......... Yakshini..........
Mega Update 23
☆ Chapter : Totake ka Asar☆
अब तक................
कायर : ये तुम दोनों नई कोठी के अंदर इतना अंधेरा कियु करके रखा हुआ है .....?
रजनी : अब हमें काम सुरु करना चाहिए ,आमोदिता जल्दी से पूर्व दिशा की और मुँह करके बैठ जा...............
रजनी : क्या हुआ काम को अंजाम दे दिया ,कोई दिक्कत तो नहीं आयी ...?
आमोदिता : है मोम दे दिया , कोई दिक्कत नहीं आयी............
युग : ( मन मै ) ये कैसे हो सकता है कुवे के अंदर से झरने के पानी गिरने की आवाज कैसे सुनाई दे सकती है...........
अब आगे.............
युग यह गाना सुन ही रहा था कि तभी गाने की आवाज धीमी हो जाती है और उसे कुँए के अंदर पानी पर एक लड़की का चेहरा दिखने लग जाता है। पहले तो वह चेहरा धूंधला था पर जैसे-जैसे वो clear होते जा रहा था, उसे कुँए के पानी में एक जाना पहचाना चेहरा नज़र आने लग जाता है।
युग हैरानी के साथ कहता है.........
युग : "यामिनी तुम...!"
कुँए के पानी में यामिनी का चेहरा था, सिर्फ चेहरा ही नहीं ऐसा लग रहा था जैसे कुँए के अंदर ही यामिनी थी। यामिनी का पूरा शरीर पानी में डूबा हुआ था बस उसका चेहरा ही दिख रहा
था।
युग धीरे से कहता है...........
युग : "यामिनी तुम यहाँ पर क्या कर रही हो....?"
यामिनी फुंसफुंसाते हुए कहती है........
यामिनी : "आपका इंतजार।"
युग : "मेरा इंतजार मतलब, और तुम कुँए के अंदर कैसे गिरी?"
यामिनी कुछ जवाब नहीं देती, वो एक-टक नज़र से युग को
देखते जा रही थी। युग को तो अभी भी अपनी आँखो पर यकिन
नहीं हो रहा था कि कुँए के अंदर यामिनी थी।
युग : "तुम वहीं पर रूको मैं अभी तुम्हे कुँए से बाहर निकालता हूँ,
घबराना मत मैं आ रहा हूँ।"
यामिनी धीरे से बड़े प्यार से कहती है........
यामिनी : "हाँ युग आओ, मेरे
पास आओ, मेरे करीब आओ।"
युग कुँए के अंदर घुसने के लिए अपने पैर कुंए के अंदर
डालने ही वाला था कि तभी उसे पीछे से अभि रोक लेता है
और उसका हाथ पकड़ते हुए कहता है.........
अभी : "युग तू पागल हो गया है
क्या, कुँए के अंदर क्यों कूद रहा है?"
युग : "यार कूद नहीं रहा हूँ, बचा रहा हूँ।
अभी : "बचा रहा है! पर किसे?"
युग : "यामिनी को, यार वो कुँए के अंदर है।"
अभी : "यामिनी! कौन यामिनी?"
युग : "वही लड़की यार जिसके बारे में मैंने कल रात में बताया था,
जिसने मेरी नदी पार करने में मदद की थी, अभी जब उसे देखा
तो उसका नाम याद आया वो कुँए के अंदर है।"
अभि कुँए के अंदर देखने लग जाता है पर उसे कुछ
दिखाई नहीं देता है। वह युग पर भिन्नाते हुए कहता है..........
अभी : "ये तुझे रात में कोई दौरे-वौरे तो नहीं पड़ते ना, किस लड़की की बात कर रहा है तू, कुँए के अंदर तो कोई नहीं है।"
युग भी कुँए के अंदर देखते हुए कहता है........
युग : "अरे यहीं पर तो थी कहाँ गयी, सच में अभि यहीं पर थी मैंने उससे बात भी की थी।"
अभी : "यार युग देख रात बहुत हो चुकी है, हो सकता है तुझको देर रात तक जागने की आदत हो इसलिए ऐसा हो रहा हो, वो चीजे दिखाई दे रही हो जो यहाँ पर है ही नहीं।"
युग अभि की बात का कुछ जवाब नहीं देता है, उसे तो
अभी भी समझ नहीं आ रहा था कि उसके साथ क्या हो रहा है।
अभि कुँए के पास रखी बाल्टी उठाता है और उससे कुँए का पानी खींचकर ब्केट में भर लेता है।
युग अभी भी यामिनी के बारे में ही सोच रहा था......
युग : ( मन मै ) "हो सकता है यह सब मेरा वहम ही हो वरना यामिनी यहाँ पर कैसे आ सकती है वो भी कुँए के अंदर ।"
अभि उसे हिलाते हुए कहता है........
अभी : "अरे कहाँ खो गया, मैं कुछ बोल रहा हूँ तुझसे पानी भरकर हो गया अब चले?"
युग : "हाँ चल जल्दी।"
युग और अभि ब्केट में पानी लेकर ग्रेव्यार्ड कोठी में चले जाते है। जब वो वहाँ पर पहुँचते है तो देखते है कि कायर और कछुऐ ने सारी ही शराब पी मारी थी, उन्होने युग और अभि का पानी लाने तक का इंतजार नहीं किया था। वह दोनो शराब पीकर जमीन पर ही पसरकर गहरी नींद में सो रहे थे।
अभि उन दोनो को देखते हुए कहता है.......
अभी : "यार ये दोनो तो टल्ली हो गये अब क्या करे?"
युग : "क्या करे क्या मतलब वही जो सोचा था यक्षिणी के बारे में पता लगाते है।"
अभी : "और कितना पता लगाऐगे यार, तुने देखा था ना उन लेज़र लाईट को अपने आप जलते हुए इसका मतलब यह है कि वो यहीं पर है कहीं नहीं गयी है।"
युग : "पर यक्षिणी..."
अभी : "यार फिर यक्षिणी, तू तो यक्षिणी के पीछे हाथ धोकर ही पड़ गया है, हमे यह तो पता चल ही गया है ना कि यक्षिणी यहीं पर है।"
युग : "हाँ पर यह तो पता नहीं चला है ना कि वो कहाँ पर है, किस कमरे में।"
अभी : "यार रूम नम्बर 666 में ही होगी ना।"
युग : "पर अभी तुने देखा था ना लेज़र लाईट हर जगह जल रही थी, फिर वो एक जगह कैसे हो सकती है?"
अभि कुछ सोचते हुए कहता है
अभी : "यार हो सकता है कि यह सब उसकी शक्तियों की वजह से हो रहा हो, भूल मत उसके पास शैतानी शक्तियों के साथ-साथ दैवीय शक्ति भी है, वो बहुत
शक्तिशाली है कमरे के अंदर कैद होकर भी वो बहुत कुछ कर सकती है और ये ग्रेव्यार्ड कोठी भी तो उसका दूसरा ठिकाना ही था तो इस कोठी की चीजो पर तो उसका वश होगा ही ना।"
युग : "हाँ यार बात तो तेरी बिल्कुल सही है, पर फिर भी जब तक में पूरी तरह clear नहीं हो जाता कि यक्षिणी अपने कमरे में ही कैद है मैं satisfied नहीं हो सकता।"
अभि उबासी लेते हुए कहता है.........
अभी : आआआहह.........."तो यार तीन दिन है
ना अभी हमारे पास, पूर्णिमा आने से पहले पता लगा लेंगे कि वो किस कमरे में है, अब मैं सोने जा रहा और तू भी चल वरना क्या पता फिर तुझे वो तेरी यामिनी दिखने लगे।"
इतना कहकर अभि युग के कमरे में सोने चले जाता है
और युग भी उसके पीछे-पीछे चले जाता है।
सुबह हो गयी थी और सुबह के सात बज रहे थे। अमोदिता और रजनी किचन में थे और नाश्ते की तैयारी कर रहे थे।
अमोदिता गर्मा-गर्म भजिये तल रही थी जिसकी खुश्बू से पूरा किचन महक रहा था।
रजनी अमोदिता से पूछती है.......
रजनी : "युग का फोन आया या नहीं?"
अमोदिता उदासी के साथ कहती है......
अमोदिता : "नहीं आया मोम "
रजनी : "अरे अभी तक फोन नहीं आया, जितना मैं जानती हूँ अभी तक तो काले जादू का असर हो जाना चाहिए था, और फोन आ जाना चाहिए था।"
अमोदिता भजिया तलते हुए कहती है........
अमोदिता : "मोम ये काला जादू असर तो करेगा ना, बाकी के टोटको की तरह वेस्ट तो नहीं हो जाएगा?"
रजनी गुस्सा करते हुए कहती है.........
रजनी : माधरचोद सुबह-सुबह मेरा मुंड ख़राब ना कर "अरे नालायक लड़की, टोटके कभी व्यर्थ नहीं जाते बस उन्हें सही से करना आना चाहिए और तू संदेह मत कर, तू सब चीज़े पर संदेह कर सकती है पर
काली शक्तियों पर नहीं, तुझे नहीं पता कितनी शक्ति होती है इस काले जादू में... तू तो ये बता तुने पुड़िया को चौराहे पर ही फेका था ना?"
अमोदिता हिचकिचाते हुए कहती है.......
अमोदिता : "हाँ मोम चौराहे पर ही फेका था।"
रजनी बड़ी-बड़ा आँखे करते हुए कहती है.......
रजनी : "देख सही-सही बताना।"
अमोदिता की जुबान लड़खड़ाने लगती है और वो कहती है.........
अमोदिता : हाँ मोम वहीं फेका था कसम से।"
अमोदिता ने इतना ही कहा था कि उसका मोबाईल बजने लग जाता है।
अमोदिता अपने मोबाईल की स्क्रीन देखते हुए कहती है...........
अमोदिता : "मोम युग जी का फोन है, वो फोन कर रहे है मुझे।"
रजनी भिन्नाते हुए कहती है........
रजनी : "अरे अरे चूतिया कही की मेरा मुँह क्या देख रही है, जल्दी उठाना फोन कटेगा तब उठाएगी क्या।"
अमोदिता फोन उठाते हुए बड़े प्यार से कहती है.......
अमोदिता : "हैलो युग जी।"
युग की घबराती हुई आवाज सुनाई देती है........
युग : "है...हैलो अमोदिता कहाँ पर हो तुम?"
अमोदिता : "मैं तो युग जी घर पर हूँ।"
युग : "तो अमोदिता जल्दी से जल्दी मेरे पास आ जाओ, मुझे तुम्हारी बहुत जरूरत है।"
जैसे ही अमोदिता युग के मुँह से यह बात सुनती है वो खुशी से फूले नहीं समाती है और हड़बड़ाते हुए कहती है
अमोदिता : ह...."हाँ युग जी मैं आती हूँ, पर हुआ क्या आप बताएगे?"
युग : "अमोदिता मैं अभी तुम्हे फोन पर कुछ नहीं बता सकता तुम बस जल्दी से जल्दी मेरे पास आ जाओ, मुझे तुम्हारी सख्त जरूरत है।"
अमोदिता : "ठीक है युग जी मैं अभी निकलती हूँ यहाँ से।"
युग : "हाँ अमोदिता जल्दी आना, मैं इंतजार कर रहा हूँ तुम्हारा यहाँ पर।"
युग का फोन कट हो जाता है। जैसे ही फोन कट होता है अमोदिता खुश होते हुए रजनी से
कहती है..........
अमोदिता : "मोम आपने तो बिल्कुल ठीक कहा था, युग जी तो मेरी ही नाम की माला जपते जा रहे है, वो तो रूक ही नहीं रहे थे, कह रहे थे जल्दी से जल्दी मेरे पास आ जाओ मुझे तुम्हारी सख्त जरूरत है; ये काला जादू तो सच में काम करता है।"
रजनी : "देखा मेरे काले जादू का कमाल; अब तू देर मत कर जल्दी जा और देखकर आ युग को किस चीज की जरूरत है और सुन उसे जो भी चाहिए हो दे देना।"
रजनी की बात सुनकर अमोदिता शर्माने लग जाती है।
रजनी अमोदिता पर गुस्सा करते हुए कहती है.......
रजनी : "अरे तू तो अभी से शर्माने लग गयी कामिनी , मेरी बात ध्यान से सुन ले ज्यादा शर्माने मत लगना जो माँगे बिना सोचे समझे दे देना मेरा मतलब समझ रही है ना तू, ये आज कल के लड़के बड़े उतावले होते है; बस एक बार युग एक गलत कदम उठा ले फिर देखना कैसे तेरी उसके साथ शादी करवाती हूँ।"
अमोदिता : "ठीक है माँ, मैं जाती हूँ आप फिक्र मत कीजिए मैं आपको शिकायत का मौका नहीं दूंगी।"
इतना कहकर अमोदिता वहाँ से ग्रेव्यार्ड कोठी की ओर जाने के लिए रवाना हो जाती है। जैसे-जैसे उसके कदम ग्रेव्यार्ड कोठी की ओर बढ़ते जा रहे थे उसके मन में ख्याली पुलाव पकते जा रहे
थे। वो सोचते जा रही थी कि युग ने उसे ग्रेव्यार्ड कोठी में क्यों बुलाया था, आखिर वो उसके साथ क्या करने वाला था।
अमोदिता : ( मन मै ) युग जी इतने बेचैन हो कर मुझे कियु बुलाया है कही वो मेरे साथ कुछ ना कर दे वैसे मोम ने बोला है जो युग जी मुझसे मांगे वो मै देदू वैसे युग जी क्या मांगेगे कही वो मुझसे किश-विश तो नहीं माँगेगे या उसके आगे और कुछ
यही सोचते हुए अमोदिता कुछ ही देर में वो ग्रेव्यार्ड कोठी पहुँच जाती है और दरवाजा खटखटाती है।
जब दरवाजा खुलता है तो वो देखती है कि दरवाजे पर कछुआ खड़ा हुआ था। अमोदिता युग के बचपन के सारे दोस्तो को जानती थी क्योंकि वो भी बचपन में युग के साथ ही स्कूल में पढ़ा करती थी, युग के दोस्त भी उसे पहचानते थे। अमोदिता कछुए को ग्रेव्यार्ड कोठी में देखकर शौक्ड हो जाती है और अपना मुँह फाड़ते हुए नेपाली में कहती है..........
अमोदिता : "अरे कछुआ तिमी, यहाँ के तपाई गर्दै हुनुहुन्छ ।"
कछुआ अमोदिता को बताता कि वो यहाँ पर क्या कर रहा है, उससे पहले ही युग की आवाज सुनाई देती है.....
युग : "अरे अमोदिता तुम आ गयी, जल्दी आओ अंदर।"
युग की आवाज सुनकर अमोदिता झट से कोठी के अंदर चली जाती है। कोठी में वो देखती है कि वहाँ पर युग खड़ा हुआ था, युग को देखकर लग रहा था कि वो बड़ी बेसब्री से अमोदिता का ही इंतजार कर रहा था।
युग अमोदिता का हाथ पकड़ते हुए कहता है........
युग : "जल्दी चलो मेरे साथ मेरे कमरे में।"
अमोदिता मन ही मन सोचने लग जाती है........
अमोदिता : "मोम ने जैसा कहा था ये तो बिल्कुल वैसा ही हो रहा है, युग जी तो बहुत तेज निकले मुझे सीधे कमरे में ले जा रहे है और इन्हे तो शर्म भी नहीं आ रही
अपने दोस्तों के सामने ही ऐसा बोल रहे है, चलो अच्छा
ही है मेरे पास सबूत भी रहेगा की युग जी के दोस्त भी वहीं पर थे जब वो मेरे साथ वो सब कर रहे थे।"
हॉल से युग के कमरे तक जाते तक ना जाने कितने मनघड़त ख्याल अमोदिता के मन में आ गये थे और वो तो अभी भी यकिन नहीं कर पा रही थी कि काले जादू ने अपना काम कर दिया था; युग को उसका दीवाना बना दिया था।
जब अमोदिता युग के कमरे में पहुँचती है तो देखती है कि युग के बिस्तर पर अभि और कायर थे। कायर लेटा हुआ था और अभि उसके दोनो हाथ पकड़ा हुआ था, ऐसा लग रहा था जैसे वो उसे कहीं जाने से रोक रहा हो।
कायर अपने चेहरे पर एक अलग ही मुस्कान के साथ कहता है.............
कायर : "अमोदिता...अमोदिता... मेरी अमोदिता।"
कायर अमोदिता का नाम बार-बार बड़बड़ाए जा रहा था और अभि अपने हाथो से उसका मुँह बंद करने की कोशिश कर रहा था।
अमोदिता युग से कोई सवाल पूछती उससे पहले ही युग कहता है...........
युग : "वो अमोदिता देखो ना ये कायर को क्या हो गया है, जब से उठा है तुम्हारे नाम की ही माला जपे जा रहा है....."
युग अपनी बात पूरी करता उससे पहले ही कछुआ बीच में टोकते हुए कहता है........
कछुआ : "हाँ अमोदिता, इतना तो कोई भगवान को
याद नहीं करता जितनी बार सुबह से इसने तुम्हे कर लिया है।"
युग अपनी बात को आगे जारी रखते हुए कहता है.....
युग : "मैंने सोचा इसे डॉक्टर के पास ले जाऊ फिर ये अभि ने बताया कि आस-पास के गाँव में तो कोई डॉक्टर ही नहीं है, तुम ही हो जो सबका इलाज करती हो, फिर मुझे याद आया कि तुम्हारा नम्बर कल सेव किया था मैंने इसलिए तुम्हे यहाँ पर बुला लिया, अब
तुम ही देखो क्या हुआ है इस कायर को।"
अभि अपना हाथ दबाते हुए कहता है......
अभी : "हाँ अमोदिता, मैं तो थक गया हूँ इसे पकड़ के बैठने में, अगर इसे पकड़ता नहीं तो ये सीधा तुम्हारे घर आ जाता; पता नहीं क्या हुआ है इसे
तुम्हारे ही नाम की रट्ट लगाया हुआ है।"
युग की बाते सुनकर अमोदिता दंग हो गयी थी, वो यही सोच रही थी कि जो काला जादू युग पर होना चाहिए था वह कायर पर कैसे हो गया था, ऐसा कैसे हो सकता है?"
कायर अमोदिता का नाम बड़बड़ाते हुए कहता है.....
कायर : "अमोदिता... मेरी अमोदिता, मेरी प्यारी अमोदिता।"
अभि कायर के मुँह से फिर से अमोदिता का नाम सुनकर कुछ सोचते हुए कहता है.......
अभी : "यार ये कायर को किसी ने अमोदिता
के नाम की मोहिनी तो नहीं दे दी?"
अभि की बात सुनकर अमोदिता घबराने लग जाती है,
वो सोचने लग जाती है कि कहीं अभि युग के सामने उसकी पोल ना खोल दे क्योंकि अभि को सब पता था कि गाँव में क्या-क्या होता था।
युग हैरानी के साथ कहता है..........
युग : "ये मोहिनी क्या होती है यार, कोई लड़की-वड़की है क्या?"
अभि : "ये मोहिनी कोई लड़की-वड़की नहीं है
बल्कि एक प्रकार का....."
अभि अपनी बात पूरी करता उससे पहले ही कछुआ
फटाक से बीच में बोल पड़ता है........
कछुआ : "यार युग तुझे मोहिनी नहीं पता, यहाँ गाँव में तो मोहिनी देना आम बात है, अपने बंगलामुडा
और रौंगकामुचा गाँव में तो सबसे ज्यादा दी जाती है।"
युग चिढ़ते हुए कहता है..........
युग : "यार नहीं पता तभी तो पूछ रहा हूँ ना; अभिमन्यु बता ना यार क्या है ये मोहिनी?"
अभि अपनी बात को आगे जारी रखते हुए कहता है.....
अभी : "यार ये जो मोहिनी है ना ये एक प्रकार से टोना होता है, जब किसी को अपने वश में करना हो तब ये किया जाता है, ये अलग-अलग प्रकार से होता है जिसमे किसी के बाल के साथ, नाखून के
साथ या खाने में कुछ मिलाकर दिया जाता है पर इसका मेन मकसद सिर्फ एक होता है और वो है वश में करना, इसे मोहिनी देना कहा जाता है।"
अभि बोल ही रहा था कि तभी कायर फिर बड़बड़ाने लग जाता है.........
कायर : "अमोदिता.... अमोदिता... मेरी जान अमोदिता।"
कछुआ अमोदिता को घूरते हुए कहता है........
कछुआ : "पर यार एक बात समझ नहीं आयी, ये कायर अमोदिता का नाम क्यों बड़बड़ा रहा है, कायर को अमोदिता के नाम की मोहिनी किसने दी होगी
और क्यों?"
अपना नाम सुनकर अमोदिता बहुत घबरा गयी थी, उसके हाथ पैर कंपकपाने लग गये थे, वो उन्हे अपनी बातो में उलझाते हुए कहती है.........
अमोदिता : "ये तुम लोग कैसी बाते कर रहे हो, भला आज के जमाने में थोड़ी ये सब होता है, युग जी ये दोनो तो गाँव वाले है पर आप तो शहर से आए है ना तो इन दोनो की बातो पर यकीन मत
करना।"
कछुआ झट से कहता है.........
कछुआ : "तो फिर तुम ही बता दो अमोदिता कि क्यों कायर तुम्हारा नाम बड़बड़ाए जा रहा है?"
अमोदिता कुछ सोचते हुए कहती है........
अमोदिता : "वो... वो इसलिए क्योंकि जरूर पिछली रात कायर ने कोई सा ऐसा सपना देखा
होगा जिसमे मैं रही होगी और मेरी जान खतरे में रहीं होगी वही सपना कायर के दिमाग में रह गया होगा और वो मेरा नाम बड़बड़ाए जा रहा है; जो मेंटली कमजोर और इमोसनल होते है
उनके साथ अकसर यह प्रॉब्लम आती है कि नींद खुलने के बाद भी वो उनका नाम बड़बड़ाते रहते है पर कुछ वक्त बाद सब ठीक हो जाता है।"
अमोदिता की बात सुनकर युग को अपने सपने की याद आने लग जाती है जिसमे वो एक लड़की के साथ निर्वस्त्र अवस्था में रहता है और प्यार भरी बाते करता है, एक पल के लिए उसके मन में आता है कि वो अमोदिता को अपने सपने के बारे में बताए, हो सकता है कि अमोदिता उसके सपनो का कुछ तोड़ निकाल
सके पर अगले ही पर उसका मन बदल जाता है और वो सोचता है कि पता नहीं आमोदिता उसके बारे में क्या सोचे कहेगी कि युग जी कैसी-कैसी बाते करते है।
कछुआ कुछ सोचते हुए कहता है..........
कछुआ : "ये कायर तो बिन्दू को प्यार करता है, तो इसे तुम्हारे सपने कैसे आ सकते है?"
अमोदिता कछुए पर चिढ़ते हुए कहती है.........
आमोदिता : "अब वो मुझे क्या पता, सपनो पर थोड़ी किसी का बस चलता है, भूलो मत कि हम चारो बचपन में साथ एक ही स्कूल में पढ़ते थे, हो सकता है
कि बचपन की ही कोई बात याद आ गयी हो और अब मुझसे कोई सवाल मत पूछो मुझे कायर का चेकअप करने दो।"
इतना कहकर अमोदिता कायर के पास जाती है और नाटक से उसके हाथ की नब्ज चेक करते हुए कहती है आमोदिता : "नब्ज तो ठीक चल रही है, हो सकता है जो मैंने कहा था वही हुआ होगा।"
जब अमोदिता कायर का हाथ पकड़ती है तो जैसे कायर के बदन में एक बिजली सी कौंध जाती है और वो अमोदिता की आँखो में देखते हुए कहता है........
आमोदिता : "अमोदिता... मेरी अमोदिता....तुम आ गयी अमोदिता।"
इतना कहकर कायर अमोदिता के नजदीक जाने लग जाता है, तभी अभि उसे फिर से पकड़ते हुए कहता है.......
अभी : "अबे कहाँ चिपक रहा है, दूर हट अमोदिता से, काबू रख अपने आप पर।"
अमोदिता घबरा जाती है, उसके समझ नहीं आता कि वो क्या करे, तभी उसे एक तरकीब सूझती है और वो अपना हाथ कायर के माथे पर फेरते हुए कहती है.......
आमोदिता : "कायर मैं ठीक हूँ, कायर देखो मेरी तरफ भूल जाओ अपने सपने को और अब अराम करो,सो जाओ कायर सो जाओ।"
जैसे ही अमोदिता कायर के सिर पर हाथ फेरती है और उसे सोने का बोलती है कायर अमोदिता- अमोदिता बड़बड़ाते हुए ही वापस बिस्तर पर लेटने लग जाता है और सो जाता है।
अभि कछुआ और युग यह तीनो ये सब देखकर दंग रह
जाते है।
कछुआ कायर को घूरते हुए कहता है........
कछुआ : "जब से हम सोने का बोल रहे थे तब तो नहीं सोया अमोदिता के हाथ फेरते ही फट से
सो गया।"
युग हँसते हुए कहता है..........
युग : हा हा हा "यही तो जादू होता है लड़कियों के
हाथो में बेटा, मेन विल बी मेन।"
अमोदिता अपने मोबाईल में कुछ टाईप करते हुए कहती है..........
आमोदिता : "युग जी मैं ना आपको एक मेडिसिन लिखकर दे रही हूँ आप ना उसे कायर को दे देना उससे वो जल्दी ठीक हो जाएगा वरना कभी-कभी सपनो का असर देर तक रहता है।"
युग अपना मोबाईल चेक करते हुए कहता है.......
युग : "हाँ ठीक है अमोदिता ले आऊँगा ये मेडिसिन मैं।"
बेड के पास ही एक शर्ट पेंट रखी हुई थी, कछुआ उसे उठाता है और उसकी स्मेल लेते हुए कहता है........
कछुआ : "यार युग ये तेरे कपड़ो में
से तो बहुत गंदी स्मेल आ रही है तू इन्हे धोता नहीं है क्या?"
युग उन कपड़ो को देखते हुए कहता है.......
युग : "यार धोने के लिए ही तो निकाले थे पर कल बहुत काम था तो धोना भूल गया और इसमे से गंदी स्मेल इसलिए आ रही है क्योंकि मेरे ये कपड़े कायर
ने पहने हुए थे, भूल गया वो उस दिन बारिश में जब वो भीगकर आया था तो उसे मैंने अपने कपड़े पहनने के लिए दिए थे।"
कछुआ : "हाँ याद आया उसी दिन तो पहला काय्रक्रर्म जमा था बिन्दू ने टेस्टी-टेस्टी खाना भी तो भेजा था।"
जब अमोदिता की नज़र उन कपड़ो पर पड़ती है तो वो
देखती है कि वो वहीं कपड़े थे जिसमें से उसने युग का बाल निकाला था, वो समझ जाती है कि वो कपड़े कायर ने पहने थे जिस कारण युग की जगह कायर का बाल उसके हाथ लग गया था और टोटका कायर पर हो गया था। अमोदिता वहाँ के हालत देखकर समझ जाती है कि उसका अब ज्यादा देर वहाँ पर रूकना खतरे से खाली नहीं है कभी भी अभि और कछुआ उससे कोई सा भी सवाल पूछ सकते है इसलिए वो वहाँ से जाने का मन बना लेती है और युग से इजाजत लेते हुए कहती है..........
आमोदिता : "अच्छा युग जी अब मैं चलती हूँ मोम ने जल्दी लौटने बोला था।"
युग अपना सिर हिलाते हुए कहता है.........
युग : "ठीक है अमोदिता तुम्हारा थैंक्यू यहाँ पर आने के लिए, तुम नहीं होती तो पता नहीं हमारा क्या होता, हम तो परेशान ही हो गये थे।
आमोदिता : "इसमे थैंक्यू की क्या बात है युग जी, आपको जब मेरी जरूरत हो आप मुझे बुला सकते है मैं दोड़ी चले आऊँगी।"
इतना कहकर अमोदिता वहाँ से जाने लग जाती है। अँगूठे के नाखून की बली देने के कारण अमोदिता थोड़ा लंगड़ा-लंगड़ा कर चल रही थी, यह बात अभि नोटिस कर लेता है और उसे रोकते हुए कहता है.......
अमोदिता : "अरे अमोदिता..., ये तुम्हारे पैर को क्या हो गया और इस पर ये सफेद पट्टी क्यों बंधी हुई है।"
अमोदिता हकलाते हुए कहती है.........
आमोदिता : वो......"वो अभिमन्यु चोट लग
गयी थी।"
युग : "क्या कहा चोट लग गयी थी पर कैसे?"
अमोदिता बहाना बनाते हुए कहती है........
आमोदिता : "वो क्या है ना युग जी जब मैं काम कर रही थी तो सिलबट्टा का पत्थर अँगूठे पर गिर
गया था उसी से लग गयी।"
कछुआ अँगूठे को देखते हुए कहता है........
कछुआ : "सिर्फ अँगूठे पर ही चोट लगी उससे और कहीं नहीं लगी?"
अमोदिता भिन्नाते हुए कहती है..........
आमोदिता : "तो तुम क्या चाहते हो कछुआ कि हमारा पूरा पैर ही टूट जाए, तुम्हारी ना बचपन की आदत अभी तक गयी नहीं है, बचपन में भी हाथ धोकर हमारे पीछे पड़े रहते थे और अभी भी हर बात मे तुम्हे टाँग अड़ानी है अपनी।"
कछुआ कुछ नहीं कहता बस शर्म से हँसते हुए अपना सिर नीचे झुका लेता है। अमोदिता वहाँ से चले जाती है।
कुछ देर बाद....
कायर को अभी तक होश नहीं आया था। युग कछुआ और अभि उसी के पास बैठकर उसके होश में आने का इंतेज़ार कर रहे थे।
युग अपने मोबाईल पर अमोदिता का मैसेज देखते हुए कहता है..........
युग : "यार यहाँ आस-पास मेडिकल स्टोर कहाँ पर है कायर के लिए मेडिसिन लेकर आ जाते है, जब होश में आएगा और यदि ठीक नहीं हुआ तो दे देंगे
कछुआ अपने हाथ से राईट साईड इशारा करते हुए कहता है.......
कछुआ : "ये अपना मेंदिपथार है ना वहाँ पर स्टेशन के पास में ही मेडिकल स्टोर है वहाँ पर मिल जाएगी ये मेडिसीन।"
युग अपना मुँह फाड़ते हुए कहता है........
युग : "क्या कहाँ मेंदिपथार! अब मेडिसीन लेने के लिए इतने दूर जाना पड़ेगा इसमें तो बहुत वक्त लग जाएगा यार।"
कछुआ हँसते हुए कहता है : "जाना तो पड़ेगा ही ना
मेडिसीन थोड़ी अमोदिता है कि तुने आवाज लगायी और वो फट से दौड़ी चले आएगी।"
कछुए की बात सुनकर अभि भी हँसने लग जाता है।
युग कुछ नहीं कहता क्योंकि उसे पता था कछुए की बचपन से हर किसी की टाँग खींचने की आदत थी।
अभि कछुए से पूछता है........
अभी : "अरे कछुए ये एक मेडिकल स्टोर, ये अपने रौगंकामुचा गाँव में भी खुला है ना अभी एक-दो ही
महीने पहले ही।"
कछुआ कुछ याद करते हुए कहता है......
कछुआ : "हाँ यार और ये युग के बड़े पापा दिलीप अंकल ने ही तो उसका उदघाटन किया था, वैसे भी गाँव में कुछ भी चीज का इनोग्रेसन हो तो युग के बड़े
पापा को ही तो बुलाया जाता है।"
अभि : "बुलाया क्यों नहीं जाएगा, आधे पैसे युग के बड़े पापा भी तो देते है पाटनर्शिप के तौर में।"
कछुआ : "हाँ यार ये भी है, मेरे तो समझ नहीं आता कि दिलीप अंकल के पास इतना पैसा आता कहाँ से है कि इनवेस्ट पे इनवेस्ट करते जाते है, कुछ फायदा तो होता नहीं उनका।"
अभी : "फायदा कैसे नहीं होता गाँव में उनका इतना मान सम्मान जो है, भूल मत बेटा पैसा बोलता है उनके सामने किसी की जुबान नहीं खुलती।"
कछुआ : "हाँ यार ये भी है पर मुझे तो लगता है कि वो हवेली में जरूर कोई ना कोई खजाना गढ़ा हुआ है, जो उनके हाथ लग गया है,युग तू ना उस खजाने के बारे में पता कर फिर ये स्टार्टअप-विस्टार्टअप खोलने की जरूरत ही नहीं पड़ेगी, इतना पैसा होगा ना तेरे पास तू तो पैसे में खेलेगा ही साथ में हम भी खेलेंगे।"
युग परेशान होते हुए कहता है........
युग : "ये तुम दोनो किस खजाने की बात कर रहे हो और कौन सी हवेली?"
अभिमन्यु झट से कहता है : "यार वही हवेली जिसमे तेरे बड़े पापा आई मीन दिलीप अंकल रहते है, सुना है कई सालो पहले वहाँ उस हवेली में एक अघोरी रहा करता था जिसने कई सिद्धियाँ हासिल की थी और उसी की मदद से खजाने का अंबार लगा दिया था।"
युग अपना मुँह फाड़ते हुए कहता है.......
युग : "क्या कहा खजाने का अंबार!"
अभिमन्यु आगे की बात बताते हुए कहता है.......
अभी : "हाँ यार, मैंने सुना है कि वो अघोरी लोगो से गलत काम मतलब टोना-टोटका करवाता था और उसके बदले में उन्हे सोना चाँदी दिया करता था
पर उसका मेन मकसद कुछ और था।"
युग हैरानी के साथ कहता है.........
युग : "क्या था उसका मेन मकसद?"
अभि : "मैंने सुना है कि उसका मेन मकसद यह था कि वो यक्षिणी पर काबू करना चाहता था।"
अभि ने अभी इतना ही कहा था कि युग उस पर दूसरा सवाल दाग देता है........
युग : "और वो यक्षिणी पर काबू करके क्या करना चाहता था?"
अभी : "यार देख जितना हम सबको पता है यक्षिणी के बारे में उस हिसाब से यक्षिणी दूसरे लोग से आयी थी और उसे कोई सा अभिशाप मिल गया था जिस कारण वो डायन बन गयी थी, तो इस हिसाब से यक्षिणी के पास दैवीय और दैत्य दोनो शक्तियाँ थी,हो सकता है उन्ही शक्तियों को हासिल करने के लिए वो अघोरी यक्षिणी पर काबू करना चाहता था या फिर कुछ भी हो सकता है,मैं बस सुनी-सुनाई बाते बता रहा हूँ असली बात तो वो अघोरी ही बता सकता है।"
युग कुछ सोचते हुए पूछता है........
युग : "अभी इस वक्त वो अघोरी
कहाँ पर है?"
कछुआ युग के सवाल का जवाब देते हुए कहता है..........
कछुआ : "उसे तो यक्षिणी ने मार दिया।"
युग अपना मुँह फाड़ते हुए कहता है.......
युग : "क्या कहा यक्षिणी ने अघोरी को भी मार दिया!"
कछुआ अपनी बात आगे जारी रखते हुए कहता है........
कछुआ : "हाँ दादी ने तो यही बताया था मुझे कि एक पूर्णिमा की रात उस यक्षिणी और अघोरी का आमना सामना हुआ था जिसके बाद से ही अघोरी किसी को दिखा नहीं, लोगो का मानना है कि उसे
यक्षिणी ने मार दिया था और अघोरी के मरने के बाद ही तो तेरे पापा के पापा ने जमीन बेचकर वो हवेली खरीदी थी, तुझे पता है दादी बताती है कि पहले तुम लोग भी बहुत गरीब थे पर जब से वो हवेली खरीदी थी तब से तुम्हारी किस्मत चमक गयी थी।"
युग यह सब बाते सुनकर दंग रह गया था क्योंकि उसे इन सब बातो के बारे में आज से पहले कुछ नहीं पता था।
युग अपना मोबाइल देखते हुए कहता है........
युग : "यार अभी ना तुम दोनो ये सब छोड़ो वैसे भी मुझे इन खजानो में कोई इंटरेस्ट नहीं है, जो पैसे अपने दम पर हासिल किए जाते है उसकी बात ही
कुछ और होती है, अभि तू चल मेरे साथ रौंगकामुचा गाँव के मेडिकल स्टोर ।"
अभिमन्यु बेड पर से उठते हुए कहता है......
अभी : "हाँ चल।"
कछुआ डरते हुए कहता है......
कछुआ : "यार ये.... ये तुम दोनो मुझे इस ग्रेव्यार्ड कोठी में अकेला छोड़कर क्यों जा रहे हो।"
अभि कायर की तरफ इशारा करते हुए कहता है..........
अभी : "अकेले कहाँ छोड़कर जा रहे है, ये कायर है ना तेरे साथ।"
कछुआ मुँह बनाते हुए कहता है........
कछुआ : "इसका होना ना होना एक समान है, अभी ये तो बेहोश पड़ा हुआ है पता नहीं किसने इसे मोहिनी दे दी, मैं नहीं रूकने वाला इसके साथ इस ग्रेव्यार्ड
कोठी में।"
युग परेशान होते हुए कहता है.......
युग : "कछुए तू ना बड़ा परेशान करता है, एक काम करते है अभी तू यहीं पर रूक जा कछुए तू चल मेरे साथ।"
कछुआ खुश होते हुए कहता है.......
कछुआ : "हाँ ये एक दम सही है,अभि तू रूक जा यहाँ पर।"
अभि : "हाँ रूक जाऊँगा मैं तेरी तरह नहीं हूँ, डरपोक।"
युग और कछुआ वहाँ से चले जाते है।
इस तरफ जब अमोदिता अपने घर पर पहुँचती है और रजनी को सब कुछ बताती है कि टोटके का उल्टा असर हो गया है, तो रजनी अमोदिता पर बहुत गुस्सा करती है वो आग बबूला हो
जाती है।
रजनी अमोदिता पर गुस्सा करते हुए कहती है........
रजनी : माधरचोद चूतिये की उलाद "तुझसे एक काम ढंग से नहीं होता, तुझे युग का बाल लाने के लिए बोला था
और तू उस कायर का बाल लेकर आ गयी।"
अमोदिता रोते हुए कहती है.......
अमोदिता : "मोम अब मुझे थोड़ी पता था
कि युग जी के कपड़े उस कायर ने पहने हुए थे।"
रजनी : "तुझे कुछ पता ही कहाँ रहता है, पता होता तो यहाँ पर होती क्या, युग के कपड़ो में से बाल लाने की जगह उसके सिर का ही बाल तोड़ लेती।"
आमोदिता :"मोम इतना आसान थोड़ी है किसी का बाल तोड़ना, कितना कठिन होता है। "
रजनी : "तू तो ऐसे बोल रही है जैसे आज तक मैंने किसी का बाल तोड़ा ही नहीं है, तू कहे तो मैं लाकर दे दूँ तुझे युग का बाल।"
अमोदिता खुश होते हुए कहती है.......
आमोदिता : "हाँ मोम, आप पहले ही ये
कर लेती तो ऐसा कुछ नहीं होता, आप ही ले आईए ना युग जी का बाल।"
रजनी अमोदिता पर भिन्नाते हुए कहती है........
रजनी : "हाँ और युग से शादी भी मैं ही कर लेती हूँ और उसके साथ शहर भी मैं ही चले जाती हूँ और तू यहीं पर बोझ बनकर बैठी रह।"
अपनी माँ का गुस्सा देखकर अमोदिता एक दम चुप हो जाती
है। रजनी अभी भी गुस्से से फूले जा रही थी।
अमोदिता बड़ी हिम्मत करके रोता हुआ मुँह बनाकर कहती है.........
आमोदिता : "मोम प्लीज कुछ कीजिए ना, वो कायर तो मेरा ही नाम बड़बड़ाए जा रहा था, बड़ी मुश्किल से बहाना बनाकर युग जी को समझाया है और यदि कल तक कायर नॉर्मल नहीं हुआ तो
गड़बड़ हो जाएगी, कायर को देखकर ऐसा लग रहा था जैसे वो मुझे खा ही जाएगा और मैं उससे शादी नहीं करना चाहती, प्लीज मोम कुछ कीजिए।"
इतना कहकर अमोदिता रोने लग जाती है।
अमोदिता के आँसू देखकर रजनी को उस पर दया आ जाती है। रजनी भले ही
कैसी भी हो, थी तो वो एक माँ ही, माँ की ममता जाग ही जाती है रजनी आमोदिता को समझाते हुए कहती है.........
रजनी : "अच्छा चल ठीक है अब ये मगरमच्छ के आँसू बहाना बंद कर, अब एक ही रास्ता बचा है और वो ये है हमे टोटका तोड़ना पड़ेगा तभी तेरा जादू
कायर पर से उतरेगा।
अमोदिता झट से पूछती है.........
अमोदिता : "और वो कैसे तोड़ते है मोम........?"
अब आगे.............
☆ Chapter : Yamini ki baate☆
युग सोचने लग जाता है कि वह भूंजी हुई मछली खाए या नहीं। युग कुछ फैसला कर पाता उससे पहले ही यामिनी उसे टोकते हुए कहती है.........
यामिनी : "अरे बाबू ज्यादा सोचिए मत, मैंने इसमे
कोई मोहिनी नहीं मिलाईए है; यामिनी को किसी को वश में करने के लिए मोहिनी देने की जरूरत नहीं पड़ती, उसका रूपरंग ही काफी है।"
युग सोचने लग जाता है........
युग : "ये यामिनी को मोहिनी देने के बारे में कैसे पता, यह वही सब बाते क्यों बोल रही है जो ग्रेव्यार्ड कोठी में हुई है?"
युग को उसके सीने पर लगे नाखून के खरोंच का याद आया और वो फिर बौखलाहट के साथ पूछने लग गया..........
युग : "ये सब तो ठीक है पर ये बताओ तुमने मेरी शर्ट क्यों खोली थी और मेरे सीने पर खरोंच के निशान कैसे थे?"
यामिनी धीरे से कहती है.........
यामिनी : "युग बाबू मैंने ना आपकी शर्ट आपके साथ संभोग करने के लिए खोली थी।"
यामिनी की बात सुनकर युग दंग रह गया था, उसकी आँखे फटी की फटी रह गयी थी। उस वक्त युग का चेहरा देखने लायक था, उसके तोते उड़ गये थे।
8477 Words Complete..........
Aaj se Updates Ab Hindi mai aayenge..........
Dear Readers story ke updates or majedaar ho uske liye like
or
comments karte rahiye taaki ham aap ke liye updates mai Or bhi thriller,Suspension,Sex,horror, Darama laa sake............
Bechari AMOODITA hr jgh se moo ki khaa rhe hi dusri trf YUG jo YAKSHANI ke bare me Jaan ke bi ni Jaan paa rha hai
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Istrf YAMINI kn hai ky hai wo YAKSHANI hai in sb se anjaan YUG fasaa pda hai bs apne 3 dosto me aage ka kuch pta ni chl rha ky hoga
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Abe bhai ab to YUG ko dosto ke paluuu se azaad krwa bhai story ko main point ko start kr bhai kuch to horror scene create kr jise pd ke mjaa aajay
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Or ye YUG ki MAA or FAMILY ka kuch scene dikhao bhai hota ky hai or krta ky hai HERO apna hisaab brabr kaise krega
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Ek swaalll or hai bs ek swaall
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TERA KAL KB AAYGE BEWAFFFFAAAAAAAAA #LUCKY