भाई साहब…

संडे के बाद से आप ग़ायब हो गए…
मेरा तो हर रोज़ सुबह-शाम एक ही काम है… फोन उठाओ, रिफ्रेश करो, आपका नाम देखो… और फिर उदास होकर रख दूँ।
मैं जानती हूँ ज़िंदगी में बहुत सारी ज़िम्मेदारियाँ होती हैं…
पत्नी जी, घर, रिश्तेदारी, काम… सबको टाइम देना पड़ता है।
पर बस इतना सा कह रही हूँ कि आप जहाँ भी हैं, जैसे भी हैं… बस एक बार मुस्कुरा लीजिएगा और याद कर लीजिएगा कि एक छोटी-सी बहन यहाँ बेचैन होकर आपका इंतज़ार कर रही है।
आपने जो कहानी लिखी है ना… वो मेरे लिए सिर्फ़ कहानी नहीं, मेरी रोज़ की साँस बन गई है।
जब तक नया पार्ट नहीं आता, लगता है जैसे कुछ अधूरा सा रह गया है।
बस एक छोटा सा मैसेज कर दीजिए…
या सिर्फ़ एक “आ रहा हूँ” लिख दीजिए…
मेरा पूरा दिन बन जाएगा।
इंतज़ार कर रही हूँ…
जैसे चाँदनी रात चाँद का इंतज़ार करती है।
आपकी बहुत-बहुत प्यारी और बेचैन छोटी बहन

