमोदिता को घूरे जा रही थी। उस काले कुत्ते के शरीर पर लम्बे-लम्बे बाल थे जिसे देखकर ऐसा लग रहा था कि कई दिनो से नहीं नहाया हो।

अमोदिता कुत्ते को देखते हुए कहती है........

आमोदिता : "अच्छा तो ये कुत्ता है, इस कुत्ते कमीने ने तो मुझे डरा ही दिया था।"

वह कुत्ता अमोदिता को देखकर भौंकने लग जाता है।

पहले तो अमोदिता डर जाती है पर फिर बड़ी हिम्मत से

कहती है..........

आमोदिता : "अरे कुत्ते कमीने मैं कोई भूत नहीं हूँ जो मुझे देखकर भौंके जा रहा है मैं... मैं तो एक सौदायीन हूँ अच्छा तो तू एक सौदायीन को देखकर भौंक रहा है रूक अभी मजा चखाती हूँ तुझे।"

इतना कहकर अमोदिता जमीन पर पड़े छोटे-छोटे पत्थरो के टुकड़े उठाने लग जाती है और उस कुत्ते की तरफ फेककर मारने लग जाती है।

यह हैरान करने वाली बात थी कि वो कुत्ता डरता

नहीं है बल्कि वहीं पर खड़ा रहता है और लगातार अमोदिता को देखकर भौंके जा रहा था। अमोदिता का कोई निशाना उस कुत्ते को नहीं लग पा रहा था, निशाना लगाने में वो एक अनाडी थी। अमोदिता सड़क पर से पत्थर उठाकर उस कुत्ते को मारे ही

जा रही थी कि तभी उसके हाथ में कोई ऐसी चीज आती है जो बहुत सौफ्ट थी। अमोदिता रूक जाती है और उस चीज को देखने लग जाती है वो देखती है कि उसके हाथ में एक काले कपड़े की पुड़िया थी। यह वही पुड़िया थी जो उसने फेकी थी। अमोदिता

उस पुड़िया को देखकर खुश हो जाती है और खुद से कहती है........

आमोदिता : "अरे मिल गयी, जब से इसे ही तो ढूँढ़ रही थी मैं, इस कुत्ते ने तो मेरा काम आसान कर दिया।"

इतना कहकर अमोदिता अपना सिर ऊपर उठाती है और उस कुत्ते की तरफ देखने लग जाती है पर तब तक वो कुत्ता वहाँ से जा चुका था।

अमोदिता हैरानी के साथ कहती है.......

आमोदिता : "अरे ये कुत्ता कहाँ चला गया, अभी तो यहीं पर था जब भगा रही थी तब तो नहीं गया अब

अचानक पता नहीं कहाँ गायब हो गया, खैर छोड़ो मुझे क्या करना है मेरा काम तो आसान हो गया ना, अब इसे किशनोई नदी में प्रवाहित करना है जैसा कि मोम ने कहा था, वो भी चार बजे से

पहले साढ़े तीन तो यहीं पर बज गये बस आधा घंटा बचा हुआ है।"

इतना कहकर अमोदिता अपने कदम किश्नोई नदी की ओर बढ़ाने लग जाती है।

इस तरफ अभि और युग यक्षिणी का पता लगा रहे थे।

अभि अपने हाथ में डाउजिंग पेंडुलम लेकर खड़ा हुआ था और काफी देर से पेंडुलम के हिलने का इंतजार कर रहा था पर उसमे कोई मुवमेंट नहीं हो रहा था।

अभि फिर अपनी तरफ से कोशिश करते हुए कहता है.......

अभी : "यक्षिणी, अगर तुम यहाँ हो तो मुझे संकेत दो।"

युग उबासी लेते हुए कहता है.......

युग : "यार मुझे नहीं लगता इससे कुछ होने वाला है, तेरा ये डिवाईस भी बाकी के डिवाईस की तरह खराब ही है।"

अभि युग पर गुस्सा करते हुए कहता है.......

अभी : "युग तू दो मिनट चुप रहेगा, जब से देख रहा हूँ बक-बक कर रहा है, ऐसा लग रहा है कछुए की कमी तू पूरी कर रहा है, मैंने कहा था ना कि इस विधि में ध्यान लगाना बहुत जरूरी है, तू मुझे ध्यान ही नहीं

लगाने देगा तो मैं यक्षिणी के बारे में पता कैसे लगाऊँगा, मुझे अपने मन को अचेतन कर ब्रह्मांड में घूम रही तरंगो के साथ सम्पर्क साधने दे समझा।"

अभि का गुस्सा देखकर युग एक दम चुप हो जाता है।

अभि अपने दूसरे हाथ में डाउजिंग पकड़ता है और एक

गहरी साँस लेकर आहिस्ते से कहता है........

अभी : "क्या यहाँ पर कोई अदृश्य शक्ति है, अगर है तो हमे संकेत दो......?"

अभि और युग एकटक नज़र से पेंडुलम की ओर देखने

लग जाते है उन दोनो की ही नज़र पेंडुलम से हट ही नहीं रही थी। और देखते ही देखते वो पेंडुलम अभि के राईट हैंड साईड मुवमेंट करने लग जाता है जिसका यह मतलब था कि कोठी के अंदर कोई ना कोई अदृश्य शक्ति जरूर है।

पेंडुलम को हिलता हुआ देखकर अभिमन्यु खुश हो जाता है और उत्साहित होते हुए कहता है.......

अभी : "अगर यहाँ पर कोई अदृश्य शक्ति है तो मुझे बताओ वो किस साईड है, मुझे राह दिखाओ ब्रह्मांड की तरंगे अपना करिश्मा दिखाओ।"

वह पेंडुलम सीढ़ियो की दिशा की ओर हिलने लग जाता है। अभि पेंडुलम की ओर देखते हुए कहता है........

अभी : "यार ये तो ऊपर के कमरे की तरफ इशारा कर रहा है।"

युग हैरानी के साथ कहता है.......

युग : "इसका मतलब यह है कि यक्षिणी ऊपर वाले कमरे में है।"

वो दोनो टाईम वेस्ट ना करके पेंडूलम की दिशा की ओर सीढ़ियों की तरफ बढ़ने लग जाते है। पेंडुलम की दिशा का पीछा करते-करते वो दोनो रूम नम्बर 666 के पास पहुँचने वाले थे। वो दोनो रूम नम्बर 666 के पास पहुँचने ही वाले थे कि तभी 666 रूम नम्बर के बगल में जो कमरा था उसमे से बहुतगंदी स्मेल आने लग जाती है। वो कमरा किसी और का नहीं बल्कि युग का था।

अभि : "यार ये तेरे कमरे में से इतनी गंदी बदबू कैसे आ रही है, ऐसा लग रहा है जैसे कोई मर गया है, बॉडी सड़ने जैसी गंध है।"

युग अपनी नाक बंद करते हुए कहता है......

युग : "ऐसा मत बोल यार, मेरे कमरे के अंदर कायर है वही तो मेडिसीन खाकर सो रहा है।"

जैसे ही युग यह बात बोलता है उन दोनो की ही सिट्टी-बिट्टी गुल हो जाती है वह दोनो जल्दी से युग के कमरे के अंदर घूस जाते है। कमरे के अंदर जाते से ही वो बदबू और बढ़ जाती है और उनके नथूनो में घुसने लग जाती है। जब वो कमरे में जाते है तो देखते है कि कायर बिस्तर पर लेटा हुआ था। युग एक हाथ से

अपनी नाक बंद करता है और दूसरे हाथ से कायर की नब्ज चेक करने लग जाता है।

अभि : "क्या हुआ ठीक तो है ना ये......?"

युग कुछ देर रूककर कहता है.......

युग : "हाँ यार ठीक तो है, नब्ज तो चल रही है; फिर ये इतनी गंदी बदबू कहाँ से आ रही है.....?"

अभी : "यार ये तो मेरे भी समझ में नहीं आ रहा, मुझसे तो सहा ही नही जा रहा।"

अभि और युग अपने आस-पास देखने लग जाते है और पता करने की कोशिश करने लग जाते है कि वो बदबू कहाँ से आ रही थी। बदबू धीरे-धीरे बढ़ते जा रही थी। अभि और युग आस-पास देख ही रहे थे कि तभी युग की नज़र टेबल पर रखी पॉलिथीन पर पड़ती है उस पॉलिथीन पर करीब बीस-तीस मक्खियाँ भिन-भिना रही थी। युग उस पालिथीन की ओर हाथ से इशारा करते हुए कहता है........

युग : "यार वो देख, उस पॉलिथीन के ऊपर इतनी सारी मक्खियाँ भिन-भिना रही है; इस पॉलीथीन में क्या हैं........?"

अभि बिना युग के किसी सवाल का जवाब दिए अपने

कदम उस पॉलिथीन की ओर बढ़ाने लग जाता है, जैसे-जैसे वो अपने कदम उस पॉलिथीन की ओर बढ़ाते जा रहा था बदबू बढ़ते जा रही थी।

जब अभिमन्यु उस पॉलिथीन के पास पहुँचता है और उसे उलेटता है तो देखता है कि उसके अंदर मछलियाँ रखी हुई थी, ये वही मछली थी जो युग को यामिनी ने दी थी। वह मछलियाँ पूरी तरह सड़ चुकी थी और उसके अंदर से मरे हुए इंसान की बदबू आ रही थी।

अभि सड़ी हुई मछली को देखते हुए कहता है......

अभी : "यार ये बदूबू तो इन मछलियों के अंदर से आ रही है।"

युग : "पर ये मछलियाँ इतनी जल्दी खराब कैसे हो सकती है, आज सुबह ही कि तो ताजी मछलियाँ थी ये।"

अभी : "पता नहीं यार, मेरे भी कुछ समझ नहीं आ रहा और मान ले कि मछलियाँ खराब भी हो गयी तो चलता है पर ऐसी बदबू किस मछली में से आती है यार, ऐसा लग रहा था जैसे कई लाश हो अंदर जो सड़ रही हो।"

अभि ने इतना ही कहा था कि तभी युग की नज़र

अभि के हाथ के डाउजिंग यंत्र पर पड़ती है और वो देखता है कि पेंडुलम ने अपने आप मुवमेंट करना शुरू कर दिया था।

युग घबराते हुए कहता है.......

युग : "यार वो देख तेरा पेंडुलम फिर

मुवमेंट कर रहा है।"

पेंडुलम कमरे के बाहर की ओर मुवमेंट कर रहा था। वह दोनो जल्दी से कमरे के बाहर निकल जाते है और पेंडुलम की दिशा की ओर जाने लग जाते है। वह दोनो रूम नम्बर 666 के सामने आकर रूक जाते है। पेंडुलम रूम नम्बर 666 के अंदर की ओर संकेत कर रहा था। युग और अभि यह सब देखकर पसीना-पसीना हो गये थे।

अभिमन्यु गहरी साँस लेते हुए कहता है.......

अभी : "इसका मतलब यह हुआ कि यक्षिणी आजाद नहीं हुई है वो यहीं इसी कमरे के अंदर कैद है। "

युग कुछ सोचते हुए कहता है.......

युग : "पर यक्षिणी आजाद क्यों नहीं हुई, हमने तो गेट खोला था ना.........?"

अभि युग पर चिढ़ते हुए कहता है........

अभी : "यार युग तू भी ना कमाल करता है, अब जब हमे पता चल गया है तो ये क्यों पूछ रहा है कि यक्षिणी यहाँ पर क्यों कैद है हमें तो बल्कि यह बात जानकर खुश होना चाहिए कि यक्षिणी आजाद नहीं हुई है बल्कि यहीं पर है, अब वो कल पूर्णिमा की रात किसी मर्द का शिकार नहीं कर पाएगी।"

युग : "हाँ अभि मैं समझ रहा हूँ तेरी बात पर एक बात अंदर ही अंदर मुझे खाए जा रही है और वो ये है कि यक्षिणी कमरे के अंदर ही कैद कैसे रह सकती है जबकि हम तो वो दरवाजा खोल चुके है ना और उसके अंदर से भी आ चुके है, याद है तुने कहा था कि जहाँ पर अदृश्य शक्तियो को बाँध कर रखा जाता है यदि हम

वहाँ के किसी सामान को छू लेते है या फिर सामान के साथ छेड़छाड़ कर देते है तो वहाँ की अदृश्य शक्तियाँ बंधन से मुक्त हो जाती है और उस रात मेरे हाथ में भी तो अपने आप पेन आ गया था, इस हिसाब से तो यक्षिणी को कमरे में से आजाद हो जाना चाहिए था।"

अभि युग पर शक करते हुए कहता है........

अभी : "यार तेरी बातो से मुझे ऐसा क्यों लग रहा है जैसे तू यक्षिणी को सच में कमरे से आजाद कराना चाहता था और वो पेन जान बूझकर तुने कमरे से बाहर निकाला था।"

युग हिचकिचाते हुए कहता है.......

युग : "ये तू क्या बोल रहा है यार, सच में मुझे नहीं पता वो पेन कैसे मेरे हाथ में आ गया था, भला मैं यक्षिणी को आजाद करके क्या करूँगा वो कौन सी मेरी रिश्तेदार लगती है।"

अभी : "यार अगर यक्षिणी तेरी रिश्तेदार नहीं लगती तो दुखी क्यों हो रहा है खुशी मनाना कि वो कमरे के अंदर ही कैद है बाहर नहीं निकली और अभी मैंने तेरे सामने डाउजिंग की मदद से उसका पता लगाया ना और डाउजिंग विधि कभी गलत नहीं हो सकती है समझा।"

अभी : और एक बात अच्छे से जान ले युग मैंने बुजुर्ग लोगो से बहोत बार सुना है

युग : सुना है क्या सुना है........?

अभी : उसकी नज़र के झासे मैं मत फसना .....

उसके उलटे पैर देखनेवालों की उलटी गिनती शुरू हो जाती है ........

उसकी चोटी आपकी उम्र छोटी कर देगी.........

युग : ये तू किया बता रहा है अभिमन्यु सुनने मै काफ़ी डरावनी लग रही है

अभि उबासी लेते हुए कहता है - "देख मुझे ना अब बहुत नींद आ रही है मुझे, अब सोने जाने दे पिछले दो दिन से रोज रात को चार बजे तक जगा रहा है मुझे, आज चैन की नींद सोऊँगा बिना किसी डर के।"

इतना कहकर अभि नीचे हॉल में जाने लग जाता है पर

युग की नज़रे अभी भी रूम नम्बर 666 पर गढ़ी हुई थी, उसके समझ ही नहीं आ रहा था कि यदि उसने दरवाजा खोला था तो यक्षिणी बाहर क्यों नहीं निकली थी।

एक तरफ युग और अभि ने यक्षिणी का पता लगा लिया था तो वहीं दूसरी तरफ अमोदिता किशनोई नदी पर पहुँच गयी थी अमोदिता रौंगकामुचा घाट पर खड़ी हुई थी। किशनोई नदी धीमी रफ्तार के साथ बहे जा रही थी। अमोदिता के सिवाये रौंगकामुचा घाट पर और कोई नहीं था वो अकेले ही वहाँ पर खड़ी हुई थी।

अमोदिता अपने अगल-बगल देखती है जब उसे कोई नहीं दिखता तो वो अपने हाथ की मुठ्ठी खोलती है जिसके अंदर उसने वो काली पुड़िया पकड़ी हुई थी। अमोदिता वो पुड़िया खोलने लग जाती है।

पुड़िया के अंदर की हल्दी की गाँठ पूरी तरह पीली से लाल हो चुकी थी, उसी हल्दी की गाँठ से कायर का बाल लिपटा हुआ था।

वह बाल पूरी तरह हल्दी की गाँठ से चिपका चुका था। ऐसा लग रहा था जैसे वो बाल हल्दी की गाँठ के अंदर घुसने की कोशिश कर रहा था।

रजनी ने अमोदिता को जो मंत्र बताया था उसका जाप करते हुए अमोदिता वो बाल हल्दी की गाँठ में से निकालने लग जाती है। अमोदिता को हल्दी की गाँठ से बाल निकालने में कड़ी मसकत करनी पड़ रही थी क्योंकि वह बाल पूरी तरह हल्दी में समाहित हो चुका था। अमोदिता हल्दी की गाँठ से बाल निकाल

ही रही थी कि तभी उसकी नज़र नदी पर पड़ती है और वो देखती है कि नदी के पानी के ऊपर अचानक कई सारे जुगनू मंडराने लग गये थे।

अमोदिता खुद से बड़बड़ाते हुए कहती है.........

आमोदिता : "ये इतने सारे जुगनू कहाँ से आ गये नदी के पास, आज से पहले तो इतने जुगनू कभी नहीं देखे।".............




अब आगे.............


☆ Ch : Totka utra yaa nahi ☆


अभी : वो बिंदु....... वो बिंदु कायर ना......... कायर ना..........

बिंदु : ये कायर कायर क्या laga kar रखा है, मैंने पूछा कायर कहा पर है मुझे ये बताओ.......

काव्या : आअह्ह्हह्ह्ह्ह....... युग कमिने छोड़ मुझे मै तेरी दीदी हु ये तू क्या कर रहा है आअह्ह्हह्ह्ह्ह...... छोड़ मेरी बूब्स को कमीना..........



9451 Words Complet.......

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