UPDATE 1
परिवार के(ke) सदस्यों में(mein) एक(ek) पिता(pita) अखिलेंद्र पांडेय परिवार(parivaar) का मुखिया और(aur) उनकी धर्मपत्नी माला देवी तथा उनकी दो(do) बेटियां सपना(sapna) और काजल थी।
अखिलेंद्र एक(ek) साधारण निम्न मध्यम वर्ग के(ke) व्यक्ति(vyakti) थे। अखिलेंद्र का खुद का स्कूल और और परिवार समृद्ध और सुखी था।
धर्मपत्नी माला की तबियत हमेशा(hamesha) खराब(kharab) रहती थी(thi) इसे लेकर अखिलेंद्र पांडेय काफी(kaafi) परेशान रहते थे। इसी बीच उनकी जवान हो रही बड़ी बेटी का भविष्य सोच कर(kar) चिंतित थे। उसके लिए उन्हें(unhein) सुयोग्य वर की भी(bhi) तलाश थी(thi) , कुछ(kuch) भी(bhi) हो लेकिन अखिलेंद्र पांडेय अपने परिवार(parivaar) को अपनी जान से(se) भी(bhi) ज्यादा प्यार(pyaar) करते थे और(aur) अपने परिवार(parivaar) के(ke) लिए वो कुछ(kuch) भी(bhi) कर(kar) सकते थे।इसके साथ(saath) ही अखिलेंद्र भीतर से(se) एक(ek) बेहद ही कामी पुरुष तथा असंतुष्ट थे। बदन काफी(kaafi) बलिष्ट और(aur) यौवन झलकता था, चौड़ा(chauda) सीना और(aur) सीने पे घनघोर काले चूंकि घर(ghar) गृहस्थी में(mein) अनवरत रहते अत्यधिक श्रम करते थे जिसकी वजह से(se) पेट(pet) सपाट मजबूत जांघें और(aur) कठोर हाथ(haath)
अखिलेंद्र की उम्र 44 साल थी और वो भी जवान लड़के लगते थे।
उनकी धर्मपत्नी एक(ek) बेहद आकर्षक स्त्री थी(thi) लेकिन उनकी तबियत (भूत बाधा) खराब(kharab) होने की वज़ह से(se) वो ज्यादा संभोग नहीं(nahin) कर(kar) पाते थे या(ya) यूं कहें कि अपनी बीबी की जो की बदन से(se) काफी(kaafi) कामुक थी(thi) उन्हे नंगी देख देख कर(kar) बस हिलाना ही आदत हो गया था क्योंकि(kyonki) उनकी धर्मपत्नी को सेक्स करने वर्जित था
दिन बीतते गए और(aur) यह(yah) क्रम ऐसा(aisa) ही चलता रहा इस(iss) अगस्त में(mein) सपना(sapna) उनकी बड़ी बेटी 23 की हो जायेगी । सपना(sapna) एक(ek) बेहद शांत(shaant) शुशील, शर्मीली और(aur) समझदार एवम बला सी खूबसूरत किशोरी थी। 5 फुट 4 इंच की हाइट बड़े(bade) मदमस्त नाक और(aur) नयन , बदन हल्का गदराता हुआ पीछे(peeche) के(ke) उभारे उसे विरासत में(mein) अपनी मां(maa) से(se) मिला था । और(aur) गोरा रंग लिए एक(ek) गेंहुवा मिश्रण सा बदन था चूंकि अखिलेंद्र सांवले मर्द थे इसलिए(isliye) उसके कामुक बदन में(mein) हल्का पिता(pita) सा रंगत भी(bhi) था ।
सपना की खूबसूरती और(aur) चाल चलन की तारीफ पूरे घर(ghar) परिवार(parivaar) रिश्तेदारों तक था। लेकिन सपना(sapna) ज्यों ज्यों बड़ी हो रही थी(thi) उसके भीतर एक(ek) अजीब खामोशी एक(ek) अनंत सन्नाटा पसर रहा था और(aur) बदन के(ke) अंगों और(aur) आंखों में(mein) भी(bhi) वह(vah) गंभीरता(gambheerata) उतरने लगा था।

सपना ऐसे दिखाती है
और सपना की छोटी बहन काजल भी अपनी बहन से कम नहीं थी।

काजल 21 year old
स्नातक की पढ़ाई का अंतिम(antim) सत्र चल रहा था और(aur) परीक्षा की तिथि भी(bhi) घोषित हो चुकी थी, लेकिन समस्या यह(yah) थी(thi) कि परीक्षा केंद्र घर(ghar) से(se) 150 किलोमीटर दूर(door) पास(paas) के(ke) शहर में(mein) पड़ा था और(aur) रोज आना(aana) जाना(jana) संभव नहीं(nahin) था या(ya) जवान बिटिया को किसी रिश्तेदारों के(ke) यहां अकेला(akela) छोड़ना भी(bhi) अखिलेंद्र पांडेय को नागवार गुजर रहा था। इसी ऊहा पोह में(mein) पड़े अखिलेंद्र ने अपनी धर्मपत्नी की राय से(se) 10 दिनों के(ke) लिए कमरा किराए पे लेकर रहने का विचार किया गया। अब(ab) सवाल(sawaal) यह(yah) था कि सपना(sapna) के(ke) साथ(saath) जायेगा कौन(kaun) क्योंकि(kyonki) वहां अकेले तो छोड़ नहीं(nahin) सकते तो अखिलेंद्र खुद(khud) ही जाने का निश्चय किया । और काजल अपने मां के साथ रहेगी। अखिलेंद्र ने काजल को समझा दिया की मां(maa) का ख्याल अच्छे से(se) रखना(rakhna) है।